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बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति

रायपुर. बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।  जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े। राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल  रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे। राज्यपाल  डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है। बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।      

जगदलपुर में इलाज अब भी अधूरा, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की इमारत खड़ी

जगदलपुर. जगदलपुर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बस्तरवासियों के लिए राहत का केंद्र बनना था, लेकिन अब सवालों में है. दिल, किडनी और न्यूरो इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म करने का दावा अब खोखला दिख रहा है. 240 बिस्तरों वाला अस्पताल शुरू तो हो गया, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है. कई विभागों में आधुनिक मशीनें मौजूद हैं, पर उन्हें संचालित करने वाले विशेषज्ञ नहीं. ओपीडी को आनन-फानन में शुरू कर दिया गया, लेकिन परामर्श की व्यवस्था कमजोर बनी हुई है. आईसीयू और आपात सेवाओं के 24 घंटे संचालन के दावे जमीन पर पूरे नहीं उतर रहे. गंभीर मरीजों को आज भी बड़े शहरों में रेफर किया जा रहा है. सरकारी दरों पर इलाज का वादा, निजी मॉडल की कार्यप्रणाली में उलझता दिख रहा है. मरीजों से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं अधूरी हैं. अब सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनी यह व्यवस्था आम जनता को कब राहत देगी. स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रशासनिक निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है.

अदालत ने कहा- प्रक्रिया शुरू होने से हस्तक्षेप ठीक नहीं, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव पर रोक की याचिका खारिज

बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए अब हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। कोर्ट ने चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान सही समय और मंच पर करने का निर्देश कहा है। याचिकाकर्ताओं ने महिला आरक्षण के साथ ही कार्यकारिणी का पद बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी की कोर्ट में हुई। दरअसल, बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लिए 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष सहित 17 पदों के लिए 61 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। एडवोकेट निरूपमा वाजपेयी ने हाई कोर्ट में यााचिका दायर कर कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रशासक समिति द्वारा चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी 15 की थी, जिसे गलत तरीके से बढ़ाकर महिला आरक्षण तय किया गया है। जबकि, प्रशासक को कार्यकारिणी के पदों में वृद्धि करने का अधिकार नहीं है। केवल सामान्य सभा के जरिए ही पद बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, सामान्य सभा की अनुमति जरुरी है। हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद, चुनावी प्रक्रिया जारी रखने पर उन्होंने आवेदन भी प्रस्तुत किया था, जिसमें चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कार्यकाल खत्म हो चुका है, जिसके चलते हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद ने प्रशासक नियुक्त किया है। प्रशासक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद से मार्गदर्शन लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है। मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा, चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई और मतदान की तारीख के साथ ही नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो चुकी है। ऐसे में चुनाव पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

केंद्रीय गृहमंत्री शाह भी तीन दिन छत्तीसगढ़ में रहेंगे, राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी बस्तर पंडुम का शुभारंभ

रायपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे पर रहेंगी. वह सुबह 9.10 बजे भुवनेश्वर से उड़ान भरकर मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगी. इसके बाद राष्ट्रपति लाल बाग मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगी. 10.55 से 11.10 बजे तक वह बस्तर पण्डुम में लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन करेंगी, जबकि 11.10 से 12.15 बजे तक कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ करेंगी. राष्ट्रपति मुर्मू करीब तीन घंटे छत्तीसगढ़ में प्रवास के बाद दोपहर 1.30 बजे रायपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगी. सीएम विष्णुदेव साय का बस्तर दौरा  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह 10.05 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत करेंगे. वह 11 बजे बस्तर पण्डुम 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 12.30 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से रायपुर के लिए रवाना होंगे और रायपुर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मुर्मू को विदाई देंगे. सीएम साय 1.45 बजे नए मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे. शाम 4.15 बजे वह दोबारा रायपुर एयरपोर्ट जाएंगे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत करेंगे. इसके बाद शाम 6 बजे एक निजी होटल जाएंगे और वहां से सीधे नए सीएम हाउस पहुंचकर कुछ देर विश्राम करेंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे. वह 7 फरवरी को शाम 4.40 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचकर निजी होटल के लिए रवाना होंगे. 8 फरवरी को सुबह 11 बजे से बैठकों का दौर शुरू होगा, जहां शाम 5 बजे तक नक्सलवाद को लेकर हाई लेवल मीटिंग की जाएगी. इस दौरान केंद्र और राज्य के अधिकारियों के साथ LWE और विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में रणनीति तैयार की जाएगी. शाम 5 से 6.10 बजे तक वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे और होटल में ही रात्रि विश्राम करेंगे. 9 फरवरी को अमित शाह बस्तर पण्डुम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे. वह सुबह 11 बजे विशेष विमान से रायपुर से दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगे और सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल जाएंगे. दोपहर 12.05 से शाम 4 बजे तक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम 4.20 बजे जगदलपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.

