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ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने नहीं गाया राष्ट्रगान, चेहरे पर उदासी और दिल में ग़म

तेहरान  अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच ईरान की महिला फुटबॉल टीम एशियन कप में खेल रही है। इस दौरान महिला खिलाड़ियों ने अलग ढंग से अपना विरोध जताया। ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने एशियन कप में दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले इस्लामिक शासन का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। महिला एशियाई कप फुटबॉल टूर्नामेंट में जहरा घनबारी की अगुआई वाली ईरान की टीम को दक्षिण कोरिया से हार का सामना करना पड़ा। उदास नजर आईं खिलाड़ी राष्ट्रगान के दौरान ईरान की खिलाड़ी उदास दिख रही थीं। वहीं, मैच से पहले मुख्य कोच मरजियाह जाफरी ने हमले और अपने देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि टीम को टूर्नामेंट पर फोकस करने की जरूरत है। हालांकि गोल्ड कोस्ट स्टेडियम में समर्थकों को देखकर उनके चेहरे पर मुस्कुराहट भी दिखी। पहले मैच में हार हालांकि ईरान की टीम को इस मैच में हार का सामना करना पड़ा। 2022 महिला एशियाई कप की उप विजेता रही दक्षिण कोरिया की टीम ने 3-0 से जीत हासिल की। टूर्नामेंट में ईरान टीम का लक्ष्य अगले साल ब्राजील में होने वाले महिला विश्व कप में जगह पक्की करना है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया में उसे कम से कम क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचना होगा। ईरान का अगला मैच बृहस्पतिवार को मेजबान ऑस्ट्रेलिया से होगा। कैसा है युद्ध का हाल गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला है। इसके जवाब में ईरान भी हमलावर है और मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला बोला है। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए एक बड़े हमले में मौत हो गई है। इस घटना ने ईरान के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है। 86 वर्षीय खामेनेई की तेहरान के मध्य क्षेत्र में उनके परिसर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में मौत हुई।

रंगों में घुले प्रेम और सौहार्द का त्योहार है होली : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दी होली की शुभकामनाएँ

रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मंत्री राजवाड़े ने अपने संदेश में कहा है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा, उल्लास और सकारात्मकता का संचार करता है तथा भेदभाव मिटाकर सभी को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देता है।उन्होंने कामना की कि यह होली सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि त्योहार मनाते समय प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, जल संरक्षण का ध्यान रखें तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में अपना सक्रिय सहयोग दें। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में आनंद और सौहार्द का उत्सव बनती है तथा समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी विश्वास को और अधिक मजबूत करती है।

CBSE का बड़ा फैसला: मिडल ईस्ट में 10वीं–12वीं की 5–6 मार्च की परीक्षा स्थगित

नई दिल्ली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मध्य पूर्व के कई देशों में जारी तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए वहां कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला लिया है। सीबीएसई ने कहा है कि बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई में चल रहे मौजूदा हालातों की समीक्षा करने के बाद बोर्ड ने इन क्षेत्रों में 5 मार्च 2026 (गुरुवार) और 6 मार्च 2026 (शुक्रवार) को होने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को टाल दिया है। छात्रों की सुरक्षा और वहां की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। बोर्ड परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद नई तिथियां जारी करेगा। बोर्ड बृह्स्पतिवार को स्थिति की समीक्षा करेगा और 7 मार्च को होने वाली परीक्षाओं के संबंध में जल्द निर्णय लेगा। इससे पहले बोर्ड ने 2 मार्च की सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी थीं। आपको बता दें कि इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय परिवार रहते हैं और उनके बच्चे सीबीएसई स्कूलों में पढ़ते हैं। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, ”पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों – बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूदा स्थिति के कारण बोर्ड ने पांच मार्च को 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाएं स्थगित करने का निर्णय लिया है।” भारद्वाज ने बताया कि नयी तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी और आगे की परीक्षाओं के लिए स्थिति की समीक्षा पांच मार्च को की जाएगी। क्यों लिया गया परीक्षा टालने का फैसला मिडिल ईस्ट में हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। क्षेत्रीय तनाव में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया है। कई स्थानों पर हवाई क्षेत्र बंद होने, उड़ानों के रद्द होने और आवाजाही बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों का परीक्षा केंद्र तक पहुंचना, पर्यवेक्षकों की उपलब्धता और परीक्षा संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। छात्रों और स्कूलों को क्या निर्देश दिए गए प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक CBSE वेबसाइट और प्रमाणित सूचना माध्यमों पर ही भरोसा करें। स्कूल प्रशासन को छात्रों के संपर्क में रहने और उन्हें तैयारी जारी रखने के लिए मार्गदर्शन देने को कहा गया है। फर्जी नोटिस से भी बढ़ी परेशानी इसी बीच सोशल मीडिया पर एक फर्जी सर्कुलर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि मिडिल ईस्ट में बाकी सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं और छात्रों को वैकल्पिक मूल्यांकन के आधार पर अंक दिए जाएंगे। CBSE ने इस नोटिस को पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि यह भ्रामक जानकारी है। बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें। छात्रों में राहत भी, चिंता भी परीक्षा टलने से जहां कुछ छात्रों को अस्थायी राहत मिली है, वहीं नई तारीख को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ गई है। कई परिवार पहले ही क्षेत्रीय तनाव से चिंतित थे और अब पढ़ाई का शेड्यूल बिगड़ने से मानसिक दबाव और बढ़ गया है। स्कूल फिलहाल छात्रों को पढ़ाई जारी रखने और संशोधित कार्यक्रम का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

