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पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की दहलीज पर पहुंचने का एक मात्र कारण चीन का कर्ज

वियनतियाने  चीन का एक और पड़ोसी देश कर्ज के भारी-भरकम बोझ से कराह रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि यह देश अब डिफॉल्ट होने जा रहा है। इस देश के डिफॉल्ट होने की दहलीज पर पहुंचने का एक मात्र कारण चीन का कर्ज है। चीन ने इस देश को भारी मात्रा में कर्ज दिया है। अब यह देश चीन के अलावा बाकी दुनिया से लिए गए कर्ज को लौटाने में सक्षम नहीं है और ऋण पुर्नगठन की मांग कर रहा है। हालांकि, चीन ने पहले की तरह अपना पल्ला झाड़ लिया है और कह रहा है कि वह मदद के लिए तैयार है। इससे पहले चीनी कर्ज से श्रीलंका डिफॉल्ट हो चुका है और पाकिस्तान उस दहलीज पर पहुंच कर बार-बार खुद को बचा रहा है। लाओस का कर्ज भुगतान दोगुना हुआ चीनी कर्ज से तबाह होने वाले इस देश का नाम लाओस है। लाओस चीन का पड़ोसी देश है। पिछले साल ही चीन ने लाओस तक रेल लाइन का उद्घाटन किया था। अब लाओस अपने चीन प्रेम की सजा भुगत रहा है। हालांकि, चीन का कहना है कि वह पड़ोसी लाओस को उसके भारी कर्ज के बोझ को कम करने में मदद कर रहा है। इस बीच लाओस ने खुलासा किया है कि उसका बाहरी पुनर्भुगतान लगभग दोगुना हो गया है। ऐसे में वह डिफॉल्ट को रोकने के लिए और अधिक ऋण स्थगन चाहता है। हालांकि, लाओस को कर्ज देने वाली पार्टियां इसके लिए तैयार नहीं हैं। लाओस के कर्ज पर चीन ने क्या कहा चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को सवालों के लिखित जवाब में कहा कि बीजिंग ने लाओस सहित विकासशील देशों के साथ “पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग” किया है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मजबूत समर्थन शामिल है। उन्होंने कहा, “साथ ही, वह संबंधित देशों को उनके कर्ज के बोझ को कम करने में मदद करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है।” लाओस पर चीन का सबसे ज्यादा कर्ज चीन अब तक लाओस का सबसे बड़ा लेनदार है, जो बाहरी सरकारी कर्ज में 10.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लगभग आधा हिस्सा वहन करता है। पिछले साल के अंत में इस छोटे से देश पर कुल सार्वजनिक और सार्वजनिक रूप से गारंटीकृत कर्ज 13.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो इसके सकल घरेलू उत्पाद का 108 प्रतिशत था। लाओस के कर्ज ने बढ़ाई छोटे देशों की चिंता कम्युनिस्ट शासित लाओस चीन के साथ हाई-स्पीड रेल लाइन शुरू करने के बाद चर्चा में आया है, जिसकी लागत इस चारों ओर से जमीन से घिरे देश को लगभग 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। कई लोग इस विकास को बुनियादी ढांचे में वृद्धि की शुरुआत के रूप में देखते हैं जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को सीधे दक्षिण पूर्व एशिया से जोड़ता है। हालांकि, इस विकास बाकी छोटे देशों के लिए ऋण में वृद्धि की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्व बैंक ने लाओस को दी चेतावनी पिछले साल लाओस का बाहरी ऋण भुगतान 950 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, जिससे देश को मूलधन और ब्याज भुगतान में 670 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ा। विश्व बैंक ने पहले कहा है कि इस तरह के कदमों से हाल के वर्षों में अस्थायी राहत मिली है। देश के ऋण मुद्दे तब सामने आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन विकासशील देशों को चीन के आर्थिक प्रभाव का विस्तार करने के प्रयासों के लिए एक विकल्प प्रदान करना चाहता है। वाशिंगटन ने अक्सर बीजिंग के प्रयासों को “ऋण-जाल कूटनीति” के रूप में पेश किया है क्योंकि श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देश पुनर्भुगतान से जूझ रहे हैं।

भारतीय महिला टीम श्रृंखला का आखिरी मैच खेलने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैदान में उतरेगी

चेन्नई  भारतीय महिला टीम तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में मंगलवार को यहां आखिरी मैच में जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैदान में उतरेगी तक उसके सामने जीत दर्ज कर इसे 1-1 से बराबर करने की चुनौती होगी। इसके लिए हालांकि भारतीय गेंदबाजों को अपने प्रदर्शन के स्तर को ऊंचा उठाना होगा जिसके खिलाफ दक्षिण अफ्रीका ने पहले मैच में नौ विकेट पर 189 रन बनाकर 12 रन से जीत दर्ज की। दूसरे मैच में बारिश के कारण भारत को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला लेकिन गेंदबाजों ने इस मुकाबले में भी छह विकेट पर 177 रन लुटाये थे। तीसरे टी20 में पर भी खराब मौसम का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि मंगलवार को भी बारिश की 30 से 40 प्रतिशत संभावना है। दोनों मैचों में दो-दो विकेट लेने वाली पूजा वस्त्राकर और स्पिनर दीप्ति शर्मा को छोड़कर, अधिकांश भारतीय गेंदबाज प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे है। रेणुका सिंह के पहले मैच में असरहीन रहने के बाद दूसरे मुकाबले में सजीवन सजना को मौका मिला लेकिन इससे भी टीम को कोई फायदा नहीं हुआ। श्रेयंका पाटिल और राधा यादव ने रविवार को एक-एक विकेट लिया लेकिन यह दोनों गेंदबाज भी रन रोकने में नाकाम रहे। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर चाहेंगी कि श्रृंखला दांव पर होने के कारण उनके गेंदबाज कड़ी मेहनत करें। बल्लेबाजी के मोर्चे पर पहले मैच में भारतीयों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जेमिमा रोड्रिग्स (नाबाद 53), स्मृति मंधाना (46), हरमनप्रीत (35), शेफाली वर्मा (18) और दयालन हेमलता (14) ने बल्ले से अच्छा योगदान दिया। टी20 में रविवार को पदार्पण करने वाली विकेटकीपर उमा छेत्री के टीम में बने रहने की संभावना है। टीम प्रबंधन बल्ले से उनके योगदान को देखना चाहेगा।   दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के लिए तजमिन ब्रिट्स ने लगातार दो अर्धशतक लगाकर शानदार लय में होने का सबूत दिया है। ब्रिट्स के अलावा, कप्तान लौरा वोल्वार्ट, मारिजान कप्प और एनेके बॉश ने भी तेजी से रन बनाये है।   दक्षिण अफ्रीका की एकमात्र चिंता चोट से वापसी करने वाली बल्लेबाज क्लो ट्रायोन हैं।  वह दोनों मैचों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही है। बांग्लादेश में आगामी टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए, ट्रायोन खुद को साबित करने के लिए बेताब होगी। टीम इस प्रकार हैं:  भारत महिला: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उपकप्तान), उमा छेत्री (विकेट कीपर), ऋचा घोष (विकेट कीपर), दयालन हेमलता, जेमिमा रोड्रिग्स, शेफाली वर्मा, अमनजोत कौर, श्रेयंका पाटिल, सजीवन सजाना, दीप्ति शर्मा, आशा शोभना, अरुंधति रेड्डी, रेणुका सिंह, शबनम शकील, पूजा वस्त्रकार और राधा यादव। दक्षिण अफ्रीका महिला:  लौरा वोल्वार्ट (कप्तान), तजमिन ब्रिट्स, मीके डी रिडर (विकेट कीपर), सिनालो जाफ्ता (विकेट कीपर), एनेके बॉश, नादिन डी क्लार्क, एनेरी डर्कसेन, मारिजान कप्प, सुने लुस, क्लो ट्रायोन, अयाबोंगा खाका, मसाबाटा क्लास, एलिज़-मारी मार्क्स, नॉनकुलुलेको म्लाबा और तुमी सेखुखुने।   मैच भारतीय समयानुसार शाम सात बजे शुरू होगा।    

