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कांग्रेस के LoP पद पर संकट, ठाकरे से 1 सीट को लेकर रार, पीछे हटने की अपील

मुंबई  महाराष्ट्र में विपक्ष के पास जीतने योग्य एक ही राज्यसभा सीट है, जिसपर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी दोनों ही दावा पेश कर चुके हैं। अब खबरें हैं कि कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से सीट पर दावेदारी छोड़ने की अपील की है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और केरल विधायक रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से बात की थी। उन्होंने ठाकरे से कहा कि यह सीट कांग्रेस को दी जानी चाहिए, जिसके बदले में शिवसेना यूबीटी को एमएलसी सीट दी जाएगी। खास बात है कि राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। इसपर नतीजों का ऐलान 16 मार्च को होगा। इन नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल अप्रैल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी, राकांपा (एसपी) की फौजिया खान, आरपीआई (आठवले) के रामदास आठवले, भाजपा के भागवत कराड, कांग्रेस की रजनी पाटिल और राकांपा के धैर्यशील पाटिल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। सत्तारूढ़ महायुति के पक्ष में भारी बहुमत को देखते हुए एमवीए संसद के ऊपरी सदन और विधान परिषद में केवल एक-एक सदस्य को निर्वाचित कराने में सफल हो सकती है। क्या बात हुई रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चेन्नीथला ने ठाकरे को बताया कि महाराष्ट्र की यह एकमात्र सीट कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर कांग्रेस को यह सीट नहीं मिलती है, तो संभावनाएं हैं कि पार्टी नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा गंवा सकती है। सूत्र ने कहा, ‘राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए किसी भी विपक्षी दल को कुल सीटों का 10 फीसदी या कम से कम 25 सदस्य रखने होते हैं। मौजूदा स्थिति है कि कांग्रेस के पास संख्या बल 27 का है, लेकिन कई सांसद ऐसे हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।ऐसे में 25 का आंकड़ा बनाए रखना चुनौती हो सकता है। ऐसे में एक राज्यसभा सीट भी अहम साबित हो सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘इसके चलते कांग्रेस नेतृत्व ने उद्धव ठाकरे से इस मुद्दे पर नहीं अड़ने का अनुरोध किया है। इसके बदले में कांग्रेस शिवसेना यूबीटी को एक एमएलसी सीट देने के लिए तैयार है।’ MVA के तीनों दलों की नजर खास बात है कि इस सीट पर महाविकास अघाड़ी के तीनों बड़े दलों की नजर है। एक ओर जहां आदित्य ठाकरे ने एक पोस्ट में कहा, ‘राज्यसभा चुनाव के लिए हो रही वार्ता में कोई गतिरोध नहीं है; सभी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हमने एक राज्यसभा सीट पर अपना दावा पेश किया है, क्योंकि संख्यात्मक ताकत और एमवीए के लिए तय ‘रोटेशन’ नीति के अनुसार इस सीट पर शिवसेना यूबीटी को चुनाव लड़ना चाहिए।’ वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ने के अपने दावे पर अडिग है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिए जाएंगे। इधर, वरिष्ठ राजनेता शरद पवार भी इस सीट के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। खबर है कि उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने गठबंधन के साथियों से पिता का समर्थन करने की अपील की है। किसके पास कितनी संख्या शिवसेना यूबीटी के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राकंपा शरद पवार के पास 10 विधायकों का समर्थन है। हाल ही में शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि 16 मार्च को होने वाले चुनावों से पहले राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर एमवीए के भीतर चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते शिवसेना यूबीटी का रुख इस फैसले के लिए अहम होगा।

‘जज ने समझा नहीं’: HC में गलती का खुलासा, सीबीआई नहीं छोड़ेगी केजरीवाल-सिसोदिया को

नई दिल्ली दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में एक नया मोड़ आ गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले में गंभीर खामियां बताई हैं. सीबीआई ने अपनी अपील में कहा कि विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने मामले में ‘मिनी ट्रायल’ चला दिया और एजेंसी के सबूतों को पूरी तरह समझे बिना आदेश पारित कर दिया. एजेंसी ने यह भी कहा कि जज ने अभियोजन पक्ष के मामले को चुनिंदा तरीके से पढ़ा और पूरे षड्यंत्र को समग्र रूप से नहीं देखा. यह मामला 2021-22 की दिल्ली की नई आबकारी (शराब) नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था. सीबीआई का आरोप है कि इस नीति को बनाते समय जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचे और बदले में कथित रूप से आर्थिक लाभ लिया गया. ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा था? राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने 27 फरवरी को जारी अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों से पहली नजर में भी कोई ठोस मामला नहीं बनता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री किसी भी आरोपी के खिलाफ गंभीर संदेह तक पैदा नहीं करती. जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाया, जिससे आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बड़ी साजिश की जो थ्योरी पेश की गई थी, वह उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में टिक नहीं पाती. इसी आधार पर सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया. सीबीआई की अपील में क्या कहा गया? सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ 974 पन्नों की विस्तृत अपील दाखिल की है. एजेंसी का कहना है कि विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय करने के शुरुआती चरण में ही ‘मिनी ट्रायल’ जैसा व्यवहार किया और मामले के हर हिस्से का विस्तृत विश्लेषण कर दिया, जबकि इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. सीबीआई के अनुसार, जज ने अभियोजन के पूरे मामले को एक साथ देखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखा. एजेंसी का आरोप है कि फैसले में अभियोजन के सबूतों को चुनिंदा तरीके से पढ़ा गया और उन तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया गया, जो आरोपियों की भूमिका को दर्शाते थे. सीबीआई ने यह भी कहा कि जज ने जांच एजेंसी और जांच अधिकारी के खिलाफ जो प्रतिकूल टिप्पणियां कीं, वे ‘अनुचित और समझ से परे’ हैं. शराब नीति में बदलाव को लेकर गंभीर आरोप सीबीआई का कहना है कि 2021-22 की आबकारी नीति में किए गए बदलाव सामान्य प्रशासनिक फैसले नहीं थे. एजेंसी के मुताबिक, नीति के तहत थोक व्यापार को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया गया और मुनाफे का मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया. साथ ही टर्नओवर की शर्तों में भी ढील दी गई, जबकि विशेषज्ञों ने पहले की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी थी. सीबीआई का आरोप है कि यह सब पहले से तय ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी लेन-देन की योजना का हिस्सा था. एजेंसी का दावा है कि उसके पास वरिष्ठ नौकरशाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य हैं, जो यह संकेत देते हैं कि नीति को खास तरीके से तैयार किया गया. अपील में कहा गया है कि नीति तैयार करने से लेकर कथित रूप से रिश्वत की रकम के इस्तेमाल तक एक सतत आपराधिक साजिश चली. सीबीआई का दावा है कि कथित अवैध धन का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया. हालांकि, जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा था कि गोवा चुनाव से जुड़े आरोप अधिकतर अनुमान और धारणाओं पर आधारित हैं, न कि ठोस कानूनी साक्ष्यों पर. जज पर उठाए गए सवाल सीबीआई ने अपनी अपील में कहा है कि विशेष न्यायाधीश ने साजिश के मूल आधार को नजरअंदाज कर दिया और छोटे-छोटे विरोधाभासों पर अधिक ध्यान दिया. एजेंसी के अनुसार, जज ने आरोपियों की भूमिकाओं को अपनी अलग समझ के आधार पर परिभाषित किया, जो अभियोजन के प्रस्तुत मामले से अलग थी. सीबीआई ने यह भी कहा कि आरोप तय करने के चरण में कानून की जो सीमाएं और सिद्धांत लागू होते हैं, उनका सही तरीके से पालन नहीं किया गया. एजेंसी का दावा है कि फैसला ‘स्पष्ट रूप से गलत, कानून के विपरीत और तथ्यों की गलत व्याख्या पर आधारित’ है. अपील में सीबीआई ने यह भी कहा कि कथित साजिश उच्च राजनीतिक स्तर पर रची गई थी. एजेंसी का आरोप है कि नीति के ढांचे में जानबूझकर बदलाव किए गए, ताकि निजी होलसेल व्यवस्था लागू की जा सके और कुछ कंपनियों को फायदा मिले. सीबीआई का कहना है कि नीति में किए गए बदलाव सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं थे, बल्कि पहले से तय लेन-देन को आगे बढ़ाने के लिए बुनियादी कदम थे, जिनमें दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की भूमिका थी. अब आगे क्या? सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. हाईकोर्ट इस अपील पर 9 मार्च को सुनवाई करेगा. अगर हाईकोर्ट को लगता है कि ट्रायल कोर्ट ने कानून की गलत व्याख्या की है या पर्याप्त आधार होते हुए भी आरोप तय नहीं किए गए, तो मामला दोबारा ट्रायल के लिए भेजा जा सकता है. वहीं, यदि हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानता है, तो आरोपियों को मिली राहत बरकरार रहेगी.  

