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मुरैना के डायल 112 हीरोज: संवेदनशीलता का उदाहरण, घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर मिला उपचार

भोपाल डायल-112 सेवा केवल आपराधिक या आपात पुलिस सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आमजन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुरैना जिले में डायल-112 जवानों की संवेदनशील कार्यवाही से घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर उपचार मिल सका। 13 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल में सूचना प्राप्त हुई कि मुरैना जिले के थाना नूराबाद क्षेत्र के सीहोरा गाँव में एक मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया है। सूचना मिलते ही नूराबाद थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  रवि कुमार एवं पायलट  अंशुल शर्मा ने देखा कि वन क्षेत्र से भटककर आया एक मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया था। स्थिति को देखते हुए डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घायल मोर को सावधानीपूर्वक सुरक्षित किया और एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं संरक्षण के लिए वन केंद्र मुरैना पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया। वन विभाग द्वारा घायल मोर का उपचार किया जा रहा है। डायल-112 टीम की संवेदनशील और जिम्मेदार कार्रवाई से राष्ट्रीय पक्षी को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात स्थितियों में केवल नागरिकों ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भी समान रूप से सजग और प्रतिबद्ध है।  

‘नो-फॉल्ट’ कंपेंसेशन पॉलिसी से कोविड पीड़ितों को मुआवजा, क्या यह न्याय का कदम या नई जटिलता?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें केंद्र सरकार को कोविड-19 वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स या इससे होने वाली मौतों के लिए ‘नो-फॉल्ट’ कंपेंसेशन पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया गया है. इस फैसले के अनुसार, प्रभावित परिवारों को यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि मौत या कोई गंभीर इफेक्ट्स के लिए राज्य सरकार किसी भी तरह से जिम्मेदार है. राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान के दौरान होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए राहत प्रदान करे. यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है, जहां वैक्सीन लेने के बाद मौत या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का दावा किया गया था. यह निर्णय न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। हालांकि इस फैसले को लागू करने में बहुत सी व्यावहारिक चुनौतियां हैं. क्योंकि इसके कार्यान्वयन में इतनी तरह की जटिलताएं हैं जिसका निदान करना असंभव हो सकता है.पर एक देश और समाज के रूप में, हमें इस फैसले की गहराई को समझना होगा. यह फैसला अव्यावहारिक लग सकता है लेकिन लंबे समय में महत्वपूर्ण साबित होगा. फैसले की पृष्ठभूमि में कोविड महामारी के दौरान भारत में चलाया गया दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान है. करोड़ों लोगों को वैक्सीन दी गई, जिसने संक्रमण दर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, सरकारी आंकड़ों से भी पता चलता है कि कुछ मामलों में वैक्सीन के बाद मौतें हुईं  हैं. यह बात तो वैक्सीन बनाने वालों ने भी स्वीकार किया था कि कुछ मामलों में साइड इफेक्ट संभव है. दुनिया की कोई भी वैक्सीन अपने आप को हंड्रेड परसेंट सुरक्षित होने का दावा नहीं कर सकती हैं. पर दुनिया भर में तरह तरह के वैक्सीन आम जनता के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए लगाईं जाती हैं. शायद यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार को आधार बनाते हुए कहा कि जब वैक्सीनेशन राज्य-प्रायोजित कार्यक्रम है, तो प्रभावितों को अदालतों में लंबी लड़ाई लड़ने के बजाय सीधा मुआवजा मिलना चाहिए. ‘नो-फॉल्ट’ का मतलब है कि बिना दोष साबित किए राहत, जो कई विकसित देशों में पहले से लागू है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह भारत जैसे विकासशील देश में व्यावहारिक है? सबसे बड़ी चुनौती कार्यान्वयन की है. वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को साबित करना वैज्ञानिक रूप से जटिल है. कोविड वैक्सीन जैसे कोविशील्ड या कोवैक्सिन के बाद देश में बहुत सी मौतें हुईं हैं, लेकिन क्या हर दावे की जांच कैसे हो सकती है? अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पॉलिसी बनाने का आदेश दिया है, लेकिन सरकार कोई ऐसी सर्वसुलभ प्रक्रिया बना पाएगी . इसमें संदेह है. उदाहरण के लिए, अमेरिका या यूके में ऐसी पॉलिसी है, लेकिन उनके पास मजबूत स्वास्थ्य डेटा सिस्टम हैं। भारत में ग्रामीण इलाकों को छोड़िए शहरों में भी मेडिकल रिकॉर्ड इस तरह के नहीं हैं कि अदालत में यह साबित किया जा सके कि अमुक व्यक्ति की मौत कोविड के चलते हुई है. ग्रामीण इलाकों में तो मेडिकल रिकॉर्ड माशा अल्ला है. अब सवाल उठता है कि क्या वैक्सीन और मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए विशेषज्ञ पैनल बनाए जाएंगे? अगर हां, तो क्या सरकार के पास इतने प्रशासनिक संसाधन है कि वह इसे क्रियान्वित कर सकेगी? स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही AEFI (एडवर्स इफेक्ट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन) की निगरानी करता है, लेकिन मौतों के मामलों में जांच लंबी चलती है. नई पॉलिसी से दावों की बाढ़ आ सकती है, जिसमें वास्तविक और फर्जी दोनों शामिल होंगे.देश में दलालों के रैकेट सक्रिय हो जाएगा जो सामान्य मौतों को भी कोविड से हुई मौत साबित करना शुरू कर देंगे.   दुरुपयोग की आशंका से सिस्टम चरमरा सकता है, और वित्तीय बोझ जो बढ़ेगा वो अलग से है। इसके अलावा, यह फैसला वैक्सीन उत्पादकों की जिम्मेदारी को भी प्रभावित कर सकता है. वर्तमान में, वैक्सीन कंपनियां इंडेम्निटी क्लॉज के तहत सुरक्षित हैं, यानी वे सीधे जिम्मेदार नहीं. अगर राज्य मुआवजा देगा, तो क्या यह कंपनियों को और लापरवाह बना देगा? वैश्विक स्तर पर देखें तो WHO की COVAX योजना में भी ऐसी प्रावधान हैं, लेकिन भारत जैसे देश में जहां वैक्सीन आयात और उत्पादन दोनों होते हैं, यह जटिल हो जाता है। इन सब के बावजूद इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि एक लोकतांत्रिक समाज में, राज्य की जिम्मेदारी सिर्फ वैक्सीन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसके जोखिमों को भी संभालना है. महामारी ने दिखाया कि वैक्सीनेशन सामूहिक प्रयास था, लेकिन कुछ लोगों ने व्यक्तिगत कीमत चुकाई. ऐसे में, ‘नो-फॉल्ट’ पॉलिसी न्याय सुनिश्चित करती है. यह अनुच्छेद 21 को मजबूत करती है, जो जीवन के अधिकार को सिर्फ नकारात्मक (हानि न करने) नहीं, बल्कि सकारात्मक (रक्षा करने) रूप में देखता है। अदालत ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य संरक्षण का दायित्व निभाए, जो सार्वजनिक विश्वास बढ़ाएगा. कल्पना कीजिए, अगर भविष्य में कोई नई महामारी आई, तो लोग वैक्सीन से डरेंगे नहीं क्योंकि वे जानेंगे कि दुर्घटना में सहायता मिलेगी. यह सामाजिक न्याय का प्रतीक है, जहां गरीब परिवारों को अदालतों की लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी. कई मामलों में, जैसे दो युवतियों की मौत पर याचिका, परिवारों ने संघर्ष किया. यह फैसला उन्हें राहत देगा और समाज को संदेश देगा कि राज्य अपने नागरिकों के साथ खड़ा है।

