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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी जारी, कल होगा शपथ ग्रहण

मुंबई महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के नाम पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। महायुति के प्रचंड बहुमत हासिल करने बाद भी सीएम के नाम को लेकर बीते कई दिनों से मंथन जारी है। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी पर जारी है। समारोह 5 दिसंबर को मुंबई के आजाद मैदान में होगा। मुंबई के आजाद मैदान में मंच बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुंबई में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन (बीएमसी) की ओर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। इस समारोह को भव्य बनाने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। यह कार्यक्रम इतना भव्य होगा कि इसमें 40 हजार लोगों के जुटने की उम्मीद है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल होने आशंका है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। महायुति के घटक दलों के नेता तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को आजाद मैदान जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में अगले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस होंगे। हालांकि, अभी यह पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है। औपचारिक घोषणा बुधवार को विधायक दल की बैठक के बाद होगी। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 132 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। महायुति की बात करें तो भाजपा ने 132, शिवसेना ने 57, एनसीपी ने 41 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं महाविकास अघाड़ी में शिवसेना (यूबीटी) ने 20, कांग्रेस ने 16, एनसीपी (शरद पवार) ने 10 सीट पर जीत दर्ज की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय रुपाणी मंगलवार को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंच जाएंगे। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को मुंबई पहुंचेगी। बुधवार को ही कि विधानसभा की विधि मंडल में भाजपा विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें भाजपा विधायक दल का नेता चुना जाएगा। विधायक दल का नेता चुनने के बाद महायुति के नेता राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।  

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी एक महत्वपूर्ण पर्व, भगवान कार्तिकेय की होती है पूजा

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी पर्व के मौके पर भगवान शिव और देवी पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती है. यह पर्व मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को हरसाल बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. भगवान कार्तिकेय को युद्ध का देवता माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. कार्तिकेय बुद्धि के देवता भी हैं. इसलिए इस दिन छात्र और विद्वान उनकी पूजा करते हैं. नि:संतान दंपत्ति की संतान प्राप्ति के लिए यह पूजा लाभकारी मानी जाती है. माना जाता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य मिलता है. पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की स्कंद षष्ठी की तिथि 06 दिसंबर दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर शुरू होगी और 07 दिसंबर, दिन शनिवार को सुबह 11 बजकर 05 मिनट पर समाप्त होगी.     ब्रह्म मुहूर्त – 04 बजकर 43 मिनट से 05 बजकर 37 मिनट     प्रातः सन्ध्या – 05 बजकर 10 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट     अभिजित मुहूर्त – 11 बजकर 28 मिनट से 12 बजकर 10 मिनट     विजय मुहूर्त – 01 बजकर 35 मिनट से 02 बजकर 18 मिनट     गोधूलि मुहूर्त – 05 बजकर 05 मिनट से 05 बजकर 32 मिनट     सायाह्न सन्ध्या – 05 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 28 मिनट     अमृत काल – 06 बजकर 58 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट     निशिता मुहूर्त – 11 बजकर 23 मिनट से अगले दिन 12 बजकर 16 मिनट शुभ योग योग     सर्वार्थ सिद्धि योग – 06 बजकर 30 मिनट से 05 बजकर 18 मिनट     रवि योग – 05 बजकर 18 मिनट से अगली सुबह 06 बजकर 31 मिनट ऐसे करें भगवान कार्तिकेय की पूजा     स्कंद षष्ठी के दिन पूजा करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें.     पूजा के लिए एक साफ और शांत स्थान का चुनाव करें.     भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र को एक साफ आसन पर स्थापित करें.     पूजा के लिए रोली, चंदन, फूल (विशेषकर कमल का फूल), फल, मिठाई, धूप, दीपक, नैवेद्य, जल, अक्षत, माला, गंगाजल आदि अर्पित करें.     पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और धूप जलाएं.     भगवान को भोग लगाएं और आरती करके पूजा संपन्न करें. इन मंत्रों का करें जाप     ॐ स्कंदाय नमः     ॐ षडाननाय नमः     ॐ शरवणभवाय नमः     ॐ कुमाराय नमः स्कंद षष्ठी क्यों मनाते हैं? पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस तारकासुर ने देवताओं को बहुत सताया था. देवताओं ने भगवान शिव और पार्वती से प्रार्थना की. उनकी प्रार्थना के अनुसार कार्तिकेय का जन्म हुआ और उन्होंने तारकासुर का वध करके देवताओं को मुक्त कराया था. कहानी यह है कि देवताओं ने इस जीत की खुशी में स्कंद षष्ठी का उत्सव मनाया था. तभी से स्कंद षष्ठी पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है. स्कंद षष्ठी पूजा का महत्व स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान कार्तिकेय सभी संकटों से लोगों की रक्षा करते हैं. वे सभी प्रकार के विघ्नों को भी दूर करते हैं. भगवान कार्तिकेय बुद्धि के देवता भी माने जाते हैं. उनकी पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है और उनकी कृपा से हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है. कई लोग स्कंद षष्ठी के दिन व्रत रखते हैं. व्रत रखने से मन को शांत किया जा सकता है और भगवान के प्रति भक्ति बढ़ती है.  

अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाने भारतीय नौसेना दो महीने में फ्रांस से 26 राफेल-एम फाइटर जेट की डील फाइनल कर देगा

नई दिल्ली अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना दो महीने के अंदर फ्रांस के साथ 26 राफेल-एम फाइटर जेट की डील फाइनल कर देगा. इसकी पुष्टि नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने खुद की है. 60 हजार करोड़ रुपए की इस डील से पूरे इंडो-पैसिफिक रीजन में शांति बहाल होगी. नेवी की ताकत बढ़ेगी. राफेल मरीन फाइटर जेट (Rafale Marine Fighter Jet/ Rafale M) को भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर INS Vikrant और INS Vikramaditya पर तैनात किया जाएगा. ये जेट्स शॉर्ट टेकऑफ करने में सक्षम हैं. लेकिन लैंडिंग के लिए अरेस्टेड रिकवरी स्टोबार तकनीक का इस्तेमाल करेंगे. भारत इस डील में फ्रांस से 22 सिंगल सीटर फाइटर जेट और चार डबल सीटर फाइटर जेट खरीदेगा. डबल सीटर फाइटर जेट ट्रेनिंग के लिए काम आएंगे. Rafale-M एक मल्टीरोल फाइटर जेट है. दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत और चीन के अलावा किसी अन्य देश के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. स्पीड 2205 km/hr, रेंज 3700 किलोमीटर राफेल-एम 50.1 फीट लंबा है. इसे 1 या 2 पायलट उड़ाते हैं. राफेल का वजन सिर्फ 15 हजार kg है. यानी हल्का है. राफेल-एम की फ्यूल कैपेसिटी करीब 11,202 kg है. यानी ज्यादा देर तक फ्लाई कर सकता है. गति 2205 km/hrहै. राफेल-एम की रेंज 3700 km है. 52 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है.   14 हार्डप्वाइंट्स, हथियारों का जखीरा लग जाए राफेल-एम में 30 mm की ऑटोकैनन गन लगी है. इसके अलावा 14 हार्डप्वाइंट्स हैं. इसमें तीन तरह के हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, हवा से सतह पर मार करने वाली सात तरह की मिसाइलें, एक परमाणु मिसाइल या फिर इनका मिश्रण लगा सकते हैं. यह फाइटर जेट एंटी-शिप वॉरफेयर के लिए बेस्ट है. इसमें प्रेसिशन गाइडेड बम और मिसाइलें लगा सकते हैं. जैसे- मेटियोर, स्कैल्प, या एक्सोसैट. इस फाइटर जेट के आने से हवा, पानी और जमीन तीनों जगहों से सुरक्षा मिलेगी. नौसेना एक देश के चारों तरफ अदृश्य कवच बना सकेगी. राडार ऐसा कि दुश्मन बच न पाए, खुद रहे सुरक्षित इसका AESA राडार टारगेट डिटेक्शन और ट्रैकिंग के लिए बेहतरीन है. इसमें स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है जो इसे स्टेल्थ बनाता है. इसमें बीच हवा में ही रीफ्यूलिंग हो सकती है. यानी इसकी रेंज बढ़ जाएगी. राफेल-एम फाइटर आने से भारतीय समुद्री क्षेत्र में निगरानी, जासूसी, अटैक जैसे कई मिशन किए जा सकेंगे. डील में मेंटेनेंस, ट्रेनिंग और कई चीजें शामिल इसके आने से चीन और पाकिस्तान समेत इंडो-पैसिफिक में जो स्थितियां हैं, उनसे निपटना आसान हो जाएगा. साथ ही इस डील में ऑफसेट प्रोविजन है. इससे भारत के मेक इन इंडिया मुहिम को भी बढ़ावा मिलेगा. ये डील 60 हजार करोड़ रुपए की है. लेकिन इसमें सिर्फ खरीद की कीमत नहीं है. डील में पैकेज है. इसमें मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है. नौसैनिकों की ट्रेनिंग, ऑपरेशन और मेंटेनेंस की ट्रेनिंग भी शामिल है. यह डील पूरी होते ही भारतीय नौसेना के पास एयरक्राफ्ट कैरियर पर नए और आधुनिक फाइटर जेट्स हो जाएंगे.  

हाईकोर्ट ने ओंकारेश्वर बांध के डूब प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को मुआवजा देने के मामले में सरकार को निर्देशित किया

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ओंकारेश्वर बांध के डूब प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को मुआवजा देने के मामले में सरकार को निर्देशित किया है। जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने इस पर विचार करने के लिए सरकार को दो माह का समय दिया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से दायर याचिका पर 7 जून 2013 को हाईकोर्ट ने सरकार को डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज प्रदान करने का आदेश दिया था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार ने विस्थापितों को पैकेज पर 15% का लाभ तो दिया, लेकिन इसे सभी पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंचाया गया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को विशेष पैकेज का लाभ नहीं दिया गया, जबकि वे इसके पात्र थे। यह कार्रवाई न केवल अवैधानिक है, बल्कि न्यायालय के आदेश का उल्लंघन भी है। न्यायालय का आदेश युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पाया कि प्रभावित किसानों के बालिग बेटों को मुआवजा देने में सरकार ने लापरवाही बरती है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन बालिग बेटों को भी विशेष पैकेज का लाभ प्रदान करने पर विचार करे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पैरवी की। कोर्ट ने इस मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए सरकार को दो माह की मोहलत दी है।

