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WWE रोस्टर में ये पहलवान संभावित वापसी, इसने महिला रेसलिंग में किया कमाल

नई दिल्ली  WWE दुनिया भर में रेसलिंग के लिए जानी जाती है। भारत में भी रेसलिंग के दीवाने बहुत हैं। 2008 में ग्रेट खली के WWE में आने से भारतीय रेसलिंग को एक नई पहचान मिली। खली की सफलता ने कई और भारतीय खिलाड़ियों को रेसलिंग में नाम कमाने के लिए प्रेरित किया। फिलहाल WWE में कोई भी भारतीय रेसलर नहीं है। पिछले साल कुछ रेसलर्स को हटा दिया गया था। लेकिन द गेम यानी ट्रिपल एच इस स्थिति को बदल सकते हैं। ऐसे में आइए दो ऐसे भारतीय पहलवानों के बारे में बात करेंगे जिन्हें WWE में वापस लाया जा सकता है। ये पहलवान भारत में कुश्ती देखने वालों को बहुत पसंद आएंगे। महिला रेसलिंग पर है WWE का फोकस 2017 में कविता देवी WWE में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। उन्होंने रेसलमेनिया 34 में अपना पहला मैच खेला। वह एक विमेंस बैटल रॉयल में भी शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने NXT लाइव शो में भी भाग लिया। 2018 में वह मे यंग क्लासिंक में भी दिखाई दीं। लेकिन 2021 में WWE ने उन्हें छोड़ दिया। कविता देवी को WWE ने ठीक से इस्तेमाल नहीं किया। अगर उन्हें सही मौका मिलता तो वह बहुत कुछ कर सकती थीं। आजकल WWE में महिला रेसलिंग को बहुत बढ़ावा दिया जा रहा है। ट्रिपल एच के आने के बाद से हर पहलवान को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। WWE को कविता देवी को भी सुनना चाहिए। उन्हें वापस लाने से सभी खुश होंगे। यह एक अच्छा कदम होगा। पूर्व चैंपियन को फिर से मिल सकता है मौका जिंदर महल भारतीय मूल के पहलवान हैं। अप्रैल 2019 में WWE ने उन्हें हटा दिया था। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान बनाए रखी। 2017 में उन्होंने रैंडी ऑर्टन को हराकर WWE चैंपियनशिप जीती थी। 2024 की शुरुआत में उन्हें फिर से एक बड़े अभियान में शामिल किया गया। इसके बाद वह द रॉक के साथ भी दिखाई दिए। उन्होंने सैथ रॉलिंस के साथ भी एक यादगार मैच खेला। WWE के 5 स्टार रेसलर जिन्होंने छोटी सी उम्र में गंवाई जान, एक तो बीच रिंग में कह गया दुनिया को अलविदा WWE छोड़ने के बाद जिंदर महल ने कई और रेसलिंग संगठनों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कई टाइटल जीते हैं। लोग आज भी उनके काम की तारीफ करते हैं। ट्रिपल एच को उन्हें वापस WWE में लाने के बारे में सोचना चाहिए। अगर वह फिर से WWE में आते हैं, तो वह एक नए अंदाज में दर्शकों को जरूर पसंद आएंगे।  

बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना, अब तक पांच उपभोक्ताओं के खाते में पहुंचाई राशि

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना के तहत बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने पर प्रकरण बनाने एवं राशि वसूली होने पर सूचनाकर्ता को दी जाने वाली 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि में से योजना के संशोधित प्रावधान के अनुसार पांच प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित सूचनाकर्ता को सूचना सही पाए जाने पर जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश के तुरंत बाद किया जाएगा। शेष पांच प्रतिशत राशि का भुगतान पूर्ण वसूली उपरांत किया जा रहा है। इसी क्रम में एक अप्रैल 2025 से अब तक 5 सफल सूचनाकर्ताओं को 11,500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराए गए हैं। साथ ही जांच एवं वसूली की कार्यवाही करने वाले संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि का भुगतान उनके मासिक वेतन में जोड़कर किया गया है।  कंपनी द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया प्रारंभ होने के पूर्व कुल 63 प्रकरणों में पूर्ण राशि का भुगतान प्राप्त होने पर 7 सफल सूचनाकर्ताओं को उनके खाते में 2 लाख 18 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है। कंपनी में कार्यरत नियमित कर्मचारी/ संविदा/ आउटसोर्स कर्मचारी को भी सूचनाकर्ता के रूप में शामिल किया गया है, परंतु उसे सूचना सही पाए जाने एवं जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश की पूर्ण वसूली होने पर एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि विभिन्न परिसरों की जांच एवं जांच के उपरांत बनाये गये पंचनामा के आधार पर आरोपी के विरूद्ध निकाली गयी राशि की वसूली में सभी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कंपनी ने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ जांच एवं वसूली के कार्य में सम्मिलित बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों को भी पारितोषिक योजना के तहत दी जाने वाली 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि को सभी संबंधितों को समान रूप में दिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि पारितोषिक योजना की पूरी जानकारी जैसे बिलिंग, भुगतान से संबंधित गतिविधियां पूरी तरह से गोपनीय और ऑनलाइन है। अब सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल पर गुप्त रूप से दिए गए प्रारूप में बैंक खाता, पहचान क्र. (आधार अथवा पेन ) देना अनिवार्य है। योजना के अंतर्गत सूचनाकर्ता के संबंध में जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखते हुए, कंपनी मुख्यालय से प्रोत्साहन की राशि सीधे संबंधित सूचनाकर्ता के बैंक के खाते में हस्तांतरित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय, वृत्त स्तर के अधिकारियों को जो शिकायतें प्राप्त होती है, उन शिकायतों पर तत्परता से कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने के लिये कंपनी मुख्यालय के द्वारा सतत रूप से निगरानी भी रखी जा रही है। पोर्टल अथवा उपाय ऐप पर देनी होगी सूचना कंपनी द्वारा योजना में सूचनाकर्ता को निर्धारित शर्तों के अधीन पारितोषिक देने का प्रावधान है। इस राशि की अधिकतम सीमा नहीं है। वर्तमान में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से ऑनलाइन किया गया है तथा कंपनी वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर informer scheme लिंक पर क्लिक करके, सूचनाकर्ता के द्वारा गुप्त सूचना दर्ज की जा सकती है।  उपाय ऐप के माध्यम से भी बिजली चोरी की सूचना दी जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा समस्त नागरिकों के साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाये।  

