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खेती में करें आधुनिक तकनीक का प्रयोग:-नरेंद्र सिंह तोमर

दतिया, दतिया में 350 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित केन्द्रीय पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान महाविद्यालय एवं मात्स्यिकी महाविद्यालय और छात्रावासों का लोकार्पण। दतिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गाँव, गरीब और किसानों की प्रगति के लिये न केवल प्रयत्नशील हैं बल्कि लालायित भी हैं। मध्यप्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। किसानों को चाहिए कि वे अपनी और देश की उन्नति के लिए आधुनिक तकनीक का खेती में प्रयोग करें। केन्द्रीय मंत्री तोमर ने गुरुवार को दतिया जिले में रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के दतिया परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, मास्त्यिकी महाविद्यालय तथा पहुँज नदी एवं बेतवा नदी के नाम से निर्मित छात्रावासों के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र व क्षेत्रीय सांसद संध्या राय भी बतौर अतिथि के मौजूद थीं। नौनेर में आयोजित समारोह में सचिव कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग व निदेशक नई दिल्ली डॉ. हिमांशु पाठक, कुलाधिपति रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि महाविद्यालय डॉ. पंजाब सिंह, कुलपति रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि महाविद्यालय झांसी डॉ. अशोक कुमार सिंह सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। किसानों को लाभ, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा केन्द्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि 350 करोड़ रुपए की लागत से विकसित इन संस्थाओं से बुन्देलखंड क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि एक समय बुन्देलखंड के लोग गर्मी के दौरान पलायन करते थे। लेकिन आज के परिवेश में बुन्देलखंड ने कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। किसानों को अब खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन एवं पशुपालन को भी अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे नए-नए अनुसंधानों और तकनीकी का उपयोग कर खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। देश के वैज्ञानिक न केवल कृषि के क्षेत्र में बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में भी किस प्रकार किसानों को आधुनिक तकनीक से लाभ हो सकता है, इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। कम समय में तैयार हुए दोनों महाविद्यालय प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि इतने कम समय में इन महाविद्यालयों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और केन्द्रीय कृषि मंत्री स्वयं आज इसका लोकार्पण कर रहे हैं। लगभग 350 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इन संस्थाओं के बन जाने से सम्पूर्ण बुन्देलखंड के किसानो को इसका लाभ मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। डॉ. मिश्र ने कहा कि दतिया जिले की दो पहाडियों के आस-पास पहले अपराध होते थे। अब दोनों पहाड़ियों में से एक पर मेडीकल कॉलेज और दूसरे पर पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय का निर्माण हुआ है। यह दोनों काम जंगल में मंगल की तरह दतिया के लिये साबित हुए हैं। उन्होंने केन्द्रीय कृषि मंत्री से आग्रह किया कि दतिया के किसानों को ड्रोन से छिड़काव की सुविधा भी अगर उपलब्ध होती है तो किसानों के लिये बहुत ही लाभकारी रहेगा। डबल इंजन सरकार में हुआ तेजी से विकास क्षेत्रीय सांसद संध्या राय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री चौहान की डबल इंजन सरकार के माध्यम से प्रदेश में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। मध्यप्रदेश अब तेजी से विकास करने वाला प्रदेश बना है। मध्यप्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं और जनकल्याण के कार्यों को सम्पूर्ण देश में सराहा जा रहा है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना हो या जनकल्याण की अन्य योजनायें सभी योजनाओं का लाभ प्रदेश के लाभार्थियों को प्राप्त हो रहा है।

आम आदमी पार्टी ने ED, CBI व केंद्र सरकार का पुतला फूंका।

ग्वालियर। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की गिरफ़्तारी के बाद से भड़के हुए आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर में ED, CBI और केंद्र सरकार का पुतला फूंका है सांसद संजय सिंह की गिरफ़्तारी से देशभर के आम आदमी पार्टी में आक्रोशित है। इसी कड़ी में गुरूवार को आम आदमी पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं ने आप नेत्री मनीक्षा सिंह तोमर के नेतृत्व में शहर के फूल बाग चौराहे पर एकत्र होकर प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए ED, CBI और केंद्र सरकार का पुतला फूंका है और कहा कि प्रधानमंत्री कितने भी जुल्म कर लें हम डरने वाले नहीं है। उनका कहना है कि हमरी बढ़ती ताकत से मोदी सरकार घबराई है इसलिए ED,CBI से हमारे नेताओं को गिरफ्तार करवा रही है। इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के आधा सैकड़ा कार्यकर्ता मौजूद थे। मोदी सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी बता दें कि सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद नाराज कार्यकर्ता फूल बाग चौराहे पर इकट्ठा हुए थे और कार्यकर्ताओं ने जहां पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। इस प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुतला हाथ में उठाकर चौराहे का चक्कर लगाए और पुतले को आग लगा दी कार्यकर्ता जलता हुआ पुतला लेकर चल रहे थे, आखिर में कार्यकर्ताओं ने पुतले को सड़क पर पटक कर उसे जूते से भी रौंदा। भाजपा भय का माहौल बनाना चाहती है:-मनीक्षा तोमर आप नेत्री मनीक्षा सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सही लोगों को, जमीन से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करती नजर आ रही हैं। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के दो मंत्रियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और अब आप सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार किया गया है, भारतीय जनता पार्टी भय का माहौल बनाना चाहती है क्योंकि संजय सिंह मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में आने वाले समय में कई चुनावी रैली करने वाले थे और इससे पूरी भाजपा सरकार डरी हुई है लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं, पीछे हटने वाले नहीं हैं ।

