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बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन, PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई अरबपति कारोबारी और बेहद ही दरियादिल इंसान रतन टाटा का निधन हो गया है. वह 86 वर्ष के थे. उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे. 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. कुछ दिनों पहले उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें चल रही थी और इस बारे में उन्होंने एक बयान जारी कर बताया भी था कि उनकी तबीयत ठीक है और सामान्य चेक-अप के लिए अस्पताल में हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर “गलत सूचना” न फैलाने की सलाह दी थी. रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे.

14 अक्टूबर से दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस

पटना  यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कई ट्रेनों के ठहराव में बदलाव किया है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए वंदे भारत, हटिया एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस के ठहराव में बदलाव किए हैं। वंदे भारत ट्रेन का ठहराव 13 अक्टूबर से बख्तियारपुर में और हटिया एक्सप्रेस का दनियावां में होगा। श्रमजीवी एक्सप्रेस का पावापुरी रोड स्टेशन पर ठहराव भी 14 अक्टूबर से होगा। बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चन्द्र ने बताया कि ये बदलाव यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि 13 अक्टूबर से पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस (22348) बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:37 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 08:39 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में हावड़ा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस (22347) रात 21:32 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 21:34 बजे आगे के लिए रवाना होगी। बख्तियारपुर में नए ठहराव के कारण 22348 पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस मोकामा में 09:02/09:04 बजे और लखीसराय में 09:24/09:26 बजे रुकेगी। दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस इसी तरह, 14 अक्टूबर से इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस (18623) शाम 19:54 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 19.56 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 15 अक्टूबर से 18624 हटिया-इसलामपुर एक्सप्रेस सुबह 07;38 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 07:40 बजे आगे के लिए रवाना होगी। दनियावां में नए ठहराव के कारण 18623 इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस के दनियावां बाजार हॉल्ट पर ठहराव समय में भी बदलाव किया गया है। यह ट्रेन अब दनियावां बाजार हॉल्ट पर 20:07/20:09 बजे रुकेगी। पावापुरी रोड स्टेशन राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस 14 अक्टूबर से राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस (12391) भी पावापुरी रोड स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:20 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 08:22 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 12392 नई दिल्ली-राजगीर श्रमजीवी एक्सप्रेस सुबह 09:15 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 09:17 बजे आगे के लिए रवाना होगी।

12 अक्टूबर को अम्बेडकर अस्पताल में सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक खुली रहेगी ओपीडी

रायपुर पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर से संबध्द डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में शनिवार 12 अक्टूबर को दशहरा (विजयादशमी पर्व) के दिन बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) का संचालन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक पूर्व की भांति होगा। विदित हो कि शुक्रवार को महानवमी पर्व हेतु स्थानीय अवकाश 12 अक्टूबर शनिवार को दशहरा पर्व हेतु सामान्य अवकाश तथा 13 अक्टूबर को रविवार होने के कारण निरंतर तीन दिवस के अवकाश होने के फलस्वरूप 12 अक्टूबर (शनिवार) को बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) का संचालन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा।

आईआईटी इंदौर ने स्वदेशी तकनीक से बनाया स्तन कैंसर की पहचान करने वाला उपकरण

इंदौर  इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं में स्तन कैंसर का समय रहते पता लगाने के लिए छोटा और किफायती उपकरण विकसित किया है। आईआईटी इंदौर के एक अधिकारी को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि आईआईटी इंदौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर श्रीवत्सन वासुदेवन का विकसित किया गया यह उपकरण, शुरुआती चरण में ही स्तन कैंसर की पहचान कर मरीजों की जान बचाने के मकसद से ईजाद किया गया है। उन्होंने बताया कि ‘‘फोटोएकाउस्टिक स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्स’’ के सिद्धांत पर आधारित उपकरण मानव शरीर के ऊतकों में असामान्य परिवर्तनों का पता लगाने के लिए ‘‘ऑप्टिकल’’ और ‘‘एकाउस्टिक’’ सिग्नल को एक साथ जोड़ता है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, ‘बीमारियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एमआरआई और सीटी स्कैनर आमतौर पर आयातित और महंगे होते हैं। इससे वे देश की आबादी के बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर हो जाते हैं।’’ उन्होंने बताया कि इस चुनौती से निपटने के लिए आईआईटी इंदौर ने स्वदेशी तकनीक से किफायती उपकरण विकसित किया है ताकि खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों में कैंसर का वक्त रहते पता लगाकर उनकी जान बचाने में मदद मिल सके। प्रोफेसर वासुदेवन ने कहा कि यह उपकरण प्रकाश उत्पन्न करने के लिए ‘‘कॉम्पैक्ट पल्स्ड लेजर डायोड’’ का उपयोग करता है जो ऊतक के संपर्क में आता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से मिले परिणामों का विश्लेषण करके उपकरण पता लगाता है कि कहीं संबंधित ऊतक कैंसरग्रस्त तो नहीं है।      

वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है

वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान महिला सशक्तिकरण की दिशा में संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है भोपाल महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका      सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है।      कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें।      चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है।      मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है।      पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ाहोने का अवसर प्रदान करता है।      आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।  

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने ईवीएम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए

नई दिल्ली राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली ताकत उनका इकबाल है और एक दिन वह उस इकबाल को खत्म करके रहेंगे। इसके लिए उन्होंने कोशिशें भी खूब की। राफेल सौदे को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का अभियान हो या हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर ‘मोदानी’ का हमला या फिर अंबानी-अडानी की जेब में सरकार वाला नैरेटिव…राहुल गांधी ने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राहुल गांधी मोदी का इकबाल खत्म भले न कर पाए लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी पार्टी अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्वस्त करने के खतरनाक खेल में जुट गई है। हरियाणा चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने और चुनाव आयोग पर हमले से कांग्रेस असल में यही कर रही। उस ईवीएम पर सवाल उठा रही जो एक बार नहीं बल्कि कई बार, बार-बार अग्निपरीक्षा में पास हुई है। बेदाग साबित हुई है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली। चुनाव आयोग ने हैकिंग का ओपन चैलेंज तक दिया लेकिन कोई सामने नहीं आया। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का! मंगलवार को दो राज्यों के चुनाव नतीजे आए। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की जीत हुई तो हरियाणा में बीजेपी की। लेकिन दोनों परिणामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जमीन-आसमान का फर्क था। जहां जीते वहां तो लोकतंत्र की जीत। राज्य के साथ ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ का जनता का करारा जवाब। तरह-तरह के लच्छेदार जुमले। लेकिन जहां हार गए, वहां जनादेश का सम्मान तो दूर, उसे न स्वीकार करने का अहंकार। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का। हरियाणा चुनाव के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी थी। लेकिन 1-2 घंटे बाद ही रुझान पलट गए। बीजेपी आगे हो गई। एक बार आगे हुई तो फिर अंतिम नतीजे आने तक आगे ही रही। पिछड़ने के बाद से ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पहले काउंटिंग के आंकड़ों के कथित धीमे अपडेट का मुद्दा उठाया। वक्त के साथ जब रुझान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए तब कांग्रेस ने ईवीएम पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने काउंटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। ईवीएम पर उंगली उठाई। साजिश का आरोप लगाने लगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतगणना के वक्त कई ईवीएम में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज मिली। जिन ईवीएम की बैटरी 60-70 प्रतिशत चार्ज थीं वहां कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। जहां 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज थी वहां बीजेपी की जीत का दावा किया. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम बैटरी की क्षमता और नतीजों में कोई संबंध ही नहीं है। आत्ममंथन के बजाय ईवीएम का रोना! कांग्रेस ने हार को स्वीकार कर आत्ममंथन और समीक्षा के बजाय बहानेबाजी का आसान रास्ता चुना लेकिन ऐसा करते हुए वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की महान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 2019 में 31 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार 37 सीटों पर जीत हासिल की। वोट शेयर में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर 28 प्रतिशत था तो इस बार 39 प्रतिशत यानी 11 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन प्रदर्शन में ये सुधार सत्ता तक नहीं पहुंचा पाया। ऐसा क्यों हुआ, उसकी समीक्षा के बजाय पार्टी चुनावी प्रक्रिया पर ही लांछन लगाने लगी है। वैसे कांग्रेस या विपक्षी दल ऐसा पहली बार नहीं कर रहे। इससे पहले भी अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से पार्टियां ईवीएम पर चुप्पी या हो-हल्ला मचाती रही हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल तो सबसे पहले बीजेपी ने ही उठाए थे। 2009 की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर संदेह किया था। बीजेपी के एक और नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदे किताब लिखकर ईवीएम पर संदेह जताया था। लेकिन ईवीएम एक बार नहीं, कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी और हर बार बेदाग निकली। जब देश की सबसे बड़ी अदालत से ईवीएम और चुनाव आयोग को क्लीन चिट मिल गई तब इस पर चल रहा विवाद खत्म हो जाना चाहिए था। हर अग्निपरीक्षा में बेदाग साबित हुई है ईवीएम निहित स्वार्थ के तहत चुनाव आयोग और ईवीएम को लांछित करने की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट एडीआर जैसे समूहों को लताड़ लगा चुका है। इसी साल अप्रैल में जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी तब सर्वोच्च अदालत ने पिछले 70 सालों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की और साथ में इस पर दुख जताया कि ‘निहित स्वार्थी समूह’ देश की उपलब्धियों को कमजोर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम पर 8 बार परीक्षण किया गया और ये हर बार बेदाग निकली। ईवीएम को लेकर कई बार मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन हर बार उसकी विश्वसनीयता असंदिग्ध मिली। वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम में दर्ज वोटों के मिलान में कभी कोई विसंगति नहीं दिखी। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कई राज्यों में ईवीएम में दर्ज वोट और वीवीपैट का मिलान हुआ। सब सही पाया गया और ईवीएम बेदाग साबित हुई। सात साल पहले 2017 में तो चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों या किसी भी व्यक्ति या संगठन को ईवीएम हैक करके दिखाने का खुला चैलेंज दिया था। तब सिर्फ 2 पार्टियों ने ही चैलेंज स्वीकार किया था- एनसीपी और सीपीएम। तय तारीख को दोनों पार्टियों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर तो पहुंचे लेकिन चैलेंज में हिस्सा लेने की हिम्मत नहीं हुई। हां, आम आदमी पार्टी ने जरूर दिल्ली विधानसभा के भीतर प्रहसन किया। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जुगाड़ के डिब्बों को ईवीएम का नाम देकर कथित तौर पर हैक करके दिखाया गया। पार्टी ने असली ईवीएम के बजाय ‘जुगाड़ डिब्बे’ का इस्तेमाल करके सस्ती पब्लिसिटी का हथकंडा अपनाया। चुनाव आयोग कार्रवाई न कर दे, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की आड़ ली गई। हार-जीत होती रहेगी, जनता में … Read more

