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हरिहरन-अर्जुन ने पार किया पहला पड़ाव, आकर्षी ने भी मुख्य ड्रॉ में जगह बनाकर बढ़ाया भारत का मान

ओरलियंस हरिहरन अम्साकरुनन और एम आर अर्जुन की भारतीय पुरुष युगल जोड़ी ने ओरलियंस मास्टर्स सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट में प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया, जबकि आकर्षी कश्यप ने क्वालीफाइंग दौर में दो जीत दर्ज कर महिला एकल के मुख्य ड्रॉ में जगह बनाई। हरिहरन और अर्जुन के खिलाफ चेक गणराज्य के जिरी क्राल और ओन्ड्रेज क्राल की जोड़ी पहले गेम में 10-21 से हारने के बाद मुकाबले से हट गई। पिछले साल अल ऐन मास्टर्स सुपर 100, तुर्किये इंटरनेशनल चैलेंज और तेलंगाना इंडिया इंटरनेशनल चैलेंज खिताब जीतने वाली यह भारतीय जोड़ी अब स्कॉटलैंड के अलेक्जेंडर डन और एडम प्रिंगल की जोड़ी से भिड़ेगी। इससे पहले विश्व रैंकिंग में 63वें स्थान पर काबिज आकर्षी ने पहले मुकाबले में हमवतन श्रीयांशी वलीशेट्टी को 21-19, 17-21, 21-13 से हराया और फिर अगले मैच में ताइपे की ली वाई एच को 21-17, 21-19 से मात दी। अब उनका मुकाबला सिंगापुर की येओ जिया मिन से होगा। पुरुष एकल के क्वालीफाइंग राउंड में एस सुब्रमणियन को मलेशिया के ली जी जिया से 12-21, 18-21 से हार का सामना करना पड़ा। ली ज़ी जिया पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता हैं और 2025 सत्र में चोटों से जूझने के बाद वापसी का प्रयास कर रहे हैं।   महिला युगल में, भारतीय जोड़ी अश्विनी भट के और शिखा गौतम को रुई हिरोकामी और सायका होबारा की जापान की जोड़ी के खिलाफ वॉकओवर मिला।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रायपुर की नालंदा लाइब्रेरी के मॉडल को सराहा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रायपुर प्रवास के दौरान नालंदा परिसर लाइब्रेरी का अवलोकन किया और सराहना की। उन्होंने इस मॉडल से प्रभावित होकर मध्यप्रदेश के रीवा में भी इसी तर्ज पर लाइब्रेरी स्थापित करने की बात कही। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने लाइब्रेरी के फर्स्ट फ्लोर, सेकंड फ्लोर और टैरेस का अवलोकन करते हुए पुस्तक वितरण प्रणाली और अध्ययन व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कम शुल्क में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि नालंदा परिसर लाइब्रेरी के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं युवाओं को सही दिशा प्रदान करती हैं और उनकी ऊर्जा का समुचित उपयोग सुनिश्चित करती हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि नालंदा लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में युवा अध्ययन कर रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हो रहे हैं। ऐसे युवा देश और प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नालंदा परिसर लाइब्रेरी की स्थापना की गई है, जहां 24×7 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस लाइब्रेरी का निर्माण डीएमएफ फंड एवं अन्य सहयोग से किया गया है तथा वर्तमान में इसका संचालन शुल्क और दानदाताओं के सहयोग से किया जा रहा है। राज्य में राजधानी सहित कुल 42 ऐसी लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि लाइब्रेरी के संचालन के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसके अंतर्गत सभी लाइब्रेरियों को एकीकृत किया गया है, जिससे संचालन में सुविधा हो रही है। उन्होंने बताया कि इस लाइब्रेरी से हर वर्ष यूपीएससी और सीजीपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन हो रहा है। इस अवसर पर स्थानीय अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

