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कोंडागांव एवं फरसगांव में एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला आयोजित

रायपुर. कोंडागांव एवं फरसगांव में एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला आयोजित वन विकास निगम, जगदलपुर द्वारा 11 फरवरी को कोंडागांव एवं फरसगांव क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।      कार्यशाला का उद्देश्य वन अग्नि से बचाव, सुरक्षा उपायों की जानकारी तथा आग लगने की स्थिति में त्वरित और सही कार्रवाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। अधिकारियों ने बताया कि वन में आग लगने के प्रमुख कारणों में जलती हुई बीड़ी-सिगरेट को लापरवाही से फेंक देना, तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान वृक्षों के नीचे आग लगाकर छोड़ देना तथा अन्य मानवीय असावधानियां शामिल हैं। इन घटनाओं को रोकने के प्रभावी उपायों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान कंट्रोल्ड बर्निंग (नियंत्रित आग) का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। साथ ही ब्लोअर मशीन के माध्यम से फायर लाइन कटाई का अभ्यास भी कराया गया, ताकि कर्मचारी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि समय रहते उचित कदम उठाने से बड़ी वन अग्नि घटनाओं को रोका जा सकता है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम गांवों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वन विकास निगम के अधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के जनजागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही।

अगर आप भी पीते हैं बहुत गरम चाय-कॉफी, तो सावधान! एक्सपर्ट्स के मुताबिक बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

क्या आपके दिन की शुरुआत भी कप से निकलती हुई ‘गरमा-गरम’ भाप वाली चाय या कॉफी के साथ होती है? अगर हां, तो जरा ठहरिए, क्योंकि जिसे आप सुकून का पल समझते हैं, वह असल में आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। जी हां, न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे आपकी गरमागरम चीजें पीने की आदत आपको भविष्य में कैंसर के खतरे तक ले जा सकती है। चाय या कॉफी नहीं, तापमान है समस्या अक्सर लोगों को लगता है कि कुछ खास चीजों से ही कैंसर का रिस्क बढ़ता है, लेकिन लीमा महाजन का साफ कहना है कि समस्या चाय, कॉफी या खाने में नहीं, बल्कि उनके तापमान में है। जी हां, बहुत ज्यादा गरम चीजें पीना या खाना ही असली खतरा है। क्या होता है शरीर पर असर? जब हम बहुत ज्यादा गर्म खाना खाते हैं या खौलती हुई चाय पीते हैं, तो इससे हमारा फूड पाइप डैमेज होता है। अगर यह लगातार होता रहे, तो इससे ‘इसोफेजस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ नामक बीमारी हो सकती है, जो एक टाइप का कैंसर है। क्या कहती है रिसर्च? न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो ‘इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर’ (IARC) ने इसे स्पष्ट रूप से ग्रुप 2A कार्सिनोजेनिक की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा गरम चीजों का सेवन कैंसर पैदा करने वाले कारणों में शामिल है। भविष्य के लिए चेतावनी यह बीमारी रातों-रात नहीं होती। ऐसा नहीं है कि आज आपने गरम चाय पी और कल आपको कैंसर हो जाएगा, लेकिन अगर आप अपनी इस आदत को नहीं बदलते हैं और लगातार बहुत गरम चीजों का सेवन करते रहते हैं, तो भविष्य में इसके होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, लीमा महाजन का कहना है कि अपनी चाय को थोड़ा ठंडा होने दें और तभी उसका मजा लें।  

