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SC ने महिलाओं के लिए मासिक धर्म में अवकाश पर केंद्र सरकार को अहम दिशा-निर्देश दिए

नई दिल्ली  महिलाओं को पीरियड के दौरान छुट्टी को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक रुख दिखाया है। कोर्ट ने मामले में केंद्र को कुछ निर्देश भी दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इसको लेकर राज्य सरकारों और सभी स्टैकहोल्डर्स से बात करे। साथ ही देखे कि क्या इस पर कोई मॉडल पॉलिसी बनाई जा सकती है। हालांकि कोर्ट ने माना कि इस दौरान छुट्टी मिलने से महिलाओं में काम को लेकर उत्साह बढ़ेगा, लेकिन यह भी कहा कि इसे अनिवार्य किए जाने के नुकसान भी हो सकते हैं। कोर्ट की चिंता, महिलाओं के काम पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव CJI डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि यह मुद्दा नीति से जुड़ा है ये कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर न्यायालयों को गौर करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि यदि महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश देने का फैसला कोर्ट देता है तो इसका विपरीत असर हो सकता है प्राइवेट सेक्टर में उनके नौकरी के अवसरों पर इसका असर हो सकता है, निजी कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने से बचेंगी इससे महिलाओं के नौकरी के अवसर कम हो सकते हैं। हम सचिव से अनुरोध करते हैं कि वे नीति स्तर पर मामले को देखें कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के समक्ष अपना मामला लेकर जा सकते है। कोर्ट ने आदेश दिया – ‘हम सचिव से अनुरोध करते हैं कि वे नीति स्तर पर मामले को देखें और सभी हितधारकों से परामर्श करने के बाद निर्णय लें और देखें कि क्या एक आदर्श नीति तैयार की जा सकती है , सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य इस संबंध में कोई कदम उठाते हैं तो केंद्र की परामर्श प्रक्रिया उनके आड़े नहीं आएगी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि पीरियड के दौरान छुट्टी मिलने से महिला कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे उनके अंदर काम को लेकर अधिक उत्साह पैदा होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह की छुट्टियों को अनिवार्य किए जाना महिलाएं वर्कफोर्स से दूर हो जाएंगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम यह नहीं चाहते हैं। इसमें कहा गया है कि महिलाओं की रक्षा के लिए हम जो करने की कोशिश करते हैं, उससे उन्हें नुकसान हो सकता है। घर में पैसे उधार न दें… पत्नी के यौन उत्पीड़न केस में क्यों बोला SC शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि यह एक पॉलिसी डिसीजन हैं। इस केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ही फैसला ले सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने याचिकाकर्ता को महिला और बाल विकास मंत्रालय के सामने जाने की बात कही। बता दें कि याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि वह राज्य सरकारों को महिलाओं के लिए पीरियड के दौरान छुट्टी के लिए नियम बनाने का निर्देश जारी करे। इसमें छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को पीरियड के दौरान छुट्टी की मांग की गई थी। Period Leave कोर्ट ने क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव और एएसजी ऐश्वर्या भाटी के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति देता है। इसके साथ ही कोर्ट ने सचिव से अनुरोध किया कि वह नीतिगत स्तर पर मामले को देखें और सभी पक्षों से बात करके निर्णय लें कि क्या इस मामले में कोई आदर्श नीति बनाई जा सकती है। महत्वपूर्ण बिंदु:     कोर्ट का तर्क:         पीरियड लीव को अनिवार्य बनाने से महिलाओं के रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।         यह नीतिगत मामला है, जिस पर सरकार को विचार करना चाहिए।     आगे की राह:         केंद्र सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर “मॉडल नीति” तैयार करेगी।         नीति में पीरियड लीव से संबंधित मुद्दों को संबोधित किया जाएगा।     वर्तमान स्थिति:         बिहार एकमात्र ऐसा राज्य है जो 1992 की नीति के तहत मासिक धर्म दर्द अवकाश प्रदान करता है। वकील शैलेंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका दरअसल, याचिकाकर्ता वकील शैलेंद्रमणि त्रिपाठी ने महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियों के चलते सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकारों को छुट्टी के नियम बनाने के निर्देश जारी करने की मांग की थी। याचिका में मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 14 को लागू करने के निर्देश दिए गए थे। जिसके तहत छात्राओं और महिला कर्मचारियों को पीरियड्स के दौरान छुट्टी देने की मांग की गई थी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि:     सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पीरियड लीव के अधिकार को खत्म नहीं करता है।     यह महिलाओं और उनके संगठनों को इस मुद्दे पर आगे बढ़ने और नीतिगत बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित करता है। बिहार में पीरियड्स के दौरान Period Leave मिलती याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कहा है कि मातृत्व लाभ अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए निरीक्षकों की नियुक्ति भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिहार एकमात्र ऐसा राज्य है जो 1992 की नीति के तहत विशेष मासिक धर्म पीड़ा अवकाश देता है।  

डॉ. किरोड़ी लाल को कोई लोभ नहीं अब इस्तीफा वापस नहीं लेंगे, राजस्थान-दौसा में पूर्व मंत्री गोलमा देवी बोलीं

