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यूपीआई पेमेंट का 16 जून से बदलेगा अंदाज अब सिर्फ 15 सेकंड में होगा लेनदेन

नई दिल्ली आप जो यूपीआई पेमेंट करते हैं, वह अब और तेज होने वाला है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आदेश के बाद अब सिर्फ 15 सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाएगा। पहले इसमें 30 सेकंड लगते थे। यानी अब आपके मोबाइल से होने वाला लेदनेन 50 फीसदी फास्‍ट होने वाला है। 16 जून से यह प्रोसेस शुरू होने जा रहा है, जिसमें एपीआई रेस्‍पॉन्‍स टाइम की अहम भूमिका होगी। अभी तक लोगों को यूपीआई ऐप से पैसे भेजने में, क्‍यूआर कोड स्‍कैन करने में और लेनदेन की पुष्टि होने में इंतजार करना पड़ता है, जो कई बार काफी लंबा हो जाता है। एनपीसीआई ने इस देरी को कम करने का फैसला किया है। क्‍या होता है API रेस्‍पॉन्‍स टाइम, जिसे कम किया जा रहा API रेस्‍पॉन्‍स टाइम, उस समय को कहा जाता है, जिसमें एपीआई के लिए रिक्‍वेस्‍ट आती है, उसे प्रोसेस किया जाता है और रेस्‍पॉन्‍स वापस भेजने में जो टाइम लगता है। एपीआई का मतलब होता है एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस। यह रूल्‍स का एक सेट है, जिसके अनुसार सॉफ्टवेयर एक-दूसरे से कनेक्‍ट करते हैं। यूपीआई पेमेंट सिस्‍टम में इसका इस्‍तेमाल होता है। कैसे काम करेगा सिस्‍टम, उदाहरण से समझिए TOI की रिपोर्ट के अनुसार, आप एक दुकान पर गए और आपने दुकानदार से एक हजार रुपये का सामान खरीदा। आप ICICI बैंक के iMobile ऐप से पेमेंट करते हैं। तो आप दुकानदार के QR कोड को स्कैन करेंगे। अब वह QR कोड HDFC बैंक अकाउंट से जुड़ा है। इस सिचुएशन में ICICI बैंक रिक्‍वेस्‍ट करेगा। व‍ह रिक्‍वेस्‍ट NPCI नेटवर्क के जरिए HDFC बैंक को जाएगी। पेमेंट हुआ या नहीं, यह जानने के लिए HDFC बैंक की ओर से रेस्‍पॉन्‍स भेजा जाएगा। जो फ‍िर से NPCI नेटवर्क से ICICI बैंक को आएगा। पहले इस काम में 30 सेकंड लग जाते थे। जून से इसमें 15 सेकंड लगने की उम्‍मीद है। बेहतर होगा लोगों का अनुभव, फटाफट होंगे पेमेंट एनपीसीआई, यूपीआई पेमेंट को फास्‍ट बनाना चाहती है। उसका मानना है कि नए बदलावों से लोगों का अनुभव और बेहतर होगा। एनपीसीआई ने फोनपे और पेटीएम जैसे बड़े प्‍लेयर्स से भी कहा है कि वो नए नियमों के अनुसार अपने सिस्‍टम को अपडेट कर लें। एनपीसीआई का सर्कुलर कहता है कि इन बदलावों का मकसद यूजर के ओवरऑल एक्‍सपीरियंस को बेहतर बनाना है। वह चाहती है कि यूपीआई पेमेंट का यूज करने वाले तमाम लोग झट से पेमेंट कर पाएं और उन्‍हें फटाफट से पैसा रिसीव हो। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि यूपीआई का यह फैसला कितना कारगर साबित होता है।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के साथ श्री धनखड़ का हुआ परस्पर संवाद

