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MP : सिंधिया को घेरने के लिए पायलट को चुनाव मैदान में उतारेगी कांग्रेस

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव में कांग्रेस ने अपने से अलग हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए उनके पुराने दोस्त और राहुल गांधी के करीबियों को चुनाव प्रचार के मैदान में उतारा जा सकता है। राज्य में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव सियासी तौर पर कांग्रेस के पूर्व नेता और वर्तमान में भाजपा के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए सबसे अहम माने जा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा तो कमलनाथ की सरकार गिर गई और भाजपा को फिर से सत्ता संभालने का मौका मिला। राज्य में जिन 28 विधानसभा सीटों पर उप-चुनाव होने वाले हैं उनमें से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके से आती हैं और इन क्षेत्रों की हार-जीत सिंधिया के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्वालियर-चंबल इलाके को सिंधिया का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस इलाके में भारी बढ़त मिली थी। सिंधिया के करीब रहे नेताओं को मैदान में उतार सकती है कांग्रेस कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने सिंधिया को घेरने के लिए युवाओं की टीम चुनाव प्रचार में उतारने का मन बनाया है। इस टीम में राहुल गांधी के करीबियों में शामिल सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, जितेंद्र सिंह सहित कई युवा नेताओं को प्रचार में आगे किया जा सकता है। कांग्रेस युवा नेताओं की जरिए सिंधिया को घेरना चाहती है और उसके लिए कभी सिंधिया के करीबी रहे साथी सबसे ज्यादा उपयोग के लायक लग रहे हैं। सिंधिया के दोस्त पायलट करेंगे कांग्रेस का प्रचार सूत्रों के मुताबिक, बीते रोज प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ के दिल्ली दौरे के दौरान भी चुनाव प्रचार की रणनीति पर चर्चा हुई है। राज्य में कई विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर मतदाता है और वे चुनावी नतीजों को भी प्रभावित करते है। लिहाजा कमलनाथ चाहते हैं कि पायलट को उप-चुनाव के प्रचार में उनका उपयोग किया जाए। कमलनाथ पायलट को प्रचार के लिए राज्य में लाकर दूसरे नेताओं के प्रभाव को भी पार्टी के भीतर कम करना चाह रहे हैं। सिंधिया के प्रभाव को पायलट कम कर सकते हैं राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा का मानना है कि कांग्रेस में सचिन पायलट की पहचान उर्जावान और अपनी बात को बेवाक तरीके से कहने वाले नेता की तो है ही, साथ ही आमजन के बीच भी पायलट को पसंद किया जाता है। सिंधिया के जाने से कांग्रेस को नुकसान हुआ है, उप-चुनाव में सिंधिया के प्रभाव को रोकने में कांग्रेस का नए और चमकदार चेहरे का उपयोग कारगर हो सकता है। कांग्रेस अगर ऐसा करने में सफ ल होती है तो चुनाव और भी रोचक हो जाएंगे। कांग्रेस चार सचिवों की नियुक्ति पहले ही कर चुकी है कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सियासत के नए समीकरण बन रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ चाहते हैं कि राज्य के उन नेताओं को ही सक्रिय किया जाए जो उनके करीबी हैं, वही दूसरे राज्यों के उन नेताओं को राज्य में प्रचार के लिए भेजा जाए जिनकी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से नजदीकियां हैं। राज्य में आगामी विधानसभा के उपचुनाव में नई कांग्रेस देखने को मिल सकती है। वैसे भी उपचुनाव के लिए पार्टी हाईकमान ने चार सचिवों की पहले ही तैनाती की है और वे कमलनाथ के साथ पार्टी हाईकमान के बीच रहकर चुनावी रणनीति को जमीनी स्तर पर उतारने में लगे हैं।

दूसरे दिन संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी; देश में 53.98 लाख केस

नई दिल्ली. देश में कोरोना मरीजों की संख्या 53 लाख 98 हजार 230 हो गई है। पिछले 24 घंटे के अंदर रिकॉर्ड 12 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई। एक दिन में टेस्टिंग का ये सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इन 12 लाख लोगों में 7.66% यानी 92 हजार 574 नए मरीज बढ़े। अब तक 42 लाख 99 हजार 724 लोग ठीक हो चुके हैं। शनिवार को 94 हजार 384 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अच्छी बात है कि यह लगातार दूसरा दिन था जब देश में संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी। इसी के साथ भारत अब मरीजों के ठीक होने के मामले में पहले नंबर पर हो गया है। यहां अब तक अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा मरीज ठीक हुए हैं। अमेरिका अब दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। (भारत में 100 संक्रमितों में से 79 रिकवर, पूरी खबर पढ़ें) मरने वालों का आंकड़ा 86 हजार के पार शनिवार को देश में 1,149 संक्रमितों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी के साथ मरने वालों की संख्या अब 86 हजार 774 हो गई है। अभी 10 लाख 10 हजार 975 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है। ये मरीज घर में रहकर या फिर अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें करीब 9 हजार मरीजों की हालत गंभीर है। कल से कोरोना वैक्सीन का आखिरी ट्रायल शुरू होगा कोरोना के लिए बनाए जा रहे ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का आखिरी और फेज-3 ट्रायल सोमवार से पुणे में शुरू हो जाएगा। इसके लिए 150 से 200 वालंटियर्स डोज लेने के लिए तैयार हैं।

MP : गोदामों में रखा 7610 क्विंटल चावल जानवरों वाला निकला, 43 हजार क्विंटल बंट चुका