प्रकृति और पर्यटन का संगम, धमनी गांव में ईको-टूरिज्म को मिल रही रफ्तार

रायपुर शुरू हुई नौकाविहार सुविधा प्रकृति के करीब, पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना और स्थानीय संस्कृति व वन्यजीवों का सम्मान करते हुए की जाने वाली यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव का संरक्षण, शिक्षा और स्थानीय समुदायों को लाभ पहुँचाना ही ईको-पर्यटन है। बलौदाबाजार वनमण्डल के अंतर्गत महानदी के तट पर स्थित ग्राम धमनी अब तेजी से ईको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के सहयोग से यहां ईको-विलेज के रूप में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पर्यटकों के लिए नौकाविहार (बोटिंग) सुविधा शुरू की गई है। अब यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण के बीच नदी में नौकायन का आनंद ले सकेंगे। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। परियोजना के तहत गांव के युवाओं और महिला स्व- सहायता समूहों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों की सुविधा के लिए ठहरने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है, ताकि लोग प्रकृति के करीब रहकर शांत वातावरण का अनुभव कर सकें। वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि यह पहल जनसहभागिता से संचालित हो रही है, जो वन संरक्षण और ग्रामीण विकास का अच्छा उदाहरण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी- कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  वन विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में धमनी को प्रदेश के प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों में शामिल किया जाए।

दिल्ली जा रहे राज्यपाल मंगूभाई पटेल की फ्लाइट में आई दिक्कत, भोपाल में रोकी गई उड़ान

भोपाल एयर इंडिया की भोपाल से दिल्ली जा रही उड़ान में मंगलवार रात को अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इस कारण उड़ान को रोक देना पड़ा। इस उड़ान से राज्यपाल मंगूभाई पटेल भी दिल्ली जा रहे थे। खराबी के कारण उन्हें विमान से वापस उतरना पड़ा। जानकारी के अनुसार एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2760 रात्रि करीब आठ बजे दिल्ली के लिए टेकऑफ हो रही थी। टेकऑफ से ठीक पहले आई खराबी: सुरक्षा की दृष्टि से रोका विमान राज्यपाल सहित सभी यात्री विमान में सवार हो गए थे। विमान स्टार्ट करते समय तकनीकी खराबी आ गई। चालक दल ने सुरक्षा की दृष्टि से विमान को टेकऑफ नहीं होने दिया। इसी बीच राज्यपाल मंगूभाई पटेल को विमान में खराबी होने की सूचना दी गई। बाद में राज्यपाल विमान से उतरे। उन्हें एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज में इंतजार करने को कहा गया।  