रायपुर छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने ईस्ट ज़ोन प्रतियोगिता में जीते 12 पदक युवाओं की प्रतिभा, तकनीकी दक्षता एवं नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार का कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इंडिया स्किल प्रतियोगिता 2025-26 में छत्तीसगढ़ राज्य के युवाओं ने ईस्ट ज़ोन रीजनल प्रतियोगिता में 12 पदक और 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस अर्जित कर उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। यह प्रतियोगिता क्रमशः चार चरणों में जिला, राज्य, रीजनल एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को वर्ल्ड स्किल्स इंटरनेशनल के अंतर्गत भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त होगा।  छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने ईस्ट ज़ोन प्रतियोगिता में जीते 12 पदक मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रदेश के युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। राज्य सरकार कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक प्रशिक्षण, नवाचार और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। यह सफलता सशक्त युवा, समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने ईस्ट ज़ोन प्रतियोगिता में जीते 12 पदकईस्ट जोन की रीजनल प्रतियोगिता का समापन 02 मार्च 2026 को भुवनेश्वर में हुआ, जिसमें ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने 59 कौशल श्रेणियों में भाग लिया। छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 12 पदक एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सम्मान अर्जित किए, जिनमें 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य पदक तथा 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस शामिल हैं।  डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया में सुनील कुमार पैतल ने स्वर्ण पदक, 3डी डिजिटल गेम आर्ट में खुशांक नायक, सीएनसी मिलिंग में पुष्कर सोनबर एवं सीएनसी टर्निंग में आत्माराम ने रजत पदक अर्जित कर राज्य को गौरवान्वित किया। इसी तरह सीएनसी मिलिंग में निखिल, इलेक्ट्रॉनिक्स में अभिषेक कुमार, प्लंबिंग एवं हीटिंग में रेशमान, वेब टेक्नोलॉजी में सतेंद्र कुमार ने कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। इसी तरह रेन्यूबल एनर्जी में नोहर लाल पटेल, मेकेनिकल इंजीनियरिंग में ओम बंजारे, हेल्थ एंड सोशल केयर में अंतरा मुखर्जी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया।  उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रतियोगिता का सफल आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया। 19 कौशल ट्रेड्स में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 3327 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हेतु चयनित हुए। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 03 एवं 04 फरवरी 2026 को रायपुर, दुर्ग एवं रायगढ़ जिलों के प्रतिष्ठित संस्थानों में संपन्न हुई। व्यावहारिक मूल्यांकन के पश्चात 38 प्रतिभागियों का चयन रीजनल स्तर के लिए किया गया। रीजनल स्तर पर सफल प्रतिभागी अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य में पहली बार कौशल तिहार 2025 एवं मोबाइल आधारित एमसीक्यू परीक्षा जैसे नवाचारों के माध्यम से प्रतियोगिता का व्यापक एवं पारदर्शी संचालन किया गया।

ओडिशा में कानून से ऊपर पंचायत? बकरी चोरी के शक में नाबालिग छात्र की बेरहमी से हत्या