जनसंख्या से जनशक्ति तक: ह्यूमन कैपिटल के अधिकतम उपयोग की नई रणनीति

लखनऊ.   उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्पष्ट संकेत दिया है कि वह केवल जनसंख्या के आकार पर नहीं, बल्कि उसे उत्पादक जनशक्ति में बदलने की ठोस रणनीति पर काम कर रही है। बजट का केंद्रीय विचार ‘ह्यूमन कैपिटल’ यानि मानव पूंजी के अधिकतम उपयोग के जरिये प्रदेश को तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की विशाल युवा आबादी को तकनीक से लैस करके उन्हें ग्लोबल वर्कफोर्स का हिस्सा बनाना है। सरकार युवाओं को पारंपरिक शिक्षा की सीमाओं से बाहर निकालकर भविष्य की उन्नत तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने की दिशा में बड़े निवेश कर रही है।  ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 25 लाख युवाओं एवं छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रिएलिटी (एआर) और वर्चुअल रिएलिटी (वीआर) और एक्सटेंडेड रिएलिटी (ईआर) में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र और उद्योग के लिए आधुनिक तकनीकी कौशल विकसित करना और युवाओं को उन्नत एप्लीकेशन आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध करना है। डिग्री आधारित शिक्षा से आगे बढ़कर कौशल आधारित दक्षता विकसित करना है, जिससे कि प्रदेश का युवा वैश्विक कार्यबल का हिस्सा बन सके। लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में विश्वस्तरीय ‘यू हब’ की स्थापना कर स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की भी योजना है। डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में बजट के माध्यम से बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 5 गीगावाट क्षमता वाले 4 से 5 डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान किया गया है। वर्तमान में पूरे भारत की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.6 गीगावाट है, जबकि उत्तर प्रदेश इसे वैश्विक स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा को रोबोटिक्स हब के रूप में विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये के उत्तर प्रदेश रोबोटिक्स मिशन की शुरुआत की जा रही है। इससे प्रदेश में उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को गति मिलने की उम्मीद है। सरकार ने डेटा गवर्नेंस को भी विकास का आधार माना है। स्टेट डेटा अथॉरिटी की स्थापना कर विभिन्न विभागों के आंकड़ों में एकरूपता और रियल टाइम डेटा प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट डेटा सेंटर 2.0 का निर्माण प्रस्तावित है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनना है, जिसके लिए सटीक और विश्वसनीय डेटा को आधार बनाया जा रहा है। बजट में नारी शक्ति को आर्थिक शक्ति में बदलने पर भी विशेष बल दिया गया है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से लगभग 1 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं । इन समूहों और अन्य महिला उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करने के लिए सरकार देश और प्रदेश के प्रमुख स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट और बड़े बाजारों में शोरूम और डिस्प्ले सेंटर स्थापित करेगी । बड़े शहरों में लिए जाने वाली दुकानों और डिस्प्ले सेंटर का किराया पहले 3 साल तक प्रदेश सरकार वहन करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रथम चरण में प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एक मार्केट या शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाया जायेगा जहां महिला उद्यमियों के उत्पादों के विपणन की व्यवस्था होगी। इन दुकानों का संचालन शत-प्रतिशत महिलाओं के द्वारा किया जायेगा । यह बजट केवल वित्तीय प्रावधानों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनसंख्या को जनशक्ति में रूपांतरित करने की व्यापक विकास दृष्टि का खाका प्रस्तुत करता है।

सिविलियन ड्रोन क्षेत्र में भारत पिछड़ा, MP में क्रांति के बावजूद रुचि नहीं, ग्लोबल रैंक 13वीं

भोपाल  मध्यप्रदेश को ‘ड्रोन हब’ बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने ‘एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025’ लागू कर भारी-भरकम सब्सिडी के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के शीर्ष राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बेहद सुस्त है। जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ देश में टॉप पर है, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या महज 480 पर सिमटी हुई है। नीति में ‘बम्पर ऑफर’, पर रुझान कम राज्य सरकार ने अपनी नई पॉलिसी में निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाया है। नीति के तहत ड्रोन निर्माण के लिए 40% तक की कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए 2 करोड़ रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देशभर में 13वें स्थान पर पिछड़ गया है। यहां तक कि हरियाणा (2,179) और आंध्र प्रदेश (1,876) जैसे राज्य भी हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कोसों पीछे हम सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड हैं। इसमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 2% भी नहीं है। महाराष्ट्र: 8,210 (नंबर 1) तमिलनाडु: 5,878 (नंबर 2) तेलंगाना: 3,657 (नंबर 3) मध्य प्रदेश: 480 (नंबर 13) किसानों और युवाओं के लिए बड़े वादे, पर रजिस्ट्रेशन का ‘पेच’ सरकार का दावा है कि ड्रोन नीति से कृषि क्षेत्र में क्रांति आएगी और 8,000 नए रोजगार पैदा होंगे। ‘नमो ड्रोन दीदी’ और ‘सीखो-कमाओ योजना’ के जरिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और रिमोट पायलट लाइसेंस को लेकर जागरूकता की कमी के कारण लोग आधिकारिक पंजीकरण (UIN) कराने से कतरा रहे हैं। ड्रोन पॉलिसी 2025 की 3 बड़ी बातें: भारी सब्सिडी: नए निवेश पर 40% सब्सिडी और लीज रेंट पर 25% की छूट। पेटेंट में मदद: घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता। ट्रेनिंग इंसेंटिव: ड्रोन ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को 8,000 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड। वजन के आधार पर होता है ड्रोन का रजिस्ट्रेशन ‘ड्रोन नियम 2021’ के तहत भारत में ड्रोन का वर्गीकरण और पंजीकरण उनके वजन (Weight) के आधार पर किया जाता है। क्या अन्य प्रकार के ड्रोन भी रजिस्टर्ड होते हैं? इसके संबंध में जानकारी नीचे दी गई है: सैन्य ड्रोन (Military Drones): ड्रोन नियम 2021 स्पष्ट रूप से उन ड्रोन पर लागू नहीं होते जो भारत की नौसेना, थल सेना या वायु सेना के स्वामित्व में हैं या उनके द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इनके लिए सैन्य प्रोटोकॉल के तहत अलग व्यवस्था होती है। शोध और विकास (R&D): अनुसंधान, विकास और परीक्षण के उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले ड्रोन को ‘टाइप सर्टिफिकेट’, ‘विशिष्ट पहचान संख्या’ (UIN) और ‘रिमोट पायलट लाइसेंस’ की आवश्यकता से छूट दी गई है, बशर्ते वे निर्धारित ग्रीन जोन में संचालित हों। प्रतिबंधित वस्तुएं: ड्रोन नियमों के तहत हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार के खतरनाक सामान की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