जन-जन तक पहुंचेगी महान सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि है उज्जैन ने सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति की ज्योति प्रज्ज्वलित की है। उज्जैन में विक्रमोत्सव का सांस्कृतिक महापर्व चल रहा है।  महान सम्राट विक्रमादित्य ने ऐसी परंपरा स्थापित की जो आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। विक्रमोत्सव की ख्याति तेजी से बढ़ रही है। उज्जैनी काल गणना का केंद्र रही है। हमारे सभी त्योहार मंगल तिथियों पर आते हैं जो विक्रम संवत पर आधारित हैं। इसी क्रम में सृष्टि आरंभ दिवस, वर्ष प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 के अवसर पर 19 मार्च 2026 को संपूर्ण प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन के शिखर पर ब्रह्मध्वज स्थापित होगा और जन -जन तक महान सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा को पहुंचाने के लिए सभी जिलों में सम्राट विक्रमादित्य नाट्य की प्रस्तुति होगी। इस साथ ही आमजन को नववर्ष के महत्व से अवगत कराने के लिए “भारत का नव वर्ष विक्रम संवत” पुस्तिका का वितरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रवीन्द्र भवन भोपाल में मुख्य कार्यक्रम में सम्मलित होंगे। “सम्राट विक्रमादित्य” नाट्य की होगी प्रस्तुति विक्रम उत्सव–2026 के अंतर्गत 19 मार्च 2026 को प्रातः 10 बजे सूर्य उपासना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर “सम्राट विक्रमादित्य” विषय पर आधारित नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा।संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन के अंतर्गत मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल द्वारा इस नाट्य प्रस्तुति के लिए नाट्य कला दलों को प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में भेजा जा रहा है, जो स्थानीय स्तर पर “सम्राट विक्रमादित्य” नाट्य का मंचन करेंगे। गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर में सम्मिलित होंगे। उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा मंदसौर और  राजेन्द्र शुक्ल रीवा जिले के कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। विभिन्न कैबिनेट मंत्रियों को भी अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें  कुंवर विजय शाह (खण्डवा),  कैलाश विजयवर्गीय (धार),  प्रहलाद सिंह पटेल (नरसिंहपुर),  राकेश सिंह (जबलपुर),  करण सिंह वर्मा (सीहोर),  राव उदय प्रताप सिंह (नर्मदापुरम), मती संपतिया उइके (मंडला),  तुलसीराम सिलावट (इन्दौर),  एदल सिंह कंषाना (मुरैना), सु निर्मला भूरिया (झाबुआ),  गोविंद सिंह राजपूत (सागर),  विश्वास सारंग (हरदा),  नारायण सिंह कुशवाह (निवाड़ी),  नागर सिंह चौहान (आलीराजपुर),  प्रद्युम्न सिंह तोमर (शिवपुरी),  राकेश शुक्ला (भिण्ड),  चैतन्य काश्यप (रतलाम) और  इंदर सिंह परमार (शाजापुर) शामिल हैं। राज्य मंत्रियों की श्रेणी में मती कृष्णा गौर (विदिशा),  धर्मेन्द्र लोधी (कटनी),  दिलीप जायसवाल (अनूपपुर),  गौतम टेटवाल (उज्जैन),  लखन पटेल (दमोह),  नारायण सिंह पंवार (राजगढ़),  नरेन्द्र शिवाजी पटेल (रायसेन), मती प्रतिमा बागरी (सतना),  दिलीप अहिरवार (छतरपुर) और मती राधा सिंह (सिंगरौली) अपने आवंटित जिलों में मौजूद रहेंगे। केन्द्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक टीकमगढ़ में और केन्द्रीय राज्य मंत्री  दुर्गादास उइके बैतूल में उपस्थित रहेंगे। सांसदों में मती हिमाद्री सिंह (शहडोल), मती संध्या राय (दतिया), मती भारती पारधी (बालाघाट),  गजेन्द्र पटेल (खरगौन), डॉ. राजेश मिश्रा (सीधी),  बंटी विवेक साहू (छिंदवाड़ा),  सुधीर गुप्ता (नीमच), डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी (बड़वानी),  वी.डी. शर्मा (पन्ना),  फग्गन सिंह कुलस्ते (डिण्डौरी),  गणेश सिंह (मैहर),  महेन्द्र सिंह सोलंकी (देवास),  ज्ञानेश्वर पाटिल (बुरहानपुर),  शिवमंगल सिंह तोमर (श्योपुर) और मती माया सिंह नारोलिया (पांढुर्णा) उत्सव में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त विधायकगण  गिरीश गौतम (मऊगंज),  दिनेश राय मुनमुन (सिवनी), सु मीना सिंह मांडवे (उमरिया),  पन्नालाल शाक्य (गुना),  बृजेन्द्र प्रताप सिंह (अशोक नगर) और  माधव सिंह (आगर मालवा) भी अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्व करेंगे। विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विक्रम उत्सव–2026 का शुभारंभ 15 फरवरी से हुआ है जो 19 मार्च तक चलेगा। इस उत्सव उज्जैन नगरी में निरंतर विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।विक्रम उत्सव के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा, भारतीय संस्कृति और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला, वैचारिक संगोष्ठियों तथा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारतीय परंपरा और कला की विविधता से परिचित कराया जा रहा है। उत्सव में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और पर्यटकों की सहभागिता देखने को मिल रही है, जिससे उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और अधिक समृद्ध रूप में उभरकर सामने आ रही है। विक्रमोत्सव 2025 को मिल चुके हैं कई सम्मान विक्रमोत्सव 2025 को “ईमैक्सम ग्लोबल अवार्ड द्वारा लांगस्टैडिंग आईपी ऑफ द इयर” से सम्मानित किया गया था। इसके साथ ही एशिया के प्रतिष्ठित WOW Awards में गोल्ड अवॉर्ड मिल चुका है। आने वाले समय में भी विक्रमोत्सव अपनी उत्सवधर्मी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया में स्थापित करेगा।  

2 करोड़ के नुकसान पर उठे सवाल, क्या BCCI करेगा Jasprit Bumrah की भरपाई?

