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तेल में आग और बाजार में भागमभाग: क्या निवेशकों को घबराना चाहिए? इतिहास का नजरिया क्या कहता है?

नई दिल्ली  क्या पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार थाम सकता है? मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों के बीच वैश्विक बाजारों में घबराहट साफ दिख रही है. 2 मार्च 2026 को निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 1.8% तक फिसल गए, सरकारी बॉन्ड यील्ड में हल्की तेजी आई, ब्रेंट क्रूड लगभग 6% उछला और सोने की कीमतें 3% बढ़ीं. सवाल यह है कि क्या यह उथल-पुथल भारत की लंबी अवधि की विकास यात्रा को प्रभावित करेगी, या यह केवल एक अस्थायी झटका है? हालिया विश्लेषण में एक्सिस एसेट मैनेजमेंट (Axis Asset Management) ने साफ किया है कि भले ही अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई हो, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे संघर्ष भारतीय शेयर बाजारों को लंबे समय तक पटरी से नहीं उतार पाए हैं. कच्चा तेल: भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम इस एनालिसिस के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है. यदि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बाधित करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा होगा. दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और 30% एलएनजी का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, और भारत की करीब आधी ऊर्जा आपूर्ति भी इसी मार्ग पर निर्भर है. तेल की कीमतों में तेज उछाल से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, महंगाई दबाव में आ सकती है और विमानन, पेंट, सीमेंट तथा केमिकल जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि जब तक तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची नहीं टिकतीं, तब तक शेयर बाजार स्थायी गिरावट का शिकार नहीं होते. रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया था, लेकिन शुरुआती गिरावट के बाद बाजार संभल गए और साल अंत में सकारात्मक रिटर्न दिया. रुपये और विदेशी निवेश का असर भू-राजनीतिक तनाव के समय अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव आता है. भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहता. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से रुपये में अस्थायी कमजोरी देखी जा सकती है. फिर भी भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति, नियंत्रित चालू खाता घाटा और संतुलित राजकोषीय स्थिति सुरक्षा कवच का काम करती है. 2013 के टेपर टैंट्रम, 2020 की महामारी और 2022 के युद्ध जैसे दौर में भी रुपया दबाव में आया, लेकिन शेयर बाजारों में लंबी अवधि की गिरावट नहीं आई. आरबीआई की भूमिका और बाजार की मानसिकता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ऐसे समय में स्थिरता का अहम स्तंभ बनता है. केंद्रीय बैंक ने अतीत में अस्थायी महंगाई झटकों को नजरअंदाज करते हुए मूल महंगाई और विकास की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया है. तरलता प्रबंधन के जरिए बाजार में भरोसा बनाए रखा गया है, ताकि घबराहट स्थायी संकट में न बदले. पिछले 15 वर्षों का इतिहास देखें तो हर बड़े संघर्ष के दौरान शुरुआती गिरावट आई, लेकिन बाजारों ने जल्द ही संतुलन पा लिया.     2014 के क्रीमिया संकट     2016 की सर्जिकल स्ट्राइक     2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक     2022 के रूस–यूक्रेन युद्ध     2023 के इजराइल–हमास संघर्ष इन सबके दौरान यही पैटर्न दिखा कि बाजार जल्द ही पटरी पर लौट आया. यहां तक कि 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के समय भी शुरुआती घबराहट के बाद स्थिरता लौट आई. असल में बाजार भावनाओं से ज्यादा इस बात का आकलन करते हैं कि आर्थिक असर कितना लंबा और गहरा होगा. जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सप्लाई चेन पर असर सीमित है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, तो जोखिम प्रीमियम घटने लगता है और निवेशक दोबारा सक्रिय हो जाते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश इतिहास बताता है कि संघर्षों के समय घबराकर बाजार से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदेह साबित हुआ है. जिन्होंने गिरावट के दौरान निवेश छोड़ा, वे बाद की तेजी से चूक गए. इसलिए अनुशासन, विविधीकरण और लंबी अवधि की सोच ही ऐसे दौर में सबसे कारगर रणनीति मानी गई है. ईरान वाला तनाव गंभीर जरूर है, लेकिन भारतीय बाजारों के लिए यह कोई अनजाना अनुभव नहीं. शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की विकास की कहानी घरेलू खपत, पूंजीगत व्यय, डिजिटलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर टिकी है. ऐसे में हर भू-राजनीतिक झटका स्थायी मोड़ नहीं, बल्कि अस्थायी विराम साबित हुआ है.  