BSNL से मिला Polycab को बड़ा ऑर्डर, आज रखें शेयर पर नजर

मुंबई  केबल तार बनाने वाली दिग्गज कंपनी पॉलीकैब इंडिया का शेयर (Polycab India Share)  फोकस में है. इसे भारत दूरसंचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल (BSNL) से एक बड़ा ऑर्डर मिला है. Bharat Net Program के तहत मिला ये ऑर्डर 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. यहां बता दें कि ये महंगे शेयरों में शामिल है और पॉलीकैब इंडिया शेयर का भाव भी (Polycab Stock Price) 6,000 रुपये के पार है. इस बड़ी डील का असर कंपनी के शेयर पर देखने को मिल सकता है.  बाजार बंद होने के बाद दी थी जानकारी Polycab India की ओर से बीते कारोबारी दिन मंगलवार को जानकारी शेयर करते हुए बताया गया कि उसे 6447.54 करोड़ रुपये का एक बड़ा ऑर्डर बीएसएनएल से मिला है और इस समझौते पर 17 जून को साइन किए गए हैं. कंपनी की ओर से ये डिटेल शेयर मार्केट (Stock Market) में कारोबार बंद होने के बाद शेयर की गई थी. ऐसे में आज बाजार ओपन होने के बाद इसका पॉजिटिव असर कंपनी के स्टॉक पर देखने की उम्मीद जताई जा रही है. बता दें मंगलवार को पॉलीकैब शेयर गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुआ था.  3 साल में पूरा करना है ऑर्डर बात करें पॉलीकैब इंडिया को BSNL से मिले इस ऑर्डर के बारे में, तो रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे भारतनेट प्रोग्राम के तहत कर्नाटक, गोवा और पुडुचेरी टेलीकॉम सर्किल में नेटवर्क डिजाइन, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, अपग्रेडेशन और मैंटेनेंस का काम दिया गया है. कुल ऑर्डर वैल्यू में से 3,741.92 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय पर,  2,245.15 करोड़ नए नेटवर्क के परिचालन के लिए और मौजूदा नेटवर्क के लिए 460.47 करोड़ शामिल है. मिडिल माइल नेटवर्क डेवलपमेंट के लिए ये काम पॉलीकैब को दिया गया है. इस करार के तहत निर्माण कार्य तीन साल में पूरा करना होगा, जबकि 10 साल तक मेंटिनेंस के लिए समझौता किया गया है.  शेयर पर दिख सकता है असर इस बड़े ऑर्डर के मिलने की खबर का असर कंपनी के स्टॉक पर आज कारोबार के दौरान देखने को मिल सकता है. बता दें कि बीते कारोबारी दिन Polycab India Share 6114 रुपये पर ओपन हुआ था और सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट के बीच 1.15 फीसदी फिसलकर 6,037 रुपये पर क्लोज हुआ था. कंपनी के मार्केट कैप की बात करें, तो ये 90840 करोड़ रुपये है और इस केबल मेन्युफैक्चरर कंपनी का 52 वीक का हाई लेवल 7605 रुपये, जबकि लो-लेवल 4555 रुपये है.  5 साल में 7 गुना किया पैसा इस महंगे स्टॉक ने बीते पांच साल में अपने निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न (Multibagger Return) दिया है. जी हां इस अवधि में हर एक शेयर की कीमत में 5235.80 रुपये का उछाल आया है और निवेशकों के लिए ये स्टॉक मल्टीबैगर बनकर उभरा है. 19 जून 2020 को Polycab Share की कीमत 801.20 रुपये थी, जो मंगलवार को गिरावट के बावजूद 6037 रुपये पर बंद हुआ. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें तो पांच साल में निवेशकों को मिला रिटर्न 653.49% रहा है यानी उनका किया गया निवेश 7 गुना से ज्यादा बढ़ गया है. 

सभी बांधो के गेट्स का मेंटीनेंस कर उन्हें क्रियाशील स्थिति में रखा जाए: मंत्री सिलावट

विभागीय अधिकारी बांधों का निरीक्षण कर वर्षा पूर्व सुधार कार्य पूर्ण करें- मंत्री सिलावट बाढ़ नियंत्रण कक्ष में 24 घंटे कार्य सुनिश्चित करें : जल संसाधन मंत्री सिलावट सभी बांधो के गेट्स का मेंटीनेंस कर उन्हें क्रियाशील स्थिति में रखा जाए: मंत्री सिलावट विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक संपन्न भोपाल  जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने निर्देश दिए हैं कि विभागीय अधिकारी वर्षा से पूर्व सभी बांधों का निरीक्षण करें एवं वर्षा से पहले ही आवश्यकतानुसार सुधार कार्य कर लिए जाएं। सभी बांधो के गेट्स का मेंटीनेंस कर उन्हें क्रियाशील स्थिति में रखा जाए। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा आदि उपस्थित थे। क्षेत्रीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए। बैठक में आगामी मानसून पूर्व तैयारियों एवं विभाग द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम की समीक्षा की गई। प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा द्वारा वर्षा ऋतु से पूर्व बांधों की सुरक्षा और संभावित आपदा स्थितियों से निपटने संबंधी विभागीय योजना एवं विभाग द्वारा किए गए जल संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी गई। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर 24 घंटे क्रियाशील किया जाए। निरीक्षण दल गठित कर नियमित मॉनीटरिंग हो और वर्षा काल के दौरान कोई भी अधिकारी बगैर सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय न छोड़े। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि वर्षा काल में जब भी डैम से पानी छोड़ने की स्थिति बने जिले के सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं को अग्रिम सूचना दे दी जाए। जिन स्थानों पर पानी छोड़ा जा रहा है वहां जन सामान्य को पर्याप्त समय पूर्व पानी छोड़ने की सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि विभागीय मैन्युअल के अनुसार वर्षा पूर्व निरीक्षण प्रतिवेदन विभागीय पोर्टल पर दर्ज किए जाएं और भारत सरकार द्वारा लागू डैम सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत चिन्हित राज्यों के बांधों से संबंधित प्रतिवेदन भी समय पर भारत सरकार के पोर्टल पर दर्ज किए जाएं। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि विभाग द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम को आगामी 14 दिनों में पूर्ण गति से क्रियान्वित किया जाए और कार्यक्रम की समाप्ति के 3 दिवस पश्चात विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सिलावट ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वर्षा पूर्व अधिकतम कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जून को अत्याधुनिक तारामंडल का करेंगे लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव योग दिवस 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परम्परा” पर उज्जैन में राष्ट्रीय कार्यशाला का करेंगे शुभांरभ उज्जैन स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला में आयोजित होगी कार्यशाला अत्याधुनिक तारामंडल का करेंगे लोकार्पण उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला, उज्जैन में करेंगे। कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे। इस दौरान अनेक शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें योग शिविर, शून्य छाया अवलोकन, साइंस शो, स्टेम वर्कशॉप, व्याख्यान एवं परिचर्चा प्रमुख हैं। कार्यशाला भारतीय खगोलशास्त्र की परंपरा और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर केंद्रित होगी। विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला में खगोल विज्ञान के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा। कार्यशाला का आयोजन म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, भोपाल, विज्ञान भारती, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल एवं वीर भारत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पद्मडॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से शून्य छाया अवलोकन करेंगे। साथ ही आचार्य वराहमिहिर न्यास एवं अवादा फाउंडेशन द्वारा निर्मित अत्याधुनिक तारामंडल का लोकार्पण भी करेंगे। इस दौरान तारामंडल-शो का प्रदर्शन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वेधशाला स्थित ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन-सत्र को संबोधित करेंगे। परिचर्चा सत्र में खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा अवादा फाउण्डेशन के आर्थिक सहयोग एवं डीप स्काई प्लेनेटेरियम, कोलकाता के तकनीकी सहयोग से आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा ग्राम डोंगला में अत्याधुनिक डिजीटल तारामंडल की स्थापना की गई हैं। तारामण्डल की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के आमजन एवं स्कूली बच्चों में खगोल विज्ञान संबंधी जानकारी एवं प्राकृतिक घटनाओं संबंधी जिज्ञासा शांत करना है। इस तारामण्डल में 8 मीटर व्यास के एफ.आर.पी. डोम में ई-विजन 4 के डिजीटल प्रोजेक्टर एवं डिजीटल साउण्ड सिस्टम लगाया गया हैं। इस वातानुकूलित गोलाकार तारामण्डल में 55 लोग एक साथ बैठकर आकाशीय रंगमंच की हैरतअंगेज और जिज्ञाशावर्धक ब्रह्मांड में होने वाली घटनाओं का रोमांचक अनुभव एवं आनन्द ले सकेंगे। इस तारामण्डल की लागत लगभग 1.6 करोड़ रूपयें हैं। वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला : मध्य भारत में खगोल विज्ञान अनुसंधान का अग्रणी केंद्र उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित ऐतिहासिक ग्राम डोंगला से कर्क रेखा गुजरती है। प्राचीन काल से ही खगोल और ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा ग्राम डोंगला में वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना, भूमि चयन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष योगदान रहा है। इस वेधशाला की स्थापना में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर और आर्यभट्ट प्रशिक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। वेधशाला में 5 मीटर डोम में स्थापित 20 इंच का आधुनिक टेलीस्कोप अनुसंधान और खगोल वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। यह सुविधा प्रदेश और देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और अनुसंधान का मंच प्रदान कर रही है। यहाँ खगोल विज्ञान पर आधारित विंटर स्कूल का आयोजन होता है और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” योजना के अंतर्गत अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी इस वेधशाला का भ्रमण कर रहे हैं। हाल ही में इस टेलीस्कोप को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर के सहयोग से ऑटोमेशन की सुविधा प्रदान की गई है। यह नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप एक ऐतिहासिक पहल है। इससे सुदूर अंचलों के विद्यार्थी भी ऑनलाइन माध्यम से वेधशाला से जुड़ सकेंगे। डोंगला में ही स्थापित पद्मडॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, जो प्राचीन खगोलीय यंत्रों पर केन्द्रित है, इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के समन्वय के रूप में डोंगला को “डोंगला मीन टाइम (DMT)” की अवधारणा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह प्रयास एक ऐतिहासिक पहल है। देश के वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद होंगे शामिल कार्यशाला में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, भारतीय ज्ञान प्रणाली भारत सरकार नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. गंटी एस. मूर्ति, राष्ट्रीय नवप्रर्वतन प्रतिष्ठान गांधीनगर के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रजेश पांडे, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एन. पी. शुक्ला, डेक्कन विश्वविद्यालय पुणे के पूर्व कुलपति एवं सीएसआईआर भटनागर फेलो, सीसीएमबी हैदराबाद डॉ. वसंत शिंदे, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन के अध्यक्ष हेमंत भवालकर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, अवादा फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती रितु पटवारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक सहित अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद शामिल होंगे।  