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, ईरान संकट के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना

नई दिल्ली क्या पश्चिम एशिया में छिड़ा नया सैन्य टकराव भारतीयों की जेब पर भारी पड़ने वाला है? ईरान पर हुए ताज़ा हमले के बाद होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव चरम पर है और वैश्विक तेल बाज़ार में घबराहट साफ दिख रही है. ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है और आशंका है कि हालात बिगड़े तो कीमतें 100 डॉलर के पार जा सकती हैं |  तेल के लिए 85–90 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर भारत के लोगों के लिए यह बड़ा प्रश्न है कि क्या यहां पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ सकते हैं? आशंका तो यह भी है कि अगर हालात जल्दी ही ठीक नहीं हुए, तो ऑयल कंपनियां भाव में 12 से 14 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं |  एक अच्छी बात यह भी है कि भारत ने अपने तेल आयात के दूसरे विकल्पों को फिर से टटोलना शुरू कर दिया है, ताकि आम लोगों पर किसी तरह का संकट न आए. भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम रिवर्ज का बड़ा भंडार यह आश्वासन देता है कि संभवत: देश में पेट्रोल और डीजल के दाम न बढ़ें |  केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि भारत का पेट्रोलियम रिजर्व 74 दिनों की मांग पूरी कर सकता है. इसमें ISPRL की SPR कैविटी, रिफाइनरी स्टॉक और फ्लोटिंग स्टोरेज शामिल हैं. ISPRL और PIB के डेटा के अनुसार, भारत के पास 5.33 MMT क्रूड ऑयल तीन भूमिगत भंडारों में है. विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पदुर. SPR अकेले 9-10 दिन का स्टॉक है, लेकिन सभी तेल कंपनियों का कमर्शियल स्टॉक मिलाकर कुल 70-75 दिन का बफर बनता है. तो कुल मिलाकर, शायद ऐसा संकट नहीं आएगा कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अनियंत्रित हो जाएं. फिर भी, पेट्रोल के दाम कैसे बढ़ते हैं, इस बारे में जान लेना आवश्यक है |  कंपनियों के हाथ में है चाबी भारत में पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकार तय करती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के हाथ में है. जून 2010 में सरकार ने पेट्रोल की कीमतों को और अक्टूबर 2014 में डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त (De-regulate) कर दिया था. इसका मतलब कि सरकार का तेल की कीमतों पर कंट्रोल नहीं है. अब तेल की कीमत हर सुबह 6 बजे बदलती है. 16 जून 2017 से भारत में डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग (Dynamic Fuel Pricing) लागू है. इसके तहत अब कीमतें 15 दिन में नहीं, बल्कि पिछले 15 दिनों के अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर हर रोज सुबह 6 बजे तय की जाती हैं |  1 डॉलर बढ़ने पर आपकी जेब से कितना असर?     अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बैरल में खरीदा जाता है, जबकि भारत में पेट्रोल-डीज़ल लीटर में बिकते हैं.     एक बैरल में लगभग 159 लीटर कच्चा तेल होता है.     जब कीमत 1 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो इसे 159 लीटर में बांटने पर प्रति लीटर करीब 0.006 डॉलर की बढ़ोतरी होती है.     भारत तेल डॉलर में खरीदता है. अगर डॉलर का भाव 91 रुपये है, तो प्रति लीटर यह बढ़ोतरी लगभग 57 पैसे बैठती है. यानी बाजार की आम धारणा के अनुसार, कच्चे तेल में 1 डॉलर की तेजी से खुदरा कीमतों में करीब 50 से 60 पैसे प्रति लीटर का इजाफा होता है. लेकिन संकट के समय अगर रुपया कमजोर होकर 92 या 93 रुपये तक पहुंच जाए, तो यह असर 65 पैसे या उससे अधिक भी हो सकता है. कच्चे तेल की तेजी और रुपये की गिरावट मिलकर ग्राहकों को दोहरा झटका देती है |  100 डॉलर पर कितना बढ़ेगा बोझ?     90 डॉलर प्रति बैरल: रिटेल कीमतों में करीब 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी संभव है.     100 डॉलर प्रति बैरल: यह बढ़ोतरी 12 से 14 रुपये प्रति लीटर तक जा सकती है.     110 डॉलर प्रति बैरल: पेट्रोल-डीज़ल 18 से 21 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं. ये अनुमान केवल मूल गणित पर आधारित हैं. वास्तविक कीमतों में टैक्स जुड़ने के बाद असर और बढ़ जाता है. पंप पर कीमत कैसे बनती है? जब आप पेट्रोल पंप पर भुगतान करते हैं, तो आप सिर्फ तेल का पैसा नहीं दे रहे होते. भारत में पेट्रोल-डीजल की कुल कीमत का लगभग 40% से 50% हिस्सा सिर्फ टैक्स होता है|      बेस प्राइस: सबसे पहले कच्चे तेल की कीमत में समुद्री ढुलाई और इंश्योरेंस जैसी लागत जुड़ती है (रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस).     केंद्र का टैक्स: इसके ऊपर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) जुड़ती है.     डीलर का मुनाफा: फिर पेट्रोल पंप मालिक का कमीशन शामिल होता है.     राज्य का टैक्स: अंत में राज्य सरकारें अपना टैक्स लगाती हैं. चूंकि यह प्रतिशत में होता है, इसलिए जैसे ही कच्चे तेल का बेस प्राइस बढ़ता है, टैक्स की राशि भी अपने आप बढ़ जाती है. यही कारण है कि हर राज्य में कीमतें अलग-अलग होती हैं. चूंकि पेट्रोल-डीजल फिलहाल GST के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इन पर टैक्स का बोझ काफी ज्यादा रहता है. भारत का रिजर्व आएगा काम? स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है. भारत की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां कई बार शार्ट टर्म का झटका खुद सहकर अचानक कीमत बढ़ोतरी को टालने की कोशिश करती हैं. इसके अलावा केंद्र सरकार चाहे तो उत्पाद शुल्क में कटौती कर सकती है, जैसा 2022 में किया गया था. भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) भी हैं, जिनका उपयोग आपूर्ति संतुलित रखने के लिए किया जा सकता है | 

