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शहडोल के ऐतिहासिक विराट मंदिर में मरम्मत के लिए ASI ने लगाया ताला, लोहे का गेट लगाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही हुई बंद

शहडोल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) ने शहडोल के ऐतिहासिक विराट मंदिर में ताला लगा दिया है। बाहर लोहे का गेट लगाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही बंद की गई है। इसकी कोई सूचना पहले से नहीं दिए जाने से श्रद्धालुओं में काफी नाराजगी है। किवदंतियों में इस मंदिर को महाभारत कालीन, पांडवों के अज्ञातवास का प्रतीक माना जाता रहा है। मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर ताला लगा दिए जाने से पूजन में व्यवधान होने लगा है। मंदिर की दीवार जर्जर एएसआई , जबलपुर के अधीक्षक डा. शिवकांत वाजपेयी का कहना है कि मंदिर की दीवार का एक हिस्सा जर्जर हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से गर्भगृह में ताला लगाया गया है। इंजीनियर सर्वे करेंगे और जल्द ही मंदिर की मरम्मत कराई जाएगी। इसके बाद गर्भगृह का ताला खोल दिया जाएगा। स्थानीय कर्मचारियों को कहा गया था कि इस संदर्भ में नोटिस चस्पा कर दें, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न बने। यदि नोटिस नहीं लगा है तो लगवाया जाएगा। इसके अलावा सुबह पूजा के लिए गर्भगृह में पुजारी को जाने दिया जाएगा। बता दें, विराटेश्वर मंदिर सदियों से स्थानीय नागरिकों की आस्था का केंद्र रहा है। गर्भगृह बंद किए जाने का विरोध इधर, हिंदूवादी संगठन गर्भगृह बंद किए जाने के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत महाकोशल महामंत्री शक्ति सिंह ने कहा कि मंदिर में ताला बंद करना उचित नहीं है। विराट मंदिर में दूर-दूर से लोग भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं, लेकिन ताला लगा होने से वे बिना दर्शन व पूजा के वापस हो रहे है। इसका विरोध किया जाएगा। यदि इस ओर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन किया जाएगा। गोलकाकी मठ के आचार्य को भेंट की निशानी भगवान शिव को समर्पित विराट मंदिर को कलचुरी राजा युवराज देव द्वितीय ने बनवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कलचुरी राजवंश की बेहतरीन वास्तुकलाओं में से एक है। इस मंदिर को खजुराहो के शिव मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। 70 फीट ऊंचे मंदिर को गोलकाकी मठ के आचार्य को भेंट के तौर पर बनवाया गया था। एएसआई की देखरेख में मंदिर मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) के संरक्षण में रखा गया है। गर्भगृह में एक छोटा शिवलिंग है। स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना: मंदिर के बाहर की दीवारों पर दिग्पाल वसु, शिव के विविध रूप, शिव परिवार, विष्णु अवतार, मिथुन दृश्य, और गजशार्दुल की मूर्तियां हैं। मंदिर में नृत्य मुद्रा में महावीर, शिव, और पार्वती की मूर्ति, सरस्वती, गणेश, विष्णु, नृसिंह, व्याल, कांटा निकालती सुंदर युवती, युद्धरत कलाकृतियां देखी जा सकती हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह ने कार्यभार संभालते ही पहला बड़ा फैसला लिया, निःशुल्क डायलिसिस सुविधा प्रदान की जाएगी

चंडीगढ़़ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद आज नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के सीएम का पदभार ग्रहर कर लिया। इस दौरान  सीएम नायब सैनी ने ट्वीट कर लिखा “हरियाणा प्रदेश के अपने 2.80 करोड़ परिवारजनों की अनथक सेवा का व्रत लेकर प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। मैं भावुक और नतमस्तक हूं। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का संकल्प सर्वोपरि है। हरियाणा प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ,समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी पूर्ण बहुमत की ये सरकार सेवा, सुशासन,समानता,समृद्धि और गरीब कल्याण के लिए समर्पित होगी।” इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सभी मंडियों को उनके कमरे में बैठाया। मुख्यमंत्री नायब सिंह का पहला बड़ा फैसला मुख्यमंत्री नायब सिंह ने कार्यभार संभालते ही पहला बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में क्रोनिक किडनी रोगियों के लिए निःशुल्क डायलिसिस सेवा उपलब्ध रहेगी। भविष्य में सभी मेडिकल कॉलेज में भी निःशुल्क डायलिसिस सुविधा प्रदान की जाएगी। कैबिनेट मीटिंग के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि कैबिनेट मीटिंग में हमने अनुसूचित जाति के वर्गीकरण से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने का फैसला लिया है। हमने फैसला किया है कि हम एससी के वर्गीकरण के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, उसे लागू करेंगे। अपराधियों को सीएम की चेतावनी सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि उनकी सरकार नारी शक्ति को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने उन लोगों को चेतावनी देते हुआ कहा जो आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं या तो राज्य छोड़ दें या फिर सुधर जाएं। नहीं तो हम सुधार करेंगे। ‘जनता ने कांग्रेस के नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया’ मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने घोषणापत्र में वादा किया था कि हम किडनी के मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराएंगे। हमने उससे संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। हरियाणा सरकार किडनी डायलिसिस का खर्च वहन करेगी। मैं हरियाणा की जनता को तीसरी बार भारी जनादेश देने और पीएम मोदी की नीतियों को मंजूरी देने के लिए धन्यवाद देता हूं। हरियाणा की जनता ने विपक्ष के नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया। कांग्रेस ने किसानों को भड़काने की कोशिश की। उन्होंने युवाओं में संदेह पैदा किया। उन्होंने हरियाणा के एथलीटों का इस्तेमाल किया। एथलीट हमारे देश का गौरव हैं। पीएम मोदी ने पिछले 10 सालों में किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। हरियाणा की जनता ने पीएम मोदी की नीतियों को मंजूरी दी है और कांग्रेस के नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है। हरियाणा के मंत्रियों को सचिवालय में कमरे अलॉट हरियाणा के मंत्रियों को सचिवालय में कमरे अलॉट कर दिए गए हैं। कैबिनेट मंत्री आरती राव को कमरा नंबर 43सी मिला है। रणबीर गंगवा को कमरा नंबर 43ए मिला है। राव नरबीर को कमरा नंबर 39 मिला है। कृष्ण लाल पंवार को कमरा नंबर 34 मिला है। अनिल विज को कमरा नंबर 32 यानी पुराना कमरा ही मिला है। कृष्ण बेदी को कमरा नंबर 24 मिला है। श्रुति चौधरी को कमरा नंबर 31 मिला है। विपुल गोयल को कमरा नंबर 49 मिला है। श्याम सिंह राणा कमरा नंबर 47 मिला है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी राजनीतिक दांव-पेंच में लगी हुई, दो सरकारी बंगले पर कब्जा करना चाहती हैं : विजेंद्र गुप्ता