प्रदेश में अब मनमानी नहीं कर पाएंगे प्राइवेट अस्पताल, सरकार ने जारी किए ये जरूरी निर्देश

Now private hospitals will not be able to act arbitrarily in the state, the government has issued these important instructions मध्य प्रदेश में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज और जांच के नाम पर हमेशा मनमानी राशि लेने के आरोप लगते रहे हैं. लेकिन, अब इन पर लगाम लगाने का मध्य प्रदेश सरकार ने मन बना लिया है. अब एमपी के निजी अस्पताल प्रबंधन अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अब सरकार ने निजी प्राइवेट अस्पताल को ट्रीटमेंट और जांच की रेट लिस्ट लगाने के निर्देश दिए हैं. प्राइवेट अस्पतालों में रेट लिस्ट लगाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त की ओर स दिए गए हैं. मरीजों के अधिकार और हितों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया आदेश स्वास्थ्य विभाग आयुक्त तरुण राठी ने आदेश जारी किया है. उन्होंने जारी किए गए आदेश में कहा कि सभी चिकित्सकीय सेवाओं की दर सूची रेट लिस्ट प्रमुखता से प्रदर्शित करें. स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी ने साफ कहा है कि अस्पताल में काउंटर पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य है. स्वास्थ्य आयुक्त के अनुसार रोगी या उनके परिजनों द्वारा मांगे जाने पर अस्पताल मैनेजमेंट को रेट सूची दिखाना होगा. किसी अस्पताल को यदि रेट लिस्ट में संशोधन करना हो, तो इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ को देना होगा. संशोधित रेट लिस्ट को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा. रेट लिस्ट नहीं तो होगी कार्रवाई आयुक्त की ओर से अपने निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि रेट लिस्ट के बिना अतिरिक्त शुल्क लेना नियमों का उल्लंघन है. अस्पतालों की ओर से मनमाने रेट वसूलने की घटनाओं को रोकने के लिए आयुक्त ने सीएमएचओ को लगातार निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए हैं. आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जिन प्राइवेट अस्पतालों में रेट लिस्ट नहीं होगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

पीवी सिंधु के हाथों में लगेगी मेहँदी, जानें कौन होगा उनका हमसफर, डेट और वेन्यू

मुंबई दो बार की ओलंपिक पदक विजेता शटलर पीवी सिंधु नई पारी शुरू करने को तैयार हैं। वह हैदराबाद स्थित सिडेक्स टेक्नोलॉजीज में कार्यरत लड़के से शादी के लिए तैयार हैं। सिंधु इसी महीने शादी करने वाली हैं। उनके पिता पीवी रमना ने शादी की तारीख, वेन्यू और रिसेप्शन समेत अन्य जानकारी दी है। 22 दिसंबर को उदयपुर में शादी के बंधन में बंधेंगी। शादी से संबंधित कार्यक्रम 20 दिसंबर से शुरू होंगे। पूर्व विश्व चैंपियन ने रविवार (1 दिसंबर) को लखनऊ में सैयद मोदी इंटरनेशनल में जीत के साथ लंबे समय तक खिताब का सूखा खत्म किया। वह हैदराबाद के रहने वाले वेंकट दत्ता साई से शादी करेंगी, जो पॉसिडेक्स टेक्नोलॉजीज में कार्यकारी निदेशक हैं। रिसेप्शन 24 दिसंबर को हैदराबाद में सिंधु के पिता पीवी रमना ने  बताया, ” दोनों परिवार एक दूसरे को पहले जानते हैं, लेकिन एक महीने पहले ही सब कुछ तय हुआ था। यह एकमात्र संभावित समय था क्योंकि जनवरी से उनका शेड्यूल बहुत व्यस्त हो जाएगा। इसलिए दोनों परिवारों ने 22 दिसंबर को शादी समारोह आयोजित करने का फैसला किया है। रिसेप्शन 24 दिसंबर को हैदराबाद में होगा। वह इसके तुरंत बाद अपनी ट्रेनिंग शुरू कर देंगी, क्योंकि अगला सत्र महत्वपूर्ण होने वाला है।” भारत की सबसे महान एथलीटों में से एक पीवी सिंधु को भारत की सबसे महान एथलीटों में से एक माना जाता है, उन्होंने 2019 में स्वर्ण सहित पांच विश्व चैंपियनशिप पदक जीते हैं। इसके अलावा उन्होंने ओलंपिक खेलों में रजत और कांस्य पदक भी जीता है। चैंपियन बैडमिंटन खिलाड़ी ने रियो 2016 और टोक्यो 2020 में लगातार ओलंपिक पदक जीते और 2017 में करियर की सर्वश्रेष्ठ विश्व रैंकिंग नंबर 2 हासिल की। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर है वेंकट दत्ता साईं उनके मंगेतर वेंकट दत्ता साईं ने फाउंडेशन ऑफ लिबरल एंड मैनेजमेंट एजुकेशन से लिबरल आर्ट्स एंड साइंसेज/लिबरल स्टडीज में डिप्लोमा किया है. इसके साथ ही उन्होंने 2018 में फ्लेम यूनिवर्सिटी बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से बीबीए अकाउंटिंग एंड फाइनेंस पूरा किया और उसके बाद इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु से डेटा साइंस एंड मशीन लर्निंग में मास्टर डिग्री हासिल की. ​​और अब वे हैदराबाद (Hyderabad) की  कंपनी पॉसाइडेक्स टेक्नोलॉजीज में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. यह कंपनी भारत में कस्‍टमर मास्टर डेटा मैनेजमेंट सॉल्‍यूशन मुहैया कराती है. पहले से जानते थे एक-दूसरे को   मिली जानकारी के अनुसार दोनों परिवार एक दूसरे को पहले से जानते थे, लेकिन इस शादी का फैसला एक महीने पहले ही लिया गया है. जिसके बाद  तारीख 22 दिसंबर तय की गई है. क्योंकि जनवरी में पीवी सिंधु का शेड्यूल काफी व्यस्त रहेगा. शादी समारोह उदयपुर में एक भव्य स्थल पर आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं. जिसकी तैयारियां 20 दिसंबर से शुरू हो जाएंगी. 24 दिसंबर को हैदराबाद में होगा रिसेप्शन 22 दिसंबर को उदयपुर में शादी के बाद 24 दिसंबर को हैदराबाद में रिसेप्शन होगा. उदयपुर अपनी विरासत, शाही संस्कृति, झीलों और अरावली की पहाड़ियों और खूबसूरती के लिए जाना जाता है. कहा जा रहा है कि इस डेस्टिनेशन वेडिंग में बैडमिंटन और दूसरे खेल जगत की कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है.