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के एक फैसले की वजह से भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को दो करोड़ रुपये का फटका लगा है। ये फैसला फरवरी में बीसीसीआई ने लिया था। ये फैसला है सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा हुआ, क्योंकि बीसीसीआई ने 2025-26 के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान किया था तो उसमें जसप्रीत बुमराह का डिमोशन हो गया था। जसप्रीत बुमराह पिछली बार ए प्लस कैटेगरी का हिस्सा थे, लेकिन नए कॉन्ट्रैक्ट में उन्हें ए कैटेगरी में डाल दिया गया। इसके पीछे की वजह ये थी कि ए प्लस कैटेगरी को ही बोर्ड ने खत्म कर दिया था। पिछली बार के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में चार खिलाड़ी ए प्लस कैटेगरी में थे। इनमें विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह का नाम शामिल था। विराट, रोहित और जडेजा का डिमोशन तो जायज है, क्योंकि विराट और रोहित एक ही फॉर्मेट खेल रहे हैं, जबकि जडेजा दो फॉर्मेट के प्लेयर हैं, लेकिन जसप्रीत बुमराह तो तीनों फॉर्मेट में एक्टिव हैं और लगातार खेल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि इस खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी हुई है और दो करोड़ का फटका भी उन्हें लगा है, क्योंकि ए प्लस कैटेगरी में सालाना करार की राशि 7 करोड़ थी, जबकि ए कैटेगरी में 5 करोड़ है। इस तरह 2 करोड़ का नुकसान बुमराह का हुआ है, लेकिन बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया है कि उन्हें किसी न किसी तरह उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी। TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI अब ये पता लगाने की कोशिश में है कि बुमराह को कैसे मुआवजा दिया जा सकता है। BCCI के एक सोर्स ने कहा, “बोर्ड यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि बुमराह को कैसे मुआवजा दिया जा सकता है। यह समझा जा सकता है कि उनकी फीस 7 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये करना गलत होगा। कुछ और खिलाड़ी भी हैं, जो अच्छा परफॉर्म करने के बावजूद एक ग्रेड से नीचे चले गए हैं। कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यूएशन में बदलाव हो सकता है।”  

ICC Rankings में बड़ा उलटफेर: Jasprit Bumrah टॉप-5 में, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों की चांदी

नई दिल्ली भारत ने 8 मार्च को टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद से कोई टी20I मैच नहीं खेला है, और जुलाई तक इस फॉर्मेट में कोई मैच नहीं है। लेकिन आईसीसी टी20 रैंकिंग में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को फायदा मिला है और वो बिना कोई मैच खेले टॉप-5 में पहुंच गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड ने वर्ल्ड कप के बाद कुछ टी20 मैच खेले, जिसमें दक्षिण अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश ने रेटिंग प्वाइंट्स गंवाए और छठे स्थान पर आ गए, जिससे बुमराह को फायदा हुआ और वो आईसीसी टी20आई बॉलर्स रैंकिंग में 1 स्थान के फायदे के साथ पांचवें स्थान पर 702 रेटिंग अंक के साथ पहुंच गए। ICC Rankings में मेहदी हसन मिराज का जलवा बांग्लादेश के कप्तान मेहदी हसन मिराज ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया था, जिसका उन्हें अब इनाम मिल गया है। बांग्लादेश ने ये सीरीज 2-1 से अपने नाम की, जिसमें मिराज ने 3 मैचों में 5 विकेट चटकाए। इस प्रदर्शन की बदौलत मिराज आईसीसी मेंस वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में 9 स्थान के फायदे के साथ 7वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं, वनडे ऑलराउंडर रैंकिंग में वह दो स्थान के सुधार के साथ अब दुनिया के दूसरे नंबर के ऑलराउंडर बन गए हैं।केवल मिराज ही नहीं, तंजीद हसन (31 पायदान ऊपर), लिटन दास, तस्कीन अहमद और मुस्तफिजुर रहमान की रैंकिंग में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। सलमान अली अगा को भी फायदा पाकिस्तान के सलमान अली आगा आईसीसी मेंस वनडे बैटर्स रैंकिंग में 9वें और ऑलराउंडर की रैंकिंग में 10वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि कप्तान शाहीन अफरीदी ऑलराउंडर रैंकिंग में 25वें नंबर पर आ गए हैं। कीवी कप्तान सेंटनर और अभिषेक शर्मा का दबदबा टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सेंटनर ने अपनी बेहतरीन फॉर्म जारी रखी है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी 5 मैचों की टी20 सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में शानदार खेल दिखाने का उन्हें बड़ा फायदा मिला है। सेंटनर टी20 गेंदबाजों की रैंकिंग में 11 पायदान चढ़कर 13वें स्थान पर आ गए हैं। ऑलराउंडर की लिस्ट में भी वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग के साथ 7वें स्थान पर पहुंच गए हैं। अभिषेक शर्मा नंबर-1 भारतीय फैंस के लिए गर्व की बात ये है कि टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारत के अभिषेक शर्मा अभी भी शीर्ष पर बने हुए हैं। न्यूजीलैंड के लॉकी फर्ग्यूसन और डेवोन कॉनवे की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के जॉर्ज लिंडे ऑलराउंडर रैंकिंग में 23वें स्थान पर पहुंच गए हैं और ओटनील बार्टमैन ने गेंदबाजों की लिस्ट में 23 पायदान की लंबी छलांग लगाई है।  

