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उच्च न्यायालय ने पत्नी की बिना सहमति ली गई व्हाट्सएप चैट साक्ष्य के रूप में मंजूर

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी के बीच व्हाट्सएप पर हुई बातचीत को पारिवारिक मामलों में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। भले ही ये बातचीत बिना किसी एक पार्टनर की मर्जी के हासिल की गई हो। जस्टिस आशीष श्रोती ने ये फैसला एक महिला की याचिका पर दिया। महिला ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने महिला के पति को तलाक के मामले में व्हाट्सएप चैट पेश करने की इजाजत दी थी। कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक मामलों को सुलझाने के लिए किसी भी सबूत को माना जा सकता है, भले ही वो भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत मान्य न हो। ये है मामला ये मामला एक पति-पत्नी से जुड़ा है। उनकी शादी दिसंबर 2016 में हुई थी और अक्टूबर 2017 में उनकी एक बेटी हुई। बाद में पति ने तलाक के लिए अर्जी दी। उसने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की और उसका किसी और के साथ संबंध है। अपने आरोपों को साबित करने के लिए, पति ने व्हाट्सएप मैसेज पेश किए। उसने बताया कि ये मैसेज उसने पत्नी के फोन में एक हिडन एप्लीकेशन के जरिए निकाले थे। इन चैट से लग रहा था कि पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है। पत्नी ने लगाई थी याचिका इसके जवाब में, पत्नी ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 9 के तहत याचिका दायर की। उसने कहा कि वो अपने पति के साथ रहना चाहती है। उसने व्हाट्सएप चैट के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। पत्नी का कहना था कि ये चैट उसकी प्राइवेसी का उल्लंघन है, जो उसे आर्टिकल 21 के तहत मिली है। उसने ये भी कहा कि ये सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का भी उल्लंघन है। पत्नी के वकील ने कुछ पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कोर्ट ने गैरकानूनी तरीके से हासिल किए गए पर्सनल कम्युनिकेशन को सबूत के तौर पर मानने से इनकार कर दिया था। पत्नी की आपत्तियों को किया खारिज लेकिन हाई कोर्ट ने पत्नी की आपत्तियों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 के तहत, कोर्ट किसी भी ऐसे मटेरियल को स्वीकार कर सकते हैं जो पारिवारिक विवादों को सुलझाने में मदद करे। भले ही वो भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत मान्य न हो। जस्टिस श्रोती ने कहा कि फैमिली कोर्ट सबूतों के नियमों में थोड़ी ढील देते हैं। क्योंकि पारिवारिक मामले निजी और संवेदनशील होते हैं। वहीं, जस्टिस श्रोती ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई सबूत गैरकानूनी तरीके से भी हासिल किया गया है, तो भी उसे माना जा सकता है अगर वो मामला से जुड़ा हुआ है और असली है। कोर्ट ने माना कि प्राइवेसी का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन ये पूरी तरह से नहीं है। इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के साथ संतुलित करना होगा। जस्टिस श्रोती ने कहा कि जब आर्टिकल 21 के तहत दो अधिकार आपस में टकराते हैं- प्राइवेसी और निष्पक्ष सुनवाई- तो निष्पक्ष सुनवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आर्टिकल 122 का भी जिक्र किया कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 का भी जिक्र किया। ये धारा आम तौर पर पति-पत्नी के बीच बातचीत को सुरक्षित रखती है, लेकिन अगर पति-पत्नी के बीच कानूनी विवाद है तो ये लागू नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली, बॉम्बे और राजस्थान जैसे कई हाई कोर्ट ने पारिवारिक मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड के इस्तेमाल का समर्थन किया है। सबूत की अभी जांच होगी जस्टिस श्रोती ने ये भी साफ किया कि सबूत को स्वीकार करने का मतलब ये नहीं है कि वो साबित हो गया है। सबूत को अभी भी वेरिफाई करना होगा। उन्होंने फैमिली कोर्ट को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी। जैसे कि सबूत की सच्चाई की पुष्टि करना, जरूरत पड़ने पर इन-कैमरा सुनवाई करना और मर्यादा बनाए रखना। कोर्ट ने ये भी कहा कि गैरकानूनी तरीके से हासिल किए गए सबूत को स्वीकार करने से उस व्यक्ति को सिविल या क्रिमिनल कार्रवाई से सुरक्षा नहीं मिलती है। फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के अप्रैल 2023 के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि सबूत को स्वीकार करने के लिए ये जरूरी है कि वो मामला से जुड़ा हुआ हो, न कि उसे कैसे हासिल किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सबूत को रोकने से फैमिली कोर्ट एक्ट के मकसद के खिलाफ होगा।

पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के नियम, जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें

पुरी  हर साल ओडिशा में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में देश भर से लोग पहुंचते हैं. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा शुरुआत 27 जून से होने जा रही है. पुरी में होने वाले इस उत्सव का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृितक विरासत को दिखाता है, जो टूरिस्टों के आकर्षक का भी केंद्र हैं. अगर आप भी इस साल रथ यात्रा में शामिल होना चाहते हैं तो जानिए यहां कैसे जाएं?  हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 26 जून दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 27 जून सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा. रथ यात्रा नौ दिनों तक चलेगी और 5 जुलाई 2025 को समाप्त होगी. कैसे जाएं पुरी अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो आपको पुरी रेलवे स्टेशन जाना होगा, जो देश के करीब सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. वहीं यात्रा के दौरान कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाती हैं. पुरी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 2 किलोमीटर के करीब है. यहां से आप ऑटो या रिक्शा लेकर जा सकते हैं. अगर आपको हवाई सफर करना है, तो करीबी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है. जो पुरी से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. एयरपोर्ट से आप बस या टैक्सी की मदद से पुरी तक जा सकते हैं.  पुरी में होटल और धर्मशाला के कई ऑप्शन मौजूद हैं, मंदिर के आसपास कई होटल हैं, जिनका बजट एक हजार से शुरू होता है. वहीं 500 रुपये में आपको धर्मशाला मिल जाएगा. मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात के 9 बजे तक का है. दिन में साढ़े 11 बजे से एक बजे तक भोग और विशेष पूजा के लिए दर्शन बंद रहता है. मंदिर में अगर भीड़ हो तो दर्शन करने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है. जून और जुलाई के महीने में रथ यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया भर से भक्त यहां आते हैं. रथ यात्रा से 15 दिन पहले मंदिर में दर्शन बंद हो जाता है.   रथ यात्रा के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कई इंतजाम किए जाते हैं. पुरी रेलवे स्टेशन के बाहर निशुल्क कैंप भी लगाए जाते हैं जहां तीर्थयात्री रह सकते हैं.  कैसे पहुंचें पुरी? जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचना होगा। पुरी उड़ीसा में स्थित है। आप हवाई मार्ग से सफर कर रहे हैं तो पुरी से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है। भुवनेश्वर का बीजू पटनाटक इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के कई शहरों से सीधी उड़ान के माध्यम से जुड़ा है। आप भुवनेश्वर एयरपोर्ट पहुंचकर टैक्सी या बस के जरिए 60 किमी की दूरी तय करके पुरी पहुंच सकते हैं।  बजट में सफर के लिए रेल यात्रा का विकल्प भी अपना सकते हैं। पुरी रेलवे स्टेशन देशभर से जुड़ा हुआ है। पुरी रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर और रथ यात्रा स्थल की दूरी लगभग ढाई से तीन किमी है। सड़क मार्ग से यात्रा के लिए भुवनेश्वर और कोणार्क से पुरी के लिए नियमित सरकारी और निजी बसें मिलती हैं। NH-316 द्वारा सड़क मार्ग भी सरल है। पुरी रथ यात्रा के लिए टिप्स पहले से बुकिंग रथ यात्रा में भारत ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। रथ यात्रा के दौरान काफी भीड़ होती है और मंदिर के पास के होटल बुक हो जाते हैं। ऐसे में पहले से परिवहन यानी ट्रेन या फ्लाइट का टिकट बुक कर लें। साथ ही होटल या धर्मशाला की बुकिंग भी पहले से ही कर लें ताकि आपको वहां पहुंचने या रहने में असुविधा न हो। मौसम समझें  जून के अंत में पुरी में गर्मी और बारिश दोनों हो सकते हैं। मौसम का पता लगाकर उसके अनुसार ही आरामदायक कपड़े और छाता साथ रखें।  सावधान रहें रथ यात्रा के दौरान भीड़ को देखते हुए बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अगर स्वास्थ्य समस्या है तो दूर से यात्रा देखें। इसके साथ ही अपनी कीमती सामान की देखरेख भी करें।  मोबाइल ऐप का उपयोग रथ यात्रा से जुड़ी सभी जानकारी Shree Jagannatha Dham ऐप पर उपलब्ध रहेगी। इस ऐप से आप दर्शन, लाइन स्थिति, आवास और महाप्रसाद की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है? पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने पुरी नगर दर्शन की इच्छा जताई. तब भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया और रास्ते में वे अपनी मौसी के घर भी कुछ दिन ठहरे. तभी से यह परंपरा हर साल रथ यात्रा के रूप में निभाई जाती है. रथ यात्रा का महत्व ऐसा माना जाता है कि रथ यात्रा में शामिल होने या इसका साक्षात दर्शन करने से हजार यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है. पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है और यह यात्रा भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है. जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। इस साल यह यात्रा 27 जून से शुरू होगी। 9 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 5 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि जब भगवान जगन्नाथम बलभद्र और सुभद्रा जी की प्रतिमा को रथ में बैठाकर यात्रा निकाली जाती है, तो इसे भक्त खींचते हैं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा में रथ खींचने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप भी अगर इस साल भगवान जगन्नाथ जी का रथ खींचना चाहते हैं, तो आपको रथ खींचने से जुड़े नियम जरूर जान लेने चाहिए। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा कहां से निकलती है तीन रथों को मोटी रस्सियों से खींचा जाता है। यह रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक जाती है। रथों को खींचकर चार किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। हर व्यक्ति को रथ खींचने का अवसर मिलता है। कुछ … Read more

