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181 और 1098 से बढ़ी सुरक्षा और भरोसा

भोपाल  मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तकनीक आधारित सहायता तंत्र को मजबूत किया गया है। महिलाओं और बेटियों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तब संभव होती है जब महिलाओं और बेटियों को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलें। राज्य सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और तकनीक आधारित सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिससे उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें। महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, जागरूकता कार्यक्रम और त्वरित सहायता तंत्र इसी दिशा में किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयास हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासनिक तंत्र को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और तकनीकी से सशक्त बनाने में कई पहल की गई हैं। भारत सरकार की “वन नेशन, वन हेल्पलाइन” पहल के अनुरूप महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा ERSS-112 (Emergency Response Support System) से एकीकृत करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना 31 अगस्त 2023 को की गई। इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से अब प्रदेश की कोई भी महिला, 18 वर्ष से कम आयु का बच्चा या उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे (24×7) 181, 1098 या 112 पर टोल-फ्री कॉल कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकता है। तकनीक आधारित यह व्यवस्था संकट की घड़ी में त्वरित मदद उपलब्ध कराने के साथ महिला और बाल सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। महिला हेल्पलाइन 181: संकट में महिलाओं का भरोसेमंद सहारा हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन किया जा रहा है। यह सेवा प्रदेश के सभी वन स्टॉप सेंटर से एकीकृत है, जिससे पीड़ित महिलाओं को एक ही मंच से पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संरक्षण अधिकारी और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है तथा प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। इस सेवा की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक लगभग 1.28 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: बच्चों के संरक्षण की मजबूत कड़ी बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को भी ERSS-112 से जोड़ा गया है। हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉल्स को कॉल रेस्पॉन्डर द्वारा उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में कॉल्स को तुरंत ERSS-112 तथा संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को भेजा जाता है, जबकि अन्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई को प्रेषित किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से 26 हजार 974 बच्चों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है, जिसमें संकटग्रस्त बच्चों को संरक्षण, परामर्श, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।  

संकट की घड़ी में सहारा बनी 181 हेल्पलाइन, 8.42 लाख से अधिक महिलाओं को मिली मदद

लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर योगी सरकार की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत होती दिख रही है। इसी दिशा में शुरू की गई 181 महिला हेल्पलाइन महिलाओं और बालिकाओं के लिए संकट की घड़ी में भरोसेमंद सहारा बनकर उभरी है। वर्ष 2017 से संचालित यह टोल फ्री हेल्पलाइन प्रदेश भर में चौबीसों घंटे सक्रिय है और अब तक इसके माध्यम से 8.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की जा चुकी है। घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद,  उत्पीड़न या अन्य किसी विषम परिस्थिति में फंसी महिलाएं 181 नंबर पर कॉल कर तुरंत मदद और परामर्श प्राप्त कर रहीं हैं। इससे उन्हें त्वरित राहत मिलने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहायता तंत्र 181 महिला हेल्पलाइन महिलाओं और बालिकाओं के लिए एक समर्पित सहायता तंत्र के रूप में कार्य कर रही है। इस हेल्पलाइन के जरिए प्रदेश के किसी भी कोने से महिलाएं अपनी समस्या साझा कर सकती हैं और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकती हैं। कॉल सेंटर में तैनात प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हैं और उन्हें तत्काल सलाह व आवश्यक सहायता उपलब्ध कराते हैं। इससे संकट की स्थिति में घिरी महिलाओं को मानसिक संबल मिलता है और उन्हें समाधान की दिशा में उचित मार्गदर्शन प्राप्त होता है। 24 घंटे सक्रिय व्यवस्था से मिल रही त्वरित मदद महिला हेल्पलाइन 181 को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह चौबीसों घंटे सक्रिय रहकर महिलाओं को तुरंत सहायता उपलब्ध करा सके। इसमे किसी भी समय आई कॉल को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाता है। संबंधित महिला को समस्या के अनुसार परामर्श या आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है। इस व्यवस्था के चलते प्रदेश की महिलाएं किसी भी आपात स्थिति में बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर पा रहीं हैं। इससे महिला सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आती है।

4,108 एलपीजी वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को सुनिश्चित की गई रिफिल डिलीवरी

एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई, 1483 स्थानों पर निरीक्षण व छापे कालाबाजारी में 24 एफआईआर दर्ज, 6 गिरफ्तार, 19 लोगों पर अभियोजन प्रदेशभर में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, आपूर्ति व्यवस्था पर कड़ी निगरानी 4,108 एलपीजी वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को सुनिश्चित की गई रिफिल डिलीवरी वितरकों के यहां एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध लखनऊ  प्रदेश में आम नागरिकों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह सक्रिय है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खाद्य एवं रसद विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा प्रदेशभर में आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी के साथ निरीक्षण व छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है, जिससे कहीं भी किसी प्रकार की कमी या अव्यवस्था न होने पाए। इसी क्रम में मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम सुनिश्चित किए जाएं। कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई यूपी पहला राज्य है, जहां कालाबाजारी के खिलाफ सबसे पहले और ताबड़तोड़ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत जनपद स्तर पर प्रवर्तन टीमों द्वारा शुक्रवार को कुल 1,483 स्थानों पर निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई की गई। इस दौरान एलपीजी वितरकों के विरुद्ध 4 एफआईआर दर्ज की गई, जबकि एलपीजी गैस की कालाबाजारी में संलिप्त अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध 20 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। मौके से 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 19 व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई की गई है। उपभोक्ताओं को सुनिश्चित की गई एलपीजी रिफिल डिलीवरी प्रदेश में कार्यरत 4,108 एलपीजी गैस वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को उनकी बुकिंग के सापेक्ष एलपीजी रिफिल की डिलीवरी सुनिश्चित कराई गई है। वितरकों के यहां एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आवश्यकतानुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वाणिज्यिक सिलेंडरों का 20 प्रतिशत आवंटन भारत सरकार द्वारा वाणिज्यिक सिलेंडरों की कुल खपत के 20 प्रतिशत तक आवंटन की अनुमति प्रदान की गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी गैस आपूर्ति प्रभावित न हो। 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए खाद्यायुक्त कार्यालय में पेट्रोलियम पदार्थों के वितरण से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अतिरिक्त होम कंट्रोल रूम में भी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। वहीं प्रदेश के सभी जनपदों में भी कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं, जो लगातार कार्यरत हैं। फील्ड में सक्रिय प्रशासन उपभोक्ताओं को एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला पूर्ति कार्यालय और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगातार फील्ड में भ्रमण कर रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति बाधित न हो और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

समावेशी न्याय की दिशा में बड़ा कदम: श्रवण बाधित पेशेवरों के लिए मध्यप्रदेश में अनोखा प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल  न्याय तक समावेशी पहुँच को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा श्रवण बाधित पेशेवरों तथा सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स के लिए भारत का प्रथम भौतिक 40-घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। पाँच दिवसीय यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर के सहयोग से तथा उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), नई दिल्ली के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह पहल न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दूरदर्शी नेतृत्व में तथा न्यायमूर्ति  विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति  विजय कुमार शुक्ला, न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, इंदौर द्वारा किया गया। न्यायमूर्ति  शुक्ला ने कहा कि मध्यस्थता न्याय की सबसे मानवीय और सहभागी विधाओं में से एक है, जहाँ टकराव के स्थान पर संवाद और आपसी समझ के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण प्रणाली को निरंतर विकसित होना चाहिए जिससे विवाद निवारण की व्यवस्थाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँच सके। श्रवण बाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स को मध्यस्थता का प्रशिक्षण प्रदान करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र अधिक समावेशी और सुलभ बन सके। सु सुमन वास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि मध्यस्थता का मूल आधार समझ, सहानुभूति और संवाद है। उन्होंने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यस्थता में हमेशा शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वास्तविक संवाद अक्सर धैर्य, विश्वास और संवेदनशीलता के माध्यम से विकसित होता है। सु वास्तव ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रवण बाधित प्रतिभागियों को विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिये आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC), उच्चतम न्यायालय द्वारा नामित अनुभवी प्रशिक्षकों ‘मती अनुजा सक्सेना’ एवं ‘मती रीमा भंडारी’ द्वारा किया जा रहा है। चालीस घंटों के प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मध्यस्थता के दर्शन, संवाद तकनीक, वार्ता कौशल, विवाद विश्लेषण, मध्यस्थ की नैतिकता तथा व्यावहारिक मध्यस्थता अभ्यासों पर संरचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रभावी मध्यस्थता के लिए आवश्यक कौशल जैसे सक्रिय श्रवण, गैर-मौखिक संप्रेषण, संरचित संवाद, कॉकस तकनीक तथा सहमति आधारित समाधान को सुगम बनाने की विधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को भारत में मध्यस्थता के विधिक ढाँचे से भी परिचित कराया जा रहा है, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 के अंतर्गत निहित सिद्धांतों तथा मध्यस्थों से अपेक्षित व्यावसायिक मानकों की जानकारी शामिल है। इस पहल को आनंद सर्विस सोसायटी का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है तथा  ज्ञानेंद्र पुरोहित ने श्रवण बाधित समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करने और प्रतिभागियों की सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में  अनुप कुमार त्रिपाठी, प्रिंसिपल रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर,  शिवराज सिंह गवली, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर,  अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और  दीपक शर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रभागीय वनाधिकारी के कार्यालय में भी बने अग्नि नियंत्रण कक्ष, छोटी-छोटी घटनाओं पर रखी जा रही नजर

