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जैविक खेती के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नायक राहुल कुमार वसूले, आज एक प्रगतिशील कृषक हैं

भोपाल छिंदवाड़ा जिले के खजरी गांव के राहुल कुमार वसूले आज एक प्रगतिशील कृषक हैं। इसके साथ-साथ वे जैविक खेती के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नायक भी हैं। कभी 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी करने वाले राहुल ने इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद पावर प्लांट में कार्य किया। लेकिन परिवार के स्वास्थ्य पर रसायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जैविक व प्राकृतिक खेती की राह चुनी। बी.टेक और एम.बी.ए. की शिक्षा लेने के बाद राहुल ने लगभग 15 वर्षों तक पॉवर प्लांट में कार्य किया, लेकिन अपने पिता और पुत्र को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में खोने के बाद उन्होंने महसूस किया कि इन समस्याओं की मूल जड़ रासायनिक खेती से पैदा हुआ अनाज और सब्जियां हैं। इस गहरी सोच के बाद उन्होंने वर्ष 2018 में अपनी नौकरी छोड़कर जैविक खेती करने का फैसला किया। जैविक खेती को समझने और इसे प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए राहुल ने राज्य सरकार की मदद से देश के विभिन्न संस्थानों और वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, केंचुआ खाद और नीमास्त्र जैसे जैविक उत्पाद तैयार करना सीखा। साथ ही इज़राइल की तकनीक से संरक्षित खेती और मशरूम उत्पादन जैसे आधुनिक तरीके भी अपनाये। राहुल की प्रगतिशीलता से उन्हें 1 से 3 दिसंबर 2024 तक पूसा, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें ‘मिलेनियर फॉर्मर ऑफ इंडिया 2024’ जैसे प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 2022 में आगरा में उन्हें जैविक इंडिया अवार्ड मिला। वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गौ आधारित जैविक कृषि अवार्ड में भी राहुल को सम्मानित किया गया। जैविक खेती का मॉडल राहुल के पास 10 एकड़ भूमि है, जहां वे गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, चना, मूंग, और सब्जियों की खेती करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खाद और जैविक तरीकों का उपयोग कर अपनी उपज की गुणवत्ता को बेहतर बनाया। इसके अलावा वे दुग्ध और मशरूम उत्पादन भी कर रहे हैं। राहुल की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है “रसायनमुक्त नवरत्न आटा,” जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, काला गेहूं और अन्य अनाज भी शामिल हैं। यह आटा उनके जैविक प्र-संस्करण यूनिट में तैयार होता है, जो ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस यूनिट से क्षेत्र के 50 से अधिक जरूरतमंद लोगों को रोजगार भी मिला है। राहुल पहले 15 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी कर रहे थे, अब खेती करने के बाद उनका का वार्षिक टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। उनके उत्पाद गुरुग्राम, नोएडा, पुणे, मुंबई जैसे शहरों तक भेजे जा रहे हैं। राहुल ने “श्रीराम जैविक कृषक समूह” की स्थापना की, जिससे 600 से अधिक किसान जुड़े हैं। वे सभी किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हैं और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाते हैं। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी रसायनमुक्त खेती की ओर मोड़ दिया है। अपनी सफलता से प्रफुल्लित होकर राहुल कहते हैं कि सही सोच और मेहनत से हम न केवल अपनी, बल्कि समाज की दिशा भी बदल सकते हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहते हैं कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की वजह से ही वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।  

अब लंबी और खुली सीमा के कारण भारतीय पहले कनाडा जाते हैं और वहां से यूएस में एंट्री करते हैं