योग दिवस की थीम एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिये योग

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर शिक्षण संस्थाओं में होगा सामूहिक योग 21 जून के लिये लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किये दिशा निर्देश योग दिवस की थीम एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिये योग भोपाल  प्रदेश में ग्यारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून 2025 को प्रदेश की शिक्षण संस्थाओं में सामूहिक योग प्रदर्शन के लिये लोक शिक्षण संचालनालय ने दिशा निर्देश जारी किये है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की इस वर्ष की थीम “एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिये योग” रखी गई है। दिये गये निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षण संस्थाओं में सामूहिक योग प्रदर्शन के लिये आयुष मंत्रालय के कॉमन योग प्रोटोकॉल का पालन किया जायेगा। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2025 के आयोजन से संबंधित अतिरिक्त जानकारी, जिसमें ब्रांडिंग किट, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित आवश्यक सहायक सामग्री, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 10 प्रमुख कार्यक्रमों से संबंधित व्यापक पाठ्य सूचना और लिंक की जानकारी दिशा निर्देश के साथ भेजी गयी है। संपूर्ण प्रदेश में योग कार्यक्रम के लिये निर्धारित पल प्रतिपल समय सारणी के अनुसार आयोजित किया जायेगा।  मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के उद्बोधन कार्यक्रमों का सीधा प्रसार प्रसारण एनआईसी द्वारा प्रदाय लिंक के माध्यम से किया जायेगा। दिशा निर्देश में कहा गया है कि योग के मूल सिद्धांतों और इसके लाभों को बताने के लिये विद्यालयों में कार्यक्रम स्थल पर योग विशेषज्ञों को आमंत्रित कर योग व्याख्यान करायें। स्कूल शिक्षा विभाग के सामूहिक योग कार्यक्रम के ‍लिये राज्य नोडल अधिकारी संयुक्त संचालक लोक शिक्षण श्री एचएन नेमा को बनाया गया है। उनका मोबाईल नबंर 9406952232 है।  

सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई

पीएम जनमन अभियान छिंदवाड़ा में 1067 भारिया परिवारों को मिले पक्के आवास जनजाति वर्ग का समग्र उत्थान मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई  सामग्री की सामूहिक खरीद पर भी की एक करोड़ की बचत भोपाल  प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत छिंदवाड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में निवासरत 1067 भारिया जनजाति के परिवारों को पक्के आवास आवंटित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजाति संवर्ग के उत्थान के लिये प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की इस योजना को मध्यप्रदेश में शत प्रतिशत मूर्तरूप दिया जायेगा। जिला प्रशासन द्वारा आवास आवंटन के साथ ही सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई है। प्रधानमंत्री जनमन अभियान के तहत छिन्दवाड़ा को कुल 5825 आवासों का लक्ष्य प्रदान किया गया था, जिसके अंतर्गत चौरई, हर्रई, तामिया, अमरवाड़ा, जुन्नारदेव एवं परासिया जनपद के दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत भारिया हितग्राहियों को योजना का लाभ देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। ग्रामों की दूर-दराज़ स्थिति (जिला मुख्यालय से 100-125 कि.मी.) के कारण स्थानीय भवन सामग्री विक्रेताओं द्वारा महंगे दाम और कम गुणवत्ता वाली सामग्री हितग्राहियों को दिये जाने से भी आवास निर्माण में बाधा थी। इससे कई परिवारों ने आवास निर्माण में रुचि ही लेना बंद कर दिया था। इस स्थिति पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह ने अधिकारियों के साथ स्वयं मौका स्थल का भ्रमण कर हितग्राहियों से चर्चा की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया। उन्होंने जनपद पंचायतों के अमले, सहायक यंत्री, और ग्राम पंचायतों के सरपंच आदि से सामूहिक चर्चा की जिसमें ग्रामवासियों और सामग्री विक्रेताओं के साथ संवाद स्थापित कर कम दर पर उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई। नवाचार से हुई एक करोड़ की बचत जिला प्रशासन द्वारा जनपद स्तर पर थोक विक्रेताओं से संपर्क कर भवन निर्माण सामग्री की दरों को भी पूर्व निर्धारित किया गया। सीमेंट, ईंट, गिट्टी, सरिया, सेंटरिंग आदि निर्माण सामग्री स्थानीय दरों से 2 से 55 रूपये तक सस्ती दरों पर हितग्राहियों के ग्रामों में ही थोक में पहुँचाई गई। इस नवाचार से न केवल परिवहन लागत बची, बल्कि समय पर सामग्री मिलने से अधिकांश हितग्राहियों ने 2 माह से भी कम समय में अपने पक्के आवास तैयार कर लिए। इस पहल से 1067 परिवारों को 99,21,443 रूपये की सीधी बचत हुई, यानी प्रति परिवार लगभग 9,298 रूपये की औसत बचत हुई। साथ ही 1052 आवासों का निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया है और शेष 508 आवास शीघ्र पूर्ण होने की स्थिति में है। बिचौलियों से मिली मुक्ति नवाचार न केवल योजनांर्गत लक्ष्य प्राप्ति में सहायक बना, बल्कि इससे हितग्राहियों को ठगने वाले बिचौलियों से भी मुक्ति दिलाई गई। अब जिले के अन्य नवीन स्वीकृत आवासों में भी इसी मॉडल को अपनाने की योजना है।  

MP में कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की, विदिशा बनेगा कांग्रेस की प्रयोगशाला

