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यादव कैबिनेट का सोमवार का लंबे इंतजार के बाद हुआ विस्तार, रावत को क्यों मिला मंत्री?

भोपाल मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव कैबिनेट का सोमवार को लंबे इंतजार के बाद विस्तार हो ही गया। कांग्रेस से भाजपा में आए श्योपुर की विजयपुर विधानसभा सीट से विधायक रामनिवास रावत ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा में आए रावत अब भी कांग्रेस विधायक हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आखिर एक कांग्रेस विधायक को मंत्री क्यों बनाया?   राजभवन में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने रावत को दो बार मंत्री पद की शपथ दिलाई। मुख्य कार्यक्रम में रावत पद एवं गोपनीयता की शपथ लेते समय राज्य के मंत्री की जगह राज्यमंत्री पढ़ गए। इसके 15 मिनट बाद राज्यपाल ने रावत को कैबिनेट मंत्री के रूप में दोबारा शपथ दिलाई।  फिलहाल मोहन सरकार के कैबिनेट मंत्रियों के विभाग में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। रावत ने लोकसभा चुनाव के बीच में भाजपा की सदस्यता ले ली थी। उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने के फैसले से छह बार के विधायक रावत नाराज थे। भाजपा ने दिया बड़ा संदेश रामनिवास रावत को मंत्री बनाने और कार्यसमिति की बैठक में सुरेश पचौरी को मंच पर स्थान देकर भाजपा ने बड़ा संदेश दिया है। कांग्रेस से भाजपा में आने वाले नेताओं को भरोसा दिलाया कि सभी को सम्मान मिलेगा। लोकसभा चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेसियों ने भाजपा की सदस्यता ली थी। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का दावा है कि चार लाख से अधिक कांग्रेस एवं अन्य दलों के कार्यकर्ता भाजपा में आए हैं। इनमें विधायक, पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्य के पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक के साथ ही मौजूदा महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारी शामिल हैं। मुरैना लोकसभा सीट पर जीत का इनाम लोकसभा चुनावों में मुरैना सीट जातिगत फेक्टर के चलते फंस गई थी। 2019 के चुनाव में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर चुनाव जीते थे। यहां से शिवमंगल सिंह तोमर को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस ने नीटू सिकरवार को प्रत्याशी बनाया था। रावत का विजयपुर विधानासभा क्षेत्र मुरैना लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। इस सीट को फंसा देख भाजपा ने बड़ा दांव चला। ओबीसी वोटरों को साधने की रणनीति बनाई। सिकरवार और शिवमंगल एक ही जाति से होने की वजह से वोट बंट रहे थे। रावत से संपर्क किया गया। वह शर्तों के साथ भाजपा में शामिल होने को तैयार हो गए। रावत के भाजपा में शामिल होने से कड़ी टक्कर के बीच भाजपा मुरैना सीट जीतने में सफल रही। मंत्री बनने के बाद इस्तीफा रामनिवास रावत ने भाजपा की सदस्यता के बाद भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया था। वह भाजपा की तरफ से उनसे किए वादे को पूरा करने का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने सोमवार को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया। अब विजयपुर विधानसभा सीट पर छह माह के अंदर चुनाव होगे। इसके साथ ही बीना से विधायक निर्मला सप्रे ने भी भाजपा में शामिल होने के बाद अभी अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। चर्चा है कि वह भी जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ा सवाल…नीट यूजी पेपर लीक मामले में सरकार ने अब तक क्या किया?अगली सुनवाई 11 जुलाई को