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी पर हमला बोला। विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी (आप) पर शीशमहल को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी राजनीतिक दांव-पेंच में लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि 11 अक्टूबर को सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्‍ल्यूडी) ने आतिशी को शीश महल का अलॉटमेंट लेटर जारी किया था। 14 अक्टूबर को आतिशी ने इसे स्वीकार कर लिया और 16 अक्टूबर को पीडब्‍ल्यूडी ने उन्हें शीश महल पर कब्ज़े की स्लिप भी दे दी। लेकिन अब, आतिशी द्वारा दिए गए बयान में यह कहा जा रहा है कि उन्हें 6 फ्लैग स्टाफ रोड पर कब्जा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि आतिशी दोनों सरकारी बंगलों, एबी-17 मथुरा रोड और 6 फ्लैग स्टाफ रोड पर एक साथ कब्जा करना चाहती हैं। उनकी इस नीति से स्पष्ट होता है कि उनका इरादा सत्ता का दुरुपयोग करना है। आतिशी ने पहले ही पीडब्‍ल्यूडी से सभी आवश्यक दस्तावेज हासिल कर लिए हैं। उन्होंने पीडब्‍ल्यूडी से मांग की है कि आतिशी से एबी-17 बंगला तुरंत खाली कराया जाए। क्योंकि, जब उन्हें 6 फ्लैग स्टाफ रोड का अलॉटमेंट मिल गया है, तो एबी-17 बंगले पर उनके कब्जे का कोई अर्थ नहीं है। बता दें कि गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी थी कि सीएम आतिशी को 6 फ्लैगस्टाफ रोड पर स्थित बंगले के आवंटन के संबंध में लोक निर्माण विभाग (पीडब्‍ल्यूडी) से एक पत्र प्राप्त हुआ है। हालांकि, अभी तक उन्हें इस बंगले का कब्जा नहीं मिला है। बयान में यह भी कहा गया है कि आतिशी अभी भी एबी-17, मथुरा रोड आवास में रह रही हैं, जिसे उन्हें पिछले साल दिल्ली सरकार में मंत्री नियुक्त होने पर आवंटित किया गया था।

भिलाई के कोहका-जुनवानी रोड पर सड़क हादसा, डिवाइडर से टकराकर पलटी कार

दुर्ग भिलाई के कोहका-जुनवानी रोड पर बीती रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसा तब हुआ जब तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराकर लगभग 10 फीट ऊपर उछलकर सड़क पर पलट गई. कार में सवार व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है. घायल का इलाज अस्पताल में जारी है. मामला स्मृति नगर चौकी क्षेत्र का है. जानकारी के अनुसार, कार क्रमांक सीजी 04 एचई 4400 का चालक अजित कुमार, जो कि कुठेला भाठा का निवासी है, अपनी कार से कोहका की ओर गया था और देर रात घर लौटते समय नशे में था. माइलस्टोन स्कूल के पास तेज रफ्तार में चल रही कार का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह डिवाइडर से टकरा गई और हवा में उछलने के बाद सड़क पर पलट गई. इस हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और अजित गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसे की सूचना के बाद परिजन मौके पर पहुंचे और कार सवार को पहले शंकराचार्य अस्पताल ले जाया गया. वहां से उसे एम्स रायपुर रेफर किया गया. कार चालक की हालत गंभीर बताई जा रही है. स्मृति नगर पुलिस चौकी को हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस जांच शुरू कर दी है.

नीतीश को तेजस्वी ने जहरीली शराब पर 12 सवालों से घेरा, कहा-100 से अधिक मौत और ठहाका लगाते CM