इंदौर में हर घर का होगा डिजिटल पता, एक क्लिक से सारी मुश्किलें होगी हल, वार्ड 82 से इसी महीने होगी शुरुआत

इंदौर प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर के नगर निगम ने एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की है। इसके तहत शहर के हर घर को एक डिजिटल पता मिलेगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को सिटी बस कार्यालय के सभागार में एक बैठक आयोजित हुई।  डिजिटलाइजेशन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इंदौर नगर निगम ने अब शहर में हर घर को डिजिटल पता देने की तैयारी कर ली है। अब शहर में हर घर को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान दी जाएगी। मकान के बाहर एक शीट चिपकाई जाएगी। इस पर एक खास क्यूआर कोड होगा। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर उस मकान से जुड़ी संपत्ति कर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, कचरा संग्रहण और अन्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी। यह व्यवस्था वार्ड 82 में इस माह के अंत तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से निगम के अन्य वार्डों में लागू किया जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पिछले वर्ष के निगम बजट में शहर को डिजिटलाइज करने की बात कही थी। इसके बाद से इस बात की कोशिशें चल रही थीं। डिजिटलाइजेशन के अभियान के तहत निगम शहर में हर भवन के बाहर क्यूआर कोड लगाने जा रहा है। पहले चरण में वार्ड 82 में इसकी शुरुआत होगी। मकान के बाहर क्यूआर कोड लगा होने का फायदा निगम और भवन स्वामी दोनों को मिलेगा। कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड को स्कैन कर यह पता लगा सकेगा कि मकान का संपत्तिकर जमा है या नहीं, कचरा संग्रहण कर नियमित जमा हो रहा है या नही। इसी तरह से उक्त पते पर जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी भी क्यूआर कोड से मिल सकेगी। निगम के राजस्व विभाग के अधिकारियों को क्यूआर कोड स्कैन करते ही भवन की जानकारी मिल जाएगी। उन्हें पुराने रिकार्ड साथ नहीं ले जाने पड़ेंगे। पूरे शहर में लागू करने की कोशिश होगी तेज बैठक के दौरान महापौर ने इंदौर नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना को शीघ्र पूर्ण कर पूरे शहर में लागू किया जाए। इस डिजिटल पहल को डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम मानते हुए महापौर ने कहा कि यह शहरवासियों को पारदर्शी, सुलभ और स्मार्ट सेवाएं प्रदान करेगा। हर घर को मिलेगा डिजिटल पता महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “हमने जो ऐप तैयार किया है, उसके जरिए हर घर का डिजिटल पता सुनिश्चित किया जाएगा। इससे नागरिकों को नगर निगम से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह मिल सके। पहले प्रयास के रूप में, वार्ड 82 में इस योजना को लागू किया जाएगा और हम इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास करेंगे। महापौर ने यह भी बताया कि एप के माध्यम से नागरिक कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी को बुला सकेंगे। एक रिक्वेस्ट भेजने पर निगम की टीम घर पर कचरा उठाने के लिए पहुंच जाएगी। हालांकि, कचरा उठाने के लिए शुल्क तय किया जाएगा, जो अभी निर्धारित नहीं किया गया है। मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे     हमने मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाने की तैयारी कर ली है। इस माह के अंत तक वार्ड 82 से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे शहर में मकानों के बाहर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। निगम की यह पहल शहरवासियों को पारदर्शी, सुलभ और स्मार्ट सेवा प्रदान करेगी। जल्द ही हम एप के माध्यम से कचरा संग्रहण के लिए गाड़ी बुलाने की शुरुआत भी करेंगे। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर  

महाकाल की नगरी उज्जैन में बन रहा महाकाल-संस्कृति वन, लगेंगे 30 हजार पौधे, योग-ध्यान केंद्र होगा तैयार