वॉशिंगटन  भारतीय बड़ी संख्या में ‘अमेरिकन ड्रीम’ के लिए अपना सब कुछ जोखिम में डाल रहे हैं। अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (USCBP) के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका में अवैध रूप से भारतीयों के जाने में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। अकेले इस साल कनाडाई सीमा पर अवैध रूप से प्रवेश करते हुए पकड़े गए लोगों में 22 फीसदी भारतीय थे। आइए समझें कि भारतीयों की इतनी बढ़ती संख्या के पीछे क्या कारण है? USCBP के डेटा का वित्तीय वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। इसका डेटा कनाडाई सीमा के जरिए अवैध रूप से अमेरिका में घुसते भारतीय अमेरिकियों की बढ़ती संख्या दिखाता है। 2022 में अवैध क्रॉसिंग की कोशिश कर रहे 109,535 लोगों को पकड़ा गया था। इसमें भारतीयों की संख्या 16 फीसदी थी। 2023 में इसमें वृद्धि हुई और 189,402 लोगों में से 30,010 भारतीय पकड़े गए। इस साल आंकड़ों में फिर वृद्धि हुई है। 42764 भारतीयों को अवैध रूप से कनाडा से अमेरिका में घुसते पकड़ा गया। भारतीयों का नंबर बढ़ा BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक निस्कैनन सेंटर के इमीग्रेशन एनालिस्ट गिल गुएरा और स्नेहा पुरी ने कहा कि ये आंकड़े हालांकि लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई प्रवासियों की तुलना में कम हैं। लेकिन पिछले चार वर्षों में भारतीय पश्चिम गोलार्ध के बाहर अमेरिकी सीमा पर आने वाले प्रवासियों का सबसे बड़ा समूह बन गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि अभी तक ज्यादातर लोग मैक्सिको बॉर्डर से अमेरिका में घुसते हैं, तो आखिर कनाडा पहली पसंद क्यों बन गया। आखिर कनाडा क्यों? निस्कैनन सेंटर के मुताबिक कनाडा से अवैध एंट्री बढ़ने का कारण कनाडा की अधिक सुलभ वीजा प्रक्रिया है। कनाडा भारतीयों के लिए अधिक सुलभ एंट्री पॉइंट बनता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कनाडा का वीजा पाने के लिए औसत 76 दिन लगते हैं। जबकि अमेरिकी वीजा के लिए एक साल से ज्यादा का समय लग जाता है। इसके अलावा मैक्सिको-अमेरिका बॉर्डर की तुलना में यूएस-कनाडा बॉर्डर ज्यादा लंबा और कम संरक्षित है। आने वाले ट्रंप के कार्यकाल में यूस-कनाडा बॉर्डर पर भी सख्ती देखी जा सकती है।

इंदौर में मरीजों को कम रेट पर मिलेगी चेकअप की सुविधा, मरीजों की रिपोर्ट आने के बाद वह इन डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे

 इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और नवाचार करने जा रहा है। चार लाख लोगों का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप करने के बाद अब हेल्थ ऑफ इंदौर अभियान के तहत प्रिवेंटिव हेल्थ केयर सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए एक संस्था ने साउथ तुकोगंज क्षेत्र में करोड़ों रुपये की 30 हजार वर्ग फीट जमीन दान की है। इस केंद्र की विशेषता यह है कि यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से मरीजों की जांच हो सकेगी, वहीं जांच के बाद ही रियल टाइम रिपोर्ट भी मिल सकेगी। आईआईटी सहायता लेंगे आधुनिक मशीनों से सिर्फ दो घंटे में ही मरीज का बॉडी चेकअप हो सकेगा और उसे रिपोर्ट भी मिल जाएगी। इसके लिए आईआईटी की सहायता ली जाएगी। दावा किया जा रहा है कि यह देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जो संस्था के माध्यम से संचालित होगा। न्यूनतम दर पर मिल सकेगी सुविधा यहां जांच की सुविधा लोगों को न्यूनतम दर में मिल सकेगी। इसके लिए हस्तीमल सुंदरबाई पारमार्थिक ट्रस्ट के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी के माध्यम से पिछले दिनों शहर आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उनसे भूमिपूजन में शामिल होने का आग्रह भी किया। चार लाख लोगों की जांच में आए चौंकाने वाले आंकड़े बता दें, हेल्थ ऑफ इंदौर के तहत शहर में सांसद सेवा संकल्प, रेड क्रास सोसायटी और सेंट्रल लैब द्वारा की गई चार लाख लोगों की जांच में चौंकाने वाले आकड़े सामने आए थे, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में कई तरह की बीमारियां पाई गई थीं। इस अत्याधुनिक सेंटर में खून की सामान्य जांच से लेकर इको कार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, कैंसर स्क्रीनिंग और जीनोमिक टेस्टिंग तक हो सकेगी। जांच के साथ फालोअप पर भी देंगे ध्यान निजी लैब की संचालक डॉ. विनीता कोठारी ने बताया कि इस सेंटर में जांच में किसी भी व्यक्ति में कोई बीमारी सामने आती है तो उसके फालोअप का भी ध्यान रखा जाएगा। हर माह मरीजों से संपर्क कर यह देखा जाएगा कि बीमारी में कितना सुधार हुआ है, क्योंकि बोहरा समाज ने पिछले 10 वर्षो में अपने स्वास्थ्य में काफी सुधार किया है।