दो भागों में बंटा छिंदवाड़ा

भोपाल/ छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले सीएम शिवराज ने अपना आखिरी दांव चल दिया है। बीती रात सीएम शिवराज की कैबिनेट बैठक में मैहर के साथ ही पांढुर्ना को नया जिला बनाने के आदेश जारी कर दिये हैं। इन दोनों को जिला बनाने को ऐलान पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर चुके थे। शिवराज सरकार ने आचार संहिता लगने से पहले अपने फैसले पर अमल कर दिया है। छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्ना और सौसर को मिलाकर पांढुर्ना नया जिला बनाया गया है। नव घोषित पांढुर्ना जिले में सौसर और पांढुर्ना तहसील के सभी 137 पटवारी हलकों को शामिल किया गया है। चुनावी साल में लंबे समय से की जा रही मांग पर अब अमल किया गया है। ये फैसला सीएम शिवराज की आखिरी कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया है। सीएम शिवराज ने इसी साल पांढुर्ना को मध्य प्रदेश का जिला बनाने का ऐलान किया था, इस जिले में पांढुर्ना के अलावा सौसर विधानसभा सीट भी है। यानी कांग्रेस के कब्जे वाली इन दोनों सीटों पर शिवराज सिंह चौहान ने जिला बनाकर बड़ा दांव खेला है। इस नए जिले के स्वरूप से छिंदवाड़ा के वर्तमान परिवेश में परिवर्तन साफ तौर पर देखा जा सकेगा। हालांकि, इसके पहले भी सीएम दो चुनावों में पांढुर्ना को जिला बनाने की घोषणा कर चुके थे। लेकिन इस बार इसे अमल में भी लाया गया है। केबिनेट में मोहर लगते ही जारी हुआ राजपत्र। मध्यप्रदेश केबीनेट की हुई बैठक में पांढुर्ना को भी नवीन जिला बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुआ एवं तत्काल अधिकृत नोटिफिकेशन भी जारी हो गया है। मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग के अपर सचिव के हस्ताक्षर के जारी इस आदेश में यह उल्लेखित है कि मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) की धारा 13 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य सरकार एतद द्वारा इस आदेश के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से नवीन जिला पांढुर्ना (मुख्यालय पांढुर्ना) का गठन करती है। जिसमें पांढुर्ना तहसील के समस्त 74 हल्के तथा सौसर तहसील के समस्त 63 हल्के मिलाकर कुल 137 पटवारी हल्के समाविष्ट होंगे। पांढुर्ना जिले के गठन उपरांत छिंदवाड़ा जिले में शेष 12 तहसीलें क्रमश: अमरवाड़ा, उमरेड, चांद, चौरई, छिंदवाड़ा, छिंदवाड़ा नगर, जुन्नारदेव, तामिया, परासिया, बिछुवा, मोहखेड़ एवं हरई के समस्त 686 हल्के शेष रहेंगे गोटमार मेले के लिए प्रसिद्ध है पांढुर्ना। प्रशासनिक दृष्टि से आज का पांढुर्ना जिला कल तक मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक तहसील और नगर रहा है। छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से इस शहर की दूरी लगभग 95 किमी है। जबकि प्रदेश की राजधानी से यह नगर लगभग 264 किमी के दूरी पर है। ‘जाम’ नदी के किनारे बसा यह शहर नेशनल हाईवे-69 (NH-69) और दक्षिण पूर्व मध्य-रेलवे मार्ग पर स्थित है। जाम नदी के किनारे स्थित पांढुर्ना को भारतवर्ष ही नहीं पूरी दुनिया में सांस्कृतिक रूप से प्रसिद्ध गोटमार (पत्थर मार) मेले के लिए जाना जाता है। प्रसिद्ध जामसांवली हनुमान मंदिर नगर से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही कई प्रसिद्ध मंदिर व दार्शनिक स्थल भी पांढुर्ना में मौजूद हैं। प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्र है पांढुर्ना। पांढुर्ना मध्य प्रदेश के एक प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्र है, जहां से सरकार को अच्छा राजस्व प्राप्त होता है। इस नगर और आसपास की उपजाऊ भूमि पर यहां के कृषक समुदाय मूंगफली, सोयाबीन, कपास, गेहूं, अरहर, चना, मूंग, ज्वार, मक्का, उड़द आदि अनाजों से अपना निर्वाह करते हैं। साथ ही यहां कद्दू, लौकी बरबटी हरी सब्जियों के साथ संतरा जैसे फल का भी उत्पादन किया जाता है। ये उत्पाद न केवल स्थानीय विक्रय केन्द्रों को बल्कि और अंतर-राज्यीय मंडियों में भी भेजा जाता है। शहर के आस-पास ऑयल मिलें और धागा मिलें भी स्थापित की गई हैं। आदिवासी बाहुल्य इलाका है पांढुर्ना। नव घोषित जिला पांढुर्ना एक बहुल आदिवासी इलाका है। यहां की विधानसभा सीटों पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है, पांढुर्ना से नीलेश उइके विधायक है। जबकि सौसर से विजय रेवनाथ चौरे विधायक हैं। पांढुर्ना की जनसंख्या लगभग तीन लाख, दस हजार पांच सौ (3,10,500) के आसपास हैं। जबकि सौसर की जनसंख्या लगभग दो लाख, चालीस हजार (2,40,000) के आसपास है। इस हिसाब से नव घोषित जिले की जनसंख्या तकरीबन पांच लाख, पचास हजार (5,50,000) है। जिसमें से लगभग आधी आबादी आदिवासियों की है। पांढुर्ना से छिंदवाड़ा की दूरी 90 किलोमीटर है। ऐसे में यहां के रहवासियों को छिंदवाड़ा आने में काफी परेशानी होती थी। लंबे समय से पांढुर्णा को जिला बनाने की मांग की जा रही थी। आज पूरी हुई है। अजय देव शर्मा को मिली पांढुर्ना की कमान। मध्य प्रदेश नव घोषित जिले पांढुर्ना के लिए सरकार ने पहले कलेक्टर की नियुक्ति कर दी है। आईएएस अधिकारी अजय देव शर्मा को पांढुर्ना जिले का पहला कलेक्टर नियुक्त किया गया है। अजय देव शर्मा की वर्तमान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उज्जैन में पदस्थ थे। अजय देव शर्मा 2014 बैच के आईएएस अफसर हैं। नव घोषित पांढुर्ना जिले में नवागत कलेक्टर के लिए भवन सज कर तैयार हो गया है। मध्य प्रदेश में अब 55 जिले होंगे। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार की कैबिनेट में दोनों नए जिलों की घोषणा पर मोहर लगने के बाद में राज्य शासन ने पांढुर्ना और मैहर को जिला बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के अमल में आने के बाद अब मध्य प्रदेश में कुल जिलों की संख्या 55 हो गई है। इसी कड़ी में इसके पूर्व रीवा क्षेत्र के मऊगंज को 53 वां जिला बनाया था। पांढुर्ना अहम क्यों? बीजेपी ने पांढुर्ना को जिला बनाने की घोषणा करके एक नया दांव खेल दिया है। छिंदवाड़ा पूर्व सीएम कमलनाथ का गढ़ माना जाता है। ऐसे में बीजेपी के पांढुर्ना को जिला बनाने की कवायद को बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अभी छिंदवाड़ा पूरा जिला एक लोकसभा क्षेत्र है। पांढुर्ना के जिला बनने के बाद छिंदवाड़ा लोकसभा में दो जिले हो जाएंगे।

