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दिल्ली से तेल अवीव जा रही थी एयर इंडिया की फ्लाइट, तेल अवीव एयरपोर्ट के पास हुआ मिसाइल अटैक, किया डायवर्ट

नई दिल्ली इजरायल के तेल अवीव एयरपोर्ट के पास हुए मिसाइल हमले के बाद एयर इंडिया के विमान को अबू धाबी के लिए डायवर्ट कर दिया गया। यह फ्लाइट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से तेल अवीव जा रही थी। एयरपोर्ट के नजदीक रविवार को मिसाइल से घातक हमला किया गया। सूत्रों की मानें तो यह हमला एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या एआई139 के तेल अवीव में उतरने से एक घंटे से भी कम समय पहले हुआ। सूत्रों ने बताया कि फ्लाइट को वापस दिल्ली लाया जाएगा। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24.com पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फ्लाइट जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में थी, जब उसे अबू धाबी की ओर डायवर्ट करने का फैसला लिया गया। एयर इंडिया की तेल अवीव से दिल्ली की उड़ान रविवार को रद्द कर दी गई है। हालांकि, अभी तक इस मामले में एयर इंडिया का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। रविवार को यमन में ईरान समर्थित विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइल ने कुछ समय के लिए इजरायल के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानें और यात्री यातायात रोक दिया। हमले से धुएं का गुबार उठा और यात्रियों में दहशत फैल गई। हाउथी विद्रोही गाजा में युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता में इजरायल पर हमला कर रहे हैं। बेन-गुरियन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमला शीर्ष इजरायली कैबिनेट मंत्रियों द्वारा गाजा पट्टी में देश के सैन्य अभियानों को तेज करने के बारे में मतदान करने से कुछ घंटे पहले हुआ। अधिकारियों ने कहा कि इस बीच सेना ने गाजा में व्यापक अभियान के लिए हजारों रिजर्व को बुलाना शुरू कर दिया। मिसाइल हमले के बाद इजरायल के कई हिस्सों में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। इजरायली मीडिया द्वारा साझा किए गए फुटेज के अनुसार, हवाई अड्डे पर धुएं का गुबार दिखाई दिया। यात्रियों को चिल्लाते और छिपने के लिए भागते हुए सुना गया। हमले की वजह से जमीन में एक गहरा गड्ढा बन गया और पास की सड़क पर गंदगी फैल गई।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देर रात सुरक्षा बल और माओवादियों के बीच मुठभेड़ , आठ लाख का इनामी माओवादी ढेर

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देर रात सुरक्षा बल और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें एक माओवादी मारा गया। मृत माओवादी की पहचान साकेत उर्फ योगेश उर्फ आयतु के रूप में हुई है। ये डीबीसी (डिवीजन बॉडी काम्बैट) का सदस्य और शीर्ष माओवादी नेताओं का बॉडीगार्ड रह चुका था। उस पर आठ लाख रुपये का इनाम था। गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सीमा पर जिला बल सीआई-30 और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन के लिए भेजी गई थी। शाम करीब छह बजे मोतीपानी जंगल में घात लगाए माओवादियों ने सुरक्षाबल पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक माओवादी को मार गिराया। ऐसे तय होता है इनाम 50 लाख से एक करोड़ के इनामी : पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी 25 लाख के इनामी : स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य (एसजेडसीएम) 10 लाख के इनामी : कंपनी कमांडर 8 लाख के इनामी : डिविजनल कमेटी, बटालियन सदस्य, कंपनी सदस्य, डिप्टी व प्लाटून कमांडर 5 लाख के इनामी : प्लाटून सदस्य, एरिया कमेटी सदस्य, लोकल ऑपरेशनल स्क्वायड, कमांडर, लोकल गुरिल्ला स्क्वायड कमांडर 3 लाख के इनामी : सेक्शन कमांडर 1 लाख के इनामी : एलओएस सदस्य, एलजीएस सदस्य, जनमिलीशिया सदस्य पर यह इनाम घोषित किया जाता है। बस्तर के माओवाद मुक्त गांवों में बनेंगे बलिदानियों के स्मारक बस्तर में माओवादी आतंक के काले अध्याय को मिटाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने “हमर बलिदानी योजना” शुरू की है। इसके अंतर्गत उन गांवों में स्मारक बनाए जाएंगे जो माओवादी आतंक का केंद्र रहे अब शांति की राह पर लौट आए हैं। स्मारकों से स्थानीय बलिदानियों की वीरता और योगदान को सहेजा जाएगा। ऐसे 500 स्मारक बनाए जाएंगे। संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक स्मारक पर तीन लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पंचायत विभाग को इस योजना की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि माओवादी हिंसा के प्रतीक स्मारकों को सुरक्षा बल लगातार ढहा रहे हैं। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक बस्तर को माओवाद मुक्त कर लिया जाएगा। राजनीतिक एकजुटता का संदेश उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू से हुई बातचीत को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया। इस बातचीत में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष साहू ने सरकार की नक्सल विरोधी कार्रवाई की सराहना की ही और कहा कि जब कोई अच्छा काम हो रहा है, तो विपक्ष में रहकर भी उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। साहू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि झीरम घाटी जैसी घटनाएं किसी एक पार्टी की नहीं, पूरे राज्य की पीड़ा हैं और इस पर सभी दलों को एकजुट होना चाहिए। बता दें कि झीरम घाटी में हुई नक्सली वारदात में कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के नेताओं समेत 31 लोग मारे गए थे। राज्य के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर में माओवाद पीड़ित परिवारों के लिए विशेष सर्वे कराया गया है, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर दिए जा रहे हैं। साथ ही बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम ने युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।  

