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इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए राजस्थान सरकार देगी 200 करोड़ रू की सब्सिडी देगी, मिलेगा बढावा

जयपुर प्रदेश मे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढावा देने हेतु इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अन्तर्गत 200 करोड़ रू का ई-व्हीकल प्रमोशन फंड गठित किया गया है। राज्य सरकार की ‘‘इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022‘‘ के अन्तर्गत फेम-2 के दिशा निर्देशों के अनुरूप आधुनिक बैटरी युक्त इलैक्ट्रिक वाहनों के क्रेताओं को स्टेट जीएसटी राशि का पुनर्भरण एवं एकमुश्त अनुदान ई-व्हीकल प्रमोशन फंड में से दिये जाने का प्रावधान किया गया है। पुनर्भरण एवं एकमुश्त अनुदान राशि 01.09.2022 से क्रय किए गए एवं राज्य में पंजीकृत किये गये वाहनो पर देय होगा। वाहन का क्रय राजस्थान राज्य से ही किया जाना आवश्यक है। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री जगदीश प्रसाद बैरवा ने बताया कि अनुदान हेतु सर्वप्रथम पॉलिसी के अन्तर्गत फेम-2 में पंजीकृत वाहन विनिर्माता को विभागीय पोर्टल  पर रजिस्ट्रशन करवाना आवश्यक है। रजिस्ट्रेशन के बाद विभाग  द्वारा सत्यापन किये जाने के पश्चात् निर्माता द्वारा पुनः पोर्टल पर  फेम-2 के दिशा निर्देशों के अनुरूप आधुनिक बैटरी (Advanced Batteries like Lithum-ions) युक्त वाहन का मॉडल, बैटरी का प्रकार व बैटरी क्षमता की सूचना दर्ज की जानी है। पोर्टल पर उपरोक्तानुसार कार्यवाही के पश्चात् विभाग द्वारा वाहन का माडल, बैटरी का प्रकार व बैटरी क्षमता इत्यादि का सत्यापन किया जाकर वाहन क्रेताओं को पुनर्भरण एवं अनुदान राशि के क्लेम हेतु आवेदन के लिए वाहन पोर्टल पर अनुमत किया जाएगा। वाहन स्वामी द्वारा अपने वाहन के पंजीयन क्रंमाक एवं चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक पोर्टल पर दर्ज होंगे। फिर आवेदक के मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से ओटीपी भेजा जाएगा। वाहन स्वामी अपने बैंक खाते का विवरण को बैंक के दस्तावेज़ जैसे पासबुक फ्रंट पेज/रद्द किए गए चेक के साथ अपलोड करेगा, फिर आवेदन सबमिट करेगा। अनुदान राशि का सीधे ही वाहन स्वामी के खाते में हस्तांतरण कर दिया जायेगा। प्रोत्साहन के लिए इलैक्ट्रिक वाहनों की संख्या प्रत्येक श्रेणी के लिए दी गई सीमा के अनुसार होगी। अतः संबंधित वाहन विनिर्माता, वाहन डीलर्स व वाहन क्रेता अनुदान रािश प्राप्त करने के लिए यथा शीघ्र पोर्टल आवेदन किया जाना सुनिश्चित करें।