किसान के खेत से निकलता है विकसित भारत का रास्ता : उप राष्ट्रपति धनखड़ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के साथ हुआ परस्पर संवाद कार्यक्रम राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केन्द्रीय मंत्री सिंधिया भी कार्यक्रम में हुए शामिल ग्वालियर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि विकसित भारत का रास्ता किसान के खेत से निकलता है। इसलिए कृषि के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं और कृषि विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों के जीवन में बदलाव एवं खुशहाली लाने में अपना योगदान दें। प्रयास ऐसे हों कि किसान केवल फसल उत्पादक बनकर ही न रहें, अपितु वे एग्री-प्रीनियर (कृषि उद्यमी) बनें। उप राष्ट्रपति धनखड़ रविवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के परस्पर संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कृषि विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे तकनीक और अनुसंधान का इस्तेमाल कर कृषि क्षेत्र में बदलाव के प्रबंधक बनें। संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उप राष्ट्रपति की धर्मपत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ और विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला मंचासीन थे। इस अवसर पर जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति किसानों के कल्याण का संदेश देती है। वर्तमान दौर में किसानों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने “जय जवान–जय किसान” का नारा दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने “जय जवान–जय किसान के साथ जय विज्ञान” जोड़ा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने “जय जवान–जय किसान–जय विज्ञान में जय अनुसंधान” को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी विज्ञान और अनुसंधान के केन्द्र बिंदु होते हैं। इसलिए विद्यार्थी इस कसौटी पर खरे उतरकर किसानों के कल्याण के लिए काम करें। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि किसानों को अपनी उपज तत्काल न बेचनी पड़े, इसके लिये पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा दें और वेयर हाउस एवं कोल्ड स्टोर स्थापित कर किसानों को भण्डारण के लिए प्रेरित करें। धनखड़ ने कहा कि किसान अपनी परेशानी व्यक्त करें, उससे पहले ही हमें अंदाजा लगा लेना चाहिए कि किसान क्या चाहते हैं। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों के हित में काम कर रही है और उनके लिये सकारात्मक नीतियां बनाई हैं। सरकार ने सहकारिता को भी कृषि में अध्याय के रूप में जोड़ा है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के खाते में सीधे धनराशि पहुँच रही है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया एवं समाजसेवी दत्तोपंत ठेंगड़ी के सुकृत्यों को याद करते हुए कहा कि सुखद संयोग है कि ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय का नाम राजमाता विजयाराजे सिंधिया एवं सभागार का नाम दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के नाम पर है। इसलिये यह विश्वविद्यालय दो ऐसी महान आत्माओं का संगम है जो राष्ट्रवाद और समाज के कल्याण के लिये समर्पित रहीं। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी यह संकल्प लें कि इन विभूतियों के आदर्शों पर चलकर हम सदैव राष्ट्र हित को सर्वोपर्य रखेंगे। मध्यप्रदेश में गौ-संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों को सराहा उप राष्ट्रपति धनखड़ ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गौवंश के संरक्षण के उद्देश्य से गौशालाओं को दिए जा रहे प्रोत्साहन की प्रशंसा की। साथ ही कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की गौशाला के विस्तार में सहयोग के लिये कहा। कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान की परिपाटियों को विश्व स्तरीय बनाएँ : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल ने कहा कि मानव सभ्यता के उद्भव और विकास में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारे देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी के लिये कृषि आज भी आजीविका की जीवन रेखा बनी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी दूरदृष्टि दृष्टिकोंण के साथ किसानों को समृद्ध व सशक्त बनाकर विकसित भारत बनाने के लिये लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विकास और परिवर्तन के केन्द्र बिंदु विश्वविद्यालयों को अध्ययन व अनुसंधान की मौजूदा परिपाटियों को विश्व स्तरीय बनाना होगा। साथ ही तेजी से बदलती जलवायु को ध्यान में रखकर नई तकनीकों के द्वारा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना होगा। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों से सामूहिक रूप से कृषि क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में हो रहे कार्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था बदलेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि और पशुपालन के कार्य प्रदेश की अर्थ व्यवस्था बदलने का कार्य करेंगे। लगभग दो वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश का कृषि क्षेत्र 45 लाख हेक्टेयर था जो आज की स्थिति में 55 लाख हो गया है। प्रदेश में एक करोड़ हेक्टेयर कृषि क्षेत्र निर्मित करने का राज्य सरकार का संकल्प है। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण योगदान है, इस नाते निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं। प्रदेश में नर्मदा और अन्य नदियों के जल से सिंचाई का कार्य हो ही रहा है। विश्व की प्रथम नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा मंजूरी के बाद पार्वती काली सिंध चंबल परियोजना को भी स्वीकृति प्राप्त हुई है। वर्षों से यह परियोजनाएं लंबित थीं। आने वाले समय में प्रदेश में बुंदेलखण्ड, चंबल और मालवा क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का उल्लेखनीय विकास होगा। इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश का नक्शा बदलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनेक राष्ट्रों में कम क्षेत्र में अधिक अनाज उत्पादन का कार्य हो रहा है। मध्यप्रदेश में जहां उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों को कृषि संकाय के महत्व से अवगत करवाकर आवश्यक अध्ययन और अनुसंधान की व्यवस्थाएं की जा रही हैं वहीं लाभकारी फसलों के उत्पादन को महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के सहयोगी पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं। जो भी व्यक्ति गोपालन करता है वह गोपाल है और हमारा घर-घर गोकुल है। राज्य सरकार ने 25 से अधिक गाय पालने पर 25 प्रतिशत की अनुदान राशि प्रदान करने और गोपालकों से दूध खरीदने का संकल्प लिया है। गौशालाओं को भूमि प्रदान करने की पहल … Read more

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने जारी किये निर्देश, 31 दिसम्बर के पूर्व फायर प्लॉन प्रस्तुत करें

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश में निश्चित ऊँचाई से बड़े भवनों में अग्नि दुर्घटना से बचाव के इंतजामों का निरीक्षण करने और नियमों की अनदेखी करने वाले भवनों को चिन्हित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से इस कार्य को प्राथमिकता दिये जाने के लिये कहा है। प्रदेश में फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र प्राप्त किये जाने के संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। जारी निर्देश के अनुसार भवन स्वामी अब 31 दिसम्बर, 2025 तक फायर प्लॉन प्रस्तुत कर संबंधित अग्निशमन प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त कर सकेंगे। नियत तिथि के बाद फायर प्लॉन प्रस्तुत नहीं करने वाले भवन स्वामियों के विरुद्ध दण्ड के अधिरोपण की कार्रवाई नियत नियम के अनुसार की जायेगी। निर्देशों में कहा गया है कि फायर सेफ्टी प्लॉन के कण्डिका क्रमांक-2 में उल्लेखित भवन, जो कि पूर्व से निर्मित हैं, उन्हें 2 माह के भीतर एनबीसी से निर्धारित मानक अनुसार फायर प्लॉन तैयार कर अनुमोदन के लिये अग्निशमन प्राधिकारी को प्रस्तुत करना होगा। निर्देश में यह भी बताया गया है कि अग्निशमन अधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्ति के एक माह के भीतर फायर प्लॉन का अनुमोदन किया जायेगा। कण्डिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2 माह की समयावधि के भीतर यदि भवन स्वामी फायर प्लॉन तैयार कर अग्निशमन प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं करता है, तो विलंब शुल्क के साथ 500 रुपये प्रतिदिन की दर से और एक वर्ष के बाद एक हजार रुपये प्रतिदिन की दर पर दण्ड शुल्क देय होगा। राज्य शासन ने नगर निगमों के लिये आयुक्त नगरपालिक निगम, नगरपालिका परिषद और नगर परिषद के लिये संभागीय संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले प्रकरणों के लिये जिला कलेक्टर और छावनी परिषद क्षेत्र जबलपुर, महू, मुरार, पचमढ़ी और सागर के लिये अधिशासी अधिकारी को अग्निशमन प्राधिकारी घोषित किया है। भवनों में अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रावधान नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जिन भवनों के लिये फायर सेफ्टी प्लॉन के प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है, उनमें 15 मीटर से ऊँचे समस्त भवन, एक तल पर 500 M2 से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाले समस्त भवन (आवासीय एवं धार्मिक और सामुदायिक भवनों को छोड़कर) शामिल किये गये हैं। कोई भी होटल और अस्पताल, जिसमें 50 से अधिक पलंग और बिस्तर हों, उन्हें भी शामिल किया गया है। नियमों में 50 से कम पलंग वाले होटल, 50 बिस्तरीय अस्पताल पंजीकृत फायर इंजीनियर का प्रमाणीकरण प्रस्तुत करेंगे। फायर सेफ्टी प्लॉन के संबंध में दिशा-निर्देश संबंधित क्षेत्र के नगरीय निकायों के कार्यालयों से प्राप्त किये जा सकते हैं।  