फरवरी 2026: कारों की बिक्री में वृद्धि जारी, Tata की 34% और Mahindra की 19% बढ़ी

 मुंबई  फरवरी 2026 के खत्म होते ही पैसेंजर व्हीकल्स निर्माता कंपनियों ने डीलरों को बेहतर बिक्री की जानकारी दी है, जिससे यह पता चलता है कि दुनिया भर में चल रही अनिश्चितताओं के बावजूद सभी सेगमेंट में डिमांड स्थिर है. कंपनियों की बिक्री ग्रोथ को काफी हद तक यूटिलिटी व्हीकल्स के माध्यम से सपोर्ट मिला, जो घरेलू मार्केट में छोटी कार सेगमेंट से बेहतर परफॉर्म कर रही हैं. ज़्यादातर बड़े मैन्युफैक्चरर्स ने साल-दर-साल बढ़त दर्ज की है, जिससे यह पता चलता है कि कस्टमर डिमांड मज़बूत बनी हुई है. इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स ने महीने के दौरान हेल्दी रिटेल मोमेंटम और कंट्रोल्ड डीलर इन्वेंट्री लेवल की ओर भी इशारा किया. Maruti Suzuki की बिक्री देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki से मिली जानकारी के अनुसार कंपनी ने फरवरी में घरेलू पैसेंजर व्हीकल्स की 1,61,000 यूनिट्स की होलसेल बिक्री की, जो एक साल पहले की 1,60,791 यूनिट से थोड़ी ज़्यादा है. जहां कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट में बिक्री कम दर्ज हुई, वहीं यूटिलिटी गाड़ियों की बिक्री पिछले साल के 65,033 यूनिट से बढ़कर 72,756 यूनिट हो गई. इससे कंपनी का ओवरऑल परफॉर्मेंस बेहतर रहा. बिक्री के बारे में कंपनी ने कहा कि इस महीने कुल बिक्री 2.14 लाख यूनिट रही, जिसमें घरेलू होलसेल बिक्री 1.64 लाख यूनिट और रिटेल बिक्री साल-दर-साल 12 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि डीलर इन्वेंट्री 12 दिन की रही. कंपनी ने बताया कि मिडिल ईस्ट से इसके एक्सपोर्ट का लगभग 12.5 प्रतिशत हिस्सा आता है, और शिपमेंट लगभग 100 देशों में अलग-अलग तरह के होते हैं. Tata Motors की बिक्री इसके अलावा, Tata Motors Passenger Vehicles की बिक्री पर नजर डालें तो कंपनी ने फरवरी 2026 में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 34 प्रतिशत की ज्यादा बिक्री दर्ज की है, जोकि 62,329 यूनिट्स की रही, जो इसके पोर्टफोलियो में निरंतर मांग को दर्शाता है. Mahindra & Mahindra की बिक्री स्वदेशी एसयूवी निर्माता कंपनी Mahindra & Mahindra की बिक्री की बात करें तो कंपनी ने बताया कि घरेलू यूटिलिटी व्हीकल्स की बिक्री में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और कंपनी ने 60,018 यूनिट्स की बिक्री की, जो SUV सेगमेंट में लगातार बढ़ोतरी को दिखाता है. Hyundai, Toyota और Kia की बिक्री Hyundai Motor India ने घरेलू बिक्री में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज करते हुए 52,407 यूनिट्स की बिक्री की. वहीं, Toyota Kirloskar Motor की घरेलू बिक्री 16 प्रतिशत बढ़कर 30,737 यूनिट्स हो गई. इसके अलावा, Kia India की बात करें तो कंपनी ने फरवरी 2026 में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल करते हुए, 27,610 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की है, जबकि बीते साल इस समयावधि में यह बिक्री 25,026 यूनिट्स की थी.

ऑनलाइन शॉपिंग अब होगी सस्ती! Amazon ने फीस घटाई, लाखों लोगों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली Amazon India ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसके बाद कस्टमर और सेलर को दोनों को फायदा होगा. नए फैसले के बाद 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट पर 20 परसेंट शिंपिंग चार्ज में कटौती होने जा रही है. ऐमेजॉन के इस फैसले के फायदा सेलर और कस्टमर दोनों को होगा | 16 मार्च से 300-1000 रुपये की कीमत वाले प्रोडक्ट के लिए अपनी जीरो रेफरल फीस स्ट्रक्चर को एक्सपेंड किया गया है. इसमें 1,800 कैटेगरी के प्रोडक्ट्स शामिल हैं | रेफरल फीस क्या होती है? रेफरल फीस, असल में वह कमीशन होता है जिसको अमेरिका बेस्ड कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर सेल होने वाले हर एक आइटम के लिए वसूली करती है. यह प्रोडक्ट की कीमत के 2% से 16.5%  होती है| बीते साल अप्रैल ऐमेजॉन इंडिया ने 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट पर लगने वाले सेलर रेफरल फीस को खत्म किया जा चुका है. अब कंपनी इसका दायरा बढ़ाने जा रही है | फीस रिवाइज में 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर ईजी शिप फीस में 20 परसेंट की कटौती शामिल की गई है. ईजी शिप के तहत, सेलर्स अपने परिसर में प्रोडक्ट्स स्टोर करते हैं. वहीं, ऐमेजॉन पिकअप और डिलीवरी को संभालता है. ये सर्विस नए सेलर को काफी पसंद भी आ रही है | बीते साल फ्लिपकार्ट ने भी लिया था फैसला ऐमेजॉन से पहले फ्लिपकार्ट ने पिछले नवंबर 1,000 से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए जीरो कमीशन मॉडल शुरू किया था. इसके बाद फ्लिपकार्ट ने इसे अपने हाइपर-वैल्यू प्लेटफॉर्म शॉप्सी पर सभी प्रोडक्ट तक एक्सपेंड कर दिया है, फिर चाहें उनकी कीमत कुछ भी हो| मीशो ने 2022 में सबसे पहले जीरो-कमीशन मॉडल लॉन्च किया था वहीं, वैल्यू कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो ने 2022 में सबसे पहले जीरो-कमीशन मॉडल लॉन्च किया था. मीशू के इस मॉडल का उद्देश्य छोटे, मीडिया और बड़े बिजनेस को जोड़ना था. मीशो टियर-2 शहरों और उससे आगे के ग्राहकों पर फोकस करता है|

मैहर में चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को बंद रहेंगे माँ शारदा के पट, कब खुलेंगे गर्भगृह के द्वार, जानें यहाँ

