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मुख्यमंत्री साय ने चार नए महिला थानों का उद्घाटन, पुलिस बल को और सशक्त बनाने पर जोर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी में उप निरीक्षक संवर्ग के 840 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए  कहा कि राज्य में पुलिस बल की क्षमता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पुलिस का कार्य केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण निर्मित हो, यह सुनिश्चित करना भी पुलिस विभाग की महती जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल का कार्य लोगों के बीच शांति, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देना भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। तकनीकी संसाधनों के समावेश से पुलिस बल को अधिक दक्ष और प्रभावी बनाया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में पुलिस बल के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्दी का अर्थ केवल अधिकार नहीं, बल्कि समाज की सेवा और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने नव नियुक्त पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे अपनी वर्दी का सम्मान करें और इसे हमेशा गर्व से धारण करें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने जशपुर, रायगढ़, जगदलपुर और दंतेवाड़ा में नए महिला थानों का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इन थानों के माध्यम से महिलाओं को अधिक सुरक्षित वातावरण और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार पुलिस बल को और अधिक सशक्त बनाने के लिए नई योजनाओं पर विचार कर रही है। इन योजनाओं के तहत तकनीकी उन्नयन, आधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने नव नियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह पुलिस सेवा में उनके सफर की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त पुलिस अधिकारी बनने के लिए उच्च मनोबल और अनुशासन अनिवार्य है। इस अवसर पर आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब, अपर मुख्य सचिव गृह मनोज पिंगुआ सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

बालोद जिले की महिलाएं होली पर्व को खास और सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा रही

रायपुर बालोद जिले की महिलाएं इस बार की होली पर्व को खास और सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। जिले के सभी विकासखंडों के 20 क्लस्टर की 172 महिलाएं मिलकर हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, जिससे होली का यह त्यौहार केमिकलयुक्त गुलाल से मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल होने वाला है। बालोद जिले की महिलाओं का यह प्रयास न केवल उनकी आय का अतिरिक्त जरिया बन रहा है, बल्कि समाज को सुरक्षित और स्वच्छ होली मनाने का संदेश भी दे रहा है। इन महिलाओं द्वारा हर्बल गुलाल के निर्माण में पलाश, चुकंदर, सिंदूर बीज, पालक और कच्ची हल्दी जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे यह गुलाल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी इस वर्ष महिलाओं ने लगभग 50 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार किया है, जिसमें से 26 क्विंटल गुलाल अब तक स्थानीय बाजार और अन्य जिलों में विक्रय किया जा चुका है। महिलाओं का यह प्रयास उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रहा है। हर्बल गुलाल का उत्पादन कर रही वृंदावन महिला संकुल संगठन जमरूवा की श्रीमती ओमलता देशमुख ने बताया कि उनके संगठन ने पिछले वर्ष भी हर्बल गुलाल बनाया था। इस बार मांग बढ़ने के कारण उन्होंने उत्पादन भी दोगुना कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस गुलाल की मांग अधिक है, क्योंकि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और त्वचा को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता। समूह की सदस्य श्रीमती विद्या यादव और श्रीमती मनीषा कुंजाम ने बताया कि वे बिहान योजना के अंतर्गत कार्य कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। इसके अलावा उन्हें महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है, जिससे उनके कार्य को निरंतरता और प्रोत्साहन मिला है। समूह की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। महिलाओं ने जिलेवासियों को होली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए रासायनिक रंगों के बजाय हर्बल गुलाल के उपयोग की अपील की है।

छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक धरोहर, जिसे देख हैरान रह जाते हैं पर्यटक

रायपुर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित घाघरा मंदिर अपने रहस्यमयी निर्माण और अनोखी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। बिना किसी जोड़ने वाले पदार्थ के सिर्फ पत्थरों को संतुलित करके बनाई गई इस प्राचीन संरचना का झुका हुआ स्वरूप इसे और भी रोचक बनाता है। छत्तीसगढ़ के इतिहास और वास्तुकला का यह अनमोल रत्न आज भी अपने भीतर कई रहस्यों को समेटे हुए है। जिले के मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से लगभग 130 किलोमीटर दूर जनकपुर के पास स्थित इस मंदिर का रहस्य आज भी विशेषज्ञों के लिए अबूझ पहेली बना हुआ है। सदियों पुराना यह मंदिर किसी चमत्कार से कम नहीं, जो बिना किसी गारा-मिट्टी या चूने के इस्तेमाल के आज भी मजबूती से खड़ा है। घाघरा मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी निर्माण शैली है। इतिहासकार मानते हैं कि यह मंदिर पत्थरों को संतुलित करके इस तरह खड़ा किया गया है कि किसी भी प्रकार की जोड़ने वाली सामग्री की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। यह तकनीक प्राचीन भारतीय वास्तुकला के अद्भुत कौशल को दर्शाती है। इस मंदिर का झुका हुआ स्वरूप इसे और भी रहस्यमयी बनाता है। माना जाता है कि किसी भूगर्भीय हलचल या भूकंप के कारण इसका झुकाव हुआ होगा, लेकिन इसके बावजूद सदियों से यह मंदिर अपनी मजबूती के साथ खड़ा है। घाघरा मंदिर के निर्माण काल को लेकर विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। कुछ इतिहासकार इसे 10वीं शताब्दी का बताते हैं, तो कुछ इसे बौद्ध कालीन संरचना मानते हैं। वहीं, स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहां आज भी विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के भीतर किसी भी मूर्ति का न होना इसके रहस्य को और गहरा करता है। कई स्थानीय कथाओं के अनुसार, मंदिर का निर्माण उस समय की अद्भुत इंजीनियरिंग और तकनीकी कौशल का प्रमाण है। घाघरा मंदिर केवल श्रद्धालुओं का आस्था स्थल ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी अनमोल प्रतीक है। इस अद्भुत संरचना को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक और शोधकर्ता आते हैं। पुरातत्वविदों के लिए भी यह मंदिर एक शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मंदिर को उचित पहचान दी जाए, तो यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी प्रमुख कस्बा जनकपुर है, जहां से घाघरा गांव आसानी से पहुंचा जा सकता है। मनेंद्रगढ़ से यहां तक का सफर लगभग 130 किलोमीटर का है। सड़क मार्ग के जरिए इस यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद भी लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट कर सुशासन की सराहना की, महिला सदस्यों ने मुख्यमंत्री को समाज के कुटीर उद्योग पहल की जानकारी दी

रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश कुनबी समाज महासंगठन के 20 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट कर, छत्रपति शंभाजी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म “छावा” को राज्य में कर मुक्त किए जाने पर आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि यह निर्णय इतिहास को सहज और सरल रूप में जन-जन तक पहुँचाने की महत्वपूर्ण पहल है। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री साय को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा, मराठी टोपी, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा कहा कि आपके नेतृत्व में प्रदेश सुशासन और प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रतिनिधि मंडल  ने शिवाजी जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग रखी। प्रतिनिधि मंडल की महिला सदस्यों श्रीमती सारिका गेडेकर व श्रीमती मनिषा बारसे ने मुख्यमंत्री साय को बताया कि कुनबी समाज की महिलाओं ने सामाजिक भवन में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुटीर उद्योग की स्थापना की है। इसके तहत हल्दी, मिर्च, मसाले आदि का निर्माण और पैकेजिंग कर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने महिलाओं की इस पहल की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया। प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश कुनबी समाज भवन निर्माण से संबंधित जानकारी मुख्यमंत्री को दी और समाज के भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की। प्रतिनिधि मंडल में रंजीत भाऊ मुनेश्वर, उमेश घोड़मोड़,  श्रीमती सारिका गेडेकर, श्रीमती मनिषा बारसे,  दिलीप गेडेकर,  हेमराज,  प्रेम बोहरे, वासुदेव फुंडे, श्रीमती रागिणी गेडेकर, श्रीमती संगिता भंडारकर, श्रीमती रिंकु सहित अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वैद्यराज सुषेण मंदिर व दशरथ दरबार के दर्शन, जलसेन सरोवर में कछुओं को खिलाया दाना

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माता कौशल्या की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की माता कौशल्या व प्रभु श्रीराम के दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली का किया प्रार्थना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वैद्यराज सुषेण मंदिर व दशरथ दरबार के दर्शन, जलसेन सरोवर में कछुओं को खिलाया दाना मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण व रखरखाव हेतु दिए आवश्यक निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में दर्शन व पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने माता कौशल्या एवं प्रभु श्रीराम के समक्ष नमन करते हुए राज्य की प्रगति, जनता की मंगलकामना और सामाजिक समरसता की प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित वैद्यराज सुषेण मंदिर और दशरथ दरबार के भी दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने माता कौशल्या मंदिर परिसर में स्थित जलसेन सरोवर में कछुओं को दाना खिलाया और मंदिर परिसर के रखरखाव व सौंदर्यीकरण हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इस अवसर पर माता कौशल्या जन्मभूमि सेवा संस्थान के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को माता कौशल्या और प्रभु श्रीराम की प्रतिमा का छायाचित्र भेंट किया।

‘छत्तीसगढ़ एनर्जी इंवेस्टर्स समिट’ में अदानी, जिंदल और एनटीपीसी समेत कई कंपनियों ने किया निवेश का ऐलान