अगले 7 दिन ऐसा ही रहेगा मौसम, रात का पारा बढ़ने से दिन रहेगा गर्म

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आज फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है. फरवरी के पहले सप्ताह में दोपहर के वक्त गर्मी लोगों के पसीने छूटा रही है. हालांकि सुबह को कोहरे और रात के समय हल्की ठंड का सिलसिला जारी है. आगामी दिनों में रात के तापमान में बढ़ोतरी के संकेत है. राजनांदगांव में 32 डिग्री रिकॉर्ड मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया. बढ़ेगा रात का पारा मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर अफगानिस्तान उससे लगे क्षेत्र में स्थित है. प्रदेश में 7 फरवरी को मौसम शुष्क रहने की संभावना है. प्रदेश में न्यूनतम तापमान में अगले दो दिनों तक कोई विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है, उसके बाद न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री के आसपास वृद्धि होने की संभावना है. एक नया पश्चिमी विक्षोभ 8 फरवरी को उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?  राजधानी रायपुर में शनिवार को सुबह के वक्त धुंध छाया रह सकता है. मौसम विभाग का अनुमान है कि आज अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है.

मास्टर कैडर के लिए PSTET-2 पास करना जरूरी, शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला

पटियाला. पंजाब में मास्टर कैडर के पदों पर प्रमोशन को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। डायरेक्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन (सेकेंडरी) पंजाब की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब मास्टर कैडर में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET-2) पास करना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पहले मेमो नंबर 19/23-16 A-4 (5) दिनांक 14.09.2017 के तहत कुछ कर्मचारियों को PSTET से छूट दी गई थी। यह छूट उन अध्यापकों को मिली थी जो NCTE की अधिसूचना 23.08.2010 और RTE एक्ट 2009 के तहत PSTET की पहली घोषणा 30.07.2011 के बाद सेवा में आए थे। हालांकि, अब माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 01 सितंबर 2025 को दिए गए फैसले (भरुनेग मुथविभा वेवत तैले अंजुमन-ए-इशात बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) के बाद स्थिति बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मास्टर कैडर में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए PSTET-2 पास करना अनिवार्य घोषित किया है। इस फैसले के आधार पर शिक्षा विभाग ने पुराने नोटिस को रद्द करते हुए नया आदेश जारी किया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी प्रमोशन के बाद मास्टर कैडर में कार्यरत हैं और जिनकी शेष सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक है, यदि उन्होंने अब तक PSTET-2 पास नहीं किया है तो उन्हें दो वर्षों के भीतर PSTET-2 पास करना होगा। ऐसा न करने पर विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्यपाल डेका और CM साय ने अधिकारियों को गुणवत्ता पूर्ण निर्माण के दिए निर्देश, काफिला रोककर देखी NH-30 के कार्य की प्रगति