अनुगुल ओडिशा में ‘कंगारू कोर्ट’ का बढ़ता चलन अब सीधे मासूमों की जान लेने लगा है। ताजा और दर्दनाक मामला मयूरभंज जिले से सामने आया है, जहां कंगारू कोर्ट की कथित सुनवाई के बाद भीड़ ने कक्षा नौ के छात्र को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। घटना इंदकोली गांव, थाना तिरिंग थाना क्षेत्र की है। मृतक 15 वर्षीय रायरांगपुर ग्रामीण थाना क्षेत्र का निवासी था। बकरी चोरी के शक में ‘फैसला’ और फिर भीड़ का कहर: बताया गया कि मृतक नाबालिग इन दिनों बसिंगी गांव में अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह बसिंगी सरकारी हाई स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। सोमवार दोपहर इंदकोली गांव में कथित बकरी चोरी के आरोप में स्थानीय लोगों ने दो नाबालिगों को पकड़ लिया और गांव में ही अनौपचारिक ‘अदालत’ लगा दी। ग्रामीणों ने स्वयं ही ‘जांच’ और ‘सुनवाई’ कर डाली। इसके बाद भीड़ ने दोनों नाबालिगों की बेरहमी से पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, गुस्साई भीड़ ने उसकी साइकिल को भी आग के हवाले कर दिया। अस्पताल में तोड़ा दम: सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को भीड़ से बचाकर पहले स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें रायरांगपुर उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान संबित ने दम तोड़ दिया। दूसरे किशोर की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बेहतर इलाज के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बारीपदा रेफर किया गया है। 11 गिरफ्तार, और धरपकड़ संभव: पीड़ित के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था: राज्य के विभिन्न हिस्सों में कंगारू अदालतों के नाम पर हो रही ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। चोरी के महज शक में एक स्कूली छात्र की जान चली जाना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता और पुलिस की सक्रियता दोनों पर और काम किए जाने की जरूरत है। क्या होती है ‘कंगारू अदालत’? ‘कंगारू अदालत’ (Kangaroo Court) उस अवैध और अनौपचारिक न्याय प्रणाली को कहा जाता है, जिसमें कुछ लोग बिना किसी कानूनी अधिकार के स्वयं ही अदालत बन बैठते हैं, आरोप तय करते हैं और सजा सुना देते हैं। इसमें न तो निष्पक्ष जांच होती है, न आरोपी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलता है और न ही कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसी ‘अदालतें’ भारतीय कानून में पूरी तरह अवैध हैं। किसी भी अपराध की जांच और सजा देने का अधिकार केवल विधिवत स्थापित न्यायालयों को है। ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी सामाजिक दबाव या अफवाहों के आधार पर इस तरह की भीड़तंत्र वाली व्यवस्था खड़ी हो जाती है, जो कई बार हिंसा और जानलेवा घटनाओं में बदल जाती है।  

आपदा पर सरकार सतर्क: पुष्कर सिंह धामी का आश्वासन – सुरक्षित निकासी के लिए हर संभव कदम

देहरादून ईरान और इजरायल में बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मंगलवार को हरिद्वार पहुंचे मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार लगातार विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में है। धामी ने कहा कि विदेशों में मौजूद उत्तराखंडियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहां रह रहे लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है। उन्हें सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था जल्द की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सबको सुरक्षित निकाला जाएगा। इस दौरान गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और डीएम मयूर दीक्षित ने अब तक की तैयारियों से अवगत कराया। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने यातायात-पार्किंग व्यवस्था की रूपरेखा रखी। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष किरन चौधरी, मेयर किरन जैसल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार, प्रदेश महासचिव अनिल गोयल, विधायक मदन कौशिक, आदेश चौहान और प्रदीप बत्रा, दर्जाधारी ओम प्रकाश जमदग्नि, अजीत चौधरी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, आईजी-गढ़वाल राजीव स्वरूप, एडीजी एपी अंशुमन, महानिदेशक-सूचना बंशीधर तिवारी, एमडी-सिडकुल सौरव गहरवार, एसपी-अभिसूचना मणिकांत मिश्रा, सीडीओ ललित नारायण मिश्रा, एडीएम पीआर चौहान, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, सचिव एचआरडीए मनीष कुमार, एसडीएम जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी मौजूद रहे। सात मार्च से पहले हरिद्वार में हाई अलर्ट केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सात मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार दौरे से पहले प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को बैरागी कैंप पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हों।

दिल्ली वालों के लिए बड़ी राहत! होली के दिन शराब बिक्री पर नहीं होगी रोक

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने शराब के शौकीन लोगों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। राजधानी दिल्ली में इस बार शराब की दुकानें खुली रहेंगी। सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि 4 मार्च को राजधानी में नो ड्राई डे रहेगा। सरकार इस साल 4 मार्च को मनाई जाने वाली होली को दिल्ली सरकार ने शराब के शौकीन लोगों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। राजधानी दिल्ली में इस बार शराब की दुकानें खुली रहेंगी। सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि 4 मार्च को राजधानी में नो ड्राई डे रहेगा। सरकार इस साल 4 मार्च को मनाई जाने वाली होली को ‘ड्राई डे’ (Dry Day) की आधिकारिक सूची से हटा दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि त्योहार के दिन दिल्ली में शराब के ठेके बंद नहीं रहेंगे और लोग अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी कर सकेंगे। परंपरा से हटकर लिया गया फैसला आमतौर पर दिल्ली सहित देश के अधिकांश राज्यों में होली जैसे बड़े त्योहारों पर शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। पिछली सूचियों में भी होली को ड्राई डे माना जाता था, लेकिन सरकार के ताजा आदेश ने पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है। इस फैसले से जहाँ शराब प्रेमियों के चेहरे खिल गए हैं, वहीं श

