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बिजली दर तय करने से पहले उपभोक्ताओं से संवाद, 17–18 फरवरी को होगी जनसुनवाई

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं पर जनसुनवाई का कार्यक्रम जारी किया है। आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य भार पोषण केंद्र द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के ट्रूअप, वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR), टैरिफ निर्धारण और पूंजीगत निवेश योजना के अनुमोदन से संबंधित याचिकाओं पर क्षेत्रीय स्तर पर दो दिन ऑनलाइन जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। आयोग ने बताया कि याचिकाओं का सारांश पूर्व में समाचार पत्रों और आयोग की वेबसाइट www.cserc.gov. in पर प्रकाशित किया जा चुका है। इच्छुक उपभोक्ता और हितधारक निर्धारित तिथियों पर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकते हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 17 फरवरी को दुर्ग (प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक), बिलासपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और राजनांदगांव (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जनसुनवाई होगी। वहीं 18 फरवरी को अंबिकापुर (प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक), जगदलपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और रायगढ़ (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। आयोग ने उपभोक्ताओं, जन-प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से जनसुनवाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की है, ताकि टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

भारत के मैप ने बढ़ाई पाकिस्तान की बेचैनी, कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाया

इस्लामाबाद संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए भारत के एक मानचित्र ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस मानचित्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारतीय क्षेत्र के भीतर दिखाया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से संपर्क कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। यह घटना पाकिस्तान के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बनी है। मैप के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत हरकत में आते हुए अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक ब्रीफिंग में कहा कि यह चित्रण गलत है और संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के अनुरूप नहीं है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा, “मैप कुछ हैंडल्स द्वारा लगाया गया था। हमने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया। उन्हें एहसास हुआ कि नक्शा गलत था।” पाकिस्तान का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय मानचित्र, जो पाकिस्तानी और भारतीय क्षेत्रों को अलग करता है, संयुक्त राष्ट्र द्वारा कानूनी रूप से स्वीकृत है। अमेरिका ने हटाया पोस्ट विवाद बढ़ने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने उस पोस्ट को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पूरी तरह से हटा दिया। पाकिस्तान ने इस बात पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका ने आवश्यक सुधार किए। अंद्राबी ने कहा, “हम संतोष व्यक्त करते हैं कि अमेरिकी पक्ष ने हमारे क्षेत्र के कानूनी UN-स्वीकृत मानचित्र को उजागर करने के लिए आवश्यक सुधार किए, जो स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र के रूप में चित्रित करता है, जिसका निपटारा UNSC प्रस्तावों के अनुसार UN-प्रशासित जनमत संग्रह के माध्यम से किया जाना है।” व्यापार समझौते के बीच आया मानचित्र यह घटना तब घटी जब भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले सप्ताह एक व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की, जिसमें टैरिफ को कम स्तर पर रीसेट किया गया। समझौते के विवरण जारी करते समय, USTR कार्यालय ने भारत का एक मानचित्र प्रकाशित किया था जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) सहित पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को देश का हिस्सा दिखाया गया था। मानचित्र में अक्साई चिन भी शामिल था, जिस पर चीन दावा करता है।

स्टार कंटेंडर 2026: मानुष-दीया ने मिक्स्ड डबल्स क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

चेन्नई डब्ल्यूटीटी कंटेंडर चेन्नई 2026 में भारत की टॉप मिक्स्ड डबल्स जोड़ी मानुष शाह और दीया चितले और युवा अंकुर भट्टाचार्जी ने जीत दर्ज की। हाल ही में डब्ल्यूटीटी कंटेंडर मस्कट 2026 जीतने वाले मानुष और दीया को कोरियन क्वालिफायर्स के खिलाफ कड़े मुकाबले में मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने तीन मैच प्वाइंट्स बचाए, इससे पहले कि घरेलू पसंदीदा टीम 42 मिनट में 3-2 (10-12, 11-6, 12-10, 5-11, 12-10) से जीतकर अल्टीमेट टेबल टेनिस, शरत कमल अकादमी द्वारा को-होस्ट किए गए इवेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई। दूसरे क्वार्टर फाइनल में, मानुष और दीया का मुकाबला भारतीय वाइल्डकार्ड पायस जैन और सिंड्रेला दास से होगा, जिन्होंने अपने पहले राउंड के मुकाबले में कजाकिस्तान के इस्केंडर खारकी और सरविनोज मिरकादिरोवा को 11-8, 11-6, 11-7 से मात दी थी। इसके बाद क्वालीफायर अंकुर ने फ्रेंचमैन फ्लोरियन बौरासॉड को 3-1 (11-5, 11-8, 3-11, 11-9) से हराकर बाहर कर दिया। अब उनका सामना दूसरे राउंड में जापान के 14वें सीड काजुहिरो योशिमुरा से होगा। पार्क ग्यूह्योन और किम नायोंग की कोरियाई जोड़ी को 3-2 (11-9, 3-11, 11-8, 6-11, 11-9) से हराकर अंकुर, स्वास्तिका घोष के साथ मिक्स्ड डबल्स क्वार्टर फाइनल में भी पहुंच गए हैं। अब उनका सामना चौथे सीड हरमीत देसाई और यशस्विनी घोरपड़े से होगा, जिन्होंने रोमानिया के डेरियस मोविलेनु और एंड्रिया ड्रैगोमैन को 3-0 (11-8, 11-4, 11-7) से मात दी थी। अन्य मुकाबलों में, स्नेहित सुरवज्जुला ने 1-2 से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दिव्यांश श्रीवास्तव को 3-2 (9-11, 11-8, 6-11, 11-7, 11-6) से हराकर दूसरे राउंड में जगह बनाई, जहां उनका मुकाबला जापान के 13वें सीड मिजुकी ओइकावा से होगा। हरमीत भी रोमानिया के इयूलियन चिरिटा को 3-1 (11-8, 12-10, 9-11, 11-8) से हराकर दूसरे राउंड में पहुंच गए। महिलाओं के सिंगल्स राउंड ऑफ 64 के मुकाबले में 15 वर्षीय दिव्यांशी भौमिक ने डब्ल्यूटीटी फीडर सीरीज वडोदरा 2026 की विनर कोरिया की रयू हन्ना को कड़ी टक्कर दी, लेकिन 3-1 (6-11, 11-6, 11-8, 11-5) के स्कोर से हार गईं। इसके बाद दीया ने वाइल्ड कार्ड अनुषा कुटुम्बले को 3-0 (11-8, 12-10, 11-8) से हराकर दूसरे राउंड में जगह बनाई।  