इंदौर सहित अन्य शहर भी बन रहे टेक इनोवेशन और निवेश के नए हॉटस्पॉट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है किआईटी और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में सबसे तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जिसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से नई ऊर्जा मिलेगी। इस सेक्टर के लिए समिट में अलग से सत्र आयोजित होगा। मध्यप्रेदश में 15 से अधिक आईटी पार्क और 5 आईटी एसईजेड हैं, जिनमें इंदौर में क्रिस्टल आईटी पार्क और इंफोसिस जैसे प्रमुख सेंटर शामिल हैं। ये पार्क विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त हैं, जो टीसीएस, इंफोसिस और एक्सेंचर जैसी प्रमुख कंपनियों को आकर्षित करते हैं। नॉलेज सिटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 जैसी आगामी परियोजनाएं, इस इको सिस्टम को और मजबूत करने के लिए तैयार हैं। परिवर्तन के दौर से गुजर रहे देश के तकनीकी इको सिस्टम के विकास के अगले केन्द्र टीयर-2 शहर हैं, जो टेक इनोवेशन और निवेश के नए हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं। इसकी वजह है यहां कम परिचालन लागत, उच्च जीवन स्तर और कुशल प्रतिभा पूल की उपलब्धता। टीयर-2 शहर अब तकनीकी कंपनियों की पसंद बनते जा रहे हैं। खास बात है कि मध्यप्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलेंट और लागत-दक्षता प्रदान करने वाला अग्रणी राज्य है। मध्यप्रदेश का व्यापक आईटी, आईटीईएस और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। विश्व स्तरीय आईटी पार्क, नॉलेज और सॉफ्टवेयर हब के साथ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने से निश्चित रूप से मध्यप्रदेश तकनीकी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करेगा। 300 से अधिक तकनीकी शिक्षा संस्थान मध्यप्रदेश की विशेषता है कि 300 से अधिक तकनीकी शिक्षा संस्थान सालाना 50 हजार से अधिक तकनीकी स्नातक तैयार करते हैं। आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर और आईआईआईटी ग्वालियर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अत्यधिक कुशल युवाओं को गढ़ते हैं। भोपाल में ग्लोबल स्किल पार्क उद्योग के लिए कौशल संपन्न पेशेवर तैयार करता है। प्रगतिशील नीतियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की प्रगतिशील नीतियां और इनोवेशन को बढ़ावा देने और तकनीक के क्षेत्र में विश्वस्तरीय दिग्गज कंपनियों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। मध्यप्रदेश का मजबूत पॉलिसी-स्ट्रक्चर प्रौद्योगिकी संचालित विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति 2023, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी 2025, एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी 2025, ड्रोन संवर्धन और उपयोग नीति 2025 और सेमीकंडक्टर नीति 2025 शामिल हैं। ये नीतियां टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करती हैं। टेलेंट और इनोवेशन को बढ़ावा प्रदेश सरकार के फोकस में उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ टेलेंट और इनोवेशन को बढ़ाते हुए आईटी पार्क, सॉफ्टवेयर हब और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण निवेश हैं। अग्रणी तकनीकी हब बनने की दृष्टि के साथ मध्यप्रदेश डिजिटल भविष्य को शक्ति प्रदान करने के रास्ते पर अग्रसर है। आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति 2023 इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर केंद्रित है, जो कैपेक्स, भूमि, ब्याज छूट, मार्केटिंग और पेटेंट सहायता आदि प्रदान करती है। दूसरी ओर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी 2025 वैश्विक तकनीकी केंद्रों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो कैपेक्स, पेरोल और अपस्किलिंग के लिए सब्सिडी, आरएंडडी को सपोर्ट करती है। इसी तरह एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी-2025 एवीजीसी सेक्टर को सपोर्ट करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, उत्पादन संबंधी वित्तीय सहायता, उद्योग सहयोग और एवीजीसी-एक्सआर लैब की स्थापना आदि के लिए सहयोगी है। इसके अलावा ड्रोन संवर्धन और उपयोग नीति 2025 ड्रोन निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए कैपेक्स सहायता, ड्रोन पाठ्यक्रमों के लिए प्रोत्साहन और अनुसंधान एवं विकास में सहयोग के साथ ड्रोन अपनाने को बढ़ावा देती है। इसके बाद सेमीकंडक्टर नीति 2025 महत्वपूर्ण है, जो कैपेक्स प्रोत्साहन और सीओई, पेरोल और कौशल विकास आदि के लिए सहयोग के साथ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करती है। परिवर्तनकारी निवेशों की लहर मध्यप्रदेश ने परिवर्तनकारी निवेशों की एक लहर देखी है, जो भारत के अगले बड़े तकनीकी केन्द्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता है। इंदौर में एलटीआई माइंडट्री का 870 करोड़ रुपये का तकनीकी परिसर 10 हजार से ज्यादा नौकरियां प्रदान करेगा, जो आईटी सेवाओं और डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं में मध्यप्रदेश की भूमिका को मजबूत करेगा। रैकबैंक का डेटा सेंटर विस्तार में 644 करोड़ रुपये का निवेश मध्यप्रदेश के डिजिटल बुनियादी ढांचे और क्लाउड सेवाओं को मजबूत कर रहा है। हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज और कॉग्निजेंट क्रमशः 50 करोड़ रुपये और 80 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अपनी उपस्थिति का और विस्तार कर रहे हैं। ये परियोजनाएं साल 2024 में हासिल किए गए 2,500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी निवेश के साथ मध्यप्रदेश को पारंपरिक आईटी केंद्रों के समक्ष एक बेहतर और सक्षम विकल्प बनाती हैं। देश की डिजिटल क्रांति के साथ तालमेल मध्यप्रदेश न केवल देश की डिजिटल क्रांति के साथ तालमेल बना रहा है, बल्कि यह इसका नेतृत्व भी कर रहा है। एआई, साइबर सुरक्षा, एवीजीसी-एक्सआर और ड्रोन में राज्य का विजन इनोवेशन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की अगली लहर के लिए आधार तैयार कर रहा है। एआई और साइबर सुरक्षा में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) की स्थापना, आगामी एवीजीसी, मीडिया पार्क और इनक्यूबेशन हब के साथ, अत्याधुनिक अनुसंधान और उद्योग सहयोग के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध है। प्रगतिशील नीति ढांचे, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और प्रचुर प्रतिभा पूल के साथ मध्यप्रदेश भारत का अगला प्रमुख टेक पॉवरहाउस बनने के रास्ते पर अग्रसर है।  

प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष-2020 का स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा

भोपाल प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष-2020 का स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रतापसिंह की अध्यक्षता में क्रियान्वयन के लिये राज्य स्तरीय टॉस्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति में अध्यायवार राज्य स्तरीय समितियों का भी गठन किया गया है। अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को न्यू एजुकेशन पॉलिसी पर केन्द्रित ऑनलाइन उन्मुखीकरण प्रशिक्षण दिया गया है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी ट्रेकर के साथ क्रियान्वयन की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा प्रदेश में वर्ष 2024-25 की वार्षिक कार्य-योजना की स्वीकृति के आधार पर 4473 शालाओं में पूर्व प्राथमिक कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं। इन शालाओं में आयु वर्ग समूह 3 से 6 के लगभग एक लाख बच्चे दर्ज हैं। शालाओं में उपलब्ध अतिरिक्त शिक्षक और कक्षा-1 और 2 को पढ़ाने वाले शिक्षकों द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को पीएम पोषण उपलब्ध कराने के लिये शिक्षा पोर्टल पर प्रावधान किया गया है। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) से संबंधित 170 मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षित किये गये हैं। नर्सरी, के.जी.-I और के.जी.-II के बच्चों के लिये वर्क-बुक भाग-1, 2 और 3 और उनके मूल्यांकन के लिये समग्र प्रगति पत्रक तैयार किये गये हैं। इन बच्चों के भाषा और संज्ञानात्मक विकास के लिये 10 विषयों पर पोस्टर तैयार किये गये हैं। पहले चरण में प्रदेश की 18 हजार 650 आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया था। दूसरे चरण में करीब 40 हजार आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिलाया गया है। प्रशिक्षण के बाद आँगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की दक्षता के साथ देखभाल, अक्षर और भाषा का ज्ञान दे रही हैं। मिशन अंकुर का क्रियान्वयन प्रदेश में कक्षा-1 एवं 2 की विषयवार अभ्यास पुस्तिकाएँ और शिक्षक मार्गदर्शिका तैयार कर बच्चों एवं शिक्षकों को उपलब्ध करायी गयी हैं। प्राथमिक कक्षाओें के लिये विभाग द्वारा लर्निंग किट तैयार कर शालाओं को उपलब्ध करायी गयी हैं। राज्य में खेल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये जादुई पिटारा प्रदाय किये जाने की कार्यवाही की जा रही है।  

माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर बन सकता है नया रिकॉर्ड, महाकुंभ में स्नानार्थियों की संख्या 45 करोड़ के पार

महाकुंभ नगर मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्नान अब उस शिखर पर पहुंच गया है, जिसकी महाकुंभ से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उम्मीद जताई थी। सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार जो भव्य और दिव्य महाकुंभ का आयोजन हो रहा है, वह स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा। उन्होंने शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई थी। उनका यह आंकलन महाकुंभ के समापन से 15 दिन पहले ही सच साबित हो गया। मंगलवार की सुबह 8 बजे ही महाकुंभ में 45 करोड़ स्नानार्थियों की संख्या पार हो गई। मंगलवार को सुबह 8 बजे तक करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाई, जिसके साथ ही महाकुंभ में स्नानार्थियों की संख्या 45 करोड़ पार हो गई। अभी महाकुंभ को 15 दिन और दो महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष हैं। पूरी उम्मीद है कि स्नानार्थियों की संख्या 50-55 करोड़ के ऊपर जा सकती है। प्रयागराज में तीनों अमृत स्नान (मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी) के बाद भी श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से पवित्र त्रिवेणी में श्रद्धा और आस्था के साथ डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु प्रतिदिन लाखों, करोड़ों की संख्या में प्रयागराज पहुंच रहे हैं। बसंत पंचमी के अंतिम अमृत स्नान पर्व के बाद भी श्रद्धा का जबरदस्त उत्साह लोगों को संगम तट तक खींचकर ला रहा है। मंगलवार को सुबह 8 बजे तक 49.68 लाख लोगों ने त्रिवेणी में स्नान किया। इसके बाद कुल स्नानार्थियों की संख्या 45 करोड़ के ऊपर पहुंच गई। स्नानार्थियों में 10 लाख कल्पवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए श्रद्धालु एवं साधु-संत शामिल रहे। यदि अब तक के कुल स्नानार्थियों की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान किया था। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ से ज्यादा और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई। इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी। माघ पूर्णिमा से पहले भी प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम तट पर पवित्र स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, महाशिवरात्रि पर भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। महाकुंभ का समापन 26 फरवरी को होना है।

गन्ना कटाई के लिए महाराष्ट्र गए सात बच्चों सहित 17 मजदूरों को बनाया बंधक, पुलिस ने कराया मुक्त

