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‘भारत की मदद से बलूच विद्रोही संगठन कर रहा हमले’, बलूचिस्तान में सैनिकों के ढेर होने पर पाक का आरोप

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने इससे उलट ही दावा करते हुए कहा है कि उसके 18 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने घर में लगी आग के लिए भारत पर भड़ास निकाली है। चीन के हस्तक्षेप, CPEC प्रोजेक्ट और ग्वादर बंदरगाह के लिए बड़े पैमाने पर बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां के स्थानीय निवासियों की जिंदगी बदतर है। इसी के विरोध में बलूच विद्रोही संगठन अकसर पाकिस्तानी सेना, पंजाबी मूल के लोगों और यहां तक की चीनी नागरिकों पर भी निशाना साधते रहते हैं। कई बार बलूच विद्रोही संगठनों ने खूनी हमले भी किए हैं। इस बार अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक अटैक किया है। लेकिन पाकिस्तान इन हमलों की वजह तलाशने की बजाय भारत पर ही भड़ास निकाल रहा है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट ISPR ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताने की कोशिश की है। उसने कहा कि ये हमले भारत से मदद पाने वाले फितना-अल-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने किए हैं। ये हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए हैं। इस तरह एक साथ ही कई शहरों पर बलूच विद्रोहियों ने हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान जैसे संगठन की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। पाकिस्तानी एजेंसी ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया है। इसमें अब तक 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 18 नागरिक और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन से गहरी नाराजगी है। यही नहीं यहां पर अकसर पंजाबियों को टारगेट करते हुए भी हमले किए जाते रहे हैं। इसकी वजह पंजाबी वर्चस्व को माना जाता है। इस बीच खबर है कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के सारे रास्तों को भी पाकिस्तान ने बंद कर दिया है। खौफ इतना कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के रास्ते ही बंद डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर उस्मान खालिद ने कहा कि बलूचिस्तान से पंजाब जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन के दौरान बलूच विद्रोही किसी आम नागरिक को टारगेट न कर सकें। अकसर बलूच विद्रोही पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करते रहे हैं। ऐसे में रूट ही बंद करने के पीछे यही एक वजह मानी जा रही है। खालिद ने कहा कि फोर्ट मुनरो हाइवे और मूसा खेल रोड को बंद किया गया है, जो बलूचिस्तान जाते हैं। इसके अलावा जो ट्रैफिक चल रहा था, उसे भी सीमाओं पर ही रोक दिया गया है। ये सारे कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं।