सतना मैहर जिला में मौजूद त्रिकूट वासिनी माँ शारदा मंदिर में चंद्रग्रहण के अवसर पर मंदिर परंपरा अनुसार दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। मंदिर प्रशासन एवं प्रधान पुजारी पवन महाराज द्वारा जारी सूचना के अनुसार 3 मार्च को सायं 5:00 बजे माता शारदा की आरती एवं पूजन संपन्न होने के पश्चात गर्भगृह के पट सायं 5:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे। 4 मार्च को अभिषेक के बाद खुलेंगे पट बताया गया है कि 4 मार्च को माता का अभिषेक एवं विधिवत पूजा-अर्चना पूर्ण होने के बाद गर्भगृह के पट पुनः दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए निर्धारित समय से पूर्व मंदिर परिसर पहुंचें तथा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। 3 मार्च को कितने बजे लग रहा चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा. सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक काल लग जाएगा. इस दौरान कोई भी शुभ काम, पूजा-पाठ नहीं होंगे. गर्भवती महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकतीं. सूतक काल लगने के बाद से चंद्रग्रहण तक मंदिरों के पट बंद रहेंगे. एमपी के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दर्शन करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी कर दी गई है. ग्रहण के चलते मंदिरों के पट हो जाएंगे बंद 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण के चलते मां शारदा मंदिर की दर्शन व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया गया है. मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और ग्रहण काल के नियमों का पालन करते हुए 3 मार्च की शाम को गर्भगृह के पट निर्धारित समय से पहले बंद कर दिए जाएंगे. मंदिर के प्रधान पुजारी पवन महाराज द्वारा जारी सूचना के अनुसार, श्रद्धालुओं से दर्शन के लिए निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो. 3 मार्च को शाम 5:30 बजे बंद होंगे गर्भगृह के पट मंदिर प्रशासन द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार 3 मार्च को चंद्रग्रहण के दिन शाम 5:00 बजे मां शारदा की सांध्यकालीन आरती व विशेष पूजन किया जाएगा. आरती के बाद ठीक शाम 5:30 बजे गर्भगृह के पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए जाएंगे. पट बंद होने के बाद मंदिर के गर्भगृह में किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश या दर्शन की अनुमति नहीं होगी. इसलिए मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे समय रहते मंदिर पहुंचकर दर्शन कर लें. ग्रहण समाप्ति के बाद 4 मार्च को होगा शुद्धिकरण चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद 4 मार्च को मंदिर के गर्भगृह का विधि-विधान से शुद्धिकरण किया जाएगा. इसके बाद मां शारदा का पवित्र जल से अभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी. पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही गर्भगृह के पट दोबारा श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाएंगे. इसके बाद नियमित दर्शन व्यवस्था शुरू हो जाएगी. प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं मैहर मां शारदा मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. विशेष अवसरों और त्योहारों पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है. चंद्रग्रहण के कारण दर्शन व्यवस्था में बदलाव होने से दूर-दराज से आने वाले भक्तों को पहले से जानकारी देना आवश्यक माना गया है. श्रद्धालुओं से समय का ध्यान रखने की अपील मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो भक्त 3 मार्च को दर्शन के लिए आने वाले हैं, वे शाम 5:30 बजे से पहले मंदिर परिसर पहुंच जाएं. निर्धारित समय के बाद दर्शन संभव नहीं होगा. प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने व प्रशासन का सहयोग करने का भी अनुरोध किया है, ताकि सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन का लाभ मिल सके. परंपराओं के पालन हेतु मंदिर प्रबंधन की अपील मंदिर प्रबंधन ने कहा है कि ग्रहण काल की परंपराओं के पालन हेतु यह व्यवस्था की गई है और सभी भक्तों से समय का विशेष ध्यान रखने का अनुरोध किया गया है।

MP की सड़कों पर टोल वसूली का सवाल, आदेश से पहले करोड़ों वसूले, PWD मंत्री ने दिया स्पष्टीकरण

  भोपाल मध्य प्रदेश में टोल वसूली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने कई सड़कों पर राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूली शुरू कर दी थी. यानी जिस तारीख से टोल वसूली कानूनी रूप से लागू होनी थी, उससे पहले ही जनता की जेब से पैसा निकाला जाता रहा. यह खुलासा विधानसभा में PWD की ओर से जारी जवाब से हुआ है |  कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि प्रदेश की कौन-कौन सी सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब-कब जारी हुई और इन पर टोल वसूली कब से शुरू हुई? इसका जवाब जब सदन में रखा गया तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई |   कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार कई सड़क परियोजनाओं में अधिसूचना और टोल वसूली की तारीखों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है जो ना सिर्फ नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है |     प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इंडियन टोल एक्ट के तहत शासन अपने स्तर पर किसी भी सड़क पर टोल नहीं ले सकता है. सड़क जनता की संपत्ति है , तथा शासन ट्रस्टी है. ट्रस्टी उस संपत्ति से बेजा लाभ नहीं कमा सकता है |  सुप्रीम कोर्ट ने मंदसौर पुलिया के टोल प्रकरण में आदेश दिया कि कोई भी निवेशक, लागत उस पर ब्याज तथा रखरखाव के अतिरिक्त टोल नहीं वसूल कर सकता है |  अधिसूचना बाद में, वसूली पहले? कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में पेश आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि कई सड़कों पर अधिसूचना जारी होने के पहले से टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई, जिनमें के कुछ सड़कें हैं:- भोपाल बायपास – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2020 | टोल वसूली शुरू: 12 दिसंबर 2019 इंदौर–उज्जैन मार्ग – अधिसूचना: 30 दिसंबर 2022 | टोल वसूली शुरू: 21 जनवरी 2022 सागर–दमोह मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 भिंड–गोपालपुरा मार्ग – अधिसूचना: 4 जनवरी 2022 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 गुना–ईसागढ़ मार्ग – अधिसूचना: 10 अक्टूबर 2024 | टोल वसूली शुरू: 2 जून 2023 महू–घाटाबिल्लौद मार्ग – अधिसूचना: 24 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021 बीना–खिमलासा मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021 43 सड़कों से 603 करोड़ का ‘शुद्ध लाभ’? प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि प्रदेश की 43 सड़कों पर अधिसूचना जारी होने से पहले कथित अवैध टोल वसूली के जरिए एमपीआरडीसी ने दिसंबर 2025 तक 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जिसकी जांच होनी चाहिए |  पूरा पैसा सरकारी खजाने में गया, कोई भ्रष्टाचार नहीं PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सदन में जो जानकारी दी गई हैए उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि टोल वसूली शासकीय खजाने में ही जमा हुई हैए इसलिए इसमें भ्रष्टाचार का कोई मामला बनता ही नहीं है. जहां तक अधिसूचना जारी होने की बात है तो वो कई बार बैकडेट में भी जारी होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि विभाग ने अवैध रूप से टोल वसूली की है |   

प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज, होली पर नेता कर रहे दावेदारी, बायोडाटा सौंपने की होड़

