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मुख्यमंत्री डॉ. यादव से परमवीर चक्र विजेता योगेन्द्र सिंह यादव ने भेंट की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज मंत्रालय में परमवीर चक्र विजेता, कारगिल युद्ध में टाइगर हिल के हीरो योगेन्द्र सिंह यादव ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगेन्द्र सिंह यादव को अंगवस्त्रम और सांची की प्रतिमा भेंट कर अभिनंदन किया।  

कूनो नेशनल पार्क में अब पर्यटकों को हो सकेंगे दीदार, बाड़े से आजाद हुए चीते, अग्नि और वायु को जंगल में छोड़ा

श्योपुर लंबे इंतजार के बाद कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में रखे गए चीतों में से दो चीते अग्नि और वायु को बुधवार को जंगल में छोड़ दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर विशेषज्ञों ने जंगल में उनेक विचरण, सुरक्षा, भोजन आदि को लेकर अंतिम चर्चा के बाद यह निर्णय लिया। बाड़े में कुल 12 चीते और 12 शावक हैं, जिसमें से एक मादा शावक मुखी पौने दो साल का होने के साथ पूर्ण वयस्क हो चुकी है। इसके साथ ही जल्दी ही जंगल में और चीते छोड़े जाने की संभावना बढ़ गई है। अगले दो-तीन दिन में दो और चीते छोड़े जा सकते हैं। सिंह परियोजना के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारोंद वन क्षेत्र में चीते छोड़े गए हैं। यह क्षेत्र अहेरा पर्यटन क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में पर्यटकों को सफारी के दौरान चीतों को देखने का अवसर मिल सकता है। पवन ने बार-बार लांघी कूनो की सीमाएं कूनो नेशनल पार्क में 17 सिंतबर 2022 को नामीबिया से लाए जाने के बाद पवन चीता को सबसे पहले 21 मार्च 2023 को जंगल में छोड़ा था। बार-बार कूनो की सीमा लांघकर कभी शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क तो कभी यूपी की सीमा तक जाने के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर वापस लाकर बाड़े में बंद करने पड़ा था। पिछले साल नौ चीतों को जंगल में छोड़ा अग्नि-वायु, गौरव-शौर्य, आशा, वीरा सहित कुल नौ चीतों को जंगल में छोड़ा जा चुका है। पिछले साल जुलाई और अगस्त में कुछ चीतों की मौत व संक्रमण के मामले सामने आने के बाद सभी चीतों को वापस बाड़े में बंद कर दिया था। बरसाती नाले में एक की डूबने से हुई थी मौत छह माह पहले पवन व वीरा चीता का जोड़ा जंगल में छोड़ा था। वीरा के मुरैना व ग्वालियर क्षेत्र तक आकर ग्रामीणों के पशुओं के शिकार करने के बाद वापस बाड़े में ले जाना पड़ा था। पवन की बरसाती नाले में डूबकर मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही सभी चीतों बाड़े में ही बंद थे। अग्नि और वायु उम्र में अधिक बड़े और मजबूत चीतों में से हैं, इसलिए पहले इन्हे छोड़ा है।

अब घर बैठे व्हाट्सएप के जरिए कर सकेंगे शिकायत, कलेक्टर ने जारी किया व्हाट्सएप नंबर

बालोद जनता की सहुलियत एवं किसी कारणों से जनदर्शन में नहीं पहुंच पाने वाले लोगों के लिए जिला ने वाट्सएप की सुविधा शुरू की है. अब लोग वाट्सएप के माध्यम से भी प्रशासन तक अपना सुझाव, शिकायत और प्रतिक्रिया भेज सकते हैं. इस नई व्यवस्था के तहत कोई भी जिले के नागरिक जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए व्हाट्सएप नंबर 9425242981 पर Hi या Hello लिखकर बातचीत की शुरूआत कर सकते हैं. बता दें कि पहली बार छत्तीसगढ़ के इस जिले में यह सुविधा शुरू की गई है. बालोद में इस नई व्यवस्था की शुरूआत से जिले के आम नागरिकों एवं आवेदकों को अपनी मांगों एवं समस्याओं के निराकरण के लिए प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली कलेक्टर जनदर्शन के अलावा कलेक्टर से मुलाकात करने के लिए संयुक्त जिला कार्यालय में आने की आवश्यकता नहीं होगी. कलेक्टर इन्द्रजीत सिंह चन्द्रवाल की विशेष पहल पर जिलेवासियों ने खुशी जताई है. बालोद जिला प्रशासन की इस नई व्यवस्था से लोगों के समय एवं श्रम की बचत होगी. इसके अलावा बार-बार शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या से निजात मिलेगी. कलेक्टर चन्द्रवाल ने मंगलवार को संयुक्त जिला कार्यालय के जनदर्शन कक्ष में उपस्थित आम नागरिकों को जिला प्रशासन की इस नई व्यवस्था की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जिले के आम नागरिकों को सुविधा प्रदान करने इसकी शुरूआत की गई है. नई व्यवस्था की शुरूआत हो जाने से अब आम नागरिकों एवं आवेदकों को अपनी मांगों एवं समस्याओं के निराकरण के लिए बार-बार कलेक्टोरेट आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस दौरान अपर कलेक्टर अजय किशोर लकरा, ईडीएम इन्द्रजीत सेन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