BJP के लिए अहम है डेरा सचखंड, पंजाब दौरे पर जा रहे PM मोदी

जालंधर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी एक फरवरी को बजट को पेश करवाने के बाद शाम को पंजाब दौरे पर जा रहे हैं। पीएम का यह दौरा गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर रविदसिया समाज के मुख्यालय जालंधर के बल्लां स्थित डेरा सचखंड में हो रहा है। विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में राज्य की जाति आधारित राजनीति में रविदासिया समाज की भूमिका को देखते हुए पीएम का इस समाज के मुख्यालय पर यह दौरा और भी ज्यादा खास हो गया है। पीएम मोदी के इस दौरे के पहले जालंधर को दहलाने की भी कोशिश की गई थी। यहां के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। हालांकि बाद में वह सब फर्जी साबित हुए। पीएम का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भाजपा और उसकी पूर्व क्षेत्रीय सहयोगी पार्टी राज्य में दलित समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है। आखिर क्यों अहम है रविदासिया समाज? पंजाब में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा समेत तमाम पार्टियां दलित वोटर्स को लुभाने में लगी हुई है। ऐसे में दोआबा क्षेत्र, जहां पर लगभग 45 फीसदी दलित आबादी रहती है, जो कि पंजाब के औसत 32 फीसदी से कहीं ज्यादा है। इस क्षेत्र में राज्य की 23 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें बल्लां स्थित डेरे की पकड़ इनमें से करीब 19 सीटों पर है। संसद में बजट पेश करवाने के बाद पंजाब के दौरे पर जा रहे पीएम का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। जालंधर पहुंचने के पीएम मोदी यहां पर आदमपुर एयरपोर्ट का नया नामकरण करेंगे। यह एयरपोर्ट कल के बाद श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट आदमपुर के नाम से जाना जाएगा। इस एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग काफी पहले से की जा रही थी। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा हर तरीके से इस समुदाय को खुश करने में लगी हुई है। हाल ही में 26 जनवरी को पद्म पुरस्कार विजेताओं में यहां के डेरा प्रमुख निरंजन दास का नाम भी शामिल था। दलित वोटरों पर भाजपा की नजर भाजपा शुरुआती दौर से ही पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की जूनियर बनकर रही है। किसान आंदोलन के बाद राज्य में भाजपा की स्थिति में थोड़ी और गिरावट आई। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल भी साथ छोड़ गया। अब ऐसे में भाजपा का मुख्य फोकस राज्य के दलित वोटरों पर ही है और यही पार्टी के लिए राज्य में खड़े होने की कुंजी भी है। राज्य में पार्टी की इस योजना का असर होते हुए भी दिख रहा है। आंकड़ों की मानें तो 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर केवल 6.6 फीसदी था, जो कि लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 फीसदी हो गया। हालांकि, इसमें किसान आंदोलन के असर का कम होने जैसे फैक्टर भी शामिल हो सकते हैं। विश्लेषकों की मानें तो रविदासिया समुदाय को साधकर भाजपा यहां पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। हालांकि पंजाब की राजनीति पर करीबी से नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि पंजाब के दलित मतदाता एकजुट होकर वोट नहीं देते हैं। प्रिंट से बात करते हुए। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज की डॉ. कंवलप्रीत कौर ने द प्रिंट से कहा, “रविदासिया और अन्य दलित समुदाय एकमुश्त किसी एक पार्टी को वोट नहीं देते। वे स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधनों के आधार पर रुख बदलते हैं।” उनका कहना है कि समुदाय लंबे समय से अलग पहचान की मांग करता रहा है और बीजेपी इस पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश कर रही है। भाजपा क्या बोली? राजनीति चाहें कुछ भी कहें लेकिन भाजपा नेतृत्व ने इस दौरे को राजनैतिक चश्मे से न देखने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, “यह पंजाब के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री का रविदास जयंती समारोह में शामिल होना सभी समुदायों में एकता का संदेश देता है।” पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बजट वाले दिन प्रधानमंत्री का यह दौरा “आस्था और सम्मान को दी जा रही प्राथमिकता” को दर्शाता है। जाखड़ ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक इस समुदाय को नजरअंदाज किया।

10 दिन तक चलेगा महाभियान, आम बजट को खास बनाने लोगों को खूबियां बताएगी BJP

नई दिल्ली. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जब रविवार को बजट पेश कर रही हैं. तो यूपी में 2017 स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर उसका सीधा प्रसारण हो रहा है। इसके लिए भाजपा के उत्तर प्रदेश मुख्यालय से लेकर पार्टी के 98 संगठनात्मक जिलों और 1918 मंडलों में एलईडी स्क्रीन लगेंगे। पार्टी ने देश के आम बजट को खास बनाने की रणनीति तय की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित प्रदेश सरकार के सभी मंत्री और भाजपा के पदाधिकारी बजट की खूबियां गिनाएंगे। यह मुहिम 10 फरवरी तक चलेगी। अगले 10 दिनों तक भाजपा की सरकार और संगठन केंद्रीय बजट की खासियतें अलग-अलग समूहों के बीच बताते नजर आएंगे। इस काम में केंद्र व प्रदेश के मंत्रियों के अलावा भाजपा और उसके सभी छह मोर्चे जुटेंगे। रविवार को केंद्रीय बजट का सीधा प्रसारण दिखाने के लिए प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, मुख्यालय प्रभारी गोविंद नारायण शुक्ला, बजट जागरूकता अभियान के लिए बनीं टोली के संयोजक सुभाष यदुवंश, डॉ. समीर सिंह सहित अन्य मौजूद रहेंगे। यह एलईडी सभी जिला व मंडल कार्यालयों पर भी लगेंगे। व्यापारी-किसान, महिला व युवाओं पर फोकस पार्टी सोमवार से इसकी खूबियां गिनाने की मुहिम शुरू करेगी। खासतौर से व्यापारियों, किसानों, महिलाओं, युवाओं व श्रमिकों पर फोकस रहेगा। प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव मौर्य व ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी प्रेसवार्ता के जरिए हर वर्ग के लिए बजट में की गई व्यवस्था को बताएंगे। यह सिलसिला प्रदेशभर में तीन दिन चलेगा। इस दौरान प्रदेश के 13 मीडिया सेंटरों पर बजट से लाभ गिनाए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में भाजपा का हर मोर्चा एक-एक कार्यक्रम करेगा। सभी मोर्चों को खुद से जुड़े समूहों से संवाद के छह-छह कार्यक्रम करने हैं। व्यापारियों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, किसान, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों के हर विधानसभा में सम्मेलन होंगे। यह सिलसिला 10 फरवरी तक चलेगा।