प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना से पक्का घर पाकर खुजरो बाई की खुशी का ठिकाना नहीं

पक्का हो घर अपना… अब नहीं रहा ये सपना प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना से पक्का घर पाकर खुजरो बाई की खुशी का ठिकाना नहीं भोपाल खुद के पक्के घर में निश्चिंत होकर कौन नहीं रहना चाहता। यह सभी का एक बड़ा सपना होता है, जिसे पूरा करने के लिये हर व्यक्ति जी जान से मेहनत करता है। खुजरो बाई भी पक्के घर का सपना दिल में लिये जी रहीं थीं। मण्डला जिले की ग्राम पंचायत जंतीपुर की खुजरो बाई बैगा की किस्मत रंग लाई और अब उसे प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना से खुद का पक्का घर मिल गया है। पक्का घर पाकर वे बेहद प्रसन्न हैं। इस योजना ने पक्के घर में रहने का उनका बरसों पुराना सपना साकार कर दिया है। खुजरो बाई बताती है कि वे बेहद गरीब परिवार से हैं और सालों से कच्चे मकान में रहती थीं। कच्चे मकान में रहने पर बारिश में उसे बड़ी परेशानी होती थी। बारिश की वजह से उसका घर-गृहस्थी का सामान भीगकर खराब हो जाता था। हर साल बारिश से पहले घर की मरम्मत में बहुत पैसा खर्च हो जाता था। वह मजदूरी करके अपना भरण-पोषण करती थीं। गरीबी के कारण वह अपना पक्का मकान नही बना पा रही थी। इसी दौर में ग्राम पंचायत जंतीपुर द्वारा उसे बताया गया कि 2023-24 में उसका नाम प्रधानमंत्री जन-मन योजना की आवास चयन सूची में आ गया है। योजना के तहत उसे तीन किश्तों में काम के आधार पर धनराशि सीधे उसके बैंक खाते में दी गई और उसे कुशल मजदूरी का भुगतान भी किया गया। खुजरो बाई ने बताया कि प्रधानमंत्री जन-मन योजना से उसका पक्का घर बन गया है और अब वह इसमें रहने भी लगी हैं। वे यह भी बताती है कि उन्हें सरकार की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, आयुष्मान भारत कार्ड, विद्युत कनेक्शन, पक्का शौचालय, नल कनेक्शन एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि का लाभ भी मिल रहा है। सरकार की इन सभी योजनाओं का लाभ पाकर खुजरो बाई के दिन अब बदल गये हैं। वे प्रधानमंत्री जन-मन योजना से उसे पक्का घर देने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार जताती हैं।  

असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 28 जिलों की 23 लाख की आबादी प्रभावित, कई जिलों का सड़क संपर्क टूटा

ईटानगर अरुणाचल प्रदेश में बारिश के कारण हुए भूस्खलन से कई जिलों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है। अधिकारियों ने  यह जानकारी दी। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को शि-योमी जिले में भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के कारण अप्रैल से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसने बताया कि लोहित और अंजाव जिलों के मोमपानी क्षेत्र में तेजू-हयुलियांग सड़क बाधित है, जबकि क्रा दादी जिले में दरी-चंबांग से लांगडांग गांव पालिन-ताराक्लेंगडी जाने वाली सड़क भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी सियांग जिले के गेयिंग में राष्ट्रीय राजमार्ग-513 भी बाधित हो गया है। इस वर्ष अप्रैल से अब तक अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 72,900 से अधिक लोग और 257 गांव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कों, पुलों, पुलियाओं, बिजली लाइनों, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों और जल आपूर्ति अवसरंचनाओं को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 160 सड़कें, 76 बिजली लाइनें, बिजली के 30 खंभे, तीन ट्रांसफार्मर, नौ पुल, 11 पुलिया और 147 जल आपूर्ति प्रणालियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसमें बताया गया कि इसके अलावा 627 कच्चे और 51 पक्के घर तथा 155 झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा है। पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के कारण राज्य की राजधानी ईटानगर में लोग गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत का काम जारी है, लेकिन इसमें कई दिन लगेंगे। इस सप्ताह लगातार बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण कुरुंग कुमेय जिले के अंतर्गत दमिन, पारसी पर्लो और पन्यासांग प्रशासनिक क्षेत्र का संपर्क राज्य के बाकी हिस्सों से कथित तौर पर कट गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दमिन से पारसी पर्लो जाने वाली सड़क भी कई जगह अवरुद्ध हो गई है। ईटानगर को बंदरदेवा से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-415 पर करसिंगसा खंड के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिसके कारण राजधानी ईटानगर प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा के लिए सड़क को बंद करना पड़ा। उपायुक्त श्वेता नागरकोटी मेहता द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सड़क को बंद करने और यातायात को गुमटो के रास्ते मोड़ने का निर्णय लिया गया है।  असम में बाढ़ के कारण 28 जिलों में करीब 23 लाख लोग प्रभावित असम में बाढ़ की स्थिति भी गंभीर बनी रही और 28 जिलों की लगभग 23 लाख की आबादी इससे प्रभावित हुई। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। बुलेटिन के अनुसार, अधिकतर नदियों का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर है। राज्य में इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान में 78 लोगों की मौत हुई जबकि इनमें से केवल बाढ़ के कारण 66 लोगों की मौत हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का  सिलचर पहुंचने और मणिपुर जाते समय कछार जिले के फुलेर्तल में बाढ़ राहत शिविर का दौरा करने का कार्यक्रम है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों में सभी राहत शिविरों में पूरी व्यवस्था की गई है और स्थिति सामान्य होने तक आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार रखा गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत शिविरों की सुरक्षा और स्वच्छता सरकार की प्राथमिकता है और उनकी टीम वहां रह रहे लोगों के संपर्क में है। वर्तमान में, 28 जिलों में 3,446 गांवों के लगभग 23 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि बाढ़ की दूसरी लहर से 68,432.75 हेक्टेयर फसल भूमि जलमग्न हो गई है। धुबरी में सबसे अधिक 7,54,791 लोग प्रभावित हुए, इसके बाद कछार में 1,77,928 लोग और बारपेटा में 1,34,328 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। कुल 53,689 लोगों ने 269 राहत शिविरों में शरण ली है, जबकि राहत शिविरों में नहीं रह रहे 3,15,520 लोगों को राहत सामग्री प्रदान की गई है। ब्रह्मपुत्र निमती घाट, तेजपुर और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। खोवांग में बुरही दिहिंग, शिवसागर में दिखौ, नंगलमुराघाट में दिसांग, नुमालीगढ़ में धनसिरी, धरमतुल में कोपिली, बारपेटा में बेकी, गोलकगंज में संकोश, बीपी घाट में बराक और करीमगंज में कुशियारा नदियां खतरे से निशान से ऊपर हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन सहित कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य कर रही हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विभिन्न हिस्सों में 171 नौकाओं को तैनात किया गया है। विभिन्न एजेंसियों ने पिछले 24 घंटे में कुल 70 लोगों और 459 मवेशियों को बचाया। राज्य भर से बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और मत्स्य पालन तालाबों को नुकसान पहुंचने की खबरें मिली हैं।    