राजगढ़ में गैस एजेंसियों पर कलेक्टर का नया आदेश, ज्यादा पैसे लेने पर होगी सख्त कार्रवाई

 राजगढ़  कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जिले में आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं, विशेष रूप से एलपीजी गैस की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। गैस वितरकों के लिए स्टॉक और दरों का प्रदर्शन अनिवार्य जारी आदेश के अनुसार राजगढ़ जिले में संचालित सभी एलपीजी गैस वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने गैस गोदाम/एजेंसी परिसर के बाहर प्रतिदिन उपलब्ध स्टॉक एवं दरों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करेंगे। इसके साथ ही गैस वितरण से संबंधित वाहनों पर भी स्टिकर एवं बैनर लगाकर सही जानकारी का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे। शिकायत निवारण और मूल्य नियंत्रण के निर्देश आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक गैस वितरक अपने उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी कर उसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करेंगे तथा प्राप्त शिकायतों की विधिवत पंजी संधारित करेंगे। साथ ही निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर गैस रिफिलिंग नहीं की जाएगी। साप्ताहिक रिपोर्ट और वैधानिक कार्रवाई कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि सभी गैस एजेंसियां प्रत्येक सप्ताह वितरण से संबंधित जानकारी संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उपलब्ध कराएंगी। नियमों का पालन नहीं करने पर “द्रवित पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश 2000” के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी पर रोक इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति, संस्था अथवा समूह द्वारा सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक अथवा गलत जानकारी पोस्ट अथवा शेयर नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 सहित अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

तेलंगाना, केरल और कर्नाटक की तर्ज पर विश्वस्तरीय नवाचार केंद्र के रूप में होगा विकास

लखनऊ योगी सरकार राज्य को नवाचार और स्टार्टअप का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में बजट 2026-27 के माध्यम से लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में यू-हब स्थापित करने की घोषणा की गई है। योगी सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ तकनीक आधारित उद्यमों को नई गति प्रदान करने का काम करेगी। इस हब को देश के अग्रणी नवाचार केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। तेलंगाना, ओडिशा, केरल और कर्नाटक में स्थापित नवाचार केंद्र की तरह ही इस यू-हब को विश्वस्तरीय नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यू-हब का उद्देश्य युवाओं के नवाचार और नए विचारों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। इसके माध्यम से स्टार्टअप और उद्यमियों को अपने आइडिया को व्यवसाय में बदलने के लिए जरूरी संसाधन, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इससे प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार की योजना के अनुसार यह हब प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप को शुरुआती स्तर से आगे बढ़ने तक हर चरण में सहयोग मिलेगा। यहां इन्क्यूबेशन, एक्सेलेरेशन, अनुसंधान, विकास और सहयोग कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही स्टार्टअप को विशेषज्ञों की मेंटोरशिप, निवेशकों से जुड़ने के अवसर और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  विशेषज्ञों का मानना है कि यू-हब की स्थापना से उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सूचना प्रौद्योगिकी, फिनटेक, हेल्थटेक और अन्य तकनीक आधारित क्षेत्रों में नए स्टार्टअप स्थापित होने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही युवाओं को पारंपरिक नौकरी की तलाश के बजाय उद्यमिता की ओर बढ़ने का अवसर मिलेगा। बजट में इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी और तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार को गति मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यू-हब के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नई कंपनियां स्थापित होंगी और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। आने वाले समय में यू-हब उत्तर प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ ही उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख स्टार्टअप मामलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने मिडल ईस्ट में 2500 नौसैनिक और युद्धपोत तैनात करने का लिया फैसला