दौसा. दौसा राजस्थान की राजनीति डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा के इस्तीफा के बाद लगातार गर्मा रही है। अब इसी मामले पर पूर्व मंत्री और डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा की धर्मपत्नी ने कहा है कि जब डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने इस्तीफा दे दिया है तो वापस नहीं लेंगे। पूर्व मंत्री गोलमा देवी बोलीं कि लोकसभा चुनाव में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को लोकसभा चुनाव में भाजपा पार्टी ने सीटों की जिम्मेदारी दी। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा जनसभा में बयान दिया था अगर दौसा लोकसभा सीट कन्हैयालाल मीणा चुनाव हारा तो मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा। अपनी बात को पूरा करते हुए डॉ. साहब ने इस्तीफा दिया है। गोलमा देवी ने कहा कि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सड़क पर  धरना दिया। लोगों के मुद्दे उठाते हैं। चाहे पेपर लीक मामला हो या किसी पीड़िता से दुष्कर्म मामला हो। किसी के मुआवजे की बात हो तो उसका मुद्दा डॉ. किरोड़ी लाल मीणा उठाते हैं। डॉ. साहब हमेशा जनता के साथ रहते हैं। डॉक्टर साहब ने इस्तीफा दिया है, लेकिन किरोड़ी लाल मीणा पार्टी से बाहर नहीं हैं। वो पार्टी का काम करते रहेंगे। बड़े पद की लालसा नहीं पूर्व मंत्री गोलमा देवी ने आगे कहा कि लोग यह अफवाहें फैला रहे हैं कि बड़े पद की लालसा में डॉक्टर मीणा ने इस्तीफा दिया है, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर ऐसा होता तो जब वो खुद मंत्री थीं तब उन्होंने इस्तीफा दिया था। वह भी वापस नहीं लिया। उसके बाद वसुंधरा सरकार में डॉ. मीना पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं ओर वापस भी नहीं लिया गया था। इसीलिए डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा को बड़े पद की कोई लालसा नहीं है। उन्होंने शुरू से जनता के लिए काम किया है और जनता के बीच रहकर किया है और आगे भी करेंगे। विधानसभा उपचुनाव को लेकर गोलमा देवी ने कहा पार्टी का प्रचार करेंगे बाकी हार जीत तो मुकद्दर की बात है। नहीं रुकेंगे कोई काम इधर पूर्व मंत्री गोलमा देवी ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा को मंत्री पद का लोभ नहीं है। इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। उनके लिए तो विधायक और मंत्री दोनों का पद कोई मायने नहीं रखता। उनके तो सारे काम बिना विधायक और मंत्री पद के भी होते हैं। तन-मन से करेंगे प्रचार उपचुनाव की जिम्मेदारी के सवाल पर पूर्व मंत्री गोलमा देवी ने कहा कि नई जिम्मेदारी मिली है, जिसे बखूबी निभाया जाएगा। पार्टी के लिए तन मन से प्रचार करेंगे। मतदाताओं के बीच में जाएंगे और फिर रही बात पार्टी की तो हम पार्टी के कार्यकर्ता हैं, पार्टी का काम तो करना ही चाहिए। उधर, डॉक्टर मीणा के इस्तीफे के सवाल पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की धर्मपत्नी गोलमा देवी ने कहा है कि जब इस्तीफा दे दिया है तो वापस नहीं लेना चाहिए। इस्तीफा दे दिया मतलब दे ही दिया।

केंद्रीय मंत्री भागीरथ ने खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्पद बताया,राजस्थान-अजमेर में खेल महाकुंभ का समापन

अजमेर. नगर निगम अजमेर और क्रीड़ा भारती अजयमेरू के सयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्राट पृथ्वीराज चौहान खेल महाकुंभ 2024 का समापन रविवार को अजमेर के पटेल मैदान में हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी रहे। समापन समारोह के मौके पर उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीत और हार से खिलाड़ियों को प्रेरित होना चाहिए और हार कर निराश होने के बजाय और मेहनत करनी चाहिए। जीत के लिए प्रयास करनी चाहिए। मुख्य अतिथि ने खिलाड़ियों की तरफ से नीरज जैन की मांग पर अजमेर में कबड्डी, फुटबाल, बास्केटबॉल, हॉकी, के भारतीय खेल प्रथिकरण की एकेडमी खोलने का आश्वासन दिया। समारोह में 670 विजेता उपविजेता को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता मे कुल 4118 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें 3015 पुरुष खिलाड़ी एवं 1103 महिला खिलाड़ी शामिल थीं। निगम के उपमहापौर नीरज जैन ने सभी का धन्यवाद दिया और खिलाड़ियों को खेलने को प्रोत्साहित किया। नीरज जैन ने नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों, क्रीड़ा भारती अजयमेरू के सदस्यों, शिक्षा विभाग के शारीरिक शिक्षकों, खेल विषशज्ञो, खिलाड़ियों एवम अजमेर के खेल प्रेमियों का धन्यवाद अर्पित किया। इस आयोजन में खेल विशेषज्ञ सहित कुल 278 लोग इस आयोजन का हिस्सा बने। समापन समारोह मे अजमेर संभागीय आयुक्त महेश शर्मा, निगम आयुक्त देशल दान सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