मुरैना में 70 लाख की वसूली के लिए 23 कनेक्शन काटे, चोरी के 16 केस बनाए

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इन दिनों बकाया बिजली बिल वसूली के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मुरैना में 70 लाख रुपए बकाया राशि की वसूली के लिए बिजली कंपनी की टीम ने गत दिनों बाल निकेतन रोड पर 23 घरों के कनेक्शन काट दिए और 16 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी के केस बनाए। शहर में इन दिनों बिजली कंपनी का राजस्व वसूली अभियान चल रहा है। इसमें बिजली चोरी पर भी फोकस है। कलेक्टर मुरैना ने बिजली कंपनी को एक थानेदार, एक हवलदार व तीन सिपाही कोतवाली थाने से उपलब्ध कराए हैं। बिजली कंपनी की टीम ने गत दिनों गोपालपुरा बाल निकेतन रोड मुरैना पहुंचकर 23 बड़े बकायादारों के घर जाकर बिजली का बिल जमा करने के लिए कहा, लेकिन बकायादारों ने बिजली बिल जमा नहीं किये। कंपनी के सहायक प्रबंधक अशोक शर्मा ने 70 लाख रुपए की वसूली के लिए 23 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने की कार्रवाई की है। टीम में शामिल अन्य अधिकारियों प्रबंधक अभिषेक चौरसिया, सहायक यंत्री इंद्रेश्वर, हेमंत बाजौरिया, पंकज सोनी, उमाशंकर मित्तल व सद्दाम हुसैन ने बिजली चोरी के 16 केस बनाए। इस कार्रवाई के दौरान बिजली कंपनी की टीम जब आगे बढ़ी तो 14 घरों के लोग ताला डालकर घर से चले गए। बिजली कंपनी का वसूली अभियान लगातार जारी है।  

निठारी कांड की फाइल अब सुप्रीम कोर्ट में खुली, कोर्ट सुनवाई को सहमत

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने 2006 के सनसनीखेज निठारी हत्याकांड में सुरेंद्र कोली को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने उच्च न्यायालय के 16 अक्टूबर, 2023 के फैसले के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अलग-अलग याचिकाओं पर कोली से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने मई में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाले एक पीड़ित के पिता की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। पीठ ने कहा कि सीबीआई की याचिकाएं उक्त याचिका के साथ सुनवाई के लिए आएंगी। राष्ट्रीय राजधानी से लगे नोएडा के निठारी में 29 दिसंबर, 2006 को एक घर के पीछे नाले से आठ बच्चों के कंकाल के अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई थी। घर के आसपास इलाके में नालों की और खुदाई तथा तलाशी में और कंकाल मिले। इनमें से अधिकतर कंकाल उन गरीब बच्चों और लड़कियों के थे जो इलाके से लापता थे। सीबीआई ने 10 दिन के अंदर मामले में जांच संभाली थी और उसकी तलाशी में और कंकाल बरामद हुए थे।   निठारी कांड क्या था नोएडा के निठारी गांव में साल 2006 में हुई एक वारदात ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली की वजह से नोएडा का छोटा सा गांव निठारी (Nithari Case) देशभर में पहचाना जाने लगा. वारदात के 18 साल बाद भी निठारी गांव का नाम सुनते ही लोग डर सहम से जाते हैं. निठारी कांड का नाम आते ही लोग इस वाकये को फिर से याद करने लगते हैं, जब न्यूज चैनलों और न्यूज पेपर्स में निठारी कांड हेडलाइन में छाया रहता था. आज इस कांड की चर्चा फिर से हो रही है और आखिर साल 2006 में निठारी में ऐसा क्या हुआ था जो आज भी लोगों के जहन से बाहर निकल नहीं पा रहा है? क्या है निठारी कांड? नोएडा के सेक्टर 31 की कोठी नंबर D-5 में  रहने वाले मोनिंदर सिंह पंढेर पर 2005 से लेकर 2006 तक बच्चों की हत्या का आरोप था. इस मामले का खुलासा पायल नाम की लड़की की हत्या की जांच से हुआ था. पहले 31 बच्चों की हत्या के आरोप पंढेर और उसके नौकर कोली पर लगे थे लेकिन जांच में 19 लोगों की हत्या ,यौन शोषण और सबूत मिटाने की बात सामने आई थी. इनमें 10 लड़कियां शामिल थीं. लेकिन इनमे से कुछ के डीएनए सैंपल मैच नहीं हुए और कुछ मामलों में आरोपी बरी हो गए. मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से पुलिस को 19 नरकंकाल मिले थे. ये कंकाल बच्चों और महिलाओं के थे. इस घटना के बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरिंदर कोली को गिरफ्तार कर लिया था. सीबीआई को इंसानी हड्डियों के कुछ हिस्से और 40 इस तरह के पैकेट मिले थे जिनमें मानव अंगों को भरकर नाले में फेंका गया था. मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में नोएडा पुलिस के 3 सीनियर अफसरों समेत कई पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए थे.     निठारी कांड के आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को आज यानी कि 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी करने का आदेश दे दिया है. दोनों को मिली फांसी की सजा भी अदालत ने रद्द कर दी है.     सुरेंद्र कोली और पंढेर को पिंकी की हत्या और रेप की कोशिश में 24 जुलाई 2017 को सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहराया था. दोनों के खिलाफ हत्या के 16 में से आठवें मामले में कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था.     सीबीआई कोर्ट ने 22 जुलाई 2017 को मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराते हुए सजा के लिए  24 जुलाई की तारीख मुकर्रर की थी.     रिम्पा हलदर हत्या मामले में सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को जनवरी 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया था.     आरोपी सुरेंद्र कोली की फांसी पर पुनर्विचार याचिका अक्टूबर 2014 में सुप्रीम कोर्ट से खारिज कर दी गई थी. रिम्पा की हत्या मामले में उसे मौत की सजा सुनाई गई थी. हालांकि अदालत ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सज़ा पर अक्तूबर 29 तक के लिए रोक लगा दी थी.       सीबीआई की एक विशेष अदालत ने मई 2010 में सुरेंद्र कोली को सात साल की आरती की हत्या का दोषी करार दिया था. लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट पंढेर को सितंबर में ही बरी कर चुका था, जबकि कोली की सजा को बरकरार रखा गया था.     सीबीआई ने मई 2007 में अपनी चार्जशीट में पढ़ेर को 15 साल की रिम्पा हलदर नाम की बच्ची के किडनैप,रेप और हत्या के  मामले में आरोपमुक्त कर दिया था. लेकिन कोर्ट की फटकार के बाद सीबीआई ने पंढेर को इस मामले में सह-अभियुक्त बनाया. पंढेर और कोली को दोषी क़रार देते हुए सजा-ए-मौत सुनाई गई थी.     निठारी हत्याकांड के आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को जनवरी 2007 में पुलिस नार्को टेस्ट के लिए गांधीनगर ले कर पहुंची थी. मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली से पूछताछ के बाद सीबीआई  कुछ ही दिनों में जांच करने के लिए नोएडा के निठारी गांव पहुंच गई. यहां से और भी हड्डियां बरामद की गईं थी. इसी महीने में दोनों को पेशी के लिए गाजियाबाद की एक कोर्ट में ले जाया गया था, जहां इनके साथ परिसर में ही मारपीट की गई थी. फरवरी से 20 अप्रैल के बीच दोनों आरोपियों को 14 दिन के लिए सीबीआई की कस्टडी में भेजा गया था. वहीं गुमशुदा लड़की के कंकाल की पहचान उसके कपड़ों से की गई थी.     12 नवंबर 2006 को एक लड़की कोठी में सफाई के लिए अपने घर से गई तो लेकिन वापस घर नहीं लौटी. परिवार के खूब तलाशने के बाद भी जब उसका कुछ पता नहीं चला तो मामले की शिकायत वह पुलिस थाने में करने पहुंचे लेकिन पुलिस ने उनकी रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की. वहीं मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे बने नाले में नई कंकाल पाए गए थे. इस मामले में पुलिस ने 19 केस दर्ज किए थे.  