दुबई अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में 2,500 मरीन (नौसैनिक) और एक बख्तरबंद नौसैनिक युद्धपोत भेजने का आदेश दिया है. ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद इस इलाके में अमेरिकी सेना की यह बड़ी तैनाती है। इस घोषणा के कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी फोर्स ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ढांचे को ‘खत्म’ कर दिया है और चेतावनी दी कि अगला निशाना द्वीप का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है. खार्ग द्वीप तेल सप्लाई का मुख्य टर्मिनल है जो ईरान के तेल एक्सपोर्ट को हैंडल करता है. एक दिन पहले, ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के हमले से बदले की कार्रवाई का एक नया स्तर शुरू होगा। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि युद्ध तब खत्म होगा “जब मैं इसे अपनी हड्डियों में महसूस करूंगा.” वह विरोधियों द्वारा इस्लामिक सरकार को गिराने की संभावना को लेकर भी अधिक सावधान थे। ट्रंप ने ईरान के अर्धसैनिक बल बसीज का हवाला देते हुए कहा, “इसलिए मुझे सचमुच लगता है कि जिन लोगों के पास हथियार नहीं हैं, उनके लिए यह एक बड़ी बाधा है.” बसीज बल ने हाल के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। मरीन और युद्धपोत अमेरिकी सेना में शामिल होंगे अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS त्रिपोली को मिडिल ईस्ट जाने का ऑर्डर दिया गया है. उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर संवेदनशील सैन्य योजनाएं पर बात करने के लिए एसोसिएटेड प्रेस से बात की। मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स जल-थलीय लैंडिंग कर सकती हैं, लेकिन वे दूतावास की सुरक्षा बढ़ाने, आम लोगों को निकालने और आपदा राहत में भी विशेषज्ञता प्राप्त करती हैं. बड़ी सैन्य तैनाती का मतलब यह नहीं है कि कोई ग्राउंड ऑपरेशन जल्द ही होने वाला है या होगा. नए मरीन की तैनाती के बारे में सबसे पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया था। अमेरिकी सेना द्वारा जारी तस्वीर के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट, साथ ही यूएसएस त्रिपोली और मरीन को ले जाने वाले दूसरे एम्फीबियस असॉल्ट शिप जापान में हैं और कई दिनों से पैसिफिक ओशन में हैं. त्रिपोली को कमर्शियल सैटेलाइट ने ताइवान के पास अकेले चलते हुए देखा, इसे ईरान के जलक्षेत्र तक पहुंचने में एक हफ्ते से ज्यादा समय लग सकता है। इस हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिकी नेवी के 12 जहाज थे, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और आठ डिस्ट्रॉयर शामिल थे, जो अरब सागर में काम कर रहे थे. अगर त्रिपोली इस बेड़े में शामिल हो जाता है, तो यह इस इलाके में लिंकन के बाद दूसरा सबसे बड़ा जहाज होगा। हालांकि मिडिल ईस्ट में जमीन पर मौजूद यूएस सर्विस मेंबर्स की कुल संख्या साफ नहीं है, लेकिन कतर में स्थित अल-उदीद एयर बेस, जो इस इलाके के सबसे बड़े एयर बेस में से एक है, में आम तौर पर लगभग 8,000 अमेरिकी सैनिक रहते हैं।

आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवार के बनाए गए कार्ड

लखनऊ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत छूटे पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड का लाभ देने के लिए योगी सरकार प्रदेश भर में विशेष अभियान चला जा रही है। अभियान की शुरुआत बीते साल 25 नवंबर को हुई। यह 25 दिसंबर, 2025 तक चला। इस दौरान 5 लाख 52 हजार से अधिक कार्ड बनाए गए। अभियान की सफलता को देखते हुए इस साल 15 जनवरी से दोबारा विशेष अभियान शुरू किया गया, जो वर्तमान में चल रहा है। विशेष अभियान की अवधि में अब तक 17 लाख 94 हजार से अधिक कार्ड बनाए जा चुके हैं। अभियान के दौरान विशेष रूप से आशा कार्यकताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के साथ उनके परिवार के कार्ड बनाए जा रहे हैं। अभियान के दौरान सबसे अधिक बरेली में कार्ड बनाए गए। इससे बरेली कार्ड बनाने में पूरे प्रदेश में पहले, जौनपुर दूसरे और आगरा तीसरे स्थान पर हैं।   70 वर्ष या अधिक आयु के करीब 25 लाख 70 हजार बुजुर्गों के कार्ड बनाए गए   साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बनाने वाला राज्य बन चुका है। योजना के तहत प्रदेश में अब तक लगभग 5.64 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित वय वंदना योजना के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के करीब 25 लाख 70 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।  उन्होंने बताया कि योगी सरकार वंचित पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ने के लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान चला जा रही है। यह अभियान पहले 25 नवंबर से 25 दिसंबर, 2025 तक संचालित किया गया। अभियान की सफलता को देखते हुए इसे इस साल 15 जनवरी से 15 अप्रैल तक विस्तारित किया गया है। अभियान के तहत 12 मार्च तक 17 लाख 94 हजार से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। अभियान को स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से संचालित किया जा रहा है। ग्राम स्तर पर स्वयंसेवकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक पहुंच बनाकर उनका सत्यापन किया गया और मौके पर ही आयुष्मान कार्ड बनाए गए। अभियान के दौरान सबसे अधिक बरेली ने 1,12,855 कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह जौनपुर 83,042 कार्ड बनाकर दूसरे, आगरा 76,702 कार्ड बनाकर तीसरे स्थान पर है जबकि प्रयागराज 74,252 कार्ड बनाकर चौथे और आजमगढ़ 70,266 कार्ड बनाकर पांचवे स्थान पर है।  1.51 लाख आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवार के बनाए गए कार्ड साचीज की एसीईओ डॉ. पूजा यादव ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आंगनबाड़ी सहायिकाओं तथा उनके परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 4.28 लाख आशा कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य योजना के दायरे में आते हैं। इनमें से 12 मार्च तक करीब 3.24 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। अभी लगभग 1.03 लाख लोगों के कार्ड बनना शेष है। इस दौरान सबसे अधिक कुशीनगर में 6,620 कार्ड बनाए गए। इसी प्रकार लगभग 2.17 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और उनके परिवारों में से 1.53 लाख के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 64 हजार लाभार्थियों के कार्ड बनने बाकी हैं। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर में 3,176 कार्ड बनाए गए। वहीं 2.32 लाख आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों में से लगभग 1.51 लाख लोगों के कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जबकि करीब 81 हजार लोगों के कार्ड बनना अभी शेष है। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर में 3,077 कार्ड बनाए गए। वहीं जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित निर्धन परिवार के सदस्यों का भी आयुष्मान कार्ड बनाया गया। इसमें सबसे अधिक वाराणसी में कार्ड बनाए गए। इसके बाद हापुड़, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में कार्ड बनाए गए।