नस्ल सुधार से पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ मजबूत आधार

अब तक 15 लाख 21 हजार से अधिक प्रजनन योग्‍य पशुओं में किया जा चुका है कृत्रिम गर्भाधान भोपाल मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य की प्राप्‍त‍ि के लिए पशुओं में नस्ल सुधार किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ संचालित किया जा रहा है। पशुओं के नस्ल सुधार का यह अभि‍यान पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार बना है। अभियान के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण, गोशालाओं में नस्ल सुधार सहित पशुपालकों को सेक्‍सड सॉर्टेंड सीमन के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्‍य उद़देश्‍य गोशालाओं को आत्‍मनिर्भर बनाना, कृत्रिम गर्भाधान और स्‍थानीय स्‍तर पर प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के बेरोजगार युवा को स्‍वरोजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) की व्‍यवस्‍था करना है। कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस प्रदेश सरकार द्वारा कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वर्तमान में 15.21 लाख पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। वहीं सॉर्टेड सेक्स सीमन के उपयोग को बढ़ावा देते हुए अब तक 1.65 लाख पशुओं में इसका सफल उपयोग किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। साथ ही जागरुकता के लिए राज्य, जिला और विकासखंड स्तर पर निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कॉल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन किए गए कार्यों का टेलीफोनिक सत्यापन भी किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो रही है। पंचायतों में ‘मैत्री’ कार्यकर्ता की व्‍यवस्‍था पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अभी तक 12 हजार 988 से अधिक मैत्री प्रशिक्षित किए गए हैं। गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत प्रदेश की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रजनन योग्‍य गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान एवं अनुपयोगी सांडों का बधियाकरण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश की विभिन्‍न गोशालाओं में उपलब्‍ध 11 हजार 551 गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान तथा 37 हजार 355 सांडों का बधियाकरण किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना के माध्‍यम से किया जाएगा पुरस्कृत विभाग द्वारा नस्ल सुधार कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों, मैत्री एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए “कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना प्रारंभ की जाएगी। विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कॉल सेंटर के माध्‍यम से प्रतिदिन किया जा रहा सत्‍यापन हिरण्यगर्भा अभियान अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का राज्‍य स्‍तर पर प्रतिदिन कॉल सेंटर के माध्‍यम से सत्‍यापन किया जा रहा है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के कार्य की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है। प्रदेश में सेक्सड सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराने की मांग बढ़ी है। साथ ही प्रदेश में दुग्ध संकलन में भी इजाफा हुआ है।  

रेफरेंडम के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय, ऊपरी सदन गठन से बदल सकती है ताकत की तस्वीर

