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मप्र बोर्ड अब अब पांचवीं व आठवीं बोर्ड परीक्षा की अंकसूची करेगी हाइटेक, डिजिटल प्रिटिंग अंकसूची प्रदान की जाएगी

भोपाल अभी तक मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं परीक्षा की अंकसूची डिजिटल प्रिंटिंग होती थी।साथ ही उसपर हालमार्क भी रहता था। अब पांचवीं व आठवीं वार्षिक परीक्षा के 25 लाख विद्यार्थियों को डिजिटल प्रिटिंग अंकसूची प्रदान की जाएगी। साथ ही डुप्लीकेट अंकसूची से बचने के लिए अंकसूची पर हालमार्क भी लगा होगा। इससे विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम जारी होने के चार से पांच दिन बाद ही सुरक्षा मापदंडों के साथ अंकसूची प्रदान कर दी जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने सत्र 2024-25 से पांचवीं व आठवीं बोर्ड परीक्षा की अंकसूची को डिजिटल प्रिंटिंग की पूरी तैयारी कर ली है। अभी तक राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से अंकसूची जिलों के स्कूलों में भेजी जाती थी। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची एक या दो साल की देरी से मिल रही थी।   यही कारण है कि स्कूल शिक्षा विभाग इस सत्र से अंकसूची डिजिटल प्रिंटिंग कर देगा, ताकि विद्यार्थियों को अंकसूची जल्द मिल सकेगा। बता दें, कि अभी तक राज्य शिक्षा केंद्र पिछले साल के 25 लाख विद्यार्थियों की अंकसूची तैयार नहीं कर पाया है। डा.संजय गोयल, सचिव, मप्र स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि इस बार से पांचवीं व आठवीं बोर्ड परीक्षा की डिजिटल प्रिंटिंग और सुरक्षा मापदंडों सहित हालमार्क अंकसूची प्रदान की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को अकसूची जल्द मिल जाएगी और इसका डूप्लीकेट अंकसूची की संभावना भी खत्म हो जाएगी। जिलों के स्कूलों में अंकसूची का प्रोफार्मा भेजा जाता था अभी तक राज्य शिक्षा केंद्र जिलों के स्कूलों में अंकसूची का प्रोफार्मा तैयार कर जिलों के स्कूलों में भेजता था।जिससे स्कूल में प्रोफार्मा पर अंक भरकर स्कूल प्राचार्य के हस्ताक्षर के बाद विद्यार्थियों को अंकसूची दी जाती थी।इससे कई जिलों में डुप्लीकेट अंकसूची का मामला भी सामने आया है।साथ ही अंकसूची एक-दो साल की देरी से मिलती थी। अंकसूची पर हालमार्क रहेगा पांचवीं व आठवीं क अंकसूची पर दो जगहों पर हालमार्क रहेगा। एक जहां पर कक्षा का नाम लिखा होगा और दूसरा जहां पर पूरी बाउंड्री बनी होगी। इससे डुप्लीकेट अंकसूची क संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे PM मोदी, क्या है BRICS शिखर सम्मेलन ?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर 22-23 अक्टूबर 2024 को रूस की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बात की जानकारी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दी। यह BRICS शिखर सम्मेलन की 16वीं बैठक होगी, जो रूस के कजान शहर में आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन में विभिन्न विकासशील देशों के नेताओं के बीच आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जो वैश्विक स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण होगा। क्या है BRICS शिखर सम्मेलन ? BRICS एक अंतरराष्ट्रीय समूह है जिसमें पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, और दक्षिण अफ्रीका। इस समूह का उद्देश्य आर्थिक विकास, राजनीतिक सहयोग, और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना है। वहीं ईरान, मिस्र, इथियोपिया, और संयुक्त अरब अमीरात इसी साल जनवरी से BRICS के नए सदस्य देश बने हैं। ये देश समूह के साथ अपने आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि, सऊदी अरब अभी तक BRICS का पूर्णकालिक सदस्य नहीं बना है। वह केवल आमंत्रित सदस्य के रूप में इसमें भाग ले रहा है। यह स्थिति BRICS के विस्तार और इसके सदस्यों की विविधता को दर्शाती है, जो वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ाने के लिए एकजुट हो रहे हैं।   BRICS शिखर सम्मेलन का महत्व BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हर साल किया जाता है, जिसमें सदस्य देशों के नेता एकत्रित होकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं। यह शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय नीतियों, व्यापार, निवेश, और सुरक्षा के विषयों पर ध्यान केंद्रित करता है। BRICS शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच है, जो विकासशील देशों के लिए वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है। यह आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे BRICS देशों की आवाज वैश्विक स्तर पर सुनी जा सके।   शिखर सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएं आर्थिक सहयोग: BRICS देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलें की जाती हैं। राजनीतिक संवाद: सदस्य देश वैश्विक मुद्दों, जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, और वैश्विक स्वास्थ्य पर चर्चा करते हैं। विकास संबंधी मुद्दे: शिखर सम्मेलन में विकासशील देशों के मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे का विकास। संस्थानिक सहयोग: BRICS एक न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना कर चुका है, जिसका उद्देश्य विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। शिखर सम्मेलन के परिणाम हर शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाता है, जिसमें सभी सदस्यों द्वारा सहमति से लिए गए निर्णयों और प्रस्तावों का उल्लेख होता है। यह घोषणापत्र वैश्विक समुदाय के सामने BRICS का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। BRICS संगठन औचारिक तौर पर किसी देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे विकासशील देशों की सशक्त आवाज के रूप में देखा जाता है। यह संगठन वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने और सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। संगठन की प्रभावशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त रूप से, BRICS सदस्य देशों के पास विश्व की भूमि का लगभग 30 फीसदी और वैश्विक जनसंख्या का 45 फीसदी हिस्सा है। यह संख्या इस बात को दर्शाती है कि BRICS केवल एक आर्थिक समूह नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बल भी है, जो विकासशील देशों के हितों को प्राथमिकता देने का प्रयास करता है। BRICS शिखर सम्मेलन का इतिहास BRICS का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में युजेन, रूस में आयोजित किया गया था। इसके बाद से यह सम्मेलन हर साल आयोजित होता है, और इसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाती है। दक्षिण अफ्रीका का समावेश 2010 में हुआ, जिसके बाद समूह का नाम BRICS हो गया।   2024 का BRICS शिखर सम्मेलन आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 और 23 अक्टूबर को रूस के कजान में आयोजित होने वाली BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है। इस बैठक के दौरान, मोदी सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।