यात्रियों को मिलेगी राहत: भोपाल रेल रूट की सुरक्षा बढ़ाने और देरी रोकने के लिए करोड़ों का टेंडर

भोपाल नई रेलवे लाइन परियोजना के तहत पश्चिम मध्य रेलवे ने एक अहम कदम उठाते हुए करीब 4 करोड़ 24 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों का संचालन और अधिक सुरक्षित, तेज और सुचारु हो सकेगा। आधुनिक तकनीक वाले उपकरण लगने से बिजली आपूर्ति से जुड़ी खराबियों का तुरंत पता लगाया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों की देरी कम होगी और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद रेल सेवा मिल सकेगी। हाई-टेक निगरानी और आटोमेटिक फाल्ट लोकेटर सिस्टम पश्चिम मध्य रेलवे के निर्माण विभाग के अनुसार यह निविदा आरआरएम-बीपीएल नई ब्रॉडगेज लाइन परियोजना के तहत जारी की गई है। इसके अंतर्गत भोपाल और कोटा मंडल के आरआरएम-बीपीएल सेक्शन में रेलवे के 2×25 केवी एसी ट्रैक्शन सिस्टम से जुड़े उपकरण लगाए जाएंगे। परियोजना के तहत एसपी, एसएसपी और टीएसएस स्टेशनों पर आटोमेटिक फाल्ट लोकेटर की आपूर्ति, इंस्टालेशन, टेस्टिंग और उसे चालू करने का कार्य किया जाएगा। यह सिस्टम विद्युत आपूर्ति में आने वाली खराबी का तुरंत पता लगाने में मदद करेगा। 12 महीने में पूरा होगा काम, यात्रियों को मिलेगा लाभ इस काम की अनुमानित लागत करीब 4.24 करोड़ रुपये रखी गई है और इसे 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद रेलवे की विद्युत व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और ट्रेनों के संचालन में तकनीकी बाधाएं कम होंगी। इससे भोपाल सहित इस रूट से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को सुरक्षित, समयबद्ध और बेहतर रेल सेवा का लाभ मिलेगा। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल  

धमाकों से परेशान लीजा रे ने कहा, ‘दुबई में इंतजार करना बहुत मुश्किल हो रहा है’

मुंबई मिडल ईस्ट इन दिनों बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद, पूरे मिडल ईस्ट में जंग छिड़ी हुई है. हर तरफ सिर्फ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है. दुबई में भी धमाके हो रहे हैं, जिस बीच कई सेलेब्स फंसे हुए थे. उनमें से एक बॉलीवुड एक्ट्रेस लीजा रे भी हैं, जिनका दुबई में अपना घर है. एक्ट्रेस वहां अपने पूरे परिवार के साथ रहती हैं. ऐसे में उन्हें वहां के माहौल से चिंता हो रही है।  मिडल ईस्ट टेंशन पर बोलीं लीजा रे लीजा रे ने इंस्टाग्राम पर दुबई में चल रहे हालातों पर एक कविता लिखी है. एक्ट्रेस का कहना है कि उनके लिए ये सबकुछ देखना काफी मुश्किल है, भले ही वहां की सुरक्षा या सरकार अच्छी हो. लीजा लिखती हैं, ‘हमारे दूसरे घर दुबई में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखना बहुत मुश्किल हो रहा है. हां, मुझे पता है कि यूएई के लोग अभी भी काफी सुरक्षित हैं और वहां की सरकार बहुत अच्छी है. ये बात मुझे अच्छे से मालूम है. लेकिन, वो अनिश्चितता. दोस्तों के बीच आ रहे मैसेज. सबके साथ-साथ सांस थामकर इंतजार करना।  ‘ये कविता मैंने अचानक लिखी थी, बिना कोई बदलाव किए आज सुबह ही सबके लिए दी है — हर उस इंसान के लिए जो कहीं भी अस्थिरता के बीच जी रहा है. मेरे पति लेबनान में बड़े हुए हैं, जहां उनके सिर के ऊपर मिसाइलें चलती रहती थीं. ये कविता उनके हौसले की, उनकी फैमिली की हिम्मत की, और दुनिया भर की उन सारी फैमिलियों की तरफ से है — जिनके लिए नॉर्मल जिंदगी में सायरन की आवाज हमेशा शामिल रही है।  मिडल ईस्ट में टेंशन के चलते कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेज जैसे सोनल चौहान, ईशा गुप्ता, लारा दत्ता भी अपनी बात सामने रख चुकी हैं. लारा अपनी बेटी के साथ दुबई में अकेली थीं, जब वहां धमाकों का शोर सुनाई दे रहा था. ये पल उनके लिए काफी डरावना और इमोशन्स से भरा था. हालांकि अब लारा दत्ता समेत कई सेलेब्स वापस इंडिया आ चुके हैं। 