किसान 5 मई को गेहूं उपार्जन के लिए कर सकते हैं स्लॉट बुक

भोपाल ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत किसान जो 30 अप्रैल तक स्लॉट बुक नहीं कर सके, वह 5 मई को स्लॉट बुक कर उसी दिन गेहूं का विक्रय उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर कर सकते हैं। स्लॉट बुक करने के लिए जिला खाद्य कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवेदन में कृषक का नाम, किसान कोड, विक्रय की जाने वाली उपज की मात्रा आदि का उल्लेख करना होगा। 5 मई को उपार्जन केंद्र पर किसान की उपज की तौल एवं देयक जारी नहीं होने पर किसानों को नोडल अधिकारी के द्वारा टोकन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।  जिन किसानों की स्लॉट की वैधता समाप्त हो गई है, उनकी अवधि डीएसओ लॉगिन से बढ़ाने तथा इन किसानों से गेहूं की खरीदी 9 मई तक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।  इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश खाद्य विभाग द्वारा जारी कर दिए गए हैं।  

आज भारत और जापान एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा करने जा रहे हैं

नई दिल्ली भारत और जापान एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा करने जा रहे हैं। इस चर्चा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चा काफी महत्वपूर्ण है। इस चर्चा में भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान की ओर से वहां के रक्षा मंत्री शामिल होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज नई दिल्ली में जापान के रक्षा मंत्री जनरल नाकातानी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों पक्ष वर्तमान क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। भारत और जापान के बीच दीर्घकालिक मित्रता है। 2014 में इस सहयोग को विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में शामिल करने के बाद दोनों देशों की इस मित्रता ने गुणात्मक गति प्राप्त की है। रक्षा और सुरक्षा दोनों देशों के बीच संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। रणनीतिक मामलों पर बढ़ते समन्वय के कारण हाल के वर्षों में भारत और जापान के बीच रक्षा आदान-प्रदान को बल मिला है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण से इसका महत्व बढ़ रहा है। नवंबर 2024 में लाओ पीडीआर में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस के मौके पर दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत हुई थी। उस बातचीत के बाद छह महीने के भीतर दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच यह दूसरी बैठक होगी। इससे पहले भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान जापान के राजदूत ने जम्मू कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की थी। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले समेत आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। इस दौरान दोनों पक्षों ने जापान और भारत के बीच चल रहे रक्षा सहयोग की समीक्षा की थी। भारत और जापान अपने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही दोनों देश अपने रिश्तों को और बेहतर एवं विस्तारित करने के नए अवसरों पर काम कर रहे हैं।

नागरिकता विवाद में राहुल गांधी को राहत: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, केंद्र पर उठाए सवाल

Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute: High Court dismisses petition, raises questions on Centre लखनऊ। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को लखनऊ हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अस्पष्ट जवाब दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि जब तक केंद्र कोई स्पष्ट स्थिति नहीं रखता, तब तक याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी है। यह मामला पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में बना हुआ था, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटेन की एक कंपनी के डायरेक्टर पद पर रहते हुए खुद को “ब्रिटिश नागरिक” बताने का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के निवासी और भाजपा से जुड़े हैं, ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि यदि राहुल गांधी ने स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया है, तो भारतीय नागरिकता कानून 1955 के अनुसार उनकी नागरिकता रद्द की जानी चाहिए और वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किए जाएं। हाईकोर्ट की टिप्पणी और केंद्र की भूमिका कोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह शामिल थे, ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत के निपटारे के लिए कोई समयसीमा नहीं दे पा रही है। ऐसे में याचिका पर विचार जारी रखना व्यर्थ होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अन्य वैकल्पिक विधिक उपायों के लिए स्वतंत्र है। इससे पहले 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है, और इसमें देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नहीं—और 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं आया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सूर्यभान पांडेय ने कोर्ट में केंद्र की ओर से स्थिति रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त” बताया था। इसके बाद कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ही मामले की गंभीरता को नहीं समझ रही, तो कोर्ट के पास याचिका खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। याचिकाकर्ता के आरोप क्या थे? याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने वर्ष 2005-2006 में ब्रिटेन की एक कंपनी, ‘BackOps Limited’ में डायरेक्टर के रूप में खुद को “British citizen” बताया था। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के 2022 के एक गोपनीय मेल का भी हवाला दिया और कहा कि राहुल गांधी की नागरिकता संदिग्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि राहुल गांधी वास्तव में ब्रिटिश नागरिक रहे हैं या दोहरी नागरिकता रखते हैं, तो भारतीय कानून के अनुसार उन्हें संसद सदस्य बने रहने और चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) के तहत याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की नागरिकता को समाप्त करने की मांग की थी। Read More: मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे पिछली सुनवाइयों का विवरण Rahul Gandhi in citizenship dispute मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। 24 मार्च को कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा। 19 दिसंबर 2024 को जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने केंद्र सरकार को यूके सरकार से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा है और जांच जारी है। राहुल गांधी की ओर से चुप्पी Rahul Gandhi in citizenship dispute इस पूरे मामले के दौरान कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिससे कई सवाल खड़े हुए। हालांकि, कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से सार्वजनिक रूप से इस याचिका पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्रकृति और भी गहरी हो जाती है। क्या आगे की कार्रवाई होगी? हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता अन्य वैधानिक विकल्पों के लिए स्वतंत्र हैं। इसका अर्थ यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य मंच पर चुनौती के रूप में फिर से उठाया जा सकता है। राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे सवाल और कोर्ट की टिप्पणी दोनों ही भारतीय राजनीति में संवेदनशील और अहम हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका खारिज कर एक स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक केंद्र खुद ठोस जानकारी नहीं देता, तब तक न्यायपालिका इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। अब देखना होगा कि क्या याचिकाकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाते हैं या केंद्र सरकार इस पर कोई नई स्थिति स्पष्ट करती है।