ढाका  बांग्लादेश चुनाव और जनमत संग्रह के नतीजों के बाद इस मुल्क की राजनीति में आमूल-चूल बदलाव होने वाला है. बांग्लादेश को न सिर्फ नए नेता, नई पार्टी का नेतृत्व मिला है. बल्कि जनमत संग्रह की वजह से वहां की संसदीय राजनीति में बदलने वाली है. बांग्लादेश में अब राज्यसभा का गठन होगा, प्रधानमंत्री के अधिकार कम होंगे, राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ेंगी और सांसद अहम मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर भी मतदान कर सकेंगे.  बांग्लादेश के हर नागरिक ने 12 फरवरी को दो वोट डाला था. एक वोट नई सरकार चुनने का था तो दूसरा जनमत संग्रह का था. ये जनमत संग्रह बांग्लादेश के संविधान में संशोधन को लेकर था. इसे ‘जुलाई चार्टर’ के नाम से जाना जाता है. बांग्लादेश के नागरिकों को ये वोट करना था कि क्या वे संविधान में संशोधन चाहते हैं या अथवा नहीं. इसके लिए उन्हें ‘यस वोट’ या ‘नो वोट’ देना था.  जनमत संग्रह के नतीजे बताते हैं कि लोगों ने भारी मतों से ‘यस वोट’ को चुना है. इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश की जनता संविधान में संशोधन चाहती है.  बता दें कि मोहम्मद यूनुस ने जुलाई चार्टर को “नए बांग्लादेश का जन्म” कहा था. जुलाई चार्टर में कुल 84 सुधार प्रस्ताव हैं, जिनमें से कुछ के लिए संविधान संशोधन जरूरी है और कुछ कानून/आदेश से लागू हो सकते हैं. बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे तारिक रहमान के सामने अब चुनातियां होंगी कि वे इस चार्टर को लागू करें.  आइए समझते हैं कि इस जनमत संग्रह से बांग्लादेश में क्या क्या बदलेगा? ‘राज्यसभा’ का गठन शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश के मुख्य प्रशासक मोहम्मद यूनुस ने कहा था देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि सत्ता विकेंद्रित रहे, यानी कि ताकत एक व्यक्ति अथवा पद के पास केंद्रित नहीं रहे. इसी उद्देश्य से बांग्लादेश में राज्यसभा का गठन किया जाएगा. बांग्लादेश की वर्तमान संसद यूनिकैमरल है. यानी कि यहां सिर्फ एक सदन है, लेकिन जुलाई चार्टर में वादा किया गया है कि संसद को bicameral बनाया जाएगा.  यानी यहां दो सदनों वाली संसद बनेगी. इसका मतलब है कि बांग्लादेश में ऊपरी सदन का गठन किया जाएगा. भारत में ऊपरी सदन को ही राज्यसभा कहते हैं.प्रस्तावित उपरी सदन में 100 सदस्य होंगे. इस आम चुनाव में जिस पार्टी को जितनी सीटें आएंगी, उसी अनुपात में उन्हें सीटें आवंटित की जाएगी. इससे संसद की शक्ति बढ़ेगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों की सहमति जरूरी होगी. कोई एक पार्टी अकेले संविधान नहीं बदल सकेगी. संविधान में बदलाव के लिए ऊपरी सदन की होगी जरूरत अब संविधान में बदलाव के लिए निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत और ऊपरी सदन में बहुमत वोट की जरूरत होगी. राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होगी.  जुलाई चार्टर में यह भी कहा गया है कि निचले सदन का डिप्टी स्पीकर विपक्षी पार्टी से होना चाहिए, जिससे पार्लियामेंट्री लीडरशिप में विपक्षी रिप्रेजेंटेशन को औपचारिक रूप दिया जा सके.  एक व्यक्ति 10 साल ही PM रह सकेगा जुलाई चार्टर के सुधारों के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल तक प्रधानमंत्री रह सकता है. यह भी प्रस्ताव है कि प्रधानमंत्री पद पर बैठा व्यक्ति एक ही समय में पार्टी नेता का पद नहीं संभाल सकता.  राष्ट्रपति की शक्तियों में इजाफा बांग्लादेश में अभी प्रेसिडेंट को प्राइम मिनिस्टर की सलाह पर काम करना होता है. लेकिन अगर जुलाई चार्टर के प्रपोज़ल लागू होते हैं, तो राष्ट्रपति ह्यूमन राइट्स कमीशन, इन्फॉर्मेशन कमीशन, प्रेस काउंसिल, लॉ कमीशन, बांग्लादेश बैंक के गवर्नर और एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन में अधिकारियों को बिना किसी सलाह या रिकमेंडेशन के अपनी अथॉरिटी से नियुक्ति कर पाएंगे.  पार्टी लाइन से इतर वोट कर सकेंगे सांसद बांग्लादेश के मौजूदा संविधान का आर्टिकल 70 सांसदों को अपनी पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करने से रोकता है. दरअसल ये फ्लोर क्रॉसिंग पर रोक लगाता है. जुलाई चार्टर के तहत इसे खत्म कर दिया जाएगा. अब सांसद पार्टी की राय से अलग भी वोटकर सकेंगे.  आपातकाल की घोषणा के लिए नेता प्रतिपक्ष की सहमति जरूरी आपातकाल से जुड़ी शक्तियों में बदलाव भी इस चार्टर का मुख्य हिस्सा हैं. इमरजेंसी की घोषणा अब सिर्फ़ प्रधानमंत्री की मर्ज़ी पर नहीं होगी. इसके बजाय, इसके लिए कैबिनेट सदस्यों और विपक्ष के नेता और उप-नेता की मंजूरी की जरूरत होगी. इसके अलावा इमरजेंसी के दौरान बुनियादी अधिकारों को सस्पेंड नहीं किया जाएगा.  महिलाओं के लिए आरक्षण चुनाव आयोग को स्वायत्त बनाया जाएगा और कैरटेकर सरकार की व्यवस्था बहाल होगी. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संसद में अधिक आरक्षण होगा. ये बदलाव 2024 के विद्रोह की मांगों से निकले हैं, जहां युवाओं ने भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई थी.  कैसे होंगे ये सभी काम चुनाव नतीजों के बाद संविधान संशोधन के लिए एक परिषद का गठन होगा. इसमें संसदीय चुनाव में जीते सदस्य शामिल होंगे. सांसद एक ही समय में कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म काउंसिल के मेंबर के तौर पर भी काम करेंगे. ये परिषद नेशनल चार्टर और रेफरेंडम के नतीजों के आधार पर अपने पहले सेशन की तारीख से 180 दिनों के अंदर रिफॉर्म पूरे करेगी. 