भारत के आर्थिक विकास के लिए बताया 6 सूत्रीय फॉर्मूला, वित्त मंत्री सीतारमण पेश कर रहीं आम बजट

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को भारत का आम बजट (Aam Budget 2026) पेश कर रही हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने बजट पर मुहर लगा दी है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। खास बात है कि इसके साथ ही वह 9वीं बार बजट पेश करने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लेंगी, जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है। एक ओर जहां मध्यम वर्गीय को महंगाई से राहत की उम्मीद है। वहीं, व्यापारी वर्ग टैक्स कम होने की आस लगाए है। पिछले चार वर्षों की तरह इस साल का बजट भी कागज रहित रूप में पेश किया जाएगा। खास बात है कि साल 2019 में जब सीतारमण ने पहला बजट पेश किया था, तब वह चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही खाता लेकर पहुंचीं थीं। साल 2017 से बजट एक फरवरी को ही पेश किया जाता है। बजट 2026 स्पीच टाइम सुबह 10.15 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक होगी जिसमें आम बजट को मंजूरी प्रदान की जाएगी। इसके बाद वित्त मंत्री राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बजट पेश किए जाने की जानकारी देंगी। सीतारमण सुबह करीब 11 बजे संसद में बजट पेश करेंगी। लोकसभा में पूरा बजट भाषण पढ़ने के कुछ देर बाद बजट को राज्यसभा के पटल पर रखा जाएगा। संसद का मौजूदा बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ है। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। उसके बाद नौ मार्च से दूसरे चरण की बैठक शुरू होगी। तय कार्यक्रम के अनुसार बजट सत्र दो अप्रैल को समाप्त होगा। बजट 2026 से अपेक्षाएं आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि संभावनाएं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमानों से बेहतर हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 6.4 प्रतिशत जबकि विश्व बैंक एवं एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है। संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा 2025-26 में देश की संभावित वृद्धि दर के अनुमान को तीन साल पहले अनुमानित 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है।

50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

नई दिल्ली. आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था। घरेलू एलपीजी के रेट भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है। बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं। 2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था। 2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के। 2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था। 2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

ट्रक से कार की टक्कर के बाद सड़क पर फैले शव, आगर-मालवा के तीन लोगों की गुजरात में मौत

आगर-मालवा. मध्य प्रदेश में आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में पनाला गांव के रहने वाले तीन लोगों की गुजरात में सड़क हादसे में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक हादसा बोटाद जिले के रानपुर इलाके में हुआ, जहां ट्रक से टकराने की वजह से कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादस में चार लोग गंभीर घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। ईको कार में सवार सभी लोग खेती के काम से रानपुर इलाके के कुंडली गांव जा रहे थे। इसी दौरान देर रात धुंधका जा रहे हाईवे से आगे यह एक तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार में सवार कुछ लोगों के शव निकलकर सड़क पर आ गए थे। तेज आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायलों को कार से निकालकर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सभी को बोटाद के अस्पताल में भर्ती करवायाग या है।

‘पत्नी की व्यक्तिगत इनकम को पति से नहीं जुड़ेगी’, आय से अधिक संपत्ति पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