पाकिस्तान के खिलाफ एक और ऐक्शन, सरकार ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध के माध्यम से चिनाब नदी का पानी रोक दिया

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत सरकार ने सिंधु जल संधि रद्द करने का ऐलान कर दिया था। अब इस फैसले को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया गया है। पीटीआई के हवाले से खबर मिली है कि सरकार ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध के माध्यम से चिनाब नदी का पानी रोक दिया है। अब झेलम नदी के ऊपर बने किशन गंगा बांध के माध्यम से ऐसा ही एक और उपाय करने की योजना बनाई जा रही है। जम्मू के रामबन में स्थित बगलिहार बांध और उत्तरी कश्मीर में स्थित किशन गंगा बांध इन नदियों पर भारत को पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में रखते हैं। भारत सरकार इन बांधों के जरिए विद्युत उत्पादन करती है और इसके साथ ही यही बांध भारत को इन नदियों में पानी रोकने और छोड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। आपको बता दें कि बगलीहार बांध भारत और पाकिस्तान के बीच में लंबे समय तक विवाद का कारण रहा है। पाकिस्तान ने इस बांध के निर्माण के समय विश्व बैंक से मध्यस्थता की मांग की थी। इसके अलावा पाकिस्तान को किशनगंगा बांध को लेकर भी खासकर झेलम की सहायक नदी नीलम पर इसके प्रभाव के कारण आपत्ति है। भारत से पाकिस्तान की तरफ बहनें वाली यह नदियां दोनों देशों की जीवन रेखाएँ मानी जाती हैं क्योंकि इनके मैदानों में रहने वाले लोग खेती के लिए पूरी तरह से इन नदियों पर ही निर्भर हैं। भारत भी शुरुआत से ही इस बात को समझकर पाकिस्तान को ज्यादा मात्रा में ही पानी उपलब्ध करवाता रहा है। सिंधु जल संधि में भी नदियों पर ज्यादा नियंत्रण होने के बाद भी भारत ने पाकिस्तान को पानी देने की बात मानी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार के सब्र का बांध टूट गया और सरकार ने सिंधु जल संधि को निरस्त कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से कई नेताओं ने उल्टी-सीधी बयानबाजी करना शुरू कर दिया है। हालांकि भारत की तरफ से किसी नेता ने ऐसा बयान नहीं दिया। पहलगाम हमले के बाद भारत की तरफ से तीखी और कूटनीतिक स्ट्राइक ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया। पूरा पाकिस्तान इस खौफ में है कि भारत कभी भी हमला कर सकता है। पीएम मोदी ने पिछले महीने ही घोषणा कर दी थी कि पहलगाम में निर्दोष लोगों का नरसंहार करने वाले आतंकवादियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।

भारतीय नौसेना में अरब सागर में युद्धाभ्यास भी शुरू कर दिया, तनाव के बीच पीएम मोदी से मिले वायुसेना प्रमुख