नई दिल्ली नीट पेपर लीक विवाद इन दिनों देश में बड़ा मुद्दा बना हुआ है. आज सुप्रीम कोर्ट में नीट पेपर लीक, री-एग्जाम और परीक्षा से जुड़ी अन्य अनियमितताओं पर सुनवाई हुई है. इस पीठ का नेतृत्व भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और दो अन्य न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा कर रहे थे. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान नीट परीक्षा और पेपर लीक के कई तथ्यों पर बात की है और कहा है कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश सभी वकील इस बात पर अपनी दलीलें पेश करेंगे कि दोबारा परीक्षा क्यों होनी चाहिए और केंद्र तारीखों की पूरी सूची भी देगा. सीजेआई के अनुसार, अगली सुनवाई 11 जुलाई को होनी है. सुनवाई में सीजेआई ने क्या-क्या कहा? याचिकाकर्ताओं के वकील ने बहस शुरू करते हुए कहा 9 फरवरी को सभी कैंडिडेट्स ने नीट के लिए आवेदन किए थे. इसके बाद परीक्षा हुई और 4 जून को परिणाम सामने आए. वकील ने बताया कि 5 मई को परीक्षा आयोजित की गई थी और 4 मई को टेलिग्राम पर पेपर के प्रश्न और उत्तर वायरल हो रहे थे. इसपर सीजीआई ने सबसे पहले पूछा कि यह बताइए कि एनटीए ने एग्जाम की घोषणा कब की थी. बैंक से लीक हुए पेपर पर CJI ने पूछा आधार जब वकील ने बताया कि बैंक से पेपर आने में देरी हुई और इस दौरान लीक की घटना हुई है तो इसपर सीजेआई ने कहा कि ‘क्या इस बात को माना जाए कि पेपर लीक हुआ है?’ आपके मुताबिक परीक्षा की पूरी विश्वसनीयता खत्म हो गई है और दागी व बेदाग लोगों में अंतर करना संभव नहीं है. साथ ही पूछा कि इसका तथ्यात्मक आधार क्या है? पेपर लीक को लेकर क्या बोले CJI? सीजेआई ने कहा कि यदि परीक्षा की पवित्रता खत्म हो जाती है, तो दोबारा परीक्षा का आदेश देना होगा. यदि दागी और बेदाग को अलग करना संभव नहीं है, तो दोबारा परीक्षा का आदेश देना होगा. यदि लीक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हुआ है, तो यह जंगल में आग की तरह फैल सकता है और बड़े पैमाने पर लीक हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया में “रेड फ्लैग” की जांच के लिए एक समिति गठित करने का सुझाव दिया है. सीजेआई ने आगे कहा कि यह प्रतिकूल मुकदमा नहीं है, क्योंकि हम जो भी निर्णय लेंगे, वह छात्रों के जीवन को प्रभावित करेगा. 67 उम्मीदवारों ने 720/720 अंक प्राप्त किए थे, अनुपात बहुत कम था. दूसरा, केंद्रों में बदलाव, यदि कोई अहमदाबाद में पंजीकरण करता है और अचानक चला जाता है. हमें अनाज को भूसे से अलग करना होगा ताकि पुन: परीक्षण किया जा सके. हम NEET के पैटर्न को भी समझना चाहते हैं. गलत करने वालों का पता लगाया जाए सीजेआई ने आगे कहा कि सवाल यह है कि इसकी पहुंच कितनी व्यापक है? यह एक स्वीकार्य तथ्य है कि लीक हुआ है. हम केवल यह पूछ रहे हैं कि लीक से क्या फर्क हुआ है? हम 23 लाख छात्रों के जीवन से निपट रहे हैं. यह 23 लाख छात्रों की चिंता है जिन्होंने परीक्षा की तैयारी की है, कई ने पेपर देने के लिए काफी ट्रैवल भी किया है. इसमें खर्चा भी हुआ है. इसके बाद सीजेआई ने वकीलों ने पूछा लीक के कारण कितने छात्रों के परिणाम रोके गए हैं? छात्र कहां हैं? 23 जून को 1563 छात्रों की दोबारा परीक्षा हो चुकी है. क्या हम अभी भी गलत काम करने वालों की तलाश कर रहे हैं. क्या हम छात्रों का पता लगा पा रहे हैं? इसमें बहुत से छात्र शामिल हैं. परीक्षा रद्द करना अंतिम उपाय तब ही होगा जब जांच में सामने आएगा कि लीक कैसे और कहां से हुआ है. सीजेआई ने सरकार से किया सवाल CJI ने पूछा कि हमारी साइबर फोरेंसिक टीम के पास किस तरह की टेक्नोलॉजी है. क्या हम सभी संदिग्ध का एक डेटा तैयार नहीं कर सकते. इस परीक्षा में जो हुआ और हम जो कदम उठा रहे हैं उससे आगे पेपर लीक नहीं होना चाहिए. क्या इस मामले में किसी एक्सपर्ट को शामिल कर सकते है? इस मामले में सेल्फ डिनायल सही नहीं होगा. CJI ने पूछा कि हमें ये बात भी देखनी है कि भविष्य में इस तरह की बात न हो. उसको लेकर क्या किया जा सकता है. हम इस प्रतिष्ठित परीक्षा की बात कर रहे हैं. मिडिल क्लास परिवार के अभिभावक बच्चे मेडिकल में जाने के लिए लालायित रहते हैं. CJI ने कहा कि हम सरकार से ये जानना चाहते हैं कि सरकार ने इस मामले में क्या किया है? 100 फीसदी अंक 67 छात्रों को मिले हैं. हमें इस बात को समझना होगा कि मार्क देने का तरीका क्या है. 11 जुलाई को होगी अगली सुनवाई क्या हम इस डेटा को साइबर फोरेंसिक विभाग में डेटा एनालिटिक्स यूनिट में डालकर पता लगा सकते हैं, क्योंकि हमें यह पहचानना है कि क्या पूरी परीक्षा प्रभावित हुई है, क्या गलती करने वालों की पहचान करना संभव है, ऐसी स्थिति में केवल उन्हीं छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा का आदेश दिया जा सकता है. आखिर में सीजेआई ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश सभी वकील इस बात पर अपनी दलीलें पेश करेंगे कि दोबारा परीक्षा क्यों होनी चाहिए और केंद्र तारीखों की पूरी सूची भी देगा और हम इस मामले को बुधवार को सुन सकते हैं. सीबीआई भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सकती है.