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित

रायपुर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए।  मुख्यमंत्री  साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए।  इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की। बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया। बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक  पुन्नूलाल मोहले,  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा,  मुख्य सचिव  विकासशील, पुलिस महानिदेशक  अरूण देव गौतम,  अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव  बसव राजू  सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

सीएम योगी के विजन से बदली गांवों की तस्वीर, आजीविका मिशन से आत्मनिर्भर बन रहा प्रदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बनता जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन से गांवों की तस्वीर बदल रही है। आज नवदुर्गा-नवशक्ति की मिसाल बनकर गांव की बेटियां गांव की अर्थव्यवस्था की ताकत बन रही हैं। “नारी तू नारायणी” की भावना को साकार करती बलिया जनपद के बहुआरा गांव की दुर्गेश तिवारी आज उस बदलाव की प्रतीक बन गई हैं, जहां गांव की बेटी अब परिवार ही नहीं, विकसित भारत विकसित उत्तर प्रदेश की रीढ़ बन रही है। मात्र दो वर्षों में दूध व्यवसाय से 34.61 लाख रुपये की आय अर्जित कर दुर्गेश ने ‘काशी की लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए हो रहे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की जीवंत मिसाल भी है। संघर्ष की जमीन से सफलता की उड़ान बलिया के बहुआरा गांव की रहने वाली दुर्गेश तिवारी एक साधारण परिवार से हैं। शादी के बाद उनका जीवन पति, दो बेटियों और सास के साथ सीमित दायरे में था। परिवार की आय का मुख्य स्रोत खेती और 3-4 पशु थे, लेकिन दूध बेचने पर न तो उचित कीमत मिलती थी और न ही समय पर भुगतान। 20–25 रुपये प्रति लीटर के औने-पौने दाम और भुगतान की अनिश्चितता ने उनके सपनों को जैसे रोक दिया था। दुर्गेश बताती हैं “उस समय घर का खर्च और बेटियों की पढ़ाई की चिंता में नींद उड़ गई थी। काशी डेयरी से बदली किस्मत इसी दौरान गांव में काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, वाराणसी की जानकारी मिली। यहां गुणवत्ता आधारित उचित मूल्य और 365 दिन सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था ने दुर्गेश के जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने सदस्यता लेकर दूध आपूर्ति शुरू की। जहां पहले उनका दूध औने-पौने दाम पर बिकता था, वहीं अब उन्हें सही कीमत मिलने लगी। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने पशुपालन का दायरा बढ़ाकर 20 से अधिक पशु तक कर लिया। ‘लखपति दीदी’ बनने तक का सफर लगातार मेहनत और सही प्लेटफॉर्म मिलने से दुर्गेश ने दो वर्षों में 34.61 लाख रुपये की आय अर्जित की। इसी उपलब्धि ने उन्हें ‘काशी की लखपति दीदी’ का सम्मान दिलाया। यह आय केवल आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी बनी। दुर्गेश ने अपनी बड़ी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक की और छोटी बेटी को पुलिस अधिकारी बनाना चाह रही हैं। गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा आज दुर्गेश तिवारी पंचदेवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में गांव की अन्य महिलाएं भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनका अगला लक्ष्य आधुनिक डेयरी फार्म स्थापित करना और गोबर से जैविक खाद बनाकर अतिरिक्त आय के स्रोत तैयार करना है। योगी सरकार के विजन से बदलता ग्रामीण परिदृश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में ठोस काम हुआ है। स्वयं सहायता समूहों और डेयरी जैसे रोजगार से महिलाएं अब गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख शक्ति बन रही हैं।