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से तनाव के बीच वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इससे पहले नौसेना प्रमुख ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। नेवी चीफ ऐडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने लोककल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। वहीं कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ मीटिंग की थी। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल हुए थे। सूत्रों ने बताया कि वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक की। उन्होंने हालांकि इससे अधिक कोई जानकारी नहीं दी। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की भी उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद सरकार ने सेनाओं को एक्शन लेने की खुली छूट दे दी। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में पहले ही कहा गया था कि 19 अप्रैल के आसपास आतंकी हमला करने का प्लान बना रहे हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में लोकेशन श्रीनगर की बताई गई थी। श्रीनगर के आसपास सुरक्षा भी बढ़ाई गई लेकिन आतंकियों ने अपना प्लान बदल दिया और पहलगाम में मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया। इसके बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित का ऐलान कर दिया। भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान बेहद घबरा गया है। भारतीय नौसेना में अरब सागर में युद्धाभ्यास भी शुरू कर दिया है। 3 मई से नौसेना लाइव फायल ड्रिल कर रही है। इसका मतलब वास्तविक युद्ध जैसा माहौल बनाकर युद्धाभ्यास किया जा रहा है। वहीं गुजरात तट से 85 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान की सेना भी अपने हथियारों का जोर आजमाने में लगी है। हालांकि अगर भारत और पाकिस्तान समंदर में आमने-सामने आ भी जाते हैं तो पाकिस्तान की सेना का चार दिन टिकना भी मुश्किल हो जाएगा। आतंकियों का सरपरस्त रहा पाकिस्तान अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है। पाकिस्तान की सेना खुलकर आतंकियों का समर्थन करती दिख रही है। जब से भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐलान किया है तब से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पहले तो वह अपने सदाबहार साथियों से मिन्नतें करने लगा। काम नहीं बना तो गीदड़भभकी का रास्ता अख्तियार कर लिया। अब लगातार 10 दिनों से एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है जिसका भारतीय सुरक्षाबल मुंहतोड़ जवाब देते हैं।

जालौर में तीन मकानों पर गिरी आकाशीय बिजली, पानी की टंकी फूटी

जालौर जालोर जिले में शनिवार देर रात मौसम का मिजाज बदलने से आहोर क्षेत्र के थावंला गांव में तीन मकानों पर आकाशीय बिजली गिरने की घटना सामने आई है। इस हादसे में मकानों में दरारें आ गईं, पानी की टंकियां फट गईं और बिजली मीटर समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलकर क्षतिग्रस्त हो गए। जानकारी के अनुसार, बिजली गिरने की यह घटना उमेश कुमार पुत्र भावाराम, छगनलाल पुत्र जवानाराम और गिरधारीलाल पुत्र मुफाराम के मकानों पर हुई। गिरधारीलाल के मकान की छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी फट गई, जबकि अन्य दो घरों में भी दीवारों में दरारें आ गईं और विद्युत मीटर व घरेलू उपकरण जल गए। घटना के बाद तहसील प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। ये भी पढ़ें: ‘विधायक जयकृष्ण पटेल पर कार्रवाई राजनीतिक षड्यंत्र’, बातचीत में बोले सांसद रोत; साजिश की बात कही शनिवार को जिलेभर में करीब 22 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी चली, जिससे तापमान में गिरावट आई। देर रात करीब 2 बजे आधे घंटे तक रुक-रुक कर 7 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। वहीं रविवार सुबह भी आसमान में बादल छाए रहे।  

पाकिस्तान अपनी गीदड़भभकी के चलते भारत को रूस से मिला आसमान का रक्षक, अब दुश्मन का निकलेगा दम

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान अपनी गीदड़भभकी से बाज नहीं आ रहा है। सीमा पर पाकिस्तान ने लगातार 10वें दिन फायरिंग की। बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी हवाई रक्षा ताकत में बड़ा इजाफा किया है। सेना को रूसी मूल की Igla-S मिसाइलों की नई खेप मिल चुकी है, जो अब बॉर्डर पर फॉरवर्ड लोकेशनों में तैनात की जा रही है। इन मिसाइलों की खासियत है कि ये दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन को बेहद कम दूरी से भी मार गिराने में सक्षम हैं। भारतीय सेना को मिली ये मिसाइलें बहुत कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा हैं। करीब 260 करोड़ रुपये की लागत से हुई यह खरीद भारत सरकार की आपातकालीन खरीद नीति के तहत की गई है। सेना ने इसी के तहत अब 48 लॉन्चर और 90 और मिसाइलें खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पाकिस्तान अपनी गीदड़भभकी के चलते भारत को रूस से मिला आसमान का रक्षक, अब दुश्मन का निकलेगा दम Igla-S मिसाइलें इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। सेना पहले से ही इस प्रणाली के पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रही थी। अब नए संस्करण से हवाई खतरों से निपटने की क्षमता कई गुना बढ़ेगी। Igla-S इन्फ्रारेड (आईआर) सीकर पर आधारित है, यानी यह दुश्मन के एयरक्राफ्ट के इंजन की गर्मी को ट्रैक करके निशाना बनाती है, जिससे इसे रडार से पकड़ना कठिन होता है। इसकी रेंज करीब 6 किलोमीटर तक है, यानी यह कम ऊंचाई पर 6 किमी दूर तक किसी भी लक्ष्य को गिरा सकती है। यह मिसाइल लगभग 3.5 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ रहे टारगेट को निशाना बना सकती है। चलाने में आसान और हल्का यह कंधे पर ले जाने योग्य सिस्टम है, जिसे कठिन इलाकों में आसानी से ले जाया जा सकता है और कुछ सेकंड में ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा सकता है। Igla-S में प्रॉक्सीमिटी फ्यूज भी होता है, जो टारगेट से सीधे न टकराने पर भी उसे निष्क्रिय करने में सक्षम होता है। यह प्रणाली खासकर ड्रोन व UAVs से निपटने में बेहद असरदार मानी जाती है, जो कि आधुनिक युद्ध की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इसके रख-रखाव और तैनाती की लागत अपेक्षाकृत कम है और यह कई युद्धों में कारगर साबित हुई है। इसके साथ ही सेना ने स्वदेशी ‘इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडक्शन सिस्टम’ भी तैनात किया है, जो 8 किलोमीटर दूर से ड्रोन को पकड़ सकता है और लेजर से मार गिरा सकता है। DRDO एक और उच्च क्षमता वाली लेजर प्रणाली पर काम कर रहा है जो भविष्य में दुश्मन के बड़े ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल और विमानों को भी टारगेट कर सकेगी। बता दें कि हाल ही में जम्मू क्षेत्र में सेना ने एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने में सफलता पाई है। ये सारी तैयारियां स्पष्ट संकेत हैं कि भारत अब न केवल आतंकी हमलों का जवाब देगा, बल्कि किसी भी संभावित हवाई हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्‍कृत करने का किया एलान