हिंदू लड़कियों को मुस्लिम समुदाय के लड़कों ने पहचान छुपाकर बरगलाया, लव जिहाद रोकने का कानून पर पुलिसिंग फेल

भोपाल लव जिहाद रोकने के लिए सरकार ने कानून तो बनाया पर कमजोर पुलिसिंग के कारण उसका प्रभाव नहीं दिख रहा। भोपाल में ही निजी कॉलेज की हिंदू लड़कियों को मुस्लिम समुदाय के लड़कों ने पहचान छुपाकर बरगलाया। दैहिक शोषण किया। यह कोई एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि संगठित अपराध था। इसमें कई लोग शामिल थे। इसके बाद भी पुलिस को कोई भनक नहीं लगी। दरअसल, ऐसे मामलों में कमजोर कड़ी पुलिस व्यवस्था ही है।   पुलिसकर्मियों के साथ ही अभद्रता की न तो उनका खुफिया तंत्र ठीक से काम कर रहा है और न ही सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर के तौर-तरीकों से ही पुलिसकर्मी वाकिफ हैं। पुलिस का खौफ इस कदर कम हो चुका है कि मात्र मार्च-अप्रैल में ही आठ मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों के साथ ही अभद्रता की गई। दरअसल राजधानी भोपाल में युवतियों के दैहिक शोषण और ब्लैकमेल करने जैसी घटनाओं को कुछ लोग संगठित रूप से अंजाम देते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में भी आरोपितों के विरुद्ध धार्मिक स्वातंत्र्य कानून 2021 के अंतर्गत धारा तीन और धारा पांच के अंतर्गत भी प्रकरण कायम किया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक पांच पीड़िताएं सामने आई हैं। पांच आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। बुरका पहनने का दबाव बनाया घटनाक्रम से साफ लग रहा है कि आरोपितों ने पीड़िताओं को योजनाबद्ध तरीके से फंसाया और दुष्कर्म किया, पर ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं कि वे उनका धर्म परिवर्तन भी कराना चाहते थे। उन्होंने लड़कियों को मांस खिलाया। बुरका पहनने के लिए दबाव बनाया। इसी कारण यह मामला लव जिहाद से जोड़ा जा रहा है। आरोपित अलग-अलग राज्यों के हैं। इस कारण यह भी आशंका है कि इनके पीछे दूसरे राज्यों के कुछ और लोग हो सकते हैं जो आरोपितों की मदद कर रहे हों। पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है। 200 से ज्यादा केस दर्ज किए गए हैं इसी वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक कार्यक्रम में नाबालिग बेटियों को बहला-फुसलाकर दुष्कर्म करने वालों के लिए फांसी की सजा का प्रविधान करने की बात कही थी। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कड़ी कार्रवाई की बात कह चुके हैं। धार्मिक स्वातंत्र्य काननू के अंतर्गत प्रदेश में अभी तक 200 से अधिक प्रकरण कायम किए जा चुके हैं, पर अपराधियों में काननू का डर नहीं दिख रहा।

PBKS की सातवीं जीत, लखनऊ को 37 रन से हराया; अर्शदीप को तीन और उमरजई को दो विकेट मिले