सांसद महुआ मोइत्रा फिर नई मुसीबत में फंसती दिख रही, क्या सांसदी फिर जाएगी

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा फिर नई मुसीबत में फंसती दिख रही हैं. उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. ये केस राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा पर अभद्र टिप्पणी को लेकर दर्ज किया गया है.  भारतीय न्याय संहिता के तहत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ये पहली एफआईआर है. राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से दिल्ली पुलिस कमिश्नर के सामने महुआ मोइत्रा के खिलाफ शिकायत दी गई थी. इसी आधार पर स्पेशल सेल ने केस दर्ज किया है. क्या है मामला? दो जुलाई को यूपी के हाथरस में सत्संग के बाद भगदड़ मची थी. इस भगदड़ में 120 से ज्यादा मौतें हुई थीं. मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं. चार जुलाई को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा हाथरस गई थीं. इस दौरान एक शख्स पीछे छाता लेकर चल रहा था. इसका वीडियो सामने आया, जिस पर महुआ मोइत्रा ने अभद्र टिप्पणी की थी. हालांकि, बाद में महुआ ने इसे डिलीट कर दिया था. इस पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया. महिला आयोग ने अपनी शिकायत में कहा कि महुआ की टिप्पणी बेहद अपमानजनक हैं और महिलाओं के सम्मान के साथ जीने के अधिकार का सरासर उल्लंघन है. महिला आयोग ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. इसके अलावा, तीन दिन के भीतर एक्शन रिपोर्ट भी मांगी है. एफआईआर में कौनसी धारा? महिला आयोग ने आरोप लगाया था कि महुआ मोइत्रा की टिप्पणी न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि एक महिला के गरिमा के अधिकार का उल्लंघन भी है. महिला आयोग ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 के तहत केस दर्ज करने की मांग की थी. महिला आयोग की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के तहत केस दर्ज किया है. X पर महिला आयोग की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए महुआ ने लिखा, ‘दिल्ली पुलिस इस स्वतः संज्ञान आदेश पर तुरंत कार्रवाई करें. अगर आपको अगले तीन दिन में तुरंत गिरफ्तारी के लिए मेरी जरूरत हो तो मैं नादिया में हूं.’ महुआ ने महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा पर तंज कसते हुए भी लिखा, ‘मैं अपना छाता खुद पकड़ सकती हूं.’ कितनी सजा हो सकती है? भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 कहती है कि जो कोई भी महिला की गरिमा को अपमानित करने के इरादे से कुछ बोलता है, कुछ आवाज निकालता है, कुछ इशारे करता है या फिर कुछ भी ऐसा करता है जिससे महिला की निजता में दखल होता है तो दोषी पाए जाने पर जेल की सजा होगी, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर जुर्माने की सजा का भी प्रावधान है. तो क्या चली जाएगी सदस्यता? कानूनन अगर किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो तत्काल उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी. 1951 में आए जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(3) में लिखा है कि अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो तत्काल उसकी सदस्यता चली जाएगी. इसके अलावा, सजा पूरी होने के बाद अगले छह साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाती है. जुलाई 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी मौजूदा सांसद या विधायक को दोषी ठहराया जाता है तो जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(1), 8(2) और 8(3) के तहत वो अयोग्य हो जाएगा. ऐसे में अगर इस मामले में महुआ मोइत्रा को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो उनकी लोकसभा की सदस्यता चली जाएगी. पिछले साल चली गई थी सदस्यता टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पिछले साल ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में फंस गई थीं. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उनपर रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछने का आरोप लगाया था. महुआ मोइत्रा पर आरोप लगा था कि उन्होंने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछे थे. ये भी आरोप था कि उन्होंने हीरानंदानी और हीरानंदानी ग्रुप को लोकसभा वेबसाइट के लिए अपने लॉगइन क्रेडेंशियल दिए थे, ताकि वो इसका इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए कर सकें. महुआ ने हीरानंदानी को पासवर्ड देने की बात मानी थी. उन्होंने कहा था कि उन्होंने हीरानंदानी को पासवर्ड इसलिए दिया था, ताकि उनके ऑफिस से कोई सवाल टाइप और अपलोड कर दे. उन्होंने कहा था कि कोई भी उनकी जानकारी के बगैर सवाल नहीं डाल सकता था. हालांकि, लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने महुआ को दोषी मानते हुए सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी. इसके बाद 8 दिसंबर 2023 को उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई थी.  

15 साल पहले हुए विवाद का बदला, 70 साल की महिला की दुष्कर्म के बाद हत्या

शहडोल सीने मे 15 साल तक बदले की आग सुलगती रही। आखिरकार उसने फिर 70 वर्षीय महिला के साथ दुष्कर्म किया और फिर मौत के घाट उतार दिया। केशवाही चौकी क्षेत्र में 28 जून को मिली महिला की लाश की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। आरोपी गिरफ्तार हो चुका है।    चौकी प्रभारी आशीष झारिया ने बताया कि 28 जून की सुबह चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बलबहरा मे पापन साहू के खेत से अज्ञात बुजुर्ग महिला की लाश बरामद हुई थी। बाद में मृतका की पहचान राम बाई सिंह (कदम फूल) गोंड, उम्र 70 साल, निवासी बलबहरा के रूप मे हुई थी। मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की गई तो यह मामला हत्या का निकला। आरोपी कमल बैगा पिता रामेशु बैगा, 32 वर्ष, निवासी ढोलकू को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने हत्या कबूल कर ली है। कमल ने किया चकित करने वाला खुलासा पुलिस को पूछताछ में कमल ने बताया कि वह पिछले 15 साल से महिला से बदला लेने की फिराक में था। वह महिला को करीब 15 साल पहले काम करने अपने परिचित के ईंट भट्टे पर लेकर गया था। वहां उसकी वजह से कमल को काफी जलील होना पड़ता था। कुछ समय बाद उसकी किडनी मे दर्द रहने लगा। उसे सूखा मल खाते देखा तो संदेह हुआ कि उसने जादू-टोना किया है। इसी कारण उसे किडनी मे दर्द रहता है। 27 जून की रात को वह रामबाई के घर गया। मारते-पीटते उसे खेत तक ले गया। वहां उसके साथ दुराचार करने के बाद मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद ही पंद्रह साल से जल रही सीने की आग को ठंडक मिली।  

मैहर में सनसनीखेज घटना, नाबालिग प्रेग्नेंट लड़की ने आरोपी के घर के सामने जहर खाकर दे दी जान