90 वर्षीय चाका बाई पुनः सुन सकती है जीवन की मधुर ध्वनि

रायपुर  90 वर्षीय चाका बाई की चेहरे से झलकती मुस्कराहट बता रही है कि उनके जीवन में खुशियां फिर से लौट आई है। उम्र के इस दौर में शारीरिक परेशानियों का आना स्वाभाविक है और ऐसे समय में की गई सहायता बुजुर्गों के लिए बड़ी सहारा बनती है। ठीक से सुनाई नहीं देने की समस्या से जूझ रही चाका बाई मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंची। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें उनकी परेशानियों का समाधान यहां पर अवश्य मिलेगा और हुआ भी ऐसा ही, कैंप कार्यालय से उन्हें तत्काल मदद मिली और उसे श्रवण यंत्र प्रदान किया गया। जशपुर जिले के ग्राम पंचायत जामचुआं, तहसील कुनकुरी निवासी चाका बाई ठीक से सुनाई नहीं देने की समस्या से जूझ रही थी। उन्होंने कैंप कार्यालय में आवेदन देकर अपनी समस्याओं को साझा किया। कैंप कार्यालय ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनके आवेदन पर त्वरित कार्यवाही की और उन्हें श्रवण यंत्र प्रदान किया। श्रवण यंत्र पाकर चाका बाई ने अपनी प्रसन्नता जाहिर की और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को आशीर्वाद दिया है।  गरीबों को मदद करने की संवेदनशील सोच और समय पर उनका काम बन सके, इसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया में कैंप कार्यालय की नींव रखी, जहां कई जरूरतमंदों को सही समय में मदद मिल रही है।

तनाव से टूट चुके हैं? भगवद गीता के 7 श्लोक और श्रीकृष्ण का जीवन बदलने वाला मंत्र

जीवन में जब असफलता, तनाव और असमंजस घेर लेते हैं, तब सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। ऐसे समय में हजारों साल पहले कही गई बातें भी आज उतनी ही प्रासंगिक लगती हैं। महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को दिया गया उपदेश आज हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। आज भी लोग कई ऐसी सिचुएशन में फंस जाते हैं, जहां से निकलने का कोई रास्ता समझ नहीं आता। अगर आप भी जिंदगी की भंवर में अटक गए हैं, तो भगवद गीता में संकलित श्री कृष्ण द्वारा कही गई अमर शिक्षाओं से कुछ सीख लें। भगवद गीता में लिखे ये 7 श्लोक आपकी सोच को बदल देंगे और जिंदगी की हर कठिनाई को सरल कर देंगे। 1. कर्म पर ध्यान दें, फल की चिंता छोड़ें “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” अर्थ: आपका अधिकार केवल कर्म करने में है, फल पर नहीं। आज के समय में लोग रिजल्ट को लेकर ज्यादा परेशान रहते हैं। गीता का यह श्लोक सिखाता है कि अगर आप पूरी निष्ठा से काम करेंगे, तो परिणाम आपके पक्ष में ही आएगा। 2. संतुलित मन ही असली शक्ति है “योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनंजय।” अर्थ: संतुलित होकर और आसक्ति छोड़कर कर्म करो। जब मन स्थिर होता है, तभी सही निर्णय लिए जा सकते हैं। यह श्लोक मानसिक संतुलन और फोकस की अहमियत बताता है। ज्यादातर लोग दो नांव में पैर रखकर चलने की कोशिश करते हैं। 3. खुद को गिरने मत दो “उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।” अर्थ: मनुष्य को स्वयं अपना उत्थान करना चाहिए। जीवन में मुश्किलें आएंगी, लेकिन हार मान लेना विकल्प नहीं है। आत्मविश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है। खुद को हर स्थिति में उठाने की कोशिश करें। 4. अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते “न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति।” अर्थ: जो शुभ काम यानी अच्छे कर्म करता है, उसके साथ कभी बुरा नहीं होता। ईमानदारी और अच्छाई का रास्ता भले लंबा हो, लेकिन अंत में जीत उसी की होती है। 5. श्रद्धा से मिलता है ज्ञान “श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्।” अर्थ: श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त करता है। सफलता के लिए केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि धैर्य और विश्वास भी जरूरी है। अगर आप सोचते हैं कि सबकुछ जल्दी हो जाए, तो ऐसा नहीं होगा। किसी भी चीज को पाने के लिए धैर्य रखना जरूरी है। 6. हर घटना के पीछे एक उद्देश्य है “अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते।” अर्थ: समस्त सृष्टि का मूल कारण मैं हूं। यह श्लोक हमें सिखाता है कि जीवन में जो भी होता है, उसका एक गहरा उद्देश्य होता है। जैसे कहा जाता है जो होता है अच्छे के लिए होता है, उसमें जरूर आपका कुछ लाभ छिपा होता है। 7. गुस्सा आपका दुश्मन है “क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः” अर्थ: यह श्लोक सिखाता है कि गुस्सा इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। एक पल का क्रोध सालों की मेहनत और रिश्तों को खत्म कर सकता है। यदि आप सफलता और खुशहाली चाहते हैं, तो अपने मन और भावनाओं कंट्रोल रखना सीखें।  