शिवपुरी . जानवराें का चावल शिवपुरी में भी इंसानाें काे बांटा गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शिवपुरी जिले में कटनी और रीवा से दो रैक में 51 हजार क्विंटल चावल इसी साल जुलाई महीने में आया था। घटिया चावल शिवपुरी में भी बांटे जाने की शिकायत के बाद भारतीय खाद्य निगम के गुणवत्ता निरीक्षकों ने 29 और 30 अगस्त काे चावल के सैंपल लिए थे। सैंपल में चावल मापदंड पर खराब निकला है। दाे रैक में आए 51 हजार क्विंटल में से 43 हजार 390 क्विंटल चावल गरीबाें काे बांटा जा चुका है। अब गाेदामाें में सिर्फ 7610 क्विंटल चावल बचा है। कोरोना काल में बांटने के लिए भेजे खराब चावल का मामला प्रदेश स्तर पर गरमाने के बाद शिवपुरी में भी जांच शुरू हुई। मंडला और बालाघाट में जो खराब चावल बांटा गया, वही चावल शिवपुरी जिले में भी बांटने लिए रैक भेजी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य निगम के गुणवत्ता निरीक्षकों ने 29 और 30 अगस्त को जिले के विभिन्न गोदामों में रखे चावल की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल लिए। सैंपलों की विश्लेषण रिपोर्ट से पता चला कि चावल निर्धारित मापदंड अनुसार नहीं है। इसलिए एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड जिला शिवपुरी ने आदेश जारी कर गोदामों में रखे संबंधित चावल के वितरण पर रोक लगा दी है। घटिया चावल की कालाबाजारी होती है फिर वही वापस वितरण के लिए आ जाता है पीडीएस सूत्रों की मानें तो इस चावल की कालाबाजारी होती है और यही चावल वापस वितरित होने के लिए आ जाता है। वहीं 17 जुलाई को पिछोर में एसडीएम ने व्यापारी के गोदाम से 230 क्विंटल चावल जब्त किया था। चावल घटिया होने पर स्वयं व्यापारी निर्मल गुप्ता ने कहा था कि गरीबों को कंट्रोल पर सरकार जो चावल भेज रही है, उसे गधे भी नहीं खाएंगे। लेकिन जिले के अधिकारी गंभीरता नहीं हुए। मामले की बड़े स्तर पर शिकायत के बाद कार्रवाई हो सकी है। दोनों रैक में आया खराब चावल, गुणवत्ता जांच के लिए केंद्र प्रभारी जिम्मेदार शिवपुरी जिले में चावल की दोनों रैक आईं। उनमें खराब चावल भेजा गया। उक्त चावल की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी मप्र स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के संबंधित केंद्र प्रभारी की रहती है। अब उक्त मामले में तत्कालीन जिला प्रबंधक और संबंधित केंद्र प्रभारी कार्रवाई की जद में आ गए हैं। उचित मूल्य दुकानाें से खराब चावल बंटने के मामले में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी से लेकर ब्लॉकों में पदस्थ खाद्य निरीक्षक भी जिम्मेदार हैं। नमूने में पोल्ट्री ग्रेड का चावल, इससे पहले जिले में और भी खराब चावल बंटा प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई शिकायत के बाद केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय नींद से जागा। भारतीय खाद्य निगम के गुणवत्ता निरीक्षक शिवपुरी आए और सात स्टेक के सैंपल लिए और जांच मेंं यह चावल मापदंड अनुसार नहीं निकला। सातों स्टैक में कुल 7610 क्विंटल चावल है। सभी नमूने पोल्ट्री ग्रेड के बताए जा रहे हैं। लेकिन पीडीएस के काम में लगे सूत्रों की मानें तो इससे पहले जिले में और भी ज्यादा खराब चावल गरीबों को बांटा जा चुका है।