नई दिल्ली ज्‍योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्‍कृत करने का एलान किया है। शंकराचार्य ने कहा कि आज से राहुल गांधी को हिंदू धर्म का न माना जाए। दरअसल, राहुल गांधी ने संसद में मनुस्‍मृति को लेकर बयान दिया था। इस पर शंकराचार्य ने राहुल गांधी से स्‍पष्‍टीकरण मांगा था। इस संबंध में उन्‍हें पत्र भी भेजा गया था लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी राहुल गांधी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। अब शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने उन्‍हें हिंदू धर्म से ब‍हिष्‍कृत करने की सार्वजनिक घोषणा की है। उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में हिंदू धर्म का अपमान किया है। उन्‍होंने कहा है कि आपकी मनुस्‍मृति को मैं नहीं मानता। मैं संविधान को मानता हूं। जबकि वास्‍तविकता यह है कि हर हिंदू और सनातन धर्मी मनुस्‍मृति से संबंधित है। शंकराचार्य ने बताया कि उन्‍हें रिमाइंडर भी भेजा गया था। अब तीन महीने बीत गए हैं। बहुत से लोग यह भी कह रहे हैं कि उन्‍हें हिंदू धर्म से क्‍या बहिष्‍कृत करेंगे, वह तो हिंदू हैं ही नहीं। तीन महीने की अवधि में उन्‍होंने अपनी ओर से इस बारे में स्थिति स्‍पष्‍ट करने के लिए कुछ भी नहीं किया। तब हम लोगों ने यह निष्‍कर्ष निकाला कि राहुल गांधी मनुस्‍मृति में अश्रद्धा रखते हैं। वह मनुस्‍मृति के बारे में संसद में खड़े होकर गलतबयानी कर रहे हैं। जबकि मनुस्‍मृति में बलात्‍कारी को संरक्षित करने की बात नहीं लिखी है। यह बात आप मनु स्‍मृति को बदमान करने के लिए कह रहे हैं। हर हिंदू चाहे वाहे सहमत हो या नहीं हो वो मनु स्‍मृति को अपना धर्मग्रंथ तो मानता ही है। आप मनु स्‍मृति को अपना ग्रंथ नहीं कह रह रहे हो इसका मतलब आप हिंदू नहीं हो। शंकराचार्य अविमुक्‍तेश्वरानंद ने कहा कि तय हो गया है कि राहुल गांधी हिंदू धर्म के विरुद्ध काम कर रहे हैं। जनता के सामने यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि संभवत: वह हिंदू नहीं हैं। इसलिए आज से उन्‍हें हिंदू न माना जाए। हिंदू पुरोहित पंडित हिंदू विधि से उनकी पूजा न कराएं। हिंदू मंदिरों में उनके प्रवेश को प्रतिबंध‍ित किया जाए। सभी हिंदू सनातनी धार्मिक कार्यों से उनको वंचित किया जाए। शंकराचार्य ने कहा कि तीन महीने का समय बीतने पर भी राहुल गांधी ने अपने वक्‍तव्‍य के बारे में न तो क्षमा मांगी और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया, इसलिए राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्कृत करने की सार्वजनिक घोषणा करते हैं और उन्हें हिन्दू न मानने की घोषणा करते हैं, कोई भी उनकी पूजा न कराए। शंकराचार्य ने कहा कि सभी धर्मों में, यहां तक कि कानून में भी जो अपराधी होता है उसको किसी क्षेत्र विशेष से बाहर करने का नियम है। अपने उसी अधिकार का प्रयोग करते हुए धर्म रक्षा की दृष्टि से राहुल गांधी को हिंदू धर्म से बहिष्‍कृत किया जाता है।

पीएम मोदी के दौरे के आसपास श्रीनगर में हो सकता था हमला, आतंकियों की थी नजर, क्यों बदलना पड़ गया प्लान?