जनगणना से विकास की योजना बनती है, सीएम ने इस प्रक्रिया की अहमियत पर जोर दिया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में जनगणना – 2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा किआदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इसके क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के लिए आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा और भारत सरकार की अपेक्षाओं एवं उद्देश्यों की सफल पूर्ति करेगा।राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसके आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज जब भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है, तब यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिल फैसला लिया है। देश में आखिरी बार 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मंजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई।  जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही विकसित होते हैं। इसलिए जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समयसीमा में पूर्ति करने का आव्हान किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्योहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन की अधिकारियों को दी बधाई  मुख्यमंत्री ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जी-रामजी की योजना क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने  खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। पहला चरण 1 मई से शुरू होगा  बता दें देश की जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसे हाउसलिस्टिंग (मकान सूचीकरण) और आवास जनगणना कहा जाता है, 1 मई 2026 से शुरू होगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। इस चरण में 30 दिनों की अवधि में घरों की स्थिति और सुविधाओं की गणना की जाएगी। इसके बाद जगणना का दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा।  

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 16,000 लोगों को मिलेगा रोजगार

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना और पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 800 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा है, जिसके माध्यम से राज्य में 16,000 लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही विभाग की पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो प्रदेश की स्थापित इकाइयों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाकर उनके संचालन और विस्तार में सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 800 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य  खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और बैंक ऋण के माध्यम से लघु, कुटीर उद्यमों की स्थापना करने में सहयोग प्रदान करना है। योजना के तहत विभाग वर्ष 2026-27 में 40 करोड़ रुपये के बैंक ऋण के माध्यम से 800 नई इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य तय किया है, जिसके माध्यम से लगभग 16,000 रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री रोजगार योजना विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को लघु उद्यम स्थापित करने के लिए बैंकों से सब्सिडी आधारित ऋण उपलब्ध करवाती है। साथ ही विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण समेत अन्य जरूरी सहयोग प्रदान करता है। इससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के साथ उनका पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 10 करोड़ रुपये का प्रावधान पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों को मजबूती प्रदान करने के लिए बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान की सुविधा प्रदान करती है। योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित उद्यम इकाइयों को वित्तीय बोझ से राहत देकर उनकी निरंतरता और विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम स्वरोजगार योजना और ‘एक जिला एक उत्पाद’  जैसी पहल से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना है। योगी सरकार के ये कदम प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ विकसित उत्तर प्रदेश @ 2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ग्रामीण बिजली आपूर्ति से कृषि, डेयरी, कुटीर उद्योग और स्वरोजगार को मिला बढ़ावा