कोंडागांव. रायपुर से जगदलपुर जाते समय शुक्रवार को केशकाल में अचानक राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय का काफिला रुक गया. वजह थी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर चल रहा सड़क उन्नयन कार्य. मुख्यमंत्री ने मौके पर उतरकर निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया और अधिकारियों को साफ शब्दों में चेताया कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एनएच-30 बस्तर संभाग की सबसे अहम सड़क है, जो राजधानी रायपुर को बस्तर और अन्य राज्यों से जोड़ती है. ऐसे में सड़क निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को तय मापदंडों के अनुसार काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए. केशकाल बायपास पर भी नजर निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने केशकाल नगर के साथ-साथ केशकाल बायपास निर्माण कार्य की जानकारी ली. कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य समय-सीमा के भीतर पूरा कराया जाए और नियमित निगरानी रखी जाए, ताकि आम लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके. कोंडागांव में दीदी की रसोई पहुंचे, फरा-अंगाकर रोटी चखी इसके बाद राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय कोंडागांव पहुंचे. यहां उन्होंने बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित “मोर सुआद–दीदी की रसोई” का निरीक्षण किया. महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया. मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने बस्तर के पारंपरिक व्यंजन फरा और अंगाकर रोटी का स्वाद लिया. मुख्यमंत्री साय ने समूह की महिलाओं से आय और कामकाज की जानकारी ली और कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम हैं. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि महिलाओं को आजीविका के लिए हर संभव सहयोग दिया जाए. लोक कलाकारों की पेंटिंग्स देखी इस दौरान जिले के लोक कलाकारों की पेंटिंग्स का भी अवलोकन किया गया. मुख्यमंत्री साय ने कलाकारों से बातचीत कर उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की. कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, बस्तर सांसद, कोंडागांव विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.

वन मंत्री केदार कश्यप एवं विधायक किरण सिंह देव भी रहे उपस्थित

  रायपुर. वन मंत्री  केदार कश्यप एवं विधायक  किरण सिंह देव भी रहे उपस्थित स्थानीय सर्किट हाऊस में शुक्रवार की शाम उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ जब जमीनी स्तर पर उतरा, तो हितग्राहियों के चेहरे खिल उठे। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप एवं विधायक  किरण सिंह देव ने विभिन्न विभागों के माध्यम से पात्र लोगों को सामग्री और सहायता राशि वितरित कर सबका साथ, सबका विकास के मंत्र को चरितार्थ किया। कार्यक्रम के दौरान सबसे भावुक और उत्साहजनक क्षण तब देखने को मिले जब समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की पहल की गई। उप मुख्यमंत्री  शर्मा, वनमंत्री  कश्यप एवं विधायक  देव ने करण नाग, संजय सांतरा और विजय मौर्य को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल सौंपी, जिससे अब उनकी जिंदगी की रफ्तार नहीं थमेगी। इसी क्रम में राकेश कुमार मिश्रा को कृत्रिम पैर और विपिन सिंह को श्रवण यंत्र प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा में सम्मान के साथ जीने का संबल दिया गया। शिक्षा और तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए समग्र शिक्षा अभियान के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, विवेक कुमार और सुभद्रा को मोबाइल किट तथा जयबती और गायत्री को टैबलेट वितरित किए गए, ताकि ये बच्चे डिजिटल युग के साथ कदमताल कर सकें। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिला समूहों को बड़े संसाधन सौंपे गए। जागृति, तिरंगा, इंद्रावती और झांसी की रानी महिला क्लस्टर संगठनों को ईंट-सीमेंट निर्माण इकाई के संचालन हेतु चेक व स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही कंकालीन और दुर्गा स्व-सहायता समूहों जैसी संस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया गया। बरसों से अपने पक्के मकान का सपना देख रहे परिवारों के लिए भी यह शाम यादगार बन गई। उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) के तहत लक्ष्मी बाई राव, बबिता कश्यप, अलाबती, गजमती और सेवती नायक समेत कई गृहणियों को उनके सपनों के घर की चाबी सौंपी। वहीं छोटे व्यापारियों को मदद पहुंचाने के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत ममता यादव और नासिर खान को चेक प्रदान किए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुजुर्ग हितग्राहियों को प्रधानमंत्री वय वंदना योजना का लाभ देकर सरकार ने हर वर्ग के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी, सीईओ जिला पंचायत  प्रतीक जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।

जनजातीय संस्कृति को नई पहचान: बस्तर में ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ की सौगात