रायपुर   छतीसगढ़ में राज्यसभा कि 2 सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए हलचल तेज है। भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव के लिए कमर कस ली है। राज्यसभा की दोनो सीट पर 16 मार्च को चुनाव होगा,जिसके लिए हलचल तेज हो गई है। वहीं  अब होली के बहाने राज्यसभा दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरु कर दी है। होली  बधाई देने के बहाने पार्टी वरिष्ठ नेताओं से कर रहे  मुलाकात छत्तीसगढ़ के कोटे की दो राज्यसभा सीट पर 16 मार्च को चुनाव होगा। वर्तमान में दोनों सीट कांग्रेस के खाते में हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट जाएगी। इसे देखते हुए कांग्रेस-भाजपा के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दरसअल राज्यसभा जाने के लिए लालयित  कुछ दावेदारों ने होली के बहाने अपनी दावेदारी पेश करने के लिए कोशिश शुरु कर दी है। दावेदार होली की बधाई देने के बहाने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके अपनी मौजूदगी औऱ सक्रियता दिखा रहे है। यही नहीं  इस दौरान वे अपना बायोडाटा भी सौंप रहे हैं और माहौल को अपने पक्ष में करने की जुगत कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है ये चुनाव वही राज्यसभा का ये चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह काफी अहम माना जा रहा है। इस फैक्ट के ध्यान में रखते हुए पार्टी दावेदारों के साथ-साथ उनका क्षेत्रीय के साथ जातिगत  समीकरणों को भी गौर से देखा जा रहा है। जहां भाजपा बस्तर या फिर दुर्ग संभाग से अपने किसी नेता को राज्यसभा का भेज सकती है,वहीं, कांग्रेस में सरगुजा संभाग से कई दावेदारों सामने आ रहे हैं। हालांकि बीजेपी कुछ नाम आलाकमान को भेज चुकी है तो वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज स्थानीय प्रत्याशी को मौका देने की बात बोल चुके है। लेकिन अभी देखने में आ रहा है  कि नेता लोग होली की शुभकामनाओं के बहाने भी अपनी दावेदारी पेश करके ताल ठोंक रहे है।

MP में मत्स्यपालकों के लिए नई नीति, सरकार का बड़ा कदम, किसान कल्याण वर्ष में हर अंचल में कैबिनेट बैठक होगी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के हर अंचल में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी। जनजातीय अंचल नागलवाड़ी (निमाड़) में आज सोमवार को कृषि कैबिनेट आयोजित की जा रही है। बीते वर्ष भी निमाड़ क्षेत्र के महेश्वर में अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। मत्स्य नीति की सौगात देगी प्रदेश सरकार-मोहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में कृषि सहित बागवानी, सहकारिता, मत्स्य उत्पादन आदि से संबंधित 17 विभागों को जोड़कर हम कार्य कर रहे हैं। नर्मदा के किनारे मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्यपालकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का समावेश करते हुए मत्स्य नीति की सौगात हम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि-पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के साथ मत्स्य उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता से बढ़कर और बेहतर स्थिति पाने का हमारा प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे-मातरम के सामूहिक गान के बाद मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति अंचल बड़वानी-निमाड़ नर्मदा जलप्रदाय योजना से पहले सूखा और आमजन के पलायन वाला क्षेत्र हुआ करता था। अब यहां हालात बदल चुके हैं। यहां सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। नर्मदा वैली से खेती संबंधी बेहतरीन प्रयोग एवं कार्य इस अंचल में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से सामान्य तापमान में भी 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा जी के किनारे हमारी आध्यात्मिक संस्कृति फली-फूली है। यहां भगवान भीलट देव का अद्भुत स्थान है, उनका चरित्र और इतिहास प्रेरणादायी है। इस अंचल में ऐसे महापुरुषों की एक पूरी शृंखला है। यहां संत सिंगा जी महाराज का स्थान है, खंडवा में दादाजी धूनीवाले का स्थान है, समाजसेवी संत एक रोटी वाले बाबा की कृपा भी यहां प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक छोटे से परिवार में जन्म लेने वाले भीलट देव जी ने साधना के बलबूते पर भक्तिभाव के साथ,  सही अर्थ में आध्यात्म के लिए सभी को प्रेरित किया। वे सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता और जीवित भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय पर्व के रूप में प्रदेश में मनाया जा रहा है। यहां होली से 7 दिन पहले से ही यह पर्व मनाया जाता है, जनजातीय भाई-बंधु टोलियों में परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गायन से होली की अनूठी प्रस्तुति देते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भगोरिया हाट का आयोजन भी किया जा रहा है।

महाकाल के दरबार में चंद्र ग्रहण का असर नहीं, बाबा महाकाल करेंगे होली खेल, मंदिर के पट रहेंगे खुले