लखनऊ.  वर्ष 2017 से पहले बिजली की किल्लत से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के गांव अब जगमगा रहे हैं। योगी सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण को विकास की बुनियाद बनाया और योजनाबद्ध तरीके से हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया है। घर-घर बिजली कनेक्शन सुनिश्चित किया जा चुका है। प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में बिजली क्षेत्र को 65,926 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।   दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पारेषण और वितरण नेटवर्क को मजबूत किया गया है। जर्जर लाइनों को बदला गया और नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके बाद ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ के जरिए लाखों परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए गए। इससे ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदलती दिख रही है। अब गांवों में न केवल घरेलू रोशनी बल्कि कृषि और लघु उद्योगों को भी निर्बाध बिजली मिल रही है। संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना के अंतर्गत गांवों में वितरण तंत्र को और सुदृढ़ किया जा रहा है। पुराने कंडक्टर बदले जा रहे हैं, लो टेंशन एबी केबल बिछाई जा रही हैं और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। स्मार्ट मीटरिंग को भी तेजी से लागू किया जा रहा है जिससे कि बिजली चोरी पर अंकुश लगे और आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर हो। इन कदमों से ग्रामीण क्षेत्रों में लो वोल्टेज की समस्या में कमी आई है और उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली मिल रही है। ग्रामीण विद्युतीकरण का सीधा लाभ खेती और स्वरोजगार के क्षेत्र में मिल रहा है। सिंचाई के लिए विद्युत आपूर्ति बेहतर होने से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है। डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, आटा चक्की, वेल्डिंग और अन्य छोटे व्यवसायों को निरंतर बिजली मिलने से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार देखा जा रहा है, क्योंकि विद्यालय और स्वास्थ्य केंद्रों को अब बिजली की कमी से जूझना नहीं पड़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कहा है कि सबका साथ सबका विकास की अवधारणा तभी साकार होगी जब गांव मजबूत होंगे। ग्रामीण उत्तर प्रदेश को ऊर्जा संपन्न बनाकर सरकार ने विकास की नई आधारशिला रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बिजली ढांचा प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल में और अधिक सशक्त करेगा। जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे निर्बाध बिजली वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में औसतन 20 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर औसतन 22 घंटे और जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। प्रदेश में एक अप्रैल, 2022 से वर्ष 2025-26 तक कुल 2,410 नए 33/11 केवी विद्युत् उपकेंद्रों का निर्माण एवं क्षमता वृद्धि की गई है। साथ ही 20,924 नए वितरण ट्रांसफार्मर्स की स्थापना और 85,684 ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि का कार्य किया गया है।

थिएटर बंद, लेकिन घर में छाई धुरंधर: पाकिस्तान में 16 रुपए में मिल रही पायरेटेड CD

इस्लामाबाद   रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर फिल्म धुरंधर पाकिस्तान में थिएट्रिकल रिलीज के दौरान बैन कर दी गई. हालांकि, लोगों ने फिल्म के ओटीटी पर आते ही बता दिया कि इस फिल्म का वो कितना इंतजार कर रहे थे. फिल्म नेटफ्लिक्स रिलीज हुई और पाकिस्टान में टॉप ट्रेंड करने लगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज के 12 दिनों के अंदर ही पाकिस्तान में इस फिल्म को 20 लाख से ज्यादा बार अवैध रूप से डाउनलोड किया गया. अब फिल्म को लेकर एक और खबर आ रही है. कराची की गलियों में आदित्य धर की इस फिल्म की पायरेटेड सीडी धड़ल्ले से बिक रही है. धुरंधर को भले ही पाकिस्तान और कुछ गल्फ देशों में सिनेमाघरों में रिलीज की इजाजत नहीं मिली, लेकिन फिल्म का क्रेज सीमाओं में बंधा नहीं. ओटीटी पर रिलीज के बाद यह स्पाई थ्रिलर अब पाकिस्तान के पायरेटेड बाजारों तक पहुंच चुकी है, जहां इसकी कॉपियां खुलेआम बेची जा रही हैं. न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक ने कराची के रेनबो सेंटर का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें दुकानदार खुलेआम इस फिल्म की पायरेटेड डीवीडी बेचते नजर आ रहे हैं. कराची के बाजार में ‘धुरंधर’ का जलवा यूट्यूबर कार्ल रॉक ने जो वीडियो शेयर किया है उस वीडियो में वह एक दुकानदार से बात करते नजर आ रहे हैं. वह कहते हैं- ‘पाकिस्तान में इंडियन फिल्म्स बैन हैं, लेकिन देखिए क्या मिला, ये नई फिल्म है हिंदुस्तान से.’ दुकानदार से उन्होंने बात की और उसने कहा कि ये सबसे नई फिल्म है. 16 रुपए में बिक रही पायरेटेड CD कार्ल ने रणवीर सिंह का जिक्र करते हुए बताया कि वे सिंधी हैं और उनके दादा-परदादा विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे. फिर उन्होंने दुकानदार से पूछा, ‘ये फिल्म कितने की है?’ दुकानदार ने जवाब दिया, ‘सिर्फ 50 पाकिस्तानी रुपये’, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 16 रुपये.’ कार्ल ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘बहुत सस्ता है!’ वायरल हो रहा ये वीडियो, लोग कर रहे ऐसी बात अब यह वीडियो वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर टिप्पणियां की हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘दोनों देशों के बीच इतनी नफरत क्यों?’, जबकि दूसरे ने कहा, ‘पाकिस्तान में ये फिल्म भारत से ज्यादा हिट रही लगती है’. कुछ ने लिखा कि सियासी तनाव के बावजूद आम लोगों के बीच फिल्मों का प्यार खत्म नहीं हुआ है. बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर का रिकॉर्ड आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने दुनियाभर में 1340 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया. महज 250-300 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का तमगा हासिल किया. रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने ‘पुष्पा 2’ को भी पीछे छोड़ दिया है. अब ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की तैयारी फिल्म के सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की रिलीज डेट 19 मार्च 2026 तय की गई है. यह फिल्म यश की पैन-इंडिया फिल्म ‘टॉक्सिक’ से सीधी टक्कर लेगी. ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों फिल्मों के बीच जबरदस्त क्लैश होने वाला है. बुक माय शो के आंकड़ों के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ में 1.02 लाख से ज्यादा लोग इंट्रेस्टेड हैं, जबकि ‘टॉक्सिक’ में यह आंकड़ा 3.61 लाख है . पाकिस्तान और गल्फ देशों में क्यों नहीं हुई रिलीज बता दें कि ‘धुरंधर’ को पाकिस्तान और गल्फ देशों में थिएट्रिकल रिलीज के वक्त बैन कर दिया गया था. वजह थी फिल्म में पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की सियासत, कंधार हाईजैक, 2001 संसद हमले और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों जैसी संवेदनशील घटनाओं को दिखाया गया है.