जबलपुर. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी पत्नी की व्यक्तिगत आय को सरकारी विभाग में पदस्थ पति की आय में जोड़कर असेसमेंट नहीं कर सकती है। कोर्ट से इस आदेश के साथ अभियोजन स्वीकृति के आदेश व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता रीवा निवासी अधिवक्ता मीनाक्षी खरे व उनके पति आलोक खरे की ओर से दायर याचिका में आय से अधिक संपत्ति का गलत असेसमेंट करने व उनके विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता आलोक खरे वर्तमान में आबकारी विभाग में डिप्टी कमिश्नर में पद पर रीवा में पदस्थ है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी पेशे से अधिवक्ता हैं और शादी के पहले से आयकर रिटर्न फाइल कर रही हैं। वर्ष 2018 में लोकायुक्त ने आलोक खरे के घर और कार्यालय में दबिश दी थी। लोकायुक्त ने जांच में चार सितम्बर, 1998 से 15 अक्टूबर, 2019 तक याचिकाकर्ता की संपत्ति और खर्च से जुड़ा डेटा एकत्र किया था। लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास वैध आय स्त्रोत से लगभग 88.20 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त ने उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया था और सरकार की ओर से अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। याचिका में कही गई यह बात याचिका में कहा गया था कि लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास से 10 करोड़ 71 लाख रुपये की संपत्ति मिली थी। जबकि उनकी वैध आय 5 करोड़ 69 लाख रुपये थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि अधिवक्ता होने के कारण मीनाक्षी की अच्छी-खासी आय थी और वह अपने परिवार की आर्थिक मदद करती थी। उन्होने अपनी आय से खेती की जमीन खरीदी और उससे इस अवधि के दौरान 4 करोड़ 81 लाख रुपये की आय हुई थी। दोनों याचिकाकर्ताओं की वैध आय को जोड़कर देखा जाए तो 10 करोड़ 50 लाख रुपये हैं। जो लोकायुक्त द्वारा किए गए असेसमेंट से 21 लाख रुपये अधिक है। जो लगभग आय के वैध स्त्रोत से दो प्रतिशत अधिक है। आय के वैध स्त्रोत से 10 प्रतिशत से अधिक संपत्ति पाए जाने पर अभियोजन की अनुमत्ति प्रदान नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट ने दिया यह फैसला हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अधिवक्ता ने इनकम टैक्स रिटर्न के साथ-साथ खेती से हुई इनकम को ध्यान में रखा जाए, तो मंज़ूरी देने वाली ऑथरिटी को मंज़ूरी नहीं देनी चाहिए थी। प्रकरण को प्रारंभ में ही खत्म कर देना चाहिए था। इनकम के जाने-पहचाने सोर्स का आशय ऐसी इनकम से है जो मध्य प्रदेश सिविल सर्विस रूल्स, 1965 के रूल 19 के अनुसार सही तरीके से बनाई गई हो। कानूनी टैक्स फाइलिंग से साबित हुई इनकम कानून की नजर में जानी-पहचानी और वैध इनकम है। युगलपीठ ने अभियोजन स्वीकृति के विवादित मंज़ूरी आर्डर व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया।

जबलपुर में पुलिस के छापा मारते ही भाग गया दलाल, सेक्स रैकेट के अड्डे पर मिली विदेशी महिला

जबलपुर. जबलपुर माढ़ोताल थाना अंतर्गत ग्रीन सिटी में संचालित देह व्यापार के अड्डे पर शनिवार को पुलिस ने दबिश देते हुए एक उज्बेकिस्तान की महिला सहित एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। वहीं छापे की भनक लगते ही अड्डे का संचालक मौके से फरार हो गया। जिसकी तलाश की जा रही है। माढ़ोताल पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बाबा टोला हनुमानताल निवासी शिवा चौधरी ग्रीन सिटी स्थित एक घर में एक विदेशी महिला को बुलाकर देह व्यापार का संचालन कर रहा है। माढ़ोताल थाना पुलिस ने तत्काल एक विशेष टीम गठित कर बताए गए पते पर दबिश दी गई। छापे के दौरान पुलिस ने मौके से हनुमानताल के बाबा टोला निवासी शिव चौधरी की 25 वर्षीय पत्नी तथा एक विदेशी महिला (उज्बेकिस्तान) को गिरफ्तार किया है। वहीं कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपित शिवा चौधरी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि फरार आरोपित की तलाश में टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भोपाल में मतदाताओं को देने होंगे दस्तावेज, SIR में 2.96 लाख पत्रकों में मिली तार्किक विसंगतियां