लखनऊ  इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2025) के 54वां मैच में पंजाब किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 37 रनों से करारी शिकस्त दी. इस जीत के साथ ही पंजाब की टीम अंक तालिका में दूसरे पायदान पर आ गई है. इस मैच में टॉस जीतकर लखनऊ की टीम ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. पंजाब की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए प्रभसिमरन की तूफानी 91 रनों की पारी के बदौलत लखनऊ के सामने 237 रनों का लक्ष्य रखा था. इसके जवाब में उतरी लखनऊ की टीम 7 विकेट खोकर 199 रन ही बना सकी. ऐसी रही लखनऊ की पारी 237 रनों के जवाब में उतरी लखनऊ की शुरुआत बेहद खऱाब रही. तीसरे ही ओवर में लखनऊ को पहला झटका लगा जब मिचेल मार्श बिना खाता खोले ही अर्शदीप का शिकार बन गए. इसके बाद इसी ओवर में एडेन मार्करम भी 13 रन बनाकर आउट हो गए. उन्हें अर्शदीप ने बोल्ड किया. इसके बाद 5वें ओवर में लखनऊ को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब अर्शदीप ने निकोलस पूरन को भी चलता किया. इसके बाद कप्तान पंत से उम्मीद थी. लेकिन एक बार फिर उन्होंने निराश किया. पंत के बल्ले से केवल 18 रन निकले और वो अपना विकेट फेंक कर चले गए. इसके बाद 10वें ओवर में डेविड मिलर के रूप में लखनऊ को 5वां झटका लगा. लेकिन इसके बाद अब्दुल समद और आयुष बदोनी के बीच 41 गेंद में 81 रनों की साझेदारी हुई. लेकिन 16वें ओवर में अब्दुल समद 45 रन बनातर आउट हो गए. लेकिन एक छोर पर आयुष टिके रहे. उन्होंने 40 गेंदों पर 70 रनों की पारी खेली और आखिरी ओवर में उनका विकेट गिरा. लेकिन वो अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके. पंजाब किंग्स ने ये मैच 37 रनों से जीत लिया और अंक तालिका में दूसरे नंबर पर पहुंच गई. ऐसी रही पंजाब की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पहले ही ओवर में आकाश महाराज सिंह ने प्रियांश आर्य को चलता किया. प्रियांश के बल्ले से केवल 1 रन ही निकले. लेकिन इसके बाद प्रभसिमरन सिंह और जोश इंग्लिश ने तूफानी बल्लेबाजी की. इंग्लिश ने छक्कों की हैट्रिक भी लगाई. लेकिनव 5वें ओवर में आकाश ने उन्हें भी अपना शिकार बनाया. लेकिन दूसरे छोर पर प्रभसिमरन टिके रहे. प्रभसिमरन ने 30 गेंद में फिफ्टी जड़ी. लेकिन 13वें ओवर में पंजाब को तीसरा झटका लगा जब अय्यर 25 गेंद में 45 रन बनाकर दिग्वेश का शिकार बने. वहीं, इसके बाद नेहाल वढ़ेरा ने अच्छी बल्लेबाजी की लेकिन 16वें ओवर में प्रिंस यादव ने उन्हें अपना शिकार बनाया. नेहाल के बल्ले से 16 रन निकले. लेकिन एक छोर पर प्रभसिमरन सिंह डटे रहे. उन्होंने 48 गेंद पर 91 रन बनाए और 19वें ओवर में उनका विकेट गिरा. अपनी पारी में प्रभसिमरन ने 6 चौके और 7 छक्के लगाए. उनकी इस पारी के दम पर पंजाब ने लखनऊ को जीत के लिए 237 रनों का लक्ष्य दिया.

एमबी पावर ने स्थानीय रोजगार को दी मजबूती, अनूपपुर प्लांट में लगभग 275 स्थानीय युवाओं की नियुक्ति

एमबी पावर ने स्थानीय रोजगार को दी मजबूती, अनूपपुर प्लांट में लगभग 275 स्थानीय युवाओं की नियुक्ति निकट भविष्य में रोजगार के और अवसर देने का संकल्प स्थानीय ठेकेदारों और विक्रेताओं के साथ साझेदारी कर क्षेत्र में बढ़ाए रोजगार के अवसर अनूपपुर  एमबी पावर (मध्यप्रदेश) लिमिटेड ने आज अनूपपुर जिले के जैतहरी तहसील स्थित लहरपुर गांव में स्थित अपने पावर प्लांट के आसपास के गांवों से लगभग 275 युवाओं को रोजगार देकर स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह नियुक्तियां विभिन्न विभागों में की गई हैं, जिनमें अकुशल श्रमिकों से लेकर आईटीआई पास तकनीशियन, स्नातक और परास्नातक डिग्री धारकों तक को शामिल किया गया है। इस विविधता से कंपनी की मजबूत स्थानीय मानव संसाधन संरचना तैयार करने की प्रतिबद्धता झलकती है। प्रत्यक्ष नियुक्तियों के साथ ही कंपनी ने कई स्थानीय विक्रेताओं और ठेकेदारों के साथ भी साझेदारी की है, जिससे क्षेत्र में कई परिवारों के लिए आय के नए स्रोत उत्पन्न हुए हैं। अपनी विस्तार रणनीति के तहत एमबी पावर आने वाले वर्षों में अपनी वर्तमान क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है। इस विस्तार को समर्थन देने के लिए कंपनी ने आसपास के गांवों से और अधिक लोगों को रोजगार देने का संकल्प लिया है, ताकि पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था में सतत योगदान दिया जा सके। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कंपनी के विकास चरण को समर्थन दिया है और इसे क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला कदम बताया है। हिंदुस्तान पावर में एवीपी – मानव संसाधन, श्री सुबोध सिंह ने कहा, “एमबी पावर में हम हमेशा उन क्षेत्रों के विकास के लिए कार्य करते हैं, जहां हम कार्यरत हैं। हमने हमेशा स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी है, जिन्होंने हर कदम पर हमारा साथ दिया है। हमें खुशी है कि क्षेत्र में समग्र प्रगति हो रही है और जैसे-जैसे आवश्यकता होगी, हम और लोगों को रोजगार देते रहेंगे।” समुदाय-आधारित विकास और समावेशी प्रगति पर केंद्रित एमबी पावर एक जिम्मेदार संस्था और क्षेत्रीय विकास की सहायक शक्ति बनी हुई है।