शिवपुरी में नदी में एडीपीओ की कार में एक व्यापारी का शव मिलने से फैली सनसनी

शिवपुरी पिछोर थाना अंतर्गत बुधना नदी में सोमवार की सुबह एक कार का टायर ग्रामीणों को दिखाई दिया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सूचना के बाद कार को बाहर निकाला तो कार में एक व्यसायी का शव मिला। कार की शिनाख्त की गई तो कार पिछोर न्यायालय में पदस्थ एडीपीओ (Assistant District Prosecution Officer) की निकली। इसके बाद खुलासा हुआ कि दोनों रविवार की शाम पार्टी मनाने के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद दोनों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं मिली। पुलिस ने फिलहाल मृतक के शव का पीएम करवा कर नदी में ही एडीपीओ के शव की तलाश शुरू कर दी है, हालांकि कार में एडीपीओ की बाडी नहीं होने से पुलिस फिलहाल इस पूरी मामले को संदेह की नजर से भी देख रही है। पिछोर टीआई रत्नेश यादव के अनुसार, नदी में से कार बाहर आने के उपरांत जब कार की पहचान की गई तो कार पिछोर न्यायालय में पदस्थ एडीपीओ राकेश रोशन की निकली, लेकिन कार में जो शव मिला। उसकी पहचान शिवम गुप्ता के रूप में हुई। पुलिस ने जब एडीपीओ राकेश रोशन की तलाश की तो उनका भी कोई सुराग नहीं लगा। इसी दौरान पुलिस को नया चौराहा निवासी केदारनाथ सेन नामक युवक मिला। उसने पुलिस को बताया कि एडीपीओ राकेश रोशन, शिवम गुप्ता रविवार को पार्टी मनाने के लिए माताटीला जाने के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ कार में वह भी था, परंतु वह नया चौराहा पर उतर गया था। ऐसे में कार नदी में कैसे पहुंची इसे लेकर संशय बना हुआ है। पुलिस प्रथम दृष्टया इसे हादसा मान कर चली रही है, परंतु कार में एडीपीओ का शव नहीं है और न ही उनका शव नदी में कहीं मिला है। ऐसे में फिलहाल पुलिस मामले को संदिग्ध भी मान रही है, लेकिन उससे पहले नदी में एडीपीओ के शव की तलाश भी की जा रही है। जिस पुल के नीचे पुलिस को कार मिली है, वह पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है और उस पुल से वाहनों का आना-जाना असंभव है। ऐसे में कार उस पुल के नीचे कैसे पहुंची, यह भी जांच का विषय है। पुलिस के अनुसार, कार जिस पुल के नीचे मिली है, वहां से गिरना संभव नहीं है। ऐसे में यह भी पता किया जा रहा है कि कहीं कार किसी अन्य रपटे से बहकर तो यहां तक नहीं आई है। कार में मिली शराब की बोतल, नशे में थे दोनों नदी में निकली कार में पुलिस को शराब की बोतलें भी मिली हैं। इसके अलावा पुलिस को प्रारंभिक पूछताछ में यह भी पता चला है कि कार में सवार शिवम गुप्ता व एडीपीओ राकेश रोशन दोनों ने पिछोर से निकलने से पहले ही शराब पी ली थी और दोनों हल्के नशे में थे। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि हो सकता है कि किसी पुल अथवा रपटे को पार करते हुए कार अनियंत्रित होकर नदी में गिर गई हो। हालांकि कार नदी में गिरती तो कार में एडीपीओ का शव भी मिलना था, लेकिन एडीपीओ का शव कार में नहीं है। ऐसे में पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है।

सीएमएचओ ने नोटिस में 5 दिन में मांगा जवाब, राजस्थान-उदयपुर के मैगनस हॉस्पिटल में मरीजों की भर्ती पर रोक

उदयपुर. जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शंकरलाल बामनिया ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए शहर के भुवाणा क्षेत्र के मीरा नगर स्थित मैगनस हॉस्पिटल के प्रबंधक को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में अस्पताल में नवीन मरीजों की भर्ती पर तत्काल प्रभाव से अस्थाई रोक लगाई है एवं जांच कमेटी की रिपोर्ट के संबंध में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शंकरलाल बामनिया ने बताया कि जिला कलेक्टर एवं जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद पोसवाल द्वारा गत दिनों श्रीमती अपूर्वा जोशी पत्नी श्री योगेश जोशी के पुत्र के इलाज में कथित घोर लापरवाही बरतने के आरोप में एक जांच कमेटी गठित की गई थी। इस जांच कमेटी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के संबंध में हॉस्पिटल के प्रबंधक से अपना प्रत्युत्तर देने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने को लेकर बच्चे के माता-पिता ने जिला कलेक्टर को एक शिकायती पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अस्पताल की लापरवाही के कारण बच्चे की दोनों आंखों की रोशनी जाने का जिक्र किया था। सतर्कता समिति में दर्ज इस शिकायत के संबंध में गठित जांच कमेटी ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा है कि अस्पताल के इस कृत्य से चिकित्सा विभाग की छवि धूमिल हुई है एवं आम जनता पर उनके हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली में गैर जिम्मेदारपूर्ण रवैया एवं इलाज में कथित घोर लापरवाही प्रदर्शित हुई है, जिससे प्रार्थी एवं आमजन में विपरीत प्रभाव पड़ा है। सीएमएचओ डॉ. बामनिया ने जांच कमेटी द्वारा अपनी जांच में पाए गए तथ्यों पर 4 बिन्दुओं में दी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि जांच कमेटी के तथ्यों से ज्ञात होता है कि उनके द्वारा चिकित्सालय में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ एवं इलाज में गंभीर लापरवाही की जा रही है, ऐसे में क्यों नहीं उनके विरुद्ध नैदानिक स्थापना (रजिस्ट्रीकरण और विनियम) अधिनियम 2010 के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की जाए? उन्होंने इस संबंध में नोटिस जारी करते हुए जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण की आगामी बैठक में अंतिम निर्णय होने तक अस्पताल में पूर्व में भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखते हुए नए मरीजों की भर्ती पर नोटिस प्राप्ति की दिनांक से तुरंत प्रभाव से अस्थाई रोक लगा दी है। साथ ही निर्देशित किया है कि जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण द्वारा अनुमति के पश्चात ही नए रोगियों की भर्ती प्रारंभ करेंगे। उन्होंने नोटिस में कहा है कि इस संदर्भ में यदि वे कोई जवाब रखते हों तो आगामी पांच कार्यदिवस में अपना जवाब मय दस्तावेज प्रस्तुत करें।

