Swami Paripurnanand initiated more than 2 dozen people in a 3-day camp in Amla.
विमान की गति से ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है क्रियायोग।
हरिप्रसाद गोहे
आमला। प्रज्ञान मिशन कटक और परमहंस हरिहरानंद क्रियायोग केंद्र भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में गायत्री मंदिर परिसर, गोविंद कॉलोनी में 14 से 16 अगस्त तक तीन दिवसीय क्रियायोग ध्यान साधना शिविर आयोजित हुआ।
शिविर में आचार्य स्वामी परिपूर्णानंद गिरी ने कहा कि श्वास के विज्ञान पर आधारित क्रियायोग मन और श्वास के संबंध को नियंत्रित कर साधक को आत्म-अनुशासन और ईश्वरानुभूति की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा “श्वास पर काबू ही सेल्फ-मास्टरी है”।

प्रथम दिन व्याख्यान, द्वितीय दिन 2 दर्जन से अधिक साधकों को दीक्षा संस्कार और तृतीय दिन निर्देशित ध्यान व तकनीकी अभ्यास कराया गया। शिविर में लगभग 100 लोग उपस्थित रहे।

स्वामी जी ने बताया कि क्रियायोग को महावतार बाबाजी ने 1861 में लाहिड़ी महाशय के माध्यम से पुनः विश्व को दिया। वे अब तक 25 से अधिक देशों में शिविर ले चुके हैं और अगले माह ऑस्ट्रेलिया में शिविर होगा। इस अवसर पर श्री महावीर हनुमान गौशाला एवं प्रगतिशील व्यापारी संघ द्वारा स्वामी परिपूर्णानंद और अमित दीक्षित का सम्मान किया गया। शिविर के आयोजन में बीपी धामोंडे, अनिल सोनी, यशवंत चढ़ोकार सहित अन्य का सहयोग रहा। मंच संचालन मनोज विश्वकर्मा ने किया।