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमजोर क्षेत्रों में विदिशा मॉडल लागू करेगी, जिसके तहत 650 पंचायतों और वार्डों में समितियां वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखेंगी। यह मॉडल उन क्षेत्रों में लागू होगा जहां कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है और संगठन कमजोर है। इस मॉडल में एक्सपर्ट्स कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे और 30 जून तक वेरिफिकेशन का काम पूरा किया जाएगा। कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे पटवारी इसके बाद जुलाई में जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे और फिर भोपाल और नर्मदापुरम में भी यह मॉडल शुरू किया जाएगा। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है, सिर्फ 15 महीनों को छोड़कर पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। 2020 में हुए दलबदल के बाद कई क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन बेहद नाजुक स्थिति में है। अब कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के लिए विदिशा मॉडल का सहारा ले रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। पहले जानिए क्या है विदिशा मॉडल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। समितियों का डेटा ऑनलाइन हुआ दर्ज कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा। वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा विदिशा जिले की पंचायतों और वार्डों में बनाई गई समितियों के वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा। इसके लिए पीसीसी में एक कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। जहां से सभी समितियों के अध्यक्ष सहित तमाम सदस्यों से टेलीफोनिक बातचीत कर सत्यापन किया जाएगा। टिफिन मीटिंग करेंगे जीतू पटवारी विदिशा जिले में गठित हुई पंचायत और वार्ड समिति के अध्यक्षों के साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जुलाई के महीने में टिफिन मीटिंग करेंगे। विधानसभा वार होने वाली टिफिन मीटिंग में सभी कार्यकर्ता अपने-अपने घर से भोजन बनवाकर टिफिन लेकर आएंगे और एक जगह पीसीसी चीफ सभी अध्यक्षों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे और भोजन करेंगे। अब भोपाल और नर्मदापुरम में होगा काम शुरू विदिशा जिले के बाद कांग्रेस अब इस मॉडल पर भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की उन विधानसभाओं में इसपर काम शुरू करेगी। जहां कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन दोनों संभागों में कांग्रेस की स्थिति सुधारने की सबसे ज्यादा जरूरत है। विदिशा से हुई पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने बताया- कांग्रेस पार्टी ने बहुत महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए विदिशा जिले को चुना था। पार्टी में इस बात की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी कि संगठन में किस तरह से संगठन में बदलाव करना चाहिए। कैसे कांग्रेस पार्टी की जमीनी स्तर पर शुरुआत कर सकते हैं। हमारे अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर जोर दिया। 70 एक्सपर्ट्स को काम पर लगाया इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे गए। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया गया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। ऑनलाइन डेटा भी किया अपलोड फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा।