तालिबान ने डूरंड लाइन पर दो और पोस्ट कब्जाई, पाकिस्तान में तेज हुई जंग

काबुल  पाकिस्तान को अफगानिस्तान-तालिबान ने एक और झटका दे दिया है. तालिबान ने डूरंड लाइन पर दो पोस्टों पर कब्जा कर लिया है. Tolo News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़गानिस्तान की सेनाओं ने कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक और शोराबक ज़िलों में काल्पनिक डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया है|  पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव तब और बढ़ गया, जब अफ़गान तालिबान सेनाओं ने रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर पाकिस्तान के कमांड और कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाकर हथियारों से लैस ड्रोन हमले किए. यह घटना खास तौर पर सेंसिटिव है क्योंकि नूर खान एयर बेस उन पाकिस्तानी मिलिट्री साइट्स में से एक था, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने टारगेट किया था|  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन की छोटी लेकिन ज़ोरदार लड़ाई के नौ महीने बाद भी, बेस पर रिकंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. बेस पर अफ़गान तालिबान के नए हमले की खबर ने रिपेयर के काम को और खतरे में डाल दिया है, जिससे और नुकसान हुआ है|  अफ़गानिस्तान के नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री के ऑफिशियल X अकाउंट के मुताबिक, तालिबान सेनाओं ने क्वेटा में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर और खैबर पख्तूनख्वा में दूसरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों पर ड्रोन हमले किए|  मिनिस्ट्री ने कहा, “आज, नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री की एयर फोर्स ने पाकिस्तान में ज़रूरी मिलिट्री ठिकानों पर सटीक और कोऑर्डिनेटेड हवाई ऑपरेशन किए. इसमें रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, क्वेटा (बलूचिस्तान) में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर, खैबर पख्तूनख्वा की मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई कैंप और कई दूसरी ज़रूरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया|  इससे पहले, तालिबान अधिकारियों ने दावा किया था कि पूर्वी अफ़गान शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी फ़ाइटर जेट को मार गिराया गया था. न्यूज़ एजेंसी AFP ने बताया कि पायलट को एयरक्राफ़्ट से पैराशूट से उतरने के बाद ज़िंदा पकड़ लिया गया. स्थानीय लोगों ने AFP को बताया कि पायलट को लैंडिंग के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था. यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर बॉर्डर पार दुश्मनी के बीच हुआ है|  शुक्रवार को पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार पर एयरस्ट्राइक की, जहां तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा का ठिकाना है. पाकिस्तानी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि 133 तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से ज़्यादा घायल हुए और कई चौकियां तबाह कर दी गईं या उन पर कब्ज़ा कर लिया गया| 

जीवन के भीतर छिपा मोक्ष: एक आध्यात्मिक दृष्टि

भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है-हे अर्जुन! ज्ञान वह परम स्थिति है, जिसे पाकर कोई मोह में नहीं फंसता! यह आध्यात्मिक अवस्था अगर जीवन के अंतकाल में भी मिल जाए तो मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। शरीर, शरीर से जुड़े लोगों, सगे-सम्बन्धियों या जहां-जहां से भी इस शरीर को सुख मिलता है, हमारा हर उस वस्तु के प्रति मोह हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम जिंदगी भर सुख को ढूंढते रहते हैं और इसकी वजह से मोह पक्का होता जाता है। एक ऐसी अवस्था आ जाती है, जहां यह पक्का हो जाता है कि सुख मिले या न मिले, मोह बरकरार रहता है। जहां से सुख मिलता है, वहीं हमारा संसार बन जाता है। व्यक्ति अपने सुख से बाहर नहीं निकलना चाहता। इसलिए सुख की चाह मोह के रूप में उसे इस संसार में बांधे रखती है। अध्यात्म के रास्ते ही व्यक्ति अपना मन संसार और इसके सुखों से हटाकर अपनी चेतना से जोड़ लेता है, जिसकी ताकत से यह शरीर, इन्द्रियां, मन, बुद्धि सब चलता है। उसे ब्रह्म भी कहते हैं। उस ब्रह्म की स्थिति का आनंद लेने के बाद संसार के सब सुख फीके लगने लगते हैं। यही शारीरिक आनंद से ऊपर उठने का वक्त होता है। यह अवस्था मोहमाया का अंत कहलाती है, जब व्यक्ति जीवित रह कर भी मोक्ष की अवस्था को प्राप्त कर लेता है।  

