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उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है – सीएम योगी आदित्यनाथ

विरासत और विकास के साथ उत्तर प्रदेश का आगे बढ़ना आधुनिक रामराज्य की अनुभूति हैं – मुख्यमंत्री   एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष केवल जनता को गुमराह कर रहा है, प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है – मुख्यमंत्री   उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है – सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज राज्यपाल के अभिभाषण पर व्यक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन सत्यापन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे विरोध पर आपत्ति जताई और कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तथा भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 7 के माध्यम से यदि किसी नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है तो निर्वाचन आयोग उसका सत्यापन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को माता के नाम, शंकराचार्य के नाम और एसआईआर के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है, जबकि सरकार का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। यदि संबंधित व्यक्ति स्वयं उपस्थित होकर यह प्रमाणित करता है कि वह जीवित है और आपत्ति गलत है, तो वह आपत्ति तत्काल निरस्त कर दी जाती है। मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि विपक्ष पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन क्यों नहीं कर रहा है।  मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एब्सेंट, शिफ्टिंग और डेथ (एएसडी) श्रेणी में कुल 2 करोड़ 88 लाख से अधिक नाम ऐसे हैं जो सत्यापन में सामने नहीं आए या जिनके संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हुई। इनमें 46 लाख 23 हजार मृतकों के नाम शामिल हैं। लगभग 1 करोड़ 39 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन उनके नाम सूची में बने हुए थे। 25 लाख 47 हजार डुप्लिकेट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जबकि लगभग 80 लाख नाम एब्सेंट श्रेणी में हैं। अन्य नाम विभिन्न श्रेणियों में आते हैं। उन्होंने सरकार की बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं का उल्लेख करते हुए माघ मेला की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 के कुंभ में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे, जबकि वर्तमान माघ मेला में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने इसे बेहतर सरकार के प्रति जनता के विश्वास का प्रमाण कहा। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का स्पष्ट विवरण था। यदि विपक्ष ने उसे ध्यानपूर्वक सुना होता तो ऐसे प्रश्न नहीं उठते। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है, अपराधियों में भय है, गरीबों को सम्मान मिल रहा है, किसान सशक्त हो रहे हैं, महिलाओं में सुरक्षा की भावना है और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है और प्रदेश में विकास की नई चेतना दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने इसे आधुनिक रामराज्य की अनुभूति बताते हुए कहा कि प्रदेश में विरासत और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। सरकार जन कल्याण, रोजगार सृजन, निवेश विस्तार और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से राज्य को सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और हमारी सरकार उसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने सदन के सभी सदस्यों, अध्यक्ष और चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

ओडीओपी से ई-केसीसी तक, यूपी का ग्रामीण उत्थान बना राष्ट्रीय मिसाल: विधानसभा में सीएम योगी

विधानसभा में सीएम योगी (भाग-9) कांग्रेस और सपा ने किया किसानों को कर्जदाता बनाने का महापाप: सीएम योगी 13 से 36 लाख करोड़ तक पहुँची यूपी की अर्थव्यवस्था, बिना नया टैक्स लगाए विकास की रफ्तार तेज: मुख्यमंत्री ओडीओपी से ई-केसीसी तक, यूपी का ग्रामीण उत्थान बना राष्ट्रीय मिसाल: विधानसभा में सीएम योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि औपनिवेशिक काल ने जिस किसान को उत्पादक से उपभोक्ता बनाया, उसी किसान को बाद की कांग्रेस और सपा सरकारों ने कर्जदाता बना देने का पाप किया। उन्होंने कहा कि जिस कारीगर में उद्यमी बसता था, उसे निराश-हताश कर पलायन के लिए मजबूर कर दिया गया। जो व्यापारी उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश को जोड़ने वाला सेतु था, उसे भय और अव्यवस्था में धकेल दिया गया। परिणामस्वरूप प्रदेश में हताशा-निराशा, किसानों की दुर्दशा और एमएसएमई की बंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में राज्य ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। स्पष्ट कृषि नीति ने परिस्थितियाँ पलट दी हैं। पहले लागत अधिक और उत्पादन कम था, बिचौलियों का वर्चस्व था। आज लागत कम, उत्पादन अधिक और उपज का पूरा लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में उत्तर प्रदेश ने अन्नदाता को फिर से केंद्र में स्थापित किया है और कृषि-अर्थव्यवस्था को दोहरी गति से आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब नई ऊँचाइयों पर पहुँच चुकी है, जहाँ कभी प्रदेश की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं आज यह 36 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुँच गई है। देश की कुल जीडीपी में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। फिस्कल डेफिसिट को 3 प्रतिशत से नीचे लाने में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है और यह टैक्स चोरी तथा रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी नियंत्रण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बिना कोई नया टैक्स लगाए प्रदेश के विकास को गति दी गई है। नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत किसानों और कारीगरों की सृजनशीलता के बल पर खड़ा हुआ देश है। ग्राम स्वराज की यह परंपरा सदैव हमारी पहचान रही है। औपनिवेशिक काल ने हमारे उत्पादक किसानों को उपभोक्ता बनने पर विवश किया और बाद में पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने अन्नदाता को कर्जदाता बनाने का पाप किया, जबकि कारीगरों और उद्यमियों को हताशा-निराशा के अंधकार में धकेल दिया। उस समय प्रदेश में पलायन, बेरोज़गारी और एमएसएमई के पतन का माहौल था, निवेशकों की धारणा पूरी तरह नकारात्मक थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में किसानों के हित में किए गए कार्य अभूतपूर्व हैं। स्पष्ट कृषि नीति के परिणामस्वरूप अन्नदाता को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिला है। बिचौलियों को हटाकर डीबीटी के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उत्पादों में गुणवत्ता सुधार पर विशेष बल दिया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम है, दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और गन्ना उत्पादन में भी दोगुनी क्षमता पर पहुँच चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जो प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रति माह की सहायता प्रदान कर रहा है। आज देश के कुल गन्ना उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से आता है। 2000 से 2017 तक मात्र 2.14 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ था, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में 3 लाख 05 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधे किसानों के खातों में भेजा गया है—यानी आधे समय में 90,000 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राशि किसानों को प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज 122 चीनी मिलें संचालित हैं और किसान को 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा रहा है। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है, जिसमें भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। आज चीनी मिलें घाटे का क्षेत्र नहीं, बल्कि लाभकारी उद्योग बन चुकी हैं। छाता और बागपत की चीनी मिलों को इंटीग्रेटेड परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य में 89 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं। एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स के माध्यम से किसानों की उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। कृषि वैल्यू चेन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर व्यापक कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हर खेत को पानी’ के संकल्प के तहत नहरों, पाइपलाइन और माइक्रो इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रदेश की 31 बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं। निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है और डीजलचालित नलकूपों के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय और लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का निर्माण प्रदेश के कृषि विकास को नई दिशा देगा। ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया को सरल बनाकर पाँच मिनट में पूरा किए जाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। एक जिला–एक उत्पाद योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी ने कारीगरों, शिल्पकारों और किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर लोकल-टू-ग्लोबल की अवधारणा को साकार कर रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को मिल रहा है। सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ओडीओपी के कारण आज इसकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मांग अत्यधिक बढ़ी है। प्रदेश के 77 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे उनके लिए वैश्विक बाजार में प्रमाणन की आवश्यकता समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना शुरू की … Read more

सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है, मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री

शंकराचार्य की परंपरा मर्यादा से चलती है, मनमर्जी से नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  सीएम ने कहा, कानून सबके लिए समान, मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है, मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री  नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा व व्यवस्था का सम्मान करना चाहिएः सीएम योगी  लखनऊ  विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य विवाद पर पूरी मजबूती से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सनातन परंपरा की मर्यादाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य का पद भारत की सनातन परंपरा में सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह कोई सामान्य उपाधि नहीं है, जिसे कोई भी व्यक्ति स्वयं ग्रहण कर ले। सपा शासनकाल में हुई वाराणसी की पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों हुई?  नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा और व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। माघ मेला में मौनी अमावस्या के अवसर पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अवसरों पर कड़ी व्यवस्था लागू करनी होती है। प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित होते हैं और उनका पालन सभी के लिए अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे श्रद्धालुओं की जान खतरे में पड़ सकती है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून सबके लिए समान है। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता। हम मर्यादित लोग हैं, कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून के शासन का पालन करना भी जानते हैं, पालन करवाना भी जानते हैं। दोनों चीजों को एक साथ लागू करवाना जानते हैं, लेकिन इसके नाम पर गुमराह करना बंद करिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी, उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। इन चारों पीठों की अपनी-अपनी परंपरा, दायित्व और आध्यात्मिक आधार हैं। इन पीठों से चार वेद जुड़े हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। प्रत्येक वेद का अपना महावाक्य है- “प्रज्ञानं ब्रह्म”, “अहम् ब्रह्मास्मि”, “तत्त्वमसि” और “अयमात्मा ब्रह्म”। ये महावाक्य भारतीय दर्शन की आत्मा हैं और साधना की उच्चतम अवस्था का बोध कराते हैं। मैं ही ब्रह्म हूं, कोई भी साधक जब अपनी साधना की पराकाष्ठा में पहुंचता है तो उसको इस बात की अनुभूति होती है। यही उपनिषदों का उद्घोष भी है।  झूठ को मुद्दा बनाना विपक्ष की प्रवृत्ति मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बार-बार एक ही बात को दोहराकर उसे मुद्दा बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि जो विषय वास्तविक मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर विवाद का रूप दिया गया। सदन में तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि भ्रम फैलाने का प्रयास।