अब ऐसे बनेगा PAN Card! 1 अप्रैल से नियमों में बड़ा बदलाव, जानें क्या करना होगा जरूरी

नई दिल्ली अगर आप नया PAN Card बनवाने की सोच रहे हैं या आने वाले समय में आपको पैन कार्ड बनवाना है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार ने PAN कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। नए नियम के मुताबिक, अब PAN Card के लिए अप्लाई करते समय सिर्फ Aadhaar का ही इस्तेमाल किया जाएगा। यानी अब अलग-अलग पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ देने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आवेदन प्रक्रिया आसान, तेज और ज्यादा सुरक्षित बनेगी। 31 मार्च 2026 तक पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन उसके बाद पूरा Aadhaar आधारित हो जाएगी। 1 अप्रैल से बदल जाएगा PAN अप्लाई करने का तरीका सरकार ने PAN Card अप्लाई करने के प्रोसेस को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से PAN के लिए आवेदन करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब तक जहां लोगों को अलग-अलग डॉक्युमेंट्स जैसे पहचान पत्र, एड्रेस प्रूफ और जन्मतिथि प्रमाण देना पड़ता था, वहीं अब यह प्रोसेस काफी आसान होने जा रहा है। इस वजह से किया जा रहा यह बड़ा बदलाव सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद PAN सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और सुरक्षित बनाना है। Aadhaar के जरिए वेरिफिकेशन होने से फर्जी PAN कार्ड बनने की संभावना कम होगी और एक ही व्यक्ति के नाम पर कई PAN जारी होने की समस्या भी खत्म होगी। इसके अलावा, Aadhaar आधारित सिस्टम से अप्लाई करने का प्रोसेस तेज होगा और कम समय में PAN जारी किया जा सकेगा। क्या इससे आम लोगों पर असर पड़ेगा? इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर नए PAN आवेदकों पर पड़ेगा। अब उन्हें अलग-अलग डॉक्युमेंट्स जुटाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी। हालांकि जिन लोगों के पास Aadhaar नहीं है, उनके लिए यह बदलाव थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। ऐसे लोगों को पहले Aadhaar बनवाना होगा, तभी वे PAN के लिए आवेदन कर पाएंगे।  

प्रधानमंत्री के संसद भवन स्थित कार्यालय में की शिष्टाचार भेंट

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी से राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री के संसद भवन के कार्यालय में बुधवार को शिष्टाचार भेंट की। उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री  मोदी को उन्होंने स्मृति स्वरूप लंका से लाई हुई भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट की।   प्रधानमंत्री  मोदी को राज्यपाल  पटेल ने भारतीय प्रतिनिधि मण्डल के साथ लंका से पवित्र बौद्ध अवशेषों को भारत वापस लाने की अपनी यात्रा के संबंध में जानकारी दी। प्रधानमंत्री को यात्रा के विवरण पर आधारित पुस्तक “बुद्ध धरोहर की सांस्कृतिक यात्रा भारत से लंका” भेंट की। प्रधानमंत्री  मोदी को उन्होंने राज्य की प्रगति से अवगत कराया तथा विकास के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।  

किसानों के लिए डबल खुशखबरी! PM Kisan के बाद कपास पर ₹1718 करोड़ MSP फंडिंग को मंजूरी