सरकार का अहम कदम: 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात से किसानों की बढ़ेगी आय

नई दिल्ली घरेलू बाजार में बंपर पैदावार और गोदामों में भरे सरप्लस स्टॉक को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शुक्रवार को 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और रबी सीजन की नई फसल आने से पहले किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है। खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, गेहूं के अलावा 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की भी अनुमति दी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब निजी और सरकारी, दोनों ही स्तरों पर देश में अनाज का भंडार आरामदायक स्थिति में है। गेहूं: गोदाम फुल, निर्यात का रास्ता खुला सरकार के इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण गेहूं का भारी स्टॉक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है: निजी क्षेत्र के पास स्टॉक: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निजी कंपनियों और व्यापारियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 32 लाख टन ज्यादा है। एफसीआई की स्थिति: भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 1 अप्रैल, 2026 तक केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। यह आंकड़ा यह सुनिश्चित करने के लिए काफी है कि निर्यात की अनुमति देने से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी। बुवाई में बढ़ोतरी: रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह दर्शाता है कि किसानों ने एमएसपी और सरकारी खरीद पर भरोसा जताते हुए जमकर बुवाई की है और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद है। चीनी मिलों को नई राहत गेहूं के साथ-साथ सरकार ने चीनी उद्योग को भी राहत दी है। चीनी सत्र 2025-26 के लिए ‘इच्छुक’ चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है। पिछला ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले 14 नवंबर, 2025 को सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी, 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है, जबकि लगभग 2.72 लाख टन के सौदे अनुबंधित हो चुके हैं। कड़ी शर्तें: अतिरिक्त पांच लाख टन का कोटा केवल उन मिलों को दिया जाएगा जो इसके लिए इच्छा जताएंगे। शर्त यह है कि आवंटित कोटे का कम से कम 70% हिस्सा 30 जून, 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। आवंटन प्रो-राटा (अनुपातिक) आधार पर होगा और मिलों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि इस निर्यात कोटे को किसी दूसरी मिल के साथ बदला नहीं जा सकेगा। सरकार का यह कदम बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) सुधारने और पीक सीजन में ‘डिस्ट्रेस सेल’ (औने-पौने दाम पर बिक्री) को रोकने के लिए उठाया गया है। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी। 

तेल लगाने से पहले रुकिए! डैंड्रफ समझकर स्कैल्प की इस समस्या को नज़रअंदाज़ न करें

अक्सर जब हमारे सिर में खुजली होती है या डैंड्रफ दिखने लगते हैं, तो हम तुरंत तेल या घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं, लेकिन अगर लाख कोशिश के बाद भी इस परेशानी से राहत नहीं मिलता, तो आपको रुकना चाहिए। हो सकता है जिसे आप मामूली डैंड्रफ समझकर इग्नोर कर रहे हैं, वह आपके स्कैल्प से जुड़ी कोई समस्या हो। बालों में डैंड्रफ होना एक ऐसी आम समस्या है, जो कभी भी किसी को भी हो सकती है। यह बालों में होने वाली खुजली और सफेद फ्लेक्स का कारण भी है। हम कई बार इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या कभी ड्राई स्कैल्प समझकर शैम्पू-तेल या घरेलू नुस्खे को आजमाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बार यह सिर्फ ड्राईनेस नहीं होता? अगर तमाम कोशिशों के बाद भी यह समस्या बनी रहती है, तो समझ लीजिए आपका स्कैल्प आपको कोई बड़ा संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं इसके बारे में। ड्राईनेस और डैंड्रफ की कैसे करें पहचान? अक्सर हम सिर में होने वाली खुजली और फ्लेक्स को डैंड्रफ समझ लेते हैं, लेकिन यह ‘ड्राई स्कैल्प’ भी हो सकता है। इसलिए दोनों के बीच के फर्क को समझना इलाज के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे में नीचे दिए गए कुछ संकेतों से आप इन्हें आसानी से पहचान सकते हैं। ड्राई स्कैल्प ड्राई स्कैल्प में सफेद फ्लेक्स छोटी और सूखी होती है। नमी की कमी के कारण स्कैल्प ड्राई होती है। यह अक्सर सर्दियों में या बहुत ज्यादा बाल धोने से होती है। डैंड्रफ डैंड्रफ में फ्लेक्स बड़ी, चिपचिपी और पीले रंग की होती है। इनसे स्कैल्प पर खुजली और रेडनेस भी हो सकती है। मैलासेजिया नाम के यीस्ट और स्कैल्प पर ज्यादा ऑयल के कारण डैंड्रफ होता है। जिद्दी डैंड्रफ की असली वजह क्या है? अगर आपको डैंड्रफ की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है, तो इसके पीछे ये तीन मुख्य कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसकी असली वजह। सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस बार-बार होने वाले डैंड्रफ की वजह ‘सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस’ हो सकती है। यह त्वचा की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें स्कैल्प के साथ-साथ आइब्रो, नाक और कानों के पास भी फ्लेक्स, रेडनेस, खुजली और कभी-कभी चिपचिपा भी महसूस हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे जेनेटिक्स, कोई खास दवाइयां, ज्यादा ऑयली स्किन या कमजोर इम्युनिटी। वहीं, स्ट्रेस, ठंडा मौसम और ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स भी इसे और बिगाड़ सकते हैं। यह समस्या ज्यादातर पुरुषों, बच्चों और टीनएजर में आम है। अगर आपको भी यह समस्या महसूस होती है, तो इसे डैंड्रफ समझकर नजरअंदाज न करें। फंगस का बढ़ना डैंड्रफ की असली वजह आपके सिर पर रहने वाला एक छोटा सा यीस्ट होता है, जिसका नाम है मैलासेजिया। यह फंगस हर किसी के सिर पर होता है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह बहुत तेजी से बढ़ने लगता है। इससे सिर की त्वचा में जलन पैदा होती है। हम अक्सर डैंड्रफ होने पर खूब तेल लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन ज्यादा तेल इस फंगस को बढ़ावा देता है। इसकी वजह से स्कैल्प की डेड स्किन बहुत तेजी से झड़ने लगती है, जिसे हम डैंड्रफ कहते हैं। इसलिए एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में मॉइस्चराइजर की जगह एंटी-फंगल इंग्रीडिएंट्स मिलाए जाते हैं। इससे राहत पाने के लिए मेडिकेटेड शैम्पू, लोशन या फोम की मदद ले सकते हैं। ध्यान रखें कि बालों की सही साफ-सफाई रखना ही इस फंगस से बचने का सबसे बड़ा तरीका है। सोरायसिस सोरायसिस का खतरा कभी-कभी जिसे हम डैंड्रफ समझते हैं, वह स्कैल्प सोरायसिस भी हो सकता है। इसमें सिर पर चांदी जैसी मोटी परत जमने लगती है, जिससे खुजली की समस्या पैदा होती है। कई बार यह समस्या आपके माथे के बाहर तक फैल जाती है। दरअसल, इस समस्या का कोई परमानेंट इलाज तो नहीं है, लेकिन सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर आप इसके लक्षणों को कंट्रोल जरूर कर सकते हैं।  