विधायक वर्मा के खिलाफ चुनाव याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई, याचिका निराधार तथ्यों पर आधारित: नीना वर्मा

इंदौर धार विधायक नीना वर्मा के खिलाफ मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष चल रही चुनाव याचिका में सोमवार को सुनवाई हुई। वर्मा की ओर से पिछली सुनवाई पर यह कहते हुए एक आवेदन प्रस्तुत हुआ था कि याचिका निराधार तथ्यों पर आधारित है। इसे निरस्त किया जाए। सोमवार को याचिकाकर्ता ने इस आवेदन का जवाब दे दिया। उनका कहना है कि प्रविधानों के तहत ही याचिका दायर की है। हाई कोर्ट की मुख्यपीठ भी ऐसे ही मामलों में फैसला सुना चुकी है। याचिका में अब 15 जुलाई को सुनवाई होगी। इसी दिन तय होगा कि वर्मा के खिलाफ चल रही इस चुनाव याचिका में सुनवाई आगे जारी रहेगी या नहीं। वर्मा के खिलाफ यह चुनाव याचिका धार निवासी सुरेशचंद्र भंडारी ने दायर की है। कहा है कि वर्मा के खिलाफ इसके पहले भी वर्ष 2013 में हुए निर्वाचन को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर हुई थी। इस याचिका को स्वीकारते हुए कोर्ट ने वर्मा का निर्वाचन निरस्त कर दिया था। उन्हें आदेश दिया था कि वे याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करें। वर्मा ने इस आदेश का अब तक पालन नहीं किया है। ऐसे में उनका वर्ष 2023 में हुआ निर्वाचन निरस्त किया जाए।

कई शहरों में कीं वारदातें, राजस्थान-दौसा में हथियार के बल पर लूट के चार बदमाश गिरफ्तार

दौसा. पुलिस ने हथियारों के बल पर रात में बाइक, जेवरात, नकदी और मोबाइल लूट करने वाली गैंग का पर्दाफाश करते हुए 02 देशी कट्टे और तीन कारतूस सहित गैंग के चार शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। ये बदमाश दौसा सहित भरतपुर, जयपुर ग्रामीण में एक दर्जन से अधिक वारदात को अंजाम दे चुके हैं। इनके पास से लूटी गई 04 बाइक, 07 मोबाइल फोन, जेवरात सहित कई बाइकों की नंबर प्लेट भी बरामद की गई हैं। दौसा जिला पुलिस अधीक्षक रंजीता शर्मा ने बताया कि पकड़े गए बदमाश आस-पास पढ़ाई के नाम पर कमरा किराए पर लेकर वारदात को अंजाम देते थे। मामले के आनुसार एक जुलाई 2024 को संजय ने अपने पिता कैलाश निवासी गणेशपुरा दौसा ने थाने पर रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट में कहा गया कि 30 जून 2024 को उसके दोस्त का फोन आया कि सोमनाथ चौराहे पर मोमोज खाने चलना है। तो प्रार्थी और दोस्त नरेन्द्र बाइक से सोमनाथ चौराहा पर चले गए। वहां सूरजपुरा रोड की तरफ से अज्ञात लड़के आए। उन्होंने मोबाइल, बाइक, सोने की बाली, चांदी की चेन डरा धमका कर ले ली। इसी पर मामला दर्ज कर जांच शरू की गई। वहीं, 30 जून 2024 को थाना कोतवाली दौसा और 02 जुलाई 2024 को थाना सदर दौसा में हाईवे पर भी इस प्रकार की बाइक, मोबाइल, जेवरात आदि लूट की घटना हुई। इस मामले में टीम ने कार्रवाई करते हुए अभियुक्त हेमराज पुत्र संजय सिंह जाट, कृष्णकान्त पुत्र नवल सिंह जाट, सचिन पुत्र निरंजन, रवि जांगिड़ पुत्र रजनेश को गिरफ्तार कर बाइक, जेवरात, अवैध हथियार, मोबाइल बरामद किया है। बदमाशों से ये हुआ बरामद दो देशी कट्टा 315 बोर, दो कारतूस 315 बोर और एक कारतूस 12 बोर, चार बाइक, सात मोबाइल फोन, एक चांदी चेन, दो सोने बाली, लूटी गई बाइक की नंबर प्लेट।