मैहर मैहर जिले के ताला थाना क्षेत्र के मुकुंदपुर में रिश्ते को शर्मशार करने की एक घटना के बाद पुलिस का गैरजिम्मेदाराना चेहरा सामने आया है, जिससे आहत होकर किशोरी ने खुदकुशी कर ली। मामले के तूल पकड़ने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी अनुसार रीवा जिले के जवा थाना क्षेत्र की 17 वर्षीय नाबालिग लड़की का ननिहाल मैहर जिले के मुकुंदपुर क्षेत्र में है, जहां आने-जाने के दौरान ममेरे भाई ने बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बना लिए, जिससे नाबालिग गर्भवती हो गई। यह बात पता चलने पर उसने शादी की बात कही तो आरोपी टालमटोल करते हुए लगातार दैहिक शोषण करता रहा। जब गर्भ 8 माह का हो गया, तब पीड़िता ने परिजनों को आपबीती सुनाई तो माता-पिता ने लोकलाज के डर से युवक और उसके घरवालों से मिलकर शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन आरोपी किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं था। पुलिस का गैर जिम्मेदाराना चेहरा परेशान होकर पीड़िता और उसके पिता ने 4 जुलाई को मुकुंदपुर चौकी पहुंचकर फरियाद की, मगर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को पकड़ने की बजाय, पुलिस समझौता करने की सलाह देने लगी। इतना ही नहीं युवक को बुलाकर दबाव बनाया तो वह नाबालिग से शादी करने को राजी हो गया, मगर थाने से लौटते ही मुकर गया और पिता-पुत्री को घर से भगा दिया। आरोपी के सामने निगला जहर तब दोनों लोग गांव के लिए निकल गए, मगर रीवा पहुंचते ही नाबालिग बस से उतरकर फिर मुकुंदपुर आई और 4 जुलाई को आरोपी के घर के सामने जहर निगल लिया। उसे गंभीर हालत में रीवा संजय गांधी ले जाया गया, जहां महिला थाना पुलिस ने 5 जुलाई को बयान दर्ज कर जीरो पर मामला दर्ज कर ताला पुलिस को सूचित किया पर तब भी आरोपी को नहीं पकड़ा गया। मौत के बाद जागी खाकी 6 जुलाई की रात को पीड़िता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया, जिसकी जानकारी मिलते ही ताला पुलिस के हाथ-पैर फूल गए और फौरन दबिश देकर 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार कर लिया, जिसे रविवार दोपहर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। इस बीच पुलिस की कार्यशैली से नाराज परिजनों के विरोध के चलते 7 जुलाई को मृतिका के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। इस मामले में अमरपाटन एसडीओपी एसके सिंह ने कहा कि नाबालिग के परिजन पहले मामला दर्ज करने के बजाय युवक को समझाइश देने में मांग रहे थे। इस मामले में नए सिरे से उनके बयान लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यानिक सिनर क्वार्टर फाइनल में, कोको गॉफ बाहर

लंदन  ऑस्ट्रेलियाई ओपन चैंपियन यानिक सिनर ने सीधे सेटों में जीत दर्ज करके विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया लेकिन महिला वर्ग में कोको गॉफ को बाहर का रास्ता देखना पड़ा। सिनर ने 14वीं वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन के खिलाफ 6-2, 6-4, 7-6 (9) से जीत दर्ज की। उनका अगला मुकाबला दानिल मेदवेदेव से होगा। एक अन्य क्वार्टर फाइनल मैच कार्लोस अल्काराज और टॉमी पॉल के बीच खेला जाएगा। गत चैंपियन अल्काराज ने 16वें वरीय उगो हम्बर्ट को 6-3, 6-4, 1-6, 7-5 से पराजित किया। पॉल ने रॉबर्टो बॉतिस्ता अगुट को 6-2, 7-6 (3), 6-2 ही हरा कर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। मेदवेदेव ने ग्रिगोर दिमित्रोव के पहले सेट में पांव पर चोट लग जाने के कारण बाहर हो जाने से अंतिम आठ में प्रवेश किया। महिला वर्ग में मेडिसन कीज के तीसरे सेट में 5-5 के स्कोर पर हट जाने के कारण जैस्मीन पाओलिनी ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। पाओलिनी का अगला मुकाबला एम्मा नवारो से होगा, जिन्होंने मौजूदा अमेरिकी ओपन चैंपियन गॉफ को 6-4, 6-3 से हराया। क्वालीफायर लुलु सन भी क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई है जहां उनका मुकाबला डोना वेकिच से होगा। सन ने 2021 की अमेरिकी ओपन चैंपियन एम्मा राडुकानू को 6-2, 5-7, 6-2 से हराया। यह 2010 के बाद पहला अवसर है जबकि महिला वर्ग में किसी क्वालीफायर ने अंतिम आठ में प्रवेश किया। वेकिच ने बारिश से प्रभावित एक अन्य मैच में पाउला बडोसा को 6-2, 1-6, 6-4 से हराया।    

शहीद प्रदीप नैन को अंतिम विदाई देने आर्मी के अफसर, जवान, स्थानीय प्रशासन, नेता और हजारों लोग पहुंचे, शहीद प्रदीप अमर रहे के नारे गूंजते रहे

जींद, कुलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए हरियाणा के जींद जिले के जाजनवाला गांव के प्रदीप नैन के अंतिम दर्शन के लिए उनके गांव बड़ी संख्या में लोग और आर्मी के जवान पहुंचे. आतंकियों से लोहा लेते हुए प्रदीप नैन शहीद हो गए थे. सोमवार को शहीद को अंतिम विदाई दी गई. इस मौके पर वहां मौजूद हर एक की आंखों में आंसू थे. शहीद प्रदीम नैन को श्रद्धांजलि देने और बड़ी संख्या में  आर्मी के अधिकारी, पूर्व अधिकारी., जवान और पुलिस के जवान पहुंचे हुए थे. साथ ही आसपास के इलाके के लोग भी शहीद को अंतिम यात्रा में शामिल हुए. मौके पर आर्मी वेटरन एसोसिएशन के जोनल जोनल प्रेसिडेंट राजबीर सिंह ने बताया शहादत से पहले 5 आतंकवादियों को मार गिराया था. राजबीर सिंह ने कहा कि पैरा कमांडो लांस नायक प्रदीप नैन जम्मू कश्मीर के कुलगाम में जवानों की टुकड़ी को लीड कर रहे थे. गोली लगने से प्रदीप की शहादत हुई. प्रदीप को श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के गांव के लोग और सभी ग्रामीण पहुंचे हुए थे. इस दौरान मौके पर स्थानीय प्रशासन भी मौजूद थी. राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, कैबिनेट मंत्री कमल गुप्ता और स्थानीय विधायक रामनिवास सूरज खेड़ा भी अंतिम विदाई में शामिल हुए. इस दौरान प्रदीप अमर रहे के नारों से उनका गांव गूंजता रहा. पूरे जाजनवाला गांव में दो दिन से किसी घर में चूल्हा भी नहीं चढ़ा है.आस पास के गांवों के हजारों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए. शहीद की पत्नी के जज्बे को सलाम जब शहीद लांस नायक प्रदीप नैन की अंतिम यात्रा निकली तो प्रदीप की गर्भवती पत्नी मनीषा नैन अंतिम यात्रा के पीछे पीछे गर्भ में पल रहे अपने बच्चे को संभलाते हुए साथ-साथ चल रही थी. घर से एक किलोमीटर दूर स्थित शमशान तक  पत्नी मनीषा नैन पैदल ही पहुंची. मनीषा का कहना था कि मैं इसलिए नहीं रो रही हूं कि कहीं शहीद की आत्मा को ठेस न पहुंचे.

राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस संबंधों की समीक्षा के लिए उत्सुक हूं: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर दृष्टिकोण साझा करने के साथ ही एक शांतिपूर्ण एवं स्थिर क्षेत्र के लिए सहायक भूमिका निभाने को उत्सुक हैं। रूस और ऑस्ट्रिया के दो दिवसीय दौरे पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक बयान में यह बात कही। मोदी और पुतिन मंगलवार को 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में मिलेंगे। इस दौरान वे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने के तरीके तलाशने पर विमर्श करेंगे। रूस में अपनी यात्रा पूरी करने के बाद मोदी ऑस्ट्रिया के लिए रवाना होंगे। यह, विगत 40 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां की पहली यात्रा होगी। मोदी ने बयान में कहा, ”भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पिछले 10 वर्षों में और बढ़ी है, जिसमें ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और लोगों से लोगों का संपर्क आदि क्षेत्र शामिल हैं।’’ उन्होंने कहा, ”मैं, मेरे मित्र राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मामलों पर दृष्टिकोण साझा करने को लेकर आशान्वित हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम शांतिपूर्ण एवं स्थिर क्षेत्र के लिए सहायक भूमिका निभाना चाहते हैं। यह यात्रा मुझे रूस में जीवंत भारतीय समुदाय से मिलने का अवसर भी प्रदान करेगी।’’ प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रिया को भारत का ‘दृढ़ और विश्वसनीय साझेदार’ बताया और कहा कि इस दौरे पर उन्हें राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वान डेर बेलन और चांसलर कार्ल नेहमर से मिलने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ऑस्ट्रिया हमारा दृढ़ और विश्वसनीय भागीदार है और हम लोकतंत्र और बहुलवाद के आदर्शों को साझा करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ”पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। मैं नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के नए और उभरते क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अपनी चर्चाओं को लेकर आशान्वित हूं।’’ मोदी ने कहा कि वह दोनों पक्षों की कारोबारी हस्तियों के साथ विचारों के आदान-प्रदान को लेकर आशान्वित हैं ताकि परस्पर लाभकारी व्यापार एवं निवेश अवसरों की संभावना तलाशी जा सके। उन्होंने कहा, ”मैं ऑस्ट्रिया में भारतीय समुदाय से भी बातचीत करुंगा, जो अपने पेशेवर रूख और आचरण के लिए जाने जाते हैं।’’  

मोबाइल पर सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने से नेता नहीं बनोगे, नेताओं और कार्यकर्ताओं दिग्विजय की नसीयत

भोपाल पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आरएसएस की दिशा में चलकर काम करने की सलाह दी। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी से सीख हासिल करने की नसीहत दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले नए नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिदायत दी है कि सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ सेल्फी अपलोड करने से नेता नहीं बन पाओगे। नेता बनने के लिए लोगों के बीच जाना होगा। गांव, मुहल्ले में जाना पड़ेगा। लोगों से मिलना और उनके सुख दुख में शामिल होना पड़ेगा। लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनना और इनके समाधान के प्रयास करना ही लोगों से जुड़ाव का कारण बन पाएगा। पहले दी थी यह सीख इससे पहले दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आरएसएस की तर्ज पर काम करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था जिस तरह आरएसएस की पहुंच घर घर तक है, कांग्रेस को भी वही मजबूत पकड़ बनाने की जरूरत है।

पश्चिम मध्य रेलवे में अप्रैल से जून के बीच ट्रेनों में पांच साल की तुलना में इस वर्ष सबसे ज्यादा यात्रियों ने सफर किया