महतारी गौरव वर्ष की गूंज दिल्ली तक: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने केंद्रीय मंत्री को दी विस्तार से जानकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ मना रहा ‘महतारी गौरव वर्ष’: मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े ने केन्द्रीय मंत्रीअन्नपूर्णा देवी को दी जानकारी छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े ने नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रीअन्नपूर्णा देवी से सौजन्य भेंट कर प्रदेश में संचालित महिला एवं बाल विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं भावी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। मंत्रीराजवाड़े ने इस अवसर पर अवगत कराया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य माताओं और बहनों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं आर्थिक स्वावलंबन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को विकास की धुरी मानते हुए योजनाओं को और अधिक प्रभावी स्वरूप दे रही है। बैठक में मातृशक्ति सशक्तिकरण, पोषण अभियान की प्रगति, बाल संरक्षण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, आंगनबाड़ी व्यवस्थाओं के उन्नयन तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन जैसे विषयों पर सकारात्मक एवं परिणाममुखी विचार-विमर्श हुआ। मंत्रीराजवाड़े ने छत्तीसगढ़ में संचालित नवाचारों, जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों तथा हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की। केंद्रीय मंत्रीअन्नपूर्णा देवी ने योजनाओं के प्रभावी संचालन, मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत करने तथा पात्र हितग्राहियों तक लाभ की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने केंद्र एवं राज्य के समन्वित प्रयासों को महिला एवं बाल कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग एवं मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। सुशासन सरकार मातृशक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

कोपा डेल रे सेमीफाइनल: एटलेटिको मैड्रिड ने बार्सिलोना को 4-0 से रौंदा

मैड्रिड कोपा डेल रे सेमीफाइनल के पहले चरण में एटलेटिको मैड्रिड ने डिफेंडिंग चैंपियन बार्सिलोना को 4-0 से करारी शिकस्त देकर फाइनल की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए। घरेलू मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में डिएगो सिमेओने की टीम ने पहले हाफ में ही चार गोल दागकर मैच लगभग एकतरफा कर दिया। मैच के छठे मिनट में बार्सिलोना के गोलकीपर जोआन गार्सिया की बड़ी गलती का एटलेटिको ने फायदा उठाया और बढ़त बना ली। इसके बाद 14वें मिनट में शानदार मूव के जरिए एंटोइन ग्रीजमैन ने दूसरा गोल दागा। 33वें मिनट में जूलियानो सिमेओने के क्रॉस पर एडेमोला लुकमैन ने तीसरा गोल किया। पहले हाफ के अंत से ठीक पहले लुकमैन और जूलियन अल्वारेज़ की बेहतरीन साझेदारी ने चौथा गोल दिलाया। हालांकि पहले हाफ में बार्सिलोना ने 70 प्रतिशत बॉल पजेशन रखा, लेकिन एटलेटिको के तेज काउंटर अटैक के सामने वह बेअसर साबित हुआ। दूसरे हाफ में कोच हांसी फ्लिक ने रॉबर्ट लेवांडोव्स्की को मैदान पर उतारा, लेकिन इससे भी टीम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। 52वें मिनट में पाउ क्यूबर्सी ने फ्री-किक पर मिले रीबाउंड को गोल में बदला, लेकिन लंबी वीएआर समीक्षा के बाद इसे ऑफसाइड करार दिया गया। मैच के 86वें मिनट में एलेक्स बेएना को पीछे से गिराने पर बार्सिलोना के खिलाड़ी को पहले पीला कार्ड दिया गया, जिसे बाद में वीएआर की मदद से सीधे लाल कार्ड में बदला गया। एटलेटिको के डिफेंडर मार्कोस योरेंटे ने कहा, “यह पागलपन था, खासकर बार्सा के खिलाफ। टीम ने हर चीज सही की — डिफेंस मजबूत रखा, हाई प्रेसिंग की और स्पेस का बेहतरीन इस्तेमाल किया।” अब इस मुकाबले का दूसरा चरण 3 मार्च को कैंप नोउ में खेला जाएगा। इस सेमीफाइनल के विजेता का सामना फाइनल में रियल सोसिएदाद या एथलेटिक बिलबाओ से होगा। फिलहाल रियल सोसिएदाद 1-0 की बढ़त के साथ दूसरे चरण में उतरेगा।  