दक्षिण कोरिया की आबादी जिस दर से घट रही, एक समय ऐसा आएगा जब देश के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा

सियोल  दुनिया में अपने तेज आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण के लिए पहचान बनाने वाला दक्षिण कोरिया इस समय एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। यह संकट इतना गंभीर है और ऐसे ही जारी रहा तो इस सदी के अंत तक इस देश की आबादी वर्तमान से घटकर एक तिहाई रह जाएगी। पहले से ही दुनिया में सबसे कम चल रह देश की प्रजनन दर में और गिरावट आई है। दक्षिण कोरिया में देश के ‘विलुप्त होने’ को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। प्रजनन दर में 8 फीसदी की गिरावट दक्षिण कोरिया के सांख्यिकी विभाग ने पिछले सप्ताह जो आंकड़े जारी किए हैं, वो बताते हैं कि साल 2023 में देश की प्रजनन दर 2022 की तुलना में 8 प्रतिशत गिर गई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा तो साल 2100 तक दक्षिण कोरिया की 5.1 करोड़ की जनसंख्या तिहाई हो सकती है। साल 2023 में दक्षिण कोरिया में राष्ट्रीय जन्म दर प्रति महिला 0.72 बच्चों के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई और इस साल इसके और गिरकर 0.6 होने की उम्मीद है। इस स्थिति ने दक्षिण कोरिया में बड़ी चिंता पैदा कर दी है। द इंडेपेंडेंड की रिपोर्ट के अनुसार, जन्म दर में गिरावट को रोकने के लिए दक्षिण कोरिया की सरकार जन्म दर में गिरावट को रोकने के लिए माता-पिता को प्रत्येक बच्चे के जन्म पर 10 करोड़ वॉन (करीब 59 लाख रुपये) नकद देने पर विचार कर रही है। जन्मदर बढ़ाने के लिए 22 ट्रिलियन वॉन होंगे खर्च इस योजना पर सालाना 22 ट्रिलियन वॉन (लगभग 1317 अरब भारतीय रुपये) खर्च होने की उम्मीद है। योजना को लागू करने के पहले सरकार राष्ट्रीय सर्वेक्षण कर रही है। 17 अप्रैल को शुरू हुए इस सर्वेक्षण में चार मुख्य प्रश्न पूछे गए हैं, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या लोग इस पहल पर सालाना 22 ट्रिलियन वॉन खर्च करने का समर्थन करते हैं। यह प्रस्तावित निधि कम जन्म दर को संबोधित करने के लिए समर्पित राष्ट्रीय बजट का लगभग आधा हिस्सा होगी, जो लगभग 48 ट्रिलियन वॉन है। दक्षिण कोरिया ने जन्म दर को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं, जैसे कि बच्चों की देखभाल के लिए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करना, कर लाभ देना और यहां तक कि यह सुझाव देना कि 30 वर्ष की आयु तक तीन या अधिक बच्चे वाले पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट दी सकती है। हालांकि, इन प्रयासों का अब तक सीमित प्रभाव पड़ा है।