रायपुर. उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण शहर की आपाधापी, धूल और शोर-शराबे से दूर, बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए शुक्रवार को एक भव्य और अनमोल ठिकाना मिल गया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, परंपरा और नैसर्गिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में निर्मित ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ का लोकार्पण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई यह वाटिका अब जनता के लिए समर्पित कर दी गई है, जो न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है। शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  किरण देव के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, सीसीएफ  आलोक तिवारी, स्टायलो मंडावी, संचालक कांगेर वैली सहित अन्य प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। लोकार्पण के पश्चात उपमुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी  उत्तम कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अतिथियों को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, जिसे बाद में एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने यहाँ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए बनाए गए 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में बनाए गए ‘गपशप ज़ोन’ और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा को भी देखा, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। वाटिका भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यहाँ की ‘इको-फ्रेंडली’ नीति और ‘प्लास्टिक फ्री ज़ोन’ के नियम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। वाटिका के बीच में निर्मित तालाब और आइलैंड ने सभी का मन मोह लिया। आगंतुकों की सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग और प्रसाधन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से शुरू हो गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी गई। उपमुख्यमंत्री  शर्मा द्वारा किए गए इस लोकार्पण के साथ ही अब ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल के रूप में अंकित हो गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की राशि के चेक वितरित किए। इस पहल के माध्यम से शासन ने वनांचल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और वन आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने ‘वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि’ के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण वितरित किया। इसमें सबसे बड़ी राशि बकावण्ड के ‘मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह’ को प्रदान की गई, जिन्हें काजू प्रसंस्करण और विपणन जैसे बड़े कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसी कड़ी में, आसना के ‘गोधन स्व-सहायता समूह’ को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अतिरिक्त,  शर्मा ने घोटिया और भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए क्रमशः 13.13 लाख और 13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि वितरित कर स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित किया।   कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल भी प्रदान किया। उन्होंने ‘राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना’ के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपा। यह सहायता राशि उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी। उप मुख्यमंत्री द्वारा किया गया यह वितरण न केवल लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद है, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इस दौरान उपस्थित महिला समूहों के सदस्यों से इमली, काजू के प्रोसेसिंग की गतिविधियों का संज्ञान लेकर बाजार की उपलब्धता एवं मार्केटिंग की व्यवस्था के संबंध चर्चा किए ।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती: मनेंद्रगढ़ में पीएम राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को लाभ

रायपुर. अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है।  डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण

रायपुर. मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है। आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया जा रहा है प्रशिक्षण कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत् प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह कर सके। चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़ वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20 का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो रहा- मनहेर तारम चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी 40 वर्षीय  मनहेर तारम ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा है। इसी तरह  नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके। 19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से जोड़ रहे हैं,  जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले रही हैं। इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला, सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी  विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20 के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का मौका मिल सके।

राज्य स्तरीय पण्डूम 2026 को लेकर तैयारियां तेज, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया निरीक्षण

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने लिया जायजा संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डूम 2026 कार्यक्रम की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने आज निरीक्षण कर जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कार्यक्रम स्थल का भ्रमण कर आयोजन की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित बस्तर की पारंपरिक कला, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और जनसहभागिता से परिपूर्ण हो। निरीक्षण के दौरान स्कूली छात्रों द्वारा की जा रही सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों का अभ्यास देखकर उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डूम जैसे आयोजन बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रतिभाओं को व्यापक पहचान दिलाने का सशक्त मंच हैं। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी., कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कम जगह, ज्यादा उत्पादन: हाइड्रोपोनिक्स से टेरेस गार्डन को बढ़ावा

रायपुर. छत्तीसगढ़ वन निगम की पहल छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइड्रोपोनिक्स पद्धति पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन नया रायपुर आवासीय परिसर, सेक्टर-26 में विगत दिनों किया गया। इस कार्यशाला में मिट्टी के बिना फल एवं सलाद सब्जियों के उत्पादन तथा टेरेस गार्डन की स्थापना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्घाटन निगम के प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें सीमित स्थान में अधिक उत्पादन का अवसर देती हैं और पर्यावरण संरक्षण के साथ आय बढ़ाने में भी सहायक हैं। यह पहल शासकीय योजनाओं के अनुरूप आधुनिक कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में हाइड्रोपोनिक्स विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक श्री जावेद आलम ने प्रतिभागियों को इस पद्धति के मूल सिद्धांत, टेरेस गार्डन की स्थापना, मृदा-रहित खेती की तकनीक तथा न्यूट्रिशन फ्लो टेक्नीक (एनएफटी) विधि के बारे में सरल तरीके से जानकारी दी। साथ ही व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स नर्सरी की स्थापना और प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रतिभागी इस तकनीक को आसानी से अपनाने के लिए प्रेरित हुए। कार्यशाला में निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल आधुनिक, कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भविष्य में उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ नए आय के अवसर भी सृजित होने की संभावना है।

