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आप जिस सच्चाई को देखकर अब जागे हैं, हम बहुत दिनों से जानते हैं और उसका सामना कर रहे -जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद और पाकिस्तान के साथ तनाव के मुद्दे पर उपदेश देने वाले यूरोपीय देशों को सुनाया है। एस. जयशंकर ने नीदरलैंड के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि यूरोप के देश तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही स्थिरता और शांति के दौर में हैं। खासतौर पर 1991-92 के बाद से और ज्यादा अच्छी स्थिति रही है, लेकिन हम बीते 80 सालों से ऐसे संघर्ष को झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप तो आतंकवाद को ही नकारते रहे हैं, लेकिन हम लगातार 8 दशक से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप जिस सच्चाई को देखकर अब जागे हैं, उसके बारे में हम बहुत दिनों से जानते हैं और उसका सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास दो कठिन पड़ोसी हैं- चीन और पाकिस्तान। हमारे लिए पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद वाली परेशानी हमेशा रही है। इसलिए हमने इस कठिन दुनिया में चुनौती को पूरी मजबूती के साथ झेला है। लेकिन मुझे लगता है कि यूरोप के देश तो इस समस्या से मुंह ही चुराते रहे हैं।’ उनसे पत्रकार ने सवाल पूछा कि यदि पाकिस्तान और चीन के साथ तनाव को समाप्त कर लिया जाए तो तीनों देश तेजी से आगे बढ़ेंगे। इस पर जयशंकर ने कहा कि आप ऐसा इसलिए कह पा रहे हैं क्योंकि यूरोप में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ही सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे में हमारे लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आर्थिक समृद्धि और स्थिरता से भी पहले का मसला है। जयशंकर ने कहा कि भारत की सुरक्षा चुनौतियां यूरोप के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि इसी स्थिति के चलते हमें सुरक्षा को प्राथमिकता देनी पड़ती है। आज आप समझ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘आपकी (यूरोप) स्थिति दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही शांतिपूर्ण और स्थिरता वाली रही है। आप आज रियलटी चेक कर रहे, हम 8 दशकों से ऐसे ही हैं विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोप में खासतौर से 1991-92 के बाद तो स्थिति और सुधर गई। आपका यह अच्छा भाग्य रहा कि भू-राजनीतिक तौर पर आपको अच्छे हालात मिले। इसलिए आपने यह सोचा कि सब कुछ नॉर्मल है। हमारी स्थिति ऐसी नहीं है।’ उन्होंने कहा कि हालांकि आज यूरोप रियलटी चेक कर रहा है। हम इस रियलटी के साथ तो बीते 8 दशकों से जी रहे हैं। इसलिए हमारे पास सुरक्षा को मजबूत करने से पहले कोई और चॉइस ही नहीं है।

एशिया में कोविड का नया वेरिएंट JN.1 से खतरे की घंटी? पिछले 1 साल में सबसे ज्यादा एक्टिव केस, डॉक्टर ने कही ये बात