नई दिल्ली PM Kisan Yojana की 22वीं किस्त के एक सप्ताह बाद मोदी सरकार ने किसानों को एक बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कपास के किसानों के लिए कपास सीजन 2023-24 के लिए 1718.56 करोड़ रुपये की MSP फंडिंग को मंजूरी दी। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह मंजूरी दी गई। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को इस मंजूरी के तहत 1718.56 करोड़ रुपये की MSP के लिए फंडिंग दी जाएगी। यह फंडिंग कपास वर्ष 2023-24 के लिए है। इस फंडिंग का लक्ष्य कपास के किसानों को सीधे तौर पर राहत देना है। एमएसपी का संचालन कपास के किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए विशेष तौर पर उस अवधि में किया जाता है जब मार्केट में कपास की कीमतें मिनिट सपोर्ट प्राइस से कम होती हैं। इस उपाय कपास की कीमतों को स्थिर करने, संकटपूर्ण बिक्री को रोकने और किसानों को लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कृषि बाजारों में समावेशिता को बढ़ाकर, MSP परिचालन कपास उगाने वाले समुदायों की आर्थिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है कपास कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक बनी हुई है, जो लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है और प्रसंस्करण, व्यापार तथा वस्त्र उद्योग सहित इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में लगे 400-500 लाख लोगों को सहारा देती है। 2023-24 के कपास सीजन के दौरान, इसकी खेती का रकबा लगभग 114.47 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान था, जबकि उत्पादन 325.22 लाख गांठ (बेल्स) आंका गया, जो वैश्विक कपास उत्पादन का लगभग 25% है। भारत सरकार, कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर, बीज कपास (कपास) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करती है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया नोडल एजेंसी के रूप में नामित सरकार ने कपास के क्षेत्र में MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से जुड़े कार्यों को पूरा करने के लिए ‘कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (CCI) को केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया है। जब भी बाज़ार में कपास की कीमतें MSP के स्तर से नीचे गिर जाती हैं, तो CCI किसानों से ‘फेयर एवरेज क्वालिटी’ (FAQ) वाले सभी कपास की खरीद बिना किसी मात्रात्मक सीमा के करता है; इस प्रकार, यह किसानों को एक सुनिश्चित सुरक्षा कवच प्रदान करता है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पेशवाई टोपी पेश कर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मराठी भाषियों के समूहों ने भेंट की गुड़ी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र मराठी समाज द्वारा मुख्यमंत्री निवास में नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर्व के आरंभ के प्रतीक स्वरूप आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस अवसर पर ढोल ताशें के साथ परंपरागत रूप में स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन करते हुए उन्हें पेशवाई टोपी पेश की। इसके साथ ही उन्हें पटका और प्रतीक स्वरूप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली सहित इंदौर, जबलपुर, भोपाल ,सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास, उज्जैन से आए समूहों ने गुड़ी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका का अथर्वनाद का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले सौ -डेढ़ सौ वर्षों से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान भी किया। गुड़ी पड़वा उत्साह और उमंग का पर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने कई आक्रांताओं का सामना किया, लेकिन कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करती है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसीलिए राज्य सरकार ने इस पर्व पर अवकाश घोषणा की है। गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों में सूर्य को नमन करने के साथ गुड़ी पड़वा उत्सव के आयोजनों में सहभागिता करेंगे। सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई ने स्थापित किया गुड़ी पड़वा का महत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल और सक्षम नेतृत्व ने भारतीयों को वैश्विक स्तर पर इस गुण धर्म की पहचान दिलाई है। पहले यूक्रेन और अब खाड़ी देशों में यह स्थिति सबके सामने है। राज्य सरकार देगी सम्राट विक्रमादित्य के नाम से एक करोड़ एक लाख रूपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किये जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम को मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक तथा अथर्वनाद पत्रिका के प्रधान संपादक  संतोष गोड़बोले ने भी संबोधित किया।  