भोपाल. जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में दो लाख 96 हजार पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। ऐसे में अब इन मतदाताओं को नाम, पता व उम्र से संबंधित एक दस्तावेज पेश करना होगा। हालांकि इनमें से 79 हजार पत्रकों की विसंगतियां बीएलओ ने अपने स्तर पर ही दूर कर ली हैं, जबकि दो लाख 17 हजार को अब नोटिस जारी किए जाएंगे। इनकी सुनवाई नो मैपिंग मतदाताओं के साथ-साथ 85 हेल्प डेस्क पर की जाएंगी, जिसके लिए 91 अतिरिक्त एईआरओ पदस्थ कर दिए गए हैं। सात विधानसभा का SIR के दौरान सत्यापन किया गया था बता दें कि डिजिटाइज किए गए पत्रकों की तकनीकी रूप से जांच की जा रही है। इस दौरान तर्किक विसंगतियां मिलने के बाद सुनवाई वाले मतदाताओं की संख्या बढ़ गई हैं। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं का एसआइआर के दौरान सत्यापन किया गया था। स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था जिनमें से कुल 16 लाख 87 हजार 33 मतदाताओं के पत्रक डिजिटाइज किए गए थे, जबकि चार लाख 38 हजार 317 मतदाताओं को एएसडीआर (अनुपस्थित, शिफ्टिंग, मृत्यु और दोहरी प्रवृष्टि) श्रेणी में रखते हुए विलोपित किया गया है। जिन मतदाताओं और उनके स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था, ऐसे एक लाख 16 हजार 925 मतदाता नो मैपिंग श्रेणी में रखे गए हैं। इनकी सुनवाई 85 हेल्प डेस्क पर 90 एईआरओ द्वारा की जा रही है। इनमें से अब तक 49 हजार 965 की सुनवाई हो चुकी है। दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए इसी बीच तकनीकी परीक्षण के दौरान दो लाख 96 हजार 317 पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। यानी किसी के नाम, उपनाम, पिता के नाम, माता के नाम आदि में अंतर होना शामिल हैं। इनमें से 79 हजार मतदाताओं के पत्रकों का बीएलओ ने अपने स्तर पर सुधार कर लिया है, जबकि दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी मतदाताओं को सुनवाई के दौरान विसंगतियों को दूर करने संबंधी दस्तावेज पेश करना होगा। 181 एईआरओ 14 फरवरी तक पूरी करेंगे सुनवाई एक लाख 16 हजार 925 नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई के लिए 85 हेल्पडेस्क बनाई गई हैं, जिन पर 90 एईआरओ सुनवाई के लिए नियुक्त किए गए थे। अब दो लाख 17 हजार तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं की सुनवाई भी की जानी है, जिसके लिए अतिरिक्त 91 एईआरओ नियुक्त कर दिए गए हैं। इस तरह कुल 181 एईआरओ नो मैपिंग और विसंगति वाले मतदाताओं की 14 फरवरी तक सुनवाई पूरी करेंगे, जिससे कि अंतिम मतदाता सूची में किसका नाम रखना है और किसका विलोपित करना है, यह तय किया जा सके। ऐसे समझें तार्किक विसंगति उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि तकनीकी परीक्षण के दौरान तार्किक विसंगति वाले कुल दो लाख 96 हजार 317 मतदाताओं के पत्रक चिह्नित किए गए थे। तार्किक विसंगति का मतलब यह है कि किसी मतदाता का नाम मोहनलाल एक साथ लिखा था मतदाता सूची में, लेकिन पत्रक में उसका नाम मोहन और लाल अलग-अलग लिखा गया है। इसलिए अब इस अशुद्धि को दूर करने के लिए मतदाता को एक दस्तावेज सुनवाई के दौरान पेश करना होगा।

इंदौर में समय पर सीपीआर मिलने से बची जान, भाषण दे रही डॉक्टर को आया कॉर्डियक अरेस्ट

इंदौर. ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यूरोलॉजी कांफ्रेंस के दौरान एक गंभीर घटना घटित होने से बच गई। मैंगलोर से आई 40 वर्षीय डॉ. श्रीन भूटिया को भाषण देते समय अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। वे मंच पर बोलते-बोलते बेहोश होकर गिर पड़ीं। उस समय हाल में लगभग 200 विशेषज्ञ डॉक्टर उपस्थित थे। स्थिति को समझते हुए वहां मौजूद डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तुरंत सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में डॉक्टर की सांस और नब्ज में सुधार दिखने लगा। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पास के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण उनकी जान बच सकी। डॉक्टर को राजश्री अपोलो अस्पताल रेफर किया गया, जहां वे फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। कार्डियक अरेस्ट से बचाव के उपाय     नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।     ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखें।     धूमपान और शराब से दूरी बनाएं।     रोजाना व्यायाम और योग करें।     तनाव कम करें व पर्याप्त नींद लें।     आमजन तक भी सीपीआर देने की प्रक्रिया के लिए शिविर लगाए जाना चाहिए।

सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब ‘खतरनाक’ सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक ‘टेस्ट केस’ साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 ‘Felon’: रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया ‘स्टेज 2’ इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और ‘आत्मनिर्भर भारत’ भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल ‘खरीदने’ में नहीं, बल्कि ‘भारत में बनाने’ और ‘पूर्ण तकनीक’ प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो ‘Felon’ भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

सफलता का नया मतलब: इंजीनियर ने बीमारी के चलते Google छोड़ दी जॉब, कहानी सोशल मीडिया पर छाई