नई दिल्ली कोरोना वायरस कहें या कोविड-19 साल 2020 के बाद से इसका खौफ लोगों के बीच खूब देखने को मिला. इस महामारी से दुनियाभर में सैंकड़ों लोगों ने जान गवाईं. अभी लोग ढंग से कोविड-19 द्वारा मचाई गई तबाही को भूले भी नहीं थे के इस बीच एशिया के कुछ देशों में कोरोना के केस फिर से बढ़ने लगे हैं. सिंगापुर, हांगकांग और थाईलैंड में संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसकी वजह है ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट है जो बहुत जल्दी फैलता है और अब इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा रहा है. सिंगापुर में 3 मई तक के हफ्ते में 14,200 नए कोरोना केस मिले, जबकि पिछले हफ्ते यह संख्या 11,100 थी. वहां अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी 30% बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से वहां के हेल्थ ऑफिसर ज्यादा सतर्क हो गए हैं. हांगकांग में भी हालात अच्छे नहीं हैं. वहां कोरोना का फैलाव काफी ज्यादा बताया जा रहा है. हेल्थ ऑफिसर अल्बर्ट औ के मुताबिक, इस साल अब तक सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं. एक ही हफ्ते में 31 लोगों की मौत भी हुई है, जो एक साल में सबसे ज्यादा है. कई लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं. भारत में अभी कोरोना के मामले कम हैं, लेकिन थोड़ी बढ़त जरूर हुई है. 19 मई तक 257 एक्टिव केस सामने आए हैं. आसपास के देशों में मामले बढ़ने की वजह से भारत के डॉक्टर और हेल्थ ऑफिर्स अलर्ट पर हैं और हालात पर नजर रख रहे हैं ताकि समय रहते कोई जरूरी कदम उठाया जा सके. लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर ओमिक्रॉन का ये नया वेरिएंट JN.1 क्या है? इसके लक्षण क्या हैं और ये कैसे फैलता है? चलिए जानते हैं. JN.1 वैरिएंट क्या है? JN.1 कोरोना वायरस का एक नया रूप है, जो ओमिक्रॉन से जुड़ा है. यह BA.2.86 नाम के पुराने वेरिएंट से निकला है, जिसे पिरोला भी कहा जाता है. इस वेरिएंट की पहचान सबसे पहले 2023 के आखिरी में हुई थी. इसके बाद यह अमेरिका, यूके, भारत, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों में तेजी से फैल गया. इस वेरिएंट में स्पाइक प्रोटीन (वायरस का वो हिस्सा जिससे वह शरीर की सेल्स से चिपकता है) में एक खास बदलाव (म्यूटेशन) हुआ है. इस बदलाव की वजह से यह वायरस ज्यादा तेजी से फैल सकता है. यह शरीर की उस इम्युनिटी को भी बेद सकता है, जो वैक्सीन लगवाने या पहले कोविड होने के बाद बनी थी. कितना खतरनाक है JN.1? फिलहाल के आंकड़ों के मुताबिक, JN.1 वेरिएंट ओमिक्रॉन के पुराने वेरिएंट्स की तरह ही है और इससे गंभीर बीमारी होने का खतरा बहुत कम है. अधिकतर लोगों में इसके लक्षण हल्के से मध्यम लेवल के ही देखे गए हैं. इनमें गले में खराश, बहती नाक, हल्का बुखार, थकान और खांसी जैसे लक्षण शामिल हैं. ये लक्षण पहले वाले ओमिक्रॉन वायरस से बहुत मिलते-जुलते हैं. हालांकि, JN.1 की सबसे बड़ी चिंता इसकी तेजी से फैलने की क्षमता है. यह वेरिएंट बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, इसलिए इसके केस तेजी से बढ़ सकते हैं. अभी तक डॉस्पिटल में एडमिट होने वालों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं देखी गई है, लेकिन फिर भी बुज़ुर्ग लोगों, पहले से बीमार लोगों और जिनकी इम्युनिटी कमजोर है उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है. इस वेरिएंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और सतर्कता बहुत जरूरी है, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके. कोविड का नया वेरिएंट JN.1 क्या खतरे की घंटी कोरोना एक बार फिर एशिया के कुछ हिस्सों में दस्तक दे रहा है। भारत में पिछले एक साल में सबसे अधिक 257 सक्रिय केस दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, AIIMS के एक्सपर्ट डॉ संजय रॉय का कहना है कि JN-1 एक साल पुराना वेरिएंट है, कोई नया वायरस नहीं है। न ही यह कोई नया स्ट्रेन है। पॉजिटिव केस इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि टेस्ट किए जा रहे हैं। मौजूदा हालात में JN.1 को लेकर घबराने वाली बात नहीं है। अभी तक इसको लेकर साइंस यही कहता है कि यह कॉमन कोल्ड है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय का भी कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के एक्सपर्ट और कोरोना वैक्सीन ट्रायल के प्रमुख रहे डॉक्टर संजय रॉय ने बताया कि कोरोना फैमिली के हजार से भी ज्यादा वेरिएंट हैं। लेकिन, मुख्य रूप से सात ऐसे वायरस हैं जो इंसानों को प्रभावित करते हैं। 2002 तक कोरोना वायरस (CoV) इंसानों के लिए मामूली वायरस माना जाता था। लेकिन पिछले 20 से 25 सालों में इसके इफेक्ट को देखें तो कोरोना परिवार का 5वां वायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) आया। इसके बाद इस परिवार का छठा वायरस मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS-CoV) आया। अब इसका 7वां वायरस कोविड-19 है। जहां तक वर्तमान हालात की बात है तो अब यह कॉमन कोल्ड है। इसके ज्यादा खतरनाक होने का कोई एविडेंस अभी नहीं है। वैज्ञानिक समझ के आधार पर करनी होगी बात डॉक्टर संजय ने कहा कि साइंस की बातें तो साइंस के आधार पर ही होनी चाहिए। वट्सऐप से जानकारी लेकर बातें नहीं करनी चाहिए। JN.1 वेरिएंट में नया कुछ नहीं है। एक साल पुराना है। इसको लेकर इतनी बातें करने के पीछे कोई साइंस तो नहीं दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी का कमर्शियल इंट्रेस्ट हो तो यह अलग बात है, लेकिन यह भी बहुत दिनों तक नहीं चलता है। अमेरिका जैसे देश ने अपने यहां छह महीने तक के बच्चों का भी कोविड वैक्सीनेशन करा दिया, जबकि हमने साइंस की बात की। हमारी सरकार ने भी इसे तवज्जो दिया और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को एक भी वैक्सीन नहीं लगी और वायरस का उनपर असर भी कुछ नहीं हुआ। हमें समझना होगा और वैज्ञानिक समझ के आधार पर ही बात करनी होगी। सिक्वेंसिंग में पहले भी मिला था वेरिएंट JN.1 दिल्ली में कोरोना वायरस पर नजर रखने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की जाती थी, लेकिन सूत्रों का कहना है … Read more