मैं चुनाव लड़ूं या नहीं लड़ूं:- शिवराज

ग्वालियर। बीजेपी के दिल्ली नेतृत्व के हाथों में चली आ रही मध्यप्रदेश विधानसभा की कमान के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनसभाओं के दौरान भावुक नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व में विधानसभा चुनाव की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले रखी है। इसका उदाहरण भी केंद्रीय बीजेपी द्वारा जारी की जा रही विधानसभा प्रत्याशियों की सूची में साफ तौर पर देखा जा रहा है। अब तक बीजेपी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित चार सांसदों को विधानसभा का टिकट देकर चुनावी समर में भूचाल ला दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव सीएम शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर लड़ा जाएगा या नहीं यह भी स्पष्ट नहीं है। दिल्ली से जारी इस उठापटक का दर्द सीएम शिवराज सिंह चौहान की सभाओं में उनकी जुबां पर भी आ रहा है। यहां गौरतलब है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान अपनी सभाओं में लगातार जिस तरह की बातें कह रहे हैं उन बातों को लेकर जहां आगामी विधानसभा चुनाव में उनके मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सन्देह की स्थिति निर्मित हो गई है। इसके साथ ही इन बातों से विपक्ष को भी बार बार शिवराज सिंह पर तंज कसने के मौका मिल रहा है। जिस प्रकार से भाजपा ने चुनाव प्रत्याशियों की तीन सूचियां जारी की हैं और इन सूचियों में अभी तक ना तो सीएम शिवराज सिंह का टिकट फाइनल किया है और ना ही अभी तक पार्टी ने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई घोषणा की है, उससे विपक्ष ने सीएम शिवराज सिंह को लेकर यहां तक कह दिया है कि पता नहीं इसबार भाजपा उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी भी या नहीं। हम आपको बता दें कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपनी गृह विधानसभा बुधनी की में सभा को संबोधित करते हुए जनता से पूछा कि मैं चुनाव लड़ूं या नहीं। सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। इसके पहले भी सीएम शिवराज सिंह चौहान यह कहकर भी खलबली मचा चुके हैं कि मुझे पद का कोई लालच नहीं है। इतना ही नहीं बुदनी विधानसभा के लाड़कुई में कार्यक्रम में शामिल होने आए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लाडली बहनों को संबोधित करते हुए कहा, ” बहनों मैंने सरकार नहीं परिवार चलाया है। मेरी बहना, ऐसा भैया मिलेगा नहीं, मैं चला जाऊंगा तब याद आऊंगा तुम्हें “। मुख्यमंत्री ने आगे कहा, मेरे लिए राजनीति का मतलब जनता की सेवा है। आपको बता दें, इस बार मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव की कमान बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपने हाथों में ले रखी है। विधानसभा प्रत्याशियों की अब तक दो सूची बीजेपी ने जारी की है। दोनों ही सूची में 39-39 नाम हैं, जबकि एक नाम सिंगल है। इस सूची को देखकर सहज नजर आ रहा है कि विधानसभा प्रत्याशियों की सूची में मध्यप्रदेश के कद्दावर नेताओं की पलभर के लिए भी नहीं चल पा रही है। भाजपा ने चुनाव प्रत्याशियों के नामों को लेकर बहुत बड़ा फेरबदल किया है। कई विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव से लेकर केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को अभी तक चुनावी समर में उतार चुकी है और कई दिग्गज नेताओं और सांसदों के नाम अगली सूचियों में आने की प्रबल सम्भावनायें नजर आ रहीं हैं लेकिन वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान और उनके विधानसभा क्षेत्र को लेकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की खामोशी ने राजनीतिक हलकों में अटकलों और चर्चाओं का का बाजार गर्म कर दिया है। इन अटकलों और चर्चाओं के बीच अब पक्ष और विपक्ष सभी भाजपा की आगामी सूचियों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं,इनके साथ ही इंतजार तो हमें भी है। चलते चलते मीर तकी मीर के कलाम की एक पंक्ति याद आई आप लोग भी गौर करें। “इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या,आगे-आगे देखिए, होता है”

डबरा एसडीएम, पद पर रहने लायक नहीं, सीएम से करेंगीं शिकायत:- इमरती देवी

ग्वालियर। डबरा तहसील परिसर में एसडीएम कार्यालय के बाहर एक किसान द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास करने के मामले में एसडीएम के असंवेदनशील बयान पर पूर्व मंत्री इमरती देवी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से शिकायत करने की बात कही है। जनसुनवाई में शिकायत का निराकरण न होने से परेशान किसान ने तहसील परिसर में ही एक पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया लेकिन वहां मौजूद लोगों व पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ से किसान को बचा लिया लेकिन जब इस घटना के बाद डबरा एसडीएम प्रखर सिंह से पत्रकारों द्वारा पूछा गया कि आगे इस तरह की घटना न हो, उसके लिए आपके क्या प्रयास रहेंगे तो उनका जवाब था “हम हर जगह उपस्थित तो नहीं रह सकते हैं, लोग जो करना चाहें स्वतंत्र हैं”। शिवराज और महाराज से करूंगी शिकायत:- इमरती देवी एसडीएम प्रखर सिंह द्वारा दिए गए इस बयान को लेकर लघु उद्योग निगम की अध्यक्ष और पूर्व मंत्री इमरती देवी ने भी भारी आक्रोश जताया है। इतना ही नहीं, इमरती ने एसडीएम द्वारा दिए गए इस गैर ज़िम्मेदाराना बयान पर सीएम शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया से शिकायत करने की भी बात कही है। इमरती देवी ने कहा की जिस पद के यह अधिकारी हैं, उस पद की जिम्मेदारी संभालना इनका काम है। चाहे फिर वह जिम्मेदारी आम इंसान को लेकर हो या किसान को लेकर। एसडीएम द्वारा कोई कुछ भी करने को स्वतंत्र है वाली बात पर इमरती ने सवाल किया ‘तो फिर अधिकारी शहर में क्या कर रहे हैं। हमारा डबरा हर बात में खुद ही सक्षम है फिर यहां ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग की क्या जरूरत।’ उन्होने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कल को अगर किसान इनके सामने पेट्रोल डालकर आग लगाएगा तब भी यह क्या बैठकर देखते ही रहेंगे और कहेंगे करो जो करना है। इमरती देवी ने कहा कि एक अधिकारी द्वारा कहे गए ऐसे शब्द बेहद ही निंदनीय हैं और मैं इसकी शिकायत सीएम शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया से निश्चित ही करूंगी। जहां एक और हमारे सीएम, हमारे महाराज सिंधिया और हम सभी जनप्रतिनिधि और जन सेवक रात में 12 बजे भी अगर किसी व्यक्ति को परेशानी हो उसके लिए मौजूद रहते हैं तो यह कर्तव्य एक अधिकारी का भी होता है। अधिकारी सिर्फ कुर्सी पर बैठकर तनख्वाह पाने के लिए नहीं होता है। अधिकारी को आमजन खासकर किसान के लिए बेहद नरम होना चाहिए और उनकी परेशानियों को तसल्ली से सुनना चाहिए। एसडीएम की बात करते हुए इमरती ने यह भी कहा कि सिर्फ अतिक्रमण हटाना ही इनका काम नहीं है, जनता की सेवा करना इनका काम है। आखिर में इमरती देवी ने कहा कि वह निश्चित तौर पर एसडीएम को डबरा से हटाने के लिए सीएम से मांग करेंगी। यह है पूरा मामला। पिछोर के बाबूपुर क्षेत्र निवासी कैलाश परिहार की गांव में 15 बीघा के लगभग जमीन है। जिस पर वह खेती करता है। पिछले काफी समय से जमीन पर रास्ते को लेकर विवाद चल रहा है। किसान का कहना है कि वह लगातार जनसुनवाई में भी आवेदन देता है, लेकिन उसकी आज तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई। किसान ने गांव के ही दबंग राजा बघेल,अमर सिंह बघेल,हरि सिंह ,बेताल ने जमीन के रास्ते पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। जिसकी शिकायत वो कई बार जनसुनवाई में कर चुका है, लेकिन जब समस्या का समाधान न होने पर वो आक्रोशित हो गया और पीपल के पेड़ पर फांसी लगाने का प्रयास किया। किसान को देखकर आसपास के लोग और तहसील के कर्मचारी पहुंचे। उन्होंने उसे पेड़ से उतारा। इसके बाद प्रशासन ने किसान को पुलिस थाने भेजा।