सस्ता MacBook आने वाला है! कम कीमत में मिलेगा Apple का दमदार लैपटॉप

नई दिल्ली Apple MacBook की कीमत देख बहुत से लोग इसे खरीद ही नहीं पाते और फिर मन में आता है कि काश मैकबुक की कीमत होती… अब लोगों की इस ख्वाहिश को कंपनी पूरा कर सकती है. एक बार फिर से एपल कंपनी का सस्ता मैकबुक चर्चा में है. पिछले लंबे समय से चर्चा है कि Apple उन यूजर्स के लिए सस्ते लैपटॉप को तैयार कर सकता है जो बिना ज्यादा कीमत चुकाए macOS को एक्सपीरियंस करना चाहते हैं. आने वाला MacBook हल्का, भरोसेमंद नोटबुक होने की उम्मीद है जो रोजाना के काम, ब्राउज़िंग, स्ट्रीमिंग और पढ़ाई की जरूरतों को बिना किसी दिक्कत के पूरा करेगा. कई रिपोर्ट्स फिर से सामने आई हैं जिनमें कहा गया है कि यह लंबे समय से चर्चा में रहा डिवाइस अब लॉन्च से ज्यादा दूर नहीं है और इसकी कीमत अभी के MacBook Air से कम हो सकती है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple एक MacBook बना रही है जिसे खास तौर पर लैपटॉप रेंज की शुरुआती कीमत कम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. पहले इस लैपटॉप के इस साल जनवरी में अनाउंस होने की उम्मीद थी लेकिन अब इसे मार्च या अप्रैल के आसपास लॉन्च किया जा सकता है. भारत में इतनी हो सकती है कीमत कीमत की बात करें तो इस डिवाइस को US में लगभग $599 (लगभग 54298 रुपए) होने की उम्मीद है, लेकिन इससे पहले कि आप बहुत ज्यादा इस मैकबुक से उम्मीद कर रहे हो तो यहां ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि टैक्स, इंपोर्ट ड्यूटी वगैरह जैसे कई फैक्टर्स की वजह से भारत में कीमत अक्सर US की तुलना में ज्यादा होती है. डिजिट की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में, डिवाइस की कीमत लगभग 60,000 रुपए या 65,000 रुपए हो सकती है. इस कीमत के साथ भी, यह भारत में सबसे सस्ता MacBook होगा, जिससे ज्यादा यूजर्स को Apple इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा.