बिहार में सितंबर में खुदरा महंगाई की दर 7.5 फीसदी रही जो 5.5 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा

नई दिल्ली  बिहार में सितंबर में लगातार तीसरे महीने सबसे ज्यादा महंगाई देखने को मिली। राज्य में सितंबर में खुदरा महंगाई की दर 7.5 फीसदी रही जो 5.5 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। बिहार के बाद छत्तीसगढ़ (7.4%) दूसरे, उत्तर प्रदेश (6.7%) तीसरे, ओडिशा (6.6%) चौथे और हरियाणा (6.2%) पांचवें नंबर पर रहे। ताजा आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई सितंबर में 5.5 फीसदी रही जो इसका नौ महीने का उच्चतम स्तर है। खानेपीने की चीजों खासकर सब्जियों, खाद्य तेल और दालों की कीमत में तेजी से खुदरा मंहगाई बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में सबसे कम महंगाई दिल्ली में रही। यहां खुदरा महंगाई की दर 3.7 फीसदी रही। पश्चिम बंगाल (4.3%) दूसरे, तेलंगाना (4.4%) तीसरे, हिमाचल (4.6%) चौथे और उत्तराखंड (4.7%) पांचवें नंबर पर रहे। ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई की बात करें तो इसमें छत्तीसगढ़ (8%) पहले, उत्तर प्रदेश (7.6%) दूसरे और बिहार (7.6%) तीसरे नंबर पर है। शहरी इलाकों में खुदरा महंगाई के मामले में बिहार (7.1%) पहले नंबर पर है। ब्याज दरों में कटौती 2023-24 के इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में कंजम्पशन बास्केट में फूड आइटम्स् का वेटेज 47.3 फीसदी है जबकि शहरी इलाकों में यह 29.6 फीसदी है। इस महंगाई को देखते हुए जानकारों का कहना है कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती को फिलहाल टाल सकता है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी संकेत दिया है कि दिसंबर में होने वाली एमपीसी बैठक में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। अगर नीतिगत दरों में कटौती नहीं होती है तो लोन पर भी ब्याज नीचे नहीं आएगा। दास ने कहा कि वर्तमान स्थिति में ब्याज दरों में कटौती जल्दबाजी और बहुत जोखिम भरी होगी क्योंकि खुदरा महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य की मौद्रिक नीतियों का निर्धारण आय और अन्य आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। महीने की शुरुआत में, आरबीआई ने महंगाई संबंधी चिंताओं के कारण नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था और मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल कर दिया था। अगले द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा 6 दिसंबर को होगी।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से ट्रूडो का भारत से पंगा कनाडा की अर्थव्यवस्था पड़ेगा भारी !

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच  कूटनीतिक विवाद का असर  अब आर्थिक मोर्चे पर भी असर डालने लगा है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से शुरू हुए इस विवाद के चलते उन कनाडाई कंपनियों और फंड्स की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिन्होंने भारतीय कंपनियों में भारी निवेश किया है। खासकर कनाडाई पेंशन फंड (CPPIB) ने भारत के बैंकिंग से लेकर टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़ा इन्वेस्टमेंट किया हुआ है। जानकारी के अनुसार  भारत और कनाडा के बीच करीब 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक व्यापार होता है (वित्त वर्ष 2023-24), जिसमें ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल्स, केमिकल्स, पेपर और मिनरल्स जैसी वस्तुओं का लेन-देन शामिल है। इस विवाद से 600 से अधिक कनाडाई कंपनियां जो भारत में व्यापार कर रही हैं, और 30+ भारतीय कंपनियां जो कनाडा में मौजूद हैं, सीधे प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार में शामिल कई कंपनियां भी इस तनाव का शिकार हो सकती हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8.3 अरब डॉलर का था, जो 2023-24 में बढ़कर 8.4 अरब डॉलर हो गया। इसमें भारत का कनाडा से आयात 4.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जबकि निर्यात 3.8 अरब डॉलर पर आ गया है। कनाडाई पेंशन फंड का भारत में निवेश कनाडाई पेंशन फंड CPPIB (Canada Pension Plan Investment Board) ने भारत की कई बड़ी कंपनियों में निवेश कर रखा है। इसमें कोटक महिंद्रा बैंक (6141.6 करोड़ रुपये), जोमैटो (2778.1 करोड़ रुपये) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जोमैटो में CPPIB की हिस्सेदारी करीब 1.15% है। इसके अलावा Delhivery, FSN E-Commerce Ventures (Nykaa), और Paytm जैसी कंपनियों में भी भारी निवेश किया गया है। अन्य प्रमुख सेक्टर्स में निवेश कनाडाई पेंशन फंड्स ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़ी पूंजी लगाई है। रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज में भी फंड का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। 2013 से 2023 तक, कनाडाई फंड्स ने भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में लगभग 3.8 अरब कैनेडियन डॉलर और फाइनेंशियल सर्विसेज में 3 अरब कैनेडियन डॉलर का निवेश किया। इसी प्रकार, इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्टेशन में 2.6 अरब कैनेडियन डॉलर का निवेश किया गया है। कंपनियों पर क्या होगा असर? कनाडाई फंड्स फिलहाल भारत में करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए के मूल्य की घरेलू इक्विटी के मालिक हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में आई खटास के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि कनाडाई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कोई बड़ा बदलाव करेंगे या नहीं। बीते एक साल में, CPPIB ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी कुछ हद तक कम की है, लेकिन अब तक वे भारत से पूरी तरह से बाहर निकलने की जल्दी में नहीं दिख रहे। भारतीय कंपनियों का भी कनाडा में महत्वपूर्ण निवेश लगभग 600 कनाडाई कंपनियां भारत में अपने व्यवसाय चला रही हैं। इनमें मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल एस्टेट और टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। इसके साथ ही, 30 से अधिक भारतीय कंपनियों का भी कनाडा में महत्वपूर्ण निवेश है, जिसका कुल मूल्य करीब 40,446 करोड़ रुपए है। इन कंपनियों के माध्यम से कनाडा में लगभग 17,000 लोगों को रोजगार मिला है। भारत से कनाडा को मुख्य रूप से रत्न, ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, रेडीमेड गार्मेंट्स और मेकैनिकल अप्लायंसेस का निर्यात किया जाता है। वहीं, कनाडा से भारत कागज, लकड़ी का गूदा, पोटाश, आयरन स्क्रैप, कॉपर और इंडस्ट्रियल केमिकल्स का आयात करता है।