कम लागत, ज्यादा लाभ: धान छोड़ ब्राम्ही की ओर बढ़ रहे किसान

रायपुर. धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान ब्राम्ही की खेती किसानों के लिए आय का नया और भरोसेमंद फसल है l  यह एक प्रमुख औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग याददाश्त बढ़ाने, मानसिक शांति और आयुर्वेद में किया जाता है, जिससे इसकी बाजार में मांग बहुत है। छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड जैसे संस्थानों द्वारा इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है, और कुछ स्थानों पर सीधे खरीद (Buy Back) की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे किसानों को सीधा फायदा हो रहा है l  धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान       छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के प्रयासों से राज्य के किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ औषधीय फसलों की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। विशेष रूप से ब्राम्ही की खेती किसानों के लिए आय का नया और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है। धान से ब्राम्ही तक : कम लागत में अधिक लाभ की ओर अग्रसर किसान        बोर्ड द्वारा संचालित औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती योजना के अंतर्गत किसानों को ब्राम्ही की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ब्राम्ही एक ऐसी औषधीय फसल है, जिसकी लागत कम और लाभ अधिक है। एक बार रोपण करने के बाद 3 से 4 वर्षों तक हर तीन माह में इसकी कटाई की जा सकती है। ब्राम्ही का उपयोग स्मरण शक्ति बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने, मस्तिष्क संबंधी औषधियों तथा सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है, जिससे बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। ब्राम्ही की खेती से किसानों को लगभग 1 लाख 20 हजार रूपए तक शुद्ध लाभ      जहां धान की खेती में प्रति एकड़ लागत अधिक और मुनाफा सीमित होता है, वहीं ब्राम्ही की खेती में सालाना लागत लगभग 21 हजार रुपये तक आती है और एक वर्ष में लगभग 30 क्विंटल तक उत्पादन से किसानों को करीब 1 लाख 50 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार किसानों को लगभग 1 लाख 20 हजार रूपए तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि किसान अब ब्राम्ही की खेती को लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। किसानों को ब्राम्ही के लिए बाजार की चिंता नहीं बोर्ड द्वारा किसानों को ब्राम्ही की रोपण सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी प्रारंभिक लागत और कम हो गई है। साथ ही किसानों की उपज के विक्रय की समस्या को दूर करते हुए पहले से ही क्रय अनुबंध की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को बाजार की चिंता नहीं रहती। रायपुर एवं धमतरी जिले के लगभग 36 किसान 15 एकड़ क्षेत्र में ब्राम्ही की खेती        ब्राम्ही की खेती छत्तीसगढ़ की जलवायु और भूमि अत्यंत उपयुक्त है। यह नमी एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उग जाती है, जहां अन्य फसलों में नुकसान की आशंका रहती है। इसी कारण अब किसान धीरे-धीरे धान के साथ वैकल्पिक खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। वर्तमान में रायपुर एवं धमतरी जिले के लगभग 36 किसान 15 एकड़ क्षेत्र में सफलतापूर्वक ब्राम्ही की खेती कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम ब्राम्ही छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने किसानों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और निरंतर प्रयासों से औषधीय पौधों की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने बताया कि बोर्ड किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, रोपण सामग्री और विपणन सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।  औषधीय की खेती में छत्तीसगढ का अग्रणी स्थान     राज्य में औषधीय पौधों की खेती को नई पहचान मिलने के साथ साथ छत्तीसगढ़ में उत्पादित ब्राम्ही और अन्य औषधीय पौधों की मांग भविष्य में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ेगी और राज्य औषधीय खेती के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। ब्राम्ही की खेती से आत्मनिर्भर बनता किसान वन विभाग और बोर्ड के संयुक्त प्रयासों से आज छत्तीसगढ़ के किसान नई सोच के साथ खेती कर रहे हैं। ब्राम्ही की खेती न केवल उनकी आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की नई राह भी दिखा रही है।

महापड़ाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, खेजड़ी की अवैध कटाई पर बनेगा कड़ा कानून