लगातार बढ़ रही मुंबई में रियल एस्टेट की कीमतें, दुबई को भी पीछे छोड़ा

 मुंबई  मुंबई में प्रॉपर्टी कीमतें अब दुबई से भी 20 फीसदी ज्यादा हो गई हैं, लेकिन भारतीय खरीदार इससे विचलित नहीं हुए हैं.   Wisdom Hatch के अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि मुंबई का बढ़ता हुआ प्रॉपर्टी मार्केट वैश्विक तर्क को क्यों चुनौती देता है और बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद खरीदारों को आकर्षित करता रहता है. अक्षत श्रीवास्तव कहते हैं- “मुंबई का रियल एस्टेट बढ़ता जा रहा है, क्योंकि भारतीय किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं.”  उन्होंने कहा कि भारत का प्रॉपर्टी मार्केट भावनाओं और स्थानीय मांग से प्रेरित है. भले ही दुबई बेहतर मूल्य दे, यहां लोग उसी में निवेश करना पसंद करते हैं जिसे वे समझते हैं.’ कोविड के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में आई तेजी उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र COVID के बाद तेजी से आगे बढ़ रहा. नवीनतम 1 फाइनेंस हाउसिंग टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) के अनुसार, भारत के शीर्ष शहरों में घरों की कीमतें औसतन 48% बढ़ गई हैं. यह इंडेक्स, जो RERA-पंजीकृत लेनदेन आंकड़ों पर आधारित है, दर्शाता है कि आवास बाजार महामारी के बाद से मजबूत रूप से उबर आया है. मुंबई सबसे महंगा मुंबई भारत का सबसे महंगा रियल एस्टेट बनकर उभरा है, जिसकी औसत कीमतें ₹26,975 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई हैं. एक आंकड़ा जो न केवल अन्य भारतीय शहरों को बल्कि दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों को भी पीछे छोड़ देता है.  शहर की लगातार बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद, प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं. श्रीवास्तव इसका कारण सांस्कृतिक मनोविज्ञान और अनौपचारिक वित्तीय प्रथाओं का मिश्रण बताते हैं. वो कहते हैं- ‘यह खरीदारों के लिए सुविधा बढ़ाता है, क्योंकि वे उस काले धन का इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत सारे खरीदार हैं जो किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं”. उन्होंने कहा कि जहां दुबई जैसे प्रॉपर्टी मार्केट पारदर्शी हैं और वैश्विक खरीदारों को आकर्षित करते हैं, वहीं मुंबई का हाउसिंग मार्केट स्थानीय मांग और गहरे विश्वास पर फलता-फूलता है. एक भारतीय सबसे ज्यादा भारत में ही प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है. रियल एस्टेट बहुत हद तक स्थानीय है. महंगी प्रॉपर्टी में दुबई रह गया पीछे!  दुबई में महंगे फ्लैट मिलते हैं तो अपनी सोच बदल लीजिए। अपने देश के एक शहर ने महंगी अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में दुबई को पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं, इससे मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों भी पीछे रह गए हैं। यह शहर कोई और नहीं बल्कि एनसीआर का गुरुग्राम है। अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में गुरुग्राम काफी आगे निकल गया है। देश में इस समय लग्जरी हाउसिंग प्रॉपर्टी की मांग काफी बढ़ रही है। साल 2024 में काफी लोगों ने करोड़ों रुपये के फ्लैट सहित दूसरे हाउसिंग प्रोजेक्ट खरीदे। ऐसे में देखा जाए तो साल 2024 भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक सुपर-लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट की मांग गुरुग्राम से लेकर मुंबई तक हो रही है। गुरुग्राम निकला आगे लग्जरी रियल एस्टेट कैटेगरी में गुरुग्राम ने मुंबई और दुबई को कड़ी टक्कर दी है। दिसंबर 2024 तक गुरुग्राम का DLF कैमेलियास प्रोजेक्ट भारत की रियल एस्टेट सुर्खियों में सबसे आगे रहा। इस प्रोजेक्ट में कई महंगे-महंगे सौदे हुए। ऐसे में ग्रुरुग्राम ने अल्ट्रा-लक्जरी सेगमेंट में मुंबई और दुबई दोनों को पीछे छोड़ दिया है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के सीएमडी प्रदीप मिश्रा के मुताबिक DLF कैमेलियास में 16,290 वर्ग फुट के पेंटहाउस को एक कारोबारी ने 190 करोड़ में खरीदा। यह कीमत 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट के बराबर है। ऐसे में कैमेलियास भारत के सबसे महंगे हाई-राइज कॉन्डोमिनियम के रूप में सबसे आगे रहा। कहां कितनी कीमत? मुंबई में जुहू को सबसे पॉश इलाका माना जाता है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के मुताबिक यहां प्रॉपर्टी की औसतन कीमत 55 हजार से 60 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं मालाबर हिल में यह कीमत 50 हजार से 55 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं बात अगर दुबई की करें तो यहां की सिलिकॉन ओएसिस में प्रॉपर्टी की औसत कीमत 40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। दुबई में पाम जुमेरह (Palm Jumeirah) काफी चर्चित जगह है। यहां समुद्र के ऊपर कॉलोनी बनी है। यहां पर प्रॉपर्टी की कीमत सबसे ज्यादा है जिसकी शुरुआत करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग फुट जो 10 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट तक जाती है। गुरुग्राम कितना आगे? महंगी प्रॉपर्टी के मामले में देखें तो अभी गुरुग्राम दुबई को कड़ी टक्कर दे रहा है। कुछ मामले में तो यह दुबई से भी आगे निकल गया है। वहीं देश में अभी सबसे महंगी प्रॉपर्टी गुरुग्राम में ही बिकी है। जानकारों के मुताबिक गुरुग्राम में प्रॉपर्टी की कीमत आने वाले समय में और तेजी से बढ़ सकती है।