संभल में पहली बार 68 तीर्थों पर होली उत्सव, जिलेभर में धारा 163 का कड़ा प्रबंध

 संभल  संभल में इस बार होली सिर्फ मोहल्लों और चौपालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन 68 तीर्थों तक पहुंचेगी जिन्हें हाल में खोजे जाने और पुनर्जीवन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है. सामाजिक संगठनों का दावा है कि पहली बार इन सभी तीर्थ स्थलों पर एक साथ रंगोत्सव मनाया जाएगा. तैयारियां ऐसी हैं कि शहर का हर कोना उत्सव की आहट से गूंज रहा है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा का अभेद्य घेरा भी बुना गया है |  तीर्थों पर रंगोत्सव, परंपरा का नया अध्याय नगर हिंदू सभा, तीर्थ परिक्रमा समिति और विभिन्न मंदिर समितियों ने संयुक्त रूप से 68 तीर्थों और 19 कूपों पर दीप प्रज्वलन व गुलाल उत्सव की रूपरेखा बनाई है. आयोजकों का कहना है कि जिस तरह मथुरा और वृंदावन में होली का रंग कई दिनों तक छाया रहता है, उसी तरह संभल में भी इस बार उत्सव का विस्तार होगा. राधा-कृष्ण मंदिरों से लेकर प्राचीन कुंडों तक, हर स्थान पर सुबह पूजा-अर्चना, दोपहर में गुलाल अर्पण और शाम को दीपोत्सव की योजना है. कई स्थानों पर बच्चों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन-संध्या भी प्रस्तावित है. मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि तीर्थों के जागरण की खुशी को सामूहिक रंगोत्सव के जरिए साझा किया जाएगा |  जिला तीन सेक्टर में बांटा गया  जिला प्रशासन के मुताबिक, पूरे जिले में 64 जुलूसों की अनुमति दी गई है. बेहतर प्रबंधन के लिए जिले को तीन सेक्टर में बांटा गया है. 17 थानों पर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं, जबकि 27 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) चौबीसों घंटे अलर्ट रहेंगी |  जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया के अनुसार, सभी आयोजकों के साथ अमन कमेटी की बैठकों में रूट, समय-सारिणी और आचार-संहिता तय कर दी गई है. जुलूस बॉक्स फॉर्मेट में निकलेंगे. आगे-पीछे और दोनों किनारों पर पुलिस बल की मौजूदगी रहेगी, ताकि किसी तरह की अफवाह या उकसावे की गुंजाइश न बचे|  संवेदनशील पृष्ठभूमि और सुरक्षा का अभेद्य घेरा ईरान और इजराइल अमेरिका युद्ध में खामेनेई  की मौत के बाद संभल के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुआ. ऐसे में प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए धारा 163 लागू की है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि एक हजार से अधिक संभावित उपद्रवियों को पाबंद किया गया है. तीन कंपनी और दो प्लाटून पीएसी, रैपिड रिएक्शन फोर्स, 200 से अधिक रंगरूट और कई वरिष्ठ अधिकारी एएसपी, सीओ, एडीएम, एसडीएम मैदान में रहेंगे. जुलूस मार्गों और प्रमुख चौराहों पर 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं, जिनकी मॉनिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होगी. ड्रोन कैमरे छतों और भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखेंगे. विशेष ध्यान उन मार्गों पर है जहां से चौपाई जुलूस संवेदनशील इलाकों और जामा मस्जिद के सामने से गुजरेंगे. प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों से संवाद कायम है और उद्देश्य सिर्फ शांतिपूर्ण, गरिमामय उत्सव सुनिश्चित करना है|  रंगों की फैक्ट्री से 12 राज्यों तक सप्लाई संभल की एक प्रमुख कलर कंपनी ने इस बार बड़े पैमाने पर गुलाल तैयार किया है. मालिक हर्ष गुप्ता बताते हैं कि चंदन, गुलाब, केवड़ा और चॉकलेट-मिंट खुशबू वाले रंगों की खास मांग रही. बच्चों के लिए स्किन-फ्रेंडली और नॉन-टॉक्सिक गुलाल तैयार किया गया है, जो मक्का के आटे और फूड-ग्रेड रंगों से बना है. कंपनी का दावा है कि यूपी के अलावा 10–12 राज्यों में सप्लाई की गई है. अयोध्या, काशी और मथुरा में विशेष मांग आई है. स्थानीय बाजारों में भगवा, गुलाबी, हरा और फिरोजी रंगों की बहार है. पहली बार गुलाल पिचकारी भी उतारी गई है, जिससे सूखे रंगों का प्रयोग बढ़े|  आयोजकों का कहना है कि 68 तीर्थों पर रंगोत्सव सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का अवसर है. कई स्थानों पर सुबह शंखनाद, दोपहर में सामूहिक आरती और शाम को दीपदान होगा. मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में भी सीसीटीवी निगरानी और पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी के साथ कार्यक्रम तय हैं. प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि सभी जुलूसों के लिए समय-सीमा निर्धारित है, डीजे की ध्वनि-सीमा तय है और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी बढ़ाई गई है. अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है |  पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा कि होली आपसी भाईचारे का पर्व है. किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें, संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत सूचना दें. अमन कमेटियों ने भी अपील की है कि जुलूस तय रूट और समय पर ही निकलें. संभल इस बार दोहरी परीक्षा से गुजर रहा है एक ओर तीर्थों पर पहली बार सामूहिक रंगोत्सव का रोमांच, दूसरी ओर संवेदनशील पृष्ठभूमि में शांति बनाए रखने की चुनौती. तैयारियों की बारीकी बताती है कि प्रशासन और आयोजक दोनों इसे प्रतिष्ठा का सवाल मान रहे हैं | 

पूरी दुनिया में उपद्रव, पर पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व करा रहा नए भारत का दर्शन: सीएम योगी

सबको सुरक्षा का अहसास ही रामराज्य की अवधारणा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने कहा, यूपी में न तनाव, न अराजकता और न ही गुंडागर्दी पांडेयहाता में होलिकादहन उत्सव समिति की तरफ से आयोजित भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी दुनिया में उपद्रव, पर पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व करा रहा नए भारत का दर्शन: सीएम योगी भक्त प्रह्लाद की आरती उतारी और फूलों की होली खेली मुख्यमंत्री ने गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों को होली की मंगलमय शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आज कोई तनाव नहीं है। कोई भय नहीं, कोई अराजकता नहीं और न ही कोई गुंडागर्दी। सबको सुरक्षा का एहसास है और सबको विश्वास है। सबके मन में एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव है। यही अहसास और विश्वास, रामराज्य की अवधारणा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही कहते हैं कि जब ऐसी स्थिति रहेगी तो भारत को विकसित बनने में कोई देर नहीं लगेगी। सीएम योगी सोमवार शाम पांडेयहाता में होलिकादहन उत्सव समिति की ओर से आयोजित भक्त प्रह्लाद शोभायात्रा के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। होलिकादहन के दिन शोभायात्रा का शुभारंभ करने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में उपद्रव, अराजकता और अव्यवस्था है। पर, हम भारतवासी गर्व कर सकते हैं कि पीएम मोदी के रूप में यशस्वी नेतृत्व देश को नई बुलंदी देते हुए नए भारत का दर्शन करा रहा है। नया भारत हर व्यक्ति, हर तबके को अवसर देकर उत्सव का वातावरण देता है।  पहले यूपी में समाज को बांटती थीं सरकारें सीएम योगी ने कहा कि हमारे यहां पर्व, त्योहारों की लंबी श्रृंखला है। पर, वर्ष 2014 के पहले लोग बेहतर तरीके से उत्सव नहीं मना पाते थे। यूपी में तो पर्व, त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था। समाज में भय और तनाव रहता था। तब की सरकारें समाज को बांटती थीं और इसका परिणाम व्यापारी और नागरिक चुकाते थे। तब गुंडागर्दी, अराजकता चरम पर थी। न बेटी सुरक्षित थी और न ही व्यापारी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश सुरक्षा और सुविधा देकर उत्सव प्रदेश बन चुका है। अब यूपी में न कर्फ्यू है और न दंगा है,  यूपी में अब सब चंगा है। सब ओर उत्सव का माहौल है। पिछले पंद्रह दिनों से मथुरा-वृंदावन में होली का कार्यक्रम चल रहा है। सबकुछ स्वतः स्फूर्त देखकर विदेशियों की आंखे फटी रह जाती हैं। सीएम योगी ने कहा कि जो लोग हम पर आरोप लगाते थे कि हम बंटे हुए हैं, वे बताएं कहां बंटे दिख रहे हैं। इस उत्सव में इतनी बड़ी संख्या में लोग आए हैं। किसी की जाति का पता नहीं है, लेकिन सभी लोग होली का आनंद ले रहे हैं।  उपद्रव से उबरकर बनते हैं उत्सव की यात्रा का हिस्सा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अव्यवस्था से व्यवस्था, अराजकता से अनुशासन, अधर्म से धर्म और असत्य से सत्य की यात्रा होती है, तभी हम उपद्रव से उबरकर उत्सव की यात्रा का हिस्सा बनते हैं। यही उत्सव आज गोरखपुर के विरासत गलियारे में देखने को मिल रहा है। पहले पांडेयहाता आने को संकरी गली थी। वाहन मुश्किल से आ पाता था। व्यापार अस्त व्यस्त था। ग्राहक नहीं आ पाते थे। अराजकता का साम्राज्य था। विरासत गलियारा के प्रभावित व्यापारियों के लिए बनेगा कॉम्प्लेक्स सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर का विरासत गलियारा प्रदेश का सबसे खूबसूरत गलियारा होगा। गलियारा बनने से प्रभावित व्यापारियों को घण्टाघर के बंधु सिंह पार्क में कुछ दुकानें दी जा रही हैं। इसके बाद अन्य जो दुकानदार शेष रह जाएंगे, उनके लिए डायट के पास कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। जगह चिन्हित करने के साथ पैसा भी आवंटित कर दिया गया है। सरकार का संकल्प है कि किसी को उजड़ने नहीं देना है, बल्कि अवसर देकर आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत गलियारा पहले पूर्वी यूपी, बिहार और नेपाल के व्यापारियों और नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होता था। सुविधा न देने, कंजेशन और जाम के कारण यहां का कारोबार उजड़ने लगा था। अब विरासत गलियारा नव विकास से एक बार फिर व्यापार का प्रमुख केंद्र हो जाएगा। सबको सुरक्षा और सुविधा दे रही डबल इंजन की सरकार सीएम योगी ने कहा कि सबके जीवन में खुशहाली लाने के लिए डबल इंजन की सरकार सुरक्षा और सुविधा दे रही है। इसी भाव से जब गोरखपुर विकास करेगा तो प्रदेश और देश का भी विकास होगा। विकास नीचे से ऊपर आता है। विरासत गलियारा के व्यापारियों के मन में पीड़ा थी, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्त करने की बजाय शासन-प्रशासन का सहयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप आज शानदार विरासत गलियारा बनकर तैयार हो रहा है। यहां की सड़कें पहले से तीन गुना अधिक चौड़ी होंगी। फसाड लाइट लग जाने के बाद यह प्रदेश का सबसे शानदार गलियारा होगा। हिरण्यकश्यप जैसे हैं माफिया व गुंडे, लातों के भूत बातों से नहीं मानते होलिकादहन के महात्म्य, भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उस समय भगवान विष्णु ने भगवान नृसिंह का अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था और धर्म की स्थापना की थी। हमें याद रखना होगा कि अराजकता, गुंडागर्दी, माफियागिरी भी हिरण्यकश्यप जैसे ही हैं, ये प्यार से नही मानेंगे क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। अराजकता, गुंडागर्दी, अव्यवस्था जैसे हिरण्यकश्यप, कंस या रावण को मारने के लिए किसी न किसी नृसिंह, कृष्ण या राम को अवतरित होना ही पड़ेगा। भक्त प्रहलाद की आरती उतार सीएम योगी ने खेली फूलों की होली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के उपरांत शोभायात्रा के लिए सजाए गए रथ पर भक्त प्रहलाद के चित्र की आरती उतारी। उनके चित्र पर फूल बरसाने के बाद सीएम योगी ने अत्यंत प्रसन्नता व उमंग से उपस्थित जनसमूह पर पुष्पवर्षा करते हुए फूलों से होली खेली। शोभायात्रा को लेकर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम में पहुंचने पर लोक कलाकारों के दल ने विभिन्न प्रस्तुतियों से मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। मंच पर सीएम योगी का स्वागत व अभिनंदन पुष्प माला व साफा पहनाकर और स्मृति-चिह्न देकर किया गया। भ्रष्टाचार का दहन कर दिया है सीएम योगी ने: रविकिशन शोभायात्रा के अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा … Read more