पटना बिहार के छपरा, गोपालगंज और सीवान में जहरीली शराब कांड पर नेता प्रतिपक्ष और लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा जुबानी हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में शराब पीने से एक सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई है और नीतीश कुमार पटना की सड़कों पर ठहाका लगा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से नीतीश कुमार का एक फोटो शेयर करते हुए तेजस्वी यादव ने बिहार सीएम पर 12 सवालों से हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजस्वी यादव ने पोस्ट डाला है। उन्होंने लिखा है, “जहरीली शराब से 100 से अधिक हत्या होने के बाद भी पटना के बीचों-बीच ठहाके लगाकर हंसते मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री! संवेदना तक व्यक्त नहीं करने वाले तीसरे नंबर की पार्टी के मुख्यमंत्री का इतनी मौतों पर हँसना और हँसाना बिहारियों एवं लोकतंत्र को चिढ़ाना है। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद CM का ना मीडिया से संवाद, ना जनता से संवाद, ना पीड़ितों से संवाद!” दरअसल नीतीश कुमार शुक्रवार को पटना जंक्शन के पास बन रहे मल्टीलेवल पार्किंग और अंडरग्राउंड सबवे का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ मंत्री विजय चौधरी और मंत्री नितिन नवीन भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान ली गई एक तस्वीर को तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शेयर किया है और सीएम नीतीश पर हमला बोला है। इससे पहले भी तेजस्वी यादव ने छपरा और सीवान में जहरीली शराब कांड पर नीतीश कुमार पर प्रहार किया था। एक्स पर उन्होंने कहा कि शराबबंदी नीतीश कुमार के संस्थागत भ्रष्टाचार का एक छोटा सा नमूना है। अगर शराबबंदी हुई है तो इसे पूर्ण रूप से लागू करना सरकार का दायित्व है लेकिन मुख्यमंत्री की वैचारिक और नीतिगत अस्पष्टता, कमजोर इच्छाशक्ति तथा जनप्रतिनिधियों की बजाय चुनिंदा अधिकारियों पर निर्भरता के कारण आज बिहार में शराबबंदी सुपरफ्लॉप है। सत्ताधारी नेताओं-पुलिस और शराब माफिया के नापाक गठजोड़ के कारण बिहार में 𝟑𝟎 हज़ार करोड़ से अधिक का अवैध शराब का काला बाजार फला-फूला है। तेजस्वी यादव ने लिखा है कि अगर शराबबंदी के बावजूद बिहार में 𝟑 करोड़ 𝟒𝟔 लाख लीटर शराब की कागजों में बरामदगी दिखायी जा रही है। एक ईमानदार वरीय पुलिस अधिकारी के अनुसार इसमें भी घपला है क्योंकि अवैध शराब की तस्करी के लिए पुलिस अधिकारी शराब पकड़ने/पकड़वाने का ढोंग रचते है जैसे कि 𝟐𝟎 ट्रक शराब बिहार में घुसाने पर एक टूटा-फूटा ट्रक पकड़वाते है। उसमें भी शराब की बजाय कुछ और द्रव्य पदार्थ होता है। अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी होशमंद है तो इन सवालों का जवाब दें। 𝟏. अगर प्रतिवर्ष इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद हो रही तो उसके दोषी कौन? 𝟐. सरकारी गुलाबी फ़ाइलों के अनुसार अवैध शराब से मरने वालों की संख्या 𝟑𝟎𝟎 से अधिक है लेकिन हक़ीक़त इससे विपरीत है, अब तक हजारों लोगों की अवैध शराब के कारण मौत नहीं बल्कि हत्या हुई है। इनका हत्यारा कौन और दोषी कौन? दोषियों पर क्या कारवाई हुई? 𝟑. क्या अब तक आज तक किसी बड़े पुलिस अधिकारी/पुलिस अधीक्षक पर कभी कोई कारवाई हुई? 𝟒. अगर पटना में शराब मिलती है तो उसका मतलब है 𝟓-𝟔 जिला पार कर यहाँ तक शराब पहुँची है, तो फिर यह उन सभी 𝟓-𝟔 जिलों की पुलिस की नाकामी है या नहीं? 𝟓. जानकारों के मुताबिक़ शराब माफिया मुख्यमंत्री से रिटायर्ड अधिकारी के मार्फ़त सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों के पदस्थापन में खुली बोली के अंतर्गत पोस्टिंग करवाता है अर्थात् किस जिला में कौन अधिकारी जाएगा इसका चयन भी शराब माफिया ही करता है। क्या यह आरोप सही नहीं है? 𝟔. क्या यह सही नहीं है कि बिहार में शराबबंदी के बाद से अगस्त 𝟐𝟎𝟐𝟒 तक मद्यनिषेध विभाग की ओर से निषेध कानूनों के उल्लंघन से संबंधित कुल 𝟖.𝟒𝟑 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुल 𝟏𝟐.𝟕 लाख लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है। 𝟕. मुख्यमंत्री बतायें कि गिरफ़्तार लोगों में अधिकांश गरीब व वंचित वर्गों से ही क्यों है? 𝟖. अब तक 𝐃𝐒𝐏 अथवा उससे ऊपर के स्तर के कितने अधिकारियों को सजा मिली? कितने बर्खास्त हुए? 𝟗. प्रतिदिन पुलिस और उत्पाद विभाग की ओर से करीब 𝟔𝟔𝟎𝟎 छापेमारी होती है उसके बावजूद भी शराब की अवैध तस्करी जारी है तो इसका दोषी कौन? 𝟏𝟎. क्या गृहमंत्री सह मुख्यमंत्री इसकी ज़िम्मेवारी लेंगे? 𝟏𝟏. क्या यह संयोग है अथवा प्रयोग कि शराबबंदी में अधिकांश जदयू के नेता/कार्यकर्ता पकड़ाए जा रहे है? 𝟏𝟐. मुख्यमंत्री बतायें कि बिहार के हर चौक-चौराहों पर शराब के ठेके किसने खुलवाये?

हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के नेता विपक्ष का फैसला आलाकमान के द्वारा लिया जाएगा

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद विधायक दल का नेता चुनने के लिए शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों की बैठक चंडीगढ़ में हुई।  बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक लाइन का प्रस्ताव रखा कि नेता विपक्ष का चयन करने का अधिकार आलाकमान को दिया जाए, जिस प्रस्ताव का अनुमोदन प्रदेश अध्यक्ष उदयभान ने किया और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसके बाद पर्यवेक्षकों ने तमाम विधायकों से वन-टू-वन उनकी राय जानी और पूरी रिपोर्ट लेकर दिल्ली रवाना हो गए हैं। अब हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के नेता विपक्ष का फैसला आलाकमान के द्वारा लिया जाएगा। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री केंद्रीय पर्यवक्षेक अशोक गहलोत, एआईसीसी के कोषाध्यक्ष अजय माकन और पंजाब सीएलपी नेता प्रताप सिंह बाजवा बैठक में मौजूद थे।  

हरियाणा में भाजपा सरकार के फैसले पर भड़कीं मायावती, कहा- आरक्षण समाप्त करने की साजिश

नई दिल्ली हरियाणा की भाजपा सरकार ने पहली ही कैबिनेट मीटिंग में अनुसूचित जाति आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू करने का फैसला लिया है। सीएम नायब सिंह सैनी का कहना है कि इससे उन दलित जातियों को लाभ मिल सकेगा, जो अब तक आरक्षण से वंचित रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को एससी आरक्षण के वर्गीकरण का अधिकार दिया था। उसी फैसले के आधार पर भाजपा सरकार ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया है। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती इस फैसले पर भड़क गई हैं। उन्होंने कहा कि यह आरक्षण को ही खत्म करने की साजिश का हिस्सा है। इसके अलावा समाज में बंटवारे का प्रयास है। मायावती ने भाजपा सरकार के फैसले के तुरंत बाद एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘हरियाणा की नई भाजपा सरकार द्वारा एससी समाज के आरक्षण में वर्गीकरण को लागू करने अर्थात आरक्षण कोटे के भीतर कोटा की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला दलितों को फिर से बांटने व उन्हें आपस में ही लड़ाते रहने का षड्यंत्र है। यह दलित विरोधी ही नहीं बल्कि घोर आरक्षण विरोधी निर्णय है।’ यही नहीं मायावती ने भाजपा हाईकमान को भी इस फैसले को लेकर आड़े हाथों लिया। मायावती ने कहा कि हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोकने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आगे नहीं आने से भी यह साबित है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आरक्षण को पहले निष्प्रभावी बनाने और अन्ततः इसे समाप्त करने के षडयंत्र में लगी है। जो घोर अनुचित व बीएसपी इसकी घोर विरोधी है। मायवाती ने कहा कि वास्तव में जातिवादी पार्टियों द्वारा एससी-एसटी व ओबीसी समाज में ’फूट डालो-राज करो’ व इनके आरक्षण विरोधी षडयंत्र आदि के विरुद्ध संघर्ष का ही नाम बीएसपी है। इन वर्गों को संगठित व एकजुट करके उन्हें शासक वर्ग बनाने का हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी मायावती ने ऐतराज जताया था। उन्होंने तब केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह अदालत में सही से पैरवी करे ताकि फैसला बदला जा सके। वहीं दलितों के ही एक वर्ग ने इस फैसले को सही करार दिया है। यहां तक कि अगस्त में ही जब एक वर्ग आरक्षण पर इस फैसले के विरोध में उतरा था तो वहीं वाल्मीकि समुदाय ने कई जगहों पर इसके समर्थन में प्रदर्शन किए थे।

चुनाव अधिकारियों की मदद से MVA का समर्थन करने वाले मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवा रहा है भाजपा

मुंबई मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित शिव सेना (यूबीटी) के मुख्य कार्यालय शिवालय में एमवीए नेताओं की शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इस दौरान कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी एमवीए समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश कर रही है। पटोले ने कहा, ‘हमें अपने समर्थकों से कुछ शिकायतें मिली हैं। यह बताया गया कि सत्तारूढ़ गठबंधन स्थानीय चुनाव अधिकारियों की मदद से MVA का समर्थन करने वाले मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवा रहा है।’ एमवीए नेताओं ने कहा, ‘चुनाव आयोग के फॉर्म नंबर 7 का उपयोग दूसरे मतदाताओं या खुद का नाम हटाने के लिए किया जाता है। अब इसका इस्तेमाल एमवीए का समर्थन करने वाले मतदाताओं के नाम को हटाने के लिए हो रहा है।’ इस दौरान कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने एनसीपी से जुड़े संतोष पवार का वोटर आईडी कार्ड दिखाया। इस कार्ड पर उनके नाम के साथ किसी और की फोटो छपी दिख रही है। उन्होंने कहा कि एमवीए नेता इन शिकायतों को लेकर मुख्य चुनाव अधिकारी से मिलने जा रहे हैं। यह गंभीर मामला है और इस पर ऐक्शन लिया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची फर्जी दूसरी ओर, महाराष्ट्र कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए सोशल मीडिया पर प्रसारित पार्टी उम्मीदवारों की पहली सूची को फर्जी बताया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से हस्ताक्षरित सूची में कांग्रेस के 15 प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह सूची फर्जी है। नेताओं ने कहा कि यह साफ नहीं है कि लिस्ट कैसे जारी की गई, लेकिन यह आधिकारिक नहीं है। पार्टी ने मतदाताओं से उम्मीदवारों की सूची की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करने और अफवाहों पर विश्वास न करने का आग्रह किया है। कांग्रेस की ओर से महाराष्ट्र चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची शनिवार को जारी किए जाने की उम्मीद है।  

अवैध रेत खनन मामला में CBI की छापेमारी, ये छापेमारी संदिग्ध व्यक्तियों के आवासीय और आधिकारिक परिसरों में की गई