कटनी में गरजे सीएम मोहन यादव: बोले- देश संकट में था तो तिरंगा आगे था, कांग्रेस झूठ बोलती रही

कटनी  बरही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए किसानों के लिए कृषि महोत्सव आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों ने प्रदेश के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। साथ ही उन्होंने बताया कि आवास योजनाओं के लिए फिर से सर्वे कराया जा रहा है और जल्द ही जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी की जाएगी। भव्य आभार रैली मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शनिवार को कटनी जिले के बरही में भव्य आभार रैली के माध्यम से स्वागत किया गया। बड़ा तालाब से विजयनाथ धाम मंदिर के मेला प्रांगण तक करीब एक किलोमीटर लंबी रैली निकाली गई। बरही के मुख्य बाजार मार्ग से रथ में निकली इस रैली के दौरान लोगों ने पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। रैली के दौरान मुख्यमंत्री के साथ रथ में खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा, विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक और जिला भाजपा अध्यक्ष दीपक टंडन सोनी भी मौजूद रहे। किसानों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।  

सीएम ने कहा, जिन लोगों ने जनता का विश्वास खो दिया, वे भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर जता रहे अविश्वास

कैथल/लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता जिन लोगों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है, जिन्होंने जनता का विश्वास खो दिया, वे मुकाबला नहीं कर पाने की स्थिति में अफवाह-अराजकता के जरिए अव्यवस्था फैला रहे हैं। ऐसे में हमें मिलकर कार्य करना है और अव्यवस्था व अराजकता को नहीं फैलने देना है। हमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में मजबूती से कार्य करना है, क्योंकि देश सुरक्षित तो सनातन सुरक्षित और सुनातन सुरक्षित तो देश सुरक्षित होगा। दोनों को अलग करके नहीं रखा जा सकता। मुख्यमंत्री ने दुनिया के वर्तमान हालात का जिक्र करते हुए कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध चल रहा है। इससे दुनिया में आर्थिक अराजकता होगी, लेकिन भारत किसानों के पुरुषार्थ और देश के यशस्वी नेतृत्व के मार्गदर्शन में सीना तानकर विकास की यात्रा को बढ़ा रहा है। 145 करोड़ देशवासी एकजुट होकर नेतृत्व पर विश्वास जता रहे हैं और कह रहे हैं कि देश के नेतृत्व का जो भी आदेश होगा, हम सब उसका पालन करेंगे। दुनिया जब अराजकता-अव्यवस्था से त्रस्त है, तब भारत मजबूती के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार को बाबा मुकुट नाथ मठ, सौंगल गांव में ब्रह्मलीन श्री महंत पीर गणेश नाथ जी का आठमान भंडारा, देशमेल व शंखाढाल कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहां पूजन-अर्चन किया और ब्रह्मलीन संतों के प्रति श्रद्धा निवेदित की। सीएम योगी ने सफल आयोजन के लिए सौंगल के पीर शेरनाथ जी महाराज को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में शेरनाथ जी को पीर की पदवी दी गई।  पहले की सरकारों को वोटबैंक व तुष्टिकरण से नहीं थी फुर्सत सीएम योगी ने कहा कि हमारा दायित्व है कि जो लोग देशहित में कार्य कर रहे हैं, उन्हें समर्थन-सहयोग करें और जो लोग देशविरोधी-धर्मविरोधी आचरण कर रहे हैं, उन्हें नकारना, दुत्कारना और बाहर का रास्ता दिखाना है। भारत का हर सनातन धर्मावलंबी चाहता था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो, क्योंकि राम सनातन के प्रतीक और भारत के आधार स्तंभ हैं। 500 वर्ष पहले विदेशी आक्रांता ने रामजन्मभूमि पर मंदिर को अपवित्र करते हुए क्षतिग्रस्त कर दिया था। दिन-वर्ष बीतते गए, हिंदू संघर्ष करता गया, लेकिन कोई बात सुनने वाला नहीं था। जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने तब अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनाने की पहल को नई ऊंचाइयां प्राप्त हुई। आज अयोध्या में दुनिया का सबसे भव्यतम मंदिर बनकर तैयार हो गया। आजादी के बाद अनेक सरकारें बनीं, लेकिन किसी ने आस्था के बारे में नहीं सोचा, क्योंकि उन्हें वोटबैंक और तुष्टिकरण से फुर्सत नहीं थीं। केंद्र व प्रदेश में एक जैसी सरकार बनी तो राम मंदिर का निर्माण हो गया। यूपी और देशवासियों को सुरक्षा की गारंटी मिली।  सनातन विरोधी सरकारें आएंगी तो तुष्टिकरण करेंगी सीएम ने कहा कि काशी में काशी विश्वनाथ मंदिर, महाकाल में महालोक, उत्तराखंड में केदारपुरी और बद्रीनाथ पुरी में भव्य धाम का निर्माण, यह तब हुआ जब उसके बारे में सोचने वाली सरकारें हैं। सनातन विरोधी सरकारें आएंगी तो तुष्टिकरण करेंगी। आजादी के बाद कश्मीर व नक्सलवाद की समस्या उन्हीं लोगों ने दी, जिन्होंने तुष्टिकरण के नाम पर देश को बांटा। जब देश में जनचेतना जागरूक हुई तो जिन लोगों ने सनातन व देश के प्रति अन्याय किया था, देशवासियों ने उन्हें अविश्वास का प्रतीक बना दिया और भारतीय जनता पार्टी व मोदी जी के नेतृत्व में विश्वास जताया। जनता जिस रूप में देश को लेकर चलना चाहती थी, मोदी जी के नेतृत्व में वैसा ही काम हो रहा है।  