एमपी हाईकोर्ट ने सुनाई अनोखी सजा, दोषी युवक को रोपने होंगे 50 पौधे

MP High Court gave a unique punishment, the guilty youth will have to plant 50 saplings. जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने न्यायालय के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी वाली पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर डालने के आपराधिक अवमानना प्रकरण में आरोपित युवक को दोषी पाते हुए सजा बतौर 50 स्वदेशी प्रजाति के पौधे रोपने के आदेश दिए हैं। इसके लिए 15 दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरोपित को बताएंगे कि वह कहां पर किस प्रजाति के पौधे लगा सकता है। इसके साथ ही युवक को चेतावनी दी कि वह भविष्य में ऐसी गलती न दोहराए। मुरैना जिले के संबलगढ़ न्यायालय का मामलाप्रकरण मुरैना जिले के संबलगढ़ न्यायालय द्वारा हाई कोर्ट को भेजे गए पत्र से संबंधित था। इसमें अवगत कराया गया था कि राजस्थान के जयपुर जिले के त्रिवेणी नगर निवासी आरोपित राहुल साहू के विरुद्ध प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक कुमार के न्यायालय में भरण-पोषण का मामला विचाराधीन था। राहुल की पत्नी पूजा राठौर वादी है। सात मई, 2024 को पूजा ने न्यायालय को सूचित किया कि राहुल ने उसके और न्यायालय के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर अपलोड की है। पूजा ने उस पोस्ट का साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किया। युगलपीठ ने सजा के सिलसिले में सुझाव मांगान्यायालय ने इस जानकारी को अभिलेख पर लेकर आरोपित राहुल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, लेकिन न तो आरोपित की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया और न ही वह उपस्थिति हुआ। इस रवैये को पर आपराधिक अवमानना प्रकरण चलाने के लिए न्यायालय ने हाई कोर्ट को पत्र भेज दिया। प्रकरण हाई कोर्ट में सुनवाई में आया तो कोर्ट रूम में उपस्थित अधिवक्ता आदित्य संघी से युगलपीठ ने सजा के सिलसिले में सुझाव मांगा। अधिवक्ता ने कहा कि सुझाव दिया कि आरोपित की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे सुधारात्मक रूप से प्रतीकात्मक सजा दी जा सकती है। इसके अंतर्गत समाज सेवा करना बेहतर होगा। मसलन, भंवरताल पार्क में पौधारोपण कराया जाए। हाई कोर्ट को यह सुझाव पसंद आया।

भोपाल मंडल वातानुकूलित ट्रेनों में यात्रियों को साफ, स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाले बेडरोल प्रदान किए जा रहे