रायपुर : छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्रांति 3 लाख करोड़ का निवेश, चार तरह के पावर प्लांट से बनेगी अपार ऊर्जा छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्रांति! 3 लाख करोड़ का निवेश, चार तरह के पावर प्लांट से बनेगी अपार ऊर्जा ‘छत्तीसगढ़ एनर्जी इंवेस्टर्स समिट’ में अदानी, जिंदल और एनटीपीसी समेत कई कंपनियों ने किया निवेश का ऐलान थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट में 1 लाख करोड़ से ज्यादा का मिला निवेश प्रस्ताव 57,000 करोड़ की जलविद्युत परियोजनाएं, नदियों से बनेगी बिजली थर्मल और न्यूक्लियर पावर से भी मिलेगी छत्तीसगढ़ को ऊर्जा रायपुर छत्तीसगढ़ अब ऊर्जा क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज रायपुर में हुए ‘छत्तीसगढ़ एनर्जी इंवेस्टर्स समिट’ में कई बड़ी कंपनियों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का ऐलान किया है. इस निवेश से राज्य में परमाणु, थर्मल, सौर और पंप्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के नए प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इससे न केवल उद्योगों को फायदा मिलेगा, बल्कि आम लोगों को भी सस्ती और निरंतर बिजली मिल सकेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ में ऊर्जा के क्षेत्र में यह निवेश राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बने, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित हो। छत्तीसगढ़ पहले से ही 30,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है, जो देश के औसत से ज्यादा है। अब हर व्यक्ति को 2048 किलोवाट-घंटे बिजली मिल रही है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एनटीपीसी ने 80,000 करोड़ रुपये की लागत से 4200 मेगावाट क्षमता का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई है। इससे छत्तीसगढ़ में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की शुरुआत होगी। थर्मल पावर क्षेत्र में भी बड़े निवेश की घोषणा हुई है। अदानी पावर 66,720 करोड़ रुपये खर्च कर कोरबा, रायगढ़ और रायपुर में 1600-1600 मेगावाट के तीन थर्मल पावर प्लांट लगाएगा। जिंदल पावर रायगढ़ में 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 12,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जबकि सरदा एनर्जी रायगढ़ में 660 मेगावाट क्षमता के प्लांट के लिए 5,300 करोड़ रुपये लगाएगी। इसके अलावा, सरकारी कंपनियां एनटीपीसी और सीएसपीजीसीएल 41,120 करोड़ रुपये की लागत से 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली है। जिंदल पावर और एनटीपीसी ग्रीन मिलकर 10,000 करोड़ रुपये खर्च कर 2500 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन करेंगे। इसमें डोलेसरा में 500 मेगावाट और रायगढ़ में 2000 मेगावाट के सौर प्लांट शामिल होंगे। किसानों के लिए भी खुशखबरी है। पीएम कुसुम योजना के तहत 4100 करोड़ रुपये की लागत से 675 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन किया जाएगा और 20,000 सोलर पंप लगाए जाएंगे। इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिलेगी और डीजल पंपों की जरूरत कम होगी। इसके अलावा, 57,046 करोड़ रुपये की लागत से 8700 मेगावाट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे। इसमें एसजेएन कोटपाली में 1800 मेगावाट और जिंदल रिन्यूएबल द्वारा 3000 मेगावाट के प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन सभी निवेशों के जरिए छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे उद्योगों, किसानों और आम लोगों को फायदा होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। प्रमुख निवेश और योजनाएं 1. परमाणु ऊर्जा: साफ और कुशल ऊर्जा उत्पादन के लिए ₹80,000 करोड़ का निवेश। 2. ताप विद्युत: राज्य की ताप विद्युत क्षमता को मजबूत करने के लिए ₹1,07,840 करोड़। 3. सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए ₹10,000 करोड़। 4. पीएम कुसुम योजना: किसानों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ₹4,100 करोड़। 5. पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP): ग्रिड स्थिरता के लिए ऊर्जा भंडारण में ₹57,046 करोड़। 6. क्रेडा सौर पहल: सौर ऊर्जा विस्तार के लिए ₹3,200 करोड़। 7. पीएम सूर्य योजना: राष्ट्रीय सौर छत परियोजना के तहत ₹6,000 करोड़। 8. सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए ₹2,500 करोड़। 9. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,600 करोड़। 10. पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क: बिजली पारेषण नेटवर्क को उन्नत करने के लिए ₹17,000 करोड़। 11. RDSS (वितरण क्षेत्र योजना): वितरण बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ₹10,800 करोड़।

मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित “महतारी वंदन अभिनंदन” कार्यक्रम में महिला पत्रकारों को सम्मानित किया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित “महतारी वंदन अभिनंदन” कार्यक्रम में महिला पत्रकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ महिला पत्रकारों ने मीडिया में महिलाओं की भूमिका पर खुलकर चर्चा की। महिला पत्रकारों ने कहा कि महिला पत्रकार राजनीति, अपराध, खेल सहित हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें बराबरी का अवसर मिले। उन्होंने कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए जा रहे छात्रावासों की सराहना की और कहा कि यह पहल महिलाओं को घर से दूर भी सुरक्षित माहौल प्रदान करेगी। इससे अब अभिभावक अपनी बेटियों के करियर को लेकर निश्चिंत हो सकेंगे। उन्होंने पत्रकारों की सम्मान निधि ₹10,000 से बढ़ाकर ₹20,000 करने के फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पत्रकारों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री निवास में सम्मान समारोह आयोजित करने पर खुशी जताई और कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे एक पिता ने हमें अपने घर बुलाया हो। उन्होंने कहा कि यह पहल महिला पत्रकारों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश में पहली बार इस तरह का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाएँ समाज निर्माण की सशक्त धुरी हैं, और महिला पत्रकार अपनी लेखनी से सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री साय के साथ लंच किया और उनके साथ सेल्फी भी ली।  मुख्यमंत्री साय ने महिला पत्रकारों के लिए भविष्य में नई योजनाओं पर विचार करने का भरोसा दिलाया और कहा कि सरकार महिला पत्रकारों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना से लोगों को मिल रहा है लाभ