लोकप्रेम की अमर कथा: हीर–रांझा, लैला–मजनूं और 250 साल से मंचित जयपुर तमाशा

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर लोक एवं प्रदर्शन आधारित कलाओं का प्रमुख केंद्र रही है। ग्रामीण अंचलों में जन्मी अनेक लोक कलाएं यहां संरक्षण और निरंतर मंचन के कारण परिष्कृत रूप में विकसित हुईं। पर्यटन नगरी होने के कारण बड़ी संख्या में लोक कलाकार यहां आकर बसे, जो देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के सामने अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। कालबेलिया और घूमर जैसे लोकनृत्य भी इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। इन्हीं परंपराओं के बीच जयपुर तमाशा, जिसे जयपुरी ख्याल भी कहा जाता है, एक विशिष्ट लोकनाट्य विधा के रूप में पहचाना जाता है। शास्त्रीय, अर्धशास्त्रीय और लोक संगीत के संगम से सजी यह रंगशैली अभिनय, गायन और नृत्य का प्रभावशाली संयोजन प्रस्तुत करती है। पिछले लगभग 250 वर्षों से इसका मंचन ब्रह्मपुरी स्थित खुले रंगमंच ‘अखाड़ा’ में किया जा रहा है। परंपरागत रूप से होली, अमावस्या और रामनवमी जैसे अवसरों पर इसका विशेष आयोजन होता है। 18वीं सदी से चली आ रही परंपरा तमाशा की शुरुआत 18वीं शताब्दी में आगरा के आसपास काव्यात्मक संवाद शैली के रूप में हुई। बाद में तत्कालीन शासक सवाई जसवंत सिंह कलाकारों को जयपुर लेकर आए और उन्हें ब्रह्मपुरी में बसाया। यहां भट्ट परिवार के बंशीधर भट्ट के संरक्षण में इस कला ने अपना विशिष्ट स्वरूप ग्रहण किया। तमाशा की कथाएं प्रेम, सामाजिक समरसता और धार्मिक सह-अस्तित्व के संदेश पर आधारित होती हैं। ‘हीर-रांझा’ और ‘लैला-मजनूं’ जैसी अमर प्रेम गाथाओं के साथ-साथ ‘तमाशा गोपीचंद’, ‘जोगी जोगन’, ‘रूपचंद गांधी’, ‘जुत्थान मियां’ और ‘छैला पनिहारी’ जैसी प्रस्तुतियां भी मंचित की जाती हैं। इन रचनाओं को भूपाली, आसावरी, जौनपुरी, मालकौंस, दरबारी, बिहाग, सिंध काफ़ी, भैरवी, कलिंगड़ा और केदार जैसे रागों में प्रस्तुत किया जाता है, जो इसकी संगीतात्मक गरिमा को और समृद्ध बनाते हैं। सौहार्द और समरसता का संदेश तमाशा की कहानियों में सामाजिक एकता का संदेश प्रमुखता से उभरता है। ‘रांझा-हीर’ कथा में नायक रांझा प्रेम की प्राप्ति के लिए अजमेर शरीफ दरगाह स्थित सूफी संत मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर आशीर्वाद लेने जाता है। यह प्रसंग सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक माना जाता है। विशिष्ट वेशभूषा और रंगशैली तमाशा की वेशभूषा इसकी अलग पहचान है। कलंगी, गोतेदार भगवस्त्र, सिंगी और सेली जैसे पारंपरिक आभूषण मंचन को आकर्षक बनाते हैं। कई बार कलाकार काल्पनिक वेशभूषा और दृश्यावली का वर्णन भी संवादों के माध्यम से करते हैं, जिससे दर्शकों की कल्पना शक्ति सक्रिय होती है और प्रस्तुति का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। बदलते समय के साथ तालमेल करीब ढाई सौ वर्षों में इसकी मूल संरचना भले ही सुरक्षित रही हो, लेकिन कहानी कहने की शैली में समय के साथ परिवर्तन आया है। आधुनिक तकनीक, प्रकाश व्यवस्था और समसामयिक घटनाओं के संदर्भ भी अब मंचन में शामिल किए जाने लगे हैं। यही कारण है कि जयपुर तमाशा आज भी जीवंत, प्रासंगिक और दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। होली जैसे उत्सवों पर जब परकोटे में यह मंचन होता है, तो हीर-रांझा और लैला-मजनूं की प्रेम गाथाएं एक बार फिर जयपुर की सांस्कृतिक धरोहर को सजीव कर देती हैं।