नई दिल्ली पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। वहीं पाकिस्तान का आतंकी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया। कश्मीर में चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती और हाई लेवल इंटेलिजेंस के बावजूद आतंकियों ने 26 मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य एजेंसियों ने स्थानीय सुरक्षाअधिकारियों को आतंकी हमले को लेकर पहले ही अलर्ट किया था। मामले के जानकार लोगों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने बताया था कि 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के आसपास श्रीनगर में हमला हो सकता है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद श्रीनगर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। आसपास के पर्यटन स्थलों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। इसमें दाचीगाम नेशनल पार्ट भी शामिल था। इसकी दूरी श्रीनगर से करीब 22 किलोमीटर है। हालांकि बाद में खराब मौसम की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा कैंसल हो गया। इसके बाद ही 22 अप्रैल को श्रीनगर से मात्र 90 किलोमीटर दूर आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया। उन्होंने धार्मिक पहचान पूछने के बाद लोगों की हत्या कर दी। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, खुफिया जानकारियों के बाद लोकेशन का पता लगाना सबसे कठिन काम होता है। आर्मी और सिविलियन सिक्योरिटी अधिकारियों को अलर्ट किया गया था। वहीं यह बात भी बताई गई थी कि आतंकी पर्यटकों को निशआना बना सकते हैं। खुफिया एजेंसियों ने कहा था कि श्रीनगर के आसपास पर्यटन स्थल पर आतंकी हमला कर सकते हैं। खुफिया जानकारी के बाद डीजीपी नलिन प्रभात चार दिनों तक श्रीनगर में ही रुके रहे। वह श्रीनगर के आसपास के इलाकों की पूरी खबर ले रहे थे। 22 अप्रैल को प्रभात जम्मू पहुंचे ही थे कि उधर पहलगाम में आतंकियों ने हमला कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी खुफिया रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया था कि पहलगाम में आतंकी हमला कर सकते हैं। यह बात स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा कैंसल होने के बाद आतंकी दूसरे मौके की तलाश में थे। वे लंबे समय तक इंतजार भी नहीं करना चाहते थे। पहलगाम का बैसरन पर्यटकों के लिए हमेशा ही खुला रहता है। यह केवल अमरनाथ यात्रा के दौरान बंद किया जाता था। हालांकि किसी इनपुट में बैसरन को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई और ना ही आशंका जताई गई। एक अधिकारी ने बताया कि आतंकियों में एक स्थानीय शख्स भी था जो कि पर्यटकों को लेकर एक तरफ गया। इसके बाद विदेशी आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की। इस स्थान की एंट्री एक ही जगह से थी। वहीं टिकट के जरिए एंट्री दी जाती थी। इस बात का पूरा अंदेशा था कि इस इलाके में आतंकी छिपे हुए हैं। इसके बाद भी स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों से चूक हूई। 

हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने दी सफाई, धोनी के इस फैसले ने डुबोई CSK की लुटिया!

बेंगलुरु चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 19वां ओवर खलील अहमद को देने के एमएस धोनी के फैसले का सपोर्ट किया है। खलील ने अपने इस ओवर में एक नो बॉल समेत कुल 33 रन खर्च किए थे, उनका यह ओवर मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। खलील अहमद के इसी ओवर की वजह से बेंगलुरु की टीम निर्धारित 20 ओवर में 213 के स्कोर तक पहुंचने में कामयाब रही थी, उस ओवर से पहले ऐसा लग रहा था कि टीम को 180 रन बनाने के लिए भी संघर्ष करना होगा। चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मैच में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अंशुल कंबोज का एक ओवर शेष रहने के बावजूद अहमद को गेंदबाजी के लिए बुलाया लेकिन उनका यह फैसला सही साबित नहीं हुआ क्योंकि रोमारियो शेफर्ड के आक्रामक अंदाज के सामने यह तेज गेंदबाज कमजोर पड़ गया। फ्लेमिंग ने शनिवार रात मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘इस सत्र में खलील ने हमारे लिए वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है, इसलिए धोनी का उनकी जगह किसी अन्य गेंदबाज को गेंद थमाने का कोई कारण नजर नहीं आता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कंबोज अपनी भूमिका में लगातार बेहतर होते जा रहे हैं। वह डेथ ओवरों गेंदबाजी करने में सक्षम हैं। वह भविष्य के लिए एक विकल्प हो सकते हैं, लेकिन ऐसा कोई कारण नहीं था कि खलील की जगह उन्हें गेंदबाजी करने के लिए बुलाया जाता।’’ आरसीबी ने चेन्नई के सामने 214 रन का टारगेट दिया था लेकिन सीएसके निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट पर 211 रन ही बना सकी। फ्लेमिंग ने कहा, ‘‘अगर हमने किसी एक ओवर में अच्छे रन बनाए होते तो हम जीत जाते लेकिन उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। हमें 10 ओवर के बाद एक बड़े ओवर की जरूरत थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’’

मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय, खराब परफॉर्मेंस वाले पहले बदले जाएंगे

भोपाल 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति (Transfer Policy) को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों (Officers) और (&) कर्मचारियों (Employees) का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें – 0- विभाग अपने लिए अलग से तबादला नीति बना सकेंगे, लेकिन जीएडी के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। 0- जीएडी की नीति से हटकर किए जाने वाले तबादलों में मुख्यमंत्री के समन्वय में आदेश प्राप्त करने होंगे। 0- जिला संवर्ग के कर्मचारी का और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर तबादला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जाएगा। पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं 0- जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। 0- ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। 0- जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे 0- ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। 0- जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। 0- कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। 0- चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। 0- संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। 0- तबादला नीति-2025 को मंगलवार को डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने बैठक में मंजूरी दी थी।

डेवाल्ड ब्रेविस को lbw आउट दे दिया था। इसमें गलती अंपायर की थी या ऑपरेटर की या फिर खुद बल्लेबाजों की?, जाने तहकीकात

नई दिल्ली IPL 2025 का 52वां लीग रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया। बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में आरसीबी को जीत मिली। ये एक हाई स्कोरिंग एनकाउंटर था। हालांकि, ये मैच इस बात के लिए ज्यादा जाना जाएगा कि डेवाल्ड ब्रेविस के साथ क्या हुआ। डेवाल्ड ब्रेविस को lbw आउट दे दिया था। इसमें गलती अंपायर की थी या ऑपरेटर की या फिर खुद बल्लेबाजों की? इसकी तहकीकात करते हैं, क्योंकि ये बहुत विवादास्पद फैसला नजर आया। दरअसल, 17वें ओवर की तीसरी गेंद पर बल्लेबाजी के लिए डेवाल्ड ब्रेविस आए थे। चेन्नई की टीम मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी। लुंगी एनगिडी ने पिछली गेंद पर ही 94 रनों के स्कोर पर आयुष म्हात्रे को आउट किया था। एनगिडी ने गेंद गेंद लॉ फुलटॉस फेंकी, जिसे ब्रेविस कनेक्ट नहीं कर पाए। गेंद पैड पर लगी और वे दौड़ पड़े। इस दौरान अंपायर नितिन मेनन ने उनको आउट दे दिया। यहां गौर करने वाली बात ये थी कि अपील तो हो रही थी, लेकिन जब अंपायर ने आउट दिया तो ना तो अंपायर की तरफ बल्लेबाज ब्रेविस का चेहरा था और ना ही दूसरे छोर से दौड़ रहे रविंद्र जडेजा का था। ये आप इस वीडियो में देख सकते हैं। दोनों ने एक रन पूरा किया। उधर से थ्रो आया, जो स्टंप्स पर लगा तो रविंद्र जडेजा और डेवाल्ड ब्रेविस दूसरा रन दौड़ गए। उनको पता ही नहीं था कि ब्रेविस को आउट दे दिया गया है। जैसे ही उनको आउट का पता चलता तो सबसे पहले रविंद्र जडेजा और ब्रेविस ने कुछ बात की और फिर T यानी डीआरएस का इशारा किया। हालांकि, अंपायर नितिन मेनन ने इस अपील स्वीकार नहीं किया और ब्रेविस को पवेलियन लौटने के लिए कहा। रविंद्र जडेजा और डेवाल्ड ब्रेविस ने ये दलील भी दी कि स्टेडियम में लगे बड़े स्क्रीन पर 15 सेकंड का टाइमर नहीं चला तो उनको कैसे पता चलेगा कि टाइम खत्म हो गया है। हालांकि, फील्ड अंपायर नितिन मेनन ने इस अपील को