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना से लोगों को मिल रहा है लाभ मोबाईल मेडिकल यूनिट बस से लोगों को मिल रही घर पहुंच सेवा मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जरूरतमंद व गरीब तबके के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने राज्य सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की गई है। इसके लिए नगर पालिक निगम चिरमिरी क्षेत्र के पूरे 40 वार्डों के लिए 02 मोबाईल मेडिकल यूनिट बस संचालित है। क्षेत्र के लोगों के द्वार तक पहुंचने वाली मोबाईल मेडिकल यूनिट वाली बसें स्वयं में एक अस्पताल है। जिसमें मेडिकल स्टाफ, मेडिकल उपकरण सहित मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं व निःशुल्क दवा उपलब्ध है। इसी क्रम में सोमवार को नगर पालिक निगम चिरमिरी के अंतर्गत वार्ड क्रमांक- 01 पोड़ी, एवं वार्ड क्रमांक- 38 डोमनहिल फुटबॉल ग्राउण्ड के पीछे कैंप लगाया गया। पोड़ी में 30 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण व 10 मरीजों का लैब टेस्ट किया गया, वहीं सभी जांच कराने वाले मरीजों को निःशुल्क दवा का भी वितरण किया गया। आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार बढ़ोत्तरी कर रही है, जिसके लिए आमजनों को स्वास्थ्य की जांच हेतु घर पहुंच सेवा मोबाईल मेडिकल युनिट बस की शुरूआत की गई है। जिसमें 42 प्रकार के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। जिसमें मुख्य रूप से सी.पी.सी. मशीन से जांच, एल.एफ.टी., थायराइड, विटामिन बी-12, विटामिन डी-03, यूरिक एसिड जैसे अन्य कई प्रकार के जांच कर लोगों का घर पहुंच स्वास्थ्य सुविधाएं सरकार के द्वारा दिया जा रहा है। इस दौरान डॉ. किरण किशोर, डॉ. सुमन पाण्डेय, ए.एन.एम. सुनिता कारफारमा, लैब टेक्नीशियन सुशील यादव, फार्मासिस्ट नैन्सी, सुभाष, रोशन सिंह, लैब टेक्नीशियन अलमा एक्का व अन्य स्टाफ मौजूद रहे।

संगमेश्वर में संभाजी का, वहीं बाबासाहेब ठाकरे का मुंबई में बनेगा भव्य स्मारक, स्मारकों के लिए 220 करोड़ रुपये की राशि आवंटित

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा में फाइनेंस मिनिस्टर अजित पवार ने राज्य का बजट पेश किया। इस बजट में उन्होंने कई जनकल्याणकारी योजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर का ऐलान किया तो वहीं कई स्मारकों की भी घोषणा की। अजित पवार ने बजट में संभाजी महाराज के नाम पर स्मारक बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा इंदु मिल्स में बने आंबेडकर मेमोरियल का काम जल्दी ही पूरा करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि संगमेश्वर में छत्रपति संभाजी महाराज का स्मारक बनेगा। वहीं बाबासाहेब ठाकरे का भव्य स्मारक भी मुंबई में बड़ी लागत से बन रहा है। इस बजट में इस स्मारक के दूसरे चरण के लिए ही 220 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इससे समझा जा सकता है कि कितना बजट स्मारकों के लिए आवंटित हुआ है। देवेंद्र फडणवीस सरकार के इस बजट में मराठी अस्मिता पर खासा जोर दिया गया है। वित्त मंत्री अजित पवार ने ऐलान किया कि यूपी के आगरा में महाराज छत्रपति शिवाजी का एक स्मारक बनेगा। यह स्मारक उस स्थान पर बनेगा, जहां से मुगलों की कैद से छूटकर शिवाजी निकले थे। इसके अलावा तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषाओं वाले विवाद के बीच एक और अहम फैसला हुआ है। महाराष्ट्र सरकार ने 3 अक्टूबर को मराठी भाषा सम्मान दिन मनाने का ऐलान किया है। यह हिंदी दिवस की तर्ज पर ही मनाया जाएगा। बता दें कि हाल ही में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने यह सवाल भी उठाया था कि आखिर हिंदी भाषा की तरह अन्य भाषाओं के लिए कोई दिवस क्यों नहीं है। महाराष्ट्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के मौके पर उनका स्मारक बनाने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि स्मारकों के बहाने महाराष्ट्र सरकार ने कई समुदायों को साधने का प्रयास किया है। आंबेडकर स्मारक के नाम पर उसने एक तरफ दलित अस्मिता को सम्मान दिया है तो वहीं अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्मारक बनाने से उत्तर भारतीयों और राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों को लुभाया जा सकेगा। मराठी अस्मिता की बात हो तो बालासाहेब ठाकरे का जिक्र जरूरी हो जाता है। यही कारण है कि हर दल उनकी विरासत पर दावा करता है। इसी वजह से उनके स्मारक के लिए भी मोटा फंड आवंटित करने का ऐलान किया है। संभाजी महाराष्ट्र और छत्रपति शिवाजी तो महाराष्ट्र के लिए भावनात्मक विषय हैं, जिसका बजट में बखूबी ध्यान रखा गया है।