जयपुर राजस्थान में CBI ने शुक्रवार को अवैध रेत खनन से जुड़े एक मामले की जांच के तहत जयपुर, टोंक, अजमेर और भीलवाड़ा में 10 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। ये छापेमारी संदिग्ध व्यक्तियों के आवासीय और आधिकारिक परिसरों में की गई. जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई राजस्थान उच्च न्यायालय (जयपुर बेंच) के आदेश 16 अप्रैल, 2024 के तहत की गई। CBI ने 26 अप्रैल 2024 को इस मामले को पुनः दर्ज किया था, जो पहले थाना सदर, जिला बूंदी राजस्थान में FIR संख्या 527/2023 के तहत IPC की धारा 379 और MMDR अधिनियम की धारा 21(4) के अंतर्गत दर्ज था। प्रवक्ता ने बताया कि आरोप है कि 24 अक्टूबर, 2023 को एक निजी व्यक्ति को 40 MT रेत (माइनर मिनरल) को बिना वैध पास/परमिट/लाइसेंस या अन्य अनुमति के वाहन (डंपर) में परिवहन करते हुए गिरफ्तार किया गया था। राजस्थान पुलिस ने इस जांच के दौरान संबंधित वाहन के पंजीकृत मालिक को भी 22 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। CBI की इस छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज मिले हैं और मामले की जांच अभी भी जारी है।

चोरों ने रात में सुने मकान पर बोला धावा, सोने चांदी के जेवर समेत नगद राशि लेकर फरार

बलौदाबाजार कोतवाली थाना क्षेत्र के कृष्णा कॉलोनी के एक मकान में चोरों ने रात में धावा बोलकर घर में रखे सोने चांदी के जेवर समेत नगद राशि लेकर फरार हो गए. घटना की जानकारी घरवालों को तब लगी जब वे रायपुर से वापस आए तो देखा घर का दरवाजा का ताला टूटा हुआ था. अंदर के कमरे के सामान बिखरे पड़े थे और अलमारी का लॉकर भी खुला हुआ था. अलमारी के लाकर उसमें रखे सोने चांदी के जेवर समेत नगदी गायब थे. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पहुंची और मर्ग कायम कर जांच में जुटी है. बताया जा रहा है कि इसके पूर्व भी अनेकों बार कृष्णा कॉलोनी में चोरी की घटना हुई है पर चोरों का आज तक पता नहीं चला. वहीं कॉलोनाइजर यहां पर सुरक्षाव्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. पीड़िता महिला प्रमोदनी इस्मानुएल ने बताया कि उनकी मां की तबियत खराब होने के कारण वे 15 अक्टूबर से रायपुर के रामकृष्ण हास्पिटल अस्पताल में थीं. जब वह घर लौटीं, तो देखा कि ताला टुटा था और आलमारी भी खुला हुआ था, जिसमें रखे सोने चांदी के जेवर समेत नगदी गायब थे. चोरों ने लगभग दो से ढाई लाख की सेंधमारी की है. कोतवाली थाना प्रभारी ने बताया कि कृष्णा कॉलोनी में चोरी की घटना हुई है. पुलिस जांच में जुटी है. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जल्द ही चोरों को पकड़ लिया जायेगा.

नांदेड़ लोकसभा का उपचुनाव भी भाजपा बना रही हाईप्रोफाइल, पूर्व CM को ही उतारने की तैयारी

मुंबई महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के साथ ही नांदेड़ लोकसभा का उपचुनाव भी होना है। इस एकमात्र सीट के उपचुनाव को भी भाजपा हल्के में नहीं लेना चाहती और मजबूत कैंडिडेट उतारने की तैयारी है। महाराष्ट्र भाजपा के सूत्रों का कहना है कि यहां से पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद अशोक चव्हाण को भी उतारा जा सकता है। उनके नाम पर पार्टी में गंभीरता से विचार चल रहा है। वह कुछ महीने पहले ही भाजपा में आए थे और उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। नांदेड़ को उनका गढ़ माना जाता है। यहां उनके अपने निजी प्रभाव और पार्टी के बड़े वोटबैंक के जरिए भाजपा को जीत की उम्मीद है। इसलिए चर्चा है कि अशोक चव्हाण को ही उतारा जा सकता है। यदि वह जीते तो फिर राज्यसभा में सूबे से किसी और नेता को भेजा सकता है। कांग्रेस ने इस सीट से पूर्व सांसद वसंत चव्हाण के बेटे रवींद्र चव्हाण को अपना कैंडिडेट घोषित किया है। भाजपा को लगता है कि कांग्रेस रवींद्र चव्हाण को उतारकर वसंत राव के निधन से मिलने वाली सहानुभूति का लाभ पा सकती है। ऐसे में भाजपा इस सीट पर टफ फाइट के मूड में आ गई है। यही वजह है कि पूर्व सीएम को ही उतारने का प्लान बन रहा है। अशोक चव्हाण के अलावा पूर्व सांसद प्रताप पाटिल चिखलिकर का नाम भी चर्चा में है। फिलहाल सभी की नजर भाजपा के कैंडिडेट पर ही है कि आखिर किसे मौका मिलता है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही अशोक चव्हाण ने कांग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा में आ गए थे। उनके साथ कई समर्थक भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। हालांकि इसके बाद भी नांदेड़ सीट पर पार्टी को फायदा नहीं मिला। यहां चुनाव में कांग्रेस के वसंतराव चव्हाण ने 60 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा के प्रताप पाटिल चिखलिकर को हरा दिया था। इसीलिए भाजपा को अब लगता है कि अशोक चव्हाण को उतारा जाए। निजी तौर पर उन्हें उतारने से भाजपा और उनके समर्थक ऐक्टिव हो सकते हैं। इससे दोहरी ताकत मिलेगी। लेकिन उनके ना लड़ने पर समर्थकों के ऐक्टिव होने की संभावना कम रहती है। यह सीट कांग्रेस के सांसद चुने गए वसंत राव चव्हाण के निधन से खाली हुई है। ऐसे में सहानुभूति का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। लेकिन अशोक चव्हाण के जरिए भाजपा तगड़े मुकाबले की तैयारी में है।