जन-जागरण से जल-संरक्षण का ऐतिहासिक जन-अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “जल स्रोतों का संरक्षण केवल प्रशासन का कार्य नहीं, यह प्रत्येक नागरिक की सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है।” जल संकट आज वैश्विक चिंता का विषय है और भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह विषय और भी अधिक गंभीर हो जाता है। मध्यप्रदेश सरकार ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से इस चुनौती को अवसर में बदलने की प्रेरणास्पद पहल की है। जल-संरक्षण केवल अभियान नहीं, अपितु पर्यावरणीय पुनरुत्थान और सांस्कृतिक चेतना का समवेत संगम है। जन-भागीदारी से जल संरचनाओं को नवजीवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 30 अप्रैल से प्रारंभ किया गया “जल गंगा संवर्धन’’ अभियान एक बहु-स्तरीय आयोजन है। इसका उद्देश्य राज्य के जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, झीलों, पुराने कुओं, बावड़ियों और जल-धाराओं को पुनर्जीवित करना और उन्हें सतत रूप से संरक्षित करना है। यह अभियान सरकारी योजना से आगे बढ़कर अब जन-आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की नदियों, तालाबों, झीलों, पुराने कुओं, बावड़ियों और जल-धाराओं को सहेज कर उन्हें पुनर्जीवन देना है। इन जल स्रोतों की गाद निकासी, सफाई, सीमांकन और पुनर्जीवन की कार्य-योजना बनाई गई है, जिसमें जन-भागीदारी से श्रमदान भी किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक लोग स्वयं आगे आकर जल स्रोतों की सफाई कर रहे हैं। नदियों के किनारे विशेष रूप से देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण कर जल-स्तर बढ़ाने और मृदा क्षरण को रोकने का कार्य किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य किया जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में जल-संरक्षण पर जन-जागरण अभियान, रैलियाँ, निबंध प्रतियोगिताएँ, जल संवाद और ‘जल प्रहरी’ जैसी अवधारणाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। ड्रोन से सर्वेक्षण, वैज्ञानिक तरीके से जलग्रहण क्षेत्र की मैपिंग, भू-जल पुनर्भरण तकनीकों का उपयोग आदि भी अभियान का हिस्सा हैं। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जिले में हज़ारों जल स्रोतों की सफाई की जा रही है। अभियान में राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व के साथ ही जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयं-सेवकों, एनजीओ और आम नागरिकों की सामूहिक सहभागिता और सक्रियता ने अभियान को जन-अभियान बना दिया है। ‘जल दीप यात्रा’, ‘जल संकल्प’ कार्यक्रमों और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जल-संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। इस कार्य में म.प्र. जन-अभियान परिषद भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान में हजारों जल स्रोत पुनर्जीवित होने लगे हैं। वर्षाकाल में इसके प्रभावी परिणाम देखने को मिलेंगे। अनेक स्थानों पर भूजल स्तर में सुधार के संकेतों के साथ ही जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ती हरियाली और मिट्टी में नमी का स्तर सकारात्मक परिवर्तन लायेगा। अभियान से समाज में सकारात्मक मनोवृत्ति का विकास भी हुआ है। अभियान अंतर्गत संचालित गतिविधियों से जन-मानस में जल-संरक्षण के लिए नई चेतना और व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है। अभियान के अंतर्गत स्थायी जल प्रबंधन संरचनाओं जैसे चेक डैम, परकोलेशन टैंक, जल पुनर्भरण, कुएं-बावड़ी आदि के पुनरुद्धार की योजना बनाई जा रही हैं। अभियान के सफल संचालन और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और मूल्यांकन प्रणाली विकसित की गई है। सभी गतिविधियों की जीआईएस आधारित ट्रैकिंग और इंपैक्ट वैल्युएशन से परिणामों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। अभियान को स्थायी जन-आंदोलन बनाने के लिए राज्य सरकार इसे एक समयबद्ध आयोजन मात्र न मानते हुए जन-सहयोग से सतत अभियान के रूप में विकसित कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश के जल संसाधनों का संरक्षण करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। साथ ही यह सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्य और नागरिक कर्त्तव्यों को जोड़ने वाला एक व्यापक अभियान भी है। जन-भागीदारी से जन्मा यह अभियान भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश देने की ओर एक सशक्त कदम है।

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार का तीसरा चरण मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में आज से होगा शुरू

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तीसरे चरण का शुभारम्भ 5 मई से होगा। इसको लेकर शासन-प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। सुशासन तिहार का तीसरा चरण 31 मई तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक जिले की 08 से 15 ग्राम पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आवेदकों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं अन्य  मंत्रीगण कुछ समाधान शिविरों में  शामिल होंगे तथा आवेदकों से भेंट कर उनकी समस्याओं के निराकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। तीसरे चरण में मुख्यमंत्री स्वयं हेलीकॉप्टर से औचक रूप से किसी भी गांव में पहुँचकर लोगों से मुलाकात करेंगे और चौपाल लगाकर गांव के विकास और वहां पर पदस्थ मैदानी अमले की कार्यशैली के बारे में लोगों से जानकारी लेंगे। मुख्यमंत्री  साय इस दौरान शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन, निर्माण एवं विकास कार्याें की जमीनी हकीकत का भी मुआयना करेंगे।   यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में शासन-प्रशासन को संवेदनशील, जनोन्मुखी और पारदर्शी बनाने के साथ ही जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन तिहार-2025 का आयोजन किया जा रहा है। सुशासन तिहार के प्रथम चरण का शुभारंभ 08 अप्रैल को हुआ था। इसके तहत 11 अप्रैल तक प्रदेश की जनता से ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डाें में शिविर लगाकर समस्याओं और मांगों के संबंध में आवेदन लिए गए। आम जनता अपने आवेदनों को सहजता से शासन-प्रशासन तक पहुंचा सके, इसके लिए ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालयों तक प्रमुख स्थानों पर समाधान पेटियां रखी गई, जिसमें लोग अपने आवेदन डाल सके। ऑनलाईन आवेदन लेने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।   सुशासन तिहार के पहले चरण में प्रदेश की जनता से करीब 40 लाख से अधिक आवेदन-पत्र प्राप्त हुए थे। इनमें मांग, समस्या और शासकीय योजनाओं से संबंधित आवेदन शामिल थे। जिला प्रशासन द्वारा समर्पित प्रयासों से इन आवेदनों को विभागवार वर्गीकृत कर सुराज अभियान के पोर्टल पर अपलोड किया गया है, और निराकरण की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ जारी है। संबंधित आवेदनों की स्थिति की जानकारी भी हितग्राहियों को समयबद्ध रूप से दी जा रही है। तीसरे चरण में शासन की प्राथमिकता आम जनता को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना है। समाधान शिविरों में हितग्राहियों को योजनाओं के आवेदन प्रपत्र प्रदान किए जाएंगे और पात्रता के अनुसार योजना से लाभ दिलाने की कार्यवाही भी की जाएगी। समाधान शिविरों में ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाना है। उन्होंने कहा, हमारा संकल्प है कि राज्य के हर नागरिक तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचे और कोई भी पात्र हितग्राही वंचित न रहे। सुशासन तिहार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गया है। यह अभियान केवल आवेदन संग्रह या समस्या निराकरण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राज्य के शासन-प्रशासन और जनता के बीच सेतु बन गया है।