MP में टेंडर लेने की शर्तें होगी कठिन, 80 प्रतिशत से कम दर भरी तो देना होगी दो गुनी परफार्मेंस सिक्योरिटी की एफडी

Conditions for taking tender in MP will be difficult, if less than 80 percent rate is paid then double the performance security FD will have to be paid. भोपाल। अव्यावहारिक दरें डालकर टेंडर प्राप्त करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए 80 प्रतिशत से कम दरें डालने वाले निविदाकर्ताओ से अंतर की दोगुनी परफार्मेंस गारंटी ली जाएगी। इसके साथ ही बैंक गारंटी के स्थान पर फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट के माध्यम से परफार्मेंस सिक्योरिटी लिए जाने पर भी लोक निर्माण विभाग विचार कर रहा है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने प्रशासनिक अकादमी में निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भेज कर तीन अध्ययन दल से निविदा शर्तों का अध्ययन कराया गया। इन दलों से प्राप्त सुझावों को इस कार्यशाला में सम्मिलित करते हुए इन पर विस्तार से चर्चा की गई। अब इसी आधार पर निविदा शर्तों को ऐसा बनाया जाएगा कि सभी तरह के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी न हो। इससे निर्माण कार्यों को और अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ठेके लेने की प्रवृत्ति पर लगेगा अंकुश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित नई निविदा नीति से क्षमता से अधिक कार्यों के ठेके लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए बिड कैपेसिटी संबंधी शर्तों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। निविदाकर्ता के पास बैच मिक्स प्लांट, डब्लू एम एम मिक्स प्लांट एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता संबंधी शर्त जोड़ने का सुझाव मिला है। दस्तावेज में सुधारों की गुंजाइश उल्लेखनीय है कि सभी निर्माण विभागों के लिए एक मानक निविदा दस्तावेज वर्ष 2014 में तैयार किया गया था। कालांतर में हुए तकनीकी विकास और नियमों में परिवर्तन के कारण इस दस्तावेज में अनेक सुधारों की गुंजाइश है। इस दौरान अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता एमडी एमपीआरडीसी अविनाश लावनिया,एमडी एमपीबीडीसी डॉ पंकज जैन,ईएनसी पीडब्ल्यूडी केपीएस राणा, ईएनसी (भवन) एसआर बघेल एवं ईएनसी भवन विकास निगम अनिल श्रीवास्तव सहित विभाग के अन्य सभी मुख्य अभियंता, वरिष्ठ अधिकारी एवं इंजीनियर उपस्थित रहे। क्या-क्या हो सकते हैं बदलाव दो करोड़ से अधिक लागत वाली सभी निविदाओं में प्री क्वालिफिकेशन शर्तें लागू की जाएं पूर्व में यह सीमा पांच करोड़ थी।अनुमानित लागत के 20 प्रतिशत के बराबर के तीन कार्यों के अनुभव के स्थान पर 40 प्रतिशत के तीन कार्यों को रखा जाए।निविदाकर्ता के पास उपलब्ध मानव संसाधन और उपकरणों के लिए न्यूनतम शर्तें जोड़ी जाएं।दो करोड़ से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों के लिए निर्माण स्थल पर गुणवत्ता परीक्षण लेब की स्थापना अनिवार्य की जाए।गुणवत्ता नियंत्रण के लिए समय-समय पर किए जाने वाले परीक्षणों, डामर की गुणवत्ता आदि से संबंधित शर्तें भी जोड़ी जाए।

भारत का व्यापार प्रदर्शन पहली छमाही में मजबूत रहा, 576 अरब डॉलर हुआ: नीति आयोग

नई दिल्ली भारत का व्यापार प्रदर्शन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मजबूत रहा है और इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह जानकारी नीति आयोग द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का व्यापार 2024 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 5.45 प्रतिशत बढ़कर 576 अरब डॉलर हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापारिक आयात में लगातार वृद्धि देखी गई, वित्त वर्ष 2025 (चालू वित्त वर्ष) की पहली तिमाही में निर्यात 5.95 प्रतिशत बढ़कर 110 अरब डॉलर हो गया और आयात 8.40 प्रतिशत बढ़कर 173 अरब डॉलर हो गया, जिससे व्यापार असंतुलन बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में भारतीय लोहा और इस्पात निर्यात में भारी गिरावट (33 प्रतिशत) देखी गई, जिसका मुख्य कारण कमजोर घरेलू मांग और वैश्विक बाजारों में चीन के कारण इस्पात की अधिक आपूर्ति है। वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में भारत के निर्यात में उत्तरी अमेरिका का योगदान 21 प्रतिशत था, उसके बाद यूरोपीय संघ का योगदान 18.61 प्रतिशत था। आयात मुख्य रूप से पूर्वोत्तर एशिया, पश्चिम एशिया (जीसीसी) और आसियान से हुआ, जो कुल आयात का 51 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही के दौरान एफटीए साझेदारों देशों को निर्यात में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इन साझेदारों से आयात में 10.29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नीति आयोग के सीईओ, बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि प्रत्येक तिमाही में भारत की व्यापार स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करके, यह प्रकाशन साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण का समर्थन करेगा। सुब्रह्मण्यम ने कहा, “यह पहल भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के साथ जुड़ी हुई है, जिसका उद्देश्य विकसित भारत (भारत@2047) के लिए भारत की व्यापार क्षमता का लाभ उठाना और तेजी से बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण में सतत विकास सुनिश्चित करना है।”