अनैतिकता को कानून का जामा पहनाने के लिए किया गया कोई अनुबंध भी अनैतिक ही माना जाएगा: अदालत

ग्वालियर  ‘भारतीय समाज और विधि के अनुसार शादी एक पवित्र बंधन है और शादी के होते हुए किसी दूसरे के साथ संबंध रखना अनैतिक है। इस अनैतिकता को कानून का जामा पहनाने के लिए किया गया कोई अनुबंध भी अनैतिक ही माना जाएगा।’ यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने दुष्कर्म के मामले को झूठा पाने पर आरोपित को बरी करते हुए कही। न्यायाधीश ने कहा कि कानून महिलाओं को अपराध से सुरक्षित करता है और अपराधी को सजा देता है, लेकिन कोई अगर अनैतिक संव्यवहार करे, चाहे महिला हो या पुरुष, वह व्यवहार कानून की दृष्टि में अवैध ही होगा। दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने का यह था मामला     एक तलाकशुदा महिला द्वारा अभिषेक राजौरिया पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि महिला उस व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी।     इसके साथ ही महिला ने युवक के साथ एक अनुबंध किया था, जिसमें युवक को उस महिला को हर महीने एक तय रकम देना थी। जैसे ही महिला को रकम मिलना बंद हुई, वैसे ही उसने युवक पर दुष्कर्म का झूठा मुकदमा कर दिया।     सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि महिला 2015 में किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी ऐसा कर चुकी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों और तथ्यों से सहमति जताते हुए युवक को दोषमुक्त कर दिया। महिला ने पुलिस के सामने गढ़ी थी यह झूठी कहानी महिला ने पड़ाव थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी वर्ष 1999 में हुई थी। पति शराब पीता था तो उसने पति को तलाक दे दिया और अपने पिता के साथ रहने चली गई। महिला के साथ उसकी एक 16 वर्ष और एक 11 वर्ष आयु की बेटी भी रहती है। इस दौरान महिला की पहचान अभिषेक नामक युवक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई तो महिला ने उससे काम दिलवाने की बात कही। युवक ने जून 2016 में काम दिलवाने के बहाने महिला को एक होटल में बुलाया और दुष्कर्म कर दिया। इसके बाद कई बार उसने महिला को शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। जब महिला ने शादी के लिए दबाव डाला तो युवक उसे टालने लगा। अप्रैल 2019 में महिला को पता चला कि युवक ने किसी और से शादी कर ली है। इसके बाद महिला ने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया।

अडानी की नेटवर्थ में 4.35 अरब डॉलर की तेजी आई, नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई

नई दिल्ली  लगातार छह दिन की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में तेजी लौटी। शुरुआत में मार्केट में भारी उतारचढ़ाव दिख रहा था लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनावों की मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही शेयर मार्केट में तेजी दिखने लगी। इस तेजी से सबसे ज्यादा फायदे में गौतम अडानी रहे। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की नेटवर्थ में  4.35 अरब डॉलर यानी करीब 36,505 करोड़ रुपये की तेजी आई। इसके साथ ही वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में दो स्थान की छलांग लगाते हुए 16वें नंबर पर पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई है। अडानी  एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शख्स रहे। हुआंग की नेटवर्थ में 4.36 अरब डॉलर की तेजी आई। अडानी की नेटवर्थ में इस साल 16.3 अरब डॉलर की तेजी आई है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी  तेजी रही। उनकी नेटवर्थ 2.12 अरब डॉलर की तेजी के साथ 106 अरब डॉलर पहुंच चुकी है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 9.90 अरब डॉलर की तेजी आई है और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर हैं। अंबानी और अडानी की नेटवर्थ में अब केवल 5 अरब डॉलर का फासला रह गया है। कौन-कौन है टॉप 10 में इस बीच एलन मस्क 259 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर बने हुए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 210 अरब डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर हैं। जेफ बेजोस ($206 अरब) तीसरे, बर्नार्ड अरनॉल्ट ($191 अरब) चौथे, लैरी एलिसन पांचवें ($185 अरब), बिल गेट्स ($161 अरब) छठे, लैरी पेज ($149 अरब) सातवें, स्टीव बाल्मर ($144 अरब) आठवें, वॉरेन बफे ($143 अरब) नौवें और सर्गेई ब्रिन ($140 अरब) दसवें नंबर पर हैं।

घातक ड्रोन बनेगा राफेल का पूरक, दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे

पेर‍िस  फ्रांस का लड़ाकू विमान राफेल पूरी दुनिया में सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। भारत से लेकर कतर तक ने फ्रांस को जमकर ऑर्डर दिए हैं। इससे राफेल बनाने वाली कंपनी डसाल्‍ट एविएशन की चांदी हो गई है। अब फ्रांसीसी कंपनी राफेल मल्‍टी रोल जेट की अगली पीढ़ी F5 बना रही है जो हवा में ही ‘शाही बॉडीगार्ड’ से लैस होगा। दरअसल, फ्रांसीसी कंपनी चाहती है कि हवा में राफेल के साथ एक मानवरहित ड्रोन विमान भी उड़ान भरे। यह ड्रोन राफेल के पायलट के इशारे पर काम करेगा और दुश्‍मन को तबाह करने में मदद करेगा। फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टिअन लेकोर्नू ने राफेल के घर कहे जाने वाले सेंट डिजिअर एयरबेस पर इस ड्रोन का ऐलान किया। यह ड्रोन पहले के nEUROn UCAV प्राजेक्‍ट के आधार पर तैयार किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक nEUROn UCAV का ट्रायल के दौरान पायलट वाले लड़ाकू विमानों के साथ पहले ही इस्‍तेमाल किया जा रहा है। डसॉल्‍ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैप्पियर ने कहा, ‘यह रेडार की पकड़ में नहीं आने वाला लड़ाकू ड्रोन विमान साल 2033 तक फ्रांसीसी एयर फोर्स को तकनीकी और ऑपरेशनल बढ़त दिलाएगा।’ यह ड्रोन विमान कई तरह की क्षमताओं से लैस होगा और इसे शामिल किया जाएगा। इस ड्रोन का अभी कोई नाम नहीं रखा गया है और यह राफेल का पूरक होगा। यह ड्रोन और राफेल दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे। राफेल F5 जेट का ड्रोन क्‍यों है बेहद खास ? इस यूएवी के अंदर ही एक आंतरिक पेलोड होगा। इस ड्रोन में ऑटोनॉमस कंट्रोल और राफेल का पायलट इसे आसानी से उड़ा सकेगा। डसॉल्‍ट ने बताया कि यह ड्रोन विमान कई गुणों से लैस होगा और भविष्‍य में आने वाले खतरों को ध्‍यान में रखकर इसे आगे भी विकसित किया जा सकेगा। कंपनी ने इस किलर ड्रोन के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी है। बता दें कि फ्रांस एक परमाणु हथियार संपन्‍न राष्‍ट्र है और वह अब राफेल की मदद से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता रखता है। इससे पहले मिराज फाइटर परमाणु बम गिराने के लिए तैयार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक भविष्‍य में किलर ड्रोन परमाणु मिशन के दौरान आकाश में आने वाले खतरों को दूर करेगा और इसके बाद राफेल आराम से एटम बम गिरा सकेगा। राफेल का एफ-5 वर्जन नए ड्रोन के साथ साल 2060 तक फ्रांस की वायुसेना में बना रह सकेगा। राफेल के एफ-5 वर्जन के लिए शुरुआती अध्‍ययन हो चुका है और साल 2026-27 में इसका पूरा विकास शुरू हो जाएगा। इससे आने वाले समय में यह राफेल नए ड्रोन के साथ उड़ान भर सकेगा। आने वाले दिनों में फ्रांस राफेल को ASN4G से लैस करने जा रही है जो फ्रांसीसी वायुसेना का स्‍टैंडऑफ न्‍यूक्लियर वेपन है। भारत को भी हो सकता है बड़ा फायदा इस नए राफेल नई क्रूज मिसाइल, एयर टु-एयर मिसाइल और नई एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने की भी योजना है। राफेल एफ-5 संस्‍करण दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को मुख्‍य रूप से निशाना बनाएगा। नए राफेल को इस तरह से बनाया जाएगा कि वह दुश्‍मन की नजर में नहीं आए और अगर हमला हो तो बचाव भी कर सके। फ्रांस अगर यह नया राफेल बनात है तो इससे भारत को भी बड़ा फायदा हो सकता है। भारत 100 से ज्‍यादा लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है और इससे पहले भारतीय वायुसेना में राफेल को शामिल किया जा चुका है। भारत अब नौसेना के लिए भी राफेल खरीद रहा है। ऐसे में भविष्‍य में भारत को भी इस परमाणु बम गिराने वाले ड्रोन से लैस राफेल का ऑफर मिल सकता है।

