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वर्ष 2017 के बाद यूपी ने पॉलिसी पैरालिसिस से पॉलिसी स्टेबिलिटी की ओर ऐतिहासिक यात्रा तय की है : मुख्यमंत्री

ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी के ट्रिपल-टी मॉडल से यूपी आज देश का प्रमुख निवेश गंतव्य बन चुका है : मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में हिस्सा लेते हुए उत्तर प्रदेश के निवेश और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में पिछले साढ़े आठ वर्षों में हुए बदलावों को ऐतिहासिक करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश जो वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया के लिए जाना जाता था, आज उसकी पहचान वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के रूप में होती है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में न स्पष्ट औद्योगिक नीति थी और न सही नियत थी। प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल माहौल न होने के कारण अपार संभावनाओं के बावजूद निवेशक उत्तर प्रदेश आने से हिचकते थे। वही उत्तर प्रदेश आज अपने ट्रिपल-टी यानी ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्म और टाइमली डिलीवरी के मॉडल को अपनाते हुए देश का प्रमुख निवेश गंतव्य बन चुका है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की यात्रा के बारे में कहा कि औद्योगिक निवेश की पहली शर्त होती है सुरक्षा, दूसरी सुविधा और तीसरी स्पष्ट नीति। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में इन तीनों का अभाव था, जिसके चलते उद्योगों का विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। अब प्रदेश ने फियरलेस बिजनेस, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ट्रस्ट इन डूइंग बिजनेस को अपनी नई पहचान बनाया है। प्रदेश सरकार इसे ट्रिपल-एस मॉडल यानी सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड के रूप में प्रस्तुत कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार होने के कारण प्रदेश के विकास कार्यों में गति स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पॉलिसी पैरालिसिस से पॉलिसी स्टेबिलिटी की ओर ऐतिहासिक यात्रा तय की है। उत्तर प्रदेश में 34 से अधिक सेक्टोरल नीतियां लागू की गई हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। “निवेश मित्र”, “निवेश सारथी” और “उद्यमी मित्र” जैसी डिजिटल एवं संस्थागत व्यवस्थाओं ने उद्योगों के लिए पारदर्शी और सुगम वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश, 2017 के पहले 14वें स्थान पर था, जबकि अब टॉप अचीवर स्टेट के रूप में स्थापित है। सरकार का दावा है कि व्यापक सुधारों के सभी मानकों को पूर्ण रूप से क्रियान्वित करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है। डीरेगुलेशन रैंकिंग में यूपी पहले स्थान पर है तो डीक्रिमिनलाइजेशन की दिशा में भी बड़े कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 13 राज्य अधिनियमों के 99 प्रतिशत आपराधिक प्रावधानों को समाप्त कर उद्योगों के लिए भयमुक्त वातावरण बनाया है। इससे प्रदेश में कारोबारी प्रक्रियाएं सरल हुई हैं और अनावश्यक कानूनी बाधाएं समाप्त हुई हैं। औद्योगिक वृद्धि के आंकड़े इस परिवर्तन की कहानी कहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी से लेकर वर्ष 2017 तक 70 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 14,000 कारखाने ही स्थापित हुए थे। वहीं 2017 के बाद से अब तक इनकी संख्या 31,000 से अधिक हो चुकी है। यह वृद्धि प्रदेश में उद्योगों के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ से साढ़े आठ वर्षों में प्रदेश ने 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू प्रस्ताव किए हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू जमीन पर उतारे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि यूपी में अब एमओयू और निवेश कागजों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ग्राउंडब्रेकिंग, उत्पादन और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के रूप में परिणाम दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश आज मेक इन इंडिया अभियान को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का बड़ा हब बनकर उभरा है। देश में होने वाले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का लगभग 55 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण में भी प्रदेश की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को नए भारत के नए उत्तर प्रदेश के रूप में स्थापित कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ रक्षा उत्पादन और खेल उद्योग में भी यूपी में तेजी से निवेश बढ़ा है। रक्षा कॉरिडोर और खेल उपकरण निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडस्ट्री फर्स्ट, इन्वेस्टर फर्स्ट के दृष्टिकोण के कारण उत्तर प्रदेश आज वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित, स्थिर और विश्वसनीय गंतव्य बन चुका है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था में सुधार, आधारभूत संरचना का विस्तार, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास ने औद्योगिक वातावरण को सुदृढ़ किया है। इन पहलों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज निवेश, रोजगार और औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड के ट्रिपल-एस मॉडल के आधार पर उत्तर प्रदेश की गणना आज देश की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं में हो रही है।

पिछले नौ वर्षों में सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और निर्णायक नेतृत्व से बदली शासन-प्रशासन की दिशा: मुख्यमंत्री योगी

  – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान रखे विचार   राज्यपाल के प्रति अभद्र व्यवहार को लेकर विपक्ष पर किया करारा प्रहार सीएम बोले, आज प्रदेश कर्फ्यू कल्चर से कानून के राज और अविश्वास से आत्मविश्वास तक पहुंचा डबल इंजन सरकार की नीति से यूपी बना निवेश, नवाचार और पारदर्शिता का मॉडल – प्रयागराज में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भागीदारी सुरक्षा और सुशासन पर बढ़े विश्वास का प्रमाण लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सदन में राज्यपाल के प्रति अभद्र और अशिष्ट व्यवहार करने पर विपक्ष को जमकर लताड़ लगाई। साथ ही प्रभावी कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि न कर्फ्यू है, न दंगा है, बल्कि यूपी में सब चंगा है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल प्रदेश का संवैधानिक प्रमुख होता है। इसके बावजूद राज्यपाल पर प्रतिपक्ष द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। यह न केवल लोकतंत्र को कमज़ोर करता है बल्कि संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े सभी प्रमुख हस्तियों की अवमानना के भी दायरे में आता है। यह हम सबका दायित्व बनता है कि हम अपने राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें। साथ ही संविधान की व्यवस्था के तहत संवैधानिक प्रमुखों के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखें। उनके प्रति कोई ऐसा आचरण न करें, जो आचरण देश की भावी पीढ़ी को गलत दिशा की ओर अग्रसर करे, लेकिन प्रतिपक्ष से इसकी अपेक्षा करना व्यर्थ है। प्रदेश की जनता को पहले ही मिलना चाहिये था कानून का राज मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राज्यपाल एक अनुभवी राजनेता होने के साथ आज प्रदेश सरकार की संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपना मार्गदर्शन और नेतृत्व सभी को प्रदान कर रही हैं। उनके प्रति अभद्र व्यवहार समाजवादी पार्टी की वास्तविक सोच और प्रतिपक्ष की नकारात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। पिछले नौ वर्ष में प्रदेश ने एक अपनी यात्रा तय की है। यह यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन, कर्फ्यू से कानून के राज, उपद्रव से उत्सव की यात्रा, समस्या से समाधान और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। इस यात्रा को देश और दुनिया स्वीकार करती है। वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में बदलाव आया है। यह अधिकार प्रदेश की 25 करोड़ जनता को पहले ही मिलना चाहिये था लेकिन अपने संकुचित एजेंडे को लेकर चलने वाली सरकारों ने प्रदेश के भविष्य और जनता जनार्दन के साथ खिलवाड़ किया। उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया। प्रदेश को अराजकता, अव्यवस्था, अपराध का एक गढ़ बना दिया। इस दौरान कर्फ्यू यहां की पहचान बन गई थी। उत्तर प्रदेश को भारत के शाश्वत मूल्यों की आधारभूमि माना जाता है, उसमें किस प्रकार की अव्यवस्था थी, यह हम सबने देखा है। वहीं डबल इंजन सरकार की स्पष्ट नीति, साफ़ नीयत, सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता से आज उत्तर प्रदेश ने बॉटलनेक से देश की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथॉट बनाने में सफलता प्राप्त की है। दुनिया के सामने टेक्नोलॉजी, भरोसे और परिवर्तन के समन्वित मॉडल के रूप में उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यूपी रेवन्यू सरप्लस और उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी यात्रा को लेकर मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में दुनिया के सबसे बड़े एआई इंपेक्ट समिट का उद्घाटन किया है। यह पांच दिनों तक देश और दुनिया के 18 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में चलेगा। इस समय जब दुनिया तेजी से इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, तब भारत भी इस दिशा में मजबूत और दूरदर्शी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। देश न केवल वर्तमान बल्कि भावी पीढ़ी के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन योजना के साथ कार्य कर रहा है। इसी राष्ट्रीय सोच के अनुरूप उत्तर प्रदेश ने भी पिछले साढ़े आठ से पौने नौ वर्षों में खुद को परिवर्तन की आधारभूमि के रूप में स्थापित किया है। प्रदेश में आए इस व्यापक बदलाव को “टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन” की त्रिवेणी के रूप में देखा जा रहा है। आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के सामने टेक्नोलॉजी, भरोसे और परिवर्तन के समन्वित मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यह त्रिवेणी केवल एक नारा नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली और विकास की दिशा का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश की ही धरती पर प्रयागराज स्थित है जिसकी पहचान मां गंगा, यमुना और  सरस्वती की पावन त्रिवेणी से है। उसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक को आधुनिक संदर्भ में नया रूप देते हुए उत्तर प्रदेश ने “टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन” की नई त्रिवेणी को विकास के केंद्र में स्थापित किया है। यह नई त्रिवेणी प्रदेश की प्रगति, पारदर्शिता और जनविश्वास की आधारशिला बन चुकी है। नीतिगत उदासीनता और विकास विरोधी सोच के माहौल को हमने बदला मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में नीतिगत उदासीनता, प्रशासनिक शिथिलता और विकास विरोधी सोच का जो माहौल था, उसे बीते वर्षों में पूरी तरह बदलने का प्रयास किया गया। अनुशासन, निर्णायक नेतृत्व, स्पष्ट नीति और शुद्ध नीयत के माध्यम से शासन-प्रशासन को एक नई दिशा देने का कार्य किया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार के कार्यों का प्रभाव भी प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लेकर रोजगार सृजन के व्यापक अभियानों तक, हर क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से कार्य हुआ है। उत्तर प्रदेश को एक बेहतरीन इंवेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश का वातावरण सुदृढ़ हुआ है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के विभिन्न माध्यमों से प्रदेश को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रही है। पहले “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” जैसी स्थिति ने प्रदेश को झकझोर रखा था मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चलाते थे। गुंडा टैक्स और अवैध वसूली प्रदेश की नियति बन चुकी थी। “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” जैसी स्थिति ने उत्तर प्रदेश को … Read more

धर्मस्थल केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना के भी केंद्रः सीएम योगी

