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रंग पंचमी पर करीला धाम में लगेगा विशाल मेला, लाखों श्रद्धालु करेंगे अखंड जलती धूनी के दर्शन, प्रशासन अलर्ट

अशोकनगर  मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के करीलाधाम पर रंग पंचमी पर मेला आयोजित होता है। इस मेले को लेकर प्रशासन में तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। मेले की व्यवस्थाओं को लेकर पत्रकारों से चर्चा में कलेक्टर ने पूरी जानकारी दी। करीला धाम मेले में इस बार प्रयागराज महाकुंभ की तरह व्यवस्थाएं करने की तैयारी की गई है। कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार मेले में नजर रखने 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, आने वाले श्रद्धालुओं के पीने के पानी के लिए अस्थाई नल, टंकी और नए बोर भी कराए गए हैं। साथ ही 250 पानी के चलित टैंकर भी रहेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अस्थाई अस्पताल और 12 एंबुलेंस भी तैनात रहेंगी। हर साल आयोजित होता है मेला उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष रंगपंचमी पर अशोकनगर जिले के करीला धाम पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी रंगपंचमी पर यह मेला आयोजित होगा। जिसमें देश दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। मेले में व्यवस्थाएं जुटाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की तरफ से कंट्रोल रूम तैयार किया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा के लिए जिले के साथ-साथ बाहर से भी पुलिस बल की मांग की गई है। महिलाओं के लिए रुकने बनेगा विशाल पंडाल मेले में इस बार प्रशासन ने नवाचार करते हुए महिलाओं के लिए एक विशाल पांडाल भी बनाया जा रहा है। जिसमें महिलाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाएं होंगी। साथ ही वहीं गद्दे और अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रही है। यहां प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। 20 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश का यह मेला विश्व प्रसिद्ध है। इसमें देश दुनिया से तीन दिन में लगभग 20 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए प्रशासन ने कई तैयारियां की है। इसमें सड़क व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था, बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही यहां तीन दिन समस्त जिले के जिला अधिकारी करीला में रहकर व्यवस्थाएं देखेंगे। यात्री किराया होगा निर्धारित कलेक्टर ने मेले में नवाचार करते हुए कुंभ मेले की तर्ज पर तैयारी के प्रयास किया जा रहे हैं। इसके तहत मेले की ओर जाने वाले समस्त बस संचालकों के लिए निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि वह करीला के लिए प्रति यात्री किराया फिक्स करते हैं। इससे अतिरिक्त कोई भी बस वाला ज्यादा पैसे नहीं लेना। यदि कोई एक्स्ट्रा पैसे लेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ अस्थाई शौचालय में भी सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। रंग पंचमी पर करीला धाम में लगेगा विशाल मेला देशभर में होली और रंग पंचमी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। जिसके लिए अभी से ही तैयारी हो चुकी है। यह फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। अभी से ही बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, कपड़े, पिचकारी, मिठाइयों से सज-धज कर तैयार हैं। लोग घरों की साफ-सफाई में जुटे हुए हैं। बच्चों में खासकर ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस दिन से हिंदू के नए साल का शुभारंभ होता है। लोग अपनी पुरानी दुश्मनी को भूलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं और नए सिरे से रिश्ते की शुरुआत करते हैं। वहीं, अशोकनगर जिले के करीला धाम में हर साल की तरह इस साल भी रंग पंचमी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा। मुंगावली तहसील अंतर्गत जसैया गांव में स्थित करीला धाम में माता जानकी (सीता जी) और उनके पुत्र लव-कुश की जन्मस्थली है, जहां हर साल रंग पंचमी के अवसर पर यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं। लाखों श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद मंदिर पुजारी के अनुसार, इस ऐतिहासिक मेले की खासियत यह है कि यहां ऋषि वाल्मीकि की दिव्य गुफा के द्वार वर्ष में केवल एक बार इसी दिन खुलते हैं, जहां श्रद्धालु दीपक और अखंड जलती धूनी के दर्शन कर सकते हैं। रंग पंचमी के अवसर पर इस पवित्र स्थल पर लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। इस वर्ष आयोजित होने वाले मेले में करीब 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इस दिन श्रद्धालु माता जानकी और लव-कुश की प्रतिमाओं के दर्शन करेंगे। मान्यता है कि इस गुफा के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। CCTV से रखी जाएगी निगरानी करीला ट्रस्ट समिति के अध्यक्षों ने बताया कि 19 मार्च को रंग पंचमी का मेला लगेगा। जिसके लिए शासन-प्रशासन द्वारा सभी तैयारिया पूर्ण कर ली गई है। इसमें पेयजल व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ प्रांगण में मंदिर में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में पूरा आयोजन होगा, ताकि किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना ना घटे। पौराणिक मान्यता रामायण काल से जुड़ा यह स्थान ऋषि वाल्मीकि की तपस्थली माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने माता सीता का त्याग किया था, तब वे यहीं ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में आकर रहने लगी थीं। यहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ। बड़े होने के बाद उन्होंने अपनी शिक्षा एवं शस्त्र विद्या की शिक्षा प्राप्त की। इस धाम से जुड़ी एक विशेष मान्यता यह भी है कि जब लव-कुश का जन्म हुआ था, तब स्वर्ग से अप्सराएं यहां उतरीं और उन्होंने नृत्य किया। इसी परंपरा के तहत, आज भी श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां राई नृत्य करवाते हैं।