भारत अमेरिका से खरीद रहा MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो, डील से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध और मजबूत होंगे

नई दिल्ली भारतीय नौसेना की गिनती दुनियाभर की टॉप 10 नेवी में होती है। अब इसकी ताकक औरबढ़ने वाली है। दरअसलभारत अमेरिका से 53 MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो खरीदने वाला है। जिनकी कीमत 175 मिलियन डॉलर है। ये टॉरपीडो भारत के नए MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों के लिए हैं। बाइडन प्रशासन का कहना है कि यह सौदा दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करेगा। इससे भारत की सुरक्षा भी बेहतर होगी। बढ़ेगी नौसेना की ताकत अमेरिका का कहना है कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम है। नए टॉरपीडो से भारत की नौसेना और मजबूत होगी। वे पनडुब्बियों से होने वाले खतरों से निपटने में सक्षम होंगे। भारत ने मार्च में छह MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल किए थे। ये हेलीकॉप्टर हेलफायर मिसाइल, MK-54 टॉरपीडो और प्रेसिजन-किल रॉकेट से लैस हैं। अगले साल तक भारत को 24 और सीहॉक मिलेंगे। ये सभी हेलीकॉप्टर फरवरी 2020 में हुए 15,157 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं। सीहॉक हेलीकॉप्टर काफी आधुनिक हैं। इनमें मल्टी-मोड रडार और नाइट-विजन उपकरण भी हैं। ये हेलीकॉप्टर युद्धपोतों से संचालित हो सकते हैं। नौसेना अधिकारियों का कहना है कि सीहॉक दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं। यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं। MK-54 टॉरपीडो भारत की नौसेना को एक मजबूत बढ़त देंगे। कितने पावरफुल होते हैं MK-54 लाइटवेट टॉर्पीडो एक प्रकार का स्वचालित पनडुब्बी रोधी हथियार है, जिसे पानी के अंदर चलने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये टॉर्पीडो आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं और उच्च गति से चलते हैं। इन्हें हल्का होने के कारण विभिन्न प्रकार के प्लेटफॉर्म जैसे कि हेलीकॉप्टर, विमान और जहाज से लॉन्च किया जा सकता है।

जंगल महकमे में प्रभार का खेला, चहेतों को किया जा रहा उपकृत एसीएस की सिफारिश की गई अनदेखी