दीपावली से पहले पुलिस-प्रशासन ने लोगों से सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने की अपील की

चित्तौड़गढ़ दीपावली का पर्व नजदीक आने के साथ ही राजस्थान में जिला प्रशासन ने बाजारों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज कर दी है। इस दौरान पुलिस-प्रशासन ने लोगों से सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने की अपील की। नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने मिलकर नगर में दुकानों के बाहर और सड़कों के आसपास के अतिक्रमण को हटाने के लिए एक अपील की। इसके साथ ही, भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण को रोकने के लिए चेतावनी भी दी गई है। पुलिस उप अधीक्षक विनय चौधरी ने बताया कि जिला कलेक्टर आलोक रंजन और पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी के निर्देश पर शहर को स्वच्छ बनाने के लिए एक अभियान शुरू किया गया है। नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने शुक्रवार से कार्रवाई की शुरुआत की, जिसमें शहरी क्षेत्र के बाजारों में दुकानों के बाहर पड़े सामान को हटाया गया। इसके अलावा, सड़कों के आसपास ठेला गाड़ियों और अवैध तरीके से खड़े वाहनों को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि संयुक्त टीम ने जिला कलेक्ट्रेट चौराहे से लेकर शास्त्री नगर चौराहे तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। दुकानदारों को निर्देशित किया गया कि वे अपनी दुकान की सीमा से बाहर किसी भी प्रकार का सामान नहीं रखें, अन्यथा उसे जब्त कर लिया जाएगा। इस अभियान के दौरान, प्रशासन ने आम जन और दुकानदारों से अपील की है कि चित्तौड़गढ़ शहर सभी का है और इसे स्वच्छ और साफ बनाने के लिए सभी को पहल करनी होगी। साथ ही, वाहन चालकों से भी अनुरोध किया गया है कि वह अपने वाहनों को पार्किंग स्थल या सुरक्षित स्थलों पर खड़ा करें, ताकि अन्य लोगों को परेशानी न हो। प्रशासन की यह कोशिश है कि दीपावली के पर्व पर शहर को साफ-सुथरा रखा जाए और नागरिकों को कोई परेशानी न हो। बता दें कि प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई व्यापार की ओर से जिला प्रशासन पर लगातार बनाए गए दबाव के बाद की गई है।  

उपचुनाव : सपा ने खैर व गाजियाबाद की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी, कांग्रेस इससे खुश नहीं

लखनऊ उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव में सपा ने कांग्रेस के लिए दो सीटें छोड़ रखी है। लेकिन कांग्रेस इससे खुश नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर बिना बोले उसने गेंद केंद्रीय नेतृत्व के पाले में डाल दी है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद दोनों दलों के नेता उपचुनाव में भी साथ मिलकर मैदान में उतरने की बात भले ही कहते दिख रहे हों। लेकिन उनके बीच सीटों के बंटवारे की बातें स्पष्ट नहीं दिख रही है। सपा सात सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। सपा ने खैर व गाजियाबाद की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी है। इन दोनों सीटों को लेकर कांग्रेस की तरफ से अभी इन सीटों पर चुनाव लड़ने की कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। न ही इन सीटों पर अपने उम्मीदवारों को लेकर पत्ते खोले हैं। अगर 2022 के गाजियाबाद के चुनावी आंकड़ों को देखें तो कांग्रेस 11818 वोट पाकर चौथे स्थान पर थी। जबकि सपा 44 हजार 668 वोट पाकर तीसरे स्थान पर थी। यहां कांग्रेस को 4.83 वहीं सपा को 18.25 फीसद वोट मिला था। खैर में कांग्रेस की हालत बहुत खराब थी यहां पर इन्हें महज 1514 वोट मिला था। जबकि सपा ने यह सीट रालोद के साथ गठबंधन में लड़ी थी। उन्हें 41644 वोट मिले थे। यहां भी कांग्रेस चौथे नंबर थी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि उपचुनाव को लेकर बातचीत चल रही हैं। अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। जो भी निर्णय होगा वह केंद्रीय नेतृत्व लेगा। तभी सबको अवगत करा दिया जाएगा। वहीं सपा के प्रवक्ता डॉक्टर आशुतोष वर्मा ने कहा कि सपा ने सात सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। गाजियाबाद और खैर सीट कांग्रेस को दी गई है। सपा पहले ही कह चुकी है कि इंडिया गठबंधन को साथ लेकर चलेगी, तो चल रही है। जब कोई बिना बात किए कुछ भी बयान दे देता है तो उससे दिक्कत बढ़ जाती है। उस समय भी हमने कहा था कि पांच सीटों में मिलाकर भी कांग्रेस अगर 50 हजार वोट पाई होती तो उसे सीटें दे दी जाती। 2022 के आंकड़ों को देखें तो हर जगह चौथे और पांचवें नंबर की लड़ाई पर रहे हैं। पांच सीटें देने का कोई मतलब नहीं है। यूपी कांग्रेस अगर ऐसा कह रही है तो यह बेतुकी बातें है। जहां दो सीटें दी हैं वहां भी सपा का मजबूत संगठन है। कई उम्मीदवार दावेदार भी हैं। हालांकि हम लोगों के बीच कोई मनमुटाव वाली बात नहीं है। भाजपा को हराने की तैयारी की जा रही है। ज्ञात हो कि यूपी के उपचुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 13 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं 23 नवंबर को परिणाम आएंगे। नामांकन की प्रक्रिया 18 अक्टूबर से शुरू होगी। वहीं दाखिल करने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर है।  