पीएम आवासों का लाभ देने में नंबर वन मध्यप्रदेश के लोगों को चार साल में 24.89 लाख पीएम आवास मिलेंगे

भोपाल  विधानसभा का बजट सत्र में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अभिभाषण में कहा की  सरकार एक लाख किमी सड़क निर्माण की योजना, 30 लाख किसानों को सोलर पंप, केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना व ताप्ती ग्राउंड वाटर रिचार्ज जैसी मेगा परियोजनाओं से सिंचाई का रकबा एक करोड़ हेक्टेयर करने जैसे कार्यों का उल्लेख किया।  पीएम आवासों(PM Awas Yojana) का लाभ देने में नंबर वन मध्यप्रदेश के लोगों को चार साल में 24.89 लाख पीएम आवास मिलेंगे। इनमें से 13 लाख आवास निर्माणाधीन है। निर्माण 6-8 महीने में पूरा हो जाएगा। एक साल के भीतर 13 लाख परिवार निवास करने लगेंगे। गंगा जल लेकर पहुंचे: जबलपुर उत्तर मध्य से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे गंगाजल का कलश लेकर सदन पहुंचे। कहा कि महाकुंभ से 15000 लीटर गंगा जल लाया था। अपनी विधानसभा के 50 हजार घरों में बंटवाया है। कांग्रेस विधायकों को गंगाजल देने के सवाल पर कहा कि गंगा का जल उसी के पास जाता है जिसकी आस्था होती है। 36 लाख का निर्माण पूरा: अब तक 11.89 लाख आवास आवंटित करने का ही आंकड़ा सामने आ रहा था, लेकिन सदन में राज्यपाल के अभिभाषण में पीएम आवास का पूरा लेखा-जोखा सामने आया है। बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में अब तक 36 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। सरकार ने सदन को बताया     पीएम स्वनिधि योजना केतहत 13 लाख कमजोर लोगों को कर्ज दिलाया।     मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना में 1640 करोड़ के748 विकास कार्य जारी।     कायाकल्प योजना में 1363 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण जारी     413 शहरों में गीता भवनबनाए जा रहे हैं।     एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने 105 करोड़ रुपए दिए।     30 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिलों में संत रविदास सह सामुदायिक भवनों कानिर्माण करवा रहे।     राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन के तहत 97 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की।     19 धार्मिक स्थलों में पूरीतरह शराबबंदी करेंगे।     दो महानगर बनाएंगे। पहला भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ को मिलाकर बनाएंगे। दूसरा इंदौर, उज्जैन, देवास व धार को मिलाकर।     भोपाल, इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर में 2,500 करोड़ से ऐलिवेटेड कॉरिडोर बना रहे।     नवीकरणीय ऊर्जा में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की,इसे और बढ़ाएंगे।