बुरहानपुर गन्ना कटाई के लिए महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के गंभीरवाड़ी गांव ले जाए गए बंभाड़ा गांव के सात बच्चों व दस महिला-पुरुषों को बंधक बना कर काम कराने का मामला सामने आया है। शाहपुर थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मंगलवार को उन्हें मुक्त करा बुरहानपुर ले आई है। इस संबंध में गमा बारेला निवासी चांदगढ़ बंभाड़ा ने कलेक्टर को आवेदन दिया था। इस पर 29 जनवरी को कलेक्टर ने एसपी देवेंद्र पाटीदार को पत्र जारी कर बंधकों को मुक्त कराने का आदेश दिया था। शिकायत में बताया गया था कि भाया पुत्र देवसिंह निवासी वड़ीधरण तहसील यादव जिला जलगांव महाराष्ट्र द्वारा मजदूरों को सतीष पांढरे निवासी गंभीरवाड़ी तहसील कलम महाराष्ट्र के खेत में गन्ना कटाई के लिए ले गया था। मोबाइल भी छीन लिया था एक सप्ताह बाद मजदूरों ने सतीष पांढरे से राशन के लिए रुपये मांगे तो उसने देने से इनकार कर दिया। उन्हें थोड़ा-थोड़ा राशन दिया जाता था। करीब चार माह बाद जनवरी में जब मजदूरों ने अपनी मजदूरी के रुपये मांगे तो सतीष ने इससे भी इनकार कर दिया और उनके साथ मारपीट करने लगा। उसने मजदूरों के मोबाइल भी छीन कर रख लिए थे। इसके चलते वे किसी से मदद नहीं मांग पा रहे थे। एसपी के निर्देश पर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने एएसआई महेंद्र पाटीदार, महिला प्रधान आरक्षक शाबाई मौर्य, संस्था जन साहस के लीगल को-आर्डिनेटर सीएस परमान, राज्य समन्वयक माश्मीन खान व एफओ देवभोरे की टीम गठित कर 11 फरवरी को रवाना की थी। उस्मानाबाद कलेक्टर और स्थानीय पुलिस के सहयोग से टीम ने मजदूरों को मुक्त कराया और बुरहानपुर ले आई। कहीं दर्ज नहीं होता पलायन जिले के खकनार व नेपानगर क्षेत्र से हर साल हजारों की संख्या में मजदूर पलायन कर महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों में मजदूरी करने जाते हैं। कुछ साल पूर्व तत्कालीन कलेक्टर ने ग्राम पंचायतों को पलायन करने वाले मजदूरों की जानकारी एक रजिस्टर में संधारित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इनका पालन नहीं किया गया।

ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस कर्मियों के लिये आयोजित हुई प्रदेश स्तरीय कार्यशाला

भोपाल मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस (टी.एल.एम.) कर्मियों की दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में प्रदेश के टी.एल.एम. उपसंभाग के 40 कर्मियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में लाइन कर्मियों को नेतृत्व कौशल, टीम वर्क के साथ सहायक एवं समावेशी तरीके से कार्य करने के अलावा अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में प्रबंध संचालक इंजी. सुनील तिवारी ने कहा कि इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य ट्रांसमिशन कंपनी में नये टीम लीडर तैयार करना है, जो पावर सेक्टर में बदलती परिस्थितियां और बढ़ती चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि एम.पी. ट्रांसको को देश की सर्वश्रेष्ठ ट्रांसमिशन कंपनी बनाये रखने के लिये वर्तमान कार्यशैली में बदलाव की आवश्यकता है। इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं कर्मियों के आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाने में सहायक हो रही है। सभी ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस कर्मियों को बेयरहेंड मेंटेनेंस के साथ-साथ हॉट लाइन मेंटेनेंस की ट्रेनिंग लेना चाहिए, ताकि वो लाइन मेंटेनेंस की सभी विधाओं में पारंगत हो सके। उन्होंने कर्मियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में जाना और उन्हें दूर करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। पहली बार वरिष्ठ लाइन कर्मियों ने भी दिया प्रशिक्षण मुख्य अभियंता श्री संदीप गायकवाड़ की परिकल्पना पर एम.पी. ट्रांसको के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस कर्मियों के लिये पहली बार इस तरह की कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें मुख्य बात यह रही वरिष्ठ लाइन कर्मियों श्री गप्पू सिंह इटारसी एवं जबलपुर के श्री मंगल पनिका, श्री राजेन्द्र कुशवाहा आदि ने न केवल प्रशिक्षण प्राप्त किया बल्कि उन्होंने साथियों को जीरो एक्सीडेंट लक्ष्य के साथ किस तरह विभिन्न परिस्थितियों में संयम के साथ कार्य निष्पादित करना है, इस संबंध में अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने मेंटेनेंस के महत्वपूर्ण गुर भी सिखाये।  

वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय में सतत एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और नवाचारों पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