सीएम योगी के निशाने पर रही कांग्रेस व समाजवादी पार्टी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व सपा को निशाने पर रखा। उन्होंने पुलिस व कानून व्यवस्था पर भी अपनी बातें रखीं। सीएम योगी ने कहा कि देश व प्रदेश विरासत पर गौरव की अनुभूति करता है। विरासत से युक्त विकास ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला होती है। जिन्होंने भारत की आत्मा पर प्रहार किया और आस्था को रौंदा, उन आक्रांताओं का महिमामंडन कोई राजनीतिक स्वार्थ के लिए करे, नए भारत का नया उत्तर प्रदेश यह स्वीकार नहीं करेगा। देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी या राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम का 150वां वर्ष चल रहा है। पीएम मोदी ने राष्ट्रगीत को देश में अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कराया। राष्ट्रगीत भारत की आन, बान व शान का प्रतीक है। इन प्रतीकों व राष्ट्रनायकों का सम्मान भारतीयों का दायित्व बनता है। आक्रांताओं का महिमा मंडन और राष्ट्र प्रतीकों (तिरंगा, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत व महापुरुषों) का अपमान करने वाले संविधान की अवहेलना कर रहे हैं। जनता की आंखों में धूल झोक रही कांग्रेस व सपा सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस व सपा एक तरफ संविधान के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोक रही है तो दूसरी तरफ राष्ट्रगीत वंदे मातरम का विरोध कराया जा रहा है। इनके सदस्य कह रहे हैं कि हम वंदे मातरम नहीं गाएंगे। हिंदुस्तान में रहकर राष्ट्रगीत न गाना नहीं चलेगा। यह संविधान निर्माताओं और बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर का अपमान है। वंदे मातरम को 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता मिली थी। हर भारतीय का दायित्व है कि इन प्रतीकों को सम्मान दे। सीएम ने कहा कि गाजी भारत की परंपरा और संस्कृति को रौंदने आया था, सपा के लोग इस गाजी के मेले का समर्थन करते हैं। श्रावस्ती के तत्कालीन नरेश महाराज सुहेलदेव के नेतृत्व में हिंदु राजाओं ने उसे रौंद डाला। डबल इंजन सरकार ने महाराज सुहेलदेव को सम्मान दिया। बहराइच के चित्तौड़ा में उनका भव्य स्मारक और उनके नाम पर विश्वविद्यालय भी बनाया। धर्मस्थल केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना के भी केंद्र सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर को सम्मान दिया। पीएम मोदी ने लोकमाता की भव्य प्रतिमा काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित कराई। समाजवादी पार्टी लोकमाता के नाम पर गुमराह कर रही है। यह लोग राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर का विरोध और ऐसे तत्वों को प्रश्रय देते हैं। उनकी यह प्रवृत्ति दिखाती है कि आस्था के प्रति इनके मन में सम्मान नहीं है। सपा सरकार ने कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी, अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोक दिया था। प्रतिपक्ष के दलों ने अपने समय में दीपोत्सव, रंगोत्सव कार्यक्रम को रोका था। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में कहा था कि श्रीराम-श्रीकृष्ण मिथक थे। सपा ने रामभक्तों पर गोलियां चलाई थीं। मंदिर निर्माण के मार्ग में बाधा पैदा करने के लिए अधिवक्ता तैयार किए थे, लेकिन हम लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान में भारत की आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता है। आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। देश-प्रदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं। धर्मस्थल केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना के भी केंद्र हैं। सशक्त भारत की अटल आधारशिला बनाने के लिए हमारी सरकार ने आस्था को बढ़ाया सीएम योगी ने कहा कि भारत की आत्मा के प्रति सम्मान का भाव रखना और कार्य करना गौरव की बात है। डबल इंजन सरकार ने विरासत पर गौरव की अनुभूति के साथ ही प्रेरणा, सम्मान व बेहतर भविष्य की ठोस कार्ययोजना के साथ कार्य किया है। प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव के समय विकसित भारत के लिए पंच प्रण की बात की थी, उसी से प्रेरणा लेकर हम लोगों ने सशक्त भारत की अटल आधारशिला बनाने के लिए आस्था को बढ़ाया है। प्रयागराज, अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली, नैमिषारण्य समेत बौद्ध, जैन, सिख व पौराणिक-ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तीर्थस्थलों का समग्र विकास किया है। यूपी की पहचान अब दीपोत्सव, देव दीपावली व रंगोत्सव से सीएम योगी ने कहा कि यूपी की पहचान अब दीपोत्सव, देव दीपावली, रंगोत्सव से होती है। यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि इसने भारत के आध्यात्मिक गौरव के वैश्विक उत्सव के रूप में पहचान बनाई है। आज हर भारतीय अयोध्या के दीपोत्सव, काशी के देव दीपावली और मथुरा-वृंदावन के रंगोत्सव से आत्मिक भाव से जुड़ा है। कर्फ्यू न दंगा, यूपी में सब चंगा मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से उत्तर प्रदेश में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। यूपी में न कर्फ्यू है, न दंगा है, यहां सब चंगा है। महिलाओं को सुरक्षा व व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण दिया गया। 8-9 वर्ष में 2.19 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई, इसमें 20 फीसदी महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया। जब हम लोग आए थे, तब यूपी पुलिस में 10 हजार महिला कार्मिक थीं, आज यह संख्या 44 हजार से अधिक हो गई है। पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2017 में हमें पुलिस भर्ती करनी थी, लेकिन राज्य के पास ट्रेनिंग क्षमता नहीं थी। मिलिट्री, पैरा मिलिट्री व अन्य राज्यों के ट्रेनिंग सेंटर हायर किए थे। इस बार 60,200 पुलिस कार्मिकों की भर्ती हुई और इनका प्रशिक्षण यूपी के ट्रेनिंग सेंटर में ही हो रहा है। पुलिस की अवस्थापना सुविधा में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। खपरैल के बैरक की जगह पुलिस कार्मिकों के लिए हाईराइज बिल्डिंग में बनाई गईँ हैं। सीएम ने गिनाई स्मार्ट पुलिसिंग की विशेषताएं सीएम योगी ने कहा कि 7 पुलिस कमिश्नरेट मॉडर्न पुलिसिंग का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। साइबर थाना व साइबर सेल इनकी पहचान को और तेजी से बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस ईकोसिस्टम आधुनिक पुलिसिंग औऱ वैज्ञानिकों साक्ष्यों के लिए अनिवार्य है। तीन नए कानून लागू होने के बाद पूरे देश के अंदर सात वर्ष से अधिक की सजा के लिए फॉरेंसिक एविडेंस अनिवार्य किया गया है। प्रदेश में पहले केवल दो फॉरेंसिक लैब थीं। आज ए ग्रेड के 12 लैब प्रारंभ हो चुके हैं, जबकि … Read more

योगी सरकार की ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’

25 वर्ष से ज्यादा पुराने प्रोजेक्ट्स को मिलेगी नई जिंदगी स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य, सोसायटी अथवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति के बाद ही लागू होगी पुनर्विकास प्रक्रिया पीपीपी मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी, त्रिपक्षीय समझौते से तय होंगी जिम्मेदारियां डीपीआर, ट्रांजिट आवास और 3 वर्ष की समयसीमा, योगी सरकार का टाइम-बाउंड रीडेवलपमेंट ब्लूप्रिंट नियोजन मानकों में व्यावहारिक लचीलापन, बोर्ड अनुमोदन से तेज होगा अमल लखनऊ, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने हो चुके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जर्जर स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू कर दी है। इस नीति का मकसद 25 वर्ष या उससे अधिक पुराने भवनों को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त रूप में पुनर्विकसित करना है, ताकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास मिल सके। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग द्वारा अब इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। योगी सरकार की यह नीति न सिर्फ पुराने और असुरक्षित भवनों को नया जीवन देगी, बल्कि निर्माण, रियल एस्टेट और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। बेहतर नियोजन और आधुनिक डिजाइन के जरिए यह पहल उत्तर प्रदेश के शहरों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। एकल आवास नीति में शामिल नहीं प्रदेश के कई शहरों में पुराने अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे भवनों में रहना जोखिम भरा हो गया है और महंगी शहरी जमीन का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा। नई नीति के जरिए सरकार इन पुराने और कम उपयोग किए जा रहे परिसरों को नए सिरे से विकसित कर शहरों के स्वरूप को बेहतर बनाना चाहती है। नीति के तहत वे सभी सार्वजनिक और निजी प्रोजेक्ट्स पुनर्विकास के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 25 वर्ष पुराने हैं या जिन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित पाया गया हो। हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के मामलों में प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। 1500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल की भूमि और एकल मकान इस नीति में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा नजूल की भूमि, लीज पर आवंटित भूमि तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि भी इस पुनर्विकास नीति में शामिल नहीं होगी। तीन मॉडल्स से तय होगा पुनर्विकास सरकार ने पुनर्विकास के लिए तीन मॉडल तय किए हैं। पहला, शासकीय एजेंसी द्वारा सीधे काम कराना, दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी और तीसरा सोसायटी या एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास। पीपीपी मॉडल में शासकीय अभिकरण, डेवलपर और सोसायटी के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा, जिसमें सभी की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करना अनिवार्य होगा। इसमें नए फ्लैट्स का कारपेट एरिया, पार्किंग, कॉमन एरिया, ट्रांजिट आवास या किराये की व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तय समयसीमा जैसी सभी जानकारियां शामिल होंगी। पुनर्विकास के दौरान जिन निवासियों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना होगा, उन्हें वैकल्पिक आवास या किराया दिया जाएगा। तीन वर्ष में पूरी होगी परियोजना परियोजना को सामान्यतः तीन वर्ष में पूरा करना होगा, जबकि विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। नियोजन मानकों में भी व्यावहारिक लचीलापन रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी से केस-टू-केस आधार पर कुछ शर्तों में ढील दी जा सकेगी, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही, आपस में जुड़े एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर पुनर्विकास की अनुमति दी गई है, जिससे बेहतर और समेकित विकास संभव होगा।