सुशासन की दिशा में पहल: उन्नत जनपद पंचायत में 5 राज्यों के अधिकारियों का प्रशिक्षण

रायपुर. उन्नत जनपद पंचायत पर 5 राज्यों के सीईओ एवं बीडीओ का प्रशिक्षण संपन्न छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में उन्नत जनपद पंचायतों की स्थापना के उद्देश्य से बीडीओ एवं सीईओ हेतु छः दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का क्षमता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 जनवरी से 01 फरवरी तक आयोजित किया गया, जिसमें राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्यों से आए कुल 26 अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में पूर्ण संतृप्ति लाने हेतु नेतृत्व द्वारा समृद्ध विकासखंडों का निर्माण विषय के अंतर्गत जनपद स्तर पर समग्र ग्रामीण विकास को गति देना रहा। प्रशिक्षण का शुभारंभ ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के संयुक्त संचालक  सी. सोम मिश्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के संस्थागत ढांचा, नेतृत्व विकास, सहभागितामूलक योजना निर्माण, पंचायत राज अधिनियम, पेसा अधिनियम, सतत विकास लक्ष्य, ग्राम पंचायत विकास योजना, विकासखण्ड विकास योजना, जिला विकास योजना, राजस्व तथा आजीविका एवं वित्तीय समावेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के अंतर्गत जिला रायपुर के जनपद पंचायत अभनपुर में विकासखंड विकास योजना पर आधारित एक दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन भ्रमण भी आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं हितग्राहियों से संवाद कर जमीनी वास्तविकताओं को समझा तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, अनुसूचित क्षेत्रों, आदिवासी संस्कृति एवं पेसा के जमीनी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। पांचवें दिवस प्रतिभागियों द्वारा प्राप्त अनुभवों के आधार पर विकासखण्ड विकास योजना आधारित योजना निर्माण एवं राज्यवार समूह प्रस्तुतियाँ दी गईं। सभी प्रतिभागियों को टीएमपी पोर्टल पर फीडबैक प्रस्तुत करने के पश्चात प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान एवं राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के संकाय सदस्यों, विशेषज्ञों एवं सहयोगी अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समावेशी, परिणामोन्मुखी एवं सतत ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय फेस-2 का कार्य जल्द होगा प्रारंभ: सोनमणि बोरा

रायपुर. नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय फेस-2 निर्माण के लिए जल्द ही कार्य प्रक्रिया शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण किया जाएगा। आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान स्थित सभाकक्ष में आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, आर्टिस्ट एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।  गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष एक नवंबर को राज्योत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का शुभारंभ हुआ था। इसके पहले जनजातीय जीवन शैली एवं परम्पराओं पर आधारित संग्रहालय का उद्घाटन मई 2025 में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया था। इन संग्रहालयों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बाद अब शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय फेस-2 का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा।  प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में कहा कि संग्रहालय में कैफेटेरिया, गढ़ कलेवा एवं अन्य दुकानें भी खोली जानी हैं इस संबंध में अंतिम रूपरेखा पर चर्चा की गई। उन्होंने संग्रहालय फेस-2 के अंतर्गत ही आकर्षक बागवानी, परिसर के भीतर स्थित नंद सागर का सौंदर्यीकरण, फॉउंटेन एवं पार्किंग की बेहतर व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की।   बैठक में आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में नवनिर्मित छात्रावास के पास ही निर्माणाधीन कन्वेंशन सेंटर की रूपरेखा पर भी चर्चा की। इसके डिजाइन एवं लेआउट पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए। इस कन्वेंशन सेंटर में एक ऑडिटोरियम, आर्ट गैलरी, प्रदर्शनी हॉल, मीटिंग रूम, प्रशासनिक भवन, फूड कोर्ट आदि की व्यवस्था रहेगी।   बैठक में संचालक, टीआरटीआई मती हिना अनिमेष नेताम, उपसचिव  बी.के.राजपूत, अपर संचालक  संजय गौड़,  जितेन्द्र गुप्ता,  आर.एस.भोई, उपायुक्त  विश्वनाथ रेडडी, कार्यपालन यंत्री  त्रिदीप चक्रवर्ती, उपयंत्री  गुप्ता एवं  यशवंत राव सहित आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, आर्टिस्ट एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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