याह्या सिनवार की मौत से भी संघर्ष रुकता नहीं दिख रहा, मोहम्मद सिनवार अब गाजा में हमास पर करेंगा कंट्रोल

तेल अवीव  इजरायल ने हमास के चीफ याह्या सिनवार को मार दिया है। 7 अक्तूबर 2023 के हमले का यह मास्टरमाइंड था। ‘गाजा का लादेन’ के नाम से मशहूर इजरायल का यह सबसे बड़ा दुश्मन था। इजरायल इसे मारने के लिए लंबे समय से खोज रहा था। लेकिन इजरायल की मुश्किलें अभी भी कम नहीं होने वाली हैं। एक एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि याह्या सिनवार का भाई हमास का नेतृत्व संभाल सकता है। अगर ऐसा होता है तो वह याह्या से भी ज्यादा आतंक ला सकता है। याह्या सिनवार को बुधवार को इजरायल ने मार डाला था। अब पूरा फोकस इसके भाई मोहम्मद सिनवार पर है। मोहम्मद सिनवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन संभावित रूप से खतरनाक है। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक मोहम्मद सिनवार अगर पावर में आता है तो वह एक बड़े खतरे को भी साथ लाएगा। अपने भाई के समर्थन से मोहम्मद सिनवार गाजा में हमास का दूसरे नंबर का कमांडर बन गया। मोहम्मद याह्या का खास था। वह उन कुछ लोगों में था, जो जानते थे कि हमास का चीफ कहां छिपा है। भाई की ले सकता है जगह अपने पारिवारिक संबंधों के कारण उसे हमास के अंदर किसी भी विश्वासघात के संदेह का सामना नहीं करना पड़ा। इसी कारण उसे हमास के टॉप पर पहुंचने में आसानी हुई। पूर्व वरिष्ठ इजरायली सैन्य अधिकारी और फिलिस्तीनी मामलों के एक्सपर्ट ग्रिशा याकूबोविच ने बताया कि मोहम्मद सिनवार को ताकत मिलना किस तरह खतरनाक हो सकता है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद सिनवार अपने भाई जितना ही कट्टरपंथी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वही हमास के चीफ-ऑफ-स्टाफ का पद संभालेगा। दोनों भाइयों ने हमास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। क्या है मोहम्मद सिनवार से खतरा याकूबोविच ने कहा कि मोहम्मद सिनवार का नेतृत्व इजरायल के साथ और भी अधिक हिंसक टकराव शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि याह्या अपनी गतिविधियों के कारण सुर्खियों में बना रहा। वहीं 49 साल का मोहम्मद एकदम सीक्रेट तरीके से अपना काम करता है। इसके बावजूद उसका हमास पर प्रभाव है। इजरायल को इस बात की चिंता है कि मोहम्मद का नेतृत्व स्थिति को गंभीर बना सकता है। मोहम्मद को याह्या की तुलना में पहुत कम व्यावहारिक बताया जाता है। वह ज्यादा हिंसा करता है और समझौता न करने वाली रणनीति से लड़ता है। इसके लिए वह नागरिकों को भी जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटेगा। कौन है मोहम्मद सिनवार? मोहम्मद सिनवार का जन्म खान यूनिस में हुआ था। कम उम्र में ही वह हमास में शामिल हो गया। इजरायल की जेल में 9 महीने और फिलिस्तीनी प्राधिकरण की कैद में वह तीन साल रहा। सन 2000 में वह जेल से भागने में कामयाब रहा। पहली बार मोहम्मद सिनवार की भागीदारी 2005 में सामने आई। तब हमास ने 2005 में IDF बलों के खिलाफ हमला करने वाले अपने सात कमांडरों की पहचान जारी की। सिनवार का नाम भी 7 में से था। तीन बार इजरायल इसे मारने की कोशिश कर चुका है। एक बार स्नाइपर, एक बार एयर स्ट्राइक और एक बार उसकी दीवार में लगे बम से मारने की कोशिश की गई, जिसे उसने खोज लिया था।

20 अक्टूबर को वाराणसी जाएंगे PM मोदी, 1400 करोड़ की बड़ी परियोजनाओं की देंगे सौगात

काशी हरियाणा विजय और जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 20 अक्टूबर को काशी आ रहे हैं। वैसे उनका यह दौरा पहले से तय है। वह काशी में करीब साढ़े पांच घंटे के प्रवास के दौरान दो सभा को संबोधित करेंगे। इसे लेकर प्रशासन व भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि सारनाथ में हुए अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा. प्रधानमंत्री की यात्रा को देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जा रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम नए निर्माण के साथ-साथ अपने सुनहरे अतीत को भी सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं. अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रविवार को प्रधानमंत्री 1,300 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इस दौरान दो जनसभाओं को भी संबोधित करने का कार्यक्रम निर्धारित है. वाराणसी में क्या है पीएम का कार्यक्रम? प्रधानमंत्री मोदी रविवार को वाराणसी दोपहर करीब साढ़े 12 बजे बाबतपुर हवाई अड्डा पहुंचेंगे. बीजेपी की काशी इकाई के अध्यक्ष दिलीप पटेल ने बताया कि संभावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी यहां उतरने के बाद रिंग रोड स्थित शंकरा नेत्र अस्पताल का उद्घाटन करेंगे. अस्पताल का निरीक्षण करेंगे और करीब 1,000 लोगों को संबोधित करेंगे. जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से सिगरा स्थित सम्पूर्णनानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंच कर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का भी लोकार्पण करेंगे. पीएम ने इस स्टेडियम का उद्घाटन जुलाई 2023 को किया था. प्रधानमंत्री यहां कई अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री शाम करीब 6 बजे दिल्ली वापसी करेंगे. शंकरा नेत्र अस्पताल से सबको मिलेगा लाभ प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों के संबंध में मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने बताया कि रिंग रोड स्थित शंकरा नेत्र अस्पताल के शुरू होने से वाराणसी सहित पूर्वांचल और बिहार के लोगों को काफी लाभ मिलेगा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री वाराणसी दौरे पर बाबतपुर हवाई अड्डा टर्मिनल और अन्य हवाई अड्डा परियोजनाओं सहित करीब 1,400 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास होना है. पीएम मोदी की यात्रा पर प्रशासन अलर्ट प्रधानमंत्री मोदी की वाराणसी यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है. पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के मुताबिक प्रधानमंत्री के वाराणसी दौरे को लेकर तैयारियां जारी हैं. व्यवस्था ऐसी की जा रही है जिससे आम जनता को तकलीफ ना हो और सुरक्षा भी दुरुस्त हो. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के लिए पुख्ता योजना बनाई गई है. इस दौरान 5,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. इसके साथ ही ड्रोन से चप्पे-चप्पे की निगरानी की जाएगी. इस दौरान यातायात के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं.