प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नियुक्तियां

परिणाम ही मापदंड, स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ व्यापक सुधारः मुख्यमंत्री योगी  इन्सेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज के तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हुई गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हो रहे एम्स, हर जिले में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नियुक्तियां  लखनऊ  मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर स्पष्ट कहा कि सरकार के लिए घोषणाएं नहीं बल्कि परिणाम ही वास्तविक मापदंड हैं। विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कोई भी बात कहने से पहले यह देखना चाहिए कि उसका परिणाम क्या है। केवल लंबी-चौड़ी बातें करने से क्या लाभ यदि परिणाम शून्य हो? इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों, इन्सेफेलाइटिस पर नियंत्रण, मेडिकल ढांचे के विस्तार और भविष्य की स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था की योजनाओं का विस्तृत उल्लेख किया। माफिया की तरह इंसेफेलाइटिस पर भी किया प्रभावी नियंत्रण मुख्यमंत्री योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि इन्सेफेलाइटिस की बीमारी के कारण आपके जिले के भी बच्चे काल-कवलित होते थे। आपने इस बीमारी का पूरा दौर देखा है। चार बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, लेकिन उन बच्चों का हाल-चाल लेने कोई नहीं गया। उपचार और सुविधाएं अलग विषय हैं, परंतु संवेदनशीलता भी आवश्यक होती है। आज विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि इन्सेफेलाइटिस से बच्चों को बचाने का जो कार्य हुआ है, उसका श्रेय प्रधानमंत्री जी के गतिशील नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार को जाता है। यह भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की डबल इंजन सरकार की उपलब्धि है। हमने इन्सेफेलाइटिस पर वैसे ही प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है, जैसे प्रदेश में माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई की है। यह सरकार केवल माफिया पर ही नहीं, बल्कि मच्छरों से फैलने वाली घातक बीमारियों पर भी उसी दृढ़ता के साथ नियंत्रण करती है। इन्सेफेलाइटिस इसका एक उदाहरण है। बिना भेदभाव सभी को मिल रही चिकित्सा की सुविधा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की परिकल्पना हमारी सरकार ने आगे बढ़ाई। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हो चुकी है। 81वां मेडिकल कॉलेज अमेठी में प्रारंभ हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुछ नए मेडिकल कॉलेजों पर कार्य प्रगति पर है। प्रदेश में दो एम्स गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हो रहे हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं विकसित की गई हैं। डायलिसिस की सुविधा अब प्रत्येक जिले में निःशुल्क उपलब्ध है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ 46 लाख गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक निधि के संदर्भ में भी हमने लचीलापन दिखाने का प्रयास किया है, ताकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यदि कोई विधायक सिफारिश करते हैं तो बिना किसी भेदभाव के धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। न किसी की जाति देखी जाती है, न मत, न मजहब। हर जरूरतमंद के साथ सरकार खड़ी है। आईसीयू की व्यवस्था के संबंध में एक समय कुछ निजी अस्पतालों के विरुद्ध शिकायतें आई थीं। उस पर जांच कराई गई और संबंधित अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया। किंतु जो मामले लंबित थे, उन्हें पुनः धनराशि उपलब्ध कराई गई। किसी भी प्रकार की सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हर जरूरतमंद को सहायता दी जा रही है। 42 हजार पैरामेडिक्स की हुई भर्ती मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर नियंत्रण आवश्यक है। यदि सरकार सीजीएचएस दरों के अनुसार भुगतान कर रही है, तो अस्पतालों को भी सहयोग करना चाहिए। शेष भुगतान सरकार उपलब्ध कराएगी। यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पैरामेडिकल स्टाफ का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक 41,868 पैरामेडिक्स की भर्ती की जा चुकी है, जिन्होंने विभिन्न संस्थानों में कार्यभार ग्रहण किया है। चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में 4,110 से अधिक भर्तियां हुई हैं। कुल मिलाकर 45,978 नियुक्तियां स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में की गई हैं। सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में आईसीयू, मिनी आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, डायलिसिस यूनिट और ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से आपात चिकित्सा सेवाएं और अधिक सुलभ बनाई गई हैं। भविष्य की दिशा में बढ़ रहीं फार्मा गतिविधियां  मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की दिशा में सरकार एआई, जीनोमिक्स, टेलीमेडिसिन, मेडटेक और हेल्थटेक पर विशेष ध्यान दे रही है। बजट में भी इन क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश केवल स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा बाजार ही नहीं बनेगा बल्कि फार्मा प्रोडक्शन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। ललितपुर में फार्मा पार्क की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव में देश-विदेश के शीर्ष फार्मा उद्यमियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है, जिससे मेडिकल उपकरण सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दरों पर उपलब्ध हो सकें। इन सभी प्रयासों के माध्यम से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है, और सरकार इस दिशा में निरंतर गति से कार्य कर रही है।

सदन में बवाल पर बोले योगी: राज्यपाल ही नहीं, मां का भी किया गया अपमान

अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमानः योगी बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष के आचरण को बताया सनातन के विपरीत लखनऊ  राज्यपाल माननीय आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान शुक्रवार को हुए हंगामे पर विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के आचरण से न केवल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख, बल्कि मातृ शक्ति का भी अपमान हुआ। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष के आचरण को सनातन की परंपरा के विपरीत बताया। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि माननीय राज्यपाल यहां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आई थीं। उनका यह कार्यक्रम अचानक नहीं थोपा गया था, दलीय बैठकों में इसकी चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आप श्रेष्ठ कुल में पैदा हुए, ब्राह्मण हैं, वयोवृद्ध हैं और सदन में वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं, इसीलिए आपकी बात का बुरा नहीं माना जाता, लेकिन यह आचरण उचित नहीं है। आप अपने वक्तव्य में सनातन की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन धर्म की परंपरा में मां की उम्र या अपनी उम्र से बड़ी महिला को मां के समान सम्मान देने का विधान है। इस बारे में महर्षि वेदव्यास ने हमें हजारों साल पहले बताया है। वह सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्याकार हैं। उन्होंने वेदों को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ी को दिया। उनका कार्यकाल पांच हजार वर्ष पूर्व था, तब भारत में सबसे विकसित सभ्यता थी, तब भारत दुनिया को दिशा दिखा रहा था। महर्षि वेदव्यास जी ने कहा था.. ‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया।’ यानी मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां  के समान कोई रक्षक नहीं और मां के समान कोई प्रिय नहीं है।