उज्जैन 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों और शिवालयों के पट बंद रहते हैं. यहां तक की घरों में भी भगवान के मंदिर के पर्दे लगा दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है. फिर ग्रहण खत्म होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलते हैं. ये बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर के पट सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. भक्त बाबा के दर्शन कर सकते हैं. जानिए बाबा महाकाल मंदिर में क्यों ग्रहण पर भी पट खुले रहते हैं. महाकाल के आगे ग्रह, नक्षत्र का कोई दुष्प्रभाव नहीं अवंतिका नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह 3 मार्च यानि चंद्र ग्रहण पर भी बाबा के दर्शन का क्रम सुबह भस्म आरती से देर रात शयन आरती तक चलता रहेगा. इसके पीछे की वजह को लेकर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने  चर्चा में बताया कि “बाबा महाकालेश्वर का मंदिर दक्षिण मुखी है. भगवान का मुख दक्षिण की और होने से वे कालों के काल महाकाल कहलाते हैं. दक्षिण दिशा काल का है, काल पर जिसका नियंत्रण हो वह महाकाल है. बाबा महाकाल के कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या कोई बाधा किसी को प्रभावित नहीं कर पाता. इसलिए ग्रहण के दौरान भी कोई दुष्प्रभाव मंदिर क्षेत्र में नहीं पड़ेगा. लिहाजा चंद्रग्रहण के दौरान भी भगवान का पूजा-अर्चन और सभी आरती समय पर जारी रहेगी. इसके साथ ही भक्त बाबा के दर्शन हर दिन की तरह कर सकेंगे. मंदिर सुबह भस्म आरती से लेकर देर रात शयन आरती तक खुला रहेगा. मंदिर में 2 मार्च यानि सोमवार को होलिका दहन हुआ . इसके बाद 3 मार्च को ही होली पर्व मनाया जाएगा. वेद परंपरा का अपना महत्व है. उसका निर्वहन करने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाएगा.” 14 मिनट का ग्रहण जानिए क्या रहेगा पूजन का क्रम मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन है. शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि “सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के बाद भगवान को भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी. ग्रहण 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक यानि 14 मिनट का रहने वाला है. ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण महेश पुजारी ने कहा कि ” ग्रहण के दिन मंदिर की सारी व्यवस्थाएं हर दिन की तरह तो रहेगी, लेकिन ग्रहण के चलते कोई भी यानि पुजारी हो या श्रद्धालु भगवान को स्पर्श नहीं करेगा. इस दौरान गर्भ गृह में पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं. जब ग्रहण खत्म हो जाता है, तो पुजारी स्नान करने के बाद भगवान का जलाभिषेक करेंगे, मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक होगा. मंदिर शुद्धिकरण होगा. दूसरे मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर का पट बंद नहीं होंगे. दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण है. जैसे सूर्य की ऊर्जा है, उससे कई गुना अधिक बाबा की ऊर्जा है.” महाकाल मंदिर समिति ने क्या कहा? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि “पुजारी-पुरोहितों से चर्चा के बाद तय हुआ है कि होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ग्रहण में भी भगवान के दर्शन पूजन का क्रम हर रोज की तरह रहेगा. दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को कोई परेशानी नहीं आए, इसका ध्यान रखा जाएगा. ग्रहण के कारण जो सामान्य जो बदलाव हुए हैं, जैसे मंदिर शुद्धिकरण हो या ग्रहण के दौरान गर्भ गृह के अंदर मंत्रोच्चार तमाम व्यवस्थाएं मंदिर समिति की ओर से की गई है.

Chandra Grahan 2026: आज लगेगा पहला चंद्र ग्रहण, सूतक काल के लिए जानें सही समय

इंदौर  Chandra Grahan 2026 Rashifal: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है. भारत में कब लगेगा चंद्र ग्रहण? साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर को 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. बता दें, कि सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ऐसे में 3 मार्च को सूतक काल 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा. इस समय मूर्ति स्पर्श और भोजन बनाने या खाने की मनाही होती है. दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक, कितने बजे दिखेगा ब्लड मून? 1. दिल्ली- शाम 06:26 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 20 मिनट) 2. प्रयागराज– शाम 06:08 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 38 मिनट) 3. कानपुर- शाम 06:14 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 32 मिनट) 4. वाराणसी– शाम 06:04 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 43 मिनट) 5. पटना- शाम 05:55 से लेकर शाम 06:46 तक ( कुल 51 मिनट) 6. रांची– शाम 05:55 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 51 मिनट) 7. कोलकाता- शाम 05:43 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 1 घंटा 03 मिनट) 8. भुवनेश्वर- शाम 05:54 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 52 मिनट) 9. गुवाहाटी– शाम 05:27 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 1 घंटा 19 मिनट) 10. चेन्नई-  शाम 06:21 से लेकर शाम 06:46 तक ( कुल 26 मिनट) 11. हैदराबाद– शाम 06:26 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 20 मिनट) 12. बेंगलुरु– शाम 06:32 से लेकर शाम 06:46 तक (कुल 14 मिनट) ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है.  चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing) इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा.  कहां कहां दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण?  यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा. किन राशियों के लिए शुभ संकेत? ज्योतिषीय गणना के आधार पर यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए करियर के क्षेत्र में अच्छी खबर मिल सकती है। लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति या जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों को पहचान मिल सकती है। मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों को आर्थिक मोर्चे पर राहत मिल सकती है। अचानक धन लाभ या रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। बैंक बैलेंस मजबूत हो सकता है। तुला राशि- तुला राशि वालों के लिए यह समय पुराने प्रयासों का फल देने वाला हो सकता है। अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं और पारिवारिक वातावरण में खुशी का माहौल रहेगा। मकर राशि- मकर राशि के लिए यह अवधि अपेक्षाकृत स्थिर और संतुलित रहेगी। कामकाज में शांति बनी रहेगी और मानसिक दबाव कम हो सकता है। किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी? जहां कुछ राशियों को लाभ के संकेत मिल रहे हैं, वहीं कुछ राशि वालों को संयम और सतर्कता रखने की सलाह दी जा रही है। मेष राशि- मेष राशि वालों को मान-सम्मान से जुड़े मामलों में सावधानी रखनी होगी। किसी विवाद या बहस में पड़ने से बचें। कर्क और कन्या राशि- इन दोनों राशियों के लिए आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है। बिना सोचे-समझे निवेश न करें। धन हानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सिंह राशि- ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। थकान, बदन दर्द या ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों को मानसिक तनाव से बचने की सलाह दी जाती है। काम का दबाव या पारिवारिक जिम्मेदारियां मन पर असर डाल सकती हैं। धनु राशि– धनु राशि के जातकों को बच्चों की पढ़ाई या सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें। कुंभ और मीन राशि- इन राशियों के लिए वैवाहिक जीवन में थोड़ी अनबन के संकेत हैं। संवाद बनाए रखना और जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर रहेगा। ग्रहण काल में क्या करें?- ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। सूतक काल के नियमों का पालन करना परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण समझा जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करने की भी सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण का प्रभाव ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा. कर्क राशि  कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें. उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. सिंह राशि यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले … Read more

धार भोजशाला परिसर में कब्रों पर विवाद गहराया, एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद मुस्लिम पक्ष ने लिया कोर्ट जाने का निर्णय