साल 2024 में अबतक मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे

उज्जैन मप्र के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक और पौराणिक महत्व की दुनियाभर में पहचान है। इसीलिए पर्यटक बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश पहुंच रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक रिकॉर्ड 6.57 करोड़ पर्यटक उज्जैन आए। मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे। सबसे खास बात यह है कि देसी पर्यटकों के टॉप-5 डेस्टिनेशन में उज्जैन, ओंकारेश्वर, इंदौर, भोपाल और मैहर शामिल हैं। इस वर्ष 10 लाख 85 हजार विदेशी पर्यटक भी मप्र पहुंचे। विदेशियों सैलानियों में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल खास आकर्षण का केंद्र रहे। टॉप-5 डेस्टिनेशन में खजुराहो, बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और ओरछा हैं। ​देसी पर्यटकों की रुचि धार्मिक क्षेत्रों में अधिक है। ओंकारेश्वर में 21 लाख 29 हजार लोगों ने दर्शन किए। इसी तरह 97 लाख लोग मैहर पहुंचे। हालांकि, इस साल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले घटी है। साल 2023 में प्रदेश में 11.21 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। वहीं, साल 2022 में यह आंकड़ा 3.41 करोड़ का था। पिछले दो साल की ही बात करें तो प्रदेश में 21.87 करोड़ पर्यटक पहुंचे। यह दो साल में पर्यटकों की संख्या का रिकॉर्ड है। धार्मिक स्थलों की ओर रुझान ज्यादा, महाकाल लोक बनने के बाद बदली तस्वीर महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। अभी फेज-2 के काम चल रहे हैं। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ ने बताया कि मंदिर में कम समय में दर्शन होते। भस्मआरती में आरएफ बैंड सिस्टम शुरू किया है। ​इससे अवैध रूप से भस्मआरती में शामिल होने वालों पर अंकुश लगा है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दो भक्त निवास बन चुके हैं। तीसरा अभी बन रहा है। महाकाल लोक बनने के बाद सेलीब्रिटी भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले पाँच सालों में दोगुनी हो गई है। कोरोना काल में पर्यटन में तेजी से गिरावट हुई थी, लेकिन वर्ष 2023 में एक बार फिर जबर्दस्त तेजी आई है और 5 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटकों के पहुँचने का रिकार्ड उज्जैन ने बनाया है। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक उज्जैन में 5 करोड़ 28 लाख 41 हजार 802 पर्यटक पहुँचे। इसी के साथ मध्य प्रदेश के टॉप-10 पर्यटन केंद्रों में उज्जैन सबसे आगे रहा हैं। प्रदेश के टॉप 10 शहरों की सूची में पहले नंबर पर उज्जैन और दूसरे नंबर पर मैहर रहा, जबकि भोपाल सबसे आखिरी पायदान पर है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में बाबा महाकाल के दर्शन और महाकाल लोक के वैभव को देखने पहुँच रहे हैं। यहाँ महाराष्ट्र के शिरडी से तीन गुना, राजस्थान के खाटू श्याम से चार गुना ज्यादा श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। मंदिर समिति के मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है कि गर्मी की शुरुआत के एक माह में 22 अप्रैल से 22 मई में अभी तक करीब 45 लाख से अधिक लोग उज्जैन पहुँच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा श्रद्धालु दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए हैं।

भारतीय रेलवे का बड़ा प्‍लान, ट्रेनों में बढ़ेंगे 1000 कोच, यात्र‍ियों की होगी बल्‍ले-बल्‍ले