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, सातवें वेतन आयोग के अनुसार अब मिलेगा भत्ता

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने अपने नए बजट में कर्मचारियों के भत्तों में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 12 मार्च 2025 को पेश किए गए बजट में बताया कि 1 अप्रैल 2025 से कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार भत्ते दिए जाएंगे। अभी तक कर्मचारियों को 6वें वेतन आयोग के हिसाब से भत्ते मिल रहे थे, जो 13 साल पुराने थे। इस बदलाव से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर परिवहन और पेट्रोल भत्ते में, जो अब तक काफी कम थे। 7वें वेतन आयोग के अनुसार भत्ता मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण में घोषणा की कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अब 7वें वेतन आयोग के अनुसार भत्ते मिलेंगे। यह नया नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा। पिछले 13 सालों से, कर्मचारियों को 2010 में निर्धारित 6वें वेतन आयोग के आधार पर भत्ते मिल रहे थे। इस लंबे अंतराल में महंगाई काफी बढ़ गई है, जिससे पुराने भत्ते कम पड़ रहे थे। इस बदलाव से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। भत्ता था काफी कम वित्त मंत्री ने बताया कि 6वें वेतन आयोग के तहत परिवहन भत्ता मात्र 200 रुपये और पेट्रोल भत्ता 106 रुपए प्रति सप्ताह था। यह राशि वर्तमान समय की आवश्यकताओं के हिसाब से काफी कम है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए यह बदलाव जरूरी हो गया था। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। ये भत्ते हैं शामिल सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों में विकलांगता भत्ता, घर किराया भत्ता, सचिवालय भत्ता, आदिवासी क्षेत्र भत्ता, यात्रा भत्ता, जोखिम भत्ता, दैनिक भत्ता, पुलिस कर्मियों के लिए आहार भत्ता, वर्दी धुलाई भत्ता और सिलाई भत्ता शामिल हैं। ये भत्ते कर्मचारियों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं। 7वें वेतन आयोग के अनुसार इन भत्तों में भी संशोधन होगा, जिससे कर्मचारियों को और अधिक लाभ मिलेगा। लंबे समय से थी संसोधन की मांग कर्मचारी संगठन लंबे समय से भत्तों में संशोधन की मांग कर रहे थे। सरकार ने उनकी मांग को मानते हुए यह फैसला लिया है। यह फैसला कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत है। हालांकि, नए कर्मचारियों को इस लाभ के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। नए नियमों के लागू होने के बाद, मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के हिसाब से बकाया महंगाई भत्ता भी मिलेगा। यह राशि उनके पिछले वेतन के आधार पर गणना की जाएगी।

एनसीएल ने सिंगरौली का कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया, 20000 से अधिक घरों की 2032 तक है शिफ्टिंग की तैयारी