खारिज किया और बल्लेबाज को पवेलियन लौटने के लिए कहा। बाद में जब रिप्ले देखा गया तो पता चला कि इस फुलटॉस गेंद पर इम्पैक्ट अंपायर्स कॉल है और हिटिंग लेग स्टंप के बाहर है। ऐसे में डीआरएस की मदद से कम से कम दो रन नहीं मिलने थे तो फैसला बदला जाता, लेकिन अंपायर नियमों की दलील देकर अड़े रहे। कौन जिम्मेदार? अब सवाल उठता है कि इसका जिम्मेदार कौन है? क्या फील्डर अंपायर नितिन मेनन इसके जिम्मेदार हैं, जिन्होंने जल्दी नहीं बताया, या वह स्क्रीन ऑपरेटर, जो बल्लेबाज को आउट दिए जाने के बाद बड़े स्क्रीन पर 15 सेंकड का काउंटडाउन शुरू करता है या फिर खुद बल्लेबाज? जिन्होंने नहीं देखा कि अंपायर ने आउट का इशारा किया है। इसमें दोष बल्लेबाजों को कम जाएगा, क्योंकि जब इशारा हुआ तो उनका ध्यान बॉल पर था। यहां तक कि वे दूसरा रन इसलिए दौड़े, क्योंकि उनको लगा कि गेंद प्ले में है और इसी वजह से फील्डर ने थ्रो फेंका है। अब बात अंपायर और ऑपरेटर की आती है…अंपायर ने चलिए फैसला दे दिया कि आउट है (हालांकि, बल्लेबाज नॉटआउट था), लेकिन उस केस में बल्लेबाजों को अनुमति देता कि आप डीआरएस कुछ सेकंड बाद भी ले सकते हैं, क्योंकि 15 सेकंड का काउंटडाउन स्क्रीन पर नहीं था। क्या कहते हैं नियम? आईसीसी और आईपीएल की प्लेइंग कंडीशन्स में यही बात लिखी हुई है कि अगर किसी बल्लेबाज को आउट दे दिया जाता है तो उसी समय गेंद डेड हो जाती है। उसके बाद आप रन दौड़े या चौका चला जाए, कोई मतलब नहीं होगा। भले ही डीआरएस में फील्ड अंपायर का फैसला बदला ही क्यों ना जाए। 15 सेकंड के बाद आप रिव्यू भी नहीं ले सकते। इस केस की बात करें तो दोनों बल्लेबाजों को पता नहीं था कि अंपायर का फैसला क्या है, दूसरी बात ये कि स्क्रीन पर काउंटडाउन नहीं था। इस केस में थर्ड अंपायर के पास फैसले को रेफर किया जाना चाहिए था, क्योंकि बल्लेबाजों का ध्यान गेंद पर था। इस बात को नजरअंदाज ना भी करें तो बड़े स्क्रीन पर 15 सेकंड का टाइमर भी नहीं था कि बल्लेबाज ये भांप सकें कि फैसला आउट या नॉट आउट का दिया गया है। इस पर चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने कहा, “हां, यह एक बड़ा पल था। जड्डू और ब्रेविस से बात करते हुए, सीधे रन दौड़ने के बारे में बहुत कुछ पता चला। मुझे लगता है कि उन्होंने गेंद को देखा और वास्तव में थ्रो के बाद गेंद चार रन के लिए बाउंड्री पार चली गई। इसमें वह खो गए। ब्रेविस ने समय पर रिव्यू लिया या नहीं। मुझे इसका उत्तर नहीं पता। वह निश्चित नहीं था, यह देखते हुए कि वे उस समय रन दौड़ रहे थे।”

कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया है, केकेआर की टीम में दो बदलाव हुए

नई दिल्ली कोलकाता के ईडन गार्डेंस में आज का आईपीएल मैच मेजबान कोलकाता नाइट राइडर्स वर्सेस राजस्थान रॉयल्स है। आईपीएल 2025 के 53वें लीग मैच में कोलकाता की टीम के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। केकेआर की टीम में दो बदलाव हुए हैं। राजस्थान की टीम में 3 बदलाव हुए हैं। केकेआर की टीम में मोईन अली और रमनदीप सिंह खेलेंगे। वहीं, राजस्थान की टीम में कुणाल राठौर, वानिंदु हसरंगा और युधवीर सिंह चरक खेलेंगे। केकेआर के लिए यहां से हर एक मैच अहम है, जबकि राजस्थान की टीम प्लेऑफ्स की रेस से बाहर है। वह कोलकाता का खेल बिगाड़ सकती है। यही कारण है कि मुकाबला दिलचस्प होगा। केकेआर इस समय पॉइंट्स टेबल में 10 मैचों के बाद सातवें नंबर पर है। टीम के खाते में 9 अंक हैं। वे अभी भी 17 अंकों तक पहुंच सकते हैं, लेकिन इसके लिए बाकी के चार मैच जीतने होंगे।

भोपाल के इश्तिहाक ने खुद को अमन सिंह बताकर महिला सब इंस्पेक्टर को प्रेमजाल में फंसाया और फिर शादी कर ली