सोयाबीन लगाई ही नहीं उसका भी बीमा मिला, 50 किसानों को मिली 4 और 8 रुपए की राशि

खरगोन. सरकार ने जोर शोर से समारोह कर किसानों को बीमा क्लेम की राशि का वितरण किया है लेकिन हकीकत में जब बीमा राशि किसानों के खातों में आई तो किसानों की आंखों से आंसू आ गए। बीमा क्लेम में हुई लापरवाही के कारण किसानों के खातों में 4, 8, 16 व 32 रुपए की राशि डाली गई। जिसे लेकर किसानों में आक्रोश है। खरीफ सीजन 2019 में अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों की राशि सरकार ने किसानों के खातों में तो डाली लेकिन नागझिरी के 50 से अधिक किसानों के खातों में अतिवृष्टि के सर्वे के दौरान हुई लापरवाही से बीमा क्लेम की राशि मात्र 4, 8, 16, 23, 29 व 39 रुपए आई है। वहीं कई किसानों ने बताया हमने सोयाबीन की तो फसल ही नहीं लगाई फिर भी हमारे नाम के आगे सोयाबीन का क्लेम देना बताया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि सर्वे में कितनी लापरवाही हुई है। केस 1 : दो बीघा साेयाबीन की फसल हुई नष्ट, राशि मिली 23 रु. किसान जितेश धारवाल ने बताया मेरा नागझिरी स्थित 27 बीघा खेत है। जिसमें मैंने 2 बीघा में सोयाबीन व 25 बीघा में कपास की फसल लगाई थी। दो बीघा में सोयाबीन की फसल लगाई थी। जिसका बीमा क्लेम मुझे 23 रुपए मिला है। मक्का फसल के नाम पर 6224 रुपए इफ्को टोकियो बीमा कंपनी के द्वारा खाते में राशि आई। जबकि मैंने मक्का की फसल लगाई ही नहीं है। 25 बीघा में कपास की फसल लगाई थी जिसमें 4 से 5 लाख का खर्च हुआ था। जिसकी बीमा क्लेम राशि 13344 रुपए लिस्ट में दिखाए है। केस 2 : कपास व पपीता के स्थान पर सोयाबीन का मिला क्लेम करही के किसान प्रेमचंद पाटीदार ने बताया मेरा खेत नागझिरी में हैं। मैंने कभी भी सोयाबीन की फसल नहीं लगाई थी। मैं सिर्फ कपास व पपीता की फसल ही लगाता हूं। मुझे एक किसान से पता लगा कि मुझे सोयाबीन के बीमा क्लेम की राशि मिली है। वह भी मात्र 8 रुपए। इस पर आक्रोशित किसान ने कहा 8 रुपए मेरी ओर से सरकारी खजाने में जमा किए जाएंगे। किसान दिनेश यादव ने बताया 7 बीद्या में सोयाबीन की फसल खराब हुई थी। जिसके मुझे करीब 937 रुपए आए है जबकि 40 हजार का खर्च ही लगा था। अब इतनी कम राशि में नुकसान कैसे पूरा होगा। केस 3 : हजारों रुपए जमा कराते हैं, भीख में मिले सिर्फ 8 रुपए किसान ललित मालवीया ने बताया साढे सात बीद्या की सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ था। बीमा कंपनी ने मुझे भीख के तौर पर मात्र 8 रुपए दिए है जबकि बीमा कंपनी हर साल किसानों से हजारों की राशि प्रीमियम के रुप में जमा कराती है। फसलों का नुकसान होने पर हर साल हमें कुछ रुपए की भीख दे देते हैं। इसी प्रकार धरमचंद मालवीया को सोयाबीन नुकसानी के 29 रुपए, चिंताराम यादव को 4 रुपए बीमा क्लेम के मिले है। और इधर, बारिश से खराब हो रही फसल पिपलिया बुजुर्ग ग्राम में शनिवार शाम को हुई बारिश से किसान चिंतित है। मौसम के मिजाज को देखते हुए अगले दो तीन दिनों तक मौसम साफ नहीं होगा। बारिश ने किसानों की आशाओं पर फिर से एक बार पानी फेर दिया है। कपास और सोयाबीन की फसल पूरी तरह से नष्ट हो रही है। किसान दादू दरबार, जगदीश मुकाती व महेंद्र सिन्हा ने कहा पिछली बार अतिवृष्टि के कारण फसले बर्बाद हो गई। इस वर्ष अच्छी फसल की उम्मीद थी लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण फसल खराब हो रही है। कीटनाशक व्यवसायी निलेश जैन व खेमराज जैन ने कहा किसानों की कमजोर स्थिति का असर उनके व्यापार पर भी पड़ेगा।  

भाजपा नेता की धमकी के बाद सीएसपी का ट्रांसफर, थाना प्रभारी से धक्का-मुक्की

उज्जैन . मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के उज्जैन आगमन के दौरान हेलीपेड पर शुक्रवार सुबह भाजपा नेताओं से विवाद के बाद 24 घंटे में सीएसपी ऋतु केवरे का ग्वालियर तबादला कर दिया गया है। मप्र शासन के गृह विभाग ने शनिवार शाम सीएसपी केवरे का तबादला आदेश जारी किया। उन्हें तत्काल प्रभाव से आईजी कार्यालय ग्वालियर भेजा है। दो साल के दौरान भाजपा व कांग्रेस नेता वीआईपी की अगवानी के दौरान हुए विवाद के बाद तीन एएसपी का भी तबादला करवा चुके है। शनिवार को तबादला आदेश के बाद सीएसपी केवरे ने कहा कि भाजपा नेता संक्रमित पार्षद की पत्नी को सीएम से मिलाने हेलीपेड के अंदर ले जा रहे थे। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर उन्हें रोका तो विवाद किया, मुझे अपशब्द कहे व ट्रांसफर की धमकी दी थी। सीएसपी ने कहा कि नेता सिर्फ तबादला ही करवा सकते है लेकिन कहीं भी भिजवा दे, मैं नौकरी तो दमखम से ही करूंगी। मैं तो इसी दमदारी से ही नौकरी करूंगी..धन्यवाद उज्जैन-सीएसपी हेलीपेड पर भाजपा नेताओं के अपशब्दों का शिकार हुई नानाखेड़ा सीएसपी केवरे ने कहा कि फिलहाल तबादला आदेश मुझे नहीं मिला है लेकिन अगर नेताओं ने ग्वालियर तबादला करवा दिया तो कोई फर्क नहीं पड़ता। ड्यूटी यहां भी कर रही थी और ड्यूटी वहां भी इसी दमखम से करूंगी। मेरे काम पर इस तबादले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उज्जैन में अच्छा-बुरा सारे अनुभव मिले, धन्यवाद उज्जैन। सांसद ने एएसपी को धमकाया था-तवज्जो नहीं दे रहे हो पुलिस अधिकारियों से वीआईपी ड्यूटी के दौरान विवाद करना भाजपा नेताओं का ही शगल नहीं है बल्कि यही स्थिति कांग्रेस की भी है। इससे पूर्व कांग्रेस की प्रदेश में सरकार रही तो यहां के कांग्रेस नेता व जनप्रतिनिधि भी विवाद करने में पीछे नहीं रहे। इसी का नतीजा का है कि वीआईपी के आगमन के दौरान नेताओ को रोकने-टोकने पर दो साल में उज्जैन से यह चौथे पुलिस अधिकारी का तबादला हुआ है। दिसंबर 2018 में शिवराजसिंह महाकाल दर्शन करने आए थे तब हेलीपेड पर एएसपी अभिषेक दीवान से सांसद चिंतामणि मालवीय व अन्य भाजपा नेता भिड़ गए थे। दीवान से यह तक बोले थे कि हमारी सरकार जाने वाली है इसलिए तवज्जो नहीं दे रहो हो। इस घटना के बाद भी एएसपी दीवान का भोपाल एआईजी रेडियो में तबादला करवा दिया था।