बीकानेर बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के विरोध में पिछले 11 दिनों से जारी महापड़ाव गुरुवार देर शाम समाप्त हो गया। लंबे समय से खेजड़ी संरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे स्थानीय लोगों ने सरकार के फैसले के बाद धरना खत्म करने की घोषणा की। 12 फरवरी की शाम सरकार की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए धरना स्थल पहुंचा। इसमें मंत्री केके बिश्नोई, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी बिश्नोई, जसवंत बिश्नोई और पब्बाराम बिश्नोई शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद अहम निर्णय लिया गया। सरकार ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। राजस्व सचिव की ओर से लिखित आदेश जारी कर सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कटाई पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सख्त निगरानी रखने और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि 5 फरवरी को विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण को लेकर घोषणा की गई थी, जिसके बाद इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खेजड़ी संरक्षण के लिए विशेष कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित विधेयक के जरिए अवैध कटाई पर सख्त प्रावधान, नियमित निरीक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर गंभीर नजर आ रहे हैं। सरकार का कहना है कि मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेजड़ी का विशेष पारिस्थितिक महत्व है और इसे संरक्षित करना प्राथमिकता में शामिल है। सरकार के निर्णय के बाद संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने आभार जताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से खेजड़ी संरक्षण की मांग की जा रही थी और अब सरकार की पहल से सकारात्मक संदेश गया है। कब, क्या-क्या हुआ? 2 फरवरी : पॉलिटेक्निक कॉलेज में विशाल जनसभा के साथ महापड़ाव शुरू। हजारों पर्यावरण प्रेमी देशभर से पहुंचे। 3 फरवरी : 29 संतों सहित 363 पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे। 4 फरवरी : आमरण अनशन करने वालों की संख्या 537 पहुंची, महापड़ाव स्थल पर अस्थायी अस्पताल बनाया गया। 5 फरवरी : संसद और विधानसभा में गूंजी खेजड़ी संरक्षण की आवाज। मुख्यमंत्री का संदेश लेकर प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, आमरण अनशन समाप्त हुआ। 6 फरवरी : प्रदेशभर में खेजड़ी कटाई पर रोक की मांग पर अड़े पर्यावरण प्रेमी, क्रमिक अनशन शुरू। 8 फरवरी : संतों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में मुख्यमंत्री से मिला। 9 फरवरी : महापड़ाव जारी रखने की घोषणा। 10 फरवरी : शहर में कलश यात्रा निकाली गई। 11 फरवरी : संतों ने मांग पूरी होने पर महापड़ाव स्थगित करने का शपथ पत्र दिया, मौन जुलूस निकाला। 12 फरवरी : सरकार के निर्देश जारी होने के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा। खेजड़ी संरक्षण कानून की तैयारी, प्रशासन अलर्ट राजस्व विभाग के निर्देशों के बाद अब प्रदेशभर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खेजड़ी कटाई रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही विशेष कानून लाकर खेजड़ी संरक्षण को स्थायी रूप से मजबूत किया जाएगा।

उज्जैन बाइपास को मंजूरी, मध्य प्रदेश के रेल नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

भोपाल मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने राज्य में कई महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन योजनाओं से न केवल ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई, क्षेत्रीय संपर्क और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। उज्जैन बाइपास रेलवे लाइन को मंजूरी भारतीय रेलवे के अंतर्गत पश्चिमी रेलवे ने नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किलोमीटर लंबी उज्जैन बाईपास रेलवे लाइन को 189.04 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी है। यह परियोजना विशेष रूप से उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों के रिवर्सल की समस्या को समाप्त करेगी। अभी कई ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए उज्जैन स्टेशन पर रुककर रिवर्सल करना पड़ता है, जिससे समय और परिचालन क्षमता दोनों प्रभावित होते हैं। बाईपास लाइन बनने से यह प्रक्रिया खत्म होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा यह परियोजना वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान बेहतर रेल प्रबंधन और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होता है। बायपास लाइन बनने से तीर्थयात्रियों को सीधे और तेज रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच और सुगम होगी। पितृ पर्वत से उज्जैन बायपास तक नया फोरलेन, सिंहस्थ से पहले तैयार होगी इंदौर-उज्जैन की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। यात्रा समय में कमी, समयपालन में सुधार और भीड़भाड़ में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।  इन स्वीकृतियों को मध्य प्रदेश के रेल ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है  बेहतर संपर्क और विश्वसनीय सेवा से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।  

हर घर जल योजना से ग्राम कन्हारी में बदली पेयजल की तस्वीर

रायपुर. जल जीवन मिशन के तहत चल रही हर घर जल योजना से ग्रामीणों का जीवन काफी आसान हो गया है। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल और बैगा जनजाति बहुल ग्राम कन्हारी में अब गांव के हर घर तक नल कनेक्शन के माध्यम से साफ और पर्याप्त पानी मिल रहा है, जिससे कई सालों पुरानी पेयजल की समस्या दूर हो गई है। इससे लोगों के जीवन में सुविधा, सुरक्षा और सम्मान की भावना बढ़ी है। पहले गांव के लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। वे कुएं, नाले और हैंडपंप पर निर्भर रहते थे, जिससे रोज कई घंटे मेहनत करनी पड़ती थी। इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों खर्च होते थे और पढ़ाई, कामकाज और सेहत पर भी असर पड़ता था। अब हर घर में नल से पानी मिलने से यह परेशानी खत्म हो गई है। महिलाओं का समय बच रहा है, जिसे वे अब घर, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों में लगा पा रही हैं। साफ और सुरक्षित पानी मिलने से गांव में पानी से होने वाली बीमारियां भी कम हुई हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है। इससे इलाज पर खर्च भी कम हुआ है और लोगों का जीवन पहले से बेहतर हुआ है। ग्राम कन्हारी में यह योजना ग्राम पंचायत, जल समिति और ग्रामीणों के सहयोग से सफलतापूर्वक चल रही है। पानी की व्यवस्था और देखभाल भी गांव के लोग मिलकर कर रहे हैं, जिससे नियमित और सही मात्रा में पानी मिलता रहे। हर घर जल योजना ने ग्राम कन्हारी में सिर्फ पानी की सुविधा ही नहीं दी, बल्कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, समय की बचत और सम्मान के साथ जीने का मौका भी दिया है। यह योजना जनजातीय क्षेत्रों में विकास का एक अच्छा उदाहरण बन गई है।

कुक स्ट्रेट फतह करने वाले पहले एमपी के पैरा स्विमर बने सतेंद्र लोहिया, सीएम ने सराहा