जबलपुर कंफर्म टिकट वालों के आलावा बेटिकट और वेटिंग वालों ने की बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए रेलवे बोर्ड ने अपने 2015 के आदेश को दोहराते हुए इसका सख्ती से पालन करने कहा। इस आदेश में बोर्ड ने स्पष्ट किया कि ट्रेन के स्लीपर, एसी कोच में न तो वेटिंग टिकट लेकर यात्रा की जा सकती है और न ही बिना टिकट। टिकट जांच दल ने ऐसे यात्रियों से गंतव्य तक का किराया और जुर्माना न लिया जाए, बल्कि जांच के दौरान अगले स्टेशन तक का किराया-जुर्माना लेकर वहां उतार दिया जाए। हर दिन ऐसे लगभग 110 से 130 यात्री ट्रेन से उतारे जा रहे जबलपुर रेल मंडल ने 15 जून से इस आदेश का सख्ती से पालन किया तो न सिर्फ यात्रियों की भीड़ में 20 से 30 फीसद की कमी आई, बल्कि बिना टिकट और वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करने वालों से होने वाली कमाई में भी 30 से 40 फीसद की कमी आ गई है। मंडल में जबलपुर, कटनी, सतना, सागर और दमोह में हर दिन ऐसे लगभग 110 से 130 यात्री ट्रेन से उतारे जा रहे हैं। पिछले तीन माह में ट्रेनों में अतिरिक्त भीड़ बढ़ी है। इसको लेकर न सिर्फ मंडल, बल्कि रेलवे जोन और बोर्ड चिंतित है। भीड़ को कम करने के लिए टिकट जांच दल से कहा गया है कि वे बिना टिकट और वेटिंग टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों की गंतव्य तक टिकट न बनाएं, बल्कि अगले स्टेशन की टिकट बनाकर उन्हें वहां उतारें। इस निर्णय से ट्रेनों में भीड़ और आय, दोनों में कमी आई है। सख्ती से पालन किया तो घट गई आय रेलवे बाेर्ड के आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश जबलपुर समेत देशभर के सभी रेल मंडल और जोन को दिए गए हैं। इस आदेश के पालन की वजह से जबलपुर रेल मंडल की आय 30 से 40 फीसदी की कमी आई है। मई माह में मंडल की आय प्रतिदिन औसतन 22 से 24 लाख रुपये थी, जून में यह 14 से 16 लाख प्रति दिन तक पहुंच चुकी है। वहीं जुलाई के पहले सप्ताह की आय में भी 30 से 35 फीसदी की कमी आई है। यही हालात रहे तो बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्री से जुर्माने से वसूली की जाने वाली आय में 50 से 60 फीसदी तक की कमी आएगी। गंतव्य की जगह, अगले स्टेशन पर उतारे यात्री जबलपुर रेल मंडल में रेलवे बोर्ड के आदेश पर सख्ती के पालन के निर्देश दिए हैं। इसका असर यह हुआ है कि जबलपुर रेल मंडल हर दिन बिना टिकट यात्री करने वाले और वेटिंग टिकट पर यात्रा करने वाले, दोनों को गंतव्य की जगह अगले रेलवे स्टेशन पर उतार रहा है। सबसे ज्यादा यात्री वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करने वाले जबलपुर मंडल में हर दिनों ऐसे यात्रियों की संख्या करीब 110 से 130 हैं। इनमें जबलपुर में हर दिन औसतन 30, कटनी में 30, सतना में 20, सागर में 20, नरसिंहपुर में 30 उतारे जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा यात्री वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करने वाले हैं। भीड़ बढ़ी तो हकीकत आई सामने दरअसल रेलवे विशेषज्ञ ट्रेनों में भीड़ बढ़ने की वजह पर अध्ययन कर रहे हैं। इस दौरान तीन बड़े कारण नजर आए हैं।     पहला- कोरोना काल के बाद ट्रेन में सफर करने वाले यात्री घटे, लेकिन संख्या बढ़ी।     दूसरा – रेलवे ने स्लीपर और जनरल कोच कम कर, एसी कोचों की संख्या बढ़ाई     तीसरा- काउंटर से ली गई आरक्षित टिकट में सफर करने की अनुमति देना है। इन ट्रेनों में यात्री ज्यादा उतारे     रीवांचल एक्सप्रेस     अमरावती एक्सप्रेस     जनशताब्दी एक्सप्रेस     गोंडवाना एक्सप्रेस     जनता एक्सप्रेस     चित्रकूट एक्सप्रेस     साकेत एक्सप्रेस     पवन एक्सप्रेस     काशी एक्सप्रेस     गोदान एक्सप्रेस  

‘मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना’: तेंदूखेड़ा एसडीएम अभिनाश रावत ने बताया कि जांच में नहीं मिले प्रतिष्ठान

दमोह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में युवाओं के लिए शुरू की मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में दमोह के तेंदूखेड़ा विकासखंड में की गई गड़बड़ी की जांच पूरी हो गई है। जिसमें मौके पर प्रतिष्ठान नहीं मिले। अब कलेक्टर को इस मामले में कार्रवाई करनी है। यह पूरा मामला करीब एक माह पहले सामने था। जिसकी सत्यता जानने अधिकारियों ने इस योजना की जांच कराई थी। जानकारी तो यह मिल रही है यह मामला केवल तेंदूखेड़ा ब्लाक का उठाया था, लेकिन कलेक्टर ने पुरे जिले की जांच कराई और तेंदूखेड़ा ब्लाक जैसे आलम पूरे जिले में देखने मिले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पूर्व शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य राज्य में बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के लिए उन्हें स्किल ट्रेनिंग दिया जाना था। योजना के तहत युवाओं को अलग-अलग सेक्टर्स में ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें मानदेय यानी स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इस स्कीम में 800 कोर्स के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह योजना अगस्त 2023 में शुरू हुई थी जिसमें जमीनी स्तर पर ऐसा फर्जीबाड़ा हुआ की धरातल पर योजना थी ही नही केवल कागजों में इसका संचालन हो रहा था। तेंदूखेड़ा ब्लाक में हुआ फर्जीवाड़ा यह मामला दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक से उठाया गया था। जिन प्रतिष्ठानों का पंजीयन हुआ था, वह मौके पर नहीं थे, लेकिन प्रतिष्ठान के संचालक कागजों में यह दावा कर रहे थे कि प्रत्येक प्रतिष्ठानों पर 24, 24 बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे है। जिसके बाद दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने इसकी हकीकत जानने के लिए पहले तेंदूखेड़ा में सीखो कमाओ योजना के प्रतिष्ठानो की जांच कराई, लेकिन वहां प्रतिष्ठान नहीं मिले तो फिर पूरे जिले में पंजीकृत प्रतिष्ठानों की जांच कराई गई और अब जानकारी यह मिल रही है की पूरे जिले का आलम तेंदूखेड़ा ब्लाक जैसा समझ में आ रहा है। तेंदूखेड़ा ब्लाक में 83 प्रतिष्ठान पंजीकृत है, जिनमें 40 ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जहां 19, 19 बेरोजगार युवा प्रशिक्षण ले रहे थे। इस मामले की जांच पड़ताल की गई तो पता चला की बेरोजगार युवाओं के लिए चलाई गई योजना जमीनी स्तर पर मजाक बन गई है और इस योजना में शासकीय कार्यलयों में पदस्थ कर्मचारी इसका लाभ ले रहे है। जिन बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण की बात कही जा रही है वह मौके पर कभी गये ही नहीं और न उनको इस तरह के प्रशिक्षण की कोई जानकारी है। तेंदूखेड़ा एसडीएम अभिनाश रावत ने दमोह कलेक्टर के निर्देश पर टीम बनाई और जांच कराई तो मामला पूरी तरह साफ हो गया मामले में लगाई सत्यता की मुहर जांच के लिए दमोह कलेक्टर ने अलग अलग विभाग के अधिकारियों को प्रतिष्ठानों की लिस्ट भेजी थी। तेंदूखेड़ा में एसडीएम, तहसीलदार, जनपद सीईओ नगर परिषद सीएमओ को प्रतिष्ठानो की जांच करनी थी। जांच हुई तो कई प्रतिष्ठान तो उस जगह पर मिले ही नहीं, जहां उनके संचालन का पता लिखा था। जो मिले वहां कोई युवा मौजूद नहीं थे जो प्रशिक्षण ले रहे है। प्रतिष्ठान वालों ने खुद भी कबूल किया है कि उन्होंने किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया। उनको तो यही जानकारी मिली थी कि पोर्टल पर प्रतिष्ठान का पंजीयन करो मेंबर की जगह 24 संख्या लिख दो हर माह शासन से राशि आएगी जो उन्होंने किया। पूरे मामले की जांच में क्या हुआ इसको लेकर जब तेंदूखेड़ा एसडीएम अभिनाश रावत ने बताया कि जांच में प्रतिष्ठान नहीं मिले। कुछ तो लापता है और जो मिले वहां पर प्रशिक्षण लेने वाले युवा नहीं मिले हैं। पूरा प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर के पास भेजा गया है आगे क्या होगा इसकी जानकारी कलेक्टर से ही मिल सकती है।