कप्तान कमिंस ने स्टीव स्मिथ को टेस्ट में चौथे नंबर पर वापस भेजने का फैसला किया

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया पुरुष टीम के मुख्य कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने खुलासा किया कि उन्होंने और कप्तान पैट कमिंस ने स्टीव स्मिथ को टेस्ट में चौथे नंबर पर वापस भेजने का फैसला किया है, जबकि कुछ समय तक उन्होंने ओपनिंग की थी। डेविड वार्नर के संन्यास के बाद स्मिथ चौथे नंबर से ओपनिंग करने के लिए टेस्ट में आए, लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, उन्होंने वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के खिलाफ मैचों में 28.50 की औसत से 171 रन बनाए। मैकडोनाल्ड ने एबीसी रेडियो के समर ग्रैंडस्टैंड शो में कहा, “यह पैटी और मेरे ऊपर है और हम इस अंतिम निर्णय को लेते हैं। हमें सामूहिक रूप से लगा कि नेतृत्व समूह के रूप में, टीम के लिए यह सबसे अच्छा था कि वह ओपनिंग से हट जाए। स्पष्ट रूप से, पिछले साल के चरण में हमें लगा कि टीम के लिए यह सबसे अच्छा था कि वह ओपनिंग करे।” कोच ने कहा, “इससे हमें कैमरून (ग्रीन) को नंबर 4 स्लॉट पर लाने में मदद मिली। जैसे-जैसे समय बीतता है, आप भविष्य के बारे में सोचते हैं और इस गर्मी में हमारे सामने अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। यह सामूहिक निर्णय था। आखिरकार, यह ऐसा निर्णय है जो स्टीव नहीं लेते।” उस्मान ख्वाजा के टेस्ट में ओपनिंग करने के साथ, शीर्ष पर उनके साथ कौन होगा, इस दौड़ पर रविवार से नज़र रहेगी, जब मार्कस हैरिस, कैमरून बैनक्रॉफ्ट, मैथ्यू रेनशॉ और युवा खिलाड़ी सैम कोंस्टास शेफ़ील्ड शील्ड के अगले दौर में अपनी-अपनी टीमों के लिए खेलेंगे। हैरिस, बैनक्रॉफ्ट और कोंस्टास के साथ ऑस्ट्रेलिया ‘ए’ टीम में भारत ‘ए’ के खिलाफ़ दो चार दिवसीय मैचों के लिए, जो इस महीने के अंत में मैके और मेलबर्न में खेले जाने हैं, मैकडोनाल्ड ने कहा कि ऊपर बताए गए सभी नाम 22 नवंबर को पर्थ में शुरू होने वाली महत्वपूर्ण बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज़ के लिए दावेदारी में हैं। उन्होंने कहा, “पहले शील्ड गेम में सैम कोंस्टास ने जो काम किया, उससे उन्हें ऑस्ट्रेलिया ए सेट-अप में मौका मिला है और साथ ही उन्हें अपना काम करने का मौका भी मिला है। हम ऑस्ट्रेलिया ए के कुछ चयनों में भविष्य को लेकर थोड़ी-बहुत नजर रखते हैं और कुछ हद तक यहां और अभी को लेकर भी।” मैकडोनाल्ड ने निष्कर्ष निकाला, “इसके बजाय, सामान्य उम्मीदवारों के बारे में बात की जा रही है: बैनक्रॉफ्ट, हैरिस, रेनशॉ, साथ ही कोंस्टास। लेकिन यह कोई बैट-ऑफ नहीं है, सभी कारकों को ध्यान में रखा जाएगा। हमारे पास कुछ बाएं हाथ के विकल्प हैं, कुछ दाएं हाथ के विकल्प हैं।हमारे पास कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने समय-समय पर रन बनाए हैं, इसलिए हम उस समय उन्हें पुरस्कृत करते हैं। लेकिन वे सभी इस समय चर्चा में हैं।”  

जायसवाल से बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें : ज्वाला

बेंगलुरु  भारतीय क्रिकेट टीम को युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल से अगले माह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें हैं। यशस्वी के कोच ज्वाला सिंह का मानना है कि यश्स्वी की सबसे बड़ी परीक्षा ऑस्ट्रेलिया दौरे में होगी पर जिस एकाग्रता से वह खेलते हैं उससे उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने में सहायता मिलेगी। कोच ने कहा इस स्तर पर पहुंचकर ये अहम होता है कि आप दबाव को कैसे संभालते हैं। आप हमेशा तकनीक पर काम कर सकते हैं पर अगर आपके पास सही रवैया और मानसिकता नहीं है, तो आप सफल नहीं हो सकते। यशस्वी काफी परिपक्व हैं और इसका लाभ उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में हालात अलग होते हैं। इसका कारण है कि वे वहां काफी कठिन क्रिकेट खेलते हैं और विपक्ष पर बेहद दबाव डालते हैं। पूर्व कोच के अनुसार टेस्ट पदार्पण के बाद से ही एक बल्लेबाज के रूप में विकास किया है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ रहने से उन्हें काफी सहायता मिली है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के बाद से यशस्वी ने 11 टेस्ट मैचों में 64.05 की औसत से 1217 रन बनाए हैं और तीन लंबी पारियां खेली हैं जिसमें 171,209 और 214 रन शामिल हैं। साथ ही कहा कि वह हमेशा एक बल्लेबाज के रूप में आक्रामक रहा है। पहले, वह लगभग हर गेंद पर प्रहार करने जाता था पर अब वह हालात के अनुसार ऐसा करता है। वह अब अपने खेल के बारे में अधिक जानकारी रखता है। उसे इस बारे में बेहतर जानकारी है कि किस गेंद पर आक्रमण करना है और किस को छोड़ना है। इसके साथ ही उसकी फील्डिंग भी बेहतर होती है। इस साल की शुरुआत में इंग्लैंड के खिलाफ यशस्वी ने अच्छी बल्लेबाजी की थी। वहीं भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा को भी यशस्वी के कौशल स्तर और अनुकूलन क्षमता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, उनके पास हर तरह की परिस्थितियों में खेलने के लिए मैच है। आप उन पर दांव लगा सकते हैं और उनसे टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद कर सकते हैं।