MP : प्रीमियम भरा 1 हजार 50 रुपये, किसान को फसल बीमा के नाम पर मिली 1 रुपये की राशि

बैतूल. बैतूल में बीमा राशि के नाम पर किसानों के साथ जो कुछ हुआ है, वह उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं है. जिले के हजारों किसानों के खातों में 100 या 50 रुपये से भी कम बीमा राशि आई है. हद तो तब हो गई जब गोधना गांव के एक किसान के खाते में बीमा राशि केवल 1 रुपये आई. किसान इसे धोखा मान रहे हैं और वे सरकार को ये राशि वापस करने की तैयारी में हैं. वे उग्र प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं. हास्यास्पद बीमा राशि प्रदेश सरकार ने बड़े जोर-शोर से सूबे के 22 लाख से ज्यादा किसानों को फसल बीमा की राशि दी. लेकिन इसमें हास्यास्पद बात यह रही कि कुछ किसानों के हिस्से महज 1 रुपये की राशि आई. बैतूल के गोधना गांव के रहनेवाले किसान पूरनलाल का नाम ऐसे ही किसानों में एक है. उन्होंने 1 हजार 50 रुपये बीमा प्रीमियम अदा किया था, लेकिन उन्हें इनके हिस्से बीमा राशि केवल 1 रुपये आई. बीमा राशि की जानकारी मिलते ही पूरनलाल सदमे की स्थिति में आ गए. पूरनलाल बताते हैं कि ढाई हेक्टेयर के रकबे में लगभग एक लाख की फसल खराब हुई थी, लेकिन जब उन्हें केवल एक रुपये बीमा राशि मिली तो अब ये समझ नहीं आ रहा है कि इस राशि पर हंसे या रोएं. वह लिस्ट जिसमें किसान को एक रुपये की राशि बतौर फसल बीमा मिली,वह लिस्ट जिसमें किसान को एक रुपये की राशि बतौर फसल बीमा मिली. सरकार को वापस देंगे बीमा कम्पनी से मिले 1 रुपये पूरनलाल की तरह ऐसे हजारों किसान हैं, जिनके खातों में बीमा की राशि 100 रुपये या 50 रुपये से भी कम आई है. किसान इस भद्दे मजाक से दुखी हैं और आक्रोशित भी. गोधना गांव के ही किसान पवन के मुताबिक ये एक-दो रुपये बीमा राशि उन्हें देकर अपमानित किया गया है, इस राशि को वो सम्मान के साथ सरकार को लौटा देंगे. कृषि विभाग ने पल्ला झाड़ा, बीमा कम्पनी से करेंगे पूछताछ फसलों के नुकसान के एवज में मिली बीमा राशि को लेकर कृषि विभाग के पास भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं है. कृषि अधिकारियों के मुताबिक बीमा कम्पनी द्वारा नुकसान का आकलन करने का अपना तरीका है. लेकिन जिन किसानों के खातों में 200 रुपये से कम राशि आई है, उनकी लिस्ट दोबारा बीमा कम्पनी को भेजी जा रही है. हालांकि किसानों के खातों में एक रुपये डालने जैसा मजाक क्यों हुआ – इसे लेकर जरूर बीमा कम्पनी से पूछताछ होगी. कुल 64 हजार 893 किसानों को मिली फसल बीमा की राशि बैतूल जिले में कुल 64 हजार 893 किसानों को फसल बीमा की राशि दी गई है. जिसके लिए 81 करोड़ 71 लाख की राशि जारी की गई थी. लेकिन अधिकतर किसान बीमा की राशि को लेकर आक्रोशित हैं, जिससे ये तो जाहिर हो रहा है कि राजस्व अमले, बीमा कम्पनी या फिर किसी तीसरे की लापरवाही से ही किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है.

सरकारी अस्पताल में मिला नवजात का शव, फ्रीजर में रखकर भूला स्टाफ

इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय अस्पताल के मुर्दाघर में हाल ही में एक लावारिस शव के स्ट्रैचर में ही सड़ जाने और कंकाल बन जाने का मामला सामने आया था. जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया में वायरल हुई थीं. ऐसे में जहां एक तरफ मामले की जांच भी पूरी नहीं हो पायी वहीं गुरुवार को एक अज्ञात बच्चे का शव मुर्दाघर में एक बक्से में बंद मिलने से हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि यहां बीते पांच दिन से एक बच्चे का शव मर्चुरी रूम के फ्रीजर में रखा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवजात बच्चे की मौत 5 दिन पहले यानी कि 12 सितंबर हो चुकी थी. ऐसे में पांच दिन से शव उसी हालत में फ्रीजर में पड़ा रहा. ऐसे में माना जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन बच्चे का शव फ्रीजर में रखकर भूल गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि बच्चे को 11 सितंबर को किसी ने अलीराजपुर में छोड़ दिया था. जिसे एक सोशल वर्कर उठाकर अस्पताल में भर्ती कर गया. उन्होंने बताया कि उसी दिन इस बच्चे की मौत भी हो गयी थी जिसे सीएमओ को भी बताया गया था. लावारिस शव के सड़ जाने पर आयोग ने मांगी रिपोर्ट वहीं स्ट्रैचर पर शव के सड़ जाने और कंकाल बन जाने के मामले में एक अधिकारी ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) के मुर्दाघर में स्ट्रैचर पर रखे गये लावारिस शव के सड़ जाने को लेकर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और इस सरकारी अस्पताल के अधीक्षक से चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. ‘लापरवाही के चलते लावारिस शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका’ अधिकारी ने बताया कि आयोग ने मीडिया की खबरों पर इस घटना का संज्ञान लिया है. खबरों में कहा गया है कि सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों की कथित लापरवाही के चलते लावारिस शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका जिससे यह मुर्दाघर में स्ट्रैचर पर पड़े-पड़े सड़ गया और कंकाल बन गया. प्रबंधन ने दिये जांच के आदेश इस बीच, सोशल मीडिया के जरिये मामले का खुलासा होने पर सकते में आये एमवायएच प्रबंधन ने जांच के आदेश दिये हैं. अस्पताल के अधीक्षक प्रमेंद्र ठाकुर ने बताया, “हमने लावारिस शव सड़ने के मामले की जांच के लिये समिति बनायी है. जांच में एमवायएच का जो भी कर्मचारी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.”