जन और जनजातीय संस्कृति के विकास में अव्वल मध्यप्रदेश

जन और जनजातीय संस्कृति के विकास में अव्वल मध्यप्रदेश जनजातीय विरासत के लिये लगभग 41 हजार करोड़ रूपये का बजट आवंटित भोपाल जनजातीय वर्ग के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार बेहद संवेदनशील है। इस वर्ग के लिये सरकार की संवेदनशीलता इसी तथ्य से परिलक्षित होती है कि सालाना बजट 2024-25 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति (उप योजना) के लिये 40 हजार 804 करोड़ रूपये बजट आवंटित किया गया है। यह बजट वर्ष 2023-24 से 3 हजार 856 करोड़ रूपये (करीब 23.4 प्रतिशत) अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जनजातीय वर्ग के कल्याण और इन्हें समर्थ बनाने की संवेदनशील पहल पर ही इस वर्ष जनजातीय कार्य विभाग को पहले से अधिक धनराशि आवंटित की गई है। जनजातीय बंधुओं और इनकी समृद्ध संस्कृति के संरक्षण और विकास के लिये सरकार द्वारा अनेक नवाचारी कदम उठाये जा रहे हैं। सरकार के प्रयासों से जनजातीय वर्ग के विद्यार्थी, युवा, खिलाड़ी और कलाकार अब विकास की एक नई राह पर चल पड़े हैं। जनजातीय वर्ग के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की ठोस चिंता करते हुए सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में सीएम राइज स्कूलों के निर्माण के लिये 667 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान नियत किया है। इस वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के प्रति प्रोत्साहित करने के लिये सरकार ने 11वीं, 12वीं एवं महाविद्यालयीन का छात्रवृत्ति के लिये 500 करोड़ रूपये प्रावधान किया हैं। सरकार की अत्यंत सराहनीय पहल आकांक्षा योजना में जनजातीय वर्ग के 10वीं पास विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश सरकार नीट, क्लैट एवं जेईई की नि:शुल्क कोचिंग देने का कार्य कर रही है। नि:शुल्क कोचिंग के साथ-साथ सरकार जनजातीय विद्यार्थियों को टैबलेट भी देगी। साथ ही डेटा प्लान भी सरकार द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के लिये सरकार ने बजट में 10 करोड़ 42 लाख रूपये आरक्षित कर दिये हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जन-मन) के तहत विशिष्टत: असुरक्षित जनजातीय समूहों (पीव्हीटीजी) के सर्वांगीण विकास के लिये मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्धता पूर्वक प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश में तीन विशेष पिछड़ी जनजातियां बैगा, भारिया एवं सहरिया निवास करती हैं। पीएम जन-मन योजना के तहत इन विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में बहुउद्देश्यीय केन्द्र, ग्रामीण आवास, ग्रामीण सड़क, समग्र शिक्षा एवं विद्युतीकरण कार्य कराये जायेंगे। सरकार ने जारी वित्त वर्ष के बजट में इन कामों के लिये 1 हजार 607 करोड़ रूपये प्रावधानित किये हैं। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीव्हीटीजी) आहार अनुदान योजना के तहत इन जनजाति समूह बाहुल्य ग्रामों में जनजातीय परिवारों को 1 हजार 500 रूपये प्रति माह आहार अनुदान के रूप में सहायता राशि दी जाती है। इसके लिये सरकार ने बजट 2024-25 में 450 करोड़ रूपये आवंटित किये हैं। इस राशि से बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजातीय परिवारों को नि:शुल्क आहार अनुदान वितरित किया जाएगा। विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिये सरकार 2024-25 में 100 करोड़ रूपये अतिरिक्त व्यय करेगी। वहीं इसी योजना के अंतर्गत विशेष जनजातीय क्षेत्रों में 217 नये आंगनवाड़ी भवनों का भी निर्माण किया जा रहा है। इन नये आंगनवाड़ी केन्द्रों के निर्माण के लिये बजट 2024-25 में 150 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत का विस्तार अर्थात पेसा एक्ट में पेसा नियम, नवम्बर, 2022 से मध्यप्रदेश में लागू है। यह नियम, प्रदेश की कुल 5 हजार 210 ग्राम पंचायतों तथा 11 हजार 783 गावों में प्रभावशील है। सरकार के प्रयासों से इन नियमों के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का उपयोग जनजातीय वर्ग के हितों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये अत्यंत प्रभावशाली साबित हो रहा है। इस पेसा एक्ट से जनजातीय वर्ग अपने क्षेत्र, अपनी परम्पराओं, अपनी संस्कृति और अपनी जरूरतों के मुताबिक फैसले लेकर विकास की राह में आगे बढ़ सकेंगे।  

नाटो शिखर सम्मेलन आज से वाशिंगटन में शुरू, राष्ट्रपति बाइडन संगठन के नेताओं का स्वागत करेंगे