केंद्रीय मंत्री सिंधिया और दो समर्थक मंत्रियों के खिलाफ परिवाद मामले अगली सुनवाई, 20 नवम्बर को।

ग्वालियर। भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते रहते हैं। इसी तरह के एक मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके दो समर्थक मंत्रियों के खिलाफ दायर परिवाद पर ग्वालियर जिला कोर्ट के MP/MLA विशेष न्यायलय में सुनवाई हुई। जानकारी के अनुसार बिगत अप्रेल माह में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ओर भाजपा के राज्यसभा सांसद व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर पर एक दूसरे पर टिपणियां की थीं और इसी मामले में सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों ने भी सिंधिया का पक्ष लेकर दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी कर दी थी। इस ट्विटर वॉर को लेकर दिग्विजय सिंह समर्थकों ने ग्वालियर जिला कोर्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थन में उतरे मध्य प्रदेश सरकार के दोंनो मंत्रियों तुलसी सिलावट और महेंद्र सिसौदिया के खिलाफ परिवाद दायर कर दिया था। ग्वालियर जिला कोर्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थके मंत्रियों तुलसी सिलावट और महेंद्र सिसौदिया के खिलाफ परिवाद पर MP/MLA कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इंदरगंज थाना पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। जिसके बाद कोर्ट ने परिवादी एडवोकेट नितिन शर्मा से जांच के स्टेटस रिपोर्ट के लिए बिंदु की मांग की।परिवादी ने कोर्ट से 7 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट का आग्रह की है। फिलहाल कोर्ट ने परिवादी के आग्रह को मंजूर कर लिया है और ग्वालियर एसएसपी को परिवादी के जांच बिन्दुओं के आधार पर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने की बात कही है। ऐसे में एसएसपी ग्वालियर को अब 20 नवंबर को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके अलावा 20 नवम्बर को ही परिवादी एड नितिन शर्मा के जांच कथन कोर्ट में दर्ज किए जाएंगे। यह है मामला। 21 अप्रैल को उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने सिंधिया के लिए कहा था कि “हे महाकाल… कांग्रेस में अब कोई दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया पैदा मत करना” जवाब में सिंधिया ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर जवाब में लिखा था कि “हे प्रभु महाकाल… दिग्विजय सिंह जैसा देश विरोधी भारत में पैदा ना हो। ” 21 अप्रैल को ही तुलसी सिलावट ने भी एक ट्वीट किया था- जिसमें उन्होंने लिखा था कि हे महाकाल, ब्रह्मांड में दिग्गी राजा जैसा तत्व सूक्ष्म रूप में भी कहीं जन्म ना लें. धर्म, समाज, देश, मनुष्यता की रक्षा करो हे राजाधिराज। मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा था- हे तीनों लोकों के स्वामी महाकाल प्रभु दिग्विजय सिंह जी जैसे व्यक्ति को जिसने कांग्रेस का पूरा बंटाधार कर दिया, मध्यप्रदेश का बंटाधार कर दिया, महाकाल प्रभु से कामना है कि दिग्विजय सिंह को अगले जन्म में पाकिस्तान में पैदा करना था। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर परिवादी ने उठाये सवाल। नितिन शर्मा ने बताया कि तीनों मंत्रियों ने खुले मंच से पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था इसके बाद हमने तीनों को लीगल नोटिस भेज माफी मांगने का आग्रह किया। समय सीमा में आग्रह न मानने पर परिवाद दायर किया था। नितिन शर्मा ने कोर्ट में क्रिमिनल परिवाद दायर करने का आग्रह किया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद क्रिमिनल परिवाद दायर किया था। वहीं इस मामले से जुड़ी जांच की स्टेटस रिपोर्ट इंदरगंज थाना पुलिस को पेश करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आज इंदरगंज थाना पुलिस ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर परिवादी ने सवाल खड़े किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि न्यायालय के आदेश पर साइबर सेल के जरिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री तुलसी सिलावट और मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के ट्विटर अकाउंट की जांच की गई। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर ट्वीट कर बयान दिए हैं. ऐसे में पूर्व सीएम के खिलाफ टिप्पणी किए जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन क्रिमिनल परिवाद दायर करने वाले याचिकाकर्ता का ग्राउंड सही नहीं है, वह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से सीधे ताल्लुक नहीं रखते हैं। पुलिस के इस रिपोर्ट पर परिवादी ने कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति मामले पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। ऐसे में अब परिवादी के बिंदुओं के आधार पर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के एसएसपी ग्वालियर को निर्देश दिए हैं।

लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते हुए जीएसटी निरीक्षक को दबोचा