भोपाल भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपने यात्रियों को स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता के बेडरोल (Railway Bedroll) देने के मामले में इन दिनों चर्चा में है. वहीं भोपाल रेल मंडल (Bhopal Railway Division) की ओर से बताया गया है कि पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में संचालित होने वाली सभी वातानुकूलित ट्रेनों (AC Train) में यात्रियों को साफ, स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाले बेडरोल प्रदान किए जा रहे हैं. सभी चादरों और पिलो कवर को प्रत्येक उपयोग के बाद मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में धुलाई और इस्त्री (प्रेस) की जाती है ताकि यात्रियों को स्वच्छ बेडरोल देकर उनकी आरामदायक, हाइजीनिक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके. अधिकारियों का क्या कहना है? भोपाल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) देवाशीष त्रिपाठी ने कहा, “हम अपने यात्रियों को सर्वोत्तम सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाले लिनन की आपूर्ति हमारी प्राथमिकताओं में से एक है.” भोपाल मंडल पर्यावरण के प्रति जागरूक है. जल संरक्षण के लिए आधुनिक वॉटर रीसाइकलिंग सिस्टम (ETP) का उपयोग किया जाता है और बायोडिग्रेडेबल डिटर्जेंट्स का प्रयोग किया जाता है जो पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं हैं. लिनन धुलाई की प्रक्रिया ऐसी है :     छंटाई और निरीक्षण: उपयोग किए गए लिनन को लॉन्ड्री में पहुंचने पर छांटा जाता है और किसी भी क्षतिग्रस्त या फटे हुए लिनन को अलग किया जाता है.     प्री-ट्रीटमेंट: दाग-धब्बों को हटाने के लिए लिनन पर प्री-ट्रीटमेंट किया जाता है. यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि धुलाई के बाद लिनन पूरी तरह से साफ हो.     स्वचालित धुलाई: लिनन को बड़े औद्योगिक वॉशिंग मशीनों में डाला जाता है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले डिटर्जेंट और सैनेटाइज़र का उपयोग किया जाता है. पानी के तापमान और धुलाई के समय का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बैक्टीरिया और विषाणुओं का नाश हो सके.     सुखाने की प्रक्रिया: धुले हुए लिनन को टंबल ड्रायर में सुखाया जाता है, जिससे अतिरिक्त सैनेटाइजेशन होता है.     प्रेसिंग और फोल्डिंग: सुखाने के बाद, लिनन को प्रेस किया जाता है और सही तरीके से पैकेजिंग साइज के अनुसार मोड़ा एवं पैक किया जाता है.     गुणवत्ता नियंत्रण: हर लिनन की स्वच्छता, सफेदी की जांच की जाती है एवं व्हाइट नेस मीटर द्वारा धुले हुए लिनेन की गुणवत्ता को जांच जाता ताकि उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके. स्वच्छ और पैक किए गए लिनेन को फिर से ट्रेनों में भेजा जाता है. यहां इन्हें यात्रियों के उपयोग के लिए सेट किया जाता है, जिससे उन्हें स्वच्छ और आरामदायक अनुभव मिलता है. इन ट्रेनों में की जाती है भोपाल मंडल से आपूर्ति वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि वर्तमान में भोपाल मंडल में यात्रियों को लगभग 20 ट्रेनों में लिनन की आपूर्ति की जाती है. इन ट्रेनों में प्रमुख रूप से शान ए भोपाल एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, रीवांचल एक्सप्रेस, उर्जाधानी एक्सप्रेस, भोपाल-प्रतापगढ़ एक्सप्रेस, रानी कमलापति-अगरतला एक्सप्रेस, सहरसा एक्सप्रेस, भोपाल-रीवा एक्सप्रेस आदि शामिल हैं. वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर आर पी खरे ने बताया, “हम स्वच्छता और हाइजीन पर विशेष ध्यान देते हैं और यात्रियों की संतुष्टि के लिए हर संभव कदम उठाते हैं.” यात्री लिनन से संबंधित किसी भी शिकायत या सुझाव के लिए रेल मदद पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं. इन शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित किया जाता है. इन सभी प्रयासों के माध्यम से भारतीय रेल यह सुनिश्चित कर रही है कि यात्रियों को यात्रा के दौरान साफ, स्वच्छ और आरामदायक लिनन मिले, जिससे उनकी यात्रा का अनुभव और भी सुखद हो सके.

शुरू हुई हीरों की नीलामी: आकर्षण का केंद्र बना 19 कैरेट 22 सेंट का हीरा

Diamond auction started: 19 carat 22 cent diamond became the center of attraction पन्ना। हीरों की नगरी के नाम से विख्यात मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों से प्राप्त हीरों की नीलामी आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शुरू हो गई है। जिसमें सूरत और गुजरात के व्यापारी शामिल होने के लिए आए हैं। यह नीलामी आगामी तीन दिनों तक चलेगी। हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि, पहले दिन इस हीरों की नीलामी में 21 ट्रे के माध्यम से 50 नग हीरे जिनका वजन 93 कैरेट 27 सेंट है रखे गए है। आज की नीलामी में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र 19 कैरेट 22 सेंट का बड़ा हीरा है। उन्होंने बताया कि, नीलामी के पहले आज होने वाली नीलामी में रखे गए हीरों का ऑक्शन लगाया गया था। ताकि व्यपारी इन हीरों को अच्छे से परख सके। इस नीलामी में व्यापारियों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा गई।

Mohan Cabinet Decision: एमपी में शराब नीति को लेकर कमेटी करेगी काम, मोहन सरकार ने लिए कई बड़े फैसले

Mohan Cabinet Decision: Committee will work on liquor policy in MP, Mohan government took many big decisions भोपाल। मध्य प्रदेश में मोहन कैबिनेट की बैठक खत्म हो गई है। जिसमें कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। 25 करोड़ के निवेश वाले थर्मल पावर प्लांट से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं शराब नीति को लेकर कमेटी काम करेगी।बुधवार को मंत्रालय में सीएम डॉ मोहन की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई है। जिसमें कई प्रस्तावों पर मुहर लगी है। कैबिनेट मीटिंग के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश में 11 से 26 दिसंबर तक जनकल्याण पर्व मनाया जाएगा। 25 करोड़ के निवेश वाले थर्मल पावर प्लांट से हजारों लोग रोजगार मिलेगा। केंद्र ने मंजूरी मिली है।वहीं शराब नीति को लेकर कमेटी काम करेगी। उज्जैन सिंहस्थ बाईपास को फोरलेन किया जा रहा है। फोरलेन से पीथमपुर का औद्योगिक विकास भी होगा। नवीनीकरण ऊर्जा में लगने वाले उपकरण के पार्क के लिए मप्र का चयन हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार 300 करोड़ की राशि देगी। इसके अलावा नर्मदापुरम के बाबई में मेगा औद्योगिक पार्क बनाया जाएगा।