इंटरनेशनल मास्टर्स लीग के मैच लखनऊ और रायपुर में आयोजित होंगे, समापन मैच की मेजबानी रायपुर करेगा

मुंबई इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (आईएमएल) ने अपनी गवर्निंग काउंसिल के गठन की घोषणा की है, जिसमें तीन महान क्रिकेट खिलाड़ी और मास्टर्स शामिल होंगे – लीग कमिश्नर सुनील गावस्कर, सर विवियन रिचर्ड्स और शॉन पोलक। यह त्रिमूर्ति आईएमएल की रणनीतिक दिशा, नियमों और संचालन की देखरेख करेगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लीग खेल प्रेमियों के लिए एक प्रमुख मंच बनी रहे, जहां खेल की विरासत और मनोरंजन का संगम हो, और दुनिया भर के प्रशंसकों को दिग्गजों के खेल का अद्वितीय रोमांच मिल सके। इंटरनेशनल मास्टर्स लीग का उद्घाटन संस्करण 17 नवंबर से 8 दिसंबर 2024 तक आयोजित हो रहा है। नवी मुंबई के डी. वाई. पाटिल स्टेडियम में उद्घाटन मैच खेला जाएगा। इसके अलावा लखनऊ और रायपुर में भी मैच आयोजित होंगे। समापन मैच की मेजबानी रायपुर करेगा। टेस्ट क्रिकेट में 10, 000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज और क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में से एक सुनील गावस्कर अपनी उत्कृष्ट क्रिकेट समझ और खेल की शुचिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा, “गवर्निंग काउंसिल के सदस्य के रूप में हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर होगा कि इंटरनेशनल मास्टर्स लीग क्रिकेट की भावना के प्रति सच्ची रहे, जबकि दुनिया भर के प्रशंसकों को मनोरंजन प्रदान करे। आईएमएल न केवल खेल के दिग्गजों को सम्मान देने का मंच है, बल्कि उन प्रशंसकों के लिए भी एक उत्सव है, जो आज भी अपने नायकों का सम्मान करते हैं।“ सर विवियन रिचर्ड्स, जो क्रिकेट इतिहास के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में से एक माने जाते हैं, 1970 और 1980 के दशक में वेस्टइंडीज टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा थे, जिसने उस समय क्रिकेट जगत पर अपना दबदबा कायम रखा। सीमित ओवरों के खेल में अपने समय से आगे माने जाने वाले सर विवियन रिचर्ड्स की कप्तानी में वेस्टइंडीज ने एक भी टेस्ट सीरीज नहीं हारी। आईएमएल की गवर्निंग काउंसिल में शामिल होने पर सर विवियन रिचर्ड्स ने कहा, “आईएमएल एक अद्भुत मंच है, जहां खेल के पूर्व दिग्गजों को एक बार फिर से एक्शन में देखने का अनोखा रोमांच खेल प्रशंसकों को मिलेगा। मैं गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा बनकर और इस नवाचारी लीग को सफल बनाने में मदद करने के लिए उत्साहित हूं।“ शॉन पोलक, पूर्व दक्षिण अफ्रीकी कप्तान और सर्वकालिक सफल ऑलराउंडर्स में से एक, आईएमएल गवर्निंग काउंसिल के सदस्य के रूप में अपने अनुभव और बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाएंगे। उन्होंने कहा, “क्रिकेट के महान खिलाड़ियों के साथ गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा बनना शानदार है। आईएमएल उन मास्टर्स के कौशल और क्लास का आनंद लेने का एक अवसर है, जिन्होंने वर्षों तक अपने लाखों- करोड़ों प्रशंसकों का मनोरंजन किया है। वे एक नई पीढ़ी को भी प्रेरित करेंगे। मैं इस लीग को सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनाने में अपनी भूमिका निभाऊंगा।”    