नक्सलियों की वारदात से इलाके में दहशत, छत्तीसगढ़-सुकमा में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली की हत्या

सुकमा. सुकमा में एक बार फिर से नक्सलियों के द्वारा एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया है। जहां आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सली के घर में घुसकर दर्जन भर नक्सलियों ने पूर्व नक्सली की हत्या कर दी। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार दो दर्जन से अधिक हथियारबंद नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया है वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। मामले की पुष्टि करते हुए सुकमा एसपी किरण चौहान ने बताया कि थाना क्षेत्र किष्टाराम के ग्राम सनमपेंटा में आत्मसमर्पित नक्सली बारसे मासा की नक्सली संगठन द्वारा हत्या करने की जानकारी प्राप्त हुई है। जिस पर थाना किष्टाराम मे अपराध पंजीबद्ध कर अग्रिम कार्यवाही की जा रही हैं। गौरतलब है कि मृतक बारसे मासा ने विगत कुछ दिनों पूर्व ही आंध्र पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था तथा वहां आत्मसमर्पण करने के उपरांत अपने ग्राम सनमपेंटा कुछ दिनों से निवास कर रहा था । मृतक बारसे मासा 2010 में नक्सली संगठन मे शामिल होने के उपरांत किष्टाराम क्षेत्र में सक्रिय रहा था ।

पहले चरण में छत्तीसगढ़ी, सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी और कुडुख में कोर्स होंगे तैयार

छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में स्थानीय बोली में प्रारंभिक शिक्षा जल्द नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आदिवासी समुदायों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने महत्वपूर्ण कदम 18 स्थानीय भाषाओं-बोलियों में स्कूली बच्चों की पुस्तकें की जा रही तैयार पहले चरण में छत्तीसगढ़ी, सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी और कुडुख में कोर्स होंगे तैयार रायपुर छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के बच्चे स्थानीय बोली व भाषा में जल्द ही पढ़ाई कर सकेंगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए विष्णुदेव सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत सरकार आदिवासी अंचलों में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली और भाषा में शिक्षा देने की पहल शुरू कर रही है। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों में शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाना है, जिससे बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त कर सकें और अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने और उन्हें स्कूल में नामांकन के लिए प्रेरित करने के लिए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में शाला प्रवेशोत्सव मनाया जाता है। इस बार राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी जिले जशपुर के बगिया गांव में किया गया। राजधानी रायपुर से हटाकर इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने राज्य के सुदूर कोने तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा इससे बच्चों की समझ और सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा। वहीं, यह पहल स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में भी मददगार होगी। इस पहल के तहत पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री को स्थानीय बोलियों में अनुवादित किया जाएगा और शिक्षकों को भी इन भाषाओं में प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 18 स्थानीय भाषाओं-बोलियों में स्कूली बच्चों की पुस्तकें तैयार की जा रही हैं। पहले चरण में छत्तीसगढ़ी, सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी और कुडुख में कोर्स तैयार होंगे। इसके लिए प्रदेशभर के साहित्यकारों, लोक कलाकारों,  संकलनकर्ताओं की मदद ली जाएगी। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिक और शिक्षकों से भी सहयोग लिया जाएगा। हाई स्कूल बगिया के प्रधानाचार्य दिनेश शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा आदिवासी बच्चों में प्रतिभाएँ होती हैं। स्थानीय बोली में शिक्षा से आदिवासी अंचलों के ज्यादा से ज्यादा बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने जशपुर के सरकारी स्कूल के अटल टिंकरिंग लैब में रोबोटिक्स मॉडल विकसित करने वाले छात्रों के साथ बातचीत करते हुए छात्रों के साथ मिट्टी के बर्तन बनाकर प्रीवोकेशनल गतिविधियों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने सरकारी स्कूलों में हर साल ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किए जाने की भी घोषणा की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए राज्य सरकार इस साल से दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित होंगी। वहीं, मुख्यमंत्री ने बताया पीएमके तहत राज्य में प्रथम चरण में 211 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बाजारों में लाल टमाटर की कीमतों में गजब की तेजी, धनिया और मिर्च भी 200 से 300 रुपए किलो