उज्जैन  PM मोदी की पहल पर गुजरात में स्थापित संस्कृति वन की तर्ज पर उज्जैन में भी एक भव्य महाकाल संस्कृति वन का निर्माण किया जा रहा है। यह वन 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इसे कोठी रोड पर बनाया जा रहा है। इस वन के निर्माण के साथ पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आने वाले लोग न केवल प्रकृति से जुड़ सकें, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध हो सकें। संस्कृति वन का निर्माण महाकाल संस्कृति वन को कुल 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस वन में 30 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधों का भी समावेश है। यहां नीम, करंज, बरगद, सिंदूर, बेल, पाम, चंदन, बादाम और कदम जैसे पौधे लगाए गए हैं। यह वन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भी प्रतीक बनेगा। इस वन में योग केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा, अवंतिका नगरी का इतिहास दर्शाने के लिए राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी का भी निर्माण किया जा रहा है। यह वन धार्मिक यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा केंद्र बनेगा। महाकाल संस्कृति वन में कुल 8 ब्लॉक्स होंगे, जिनका नाम कालिदास वन, शांति वन, जैव विविधता वन, नवग्रह वाटिका, सिंदूर वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका जैसे आकर्षक नामों से रखा जाएगा। विक्रम टीले और सिंहासन बत्तीसी उज्जैन के महाकाल संस्कृति वन में सम्राट विक्रमादित्य की भव्य सिंहासन बत्तीसी का दर्शन भी होगा। विक्रम टीला भी यहां विशेष रूप से सुसज्जित किया जा रहा है, जहां फूलों से सुसज्जित एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अनूठा होगा। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में एक स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपए की लागत से इस सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़के, अंडरग्राउंड लाइटिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे और सड़कों के बीच डिवाइडर जैसी सुविधाएं होंगी। यह स्थायी कुंभ सिटी सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी। सिंहस्थ से पहले एलिवेटेड ब्रिज की सौगात सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को दो एलिवेटेड ब्रिज भी मिलेंगे, जिनकी मंजूरी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। ये ब्रिज नागपुर की तर्ज पर बनाए जाएंगे और इस सड़क मार्ग को चौड़ा करेंगे, जिससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी। महाकाल संस्कृति वन के अन्य आकर्षण महाकाल संस्कृति वन में सप्त सागरों के आसपास 84 शिवलिंग स्थापित किए जाएंगे, जिनकी परिक्रमा की जा सकेगी। इसके अलावा, यहां फूल घाटी, विद्या वाटिका, कालिदास अरण्य, नक्षत्र वाटिका, और चरक वाटिका जैसे अनेक आकर्षक स्थान होंगे। इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की 64 कलाओं का भी यहां दर्शन किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं और सुविधाएं महाकाल संस्कृति वन में कैफेटेरिया, पार्किंग, व्हीलचेयर और ग्रीन शेड जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, वन में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। वन विभाग जल्द ही अहमदाबाद जाकर वहां के संस्कृति वन की स्टडी करेगा, ताकि यहां भी उसी मॉडल पर काम किया जा सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा एक नया रूप  महाकाल संस्कृति वन उज्जैन का एक अद्भुत और अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह वन न केवल पर्यटकों को धार्मिक अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इस वन के साथ उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को एक नया रूप मिलेगा और यह स्थान तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन जाएगा। उज्जैन का फिर से लौटेगा प्राचीन वैभव, मोहन यादव की इच्छानुसार महाकाल क्षेत्र के सभी गेटों का किया जाएगा जीर्णोद्धार. डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव अब महाकाल की नगरी उज्जैन में लौटने जा रहा है. प्राचीनकाल में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा रही है. जिसका जीर्णोद्धार अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रशासन कराने जा रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय में उज्जैन में जिस तरह के प्रवेश द्वारा हुआ करते थे, उसी तरह के द्वार फिर से बनाए जाएंगे. जिससे नगर में आने वाले पर्यटक महाकाल नगरी की प्राचीन परंपरा को जान सकेंगे. आइए जानते हैं ये द्वारा कैसे थे और इसका इतिहास क्या था. क्या कहते हैं इतिहास के जानकार? विक्रम विश्वविद्यालय में पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि “प्राचीन भारत में गोपुरम की परंपरा रही है. यह एक प्रकार का विशाकाय द्वार होता है. इसका अर्थ होता है ‘मंदिर का द्वार’. दक्षिण भारत के मंदिरों में ये आज भी मौजूद है. 2600 साल पहले उज्जैन एक राजधानी के रूप में हुआ करता था. यह 16 महाजनपदों में से एक अवंती महाजनपद की राजधानी थी, जिसके पहले राजा चंद प्रद्योत थे. उन्होंने अपने शासन काल में उज्जैन क्षेत्र में परिखाये और गोपुरम निर्माण करवाए, बाद में अशोक मौर्य जब राज्यपाल बनकर आए तो उन्होंने उनका जीर्णोद्धार करवाया.” राजा भोज ने बनवाया था चौबीस खंबा प्रवेश द्वार डॉ रमण सोलंकी आगे बताते हैं कि “सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इसके अलावा परमारों के सम्राट राजा भोज ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई द्वारों का निर्माण कराया. राजा भोज द्वारा बनवाया गया चौबीस खंबा प्रवेश द्वार आज भी मौजूद है. इस पर देवी महामाया और देवी महालया विराजमान हैं. महाकाल के द्वारा का कराया जाएगा जीर्णोद्धार  मुगल शासक अकबर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दानी गेट, सती गेट, केडी गेट बनवाए. अब मोहन यादव इन द्वारों के जीर्णोद्धार और निर्माण कराने जा रहे हैं. इससे 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव फिर से लौटेगा. इससे यहां आने वाले श्रद्धालु महाकाल नगरी के इस सुनहरे इतिहास को जान सकेंगे और देख सकेंगे.” करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है महाकाल का दरबार दरअसल, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पूर्व का बताया जाता है. ज्योतिर्लिंग होना मतलब स्वयंभू … Read more

ग्वालियर में बनी भगवान राम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा, अब रायपुर में करेगी राम पथगमन के दर्शनार्थियों को मंत्रमुग्ध