लखनऊ  मौसम में परिवर्तन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वन विभाग ने आग से बचाव की तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के आलाधिकारियों से कहा है कि गर्मी में जंगलों में आग की घटनाएं न हों,  इसके लिए अभी से तैयार रहें। वन विभाग ने ऐसी घटनाओं पर निगरानी और रोकथाम के लिए मुख्यालय से लेकर प्रभागीय स्तर, जोनल-मंडलीय मुख्य वन संरक्षक स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाया है। प्रदेश मुख्यालय पर बनाए गए अग्नि नियंत्रण सेल कार्य कर रहे हैं।  मुख्यालय व प्रभागीय स्तर पर बनाए गए अग्नि नियंत्रण सेल  प्रत्येक प्रभाग, वृत्त, जोन तथा मुख्यालय स्तर पर प्रदेश में कुल 116 अग्नि नियंत्रण सेल स्थापित किए जा चुके हैं। यह सेल 24 घंटे कार्य करेंगे। सेल में तीन शिफ्ट (सुबह छह से दोपहर दो बजे तक, दोपहर दो बजे से रात्रि 10 बजे तक व रात्रि 10 से सुबह छह बजे तक) में कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। हीलाहवाली न हो, इसके लिए विभिन्न रेंजों में समस्त सूचनाएं रजिस्टर में पंजीकृत कर तत्काल उसके निदान पर कार्य भी किया जाएगा।  हेल्पलाइन नंबर पर दी जा सकेगी जानकारी आग से जुड़ी घटनाओं के संबंध में आम नागरिक भी सूचना दे सकेंगे। जनपद से मिली इन सूचनाओं को जनपदीय अधिकारी तत्काल मुख्यालय के नियंत्रण सेल को प्रेषित करेंगे। आमजन की सुविधा के लिए लखनऊ में भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। 0522-2977310, 0522-2204676, 9651368060, 7017112077 पर इससे जुड़ी सूचनाएं दी जा सकती हैं। अन्य सभी जनपदों में भी आमजन व अन्य विभागों के अधिकारियों को स्थानीय हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराया जाएगा। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की वेबसाइट-fsi.nic.in पर वन अग्नि अलर्ट सूचना के लिए प्रदेश के 3792 अधिकारियों, कर्मचारियों व आमजन ने पंजीकरण भी कराया है।  अतिसंवेदनशील व मध्य संवेदनशील प्रभागों में भी कर ली गई तैयारी  प्रदेश में वन अग्निकाल 15 जून तक माना गया है। पहले के वर्षों में हुई अग्नि घटनाओं के आधार पर अतिसंवेदनशील व मध्य संवेदनशील (चित्रकूट, सोनभद्र, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग, बहराइच, महराजगंज, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, उत्तर खीरी-दक्षिण खीरी, बलरामपुर, सहारनपुर, बिजनौर, गोंडा, गोरखपुर, मीरजापुर, चंदौली, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, वाराणसी व कैमूर वन्य जीव प्रभाग घोषित किए गए हैं। इनमें फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल भी की जा चुकी है। संवेदनशील जनपदों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति भी गठित की गई है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्देश के क्रम में वन अग्नि नियंत्रण के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रभागीय स्तर पर आग लगने की किसी भी सूचना से तत्काल मुख्यालय स्तर को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। आमजन की सुविधा के लिए मुख्यालय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। वन्य जीवों को वन क्षेत्र के अंदर पीने के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए पक्का होल निर्माण व पुराने वाटर होल की मरम्मत कर उसमें नियमित जल भी भरा जा रहा है। वन क्षेत्र के अंदर वाच टावर का निर्माण व पुराने वाच टावर का रखररखाव भी किया जा रहा है। 

पंचायत शिक्षकों के लिए वेतनमान में बड़ा बदलाव, अब मिलेगा सरकारी कर्मचारियों जैसा वेतन

इंदौर  इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। युगलपीठ ने सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों समान वेतनमान देने के फैसले को बरकरार रखा है। सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने पंचायत शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार के 29 दिसंबर 2017 के आदेश को खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को भी छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से देने का आदेश दिया था और साथ ही बकाया राशि पर 6 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट की युगलपीठ में सरकार ने अपील दायर करते हुए चुनौती दी थी। तर्क दिया था कि एकलपीठ ने गलत तरीके से 1 जनवरी 2006 से लाभ देने का आदेश दिया। राज्य सरकार का कहना था कि छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से ही मिलना था। इसमें भी सरकार हार गई थी। इसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर की थी। भेदभाव नहीं कर सकते हाई कोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने साफ किया कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का मामला पहले भी कई फैसलों में हल हो चुका है। जिनमें स्पष्ट किया है कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतन व सरकारी कर्मचारियों समान सभी लाभ मिलें। जब राज्य सरकार ने पंचायतकर्मियों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन देने का फैसला लिया है, तो उनसे भेदभाव नहीं किया जा सकता। क्या है मामला सरकार ने 7 जुलाई 2017 व 29 दिसंबर 2017 को आदेश जारी किया था कि पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से दिया जाए, बजाय उनकी नियुक्ति तारीख के। फैसले के खिलाफ पंचायत शिक्षकों ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें छठे वेतन आयोग के लाभउनकी प्रारंभिक नियुक्ति तारीख से दिए जाएं।