नईदिल्ली सरकार ने कहा है कि रेल सुविधा को सबके लिए उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके लिए जनरल बोगियों को बढ़ाया जा रहा है और इसके तहत इस साल के अंत तक 1000 अतिरिक्त कोच रेलों में लगाये जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी देते हुए बताया कि कि देश के हर क्षेत्र में लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिले, इसलिए सरकार जनरल डिब्बों को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है और इसका मकसद ऐसा कर हर नागरिक तक बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराना है। वैष्णव ने कहा कि केरल में रेल नेटवर्क को विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिए निधि आवंटित की गई है। उन्होंने स्थानीय सांसदों से राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध कराने में मदद करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पैसेंजर ट्रेन में यात्रा के लिए बड़ी सब्सिडी दे रही है और इस क्रम में 56993 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी पैसेंजर ट्रेन में दी गयी है। सरकार का फोकस जनरल कोच बढ़ाने पर है और दिसंबर के आखिर तक 1000 अतिरिक्त जनरल कोच बढ़ाने की योजना है। 100 रुपये के टिकट पर खुद कितने वसूलता है रेलवे, सरकार ने दिया पूरा हिसाब पत्रकारों को पहले मिलने वाली सब्सिडी की बहाली की संभावना के बारे में पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा, ‘भारत सरकार की ओर से यात्रियों को कुल सब्सिडी 56,993 करोड़ रुपये की दी जाती है। हर 100 रुपये की यात्रा सेवा की कीमत 54 रुपये ली जाती है। सभी श्रेणियों के यात्रियों को 46 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है।’ वैष्णव ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह भी कहा कि जिस तरह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में सड़कों से पूरे देश को जोड़ा गया था, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के छोटे और मझोले रेलवे स्टेशनों का विकास किया जा रहा है। जोन के अंदर और बाहर आने-जाने में सुव‍िधा होगी रेलवे की तरफ से उठाए गए कदम से जनरल कोच में सफर करने वाले करीब एक लाख यात्र‍ियों को राहत म‍िलेगी. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) की तरफ से इसमें अहम भूमिका निभाई जा रही है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के CPRO कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया क‍ि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने पहले ही 36 ट्रेनों / 69 रैक को 276 जनरल कोच के साथ बढ़ा दिया है. इससे यात्री अपने जोन के अंदर और बाहर ज्‍यादा सुव‍िधाजनक तरीके से जा सकेंगे. करीब 370 ट्रेनों में 600 जनरल कोच जोड़े गए उन्होंने यह भी बताया क‍ि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे दिसंबर 2024 के अंत तक 16 जनरल कोच के साथ तीन अतिरिक्त ट्रेनों को बढ़ाने का प्‍लान कर रही है. ये प्रयास NFR की यात्री सेवाओं में सुधार और सभी वर्गों के लिए ट्रेन सफर को ज्‍यादा आरामदायक बनाने के मकसद से क‍िया जा रहा है. उन्‍होंने बताया क‍ि रेल यात्रा में लोगों की बढ़ती रुच‍ि को देखते हुए रेलवे अपने बेड़े का विस्तार करने के साथ ही मौजूदा ट्रेनों में भी जनरल कोच को जोड़ने पर काम कर रहा है. कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया क‍ि जुलाई से अक्टूबर के बीच करीब 370 ट्रेनों में 600 जनरल कोच जोड़े गए. 10,000 से ज्‍यादा नॉन-एसी कोच शाम‍िल करने का प्‍लान इसके अलावा अगले दो साल में 10,000 से ज्‍यादा नॉन-एसी कोच शाम‍िल क‍िये जाने का प्‍लान है. इसमें 6,000 से ज्‍यादा जनरल कोच और स्लीपर-क्लास कोच शामिल हैं. रेलवे की तरफ से उठाए जाने वाले कदम से रोजाना करीब 8 लाख यात्रियों को सहूल‍ियत म‍िलेगी. रेलवे की तरफ से तैयार क‍िये जा रहे एलएचबी कोच (LHB) काफी आरामदायक और सुरक्ष‍ित हैं. उन्होंने बताया क‍ि LHB कोच हल्के और मजबूत होते हैं. दुर्घटना होने पर भी इनमें कम नुकसान होता है.