तेहरान के हर कोने को डिजिटल रूप में समझ रहा था इजरायल, नेतन्याहू का दावा – युद्ध लंबा नहीं चलेगा

तेहरान  ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद एक सवाल लोगों के ज़ेहन में है. सवाल ये है की अमेरिका और इजरायल ने आख़िर कैसे इतना सटीक निशाना लगाया और खामेनेई के साथ तमाम टॉप लीडरशिप पर बॉम्बिंग कर दी |  Financial Times की एक बड़ी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने कई सालों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम में सेंध लगाई |  सिर्फ कैमरे ही नहीं, मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई. मकसद था ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई और उनके सुरक्षा घेरे की हर गतिविधि पर नजर रखना |  रिपोर्ट कहती है कि तेहरान के ज्यादातर ट्रैफिक कैमरे इजरायल की निगरानी में थे. फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहर भेजा जाता था. इससे एक पूरा मूवमेंट पैटर्न तैयार हुआ. कौन कब निकला. कौन साथ था. कौन सा रूट लिया गया. सब रिकॉर्ड होता रहा |  ऑपरेशन कैसे चला? बताया गया है कि यह काम एक-दो महीने का नहीं था. यह लंबा ऑपरेशन था. इजरायल की खुफिया यूनिट 8200 और मोसाद ने टेक सिस्टम में गहरी घुसपैठ की |  कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की गई. मोबाइल नेटवर्क डेटा भी जोड़ा गया. इससे सिक्योरिटी स्टाफ की आवाजाही समझी गई. बॉडीगार्ड्स कहां पार्क करते हैं. किस समय गार्ड बदलते हैं. किस रास्ते से मूवमेंट होता है. धीरे-धीरे एक पैटर्न ऑफ़ लाइफ तैयार हुआ. यानी रोजमर्रा की आदतों का पूरा डिजिटल नक्शा |  कैमरे कैसे हथियार बने? आज शहरों में लगे CCTV सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नहीं हैं. अगर कोई सिस्टम में घुस जाए तो वही कैमरे निगरानी का टूल बन जाते हैं|  रिपोर्ट के मुताबिक फुटेज को सीधे बाहर के सर्वर पर भेजा गया. यानी डेटा शहर के अंदर नहीं रहा|  मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ से यह पता चलता है कि कौन सा फोन किस लोकेशन पर था. इससे सिक्योरिटी मूवमेंट और साफ दिखने लगता है|  इजरायल ने ऐसे बनाया एक्शन प्लान  रिपोर्ट में दावा है कि जब पर्याप्त जानकारी इकट्ठा हो गई, तब सटीक एक्शन प्लान बनाया गया|  लोकेशन, टाइमिंग और सिक्योरिटी गैप को समझकर आगे की रणनीति तय की गई|  हालांकि आधिकारिक स्तर पर सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन यह साफ है कि डिजिटल निगरानी इस पूरे मामले में अहम रही|  डिजिटल युद्ध: साइबर वॉर      विशेषज्ञ कहते हैं कि अब युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं लड़ा जाता|      डिजिटल सिस्टम नया मोर्चा है. कैमरे. मोबाइल नेटवर्क. इंटरनेट. सब संभावित टारगेट हैं|      जो देश साइबर क्षमता में मजबूत हैं, वे बिना गोली चलाए भी बड़ी बढ़त बना सकते हैं|  क्या सेफ हैं कैमरा? मिडिल ईस्ट में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है. इजरायल और ईरान के बीच टकराव खुला रहस्य है. ऐसे माहौल में अगर शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर ही निगरानी टूल बन जाए, तो यह नई तरह की जंग है|  यह मामला दिखाता है कि अब साइबर वॉरफेयर असली दुनिया के फैसलों को प्रभावित कर रही है|  इस रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या शहरों के कैमरे सुरक्षित हैं? क्या मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं? और क्या आने वाले समय में ऐसे ऑपरेशन आम हो जाएंगे? ये युद्ध कई साल तक नहीं चलेगा… नेतन्याहू  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ जल्द और निर्णायक सैन्य कार्रवाई का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि यह सैन्य संघर्ष अंतहीन नहीं होगा और इसे वर्षों तक खींचने की योजना नहीं है |  इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार दोपहर 2 बजे वित्त और ऊर्जा सचिवों के साथ व्हाइट हाउस में बैठक कर रहे हैं. अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए परिस्थितियां बना रहे हैं |  इजरायल का मानना है कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य कदम सऊदी अरब के साथ संभावित शांति के द्वार खोल सकते हैं |  नेतन्याहू का युद्ध और ईरान पर रुख नेतन्याहू ने जोर देकर कहा है कि इजरायल ईरान के साथ लंबे युद्ध की स्थिति में नहीं जाना चाहता है. उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है, वह त्वरित और निर्णायक होगी. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की अंतिम जिम्मेदारी वहां की जनता की है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जो ईरानी लोगों को अपने शासन को बदलने में सक्षम बनाएंगी. इजरायल के मुताबिक, यह सैन्य कार्रवाई कुछ वक्त तक जारी रह सकती है लेकिन यह लंबी अवधि की प्रक्रिया नहीं होगी | सऊदी-इजरायल शांति और ट्रंप की बैठक नेतन्याहू ने यह भी इशारा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब और इजरायल के बीच शांति स्थापना में मदद कर सकती है |  इस बड़े घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस से सूचना मिली है कि राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को दोपहर 2 बजे वित्त सचिव और ऊर्जा सचिव के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ईरान के खिलाफ रणनीतिक आर्थिक और ऊर्जा संबंधी फैसलों के संदर्भ में. प्रशासन इस स्थिति को लेकर लगातार सक्रिय है और कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर समन्वय बना रहा है | 