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन की मेजबानी में इस सप्ताह आयोजित होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा यूक्रेन के प्रति मजबूत समर्थन प्रदर्शित करने की संभावना है। बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में यूक्रेन को सैन्य, राजनीतिक और वित्तीय सहायता देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जा सकती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सम्मेलन में यूरोपीय संघ और हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ अमेरिका के सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक बैठक भी आयोजित की जाएगी। संगठन सदस्य के रूप में स्वीडन के शामिल होने के बाद यह पहला नाटो शिखर सम्मेलन होगा। स्वीडन मार्च में आधिकारिक रूप से नाटो में शामिल हुआ था। यह ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक होगा। नाटो अब 32 देशों का एक मजबूत सैन्य गठबंधन है। शिखर सम्मेलन से पहले एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह (नाटो) यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए वास्तव में अति आवश्यक रहा है और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों की रक्षा करता आया है।’’ अमेरिका की राजधानी में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बैठक के कुछ ही दिनों के भीतर हो रहा है। अधिकारियों ने कहा, ‘‘सम्मेलन के जरिये पुतिन को एक कड़ा संदेश जाएगा कि अगर उन्हें लगता है कि वह यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों के गठबंधन के सामने अधिक समय तक टिक सकते हैं तो यह उनकी गलतफहमी है।’’ नाम न उजागर करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने साझेदारों के साथ मिलकर हम बाकी देशों को भी एक महत्वपूर्ण संदेश देंगे कि हम एकजुट हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन के लिए साथ खड़े हैं।’’ नाटो शिखर सम्मेलन मंगलवार को वाशिंगटन में शुरू होगा, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन संगठन के नेताओं का स्वागत करेंगे।  

जमानत में ऐसी कोई शर्त नहीं हो सकती जो पुलिस को आरोपी की आवाजाही पर लगातार नज़र रखने में सक्षम बनाए- कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोपियों को जमानत देने के लिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के वास्ते गूगल पिन का स्थान संबंधित जांच अधिकारियों से साझा करने की शर्त नहीं रखी जा सकती। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने नशीले पदार्थो की तस्करी के आरोपी नाइजीरिया के निवासी फ्रैंक विटस की दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर यह फैसला सुनाया‌। पीठ ने कहा, “जमानत की शर्त जमानत के मूल उद्देश्य को विफल नहीं कर सकती। ऐसी कोई शर्त नहीं हो सकती जो पुलिस को आरोपी व्यक्तियों की आवाजाही पर लगातार नज़र रखने में सक्षम बनाए”। याचिकाकर्ता विटस ने दिल्ली उच्च न्यायालय की‌ ओर से जमानत के लिए मोबाइल लोकेशन पुलिस से साझा करने की शर्त की व्यवस्था के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि इससे उसके निजात के अधिकार का उल्लंघन होता है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि जमानत की शर्त के रूप में गूगल पिन स्थान साझा करने की शर्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत निजता के अधिकार पर आघात करती है। शीर्ष अदालत ने पहले यह भी कहा था कि जब एक बार किसी अभियुक्त को अदालतों द्वारा निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो उसके ठिकाने को जानना और उसका पता लगाना अनुचित हो सकता है। वजह यह कि इससे उसकी निजता के अधिकार में बाधा आ सकती है। उच्चतम न्यायालय ने तब कहा था, “यह जमानत की शर्त नहीं हो सकती। हम सहमत हैं कि ऐसे दो उदाहरण हैं जहां इस न्यायालय ने ऐसा किया है, लेकिन यह जमानत की शर्त नहीं हो सकती।” नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2017 में अपने ऐतिहासिक फैसले में सर्वसम्मति से कहा था कि निजता का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है। प्रिम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत एक मामले में आरोपी नाइजीरियाई नागरिक को जमानत दी गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि गूगल पिन साझा करने की शर्त संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के निजता अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है. याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रिम कोर्ट का रुख किया था. मई 2022 में, हाई कोर्ट ने दो सख्त शर्तें रखी थीं – एक, आरोपी को गूगल मैप पर एक पिन डालना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मामले के जांच अधिकारी को उनका स्थान उपलब्ध हो. और, दूसरी शर्त यह थी कि नाइजीरिया के उच्चायोग को यह आश्वासन देना होगा कि आरोपी देश छोड़कर नहीं जाएगा और जब भी आवश्यकता होगी, ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होगा. 29 अप्रैल को, सुप्रिम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह इस बात की जांच करेगी कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों में से एक शर्त निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, जिसमें एक आरोपी को जमानत पर रहते हुए जांचकर्ताओं को उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने मोबाइल फोन से ‘गूगल पिन डालने’ के लिए कहा गया है. एक ऐतिहासिक फैसले में, नौ जस्टिस की संविधान पीठ ने 24 अगस्त, 2017 को सर्वसम्मति से घोषणा की थी कि निजता का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है. हाई कोर्ट ने शर्त पर ध्यान दिया और कहा कि प्रथम दृष्टया यह जमानत पर रिहा आरोपी के निजता के अधिकार का उल्लंघन है.  

प्रदेश में 3.42 लाख मीट्रिक टन मत्स्योत्पादन का लक्ष्य किया गया हासिल

प्रदेश में 3.42 लाख मीट्रिक टन मत्स्योत्पादन का लक्ष्य किया गया हासिल मछुआ दिवस पर राज्यमंत्री श्री पंवार ने मछुआरों को दी बधाई भोपाल प्रदेश में 10 जुलाई को मछुआ दिवस मनाया जायेगा। इस संबंध में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार ने मछुआरों को बधाई दी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि प्रदेश में मछली पालन को प्रोत्साहित कर बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले वर्ष प्रदेश में 3 लाख 42 हजार मीट्रिक टन मत्स्योत्पादन का लक्ष्य हासिल किया गया। उन्होंने कहा कि मछुआरों की सहकारी समितियों से आगामी वर्ष में प्रदेश में 3 लाख 90 हजार मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। राज्यमंत्री श्री पंवार ने अपने संदेश में कहा कि नीली क्रांति से प्रदेश में आर्थिक क्रांति लाने के ठोस प्रयास किये जा रहे है। इसके लिये अधिक से अधिक लोगों को मछली पालन के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार मछली पालन के साथ-साथ उसके प्र-संस्करण, विपणन और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य मंत्री श्री पंवार ने कहा कि राज्य सरकार ने मछुआरों एवं मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे में लाने के लिये विशेष अभियान चालाया है। इस अभियान से उन्हें सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा के मिलने से प्रदेश के मत्स्य पालक साहूकारों और बिचौलियों के हाथों से फँसने से बच सकें है। मत्स्य उत्पादन संवर्धन के लिये वर्ष 2024-25 का रोडमेप तैयार प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिये वर्ष 2024-25 में विभाग ने रोडमेप तैयार किया है। रोडमेप के जरिये प्रदेश में मत्स्य उत्पादन की नई संभावनाओं के लिये स्थानों को चिंन्हित किया जा रहा है। प्रकृतिक तालाबों एवं जल-संरचनाओं को मत्स्य पालन के अनुकूल बनाने के ‍लिये विभाग द्वारा ठोस प्रयास किये जा रहे है। जिला स्तर पर होगें कार्यक्रम प्रदेश में 10 जुलाई को जिला स्तर पर मछुआ दिवस पर आयोजन होगा। मछुआरों और मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जायेगी। 10 जुलाई 1957 को डॉ. हीरालाल चौधरी द्वारा सीफा भुवनेश्वर में पहली बार सफर मछली का सफलतापूर्वक प्रजनन कराया गया था। यह एक ऐसा उल्लेखनीय कार्य था, जिससे मछली पालन के क्षेत्र में एक नई क्रांति आयी। इस क्रांति को नीली क्रांति का नाम दिया गया। इस क्रांति से देश में लाखों लोगों को मछली पालन से जोड़ा गया है। इस उपलब्धि के लिये देश में हर साल 10 जुलाई को मछुआ दिवस मनाया जाता है।  