धार  धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।  जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे। भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है। परिसर के उस हिस्से में, जहां मस्जिद निर्मित है, पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो सामान्यतः मस्जिद निर्माण में नहीं देखी जातीं। कुछ शिलालेखों पर पशु आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि 50 से अधिक शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें लिखी पाई गई हैं। नींव में मिला परमारकालीन ‘शारदा सदन’ रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ढांचे के नीचे बेसाल्ट पत्थरों की 10वीं–11वीं शताब्दी की नींव पाई गई। इन पत्थरों पर ‘शारदा सदन’ शब्द अंकित है, जो देवी सरस्वती या वाग्देवी के निवास का संकेत देता है। साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यिक कृति ‘पारिजात मंजरी’ के उल्लेख वाले शिलालेख भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह स्थान पूजा का केंद्र होने के साथ ही शिक्षा और नाट्य गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी था। तीन चरणों में निर्माण, अंतिम चरण में मस्जिद स्वरूप वैज्ञानिक परीक्षणों से एएसआई ने निष्कर्ष निकाला है कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे प्राचीन परत मंदिर की है। इसके ऊपर क्षतिग्रस्त संरचना के अवशेष और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा ढांचा निर्मित किया गया। रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद निर्माण के दौरान मंदिर के स्तंभों, शिलाखंडों और सजावटी पत्थरों का पुनः उपयोग किया गया। जिसमें कि निर्माण में समरूपता का अभाव स्पष्ट दिखता है। कई पत्थर उल्टे या आड़े-तिरछे लगाए गए, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे थे। कुछ अक्षरों को घिसकर मिटाने के प्रयास भी मिले हैं। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि मूल पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। 106 स्तंभ, 82 अर्धस्तंभ और कीर्तिमुख सर्वे में पाया गया कि पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्धस्तंभों पर आधारित है। अधिकांश स्तंभ चूना पत्थर के हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर है। इन पर कीर्तिमुख, नागबंध, चैत्य गवाक्ष और उल्टे पत्तों की नक्काशी उकेरी गई है। कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट आकृति है, जिसे सिंहमुख रूप में दर्शाया जाता है और जिसे दुष्ट शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्तंभों के शीर्ष पर गोलाकार अभाकस, अष्टकोणीय पट्ट और त्रिकोणीय आधार स्पष्ट रूप से मध्यकालीन मंदिर शैली को दर्शाते हैं। 150 से अधिक संस्कृत शिलालेख, 56 अरबी-फारसी अभिलेख रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत 56 शिलालेख अरबी और फारसी में पाए गए। यह अनुपात भी मूल संरचना के मंदिर और शैक्षणिक केंद्र होने की ओर संकेत करता है। फर्श और दीवारों में लगे कई पत्थरों पर खुदे अक्षरों को जानबूझकर घिसा गया या उल्टा लगा दिया गया ताकि उन्हें पढ़ा न जा सके। एएसआई के अनुसार यह ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ का स्पष्ट उदाहरण है। मूर्तियों के साक्ष्य: गणेश से अर्धनारीश्वर तक सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियों और उनके अवशेषों का उल्लेख है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और चार भुजाओं वाले अन्य देवताओं की आकृतियां शामिल हैं। परिसर से पूर्व में प्राप्त अर्धनारीश्वर, कुबेर और नायिका की मूर्तियों को भी साक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। ये प्रतिमाएं वर्तमान में संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खिड़की फ्रेम पर देवी-देवताओं की अपेक्षाकृत सुरक्षित मूर्तियां और एक स्तंभ पर कटी-फटी आकृतियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मूल प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई। 1455 ईस्वी का शिलालेख और ऐतिहासिक संदर्भ परिसर में स्थित मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख का उल्लेख रिपोर्ट के खंड चार, पृष्ठ 260 पर किया गया है। यह शिलालेख मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (हिजरी 859/1455 ईस्वी) का है। एएसआई द्वारा किए गए अनुवाद के अनुसार उसमें उल्लेख है कि एक पुराने आश्रम को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह में परिवर्तित किया गया। इस संदर्भ में उल्‍लेखित है कि रिपोर्ट इस अभिलेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानती है। कारीगरों के 139 निशान और युद्ध दृश्य स्तंभों पर 139 से अधिक प्रकार के चिह्न जैसे त्रिशूल, स्वास्तिक और अन्य प्रतीक मिले हैं। इन्हें कारीगरों के सिग्नेचर या कोड के रूप में देखा गया है। दीवारों पर हाथी और सैनिकों के युद्ध दृश्य भी उकेरे गए हैं। एक स्थान पर बच्चे के हाथ का निशान भी मिला है, जो निर्माणकालीन गतिविधियों का मानवीय संकेत देता है। 98 दिन का सर्वे और 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया। 4 जुलाई 2024 को एएसआई ने 10 … Read more

मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट नदियों की स्वच्छता में योगी सरकार ने रचा नया अध्याय, 2035 तक 100% अपशिष्ट जल उपयोग का लक्ष्य

यूपी बना 85 फीसदी सीवेज का शोधन करने में सक्षम राज्य गंगा-यमुना की पवित्रता दूषित नहीं होने देगी योगी सरकार, राज्य में प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी किया जा रहा ट्रीट नदियों की स्वच्छता में योगी सरकार ने रचा नया अध्याय, 2035 तक 100% अपशिष्ट जल उपयोग का लक्ष्य नमामि गंगे मिशन फेज-2 से यूपी के सीवरेज सिस्टम को मिल रही बड़ी मजबूती, अपशिष्ट जल से बनेगा विकास का नया मॉडल लखनऊ, उत्तर प्रदेश को स्वच्छ प्रदेश बनाने की मुहिम समय के साथ तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार अपशिष्ट जल को ‘आर्थिक संपत्ति’ में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज का शोधन किया जा रहा है। इस तरह प्रदेश अब लगभग 85 प्रतिशत गंदे पानी को उपचारित करने में सफल है। सरकार गंगा-यमुना समेत राज्य की तमाम नदियों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। नमामि गंगे मिशन से मिली सीवरेज सिस्टम को मजबूती उल्लेखनीय है कि नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम को नई मजबूती दी है। उत्तर प्रदेश में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 41 पूरी होकर संचालन में भी आ चुकी हैं। शेष परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। राज्य भर में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है। हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है।  अपशिष्ट जल से विकास का नया मॉडल   योगी सरकार अब उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति तैयार कर रही है। योजना तीन चरणों में लागू होगी।  1. नगरपालिका- पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, सार्वजनिक उद्यानों में इस्तेमाल।  2. उद्योग और कृषि- औद्योगिक प्रक्रियाओं व खेतों की सिंचाई के लिए। 3. घरेलू गैर-पेय उपयोग- निर्माण कार्य समेत अन्य कार्यों में पुनर्चक्रण।   सीएम योगी कर रहे स्वच्छ नदियों के सपने को साकार जहां एसटीपी चालू हैं और क्षमता मौजूद है, वहां वर्ष 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वच्छ नदियों के सपने को साकार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।