गन्ने से कमाई का नया मॉडल: चेतन वीर सिंह की मेहनत से लाखों की आमदनी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के युवा वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार का लक्ष्य युवाओं को ‘रोजगार मांगने वाला नही, बल्कि ‘रोजगार देने वाला’ बनाना है। योगी सरकार के इसी लक्ष्य के साथ लखीमपुर खीरी के विकासखंड फूलबेहड़ के चेतन वीर सिंह ने गुड़ कोल्हू लगाकर उद्यम की शुरुआत की। चेतन वीर सिंह ने योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को जमीन पर उतारकर 15 लोगों को रोजगार देने का काम किया है। चेतन वीर सिंह ने बताया कि 2022 में गुड़ कोल्हू लगाकर अपने उद्यम की शुरुआत की थी। उनको प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पीएमईजीपी योजना के तहत 10 लाख रुपए के ऋण के लिए अप्लाई किया। सरकारी वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने कोल्हू लगाकर काम शुरू किया। आज वे 15 लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और रोज 200 क्विंटल गन्ने की पिराई करते है। उन्होंने ड्रायर लगाकर गन्ने की खोई को सुखाने का नया तरीका निकाला है, जिससे लेबर के खर्च की पूरी बचत होती है। वे हर रोज 25 से 26 क्विंटल गुड़ बनाते हैं, इनको पूरे उत्तर प्रदेश समेत बंगाल और बिहार तक से ऑर्डर मिलते हैं। चेतन वीर सिंह अपने 6 एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं, इसके अलावा अन्य किसानों से भी गन्ना खरीदते हैं। आज चेतन वीर सिंह लाखों की कमाई कर रहे हैं।  प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी (PMEGP) भारत सरकार की एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की स्थापना के लिए ऋण प्रदान करती है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग- अलग सब्सिडी का भी प्रावधान है, जो श्रेणी के आधार पर होता है। विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान करती है, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार और नए उद्यम शुरू करने में सहायता करना है।  इस योजना के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, या सहकारी समितियां आवेदन कर सकती हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा केवीआईसी, केवीआईबी और जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित की जाती है। योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग, कृषि उपकरण, कपड़े, या कागज के उत्पाद बनाने वाली छोटी इकाइयां लगाना, कंप्यूटर सेंटर, गैरेज, बुटीक या छोटी वर्कशॉप खोलना आदि शामिल है।

लाखों नौकरियों का रास्ता साफ! मोदी कैबिनेट ने 33,660 करोड़ की योजना को दी हरी झंडी

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य योजना) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपए की लागत से देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिससे देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी और भारत की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार मिलेगी। यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनआईसीडीपी) के तहत बने इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी मॉडल की सफलता पर आधारित है, जिसे राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से लागू किया जाएगा। ‘भव्य’ योजना में व्यापार करने में आसानी पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा और निवेशकों के लिए अनुकूल सुधार किए जाएंगे। इस योजना के तहत ऐसे इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे जहां उद्योगों को पहले से तैयार जमीन, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी, जिससे कंपनियां जल्दी काम शुरू कर सकेंगी। इन इंडस्ट्रियल पार्क का आकार 100 से 1,000 एकड़ तक होगा। सरकार इनके विकास के लिए प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता देगी। इसमें सड़कों, बिजली-पानी, ड्रेनेज, आईटी सिस्टम, फैक्ट्री शेड, वेयरहाउस और टेस्टिंग लैब जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा, योजना के तहत वर्कर्स के लिए आवास और अन्य सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक समर्थन दिया जाएगा, ताकि बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके। परियोजनाओं का चयन चैलेंज मोड के जरिए किया जाएगा, जिससे केवल बेहतर और निवेश के लिए तैयार प्रस्तावों को ही चुना जाएगा। इन इंडस्ट्रियल पार्क को भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाएगा और इन्हें पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुसार विकसित किया जाएगा ताकि मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिल सके। साथ ही, इन पार्कों में ग्रीन एनर्जी और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा। अंडरग्राउंड यूटिलिटी सिस्टम होने से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी और उद्योगों का काम बिना रुकावट चलता रहेगा। सरकार का मानना है कि ‘भव्य’ योजना से बड़े स्तर पर रोजगार पैदा होंगे, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की नौकरियां शामिल होंगी। यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, जिससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। बयान में आगे कहा गया है कि क्लस्टर-आधारित विकास के जरिए यह योजना उद्योग, सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ लाएगी, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और क्षेत्रीय औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का सीधा लाभ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप्स और ग्लोबल निवेशकों को मिलेगा, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा मजदूरों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, सर्विस सेक्टर और स्थानीय लोगों को भी होगा।  

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