गुरुकुल परंपरा एवं नैतिक शिक्षा के समन्वय पर बल: रूपनारायण सिन्हा

रायपुर. गुरुकुल परंपरा एवं नैतिक शिक्षा के समन्वय पर बल:  रूपनारायण सिन्हा आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों एवं शिष्टाचार का समावेश अत्यंत आवश्यक है। गुरुकुल परंपरा की मूल भावना को अपनाते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना समय की आवश्यकता है।उक्त विचार  रूपनारायण सिन्हा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा पीएम  प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला अखरा (पाटन), जिला दुर्ग के वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए गए।  सिन्हा ने कहा कि पीएम  विद्यालय की संकल्पना माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधायुक्त, गुणवत्तापूर्ण एवं समग्र शिक्षा प्रदान करना है। इस पहल के अंतर्गत शिक्षा के साथ-साथ संगीत, खेल एवं योग जैसी गतिविधियों को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है।  कार्यक्रम की अध्यक्षता जितेंद्र वर्मा द्वारा की गई। अतिथियों का शाला प्रबंधन समिति द्वारा पुष्पगुच्छ, शाल, फल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया गया। वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, योगासन एवं विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रभावी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, खेल एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल, ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह में जनप्रतिनिधिगण, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षकगण एवं अभिभावकगण उपस्थित रहे।

स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां पूरी, राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम में रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे

राज्य निर्वाचन आयोग का स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  रावत होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का 32वां स्थापना दिवस समारोह 16 फरवरी को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जायेगा। समारोह के मुख्य अतिथि भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ओ.पी. रावत होंगे।  रावत “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देंगे। पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त  आर परशुराम “स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौतियाँ” विषय पर उद्बोधन देंगे। दैनिक भास्कर, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष  नरेन्द्र कुमार सिंह “जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव” विषय पर और एडवोकेट  सिद्धार्थ सेठ स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक” विषय पर उद्बोधन देंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग  दीपक सिंह ने बताया है कि समारोह में आयोग के निर्वाचन साहित्य-ई बुक का विमोचन और प्रेक्षा मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया जायेगा। साथ ही स्थानीय निर्वाचन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किये जायेंगे।  

CJI सूर्यकांत ने RERA पर सुनाया फैसला, कहा—दागी बिल्डरों को फायदा देने वाला कानून खत्म होना चाहिए

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि सभी राज्यों के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के गठन पर पुनर्विचार करने का यह सही समय है क्योंकि यह संस्था दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों के लिए RERA बनाया गया था, वे ‘पूरी तरह से निराश और हताश’ हैं। पीठ ने जोर देकर कहा कि अगर इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को RERA के कार्यालय को अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए ये टिप्पणियां कीं। हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य द्वारा दायर याचिका पर पीठ ने नोटिस जारी किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जो राज्य के RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से संबंधित था। उच्च न्यायालय ने इससे पहले RERA कार्यालय के स्थानांतरण से संबंधित जून 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया। उच्चतम न्यायालय ने 30 दिसंबर के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी है। CJI भड़के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘दागी बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा यह संस्था (RERA) कुछ नहीं कर रही है। बेहतर होगा कि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है …अब समय आ गया है कि सभी राज्य इस प्राधिकरण के गठन पर ही पुनर्विचार करें।’ राज्य सरकार ने अधिवक्ता सुगंधा आनंद के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि हिमाचल प्रदेश RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय शिमला शहर में भीड़भाड़ कम करने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों पर आधारित था। प्रतिवादी की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि प्राधिकरण जिन परियोजनाओं से संबंधित मामलों को देखता है, उनमें से 90 प्रतिशत शिमला, सोलन, परवानू और सिरमौर में हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि RERA के समक्ष लंबित शिकायतों में से लगभग 92 प्रतिशत इन्हीं जिलों से हैं, और धर्मशाला में केवल 20 परियोजनाएं हैं।

मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया।         मुख्यमंत्री  साय ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को को इस खास आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘रेडियो और एआई’ अत्यंत सामयिक और उपयोगी है। सूचना क्रांति के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक जनोपयोगी बनाने पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसमें रेडियो की भूमिका शुरू से ही अत्यंत प्रभावी रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आकाशवाणी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार प्रसारक है। निजी चैनलों के बीच तेज़ी से खबरें देने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद आकाशवाणी ने अपनी विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना परंपरा को बनाए रखा है।              मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रेडियो से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब दूरस्थ गांवों तक किसी अन्य माध्यम की पहुंच नहीं थी, तब रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम था। किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के छह स्टेशन संचालित हैं तथा रायपुर से विविध भारती सेवा प्रसारित हो रही है।    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रेडियो और एआई’ संचार के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। एआई की मदद से कंटेंट को अधिक प्रभावी, सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है। आपातकालीन सूचनाएं, मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक तेजी और सटीकता से प्रसारित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी भाषाओं में प्रसारण से स्थानीय जुड़ाव मजबूत हुआ है और श्रोताओं की रुचि में वृद्धि हुई है।  अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को और अधिक सशक्त बनाएंगी और विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प सभी के सहयोग से अवश्य साकार होगा।            कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन सु हज़्ज़ाज़ मा’अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सु अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सु अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा।              इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक  राजीव कुमार जैन, उप महानिदेशक  व्ही. राजेश्वर, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर, फरहान अख्तर पहली विदेशी फिल्म में संगीत के जादूगर के रोल में

मुंबई बॉलीवुड के सबसे टैलेंटिड आर्टिस्ट के तौर पर जानें जाने वाले फरहान अख्तर इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में से एक के तौर पर मशहूर हैं. फरहान एक एक्टर, डायरेक्टर, म्यूजिशियन, राइटर और फिल्म प्रोड्यूसर हैं, जो उन्हें इंडस्ट्री के बाकी सितारों में काफी अलग बनाता है. फरहान एक एक्टर, डायरेक्टर, म्यूजिशियन, राइटर और फिल्म प्रोड्यूसर हैं, जो उन्हें इंडस्ट्री के बाकी सितारों में काफी अलग बनाता है. फरहान बीते कुछ दिनों से अपनी फिल्म डॉन 3 को लेकर चर्चा में है. उनकी प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल और एक्टर रणवीर सिंह के बीच चल रही तकरार के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. फरहान बीते कुछ दिनों से अपनी फिल्म डॉन 3 को लेकर चर्चा में है. उनकी प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल और एक्टर रणवीर सिंह के बीच चल रही तकरार के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. मीडियो रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर बॉलीवुड में शानदार पारी खेलने के बाद अब अपना हॉलीवुड डेब्यू करने के लिए तैयार हैं. मीडियो रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर बॉलीवुड में शानदार पारी खेलने के बाद अब अपना हॉलीवुड डेब्यू करने के लिए तैयार हैं. फरहान ने ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर सैम मेंडेस के साथ हाथ मिलाया है. एक्टर सैम की अगली फिल्म ‘द बीटल्स: ए फोर फिल्म सिनेमैटिक इवेंट’ में म्यूजिक माइस्त्रो पंडित रवि शंकर के किरदार में नजर आ सकते हैं. एक्टर सैम की अगली फिल्म ‘द बीटल्स: ए फोर फिल्म सिनेमैटिक इवेंट’ में म्यूजिक माइस्त्रो पंडित रवि शंकर के किरदार में नजर आ सकते हैं. ये फिल्म अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े और फेमस बैड्स में से एक द बीटल्स की जर्नी को अलग-अलग पर्सपेक्टिव से दिखाएगी. फिल्म में द बीटल्स के इंडियन क्लासिकल म्यूजिक को लेकर प्यार को दिखाया जाएगा. ये फिल्म अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े और फेमस बैड्स में से एक द बीटल्स की जर्नी को अलग-अलग पर्सपेक्टिव से दिखाएगी. फिल्म में द बीटल्स के इंडियन क्लासिकल म्यूजिक को लेकर प्यार को दिखाया जाएगा. सितार वादक रवि शंकर से द बीटल्स म्यूजिक बैंड के जॉर्ज हैरिसन काफी प्रभावित थे. 1960 के दशक में द बीटल्स म्यूजिक बैंड ने इंडियन क्लासिकल म्यूजिक को अपने गानों में शामिल किया था. सितार वादक रवि शंकर से द बीटल्स म्यूजिक बैंड के जॉर्ज हैरिसन काफी प्रभावित थे. 1960 के दशक में द बीटल्स म्यूजिक बैंड ने इंडियन क्लासिकल म्यूजिक को अपने गानों में शामिल किया था. इसकी झलक बीटल्स के कई गानों में देखने को मिलती है. ये वो दौर था, जब इंडियन म्यूजिक और हॉलीवुड सॉन्ग्स के इस फ्यूजन को दुनियाभर में खूब पसंद किया गया था. इसकी झलक बीटल्स के कई गानों में देखने को मिलती है. ये वो दौर था, जब इंडियन म्यूजिक और हॉलीवुड सॉन्ग्स के इस फ्यूजन को दुनियाभर में खूब पसंद किया गया था.