अलमारी के छोटे से ‘बॉक्‍स’ से न‍िकले 4 खूंखार आतंकी,दहशतगर्दों का नया ठ‍िकाना

कुलगाम जम्मू कश्मीर में सेना द्वारा आतंकवादियों के सफाए के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. शनिवार को कुलगाम जिले में दो जगहों पर हुई मुठभेड़ में  6 आतंकियों को सुक्षाबलों ने ढेर कर दिया. कुलगाम के मोदरगाम मुठभेड़ स्थल से दो आतंकवादियों के शव बरामद किए गए जबकि चिन्नीगाम स्थल से रविवार को चार शव बरामद किए गए. इस बीच चिन्निगाम फ्रिसल से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जो हैरान करने वाला है. दरअसल शनिवार रात को मुठभेड़ में मारे गए हिजबुल मुजाहिदीन के चार आतंकवादियों ने चिन्निगाम फ्रिसल में एक घर के अंदर ऐसा ठिकाना बना रखा था जिसका वीडियो देखकर सुरक्षाबल भी हैरान हैं. आतंकियों ने एक अलमारी के अंदर बंकर बना रखा था. घर के अंदर आतंकियों का खुफिया ठिकाना कुलगाम के चिनीगाम क्षेत्र जिस घर में आतंकी छिपे थे, वहां उन्होंने अलमारी के पीछे बंकर बना रखा था. मुठभेड़ में हिजबुल के चारों आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने घर के अंदर तलाशी ली तो उन्हें तयखाना मिला. इसका इस्‍तेमाल आतंकी खुद छिपने और हथियार व गोलाबारूद छिपाने के लिए करते थे. कुलगाम के चिन्निगाम में मारे गए सभी आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हुए थे. ड्रॉवर के अंदर सीक्रेट बंकर वायरल हो रहे वीडियो में सुरक्षाकर्मी एक घर के अंदर हैं जहां अलमारी के पीछे आतंकियों ने सीक्रेट बंकर बना रखा है. जवान जब एक कमरे में लगी कपड़े की अलमारी को देखते हैं तो उन्हें कुछ शक सा होता है. जैसे अलमारी के नीचे की तरफ बना ड्रॉवर को खोला जाता है तो इसमें अंदर की तरफ एक रास्ता जाता दिखा. फिर यहां लाइट जलाकर एक शख्स को अलमारी के अंदर बने सीक्रेट रास्ते के जरिए बंकर तक भेजा गया और वीडियो रिकार्डिंग की गई. इस दौरान साफ देखा जा सकता है कि अलमारी के पीछे की तरफ आतंकियों ने एक सीक्रेट बंकर बना रखा था. जिसमें वह खुद भी छिप सकते थे और हथियार भी छिपा सकते थे. बताया जा रहा है कि कुलगाम में मारे गए आतंकी इसी बंकर में छिपे थे. दो जवान भी हुए थे शहीद आपको बता दें कि कुलगाम जिले के दो गांवों में शनिवार को मुठभेड़ शुरू हुई थी. पहली मुठभेड़ मोदरगाम गांव में हुई, जहां पैरा कमांडो लांस नायक प्रदीप नैन कार्रवाई में शहीद हो गए. सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान शुरू किया और कम से कम दो से तीन आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर घेर लिया. वहीं दूसरी मुठभेड़ फ्रिसल चिनिगाम गांव में हुई, जब सुरक्षा बलों को इलाके में संभावित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के बारे में सूचना मिली. ऑपरेशन के दौरान प्रथम राष्ट्रीय राइफल्स के हवलदार राज कुमार शहीद हो गए. गांव पहुंचने पर, एक घर में छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. मुठभेड़ में एक पैरा कमांडो समेत दो सैन्यकर्मी शहीद हो गए. अभियान के बारे में बताते हुए जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक आरआर स्वैन ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आतंकवादियों का सफाया करना एक बड़ी उपलब्धि है. स्वैन ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में आतंक के खात्मे की लड़ाई अपने अंजाम तक पहुंचेगी. आतंकियों की थी बड़ी साजिश आर्मी के इस ऑपरेशन में दो सुरक्षा बल भी शहीद हो गए। वहीं दो अलग-अलग जगह पर हुए एनकाउंटर में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कुल 6 आतंकी मारे गए हैं। इस ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए जम्मू कश्मीर के डीजीपी आर.आर स्वैन के अनुसार कुलगाम में छिपे ये आतंकी कोई बड़ी साजिश रच रहे थे, जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। सुरक्षा बलों ने मार गिराए 6 आतंकी बता दें कि जम्मू कश्मीर में हुए पहले एनकाउंटर में दो आतंकियों को मारा गया। इस मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया। दूसरा एनकाउंटर कुलगाम के चिनिगम में हुआ, जहां चार आतंकियों को ढेर किया गया। इस दौरान हुई गोलीबारी में एक और जवान की शहादत हो गई। 2 एनकाउंटर में मारे गए 6 आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन के थे। कुलगाम में मारे गए आतंकियों की पहचान यावार बशीर धर, जहीद अहमद धर, तौहीद अहमद और शकील अहमद वाणी के रूप में की गई है।  

हमीद‍िया अस्‍तपाल के इमरजेंसी वार्ड का छज्‍जा गिरा

भोपाल हमीदिया अस्पताल में गत रात को मरीज और डाक्टर बाल-बाल बच गए। यहां इमरजेंसी विभाग में रात को 12.15 के आस-पास छज्जा गिर गया। उस समय में एक डाक्टर मरीजों का उपचार कर रहा था, गनीमत रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बता दें कि यहां हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना 150 से अधिक इमरजेंसी केस आते हैं। वहीं दिन में 200 से 350 तक संख्या पहुंच जाती है। डाक्टर सौमित्र बाथम ने बताया कि मैं इमरजेंसी वार्ड में केबिन में मरीजों का इलाज कर रहा था। इसी बीच खिड़की के पास का छज्जा गिर गया। इसके बाद मैं और मरीज अपना बचाव करते हुए केबिन के बाहर आ गए। इसके बाद प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। बतादें कि हमीदिया अस्पताल की इस इमरजेंसी वार्ड का उद्धाटन अगस्त 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था। और यह बिल्डिंग 727 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई थी।

“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान में ग्राम खारखेड़ी में किया गया पौध-रोपण