खुशखबरी: धीमी गति से रूप बदल रहा कोरोना अब और ज्यादा संक्रामक नहीं होगा

लंदन . दुनियाभर में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस अब धीमी गति से अपना रूप बदल रहा है। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन के शोध से यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक वायरस के आनुवांशिक तत्वों में हुआ एक भी बदलाव उसे और ज्यादा संक्रामक नहीं बनाता। इससे साफ है कि वायरस फैलने की गति और घातक क्षमता में कमी आई है। जबकि पूर्व के शोध में कहा गया था कि भले वायरस धीमी गति से फैल रहा हो पर ज्यादा घातक हो गया है। टीका बनने पर असरकारी होगा- शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर कोविड-19 वायरस में म्यूटेशन या रूप परिवर्तन बहुत धीमा हो रहा है तो इसका फायदा कोविड का टीका तैयार होने पर मिलेगा। यह टीका ज्यादा लंबे वक्त तक लोगों को वायरस से सुरक्षा दे सकेगा क्योंकि वायरस समय गुजरने के साथ और शक्तिशाली नहीं हो रह पाएगा। वायरस अब स्थायी रूप में मौजूद- कैंब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े और शोध के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. जेफ्री स्मिथ का कहना है कि वायरस रफ्तार और क्षमता के लिहाज से अब ज्यादा स्थायी है। इसकी आसानी से पहचान के साथ सही ढंग से उपचार हो सकता है। रॉयल सोसायटी के साइंस इन इमरजेंसी टास्क फोर्स ने इस अध्ययन को प्री-प्रिंट के रूप में ऑनलाइन प्रकाशित किया है। घातक नहीं बन रही बीमारी- शोधकर्ताओं ने जीनोम शृंखला का अध्ययन कर पाया कि धीमी गति से हो रहे रूप परिवर्तन के बावजूद वायरस के अंदर ऐसे गुण विकसित नहीं हो रहे हैं, जिससे वायरस का नया स्ट्रेन किसी दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ले। ऐसे में शोधकर्ताओं का भरोसा है कि यह वायरस अब बीमारी को और ज्यादा संक्रामक और जानलेवा नहीं बना रहा है। प्रयोगशाला में तैयार नहीं हुआ वायरस- वैज्ञानिकों ने वायरस की उत्पत्ति का भी अध्ययन किया। उनका कहना है कि वायरस किसी प्रयोगशाला में तैयार नहीं हुआ। सार्सकोव-2 व अन्य वायरसों की आनुवांशिक प्रकृति के बीच इतना अंतर है कि इसे प्रयोगशाला में बनाना असंभव है। वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन में फैले कोविड-19 वायरस के स्ट्रेन की ट्रेसिंग की। उन्होंने पाया कि वायरस के 97 प्रतिशत निकटतम गुण वाला एक अन्य वायरस ‘आरएटीजी13’ चीन के चमगादड़ों में मौजूद था। हालांकि दोनों वायरस के आनुवांशिक तत्वों की जांच में काफी भिन्नता मिली। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 और कोरोना प्रजाति के अन्य वायरस में इतना ज्यादा अंतर है कि इसे लैब में तैयार करना संभव नहीं है। पहले का दावा- नौ गुना तेजी से फैल रहा संक्रमण- जुलाई में सेल पत्रिका में छपे शोध में कहा गया कि वायरस का नया रूप ‘जी614’ पूरी दुनिया में तेजी से संक्रमण फैला रहा है, हालांकि यह संक्रमण पहले के स्ट्रेन की तुलना में ज्यादा घातक नहीं है। कैलिफोर्निया के ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी के शोध में कहा गया कि नया स्ट्रेन नौ गुना तेजी से दुनिया में वायरस को फैला रहा है। मार्च की शुरूआत में इसकी मौजूदगी यूरोप में थी और मार्च के अंत तक यह अमेरिका तक फैल चुका था। फरवरी में शुरू हुआ था म्यूटेशन – कोरोना के आनुवांशिक तत्वों में आंशिक बदलाव या म्यूटेशन सबसे पहले फरवरी में देखा गया। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यूरोप से अमेरिका में वायरस का बदला हुआ स्वरूप फैला। रॉयल सोसायटी के शोध का महत्व- रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन की स्थापना 1660 में हुई थी, यह ब्रिटेन की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्था है। कोरोना संक्रमण के इस आपातकाल में रॉयल सोसायटी एक विशेष टास्क फोर्स बनाकर इस वायरस से जुड़े अध्ययन कर रहा है। इस ताजा शोध की अभी समीक्षा होना बाकी है, जिसके बाद इसे जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा। पर सोसायटी से जुड़े प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के अध्ययन को इस क्षेत्र से जुड़े अन्य वैज्ञानिक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं। सोसायटी ने सबसे पहले बताई थी मास्क की जरूरत- रॉयल सोसायटी उन वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है, जिससे सबसे पहले कहा था कि सिर्फ तालाबंदी से संक्रमण नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों को फेसमास्क लगाने को प्रेरित किया जाए और वे शारीरिक दूरी अपनाएं।