चंद्र ग्रहण का प्रभाव: 3 मार्च को सिंह राशि में ग्रहण, कर्क-कन्या-मीन रहें Alert

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण के समय चंद्रमा सिंह राशि में गोचर करेंगे। यह ग्रहण भारत समेत पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में दिखाई देगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव मानसिक स्थिति, आर्थिक निर्णय और स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासतौर पर कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता हो सकती है। आइए जानते हैं इन राशियों पर संभावित प्रभाव और बचाव के उपाय। कर्क राशि: धन और स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं, इसलिए चंद्र ग्रहण का प्रभाव इस राशि पर अधिक माना जाता है। ग्रहण आपके धन भाव में प्रभाव डाल सकता है, जिससे आर्थिक मामलों में अस्थिरता आ सकती है। बड़े निवेश या महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय कुछ समय के लिए टालना बेहतर रहेगा। वाणी पर संयम रखें, सामाजिक या पारिवारिक विवाद से बचें। आंख, गला या पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। उपाय: चंद्र मंत्र “ॐ सोमाय नमः” का जप करें और सोमवार को सफेद वस्त्र या चावल का दान करें। कन्या राशि: खर्च बढ़ने की आशंका कन्या राशि के लिए यह ग्रहण द्वादश भाव (हानि भाव) में प्रभाव डालेगा। इस कारण संचित धन खर्च हो सकता है। परिवार के किसी सदस्य की सेहत पर खर्च बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सतर्क रहें और ऑफिस राजनीति से दूरी बनाए रखें। नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। उपाय: भगवान शिव की पूजा करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ रहेगा। मीन राशि: शत्रु पक्ष से सावधान मीन राशि के लिए ग्रहण छठे भाव में प्रभाव डालेगा, जो शत्रु और ऋण का भाव माना जाता है। विरोधी सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए कार्यों में सावधानी रखें। ऑनलाइन लेन-देन में सतर्क रहें, धोखाधड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। अनावश्यक खर्च और गलत संगति से बचें। उपाय: नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और गरीबों को दान करें। ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें? क्या करें: मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य करें। ग्रहण के बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान दें। क्या न करें: ग्रहण काल में भोजन पकाने या खाने से बचें (धार्मिक मान्यता अनुसार)। बड़े आर्थिक फैसले टालें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें। चंद्र ग्रहण को ज्योतिष में संवेदनशील समय माना जाता है। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्तिगत कुंडली पर निर्भर करता है, फिर भी कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों को 3 मार्च 2026 के आसपास विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उचित उपाय अपनाकर संभावित नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