1 अप्रैल से जेब पर असर, उत्तर प्रदेश में देशी शराब के रेट बढ़े

लखनऊ  यूपी कैबिनेट ने प्रदेश की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. 1 अप्रैल से यूपी में देसी शराब के दाम बढ़ जाएंगे. देसी शराब के दाम में लगभग 5 रुपए बढ़ेंगे. 36% अल्कोहल वाली देसी शराब 165 से बढ़कर 173 रुपए की हो जाएगी. अन्य किस्म की शराब के दामों में कोई संशोधन नहीं हुआ. यूपी सरकार ने 2026-27 के लिए आबकारी को 71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य दिया है. वहीं शहरी क्षेत्र में दुकानों का देसी शराब का कोटा घटेगा. शराब की फुटकर दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से होगा. अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों की लाइसेंस फीस 7.5% बढ़ाई गई है. नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में लो अल्कोहलिक स्ट्रैंथ बेवरेज बियर, वाइन और आरटीडी के बाहर लाइसेंस मिल सकेंगे. यूपी में निर्मित शराब और आबकारी के अन्य उत्पादों को विदेश में भी निर्यात होगा. इसके अलावा यूपी में एक अप्रैल से नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब 10 से 30 रुपये तक महंगी हो जाएगी. देशी शराब के यह दाम प्रति बोतल के हिसाब से बढ़े हैं, इसी आधार पर हाफ क्वॉर्टर और बच्चा की रेट में भी बढ़ोत्तरी हुई है. यानी कोटा 7.5 फीसदी बढ़ा है और 7.5 फीसदी ही लाइसेंस शुल्क भी बढ़ा है. 7.5 फीसदी की यही बढ़ोतरी अंग्रेजी शराब की तरह बीयर पर भी लागू होगी. एक अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति में कई नए प्रावधान किए गए है. कोटेदारों (अनुज्ञापी) को राहत देने वाली इस नीति में पहली बार देसी शराब में 100 एमएल का मिनिएचर ‘बच्चा’ उतारा गया. 42.8 डिग्री तीव्रता वाला यह ‘बच्चा’ बाजार में 50 रुपये का बिकेगा.  

वंदे मातरम विवाद पर गरजे सीएम योगी, कहा- राष्ट्रगान का अपमान बर्दाश्त नहीं

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कहा कि 6 करोड़ से अधिक की आबादी को पिछले आठ वर्षों के अंदर डबल इंजन सरकार के द्वारा किए गए सतत प्रयास से बहुआयामी गरीबी की रेखा से ऊपर किया गया है। उन्होंने कहा कि ये नीति आयोग के वे आंकड़े हैं जो उन्होंने पूरे देश भर में सरकार की विकासपरक योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के परिणामस्वरूप सामने आए हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि उनको अन्य योजनाओं से वंचित कर दिया जाए। उनको जो राशन की सुविधा मिल रही है, वह यथावत मिलेगी। उन्हें स्वास्थ्य की सुविधाएं जो मिल रही हैं, वे यथावत मिलती रहेंगी और शासन की अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं वैसे ही मिलती रहेंगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कानून चंद हाथों की जागीर बन गई थी। कर्फ्यू और दंगा आम बात हो गई थी, पर्व आस्था नहीं आशंका के पर्याय बन गए थे, पुलिस का मनोबल टूटा था, न बेटी सुरक्षित थी न व्यापारी। उन्होंने कहा कि आज उपद्रव नहीं उत्सव प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में आज भय का वातावरण नहीं, बल्कि लोगों के मन में आस्था का भाव है। कर्फ्यू कल्चर की जगह जीरो टॉलरेंस कल्चर ने ले ली है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वालों को भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है। बजट सत्र के दौरान विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने सपा और कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने राज्य में विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान दोनों में बाधा डाली है। मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वालों को भारतीय धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। कुछ राजनीतिक समूह भारत से खाते-पीते हैं लेकिन वंदे मातरम गाने से इनकार करते हैं। उन्होंने सपा के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों पर अयोध्या और मथुरा के विकास को रोकने और कांवड़ यात्रा और दीपोत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश, आस्था का केंद्र होने के नाते, अब एक ऐसे मॉडल का गवाह बन रहा है जहां विकास और विरासत पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य दंगा-प्रधान अर्थव्यवस्था से मंदिर-प्रधान अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हुआ है। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पूर्व के वर्षों में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते थे, वहीं इस वर्ष के माघ मेले में लगभग 21 करोड़ तीर्थयात्रियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह बेहतर कानून व्यवस्था में बढ़ती जन आस्था को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। कानून प्रवर्तन सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब 12 कार्यरत फोरेंसिक प्रयोगशालाएं हैं, जबकि पहले केवल दो या तीन ही थीं। इसके साथ ही लखनऊ में एक राज्य फोरेंसिक संस्थान की स्थापना भी की गई है। प्रत्येक जिले में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं और सभी पुलिस थानों में साइबर डेस्क कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 60,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है, पीएसी इकाइयों का पुनर्गठन किया गया है और महिला पीएसी बटालियन का गठन किया गया है, और कई अन्य बटालियनों का गठन प्रक्रियाधीन है।