रवि किशन ने बताया नाम से क्यों हटाना पड़ा था शुक्ला? सुनाई संघर्ष की कहानी

नई दिल्ली . बॉलीवुड में ड्रग्स के मुद्दे को लोकसभा में उठाने वाले बीजेपी सांसद और एक्टर रवि किशन ने मुंबई में अपने संघर्ष के दिनों को याद किया है. रोजी रोटी के लिए उन्हें किस दौर से गुजरना पड़ा इसकी कहानी उन्होंने आजतक से साझा की है. यूपी में फिल्म सिटी बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद वे आजतक से बात कर रहे थे. बता दें कि जौनपुर में जन्मे रवि किशन ने पिता की पिटाई के बाद मुंबई का रूख किया था. जब उनसे पूछा गया कि रवि किशन शुक्ला गोरखपुर में अपनी पहचान बताते हैं मुंबई में क्यों छिपाते हैं, क्या डर था? इस पर रवि किशन कहते हैं, ‘सिनेमा में अलग नजर से देखा जाता है. भैया, दूध वाला, ठेला वाला समझा जाता था. भोजपुरी हिंदी के लोगों को नीचा समझा जाता है. एक लड़ाई में बोला गया कि शुक्ला तो हटाना पड़ेगा. मेरे पास पैसा नहीं था. अपने पिता का नाम हटाना इससे दुखद क्या होगा. रोजी रोटी के लिए ऐसा करना पड़ा, क्योंकि एक बड़े परिवार को देखना पड़ रहा था. प्रभु मुझे रास्ता दिखा रहे थे. मुझे लगा कि सिनेमा का एक नाम होगा इसलिए ऐसा करना पड़ा. पैदल, बस से चला. ये एक लंबी कहानी है.’ फिल्म सिटी से हिंदी पट्टी के लोगों को होगा फायदा रवि किशन ने कहा,’देश तो समझ ही गया होगा कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं. मैं जो चाह रहा था कि फिल्म सिटी यहां बने, सम्मान के साथ लोग यहां काम करें. वैसा माहौल बन रहा है यहां. अपनी भाषा-अपनी इंडस्ट्री पर लोग काम करें.’ जया बच्चन ने आप पर तंज कसा, बॉलीवुड दो खेमे में बंटा हुआ है, खेमेबाजी होगी तो बॉलीवुड से ड्रग का खात्मा कैसे होगा? इस सवाल के जवाब में बीजेपी सांसद ने कहा, ‘खेमेबाजी नहीं होनी चाहिए, मेरा समर्थन करना चाहिए. सबके बच्चे का भविष्य है. गंदी मछलियों को पकड़ना पड़ेगा, सिनेमा एक बहुत बड़ा माध्यम है. क्रिकेट-सिनेमा बहुत बड़ा माध्यम है. ये पहले नहीं था लेकिन आठ दस साल में ये बहुत बढ़ा. गाने, फिल्मों में ये बड़ी तेजी से आया.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा युवा एक अलग दिशा में जा रहे थे, देश को कमजोर, खोखला किया जा रहा था. नशे से देश को कमजोर करने की साजिश.बड़े नाम हों या छोटे, जो गलत किया होगा वो पकड़ा जाएगा. किसी ने गलत नहीं किया होगा तो क्यों पकड़ा जाएगा.’ जया बनाम रवि किशन का तो मामला नहीं है? रवि किशन ने कहा, ‘एनसीबी, सीबीआई, पुलिस प्रशासन, हमारी सरकार बहुत मजबूत हैं. वो एक-एक को चुन-चुन के निकालेंगे. जो भी बर्बाद कर रहा है, ऐसे लोगों को संरक्षण दे रहा है, उन्हें एजेंसियां चुन के निकालेंगे. जो निर्दोष हैं उनके लिए मैं वादा करता हूं कि उन्हें कुछ नहीं होगा. लॉकअप ऑप्शन नहीं है, रिहैब ऑप्शन है.’

मास्क पहनकर सांस लेने से फेफड़े-इम्यूनिटी पर बुरा असर, बचाव का सिर्फ एक तरीका

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनना बहुत जरूरी हो गया है. अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए जरूर पहनें. लेकिन क्या आप जानते हैं लगातार मास्क पहने रखना हमारे फेफड़ों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है. ‘योगा एंड वेलनेस कोच’ अनुराधा गुप्ता का कहना है कि मास्क (Mask) पहनकर सांस लेने से हमारे फेफड़ों, वायटैलिटी और इम्यूनिटी पर काफी बुरा असर पड़ता है. फिटनेस एक्सपर्ट का कहना है कि लगातार मास्क पहनने वालों को ऐसी दिक्कतों से बचने के लिए प्राणायाम या डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज नियमित रूप से करनी चाहिए. इससे ना सिर्फ आपके फेफड़े और इम्यूनिट अच्छी होगी, बल्कि आप ज्यादा ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करेंगे. फिटनेस और योगा एक्सपर्ट ने बताया कि अपनी ही सांस को छोड़ने के बाद इनहेल करने की प्रक्रिया को योग और आयुर्वेद में अपान वायु कहते हैं. अपान वायु में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, जिसका बुरा असर आपकी पूरी सेहत पर पड़ता है. इससे निजात पाने के लिए उन्होंने बेहद आसान एक्सरसाइज भी बताए हैं.