रायपुर/ग्वालियर  भगवान श्रीराम की 14 वर्षों की वन यात्रा आज भी भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का अहम हिस्सा है। श्रीराम ने अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक का मार्ग जंगलों में व्यतीत किया, जिन स्थानों से वे गुज़रे वे आज राम वन गमन पथ के रूप में श्रद्धा का केंद्र हैं। भारत सरकार इस पथ पर पड़ने वाले धार्मिक स्थलों को विकसित करने का कार्य कर रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित 10 राज्यों के 248 स्थलों को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से संवारा जा रहा है। रायपुर में लगेगी ग्वालियर में बनी मूर्ति अब इसी पथ पर ग्वालियर की भी महत्वपूर्ण भागीदारी दर्ज होने जा रही है। ग्वालियर के प्रसिद्ध मिंट स्टोन से बनी भगवान राम की 51 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा जल्द ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी में स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा वनवासी रूप में श्रीराम को दर्शाती है और इसे जाने-माने मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा और उनकी टीम ने तैयार किया है। 7 महीने पहले मिला था काम इस विशाल प्रतिमा को आकार देने का जिम्मा छत्तीसगढ़ सरकार ने करीब 7 महीने पहले दीपक विश्वकर्मा को सौंपा था। उनकी टीम के 25 कलाकारों ने दिन-रात मेहनत करके इसे मूर्त रूप दिया है। यह प्रतिमा पूरी तरह ग्वालियर मिंट स्टोन से बनी है। अलग-अलग खंडों को जोड़कर एक अद्भुत और सजीव आकृति तैयार की गई है। वनवासी स्वरूप में है प्रतिमा इस मूर्ति की विशेषता है कि यह भगवान राम को वनवासी स्वरूप में दर्शाती है। उनकी वेशभूषा, पुष्पहार, रुद्राक्ष की 108 माला, खड़ाऊ आदि सभी को अत्यंत सूक्ष्मता और सुंदरता से पत्थर में उकेरा गया है। मूर्तिकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से डिजाइन पहले से तय थी और उसी के अनुसार इसे तैयार किया गया। मूर्ति में शिवरीनारायण की छवि भी दिखेगी राम वनगमन पथ में 9 जगहों को चिन्हित किया गया था। इनमें से 7 जगहों चंदखुरी, शिवरीनारायण, सीतामढ़ी हरिचौका, राजिम, चंपारण, नगरी सिहावा, रामगढ़ में मूर्तियां लगाईं। रामाराम (सुकमा) और तुरतुरिया (बलौदा बाजार) में विकास कार्य किया गया है। चंदखुरी को छोड़कर बाकी 6 जगहों पर 25 फीट की मूर्ति स्थापित की गईं हैं। मूर्ति निर्माण में आईं चुनौती दीपक विश्वकर्मा के अनुसार, इस प्रतिमा का निर्माण अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। सबसे पहले विशाल पत्थर को काटकर ज़मीन पर बिछाया गया, फिर उसके ऊपर डिजाइन उकेरा गया। माप-तौल और ड्राइंग के बाद मूर्ति पर काम शुरू हुआ। इस प्रक्रिया में लगभग 60-70 टन मिंट स्टोन का उपयोग हुआ, लेकिन कटाई और तराशने के बाद प्रतिमा का कुल वजन लगभग 30-35 टन रह गया। इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में लगभग 72 लाख रुपये की लागत आई है। इसे रायपुर ले जाकर स्थापित करने में अतिरिक्त 22-25 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है। यानी कुल मिलाकर यह करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी। 25 कलाकारों ने 7 महीने में तैयार की मूर्ति छत्तीसगढ़ सरकार ने 7 महीने पहले दीपक विश्वकर्मा को इस मूर्ति को तैयार करने का जिम्मा सौंपा था. इस प्रतिमा को तैयार करने में दीपक विश्वकर्मा के साथ उनकी टीम के करीब 25 कलाकारों ने 7 महीने तक दिन रात मेहनत की है. इस पूरी प्रतिमा को ग्वालियर मिंट स्टोन से तैयार किया गया है. अलग-अलग पत्थरों को जोड़कर इसे एक स्वरूप दिया गया है. इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रतिमा कैसी होनी चाहिए इसके बिंदु पहले ही बता दिए थे. ऐसे में उनके अनुसार ही इसे तैयार किया गया है. 60-70 टन मिंट स्टोन का इस्तेमाल इस प्रतिमा में राम की सुंदरता और वनवासी रूप को दर्शाने के लिए पुष्प हार को पत्थर में ही उकेरा गया है. साथ ही प्रमुख आकर्षण रुद्राक्ष की माला है, जिसे 108 पत्थरों से रूप दिया गया है. खड़ाऊ भी अत्यंत आकर्षक बनाए गए हैं. इस प्रतिमा को बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दीपक को डिजाइन उपलब्ध कराया गया था. उसी डिजायन को दीपक ने पत्थर में हूबहू उकेरा है. इस प्रतिमा को तैयार करने के लिए 60-70 टन ग्वालियर मिंट स्टोन का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, कांट छांट और प्रतिमा को स्वरूप देने में आधा पत्थर निकल गया फिर भी यह करीब 30 से 35 टन वजनी है. इससे पहले भी बनाई हैं प्रतिमाएं यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में बनी राम प्रतिमा को राम वन गमन पथ पर स्थान मिला हो। इससे पहले भी दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई 25-25 फीट ऊंची दो प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ में स्थापित की जा चुकी हैं। इन्हीं की गुणवत्ता और कलात्मकता को देखते हुए उन्हें 51 फीट ऊंची इस नई प्रतिमा का कार्य सौंपा गया। यह प्रतिमा राम वन गमन पथ पर अब तक लगाई गई 7 मूर्तियों में सबसे ऊंची है और जल्द ही इसकी स्थापना चंदखुरी में की जाएगी। यह न सिर्फ ग्वालियर के लिए गर्व की बात है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिए भी एक बड़ा आकर्षण बनने जा रही है। चुनौतीपूर्ण रहा पत्थर से प्रतिमा का सफर भगवान राम की यह प्रतिमा अपने आप में अनोखी है और इसे बनाना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. दीपक विश्वकर्मा ने बताया, “इस प्रतिमा का साइज अपने आप में चुनौती था. पहले मूर्ति के लिए पत्थर को काटा गया और उसे जमीन पर बिछाया गया. जिसके बाद इसकी ड्राइंग तैयार की गई. नाप तौल किया गया, क्योंकि डिजाइन के अनुसार 51 फीट की प्रतिमा बनाना आसान नहीं था, लेकिन पूरी टीम ने इसे सफलता पूर्वक पूरा किया.” दीपक ने यह भी बताया, “मूर्ति को पास कर दिया गया है और आने वाले एक हफ्ते में यह मूर्ति रायपुर के लिए रवाना हो जाएगी.” प्रतिमा पर 1 करोड़ होंगे खर्च जितनी भव्य और आकर्षक यह प्रतिमा है, उतना ही इसका खर्च भी है. 51 फीट ऊंची इस प्रतिमा को बनाने में करीब 72 लाख रुपए की लागत आई है. इसके बाद जब इसे रायपुर में लगाया जाएगा, तो वहां भी करीब 22-25 लाख रुपए का खर्च आएगा. यानी करीब एक करोड़ रुपए की लागत से राम वन गमन पथ पर ग्वालियर की यह प्रतिमा शोभा बढ़ाएगी. पहले भी लगाईं ग्वालियर में तैयार दो प्रतिमाएं ऐसा नहीं है कि यह पहली प्रतिमा है, जो राम वन गमन पथ … Read more

Wasteकी ताकत!CBG प्लांट से बदलने वाला है ग्वालियर का भविष्य, रोज़ बनेगा CNG और खाद