5 बार ट्रैफिक रूल तोड़ने पर जुर्माना न भरने वाले वाहन चालकों की मोटर साइकिलें भी जब्त की जा रही, पुलिस ने भेजे समन

सागर अगर आप ने शहर में यातायात नियम तोड़ा है और उसका जुर्माना नहीं भरा तो आप की गाड़ी को पुलिस जब्त करेगी, क्योंकि पांच से अधिक बार यातायात नियम को तोड़ने वाले वाहनों चालकों की कुंडली बनकर तैयार हो गई है। पुलिस इनके पते में समन भिजवा रही है। जुर्माना न भरने वाले वाहन चालकों की मोटर साइकिलें भी जब्त की जा रही हैं। सागर में ऐसे 1 हजार से अधिक वाहन चालक ऐसे हैं जिन्होंने पांच से अधिक बार ट्रैफिक नियम को तोड़ा है और बगैर जुर्माना भरे घूम रहे हैं। एक बाइक चालक महाशय के तो 23 चालान तक बन चुके हैं।   नियम तोड़ने वालों के ई-चालान दरअसल शहर के जगह-जगह लगे स्मार्ट सिटी के कैमरों में यातयात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के ई-चालान बनाए जाते हैं। शहर के कुल डेढ़ दर्जन स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से रेड लाइट जंप, तीन सवारी और हेलमेट न पहलकर वाहन चलाने वालों के चालान काटे जाते हैं। हर साल कैमरों की मदद से बनने वाले ई-चालान की बात करें तो इनकी संख्या करीब 50 हजार है, यानी हर साल सागर शहर में 50 हजार से अधिक लोग यातायात नियम तोड़ते हैं। पिछले साल से सागर में लागू हुए एनआईसी के ई-चालान सिस्टम के माध्यम से न केवल कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों का चालान बनाया जाता है, कई विभागों से भी जुड़ा ऑनलाइन सिस्टम आल इंडिया स्तर पर बनाए गए नए साफ्टवेयर पर उक्त वाहन चालक का चालान अपलोड भी हो जाता है। इस साफ्टवेयर में आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस ही बल्कि न्यायालय तक जुड़ा हुआ है। हालांकि चालान बनने की सूचना चालक के वाहन रजिस्ट्रेशन पर दर्ज उसके मोबाइल नंबर पर भी भेजी जाती है। लेकिन वाहन चालक चालान नहीं भरते।   शहर में करीब 50 हजार चालान लंबित यही करते करते शहर में करीब 50 हजार ई-चालान की राशि वाहन चालकों ने जमा नहीं की है। इसी को देखते हुए पिछले दिनों न्यायालय और जिला दंडाधिकारी द्वारा यातायात पुलिस को ई-चालान की जुर्माना राशि वसूली और न भरने वाले चालकों के वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए गए। लंबित चालान पर कार्रवाई यातायात पुलिस द्वारा सबसे पहले पांच या उससे अधिक लंबित चालान वाले वाहन चालकों पर शिकंजा कसाने की योजना बनाई है। करीब एक हजार ऐसे वाहन चालक हैं, जिन्होंने पांच या उससे अधिक बार यातायात नियमों को तोड़ा और जुर्माना नहीं भरा। इसके लिए यातायात पुलिस द्वारा समस्त पुलिस कर्मियों को उनके बीट के अनुसार ऐसे वाहन चालकों के नाम समन जारी करवाकर उसे हाथों-हाथ तामील कराया जा रहा है। साथ ही उनके वाहनों की जब्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है। साफ्टवेयर में सारी जानकारी अपलोड एनआईसी के नए साफ्टवेयर में चालानी कार्रवाई के दौरान जैसे ही यातायात पुलिस वाहन को पकड़कर उसका आनलाइन चालान करती है, वैसै ही मशीन में गाड़ी नंबर डालते ही इसके पहले हुए उसके सारे चालान और जुर्माना की जानकारी सामने आ जाएगी। रेड लाइन जंप के लिए 500 रुपये, तीन सवारी बैठाकर मोटर साइकिल चलाने वाले पर 500 रुपये और हेलमेट न पहन कर वाहन चलाने वाले चालकों पर 300 रुपये जुर्माना की कार्रवाई की जाती है। वाहन जब्त होंगे पांच से अधिक बार यातायात नियमों को तोड़कर उसका जुर्माना न भरने वाले वाहन चालकों के वाहन जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे वाहन चालकों के घर पर भी जाकर पुलिस उन्हें समन तामील करवा रही है।मयंक चौहान, डीएसपी, ट्रैफिक फोटो कैप्शन: सिविल लाइन चौराहे पर रेड सिग्नल के बाद खड़े वाहन।