2,000 करोड़ रुपये की लागत से देश भर में 72,000 EV सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की जाएगी

नई दिल्ली सरकार ने  जानकारी दी कि 2,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ पीएम ई-ड्राइव योजना देश भर में लगभग 72,000 EV सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना का समर्थन करेगी.भारी उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इन स्टेशनों को रणनीतिक रूप से 50 राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों, मेट्रो शहरों, टोल प्लाजा, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, ईंधन आउटलेट और राज्य राजमार्गों जैसे उच्च यातायात स्थलों पर तैनात किया जाएगा. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत EV चार्जिंग बुनियादी ढांचे के कार्यान्वयन की समीक्षा और तेजी लाने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समन्वय बैठक की अध्यक्षता की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ परिवहन को सक्षम बनाने और जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी ईवी-तैयार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है. कुमारस्वामी ने कहा कि “भारत संधारणीय परिवहन के लिए वैश्विक मॉडल बनने की राह पर है. पीएम ई-ड्राइव योजना एक परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य हमारे नागरिकों को स्वच्छ, किफायती और सुविधाजनक परिवहन विकल्पों तक पहुंच प्रदान करना है. हम केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं बना रहे हैं, हम ऊर्जा सुरक्षा और हरित आर्थिक विकास की नींव भी रख रहे हैं.” मंत्री ने इस पहल के क्रियान्वयन में विभिन्न हितधारकों की एकीकृत भूमिका को भी स्वीकार किया. बीएचईएल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) को मांग एकत्रीकरण और एकीकृत डिजिटल सुपर ऐप के विकास के लिए नोडल एजेंसी के रूप में माना जा रहा है, जो पूरे भारत में EV यूजर्स के लिए एकल मंच के रूप में काम करेगा. ऐप में PM e-Drive योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर तैनाती को ट्रैक करने के लिए रियल-टाइम स्लॉट बुकिंग, भुगतान एकीकरण, चार्जर उपलब्धता की स्थिति और प्रगति डैशबोर्ड की सुविधा होगी. BHEL चार्जर स्थापना के प्रस्तावों को संकलित करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए राज्यों और मंत्रालयों के साथ समन्वय भी करेगा. कुमारस्वामी ने कहा कि “स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण अकेले सफल नहीं हो सकता. यह बैठक एक सरकार के रूप में काम करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है. मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम और राज्य सभी जमीनी स्तर पर परिणाम देने के लिए एकजुट हैं. हमें विश्वास है कि पीएम ई-ड्राइव नए उद्योगों को बढ़ावा देगा, हरित रोजगार पैदा करेगा और हर भारतीय को निर्बाध इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रदान करेगा.”

मरीज कई वर्षों से बीमारी से जूझ रहे थे, एक दुर्लभ सर्जरी 60 मिनट तक चली, पेट से निकले 8125 स्टोन्स, मिली राहत