पहली ही बारिश में डूबी मुंबई, डूबी सड़कें, घरों में भी घुसा पानी, मौसम विभाग ने जारी किया बड़ा अपडेट

 मुंबई मुंबई में बारिश ने आफत मचाई हुई है. जलभराव की वजह से लोकल ट्रेनें तो कैंसल हुई हीं, कई विमान सेवाओं  भी एडवायजरी जारी कर दी है. इस बीच मौसम विभाग चेता रहा है कि शहर को फिलहाल इससे राहत मिलने वाली नहीं. लेकिन क्या वजह है जो देश की आर्थिक राजधानी कहलाता मुंबई हर बारिश पानी में डूब जाता है, वो भी कुछ घंटों की बारिश में? इसके पीछे अतिक्रमण या शहर की बसाहट कम, बल्कि कुदरती स्ट्रक्चर ज्यादा जिम्मेदार है. दो दशक पहले हुआ था बड़ा नुकसान जुलाई 20025 में मुंबई में तेज बारिश से सबसे बड़ा नुकसान हुआ. 26 जुलाई को चौबीस घंटों के भीतर 9 सौ मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा. ये वहां पूरी जुलाई की बारिश जितना था. इससे शहर के रास्ते बंद हो गए. बसें, ट्रेनों से लेकर हवाई जहाज थम गए. इस दौरान पानी में फंसने या डूबने से 1094 जानें चली गईं, जबकि लगभग साढ़े 5 सौ करोड़ का नुकसान हुआ. उस मानसून ने शहर की ताकत एक झटके में खींच ली. इसके बाद से लगातार प्लानिंग हो रही है. यहां तक कि महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन ने जापानी कंपनी द जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के साथ मिलकर अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट पर काम की बात की. इसमें नदियों से जोड़कर ऐसा सिस्टम बनाया जाएगा कि ओवरफ्लो होने पर पानी दूसरी जगह जमा हो जाए और बाद में काम आ सके. क्यों होती रही नदियों पर बात ये शहर केवल अरब सागर से ही घिरा हुआ नहीं, बल्कि यहां चार-चार नदियां भी हैं- मीठी, दहिसर, ओशिवारा और पोयसर. नदियों के अलावा यहां चार क्रीक हैं. ये सब मिलकर लगभग 21 मिलियन की आबादी वाले शहर को मानसून के मौसम में काफी खतरनाक बना देते हैं. मसलन, मीठी नदी की बात करें तो पूरे मुंबई को घेरती इस नदी की ज्यादातर जगहों पर चौड़ाई केवल 10 मीटर है. ऐसे में थोड़ी बारिश में ही पानी ओवरफ्लो का खतरा रहता है. आसपास घनी बसाहट है, जिसपर तुरंत इसका असर होगा. मुंबई की टोपोग्राफी भी अलग समंदर किनारे बसा ये शहर कई जगहों पर काफी नीचे बसा हुआ है, जबकि कई जगहें काफी ऊंचाई पर हैं. बता दें कि मुंबई सात द्वीपों के मिलने से बना हुआ है, ऐसे में उसका आकार देश के ज्यादातर शहरों से काफी अलग, कुछ-कुछ तलेदार प्लेट की तरह है. बारिश शुरू होते ही पानी अपने-आप नीचे की तरफ आकर जमा होने लगता है. ऐसे कुछ इलाके हैं- सायन, अंधेरी सबवे, मिलान सबवे और खार. ये हिस्से कुछ घंटों के पानी से भी डूबने लगते हैं. पानी के निकासी की अलग है व्यवस्था शहर का ड्रेनेज सिस्टम इस तरह का है कि पानी समंदर में खाली होता जाए. लेकिन भारी बारिश के दौरान, जब समुद्र का स्तर बढ़ता है, ड्रेन्स के गेट बंद कर दिए जाते हैं ताकि पानी वापस शहर में लौटकर तबाही न मचा दे. भारी बारिश के दौरान ऊंची लहरें बचेखुचे ड्रेनेज सिस्टम को भी रोक देती हैं. इस सिस्टम के दोबारा काम पर लौटने में पानी घटने के बाद लगभग 6 घंटे लग जाते हैं. इस दौरान पानी भरा ही रहता है. भारत समेत दुनिया के ज्यादातर शहरों में बारिश होने पर आधे से ज्यादा पानी जमीन में समा जाता है. वहीं मुंबई में लगभग 90 प्रतिशत पानी ड्रेन्स के जरिए निकलता है. इससे भी ड्रेनेज पर काफी बोझ रहता है. एक वजह अतिक्रमण भी आर्थिक राजधानी होने की वजह से यहां देश के कोने-कोने से लोग आते रहते हैं. इतने लोगों के रहने के लिए वैसी प्लानिंग नहीं. बड़ी आबादी निचले हिस्सों में बसी हुई है, जो पानी के लिए संवेदनशील हैं. यहां पर पानी के बाहर निकलने या जमीन में जाने की वैसी व्यवस्था नहीं. यही वजह है हल्की बारिश में भी कई इलाकों में पानी भर जाता है. कैसे मिल सकता है छुटकारा पिछले कुछ समय से मुंबई में जापान की मदद से अंडरग्राउंड डिस्चार्ज चैनल की बात हो रही है. ये प्रोजेक्ट जापान ने अपने शहर टोक्यो में भी तैयार किया. असल में टोक्यो में साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा आबादी हमेशा बाढ़ के खतरे में जीती आई. जापान के मौसम विभाग की मानें तो ये शहर समुद्र तल से नीचे जा चुका है. अपने लोगों और इंफ्रा को बचाने के लिए जापान ने अंडरग्राउंड चैनल बनाया. बाढ़ का पानी या अतिरिक्त पानी इस चैनल में गिरता है, जहां से पंप के जरिए उसे वहां की ईडो नदी में छोड़ा जाता है. मुंबई को स्पंज सिटी की तरह डेवलप करने की भी बात हो रही है. स्पंज सिटी वो कंसेप्ट है, जिसमें शहर स्पंज की तरह काम करे यानी पानी डलते ही अंदर सूख जाए. इसके तहत शहर को ऐसे डिजाइन किया जाएगा कि पानी तुरंत ही जमीन में चला जाए और ड्रेनेज पर भार न पड़े. इसमें ग्रीन स्पेस बढ़ाया जाएगा.  