एसडीएम को कालिख पोतने के विरोध में काम बंद, 60 हजार अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर

भोपाल. मध्य प्रदेश के चौरई ब्लॉक के छिंदवाड़ा एसडीएम सीपी पटेल के मुंह पर कालिख पोतने के विरोध में अब मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा के सभी अधिकारी (डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, अपर कलेक्टर) तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक संघ, पटवारी संघ समेत प्रदेश के 60 हजार अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे सबसे ज्यादा आम लोगों को परेशानी होने वाली है। सोमवार से आय प्रमाण पत्र से लेकर जाति प्रमाण पत्र और बाढ़ से होने वाले नुकसान का सर्वे तक सभी सरकारी काम नहीं होंगे। इस हड़ताल को कई और संगठनों का भी समर्थन है। कर्मचारियों का आरोप है कि राजनीतिक दल सिर्फ चर्चा में आने के लिए इस तरह की बदसलूकी करते हैं। इसी कारण अब आमजनों की तरह ही राजनीतिक पार्टियों को भी ज्ञापन कोर्ट में आकर ही अकेले देना होगा। भीड़ में जाकर किसी तरह के ज्ञापन नहीं लिए जाएंगे। हमें सुरक्षा मिलना जरूरी मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा संघ के अध्यक्ष जीपी माली ने कहा कि प्रदेश में लगातार इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। कहीं यह नियम नहीं है कि भीड़ में जाकर ज्ञापन लिया जाए। जिस तरह सामान्य लोग सामान्य तरीके से आकर ज्ञापन देते हैं, उसी तरह अब इस तरह के प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल आकर ज्ञापन दें। बस, हम इतना ही चाहते हैं। यह किसी दल के खिलाफ नहीं है। यह व्यवस्था के खिलाफ हड़ताल है। हम नियमानुसार कार्य करते हैं, लेकिन हमेशा हम ही निशाना बनते हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, निशाना कर्मचारी ही कर्मचारियों ने कहा कि प्रदर्शन चाहे सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का- निशाना सिर्फ कर्मचारी और अधिकारी ही बनते हैं। पिछली सरकार में भांडेर में इसी तरह की घटना हो चुकी है। दो दिन पहले उज्जैन में पुलिस अधिकारी से बदसलूकी हुई, लेकिन उनका ही तबादला कर दिया गया। राजनीतिक दबाव के कारण कर्मचारी और अधिकारी विरोध नहीं कर सकते हैं, इसलिए उनका फायदा उठाया जाता है। जेल जा चुका है आरोपी नेता छिंदवाड़ा में शुक्रवार को बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ नेता बंटी पटेल और पूर्व विधायक चौधरी गंभीर सिंह ने एसडीएम कार्यालय का घेराव किया था। ज्ञापन लेने पहुंचे चौराई तहसील के एसडीएम सीपी पटेल के चेहरे पर बंटी ने कालिख पोत दी थी। पुलिस प्रशासन के जवाबी कार्रवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पथराव कर दिया था। पुलिस ने आरोपी कांग्रेसी नेता बंटी पटेल पर हत्या के प्रयास समेत 11 धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। उस पर एनएसए की कार्रवाई भी की गई। इसके बाद पूर्व विधायक चौधरी गंभीर सिंह पर भी केस दर्ज कर लिया है।

कश्मीर में एनकाउंटर:सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में 3 आतंकी मार गिराए; 2 जवान घायल

श्रीनगर। श्रीनगर के बाटमालू इलाके में सुरक्षाबलों ने गुरुवार को 3 आतंकी मार गिराए। आतंकियों की तरफ से हुए फायरिंग सीआरपीएफ के 2 जवान घायल हो गए और एक महिला की मौत हो गई। आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर सिक्योरिटी फोर्सेज ने तड़के करीब 2.30 बजे सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इस बीच आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इससे पहले 5 सितंबर को सुरक्षाबलों ने बारामूला में 3 आतंकी मार गिराए थे। आतंकियों के पास 2 एके-47, 2 मैगजीन और एक पिस्टल मिली थी। पाकिस्तान से आतंकी घुसपैठ के इनपुट के बाद जम्मू-कश्मीर की पुलिस और आर्मी ने पिछले कई महीनों से सर्च ऑपरेशन छेड़ रखा है। सुरक्षाबलों ने इस साल 72 ऑपरेशंस में 177 आतंकी ढेर किए जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्रीनगर के इलाके में इस साल 7 एनकाउंटर में 16 आतंकी मारे गए हैं। वहीं पूरे राज्य में 72 ऑपरेशंस में अब तक 177 आतंकी ढेर किए जा चुके हैं। अलग-अलग राज्यों के कुछ लोग आईएस में शामिल हो रहे सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि दक्षिण के राज्यों समेत अलग-अलग राज्यों से कुछ लोग आतंकी संगठन आईएस में शामिल हुए हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में आईएस की मौजूदगी से जुड़े 17 मामले दर्ज किए हैं और 122 आरोपी गिरफ्तार किए हैं।

टाटा कंपनी बनाएगी नई संसद, 865 करोड़ की लागत से पुरानी इमारत के सामने ही बनेगी नई इमारत