 नई दिल्ली जिंदगी में हर इंसान की तलाश क्या होती है. जल्द से जल्द पैसा कमाना, खुद को एक इनसेक्योर जोन से सेक्योर जोन में ले जाना, लेकिन असल जिंदगी की प्राथमिकता क्या है. रेस में सबसे आगे जाना या फिर जिंदगी की बुनियादी जरूरत वो सेहत है,जिसे दरकिनार कर दिया जाता है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली की कहानी भी इन्हीं दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली (Tia Lee) ने 2020 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (Michigan State University) से ग्रेजुएशन किया और तभी तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक चीज चाहिए जितना हो सके उतना पैसा कमाना. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी करियर जर्नी शुरू की, लेकिन तीन साल बाद यही रेस उनकी सेहत पर इतना भारी पड़ी कि आज वह सफलता को पूरी तरह नए नजरिए से देखती हैं. पैसा या सेहत-जिंदगी में क्या है अहमियत 2023 के अंत तक टिया एक साथ तीन भूमिकाएं निभा रही थीं.कैलिफोर्निया में Google की Technical Program Manager, फ्रीलांस वेबसाइट डिजाइनर और अपनी क्लोदिंग लाइन की मालिक. लगातार काम और अलग-अलग शहरों की यात्राओं ने उनकी सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया. उन्होंने CNBC Make It को बताया कि वह लगभग हर दूसरे महीने बीमार पड़ने लगी थीं. कैलिफोर्निया, मिशिगन और टेक्सास के बीच लगातार यात्रा करते-करते उन्हें लगने लगा कि बीमारी सिर्फ ट्रैवल की वजह से होती है. लेकिन कई महीनों तक यूं ही बीमार रहने के बाद डॉक्टर ने इशारा किया कि असली वजह तनाव हो सकता है. इसी बात ने टिया को सोचने पर मजबूर किया कि शायद बहुत सारी जिम्मेदारियां ही उनकी सेहत को खराब कर रही हैं. तभी उन्होंने अपने करियर को रोकने का फैसला किया. भागदौड़ में खो गई थीं… टिया ने जीवन को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए. फ्रीलांस काम कम किया, खर्चों में कटौती की और इतना पैसा बचाया कि वे सालों तक बिना नौकरी के रह सकें. वह मिशिगन में अपने माता-पिता के घर वापस आ गईं. उन्होंने अपनी Tesla कार बेचकर एक सस्ती Chevrolet ले ली ताकि खर्च और कम हो सके. यहां तक कि उन्होंने एक निजी शेफ से यह समझौता किया कि वह उसका वेबसाइट बना दें और इसके बदले शेफ हफ्तेभर का मील प्रेप दे दे.इससे उनका किराना खर्च भी खत्म हो गया. इन बदलावों ने टिया के लिए सफलता की परिभाषा बदल दी. उन्होंने बताया कि पहले उनके लिए कामयाबी का मतलब था पैसा, प्रमोशन और काम में पहचान, लेकिन अब सफलता का मतलब है अपनी सेहत और समय पर पूरा नियंत्रण. Google छोड़ने के बाद उन्होंने जून में नौकरी से इस्तीफा दिया और ब्रूक्लिन, न्यूयॉर्क में शिफ्ट होकर एक धीमी, संतुलित जीवनशैली अपनाई, जिसमें अच्छा खाना और खुद के साथ समय बिताना शामिल है. फिलहाल उनका कॉर्पोरेट दुनिया में वापस लौटने का कोई प्लान नहीं है.