प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन, दस दिन में शुरू होगी डीपीसी प्रक्रिया

भोपाल   कैबिनेट से पदोन्नति नियम 2025 को मंजूरी मिलने से नौ वर्ष बाद अब अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नति की तैयारी प्रारंभ हो गई है। सबसे पहले मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत किए जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग वरिष्ठता के हिसाब से सूची तैयार कर रहा है। प्रयास यही है कि जून में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाए। डेढ़ साल में दो बार पदोन्नति करने की तैयारी है। एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू होंगे नियम पदोन्नति नियम एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू कर दिए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चूंकि नियम हमने तैयार किए हैं, इसलिए सबसे पहले इनका क्रियान्वयन भी हम ही कर रहे हैं। इससे सभी विभागों को प्रक्रिया भी समझ आ जाएगी। मंत्रालयीन सेवा संवर्ग में हर स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति होगी। लगभग सभी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति बनाई जाएगी। वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी दस पद हैं तो कुल 24 लोगों की एक जनवरी 2025 की स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी। सेवा अभिलेख के आधार पर नए नियम से पात्रता निर्धारित कर पदोन्नति दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अधिकतर कर्मचारी पदोन्नत पदों का वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए इसमें कोई परेशानी भी नहीं होगी। पदोन्नति के लिए पदों की गणना संवर्ग के हिसाब से होगी। पदोन्नति भी पहले आरक्षित पदों के लिए होगी सबसे पहले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 प्रतिशत पद अलग किए जाएंगे। पहले पदोन्नति भी आरक्षित पदों के लिए होगी। इसके बाद अनारक्षित पदों पर पदोन्नति की जाएगी। इसमें सभी कर्मचारी शामिल होंगे। प्रथम श्रेणी के पदों पर योग्यता सह वरिष्ठता और शेष पदों पर वरिष्ठता सह उपयुक्तता का फार्मूला रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन होगी पदोन्नति प्रक्रिया नई डीपीसी प्रक्रिया को सशर्त माना जाएगा, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। जीएडी का कहना है कि कोर्ट में रिवर्ट के मामलों को लेकर भी सरकार अपना पक्ष रखेगी और कैविएट दाखिल करेगी, ताकि भविष्य में कोई निर्णय बिना पक्ष सुने न हो। सभी विभागों को दी जाएगी ट्रेनिंग जीएडी के अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले सामान्य प्रशासन विभाग अपनी डीपीसी करेगा। इसके बाद अन्य विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें निम्न बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी। पदों की गणना कैसे हो, नये नियमों के पैरा की व्याख्या, वर्गवार आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन और मेरिट और सीनियरिटी के नियम के बारे में बताया जाएगा। आरक्षित वर्ग को कैसे मिलेगा लाभ अनुसूचित जाति (अजा) को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (अजजा) को 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कैडर स्तर पर लागू होगा। यदि आरक्षित कोटे के पद भरे जा चुके हैं, तब पात्र अजा/अजजा वर्ग के व्यक्ति को अनारक्षित श्रेणी में स्थान मिल सकता है। भविष्य की डीपीसी में उस पद को आरक्षित कोटा में ही गिना जाएगा। अनारक्षित वर्ग के लिए चयन प्रक्रिया प्रत्येक पद के लिए दो गुना + 4 अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे। जैसे 10 पद खाली हैं तो 24 लोग चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे। पद भरने की प्राथमिकता में पहले अजजा, फिर अजा और अंत में अनारक्षित वर्ग को लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति नियमों को अंतिम रूप देने से पहले 27 ड्राफ्ट तैयार किए गए थे। अंततः मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से चर्चा कर कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियम को अधिसूचित किया जाएगा। जीएडी का दावा है कि यह नया नियम सभी वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करता है। आरक्षित पदों की संख्या हो जाएगी कम नए नियम में सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है। सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को प्रदेश में शासकीय सेवाओं में जो आरक्षण निर्धारित है, वह पदोन्नति में भी मिलेगा यानी 36 प्रतिशत। शेष पद अनारक्षित वर्ग के रहेंगे। इसमें आरक्षित वर्ग भी शामिल रहता है। आरक्षित वर्ग के पद भरने के बाद अनारक्षित वर्ग में सभी शामिल होंगे। आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी को अनारक्षित श्रेणी से पदोन्नति मिलने पर आगे संवर्ग की गणना में उन्हें आरक्षित कोटे का ही माना जाएगा और आगे चलकर उनकी संख्या कोटे में कम हो जाएगी। पदोन्नति देने के लिए होगा प्रशिक्षण ‘पदोन्नति की प्रक्रिया के संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दरअसल, नए नियमों में कई प्रविधान किए गए हैं, जिसके बारे में सभी को बारी-बारी से बताया जाएगा। हम प्रयास कर रहे हैं कि जून में ही मंत्रालय संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति कर दी जाएगी। सितंबर-अक्टूबर में वर्ष 2026 के लिए फिर पदोन्नत करेंगे। इस प्रकार डेढ़ वर्ष में दो बार पदोन्नति हो जाएगी।’ – संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, भोपाल

दमोह में किसान प्रहलाद पटेल ने हिमाचल के सेब की खेती कर लोगों को हैरत में डाल दिया