सिंगरौली  मध्य प्रदेश का एक शहर इतिहास बन जाएगा। हरसूद की तरह अब सिंगरौली जिले के मोरवा में सबसे बड़ा विस्थापन होगा। करीब 20000 से अधिक मकान शहर में तोड़े जाएंगे क्योंकि यहां कोल का अकूत भंडार मिला है। इसे लेकर NCL (नार्दर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड) ने एक मास्टर प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत, कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए मोरवा को हटाया जाएगा। एमपी का होगा सबसे बड़ा विस्थापन यह विस्थापन 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसमें NCL का मुख्यालय और आवासीय कॉलोनी भी शामिल है। कंपनी अगले दस सालों में यहां से कोयला उत्पादन शुरू करना चाहती है। इस प्लान को कोल इंडिया के बोर्ड से भी मंजूरी मिल गई है। इसलिए, मोरवा को अब कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। बड़ा झटका होगा यह NCL का मास्टर प्लान सिंगरौली के लिए एक बड़ा झटका है। इससे लगभग एक लाख लोग विस्थापित होंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, मोरवा में लगभग 20 हजार मकान हैं। यह एशिया का सबसे बड़ा नगरीय विस्थापन माना जा रहा है। यह विस्थापन कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। NCL मुहेर सब बेसिन को सिंगरौली मेन बेसिन में मिलाकर तेजी से कोयला खनन करना चाहता है। 2202 वर्ग किमी में फैला है कोल फील्ड्स सिंगरौली कोल फील्ड्स 2202 वर्ग किमी में फैला है। मुहेर सब बेसिन 312 वर्ग किमी में है, जबकि सिंगरौली मेन बेसिन 1890 वर्ग किमी में फैला है। अभी तक कोयला खनन सिर्फ मुहेर सब बेसिन में ही हो रहा है। लेकिन मास्टर प्लान में पूरे कोल फील्ड्स में खनन की तैयारी है। इसके लिए वार्ड क्रमांक 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 और 10 की कुल 1485 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसके चलते 20 हजार मकान टूटेंगे। मुआवजा मिलेगा वहीं, मोरवा के विस्थापितों को मुआवजा दिया जाएगा। यह 35000 करोड़ रुपए तक हो सकता है। अब देखना होगा कि यह बसे परिवारों को कहां बसाया जाएगा। विस्थापित होने वाले लोगों के साथ कोल इंडिया बात कर, उसकी प्लानिंग कर रही है।

सर्वेक्षण में एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी आशंका विश्वयुद्ध, परमाणु युद्ध और अंतरिक्ष की लड़ाई , कई एक्सपर्ट्स जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चेतावनी दे रहे

वॉशिंगटन  दुनिया में जियो-पॉलिटिकल हालात काफी खतरनाक रास्ते पर मुड़ चला है। यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया कई बार परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुकी है। लेकिन आगे हालात और भयावह होने वाले हैं। वाशिंगटन में वैश्विक मामलों के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की तरफ से किए गये एक सर्वेक्षण से बता चला है कि तीसरा विश्वयुद्ध निश्चित है और ये अगले 10 सालों में शुरू हो सकता है। इस सर्वेक्षण में दुनिया के 300 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया था। इस दौरान इस मुद्दे पर बात की गई कि आखिर अगले 10 सालों में दुनिया कैसे दिखेगी। कई एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि 2035 तक अमेरिका, चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों के बीच युद्ध छिड़ सकता है। वहीं कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 10 सालों में जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वेक्षण में 357 राजनीतिक रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने अगले 10 सालों में दुनिया की बदलती परिस्थितियों और हालातों को लेकर भविष्यवाणियां की हैं। इस दौरान 10 में से चार एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि अगले 10 सालों में अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बीच विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि ये लड़ाई सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युद्ध की आग अंतरिक्ष तक पहुंचेगी। 10 सालों में दुनिया कितनी होगी खतरनाक? सर्वेक्षण के दौरान 10 में से 3 एक्सपर्ट्स ने कहा कि 2035 तक दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द जलवायु परिवर्तन होगा। जबकि करीब 1.7 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 10 सालों में कोई महामारी दुनिया में दस्तक दे सकती है। वहीं 5.1 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय ऋण अगले 10 सालों में दुनिया को पंगु बना सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध का अंत यूक्रेन के लिए अच्छा नहीं होगा और यूक्रेन युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका की आर्थिक और कूटनीतिक वर्चस्व में भारी कमी आएगी। एक्सपर्ट्स इस बात पर अभी भी एकमत हैं कि दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा बना हुआ है। अटलांटिक काउंसिल की टीम ने कहा, “यह भयावह पूर्वानुमान निश्चित तौर पर एक अंधकारमय वैश्विक परिदृश्य के मुताबिक है, जिसमें 62 प्रतिशत एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि एक दशक बाद दुनिया आज की तुलना में बदतर होगी। इस दौरान सिर्फ 38 प्रतिशत ने अनुमान लगाया है कि यह बेहतर होगी।” इस सर्वेक्षण के दौरान एक्सपर्ट्स के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक बात परमाणु युद्ध का खतरा था। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि परमाणु युद्ध जैसा ही खतरनाक स्थिति जलवायु परिवर्तन से भी बन सकते हैं। 10 में से तीन एक्सपर्ट्स ने जलवायु परिवर्तन को 2025 और 2035 के बीच दुनिया में होने वाले विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा माना।