अयोध्या कचहरी में बम की सूचना से अफरा-तफरी, जांच में जुटी पुलिस

अयोध्या   राम नगरी अयोध्या में कचहरी को बम से उड़ाए जाने की धमकी से शुक्रवार की दोपहर हड़कंप मच गया। आनन-फानन में दोपहर पौने एक बजे सूचना पर मौके पर बड़ी संख्या में फोर्स पहुंच गई। कचहरी को खाली कर कर सर्च अभियान चलाया जा रहा है। बमरोधी दस्ते, स्नेफर डॉग्स के साथ सर्च अभियान में शामिल है।वरिष्ठ अफसर ने मौके पर पहुंचकर सभी अदालतों एवं अधिवक्ताओं के के बस्ते को खाली करा लिया।लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह की कोई अप्रिय सूचना नहीं मिली है। एक फोटो स्टेट की दुकान के पास लावारिस झोले को भी चेक किया गया।  

जनसंख्या से जनशक्ति तक: ह्यूमन कैपिटल के अधिकतम उपयोग की नई रणनीति

लखनऊ.   उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्पष्ट संकेत दिया है कि वह केवल जनसंख्या के आकार पर नहीं, बल्कि उसे उत्पादक जनशक्ति में बदलने की ठोस रणनीति पर काम कर रही है। बजट का केंद्रीय विचार ‘ह्यूमन कैपिटल’ यानि मानव पूंजी के अधिकतम उपयोग के जरिये प्रदेश को तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की विशाल युवा आबादी को तकनीक से लैस करके उन्हें ग्लोबल वर्कफोर्स का हिस्सा बनाना है। सरकार युवाओं को पारंपरिक शिक्षा की सीमाओं से बाहर निकालकर भविष्य की उन्नत तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने की दिशा में बड़े निवेश कर रही है।  ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 25 लाख युवाओं एवं छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रिएलिटी (एआर) और वर्चुअल रिएलिटी (वीआर) और एक्सटेंडेड रिएलिटी (ईआर) में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र और उद्योग के लिए आधुनिक तकनीकी कौशल विकसित करना और युवाओं को उन्नत एप्लीकेशन आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध करना है। डिग्री आधारित शिक्षा से आगे बढ़कर कौशल आधारित दक्षता विकसित करना है, जिससे कि प्रदेश का युवा वैश्विक कार्यबल का हिस्सा बन सके। लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में विश्वस्तरीय ‘यू हब’ की स्थापना कर स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की भी योजना है। डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में बजट के माध्यम से बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 5 गीगावाट क्षमता वाले 4 से 5 डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान किया गया है। वर्तमान में पूरे भारत की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.6 गीगावाट है, जबकि उत्तर प्रदेश इसे वैश्विक स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा को रोबोटिक्स हब के रूप में विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये के उत्तर प्रदेश रोबोटिक्स मिशन की शुरुआत की जा रही है। इससे प्रदेश में उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को गति मिलने की उम्मीद है। सरकार ने डेटा गवर्नेंस को भी विकास का आधार माना है। स्टेट डेटा अथॉरिटी की स्थापना कर विभिन्न विभागों के आंकड़ों में एकरूपता और रियल टाइम डेटा प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट डेटा सेंटर 2.0 का निर्माण प्रस्तावित है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनना है, जिसके लिए सटीक और विश्वसनीय डेटा को आधार बनाया जा रहा है। बजट में नारी शक्ति को आर्थिक शक्ति में बदलने पर भी विशेष बल दिया गया है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से लगभग 1 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं । इन समूहों और अन्य महिला उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करने के लिए सरकार देश और प्रदेश के प्रमुख स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट और बड़े बाजारों में शोरूम और डिस्प्ले सेंटर स्थापित करेगी । बड़े शहरों में लिए जाने वाली दुकानों और डिस्प्ले सेंटर का किराया पहले 3 साल तक प्रदेश सरकार वहन करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रथम चरण में प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एक मार्केट या शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाया जायेगा जहां महिला उद्यमियों के उत्पादों के विपणन की व्यवस्था होगी। इन दुकानों का संचालन शत-प्रतिशत महिलाओं के द्वारा किया जायेगा । यह बजट केवल वित्तीय प्रावधानों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनसंख्या को जनशक्ति में रूपांतरित करने की व्यापक विकास दृष्टि का खाका प्रस्तुत करता है।

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 16,000 लोगों को मिलेगा रोजगार

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना और पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 800 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा है, जिसके माध्यम से राज्य में 16,000 लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही विभाग की पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो प्रदेश की स्थापित इकाइयों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाकर उनके संचालन और विस्तार में सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 800 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य  खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और बैंक ऋण के माध्यम से लघु, कुटीर उद्यमों की स्थापना करने में सहयोग प्रदान करना है। योजना के तहत विभाग वर्ष 2026-27 में 40 करोड़ रुपये के बैंक ऋण के माध्यम से 800 नई इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य तय किया है, जिसके माध्यम से लगभग 16,000 रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री रोजगार योजना विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को लघु उद्यम स्थापित करने के लिए बैंकों से सब्सिडी आधारित ऋण उपलब्ध करवाती है। साथ ही विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण समेत अन्य जरूरी सहयोग प्रदान करता है। इससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के साथ उनका पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 10 करोड़ रुपये का प्रावधान पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों को मजबूती प्रदान करने के लिए बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान की सुविधा प्रदान करती है। योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित उद्यम इकाइयों को वित्तीय बोझ से राहत देकर उनकी निरंतरता और विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम स्वरोजगार योजना और ‘एक जिला एक उत्पाद’  जैसी पहल से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना है। योगी सरकार के ये कदम प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ विकसित उत्तर प्रदेश @ 2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ग्रामीण बिजली आपूर्ति से कृषि, डेयरी, कुटीर उद्योग और स्वरोजगार को मिला बढ़ावा