जिन लोगों ने विश्वास खो दिया, वे भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास जता रहे  विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए सीएम योगी ने कहा कि जिन लोगों ने विश्वास खो दिया है, वे भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास जता रहे हैं। कभी लोकसभा स्पीकर तो कभी न्यायपालिका या भारत निर्वाचन आयोग पर अविश्वास जताते हैं। वे जीतते हैं तो उनकी उपलब्धि और हार गए तो संवैधानिक संस्थाओं पर अंगुली उठाते हैं। कड़वा-कड़वा थू और मीठा-मीठा गप नहीं चलेगा। जो लोग सनातन विरोधी आचरण करते हुए भारत को कमजोर करने का कार्य कर रहे हैं, जनता उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। भारत की आन, बान, शान से खिलवाड़ की इजाजत किसी को नहीं मिलेगी। भारत में नशे को बढ़ाने की साजिश कर रहा पाकिस्तान  सीएम ने कहा कि हमें अपनी कमियों पर भी ध्यान देना चाहिए। दुश्मन हमेशा हमारी कमजोरी देखने की फिराक में रहता है। पाकिस्तान भारत में शरारत के तहत नशे को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। सीएम ने धर्मसभा में आह्वान किया कि युवा पीढ़ी और समाज को जागरूक करें, नशे के खिलाफ अभियान चलाएं, नशा नाश का कारण है, इसलिए नशे के खिलाफ किया गया कार्य देश की सेवा है। नशे के सौदागर देश के दुश्मन हैं, वे देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं, इन्हें पनपने नहीं देना चाहिए। भारत की युवा पीढ़ी ऊर्जा से परिपूर्ण है। जब भी उसे अवसर मिला, उसने देश-दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नशे के सौदागरों को युवा पीढ़ी के साथ खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए। धर्मसभाओं के माध्यम से आमजन को जागरूक करना चाहिए।  संतों के सानिध्य में हमेशा ऊंची रहेगी सनातन की ध्वज पताका सीएम योगी ने कहा कि शेरनाथ जी महाराज ने सभी के सहयोग से गुरु महंत गणेश नाथ जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इस आयोजन का साहसिक निर्णय लिया। कई दशकों के बाद सौंगल में संतों-योगेश्वरों व भक्तों का इतना बड़ा जमावड़ा हुआ। इस भूमि ने हर युग में अपना प्रभाव दिखाया है। यहां की उपस्थिति बताती है कि सनातन की ध्वज पताका संतों के सानिध्य में हमेशा ऊंची रहेगी, उसे कोई ताकत झुका नहीं सकती। सनातनी जीते जी सम्मान देते हैं और जो भौतिक रूप से नहीं हैं तो भी उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए ऐसे आयोजन करते हैं। उनकी अच्छाइयों से प्रेरणा प्राप्त करते हैं। सीएम योगी ने सिकंदर के अहंकार के पतन और सिद्ध योगी के व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की सिद्ध संतों व संन्यासियों की परंपरा ने सदैव सदाचार, कर्तव्य व राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव को सर्वोच्च मान्यता दी। समाज व राष्ट्र … Read more

प्रथम चरण में प्रदेश भर में 1.09 लाख से अधिक सीटों का हुआ आवंटन

लखनऊ योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा दिलाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से आवेदन, सत्यापन और लॉटरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है। प्रदेश में आरटीई के अंतर्गत प्रथम और द्वितीय चरण में मिलाकर 1.56 लाख से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 1.09 लाख सीटों का आवंटन किया जा चुका है  जबकि द्वितीय लॉटरी में 47 हजार से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिला है। इस प्रकार बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर सुनिश्चित किए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन सत्यापित किए गए। आरटीई के तहत सर्वाधिक प्रवेश लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा, मुरादाबाद और बुलंदशहर जैसे जनपदों में हुए हैं, जहां हजारों बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिला है। इसी प्रकार अलीगढ़, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, फीरोजाबाद और बरेली जैसे जिलों में भी हजारों बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिला है। आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में निर्धारित सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। योगी सरकार ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया है ताकि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के हर वर्ग के बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी निजी विद्यालयों में पढ़कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया के आगामी चरण भी जल्द पूरे किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके। सर्वाधिक प्रवेश वाले जनपद लखनऊ   L1: 12,097 L2: 3,489 कुल: 15,586 सीटें     वाराणसी   L1: 7,140 L2: 989 कुल: 8,129 सीटें   कानपुर नगर   L1: 7,128 L2: 1,822 कुल: 8,950 सीटें   आगरा   L1: 4,989 L2: 1,771 कुल: 6,760 सीटें   मुरादाबाद   L1: 4,080 L2: 1,890 कुल: 5,970 सीटें   मुरादाबाद   L1: 4,080 L2: 1,890 कुल: 5,970 सीटें     अलीगढ़   L1: 4172 L2: 1189 कुल: 5,361 सीटें     अलीगढ़   L1: 4172 L2: 1189 कुल: 5,361 सीटें   बुलंदशहर   L1: 3,761 L2: 1,584 कुल: 5,345 सीटें   गाजियाबाद   L1: 3,540 L2: 1,350 कुल: 4,890 सीटें   मेरठ   L1: 3,691 L2: 1,235 कुल: 4,926 सीटें                  