उदित नारायणभोपाल। जंगल महकमे में प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया नहीं बनाया गया है । ऐसे में प्रशासन-एक के मुखिया ने अपने चहेते आईएफएस देवांशु शेखर को प्रभार देने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि सागर वर्किंग प्लान अफसर का पदभार ग्रहण करने से पहले उन्हें सामाजिक वानिकी का प्रभार दे दिया ही दे दिया। जबकि कैडर में यह पद सीसीएफ स्तर के अधिकारी का है। वैसे जब रीवा में सामाजिक वानिकी वृत का अतिरिक्त प्रभार वन संरक्षक रीवा के राजेश कुमार राय को दिया है तो फिर सामाजिक वानिकी का प्रभार डीएफओ को क्यों दिया गया, यह शोध का विषय है। जबकि सागर में सीसीएफ कार्यरत है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक विवेक जैन ने बुधवार को जारी आदेश में 2011 बैच के डीएफओ वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार दिया है। सनद रहे कि 27 सितंबर को राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में देवांशु शेखर को उत्तर बैतूल डीएफओ से हटकर सागर वर्किंग प्लान ऑफिसर के पद पर पदस्थ किया है। देवांशु शेखर ने अभी तक वर्किंग प्लान ऑफिसर का पदभार भी ग्रहण नहीं किया है। अपने मूल पोस्टिंग का पदभार ग्रहण करने से पहले ही उन्हें पीसीसीएफ विवेक जैन ने एक आदेश जारी कर सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार देकर उपकृत कर दिया। विवेक जैन के इस आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है तो फिर 2009 बैच के प्रशांत कुमार सिंह, किरण बिसेन और अनुराग कुमार समेत अन्य पांच वर्किंग प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार क्यों नहीं दिया गया ? जबकि भोपाल को छोड़कर सामाजिक वानिकी वृत के पद खाली है और वे सभी प्रभार में चल रहें हैं। शेखर पर विशेष कृपा के संबंध में चर्चा इस बात की शुरू हो गई है कि शहर के अलावा अन्य वर्जन प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी वृत का प्रभाव क्यों नहीं दिया गया? सागर वर्किंग प्लान अफसर डीएफओ देवांशु शेखर को पीसीसीएफ विवेक जैन ने किस फॉर्मूले के तहत उपकृत किया। क्या उनके बनाए फॉर्मूले में अन्य 5 वर्किंग प्लान अफसर फिट नहीं आ रहे हैं ? जबकि डीएफओ शेखर के खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए शासन के पास विचाराधीन है। एससीएस की सिफारिश को किया दरकिनार सूत्रों ने बताया कि अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को एक नोटशीट लिखी है। इसके अनुसार सिवनी वन वृत के मुख्य वन संरक्षक एसएस उद्दे से सामाजिक वानिकी का प्रभार लेकर जबलपुर वर्किंग प्लान सबमिट कर चुके वन संरक्षक रमेश विश्वकर्मा को सौंप दिया जाए। वैसे भी वन संरक्षक विश्वकर्मा को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। एसीएस की सिफारिश में यह भी उल्लेख है कि सामाजिक वानिकी रीवा वृत्त वहां के वन संरक्षक राजेश राय और सामाजिक वानिकी सागर वृत्त का प्रभार मुख्य वन संरक्षक सागर अनिल कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दे दिया जाए। यह बात अलग है कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव इस बात से इनकार किया है कि सामाजिक वानिकी का आर्थिक प्रभार देने संबंधित एसीएस की कोई नोटशीट उनके पास आई है। प्रभार देने से वर्किंग प्लान में होगी देरी एक पीसीसीएफ अधिकारी का कहना है कि वर्किंग प्लान ऑफिसर को आर्थिक प्रभार दिए जाने से कार्यायोजना बनाने में देरी होगी , क्योंकि अतिरिक्त प्रभार वाला पद अफसरों के लिए लाभप्रद होता है। वे ज्यादातर समय वर्किंग प्लान पर नहीं देकर शुभ-लाभ को ध्यान में रखते हुए काम करते है। जबकि वर्किंग प्लान बनाने का कार्य गंभीरता और बारीकी से किया जाता है।

86 की उम्र में रतन टाटा का मुंबई में निधन, शोक में देश

नई दिल्ली देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का निधन बुधवार की शाम को हो गया. उन्‍होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम सांस ली. रतन टाटा 86 साल के थे. पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी. दरअसल, बुधवार की शाम में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी. जिसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. रतन टाटा का जाना देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. हालांकि उन्हें देश कभी भूल नहीं पाएगा. उन्होंने देश के एक से बढ़कर एक काम किए. टाटा ग्रुप को ऊंचाईयों पर पहुंचाने में रतन टाटा की सबसे बड़ी भूमिका रही. इन्‍होंने देश और आम लोगों के लिए कई ऐसे काम किए, जिसके लिए उन्‍हें हमेशा याद किया जाता रहेगा. रतन टाटा एक दरियाद‍िली इंसान थे और मुसीबत में देश के लिए हमेशा तैयार रहते थे. दो दिन पहले ही कहा था- मैं बिल्‍कुल ठीक हूं इससे पहले सोमवार को भी रतन टाटा की तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद खुद रतन टाटा के एक्‍स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्‍ट शेयर किया गया था. इस पोस्‍ट में लिखा था कि मेरे लिए चिंता करने के लिए सभी का धन्‍यवाद! मैं बिल्‍कुल ठीक हूं. चिंता की कोई बात नहीं, मैं बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों की रूटीन जांच के लिए अस्‍पताल आया हूं. लेकिन देश को ये दर्द रहेगा कि वो इस बार अस्पताल से लौट नहीं पाए, और हमेशा के लिए अंतिम यात्रा पर निकल पड़े. 28 दिसंबर को हुआ था जन्‍म अरबपति कारोबारी और बेहद दरियादिल इंसान रतन टाटा 86 साल के थे, 28 दिसंबर 1937 को उनका जन्म हुआ था. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. रतन टाटा की शख्सियत को देखें, तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान भी थे. वो देश के लिए हमेशा आदर्श और प्रेरणास्रोत रहेंगे. वे अपने समूह से जुड़े छोटे से छोटे कर्मचारी को भी अपना परिवार मानते और उनका ख्याल रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते, इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. 1991 में बने थे चेयरमैन गौरतलब है कि रतन टाटा को 21 साल की उम्र में साल 1991 में ऑटो से लेकर स्टील तक के कारोबार से जुड़े समूह, टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया था. चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. उन्होंने 2012 तक इस समूह का नेतृत्व किया, जिसकी स्थापना उनके परदादा ने एक सदी पहले की थी. 1996 में टाटा ने टेलीकॉम कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को मार्केट में लिस्‍ट कराया था.  