अब पुलिस थानों पर होगी जनसुनवाई, DGP कैलाश मकवाना ने दिए आदेश

Now public hearing will be held at police stations, DGP Kailash Makwana gave orders मध्य प्रदेश में अब पुलिस थानों पर ही लोगों की जनसुनवाई हो जाएगी. उन्हें पुलिस अधीक्षक के दफ्तर तक नहीं जाना पड़ेगा. प्रदेश के नए डीजीपी कैलाश मकवाना ने यह निर्देश दिया है. उनका मानना है कि इससे लोगों को काफी सुविधा मिलेगी. इसके अलावा छोटी-छोटी शिकायतों का निराकरण पुलिस थाने पर ही हो जाएगा. मध्य प्रदेश के नए पुलिस मुखिया कैलाश मकवाना ने लोगों को सुविधा देने के उद्देश्य से बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा, अब लोगों को जन सुनवाई के लिए पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि पुलिस थाने में ही हर मंगलवार जनसुनवाई हो जाएगी. पुलिस अधिकारियों द्वारा शिकायतों का निराकरण किया जाएगा, यदि पुलिस थानों पर शिकायत का निराकरण नहीं होता तो फिर पीड़ित आगे शिकायत कर सकता है. अभी तक यहा होती थी जनसुनवाईअभी तक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जन सुनवाई का सिलसिला मंगलवार को चलता था. इसके अलावा डीआईजी और आईजी स्तर के अधिकारी भी जनसुनवाई करते थे. नए आदेश से काफी बदलाव आने की संभावना है. जनसुनवाई के नए आदेश के बाद अब पुलिस थानों पर अधिकारियों द्वारा शिकायतों का निराकरण करने की जिम्मेदारी रहेगी. इसके अलावा शिकायतकर्ता को न्याय मिलने में होने वाली देरी भी कम होगी. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि शिकायतों का पुलिस थाने पर जल्द ही निराकरण करने पर कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जाएगा. नई व्यवस्था को लेकर फिलहाल तारीख नहीं सामने आई है, लेकिन यह कहा जा रहा है कि अगले मंगलवार से ही नई व्यवस्था लागू हो सकती है.