MP कांग्रेस ने पहली बार अलग से बनाया चुनाव प्रबंधन विभाग, संगठन को मजबूत करने में जुटी

भोपाल एमपी कांग्रेस ने पहली बार चुनाव के इतने पहले चुनाव प्रबंधन विभाग का अलग से गठन है। विभाग का प्रभार पूर्व मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह को दिया गया है। वहीं संगठन का प्रभार पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को दिया गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। इसे लेकर तरह-तरह के प्रयोग किया जा रहे हैं और अलग-अलग व्यक्तियों को दायित्व दिए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के करीब साढ़े तीन साल पहले कांग्रेस ने पहली बार चुनाव प्रबंधन विभाग का अलग से गठन किया है। काग्रेस के प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. संजय कावले ने बताया कि इससे पहले चुनाव के समय चुनाव प्रबंधन कमेटी बनाई जाती थी। पहली बार इस तरह का प्रयोग किया गया है। इस विभाग का प्रभार पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को दिया गया है। पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को मिली जिम्मेदारी वही संगठन प्रभारी मे भी बदलाव किया गया गया है। पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह की जगह पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को प्रभार सौंप गया है। दरसअल चार महीने पहले एमपी कांग्रेस के संगठन में दो-दो प्रभारी नियुक्त किए गए थे। पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह और प्रदेश महामंत्री संजय कामले को संगठन का प्रभारी बनाया गया था। चार महीने में ही प्रियव्रत सिंह की जगह संगठन का प्रभार पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को दिया गया है। कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति 1-  प्रियव्रत सिंह- प्रभारी 2-  गौरव रघुवंशी- अध्यक्ष 3-  गोरकी बैरागी- सदस्य 4- मृणाल पंत- सदस्य 5- शैलेन्द्र पटेल- सदस्य 6- मयंक तेनगुरिया- सदस्य पंचायत और वार्ड समितियों का होगा गठन एमपी कांग्रेस द्वारा गठित चुनाव प्रबंधन विभाग अब निचले स्तर के संगठन पर काम करेगा। यानि हर विधानसभा में चुनाव प्रबंधन का प्रभारी नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद पंचायत और वार्ड समितियों का गठन होगा। इन समितियों के गठन में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि चुनावी लिहाज से पंचायत और वार्ड समिति के सदस्य कितने कैपेबल हैं।

शहर की अलग-अलग अवैध काॅलोनी में 565 प्लाॅट भूमाफिया ने बेचे है, होगी एफआईआर

इंदौर इंदौर में प्रशासन ने अवैध काॅलोनी काटने वालों के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी की है। शहर की अलग-अलग अवैध काॅलोनी में 565 प्लाॅट भूमाफिया ने बेचे है। इस तरह के 19 लोगों पर प्रशासन प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। इंदौर में 16 हेक्टेयर जमीन पर विकसित हो रही थी काॅलोनी। इससे पहले भी प्रशासन 38 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर चुका है। शहर के मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट की जगह पर अवैध काॅलोनियां काटकर प्लाॅट बेचने का काम लंबे समय से जारी है। लोग भी सस्ते प्लाॅटों के चक्कर में नोटरियों पर प्लाॅट खरीद लेेते है, लेकिन वहां नक्शे मंजूर नहीं होते और न ही मूलभूत सुविधाएं मिलती है। अफसरों ने शहर में 19 भूमाफिया को चिन्हित किया जो काॅलोनियों में प्लाॅट बेच रहे है। उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में शिकायत होगी। इससे पहले प्रशासन अवैध काॅलोनाइजरों के खिलाफ रासुका के तहत भी एक्शन ले चुका है। पार्षद ने रुकवाया निर्माण सांईकृपा काॅलोनी में एक होस्टल का निर्माण हो रहा था। इसकी शिकायत रहवासियों ने पार्षद संगीता जोशी को की थी। रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र मेें आवासीय प्लाॅटों पर होस्टल व होटल खोले जा रहे है। इसके बाद पार्षद ने मौके पर जाकर अवैध निर्माण रुकवाया और नगर निगम के अफसरों से कहा कि वे काॅलोनी में देखे कि कहां पर व्यावसायिक निर्माण हो रहा है। रहवासी केके झा ने बताया कि  वार्ड 36 और 37 में इस तरह के अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहे है। 

दिल्ली में 13-14 मई को विधानसभा का विशेष सत्र

नई दिल्ली दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। सरकार ने 13 और 14 मई को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। बैठक में सत्र के दौरान संभावित विधेयकों और विभिन्न योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के बाद भाजपा विधायक शिखा राय ने बताया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने सरकार की मौजूदा और आगामी योजनाओं पर चर्चा की। इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और जनता तक उनका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया। विशेष रूप से, 20 दिवसीय स्वच्छता अभियान की शुरुआत होने वाली है, जिसमें सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए निर्देश दिए गए हैं। शिखा राय ने कहा कि इस अभियान के जरिए दिल्ली को स्वच्छ बनाने का वादा पूरा किया जाएगा। भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने बताया कि इस सत्र में दिल्ली के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होगी। इनमें शिक्षा से संबंधित विधेयक और मानसून के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, विधेयकों का विस्तृत ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन सत्र की तारीखें 13 और 14 मई तय की गई हैं। भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि बैठक में मानसून की तैयारियों, नालों से गाद निकालने, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, टेंडर माफिया को खत्म करने और पानी की उचित व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकें सरकार और विधायकों के बीच समन्वय के लिए नियमित रूप से आयोजित होती हैं। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह बैठक विशेष सत्र की तैयारियों और जनता के मुद्दों को सुलझाने के लिए थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाएंगे और उनका समाधान निकालेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार जनता के लिए सप्ताह में सातों दिन-चौबीसों घंटे काम कर रही है। चाहे मौसम, सड़कों की स्थिति या जलभराव की समस्या हो, हर क्षेत्र में सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हाल की रिकॉर्ड बारिश के बावजूद जलभराव की स्थिति को एक घंटे में नियंत्रित कर लिया गया। सीएम ने कहा कि 27 साल के बैकलॉग को खत्म करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और सचिवालय हर दिन जनता की सेवा के लिए खुला रहता है।