रीवा। वेरिफिकेशन के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहे जीएसटी निरीक्षक एस के गुप्ता को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। उक्त कार्रवाई सतना मुख्यालय में की गई है कार्रवाई पूरी हो जाने के बाद जीएसटी निरीक्षक को जमानत पर छोड़ दिया गया है। लोकायुक्त एसपी गोपाल सिंह धाकड़ ने बताया कि किसी उपकरण के डीलर खेमचंद शर्मा ने कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में डीलर खेमचंद शर्मा ने बताया था कि वेरिफिकेशन के नाम पर जीएसटी निरीक्षक एस के गुप्ता उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत की जांच कराई गई तो शिकायत प्रमाणित पाई गई जिसके बाद बुधवार को कार्यालय में पदस्थ डीएसपी परमेंद्र सिंह के नेतृत्व में 16 सदस्य टीम को कार्रवाई करने के लिए सतना भेजा गया। जहां देर दोपहर 2000 रुपये की रिश्वत लेते हुए जीएसटी निरीक्षक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया था। कार्रवाई पूरी हो जाने पर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त निरीक्षक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत कर मामले को विवेचना में लिया गया है।

ठेला-टपरों को ग्राउण्ड में शिफ्ट किया जायेगा महापौर प्रीति संजीव सूरी का सख्त आदेश

कटनी। नगर पालिक निगम महापौर श्रीमति प्रीति संजीव सूरी द्वारा 4 अक्टूबर को सायं 6 बजे पं. जवाहर लाल नेहरू वार्ड स्थित बड़े ग्राउण्ड का निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान वार्ड के नागरिकों की समस्यायें सुनते हुये वार्ड में फुटकर सब्जी, फल, चाट ठेला, फुल्की आदि विक्रेताओं द्वारा जगह-जगह ठेला लगाये जाते है, जिन्हें वार्ड के बड़े ग्राउण्ड में शिफ्ट कराने एवं स्थापित पोल में प्रकाश की व्यवस्था व गढ्ढों को बजरी डालकर समतल किये जाने के निर्देश दिये। इस अवसर पर महापौर श्रीमति प्रीति संजीव सूरी, निगमाध्यक्ष मनीष पाठक, स्थानीय पार्षद शशिकांत तिवारी, एमआईसी सदस्य एवं पूर्व निगमाध्यक्ष संतोष शुक्ला, बीना बैनर्जी, सुभाष शिब्बू साहू पार्षद सीमा श्रीवास्तव, शकुन्तला सोनी, प्रभा गुप्ता सुमित्रा रावत सहायक यंत्री सुनील सिंह आशीष बिलैया एवं वार्ड के वरिष्ठजन मास्टर उदवानी, सुनील पुरूस्वानी, पिंकी जैन, डब्बू डुग्गल, पं. नारायणी उपस्थित रहे।

बेटी के प्रसव के बाद घर से निकाली गई महिला, कोतवाली पुलिस ने लिया गंभीरता से

कटनी। अजीब विडबना है इस समाज में आज भी किसी को बेटा चाहिए तो किसी को बेटी एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है बेटे की चाह में ससुराल वालों ने बहू की कोख से बेटी के जन्म लेते ही मां बेटी को घर से बेघर कर देने के मामले में कोतवाली पुलिस खबर प्रकाश में आते ही हरकत में आ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कोतवाली थाना प्रभारी आशीष शर्मा ने टीम गठित कर न केवल महिला के ससुराल वालों का पता लगाने बल्कि घर से निकाली गई महिला और उसकी दूधमुही बच्ची को भी खोज कर सामने लाने के प्रयास शुरू कर दिए। महिला पहुंच गई मायके महात्मागांधी वार्ड निवासी प्रीति यादव पति मुकेश यादव (32) ने 30 सितंबर को जिला अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था। 2 अक्टूबर को प्रसूता को डिस्चार्ज कर दिया गया। प्रीति ने आरोप लगाया था कि जब गर्भ में बेटी का पता चला तो ससुराल वाले प्रताड़ित करने लगे। बेटी जब पैदा हुई तो पति अस्पताल एक-दो बार ही पहुंचे डिस्चार्ज कराने नहीं आए। मम्मी ने डिस्चार्ज कराया। परेशान होकर महिला अपने मायका छिरपई थाना सुलतानपुर रायसेन चली गई है। कोतवाली पुलिस से बात करते हुए महिला के पिता ने कहा कि वर्तमान में प्रसव के कारण बेटी की हालत ठीक नहीं है, इसलिए देखरेख के लिए उसे मायके लेकर आए हैं। जैसे ही परिस्थितियों सामान्य हुई तो हम बेटी को ससुराल पहुंचाएंगे। पति को भी लताड़ा पूर्व में 16 सितंबर को महिला कोतवाली थाने भी गई थी और पुलिस को आपबीती बताई और कहा की परिवार में झगडे चल रहे हैं उसने यह बात नहीं बताई की बेटी के कारण उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। महिला के पारिवारिक झगड़ा बताए जाने के कारण उसे परिवार परामर्श केंद्र जाने की सलाह पूर्व में दी गई थी। जब बेटी पैदा होने के बाद निकल जाने का मामला प्रकाश में आया तो कोतवाली थाना प्रभारी ने तत्काल उसके पति को लताड़ लगाई। पूछताछ के दौरान महिला के पति ने पुलिस के सामने दोबारा ऐसी गलती न करने की बात कहते हुए किए गए कार्य को लेकर माफी भी मांगी। इनका कहना है इस मामले को लेकर कोतवाली थाना प्रभारी आशीष शर्मा ने कहा कि यह मामला संज्ञान में नहीं आया था की बेटी जन्म लेने के कारण महिला को प्रताड़ित किया जा रहा है। पूर्व में केवल पारिवारिक पति-पत्नी के झगड़े की बात सामने आई थी। जिसके कारण उन्हें महिला परामर्श जाने की सलाह दी गई थी। अब जब यह बात सामने आई है तो इस पर कार्यवाही की गई है।