भोपाल वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग प्रोग्राम ने इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एयर ब्रीथिंग इंजन (आईएसएबीई) के सहयोग से 7-8 फरवरी, 2025 को सस्टेनेबल एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन (आईसीएसएटीआई 2025) पर अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया। सम्मेलन की शुरुआत से पहले, सभी प्रतिभागियों के लाभ के लिए गैस टर्बाइन प्रौद्योगिकी पर एक प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला भी आयोजित की गई।वीआईटी विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन, डॉ. जयरामन को सम्मानित करते हुए किशोर-अध्यक्ष यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल और पूर्व रोल्स रॉयस एशिया-पैसिफिक अध्यक्ष। सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. सुरेश संपत, क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी, यूके (सबसे दाएं) और मुख्य अतिथि पद्म श्री डॉ. अजय कुमार रे (सबसे बाएं) देख रहे हैं।उद्घाटन समारोह में वीआईटी विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन ने मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रोफेसर अजय कुमार रे (निदेशक, जेआईएस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज एंड रिसर्च; पूर्व निदेशक, आईआईईएसटी शिबपुर; पूर्व प्रोफेसर, आईआईटी खड़गपुर) को सम्मानित किया। आईआईटी दिल्ली सोनीपत परिसर के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सीईओ डॉ. आलोक पांडे ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। यह सस्टेनेबल एयरोस्पेस इंजीनियरिंग सम्मेलन भारत में एयरोस्पेस के क्षेत्र में ऐसे अग्रणी सम्मेलनों में से एक है।प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति जिन्होंने इस सम्मेलन में डॉ. फ्रैंक हेसलबैक, अध्यक्ष, ISABE और वरिष्ठ उपाध्यक्ष, AIRBUS; डॉ. सामी गिरगिस एसोसिएट डायरेक्टर, प्रैट एंड व्हिटनी, कनाडा ने ऑनलाइन मुख्य भाषण के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ICSATI 2025 में 9 मुख्य सत्र, 7 तकनीकी सत्र, 2 पैनल चर्चाएँ, तकनीकी कार्यक्रम: स्पेस टैंक और एक शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। IIT, NITS, DRDO, VSSC और ISRO और अन्य विश्वविद्यालयों जैसे विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए। विजेताओं को डॉ. जी. विश्वनाथन सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।सबसे पहले, स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के डीन डॉ. एस. बालागुरु ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रो वाइस चांसलर डॉ. टी.बी. श्रीधरन ने एयरोस्पेस नवाचारों में स्थिरता के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने शीर्ष प्रबंधन चांसलर माननीय डॉ. जी. विश्वनाथन, उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन, सहायक उपाध्यक्ष सुश्री कधंबरी एस. विश्वनाथन और ट्रस्टी मैडम रमानी बालासुंदरम को उनके समर्थन और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत जी.के. ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा तिलका मांझी की जयंती पर किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय गौरव श्रद्धेय बाबा तिलका मांझी की जयंती पर नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि अधिकारों एवं संस्कृति की रक्षा के लिए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से पहले ही बाबा तिलका मांझी ने संघर्ष का बिगुल फूंका था। ब्रिटिश सत्ता को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए किए गए उनके प्रयास इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र सदैव बाबा मांझी का ऋणी रहेगा।  

ओपनएआई के सीईओ, सैम ऑल्टमैन ने कहा, भारत एआई का एक बड़ा बाजार है

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उद्योगों और ग्लोबल टेक्नोलॉजी लैंडस्केप को फिर से परिभाषित कर रहा है। साथ ही भारत इस क्रांति में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। यह बयान पेरिस में चल रही एआई एक्शन समिट में ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स द्वारा दिए गए। एआई एक्शन समिट का तीसरा संस्करण एआई गवर्नेंस के लेकर वैश्विक संवादों की सीरीज में लेटेस्ट है और इसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी एआई क्षेत्र में भारत की बढ़ती हुई क्षमता से अवगत हैं। ओपनएआई के सीईओ, सैम ऑल्टमैन ने कहा, “भारत एआई का एक बड़ा बाजार है। साथ ही हमारी कंपनी के लिए दूसरी सबसे बड़ी मार्केट है। बीते एक वर्ष में यहां हमारे यूजर्स की संख्या तीन गुना बढ़ी है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत के लोग स्टैक, चिप, मॉडल और कई असाधारण एप्लीकेशन बना रहे हैं। एआई क्रांति में भारत को एक लीडर के रूप में उभरना चाहिए।” गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत में फ्रंट से नेतृत्व करने की क्षमता है। ग्लोबल टेक लीडर्स ने बताया कि अच्छा टैलेंट पूल और एआई टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने के कारण भारत एआई इनोवेशन, विकास और उसे लागू करने में तेजी से आगे बढ़ने को तैयार है। माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्य नडेला ने कहा, “भारत इंडिक भाषाओं के क्षेत्र में और एआई का उपयोग करके अपने उद्योगों में बदलाव ला सकता है।” साथ ही कहा, “देश में एआई के क्षेत्र में बड़ा काम करने के लिए गणित प्रतिभा, शैक्षणिक संस्थान और अनुसंधान संस्थान हैं।” एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने भारत से “अपनी खुद की एआई का निर्माण करने” का आग्रह किया। हुआंग ने कहा कि देश में अगली पीढ़ी “एआई डिलीवरी के लिए बैक-ऑफिस होगी।” आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा के अनुसार, “भारत में विशाल जनसंख्या और डेटा वेल्थ एआई परिदृश्य में एक अद्वितीय लाभ बनाने में मदद करेगी।” बॉश टेक कंपास सर्वे 2025 के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक भारतीयों ने एआई-संबंधित स्किल में सक्रिय रूप से स्व-शिक्षा प्राप्त की है। एमेरिटस ग्लोबल वर्कप्लेस स्किल्स स्टडी 2025 के मुताबिक, भारत की एआई अपनाने की दर विश्व स्तर पर सबसे अधिक है, पेशेवर करियर की सफलता के लिए एआई स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं। लगभग 94 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों का मानना ​​है कि एआई स्किल में महारत हासिल करने से उनके करियर के विकास में तेजी आएगी। एएमडी की सीईओ लिसा सु ने कहा कि एएमडी के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण है और हमारी उत्पाद लाइन का हर पहलू यहां भारत में हमारे डिजाइन सेंटर से होकर गुजरता है। सु ने आगे कहा कि भारत को एक आवश्यक विकास केंद्र माना जाता है। अमेरिका के बाद एएमडी की सबसे बड़ी अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) सुविधा बेंगलुरु में है।