टीम में बदलाव की तैयारी, क्या राशिद खान को हटाया जाएगा? अफगानिस्तान बोर्ड का सख्त रुख

नई दिल्ली अफगानिस्तान की टी20 टीम के कप्तान राशिद खान हैं, लेकिन अगली सीरीज से पहले उनसे कप्तानी छीनी भी जा सकती है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम सुपर 8 में नहीं पहुंच पाई थी, जबकि एशिया कप 2025 में भी टीम का प्रदर्शन खराब रहा था। इसके अलावा भी मल्टी नेशन टूर्नामेंट में टीम आगे नहीं जा सकी है। ऐसे में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड टीम में बदलाव और सुधार करने की मन बना चुका है। राशिद खान वैसे तो दुनिया के सबसे धाकड़ टी20 प्लेयर्स में शामिल हैं, लेकिन कप्तान के तौर पर उनका प्रदर्शन बेहतर नहीं है। 2019 में पहली बार उनको अफगानिस्तान की टीम का कप्तान बनाया गया था। हालांकि, 2021 के टी20 वर्ल्ड कप से पहले उन्होंने कप्तानी छोड़ दी थी। इसके पीछे सिलेक्शन में मतभेद एक बड़ा कारण था। बाद फिर से कप्तान बने, जब 2022 के टी20 विश्व कप के बाद मोहम्मद नबी ने कप्तानी छोड़ी। एसीबी ने बड़ी उम्मीदों से उनको कप्तान बनाया और उन्होंने 2024 के टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन इसके बाद प्रदर्शन टीम का गिरता चला गया। अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम टी20 फॉर्मेट में दमदार है, लेकिन एसीसी और आईसीसी इवेंट में अच्छा नहीं कर पा रही है। ऐसे में बोर्ड ने टीम में बदलावों की शुरुआत कर दी है। वर्ल्ड कप से पहले बल्लेबाजी कोच टॉबी रैडफोर्डको बल्लेबाजी कोच बनाया गया था, जबकि रिचर्ड पायबस ने हेड कोच के तौर पर जोनाथन ट्रॉट को रिप्लेस किया है। ट्रॉट और बोर्ड के बीच बन नहीं रही थी। इसके बाद क्या लीडरशिप में बदलाव होगा? इस पर अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ एग्जक्यूटिव नसीब खान ने कहा है कि इसी संभावना है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। नसीब ने क्रिकबज से कहा, “हम अभी टीम में सुधारों पर विचार कर रहे हैं। अगर आप भविष्य के लिए टीम बना रहे हैं, तो बदलाव तो होंगे ही। हम पहले ही हेड कोच, बैटिंग कोच और ट्रेनर बदल चुके हैं और टीम में भी इसी तरह के बदलाव किए जाएंगे। हालांकि, कप्तानों के बारे में अभी कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है, इसलिए मैं इस समय यह नहीं कह सकता कि उन्हें बदला जाएगा या बनाए रखा जाएगा।”