25 मार्च को को-लोकेटेड आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालयों में होगा आयोजन

लखनऊ प्रदेश सरकार प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने और छोटे बच्चों के विद्यालय में प्रवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों में ‘नवआरंभ उत्सव’ आयोजित किया जाएगा।  यह कार्यक्रम 25 मार्च 2026 को राज्यभर में एक साथ आयोजित होगा।  इस पहल का उद्देश्य 3 से 6 आयु वर्ग के बच्चों का बालवाटिका में नामांकन बढ़ाना और प्रारंभिक शिक्षा के प्रति अभिभावकों को जागरूक करना है। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को बालवाटिका की गतिविधियों से परिचित कराया जाएगा और अभिभावकों को विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। वर्ष 2030 तक प्रारंभिक शिक्षा लाभ सभी तक पहुंचाने का लक्ष्य राज्य सरकार का यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नीति के अनुसार वर्ष 2030 तक प्रारंभिक शिक्षा लाभ सभी तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बालवाटिका की गतिविधियों से कराया जाएगा परिचय योगी सरकार ने विशेष अभियान चलाकर बच्चों के नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। नवआरंभ उत्सव के दौरान विद्यालयों में अभिभावकों को बालवाटिका की गतिविधियों, लर्निंग कॉर्नर, स्टेशनरी, खेल सामग्री और बच्चों के बैठने की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही बच्चे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य गतिविधियां भी करेंगे। इससे अभिभावकों को बालवाटिका के शैक्षिक वातावरण की झलक मिल सकेगी। तैयार हुई कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा नवआरंभ उत्सव के लिए विभाग ने विस्तृत कार्यक्रम तय किया है। इसके तहत जनप्रतिनिधि दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम के उद्देश्य और बालवाटिका की अवधारणा पर प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर चर्चा, बालवाटिका के बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी होगी। इसके साथ ही, कक्षा-1 में प्रवेश के लिए पात्र बच्चों की सूची अभिभावकों को उपलब्ध कराना और क्रियाशील बालवाटिका का प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, डायट, नोडल शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं हैं। जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक कार्यक्रम की निगरानी की जाएगी और संबंधित सूचनाएं प्रेरणा पोर्टल और विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से राज्य स्तर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रत्येक विद्यालय को मिलंगे लगभग 3000 रुपये नवआरंभ उत्सव के आयोजन के लिए राज्य सरकार ने 1592.22 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय को लगभग 3000 रुपये की दर से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस धनराशि से कार्यक्रम के आयोजन, बच्चों के लिए गतिविधियां, बैनर-पोस्टर और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। प्रारंभिक शिक्षा को नई दिशा देने का प्रयास योगी सरकार का मानना है कि मजबूत प्रारंभिक शिक्षा से ही बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार होती है। इसी दृष्टिकोण से राज्य सरकार आंगनबाड़ी और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। ‘नवआरंभ उत्सव’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो छोटे बच्चों के नामांकन और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नेपानगर में जनजातीय सम्मेलन में रविवार को होंगे शामिल 363 करोड़ 82 लाख रूपये के 127 विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 मार्च रविवार को बुरहानपुर जिले के नेपानगर में विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 363 करोड़ 82 लाख रूपये के 127 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। नेपानगर में ‘‘जनजातीय सम्मेलन एवं विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमि-पूजन कार्यक्रम’’ में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत कार्यशाला भी आयोजित होगी। जनजातीय बाहुल्य नेपानगर में जनजातीय समुदाय की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव संवाद भी करेंगे। जनजातीय सम्मेलन में कृषि, उद्यानिकी, पशु चिकित्सा, आजीविका मिशन, वन विभाग की ‘‘विकास प्रदर्शनी’’ भी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित करेंगे।  