राशिफल गुरुवार 10 अक्टूबर 2024

मेष: आज के दिन मेष राशि के जातक अपना फोकस बनाए रखें। बेतहाशा सपनों का पीछा करने और उस चीज से मुक्त होने का दिन है, जो आपको रोक रही है। जंक फूड को नो कहें और सेल्फ-लव पर फोकस करें। सावधान रहें और उत्साह में अपने खर्च को कंट्रोल से बाहर न जाने दें। अगर आप किसी बदलाव या नए प्रोजेक्ट के बारे में सोच रहे हैं, तो अब जरूरी डिसीजन लेने का सही वक्त है। वृषभ: वृषभ राशि के जातकों को आज सेल्फ-केयर पर ध्यान देना चाहिए। आपका कॉन्फिडेंस व लीडरशिप स्किल्स दूसरों को प्रभावित करेंगी। मेडिटेशन के लिए समय अवश्य निकालें। धन से जुड़े निर्णय सोच समझकर ही लें। फिजिकल और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने की कोशिश करें। परिवार में मतभेद होने की संभावना है। संयम से काम लें और खुद को बीजी रखें। बाहर के खाने से परहेज करें। मिथुन: आज मिथुन राशि के जातक नए लोगों के साथ बात-चीत शुरू करने से न डरें। जो जातक रिलेशनशिप में हैं, वो आज अपनी फीलिंग्स और विचार अपने साथी के साथ शेयर करें। बहुत ज्यादा तनाव लेने से बचें। चाहे आप नई नौकरी पाना चाहते हों या प्रोमोशन पाना चाहते हों, आज का दिन लकी है। खुद पर विश्वास करें। आपको अपनी खर्च करने की आदतों पर ध्यान देना चाहिए। कर्क: कर्क राशि के जातकों आज अपनी फाइनेंशियल बॉउन्डरी को मेन्टेन करने पर ध्यान दें। करियर के मामले में आज सावधानी के साथ प्लान करें। आप अपने धन संबंधी मामलों में सफलता देखेंगे। सही दृष्टिकोण और थोड़े से साहस के साथ आप अपने रोमांटिक सपनों को एक खूबसूरत हकीकत में बदल सकते हैं। हाइड्रेटेड रहें। अपने रूटीन में जरूरी बदलाव करें। सिंह: आज के दिन सिंह राशि के जातकों आपकी सेहत ही आपका धन है। आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण बड़े पैमाने पर फल देंगे। पैसे कमाने के आज कई मौके मिल सकते हैं। रोमांस से भरपूर रहेंगे आज आप। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में संकोच न करें। अपने एनर्जी लेवल को बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी, जैसे कि कोई नया वर्कआउट ट्राई कर सकते हैं। कन्या: आज कन्या राशि के जातक अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए समय निकालें। नए अवसर पर अपना फोकस रखें, जो आपके करियर को अगले लेवल तक ले जा सकते हैं। अपने साथी से जुड़ने और अपना प्यार बांटने के लिए अपने अट्रैक्शन और कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करें। धन संबंधी मामलों में आज आप सफलता देखेंगे। संतुलित जीवनशैली बनाए रखें। तुला: तुला राशि के लोगों आज आपके लिए पैसों के लेन-देन से बचना बेहतर रहेगा। मौजूदा रिश्तों को आपकी सूझ-बूझ से आज काफी लाभ हो सकता है। हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है। लव के मामले में कुछ बातों को इग्नोर करने से रिश्ते में दरार पड़ने से रोका जा सकता है। वित्तीय सलाह लेने या फ्यूचर के लिए प्लान बनाने के लिए भी आज एक अच्छा दिन है। अपने सभी टास्क समय पर पूरे करें। वृश्चिक: वृश्चिक राशि के जातकों आज के दिन आप बेहतर महसूस करेंगे। बेहतर दिखेंगे और दिनभर में जो भी चैलेंज आएंगे, उनसे निपटने के लिए आपके पास अधिक एनर्जी होगी। रिलेशन में रहने वालों के लिए रोमांस को फिर से जगाने का बेस्ट समय है। अपने कार्यों और डीसीजन को गाइड करने के लिए खुद पर भरोसा रखें। शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर जांच करवाते रहें। धनु: आज धनु राशि के जातकों को सलाह दी जाती है कि वे खुद के प्रति सच्चे रहें। नया प्रोजेक्ट या कोई जिम्मेदारी आपके सामने आ सकती है। हमेशा अपने स्वास्थ्य को पहले स्थान पर रखना याद रखें, बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा। यूनिवर्स आज आपके पक्ष में रहेगा। धन के मामले में सावधानी जरूरी है। आपका कनेक्शन इमोशनल रूप से आज मजबूत होगा। मकर: आज मकर राशि के जातकों के लिए उत्साह से भरा दिन रहने वाला है। अपनी फीलिंग्स को खुलकर एक्सप्रेस करें। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें कि आप क्या करने में सक्षम हैं। धन के मामले में लकी रहने वाले हैं आज आप। अपनी डाइट को हेल्दी रखें। अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने के लिए तैयार रहें। प्रोफेशनल ग्रोथ जरूरी है। खुद को हाइड्रेटेड रखें। कुंभ: कुंभ राशि के जातकों आज के दिन फाइनेंशियल स्थिति में थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। हेल्दी डाइट का सेवन करें। अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाने का दिन है। सावधानी के साथ योजना बनाने से आप अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को बढ़ा सकते हैं। स्किल्स में सुधार करना चाहते हैं, तो अब कदम उठाने का समय आ गया है। आज कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। मीन: आज मीन राशि के जातकों का दिन पॉजिटिव रहेगा। जो लोग रिलेशन में हैं, उनके लिए आज अपने पार्ट्नर्शिप में फिर से स्पार्क लाने का सही समय है। अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देने से छोटी-मोटी समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है। आज पैसों से जुड़े मामलों को मैनेज करने में आपका पार्टनर मदद कर सकता है। अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए आज का दिन शुभ रहेगा।