राष्ट्रपति पद के चुनावों की उल्टी गिनती शुरू, डेमोक्रेट पार्टी के दानदाताओं की धमकी बाइडेन उम्मीदवार रहे तो पार्टी की फंडिंग बंद

कैलिफ़ोर्निया अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनावों के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. 5 नवंबर को होने वाले यूएस राष्ट्रपति चुनाव के लिए सभी नेता ऐड़ी-चोटी का जोर लगाने में लगे हुए हैं. इस बीच खबर ये हैं कि उपराष्ट्रपति कमला हैरिस चुनावों में जो बाइडेन को पीछे छोड़ सकती हैं. कमला का सिक्का जो बाइडेन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. इसकी वजह ये है कि डेमोक्रेट पार्टी के दानदाताओं ने धमकी दी है कि अगर जो बाइडेन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने रहे तो वे पार्टी की फंडिंग को रोक सकते हैं. जो बाइडेन के खिलाफ उठ रहे विद्रोह के इस स्वर को देखते हुए पार्टी ने जो बाइडेन के विकल्प पर विचार करना शुरू कर दिया है. हालांकि बाइडेन का दावा है कि वे ही राष्ट्रपति पद की रेस में हैं. उधर, कुछ लोगों को कहना है कि बाइडेन की दावेदारी में उनकी बढ़ती उम्र आड़े आ रही है. इन सबके बीच उपराष्ट्रपति कमला हैरिस बाइडेन को पछाड़ती नजर आ रही हैं. कमला हैरिस के बारे में कहा जा रहा है कि पार्टी के साथ-साथ देश में उनकी अलग पहचान है और डेमोक्रेटिक पार्टी के दिग्गज उनके पीछे खड़े होने लगे हैं. पार्टी के शीर्ष नेताओं का कहना है कि अगर जो बाइडेन चुनावी दौड़ से बाहर होने का फैसला करते हैं तो वह चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को नामित किया जा सकता है. बता दें कि पिछले महीने अटलांटा में प्रेसिडेंशियल डिबेट में जो बाइडेन का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था. इस प्रदर्शन के बाद से सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी में बाइडन के चुनावी दौड़ से दूर करने की मांग बढ़ने लगी है. 81 साल के बाइडन की सेहत पर सवाल उठ रहे हैं. इन सब अटकलों से परे जो बाइडेन कहते हैं कि, ‘अगर खुद भगवान आसमान से धरती पर आकर कहें कि जो इस रेस से निकल जाओ तभी मैं बाहर आऊंगा और भगवान तो नीचे आएंगे नहीं.’ बाइडन को राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होते देखना चाहते हैं डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच सांसद  डेमोक्रेटिक पार्टी के कम से कम पांच सांसदों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पांच नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से जो बाइडन को बाहर हो जाना चाहिए। कई समाचारों में यह जानकारी दी गई। अटलांटा में 27 जून को हुई बहस में रिपब्लिकन पार्टी से अपने प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बाइडन के निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा फोन कॉल पर की गई चर्चा के दौरान सांसदों- जेरी नाडलर, मार्क ताकानो, जो मोरेल, टेड लियू और एडम स्मिथ ने अपने विचार व्यक्त किए। बहस में अपने प्रदर्शन को खुद बाइडन ने ‘‘एक बुरी रात’’ बताया है। उनकी लोकप्रियता की रेटिंग में गिरावट आई है और उनकी अपनी पार्टी के सहयोगियों ने उनके स्वास्थ्य और आगामी चार वर्षों तक शासन करने की उनकी क्षमता पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिया है। बाइडन ने जोर देकर कहा कि वह दौड़ में बने रहेंगे और विश्वास जताया कि वह नवंबर में ट्रंप के खिलाफ चुनाव जीतेंगे। सदन में अल्पमत के नेता हकीम जेफरीज ने 27 जून को बाइडन और ट्रंप के बीच बहस के बाद राजनीतिक परिदृश्य पर प्रतिनिधि सभा में अपनी पार्टी के सहयोगियों के साथ फोन कॉल पर चर्चा की। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, इस फोन वार्ता सत्र को ‘‘विचार व्यक्त करने का सत्र’’ बताया गया, जिसका उद्देश्य पार्टी सहयोगियों से बाइडन की दावेदारी की व्यवहार्यता के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। खबर में यह भी बताया गया कि इस बैठक से पहले ही कई शीर्ष नेताओं का मानना था कि बाइडन को राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो जाना चाहिए। इस मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से खबर में बताया गया कि सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य स्मिथ ने कहा कि बाइडन के जाने का समय आ गया है। चार अन्य सांसदों ने भी यही विचार व्यक्त किए और उनका मानना है कि बाइडन के लिए इस दौड़ से बाहर हो जाने का समय आ गया है। कमला हैरिस के पक्ष में बनता माहौल पूर्व अमेरिकी सीनेटर और कैलिफ़ोर्निया अटॉर्नी जनरल कमला हैरिस, अगर पार्टी की उम्मीदवार होती हैं और चुनाव जीत जाती हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रपति बनने वाली पहली महिला होंगी. वह उपराष्ट्रपति के रूप में सेवा करने वाली पहली अफ्रीकी अमेरिकी और एशियाई व्यक्ति हैं. हाल के सर्वे से पता चलता है कि कमला हैरिस रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ जो बाइडेन से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, हालांकि उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा. 2 जुलाई को जारी एक सीएनएन सर्वे में पाया गया कि मतदाताओं ने जो बाइडेन के मुकाबले डोनाल्ड ट्रम्प को छह प्रतिशत अंक, 49% से 43% तक पसंद किया. कमला हैरिस भी ट्रम्प से 47% से 45% तक पीछे रहीं. सर्वे में पाया गया कि निर्दलीय उम्मीदवारों ने डोनाल्ड ट्रम्प की तुलना में 43%-40% कमला हैरिस को समर्थन दिया, और दोनों पार्टियों के मतदाता उन्हें 51-39% पसंद करते हैं. डोनाल्ड ट्रम्प और लड़खड़ाते जो बाइडेन के बीच पिछले सप्ताह टेलीविजन पर बहस के बाद एक रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में पाया गया कि कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रम्प लगभग बराबरी पर थे. आंतरिक मतदान से पता चलता है कि हैरिस के पास भी जो बाइडेन के समान ही ट्रम्प को हराने की संभावना है. इनमें 45% मतदाताओं ने कहा कि वे उनके लिए वोट करेंगे, जबकि 48% ट्रम्प के लिए. 2 रिपब्लिकन दानदाताओं ने रॉयटर्स को बताया कि कमला हैरिस को इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि वे चाहेंगे कि जो बाइडेन के मुकाबले वे ट्रम्प का सामना करें. पोलिंग आउटलेट फाइव थर्टी एट ने कहा कि 37.1% मतदाता हैरिस को स्वीकार करते हैं और 49.6% मतदाता उन्हें नापसंद करते हैं. उन संख्याओं की तुलना जो बाइडने के लिए 36.9% और 57.1% तथा डोनाल्ड ट्रम्प के लिए 38.6% और 53.6% से की जाती है.

अंतरिक्ष में फंसी नहीं हैं सुनीता विलियम्स, वापसी के लिए दो और स्पेसक्राफ्ट भी तैयार