Jeep India की योजना खुली, 2027 में भारत में नए मॉडल और नई रणनीति लागू

मुंबई   लग्जरी एसयूवी निर्माता कंपनी Jeep ने भारतीय बाजार के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है, जिसे कंपनी ने Strategic Plan Jeep 2.0 नाम दिया है. कंपनी ने इस प्लान को ऐसे समय में तैयार किया है, जब बाज़ार के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता की जरूरत है और यह इसे पक्का करता है, जब उसका लोकल पोर्टफोलियो अभी भी सीमित है. यह प्लान भारत को Jeep के एशिया पैसिफिक ऑपरेशंस के केंद्र में रखता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत इस ब्रांड के लिए दोहरी भूमिका निभाता रहेगा, एक घरेलू बाज़ार के तौर पर और एक रीजनल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बेस के तौर पर. कंपनी का कहना है कि भारत में डेवलप और बनाई गई गाड़ियां न सिर्फ लोकल खरीदारों बल्कि एशिया पैसिफिक और उससे बाहर के बाजारों को भी सर्विस देंगी. क्षेत्रीय मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में भारत की भूमिका इस योजना के बारे में बताते हुए, Stellantis India के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश हज़ेला ने कहा कि, “Jeep की 85 साल की विरासत असलियत और एडवेंचर पर बनी है. Strategic Plan Jeep 2.0 बताता है कि हम अपनी प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी को कैसे बेहतर बनाएंगे और हर साल कस्टमर एक्सपीरियंस को कैसे मज़बूत करेंगे, जो ज़्यादा लोकलाइज़ेशन, ग्लोबल प्रोडक्ट अलाइनमेंट, अपनी गाड़ियों की रेंज बढ़ाने और ऐसे प्रोग्राम्स पर आधारित होगा जो असली वैल्यू देते हैं.” उन्होंने आगे कहा कि, “हम अपने मौजूदा कस्टमर्स का ख्याल रखने पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं, यह पक्का करते हुए कि उन्हें वह सपोर्ट, सर्विस और भरोसा मिले जिसकी वे Jeep से उम्मीद करते हैं. भारत में सफलता के लिए मज़बूती और लंबे समय की कमिटमेंट की ज़रूरत है, और हम उसी सोच के साथ निवेश कर रहे हैं, ताकि यह पक्का हो सके कि Jeep गर्व और पसंद का ब्रांड बना रहे.” 2027 से नए मॉडल लाने की योजना कारों की बात करें तो Jeep ने जानकारी दी है कि भारत के लिए नए मॉडल लाने की तैयारी चल रही है, और इसकी फ्यूचर लाइनअप की पहली गाड़ी साल 2027 में आने की उम्मीद है. तब तक, कंपनी शोरूम में कस्टमर्स की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए अपनी मौजूदा रेंज के पीरियोडिक अपडेट और स्पेशल एडिशन बाजार में उतारती रहेगी. इसके साथ ही Jeep की इंडिया स्ट्रेटेजी के लिए एक्सपोर्ट भी ज़रूरी हैं. कंपनीन ने पुणे के पास रंजनगांव फैसिलिटी से साल 2017 में अपना प्रोडक्शन शुरू किया था और Jeep Compass के साथ ग्लोबल मार्केट में सप्लाई शुरू की थी. उसके बाद से कंपनी ने Jeep Meridian और Commander जैसे मॉडल जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे इलाकों में एक्सपोर्ट किए गए हैं. कंपनी ने कहा कि वह अब अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में और एक्सपोर्ट के मौकों का मूल्यांकन कर रही है. स्थानीयकरण में होगी बढ़ोतरी जानकारी के अनुसार, कंपनी का प्लान रंजंगांव प्लांट में लोकलाइज़ेशन को और बढ़ाने का भी है, जिसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 1,60,000 यूनिट्स होने वाली है. लोकल कंटेंट मौजूदा 65-70 प्रतिशत से बढ़कर करीब 90 प्रतिशत होने की उम्मीद है. बता दें कि Jeep भारत में Jeep Club, Jeep Trails और Camp Jeep इवेंट्स के ज़रिए अपनी ओनर कम्युनिटी को बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है, साथ ही अपने कॉन्फिडेंस 7 प्रोग्राम के तहत कस्टमर एश्योरेंस पहल को भी बढ़ा रही है, जिसमें एक्सटेंडेड वारंटी, बायबैक ऑप्शन और सर्विस प्लान शामिल हैं.

अब घर बैठे आसान होगा रजिस्ट्री का काम, संपदा-2.0 पोर्टल और ऐप से पाएं सर्टिफाइड कॉपी