बीट नैमेड़ के नयापारा में वनों की अवैध कटाई पर विभाग नहीं लग पा रहा अंकुश

बीजापुर छत्तीसगढ़ के आदिवासीय क्षेत्र बीजापुर, जहां पेड़ों को भगवान स्वरूप पूजा जाता है. जहां आदिवासी अपनी प्रकृति को बचाने के लिए आंदोलन करते हुए मर मिटते हैं, ऐसी जगह पर जिन अधिकारियों पर जंगलों के संरक्षण की जिम्मेदारी है, उनके नाक के नीचे लगातार कुटरू वन परिक्षेत्र (बफर) के वनों में अवैध कटाई जारी है और वे कुंभकरण की नींद सो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण पेड़ काटे जा रहे हैं. जबकि वन विभाग अवैध कटाई करने वालों पर को सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है. बीट नैमेड़ के नयापारा में वनों की अवैध कटाई पर विभाग अंकुश नहीं लग पा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि बीट नैमेड़ के नयापारा क्षेत्र में जंगलों को खेती किसानी के लिए साफ किया जा रहा है. इसमें ऐसे पेड़ों को भी ग्रामीण काट रहे हैं, जिन्हें कुछ साल पहले ही रोपा गया था. कई स्थानीय लोगों द्वारा विभागीय अधिकारियों से भी इसकी शिकायत करने पर भी विभाग के रेंजर से लेकर बीट गार्ड के कानों में जूं तक नही रेंग रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग समेत कई जिम्मेदारों को इस अवैध कारोबार के बारे में जानकारी है, लेकिन इस संबंध में पूछे जाने पर ऐसी गतिविधियों के होने से नकार दिया जाता है. यदा कदा विभाग के द्वारा ग्रामीणों की सजगता एवं सूचना पर लकड़ी तस्करों पर कार्रवाई की जाती है. उनमें से भी पुख्ता कार्रवाई के अभाव में दोषी बच निकलते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि अवैध कटाई से क्षेत्र के जंगल उजड़ रहे हैं. जंगलों से इमारती लकड़ी के साथ-साथ अवैध जलाऊ लकड़ी का कारोबार भी दिनोंदिन फल फूल रहा है. इन लकड़ियों का प्रयोग होटलों, ढाबों, ईंट भट्‌टों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा है. अवैध कटाई के बाद जमीन को लेकर बढ़ रहा आपसी विवाद हाल ही में कुटरू वन परिक्षेत्र के बीच जंगल कटाई देखने को मिली. वहीं नैमेड़ बीट के नयापारा के बीच जंगल कटाई के निशान दिखाई दे रहे हैं. यहां कुछ ग्रामीण जहां जंगलों की कटाई कर रहे हैं. वहीं जंगल साफ कर खेती करने और जमीन अतिक्रमण पर भी लोगों में आपसी विवाद हो रहे हैं. कब्जा का कारण खेती करने और पट़्टों का लालच कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि नैमेड़ आदिवासी समुदाय की आड़ में वन माफिया काम करता है. वह उनसे जमीन साफ करवाकर उस पर कब्जा करके खेती करता है. आदिवासी समुदाय गरीब का गरीब बना रहता है. उनका कहना है कि गांव वाले यह समझने लगे हैं कि वनों पर उनकी जिंदगी निर्भर है. अगर वे न रहे तो न तो मवेशियों को चराने के लिए जगह बचेगी न ही बारिश होगी. इसके लिए ग्रामीण भी पहल कर चुके हैं. लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से जंगल कटाई नहीं रुक पा रही है. वहीं पट्‌टों के लालच में भी कई ग्रामीण कब्जे करने जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं. जानिए क्या कहते हैं जिम्मेदार इस पूरे मामले में जब परिक्षेत्र रेंजर रामायण मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि पहले भी जंगल कट चुका है, ग्रामीणों को समझाने पर भी नही समझते हैं, उसमें विभाग क्या करेगा. हालांकि इसके बाद इंद्रावती डीएफओ संदीप बल्गा ने जांच और कार्रवाई की बात कही है. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र की आप बात कर रहे हैं, मैं वहां स्टाफ भेजकर जांच करवाता हूं और जो भी लोग इस प्रकार का काम कर रहे हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

छोटेडोंगर में सोलर परियोजना घोटाला: विकास कार्यों के नाम पर लाखों की हेराफेरी, फर्जी दस्तावेजों से लाखो का भुगतान, प्रशासन मौन!