03 मार्च 2026 राशिफल: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्य, जानें किसे मिलेगा सफलता और लाभ

मेष 3 मार्च के दिन घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है। प्रोडक्टिविटी आज रोज के मुकाबले नॉर्मल से स्लो रहेगी। आपकी प्लानिंग पूरी होने में देरी हो सकती है। कॉन्फिडेंस में आपके कमी आ सकती है। लाइफ पार्टनर के साथ बॉन्ड को स्ट्रांग बनाने के लिए आप डेट प्लान कर सकते हैं। वृषभ 3 मार्च के दिन दोपहर के बाद नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। जीवनसाथी के साथ बहस करने से बचें क्योंकि मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। मिथुन 3 मार्च के दिन कारोबार फलेगा-फूलेगा। अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं। आज का दिन धन के मामले में अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। कर्क 3 मार्च के दिन आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है। हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। अहंकारी न होने का प्रयास करें और सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। सिंह 3 मार्च के दिन आज आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। आज का दिन संतोषजनक रहेगा। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है और नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है। कन्या 3 मार्च के दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा। और आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे। आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी लेकिन कुछ अप्रत्याशित खर्चे तनाव का कारण बन सकते हैं। तुला 3 मार्च के दिन आपके काम की तारीफ होगी। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। वृश्चिक 3 मार्च के दिन पार्टनरशिप में व्यवसाय करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं। दोपहर में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है। धनु 3 मार्च के दिन खुद और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए। फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। मकर 3 मार्च के दिन आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। बिजनेस में फाइनेंशियल कमजोरी का अनुभव हो सकता है। कुछ नुकसान होने की भी आशंका है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। कुंभ 3 मार्च के दिन तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें। परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है। करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। मीन 3 मार्च के दिन करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम, यूपी में 1 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति क्लब’ से जोड़ने की तैयारी

वाराणसी यूपी के वाराणसी में आयोजित 11 दिवसीय रीजनल (राष्ट्रीय स्तर) सरस मेले में पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने महिलाओं को लेकर बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने कहा, समूह से और अधिक महिलाओं को जोड़ा जाए। उन्होंने प्रदेश में एक करोड़ महिलाओं को लखपति महिला क्लब में शामिल करने तथा उन्हें करोड़पति महिला बनाने का आह्वान किया। आने वाले दिनों में सरस मेलों के आयोजन कराने की घोषणा की, जिससे अन्य प्रदेशों तथा जनपदों से आने वाली महिलाओं से प्रेरित होकर अन्य महिलाएं भी आगे आकर कार्य करें। उन्होंने महिलाओं के कार्यों तथा उनके उत्पादों की सराहना की। उप मुख्यमंत्री ने स्टालों का अवलोकन किया, उत्पादों की जानकारी ली तथा आजीविका मिशन की ओर से लगाए गए फूड कोर्ट के कार्य की प्रशंसा की। 11 दिवसीय सरस मेले का समापन यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उपस्थिति में ग्यारह दिवसीय रीजनल (राष्ट्रीय स्तर) सरस मेला का सोमवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में समापन हो गया। इस आवासीय मेले में विभिन्न प्रदेशों तथा उत्तर प्रदेश के विभन्नि जनपदों से आए महिला समूहों द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये का व्यापार किया गया। मेले में सजावटी सामग्री, खाद्य प्रसाद, पीतल की सामग्री, अचार-मुरब्बा, लेदर के सामान, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, कुर्ती, चादर, कालीन, जूट के उत्पाद, मूंज के उत्पाद आदि प्रमुख थे। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी की दो बीमा सखियों मीना देवी व प्रतिभा देवी तथा दो लखपति महिलाओं शर्मीला देवी व लक्ष्मी वर्मा को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। जनपद के 703 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि तथा 20 समूहों को रिवॉल्विंग फंड मद में कुल 10 करोड़ 60 लाख 50 हजार रुपये का प्रतीकात्मक रूप से चेक प्रदान किया गया। साथ ही दो समूह की महिलाओं को ई-रक्शिा उपलब्ध कराते हुए प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आम बजट में लखपति दीदी के लिए नए अवसर खुलने की हुई थी घोषणा आम बजट में वित्त मंत्री ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का विशेष ध्यान रखते हुए सरकार की महत्वाकांक्षी लखपति दीदी योजना को और विस्तार देने की घोषणा की थी। इससे देशभर की लाखों महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा, जिसके चलते जनपद बिजनौर की करीब 29 हजार लखपति दीदी के लिए नए अवसर खुलेंगे। वर्तमान में बिजनौर में विदुर ब्रांड के लगभग 100 आउटलेट और स्टोर हैं, जबकि करीब 60 विदुर कैफे हैं, जिन्हें बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। अभी विदुर ब्रांड से आमदनी टर्न ओवर करीब दस करोड़ से ज्यादा का टर्न ओवर है। बजट में वित्त मंत्री की घोषणा के अनुसार लखपति दीदी कार्यक्रम के तहत अब महिलाओं को सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि उनके उत्पादों को बेचने के लिए और अधिक रिटेल आउटलेट खोले जाएंगे।  