भोपाल प्रदेश में चलाए जा रहे पौध-रोपण कार्यक्रम “एक पेड़ माँ के नाम” के तहत प्रमुख सचिव उद्यानिकी सुखवीर सिंह और संचालक एस.बी. सिंह के नेतृत्व में उद्यानिकी अमले ने विकासखण्ड फन्दा के ग्राम खारखेड़ी में पौध-रोपण किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा है किमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए पौध-रोपण कर वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए 5 करोड़ पौधे लगाने का अभियान आरंभ किया गया है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का समर्थन करते हुये प्रदेश-वासियों को पौध-रोपण करने के लिए आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि जब हम “एक पेड़ माँ के नाम” से रोपेगें तो हमारा विशेष रूप से भावनात्मक जुड़ाव होने से उस पौधे की देखभाल, सिंचाई एवं सुरक्षा के प्रति सतर्कता रखेंगें। परिणामतः पौध-रोपण अभियान की सफलता अधिकाधिक होगी। पौध-रोपण अंतर्गत हम फल प्रजातियों का चयन करते हैं, तो इससे दोहरा लाभ होगा। हरियाली, पर्यावरण संतुलन, मृदा-नमी का संरक्षण, जैव-विविधता जैसे वानिकी लाभ के साथ ही फल उत्पादन से रोजगार एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। फलों की उपलब्धता बढ़‌ने के साथ संतु‌लित पोषण से स्वास्थ्य एवं कार्यक्षमता की दृष्टि से समाज को बहुआयामी लाभ प्राप्त होगा। उद्यानिकी विभाग सभी नर्सरी में पौध-रोपण का विशेष अभियान चलाकर ग्रामीणजन को प्रेरित करेगा।  

पूर्व विधायक अमृता मेघवाल ने पति पर मारपीट का आरोप लगाया, अस्पताल में भर्ती, ससुराल पक्ष पर केस भी दर्ज करवा दिया

जालोर  राजस्थान के जालोर की पूर्व विधायक अमृता मेघवाल के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। मेघवाल ने एक दिन पहले अपने पति एडवोकेट बाबूलाल मेघवाल के घर का ताला तोड़ घर में घुसने का प्रयास किया था। इसी दौरान कथित मारपीट का आरोप लगाया और खुद ही अस्पताल में भर्ती हो गईं। साथ ही ससुराल पक्ष पर केस भी दर्ज करवा दिया। अब इस घटना का एक सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। ससुराल पक्ष ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस को वीडियो दिखाते हुए अमृता पर केस दर्ज कराया। उनका आरोप है कि पूर्व विधायक दबंगई दिखाते हुए जबरन घर में घुस रही थी। रोकने पर गाली गलाेच करते हुए धमकियां दी और मारपीट भी की। अब जालोर पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच में जुटी है। पूर्व विधायक अमृता मेघवाला ने बुजुर्ग ससुर का धक्का मारा, धमकाया ससुराल पक्ष की ओर से दर्ज शिकायत के अनुसार तलाक होने के करीब सवा साल बाद रविवार शाम को जालोर पहुंची अमृता मेघवाला ने घर काताला तोड़कर बंद घर में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान वहां भाई के घर मौजूद अमृता मेघवाल के चचेर ससुर शिवलाल और ससुर हेमाराम ने मना किया तो आपस में कहासुनी भी हुई। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें अमृता मेघवाल किसी बुजुर्ग को धक्का मारकर गाड़ी में बैठ रही हैं। घटना के वक्त बाबूलाल मेघवाल घर पर नहीं थे। दोनों पक्षों की ओर से परस्पर मामला दर्ज करवाया गया है। अमृता मेघवाल रात को ही अस्पताल में भर्ती हो गई थीं और उन्होंने ससुराल पक्ष पर भी कई आरोप लगाए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। चुनाव में टिकट कटने के बाद हुआ पारिवारिक विवाद, बढ़ी दूरियां जालोर जिले के नोरवा हाल रामदेव कॉलोनी जालोर निवासी एडवोकेट बाबूलाल मेघवाल की 21 अप्रैल 2008 को अमृता के साथ शादी हुई थी। अमृता जब ससुराल आईं तब से राजनीति में रुचि थी, इस कारण एक बार जिला परिषद सदस्य भी निर्वाचित हुईं। बाबूलाल मेघवाल ने भी पत्नी का साथ दिया और पार्टी में पैठ बनाते हुए वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव में भाजपा से अमृता मेघवाल के लिए टिकट की मांग की। पार्टी ने विश्वास जताया और अमृता मेघवाल ने जालोर एससी आरक्षित सीट पर रेकॉर्ड तोड़ मतों से जीत हासिल की। सरकार भी भाजपा की थी, इस कारण पांच साल विधायकी जमकर की, अमृता के साथ साथ बाबूलाल भी राजनीति में पूरे सक्रिय रहे। इसी कारण वर्ष 2018 में पार्टी में इनका विरोध हुआ और अमृता मेघवाल का टिकट काटकर जोगेश्वर गर्ग को पार्टी ने टिकट दे दिया। इससे पति पत्नी में विवाद बढ़ने लगा। एक दूसरे पर आरोप, 2019 में दूरिया बढ़ी और 2023 में तलाक अमृता और बाबूलाल इसके बाद एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे। अंत में 21 जनवरी 2019 को दोनों के बीच इतना विवाद हुआ कि मिलना भी बंद हो गया। करीब तीन साल बाद अंत में पति बाबूलाल ने पारिवारिक न्यायालय जालोर में वैवाहिक सम्बन्ध विच्छेद के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसके बाद न्यायालय ने अमृता मेघवाल को कई नोटिस भेजकर उपस्थित होने को कहा। लेकिन अमृता मेघवाल न्यायालय में उपस्थित नहीं हुईं। जिस पर पारिवारिक न्यायालय ने 4 मई 2023 को वैवाहिक तलाक का फैसला बाबूलाल के पक्ष में दे दिया। अमृता मेघवाल इस अवधि अपनी बेटी के साथ जयपुर और दिल्ली रहने लगी। जयपुर में हमले की सच्चाई नहीं आई सामने विधायक कार्यकाल के बाद से अमृता मेघवाल जयपुर शिफ्ट हो गई थीं। इसके बाद कई बार विवाद सामने आए। एक बार जयपुर में एक पार्क में अमृता मेघवाल की गाड़ी पर कुछ युवकों ने हमला करने का प्रयास का मामला भी अमृता ने दर्ज कराया। लेकिन हमलावर कौन थे ? उसका पता अभी तक नहीं लग पाया है। उसकी सच्चाई सामने नहीं आई है।