भोपाल मंडल में मॉक ड्रिल का सफल आयोजन, आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन

भोपाल मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी के मार्गदर्शन में एवं वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी श्री विजय शंकर गौतम के नेतृत्व में आज दिनांक 11 फरवरी 2025 को भोपाल मंडल के बुदनी-नर्मदापुरम  रेलखंड पर मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे की तत्परता, समन्वय और बचाव कार्यों की प्रभावशीलता को परखना था। मॉक ड्रिल की परिकल्पना के अनुसार, सुबह 11:56 बजे नर्मदापुरम  स्टेशन मास्टर द्वारा भोपाल कंट्रोल रूम को सूचना दी गई कि बुदनी-नर्मदापुरम  खंड पर एक इंजीनियरिंग मशीन (रेल ग्रिलिंग मशीन – RGM) पटरी से उतर गई है, जिससे 10-12 रेलवे कर्मचारी घायल हो गए हैं। इस सूचना के आधार पर तत्काल प्रतिक्रिया शुरू की गई। भोपाल और इटारसी में हूटर बजाकर आपातकालीन स्थिति की तैयारी की गई। भोपाल और इटारसी से दुर्घटना राहत चिकित्सा वैन (ARMV) को समय पर तैयार कर रवाना किया गया। भोपाल से दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) को भी त्वरित रूप से तैयार किया गया। इस दौरान सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी (ADSO) श्री ममलेश यादव, इंजीनियरिंग, सिग्नल और ट्रैफिक विभाग के सेफ्टी काउंसलर, सहायक मंडल अभियंता (AEN) भोपाल, सभी विभागों के पर्यवेक्षक, जीआरपी, आरपीएफ तथा स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर समय पर पहुंच गए। इसी के साथ डीआरएम कार्यालय भोपाल में मंडल रेल प्रबंधक और अन्य शाखा अधिकारी स्थिति पर नजर रखने के लिए तुरंत कंट्रोल रूम में पहुंचे। इस मॉक ड्रिल को दोपहर 12:32 बजे सफलतापूर्वक पूरा घोषित किया गया। यह मॉक ड्रिल आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे कर्मचारियों की तत्परता, समयबद्धता और सतर्कता का परीक्षण करने के लिए आयोजित की गई थी। इस दौरान भोपाल मंडल की टीम ने त्वरित और संगठित कार्रवाई की, जिससे रेलवे की आपातकालीन सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता का प्रदर्शन हुआ। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में रेलवे कर्मचारियों को संगठित और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित करना है। इस प्रकार के अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां यह सुनिश्चित करती हैं कि रेलवे किसी भी आपातकालीन स्थिति में यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सतर्क और पूरी तरह तैयार है।

मढ़ई कोर क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित

भोपाल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम के पर्यटन स्थल मढ़ई को प्लास्टिक मुक्त कर दिया गया है। मढ़ई में जंगल सफारी करने वाले पर्यटक प्लास्टिक की बोतल में पानी और पॉलिथिन में सामग्री नहीं ले जा सकेंगे। जंगल सफारी पर जाने वाले टूरिस्ट को टिकिट काउंटर या गेट पर ही प्लास्टिक और पॉलिथिन को जमा करना होगा। मढ़ई पार्क प्रबंधन ने बुधवार 12 फरवरी से मढ़ई कोर क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। पार्क प्रबंधन द्वारा पर्यटकों को पानी ले जाने के लिये स्टील, एल्युमिनियम की पानी की बोतल और कपड़े का थैला भी उपलब्ध कराया जायेगा। पर्यटक बोतल एवं कपड़े का थैला किराये से अथवा खरीद भी सकते हैं।

कलेक्टर ने जनसुनवाई में सुनी आवेदकों की समस्याएं, अधिकारियों को आवेदन निराकरण के दिए निर्देश