‘सब चंगा है’ – यूपी की कानून-व्यवस्था पर विधान परिषद में CM Yogi Adityanath का बयान

 लखनऊ उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने विचार व्यक्त किए. इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने प्रदेश को अराजकता अव्यवस्था का गढ़ बना दिया था. आज डबल इंजन सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीति और सशासन की प्रतिबद्धता के कारण बीमारू से ब्रेकथ्रू स्टेट बना है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले गुंडे और माफिया इस प्रदेश में समानांतर सरकार चला रहे थे. वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया का राज था. प्रदेश की छवि अराजकता और अस्थिरता का पर्याय बन गया था. लेकिन आज ‘उपद्रव प्रदेश’ ‘उत्सव प्रदेश’ बन गया है. रूल ऑफ लॉ स्थापित किया. यूपी में न दंगा न कर्फ्यू, अब सब चंगा. बकौल सीएम- ‘यूपी फियर जोन से फेथ जोन में बदला है. अब कर्फ्यू कल्चर नही जीरो टॉलरेंस का कल्चर है. अब फेस्टिव एंड टेम्पल इकोनॉमी ग्रो कर रही है. अब फेस्टिव एंड टेम्पल इकोनॉमी ग्रो कर रही है. कोई सोच सकता था माघ मेला में जहां केवल कल्पवासी आते थे. कुछ लाख श्रद्धालु आते थे. आज 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए… क्योंकि उसको व्यवस्था सुरक्षा पर विश्वास है.’ नौकरी के मुद्दे पर सीएम योगी ने कहा कि पुलिस में 2 लाख 19 हजार भर्तियां निकाली गईं, इनमें 20 फीसदी बेटियां हैं. 2017 में यूपी पुलिस में कुल दस हजार महिला कार्मिक थी आज 44000 से अधिक हैं. 2017 से पहले यूपी पुलिस के पास ट्रेनिंग की व्यवस्था नहीं थी.. आज 60000 कार्मिक एक साथ ट्रेनिंग ले रहे हैं. पहले फॉरेंसिक लैब मात्र 2 थीं, आज हमलोग 12 लैब बना चुके हैं 6 अन्य निर्माणाधीन हैं. सभी 75 जिलों में दो दो फॉरेंसिक वन हैं. PAC को पिछली सरकार ने बंदी की कगार पर पहुंचा दिया था. आज 34 वाहिनियां है जिसमे 3 नईं महिला बटालियन हैं- उदा देवी, झलकारी बाई और अवंती बाई.  सीएम योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि हम आभारी है प्रधानमंत्री मोदी जी के क्योंकि उन्होंने वंदे भारत राष्ट्र गीत को अनिवार्य किया है. वंदे मातरम भारत के आन बान शान का प्रतीक है. राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान राष्ट्रनायकों, तिरंगे का अपमान संविधान की अवहेलना है. सपा के सदस्य वंदे मातरम का अपमान कर रहे, संविधान का अपमान है, बाबा साहब अम्बेडकर का अपमान है. सपाई राममंदिर, काशी विश्वनाथ का विरोध करते हैं.  उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा गाजी के मेले का समर्थन करती है. गाजी  की भारत के हिंदू राजाओं ने रौंद डाला था. हमारी सरकार ने बहराइच में महराज सुहेलदेव के नाम पर स्मारक बनवाया.

निवेशकों की समस्याओं के समाधान में विलंब स्वीकार नहीं, संबंधित विभाग निस्तारण में लाएं तेजी: मुख्यमंत्री

जनपद स्तर पर समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित करें अधिकारी: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने की नागरिकों से अपील, जनपद स्तर पर अवश्य शिकायत करें     निवेशकों की समस्याओं के समाधान में विलंब स्वीकार नहीं, संबंधित विभाग निस्तारण में लाएं तेजी: मुख्यमंत्री बच्चों से बोले सीएम- मन लगाकर पढ़ो, खूब खेलो और खिलते रहो  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। उन्होंने यहां आए हर फरियादी से स्वयं मुलाकात की, उनकी समस्याओं को सुना और निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अनुरोध किया कि लखनऊ आने से पहले अपनी समस्याओं को लेकर जनपद व मंडल स्तर पर तैनात अधिकारियों से जरूर मुलाकात करें। वहां भी हर अधिकारी आमजनों की समस्याओं के उचित निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है। यदि किन्हीं कारणों से वहां समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा हो, तो अवश्य लखनऊ आएं। सीएम योगी ने कहा कि हर परेशान व्यक्ति की समस्या का निदान सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारी हर हाल में जनपद स्तर पर ही पीड़ितों की समस्याओं का निस्तारण करें।  उद्यमियों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री सख्त, त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान कुछ उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने हर एक प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) एवं जिला प्रशासन को तत्काल और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में निवेश का बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार किया गया है और सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम सहित कई पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की हैं। यदि किसी उद्यमी को किसी भी स्तर पर परेशानी होती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्राइमरी विद्यालयों में फिजिकल एजुकेशन अनिवार्य करने की मांग पर सकारात्मक संकेत ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में एक नागरिक ने बेसिक शिक्षा परिषद के सभी प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेल और शारीरिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही अवैध कब्जों और पुलिस से जुड़े मामलों में भी अधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मन लगाकर पढ़ो, खूब खेलो और खिलते रहो  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों को देखकर उनका हालचाल जाना और हंसी ठिठोली भी की। मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि किस क्लास में पढ़ते हो। बच्चों ने भी मुख्यमंत्री के प्रश्नों का उत्तर दिया, फिर सीएम योगी ने सभी बच्चों से कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करो। खूब खेलो और खेलकर खिलते रहो। सीएम ने बच्चों को चॉकलेट दी और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद भी दिया।

सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, लखपति दीदी परिवार का बनीं सहारा