जम्मू कश्मीर में भी नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई : रविंद्र शर्मा

नई दिल्ली हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों में हर एग्जिट पोल को धता बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। साथ ही कांग्रेस पार्टी दोनों ही राज्यों में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई। जम्मू कश्मीर में भी नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। जम्मू कश्मीर की 90 सीटों में से कांग्रेस 6 सीटें ही जीत पाई, जबकि नेशनल कांफ्रेंस की 42 सीटों को मिलाकर गठबंधन ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की। राज्य में गठबंधन के मिली जीत के बाद कांग्रेस और एनसी सरकार बनाने की प्रक्रिया में हैं। राज्य में सरकार के गठन पर कांग्रेस प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने जानकारी दी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह तो स्पष्ट है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया चल रही है, और सरकार को शपथ दिलाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा द‍िलाने के ल‍िए प्रयास जारी रहेगा। हम प्रयास तब तक करते रहेंगे, जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल नहीं जाता।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा, “ यह जम्मू-कश्मीर की जनता का अधिकार है और वो राज्‍य व केंद्र सरकार से अपना अधिकार मांगें। कांग्रेस ने भी कहा है कि यहां सुरक्षा का होना जरूरी है। यह महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी जमीन और नौकरियों के अधिकार सुरक्षित रखें। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए एक संवैधानिक गारंटी होनी चाहिए। र‍व‍िंद्र शर्मा ने कहा क‍ि कांग्रेस ने कश्मीर में अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां हमने आठ में से पांच सीटें जीती हैं, लेक‍िन जम्मू में स्थिति थोड़ी अलग रही है। प्रशासन और भाजपा ने चुनाव में दुरुपयोग किया है, इसकी कई शिकायतें मिली हैं। हमें यह देखना होगा कि क्या हमारे भीतर भी कोई कमी थी।” उन्होंने कहा, “आपको लगता है कि भाजपा की इतनी बड़ी जीत जम्मू में हुई है, जबकि हमें तो ऐसा नहीं लग रहा था। चुनावी माहौल ऐसा था कि लोग बदलाव चाहते थे, लेकिन परिणाम कुछ और ही दिखा रहे हैं। हम इस पर चर्चा करेंगे और फीडबैक लेंगे। मेरा मानना है कि कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है। लोग कांग्रेस के साथ थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अवैध गतिविधियों को नहीं रोका गया। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या वजह थी और क्यों ऐसा हुआ। जनता की आवाज़ सुननी होगी और उन पर ध्यान देना होगा।”

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