नई दिल्ली गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ सर्जरी कर 70 वर्षीय मरीज के पित्ताशय से 8,125 स्टोन्स (पथरी) सफलतापूर्वक निकालकर मरीज को पिछले लंबे समय से हो रही पीड़ा और बेचैनी से राहत दिलाई। मरीज कई वर्षों से पेट के दर्द, बीच-बीच में बुखार आने, भूख न लगने और कमजोरी की शिकायत से जूझ रहे थे और उन्हें सीने में भी भारीपन महसूस हो रहा था। ये है डॉक्टरों की टीम डॉ. अमित जावेद, सीनियर डायरेक्टर, गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल ओंकोलॉजी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम तथा डॉ नरोला येंगर, प्रिंसीपल कंसल्टेंट– जीआई, जीआई ओंकोलॉजी, मिनीमल एक्सेस एंड बेरियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के नेतृत्व में डॉक्टरों की कुशल टीम ने इस जटिल एवं चुनौतीपूर्ण मामले को संभाला और करीब घंटे भर चली सर्जरी के दौरान मरीज के पेट में पित्ताशय की थैली से पथरी निकालकर उनकी वर्षों पुरानी तकलीफ का दूर किया। असहनीय हुआ दर्द तो पहुंचे अस्पताल मरीज शुरुआत में इलाज को लेकर अनिच्छुक थे। लेकिन उनका दर्द लगातार बढ़ रहा था और उनके नियंत्रण से बाहर हो गया, तो उन्हें नाजुक हालत में फोर्टिस गुरुग्राम लाया गया। यहां भर्ती करवाने पर उनके पेट का तत्काल अल्ट्रासाउंड किया गया जिसमें उनके पित्ताशय में काफी भारीपन दिखायी दिया। उनकी कंडीशन को देखते हुए, डॉक्टरों ने तुरंत मिनीमली इन्वेसिव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर गॉल ब्लैडर (पित्ताशय की थैली) में जमा हजारों गॉलस्टोन्स को निकाला। यह सर्जरी करीब एक घंटे चली और 2 दिन बाद ही स्थिर अवस्था में मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। सर्जरी से ज्यादा समय स्टोन गिनने में लगा लेकिन, सर्जरी के बाद और भी लंबा काम बाकी था क्योंकि सपोर्ट टीम को मरीज के पित्ताशय से निकाले गए गॉलस्टोन्स की गिनती करनी थी। सर्जरी के बाद घंटों बैठकर टीम ने इस गिनती में पाया कि यह आंकड़ा आश्चर्यजनक रूप से 8,125 था। इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ अमित जावेद, डायरेक्टर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ओंकोलॉजी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, ‘यह मामला वाकई दुर्लभ था, भले ही अभूतपूर्व न रहा हो। यदि पित्ताशय की पथरी का उपचार नहीं किया जाए, तो धीरे-धीरे पथरी बढ़ती रहती है।’ मरीज की उपेक्षा से इस हद तक बढ़ी पथरी वह आगे बोले, ‘इस मामले में, मरीज द्वारा पिछले कई वर्षों तक उपेक्षा का ही नतीजा था कि पथरी इस हद तक बढ़ गई थी। यदि अब और देरी की जाती, तो मरीज की हालत काफी बिगड़ सकती थी और पित्ताशय में इंफेक्शन, पेट दर्द की और गंभीर शिकायत भी हो सकती थी।’ डॉ. अमित ने बताया, ‘ऐसे में भी इलाज न कराया जाए तो गॉलब्लैडर में पस (मवाद) बनने लगता है, और गॉलब्लैडर की भीतरी सतह भी सख्त होने लगती है और इसमें फाइब्रॉसिस भी हो सकता है, यहां तक की गॉलब्लैडर के कैंसर की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।’ सर्जरी के बाद, मरीज की हालत स्थिर है और उन्हें कोई खास बेचैनी भी नहीं है। इस मामले को दुर्लभ बनाया मरीज के पित्ताशय में भारी संख्या में मौजूद स्टोन्स ने जो आमतौर पर कलेस्ट्रोल से बने होते हैं और प्रायः इनका संबंध मोटापे तथा अधिक-कलेस्ट्रोल युक्त खुराक से होता है।

राजद नेता प्रेम चंद गुप्ता ने कहा- जब से पाकिस्तान का जन्म हुआ है, तभी से वह भारत के खिलाफ साजिश रचता आ रहा है