मैहर बना मध्य प्रदेश का 55वां जिला।

भोपाल/सतना। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने विंध्य की एक और पुरानी मांग पूरी करते हुए चुनाव से पहले मैहर जिले का नक्शा साकार कर दिया। राज्य सरकार की घोषणा के बाद नव घोषित जिला मैहर में सतना जिले की तीन तहसीलों के पटवारी हलके और तीन जनपद पंचायतों की ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र की रामनगर तहसील भी अमरपाटन के साथ मैहर जिले का हिस्सा होगी। मैहर को जिला घोषित किये जाने से मैहर के लोगों में अपार हर्ष है। हम आपको बता दें कि विंध्य क्षेत्र में स्थित मैहर को जिला बनाने की मांग वहां के जनप्रतिनिधियों और आमजनता के द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। लोगों का तर्क था की यहां से भारी राजस्व मिलने के बाद भी इलाके का विकास नहीं हो पा रहा है। वहीं आम लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए दूर सतना तक का सफर करना पड़ता है। ऐसे में मैहर का जिला बनना जरूरी है। इस मांग पर पिछले दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक सभा के दौरान घोषणा करते हुए कहा था कि बहुत जल्द मैहर को जिला बनाया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाते हुए मैहर को जिला घोषित कर दिया। मैहर की सबसे बड़ी पहचान विश्वप्रसिद्ध मां शारदा शक्तिपीठ मंदिर है और इसी वजह से यहां सालाना लाखों-करोड़ों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा यहां अन्य बड़े व प्रसिद्ध मंदिरों के साथ ही मैहर का किला और पन्नी जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा वर्तमान में यहाँ पर देश की प्रसिद्धि सीमेंट की तीन फैक्ट्रियां कार्यरत हैं। जो अब तक सतना जिले को काफी राजस्व देती रही हैं। 55वां जिला बना मैहर। मैहर को जिला घोषित करने से पहले 15 अगस्त को रीवा से अलग होकर मऊगंज 53वें जिले के रूप में सामने आया था। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा के पाढ़ुर्ना को जिला बनाया जो प्रदेश का 54वां जिला हुआ अब मैहर के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने मैहर को मध्य प्रदेश का 55वां जिला घोषित कर दिया। मैहर जिले में 234 पटवारी हलके होंगे। राज्य शासन ने मैहर जिले में राजस्व के कामकाज के लिहाज से अब तक सतना का हिस्सा रही अमरपाटन और रामनगर राजस्व अनुविभाग की तहसीलों को मैहर जिले में शामिल करने की अधिसूचना जारी कर दी है। नए जिले में मैहर तहसील के 122, अमरपाटन तहसील के 53 और रामनगर तहसील के 59 पटवारी हलकों समेत 234 पटवारी हलके होंगे। तीन राजस्व अनुविभागों की इन तीन तहसीलों के अलग होने के बाद सतना जिले में अब 8 तहसीलों रघुराजनगर, कोठी, मझगवां, नागौद, उचेहरा, रामपुर बाघेलान, कोटर और बिरसिंहपुर के 496 पटवारी हलके ही रह गए। 67 जनपद और 10 जिला पंचायत वार्ड होंगे। मैहर जिले में तीन तहसीलों के साथ-साथ तीन जनपद पंचायतें, और जिला पंचायत के 10 वार्ड होंगे। मैहर जनपद पंचायत की 115, अमरपाटन की 75 और रामनगर जनपद पंचायत की 55 ग्राम पंचायतों को मिला कर मैहर जिले में 245 ग्राम पंचायतें होंगीं । जिनमें जनपद पंचायतों के 67 वार्ड और जिला पंचायत के 10 वार्ड शामिल होंगे। मैहर के साथ हिस्सा बांट के बाद सतना जिला पंचायत का आकार छोटा हो जाएगा और यहां के वार्डों की संख्या 26 से घट कर मात्र 16 रह जाएगी। इसी तरह 8 जनपद पंचायतों की जगह सतना में सिर्फ 5 जनपद पंचायतें शेष बची रहेंगी। सतना से छिनी सबसे बड़ी धरोहरें। मैहर के अलग हो जाने से सतना से मैहर माता मंदिर सहित प्रसिद्ध 9 बड़े मंदिर और अन्य पर्यटकस्थलों के रूप में उसकी सबसे बड़ी धरोहर छिन गई है। नव घोषित मैहर जिले में विश्वप्रसिद्ध मां शारदा शक्तिपीठ मंदिर है और इसी वजह से यहां सालाना लाखों-करोड़ों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। त्रिकूट पर्वत पर विराजीं माता शारदा का विश्व प्रसिद्ध मंदिर सतना की पहचान रहा है। लेकिन अब यह पहचान भी सतना से अलग हो गई है। इसके साथ ही आल्हा ऊदल अखाड़ा, नीलकंठ मंदिर और आश्रम, गोला मठ मंदिर, बड़ा अखाड़ा मंदिर, बड़ी खेरमाई मंदिर, ओइला मंदिर, ललितंबा शक्ति पीठ, इक्षापूर्ति मंदिर और मैहर का किला व पन्नी खोह जलप्रपात आदि भी अब जिला मैहर की धरोहर होंगे जिले में 5 लाख, 50 हजार से अधिक मतदाता होंगे। तीन राजस्व अनुविभागों, तहसीलों, जनपद पंचायतों और नगरीय निकायों को मिला कर अस्तित्व में आए मैहर जिले में ग्रामीण एवं नगरीय निकाय मिलाकर 5 लाख 53 हजार 445 से अधिक मतदाता होंगे। गत वर्ष हुए नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों के आंकड़ों के लिहाज से नए जिले मैहर में मैहर जनपद की 115 पंचायतों के 214067 एवं नगर पालिका के 24 वार्डों के 45223 मतदाताओं को मिलाकर 259290 मतदाता थे। जबकि अमरपाटन जनपद की 75 पंचायतों के 157332 और नगर परिषद के 15 वार्डों के 15201 वोटर मिला कर कुल 172533 मतदाता थे। इसी तरह रामनगर जनपद की 55 पंचायतों में 103527 एवं 15 वार्डों के 18095 मतदाता मिला कर कुल मतदाता संख्या 121622 थी। हालांकि विधानसभा चुनाव के लिहाज से मतदाता पुनरीक्षण का कार्य अभी प्रगति पर है। लिहाजा इन तीनों क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 553445 से बढ़ने की संभावना है। एक नगर पालिका और दो नगर परिषदें होंगी। नवीन जिले मैहर में एक नगर पालिका और दो नगर परिषदें भी होंगी। मैहर नगर पालिका तो मैहर जिले में स्वाभाविक तौर पर सबसे बड़ा नगरीय निकाय होगी ही अमरपाटन और रामनगर नगर परिषद भी नए जिले का हिस्सा होंगी। एक नगर पालिका और दो नगर परिषदों के मैहर में समाहित हो जाने के बाद अब सतना जिले में सतना नगर पालिक निगम समेत नगरीय निकायों की संख्या घट कर 9 रह जाएगी। सीमेंट फैक्ट्रियों बड़ी पहचान। नव घोषित मैहर जिले में वर्तमान में आर्थिक दृष्टि से सीमेंट की तीन बड़ी फैक्ट्रियां कार्यरत हैं जो मैहर सीमेंट, रिलायंस सीमेंट और KJS सीमेंट है। ये फैक्ट्रियां सरलानगर में स्थित है जो शहर से लगभग 8 किलोमीटर मैहर-धनवाहि रोड पर है। इसके साथ अन्य कई छोटी बड़ी औद्दोगिक इकाइयां भी नव घोषित मैहर जिले में कार्यरत हैं। मैहर में सीमेंट फैक्ट्रियों सहित … Read more