टूटी झोपड़ी से IAS तक का सफर, चाय बेचने वाले पिता के बेटे ने रचा इतिहास

जयपुर कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, रास्ता निकल ही आता है। यह बात सच साबित करते हैं देशल दान चरण, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा पास की और आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर देशल दान चरण मूल रूप से राजस्थान के सुमलाई गांव से आते हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके पिता कुशल दान चरण एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। इसी दुकान की कमाई से दस लोगों का परिवार चलता था। घर की हालत ऐसी थी कि रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए पिता को कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो गरीबी से बाहर निकाल सकता है। पिता का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत देशल के पिता हमेशा कहते थे कि हालात चाहे जैसे हों, पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। घर में पैसों की कमी थी, लेकिन सपनों की नहीं। यही सोच बच्चों के अंदर भी बैठ गई। कम संसाधनों में पढ़ाई करना आसान नहीं था। न अच्छे कोचिंग संस्थान, न सुविधाएं, न पढ़ाई का माहौल। लेकिन देशल ने ध्यान भटकने नहीं दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस रखा और हर परिस्थिति को चुनौती की तरह लिया। परिवार पर टूटा बड़ा दुख, फिर भी नहीं डगमगाए जब देशल दसवीं कक्षा में थे, तब उनके परिवार पर एक बड़ा दुख आ पड़ा। उनके बड़े भाई, जो नौसेना में थे, एक पनडुब्बी दुर्घटना में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर का माहौल बदल गया। दुख, जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव सब एक साथ आ गए। लेकिन इसी समय देशल ने ठान लिया कि अब उन्हें अपने परिवार को संभालने के लिए कुछ बड़ा करना है। उन्होंने इस दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। इंजीनियर बनने का सपना और पहली बड़ी सफलता देशल का सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने जेईई मेन परीक्षा की तैयारी शुरू की। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और पहले ही प्रयास में परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर ली। इसके बाद उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जबलपुर में दाखिला मिला। यह उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था। गांव से निकलकर एक प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचना उनके संघर्ष का पहला फल था। यहां से बदला सोचने का नजरिया इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान देशल ने महसूस किया कि वह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। यहीं से उनके मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि अब लक्ष्य होगा देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में जाना। यह रास्ता आसान नहीं था, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा माना जाता है। यूपीएससी की तैयारी, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा यूपीएससी की तैयारी केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और लगातार मेहनत की मांग करती है। देशल ने बिना किसी शोर-शराबे के, बिना दिखावे के, चुपचाप तैयारी शुरू की। उन्होंने अपनी दिनचर्या सख्त बनाई। समय का पूरा उपयोग किया। कमजोर विषयों पर ज्यादा मेहनत की और लगातार खुद को बेहतर बनाते रहे। उनकी रणनीति साफ थी, कम संसाधन हैं तो मेहनत दोगुनी करनी होगी। संघर्ष से निकली सफलता की कहानी देशल दान चरण ने यह साबित कर दिया कि सफलता किसी बड़े शहर, अमीर परिवार या महंगी कोचिंग की मोहताज नहीं होती। अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो एक चाय बेचने वाले का बेटा भी आईएएस बन सकता है। उनकी कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो एक पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई पर रखा, और उस बेटे की जिसने उस विश्वास को सच कर दिखाया।

दोस्ती पर भारी पड़ी भूल: कुवैत ने गिराए तीन F-15E फाइटर जेट, अमेरिका ने कही ये बात

कुवैत कुवैत ने गलती से 3 अमेरिकी F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, सभी 6 एयरक्रू सदस्य सुरक्षित रूप से ईजेक्ट हो गए, उन्हें बचा लिया गया है और वे स्थिर हालत में हैं। यह घटना ईरान के खिलाफ चल रही ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान हुई, जब कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने इन विमानों को दुश्मन के रूप में पहचान लिया। कुवैत ने इस घटना को स्वीकार किया है और अमेरिकी सेना ने कुवैती रक्षा बलों के सहयोग की सराहना की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुर्भाग्यपूर्ण फ्रेंडली फायर घटना 2 मार्च की सुबह हुई, जब अमेरिकी F-15E विमान ईरान पर हमलों में सहायता कर रहे थे। उस समय क्षेत्र में ईरानी विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन अटैक हो रहे थे, जिससे वायु क्षेत्र में भारी उथल-पुथल मची हुई थी। कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने इन अमेरिकी विमानों को गलत तरीके से खतरे के रूप में पहचाना और उन्हें मार गिराया। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की जटिलता को दर्शाती है, जहां सहयोगी देशों के बीच भी गलतफहमियां हो सकती हैं। खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले ऑपरेशन एपिट फ्यूरी अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई है, जिसमें ईरान के सैन्य ठिकानों, नौसेना और IRGC मुख्यालयों पर 1 हजार से अधिक हमले किए जा चुके हैं। ईरान ने जवाबी हमलों में कुवैत सहित खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। इस फ्रेंडली फायर घटना से अमेरिकी वायुसेना को नुकसान हुआ है, लेकिन कोई जानमाल की हानि नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले वायु क्षेत्र और तेज गति से बदलती स्थिति ने इस गलती को जन्म दिया। दोनों देश अब जांच और बेहतर समन्वय पर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कुवैत में कैसे हैं हालात ईरान और ईरान समर्थित मिलिशिया ने इजरायल व अरब देशों पर मिसाइलें दागीं, जिनमें कुवैत में अमेरिकी दूतावास परिसर को निशाना बनाया गया। इजरायल और अमेरिका ने ईरान में लक्ष्यों पर बमबारी की जिससे सोमवार को युद्ध का विस्तार हुआ। इसके साथ ही युद्ध में हताहतों की संख्या भी बढ़ रही है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, अमेरिका-इजरायल ऑपरेशन में ईरान में अब तक कम से कम 555 लोग मारे जा चुके हैं और देश भर के 130 से अधिक शहर हमलों की चपेट में आ चुके हैं। कुवैत सिटी में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर से आग और धुआं उठते देखा गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश में अमेरिकी युद्धक विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं। मंत्रालय ने दुर्घटनाओं के कारणों या उनमें शामिल विमानों की संख्या के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि पायलटों को अस्पताल ले जाया गया है और उनकी हालत स्थिर है।  

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