रायसेन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े रायसेन जिले में एक महिला पुलिस एसआई लव जिहाद का शिकार हो गई। भोपाल के इश्तिहाक ने खुद को अमन सिंह बताकर उसे प्रेमजाल में फंसाया और फिर शादी कर ली। महिला को इस फरेब का पता लगा तब तक देर हो चुकी थी। उसने फरवरी 2025 में थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उसके ही साथी तीन महीनों तक इस मामले को दबाए रहे। भोपाल में हिंदू लड़कियों के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह की वारदातें सामने आने के बाद जब जनविरोध बढ़ा तो पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। महिला एसआई का आरोप है कि वर्ष 2019 में भोपाल में आरक्षक पद पर पदस्थ रहते हुए उसकी मुलाकात एक युवक से हुई थी।   मकान की रजिस्ट्री पर लिखा मिला इश्तिहाक अहमद युवक ने खुद को ‘अमन’ नामक हिंदू युवक के रूप में प्रस्तुत किया और दोस्ती बढ़ाकर विवाह का प्रस्ताव रखा। कुछ ही समय में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने विवाह कर लिया। एक वर्ष बाद 2020 में महिला को तब सच्चाई का पता चला जब एक मकान की रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों में युवक का असली नाम ‘इश्तिहाक अहमद’ दर्ज मिला। मानसिक रूप से प्रताड़‍ित करता रहा इस पर दोनों के बीच विवाद हुआ, लेकिन महिला ने वैवाहिक जीवन बचाने का प्रयास किया। बाद में इश्तिहाक का व्यवहार हिंसक होता गया। वह महिला एसआई के साथ आए दिन मारपीट करता और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। 19 फरवरी 2025 को महिला ने प्रताड़ना बढ़ने पर मंडीदीप थाने में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक तौर पर यह शिकायत केवल मारपीट और प्रताड़ना के रूप में दर्ज की गई थी, लेकिन हाल ही में इस मामले में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं।   भोपाल में कैफे चलाता है इश्तिहाक एसपी पंकज कुमार पांडे ने बताया कि आरोपी इश्तिहाक अहमद भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र में एक कैफे का संचालन करता है। पुलिस की टीम ने उसे शुक्रवार को भोपाल से गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके अलावा पुलिस सभी संभावित पहलुओं पर भी जांच कर रही है। बच्चे के कारण साथ रह रही थी महिला औबेदुल्लागंज एसडीओपी शीला सुराणा ने बताया कि आरोपित, महिला एसआई के साथ रह रहा था और घरेलू हिंसा करता था। नाम उजागर होने के बाद भी महिला अपने बेटे के कारण उसके साथ रह रही थी, लेकिन जब अत्याचार असहनीय हो गया तब उसने शिकायत दर्ज कराई।

Keunggulan Teknologi Enkripsi di Situs Mauslot Resmi

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शहर में निर्धारित बस स्टॉपेज पर बस नहीं रोकना पड़ा भारी, 11 बस संचालकों के खिलाफ हुई चालानी कार्रवाई

मुंगेली शहर में निर्धारित बस स्टॉपेज को नजरअंदाज कर अन्यत्र बस रोकने वाले 11 बस संचालकों पर जिला परिवहन विभाग द्वारा चालानी कार्रवाई की गई. इस अभियान में कुल 8,700 रुपए जुर्माना वसूला गया. शहर में सुगम यातायात व्यवस्था बनाए व यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखने हुए कलेक्टर कुन्दन कुमार ने जिला परिवहन अधिकारी को बस स्टॉपेज चिन्हित करने के निर्देश दिए थे. जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि शहर में चार स्थानों मुंगेली-बिलासपुर मार्ग दाऊपारा चौक (सुखनंदन हॉस्पिटल के सामने), मुंगेली-पंडरिया मार्ग पड़ाव चौक (जिला ग्रंथालय के सामने), लोरमी तिराहा और लोरमी-बिलासपुर मार्ग (पड़ाव चौक) को बस स्टॉपेज चिन्हांकित कर कलेक्टर के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया है, जिसे भविष्य में बस स्थानक बनाया जाएगा. जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि नियमों के विरुद्ध संचालक तय स्टॉपेज के बजाय अनाधिकृत स्थानों पर बसें रोक रहे थे, जिससे यातायात व्यवस्था बाधित हो रही थी. इसे गंभीरता से लेते हुए 11 बस संचालकों पर कार्रवाई की गई. साथ ही, सभी बस संचालकों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में केवल चिन्हित स्थानों पर ही बसें रोकी जाएं और यातायात नियमों का पूर्ण रूप से पालन किया जाए.

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