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मेडिकल पीजी की 780 सीटें खाली, डॉक्टरों का सवाल—1.3 करोड़ फीस कौन देगा?

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कर्नाटक

नीट पीजी की कटऑफ माइनस 40 तक गिरने के बावजूद कर्नाटक में मेडिकल पीजी की 780 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) ने 7 मार्च को नीट पीजी काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली थी जिसके बाद प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में 4,773 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों में से 783 (16 फीसदी) सीटें खाली रह गईं। इस साल लगभग 14400 छात्रों ने काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया और लगभग 10000 छात्रों ने केईए (KEA) पोर्टल के जरिए मेडिकल पीजी सीटों के लिए वेब ऑप्शन चुने। विशेषज्ञों ने सीटों के खाली रहने के लिए एक ही साल में 967 सीटों का बढ़ना और काउंसलिंग के लंबे राउंड्स को मुख्य वजह बताया है।

1.3 करोड़ रुपये तक फीस
ज्यादातर सीटें जो खाली रह गई हैं, वे मैनेजमेंट कोटे के तहत आती हैं; इन सीटों की फीस प्राइवेट कॉलेजों में एनाटॉमी की सीट के लिए 25,000 रुपये से लेकर डर्मेटोलॉजी की सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपये तक है। हैरानी की बात यह है कि पॉपुलर स्ट्रीम की सीटें भी खाली पड़ी हैं। उदाहरण के लिए, जनरल मेडिसिन में कुल 500 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 37 अभी भी खाली हैं। एमडी रेडियोडायग्नोसिस में 287 सीटों में से 35 सीटें खाली हैं। जनरल सर्जरी में 425 सीटों में से 11 सीटें खाली रह गई हैं, जबकि डर्मेटोलॉजी में 196 सीटों में से 15 और पीडियाट्रिक्स में 362 सीटों में से 25 सीटें खाली हैं।

इतनी अधिक सीटें खाली रहने के मामले पर सोशल मीडिया पर भी चर्चा छिड़ गई है। डॉक्टर और उम्मीदवार दोनों ही अपनी राय साझा कर रहे हैं। डर्मेटोलॉजी की बढ़ी हुई फीस को देखते हुए एक न्यूरोलॉजिस्ट ने लिखा, 'एमडी डर्मेटोलॉजी की एक सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपये? कोई हैरानी की बात नहीं कि इसे लेने वाला कोई नहीं मिला। मेडिकल शिक्षा की लागत कम होनी चाहिए। इसका असर मेडिकल इलाज की लागत कम होने पर भी पड़ सकता है।' इसके अलावा प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल सीटों पर बहुत कम छात्रों ने दाखिला लिया। डेटा से पता चलता है कि कुल 119 सीटों में से, केवल आठ छात्रों ने एनाटॉमी की सीटें लीं।

कोर्स , कुल सीटें , खाली सीटें

एनाटॉमी 119 111

फिजियोलॉजी 117 97

बायोकेमिस्ट्री 113 92

फार्माकोलॉजी 123 53

पैथोलॉजी 265 39

माइक्रोबायोलॉजी 130 99

कम्युनिटी मेडिसिन 143 63

फोरेंसिक मेडिसिन 77 47

डर्मेटोलॉजी 196 15

पीडियाट्रिक्स 362 25

जनरल मेडिसिन 500 37

रेडियो डायग्नोसिस 287 35

रेस्पिरेटरी मेडिसिन 87 4

इमरजेंसी मेडिसिन 74 1

ऑर्थोपेडिक्स 358 28

एनेस्थीसिया 443 3

जनरल सर्जरी 425 11

ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी 362 18

डिप्लोमा इन क्लिनिकल पैथोलॉजी 2 2

डिप्लोमा इन पब्लिक हेल्थ 3 3

कुल 4,186 783

इस साल क्यों हालात अलग
रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना से पता चलता है कि 2024–25 में, केईए काउंसलिंग के जरिए कुल 3,806 मेडिकल PG सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 3,378 सीटें अलॉट कर दी गईं, जबकि 428 सीटें खाली रह गईं। ये सभी सीटें प्री- और पैरा-क्लिनिकल प्रोग्राम की थीं। इसी तरह साल 2023 में प्री- और पैरा-क्लिनिकल स्ट्रीम में 478 सीटें अलॉट नहीं हो पाई थीं। यह स्थिति इस साल से काफी अलग है क्योंकि इस साल तो सबसे ज्यादा मांग वाली स्ट्रीम की सीटें भी खाली पड़ी हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुए द ऑक्सफोर्ड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन SNVL नरसिम्हा राजू ने कहा, 'MBBS और MD के लिए अप्लाई करने वाले छात्रों की सोच अलग होती है। MBBS में, किसी भी स्टेज पर सीटें जोड़ी जाएं, वे भर जाती हैं। लेकिन PG में ऐसा नहीं होता। हमने जो देखा है, उसके मुताबिक काउंसलिंग के बीच में जोड़ी गई सीटों के लिए ज्यादा दावेदार नहीं मिलते। PG छात्रों ने अपने करियर का रास्ता पहले से ही तय कर लिया होता है।'

सीटें खाली क्यों रही
उन्होंने आगे कहा, 'कोर्ट केस और दूसरी देरी की वजह से काउंसलिंग में बहुत ज्यादा समय लगता है। एक काउंसलिंग और अगले साल की परीक्षा के बीच बहुत कम समय बचता है। इसलिए छात्र इस साल ज्यादा फीस वाली कैटेगरी की सीट लेने के बजाय अगले साल की परीक्षा की बेहतर तैयारी करने का फैसला करते हैं। इस वजह से कई संस्थानों में NRI/मैनेजमेंट कोटे की सीटें खाली रह जाती हैं।'

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