लखनऊ.  वर्ष 2017 से पहले बिजली की किल्लत से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के गांव अब जगमगा रहे हैं। योगी सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण को विकास की बुनियाद बनाया और योजनाबद्ध तरीके से हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया है। घर-घर बिजली कनेक्शन सुनिश्चित किया जा चुका है। प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में बिजली क्षेत्र को 65,926 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।   दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पारेषण और वितरण नेटवर्क को मजबूत किया गया है। जर्जर लाइनों को बदला गया और नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके बाद ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ के जरिए लाखों परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए गए। इससे ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदलती दिख रही है। अब गांवों में न केवल घरेलू रोशनी बल्कि कृषि और लघु उद्योगों को भी निर्बाध बिजली मिल रही है। संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना के अंतर्गत गांवों में वितरण तंत्र को और सुदृढ़ किया जा रहा है। पुराने कंडक्टर बदले जा रहे हैं, लो टेंशन एबी केबल बिछाई जा रही हैं और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। स्मार्ट मीटरिंग को भी तेजी से लागू किया जा रहा है जिससे कि बिजली चोरी पर अंकुश लगे और आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर हो। इन कदमों से ग्रामीण क्षेत्रों में लो वोल्टेज की समस्या में कमी आई है और उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली मिल रही है। ग्रामीण विद्युतीकरण का सीधा लाभ खेती और स्वरोजगार के क्षेत्र में मिल रहा है। सिंचाई के लिए विद्युत आपूर्ति बेहतर होने से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है। डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, आटा चक्की, वेल्डिंग और अन्य छोटे व्यवसायों को निरंतर बिजली मिलने से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार देखा जा रहा है, क्योंकि विद्यालय और स्वास्थ्य केंद्रों को अब बिजली की कमी से जूझना नहीं पड़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कहा है कि सबका साथ सबका विकास की अवधारणा तभी साकार होगी जब गांव मजबूत होंगे। ग्रामीण उत्तर प्रदेश को ऊर्जा संपन्न बनाकर सरकार ने विकास की नई आधारशिला रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बिजली ढांचा प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल में और अधिक सशक्त करेगा। जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे निर्बाध बिजली वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में औसतन 20 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर औसतन 22 घंटे और जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। प्रदेश में एक अप्रैल, 2022 से वर्ष 2025-26 तक कुल 2,410 नए 33/11 केवी विद्युत् उपकेंद्रों का निर्माण एवं क्षमता वृद्धि की गई है। साथ ही 20,924 नए वितरण ट्रांसफार्मर्स की स्थापना और 85,684 ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि का कार्य किया गया है।

सरकार की ओर से अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान की गई

ओडीओपी योजना से बदली कारीगरों की तकदीर, 3.16 लाख लोगों को मिला रोजगार ओडीओपी योजना से निर्यात दोगुना, पारंपरिक उत्पादों को मिला वैश्विक मंच, बजट में आवंटन बढ़ा सरकार की ओर से अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान की गई कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की सुरक्षा भी दी जा रही  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का माध्यम बनकर उभरी है। वर्ष 2018 में प्रारंभ की गई इस पहल ने पारंपरिक कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को न केवल नई पहचान दी, बल्कि उन्हें बाजार, प्रशिक्षण और वित्तीय संबल भी उपलब्ध कराया। सरकार की ओर से अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की सुरक्षा भी दी जा रही है। परंपरागत उत्पादों को मिला प्रोत्साहन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बजट सत्र 2026-27 में प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू हुई इस योजना ने प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और उत्पादकों को नई पहचान दी है। यह योजना परंपरागत उत्पादों को प्रोत्साहन देने, कारीगरों को प्रशिक्षण, टूल किट और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। उन्होंने बताया कि सहारनपुर जनपद में 2275 कारीगरों को उन्नत टूल किट उपलब्ध कराई गई, जबकि 454 हस्तशिल्पियों को 16.26 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गई।  दोगुना से अधिक हुआ निर्यात उन्होंने बताया कि आर्थिक दृष्टि से भी ओडीओपी योजना ने उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत योगदान ओडीओपी एवं हस्तशिल्प उत्पादों का बताया गया है। वर्ष 2018 से अब तक इस योजना के माध्यम से 3,16,000 लोगों को रोजगार सृजित हुआ है। 200 करोड़ के बजट का प्रावधान वित्तीय प्रतिबद्धता भी इस योजना के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। पिछले बजट में 145 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 135 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष में इसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांडिंग को मजबूती मिली है। कारीगरों को स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा सुविधाओं से भी जोड़ा उन्होंने कहा कि ओडीओपी केवल आर्थिक योजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्जागरण का अभियान है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से कारीगरों को स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा सुविधाओं से भी जोड़ा गया है। इसके साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन व्यंजन’ जैसी नई पहल स्थानीय पहचान को और व्यापक मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