रोगियों के अधिकार और हितों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त ने दिए निर्देश

भोपाल आयुक्त, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालयों (नर्सिंग होम) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अस्पताल में प्रदायित सभी चिकित्सकीय सेवाओं की दर सूची (रेट लिस्ट) प्रमुखता से प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिये यह महत्वपूर्ण है। निजी चिकित्सालयों में काउंटर पर दर सूची का प्रदर्शन अनिवार्य है। रोगी या उनके परिवारजन द्वारा मांग करने पर दर सूची दिखाना अस्पताल प्रबंधन का दायित्व भी होगा। इसके अलावा, यदि किसी अस्पताल को दर सूची में संशोधन करना हो, तो इसकी लिखित सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को देना आवश्यक है। संशोधित दर सूची को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसका उद्देश्य रोगियों के अधिकारों की रक्षा करने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना है। यह निर्देश म.प्र. उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम, 1973 और नियम, 1997 (यथासंशोधित 2021) के नियम 17 के अनुसार जारी किए गए हैं। सभी निजी चिकित्सालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इन प्रावधानों का पालन करें। आयुक्त राठी ने समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इसके अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। दर सूची के बिना अतिरिक्त शुल्क लेना नियमों का उल्लंघन है, मनमानी शुल्क वसूलने की घटनाओं को रोकने के लिए सतत निरीक्षण करने के आयुक्त ने निर्देश दिये हैं।  

Parvati-Kali Sindh-Chambal Link Project में पूर्व में बनाई गई कार्ययोजना में बदलाव

भोपाल   पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मालवा रीजन में अगले विधानसभा चुनाव के पहले सिंचाई और पेयजल के लिए पानी दिलाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके चलते दूसरे फेज में शामिल मालवा रीजन के कामों को अब पहले फेज में पूरा कराने का फैसला लिया है। इसके लिए पूर्व में बनाई गई कार्ययोजना में बदलाव मंत्री स्तरीय बैठकों में किया है। इसके बाद अब संशोधित पार्वती-काली सिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के किसानों को फायदा मिलेगा। किसानों को न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पानी मिलेगा बल्कि संबंधित क्षेत्र में पर्यटन और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के संबंधित जानकारी     पार्वती काली सिंध चंबल लिंक परियोजना में एमपी की 17 परियोजनाएं एवं राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल हैं। इस परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है।     परियोजना के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश के लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर नवीन क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल मिलेगा।     उद्योगों के लिए लगभग 172 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 40 लाख परिवारों को फायदा होगा। एमपी में 35 हजार करोड़ होंगे खर्च संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना में मध्यप्रदेश से पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा एवं सहायक नदियों के जल का अधिकतम उपयोग किया जायेगा। प्रदेश में इन परियोजनाओं की कुल लागत 35 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है। एमपी में यहां बनेंगे बांध     परियोजना के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स में 4 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा एवं धनवाड़ी) बनाए जाएंगे।     यहां 2 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ) में बनेंगे।     कुम्भराज कॉम्प्लेक्स में 2 बांध (कुंभराज-1 एवं कुंभराज-2) बनेंगे। रणजीत सागर, लखुंदर बैराज एवं ऊपरी चम्बल कछार में 7 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेड़ी, चितावद तथा सीकरी सुल्तानपुरा) बनाए जाएंगे।     गांधी सागर बांध की अप स्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन 13 जिलों को मिलेगा पानी इस परियोजना से राज्य के 13 जिलों मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, श्योपुर, इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास एवं राजगढ़ को सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन एवं औद्योगिक प्रयोजन के लिए पानी मिलेगा। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का कार्य आगामी 5 वर्ष में पूर्ण कर लिया जाएगा। 21 बांध बैराज, रिजर वायर बनाए जाएंगे परियोजना अंतर्गत कुल 21 बांध, बैराज एवं बैलेंसिंग रिजरवायर आदि का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना में मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मध्य मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर (CRMC) एवं मध्य प्रदेश क्षेत्र में CRMC सिस्टम को अंतिम छोर तक नवीकरण एवं आधुनिकीकरण का प्रावधान रखा गया है, इससे मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड जिलों को सिंचाई एवं पेयजल के लिए आवंटित जल मिलेगा। ऐसे चली परियोजना डीपीआर बनाने की प्रक्रिया     केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्य प्रदेश, राजस्थान के मुख्यमंत्री और दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव एवं सचिव की मौजूदगी में 28 जनवरी 2024 को परियोजना की डीपीआर तैयार करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।     संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स की 6 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है।     शेष परियोजनाओं की डीपीआर विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन है।     संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का भारत सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट समझौता अनुबंध को मध्य प्रदेश शासन द्वारा संशोधन के बाद भारत सरकार को 25 अक्टूबर 2024 को भेजा है।  

केन्द्रीय कर्मचारियों पेंशनरों के डीए में 3 फीसदी की वृद्धि होना तय, अंतिम फैसला मोदी सरकार को लेना