साइबर सेल में शिकायत कर ब्लैकमेलर को आप दिला सकते हैं सजा

नई दिल्ली  सोशल मीडिया के इस दौर में अपनी जानकारी बचा के रख पाना काफी मुश्किल काम हो जाता है. लोग न चाहते हुए भी कई बार इस तरह की गलतियों कर देते हैं. जो उनके लिए काफी मुश्किल खड़ी कर देती है. कई बार लोग अपनी इस प्राइवेट तस्वीर खींच कर अपने फोन में रख लेते हैं. या फिर किसी को भेज देते हैं. लेकिन फिर कई बार लोगों की प्राइवेच तस्वीरों का गलत इस्तेमाल हो जाता है. कई लोग ऐसे में प्राइवेट तस्वीर दिखाकर लोगों से पैसे मांगते हैं. उन्हें ब्लैकमेल करते हैं. ऐसे में बहुत से लोग अपनी इज्जत बचाने के लिए ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाते है. लेकिन आपको इस तरह की सिचुएशन में घबराना नहीं चाहिए और न ही खुद को ब्लैकमेल होने देना चाहिए. आप ब्लैकमेलर की शिकायत कर सकते हैं.  उसे कानून के हाथों सजा दिलवा सकते हैं. साइबर सेल में कर सकते हैं शिकायत अगर कोई आपके प्राइवेट फोटो इस्तेमाल करके आपको ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है. तो ऐसी स्थिति में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आपको सबसे पहले तुरंत साइबर सेल में ब्लैकमेलिंग के बारे में शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए आप चाहें तो ऑनलाइन  https://cybercrime.gov.in/  पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. या फिर आप चाहें तो ऑफलाइन साइबर सेल की ऑफिस जाकर के भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. वहां जाकर आपको घटना की पूरी जानकारी देनी होती है. जिसमें काॅल डिटेल्स, मैसेज, और भी जो चीजें ब्लैकमेलर को ट्रेस करने में सहायक हो सकें. पुलिस करेगी कार्रवाई भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 384 के तहत ब्लैकमेलिंग एक सीरियस ऑफेंस है. यानी अगर कोई आपको प्राइवेट फोटो का डर दिखाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है. ऐसे में आप साइबर सेल में शिकायत करते हैं. तो फिर पुलिस अपराधी को ट्रेस करने की कोशिश करती है. और फिर उस पर कार्रवाई करती है. इस मामले में IPC की धारा 384 के तहत 3 साल तक की सजा हो सकती है. वहीं इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 503 के तगत भी इसके अलावा धारा 503 के तहत 2 साल तक की सजा हो सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अंबिकापुर में मां महामाया एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में नए एयरपोर्ट का शुभारंभ करेंगे। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव के मुताबिक इससे प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अंबिकापुर में मां महामाया एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। यह एयर कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी, जिससे छत्तीसगढ़ को और अधिक विकास की राह पर ले जाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए चाहे सड़क मार्ग हो या वायु मार्ग, हम लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। कल (रविवार) का दिन छत्तीसगढ़ के लिए एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आएगा। एयरपोर्ट के शुभारंभ को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को यात्रा करने में आसानी होगी। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी रविवार को वर्चुअल माध्यम से अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केन्द्रीय उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू सहित अन्य मंत्री भी उपस्थित होंगे। उद्घाटन की तैयारी अब अंतिम चरण में चल रही है। हवाई पट्टी अंबिकापुर शहर से 13 किमी की दूरी पर दरिमा ग्राम में स्थित है। इसका पूरा क्षेत्रफल 365 एकड़ है और यह हवाई पट्टी समुद्र तल से 1924 फीट की ऊंचाई पर है। वहीं, रायपुर दक्षिण विधानसभा के होने वाले उपचुनाव को लेकर अरुण साव ने कहा कि रायपुर दक्षिण की जनता का आशीर्वाद हमेशा भारतीय जनता पार्टी को मिलता रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी जनता का समर्थन पार्टी को मिलेगा और रायपुर दक्षिण में फिर से कमल खिलेगा। कांग्रेस पार्टी द्वारा बिना प्रत्याशी घोषित किए एक नेता के नामांकन दाखिल करने पर उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का विषय है। उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस में आपसी झगड़े लगातार देखने को मिल रहे हैं, जो पार्टी की अंदरूनी स्थिति को दर्शाते हैं।  

महिला हॉकी लीग में रानी पंजाब और हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए सूरमा हॉकी क्लब की कोच होंगी

नई दिल्ली भारतीय महिला हॉकी की पूर्व कप्तान रानी रामपाल अब महिला हॉकी लीग में अब मेंटोर और कोच की भूमिका में नजर आयेंगी। महिला हॉकी लीग के इस पहले सीज़न में रानी पंजाब और हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए सूरमा हॉकी क्लब की कोच होंगी। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि समग्र रूप से भारतीय महिला हॉकी के लिए एक कदम आगे है। रानी ने कहा कि इससे उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरु होगा। रानी कई सालों तक भारतीय महिला हॉकी का चेहरा रहीं। इस दौरान उनका नेतृत्व कौशल और जुनून प्रेरणादायक रहा।  रानी टोक्यो ओलंपिक 2021 में ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम की कप्तान रही थीं। रानी ने कहा, ‘‘हॉकी मेरा जुनून है। मैने जितने समय खेला, जुनून के साथ खेला। मेरे दिमाग में हमेशा से यह था कि भारतीय हॉकी से जुड़ने के लिये जो भी मौका मिलेगा, उसे मैं स्वीकार जरूर करूंगी। हॉकी मेरे दिमाग में हमेशा चलती रहती थी।’’ रानी ने भारत के लिये 212 मैचों में 134 गोल कर किये हैं और इस प्रकार उन्हें खेल का लंबा अनुभव है। इस खिलाड़ी ने कहा कि पहली बार शुरु हो रही इस महिला लीग से उभरती हई खिलाड़ियों को एक मंच मिलेगा। रानी ने कहा कि मैं एक महिला खिलाड़ी हूं और मैने बहुत संघर्ष झेला है। एक खिलाड़ी हमेशा खिलाड़ी होता है। खेलने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती। कई बार आपको कठिन फैसला लेना होता है और इसी लिए लीग में न खेलते हुए ही मैने कोचिंग स्टाफ के साथ जुड़ने का फैसला किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संन्यास के बारे में बोलना अभी मुश्किल है। अभी लीग में नई चुनौती का सामना करूंगी और उसके बाद कोई अंतिम फैसला लूंगी।’’ साथ ही कहा कि भारतीय हॉकी टीम को अब 2026 एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी करनी चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास हरेंद्र सिंह के रूप में एक बेहतरीन कोच है जो पोडियम फिनिश का सपना पूरा कर सकते हैं। इस महान स्ट्राइकर ने कहा, ‘‘कोई भी टीम हारना नहीं चाहती। हम अतीत को बदल नहीं सकते लेकिन अब 2028 के लिये देखना है। पहला लक्ष्य 2026 एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर ओलंपिक के लिये सीधे क्वालीफाई करना होना चाहिये। साथ ही कहा कि महिला लीग खिलाड़ियों का पूल तैयार करने में काफी सहायक हो सकती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हरेंद्र सर कोच के तौर पर लौटे हैं जिनके साथ मैंने काफी हॉकी खेली है। उनके साथ सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह हमारी संस्कृति और जानते हैं। हमें भरोसा है कि हरेंद्र सर के साथ टीम 2028 में टीम अच्छा करेगी।’’रानी ने स्वीकार किया कि महिला लीग के पहले सत्र में नीलामी के लिये पर्स छोटा है लेकिन उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अधिक फ्रेंचाइजी लीग से जुड़ेंगी और पैसा भी बढेगा। उन्होंने कहा, ‘‘नीलामी के लिये पर्स कम जरूर है लेकिन कोई भी चीज शुरू करना कठिन होता है। हॉकी इंडिया के लिये भी यही है लेकिन लीग का प्रभाव अच्छा रहता है तो उम्मीद है कि और टीमें आगे आयेंगी और पर्स भी बढेगा। हमारे खिलाड़ी बहुत साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं तो आर्थिक तौर पर यह लीग बहुत मदद करेगी।’’    