संडे स्पेशल हर महीने लाख तक कमाने लगीं हैं लखपति दीदियां 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, लखपति दीदी परिवार का बनीं सहारा लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से सफलता की नई कहानियां गढ़ रहीं हैं। लखपति दीदी योजना से कई महिलाएं हर महीने एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहीं हैं। पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रदेश सरकार ने तत्परता से योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे यह उपलब्धि हासिल हो पायी। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर हैं। बढ़ी कमाई, परिवार का बनीं सहारा आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल हैं आजमगढ़ जिले की हुस्नआरा खातून जो तैबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं । वे रेशमी साड़ी निर्माण के काम से जुड़ीं हैं। लखपति दीदी योजना के माध्यम से जब एक लाख 15 हजार रुपये की सहायता मिली तो जैसे ठहरी हुई रफ्तार को पंख लग गए। आज वे प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये तक कमा रहीं हैं। वे कहती हैं कि अब उनका कारोबार बारह गुना तक बढ़ चुका है। उनका परिवार सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवनयापन कर रहा है। आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन को मिला बल प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक संसाधन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का जो व्यापक ढांचा तैयार हुआ, उसने हजारों परिवारों की तकदीर बदल दी। लखपति दीदी योजना के अंतर्गत ही आजमगढ़ की शशिकला राजभर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण प्राप्त किया। इससे अदिति फास्ट फूड के नाम से अपना स्टॉल शुरू किया। आज वे प्रतिदिन लगभग 2000 रुपये का कारोबार कर रही हैं। वे बताती हैं कि पहले रोजगार की तलाश में थी, आज वे दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकीं हैं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि योजनाएं जब सही दिशा और निगरानी के साथ लागू होती हैं तो परिणाम समाज की संरचना को बदल देते हैं। लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन महिला सशक्तीकरण का सबसे मजबूत स्तंभ वित्तीय सहायता है जिसमें प्रदेश सरकार ने खासी प्रगति हासिल की है। आजमगढ़ की सरोज मौर्या इसकी जीवंत तस्वीर हैं। पढ़ाई के साथ वे बीसी सखी के रूप में कार्य कर रहीं हैं और गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं। उनके बताया कि पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने से हिचकतीं थीं। अब वे घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाएं पा रहीं हैं। इस पहल ने महिलाओं को न केवल रोजगार दिया बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में सहभागी भी बनाया। बीसी सखियों ने प्रदेश में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब आर्थिक गतिविधियों की मुख्य धुरी बन चुकी हैं। नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन प्रदेश में नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं जिनसे 99 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। लखपति महिला योजना के तहत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रमाण है।  कारोबार शुरू करने के लिए मिलती है पूंजी लखपति दीदी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता मिलती है।

प्रयागराज का माघ मेला खत्म, महाशिवरात्रि पर 22 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था दिखाई

महाशिवरात्रि पर प्रयागराज में माघ मेले का समापन, 44 दिनों में 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी ने भगवान शिव का किया रुद्राभिषेक, प्रदेशवासियों के लिए की मगंलकामना काशी विश्वनाथ धाम में पुष्प वर्षा से किया गया शिवभक्तों का स्वागत लखनऊ प्रयागराज के पावन संगम तट पर लगे धर्म-कर्म, त्याग और समर्पण के माघ मेले का समापन रविवार को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हुआ। हर हर महादेव के जयघोष और ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से संगम नगरी गूंज उठी। गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी ने रुद्राभिषेक-जलाभिषेक कर प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। काशी विश्वनाथ धाम में पुष्पवर्षा से शिवभक्तों का स्वागत हुआ। देश-विदेश के 63 मंदिरों से आई भेंट को भगवान श्री विश्वेश्वर को अर्पित किया गया।  माघ मेले में 22 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी प्रयागराज में माघ मेले में महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाई। 44 दिन चले माघ मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 22 करोड़ को पार कर गई। ये अब तक किसी भी माघ मेले का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ माघ मेले के आयोजन और तैयारियों पर नजर रखे हुए थे और महाशिवरात्रि पर भी लगातार खबर ले रहे थे। गोरखपुर में मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का किया रुद्राभिषेक गोरखपुर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने अंधियारी बाग स्थित प्राचीन मानसरोवर मंदिर और भरोहिया के पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में भी दर्शन, पूजन व दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक किया और चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।   काशी में गूंजा “हर-हर महादेव” और “बोल बम” का जयघोष महाशिवरात्रि पर काशी आस्था, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही। श्रद्धा की डोर से बंधे लाखों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के विवाहोत्सव के साक्षी बनने उमड़े। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक बेलपत्र, गंगाजल और दूध बाबा पर अर्पित किया। काशी “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गुंजायमान रही। श्री विश्वेश्वर के लिए देश-विदेश के कुल 63 मंदिरों से भेंट आई। यह भेंट भगवान श्री विश्वेश्वर की मध्याह्न भोग आरती में अर्पित कर श्रद्धालुओं के मध्य वितरित की गई। शाम छह बजे तक 5,20,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाज़िरी लगाई।  रामनगरी में शिवभक्तों का लगा तांता   महाशिवरात्रि के अवसर पर अयोध्या में लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर और क्षीरेश्वर नाथ मंदिर सहित अन्य प्रमुख शिवालयों पर शिवभक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे अयोध्या धाम को पांच जोन और 12 सेक्टर में बांटा गया। प्रत्येक जोन और सेक्टर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

हर जिले में मास्टर ट्रेनर तैनात, बीज व्यवसाइयों को देंगे प्रशिक्षण

नकली बीजों पर लगेगी नकेल, गुणवत्ता का पूरा ब्यौरा देगा साथी पोर्टल  बीज उत्पादक व विक्रेता अप्रैल से साथी पोर्टल के माध्यम से करें व्यवसाय: कृषि विभाग  हर जिले में मास्टर ट्रेनर तैनात, बीज व्यवसाइयों को देंगे प्रशिक्षण बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ और बीज कंपनियों को किया जा रहा प्रशिक्षित 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत, शेष भी 15 दिन के भीतर करा लें पंजीकरणः अपर कृषि निदेशक लखनऊ डबल इंजन सरकार किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने बीज व्यवसाइयों से अनुरोध किया है कि अप्रैल से साथी पोर्टल पर संपूर्ण जानकारी अपडेट करें। बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया साथी पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से ट्रैक की जाएगी। यह प्रक्रिया बीज की मिलावट रोकने, नकली बीजों पर अंकुश लगाने और किसानों को सही गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। केंद्र व महाराष्ट्र सरकार की टीम ने दिया प्रशिक्षण  उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग ने इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान भी चलाया। कृषि निदेशालय में चले प्रशिक्षण में केंद्रीय टीम व महाराष्ट्र कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने किया। डॉ. सोनू कुमार चौधरी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक (सीड) भारत सरकार,  अर्चना व अविनाश विजयकुमार पेडगांवकर, वरिष्ठ निदेशक (आईटी) एन.आई.सी, निलाद्रि बिहारी मोहंती संयुक्त निदेशक व उनकी टीम के सदस्य कोमित व सुदीप ने प्रशिक्षण प्रदान किया। महाराष्ट्र की उप निदेशक (कृषि) डॉ. प्रीति सवाईराम ने उनके राज्य में साथी पोर्टल की सफलता की कहानी बताई। उन्होंने इसके विभिन्न चरणों, कार्यों व किसानों को होने वाले लाभ की भी जानकारी दी। हर जनपद से आए तीन-तीन व्यवसायी, लौटकर देंगे ट्रेनिंग  अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) अनिल कुमार पाठक ने बताया कि बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित कर मास्टर ट्रेनर बनाया जा रहा है। अब ये प्रशिक्षक जनपद स्तर पर थोक व फुटकर विक्रेताओं को प्रशिक्षित करेंगे जिससे नई प्रणाली का सही ढंग से संचालन हो सकेगा। उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे स्थानीय स्तर पर सभी विक्रेताओं और उत्पादकों को नई प्रक्रिया में प्रशिक्षित करें ताकि अप्रैल से यह व्यवस्था पूरी तरह लागू की जा सके। लगभग 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। शेष 30 फीसदी विक्रेता भी 15 दिन के भीतर पोर्टल पर पंजीकरण करा लें। किसी भी समस्या पर स्थानीय जिला कृषि अधिकारी से भी निराकरण करा सकते हैं।  बीज से जुड़ी सारी जानकारी देगा साथी पोर्टल साथी (सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंटरी) पोर्टल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण और वितरण की गुणवत्ता में पारदर्शिता लाना और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकता है। बीज पैकेट पर लगे टैग के क्यूआर कोड को स्कैन करके किसान बीज के स्रोत, बीज का उत्पादन करने वाली एजेंसी/फर्म, उसके प्रमाणीकरण की पूरी जानकारी एवं उसकी गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं। दो चरणों में तैयार किए गए मास्टर ट्रेनर पहले दिन बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठन एवं बीज कंपनियों और फर्मों को प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे दिन जिलों के थोक एवं रिटेलर बीज विक्रेताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधि मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे। वे अपने-अपने जनपदों में अन्य डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर को साथी पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षित करेंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार की श्रृंखला होगी सक्रिय, एमएसएमई और वस्त्रोद्योग में बढ़े प्रावधान से नई नौकरियों की उम्मीद

औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर बनेंगे रोजगार के बड़े इंजन यूपी बजट 2026-27 में संरचनात्मक निवेश से लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसरों की तैयारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार की श्रृंखला होगी सक्रिय, एमएसएमई और वस्त्रोद्योग में बढ़े प्रावधान से नई नौकरियों की उम्मीद एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट में बढ़ेंगे अवसर डेटा सेंटर व एआई मिशन से हाई-स्किल जॉब्स का होगा विस्तार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से युवाओं के लिए खुलेंगे नए करियर विकल्प लखनऊ  प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विकास को जिस पैमाने पर प्राथमिकता दी गई है, वह प्रदेश में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की ठोस रणनीति की ओर स्पष्ट संकेत कर रहा है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए ₹27,103 करोड़ का प्रावधान कियी गया है जो कि पिछले वर्ष के बजट से 13 प्रतिशत अधिक है। यह साफ दर्शाता है कि योगी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित औद्योगिक विस्तार को रोजगार वृद्धि का मुख्य आधार बना रही है। बजट में किए गए ये निवेश निर्माण से लेकर उत्पादन, लॉजिस्टिक्स संचालन और डिजिटल सेवाओं तक रोजगार की बहु-स्तरीय श्रृंखला तैयार करने की योजना का हिस्सा हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार का लक्ष्य प्रदेश में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर विकास और रोजगार को समानांतर गति देना है। औद्योगिक क्लस्टर: उत्पादन से लेकर रोजगार की पूरी चेन औद्योगिक क्लस्टर मॉडल की सबसे बड़ी ताकत उसकी बहु-स्तरीय रोजगार क्षमता है। एक एंकर यूनिट स्थापित होते ही उसके आसपास कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, मशीनरी रखरखाव, परिवहन, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर की दर्जनों सहायक इकाइयां विकसित होती हैं। यही कारण है कि बजट 2026-27 में एमएसएमई सेक्टर के लिए ₹3,822 करोड़ (19% वृद्धि) और वस्त्रोद्योग के लिए ₹5,041 करोड़ का प्रावधान केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि रोजगार विस्तार की संरचनात्मक रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने वस्त्रोद्योग क्षेत्र में वर्ष 2026-27 के लिए 30,000 नए रोजगार सृजन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है, जो इस सेक्टर को प्रत्यक्ष नौकरी सृजन का प्रमुख केंद्र बनाता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास में हर एक प्रत्यक्ष रोजगार के साथ कई अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़ते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक गतिशीलता आती है। इसके साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन के लिए ₹575 करोड़ तथा निवेश प्रोत्साहन नीति के क्रियान्वयन हेतु ₹1,000 करोड़ का प्रावधान बड़े और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। बड़े उद्योगों की स्थापना से दीर्घकालिक, स्थायी और कौशल आधारित रोजगार अवसरों का मजबूत आधार तैयार होगा। लॉजिस्टिक्स हब: सड़क से सप्लाई चेन तक रोजगार की नई राह इसी तरह एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर बढ़ा निवेश केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिलाने की रणनीति का हिस्सा है। जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए ₹1100 करोड़, आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक हेतु ₹1250 करोड़ और विन्ध्य एक्सप्रेसवे व अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए ₹500-500 करोड़ के प्रावधान से माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ता है। जहां सड़क पहुंचती है, वहां वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, कोल्ड स्टोरेज और वितरण केंद्र भी विकसित होते हैं। यह सेक्टर स्वभाव से श्रमप्रधान है। ड्राइवर, लोडिंग-अनलोडिंग स्टाफ, वेयरहाउस ऑपरेटर, सप्लाई चेन मैनेजर, डेटा ऑपरेटर और आईटी सपोर्ट कर्मियों तक रोजगार के विविध अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही छोटे ट्रांसपोर्टर, पैकेजिंग इकाइयां, मरम्मत कार्यशालाएं और स्थानीय सेवा प्रदाता भी इस आर्थिक गतिविधि से जुड़ते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार की एक विस्तृत श्रृंखला बनती है।  डेटा सेंटर और एआई: तकनीक से खुलेंगे नए करियर के दरवाजे बजट में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए ₹2,059 करोड़ का प्रावधान है जो पिछले वर्ष के बजट से 76% अधिक है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेजी से डिजिटल और तकनीक-आधारित दिशा दी जा रही है। ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ के लिए ₹225 करोड़ और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर हेतु ₹95.16 करोड़ की व्यवस्था केवल तकनीकी ढांचा मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल है। प्रदेश में पांच गीगावॉट क्षमता के पांच डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की योजना के लिए ₹100 करोड़ का प्रारंभिक बजट प्रस्तावित है। यह राशि आने वाले वर्षों में आईटी सेक्टर को नई ऊंचाई दे सकती है। डेटा सेंटर स्थापित होने पर केवल आईटी इंजीनियर या डेटा विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि नेटवर्क मैनेजर, क्लाउड आर्किटेक्ट, साइबर सुरक्षा विश्लेषक, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर और तकनीकी सपोर्ट स्टाफ जैसे अनेक प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा डेटा सेंटर के संचालन के लिए निरंतर बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, सुरक्षा, फायर सेफ्टी और मेंटेनेंस सेवाओं की जरूरत होती है। इनसे जुड़े तकनीकी और सहायक क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे। बहुस्तरीय रोजगार मॉडल को बढ़ावा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया निवेश केवल सड़क, भवन या औद्योगिक परिसर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रोजगार की एक पूरी श्रृंखला को जन्म देता है। शुरुआत निर्माण चरण से होती है, जहां इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, मशीन ऑपरेटर और बड़ी संख्या में श्रमिकों को तत्काल काम मिलता है। इसके बाद जब औद्योगिक इकाइयां उत्पादन शुरू करती हैं, तो फैक्ट्री कर्मियों, सुपरवाइजर, तकनीकी स्टाफ और प्रबंधन पेशेवरों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसी के साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन और वितरण सेवाएं सक्रिय होती हैं, जो सप्लाई चेन के हर स्तर पर नई नौकरियां जोड़ती हैं। इतना ही नहीं, इन गतिविधियों से स्थानीय बाजार, छोटे व्यवसाय, मरम्मत सेवाएं, पैकेजिंग और सहायक उद्योग भी लाभान्वित होते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार का दायरा और व्यापक हो जाता है।