अंतरधार्मिक विवाह मामले में सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने सभा पर लगाई पाबंदी

मेरठ  मेरठ में बकायदा कार्ड छपवाकर मुस्लिम युवक से शादी का ऐलान करने वाली हिंदू लड़की का मामला बहुत ज्यादा गरमा गया है। हिंदूवादी नेताओं ने शादी नहीं होने देने का ऐलान किया तो पुलिस एक्टिव हुई। रार बढ़ने पर फिलहाल आज यानी 13 फरवरी को होनी वाली शादी टल गई है। रिसोर्ट मालिक ने बुकिंग भी कैंसिल कर दी है। युवती के चाचा ने मुस्लिम युवक के खिलाफ धर्मांतरण और लव जेहाद का आरोप लगा मुकदमा गंगानगर थाने में दर्ज कराया है, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, हिंदू संगठनों ने शादी वाले रिसोर्ट के बाहर हिंदू महापंचायत का ऐलान किया है। पुलिस इसे भी रोकने में जुट गई है। हिंदूवादी नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है। क्या है पूरा मामला गंगानगर निवासी युवती की 13 फरवरी को पैराडाइज व्यू रिसोर्ट में शादी होनी थी। शादी के जो कार्ड युवती पक्ष ने छपवाए, उन पर दूल्हे का नाम साहिल था, जबकि युवक का असली नाम शाहवेज बताया गया। हिंदू संगठनों और अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने इसे लेकर हंगामा किया। मामला तूल पकड़ा तो पुलिस ने युवती के चाचा की तहरीर पर शाहवेज के खिलाफ धर्मांतरण का मुकदमा गंगानगर थाने में दर्ज किया। अभी शाहवेज की गिरफ्तारी नहीं की गई है। शादी टल गई है। अब सोशल मीडिया पर पैराडाइव व्यू रिसोर्ट के बाहर शुक्रवार दोपहर हिंदू महापंचायत का ऐलान किया गया है। लव जेहाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर महापंचायत बुलाई है। कई संगठनों समेत हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई संगठन के पदाधिकारियों ने महापंचायत में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया है। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है महापंचायत की अनुमति नहीं है, आयोजन नहीं होने दिया जाएगा। गंगानगर समेत सर्किल के बाकी थानों से फोर्स और पुलिस लाइन से अतिरिक्त फोर्स को शुक्रवार दोपहर गंगानगर में तैनात किया जा रहा है। धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज कराने वाले युवती के चाचा को धमकी भी मिल चुकी है। एसएसपी अविनाश पांडेय के अनुसार पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रही है। इस मामले में पहले से मुकदमा दर्ज है और जांच शुरू कर दी गई है। नियमानुसार कार्रवाई कराई जा रही है। मंडप एसोसिएशन महामंत्री बोले, कोई बुकिंग नहीं मेरठ मंडप एसोसिएशन महामंत्री विपुल सिंघल ने बताया 13 फरवरी को गंगानगर मवाना रोड स्थित पैराडाइज व्यू रिसोर्ट में आकांक्षा और शाहवेज की शादी का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया है। रिसोर्ट मालिक सतीश मंगा ने बताया है कुछ संगठन द्वारा 13 अप्रैल को रिसोर्ट पर कथित हिंदू पंचायत को लेकर मैसेज वायरल किया जा रहा है। इस तरह के आयोजन के लिए रिसोर्ट पर न तो बुकिंग है और न ही ऐसी कोई पंचायत रिसोर्ट में होने दी जाएगी। न तो विवादित विवाह समारोह आयोजित होगा और न पंचायत के लिए कोई व्यवस्था की है। युवती ने पुलिस को दर्ज कराए बयान युवती ने मीडिया को बताया गंगानगर थाने में दर्ज मुकदमे को लेकर बयान दर्ज कराए हैं। 13 फरवरी को होनी वाली शादी को फिलहाल निरस्त कर दिया है। शाहवेज से बात नहीं हो पा रही है। पुलिस से मदद मांगी, लेकिन पुलिस ने मदद करने से इंकार कर दिया। कानून व्यवस्था का हवाला दिया। स्पेशल मैरिज एक्ट में एडीएम कार्यालय पर नवंबर में आवेदन किया था। इसके बाद ही शादी की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। युवती ने कहा कि वह बौद्ध धर्म को मानती है और हिंदू धर्म से कोई वास्ता नहीं है। पुलिस जिसे खोज रही, वो सोशल मीडिया पर एक्टिव अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने बताया वह पंचायत को लेकर सोशल मीडिया पर लाइव थे। इसी दौरान वांटेड शाहवेज सोशल मीडिया पर आया और कमेंट किया। लिखा सिरोही जी, मेरा पीछा छोड़ दो, मेरी शादी हो जाने दो। सचिन सिरोही ने सवाल उठाया जिसके खिलाफ धर्मांतरण में मुकदमा है, वह सोशल मीडिया चला रहा है, लेकिन पुलिस पकड़ नहीं रही। युवती के बौद्ध धर्म वाले बयान पर कहा कि युवती ने अपने घर पर पांच दिन पहले माता की चौकी और पूजा का कार्यक्रम रखा था, जिसकी वीडियो भी है। यदि युवती बौद्ध धर्म अपना चुकी है तो ये पूजा क्यों हुई? बौद्ध धर्म अपनाने के साक्ष्य दें।