ग्वालियर  शहर में कचरे से निजात पाने और स्वच्छ वातावरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नगर निगम ग्वालियर द्वारा प्रस्तावित मध्यप्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा वेस्ट आधारित सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट अब केदारपुर डंपसाइड पर स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट को बनाने की लागत करीब 75 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग 5.5 हेक्टेयर भूमि पर तैयार किया जाएगा। प्रोजेक्ट को मिली स्वीकृति ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने बताया कि सरकार से इस परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। यह प्लांट शहर में हर दिन निकलने वाले 350 टन गीले और सूखे कचरे को प्रोसेस करेगा। इसमें से गीले कचरे से बायो सीएनजी गैस और खाद तैयार की जाएगी। प्लांट से प्रतिदिन करीब 9 टन बायो सीएनजी गैस का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग नगर निगम के वाहनों में किया जाएगा और साथ ही इसे कमर्शियल रूप से भी बेचा जाएगा। इससे नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। सूखे कचरे के लिए बनेगा अलग प्लांट इसके अतिरिक्त, 277 टन सूखे कचरे के लिए भी अलग प्लांट लगाया जाएगा, जिससे प्लास्टिक और अन्य रीसायक्लिंग योग्य सामग्री का निष्पादन किया जाएगा। इस योजना से न केवल शहर को कचरे के ढेर से छुटकारा मिलेगा, बल्कि स्वच्छता अभियान को भी मजबूती मिलेगी। पहले इस प्लांट को चंदुआखुर्द डंपयार्ड में लगाया जाना था, लेकिन भूमि की कमी और स्थानीय विवादों के चलते स्थान बदलकर केदारपुर किया गया है। यह लैंडफिल्ड साईट अब धीरे-धीरे खाली हो रही है, जिससे यहां प्लांट निर्माण संभव हो सका। 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट यह परियोजना साल 2027 तक पूरी होने की संभावना है। साथ ही डबरा, दतिया और बमौर जैसे आस-पास के क्षेत्रों से भी कचरा लाकर यहां प्रोसेस किया जाएगा। इस सीबीजी प्लांट की स्थापना ग्वालियर को स्वच्छ और हरित शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। शासन से स्वीकृति, जल्द होंगे टेंडर ग्वालियर में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गोबर आधारित बायो सीएनजी प्लांट लगाया गया था, जिससे ना सिर्फ प्रतिदिन 100 टन गोबर का निष्पादन हो रहा बल्कि इससे बन रही 1 टन बायो सीएनजी निगम का राजस्व भी बढ़ा रही है. अब इंदौर के बाद प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीजी प्लांट भी ग्वालियर में स्थापित होने जा रहा है. ग्वालियर नगर निगम ने इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था और इस पर स्वीकृति भी मिल चुकी है. इस प्लांट में प्रतिदिन शहर से इकट्ठा किया 350 टीपीटी (टन प्रति दिन) सूखा और गीला कचरा से बायो सीएनजी गैस और खाद तैयार की जाएगी.  सूखे कचरे के लिए अलग से होगा एक प्लांट शहर में लगने वाले कचरे के ढेर से निजात पाने के लिए ये अच्छा विकल्प नगर निगम ने तैयार किया है. ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि, ”ये प्लांट सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया है इसके साथ ही एक और प्लांट स्थापित किया जाएगा. जिसके जरिए प्रतिदिन 277 टीपीटी सूखा कचरा भी निष्पादित किया जाएगा. ये एक बहतरीन व्यवस्था होगी जिससे शहर में कचरे के जगह जगह लगने वाले ढेरों से छुटकारा मिलेगा और वातावरण साफ सुथरा होगा.” साढ़े 5 हेक्टेयर में बनेगा प्लांट इस प्लांट को तैयार करने के लिए नगर निगम को अच्छी खासी राशि खर्चनी पड़ेगी. अपर आयुक्त की माने तो इस प्लांट को बनाने में करीब 75 करोड़ रुपये की लागत आएगी. पहले वेस्ट बेस्ड सीबीजी प्लांट को तैयार करने के लिए निगम द्वारा चंदुआखुर्द डंप यार्ड में जमीन प्रस्तावित की गई थी. लेकिन यहां जमीन की कमी और स्थानीय विवादों के चलते बदलने का निर्णय किया गया और अब इसे केदारपुर डंपसाइड पर लगाने का निर्णय लिया गया. ये प्लांट लगभग 5.5 हेक्टेयर जमीन पर स्थापित किया जाएगा. क्योंकि ये लैंडफील्ड साइट अब खाली हो रही है. यहां का कचरा धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है. इसलिए इसी जमीन पर नया सीबीजी प्लांट स्थापित किया जाएगा.  आसपास के क्षेत्रों से भी लाया जाएगा कचरा केदारपुर डंप साइड पर लगने वाले इस प्लांट में हर दिन शहर के कचरे के साथ ही डबरा दतिया और बमौर क्षेत्र से भी कचरा लाया जाएगा. यहां गीला और सूखा कचरा अलग अलग किया जाएगा. गीले कचरे का उपयोग बायो गैस बनाने में होगा. इसके बाद जो वेस्ट मटेरियल बचेगा उससे खाद तैयार की जाएगी. माना जा रहा है की 350 टीपीटी (टन प्रति दिन) कचरे से हर दिन लगभग 9 टन बायो सीएनजी गैस तैयार होगी. जिसे नगर निगम के वाहनों में इस्तेमाल करने के साथ ही कमर्शियल तौर पर बेचा जाएगा. जिससे की नगर निगम को राजस्व भी प्राप्त होगा. साल 2027 तक तैयार होगा प्लांट ग्वालियर नगर निगम के अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार के मुताबिक, ”यह प्लांट अभी पेपरवर्क स्तर पर है. आने वाले एक या दो हफ़्ते में इसके निर्माण के लिए टेंडर भी जारी होने वाले हैं. आने वाले दो से तीन साल में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा. ऐसे में यह प्लांट इस क्षेत्र में नई उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है.”

19 जून 2025 गुरुवार, सूर्य की तरह चमकेगा इन राशियों का भाग्य

मेष राशि– आज का दिन आपके लिए लाभकारी रहेगा। अपनों का साथ मिलेगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताएंगे। आर्थिक लाभ के संकेत हैं। करियर में उन्नति के साथ आय में वृद्धि मिल सकती है। भविष्य के लिए अपने धन की योजना बना सकते हैं। बच्चों की सेहत का ध्यान रखें। यात्रा लाभकारी रहेगी। वृषभ राशि– आज आपके सितारे आपके पक्ष में दिख रहे हैं। आपके माता-पिता का सहयोग मिलने से वित्तीय परेशानियां खत्म हो सकती है। व्यक्तिगत मामलों को सुलझाने के लिए धैर्य से काम लें। रोमांस के लिए आज का दिन अच्छा है लेकिन किसी को प्रपोज करना चाहते हैं तो एक-दो दिन रुकें। आज आप घर के छोटे सदस्यों के साथ बातचीत करके अपने खाली समय का अच्छा उपयोग कर सकते हैं। कारोबार में वृद्धि हो सकती है। मिथुन राशि- आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। आज आपको आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है। किसी का कर्ज लिया है, तो उससे छुटकारा मिल सकता है। घर पर मेहमानों का आगमन हो सकता है। ऐसे में यह आपकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। जो लोग अभी भी बेरोजगार हैं उन्हें अच्छी नौकरी पाने के लिए आज ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। कड़ी मेहनत से ही आपको मनचाहा परिणाम मिलेगा। कर्क राशि- अगर आज आप लंबी दूरी की यात्रा करने वाले हैं, तो सतर्क रहें। धन की स्थिति में सुधार होगा। परिवार में किसी शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। आज आपका दिन रोमांस के लिहाज से अच्छा रहने वाला है। कारोबारियों को लॉन्ग टर्म में लाभ होने के संकेत हैं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा आपको अच्छे परिणाम मिलने लगेंगे। वैवाहिक जीवन अच्छा रहने वाला है। सिंह राशि- आज आपको जीवनसाथी के साथ अनबन से बचना चाहिए। धन की स्थिति में सुधार होगा। अपनों का साथ मिलेगा। किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। मित्र के सहयोग से कारोबार में विस्तार हो सकता है। मन में उतार-चढ़ाव हो सकता है। क्रोध के अतिरेक से बचें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है। कन्या राशि– आज कन्या राशि वालों का आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा लेकिन अति उत्साही होने से बचें। परिवार का साथ मिलेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। आज आपको धन की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कार्यस्थल पर आपके सामने नई समस्याएं सामने आएंगी-खासकर अगर आप चीजों को कूटनीतिक तरीके से नहीं संभालेंगे। तुला राशि- तुला राशि वालों के आज आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, लेकिन मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। तरक्की के अवसर भी मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। परिवार के सहयोग से किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिल सकती है। परिवार में कोई उत्सव हो सकता है। व्यापारिक वृद्धि के संकेत हैं। वृश्चिक राशि– मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे।आज का दिन आपके साथी के रोमांटिक पक्ष की चरम सीमा को दिखाएगा। सिंगल जातकों की किसी खास व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। धनु राशि- धनु राशि वालों की पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। लेखनादि-बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। धन की प्राप्ति होगी। आज धन का आगमन आपको कई आर्थिक परेशानियों से मुक्ति दिला सकता है। अपने व्यक्तिगत मामलों को किसी के साथ शेयर न करें। आज जीवनसाथी आपको सरप्राइज दे सकता है। आज किया गया निवेश फायदेमंद रहेगा लेकिन साझेदारों से आपको कुछ विरोध का सामना करना पड़ सकता है। मकर राशि- आज मकर राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। बातचीत में संतुलित रहें। किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। माता-पिता से धन मिल सकता है। दोस्तों के साथ शाम मौज-मस्ती के साथ-साथ वेकेशन की प्लानिंग बनाने के लिए भी अच्छी रहेगी। अपने साथी पर किसी भी चीज के लिए दबाव नहीं डालें। कुंभ राशि– कुंभ राशि वालों की आज वाणी में मधुरता रहेगी, लेकिन मन परेशान भी हो सकता है। माता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। कार्यस्थल पर किसी कारणवश कोई कार्य लंबित रहने से शाम को आपको अपना बहुमूल्य समय देना पड़ेगा। ऐसा लगता है कि आज आप अपने जीवनसाथी के साथ बहुत सारा पैसा खर्च करने वाले हैं, लेकिन बहुत बढ़िया समय बीतेगा। परिवार का साथ मिलेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ अधिक रहेगी। मीन राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। नौकरी के लिए साक्षात्कारादि देंगे। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। वस्त्रों आदि पर खर्च बढ़ेंगे। आप अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर फाइनेंस पर चर्चा कर सकते हैं और अपने भविष्य के लिए अपने धन की योजना बना सकते हैं। आज कार्यस्थल पर आपका समय अच्छा समय बीतेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में ऐसे प्रयास निश्चित ही मील का पत्थर सिद्ध होंगे