वर्ष 2017 के मुकाबले 2025 में 89 प्रयोगशालाएं हो रहीं संचालित, 86 सेंटिनल और तीन एपेक्स प्रयोगशालाएं शामिल

योगी सरकार ने संचारी रोग नियंत्रण में रचा इतिहास, मृत्यु दर में आई उल्लेखनीय कमी  डेंगू, मलेरिया और एईएस/जेई पर किया प्रभावी प्रहार, डिजिटल सर्विलांस पोर्टल से मॉनीटरिंग हुई मजबूत वर्ष 2017 के मुकाबले 2025 में 89 प्रयोगशालाएं हो रहीं संचालित, 86 सेंटिनल और तीन एपेक्स प्रयोगशालाएं शामिल – एईएस से होने वाली मौतों में 99 प्रतिशत और जेई में 98 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों के दौरान संचारी रोगों के नियंत्रण को लेकर कई व्यापक और परिणामकारी कदम उठाए हैं। योगी सरकार ने डेंगू, मलेरिया तथा एईएस/जेई जैसे गंभीर रोगों पर प्रभावी प्रहार करते हुए जांच, उपचार और मॉनीटरिंग व्यवस्था को मजबूत बनाया। साथ ही डिजिटल सर्विलांस, प्रयोगशालाओं के विस्तार और त्वरित उपचार व्यवस्था से मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। 16 संक्रामक रोगों की 34 हजार से अधिक लैब में हो रही जांच स्वास्थ्य सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्रदेश में एकीकृत डिजिटल सर्विलांस पोर्टल (आईडीएसपी) विकसित कर रोगों की निगरानी को सशक्त किया गया है। पोर्टल पर कुल 34,334 लैब पंजीकृत हैं, जिनमें 31,885 सरकारी तथा 2,439 गैर-सरकारी लैब शामिल हैं। इन लैबों के माध्यम से 16 संक्रामक रोगों और 6 वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज की नियमित जांच की जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए समयबद्ध सूचना उपलब्ध होने से रोगों की पहचान और नियंत्रण की कार्रवाई तेज हुई है। यही वजह है कि डेंगू की जांच सुविधाओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 में जहां 29 जनपदों में मात्र 36 प्रयोगशालाएं संचालित थीं, वहीं वर्ष 2025 तक प्रदेश के सभी जनपदों में 89 प्रयोगशालाएं क्रियाशील हो चुकी हैं। वर्तमान में 86 सेंटिनल प्रयोगशालाएं और तीन एपेक्स प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इससे डेंगू की उन्नत जांच सुविधा प्रदेशभर में उपलब्ध कराई जा रही है। जांच और उपचार व्यवस्थाओं में सुधार से डेंगू की मृत्यु दर जहां वर्ष 2017 में 0.91 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 0.06 रह गई है। इस अवधि में मृत्यु दर में लगभग 94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। एईएस से होने वाली मौतों में 99 प्रतिशत और जेई में 98 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई सचिव ने बताया कि मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2017 में सूचित मलेरिया रोगियों की संख्या 32,342 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 14,688 रह गई। इस प्रकार कुल रोगियों में लगभग 55 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं जांचों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में 46.69 लाख मलेरिया जांचें की गई थीं, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.54 करोड़ तक पहुंच गया है। यानी जांचों की संख्या में 229 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह एईएस/जेई नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2017 से लेकर 2025 तक एईएस रोगियों की संख्या में 85 प्रतिशत की कमी आई है। एईएस से होने वाली मौतों की संख्या में 99 प्रतिशत तथा रोग मृत्यु दर में 94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी प्रकार जेई के रोगियों की संख्या में 96 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि जेई से होने वाली मृत्यु में 98 प्रतिशत और रोग मृत्यु दर में 76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह उपलब्धि विशेष रूप से पूर्वांचल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां कभी एईएस/जेई गंभीर चुनौती बने हुए थे। ब्लॉक स्तरीय इंसेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर से इलाज की क्षमता हुई सुदृढ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में सूबे की कमान संभालने के बाद दिमागी बुखार के समूल उन्मूलन को उच्च प्राथमिकता देते हुए प्रभावित जिलों में व्यापक प्रयास सुनिश्चित किए। इसमें गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी सघन चिकित्सा इकाइयों में वेंटिलेटर सुविधा स्थापित की गई। इसके अतिरिक्त पीआईसीयू, ब्लॉक स्तरीय इन्सेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, वेंटिलेटर, सेंटिनल तथा एपेक्स प्रयोगशालाओं की स्थापना कर उपचार क्षमता को सुदृढ़ किया गया। इससे गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सका। योगी सरकार ने संचारी रोगों की रोकथाम के लिए केवल चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि जागरूकता अभियानों, स्वच्छता कार्यक्रमों और सामुदायिक सहभागिता पर भी विशेष बल दिया। गांव-गांव सर्वे, लार्वा निरोधक छिड़काव, फॉगिंग तथा आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर संपर्क अभियान चलाए गए। डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की त्वरित पहचान कर नियंत्रण उपायों को प्रभावी बनाया गया, जिससे संचारी रोगों पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया गया।

बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय

बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय  लखनऊ  बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह बीते साल से 19 प्रतिशत अधिक है। इससे उत्तर प्रदेश के नए उद्यमियों को काफी संबल मिलेगा। बजट में ऋण गारंटी को लेकर बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे बड़ी जमानत के बिना भी छोटे उद्यमियों को ऋण लेने में आसानी होगी। शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ  उत्तर प्रदेश के बजट में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक धनराशि है। अब ₹27,103 करोड़ तय किए गए हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर रही है। प्रो मेनका सिंह, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी   देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट्स इकाइयां प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस बार के बजट में इस क्षेत्र को बढ़ाना देने के ज्यादा धन दिया गया है। प्रो दीप्ति तनेजा, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी

मानसरोवर और भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक

मुख्यमंत्री ने रुद्राभिषेक-जलाभिषेक कर की प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना महाशिवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में सीएम योगी ने किया देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक मानसरोवर और भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक गोरखपुर  देवाधिदेव महादेव भोले शंकर की उपासना के पावन पर्व महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सुबह गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने अंधियारी बाग स्थित प्राचीन मानसरोवर मंदिर और भरोहिया के पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में भी दर्शन, पूजन व दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक किया और चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।   रविवार सुबह जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में मठ के प्रथम तल पर स्थित शक्ति मंदिर में भगवान भोले शंकर का दुग्ध, दही, घी, मधु और शर्करा से पंच स्नान कराया। इसके बाद विधि विधान से रुद्राभिषेक किया। मठ के पुरोहित एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता के रुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक का अनुष्ठान पूर्ण कराया। रुद्राभिषेक के बाद मुख्यमंत्री ने महादेव भगवान शिव से चराचर जगत के मंगल की प्रार्थना की।  गोरक्षपीठ में रुद्राभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधियारी बाग के प्राचीन मानसरोवर मंदिर भी गए। यहां उन्होंने भोलेनाथ का दर्शन पूजन किया। भगवान शिव को पूजन सामग्री अर्पित कर, पंचस्नान कराकर दूध और जल से उनका अभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए पूजन, अभिषेक का अनुष्ठान हवन और आरती के साथ पूर्ण हुआ। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास आदि भी उपस्थित रहे।  इसी क्रम में महाशिवरात्रि पर सीएम योगी रविवार दोपहर बाद भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर पहुंचे। यहां बाबा पितेश्वरनाथ का दर्शन, पूजन व विधि विधान से जलाभिषेक कर संपूर्ण मानव जाति के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना की। पांडवकालीन मान्यता वाले पितेश्वरनाथ मंदिर का गोरक्षपीठ से गहरा नाता है। गोरक्षपीठाधीश्वर हर महाशिवरात्रि यहां जलाभिषेक करने आते हैं। जलाभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री ने भरोहिया में शिव मंदिर के सामने स्थित गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ के परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। बच्चों से बातचीत कर उन्हें आशीर्वाद दिया। स्थानीय खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाई और उनका उत्साहवर्धन किया। भरोहिया में मुख्यमंत्री के आगमन पर विधायक फतेह बहादुर सिंह, भरोहिया के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संजय सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

अखिलेश यादव बोले- CM योगी का रवैया सवालों के घेरे में, शंकराचार्य विवाद पर तीखा प्रहार

लखनऊ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा सीएम योगी को लेकर दिए गए बयान से मैं सहमत हूं। राजधानी लखनऊ में पार्टी ऑफिस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कोई मुख्यमंत्री, जो अपने आप को योगी कह रहे हों, पूजनीय शंकराचार्य को लेकर ऐसा कह सकते हैं क्या? इतना व्यवहार खराब हो सकता है? अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि हम शंकराचार्य से 100 प्रतिशत सहमत हैं। रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सिद्दीकी को सपा की सदस्यता ग्रहण कराई। उनके साथ उनकी पत्नी और 7 अन्य नेताओं ने भी रविवार को समाजवादी पार्टी का दामन थामा। नसीमुद्दीन सिद्दीकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। मायावती का साथ छोड़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की थी। पिछले महीने उन्होंने कांग्रेस से भी इस्तीफा दे दिया था। सिद्दीकी ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अलग-अलग दलों में रहते हुए भी हमेशा मुलायम सिंह यादव से प्रभावित रहा। इसी तरह मैंने हमेशा अखिलेश यादव को ही अपना नेता माना। पिछले महीने, नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस्तीफा भेजकर पार्टी छोड़ने का कारण व्यक्तिगत बताया था। अपने लिखित इस्तीफा पत्र में सिद्दीकी ने कहा कि वे ‘अपरिहार्य कारणों’ से अपनी प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों का त्याग कर रहे हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा से की और मायावती सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।

एमएसएमई को आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट, पैदा करेगा रोजगार के लाखों अवसर

96 लाख इकाइयों को मजबूती, तीन करोड़ परिवारों की आजीविका को मिलेगा स्थायित्व क्लस्टर, आधारभूत संरचना और बाजार विस्तार से प्रतिस्पर्धी बनेगा प्रदेश का उद्योग लखनऊ, प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को बजट 2026-27 में जिस प्राथमिकता के साथ रखा गया है, वह आने वाले वर्षों की औद्योगिक तस्वीर को बदलने का संकेत देता है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो करीब तीन करोड़ परिवारों की आजीविका का आधार हैं। इस बजट में 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बीते साल की तुलना में 19 प्रतिशत की वृद्धि केवल बजटीय विस्तार ही नहीं बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। प्रदेश सरकार एमएसएमई को अनुदान आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रतिवर्ष एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पांच वर्षों में पांच लाख से अधिक नई इकाइयां खड़ी हो सकती हैं जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित होने का अनुमान है। बैंक ऋण और सरकारी प्रोत्साहन के संयोजन से निवेश का मल्टीप्लायर इफेक्ट्स (गुणक) कई गुना बढ़ सकता है। एमएसएमई क्षेत्र की सबसे बड़ी बाधा ऋण हासिल करना है। छोटे उद्यमियों के पास पर्याप्त जमानत (कोलैटरल) न होने से वे औपचारिक बैंकिंग तंत्र से दूर रह जाते हैं। बजट में ऋण गारंटी तंत्र को सुदृढ़ करने और बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे बड़ी जमानत के बिना ऋण लेने की राह आसान होगी। इसका सीधा असर यह होगा कि बड़ी संख्या में इकाइयां असंगठित क्षेत्र से निकलकर औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगी जिससे कर संग्रह, पारदर्शिता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को भी बजट में बल मिला है। सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र के लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। समूह आधारित औद्योगिक क्षेत्रों में साझा मशीनरी, परीक्षण प्रयोगशालाएं और सामान्य सुविधाएं उपलब्ध होने से उत्पादन लागत घटेगी और गुणवत्ता में सुधार होगा। इससे छोटे उद्यम बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनेंगे। ओडीओसी के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था स्थानीय व्यंजनों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीति को मजबूती देती है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यदि प्रत्येक नया उद्यम औसतन पांच से 10 लोगों को रोजगार देता है तो केवल इस योजना से ही हजारों युवाओं के लिए अवसर बन सकते हैं। यह ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि को नई गति देगा। प्रत्यक्ष प्रावधानों के अलावा बजट में आधारभूत संरचना पर निरंतर निवेश भी एमएसएमई के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन है। एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक गलियारे और बेहतर विद्युत आपूर्ति से उत्पादन लागत घटती है और समयबद्ध आपूर्ति संभव होती है। परिवहन और लॉजिस्टिक सुविधा बेहतर होने से छोटे उद्योग भी निर्यात बाजार की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। व्यापार सुगमता सुधार, एकल खिड़की प्रणाली और ऑनलाइन स्वीकृति व्यवस्था निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर रही है। आज जब 96 लाख इकाइयां तीन करोड़ परिवारों की आजीविका का आधार हैं, तब लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने का है। बजट 2026-27 इस दिशा में बहुस्तरीय हस्तक्षेप का संकेत देता है। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश का एमएसएमई क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि रोजगार सृजन का सबसे बड़ा इंजन भी साबित होगा।

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