वाशिंगटन बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर में खराबी के बाद इसका धरती पर वापसी का मिशन रोक दिया गया है। इसके बाद यान के साथ गए नासा के एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन (ISS) पर फंस गए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री बीते महीने 5 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे। अंतरिक्ष में उनका मिशन केवल एक सप्ताह के लिए ही था, लेकिन एक महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है और अभी तक उनकी वापसी के बारे में कोई अपडेट नहीं है। नासा के इंजीनियर स्टारलाइनर की समस्या को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, इस दौरान दोनों एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन पर दूसरे यात्रियों के साथ रहना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर वापसी कब होगी और क्या नासा को इसके लिए रेस्क्यू मिशन शुरू करने की जरूरत है। अंतरिक्ष में फंसी नहीं हैं सुनीता विलियम्स इन सवालों का जवाब अंतरिक्ष प्रणालियों और मिशनों के विशेषज्ञ पैट्रिक विनिंग ने दिया है। पैट्रिक जॉन्स हॉपकिंस एप्लाइड फिजिक्स लैब में नेशनल सिक्योरिटी स्पेस के लिए मिशन एरिया एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेस्क्यू अभियान की बात करना अनावश्यक है। इसकी वजह बताते हुए वे कहते हैं कि पहले तो यह समझना होगा कि स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर आईएसएस पर पहुंचे अंतरिक्ष यात्री फंसे नहीं है। न ही आईएसएस पर पहले से मौजूद सात दूसरे अंतरिक्ष यात्री ही फंसे हुए हैं। वापसी के लिए दो और स्पेसक्राफ्ट भी पैट्रिक ने बताया कि स्टारलाइनर अपने यात्रियों के साथ पृथ्वी पर लौटने में सक्षम है। इसके अलावा आईएसएस पर डॉक किए दो अन्य अंतरिक्ष यान भी अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर वापस ले आने में सक्षम हैं। इनमें एक स्पेसएक्स का ड्रैगन एंडेवर और सोयुज MS-25 क्रू शिप शामिल है। स्टारलाइनर के थ्रस्टर में खराबी और एक अप्रत्याशित हीलियम लीक की रिपोर्ट के बाद नासा की टीम अंतरिक्ष यान का डेटा इकठ्ठा कर रही है, जिसके चलते स्पेसक्राफ्ट की वापसी में देरी की गई है। यहां हमें याद रखने की जरूरत है कि अंतरिक्ष में जाना कठिन है। वहीं, मानव अंतरिक्ष उड़ान तो और भी कठिन है। स्टारलाइनर के डिजाइन में कई बैकअप सिस्टम हैं, जिसने आईएसएस पर इसके पहुंचने को सफल बनाया, लेकिन बैकअप सिस्टम के साथ भी अप्रत्याशित स्थितियों को समझना महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि नासा अधिक डेटा एकत्र कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रेस्क्यू मिशन आम तौर पर सेना चलाती है, जैसे कि अगर कोई स्पेसक्रॉफ्ट लॉन्च के समय समुद्र में गिर जाए। लेकिन यहां मामला अलग है, अमेरिकी सेना के पास अंतरिक्ष में मिशन चलाने की क्षमता नहीं है। फिलहाल तो इस मामले में रेस्क्यू की जरूरत भी नहीं है। प्रोटोकॉल बदलने की जरूरत? स्टारलाइनर में आई समस्या के बाद भविष्य के आपातकाली प्रोटोकॉल को बदलने के सवाल पर पैट्रिक ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि नासा और बोइंग जमीनी परीक्षण प्रक्रियाओं और दृष्टिकोणों पर कड़ी नज़र रखेंगे। सभी अंतरिक्ष यान डेवलपर्स ‘उड़ान भरते समय परीक्षण’ करने का बहुत प्रयास करते हैं ताकि लॉन्च से पहले अंतरिक्ष प्रणालियों पर असामान्य स्थितियों का पता लगाया जा सके। यह स्पष्ट है कि बोइंग का परीक्षण कार्यक्रम वर्तमान स्थितियों को पकड़ने में अपर्याप्त था। यही कारण है कि अधिक ऑन-ऑर्बिट परीक्षण डेटा एकत्र किया जाना चाहिए।

ग्रीन हाइड्रोजन के पहले चरण में अडानी का नौ अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश का प्लान, 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े अमीर गौतम अडानी (Gautam Adani) ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप (Adani Group) ने ग्रीन हाइड्रोजन बिजनस के पहले चरण के लिए नौ अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। इसमें से चार अरब डॉलर का निवेश मशीनरी, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट आदि पर किया जाएगा जबकि पांच अरब डॉलर 5 गीगावॉट इलेक्ट्रोलाइजर मेकिंग कैपिसिटी के विकास पर खर्च किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इससे करीब 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। अडानी ग्रुप ने तीन मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन कैपेसिटी का टारगेट रखा है। इसमें से एक मिलियन टन कैपेसिटी 2030 तक हासिल करने का लक्ष्य है। अडानी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उनकी दुनिया की सबसे सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगी। सूत्रों के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन का प्रॉडक्शन शुरू होने के बाद अडानी ग्रुप इसे जहाजों के जरिए यूरोप और कुछ एशियाई देशों को एक्सपोर्ट करेगा। इस सेक्टर में अडानी ग्रुप का मुकाबला लार्सन एंड टुब्रो, इंडियन ऑयल और ऑयल इंडिया से हो सकता है। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका को अहम माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन पानी और क्लीन इलेक्ट्रिसिटी से बनती है और इसे भविष्य का ईंधन कहा जा रहा है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी ग्रीन एनर्जी में में 75 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इलेक्ट्रोलाइजर सूत्रों का कहना है कि अडानी ग्रुप के ग्रीन हाइड्रोजन बिजनस का पहले चरण एल्केलाइन इलेक्ट्रोलाइजर पर आधारित होगा। इसमें एक किलो हाइड्रोजन बनाने के लिए कम से कम नौ किलो पानी की जरूरत होती है। बाद में एनियन एक्सचेंज मेंबरेन पर आधारित इलेक्ट्रोलाइजर बनाएगा। ग्रीन बिजनस के लिए अडानी ग्रुप ने अडानी न्यू इंडस्ट्रीज नाम से एक कंपनी बनाई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में अडानी ग्रुप की टोटल इनकम में इसकी हिस्सेदारी नौ फीसदी थी। अडानी ग्रुप की बिजनस कई सेक्टर्स में फैला है और यह मार्केट कैप के हिसाब से टाटा ग्रुप और रिलायंस के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक घराना है।  

अमरनाथ यात्रा तीर्थयात्रियों को स्वास्थ्य सेवा में एक ओर अध्याय जोड़ते हुए प्रशासन ने ‘पोनी एम्बुलेंस’ शुरू

श्रीनगर  जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अनोखी एम्बुलेंस सेवा शुरू की है। यह सेवा पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर पवित्र गुफा मंदिर की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए है। इसका नाम पोनी एंबुलेंस रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार इस एम्बुलेंस का उद्देश्य अमरनाथ यात्रा तीर्थयात्रियों को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। आक्सीजन सिलेंडर से लैस एंबुलेंस इस एंबुलेंस में घोड़े पर चढ़ा एक आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र चिकित्सा किट और ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस है। यह तंत्र बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर तीर्थयात्रियों के साथ जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पोनी एम्बुलेंस को प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। ये कर्मी यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं या आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं। तीर्थयात्रियों ने इस पहल को सराहा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा सचिव सैयद आबिद रशीद शाह ने कहा कि हम अमरनाथ यात्रियों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पोनी एम्बुलेंस सेवा ने यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के आत्मविश्वास और आराम को बढ़ाया है। शाह ने कहा कि यह सेवा, जिसे तीर्थयात्रियों द्वारा व्यापक रूप से सराहा गया है, कश्मीर में स्वास्थ्य सेवा विभाग द्वारा शुरू की गई है। इस सेवा की परिकल्पना विभाग के निदेशक मुश्ताक अहमद राथर ने की थी। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस सेवा ने दूरदराज के इलाकों में आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एक नया मानक स्थापित किया है। यह कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा नवाचार को प्रदर्शित करता है।

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