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में विकास ने पकड़ी रफ्तार , जशपुर की भी बदल रही तस्वीर

जशपुर विष्णुदेव साय के मुख्यमंत्री बनते ही विकास ने जो रफ्तार पकड़ी है वह समय के साथ और भी तेज होती जा रही है. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकासकार्यों की स्वीकृति मिलने और उसे जमीनी स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया में तेजी आई है. प्रदेश के साथ ही जशपुर जिले में सड़क, पुल-पुलिया निर्माण, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने सहित अन्य कार्य प्रमुखता से किया जा रहा है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर शहरों को संवारने का काम में भी तेजी आई है. इसी के तहत कुनकुरी नगरीय क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए चौक-चौराहों को संवारने के साथ ही नगर के स्ट्रीट लाईट को भी बदला जा रहा है. मुख्यमंत्री साय के पहल पर कुनकुरी नगरीय इलाके में विद्युतिकरण, खिलाड़ियों को सुविधा प्रदान करने सहित अन्य कार्यों के लिए एक करोड़ 35 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है. रोशन होगा कुनकुरी शहर कुनकुरी नगरीय क्षेत्र जल्द ही रोशनी से जगमगाने वाला है. शहर में स्ट्रीट लाइट स्थापना के लिए 75 लाख रूपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है. इसी के तहत 16.59 लाख रूपए लागत के वार्ड क्रमांक 01 एवं 06 में टाकिज चौक से संदीप गुप्ता के घर तक बाहरी विद्युतिकरण (स्ट्रीट लाईट स्थापना) कार्य, 18.80 लाख रुपये लागत के वार्ड क्रमांक 11 में पौनी पसारी बाजार से गढ़ाकाटा तक बाहरी विद्युतिकरण (स्ट्रीट लाइट स्थापना) कार्य, 19.97 लाख रुपये लागत के वार्ड क्रमांक 04 आर्या होटल से मंगल भवन तक बाहरी विद्युतिकरण (स्ट्रीट लाइट स्थापना) कार्य और 19.69 लाख रुपये लागत के वार्ड क्रमांक 12 एवं 13 में जयस्तम्भ चौक से रेस्ट हॉउस तक बाहरी विद्युतिकरण (स्ट्रीट लाईट स्थापना) कार्य की स्वीकृति मिली है. खिलाड़ियों को मिलेगें खेल उपकरण, नालियों को भी ढका जाएगा मुख्यमंत्री के पहल पर कुनकुरी सहित जिले के युवाओं में छिपी हुई खेल प्रतिभा को निखारने के लिए स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के निर्माण की घोषणा और बजट आबंटन जारी हो चुका है. युवाओं के सेहत के लिए 81.73 लाख की लागत से अत्याधुनिक जीम निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है. इसी परिप्रेक्ष्य में वार्ड क्रमांक 07 एवं 06 में 02 सेट खेलकूद उपकरण प्रदाय एवं स्थापना के लिए 9.98 लाख रूपए की स्वीकृति मिली है. इसी तरह वार्ड क्रमांक 01 एवं 06 में 02 सेट ओपन जिम उपकरण प्रदाय एवं स्थापना के लिए 9.99 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है. इसके अलावा शहर में 19.10 लाख रुपये की लागत से वार्ड क्रमांक 01 से 15 वार्ड तक आरसीसी एवं एमएस नाली ढक्कन स्थापना कार्य कराया जाएगा. इसके साथ ही वार्ड क्रमांक 06 में रेमते रोड में रंगमंच में अतिरिक्त कार्य के लिए 1.98 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है.

महाकाल मंदिर के पुजारी को देवेंद्र फड़नवीस ने खुद भेजा महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण

उज्जैन महाराष्ट्र में कल शाम को 5 बजे नए मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा आज हो सकती है। इन सबके बीच भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस का नाम मुख्यमंत्री के लिए तय माना जा रहा है। देवेंद्र फड़नवीस ने महाकाल मंदिर के पुजारी को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा ने बताया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने खुद उन्हें महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा है। मुंबई आने-जाने और ठहरने का प्रबंध भी किया है। आशीष पुजारी ने बताया कि वे शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आज शाम को मुंबई के लिए रवाना होंगे। वे अपने साथ महाकाल का प्रसाद, दुपट्टा और रुद्राक्ष की माला ले जाएंगे और भावी मुख्यमंत्री को भेंट करेंगे। महाकाल के परम भक्त हैं फडणवीस आशीष पुजारी ने बताया कि देवेंद्र फडणवीस महाकाल के परम भक्त हैं। पिछली बार जब वे मुख्यमंत्री बने थे, तब महाकाल मंदिर के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने आए थे। उसके बाद में भी वे लगातार भगवान महाकाल के दर्शन करने आते रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर को शाम 5 बजे मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित किया जाएगा। मंत्रिमंडल का गठन बाद में होगा महाराष्ट्र में गुरुवार शाम को 5 बजे नए मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। अभी देवेंद्र फडणीस के साथ ही एकनाथ शिंदे और अजित पवार ही शपथ लेंगे। मंत्रिमंडल का गठन बाद में दिया जाएगा। पहले कहा गया था कि कुछ विधायक भी शपथ ले सके हैं।