महंगाई और युद्ध का डबल असर! सोना ₹2 लाख, चांदी ₹3 लाख तक जाने की अटकलें

नई दिल्ली सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। यह लगातार 5वां कारोबारी दिन है जब गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव की वजह से निवेशक सुरक्षित निवेश तलाश रहे हैं। जिसकी वजह से इन धातुओं की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। आज फिर से बड़ा गोल्ड और सिल्वर का रेट COMEX गोल्ड का रेट 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ मंगलवार को 5300 डॉलर को पार कर गया है। वहीं, COMEX सिल्वर की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। COMEX Silver का रेट आज 91.61 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंचने में सफल रहा है। बता दें, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज का पहला सेशन आज बंद है। एमसीएक्स का दूसरा सेशन आज शाम को 5 बजे से 11 बजे तक खुला रहेगा। सोमवार को एमसीएक्स में गोल्ड का रेट 2.53 प्रतिशत की उछाल के बाद 166199 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का रेट गिरावट के साथ सोमवार को 280090 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। 2 लाख रुपये के पार जाएगा सोना? एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता की वजह से गोल्ड और सिल्वर की कीमतों तेजी का सिलसिला जारी रहेगा। जियोजीत इन्वेस्टमेंट के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी कहते हैं, “घरेलू बाजार में सोने का भाव अधिकतम 2 लाख रुपये और इंटनरेशनल मार्केट में 6000 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर जा सकता है।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी का भाव 100 डॉलर के स्तर तक फिर से पहुंच सकता है। एक्सपर्ट रेनिशा का मानना है कि चांदी का रेट 95 डॉलर (293000) के स्तर पर रेसिस्टेंस महसूस कर रहा है। अगर इस स्तर को यह क्रॉस करने में सफल रहा तो चांदी का रेट 310000 रुपये से 325000 रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है। 265000 रुपये का स्तर चांदी का सपोर्ट लेवल है। सिल्वर ईटीएफ में 139% की तेजी जनवरी का महीना सिल्वर ईटीएफ के प्रवाह के लिहाज से काफी ऐतिहासिक रहा है। इस दौरान सिल्वर ईटीएफ का नेट प्रवाह 9500 करोड़ रुपये रहा है। दिसंबर 2025 में यह 4000 करोड़ रुपये रहा था।

प्रदेश में पांव पसार रही गर्मी, फतेहपुर रहा सबसे गर्म शहर, कई जिलों में पारा 33 पार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में दिन चढ़ने के साथ धूप में तल्खी महसूस की जा रही है। प्रदेश में गर्मी की दस्तक और तापमान में बढ़ोतरी के संकेत साफ नजर आने लगे हैं।  34.8 डिग्री अधिकतम तापामान के साथ झांसी प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। वहीं फतेहपुर में 34.6 डिग्री, वाराणसी में 33.6 डिग्री, हमीरपुर में 33.2 डिग्री और आगरा में 33 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। इसके साथ ही प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।  साथ ही  फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई हिस्सों में करीब 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रूखी पछुआ हवा चली, जिसे स्थानीय भाषा में फगुनहट कहा जाता है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मंगलवार से हवा की रफ्तार 35 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। अगले सप्ताह अधिकतम तापमान में लगभग तीन डिग्री तक वृद्धि की संभावना है, जिससे गर्मी और बढ़ेगी। पछुआ के थमते ही तेजी से चढ़ेगा पारा  राजधानी में दिन चढ़ते ही चिलचिलाती धूप ने लोगों को परेशान किया। सोमवार को फाल्गुन की पूर्णिमा पर दिन भर 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली रूखी पछुआ हवाएं चलीं। मौसम विभाग का अनुमान है कि मंगलवार को पछुआ हवाओं की रफ्तार 35 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं। इन हवाओं के थमते ही तापमान में तेजी से बढ़त देखने को मिलेगी। गर्मी और तीखी महसूस होगी। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, अब दिन और रात, दोनों के तापमान में क्रमिक बढ़ोतरी की संभावना है। सोमवार को अधिकतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 1.4 डिग्री की गिरावट के साथ 14.6 डिग्री सेल्सियस रहा।  

सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में प्रदेश में लगाए गए 242 करोड़ से अधिक पौधे

सर्वोत्तम के साथ यूपी को ‘हरित प्रदेश’ बनाने में जुटी योगी सरकार इस वर्ष भी प्रदेश में लगेंगे 35 करोड़ पौधे, पिछले वर्ष हुआ था 37.21 करोड़ पौधरोपण  सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में प्रदेश में लगाए गए 242 करोड़ से अधिक पौधे गांवों में लग रही ग्रीन चौपाल,  15 हजार से अधिक गांवों में हुआ आयोजन  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक तरफ प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बनाया तो वहीं यूपी की पहचान ‘हरित प्रदेश’ के रूप में भी बन रही है। 9 वर्ष में यहां 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए। उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। पिछले वर्ष सिर्फ एक दिन (9 जुलाई) को ही 37.21 करोड़ पौधे लगाए गए। यही नहीं, रविवार को वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा। योगी सरकार 2026 में भी 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है।  9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक लगे पौधे, यूपी का वनाच्छादन भी बढ़ा  2017 में सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने खुद यूपी की हरियाली की चिंता की। 5 जून को पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल में पौधरोपण, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी कमान संभाली। पौधरोपण अभियान के पहले वे खुद कई बार इसकी मीटिंग करते हैं। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहुंचकर पौधे भी लगाते हैं। योगी सरकार के प्रयास से 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इससे यूपी का वनाच्छादन में भी वृद्धि हुई। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट- 2023 के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा। योगी सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट और उनके अभिभावकों को लकड़ी, फल व सहजन आदि प्रजातियों के पौधे भी प्रदान किए। एक पेड़ मां के नाम अभियान में सराहनीय कार्य को लेकर पीएम मोदी ने भी बधाई दी थी।  ‘योगी के यूपी’ ने चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त  ‘योगी के यूपी’ ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर रविवार को नया इतिहास दर्ज किया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन से यह रिकॉर्ड संभव हो सका। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसके पहले 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।  योगी सरकार-2026 में भी लगाएगी 35 करोड़ पौधे  योगी सरकार वर्षाकाल-2026 में भी पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है। वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। पौधशालाओं, विभागों, जनपदों को आगामी दिनों में तैयारी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। हाल में प्रस्तुत किए गए बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  गांवों में पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित कर रही ‘ग्रीन चौपाल’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक लाने का निर्देश दिया है। यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब पौधरोपण को जनांदोलन का स्वरूप दिया जा सके। सीएम के विजन को केंद्र में रखते हुए वन विभाग ने गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन करने का निर्णय किया और इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित की। विभिन्न विभागों के सहयोग से प्रत्येक ग्रामसभा स्तर पर अब तक 15000 से अधिक गांवों में चौपाल का गठन/आयोजन किया जा चुका है। ग्रीन चौपाल ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रही है। इसमें सरकार के सभी वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से इसकी बैठक की जा रही है।