अनूपपुर कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने मंगलवार को जनसुनवाई में जिले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए आवेदकों की समस्याएं सुनी। जनसुनवाई में 76 आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर ने जनसुनवाई में आए हर एक आवेदक को धैर्यतापूर्वक उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें आवेदक के शीघ्र निराकरण का आश्वासन भी दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को नागरिकों से प्राप्त आवेदनों पर संवेदनशील रुख अपनाते हुए निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवेदकों की समस्याओं पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को कार्यवाही करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर श्री सुधाकर सिंह बघेल, तहसीलदार अनूपपुर श्री अनुपम पांडेय सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारीगणों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनी।      जनसुनवाई में श्री अमित यादव कोडा तहसील अनूपपुर धान खरीदी-बिक्री की धन राशि दिलाए जाने, धनी बाई मरावी सरपंच परसेलकला तहसील पुष्पराजगढ़ नल जल योजना अंतर्गत नर्मदा नदी व जोहिला नदी से ग्राम पंचायत तक पानी पहुंचाने, श्री राजू प्रसाद औढेरा तहसील अनूपपुर नक्शा एवं तरमीम सुधार कराए जाने, ओम प्रकाश पटेल मजगवां तहसील अनूपपुर निजी भूमि पर लगे फसल व जमीन क्षति का मुआवजा दिलाने, सियाराम केवट वेंकटनगर तहसील जैतहरी राजस्व अभिलेख सुधार, राकेश कुमार मिश्रा लतार सेजरा प्रमाण पत्र दिलाए जाने, ध्यान सिंह गोंड अमली पयारी तहसील अनूपपुर भूमि पर अवैध कब्जा करने से रोके जाने, प्रभाकर उरमालिया बरगवां तहसील अनूपपुर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराए जाने, राजकुमार पटेल भोलगढ़ तहसील अनूपपुर किसान सम्मन निधि लाभ दिलाए जाने के संबंध में आवेदन दिए।

दिल्ली चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद हलचल तेज, जेपी नड्डा ने 10 विधायकों से की मुलाकात

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के 10 नवनिर्वाचित विधायकों ने मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इन विधायकों में विजेंद्र गुप्ता, रेखा गुप्ता, अरविंदर सिंह लवली, अजय महावर, सतीश उपाध्याय, शिखा राय, अनिल शर्मा और डाॅ. अनिल गोयल, कपिल मिश्रा और कुलवंत राणा शामिल हैं। इस विधायकों में 3 से 4 चेहरे मुख्यमंत्री पद के दावेदार बताए जा रहे है। दिल्ली चुनाव में पार्टी की जीत के बाद भाजपा ने सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा विधायकों की जेपी नड्डा से मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले कुछ नवनिर्वाचित विधायकों ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से भी मुलाकात की। अरविंद केजरीवाल को हराने वाले नई दिल्ली के विधायक प्रवेश वर्मा, कैलाश गहलोत और अरविंदर सिंह लवली समेत जीते हुए तमाम विधायकों ने एलजी वीके सक्सेना से मुलाकात की थी। वहीं सोमवार शाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। सूत्रों ने मुताबिक दोनों नेताओं की इस बैठक में दिल्ली के अगले सीएम को लेकर चर्चा हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के अनुसार दिल्ली में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल फ्रांस और अमेरिका के दौरे पर हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जल्द ही भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। जिसमें नवनिर्वाचित विधायक विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 48 सीटों पर जीत मिली है, जबकि आप को 22 सीटें मिली हैं। कांग्रेस का खाता नहीं खुला है।

आईटी और प्रौद्योगिकी में अग्रणी मध्यप्रदेश करेगा भारत के डिजिटल भविष्य का निर्माण: मुख्यमंत्री