अडाणी पावर प्लांट बना तनाव का केंद्र: सिंगरौली में आगजनी और भारी तोड़फोड़

सिंगरौली जिले के माढ़ा थाना क्षेत्र के बंधौरा क्षेत्र स्थित अडाणी पावर प्लांट में झारखंड निवासी श्रमिक की मौत के बाद शनिवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। गुस्साए मजदूरों ने सुबह जमकर हंगामा किया और ठेकेदार कंपनी के कार्यालय में आग लगा दी। पावर प्लांट की एक साइट में भी आगजनी की गई। परिसर में खड़ी 12 से अधिक गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की और उन्हें पलटा दिया। थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी के वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में करीब 200 पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। शव छिपाने का आरोप लगाया अडाणी ग्रुप से जुड़े बंधौरा पावर प्लांट में करीब 10 हजार श्रमिक काम करते हैं। ठेका कंपनी पावर मेक के तहत काम करने वाले झारखंड निवासी श्रमिक लल्लन सिंह (38) पुत्र रामदास चंद्रवंशी, निवासी गढ़वा, झारखंड की शुक्रवार रात आवास पर मौत हो गई। इस दौरान अफवाह फैली कि श्रमिक की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हुई है। मजदूरों का आरोप था कि श्रमिक की मौत के बाद कंपनी प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और शव को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। शीशे तोड़े, गाड़ियों में भी आग लगाई आक्रोशित मजदूरों ने ठेका कंपनी के कार्यालय परिसर में खड़े वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और कुछ वाहनों में आग भी लगा दी। आगजनी के कारण परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागते नजर आए। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ काफी आक्रोशित थी। कंपनी के कर्मचारियों से भी मारपीट की गई, जिससे वे मौके से भाग खड़े हुए। कुछ श्रमिक भी सामान समेटकर चले गए हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारी, भारी पुलिस बल तैनात पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया। पुलिस ने किसी तरह मजदूरों को समझाकर माहौल शांत कराया। मजदूरों का कहना था कि मृत श्रमिक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मृतक मजदूर का शव झारखंड रवाना कर दिया गया है। कंपनी का दावा, हृदयाघात से हुई मौत कंपनी प्रबंधन का कहना है कि श्रमिक की मौत उसके आवास पर हुई है। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रबंधन का कहना है कि नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच की बात कह रहा है। कंपनी के सिक्योरिटी इंचार्ज राकेश कुमार का कहना है कि तोड़फोड़ और आगजनी से करोड़ों का नुकसान हुआ है।  

सैटेलाइट, ड्रोन और एआई से हो रहा फसलों का वैज्ञानिक विश्लेषण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिला है और किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। डीप लर्निंग तकनीक से ‘सारा’ ऐप द्वारा प्राप्त लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर खेत स्तर पर बोई गई फसलों के प्रकार का सत्यापन किया जाता है, जिससे फसलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्मार्ट क्रॉप मैपिंग और पहचान के लिए उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग कर भूमि खंड (खसरा) स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए ‘पटवारी हल्का’ स्तर पर उपज का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है। इससे कृषि योजना निर्माण, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है। इस तकनीकी पहल से फसल पहचान और आकलन की सटीकता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। वर्ष-2022 में जहाँ सटीकता 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष-2025 तक यह बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत हो गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है, जिससे रीयल-टाइम फसल पहचान संभव हुई है। इस प्रणाली से 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों का डिजिटल मैपिंग किया गया है। साथ ही प्रमुख फसलों की पहचान और डिजिटल फसल गिरदावरी का सत्यापन भी किया जा रहा है। वर्ष 2023 से ‘पटवारी हल्का’ स्तर के लगभग 22 हजार क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आंकलन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भू-स्थानिक (जियो-स्पेशियल) तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन संभव होगा, जिससे किसानों को मुआवजा सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से विकसित यह पहल मध्यप्रदेश की कृषि व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को आय सुरक्षा और बेहतर कृषि प्रबंधन का लाभ मिलेगा।  

प्रेसिडेंट ट्रंप का बड़ा बयान- ‘I love India, love Modi’, पाकिस्तान को बताया आतंकवाद का सबसे बड़ा निर्यातक

 नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और धुर-दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता लौरा लूमर ने कहा है कि दुनिया को पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात “इस्लामी आतंकवाद” है. लौरा लूमर ने सुझाव दिया कि अमेरिका को पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के साथ बिल्कुल भी गलबहियां नहीं करनी चाहिए. लौरा लूमर अपनी मुस्लिम विरोधी बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं. वे स्वयं को गौरवशाली प्राउड इस्लामोफोब कहती हैं. लौरा ने जिहाद फैलाने के लिए पाकिस्तान को खुले तौर पर लताड़ा। लौरा लूमर के साथ गरमागरम चर्चा हुई. इस्लामी आतंकवाद पर तीखी टिप्पणी करते हुए लूमर ने आरोप लगाया कि दुनिया भर में हुए कई आतंकवादी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं. ट्रंप के चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ लगातार दिखने वालीं लौरा ने जोर देकर कहा कि भारत और ब्रिटेन में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े थे। लौरा ने कहा, “दुनिया को पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात इस्लामी आतंकवाद है, और मेरा मानना ​​है कि अमेरिका को पाकिस्तानी सरकार के साथ बिल्कुल भी नज़दीकी नहीं बढ़ानी चाहिए,” लौरा ने कहा कि उन्होंने कई बार अमेरिकी सरकार की इस बात के लिए आलोचना की है।  लौरा लूमर ने बातचीत के बीच कहा कि, “पाकिस्तान एक खुले तौर पर जिहादी और शरिया-समर्थक देश के तौर पर काम करता है, और जब आप दुनिया भर में हुए कई इस्लामी आतंकी हमलों को देखते हैं, तो अक्सर उनका कोई न कोई तार पाकिस्तान से जुड़ा होता है।  ‘आतंकवाद ज्यादातर पाकिस्तान से आ रहा है’ अपने दावे को मजबूत करने के लिए लूमर ने पिछले हफ़्ते एक पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को दोषी ठहराए जाने का ज़िक्र किया. मर्चेंट पर ट्रंप और अमेरिका के बड़े नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप था। लौरा लूमर ने आगे कहा कि इस घटना से एक बात साफ हो जाती है. ज़्यादातर आतंकवाद मुख्य रूप से पाकिस्तान से ही आ रहा है. उन्होंने कहा कि आप देखते हैं कि जब भी भारत पर इस्लामिक आतंक का हमला होता है, ब्रिटेन पर इस्लामिक आतंक का हमला होता है, आप देख रहे होंगे कि यूके का इस्लामिक टेकओवर हो गया है। अमेरिकी दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट ने कहा कि उन्होंने इस बारे में राष्ट्रपति ट्रंप से बात की है, और उन्होंने कहा है कि वे ओवल ऑफिस में इस्लामिक नेताओं की मीटिंग नहीं देखना चाहती हैं. लेकिन वे अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और मैं उन्हें नहीं कह सकती हूं कि उन्हें क्या नहीं करना चाहिए. राष्ट्रपति ट्रंप को डिप्लोमैटिक होना पड़ता है और उन्हें दुनिया भर के नेताओं से मिलना पड़ता है. मैं समझती हूं कि राष्ट्रपति ट्रंप को जो करना होता है वे वही करते हैं. कोई सबसे बड़ी गलती यही करेगा कि वह राष्ट्रपति को बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए. मैं उनके लीडरशिप में विश्वास करती हूं। इमिग्रेशन पर अपनी विवादित टिप्पणियों और कट्टर विचारों के लिए जानी जाने वाली और ट्रंप की कट्टर समर्थक लूमर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में PM मोदी को “एक शानदार नेता और मेरा अच्छा दोस्त” बताया है। लौरा लूमर का ये पहला भारत दौरा है. कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि वे प्राय: कितनी बार राष्ट्रपति ट्रंप से बात करती हैं. तो लौरा ने कहा कि इस सप्ताह मैंने तीन बार उनसे बात की है. मैं व्हाइट हाउस में उनसे मिलती रहती हूं. कुल मिलाकर मेरी उनसे बात होती रहती है. लौरा लूमर ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ हमारी दोस्ती इस वजह से महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वे मुझ पर भरोसा करते हैं कि मैं उन्हें सलाह दे सकती हूं कि कौन उनका वफादार है और कौन नहीं। कार्यक्रम में लौरा ने कहा कि वे काफी रिसर्च करती रहती हैं और देखती रहतीं है कि राष्ट्रपति के अंडर काम करने वाले कौन-कौन लोग हैं जो उनके एजेंडे को डिरेल करने में लगे रहते हैं या फिर अमेरिका फर्स्ट एजेंडा को नुकसान पहुंचाते हैं. मैं उनको तमाम चीजों पर अपडेट करती रहती हूं. लौरा से जब पूछा गया कि क्या वे ट्रंप प्रशासन में काम करना चाहेंगी. इस पर उन्होंने कहा कि ये उनके लिए गर्व की बात होगी. लौरा ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के कई लोग उन्हें राष्ट्रपति तक पहुंचने से रोकते रहते हैं। लौरा लूमर ने कहा कि लोगों को बुरा लग सकता है लेकिन ‘इस्लाम डेथ कल्ट’ है और दुनिया के लिए कैंसर है।  