पिंक सॉलिड स्टोन से सजेगा प्रवेश द्वार, अयोध्या-गोण्डा मार्ग की बढ़ेगी गरिमा

राम की नगरी में आने वाले भक्तों का स्वागत करेगा लक्ष्मण द्वार एनएच-330ए पर बन रहा भव्य लक्ष्मण द्वार, 3,970.50 लाख रुपये की लागत से हो रहा निर्माण पिंक सॉलिड स्टोन से सजेगा प्रवेश द्वार, अयोध्या-गोण्डा मार्ग की बढ़ेगी गरिमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में है अयोध्या का धार्मिक विकास अयोध्या  राम की नगरी अब भक्तों के लिए और अधिक आकर्षक व स्वागतमय बन रही है। राम मंदिर के दर्शनार्थ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत करने के लिए एनएच-330ए (अयोध्या-गोण्डा मार्ग) पर एक शानदार लक्ष्मण द्वार का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह प्रवेश द्वार अयोध्या की धार्मिक गरिमा को और निखारने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह भव्य लक्ष्मण द्वार देईपुर/कटरा भागचंद्र अहतमाली क्षेत्र में 40 मीटर चौड़े मार्ग पर बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को इस परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल निर्माण लागत 3,970.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। द्वार को पिंक सॉलिड स्टोन से सजाया जाएगा, जो इसे राजसी एवं आकर्षक बनाएगा। पिंक स्टोन का उपयोग न केवल सौंदर्य बढ़ाएगा, बल्कि यह स्थानीय शिल्प कौशल को भी प्रदर्शित करेगा और अयोध्या की प्राचीन वास्तुकला से प्रेरित होगा। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंद्र यादव ने बताया कि वर्तमान में परियोजना का 35 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और अक्टूबर तक पूरा लक्ष्मण द्वार तैयार हो जाएगा। भव्य और यादगार पड़ाव साबित होगा लक्ष्मण द्वार के बनने से यह मार्ग धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक भी बन जाएगा। रामायण काल में लक्ष्मण जी के भाई राम के प्रति समर्पण की याद दिलाता यह द्वार भक्तों के मन में श्रद्धा एवं उत्साह का संचार करेगा। अयोध्या विकास की इस नई परियोजना से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश का धार्मिक पर्यटन नक्शा और चमकदार हो रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगी मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में धार्मिक स्थलों का विकास एवं पर्यटन संवर्धन प्रमुख स्थान रखता है। अयोध्या में राम मंदिर के लोकार्पण के बाद यहां पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। लक्ष्मण द्वार का निर्माण इसी दिशा में एक और कदम है, जो न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। स्थानीय व्यापारियों, होटलों, परिवहन सेवाओं और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। एनएच-330ए पर यह लक्ष्मण द्वार अयोध्या-गोण्डा मार्ग की गरिमा को कई गुना बढ़ा देगा।

289 एकड़ भूमि पर विकसित होगा कार्बन-फ्री डेटा सेंटर, हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजन की संभावना

एएम ग्रुप और इन्वेस्ट यूपी के बीच एमओयू, 2030 तक पूर्ण क्षमता से संचालन का लक्ष्य यीडा के सीईओ ने एएम ग्रुप के प्रतिनिधियों को सौंपा लेटर ऑफ इंटेंट 289 एकड़ भूमि पर विकसित होगा कार्बन-फ्री डेटा सेंटर, हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजन की संभावना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एएम ग्रुप और राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ के बीच सहमति बनी है। इसके तहत 1 गीगावॉट (GW) हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूट (HPC) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। गुरुवार को यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने एएम ग्रुप के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया है।  289 एकड़ भूमि के लिए एलओआई जारी यीडा द्वारा सेक्टर 28 में 114 एकड़ और सेक्टर 8डी में 175 एकड़, कुल 289 एकड़ भूमि के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किया गया है। यह अत्याधुनिक हब लगभग पांच लाख हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट्स से लैस होगा और 24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा (पवन, सौर एवं पम्प्ड स्टोरेज) से संचालित होगा। यह परियोजना यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में स्थापित की जाएगी, जिसमें लगभग 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्रस्तावित है। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्ष 2028 तक प्रथम चरण का संचालन शुरू होगा, जबकि 2030 तक पूर्ण 1 गीगावॉट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को नई गति भारत में एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए यह हब वैश्विक हाइपरस्केलर्स, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमों और संप्रभु एआई पहलों की जरूरतों को पूरा करेगा। एएमजी एआई लैब्स ‘एआई के लोकतंत्रीकरण’ के तहत ऊर्जा से लेकर इंटेलिजेंट टोकन तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में कार्यरत है। यह सुविधा भारतीय डेवलपर समुदाय को अत्याधुनिक चिपसेट्स तक व्यापक पहुंच देगी, जिससे घरेलू और वैश्विक स्तर पर एआई समाधान विकसित करने में तेजी आएगी। आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव इस परियोजना से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजित होंगे। हार्डवेयर निर्माण, सॉफ्टवेयर विकास और विशेषीकृत कूलिंग तकनीकों के क्षेत्र में स्थानीय इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था के अग्रिम पंक्ति के राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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