प्रदेशभर के सभी बिजली वितरण केंद्रों व कार्यालयों में पंजीयन हुआ शुरू

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा 12 मार्च 2026 को प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना (एमबीबीएस) आर्थिक रूप से कमजोर बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत और संजीवनी बनकर सामने आई है। इस योजना के माध्यम से कोरोना महामारी तथा अन्य कारणों से बकाया बिजली बिल जमा नहीं कर पाने वाले उपभोक्ताओं को सीधे राहत प्रदान की जाएगी। यह योजना विशेष रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल तथा कृषि उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी है। इसके अंतर्गत 31 मार्च 2023 की स्थिति में बकाया राशि को आधार मानकर उपभोक्ताओं को मूल राशि एवं अधिभार (सरचार्ज) में छूट दी जाएगी। प्रदेश के 29 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को इस योजना के तहत लगभग 758 करोड़ रुपए तक की सीधी छूट मिलने का अनुमान है। बिजली क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि की राहत पहली बार दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के दौरान प्रोटोकॉल और प्रतिबंधों के कारण कई महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं हो पाई थी। इसके चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को एक साथ कई महीनों के बिजली बिल मिले, जिन्हें आर्थिक तंगी के कारण वे जमा नहीं कर सके। महामारी के कारण कमजोर हुई आर्थिक स्थिति ने अनेक परिवारों को और अधिक कठिनाई में डाल दिया। ऐसे ही उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। इस योजना से उपभोक्ताओं को न केवल बकाया बिजली बिलों के भुगतान में राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें सरल और सुविधाजनक तरीके से अपने पुराने बकाये का निराकरण करने का अवसर भी मिलेगा। योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। योजना में शामिल होने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप, सभी बिजली वितरण केंद्रों तथा संबंधित कार्यालयों में पंजीयन करा सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए गांव-गांव में शिविर भी लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद उपभोक्ता इसका लाभ उठा सकें। भुगतान के बाद पात्र उपभोक्ताओं को एम-ऊर्जा योजना का लाभ भी मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल लाखों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देगी, बल्कि उन्हें नियमित रूप से बिजली बिल भुगतान के लिए प्रोत्साहित भी करेगी। मुख्यमंत्री  साय की इस संवेदनशील पहल से प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे समय पर पंजीयन कर योजना का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करें तथा भुगतान के दौरान किसी प्रकार की आशंका होने पर संबंधित वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क किया जाए।

गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना का शुभारंभ किया। योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के 11 जिलों में 29 गौधामों का संचालन प्रारंभ हो गया है।  मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर बिलासपुर जिले के  कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जोगीपुर में प्रस्तावित गौ अभ्यारण्य लगभग 184 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रथम चरण में 1 करोड़ 32 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके पूर्ण होने पर यहां एक साथ लगभग 2500 गौवंश के संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था की जा सकेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। गौधाम योजना के माध्यम से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा तथा पशुधन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ एमओयू किया गया है। इसके तहत कई जिलों में गाय वितरण का कार्य भी प्रारंभ किया गया है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पानी और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस योजना से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने कहा कि गौधाम योजना का शुभारंभ एक पुनीत अवसर है। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है तथा गोधन संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है, जब पूरे प्रदेश में एक साथ गौधाम योजना की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में 10-10 गौधाम चरणबद्ध रूप से स्थापित किए जाएंगे, जिससे गौवंश संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष  विशेषर पटेल ने कहा कि गौ माता हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य सरकार सुनियोजित कार्ययोजना के साथ कार्य कर रही है। कार्यक्रम में विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  धर्मजीत सिंह,  सुशांत शुक्ला, महापौर मती पूजा विधानी, कमिश्नर बिलासपुर  सुनील जैन, आईजी  रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा  चंद्रकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में गौपालक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

योगी सरकार की पहल से महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार और सशक्तीकरण का लाभ