समाजसेवी भैया लाल श्रीवास्तव में तोड़ा अपना अनशन

ग्यारसपुर तहसील की हैदरगढ़ में मृगन्नाथ धाम की सड़क की मांग एवं अन्य मांगों को लेकर भैया लाल श्रीवास्तव अनशन पर बैठे हुए थे कि देर शाम ग्यारसपुर एसडीएम मनोज उपाध्याय ने क्षेत्र की जो भी मांगे थी उन सभी मांगों को लिखित में भैयालाल श्रीवास्तव को दे दिया है एवं जल्द ही उनकी सभी मांगों को पूर्ण किया जाएगा ऐसा आश्वासन देकर एसडीएम ने पानी पिलाकर भैया लाल श्रीवास्तव को धरना स्थल से स्वयं की इच्छा के अनुसार उठाया एवं भैया लाल श्रीवास्तव में बताया है कि समस्त ग्राम वासियों एवं क्षेत्र वासियों की मांग के अनुसार एसडीएम के द्वारा मांगों को जल्द पूर्ण करने का आश्वासन एवं लिखित में दिया है जिसके चलते मैंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है । आपको बता दें कि 3 अक्टूबर से भैया लाल श्रीवास्तव अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे और आज रात्रि 9:00 बजे उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया। मौके पर जनपद सदस्य मोकम सिंह कुशवाहा, नायब तहसीलदार राजेंद्र सेन, नितिन श्रीवास्तव, पवन सोनी, सहित क्षेत्रीय ग्रामीण मौजूद रहे ।

मुख्यमंत्री ने भोपाल स्टेट मीडिया सेंटर के लिए किया भूमिपूजन।

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकार समाज और सरकार के मध्य सेतु की भूमिका निभाते हैं। पत्रकार समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की आवाज होते हैं। पत्रकारिता एक धर्म है, जिसके निर्वहन के लिए पत्रकार युद्ध, बाढ़, भूकम्प जैसी विपरीत स्थितियों में भी जीवन दांव पर लगाकर कार्य करते हैं। जब विपत्तियों में लोग सुरक्षित स्थान खोजते हैं, तब पत्रकार समाधान खोजते हैं। यह कहना था मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मालवीय नगर भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर के लिए भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनसंपर्क मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, आयुक्त जनसंपर्क श्री मनीष सिंह उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लघु समाचार पत्रों को एक माह के अंतराल से विज्ञापन जारी करने और 70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड प्रदान करने की घोषणा की। हर साल पांच महिला पत्रकारों को महिला विकास कार्यों पर अध्ययन के लिए फैलोशिप प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार समाज को प्राप्त वो आश्वासन है, जिनके होने से सुनवाई सुनिश्चित है। राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों के स्याही का अमूल्य योगदान है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार और पत्रकारिता लोकतंत्र के प्राण हैं। मध्यप्रदेश की भूमि से पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता के पुरोधा बने। इसी धरती पर श्री हरिशंकर परसाई जैसे व्यंग्यकार हुए जिन्होंने समाज को आईना दिखाने का कार्य किया। स्व. श्री वेदप्रताप वैदिक ने हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए कार्य किया। स्व. श्री प्रभाष जोशी ने नई भाषा दी। एक दौर था जब स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों ने भागीदारी की और परतंत्रता की बेड़ियां तोड़ने का कार्य किया। आपातकाल के खिलाफ भी पत्रकार लड़े। कोविड के कठिन दौर में पत्रकारों ने अपना दायित्व निभाया। पत्रकार समाजसेवी भी होते हैं, उनका सरोकारों से ऐसा रिश्ता होता है, जैसे शरीर और आत्मा का रिश्ता। मीडिया सेंटर बनेगा पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के दौर में कहीं-कहीं विश्वसनीयता का संकट देखने को मिलता है। संवाद, संचार और सम्पर्क पत्रकारिता के प्राण होते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि स्टेट मीडिया सेंटर इन पत्रकारों के संवाद, खबरों के संचार और हमारे सम्पर्क का केन्द्र बनेगा। यह केन्द्र पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल बनेगा। यह केन्द्र वरिष्ठों के अनुभवों और युवाओं की ऊर्जा का उपयोग करेगा। साथ ही पुराने घर की स्मृतियां भी संजोएगा। पत्रकार भवन के पुनर्निर्माण का सपना पूरा होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन की नींव रखने वाले पुरोधा पत्रकारों का स्मरण भी किया और इस पत्रकार भवन में एक युग में पत्रकारों से भेंट और पत्रकार वार्ता आयोजित करने के अपने अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गत 7 सितम्बर को उन्होंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में इस मीडिया सेंटर के संबंध में घोषणा की थी जिसे आज मूर्त रूप देते हुए भूमिपूजन का कार्य सम्पन्न हुआ है। अब पत्रकार बंधु इस मीडिया सेंटर के रूप में पुराने पत्रकार के भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश करेंगे। पत्रकार भवन के पुनर्निर्माण का सपना पूरा होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशभर से पधारे पत्रकारों को स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। वैदिक अनुष्ठान के साथ किया भूमिपूजन। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन परिसर में अनुष्ठान और विधि-विधान पूर्वक स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। उन्होंने शिला पट्टिका का अनावरण भी किया। मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन से हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंच पर आते ही प्रदेश के सभी जिलों से आये समस्त पत्रकार बंधुओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पौधा भेंट कर वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्टेट मीडिया सेंटर की विशेषताओं और पत्रकार कल्याण पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। प्रत्येक जिले के पत्रकारों से मिले मुख्यमंत्री। स्टेट मीडिया सेंटर के भूमिपूजन के औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश के जिलों से पधारे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों, टी.वी. कैमरा पर्सन और प्रेस छायाकारों से भेंट कर संवाद किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान पत्रकारों के साथ भोजन में शामिल हुए। कैसा होगा स्टेट मीडिया सेंटर का स्वरूप। भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर का निर्माण 28 करोड़ रुपए की लागत से होगा। यह सर्व सुविधा युक्त मीडिया सेंटर होगा। इस सेंटर में निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश भवन विकास निगम है। अगले दो वर्ष में निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य है। कुल 66 हजार 981 वर्गफीट में तीन मंजिल के भवन में लोअर ग्राउण्ड फ्लोर पर वाहन पार्किंग, ड्रायवर्स रूम, मेंटेनेंस रूम, बैंक, शॉप्स और डिस्पेंसरी निर्माण होगा। ग्राउण्ड फ्लोरपर एक्जीबिशन हॉल, आर्ट गैलरी, मिनी ऑडिटोरियम, प्रेस कॉन्फ्रेंस कक्ष, प्रशासनिक कक्ष, रिसेप्शन कक्ष, कॉरीडोर, बैंक्वेट हॉल, बैंडमिंटन कोर्ट, रेस्टारेंट, टेरिस गार्डन होंगे। प्रथम मंजिल पर लायब्रेरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल, मल्टी मीडिया रूम, लाउन्ज, जिम्नेशियम और इन्डोर गेम हॉल होगा। दूसरे मंजिल पर ओपन टेरिस, वर्किंग स्पेस, केबिन मिनी मीटिंग रूम, क्यूबिकल वर्क स्टेशन होंगे। तीसरी मंजिल पर पत्रकारों के लिए वर्क स्पेस, न्यूज और मीडिया के ऑफिस स्पेस रहेगा। जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने की चल रही है कार्यवाही – जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास में प्रदेश भर से पत्रकार आए हैं। पत्रकार लोकतंत्र को वरदान बनाने का कार्य करते हैं। उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश को बीमारू प्रदेश होने की पहचान को समाप्त कर तेजी से विकास कर रहे प्रदेश की पहचान दी है। अब हम नहीं जमाना कहता है कि मध्यप्रदेश विकसित प्रदेश में शामिल हो रहा है। उन्होंने समय-समय पर सभी वर्गों के हित में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकारों के लिए भी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जिससे अनेक परिवारों को राहत मिली। गत 7 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में स्टेट मीडिया सेंटर प्रारंभ करने के साथ पत्रकारों को जिला स्तर पर भूखंड प्रदान करने की घोषणा की थी। जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने के लिए आवश्यक कार्यवाही भी प्रारंभ हो गई है। … Read more

पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्धकर्म की महिमा।

हमारे हिन्दू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष की महिमा विशेष मानी जाती है, और इसे पितरों की पूजा और श्राद्ध का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। हिदू धर्म के अनुसार माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन 16 दिनों के पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष में पितृ देवता अर्थात पंचतत्व में विलीन हो चुके परिजनों की मृतात्माओं को भोजन और जल अर्पित किया जाता है, जिसे तर्पण और श्राध्द कर्म कहा गया है। मान्यता यह है कि पितृपक्ष के 16 दिनों में मृत्यु तिथि अनुसार किये गए तर्पण एवं श्राद्धकर्म से पितृदेवताओं को भोजन और जल प्राप्त होता है। पितृदेवताओं के लिए मनाये जाने वाले 16 दिवसीय पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष का वर्णन हमारे वेद-पुराणों ओर धर्मग्रंथों में भी मिलता है। हिन्दुओं के प्रमुख धर्मग्रंथ श्रीराम चरित मानस से प्राप्त वर्णन के अनुसार स्वयं भगवान श्री राम चन्द्र जी ने भी अपने पिता महाराज दशरथ जी की मृत्यु के बाद उचित समय पर पितृदेवताओं के लिए श्राद्धकर्म एवं तर्पण किया था। इसके साथ ही गरुण पुराण और महाभारत आदि में भी तर्पण और श्राद्धपक्ष का वर्णन मिलता है इसकी महिमा कुछ मुख्य तत्वों पर आधारित होती है। जिसमें से कुछ विशेष कारणों से आपको अवगत कराते हैं। इन कारणों से, पितृपक्ष को हिन्दू समुदाय में एक महत्वपूर्ण और समर्पित त्योहार माना जाता है, जिसके कारण प्रत्येक हिन्दू परिवार में इन 16 दिनों को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष को धर्म, और पितरों के स्मरण में बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और सभी को अपने पितृदेवताओं की आत्मतृप्ति के लिए पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्धकर्म अवश्य करना चाहिए। पितरों की आत्मा की शांति पितृपक्ष के दौरान, परिवार के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि श्राद्ध के द्वारा पितरों की आत्माओं को शांति मिलती है और वे स्वर्ग में आनंद से रहते हैं। पितृऋण हिन्दू धर्म में, पुत्र या पुत्री का धर्म है कि वे अपने पितरों के ऋण को चुकाएं। पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध करके, यह ऋण चुकाया जाता है। परिवार के महत्व पितृपक्ष एक परिवारी त्योहार होता है जिसमें परिवार के सभी सदस्य एक साथ आते हैं और अपने पितरों के स्मरण में एकत्र होते हैं। इसके माध्यम से परिवार के बंधन मजबूत होते हैं। धार्मिक महत्व पितृपक्ष का पालन करने से व्यक्ति अपने धर्म के मान्यता और तात्पर्य को दिखाता है। यह धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है और आत्मा के मोक्ष की दिशा में मदद करता है।

33 सांसदों और 74 विधायकों के ख़िलाफ़ नफ़रती भाषण के मामले: एडीआर

सोर्स – न्यूज़ क्लिक नई दिल्ली: एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने सभी मौजूदा सांसदों और विधायकों के अलावा पिछले पांच वर्षों में देश में हुए चुनावों में असफल उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया है। विश्लेषण से पता चलता है कि कई मौजूदा सांसदों और विधायकों ने अपने ख़िलाफ़ ‘‘नफरती भाषण’’ से संबंधित मामलों की घोषणा की है। यह विश्लेषण सांसदों और विधायकों द्वारा पिछला चुनाव लड़ने से पहले दिए गए हलफनामों पर आधारित है। विश्लेषण के अनुसार, 33 सांसदों ने अपने ख़िलाफ़ नफरती भाषण से संबंधित मामलों की घोषणा की है, जिनमें से सात उत्तर प्रदेश से, चार तमिलनाडु से, तीन-तीन बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना से जबकि दो-दो असम, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से तथा एक-एक झारखंड, मध्य प्रदेश, केरल, ओडिशा और पंजाब से हैं।

लोकतंत्र का खात्मा, पत्रकारिता को खत्म करने से ही गुज़रता हैं। – जिग्नेश मेवानी

लोकतंत्र का खात्मा, पत्रकारिता को खत्म करने से ही गुज़रता हैं। फंडिंग का मामला यदि सही भी मान लिया जाए, तो उसमें आतंकवादी की धाराएं कैसे लगाई जा सकती हैं? जिग्नेश मेवानी जिग्नेश मेवानी ने एक्स पर ट्वीट करते हुए एक विडिओ पोस्ट के हवाले से

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