श्री होलिकोत्सव समिति व आरएसएस के बैनर तले बुधवार सुबह घंटाघर से निकलेगी शोभायात्रा

सीएम योगी के साथ खास होगा गोरखपुर का रंगोत्सव होलिकोत्सव पर भगवान नृसिंह की शोभायात्रा में शामिल होंगे गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री होलिकोत्सव समिति व आरएसएस के बैनर तले बुधवार सुबह घंटाघर से निकलेगी शोभायात्रा भक्ति की उमंग में सामाजिक समरसता के रंग से सराबोर होगी शोभायात्रा गोरखपुर  भक्ति की शक्ति की प्रतिष्ठा, भेदभाव भुलाकर सबको गले लगाने और समृद्ध सनातन संस्कृति के उत्सव पर्व होली पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर मौजूदगी गोरखपुर के रंगोत्सव को बेहद खास बनाती है। सीएम योगी के संग भक्ति की उमंग में यहां सामाजिक समरसता के रंग बरसते हैं। इसका माध्यम होती है घंटाघर से श्री होलिकोत्सव समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बैनर तले निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा। दशकों से जारी इस परंपरा का निर्वाह करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में बुधवार सुबह इस शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे। गोरक्षपीठ के नेतृत्व वाला रंगोत्सव सामाजिक संदेश के ध्येय से काफी खास है। सामाजिक समरसता का स्नेह बांटने के लिए ही गोरक्षपीठाधीश्वर दशकों से होलिकोत्सव भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में शामिल होते रहे हैं। 1996 से 2019 तक शोभायात्रा का नेतृत्व करने वाले योगी आदित्यनाथ वर्ष 2020 और 2021 के होलिकोत्सव में लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए इसमें शामिल नहीं हुए थे। कोरोना प्रबंधन का पूरी दुनिया में लोहा मनवाने और इस वैश्विक महामारी को पूरी तरह काबू में करने के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 2022 से पुनः शोभायात्रा का नेतृत्व करने लगे। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान नृसिंह की शोभायात्रा सीएम योगी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता के रंगों से सराबोर होगी।  गोरखपुर में भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत अपने गोरखपुर प्रवासकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने 1944 में की थी। गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली मनाने की परंपरा इसके काफी पहले से जारी थी। नानाजी का यह अभियान होली के अवसर पर समाज को एकजुट करने के लिए था। नानाजी के अनुरोध पर इस शोभायात्रा का गोरक्षपीठ से भी गहरा नाता जुड़ गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने लगे और यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया। 1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसे अपनी अगुवाई में न केवल गोरखपुर, बल्कि समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का विशिष्ट पर्व बना दिया। अब इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली सरीखी है और लोगों को इंतजार रहता है योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भगवान नृसिंह शोभायात्रा का। पांच किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली शोभायात्रा में पथ नियोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता करते हैं और भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगों में सराबोर होकर बिना भेदभाव सबसे शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के रंगपर्व की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन या सम्मत की राख से तिलक लगाने के साथ होगी। पीठाधीश्वर के साथ ही मंदिर के प्रधान पुजारी एवं अन्य साधु-संत भी होलिकादहन की भस्म से रंगोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मंदिर में फाग गीत भी गाए जाएंगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में होली मिलन समारोह का आयोजन भी होगा।

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