अनन्या पांडे बनीं मौसी, अलाना पांडे ने दिया बेबी बॉय को जन्म

मुंबई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और अनन्या पांडे की कजिन अलाना पांडे मां बन गई हैं. अलाना ने बेबी बॉय को जन्म दिया है. उन्होंने अपने पति आइवर मैक्रे के साथ एक वीडियो शेयर करके अपने बेटे की झलक फैंस को दिखाई है. अलाना का बेबी बॉय के साथ ये वीडियो वायरल हो रहा है. उन्होंने वीडियो में बेबी बॉय का चेहरा भी फैंस को दिखा दिया है. अलाना ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- हमारा लिटिल एंजेल यहां है. वीडियो में अलाना बेटे को गोद में लेकर आती हैं और मम्मी और पापा दोनों ही बच्चे को प्यार करते हैं और किस करते हैं. अलाना के इस पोस्ट पर फैंस ढेर सारे कमेंट करके उन्हें बधाई दे रहे हैं. सेलेब्स ने दी बधाई अलाना के पोस्ट पर सेलेब्स कमेंट करके उन्हें बधाई दे रहे हैं. आलिया कश्यप ने लिखा- ओह माई गॉड. आप दोनों को बधाई. वहीं दूसरे ने लिखा- तुम्हे चार सालों से देख रही हूं. अब पेरेंट्स, बहुत खूबसूरत. एक ने लिखा- बेबी बॉय अपनी प्यारी मां की तरह लग रहा है. खुशी से झूमीं अनन्या अनन्या ने अलाना की वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की है. उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- मेरा ब्यूटीफुल बेबी बॉय भांजा यहां है. अनन्या के पोस्ट से उनकी खुशी साफ झलक रही है. अलाना पांडे एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं. उनके इंस्टाग्राम पर 1.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं. उनके मैटरनिटी फोटोशूट और बेबी शॉवर की फोटोज-वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे. अलाना जल्द ही ओटीटी डेब्यू करने जा रही हैं. उनका रियलिटी शो द ट्राइब जल्द ही प्राइम वीडियो इंडिया पर रिलीज होगा. इस शो में इंडिया के टॉप सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की लाइफ के बारे में दिखाया जाएगा. इस शो को करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शन प्रोड्यूस करेगा.

इंदौर शहर से सूखा कचरा लेने वाली कंपनी नेप्रा का कांट्रेक्ट हुआ कैंसिल

इंदौर इंदौर शहर से सूखा कचरा लेने वाली नेप्रा कंपनी का ठेका आगे नहीं बढ़ेगा। स्मार्ट सिटी बोर्ड ने कंपनी का ठेका सात वर्ष के लिए आगे बढ़ाने वाले अनुबंध को निरस्त कर दिया है। कंपनी को वर्ष 2028 के बाद इंदौर से अपना काम समेटना होगा। स्मार्ट सिटी कंपनी शहरभर से सूखा कचरा लेने का ठेका किसी नई कंपनी को देगी। नेप्रा से बकाया राशि वसूलने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी। स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी ने वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी नेप्रा को वर्ष 2018 में ठेका दिया था। कचरा लिया, लेकिन एक रुपये भी नहीं दिए वर्ष 2018 से नेप्रा ने सूखा कचरा तो लिया, पर इसके एवज में एक रुपये का भी भुगतान निगम को नहीं किया। बावजूद पूर्व निगमायुक्त प्रतिभा पाल व स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने नेप्रा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों को धता बताते हुए उसके साथ हुए मूल अनुबंध को पुरानी शर्तों के साथ सात वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। साथ ही कोरोना काल की 22 माह की अवधि को भी यह कहते हुए बढ़ाया था कि कोरोनाकाल में नेप्रा को शहर से पर्याप्त सूखा कचरा नहीं मिला। मामला संज्ञान में आने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को पत्र भी लिखा था। हाल ही में स्मार्ट सिटी बोर्ड बैठक में नेप्रा को आगे बढ़ाए अनुबंध को निरस्त कर दिया गया। महापौर ने इसकी पुष्टि की है। ज्यादा भुगतान देने को तैयार हैं कंपनियां नेप्रा का अनुबंध गलत तरीके से आगे बढ़ाया गया था। उसे प्रतिवर्ष एक करोड़ 41 लाख रुपये का भुगतान निगम को करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बावजूद इसके उसका अनुबंध बढ़ा दिया गया। गड़बड़ी सामने आने के बाद बढ़ा हुआ अनुबंध निरस्त कर दिया गया है।कई कंपनियां सूखा कचरा लेने को तैयार हैं और वे नेप्रा से कई ज्यादा राशि निगम को देने की बात कर रही हैं। हम नेप्रा से बकाया राजस्व वसूलने की भी कार्रवाई कर रहे हैं। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर नोटिस के बाद जमा 13 लाख रुपये स्मार्ट सिटी सीईओ दिव्यांक सिंह ने बताया कि भुगतान के संबंध में नोटिस जारी होने के बाद नेप्रा ने निगम में 13 लाख रुपये जमा कराए हैं। निगम को वर्ष 2018 से अब तक आठ करोड़ रुपये से अधिक वसूलना हैं। एक ही दिन में दे दी थी स्वीकृति मामले में यह बात भी सामने आई थी कि स्मार्ट सिटी के तत्कालीन अधिकारियों ने नेप्रा की ओर से अनुबंध आगे बढ़ाने के आवेदन पर 24 घंटे के भीतर ही निर्णय ले लिया था। यह भी कि कंपनी ने ठेका लेने के बाद कोई राजस्व का भुगतान नहीं किया बावजूद इसके ठेका आगे बढ़ा दिया गया था।