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग स्थित महर्षि आयुर्वेद हॉस्पिटल में ‘सोमा किचन’ का उद्घाटन किया। रेखा गुप्ता का कहना है कि ये पहल न सिर्फ दिल्ली को आयुर्वेद और स्वास्थ्य संस्कृति से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ के विजन को भी साकार करती है। रेखा गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में ऐसे प्रयास निश्चित ही मील का पत्थर सिद्ध होंगे। महर्षि आयुर्वेदिक हॉस्पिटल के डायरेक्टर लक्ष्मण श्रीवास्तव ने बताया कि ये किचन पूरी तरह सात्विक भोजन पर आधारित है, जहां न तो प्याज और लहसुन का प्रयोग होता है और न ही मैदा या रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। लक्ष्मण श्रीवास्तव ने बताया कि आजकल के रेस्टोरेंट्स में अक्सर पुराना और मिलावटी खाना परोसा जाता है, लेकिन ‘सोमा किचन’ में ‘नो मैदा कॉन्सेप्ट’ को अपनाते हुए शुद्ध, पौष्टिक और ताजा भोजन तैयार किया जाता है। यह भोजन आयुर्वेद की पारंपरिक पद्धतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। लक्ष्मण श्रीवास्तव ने कहा, “आयुर्वेद में खाने की जो पद्धति है, उसको ध्यान में रखते हुए सोमा किचन में खाना बनाया जा रहा है, क्योंकि आयुर्वेद हमारी बहुत पुरानी पद्धति है। हमारे दिमाग में जब भी आयुर्वेद का नाम आता है तो हम सिर्फ खिचड़ी के बारे में सोचते हैं, लेकिन इसी चीज को बदलने के लिए हम लोगों के लिए अलग-अलग तरीके का स्वादिष्ट भोजन बना रहे हैं, जो पूरी तरीके से सात्विक है और मिलेट बेस है। सोमा किचन इस सोच को बदलने की दिशा में एक प्रयास है।” उन्होंने कहा, “महर्षि आयुर्वेद हॉस्पिटल नॉर्थ इंडिया का पहला ऐसा हॉस्पिटल है, जहां आयुर्वेदिक पंचकर्म पद्धति से ट्रीटमेंट किया जाता है। यहां इलाज के लिए कई देशों के नेता आ चुके हैं। साथ ही कई सेलिब्रिटी भी आयुर्वेदिक इलाज के लिए यहां आते हैं। हॉस्पिटल में मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े संपूर्ण उपचार मिलते हैं, जो पूरी तरह आयुर्वेदिक पद्धतियों पर आधारित हैं।” डायरेक्टर श्रीवास्तव ने बताया कि अगर हम अपनी दिनचर्या में छोटी-छोटी आदतें, जैसे कि सुबह गर्म पानी पीना शामिल करें, तो हम पाचन तंत्र को बेहतर बना सकते हैं और कई बीमारियों से बच सकते हैं। हॉस्पिटल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगा।

कांग्रेस पार्टी एक बार फिर फर्जी खबरों की फैक्ट्री और झूठ का जनरेटर साबित हुई: शहजाद पूनावाला

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फोन पर हुई 35 मिनट की बातचीत पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस बातचीत से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी फर्जी खबरों की फैक्ट्री और झूठ का जनरेटर है। शहजाद पूनावाला ने बुधवार को समाचार से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर फर्जी खबरों की फैक्ट्री और झूठ का जनरेटर साबित हुई है। कांग्रेस पार्टी आईएनसी की तरह कम और पीएनसी (पाकिस्तानी नेशनल कांग्रेस) की तरह ज्यादा बोलती है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता की तरह कम और पाकिस्तान प्रोपेगेंडा फैलाने वाले नेता की तरह ज्यादा बोलते हैं। विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए पूनावाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस की ओर से जो झूठ फैलाया गया, उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की बातचीत ने बेनकाब कर दिया है। पीएम मोदी ने इस बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के मामले में किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई है। जबकि कांग्रेस लगातार इस बात को उठाती रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक सीजफायर में मध्यस्थता की। ट्रंप के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान डीजीएमओ ने सीजफायर की गुहार भारत से लगाई थी। लेकिन, कांग्रेस सरेंडर और अन्य घटनाओं से जोड़कर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का मजाक बनाती रही। ट्रंप के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मामले पर साफ कर दिया है कि अगर पाकिस्तान की ओर से गोली चलाई जाएगी तो यहां से बदले में गोला चलाया जाएगा। आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूनावाला ने मांग की है कि कांग्रेस जो हमेशा से सेना का अपमान करती रही है, उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर सवाल उठाकर भी सेना का अपमान किया। पाकिस्तान की प्रशंसा करने वाली इस कांग्रेस पार्टी को देश की सेना से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने पीएम मोदी को अमेरिका आने का भी आग्रह किया था। लेकिन, शेड्यूल की व्यवस्थता को देखते हुए नहीं जा पाए। लेकिन, जल्द ही मुलाकात पर सहमति बनी है। कांग्रेस को यह सोचना चाहिए कि मोदी विरोध के चक्कर में वह देश का विरोध करने लगे हैं।

जैकबबाद के पास रेलवे ट्रैक पर एक धमाका होने के बाद ट्रेन के कम से कम छह डिब्बे पटरी से उतर गए