लखनऊ अलीगढ़ के हरदुआगंज क्षेत्र के बड़ा गांव उखलाना की रहने वाली सुजाता राघव ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी नए अवसरों की राह खोल सकतीं हैं। कोरोना काल में जब उनके पति की नौकरी छूटने के बाद परिवार के सामने आय का संकट खड़ा हो गया, तब सुजाता ने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के बारे में जानकारी मिली। इस योजना से प्रेरित होकर उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह बनाया। उनका कहना है कि योगी सरकार की नीतियों से उनको आत्मनिर्भर बनने में काफी मदद मिली। एनआरएलएम से जुड़ने के बाद सुजाता राघव को अपने व्यवसाय की शुरुआत करने के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस योजना के माध्यम से उन्हें स्वयं सहायता समूह के जरिए शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्होंने पूजा सामग्री के निर्माण का कार्य शुरू किया।  एनआरएलएम से मिली वित्तीय सहायता ने न केवल उनके व्यवसाय की नींव मजबूत की, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया। इस सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया, नए उत्पाद जोड़े और अन्य महिलाओं को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान किए। समूह की ताकत से बनाया ‘श्री शुभांग’ नाम से ब्रांड सुजाता ने वर्ष 2022 में अन्य महिलाओं के साथ मिलकर “श्री राघव ग्रामीण महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह” का गठन किया। शुरुआत मिट्टी के दीये के लिए सूती बातियों से की। धीरे-धीरे मांग बढ़ने लगी और उत्पादों की विविधता भी बढ़ती गई। इसके बाद समूह ने धूपबत्ती, 6 तरह की धूप स्टिक, 8 तरीके की धूप कोन, हवन सामग्री, सत्यनारायण पूजा किट और जन्माष्टमी पूजा किट जैसे अन्य पूजा से जुड़ी किट्स भी बनाने शुरू किए। अपने उत्पादों को अलग पहचान देने के लिए उन्होंने “श्री शुभांग” नाम से एक ब्रांड बनाया और उसका ट्रेडमार्क भी पंजीकृत कराया। उन्होंने अपने उत्पाद अमेज़न, फ्लिपकार्ट, जियो मार्ट पर भी रजिस्टर किये हैं। इससे उन्हें सालाना 2 से 2.50 लाख तक की बिक्री हो जाती है। आज यह ब्रांड केवल अलीगढ़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी खुशबू देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है। मंदिरों, बड़े किराना स्टोर्स और सरकारी कैंटीनों तक इन उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है।  डिजिटल प्लेटफॉर्म से देशभर में पहुंचा कारोबार सुजाता राघव की सफलता में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी बड़ा योगदान रहा है । उन्होंने अपने उत्पादों को ओएनडीसी (Open Network for Digital Commerce) प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया, जिससे उनका कारोबार जिला स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। अब ग्राहक ‘श्री शुभांग’ से देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। सुजाता के लिए डिजिटल तकनीक की जानकारी शुरू में बहुत चुनौतीपूर्ण जरूर थी, लेकिन ओएनडीसी टीम, एनआरएलएम और परिवार के सहयोग से उन्होंने इसे सीख लिया। आज मोबाइल पर आसानी से ऑर्डर आ जाते हैं, इन्वेंटरी मैनेज होती है। ऑनलाइन कैटलॉग के जरिए ग्राहक उनके उत्पाद आसानी से देख सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार ऑर्डर कर लेते हैं।  रोजगार पाकर महिलाओं को मिली नई पहचान सुजाता राघव की पहल आज कई महिलाओं के जीवन में बदलाव की वजह बन चुकी है। उनके समूह से 10 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है, और अन्य 10 महिलाओं को भी पैकिंग और आपूर्ति जैसे कार्यों से कई अन्य लोग भी अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ गए हैं। समूह से जुड़ी हर महिला लगभग 7 से 8 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही है और समूह की कुल मासिक आय सवा से डेढ़ लाख रुपये से ऊपर तक पहुंच चुकी है। सुजाता का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनतीं हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। उनकी यह यात्रा बताती है कि अगर संकल्प मजबूत हो और सामूहिक प्रयास किया जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। सुजाता राघव की यह कहानी केवल एक व्यवसाय ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, महिला सशक्तीकरण और सामूहिक प्रयास को दर्शाती है, जिसने कई घरों में रोजगार और उम्मीद की नई खुशबू पहुंचाई है।

लापरवाही पर गिरी गाज: मासूम मामले में महिला थाना प्रभारी और प्रधान आरक्षक निलंबित

राजनांदगांव. शहर के बाजार क्षेत्र में पिता से बिछड़ी डेढ़ वर्षीय मासूम बालिका के मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने कड़ी कार्रवाई की है। मामले में त्वरित कार्रवाई न करने पर महिला थाना प्रभारी गीतांजलि सिंह और कोतवाली थाने के आरक्षक चंद्रेश सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर लाइन अटैच कर दिया गया है। साथ ही कोतवाली थाना प्रभारी नंदकिशोर गौतम का भी तबादला कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार शहर के मार्केट एरिया में एक व्यक्ति अपनी डेढ़ वर्षीय मासूम बालिका के साथ पहुंचा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह नशे की हालत में था। नशे की वजह से वह अपनी बच्ची पर ध्यान नहीं दे पाया और इसी दौरान मासूम अपने पिता से बिछड़ गई। कुछ देर बाद वह सड़क किनारे खड़ी होकर रोती हुई मिली। इसी दौरान वहां से गुजर रहे दो युवकों की नजर रोती हुई बच्ची पर पड़ी। बच्ची को लावारिस देखकर दोनों युवकों ने मानवता का परिचय देते हुए उसे महिला थाने पहुंचाया, ताकि पुलिस मदद कर सके और परिजनों तक पहुंचा सके। बताया जाता रहा है कि महिला थाना पहुंचने पर पुलिस की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। आरोप है कि महिला थाना प्रभारी ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय युवकों से कहा कि वे डायल 112 या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। वहीं जब दोनों युवक बच्ची को लेकर कोतवाली थाना पहुंचे तो वहां मौजूद एक आरक्षक ने भी उनकी कोई विशेष मदद नहीं की। इसके बाद दोनों युवकों ने चीखली पुलिस चौकी के एक आरक्षक की मदद से चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क किया। चाइल्ड हेल्पलाइन की सहायता से बालिका को संपर्क गृह भेजा गया। बाद में पुलिस ने जानकारी जुटाकर बच्ची को उसके परिजनों से मिलवा दिया। मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए महिला थाना प्रभारी गीतांजलि सिंह और आरक्षक चंद्रेश सिन्हा को निलंबित कर दिया। जारी आदेश के अनुसार दोनों को बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने और नियमित गणना में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। मासूम बच्ची को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाने में सहयोग देने वाले दोनों युवकों की मानवीय पहल की सराहना की गई है। पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने उनके इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किया।

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