पेजर बम वाली तकनीक का हुआ खुलासा, देशी जुगाड़ ने दुनिया को हिला दिया

बेरूत बेरूत के दक्षिणी उपनगर और हिजबुल्लाह के गढ़ वाले इलाकों में हजारों पेजर ब्लास्ट ने चरमपंथी समूह को हिलाकर कर रख दिया था। इजराइली खुफिया एजेंसी ने एक बड़ी योजना के तहत हिजबुल्लाह के लड़ाकों के पेजर को बम में बदल दिया था। इसके लिए इजराइली जासूसी ने एक लंबी योजना तैयार की थी, जिसमें बैटरी के डिजाइन के साथ कवर स्टोरी भी तैयार की गई थी। इसमें एक कमजोरी भी थी। लेकिन इजराइली योजना की हिजबुल्लाह को भनक तक नहीं लगी। इसमें एक कमी भी थी। पेजर की बैटरी इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल लिथियम ऑयन बैटरी पैक जैसी ही थी लेकिन समस्या थी कि पेजर की तरह यह बाजार में मौजूद नहीं थी। इसलिए इजराइली एजेंटों ने एक बैकस्टोरी बनाई। पेजर के लिए इजराइली एजेंटों ने मशहूर ताइवानी ब्रांड गोल्ड अपोलो का बताकर हिजबुल्लाह को धोखा दिया। एक रिपोर्ट में पेजर के अध्ययन और खुफिया सूत्रों से पता चला है कि एक बैटरी विशेषज्ञ ने बताया कि विस्फोटक के लिए पीईटीएन का इस्तेमाल किया गया था। एक लेबनानी स्रोत ने कहा कि हिजबुल्लाह ने पाया था कि बैटरी अपेक्षा से ज्यादा तेजी से गर्म हो रही थी। हालांकि, इससे कोई बड़ी चिंता नहीं हुई। समूह हमले से कुछ घंटे पहले तक अपने सदस्यों को पेजर बांट रहा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि हजारों पेजर एक साथ फटे। ज्यादातर मामलों में डिवाइस में मैसेज आने के बीप वाले संकेत के बाद इसमें ब्लास्ट हुआ। यह भी योजना का ही हिस्सा था, ताकि विस्फोट के समय पेजर हाथ और चेहरे के पास रहे। हमले में करीब 3000 लोग घायल हो गए थे। पेजर हमले के अगले ही दिन वॉकी-टॉकी में विस्फोट हुए। दोनों हमलों में कम से कम 39 लोगों की मौत हुई थी और 3400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पश्चिमी सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि इजराइली खुफिया एजेंसी ने इन पेजर और वॉकी-टॉकी हमलों की योजना बनाई थी। इसके लिए इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने हिजबुल्लाह के सप्लाई सिस्टम में घुसपैठ कर ली थी। हिजबुल्लाह को जिस डीलर ने पेजर सप्लाई किए वह मोसाद का ही एजेंट था। यही नहीं, इन पेजर को मोसाद की निगरानी में ही तैयार किया गया था। पेजर बम वाली तकनीक का हुआ खुलासा, देशी जुगाड़ ने दुनिया को हिला दिया  हिजबुल्ला ह पर पिछले महीन इजरायल ने पेजर अटैक कर हर किसी को चौंका दिया। इतने छोटे से दिखने वाले पेजर को आखिर इजरायल ने कैसे चलते फिरते बम में बदल दिया, ये सोचकर हर कोई हैरान था। एक एजेंसी की तरफ से अब इस मामले में एक अहम रिपोर्ट प्रकाशित की गई है, जिसमें लेबनान सूत्रों के हवाले से पेजर को बम में बदलने की इजरायली तकनीक के बारे में विस्तारर में बताया गया है। फरवरी में पेजर प्राप्त करने के बाद हिजबुल्लाह ने विस्फोटकों की उपस्थिति की जांच की। उन्हें हवाई अड्डे के सुरक्षा स्कैनर के माध्यम से यह देखने के लिए डाला कि क्या वे अलार्म ट्रिगर करते हैं। कुछ भी संदिग्ध नहीं बताया गया। दो बम विशेषज्ञों ने कहा कि उपकरणों को बैटरी पैक के अंदर एक चिंगारी उत्पन्न करने के लिए सेट किया गया था, जो विस्फोट करने वाली सामग्री को जलाने के लिए पर्याप्त था, और शीट को विस्फोट करने के लिए ट्रिगर करता था। क्योंरकि विस्फोटक और उसके कवर ने लगभग एक तिहाई हिस्सा ले लिया था, लिहाजा बैटरी पैक में 35 ग्राम वजन के अनुरूप शक्ति का एक अंश था। दरअसल, पेजर बनाने वाले एजेंटों ने एक ऐसी बैटरी डिजाइन की थी, जिसमें प्लास्टिक विस्फोटक का एक छोटा लेकिन शक्तिशाली चार्ज और एक नया डेटोनेटर छिपा था, जिसे देख पाना भी संभव नहीं है। पेजर बम का गुप्त डिजाइन और बैटरी की सावधानीपूर्वक बनाई गई कवर स्टोरी, दोनों के बारे में विस्तानर में बताया गया। ये पूरा ऑपरेशन एक दो दिन या महीने में नहीं, बल्कि सालों की मेहनत के बाद पूरा हुआ। छह ग्राम सफेद पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट प्लास्टिक विस्फोटक का इसमें इस्ते माल किया गया। उसके साथ एक पतली स्वेइट्रयर शीट का इस्तेंमाल किया गया। दोनों की कोशिकाओं को आपस में निचोड़ा गया। बताया गया कि बैटरी कोशिकाओं के बीच बाकी स्थान अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ की एक पट्टी द्वारा कब्जा कर लिया गया था, जिसने डेटोनेटर के रूप में काम किया। इस पूरे प्रोसेस की तस्वी र भी दिखाई गई, जिससे पता चलता है कि इस तीन-परत वाले सैंडविच को एक काले प्लास्टिक की स्लीाव में डाल दिया गया था और एक धातु के कवर में वो लगभग एक माचिस के आकार का था। दो बम विशेषज्ञों ने बताया कि असेंबली असामान्य थी क्योंकि यह एक स्टैं डर्ड छोटे डेटोनेटर या यूं कहें कि आमतौर पर दिखने वाले मेटल के सिलेंडर पर निर्भर नहीं था।  