बलूचिस्तान  पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जैकबबाद के पास बुधवार को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, रेलवे ट्रैक पर एक धमाका होने के बाद ट्रेन के कम से कम छह डिब्बे पटरी से उतर गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब विस्फोट हुआ तब ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट से लगभग छह फीट रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया। अधिकारियों को संदेह है कि यह विस्फोट रेल लाइन के किनारे लगाए गए एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बम के कारण हुआ। अधिकारियों ने बताया कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और इलाके को सुरक्षित कर लिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल औपचारिक जांच चल रही है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सशस्त्र बलूच अलगाववादी संगठन बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने जाफर एक्सप्रेस पर हमले के साथ-साथ बलूचिस्तान के चगाई में रेको दिक परियोजना से जुड़े कंटेनरों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। समूह के प्रवक्ता दोस्तिन बलूच ने एक बयान जारी कर दावा किया कि यह विस्फोट उनके कार्यकर्ताओं द्वारा जैकोबाबाद मवेशी बाजार के निकट रिमोट-कंट्रोल डिवाइस का इस्तेमाल करके किया गया था। प्रवक्ता ने कहा, “आज के हमले में ट्रेन के छह डिब्बे पटरी से उतर गए। जाफर एक्सप्रेस का इस्तेमाल कब्जे वाली पाकिस्तानी सेना अपने कर्मियों की आवाजाही के लिए करती है और भविष्य में हमारे हमले और भी गंभीर होंगे।” बयान में कहा गया, “हमारा संगठन इन हमलों की जिम्मेदारी लेता है। बलूचिस्तान की आजादी तक हमारे ऐसे हमले जारी रहेंगे।” सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में यात्रियों को, जिनमें बच्चों के साथ परिवार भी शामिल हैं, पटरी से उतरी ट्रेन से सुरक्षित उतरते और अपना सामान निकालते हुए दिखाया गया। पटरी से उतरने के बावजूद, किसी के घायल होने या मौत की खबर नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब जाफर एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया है। मार्च में, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के विद्रोहियों ने क्वेटा के पास ट्रेन को हाईजैक कर लिया था, जिसमें सैकड़ों यात्रियों को बंधक बना लिया गया था और दो दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। सेना ने दावा किया कि हमलावरों को बेअसर करने और बंधकों को बचाने का अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। सुरक्षा सूत्रों ने पुष्टि की कि कम से कम 346 बंधकों को बचा लिया गया तथा लगभग 50 हमलावरों को मार गिराया गया।

लौह पुरुष पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की याद में अयोध्या में बनायाजाएगा स्मृति द्वार

अयोध्या योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या धार्मिक, सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे के विकास में नए आयाम स्थापित कर रहा है। अब यहां लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण कराया जाएगा। शासन ने इसकी स्वीकृति देते हुए निर्माण के लिए पहली किस्त भी जारी कर दी है। इस परियोजना से अयोध्या की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक गरिमा और बढ़ेगी। अंबेडकर नगर मार्ग में बाकरगंज बाजार में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार और अयोध्या-गोंडा मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास अटल बिहारी वाजपेयी द्वार का निर्माण कराया जाएगा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार की लागत 16.57 लाख रुपए आएगी, जिसके तहत 9.42 लाख रुपए की प्रथम किस्त अवमुक्त की जा चुकी है। अटल बिहारी वाजपेयी द्वार की लागत 17.17 लाख आएगी, जिसकी प्रथम किस्त के रूप में 10.302 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। अयोध्या धाम में फटिक शिला पार्किंग का निर्माण व पर्यटन सुविधाओं का विकास का कार्य, रामपथ व धर्मपथ पर मिस्टिंग फैन का कार्य, राम की पैड़ी पर आरती घर व पर्यटन विकास का कार्य, लता चौक के दाहिनी तरफ राम की पैड़ी कैनाल रोड पर धर्मपथ के समानांतर राष्ट्र की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले थीम वाल का सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है। इसके साथ नगर निगम क्षेत्र में 17 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। रीडगंज चौराहे से गुलाबबाड़ी तक मार्ग का चौड़ीकरण 9.50 करोड़, लगभग 33 करोड़ की लागत से रामपथ से ग‌द्दोपुर होते हुए रायबरेली रोड तक चौड़ीकरण, 40 करोड़ की लागत से देवकाली से जेल रोड का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण, लगभग 113 करोड़ की लागत से नियावां चौराहे से पाटेश्वरी देवी मंदिर होते हुए रामपथ तक फोरलेन का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। रामकथा पार्क में नवीन पर्यटक आवास गृह का निर्माण कार्य, गुलाबबाड़ी पार्क का सौंदर्यीकरण, गुप्तारघाट में यात्रियों की सुविधा के लिए बेंच व प्रकाश व्यवस्था, राजघाट के निकट एम्पिथिएटर एवं फूड कोर्ट का कार्य किया जाएगा। योगी सरकार ने स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत 351 करोड़ रुपए की लागत से 27 हजार घरों को सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा, जिससे शहर की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही नियावां से पाटेश्वरी मंदिर होते हुए रामपथ तक फोरलेन सड़क का निर्माण होगा, जो यातायात को सुगम बनाएगा और तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त, नगर निगम क्षेत्र में अन्य सड़कों के निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्रस्तावित है, जो अयोध्या को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप प्रदान करेगा। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में भयमुक्त परिवेश के कारण आज उत्तर प्रदेश निवेशकों की पसंद बन गया है। अमृत-2 के तहत 351.4 करोड़ की लागत से नगर निगम की सीवरेज योजना पार्ट-2 के तहत 27 हजार घरों को जोड़ा जाएगा। इस परियोजना की लागत 351 करोड़ रुपए है, जिसमें चार पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। रामनगरी के विकास में संत-महंतों के साथ आम जनता की सरकार से अपेक्षा व सुझाव को समाहित करना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसमें पूरे विश्व से आने वाले पर्यटकों व तीर्थयात्रियों की आवश्यकताएं भी शामिल हैं। इसके लिए लगातार तीर्थयात्रियों व आम जनता से संवाद स्थापित करते हुए उनकी अपेक्षा व सुझावों को सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया गया है। जिससे विकास की इस पटकथा में जनता आज खुद को जोड़कर देख रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की लगी क्लास, मंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी नबीन ने वन टू वन की चर्चा

रायपुर  छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन ने मंत्रियों पर अपनी आंखें तरेरी है. मंत्रियों का परफार्मेंस आडिट किया गया है. भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन ने मंत्रियों की क्लास लगाई है. कुछ मंत्रियों को सख्त लहजे में परफार्मेंस सुधारने की हिदायत दी गई है. संगठन सूत्र बताते हैं कि सरकार के कुछ मंत्रियों की कारगुजारियां संगठन तक पहुंची थी. संगठन ने इसे गंभीरता से लिया है. बताया जा रहा है कि संगठन नेताओं ने मंत्रियों से बातचीत दो लेयर में की है. पहले लेयर में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन मंत्री पवन साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने मंत्रियों से बातचीत की और दूसरे लेयर में शिवप्रकाश और नितिन नबीन ने मंत्रियों से चर्चा की है. यह चर्चा बंद कमरे में की गई है. संगठन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि संगठन नेताओं ने उन मंत्रियों को फटकार लगाई है, जो जमीन से दो फ़ीट ऊपर रहकर काम कर रहे हैं. सख्त नसीहत भी दी गई भाजपा संगठन के सूत्र बताते हैं कि आला नेताओं ने मंत्रियों के कामकाज से जुड़े विषयों पर सवाल पूछा है. संगठन कई मंत्रियों के कामकाज के तौर तरीकों नाराज है. इस पर भी गंभीर टिप्पणी की गई. संगठन द्वारा मंत्रियों को उनकी आदत और व्यवहार सुधारने की नसीहत दी गई. संगठन के आला नेताओं ने मंत्रियों को प्रशासनिक अधिकारियों की बढ़ती स्वेच्छाचारिता पर लगाम लगाने के निर्देश दिए हैं. विधायकों पर भी चला डंडा मंत्रियों से वन टू वन के पहले विधायकों की बैठक के दौरा भी राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश ने दो टूक फटकार लगाई है. उन्होंने कहा कि विधायक अपने बेतुके बयानों पर लगाम लगाए. विषय की जानकारी नहीं होने पर बेफ़िजूल बयानबाजी से बचे.

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