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है किआईटी और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में सबसे तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जिसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से नई ऊर्जा मिलेगी। इस सेक्टर के लिए समिट में अलग से सत्र आयोजित होगा। मध्यप्रेदश में 15 से अधिक आईटी पार्क और 5 आईटी एसईजेड हैं, जिनमें इंदौर में क्रिस्टल आईटी पार्क और इंफोसिस जैसे प्रमुख सेंटर शामिल हैं। ये पार्क विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त हैं, जो टीसीएस, इंफोसिस और एक्सेंचर जैसी प्रमुख कंपनियों को आकर्षित करते हैं। नॉलेज सिटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 जैसी आगामी परियोजनाएं, इस इको सिस्टम को और मजबूत करने के लिए तैयार हैं। परिवर्तन के दौर से गुजर रहे देश के तकनीकी इको सिस्टम के विकास के अगले केन्द्र टीयर-2 शहर हैं, जो टेक इनोवेशन और निवेश के नए हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं। इसकी वजह है यहां कम परिचालन लागत, उच्च जीवन स्तर और कुशल प्रतिभा पूल की उपलब्धता। टीयर-2 शहर अब तकनीकी कंपनियों की पसंद बनते जा रहे हैं। खास बात है कि मध्यप्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलेंट और लागत-दक्षता प्रदान करने वाला अग्रणी राज्य है। मध्यप्रदेश का व्यापक आईटी, आईटीईएस और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। विश्व स्तरीय आईटी पार्क, नॉलेज और सॉफ्टवेयर हब के साथ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने से निश्चित रूप से मध्यप्रदेश तकनीकी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करेगा। 300 से अधिक तकनीकी शिक्षा संस्थान मध्यप्रदेश की विशेषता है कि 300 से अधिक तकनीकी शिक्षा संस्थान सालाना 50 हजार से अधिक तकनीकी स्नातक तैयार करते हैं। आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर और आईआईआईटी ग्वालियर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अत्यधिक कुशल युवाओं को गढ़ते हैं। भोपाल में ग्लोबल स्किल पार्क उद्योग के लिए कौशल संपन्न पेशेवर तैयार करता है। प्रगतिशील नीतियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की प्रगतिशील नीतियां और इनोवेशन को बढ़ावा देने और तकनीक के क्षेत्र में विश्वस्तरीय दिग्गज कंपनियों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। मध्यप्रदेश का मजबूत पॉलिसी-स्ट्रक्चर प्रौद्योगिकी संचालित विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति 2023, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी 2025, एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी 2025, ड्रोन संवर्धन और उपयोग नीति 2025 और सेमीकंडक्टर नीति 2025 शामिल हैं। ये नीतियां टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करती हैं। टेलेंट और इनोवेशन को बढ़ावा प्रदेश सरकार के फोकस में उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ टेलेंट और इनोवेशन को बढ़ाते हुए आईटी पार्क, सॉफ्टवेयर हब और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण निवेश हैं। अग्रणी तकनीकी हब बनने की दृष्टि के साथ मध्यप्रदेश डिजिटल भविष्य को शक्ति प्रदान करने के रास्ते पर अग्रसर है। आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति 2023 इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर केंद्रित है, जो कैपेक्स, भूमि, ब्याज छूट, मार्केटिंग और पेटेंट सहायता आदि प्रदान करती है। दूसरी ओर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी 2025 वैश्विक तकनीकी केंद्रों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो कैपेक्स, पेरोल और अपस्किलिंग के लिए सब्सिडी, आरएंडडी को सपोर्ट करती है। इसी तरह एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी-2025 एवीजीसी सेक्टर को सपोर्ट करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, उत्पादन संबंधी वित्तीय सहायता, उद्योग सहयोग और एवीजीसी-एक्सआर लैब की स्थापना आदि के लिए सहयोगी है। इसके अलावा ड्रोन संवर्धन और उपयोग नीति 2025 ड्रोन निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए कैपेक्स सहायता, ड्रोन पाठ्यक्रमों के लिए प्रोत्साहन और अनुसंधान एवं विकास में सहयोग के साथ ड्रोन अपनाने को बढ़ावा देती है। इसके बाद सेमीकंडक्टर नीति 2025 महत्वपूर्ण है, जो कैपेक्स प्रोत्साहन और सीओई, पेरोल और कौशल विकास आदि के लिए सहयोग के साथ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करती है। परिवर्तनकारी निवेशों की लहर मध्यप्रदेश ने परिवर्तनकारी निवेशों की एक लहर देखी है, जो भारत के अगले बड़े तकनीकी केन्द्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता है। इंदौर में एलटीआई माइंडट्री का 870 करोड़ रुपये का तकनीकी परिसर 10 हजार से ज्यादा नौकरियां प्रदान करेगा, जो आईटी सेवाओं और डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं में मध्यप्रदेश की भूमिका को मजबूत करेगा। रैकबैंक का डेटा सेंटर विस्तार में 644 करोड़ रुपये का निवेश मध्यप्रदेश के डिजिटल बुनियादी ढांचे और क्लाउड सेवाओं को मजबूत कर रहा है। हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज और कॉग्निजेंट क्रमशः 50 करोड़ रुपये और 80 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अपनी उपस्थिति का और विस्तार कर रहे हैं। ये परियोजनाएं साल 2024 में हासिल किए गए 2,500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी निवेश के साथ मध्यप्रदेश को पारंपरिक आईटी केंद्रों के समक्ष एक बेहतर और सक्षम विकल्प बनाती हैं। देश की डिजिटल क्रांति के साथ तालमेल मध्यप्रदेश न केवल देश की डिजिटल क्रांति के साथ तालमेल बना रहा है, बल्कि यह इसका नेतृत्व भी कर रहा है। एआई, साइबर सुरक्षा, एवीजीसी-एक्सआर और ड्रोन में राज्य का विजन इनोवेशन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की अगली लहर के लिए आधार तैयार कर रहा है।  

माघ पूर्णिमा स्नान पर संपूर्ण मेला क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ किया घोषित, विशेष यातायात प्रबंध

महाकुंभ नगर प्रयागराज महाकुंभ में माघ पूर्णिमा के स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन ने विशेष यातायात योजना बनाई है। इसके अंतर्गत, 11 फरवरी 2025 की सुबह 4:00 बजे से संपूर्ण मेला क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम स्नान के लिए केवल आवश्यक एवं आकस्मिक सेवाओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी। प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के निजी व सार्वजनिक वाहनों को 11 फरवरी को सुबह 4:00 बजे के बाद संबंधित रूट की पार्किंग में पार्क कराया जाएगा। इससे शहर में यातायात अव्यवस्था न हो और श्रद्धालु पैदल सुगमता से स्नान घाटों तक पहुंच सकेंगे। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने 11 फरवरी की शाम 5:00 बजे से पूरे प्रयागराज शहर को भी ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए यह विशेष यातायात योजना 12 फरवरी को स्नान संपन्न होने तक लागू रहेगी। महाकुंभ में कल्पवास कर रहे श्रद्धालुओं के वाहनों पर भी यह नियम लागू रहेगा। प्रशासन ने सभी कल्पवासियों से अनुरोध किया है कि वे नियमों का पालन करें और अधिकृत पार्किंग स्थलों का उपयोग करें। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सहयोग दें, ताकि महाकुंभ का यह महत्वपूर्ण स्नान पर्व सुगमतापूर्वक संपन्न हो सके।  

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