नई दिल्ली एक करोड़ केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए खुशखबरी है।नए साल में एक बार फिर महंगाई भत्ता बढ़ने वाला है। हालांकि डीए में कितनी वृद्धि होगी यह AICPI इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करेगा।इसका लाभ केंद्र सरकार ने 50 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 65 लाख से ज्यादा पेंशनरों को मिलेगा।यह बढ़ोतरी 7th Pay Commission के तहत की जाएगी। श्रम विभाग द्वारा जारी जुलाई से सितंबर के आंकड़ों की बात करें तो AICPI Index अंक 141.5 पर पहुंच गया है और DA स्कोर 54.49% पहुंचा है, हालांकि अभी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के आंकड़े आना बाकी हैं। इसके बाद तय होगा डीए में कितनी वृद्धि होगी। अगर दिसंबर 2024 तक इंडेक्स में 144-145 अंक तक पहुंचता है और डीए स्कोर 55% से ज्यादा होता है तो डीए में 3 फीसदी की वृद्धि होना तय है। हालांकि अंतिम फैसला मोदी सरकार को लेना है। जनवरी 2025 से बढ़ेगा Dearness Allowance     दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा साल में 2 बार केन्द्रीय कर्मचारियों पेंशनरों के डीए/डीआर की दरों में संशोधन किया जाता है, जो AICPI इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह वृद्धि जनवरी/जुलाई से होती है। जनवरी 2024 से 4% तो जुलाई में 3 फीसदी डीए बढ़ाया गया था, जिसके बाद डीए 53% हो गया है।     अब अगला डीए जनवरी 2025 से बढ़ाया जाना है, जो कि AICPI इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करेगा। अबतक के आंकड़ों पर गौर करें तो नए साल में फिर 3 फीसदी डीए बढ़ सकता है, चुंकी नई दरें जनवरी 2025 से लागू होंगी ऐसे में एरियर का भी लाभ मिलने की उम्मीद है।सुत्रों की मानें तो बजट के पहले या बाद में कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका ऐलान कर सकते है। ऐसे होगी महंगाई भत्ते की गणना     डीए और डीआर में बढ़ोतरी का कैलकुलेशन औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत में हुई प्रतिशत वृद्धि के आधार पर की जाती है। सरकार अमूमन हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इन भत्तों में संशोधन करती है।     केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए DA ऐसा होता है कैलकुलेट- DA% = [(Average of AICPI (Base Year 2001 = 100) पिछले 12 महीने के लिए – 115.76)/115.76] x 100     पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों के लिए DA ऐसा होता है कैलकुलेट- DA% = [(Average of AICPI (Base Year 2001 = 100) पिछले 3 महीने के लिए – 126.33)/126.33] x 100

प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार, 92 लाख में कचौड़ी की दुकान

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 14 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत हो रही है। इससे पहले प्रशासनिक और सरकार की तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है। देश-दुनिया से करीब 40 करोड़ लोगों के महाकुंभ मेला में पहुंचने की उम्मीद है। मेले में आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए तमाम व्यवसायी अपनी दुकान वहां लगाने की जुगत में हैं। ऐसे में मेला प्रशासन की ओर से भी दुकानों के आवंटन को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। 30 X 30 फीट के दुकान के किराए को जानकर आप हैरान हो जाएंगे। एक प्लेट कचौड़ी की कीमत भले ही 30 रुपये हो, लेकिन करीब 900 स्क्वायर फीट की दुकान का किराया 92 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। 13 जनवरी से शुरू होगा महाकुंभ प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा। इसको लेकर जमीनों का आवंटन शुरू हुआ है। यहां पर दुकान लगाने के लिए आवंटित होने वाली जमीन की कीमत कई-कई लाख में मिल रही है। प्राइम लोकेशन पर जमीन के किराए की दर काफी महंगी है। कचौड़ी की दुकान में बगल में लड्‌डू की दुकान के लिए जमीन का आवंटन किया गया है। इसका किराया 75 लाख रुपये रखा गया था। महाकुंभ में लगनी वाली दुकानों पर महाकुंभ के डेढ़ महीने ही भीड़ रहेगी। भव्य महाकुंभ की है तैयारी प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार की गई है। 4000 हेक्टेयर यानी 15,840 बीघा क्षेत्र में मेला क्षेत्र को बनाया जाएगा। यहां पर पहली बार 13 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बन रहा है। इसमें 40 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। भव्य आयोजन के कमाई की अपार संभावनाओं को देखते हुए हर व्यापारी यहां दुकान लगाना चाहता है। मेला क्षेत्र में निर्माण के लिए जगह-जगह जेसीबी से जमीन समतल की जा रही है। गंगा पर पांटून पुल (पीपा पुल) बन रहे हैं। सजने लगी हैं दुकानें मेला क्षेत्र में दुकान भी सजने लगे हैं। दुकानों में अब लोगों की भीड़ भी आने लगी है। संगम किनारे निर्धारित दुकानों के किराए सबसे अधिक हैं। कचौरी और लड्‌डू की दुकानें सबसे महंगी हैं। परेड ग्राउंड में महाराज कचौड़ी एवं प्रसाद भोग के नाम से एक दुकान है। 30 X 30 वर्गफीट की इस दुकान का टेंडर 92 लाख रुपए में फाइनल हुआ है। इस दुकान को पवन कुमार मिश्रा ने लिया है। वे कहते हैं कि कचौड़ी और लड्डू बनाने का काम पहले से करते रहे हैं, लेकिन कुंभ में पहली बार दुकान लगाने के बारे में सोचा। पवन मिश्रा ने कहा कि मेला प्रशासन हमें अपनी दुकान से करीब 200 मीटर दूर जगह देगा। वह भी रोड पर स्थित है। 2 महीने हम वहीं दुकान लगाएंगे। उसके बाद वापस इस जगह पर आ जाएंगे। अभी बताया जा रहा है कि जिस जगह हमारी दुकान है, वहां विश्व हिंदू परिषद को जगह दी गई है। पवन कहते हैं कि भले किराया अधिक लगा हो, लेकिन सामग्रियों के दाम नहीं बढ़ाएंगे। 76 लाख में लड्‌डू की दुकान लेटे हुए हनुमान मंदिर पर इस बार लड्डू की दुकानों में इजाफा हुआ है। जय बजरंग भोग नाम की एक दुकान अब यहां पर खुली है। इस लड्डू की दुकान के लिए टेंडर 76 लाख रुपये में खुला। वहीं, परेड ग्राउंड में ही महाकाल प्रसाद भोग एवं कचौड़ी भंडार दुकान 75 लाख रुपये में बकही है। झूंसी साइड और मेला क्षेत्र के अंदर भी दुकानों की बिक्री हो रही है। वहां भी रेट हाई है। गंगा की तराई में कुंभ के दौरान लगने वाली दुकानों का रेट अन्य जगहों के मुकाबले कम है। 10 हजार दुकानों का टारगेट महाकुंभ के आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने 10 हजार दुकानें बेचने का टारगेट रखा गया है। 2019 के कुंभ में कुल 5721 स्टॉल के आवेदन आए थे। 2012 के महाकुंभ में यह संख्या करीब 2000 हजार थी। उस समय ऑफलाइन टेंडर के जरिए आवंटन होता था। 2019 से टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। 13 नवंबर से दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अब तक 2000 से अधिक दुकानों का टेंडर हो चुका है। गंगा तराई में लगने वाली दुकानों का किराया भी तीन से 5 लाख रुपये तक पहुंच रहा है।