भोपाल   मध्यप्रदेश में पुरानी रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी लेने के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। इसे ऑनलाइन निकलवाया जा सकता है। पंजीयन विभाग ने संपदा-2.0 पोर्टल और मोबाइल ऐप पर यह सुविधा शुरू की है। जिन रजिस्ट्री का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ, उनकी सर्टिफाइड कॉपी के लिए भी इस माध्यम से आवेदन किया जा सकेगा। पंजीयन विभाग उसे डिजिटाइज कर ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। इसके लिए 300 रुपए फीस तय की गई है। मंदसौर पहला जिला जहां के 100 फीसदी डिजिटाइज्ड आइजी (पंजीयन) अमित तोमर के अनुसार वर्ष 2000 तक के दस्तावेज डिजिटाइज किए जा चुके हैं। मंदसौरएमपी का पहला जिला है जहां के 100 फीसदी रजिस्ट्री दस्तावेज डिजिटाइज हो चुके हैं। यहां 1908 तक की रजिस्ट्री डिजिटाइज हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रयास के लिए मध्यप्रदेश सरकार को 24 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान भी दिया है। क्या करना होगा: स्टेप-बाय-स्टेप समझिए -1- एमपीआइजीआर के संपदा पोर्टल पर जाएं। मांगी गई जानकारियां देकर लॉगिन आइडी बनाएं। -2- दस्तावेज प्रमाणित प्रति पर क्लिक कर ओपन करें।  3- पुरानी रजिस्ट्री का डॉक्यूमेंट नंबर डालकर सर्च करें। -4- डॉक्यूमेंट नंबर नहीं है तो किन वर्षों के बीच रजिस्ट्री कराई, वह अवधि और नाम से रजिस्ट्री सर्च करें। मिलने पर एड टू कार्ट करें। -5- अब तय शुल्क जमा करें। -6- संबंधित सब रजिस्ट्रार के डिजिटल हस्ताक्षर युक्त सर्टिफाइड कॉपी ई-मेल और व्हाट्सऐप पर भेजी जाएगी। जो रजिस्ट्री डिजिटाइज नहीं हैं, उनकी कॉपी के लिए यहीं से आवेदन किया जा सकता है।

रेड जोन अलर्ट: 18 जिलों में 11.23 लाख लोगों को नहीं मिलेगा सरकारी राशन, जानें लिस्ट

सतना   प्रदेश में गरीबी रेखा में पात्रता के बावजूद लाखों परिवार आज भी सरकारी खाद्यान्न से वंचित हैं। वजह कोई नई नहीं, बल्कि ई-केवाइसी की धीमी रफ्तार है। ई-केवाइसी पूरी न होने के कारण पात्र सदस्यों के नाम से खाद्यान्न पात्रता पर्ची जारी नहीं हो सकी। प्रदेश के 55 जिलों में 5.79 लाख नए सदस्यों को खाद्यान पात्रता में शामिल तो किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 26 हजार के ही ई-केवाइसी पूरी हो सकी। वहीं पुराने कार्डधारियों में 5.44 लाख परिवारों के सदस्यों के नाम बढ़ाए गए। इनमें से भी केवल 24 हजार की ई-केवाइसी हो सकी है। प्रदेश में कुल 11.23 लाख सदस्य बढ़ें, जिनमें 50 हजार सदस्यों की ही ई-केवाइसी हो सकी है। इन जिलों का प्रदर्शन खराब प्रदेशभर के 18 जिले रेड जोन में रखे हैं। इनमें अनूपपुर, आलीराजपुर, डिंडोरी, पांढुर्णा, उमरिया, निवाड़ी, मऊगंज, मंडला, बड़वानी, आगर मालवा, हरदा, नीमच, नरसिंहपुर, झाबुआ, नर्मदापुरम, सिंगरौली, रतलाम और सीधी शामिल हैं। यहां 200 या इससे कम ही ई-केवाइसी हो सकी। ई-केवाइसी में शिवपुरी जिला प्रदेश में अव्वल ई-केवाइसी के मामले में शिवपुरी जिला प्रदेश में सबसे आगे है। यहां 35,679 नए पात्र सदस्यों में से 3,407 की ई-केवाइसी हो चुकी है। वहीं पुराने कार्डों में जुड़े 23 हजार सदस्यों में से 2,923 की ई-केवाइसी पूरी कर ली गई है। हालांकि इसके बाद अन्य जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर ही बनी हुई है। वेरिफिकेशन प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के चलते प्रदेश के लाखों गरीब राशन से वंचित हैं सतना-मैहर में स्थिति चिंताजनक सतना में हालात और भी गंभीर हैं। यहां 13 हजार नए पात्र सदस्यों को राशन(Government Ration) का लाभ मिलना है, लेकिन अब तक 390 सदस्यों की ई-केवाइसी हो पाई है। वहीं पुराने कार्डधारियों में 11.50 हजार सदस्यों में से मात्र 417 के सत्यापन हुए। मैहर में 7,945 नए सदस्य खाद्यान्न के पात्र हैं, पर केवल 342 की ई-केवाइसी हो सकी है। पुराने परिवारों में 5,867 सदस्यों की वृद्धि की, लेकिन इनमें से सिर्फ 271 सदस्यों का ही सत्यापन हो पाया।

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