भोपाल  मध्य प्रदेश के बाजारों में लाल टमाटर की कीमतों में गजब की तेजी देखी जा रही है। भोपाल में सब्जियों की बढ़ती कीमतें चर्चा का विषय बन गई हैं। बाजार में लाल टमाटर 100 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। इसके साथ साथ धनिया और मिर्च भी 200 से 300 रुपए किलो बिक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आलू और प्याज की कीमतें 40 और 50 रुपए प्रति किलो पर रूक गई हैं। टमाटर की बढ़ती कीमतों के बारे में पूछे जाने पर बिट्टन मार्केट सब्जी व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष हरिओम खटीक ने कहा कि यह एक आम बात है। इस मौसम में प्रदेश में टमाटर की फसल खत्म हो जाती हैं। बाजार दूसरे राज्यों से आने वाले टमाटर पर ही निर्भर रहता है। यह नाजुक होता है जिससे जल्दी खराब हो जाता है। इसलिए व्यापारी भी टमाटर को आयात करने में सावधानी बरत रहे हैं। इस मौसम में यह समय से नहीं बिक पाया तो सड़कर खराब हो सकता है। एक जगह से दूसरे जगह लाते जाते समय में भी इनके खराब होने का खतरा है। जिससे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है। इसलिए वे कम मात्रा में टमाटर आयात करते हैं और कीमतें बढ़ जाती हैं। मंहगाई से आम लोगों को परेशानी वहीं दूध, दाल और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़त ने पहले से ही आम लोगों को परेशान कर रखा है। अब टमाटर, धनिया, मिर्च, आलू और प्याज की कीमतों में उछाल ने उन्हे और परेशान कर दिया है। इन सब्जियों का उपयोग गरीब हो या अमीर हर घर में होता है। बारिश के मौसम में सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं। पर इस बार बाकी सब्जियों पर भी मंहगाई का ज़्यादा असर होने वाला है, क्योंकि आलू और प्याज़ की कीमतें कुछ महीने पहले से ही बढ़नी शुरू हो गई थीं। सब्जियों की कीमतें आसमान पर इस पर एक टीचर राखी ने बात करते हुए कहा कि मुझे पता चला है कि सरकार ने आलू और प्याज़ की कीमतों को स्थिर करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। वे अब कुछ दिनों से स्थिर हैं, लेकिन टमाटर की कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। बाकी सब्जियां भी चाहे वह करेला हो या शिमला मिर्च, 80 रुपए किलोग्राम या उससे ज़्यादा ही बिक रही हैं। जब त्रिलंगा में एक दुकानदार से सब्ज़ियां खरीदते हुए एक युवक ने कहा कि सब्जियां बहुत महंगी हैं, तो उसने ने हां में सिर हिलाया। फिर युवक ने थोड़ी बहुत सब्जियां खरीदी। इसके बाद युवक ने मुफ़्त में कुछ हरी मिर्च और धनिया मांगा तो दुकानदार ने साफ कहा कि मिर्च 200 रुपये और धनिया 300 रुपये किलो है, मुफ़्त में कहां से देंगे। कब होगी गिरावट खटीक से जब पूछा गया कि सब्जियों की कीमतों में कब गिरावट शुरू होगी। इस बात पर उन्होंने कहा कि इसमें समय लगेगा। सब्जियों की कीमतें गर्मी और बरसात दोनों मौसम में ऊंची रहती हैं। अगर भारी बारिश होती है तो कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। अभी तक सब्जियों की कीमतों में कमी आने की कोई संभावना नहीं दिखती है।

लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सिरफुटौव्वल शुरू

 नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के नतीजे आए एक महीने से अधिक समय गुजर गया. संसद का पहला सत्र संपन्न हो चुका और नवगठित सदस्यों ने शपथ भी ले ली है लेकिन राजनीतिक दलों में चुनाव नतीजों की समीक्षा का सिलसिला चल रहा है. लोकसभा चुनाव में गठबंधन कर उतरी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में अब केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के नतीजों को लेकर सिरफुटौव्वल शुरू हो गई है. गठबंधन के तहत कांग्रेस को दिल्ली की सात में से तीन सीटें मिली थीं और आम आदमी पार्टी ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. गठबंधन के प्रत्याशियों को सभी सात सीटों पर मात मिली थी. कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अब हार के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है. कांग्रेस ने दिल्ली में हार की समीक्षा के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई थी. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने दिल्ली के तीनों उम्मीदवारों ने अपनी हार के कारण बताए थे. कमेटी ने अब अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी  है. इस रिपोर्ट के मुताबिक उम्मीदवारों ने आम आदमी पार्टी पर हार का ठीकरा फोड़ा है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे उदित राज, जेपी अग्रवाल और कन्हैया कुमार ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी चुनाव में अपने वोट ट्रांसफर कराने में विफल रही. तीनों नेताओं ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को ये भी बताया है कि चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने उनका समर्थन नहीं किया. हालांकि, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि तीनों ही उम्मीदवारों ने कांग्रेस कैडर के साथ अच्छा व्यवहार नहीं दिया. इसकी वजह से उम्मीदवारों को कांग्रेस कैडर की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा. तीनों उम्मीदवारों को ये उम्मीद थी कि आम आदमी पार्टी ही उनकी जीत सुनिश्चित कर देगी. गौरतलब है कि गठबंधन के तहत केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी ने चार और कांग्रेस ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. गठबंधन में कांग्रेस को उत्तर पश्चिमी दिल्ली, चांदनी चौक और उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट मिली थी. पार्टी ने उत्तर पश्चिमी सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री उदित राज, चांदनी चौक से पूर्व सांसद और दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके जेपी अग्रवाल और उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से कन्हैया कुमार को चुनाव मैदान उतारा था. कांग्रेस के तीनों ही उम्मीदवारों को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था.  

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