विंध्य क्षेत्र के लिये गेम चेंजर साबित होगा रीवा एयरपोर्ट, मोदी आज करेंगे शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के साथ मध्यप्रदेश को भी अनेक अनूठी सौगातें दी है, जिससे मध्यप्रदेश तेजी से विकसित राज्य की ओर अग्रसर हो रहा है। विकास की इसी कड़ी प्रधानमंत्री श्री मोदी विंध्य क्षेत्र को एयरपोर्ट की सौगात देने जा रहे हैं। रविवार 20 अक्टूबर विंध्य क्षेत्र के लिये ऐतिहासिक होगा। इस दिन प्रधानमंत्री श्री मोदी रीवा एयरपोर्ट का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। रीवा एयरपोर्ट पूरे विंध्य क्षेत्र के लिये गेम चेंजर साबित होगा, इससे रीवा अंचल में पर्यटन के साथ निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश का 6वां एयरपोर्ट, जिसे डीजीसीए ने दिया लायसेंस मध्यप्रदेश के एक बड़े हिस्से के लिए यह अच्छी खबर है कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने रीवा एयरपोर्ट को लाइसेंस दे दिया है। इसके अंतर्गत अब यहां से एयरक्राफ्ट आसानी से उड़ान भर सकेंगे। भोपाल, जबलपुर, खजराहो, इंदौर और ग्वालियर के बाद रीवा प्रदेश का 6वां एयरपोर्ट है, जिसे डीजीसीए ने लाइसेंस दिया है। इस एयरपोर्ट पर उड़ानें शुरू होने से प्रदेश के 65 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा होगा। साथ ही रीवा की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों को भी राहत मिलेगी। उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्र भी होंगे लाभान्वित उल्लेखनीय है कि रीवा से मऊगंज, सीधी, सतना, मैहर जिले सीधे जुड़े हुए हैं। इन जिलों के साथ ही उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे लोग भी काम के सिलसिले में रीवा आते हैं। रीवा की आबादी करीब 15 लाख, मऊगंज की 8 लाख, सीधी की 12 लाख, सिंगरौली की 12 लाख और सतना जिले की आबादी 18 लाख है। इन जिलों की जनता को रीवा एयरपोर्ट बनने से सीधा फायदा होगा। एयर कनेक्टिविटी होने से यहां विकास को भी रफ्तार मिलेगी। रीवा एयरपोर्ट सरकार की उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक- UDAN) योजना के तहत बनाया गया है। इसका उद्देश्य विमान यात्रा को आम जनता के लिए आसान बनाना है। इससे छोटे शहरों के बीच एयर कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इसके अलावा अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। निवेश-टूरिज्म को मिलेगा फायदा लाइसेंस मिलने के बाद अब रीवा एयरपोर्ट पर फ्लाइट का आना-जाना, यात्रियों और कार्गो सुविधा का विस्तार होगा. इस एयरपोर्ट को नए ढंग से बनाया गया है। यह अच्छा-खासा टर्मिनल भी बनाया गया है। इस एयरपोर्ट पर एटीआर-72 विमान संचालित किया जा सकता है। ये सभी सुविधाएं एयरलाइंस को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। इस एयरपोर्ट के संचालन से एक ओर पर्यटन को फायदा होगा वहीं दूसरी ओर निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।  अगले 50 सालों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया प्लान रीवा एयरपोर्ट को अगले 50 सालों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रीवा से हवाई यात्रा करने वाले यात्री बिना किसी असुविधा के रीवा एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे। रीवा में पहले से बनाए गए रिंग रोड के चलते सीधी और सतना जिले से यात्रियों का आना-जाना काफी बढ़ गया है। सिंगरौली का पॉवर प्लांट, विंध्य की 29 बड़ी इकाइयां, बेहतरीन हाई-वे, मुकुंदपुर व्हाइट सफारी, बंधावगढ़ नेशनल पार्क, संजय नेशनल पार्क, एशिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट, खूबसूरत जलप्रपात, भगवान श्रीराम की तपोवन भूमि चित्रकूट, मैहर की शारदा मां और सीमेंट के बड़े उद्योग होने से रीवा एयरपोर्ट की महत्वता और भी बढ़ जायेगी। रीवा एयरपोर्ट – एक नजर में 450 करोड़ रूपये की लागत। 102 हेक्टेयर भूमि पर निर्मित। 30 मीटर चौड़ा और 800 मीटर लंबा रन-वे। रन-वे के दोनों तरफ़ 3.5 मीटर के दो शेल्टर। टर्मिनल में बैठने की अच्छी व्यवस्थाएँ। साफ़-सुथरे शौचालय। यात्री सहायता के लिए सूचना डेस्क। स्क्रीनिंग उपकरण और प्रशिक्षित कर्मियों से लैस सुरक्षा उपाय। यात्री और कार्गो विमान भर सकेंगे उड़ान। भोपाल के लिए 72 सीटर विमान सेवाएं शुरू होंगी। भविष्य में अन्य बड़े शहरों तक होगा इसका विस्तार। जनरेटिव एआई की सुविधा एक्सपेरिमेंट के तौर पर उपलब्ध।  

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