कलेक्टर का बाप या सर्वर का सेवक: पटवारी की नई पहचान

Collector’s father or server’s servant: Patwari’s new identity कमलेश अहिरवार ( विशेष संवाददाता सहारा समाचार )भोपाल ! मध्य प्रदेश में राजस्व महाभियान 3.0 जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। योजना के 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सर्वर की लचर हालत ने पटवारी और किसान दोनों को असहाय बना दिया है। एक ओर किसान फॉर्मर आईडी और पीएम किसान जैसी योजनाओं के लिए पटवारी से उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर पटवारी सर्वर की कृपा पाने के लिए लोकसेवा केंद्र और CSC सेंटर के चक्कर काट रहा है। पटवारी की पहचान अब सरकारी कर्मचारी से ज्यादा सर्वर का सेवक बन गई है। फॉर्मर आईडी जैसे कार्यों के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। अगर किस्मत अच्छी हो, तो दिनभर में एक या दो आईडी बन जाएं, वरना पूरे दिन की मेहनत बेकार। छः महीने पहले शुरू हुई यह प्रक्रिया आज भी अधूरी है। किसान और पटवारी दोनों इस त्रासदी को नियति मानकर चल रहे हैं। हालत यह है कि किसान की झल्लाहट का पहला शिकार पटवारी ही बनता है। किसान जब अपनी फसल के काम छोड़कर पटवारी से बार-बार एक ही सवाल करता है—”मेरी आईडी क्यों नहीं बनी?”—तो पटवारी के पास जवाब में सिर्फ एक लाइन होती है, “सर्वर नहीं चल रहा।” लेकिन यह जवाब न किसान को संतुष्ट करता है और न ही अधिकारियों को। जब पटवारी अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास जाता है, तो उन्हें आश्वासन मिलता है कि सर्वर पर काम हो रहा है। लेकिन यह “काम हो रहा है” कब “काम हो गया” में बदलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं। दूसरी तरफ, मंचों पर अधिकारी और नेता सर्वर की असफलताओं का ठीकरा खुलेआम पटवारियों के सिर फोड़ते हैं। “कलेक्टर का बाप” जैसे तमगे देकर वे यह भूल जाते हैं कि पटवारी सिर्फ एक माध्यम है, जो सरकार और किसान के बीच पुल बनाने का काम करता है। योजनाओं की स्थिति और खराब हो जाती है, जब किसान का दो साल पुराना पंजीयन भी पूरा नहीं होता। सम्मान निधि योजना के तहत पैसा तो दूर, किसानों की पीएम किसान आईडी तक नहीं बन पाई। और इन सबका दोष, जैसा कि हमेशा होता है, पटवारी पर डाल दिया जाता है। पटवारी इस पूरे तंत्र को समझ चुका है और अब इसे अपनी नियति मानकर काम कर रहा है। चाय के कप और सर्वर के इंतजार के बीच, वह यह सोचता है कि उसकी मेहनत और धैर्य का अंत कब होगा। लेकिन सर्वर के इस शासन में, पटवारी और किसान की आवाज शायद ही किसी तक पहुंचे। पटवारी, जो कभी अपने अधिकारों और कर्तव्यों का राजा था, अब सर्वर का सेवक बनकर रह गया है।

बांग्लादेश में हिन्दू नरसंहार के विरोध में सकल हिन्दू समाज का उग्र विरोध प्रदर्शन ।

Fierce protest by the entire Hindu community against the Hindu genocide in Bangladesh. हरिप्रसाद गोहेआमला ! बांग्लादेशी सरकार के संरक्षण में कट्टरपंथी अतिवादियों समूहों के द्वारा बांग्लादेश मे करोड़ों हिन्दुओं समेत अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे जघन्य -अत्याचार, अमानवीय व्यवहार एवं बांग्लादेशी सरकार के आक्रोशित करने वाले रवैया के विरुद्ध सकल हिंदू समाज आमला के बैनर तले बुधवार को बड़ी संख्या में मातृ शक्ति समेत बड़ी संख्या में सर्व समाज के लोगों के द्वारा तीव्र विरोध प्रदर्शन किया गया । स्थानीय नगर पालिका स्कूल परिसर जनपद चौक पर सनातनी बंधुओ एवं मातृशक्तियों की उपस्थिति में नगर पालिका स्कूल परिसर जनपद चौक आमला में एकत्रीकरण के साथ मुख्य मार्ग से रैली के रूप में तहसील पहुंच कर बांग्लादेश में विधर्मीयो के द्वारा हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ कुकृत्यों एवं दुराचार व सनातन धार्मिक स्थलों पर आगजनी एवं तोड़फोड़ की नियोजित घटनाओं की पूरज़ोर तरीके से निंदा कर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन , स्थानीय प्रशासन आमला को सौप कर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की । व्यापारियों ने बंद रखे अपने प्रतिष्ठान , समाज के सभी वर्गों की रही भागीदारी सकल हिन्दू समाज के विरोध प्रदर्शन को आमला नगर के सभी व्यापारी संगठनों ने अपना समर्थन किया इस दौरान व्यापारीगणों ने अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे । विरोध प्रदर्शन एवं रैली में बड़ी संख्या में मातृ शक्ति, विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रमुख, समाज के सभी वर्गों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर बंगलादेश सरकार के संरक्षण में कट्टरपंथियों के द्वारा हिन्दू समुदाय के नरसंहार एवं अत्याचार का विरोध कर भारत सरकार से बांगलादेशी हिन्दुओं के सुरक्षा की मांग की गई।

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