पाकिस्तान ने फिर किया सीजफायर का उल्लंघन, LoC पर फिर की फायरिंग; सेना ने दिया माकूल जवाब

श्रीनगर पहलगाम में आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रही है। आज पाकिस्तान ने लगातार 10वें दिन एलओसी के पास फायरिंग कर सीजफायर का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान की कई पोस्ट्स से भारत की तरफ बिना किसी उकसावे के फायरिंग की गई। हालांकि भारत की सेना ने भी पाकिस्तान की इस हरकत का माकूल जवाब दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की सेना की लगभग 32 चौकियां सक्रिय हो गई हैं, जहां से फायरिंग की गई है। छोटे हथियारों से की फायरिंग ताजा जानकारी के मुताबिक 03-04 मई 2025 की रात को, पाकिस्तानी सेना की चौकियों ने जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में फायरिंग की। इसमें कुपवाड़ा, बारामुल्ला, पुंछ, राजौरी, मेंढर, नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर के आसपास के इलाकों में नियंत्रण रेखा के पार बिना उकसावे के छोटे हथियारों से गोलीबारी की गई। भारतीय सेना ने भी पाकिस्तान की ओर से की गई इस फायरिंग का तुरंत और आनुपातिक रूप से जवाब दिया। पाकिस्तान की 32 चौकियां सक्रिय बता दें कि 03-04 मई की दरमियानी रात पाकिस्तानी सेना की लगभग 32 चौकियां सक्रिय हो गईं। उन्होंने भारतीय सेना के अग्रिम ठिकानों पर गोलीबारी की।वहीं भारतीय सेना का अनुमान है कि पाकिस्तान ने घात लगाकर हमला करने की कोशिश की है। इन हमलों के जरिए पाकिस्तानी सेना अपने आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रही है। पाकिस्तान सीमा पार या सर्जिकल स्ट्राइक से डर रहा है और यही वजह से लगातार इस तरह की हरकतें कर रहा है। वहीं पाकिस्तान की इस हरकत से कश्मीर और जम्मू क्षेत्र की नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ गया है। आतंकियों ने पांच गुटों में बनाए कैंप जानकारी के मुताबिक, ताजा संघर्ष विराम उल्लंघन के दौरान पाक सेना ने पांच समूहों में अलग-अलग स्तर के शिविर बनाए हैं। ये अलग-अलग पोस्ट मानसेरा, मुजफ्फराबाद, कोटली, मुरीदके और बहावलपुर में बनाए गए हैं। इन पोस्ट की बात करें तो मानशेरा में बालाकोट, गढ़ी हबीबुल्लाह, बतरासी; मुजफ्फराबाद में चेलाबंदी, सवाईनाला, मुस्कराअक्सा, अब्दुल्ला बिन मसूद, दुलई नाला; कोटली में गुलपुर, सेंसा, बराली, डुंगी; बहावलपुर में बरनाला और मुरीदके में कालीघाटी हजीरा हैं। अल्फा 3 मुख्य नियंत्रण कक्ष से ये आतंकी कश्मीर में घुसपैठ के लिए योजना बना रहे हैं और आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। आतंकियों के तीन प्रमुख लॉन्चिंग पैड वहीं जांच के दायरे में पाकिस्तान के तीन मुख्य आतंकी कैंप सामने आए हैं। इसमें कोटा हलान नॉर्थ, पीओजेके; तशराजी कैंप, कोटा बाजार, पीओजेके और हलान नॉर्थ, पीओजेके हैं। फॉरवर्ड कोटा हलान नॉर्थ में हिजबुल मुजाहिदीन का लॉन्चिंग पैड है। इस लॉन्चिंग पैड पर सभी संगठनों के मुजाहिदीन की कुल संख्या 15 से 20 है। कमांडर सैफुल्लाह खालिद बटूर इसका लॉन्चिंग कमांडर है। लश्कर-ए-फॉरवर्ड का दूसरा लॉन्चिंग पैड तशराजी कैंप के नाम से है, जो फॉरवर्ड कोटा बाजार में है। इस लॉन्चिंग पैड पर फिलहाल लश्कर का कमांडर अजमतुल्लाह खान है। इस लॉन्चिंग पैड पर 15 से 12 मुजाहिदीन हैं, जो सभी संगठनों से जुड़े हुए हैं। वहीं तीसरा लॉन्चिंग पैड हलान नॉर्थ में है, जो जैश-ए-मोहम्मदी संगठन से जुड़ा हुआ है। इस लॉन्चिंग पैड पर केवल चार मुजाहिद्दीन हैं जो इस पैड की देखभाल कर रहे हैं और बाकी लॉन्चिंग पैड को ज्यादातर बंद रखा गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ा तनाव दरअसल, एक तरफ पाकिस्तान के नेता आरोप लगा रहे हैं कि भारत उनपर हमला करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना खुद ही लगातार जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा यानी LoC पर सीजफायर का उल्लंघन कर रही है। पाकिस्तान की तरफ से बीते 10 दिनों से लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। भारतीय सेना भी पाकिस्तान की फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब दे रही है।

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