आईपीएल में RR की कप्तानी का बड़ा बदलाव, इस खिलाड़ी पर हो सकती है निगाहें

जयपुर  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स (RR) ने बड़ा दांव खेल दिया है. 24 साल के रियान पराग को टीम का नया कप्तान बनाए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब लंबे समय तक टीम की कमान संभालने वाले संजू सैमसन का ट्रेड होकर चेन्नई सुपर किंग्स (CSK)  में जाना लगभग तय हो गया है. इस ट्रेड के बदले राजस्थान को दो अनुभवी ऑलराउंडर- रवींद्र जडेजा और सैम करन मिले हैं, जिससे टीम का संतुलन तो मजबूत हुआ है, लेकिन नेतृत्व में बदलाव अनिवार्य हो गया. पहले भी संभाल चुके हैं कमान रियान पराग के लिए कप्तानी बिल्कुल नई जिम्मेदारी नहीं है. पिछले सीजन में जब संजू सैमसन चोट के कारण आठ मैच नहीं खेल पाए थे, तब पराग ने टीम की अगुवाई की थी. उन आठ मुकाबलों में राजस्थान को सिर्फ दो जीत मिलीं, लेकिन व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से पराग प्रभावशाली रहे. उन्होंने 38.57 की औसत से रन बनाए और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ Eden Gardens में 95 रनों की करियर-बेस्ट पारी खेलकर अपनी नेतृत्व क्षमता और बल्लेबाजी कौशल दोनों का परिचय दिया. इंटरव्यू के बाद हुआ फैसला! सूत्रों के मुताबिक, हेड कोच कुमार संगकारा ने कप्तानी के लिए कुछ खिलाड़ियों का इंटरव्यू लिया था, जिनमें पराग सबसे आगे रहे. टीम मैनेजमेंट युवा नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहता था और पराग की फ्रेंचाइजी के साथ लंबी प्रतिबद्धता ने भी उनके पक्ष में काम किया. यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब टीम के सपोर्ट स्टाफ में भी हलचल रही. 2025 सीजन में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा- 14 में से सिर्फ चार मैच जीतकर राजस्थान की टीम अंकतालिका में नीचे से दूसरे स्थान पर रही. इसी सीजन के बाद राहुल द्रविड़ ने फ्रेंचाइजी से अलग होने का फैसला किया. अब नए कप्तान और नए कोचिंग ढांचे के साथ टीम नई शुरुआत की ओर देख रही है. 2019 से लगातार राजस्थान के साथ रियान पराग ने 2019 में आईपीएल डेब्यू किया था और तब से वे लगातार राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा हैं. पिछले दो सीजन में उन्हें सभी मैच खेलने का मौका मिला. 2024 का सीजन उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ रहा, जब उन्होंने 573 रन बनाए. इस दौरान एवरेज 52.09 और स्ट्राइक रेट 149.21 का रहा. यह प्रदर्शन उन्हें टीम का बल्लेबाजी स्तंभ साबित करता है. अब तक वे राजस्थान के लिए 84 मैच खेल चुके हैं, जिनमें 1566 रन और 7 विकेट उनके नाम हैं. आंकड़े बताते हैं कि पराग सिर्फ भविष्य की परियोजना नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरत भी हैं. नई दिशा, नई उम्मीद संजू सैमसन ने 11 सीजन तक राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया और पिछले सीजन के बाद बदलाव की इच्छा भी जताई थी. ऐसे में फ्रेंचाइजी ने युवा चेहरे पर दांव लगाकर दीर्घकालिक रणनीति अपनाई है. राजस्थान रॉयल्स (25 खिलाड़ी): यशस्वी जायसवाल, रियान पराग, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, शुभम दुबे, युद्धवीर सिंह, संदीप शर्मा, तुषार देशपांडे, शिमरॉन हेटमायर, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, जोफ्रा आर्चर, क्वेना मफाका, नांद्रे बर्गर, रवींद्र जडेजा (चेन्नई से ट्रेड), सैम करन (चेन्नई से ट्रेड), डोनोवन फरेरा (दिल्ली से ट्रेड), रवि बिश्नोई, सुशांत मिश्रा, यश राज पुंजा, विघ्नेश पुथुर, रवि सिंह, अमन राव, ब्रिजेश शर्मा, एडम मिल्ने और कुलदीप सेन.  

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