ओरछा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होगा, राम राजा की नगरी को मिलेगी ऐतिहासिक मान्यता

ओरछा मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में भगवान रामराजा सरकार की नगरी ओरछा (Orchha) को अब प्रदेश की चौथी वर्ल्ड हेरिटेज साइट (World Heritage) बनने का दर्जा मिलने जा रहा है. इसके लिए डोजियर (कम्पाइल्ड डॉक्यूमेंट्स) को यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने मंजूरी दे दी है. इसको लेकर ओरछा में खुशी का माहौल है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे ओरछा को नए आयाम मिलेंगे, जिससे यहां के रोजगार में बढ़ोतरी होगी. अभी तक ओरछा यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (वर्ल्ड हेरिटेज साइट की टेम्पररी लिस्ट) में शामिल है. परमानेंट लिस्ट में शामिल करने के लिए डोजियर और डॉक्यूमेंटेशन का काम पिछले साल पूरा किया गया था. डोजियर को केंद्र सरकार ने यूनेस्को की विश्व धरोहर कमेटी को सौंपा है. साल 2027 और 2028 के लिए केंद्र सरकार ने ओरछा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करने के लिए रिकमेंडेशन दिया है. हर साल केंद्र सरकार देश की एक धरोहर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नॉमिनेट कराने के लिए यूनेस्को को रिकमेंडेशन देती है. यूनेस्को ऑफिस पेरिस में भारतीय राजदूत विशाल वी शर्मा ने यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र के निदेशक लाजारे एलौंडो असोमो को यह डोजियर सौंपा. यूनेस्को की आधिकारिक घोषणा के बाद ओरछा देश की ऐसी एकमात्र विश्व धरोहर स्थली होगी, जो राज्य संरक्षित है. पांच साल की मेहनत के बाद मिली सफलता मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने ओरछा और भेड़ाघाट को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल कराने के लिए साल 2019 और 2021 में प्रस्ताव तैयार कराया था. इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने योग्य मानते हुए यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को फॉरवर्ड किया और फिर टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करने की घोषणा की गई थी. घोषणा के बाद टूरिज्म बोर्ड ने विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से ओरछा, मांडू, भेड़ाघाट के डोजियर तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजा. वहीं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने प्रारंभिक निरीक्षण कर ओरछा के डोजियर को रिकमेंड कर यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को सौंपा. रामराजा मंदिर भारत का  ऐसा मंदिर जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है. यह विश्व का एक मात्र स्थान जहां भगवान को सरकार की ओर से शस्त्र सलामी दी जाती है. यहां भगवान को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भी सलामी दी जाती है. ईश्वरीय सत्ता का अनूठा उदाहरण जहां भगवान राम के लिये करोड़ों रुपये की लागत से भव्य मंदिर बनाया गया, लेकिन भगवान उस मंदिर में विराजमान न होकर महल में विराजे हैं. जानकार बताते हैं कि यह एक मात्र स्थान है जहां रामराजा राजकाज निपटाने और जनता को दर्शन देने के लिये गर्भगृह से बाहर आते हैं. जबकि हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा की गई मूर्ति को हटाया नहीं जाता है. बुंदेला स्थापत्य शैली ओरछा का स्थापत्य बुंदेला शासकों द्वारा विकसित किया गया था, जो अद्वितीय स्थापत्य शैली का प्रतीक है, जिसमें महलों, मंदिरों, और किलों का समावेश है. जहांगीर महल ओरछा का प्रसिद्ध मुगल और राजपूत स्थापत्य कला का अनूठा संगम है. इस महल को मुगल सम्राट जहांगीर के स्वागत के लिए बनवाया गया था. ओरछा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व यह चतुर्भुज मंदिर विशाल और भव्य मंदिर अनूठी वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है. ओरछा का किला परिसर बुंदेलखंड क्षेत्र की शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रतीक है, जिसमें महल, दरबार हॉल और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं. ओरछा बेतवा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करता है और इसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा के लिए आकर्षक बनाता है. राजशाही छतरियां बेतवा नदी के किनारे स्थित बुंदेला राजाओं की स्मृति में बनवाई गई और शाही वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण हैं. अमर महल और लक्ष्मी नारायण मंदिर इन मंदिरों में की गई भित्ति चित्रकारी और वास्तुकला बुंदेला शासकों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक योगदान को दर्शाती है. यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से ओरछा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल के रूप में मान्यता मिलेगी. नामांकन के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. पर्यटन के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने पर ओरछा को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से संरक्षण और विकास के लिए सहयोग मिल सकता है. स्थानीय शिल्प, हस्तकला और अन्य सांस्कृतिक उत्पादों का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने से ओरछा पर शिक्षा, शोध और अध्ययन के नए अवसर खुलेंगे, जिससे इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित होगा. यूनेस्को की मान्यता से ओरछा में स्थायी और पर्यावरण संवेदनशील पर्यटन के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लंबे समय तक पर्यटन की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी.