भारतीय नौसेना की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए पाकिस्तान में भी नेवी को मजबूत करने की मांग उठने लगी

इस्लामाबाद भारतीय नौसेना की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए पाकिस्तान में भी नेवी को मजबूत करने की मांग उठने लगी है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक और भारत में उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े में परमाणु चालित पनडुब्बी शामिल करने की मांग की है। पाकिस्तान के पास वर्तमान में एक भी परमाणु चालित पनडुब्बी नहीं है। अब्दुल बासित ने भारतीय नौसेना की परमाणु हमला करने की क्षमता का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर सबमरीन की आवश्यकता पर जोर दिया। बासित ने कहा कि भारत ने हाल की न्यक्लिर सबमरीन से के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो बहुत बड़ी कामयाबी है। इसकी क्षमता 3500 किलोमीटर है। भारत के वर्तमान में अरिहंत और अरिघात श्रेणी की परमाणु चालित पनडुब्बियां हैं। एक दिन पहले सोमवार को ही भारतीय नौसेना प्रमुख ने भारत की पूर्ण स्वदेशी निर्मित पनडुब्बी को शामिल करने की योजना का खुलासा किया है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने बताई भारत की बढ़त अब्दुल बासित ने कहा कि भारत रक्षा पर भारी खर्च कर रहा है और जवाबी हमला करने की क्षमता की तरफ जा रहा है। पाकिस्तान के पास सबमरीन तो हैं, लेकिन न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन नहीं हैं। उन्होंने कहा, हम कोशिश कर रहे हैं कि हमारे पास जो पारंपरिक मिसाइल हैं, वे परमाणु मिसाइल फायर कर सकें। लेकिन सेकंड स्ट्राइक क्षमता के लिए पाकिस्तान को न्यूक्लियर पावर सबमरीन की आवश्यकता होगी।’ पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक ने आगे बताया कि परमाणु चालित पनडुब्बी का फायदा ये है कि वह बिना ऊपर आए तीन से चार महीने तक समंदर के नीचे रह सकती है। जवाबी हमला करने की क्षमता के लिए यह एक बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘मान लीजिए कि भारत हमारे ऊपर पहला हमला करता है और सारी परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर देता है। तो हमारे पास वो क्षमता बची होनी चाहिए कि हम सेकंड स्ट्राइक करें।’ पाकिस्तान के लिए बताई जरूरत बासित ने कहा कि भविष्य में हमें भी परमाणु पनडुब्बी लेनी होंगी। भारत जिस तरह से अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ा रहा है, पाकिस्तान इससे दूर नहीं रह सकता है। हमें अपनी रक्षा के लिए वो तमाम उपाय करने होंगे, जो जरूरी हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि दोनों देशों के बीच हालात सुधरें। बासित का ये बयान पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान में उस मजबूत नैरेटिव को दिखाता है, जो भारत की सेना के आधुनिकीकरण को एक बढ़ते खतरे के रूप में देखता है और इसके लिए जवाबी उपाय की आवश्यकता पर जोर देता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने पाकिस्तान द्वारा अल्प से मध्यम अवधि में परमाणु ऊर्जा पनडुब्बी क्षमता हासिल करने की व्यवहार्यता पर चिंता जताई है, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी।

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