संदेशखाली यौन उत्पीड़न मामले में SC ने बंगाल सरकार को झटका दिया, सीबीआई जांच पर रोक की मांग वाली अर्जी भी खारिज

नई दिल्ली संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जमीनों के कब्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को झटका दिया है। अदालत ने सीबीआई जांच पर रोक की मांग वाली बंगाल सरकार की अर्जी को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही ममता सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आखिर किसी को बचाने की जरूरत क्या है। अदालत ने पूछा, ‘आखिर सरकार क्यों किसी को बचाना चाह रही है?’ अदालत ने इस मामले में बंगाल सरकार की यह कहते हुए भी खिंचाई की कि इस केस में टीएमसी का एक नेता शामिल है। इसके बाद भी आपने कुछ नहीं किया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा, ‘ये सभी मामले संदेशखाली से जुड़ी हैं। आपने आरोपी को गिरफ्तार करने समेत कोई भी ऐक्शन नहीं लिया।’ इसके अलावा अदालत ने 10 अप्रैल को दिए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने जो बातें कहीं, उसमें कुछ गलत नहीं था। इसके अलावा केस को लेकर अदालत की टिप्पणी से जांच पर कोई असर नहीं दिखेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में ममता सरकार का पक्ष रखा। सिंघवी ने अदालत में कहा कि हाई कोर्ट यह कह सकता था कि ईडी के अफसरों पर हमले के मामले में सीबीआई जांच करे। लेकिन उसकी ओर से राशन घोटाला भी सीबीआई को सौंप देना गलत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राशन घोटाले की जांच कराई। इसके अलावा यौन उत्पीड़न और जमीन कब्जाने के मसले पर भी जांच की गई। इस मामले में कुल 42 चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसके बाद भी आखिर क्यों केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। उच्च न्यायालय ने इसकी कोई वजह भी नहीं बताई थी। आपको किसी को बचाने में क्यों दिलचस्पी है? SC का तीखा सवाल   इस पर बेंच ने कहा, ‘आखिर सरकार क्यों कुछ लोगों को बचाने में दिलचस्पी ले रही है।’ इसके अलावा अदालत ने यह भी पूछा कि आखिर मामले में शामिल लोगों को कब अरेस्ट किया गया था। अदालत ने यह जानकारी 29 अप्रैल को ही मांगी थी, जब आखिरी सुनवाई हुई थी। तब भी कोर्ट ने पूछा था कि आखिर ममता बनर्जी सरकार शाहजहां शेख को क्यों बचाना चाहती है, जो टीएमसी का नेता है और दबंग है। इस पर बंगाल सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां गलत हैं क्योंकि उसने सभी संभव कदम उठाए हैं।  

अनुमति नहीं देने पर बरसे गहलोत, राजस्थान की भजनलाल सरकार को धरने-प्रदर्शन से डर

जयपुर. नई सरकार के गठन के बाद हुए फैसलों को लेकर युवाओं के अलग-अलग संगठन जनवरी से प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन लोकसभा चुनाव की अचार संहिता लगने के कारण सभी प्रकार के धरने और प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई थी। अब चुनाव संपन्न होने के साथ ही एक बार फिर से ये सभी संगठन आंदोलन की राह पकड़ना चाहते हैं परंतु इन्हें सरकार और प्रशासन द्वारा धरने की अनुमति नहीं मिल रही है। राजीव गांधी युवा मित्र संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष संजय मीणा ने बताया कि उनके द्वारा दो बार प्रशासन को धरना देने की अनुमति के लिए पत्र दिया गया परंतु दोनों बार बिना किसी कारण बताए उनकी अनुमति को निरस्त कर दिया गया। बार-बार पूछने पर यह बताया गया कि ऊपर से यह आदेश हैं कि किसी प्रकार का धरना-प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जाए। राजस्थान सरकार के गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम को जब अमर उजाला ने इस मामले में प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन किया तो उनके फोन पर उनके सहयोगी ने बताया कि साहब मीटिंग में जोधपुर हैं इसलिए अभी बात नहीं हो पाएगी। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने X पर लिखा है कि कई युवाओं एवं एक्टिविस्टों ने मेरे कार्यालय में आकर एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि वो बेरोजगारी भत्ता, रोजगार, राजीव गांधी युवा मित्र बहाली, भर्तियों की घोषणा जैसे मुद्दों पर जयपुर में धरना प्रदर्शन करना चाहते हैं परन्तु प्रशासन उन्हें सरकार के दबाव में अनुमति नहीं दे रहा है। धरना प्रदर्शन के लिए आरक्षित शहीद स्मारक से भी उन्हें बार-बार बलप्रयोग करके भगा दिया जाता है,यह उचित नहीं है। लोकतंत्र में अपने हक के लिए शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जनता का अधिकार है। उनकी बात सुनना सरकार का कर्तव्य है। मैं सरकार एवं पुलिस प्रशासन से आग्रह करता हूं कि इस तरह की अलोकतांत्रिक कार्यप्रणाली ना अपनाएं एवं जनता को उनका लोकतांत्रिक हक प्रयोग करने दें।

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