IIT Indore की तकनीक फसलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने के लिए गेमचेंजर साबित होगी

 इंदौर आईआईटी इंदौर ने छोटे और मध्यम किसानों की फसल सुरक्षा के लिए एक अनूठी और सस्ती स्मार्ट स्टोरेज तकनीक विकसित की है, जो किसानों को महंगे कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता से मुक्त कर सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए बड़े और महंगे कोल्ड स्टोरेज का खर्च नहीं उठा सकते। “चलो गांव की ओर” अभियान के अंतर्गत विकसित यह स्मार्ट स्टोरेज तकनीक किसानों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकती है। आईआईटी इंदौर ने दावा किया है कि यह तकनीक फसलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने के लिए गेमचेंजर साबित होगी। इसका उपयोग छोटे किसानों द्वारा घर के एक कमरे में आसानी से किया जा सकता है। इस स्मार्ट स्टोरेज सिस्टम को 10 बाय 10 फीट के छोटे से कमरे में फिट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यह तकनीक कम जगह में भी प्रभावी रूप से काम कर सके। यह न केवल फसल और सब्जियों को संरक्षित रखने में मदद करेगा, बल्कि इनकी गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखेगा। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह फोटोडायनामिक इनेक्टिवेशन (PDI) तकनीक पर आधारित है। इसमें 455 और 476 एनएम के प्रभावी वेवलेंथ पर फोटोसेंसिटाइजर और फ्लैश लाइट के साथ विटामिन बी-2 स्प्रे का उपयोग किया गया है। यह संयोजन खाद्य पदार्थों पर मौजूद कीटाणु और रोगाणुओं को पूरी तरह से नष्ट कर देता है, जिससे फसल और सब्जियों को किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाया जा सकता है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने इस तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि यह कोल्ड स्टोरेज का एक उत्कृष्ट और किफायती विकल्प है। इस तकनीक का आविष्कार प्रोफेसर देबायन सरकार के नेतृत्व में किया गया है, जिसमें छात्र नीलाद्रि शेखर रॉय ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसान अपने घर के किसी एक कमरे में ही इसे स्थापित कर सकते हैं। यह स्मार्ट स्टोरेज सिस्टम बड़ी मात्रा में सब्जियों और फलों को संरक्षित रखने में सक्षम है। यह न केवल फसलों को लंबे समय तक ताजा बनाए रखता है, बल्कि साग-सब्जियों की गुणवत्ता को भी बनाए रखने में मदद करता है। इस सिस्टम में लगाए गए कैमरे की मदद से किसान स्टोरेज में रखे उत्पादों पर नजर रख सकते हैं। आईआईटी इंदौर की यह पहल विशेष रूप से देश के छोटे और गरीब किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। अक्सर किसान अपनी फसल को महंगे कोल्ड स्टोरेज में रखने में असमर्थ होते हैं, जिसके कारण उनकी फसल खराब हो जाती है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यह नई तकनीक ऐसे किसानों को एक किफायती और प्रभावी समाधान प्रदान करती है। इसके उपयोग से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखकर बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे। इस तकनीक की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसे ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह न केवल छोटे और मध्यम किसानों के लिए मददगार है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन को भी बेहतर बनाएगी। आईआईटी इंदौर के इस नवाचार से न केवल किसानों का खर्च कम होगा, बल्कि उनकी आय भी बढ़ेगी।    

सतना जिले में जिले में सिंचाई की पानी की आपूर्ति के लिए चार नए बांध बनाने के लिए सर्वे प्रक्रिया का काम जल्द शुरू