टीकमगढ़  बुंदेलखंड के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। हिमाचल प्रदेश के हरमन शर्मा ने एक ऐसा सेब का पौधा विकसित किया है जो 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल दे सकता है। इस खोज से बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदल गई है। उन्हें इस उपलब्धि के लिए पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया है। हरमन 99 सेब की किस्म बुंदेलखंड के कई जिलों में खूब पैदा हो रही है। किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। 50 डिग्री सेल्सियस में देता है फल हिमाचल प्रदेश के हरमन शर्मा ने कई सालों की मेहनत के बाद एक खास किस्म के सेब के पौधे को विकसित किया। यह पौधा 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल दे सकता है। इस खोज के लिए भारत सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रपति सम्मान दिया। फिर 2024-25 में पद्मश्री से सम्मानित किया। बुंदेलखंड में हरमन 99 सेब की किस्म अब खूब पैदा हो रही है। इन जिलों में हो रहा उत्पादन बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हरमन 99 सेब का उत्पादन हो रहा है। टीकमगढ़ के किसान सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने 2021 में ऑनलाइन इस पौधे को मंगाया था। पिछले 3 सालों से उनके पेड़ लगातार फल दे रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के उद्यानिकी विभाग की मदद से सेब का उत्पादन शुरू किया था। हर साल उन्हें अच्छा उत्पादन मिल रहा है। 22 पेड़ से की शुरुआत सुरेंद्र राजपूत ने 22 पेड़ ऑनलाइन मंगाए थे। आज वे सभी 22 पेड़ जिंदा हैं और उनमें फल लग रहे हैं। बुंदेलखंड में तापमान 40 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। लेकिन इस पौधे पर इसका कोई असर नहीं होता। इसका उत्पादन अच्छा होता है। उन्होंने बताया कि एक पेड़ में करीब 25 से 30 किलो सेब का उत्पादन होता है। यह फल मई के आखिर और जून के पहले हफ्ते में आता है। उस समय कश्मीर का सेब आना बंद हो जाता है। इसलिए बुंदेलखंड में सेब का अच्छा दाम मिलता है। इस मौसम में सेब की कीमत 250-300 रुपए किलो है। जनवरी में सूख जाता है पेड़ सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि जनवरी में पेड़ सूख जाता है। इसके बाद उसकी कटाई की जाती है। जितनी अच्छी कटाई होगी, उतना ही फल पेड़ में लगेगा। इसके बाद फूलों की क्रॉसिंग कराई जाती है। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी करना पड़ता है। वे पिछले 3 सालों से लगातार सेब का उत्पादन कर रहे हैं और बाजार में बेच रहे हैं। थोक में 200 रुपए किलो बिकता किसान सुरेंद्र राजपूत बताते हैं कि जब कश्मीर का सेब बाजार में आना बंद हो जाता है, तो बुंदेलखंड का सेब सबसे ज्यादा दिखता है। गर्मियों में होने वाले सेब का स्वाद मीठा होता है और रंग भी अच्छा होता है। इसलिए इसका थोक रेट ₹200 तक बिक जाता है। बुंदेलखंड में उत्पादन होने से बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है। यह सेब ताजा होता है। कश्मीर से आने में समय लगता है। गर्मियों में यह सेब तुरंत बाजार में पहुंच जाता है। इसलिए इसका मुनाफा भी अच्छा होता है। इन बातों का रखना होगा ध्यान सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि बुंदेलखंड में सेब का उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। अगर कोई किसान इसकी खेती करना चाहता है, तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। पौधा लगाते समय ध्यान रखना जरूरी है कि उसे कम मात्रा में पानी दें। कीटनाशक दवा का छिड़काव करें, ताकि दीमक न लगे। 2 साल बाद फल देने लगता है। जब पेड़ बड़ा हो जाए और जनवरी में सूख जाए, तो उसकी डालियों की कटाई करें। अगर मधुमक्खी नहीं है, तो फूलों की क्रॉसिंग भी एक दूसरे फूल से करनी पड़ती है। इससे फल का उत्पादन अच्छा होता है। हिमाचल के हरमन शर्मा ने किया है रिसर्च हिमाचल के बिलासपुर जिले के रहने वाले हरमन शर्मा ने कई सालों तक रिसर्च के बाद एक ऐसा पौधा बनाया जो 60 डिग्री के तापमान पर भी पैदा होता है और फल देता है। जब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह सेब सफल हुआ, तो भारत सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया। इस पौधे का नाम भी उन्हीं के नाम पर है, हरमन 99। इसके बाद वर्ष 2024-25 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके द्वारा रिसर्च किए गए इस पौधे ने अब बुंदेलखंड के किसानों की तस्वीर और तकदीर बदल दी है।

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