सिलेंडर बुकिंग में नया नियम, 45 दिनों के भीतर होगा बुकिंग, नई टाइम लिमिट तय

भोपाल  देशभर में बढ़ती रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में नया LPG सिलेंडर 45 दिनों में ही बुक हो सकेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार गैस की जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। केंद्र के इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के लाखों ग्रामीण गैस उपभोक्ताओं पर भी नजर आएगा। जहां उज्जवला योजना और सामान्य कनेक्शन मिलाकर बड़ी संख्या में परिवार LPG गैस पर निर्भर हैं। अब ग्रामीण परिवारों को एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 45 दिन का इंतजार करना होगा। क्यों लेना पड़ा ये फैसला? हाल के दिनों में LPG सिलेंडरों की अचानक ज्यादा बुकिंग और जमाखोरी देखने को मिली है। एमपी में भी कई गोदामों पर छापामारी की कार्रवाई की गई है। वहीं देशभर के कई राज्यों से जमाखोरी की खबरें आईं। कई जगह लोगों ने जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिए। जिससे वास्तविक जरूरत वाले उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई के कारण गैस की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।  10 दिन में तीसरी बार बदला नियम गैस बुकिंग के नियम कुछ दिनों से लगातार बदल रहे हैं। पहले दो सिलेंजर के बीच तय समय सीमा नहीं थी। 6 मार्च को पहली बार 21 दिन का गैप तय किया गया। इसके बाद इस गैप को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन लॉक-इन समय लागू कर दिया गया है। हालांकि शहरी उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल यह अवधि 25 दिन ही रखी गई है। एमपी में क्या दिखेगा असर? मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना और सामान्य LPG कनेक्शन से खाना बनाते हैं। ऐसे में इन नए नियमों के कारण ग्रामीण परिवारों को गैस का उपयोग अधिक सावधानी से करना होगा, ताकि गैस सिलेंडर ज्यादा समय तक चल सके। संयुक्त परिवारों में गैस की किल्लत देखी जा सकती है। कई उपभोक्ता, दूसरा सिलेंडर रखने की कोशिश कर सकते हैं। क्या कहते हैं जिम्मेदार मामले में जिम्मेदारों का कहना है कि यह कदम सप्लाई को संतुलित करने, उभोक्ताओं तक गैस पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी है। सिलेंडर डिलीवरी के समय पर मोबाइल पर OTP आएगा। OTP देने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाएगी। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और गलत डिलीवरी पर रोक लगेगी। सरकार की अपील पैनिक बुकिंग या अनावश्यक सिलेंडर स्टॉक न करें। इससे असली जरूरतमंद परिवारों को मुश्किल हो सकती है। वहीं ऐसा करने से कालाबाजारी भी बढ़ती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी गौधाम योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जिला बिलासपुर के तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम लाखासार स्थित गौधाम का शुभारंभ करते हुए प्रदेश में गोधन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने गोमाता की विधिवत पूजा-अर्चना करने के उपरांत गौधाम परिसर का अवलोकन कर वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने गौधाम में आश्रय प्राप्त बेसहारा एवं आवारा पशुओं की देखरेख, चारा, पानी तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और चारागाह का भी अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि ग्राम  लाखासार में लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में गौधाम विकसित किया गया है, जिसमें से 19 एकड़ भूमि पर पशुओं के लिए हरे चारे की खेती की जा रही है। गौधाम का संचालन कामधेनु गौशाला समिति द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की जा रही गौधाम योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति, कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार गोधन संरक्षण और बेसहारा मवेशियों की देखभाल के लिए गौधाम योजना को राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, जिससे गौसेवा की परंपरा को मजबूती मिलने के साथ ही पशुधन संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस अवसर पर घोषणा की कि अब राज्य के सभी गौधाम “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश के गौधामों में विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे गौसेवा के साथ-साथ स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने लाखासार ग्राम के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने लाखासार में महतारी सदन, मिनी स्टेडियम तथा 500 मीटर लंबाई के गौरव पथ के निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही लाखासार गौधाम में प्रशिक्षण भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत करने तथा एक काऊ कैचर और एक पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा की, जिससे क्षेत्र में गौसंरक्षण और स्थानीय विकास कार्यों को और मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने क्षेत्र के पशुपालकों और ग्रामीणों से संवाद कर गोधन संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली तथा इस सेवा कार्य में लगे लोगों की सराहना की। उन्होंने गौसेवा से जुड़े कार्यकर्ताओं को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सेवा कार्य जारी रखने की बात कही और सभी को गोधन संरक्षण तथा गौसेवा के लिए प्रेरित किया। तखतपुर विधायक  धर्मजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का चहुँमुखी विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो भी वादा करते हैं, उसे अवश्य पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  साय द्वारा तखतपुर क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से कई कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा अनेक कार्य प्रगतिरत हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों से क्षेत्र में विकास को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष  विशेषर पटेल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का अभिनंदन किया और गौधाम योजना के शुभारंभ के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस पहल से गोधन संरक्षण को नई दिशा मिलेगी तथा बेसहारा और निराश्रित गौवंश के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम, विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  सुशांत शुक्ला, कमिश्नर बिलासपुर  सुनील जैन, आईजी  रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा  चंद्रकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