सतना सतना जिले में जिले में सिंचाई की पानी की आपूर्ति के लिए चार नए बांध बनाने के लिए सर्वे प्रक्रिया का काम जल्द शुरू होने जा रहा है. नए बांध के जरिए जिले के 3 हजार हेक्टेर कृषि भूमि को सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिले में चार नए बांधों के निर्माण की रुपरेखा तैयार की जा रही है. जल संसाधन विभाग अवर सचिव के निर्देश पर जिले में चार नए बांध के निर्माण के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है. प्राथमिक तौर पर रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बालकुंड़ चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के कंदर, नरदहा और गहबर इलाके में बांध निर्माण करने का सर्वे किया जाएगा. चार महीने के अंदर सर्वे पूरा करके पेश करना होगा रिपोर्ट जिले चार नए बांध निर्माण के लिए चार महीने के अंदर सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है. इसके बाद बांधों का डीपीआर तैयार किया जाएगा. वहीं, जल संसाधन संभाग सतना को संबंधित योजनाओं का सर्वे करवाए जाने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शिका जारी की गई है.  रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बालकुंड में होगा बांधों का निर्माण जानकारी के मुताबिक शासन के स्वीकृत के अनुसार विधानसभा क्षेत्र चित्रकूट के अंतर्गत कंदर, नरदहा और गहबर में जबकि रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बालकुंड में बांधों का निर्माण किया जाएगा. इन चारों योजनाओं के निर्माण पर करीब 102 करोड़ रुपए खर्च होने और लगभग 3 हजार हेक्टेयर की सिंचाई होने का लक्ष्य प्रस्तावित है. बालकुंड से लगभग 355 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का खर्च 12.39 करोड़ रुपए होगा.कंदर बांध से 888 हेक्टेयर रकबे के लिए 27.95 करोड़, नरदहा के 1120 हेक्टेयर सिंचाई के लिए 37.10 करोड़ और गहबर से लगभग 724 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए 24.85 करोड़ खर्च आएगा. सतना में चार नए बांध निर्माण के लिए विधायकों ने की थी पहल बताया जा रहा है कि योजनाओं के प्रस्ताव शासन स्तर पर काफी समय से लंबित हैं, जिसके लिए आवश्यक मंजूरी के लिए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी और चित्रकूट क्षेत्र के लिए विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र की 3 सिंचाई योजनाओं को शासन से मंजूरी दिलाए जाने की मांग रखी थी. चारों बांध के निर्माण पर आएगा करीब 102 करोड़ रुपए खर्च बालकुंड से लगभग 355 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य है, जिसकाखर्च 1 2.39 करोड़ रुपए होगा. वहीं, कंदर बांध से 888 हेक्टेयर रकबे के लिए निर्माण खर्च 27.95 करोड़, नरदहा के 1120 हेक्टेयर सिंचाई के लिए 37.10 करोड़ और गहबर से लगभग 724 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए बांध निर्माण पर  24.85 करोड़ आएगा.

CBSE स्पोर्ट्स और ओलंपियाड में भाग लेने वाले छात्रों के लिए करेगा स्पेशल परीक्षा का आयोजन, अहम नोटिस जारी

नई दिल्ली ओलंपियाड और स्पोर्ट्स कार्यक्रम में भाग लेने वाले 10वीं और 12वीं के छात्रों के केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अहम नोटिस जारी किया है। जिसमें स्पेशल एग्जाम से संबंधित जानकारी साझा की गई है। बता दें कि सीबीएसई खेल में युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल कर चुका है। ऐसे छात्रों को कई सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है। विशेष परीक्षा का अवसर भी प्रदान कर रहा है। मार्च 2018 से सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले ऐसे छात्र जो राष्ट्रीय/इंटरनेशनल स्पोर्ट्स भाग लेते हैं, उन्हें बोर्ड एग्जाम के बाद भी स्पेशल परीक्षा का अवसर प्रदान करता है। ताकि छात्रों का शैक्षणिक क्षेत्र में कोई भी नुकसान ना हो। इसके अलावा यदि सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त आयोजनों के लिए यात्रा की तारीख को सहित राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की तारीखों से टकराती है, उन्हें भी एक खास अवसर दिया जाता है। वहीं वर्ष 2020 से बोर्ड ऐसी ही सुविधा इंटरनेशनल ओलंपियाड में भाग लेने वाले छात्रों को भी मिलता है। सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए सीबीएसई ने कुछ नियम और समय सीमा भी निर्धारित की है। गतिविधियों को पूरा करने की डेडलाइन (CBSE Provision For Sports Participation) स्पेशल एग्जाम के खास अवसर का लाभ उठाने के लिए छात्रों को आवेदन जमा करना होगा। स्कूल एसएआई/बीसीसीआई/एचबीएससीई द्वारा मान्यता प्राप्त कार्यक्रमों में पार्टिसिपेशन के लिए सर्टिफिकेट इश्यू करने के लिए रिक्वेस्ट भेजना होगा। इसके अलावा स्कूलों को इन सर्टिफिकेटों के लिए रिकमेंडेशन भी सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय में भेजना होगा। इन सभी कार्यों को पूरा करने के लिए बोर्ड ने 31 दिसंबर 2024 तक का समय तय दिया है। 15 जनवरी 2025 तक क्षेत्रीय कार्यालय को अप्रूवल के लिए संबंधित स्कूलों को स्कूलों से संपर्क करना होगा। बोर्ड परीक्षा के आयोजन के बाद 15 दिनों के भीतर विशेष परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। कौन उठा सकता है इस सुविधा का लाभ? (CBSE Board Exam 2025) केवल एसएआई/ बीसीसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त स्पोर्ट्स और एचबीसीएसई द्वारा मान्यता प्राप्त ओलंपियाड के लिए है यह सुविधा लागू होती है। पूरक परीक्षाओं के लिए छात्रों को यह अवसर उपलब्ध नहीं करवाया जाता। इसके अलावा प्रैक्टिकल परीक्षा, प्रोजेक्ट और  आंतरिक मूल्यांकन के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। ट्रेनिंग और  सिलेक्शन कैंप में भाग लेने वाले छात्रों को भी यह अवसर प्रदान नहीं किया जाता। अतिरिक्त जानकारी के लिए छात्रों को सीबीएसई द्वारा जारी ऑफिशियल नोटिफिकेशन चेक करने की सलाह दी जाती है।