नारायणपुर विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा करने वाली प्रशासन की पोल खोलने वाला मामला ग्राम पंचायत छोटेडोंगर में सामने आया है। नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में आदिवासियों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार वित्तीय सहायता भेजती हैं, ताकि इस पिछड़े इलाके के लोग मुख्यधारा में आ सकें। लेकिन भ्रष्टाचार का भेड़िया धसान ऐसा है कि विकास कार्यों की राशि जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में समा जाती है। दरअसल, ग्राम पंचायत छोटेडोंगर में सोलर लाइट और सोलर पंप लगाने के नाम पर 15वें वित्त आयोग की राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत ने इस कार्य के लिए लाखों रुपये जारी किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस घोटाले में फर्जी दस्तावेज बनाकर संदिग्ध तरीके से भुगतान किया गया। छोटेडोंगर के ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में शासकीय राशि का सोलर लाइट और सोलर पंप लगाने के नाम पर जमकर बंदरबांट हुआ है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पंचायत सचिव और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह सारा घोटाला हुआ। जब इस बारे में प्रशासन से शिकायत की गई, तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन भी इस भ्रष्टाचार में शामिल है? RTI से खुलासा: क्रेडा विभाग की फर्जी टीएस बनी आधार इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत इस परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की मांग की। वहीं पंचायत ने जो कागजात दिए, उनमें कई गंभीर खामियां पाई गईं। सबसे पहले तो क्रेडा विभाग नारायणपुर का टेक्निकल सेक्शन (TS) फर्जी निकला। दस्तावेज में कोई दिनांक नहीं है और उप अभियंता, क्रेडा जिला नारायणपुर की सील लगी हुई है, लेकिन दस्तावेज की सत्यता संदिग्ध है। उक्त दस्तावेज में सचिव और सरपंच के हस्ताक्षर और मुहर लगी हुई है, और इसी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। संदेहास्पद भुगतान: माजीसा इंटरप्राइजेज के नाम लाखों के बिल टीएस के अनुसार, 1000 लीटर का वाटर टैंक और 900 वॉट क्षमता का सोलर पंप लगाया जाना था। इस पर 5,80,484 रुपये की लागत दिखाई गई, लेकिन हकीकत में कार्य मानकों के विपरीत किया गया। जब इस टीएस की पुष्टि के लिए क्रेडा विभाग के अधिकारी रामकुमार ध्रुव से नवंबर 2024 में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि टीएस उनके कार्यालय से जारी नहीं किया गया है। उन्होंने उक्त टीएस को अमान्य बताया और कहा कि जिला कार्यालय टीएस जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है, बल्कि टीएस रीजनल अथवा हेड ऑफिस से मंगवाया जाता है। इस टीएस के आधार पर मई 2024 में लाखों रुपये के बिल पास किए गए, जिनमें तीन बिलों में से प्रत्येक 3 लाख रुपये का है और एक बिल 2 लाख 60 हजार रुपये का है। यह सभी बिल एक ही फर्म माजीसा इंटरप्राइजेज के हैं। इन सभी बिलों का बिना जांच के भुगतान कर दिया गया। पंचायत सचिव ने पल्ला झाड़ा, प्रशासन का मौन जब इस पर पंचायत सचिव विनोद गावड़े से सवाल किया गया, तो उन्होंने सारा दोष ठेकेदार पर डालते हुए पल्ला झाड़ लिया और कहा कि उक्त टीएस माजीसा इंटरप्राइजेज द्वारा दिया गया था, जिस पर क्रेडा विभाग नारायणपुर की सील लगी हुई थी, जिसे आधार मानकर उन्होंने भुगतान कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या पंचायत सचिव की यह ज़िम्मेदारी नहीं थी कि वह भुगतान से पहले दस्तावेजों की जांच करे? वहीं जब इस मामले पर वर्तमान पंचायत सचिव पवन कुलदीप से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे पिछले कार्यकाल का मामला बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया। वहीं जनपद पंचायत नारायणपुर के सीईओ एल.एन. पटेल ने कहा कि अब तक उन्हें इस मामले पर लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन शिकायत मिलने पर जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सिर्फ छोटेडोंगर ही नहीं, जिलेभर में भ्रष्टाचार! जानकारी के मुताबिक, यह घोटाला सिर्फ छोटेडोंगर में ही नहीं हुआ, बल्कि जिले की कई अन्य पंचायतों में भी इसी तरह से 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग किया गया है। वहीं कुछ माह पूर्व 15वें वित्त की राशि के दुरुपयोग के मामले में नवंबर 2024 को भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं छोटेडोंगर के ग्रामीणों ने भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, लेकिन इस मामले में किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय ग्रामीण उमेश जायसवाल ने कहा कि शासकीय राशि का जमकर बंदरबांट हुआ है, इस पर जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। गांव के विकास के लिए आई राशि से गांव में विकास होना चाहिए, न कि यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़नी चाहिए। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो और भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। क्या मिलेगा छोटेडोंगर को न्याय? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर घोटाले की पूरी जानकारी उपलब्ध है, तो दोषियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन के बड़े अधिकारी भी इसमें शामिल हैं? क्या इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है? क्या छोटेडोंगर के लोगों को न्याय मिलेगा? छोटेडोंगर और अन्य प्रभावित पंचायतों के लोग अब भी वास्तविक विकास और न्याय का इंतजार कर रहे हैं। क्या प्रशासन इस घोटाले पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा। क्या गांव के विकास के लिए आई राशि का सही उपयोग होगा, या फिर यह भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? छोटेडोंगर और अन्य प्रभावित पंचायतों के लोग अब भी असली विकास का इंतजार कर रहे हैं।

एयर एनसीसी का फ्लाइंग ट्रेनिंग: प्रशिक्षण के लिए आगडीह हवाई अड्डे में जुटाए गए सुरक्षा और सुविधा के सभी संसाधन

मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री, शिक्षा सचिव और जशपुर कलेक्टर ने किया था प्रयास रायपुर  जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे में वर्तमान  में  एयर एनसीसी का फ्लाइंग ट्रेनिंग  चल  रही है। एनसीसी  कैडेट  को छोटे हवाई जहाज से उड़ान भरने और रनवे पर लैंड करने से लेकर, विमान के कॉकपिट से लेकर हर हिस्से और विमान के नियंत्रण को लेकर सभी बेसिक जानकारी दी जा रही है।   विंग कमांडर वी  के  साहू  के  अनुसार इस महीने के 7 तारीख से संचालित की जा रही इस प्रशिक्षण में फिलहाल 35 प्रशिक्षु कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं और इस माह के अंत तक 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन रायपुर के बैनर के तले प्रदेश के युवा जशपुर के खुले आसमान में हवा में उड़ान सीख रहे हैं। एयर एनसीसी के द्वारा 2 सीटर माइ‌को लाइट एयरक्राफ्ट के जरिए जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी पर एनसीसी सीनियर डिवीजन के कैडेट्स जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। मील का पत्थर साबित होगा यह प्रशिक्षण विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की एयर फोर्स और एविएशन के क्षेत्र में करियर के रूप में इसे चुनने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण बेहद कारगर है। उन्होंने बताया की वो खुद बसना क्षेत्र के लाखौली के निवासी है और सबसे पहले उन्होंने भी एनसीसी कैडेट्स के रूप में उड़ान भरी थी जो आगे चलकर उनके करियर के लिए मील के लिए एयरफोर्स या एविएशन क्षेत्र में जाने वाले युवा के लिए यह प्रशिक्षण फ्लाइंग स्कूल में प्रवेश के लिए सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने बताया कि रायपुर के माना एयरपोर्ट पर उड़ान के सीमित अवसर के कारण इस ट्रेनिंग को जशपुर शिफ्ट किया गया है।  उन्होंने इस पूरे प्रशिक्षण अभियान के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रदेश के शिक्षा सचिव और कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास का आभार प्रकट किया, जिनके प्रयासों से जशपुर हवाई पट्टी पर चिकित्सा स्टाफ के साथ एम्बुलेंस और फायर फाईटिंग दस्ते के साथ तमाम तरह गई है, जिससे पूरी टीम और कैडेट्स के रुकने रहने, खाने और प्रशिक्षण का सारा काम सुचारू रूप से चल रहा है। विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की रायपुर के माना स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर इस प्रशिक्षण का संचालन किया जा रहा था लेकिन माना एयरपोर्ट में एयर ट्रैफिक के दबाव और उसके बीच 100 कैडेट्स को एयरक्राफ्ट उड़ान का प्रशिक्षण देने में कई प्रकार की दिक्कतें आ रही थी। इसके बाद इस प्रशिक्षण को प्रदेश के किसी और छोटे हवाई अड्डे या रनवे पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे का चयन किया गया, यहां का शांत वातावरण और रनवे इस प्रशिक्षण के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है, यह पूरा प्रशिक्षण और एयर एनसीसी के कैडेट्स के साथ जशपुर के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। जशपुर के उपर उड़ने का अनुभव अनूठा माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के उड़ान के प्रशिक्षण में शामिल एयर कुछ ऐसा है ट्रेनी एयरक्राफ्ट है जिसमें 2 सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट से एयर एनसीसी के कैडेट्स को उड़ान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह एक घंटे की उड़ान में 13 लीटर ईंधन खर्च करता है और इसमें 50 लीटर एवियशन फ्यूल भरने की क्षमता है। इसे 20000 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल लगभग 1000 फुट की ऊंचाई पर प्रशिक्षु कैडेट्स को इसे उड़ाना सिखाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार रायपुर से जशपुर तक उड़कर आने में इस विमान को 2 घंटे 5 मिनट का समय लगा। एनसीसी कैडेट्स वंश कुमार, एसआर साहू, अंजू सिन्हा, बिपाशा परिहार और सिमरन साहू ने बताया की उन्होंने रायपुर के माना एयरपोर्ट पर भी इससे पहले एयर एनसीसी का प्रशिक्षण लिया है, लेकिन जशपुर की शांत फिजा यहां का एयरनॉट, एनवायरनमेंट में पायलट के बगल में को पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करना एक अनूठा अनुभव है।

भूपेश बघेल के घर ईडी की कार्रवाई जारी, समर्थकों ने ईडी अफसरों से की झूमाझटकी वाहन पर तोड़फोड़ की कोशिश

रायपुर  छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई निवास पर ईडी की जांच जारी है. वहीं भूपेश बघेल के निवास के बाहर ईडी की कार्रवाई से आक्रोशित समर्थकों की नारेबाजी जारी है. समर्थकों ने अफसरों से झूमाझटकी करते हुए ईडी अफसर के वाहन पर तोड़फोड़ की कोशिश की है. इसे देखते हुए भूपेश बघेल के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, बघेल के निवास में बड़ी मात्रा में नगदी मिलने की सूचना पर ईडी और बैंक के अधिकारी नोट गिनने की मशीन लेकर बघेल के घर पहुंचे हैं. ED ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी जब्त किया है. भूपेश बघेल के घर से 6 मोबाइल फोन से ईडी के अधिकारी बातचीत की डिटेल खंगाल रहे. डिजिटल ट्रांजेक्शन के हिसाब निकाल रहे. 14 ठिकानों पर ईडी की टीम कर रही जांच बता दें कि भूपेश बघेल के निवास पर ED तड़के सुबह से जांच कर रही. जानकारी के अनुसार, ED की टीम भिलाई स्थित भूपेश बघेल के आवास सहित चैतन्य बघेल के घर और प्रदेशभर में कुल 14 ठिकानों पर दबिश दी है. ईडी की अलग-अलग टीमें रायपुर, भिलाई सहित अन्य जिलों में एक साथ छापेमारी की है, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है. पूर्व उपमुख्यमंत्री समेत बड़े नेताओं का जमावड़ा ईडी की दबिश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर के बाहर बड़ी संख्या में दिग्गज कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ है. पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, विधायक देवेंद्र यादव, अरुण वोरा, गिरीश देवांगन, विनोद वर्मा समेत बड़ी संख्या में एनएसयूआई, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद हैं और ईडी की कार्रवाई को लेकर जमकर नारेबाजी कर रहे. किन मामलों में हो रही जांच? सूत्रों के मुताबिक, ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों में की जा रही है. हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह छापेमारी किस विशेष मामले से जुड़ी हुई है. बताया जा रहा है कि शराब घोटाला, कोयला घोटाला और महादेव सट्टा ऐप मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल का नाम सामने आया था, जिसके बाद से ही वे ईडी के रडार पर थे. भूपेश बघेल ने ईडी की कार्रवाई को बताया ‘षड्यंत्र’ ईडी की कार्रवाई को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि सात वर्षों से चले आ रहे झूठे केस को जब अदालत में बर्खास्त कर दिया गया तो आज ED के मेहमानों ने पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल के भिलाई निवास में आज सुबह प्रवेश किया है. अगर इस षड्यंत्र से कोई पंजाब में कांग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह गलतफहमी है.