क्रिकेट का महाकुंभ फिर ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में, अगले टी20 विश्वकप की मेजबानी तय

मुंबई आईसीसी टी20 विश्वकप का 11 वां सत्र अब साल 2028 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में संयुक्त रुप से खेला जाएगा। यह टूर्नामेंट 21 अक्टूबर से 19 नवंबर, 2028 के बीच होगा। इस प्रकार साल 2022 के बाद ऑस्ट्रेलिया को दूसरी बार इस वैश्विक इवेंट की मेजबानी का अवसर मिलेगा। वहीं न्यूजीलैंड में पहली बार इस  टूर्नामेंट का आयोजन होगा। टूर्नामेंट के आयोजन की जिम्मेदारी डेम थेरेसी वॉल्श के पास है। वाल्श के अनुसार ये मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी), सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी), एडिलेड ओवल और पर्थ का ऑप्टस स्टेडियम में खेले जाएंगे। वहीं न्यूजीलैंड में ऑकलैंड के ईडन पार्क, वेलिंगटन के स्काई स्टेडियम और क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में होंगे। इसमें 20 टीमें भाग लेंगी इस टूर्नोमेंट में भी आईसीसी का साल 2024 का ही प्रारुप लागू रहेगा। इस टूर्नामेंट के लिए 12 टीमों को स्थान मिल गया है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को मेजबान होने के कारण पहले ही जगह मिल गयी है। वहीं इस साल की विजेता भारतीय टीम के अलावा, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज, श्रीलंका और जिम्बाब्वे. को भी इसमें रैंकिंग के आधार पर जगह मिली है। इसके अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश और आयरलैंड को भी शामिल किय गया हैं। वहीं बचे 8 स्थानों के लिए रीजनल क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट इस साल के बीच में शुरू होंगे। अमेरिका और यूरोप में उप-रीजनल क्वालीफायर आयोजित किए जाएंगे, जिससे एसोसिएट देशों को भी 20 टीमों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।  

सुकमा में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: नक्सलियों का विस्फोटक भंडार पकड़ा, 18 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त

सुकमा नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान जंगल में छिपाकर रखा गया विस्फोटक और अन्य सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई को नक्सलियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खुफिया सूचना के आधार पर पता चला था कि सुकमा क्षेत्र के ग्राम गोमगुड़ा के पोडियमपारा इलाके में नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में विस्फोटक और अन्य सामग्री छिपाकर रखी है। सूचना मिलते ही 226 बटालियन सीआरपीएफ की सी कंपनी ने 14 मार्च 2026 की सुबह करीब 5:50 बजे विशेष एंबुश ऑपरेशन शुरू किया। घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन यह अभियान सहायक कमांडेंट जी. नबी के नेतृत्व में चलाया गया। वहीं कमांडेंट एच.पी. सिंह और द्वितीय कमान अधिकारी बीरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। जवानों ने एफओबी गोमगुड़ा से लगभग एक किलोमीटर पश्चिम स्थित पोडियमपारा क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। घने जंगल और कठिन परिस्थितियों के बीच जवानों ने इलाके की गहन जांच की। इस दौरान संदिग्ध नक्सली डंप साइट का पता चला। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र को घेरकर के-9 और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल (BDD) स्क्वॉड की मदद से तलाशी ली गई। 18 किलो अमोनियम नाइट्रेट सहित कई सामग्री बरामद तलाशी के दौरान करीब 18 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, काला तिरपाल प्लास्टिक, पिट्ठू बैग, स्लीपिंग बैग, नक्सली पत्रिका, चाकू, मेडिकल और मेस से जुड़ी सामग्री, इलेक्ट्रिकल वायर, चार्जर, डेटा केबल, बैटरी, स्विच, ड्राइंग मैप चार्ट पेपर और 50 लीटर का ब्लू ड्रम समेत कई सामान बरामद किए गए। इसके अलावा स्टील का टिफिन बॉक्स, चाय का गिलास, तांबे की पानी की बोतल, छाता और कपड़े भी मिले। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि नक्सली इस इलाके में लंबे समय तक रुकने या किसी बड़ी वारदात की तैयारी में थे। सुरक्षा बलों की समय पर कार्रवाई से उनकी योजना नाकाम हो गई। बरामद सभी सामग्री को सुरक्षा मानकों के तहत जब्त कर लिया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन और निगरानी बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों ने कहा- अभियान जारी रहेगा 226 बटालियन के कमांडेंट ने कहा कि नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सुरक्षा बल पूरी प्रतिबद्धता के साथ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने जवानों की सतर्कता और साहस की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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