ग्वालियर मध्य प्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर सतेंद्र सिंह लोहिया ने दुनिया के सबसे मुश्किल ओपन-वॉटर समुद्री चैनलों में से एक, न्यूजीलैंड के कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करके इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को उन्हें इस कामयाबी पर बधाई देते हुए कहा कि इस कामयाबी के साथ, पद्म श्री अवॉर्डी (2024) लोहिया कुक स्ट्रेट को पार करने वाले एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं। अपनी खुशी जाहिर करते हुए, मुख्यमंत्री ने इस कामयाबी को देश और मध्य प्रदेश दोनों के लिए गर्व का पल बताया। यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पद्म श्री और तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्डी, मध्य प्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर सतेंद्र सिंह लोहिया ने दुनिया के सबसे मुश्किल समुद्री चैनलों में से एक, न्यूजीलैंड के कुक स्ट्रेट को कामयाबी से पार करके इतिहास रच दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं इस अनोखी कामयाबी के लिए उन्हें दिल से बधाई देता हूं। देश और मध्य प्रदेश के लिए यह गर्व का पल उनके जबरदस्त जज्बे और पक्के इरादे को दिखाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।” 38 साल के पैरा स्विमर, जिनके दोनों पैरों में चलने-फिरने की क्षमता कम है, ने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उनमें से एक है मुंबई में 33 किलोमीटर का स्विम सर्किट 5 घंटे 42 मिनट में पूरा करना। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल डिवीजन के भिंड जिले के गाटा गांव के रहने वाले लोहिया ने इससे पहले 2018 में एक टीम के साथ 36 किलोमीटर का इंग्लिश चैनल पार करके इतिहास रचा था। 2019 में, उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स में कैटालिना चैनल पूरा किया। उन्होंने इंग्लिश चैनल की तैराकी 12 घंटे और 26 मिनट में पूरी की। अपनी उपलब्धियों के लिए, उन्हें 2020 में तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड मिला और उन्होंने कहा कि वह यह सम्मान पाने वाले पहले पैरा-एथलीट थे। लोहिया को 2014 में मध्य प्रदेश के सबसे बड़े राज्य-स्तरीय खेल सम्मान, विक्रम अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। 2021 में, उन्हें बेस्ट स्पोर्ट्सपर्सन का नेशनल अवॉर्ड मिला। खेलों में उनके योगदान के लिए, उन्हें 2024 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।  

महिला एवं पुरूष खिलाड़ियों ने जूनियर व सीनियर वर्ग में 12 खेलों में दिखाया दम

रायपुर. आदिवासी अंचल की प्रतिभाओं को सरगुजा ओलंपिक से मिल रहा सशक्त मंच :  रामविचार नेताम आदिम जाति विकास तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में बलरामपुर में जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक का समापन हुआ। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा बलरामपुर के स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय के खेल मैदान में 10 फरवरी से 12 फरवरी तक इसका आयोजन किया गया था। इस तीन दिवसीय आयोजन में खेल प्रतिभाओं के उत्साह, कौशल और ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। राज्य में पहली बार आयोजित सरगुजा ओलंपिक ग्रामीण और शहरी खिलाड़ियों को अपनी क्षमता  और खेल कौशल प्रदर्शित करने का अच्छा मंच प्रदान कर रहा है। इसके जिला स्तरीय आयोजन के समापन में बलरामपुर पहुंचे आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया। वे शंकरगढ़ और बलरामपुर की टीमों के बीच हो रहे बालिका रस्साकसी प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचे और प्रतिभागियों से परिचय प्राप्त कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने तीरंदाजी प्रतियोगिता भी देखा और स्वयं तीरंदाजी में हाथ आजमाकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को शील्ड और मेडल प्रदान किए। सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजन के समापन के अवसर पर  नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि विकासखंड से लेकर जिला स्तर तक सरगुजा ओलंपिक का सुनियोजित एवं व्यवस्थित आयोजन सराहनीय है। सरगुजा ओलंपिक खेल प्रतिभाओं को निखारने का सशक्त मंच बन रहा है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी अंचल के युवाओं को मिल रहे इस अवसर की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रतिभागी खिलाड़ियों को निरंतर अभ्यास कर संभाग एवं राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। समापन समारोह में बलरामपुर के कलेक्टर  राजेंद्र कटारा, पुलिस अधीक्षक  वैभव बैंकर, जिला पंचायत की सीईओ मती नयनतारा सिंह तोमर, वनमंडलाधिकारी  आलोक वाजपेयी, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य  कृष्णा गुप्ता, रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष  ओमप्रकाश जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  लोधीराम एक्का, उपाध्यक्ष  दिलीप सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी  एम.आर. यादव और जिला खेल अधिकारी  मारकूस कुजूर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी और खेलप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे। इन खेलों में दिखा रहे कौशल सरगुजा ओलंपिक में सरगुजा संभाग के सभी 32 विकासखंडों के खिलाड़ी 12 खेलों में अपने खेल कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें 5 व्यक्तिगत स्पर्धाएं और 7 दलीय खेल हैं। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में एथलेटिक्स (100, 200, 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो, 400 मीटर रिले), तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती और कराटे शामिल रहे। वहीं दलीय खेलों में फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल शामिल हैं। सभी प्रतियोगिताएं जूनियर वर्ग (14 से 17 वर्ष, बालक/बालिका) तथा सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक, महिला/पुरुष) में आयोजित की जा रही हैं।

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