वित्त वर्ष 2026 में भारतीय फार्मास्यूटिकल्स बाजार 8-9 प्रतिशत बढ़ेगा

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2026 में भारतीय फार्मा बाजार में सालाना आधार पर 8-9 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। जारी एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (आईएनडी-आरए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में इस सेक्टर की वृद्धि सालाना आधार पर 7.5-8.0 प्रतिशत रहेगी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर कृष्णनाथ मुंडे ने कहा कि “भारतीय फार्मा बाजार में वित्त वर्ष 2024 में सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023 में सालाना आधार पर 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।” इस साल फरवरी में फार्मा बाजार ने सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत का राजस्व दिया इस साल फरवरी में फार्मा बाजार ने सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत का राजस्व दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कीमत और नए लॉन्च में आई वृद्धि की वजह से देखी गई। कीमत में वृद्धि सालाना आधार पर 5.2 प्रतिशत और नए लॉन्च में सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ओवरऑल फार्मा प्रोडक्ट्स की 12 महीने की रोलिंग बिक्री में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, मूविंग एनुअल टोटल (एमएटी) या ओवरऑल फार्मा प्रोडक्ट्स की 12 महीने की रोलिंग बिक्री में फरवरी में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। कार्डियक थेरेपी ने फार्मा बाजार में एमएटी में 10.8 प्रतिशत की वृद्धि और मासिक बाजार हिस्सेदारी में 13.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी/सेंट्रल नर्वस सिस्टम और डर्मेटोलॉजी का स्थान रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी ओर, एंटी-इंफेक्टिव, रेस्पिरेटरी और गायनोकोलॉजी थेरेपी में फरवरी में कमजोर वृद्धि देखी गई। इस बीच, एक दूसरी हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि देश में फार्मा सेक्टर में तेजी से उत्पादन में वृद्धि देखी जा रही है। भारत बना जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर मैकिन्से एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फार्मा सेक्टर 8 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा है और 2024 में निर्यात दरों में भी 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। एपीआई और बायोटेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए, इसने 8 प्रतिशत सीएजीआर से वृद्धि की है, जो वैश्विक औसत से दोगुना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर भी बन गया है, जिसकी फार्मा निर्यात वृद्धि दर 9 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है।

मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नए निवेश की बढ़ी संभावनाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आ रहा है। देश के केंद्र में स्थित होने के कारण यह प्रदेश उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम के व्यापार मार्गों को सुविधाजनक रूप से जोड़ते हुए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचे, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और उद्योग समर्थक नीतियों के कारण प्रदेश निवेशकों के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में की जा रही रणनीतिक पहलों से मध्यप्रदेश अब सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि पूरे भारत की आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत आधार बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के हब के रूप में उभर रहा है। अपनी भौगोलिक स्थिति, उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे और उद्योग अनुकूल नीतियों के कारण यह प्रदेश निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं इसे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। बेहतर सड़कों और कॉरिडोर से लॉजिस्टिक्स को नई दिशा प्रदेश में लॉजिस्टिक्स को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का तेज़ी से विस्तार किया गया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, उत्तर-दक्षिण फ्रेट कॉरिडोर और भारतमाला परियोजना प्रदेश को लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं। इंदौर और भोपाल में विकसित हो रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) व्यापार को आसान और लागत प्रभावी बना रहे हैं। हवाई मार्ग से निर्यात और उद्योग को नई गति प्रदेश के छह प्रमुख हवाई अड्डों पर एयर कार्गो सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ी ताकत मिल रही है। रीवा हवाई अड्डे के चालू होने से व्यापार और औद्योगिक परिवहन को नई रफ्तार मिली है। फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और खाद्य प्र-संस्करण जैसे उद्योगों को अब कम समय में बेहतर लॉजिस्टिक्स सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। डिजिटल तकनीक से लॉजिस्टिक्स और बिजनेस में आई ट्रांसपेरेंसी प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्रणाली व्यापारियों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) के माध्यम से पारदर्शी और कुशल लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। प्रदेश के लॉजिस्टिक्स हब में स्मार्ट वेयरहाउसिंग, ऑटोमैटेड ट्रैकिंग और डिजिटल डिलीवरी सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। औद्योगिक विकास एवं लॉजिस्टिक्स में बेहतर तालमेल प्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास का गहरा तालमेल देखने को मिल रहा है। विक्रम उद्योगपुरी आईआईटीवीयूएल जैसी परियोजनाएं लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विस्तार में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश में स्थापित किए जा रहे 11 औद्योगिक गलियारे और 20 स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र लॉजिस्टिक्स उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। हरित ऊर्जा समाधान और इलेक्ट्रिक लॉजिस्टिक्स वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मजबूत नीति और प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लेकर आई है। निश्चित पूंजी निवेश पर 30% तक की वित्तीय सहायता, स्टाम्प ड्यूटी में 100% छूट और लॉजिस्टिक्स पार्कों के लिए अनुदान जैसी योजनाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। ग्रीन लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार आईजीबीसी प्रमाणन प्राप्त इकाइयों को अतिरिक्त रियायतें दे रही है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नए अवसरों का केंद्र प्रदेश की मजबूत आधारभूत संरचना, उन्नत तकनीक और उद्योग अनुकूल नीति इसे लॉजिस्टिक्स सेक्टर के सबसे प्रमुख निवेश केंद्रों में शामिल कर रही है। सरकार के स्पष्ट विजन और विकास रणनीति के चलते यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।  

भोपाल एम्‍स कैंसर मरीजों की देखभाल करेगा AI, पूछेगा- क्‍या आपको दर्द हो रहा है, खाने में समस्‍या तो नहीं!

AI will take care of cancer patients in Bhopal AIIMS, will ask- are you in pain, are you having problem in eating! भोपाल। एम्स भोपाल को कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ी उपलब्धि मिली है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने डिजिटल आन्कोलाजी (कैंसर देखभाल) के लिए एम्स भोपाल को 20 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान प्रदान किया है। यह शोध आईआईटी इंदौर के नवाचार केंद्र के सहयोग से किया जाएगा। ऐसे होगा मरीजों की जिंदगी पर असर इस परियोजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से कैंसर मरीजों के इलाज के बाद उनकी जीवन गुणवत्ता (क्वालिटी आफ लाइफ) पर शोध किया जाएगा। एआई पूछेगा यह सवाल इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा, जो मरीजों से उनके स्वास्थ्य और समस्याओं के बारे में सवाल पूछेगा, जैसे – क्या आपको दर्द हो रहा है? खाने-पीने में दिक्कत तो नहीं? आपको सबसे ज्यादा तकलीफ किस चीज से हो रही है? मरीजों से मिले इन जवाबों का विश्लेषण करके डॉक्टर उनके लिए बेहतर उपचार योजना बना सकेंगे। डिजिटल हेल्थ में बड़ी पहल इस परियोजना से कैंसर मरीजों की शारीरिक और मानसिक सेहत, सामाजिक जुड़ाव और इलाज के प्रभावों का मूल्यांकन किया जाएगा। भारत में अभी तक ऐसा कोई डिजिटल टूल नहीं था जो कैंसर मरीजों की जीवन गुणवत्ता को माप सके। यह शोध इस कमी को पूरा करेगा और कैंसर मरीजों को बेहतर देखभाल और व्यक्तिगत उपचार समाधान देगा।

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