‘इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले नेशनल हाईवे- 30 पर भोंड के पास चक्काजाम

बस्तर छत्तीसगढ़ का बस्तर हमेशा से प्राकृतिक संपदा से भरपूर रहा है. यहां की इंद्रावती नदी पूरे बस्तर को सींचती है. लेकिन भीषण गर्मी आने से पहले ही यह प्राणदायनी नदी सूखने लगी है. पानी की कमी की चिंता को लेकर बस्तर के किसानों को आज पहली बार संघर्ष करना पड़ा. यहां के किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ‘इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले नेशनल हाईवे- 30 पर भोंड के पास चक्काजाम कर दिया. इससे के दोनों तरफ आवाजाही ठप पड़ गई. बड़ी संख्या में पुलिस बल स्थिति को नियंत्रित करने में लगी हुई है. दरअसल, किसानों ने कुछ दिन पहले ही बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इंद्रावती नदी में बने स्टाप डेम का पानी छोड़ने के अलावा अन्य 6 सूत्रीय मांग की थी. किसानों ने इन मांगों को पूरी करने के लिए प्रशासन को सप्ताह भर का समय दिया था. मांग पूरी नहीं होने पर आक्रोशित किसानों ने आज चक्का जाम कर दिया. इधर चक्का जाम के चलते हाईवे में दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई है. जगदलपुर-रायपुर मार्ग में जाम की स्थिति बनने से आवाजाही ठप पड़ गई है. स्थिति को कंट्रोल करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है. वहीं किसानों का कहना है, कि जब तक प्रशासन के द्वारा उन्हें आश्वासन नहीं मिल जाता और स्टाप डैम का पानी नहीं छोड़ा जाता, तब-तक वे हाईवे पर धरना प्रदर्शन करते रहेंगे. सूखी नदी पर बच्चे खेलते हैं क्रिकेट गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है. इस साल आलम यह है की सूखती नदी में बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं. साथ ही रेत माफिया भी सक्रिय हो गए हैं और लगातार रेत का अवैध उत्खनन भी किया जा रहा है.  

पूर्व सीएम के घर ईडी का छापा, 5 साल की सरकार में तरह-तरह के हुए घोटाले: सीएम विष्णुदेव साय

रायपुर  छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल के निवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने छापेमारी की है. ED की इस कार्रवाई से राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है. इस बीच सीएम विष्णुदेव साय ने भी छापे को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि 5 साल की सरकार में तरह-तरह के घोटाले हुए, उसकी जांच सेंट्रल एजेंसियां कर रही है. कई लोग जेल के अंदर भी हैं. ED सेंट्रल एजेंसी है, उससे हमारा कोई लेना देना नहीं है. बता दें कि भूपेश बघेल के निवास पर ED की टीम ने आज तड़के छापेमारी की है. जानकारी के अनुसार, ED की टीम भिलाई स्थित भूपेश बघेल के आवास सहित चैतन्य बघेल के घर और प्रदेशभर में कुल 14 ठिकानों पर ईडी की टीम ने दबिश दी है. फिलहाल, ईडी की अलग-अलग टीमें रायपुर, भिलाई सहित अन्य जिलों में एक साथ छापेमारी की है, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है. भूपेश बघेल ने इसे ‘षड्यंत्र’ बताया सात वर्षों से चले आ रहे झूठे केस को जब अदालत में बर्खास्त कर दिया गया तो आज ED के मेहमानों ने पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल के भिलाई निवास में आज सुबह प्रवेश किया है. अगर इस षड्यंत्र से कोई पंजाब में कांग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह गलतफहमी है. किन मामलों में हो रही जांच? सूत्रों के मुताबिक, ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों में की जा रही है. हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह छापेमारी किस विशेष मामले से जुड़ी हुई है. बताया जा रहा है कि शराब घोटाला, कोयला घोटाला और महादेव सट्टा ऐप मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल का नाम सामने आया था, जिसके बाद से ही वे ईडी के रडार पर थे.

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