फायर इंजीनियरिंग में भविष्य बनाएं: पढ़ाई से नौकरी तक का सफर

आग लगने पर उसे बुझाने के लिए ऐसा आदमी या ऐसी टीम चाहिए जो आग की किस्म, आग लगने के कारण, आग बुझाने के तरीके, आग बुझाने के सामान और आग में घिरे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का हुनर रखती हो। जाहिर है यह ऐसी जानकारी नहीं जिसे यूं ही पूछ कर या पढ़ कर जान लिया जाए। इसकी पढ़ाई भी होती है और इसका प्रशिक्षण भी दिया जाता है। एक गुण ऐसा है जिसके बिना यह पढ़ाई और प्रशिक्षण काम नहीं आ पाएगा-वह है साहस और सूझबूझ का सही मिश्रण। इस क्षेत्र में फायरमैन से लेकर चीफ फायर अफसर तक बन सकते हैं। जो लोग आग से उपजी चुनौतियों का सामना करते हुए करियर की बुलंदी तक पहुंचना चाहते हैं वे डिप्लोमा से लेकर बी.ई. (फायर) की डिग्री प्राप्त कर निम्न पदों तक पहुंच सकते हैं।.. फायरमैन: वह व्यक्ति जो सीधे-सीधे आग से जूझता है। फायरमैन की टीम हर फायर स्टेशन में तैनात होती है। लीडिंग फायरमैन: फायरमैन के बाद विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण कर लीडिंग फायरमैन बन सकते हैं। सब-अफसर: किसी भी फायर टैंडर का लीडर सब-अफसर होता है जिसकी कमान में फायरमैन और लीडिंग फायरमैन होते हैं। यह परिस्थिति का आकलन कर अपनी टीम का मार्गदर्शन करता है कि किस प्रकार से कम से कम नुक्सान सहते हुए आग को बुझाया जा सके। स्टेशन अफसर: किसी भी फायर स्टेशन का प्रमुख स्टेशन अफसर होता है जो न सिर्फ फायर स्टेशन की टीम को लीड करता है बल्कि पूरी जानकारी रखता है कि उसकी जिम्मेदारी के दायरे में आने वाले इलाके में किस तरह की इमारतें, फैक्ट्रियां या रिहायशी इलाका है जहां आग लग सकती है। असिस्टैंट डिवीजनल अफसर: पूरे राज्य को अलग-अलग डिवीजनों में बांटा जाता है और हर डिवीजन की जिम्मेदारी असिस्टैंट डिवीजनल अफसर की होती है जो कार्य और इलाके के हिसाब से कई हो सकते हैं। इलाके में बनने वाली इमारतों में आग बुझाने के इंतजाम सही हैं या नहीं, यह देखने-सुनने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। डिवीजनल अफसर: डिवीजनल अफसर की जिम्मेदारी भी वही होती है जो असिस्टैंट डिवीजनल अफसर की होती है और तीन असिस्टैंट डिवीजनल अफसर पर एक डिवीजनल अफसर होता है। डिप्टी चीफ फायर अफसर: पूरे फायर डिपार्टमैंट के समन्वय, कार्य, क्षेत्र विभाजन व अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ यह सुनिश्चित करना कि पूरा फायर डिपार्टमैंट हर परिस्थिति से निपटने के लिए सक्षम है, डिप्टी चीफ फायर अफसर जैसा अधिकारी ही देखता है। चीफ फायर अफसर: चीफ फायर अफसर पूरे फायर डिपार्टमैंट का बॉस होता है जिसकी निगरानी, निर्देश, समन्वय और प्रेरणा से विभाग चलता है। पूरे राज्य में आग लगने की घटनाएं कम से कम हों और आग लगने पर उससे किस तरह पूरी तैयारी के साथ निपटना है, चीफ फायर अफसर की लीडरशिप तय करती है। बेहद चुनौतीपूर्ण है यह क्षेत्र:- जाहिर है इस क्षेत्र में करियर निखर सकता है लेकिन इस करियर को चुनने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना जरूरी है। किसी भी आपात स्थिति में बड़े ही धैर्य और सूझ-बूझ से काम करना यदि आता है तो इस ओर कदम बढ़ाया जा सकता है। यह बताना जरूरी है कि आग कितना नुक्सान कर सकती है। गत कुछ महीनों में आग लगने की ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनमें न सिर्फ लाखों का नुक्सान हुआ है बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हुई है। कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में लगी आग अभी लोगों की याद्दाश्त में बुझी नहीं जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा नई दिल्ली एयरपोर्ट के कार्गो डिवीजन में लगी आग ने लाखों का नुक्सान कर दिया था। दिल्ली के मुनिरका के सी.एन.जी. स्टेशन में लगी आग ने 5 लोगों को मौत की नींद सुला दिया। कहने का तात्पर्य है कि करियर का चुनाव करने से पहले खुद को इस बात के लिए तैयार करना जरूरी है कि चुनौतियों की लपटें बड़ी ऊंची हैं। कार्य का स्वरूप:- फायर डिपार्टमैंट से जुड़ना एक कामयाब करियर के साथ साथ जनसेवा भी है। फायर फाइटर्स का मुख्य काम आग लगने के कारणों का पता लगाना और उसे रोकने के उपायों का विशलेषण करना होता है। फायर फाइटिंग सिविल, इलैक्ट्रीकल, एनवायरनमैंटल इंजीनिरिंग से जुड़ा क्षेत्र है। मसलन आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सबसे सटीक इस्तेमाल, कम से कम समय और कम से कम संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा जान-माल की रक्षा करना उसका उद्देश्य होता है। शैक्षणिक योग्यता:- डिप्लोमा या डिग्री में दाखिले के लिए कैमिस्ट्री, फिजिक्स या गणित विषय में 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास होना अनिवार्य है। कुछ पदों के लिए बी.ई. (फायर) डिग्री अनिवार्य है। इसमें प्रवेश के लिए ऑल इंडिया एंट्रैंस एग्जाम होता है। शारीरिक योग्यता:- शैक्षणिक योग्यता के साथ इस फील्ड में करियर बनाने के लिए शारीरिक योग्यता भी देखी जाती है। पुरुषों के लिए न्यूनतम लंबाई 165 सैंटीमीटर, वजन 50 कि.ग्रा., वहीं महिलाएं कम से 157 सैंटीमीटर लंबी हों, वजन कम से कम 46 कि.ग्रा. हो। नजरें दोनों के लिए 6ध्6 होनी चाहिएं और उम्र 19 से 23 वर्ष के भीतर हो। कौशल:- इस फील्ड के लिए जितनी जरूरत डिग्री की है, उससे ज्यादा जरूरत कुछ व्यक्तिगत योग्यताओं की भी है। आग बारूद से भरे कारखानों में लग सकती है और कैमिकल फैक्टरी में भी, घनी आबादी वाले इलाकों व जंगलों में। ऐसे में साहस, धैर्य के साथ लीडरशिप क्वालिटी, तेजी से फैसले लेने की क्षमता जरूरी है। विभिन्न कोर्स:- डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी, पीजी. डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी, बीएससी. इन फायर इंजीनियरिंग, सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर फाइटिंग, फायर टैक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रीयल सेफ्टी मैनेजमैंट, इंडस्ट्रीयल सेफ्टी सुपरवाइजर, रैसक्यू एंड फायर फाइटिंग जैसे कोर्स शामिल हैं। इनकी अवधि 6 महीने से लेकर 3 वर्ष तक है। कोर्स के दौरान आग बुझाने की तकनीकी जानकारी से लेकर जान-माल के बचाव के साइंटिफिक फॉर्मूले की जानकारी दी जाती है जैसे आग पर काबू पाने, खतरों से खेलने, उपकरणों का प्रयोग कैसे किया जाए आदि के गुण सिखाए जाते हैं। अवसर:- दिल्ली इंस्टीच्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के निदेशक वीरेंद्र गर्ग के मुताबिक इस फील्ड में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पहले केवल महानगरों में फायर स्टेशन होते थे, आज हर जिले … Read more

खामनेई की मौत पर खुशी जाहिर करने वाली एक्ट्रेस मंदाना, ईरान छोड़कर भारत में बिता रही हैं जिंदगी

मुंबई  अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से ईरान में इस समय तबाही का मंजर है. अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की भी मौत हो गई है. खामेनेई की मौत से ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी काफी खुश हैं. वो लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके अपनी खुशी जाहिर कर रही हैं |  हालांकि, मंदाना अपने देश के लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित भी हैं. सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिसपर उन्हें ट्रोलिंग भी झेलनी पड़ रही है. कुछ लोग मंदाना को उनके देश लौटने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि वो बीते कई सालों से इंडिया में रह रही हैं|  लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदाना पहले भी कई दफा सुर्खियों में रह चुकी हैं. उनका नाम कई कंट्रोवर्सी से जुड़ चुका है. तो आइए जानते हैं कि मंदाना करीमी कौन हैं और वो क्यों ईरान छोड़कर भारत में बस गई हैं|  मंदाना करीमी का जन्म ईरान के तेहरान में हुआ था. मगर एक्ट्रेस बनने के सपने को पूरा करने के लिए वो सालों पहले इंडिया आ गई थीं और तब से यहीं बस गई हैं|  मंदाना मॉडलिंग कर चुकी हैं. वो कई बॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं, जिनमें ‘भाग जॉनी’, ‘क्या कूल हैं हम’ जैसी फिल्में शामिल हैं. मंदाना को सलमान खान के शो बिग बॉस में भी देखा गया था. वो साल 2022 में एकता कपूर के रियलिटी शो लॉक अप में भी दिखी थीं|   मंदाना रियल लाइफ में काफी बोल्ड और ग्लैमरस हैं. वो अक्सर बिकिनी में अपनी सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती हैं. मंदाना को बिकिनी फोटोज पर भारी ट्रोलिंग झेलनी पड़ चुकी है | मंदाना ने कुछ साल पहले रमजान के महीने में बिकिनी में अपने फोटोज-वीडियोज शेयर किए थे, जिसें देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था. रमजान में बिकिनी पहनने पर कई लोगों ने उनपर धामर्कि भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था |          मंदाना के टॉपलेस फोटोज पर भी बवाल मच चुका है. मंदाना की टॉपलेस तस्वीरों पर लोगों ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई थी| मंदाना अपनी मैरिड लाइफ को लेकर भी विवादों में रह चुकी हैं. एक्ट्रेस ने साल 2017 में बिजनेसमैन बॉयफ्रेंड गौरव गुप्ता से शादी रचाई थी. कपल ने पहले कोर्ट मैरिज की थी फिर हिंदू रीति-रिवाजों से शादी रचाई थी. मगर चंद महीनों में ही मंदाना ने पति और सास-ससुर पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था. वो पति पर चीटिंग का आरोप भी लगा चुकी हैं. हालांकि, अब उनका तलाक हो चुका है| 

मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग

मुख्यमंत्री निवास पर हुआ भव्य होलिका दहन, गौ-काष्ठ का हुआ उपयोग होलिका दहन में मुख्यमंत्री निवास पर गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग मुख्यमंत्री निवास में हुआ होलिका का दहन, गौ-काष्ठ का किया गया उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक पूजा-अर्चना कर किया होलिका दहन प्रदेशवासियों को होली की दी मंगलकामनाएं भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका की विधि-विधान से सपत्नीक पूजा-अर्चना कर होलिका का दहन किया। होलिका में गौ-काष्ठ का उपयोग किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की धर्मपत्नी मती सीमा यादव, अन्य परिजन एवं म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पदस्थ सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को होली की बधाई देकर प्रसादी के रूप में गुझिया वितरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होलिका दहन कर प्रदेशवासियों को रंग पर्व की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली हम सबको रंगों से सराबोर कर देने वाला त्यौहार है। होली हमें एकजुट रहने की सीख देती है। हम सभी को अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर होली से रंगपंचमी तक प्रेमपूर्वक यह त्यौहार मनाना चाहिए।  

ऐंड्रॉयड फोन स्लो क्यों हो रहा है? इन ऐप्स और सेटिंग्स को अभी करें कंट्रोल

नई दिल्ली रोज लॉन्च हो रहे हाई-परफॉर्मेंस और बेहतर ग्राफिक्स वाले ऐंड्रॉयड गेम्स के चलते स्मार्टफोन्स का लिमिटेड स्टोरेज स्पेस और कम रैम चैलेंज बनता रहता है। ऐसे में स्मार्टफोन्स 6जीबी और 8जीबी रैम तक के साथ लॉन्च हो रहे हैं। ऐसे में ज्यादा रैम वाला मोबाइल खरीदना एक ऑप्शन हो सकता है, वहीं बहुत ये यूजर्स नया फोन खरीदना अफॉर्ड नहीं कर सकते। जरूरी नहीं कि आप नया फोन खरीदें क्योंकि कई ऐप्स की सेटिंग्स को चेंज करके आप फोन की स्पीड बढ़ा सकते हैं। कुछ ऐप्स को किल या अनइंस्टॉल करके फोन की स्पीड और बैटरी लाइफ भी बढ़ाई जा सकती है। जरूरी है कि हैवी गेम्स और ऐप्स को स्लो होते फोन के लिए जिम्मेदार मानने से पहले चेक करें कि कौन सी ऐप्स की वजह से आपका फोन स्लो हो गया है। फेसबुक से लेकर इंस्टाग्राम तक, कौन सी ऐप आपके फोन की कितनी बैटरी और रैम यूज करती है, इसे सेटिंग्स में जाकर आप चेक कर सकते हैं। इस तरह आप जान सकते हैं कि कौन सा ऐप आपका स्मार्टफोन स्लो कर रहा है: स्टेप 1: फोन की सेटिंग्स में जाकर स्टोरेज या मेमोरी पर टैप करें। स्टेप 2: यहां आपको दिखाई देगा कि किस तरह का कंटेंट सबसे ज्यादा मेमोरी यूज कर रहा है। इस लिस्ट में इंटरनल स्टोरेज कंजप्शन ही दिखाई देगा। स्टेप 3: मेमोरी पर टैप करने के बाद मेमोरी यूज्ड बाई ऐप्स में जाएं। स्टेप 4: अब दिखने वाली लिस्ट आपको एप यूसेज ऑफ रेम चार हिस्सों, 3 घंटे, 6 घंटे, 12 घंटे और 1 दिन में दिखाएगी। इसकी मदद से आप जान सकते हैं कि कौन सा ऐप कितना रैम यूज कर रहा है। इस लिस्ट में देखकर आप गैर-जरूरी ऐप को किल कर सकते हैं या अनइंस्टॉल कर सकते हैं। साथ ही कई पॉप्युलर ऐप्स के लाइट वर्जन डाउनलोड करने का ऑप्शन भी आपके पास है, जो कम स्टोरेज स्पेस और रैम यूज करता है। इस तरह आप स्मार्टफोन की प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ा सकते हैं।  

भारत की बास्केटबॉल टीम दोहा में फंसी, Iran-Israel War के चलते एमपी के तुशाल सिंह समेत खिलाड़ी परेशान

जबलपुर  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई सेवाओं के बाधित होने के कारण भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम कतर की राजधानी दोहा में फंस गई है। 18 सदस्यीय दल में 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ रेलवे खिलाड़ी तुशाल सिंह भी शामिल हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल के अनुसार भारतीय टीम एफआईबीए विश्व कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर में भाग लेने 25 फरवरी को कतर पहुंची थी। टीम को शनिवार को अगला मुकाबला खेलने के लिए लेबनान रवाना होना था, लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और उड़ानों के रद्द होने के कारण पूरी टीम दोहा में ही रुक गई है। स्वदेश वापसी के प्रयास जारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हवाई सेवाओं के बाधित होने के कारण भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम कतर की राजधानी दोहा में फंस गई है। 18 सदस्यीय दल में 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ रेलवे खिलाड़ी तुशाल सिंह भी शामिल हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल के अनुसार भारतीय टीम एफआईबीए विश्व कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर में भाग लेने 25 फरवरी को कतर पहुंची थी। टीम को शनिवार को अगला मुकाबला खेलने के लिए लेबनान रवाना होना था, लेकिन क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति और उड़ानों के रद्द होने के कारण पूरी टीम दोहा में ही रुक गई है। स्वदेश वापसी के प्रयास जारी

9 सवारियां और 1 बाइक: मौत से खेलता सफर, वीडियो देखकर पुलिस भी हैरान

कटनी एक मोटर साइकिल में कितने लोग सवार हो सकते हैं- दो, तीन या हद से हद चार… लेकिन क्या कभी 9 सवारी बैठे देखा है? यह नजारा देखकर बाइक निर्माता कंपनी भी अपना माथा पीट लेगी  |  कटनी जिले में एक हैरान कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक मोटरसाइकिल पर 9 लोग सवार हैं. बाइक चालक महिलाओं बच्चों सहित नौ सवारी बैठाकर बाइक चला रहा है. बगैर इस बात की चिंता किए कि जरा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है  |  जान जोखिम में डालकर बाइक में नौ लोगों को बैठाने का यह नजारा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला है  |  बाइक की नंबर प्लेट में दिए गए नंबर MP 21 ZE 8630 से जाहिर होता है कि यह कटनी जिले के किसी ग्रामीण क्षेत्र का मामला है. बच्चों के हाथ में पिचकारी नजर आ रही है जिससे प्रतीत होता है कि परिवार होली पर्व की खरीददारी कर वापस लौट रहा है  |  एक बाइक पर 9 सवारी देखकर किसी ने इसका वीडियो बना लिया जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं  |  वहीं, वीडियो वायरल होते ही पुलिस हरकत में आ गई है. यातायात थाना प्रभारी राहुल पांडे ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए वाहन चालक की तलाश शुरू कर दी गई है और संबंधित वाहन चालक की पहचान कर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी  | 

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