रावघाट संघर्ष समिति ने ट्रकों को बंद कर ट्रेन शुरू करने की मांग की

रायपुर  रावघाट खदान से चलने वाले ट्रकों को बंद कर ट्रेन शुरू करने रावघाट संघर्ष समिति ने मांग की है. समिति पदाधिकारियों ने बताया कि ट्रकों के बेलगाम बेतरतीब परिचालन की वजह से क्षेत्र के 16 बच्चों की जान जा चुकी है. समिति ने इसके साथ अच्छी सड़क बनाने की भी मांग की है. रावघाट संघर्ष समिति के गीत ने रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि रावघाट का खदान नारायणपुर और कांकेर बोर्डर में स्थित है. जब खदान का काम शुरू हुआ तब कहा गया था कि काम ट्रेन से होगा. लेकिन बाद में कहा गया कि ट्रेन परिचालन शुरू नहीं हुआ है, जिससे ट्रक से काम किया जा रहा है. ट्रकों के चलने से प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ दुर्घटना में भी इजाफा हुआ है. दंतेवाड़ा-कांकेर के सारे इलाकों की यही स्थिति है. रावघाट समिति और बचाओ अभियान के तहत एक याचिका दायर की गई थी, उसमें महत्वपूर्व ऑर्डर है. रात-दिन बेहताशा चल रही ट्रकों से फैल रहे प्रदूषण पर महत्वपूर्व डायरेक्शन है. एक साल में कांकेर के अंदर में 16 बच्चों की जान गई है. ट्रेन के चलने से प्रदूषण कम होगा. समिति के पदाधिकारी ने कहा कि रावघाट खदान चालू होने के पहले क्षेत्र को व्यवस्थित करे. रावघाट से अंतागढ़ की दूरी मात्र 23 किलोमीटर है, वहां से उसे छोड़ रहे हैं. वहां की सड़क जर्जर है. रावघाट को खोलने के पहले उसे व्यवस्थित करे. उसे बनाए. हमने पहले भी कहा था जब तक रावघाट से ट्रेन का परिचालन शुरू नहीं होता, तब तक घाट शुरू नहीं करे. रावघाट क्षेत्र में एक्सीडेंट बहुत ही रहे हैं.

महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक घराने में आपसी कलह थोड़ी कम हो सकती, राज के बेटे के लिए उद्धव करने जा रहे बड़ी पहल

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। इस बीच महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक घराने में आपसी कलह थोड़ी कम हो सकती है। खबर है कि उद्धव ठाकरे इसकी पहल करने जा रहे हैं और वह चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ रिश्ते सुधार सकते हैं। इसके तहत वह राज के बेटे अमित ठाकरे के खिलाफ कैंडिडेट नहीं उतारेंगे। ऐसा हुआ तो ठाकरे परिवार में करीब डेढ़ दशक से छिड़ा गृह युद्ध थोड़ा धीमा पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार अमित ठाकरे माहिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वह महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष हैं। अमित ठाकरे ने बीते दिनों महाराष्ट्र के कई इलाकों का दौरा किया था और पार्टी के संगठन को खड़ा करने का प्रयास किया है। वह चुनाव में भी उतरने जा रहे हैं और उद्धव ठाकरे की शिवसेना उनके खिलाफ कैंडिडेट न उतारने की तैयारी में है। मनसे के नेताओं ने अमित ठाकरे को उतारने की मांग की है और अब आखिरी फैसला राज को ही लेना है। गुरुवार रात को इस संबंध में लंबी मीटिंग हुई। वहीं चर्चा है कि यदि अमित ठाकरे को टिकट मिला तो फिर उद्धव सेना उनके सामने कैंडिडेट नहीं देगी। इसकी वजह यह है कि जब वरली सीट से आदित्य ठाकरे 2019 में वरली सीट से उतरे थे तो उनके खिलाफ मनसे ने भी कैंडिडेट नहीं दिया था। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अब उसके बदले में अमित के लिए भी ऐसा ही करने वाले हैं। इस तरह उनकी कोशिश है कि परिवार में छिड़े संघर्ष को कम किया जा सके। इससे काडर के बीच अच्छा संदेश जाएगा। खासतौर पर ऐसे वक्त में जब पार्टी विभाजित हो चुकी है और एक बड़ा खेमा एकनाथ शिंदे के साथ अलग पार्टी के तौर पर सत्ता में है। उद्धव सेना के एक नेता ने कहा कि जब आदित्य ने वरली से चुनाव लड़ा था तो राज काका ने भी कैंडिडेट नहीं दिया था। अब ऐसा ही उद्धव काका करेंगे। दरअसल 2019 के चुनाव में राज ठाकरे ने कहा कि यदि हमारे बच्चे चुनाव लड़ना चाहते हैं तो फिर उन्हें हमें आगे बढ़ने देना चाहिए। यदि आदित्य चुनाव लड़ना चाहते हैं तो फिर इसमें गलत क्या है। शिवसेना कार्यकर्ताओं का कहना है कि उद्धव ठाकरे इसके जरिए इमोशनल रणनीति बना रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे फैमिली की एकता का संदेश जाएगा और कार्यकर्ता एकजुट होंगे। खासतौर पर मुंबई की सीटों पर उद्धव सेना को इससे फायदे की उम्मीद है। यही नहीं चुनाव बाद जरूरत हुई तो मनसे के विधायक साथ भी आ सकते हैं।

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