जैविक खेती के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नायक राहुल कुमार वसूले, आज एक प्रगतिशील कृषक हैं

भोपाल छिंदवाड़ा जिले के खजरी गांव के राहुल कुमार वसूले आज एक प्रगतिशील कृषक हैं। इसके साथ-साथ वे जैविक खेती के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नायक भी हैं। कभी 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी करने वाले राहुल ने इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद पावर प्लांट में कार्य किया। लेकिन परिवार के स्वास्थ्य पर रसायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जैविक व प्राकृतिक खेती की राह चुनी। बी.टेक और एम.बी.ए. की शिक्षा लेने के बाद राहुल ने लगभग 15 वर्षों तक पॉवर प्लांट में कार्य किया, लेकिन अपने पिता और पुत्र को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में खोने के बाद उन्होंने महसूस किया कि इन समस्याओं की मूल जड़ रासायनिक खेती से पैदा हुआ अनाज और सब्जियां हैं। इस गहरी सोच के बाद उन्होंने वर्ष 2018 में अपनी नौकरी छोड़कर जैविक खेती करने का फैसला किया। जैविक खेती को समझने और इसे प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए राहुल ने राज्य सरकार की मदद से देश के विभिन्न संस्थानों और वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, केंचुआ खाद और नीमास्त्र जैसे जैविक उत्पाद तैयार करना सीखा। साथ ही इज़राइल की तकनीक से संरक्षित खेती और मशरूम उत्पादन जैसे आधुनिक तरीके भी अपनाये। राहुल की प्रगतिशीलता से उन्हें 1 से 3 दिसंबर 2024 तक पूसा, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें ‘मिलेनियर फॉर्मर ऑफ इंडिया 2024’ जैसे प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 2022 में आगरा में उन्हें जैविक इंडिया अवार्ड मिला। वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गौ आधारित जैविक कृषि अवार्ड में भी राहुल को सम्मानित किया गया। जैविक खेती का मॉडल राहुल के पास 10 एकड़ भूमि है, जहां वे गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, चना, मूंग, और सब्जियों की खेती करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खाद और जैविक तरीकों का उपयोग कर अपनी उपज की गुणवत्ता को बेहतर बनाया। इसके अलावा वे दुग्ध और मशरूम उत्पादन भी कर रहे हैं। राहुल की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है “रसायनमुक्त नवरत्न आटा,” जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, काला गेहूं और अन्य अनाज भी शामिल हैं। यह आटा उनके जैविक प्र-संस्करण यूनिट में तैयार होता है, जो ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस यूनिट से क्षेत्र के 50 से अधिक जरूरतमंद लोगों को रोजगार भी मिला है। राहुल पहले 15 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी कर रहे थे, अब खेती करने के बाद उनका का वार्षिक टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। उनके उत्पाद गुरुग्राम, नोएडा, पुणे, मुंबई जैसे शहरों तक भेजे जा रहे हैं। राहुल ने “श्रीराम जैविक कृषक समूह” की स्थापना की, जिससे 600 से अधिक किसान जुड़े हैं। वे सभी किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हैं और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाते हैं। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी रसायनमुक्त खेती की ओर मोड़ दिया है। अपनी सफलता से प्रफुल्लित होकर राहुल कहते हैं कि सही सोच और मेहनत से हम न केवल अपनी, बल्कि समाज की दिशा भी बदल सकते हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहते हैं कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की वजह से ही वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।  

अब लंबी और खुली सीमा के कारण भारतीय पहले कनाडा जाते हैं और वहां से यूएस में एंट्री करते हैं

वॉशिंगटन  भारतीय बड़ी संख्या में ‘अमेरिकन ड्रीम’ के लिए अपना सब कुछ जोखिम में डाल रहे हैं। अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (USCBP) के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका में अवैध रूप से भारतीयों के जाने में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। अकेले इस साल कनाडाई सीमा पर अवैध रूप से प्रवेश करते हुए पकड़े गए लोगों में 22 फीसदी भारतीय थे। आइए समझें कि भारतीयों की इतनी बढ़ती संख्या के पीछे क्या कारण है? USCBP के डेटा का वित्तीय वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। इसका डेटा कनाडाई सीमा के जरिए अवैध रूप से अमेरिका में घुसते भारतीय अमेरिकियों की बढ़ती संख्या दिखाता है। 2022 में अवैध क्रॉसिंग की कोशिश कर रहे 109,535 लोगों को पकड़ा गया था। इसमें भारतीयों की संख्या 16 फीसदी थी। 2023 में इसमें वृद्धि हुई और 189,402 लोगों में से 30,010 भारतीय पकड़े गए। इस साल आंकड़ों में फिर वृद्धि हुई है। 42764 भारतीयों को अवैध रूप से कनाडा से अमेरिका में घुसते पकड़ा गया। भारतीयों का नंबर बढ़ा BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक निस्कैनन सेंटर के इमीग्रेशन एनालिस्ट गिल गुएरा और स्नेहा पुरी ने कहा कि ये आंकड़े हालांकि लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई प्रवासियों की तुलना में कम हैं। लेकिन पिछले चार वर्षों में भारतीय पश्चिम गोलार्ध के बाहर अमेरिकी सीमा पर आने वाले प्रवासियों का सबसे बड़ा समूह बन गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि अभी तक ज्यादातर लोग मैक्सिको बॉर्डर से अमेरिका में घुसते हैं, तो आखिर कनाडा पहली पसंद क्यों बन गया। आखिर कनाडा क्यों? निस्कैनन सेंटर के मुताबिक कनाडा से अवैध एंट्री बढ़ने का कारण कनाडा की अधिक सुलभ वीजा प्रक्रिया है। कनाडा भारतीयों के लिए अधिक सुलभ एंट्री पॉइंट बनता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कनाडा का वीजा पाने के लिए औसत 76 दिन लगते हैं। जबकि अमेरिकी वीजा के लिए एक साल से ज्यादा का समय लग जाता है। इसके अलावा मैक्सिको-अमेरिका बॉर्डर की तुलना में यूएस-कनाडा बॉर्डर ज्यादा लंबा और कम संरक्षित है। आने वाले ट्रंप के कार्यकाल में यूस-कनाडा बॉर्डर पर भी सख्ती देखी जा सकती है।