नई दिल्ली। संसद की नई इमारत बनाने का कॉन्ट्रैक्ट टाटा कंपनी को मिला है। 865 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इमारत का कॉन्ट्रैक्ट बुधवार को टाटा ने हासिल कर लिया है। एक अधिकारी के मुताबिक, इमारत का निर्माण 21 महीने में पूरा होने की उम्मीद है। यह इमारत पार्लियामेंट हाउस स्टेट के प्लॉट नंबर 118 पर बनाई जाएगी। इस इमारत का मास्टर प्लान पिछले साल तैयार किया गया था। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच संसद के दोनों सदनों के लिए ज्यादा सदस्यों की क्षमता वाली नई इमारतें बनाई जाएंगी। साथ ही केंद्रीय सचिवालय के लिए 10 नई इमारतें बनाई जाएंगी। राष्ट्रपति भवन, मौजूदा संसद भवन, इंडिया गेट और राष्ट्रीय अभिलेखागार की इमारत को वैसा ही रखा जाएगा। हालांकि, मास्टर प्लान तैयार होते वक्त केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने स्पष्ट कर दिया था कि ये प्लान अंतिम नहीं है। ऐसा होगा नया संसद भवन लोकसभा की नई इमारत में सदन के अंदर 900 सीटें होंगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि भविष्य में लोकसभा में सीटें बढ़ती हैं तो दिक्कत न हो। नए सदन में दो-दो सांसदों के लिए एक सीट होगी, जिसकी लंबाई 120 सेंटीमीटर होगी। यानी एक सांसद को 60 सेमी की जगह मिलेगी। संयुक्त सत्र के दौरान इन्हीं दो सीटों पर तीन सांसद बैठ सकेंगे। यानी कुल 1350 सांसद बैठ सकेंगे। राज्यसभा की नई इमारत में 400 सीटें होंगी। देश की विविधता दर्शाने के लिए संसद भवन की एक भी खिड़की किसी दूसरी खिड़की से मेल खाने वाली नहीं होगा। हर खिड़की अलग आकार और अंदाज की होगी। प्रधानमंत्री आवास साउथ ब्लॉक की मौजूदा इमारत के पीछे बनेगा पीएम आवास: साउथ ब्लॉक की मौजूदा इमारत के पीछे नया पीएमओ बनेगा। उसी के पीछे प्रधानमंत्री आवास बनेगा। अभी प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर है। इस आवास को साउथ ब्लॉक के पास बनाने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रधानमंत्री के अपने आवास से दफ्तर और संसद आने-जाने के लिए ट्रैफिक नहीं रोकना पड़ेगा।

ग्वालियर में चुनाव से पहले झड़प, शिवराज के मंत्री ने कांग्रेस नेता का गला पकड़ा

ग्वालियर. ग्वालियर चंबल की 16 सीटों पर उपचुनाव की जंग शुरू होने से पहले ही कांग्रेस और बीजेपी में सड़क पर झड़प होने लगी है. नगर निगम ने कमलनाथ के स्वागत के लिए लगाए कुछ पोस्टर हटाए तो कांग्रेसियों ने हंगामा खड़ा कर दिया. कार्यकर्ताओं ने फूलबाग चौराहा पर चक्काजाम कर दिया. इस दौरान केबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर यहां पहुंचे तो कांग्रेसियों ने उनका घेराव कर दिया. मंत्री भी आपा खो बैठे और कांग्रेस कार्यकर्ता से बदसुलूकी कर दी. इससे उत्तेजित कार्यकर्ताओ की उनसे और पुलिस से झड़प हो गई. 18 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ग्वालियर-चंबल के दो दिन के चुनावी दौरे पर आ रहे हैं.इस इवेंट को जोरदार बनाने के लिए शहर में कांग्रेस ने कमलनाथ के होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर लगाए हैं. फूलबाग पर लगे कुछ पोस्टर बैनर नगर निगम अमले ने हटा दिए.जब निगम का अमला पोस्टर बैनर हटा रहा था तो कांग्रेसियों को भनक लग गई.थोड़ी देर में पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता फूलबाग पर जमा हो गए. इन लोगों ने हंगामा कर दिया और फूलबाग चौराहे पर धरना देकर बैठ गए. कांग्रेसियों ने सिंधिया के खिलाफ भी नारेबाज़ी की. लाखन सिंह ने प्रशासन पर BJP के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया. उनका आरोप है कि बीजेपी कमलनाथ और कांग्रेस के जोरदार माहौल से डर गई है. अब कांग्रेस को रोकने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है. कैबिनेट मंत्री पहुंचे तो बवाल बढ़ा,झूमा झटकी जिस वक्त फूलबाग चौराहे पर कांग्रेसियों का धरना चल रहा था, उस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर मांझी समाज से मुलाकात करने पहुंच गए. मंत्री को आता देख कुछ कांग्रेसी उनके सामने नारेबाजी करने लगे.पहले मंत्री प्रधुम्न ने कांग्रेसियों को मना किया, लेकिन जब मंत्री के सामने अड़ गए तो मंत्री ने अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला पदाधिकारी नाज़िम खान का गला पकड़ लिया. मामला बढ़ता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला और कांग्रेसियों को हटाया. सिंधिया का पुतला फूंका, थाना घेरा मंत्री से विवाद के बाद भड़के कांग्रेसियों ने फूलबाग पर प्रदर्शन किया. कांग्रेसियों ने सिंधिया का पुतला फूंका और मंत्री पर कार्रवाई की मांग को लेकर 3 घंटे तक सड़क पर धरना दिया. देर शाम कांग्रेसियों ने पड़ाव थाना का घेराव किया.थाना परिसर में नारेबाजी कर कांग्रेसियों ने मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर और भाजपाईयों पर FIR की मांग की. कांग्रेस के आवेदन पर पुलिस अफसरों ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया.कांग्रेस ने 24 घंटे में कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनीदी है.

कोविड-19 का वैक्सीन ट्रैकर

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि हाई-रिस्क ग्रुप यानी बुजुर्गों और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स के लिए कोरोना वैक्सीन को जल्दी अप्रूव किया जा सकता है। अब तक वैक्सीन जारी करने को लेकर कोई तारीख फिक्स नहीं है, फिर भी स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने उम्मीद जताई है कि अगले साल मार्च से पहले वैक्सीन तैयार हो जाएगी। वहीं, अमेरिकी कंपनी फाइजर ने दावा किया है कि उसका वैक्सीन इसी साल दिसंबर से पहले अमेरिकी मार्केट में आ जाएगी। आप भी जान लीजिए कि कोरोना को काबू करने के लिए जिस वैक्सीन का इंतजार हो रहा है, उस पर दुनियाभर में क्या डेवलपमेंट हुए हैं।

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