इंदौर में मरीजों को कम रेट पर मिलेगी चेकअप की सुविधा, मरीजों की रिपोर्ट आने के बाद वह इन डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे

 इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और नवाचार करने जा रहा है। चार लाख लोगों का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप करने के बाद अब हेल्थ ऑफ इंदौर अभियान के तहत प्रिवेंटिव हेल्थ केयर सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए एक संस्था ने साउथ तुकोगंज क्षेत्र में करोड़ों रुपये की 30 हजार वर्ग फीट जमीन दान की है। इस केंद्र की विशेषता यह है कि यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से मरीजों की जांच हो सकेगी, वहीं जांच के बाद ही रियल टाइम रिपोर्ट भी मिल सकेगी। आईआईटी सहायता लेंगे आधुनिक मशीनों से सिर्फ दो घंटे में ही मरीज का बॉडी चेकअप हो सकेगा और उसे रिपोर्ट भी मिल जाएगी। इसके लिए आईआईटी की सहायता ली जाएगी। दावा किया जा रहा है कि यह देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जो संस्था के माध्यम से संचालित होगा। न्यूनतम दर पर मिल सकेगी सुविधा यहां जांच की सुविधा लोगों को न्यूनतम दर में मिल सकेगी। इसके लिए हस्तीमल सुंदरबाई पारमार्थिक ट्रस्ट के सदस्यों ने सांसद शंकर लालवानी के माध्यम से पिछले दिनों शहर आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उनसे भूमिपूजन में शामिल होने का आग्रह भी किया। चार लाख लोगों की जांच में आए चौंकाने वाले आंकड़े बता दें, हेल्थ ऑफ इंदौर के तहत शहर में सांसद सेवा संकल्प, रेड क्रास सोसायटी और सेंट्रल लैब द्वारा की गई चार लाख लोगों की जांच में चौंकाने वाले आकड़े सामने आए थे, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में कई तरह की बीमारियां पाई गई थीं। इस अत्याधुनिक सेंटर में खून की सामान्य जांच से लेकर इको कार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, कैंसर स्क्रीनिंग और जीनोमिक टेस्टिंग तक हो सकेगी। जांच के साथ फालोअप पर भी देंगे ध्यान निजी लैब की संचालक डॉ. विनीता कोठारी ने बताया कि इस सेंटर में जांच में किसी भी व्यक्ति में कोई बीमारी सामने आती है तो उसके फालोअप का भी ध्यान रखा जाएगा। हर माह मरीजों से संपर्क कर यह देखा जाएगा कि बीमारी में कितना सुधार हुआ है, क्योंकि बोहरा समाज ने पिछले 10 वर्षो में अपने स्वास्थ्य में काफी सुधार किया है।

दक्षिण कोरिया की आबादी जिस दर से घट रही, एक समय ऐसा आएगा जब देश के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा

सियोल  दुनिया में अपने तेज आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण के लिए पहचान बनाने वाला दक्षिण कोरिया इस समय एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। यह संकट इतना गंभीर है और ऐसे ही जारी रहा तो इस सदी के अंत तक इस देश की आबादी वर्तमान से घटकर एक तिहाई रह जाएगी। पहले से ही दुनिया में सबसे कम चल रह देश की प्रजनन दर में और गिरावट आई है। दक्षिण कोरिया में देश के ‘विलुप्त होने’ को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। प्रजनन दर में 8 फीसदी की गिरावट दक्षिण कोरिया के सांख्यिकी विभाग ने पिछले सप्ताह जो आंकड़े जारी किए हैं, वो बताते हैं कि साल 2023 में देश की प्रजनन दर 2022 की तुलना में 8 प्रतिशत गिर गई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा तो साल 2100 तक दक्षिण कोरिया की 5.1 करोड़ की जनसंख्या तिहाई हो सकती है। साल 2023 में दक्षिण कोरिया में राष्ट्रीय जन्म दर प्रति महिला 0.72 बच्चों के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई और इस साल इसके और गिरकर 0.6 होने की उम्मीद है। इस स्थिति ने दक्षिण कोरिया में बड़ी चिंता पैदा कर दी है। द इंडेपेंडेंड की रिपोर्ट के अनुसार, जन्म दर में गिरावट को रोकने के लिए दक्षिण कोरिया की सरकार जन्म दर में गिरावट को रोकने के लिए माता-पिता को प्रत्येक बच्चे के जन्म पर 10 करोड़ वॉन (करीब 59 लाख रुपये) नकद देने पर विचार कर रही है। जन्मदर बढ़ाने के लिए 22 ट्रिलियन वॉन होंगे खर्च इस योजना पर सालाना 22 ट्रिलियन वॉन (लगभग 1317 अरब भारतीय रुपये) खर्च होने की उम्मीद है। योजना को लागू करने के पहले सरकार राष्ट्रीय सर्वेक्षण कर रही है। 17 अप्रैल को शुरू हुए इस सर्वेक्षण में चार मुख्य प्रश्न पूछे गए हैं, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या लोग इस पहल पर सालाना 22 ट्रिलियन वॉन खर्च करने का समर्थन करते हैं। यह प्रस्तावित निधि कम जन्म दर को संबोधित करने के लिए समर्पित राष्ट्रीय बजट का लगभग आधा हिस्सा होगी, जो लगभग 48 ट्रिलियन वॉन है। दक्षिण कोरिया ने जन्म दर को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं, जैसे कि बच्चों की देखभाल के लिए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करना, कर लाभ देना और यहां तक कि यह सुझाव देना कि 30 वर्ष की आयु तक तीन या अधिक बच्चे वाले पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट दी सकती है। हालांकि, इन प्रयासों का अब तक सीमित प्रभाव पड़ा है।

साल 2024 में अबतक मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे

उज्जैन मप्र के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक और पौराणिक महत्व की दुनियाभर में पहचान है। इसीलिए पर्यटक बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश पहुंच रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक रिकॉर्ड 6.57 करोड़ पर्यटक उज्जैन आए। मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे। सबसे खास बात यह है कि देसी पर्यटकों के टॉप-5 डेस्टिनेशन में उज्जैन, ओंकारेश्वर, इंदौर, भोपाल और मैहर शामिल हैं। इस वर्ष 10 लाख 85 हजार विदेशी पर्यटक भी मप्र पहुंचे। विदेशियों सैलानियों में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल खास आकर्षण का केंद्र रहे। टॉप-5 डेस्टिनेशन में खजुराहो, बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और ओरछा हैं। ​देसी पर्यटकों की रुचि धार्मिक क्षेत्रों में अधिक है। ओंकारेश्वर में 21 लाख 29 हजार लोगों ने दर्शन किए। इसी तरह 97 लाख लोग मैहर पहुंचे। हालांकि, इस साल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले घटी है। साल 2023 में प्रदेश में 11.21 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। वहीं, साल 2022 में यह आंकड़ा 3.41 करोड़ का था। पिछले दो साल की ही बात करें तो प्रदेश में 21.87 करोड़ पर्यटक पहुंचे। यह दो साल में पर्यटकों की संख्या का रिकॉर्ड है। धार्मिक स्थलों की ओर रुझान ज्यादा, महाकाल लोक बनने के बाद बदली तस्वीर महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। अभी फेज-2 के काम चल रहे हैं। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ ने बताया कि मंदिर में कम समय में दर्शन होते। भस्मआरती में आरएफ बैंड सिस्टम शुरू किया है। ​इससे अवैध रूप से भस्मआरती में शामिल होने वालों पर अंकुश लगा है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दो भक्त निवास बन चुके हैं। तीसरा अभी बन रहा है। महाकाल लोक बनने के बाद सेलीब्रिटी भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले पाँच सालों में दोगुनी हो गई है। कोरोना काल में पर्यटन में तेजी से गिरावट हुई थी, लेकिन वर्ष 2023 में एक बार फिर जबर्दस्त तेजी आई है और 5 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटकों के पहुँचने का रिकार्ड उज्जैन ने बनाया है। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक उज्जैन में 5 करोड़ 28 लाख 41 हजार 802 पर्यटक पहुँचे। इसी के साथ मध्य प्रदेश के टॉप-10 पर्यटन केंद्रों में उज्जैन सबसे आगे रहा हैं। प्रदेश के टॉप 10 शहरों की सूची में पहले नंबर पर उज्जैन और दूसरे नंबर पर मैहर रहा, जबकि भोपाल सबसे आखिरी पायदान पर है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में बाबा महाकाल के दर्शन और महाकाल लोक के वैभव को देखने पहुँच रहे हैं। यहाँ महाराष्ट्र के शिरडी से तीन गुना, राजस्थान के खाटू श्याम से चार गुना ज्यादा श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। मंदिर समिति के मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है कि गर्मी की शुरुआत के एक माह में 22 अप्रैल से 22 मई में अभी तक करीब 45 लाख से अधिक लोग उज्जैन पहुँच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा श्रद्धालु दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए हैं।

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