नई दिल्ली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य प्रेम चंद गुप्ता ने गुरुवार को पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जब से पाकिस्तान का जन्म हुआ है, तभी से वह भारत के खिलाफ साजिश रचता आ रहा है। 1948 में उसने मुजाहिदीन भेजकर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों को अपने कब्जे में कर लिया। इसके बाद इन लोगों ने 1965, 1971 और 1999 में भारत के खिलाफ युद्ध किया। उन्होंने पाकिस्तान की तरफ से आतंकवादियों को संरक्षण देने को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत में अब तक जितनी भी सरकारें सत्ता में रहीं, उन सभी ने पाकिस्तान को सिर्फ यही कहा कि आप लोग आतंकियों को पनाह देना, उनका पालन-पोषण बंद कीजिए, लेकिन आज तक पाकिस्तान ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया। पाकिस्तान की तरफ से लगातार आतंकवादियों को संरक्षण दिया जा रहा है, लेकिन अब इस स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र कर कहा कि यह पाकिस्तान का अमानवीय कृत्य है, जिसके तहत उसने पर्यटकों को निशाना बनाया। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहा है। इसी को देखते हुए भारत को ऑपरेशन सिंदूर जैसा कदम उठाना पड़ा, जिससे परिणाम अब साफ देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग देशों में भारत सरकार की तरफ से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने के उद्देश्य के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि हम इस प्रतिनिधिमंडल को भेजकर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के नापाक चेहरे को बेनकाब करना चाहते हैं। हम पूरी दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि किस तरह से वह आतंकवादियों को संरक्षण देता है, उन्हें पालता और पोषता है। उन्होंने पाकिस्तान की फितरत को झूठा बताया और कहा कि वैश्विक मंच पर हमेशा से ही पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। पाकिस्तान के पास अपना मौलिक कुछ नहीं है। वह सिर्फ दूसरे देशों की नकल करता है। प्रेम चंद गुप्ता ने ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते हुए कहा कि इससे आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब मिला है। इस ऑपरेशन को सफल बनाने में हमारी सेना ने अहम भूमिका निभाई है। हमें अपनी सेना पर पूरा भरोसा है।

तिरंगा यात्रा में शामिल अनुराग ठाकुर ने कहा- हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया

पांवटा साहिब पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भारतीय सेना ने जोरदार बदला लिया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके के आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना ने अटैक करते हुए कड़ी कार्रवाई की। वहीं, भारतीय सेना के सम्मान में भाजपा तिरंगा यात्रा निकाल रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पांवटा साहिब में निकाली गई तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। तिरंगा यात्रा में शामिल अनुराग ठाकुर ने कहा, “हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित कर दिया कि भारत की सेना हर चुनौती का डटकर सामना करने में सक्षम है। यह तिरंगा यात्रा सैनिकों के साहस, बलिदान और शौर्य को सम्मान देने का एक छोटा सा प्रयास है।” तिरंगा यात्रा का उद्देश्य “ऑपरेशन सिंदूर” में भारतीय जवानों द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस और पराक्रम को जन-जन तक पहुंचाना था। इस यात्रा के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर देश के वीर जवानों को सम्मान दिया और राष्ट्रभक्ति का संदेश फैलाया। रामलीला मैदान से शुरू हुई यह यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नागरिकों को देशभक्ति के रंग में रंगती गई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा विचारक अनुराग गुप्ता ‘भूषण’ उपस्थित रहे। अनुराग गुप्ता का हिमाचल की सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में अहम योगदान रहा है। वह पिछले दो दशकों से राष्ट्रसेवा और जन-जागरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने वाले कई अभियानों का नेतृत्व कर चुके हैं और कई बार भाजपा की विचारधारा को जनमानस तक पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं। वह ‘भूषण’ उपनाम से प्रसिद्ध हैं और एक चिंतक, वक्ता और प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति गीत और नारों की गूंज से वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो गया। वहीं, सभी के हाथ में झंडे भी थे। यह यात्रा न केवल एक सामूहिक आयोजन था, बल्कि यह उन वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक था, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। इस यात्रा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पांवटा साहिब से विधायक सुखराम चौधरी, जिला भाजपा अध्यक्ष सहित कई मंडल अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की

टोक्यो जेडीयू से सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने टोक्यो के एडोगावा में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपनी जापान यात्रा शुरू की। इसके बाद सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को टोक्यो में जापान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और ऑपरेशन सिंदूर के वैश्विक आउटरीच अभियान के तहत आतंकवाद के खिलाफ भारत के अडिग रुख की पुष्टि की। इस प्रतिनिधिमंडल में जेडीयू से सांसद झा, भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी और बृजलाल, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी, सीपीआई (एम) के राज्यसभा सदस्य जॉन बैरिटास और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को टोक्यो पहुंचा। इनके पहुंचने के बाद से ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भारत की व्यापक कूटनीतिक पहल की शुरुआत भी हो गई। जेडीयू सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “टोक्यो के एडोगावा में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपनी यात्रा की शुरुआत की। जुलाई 2024 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। यह शांति और भारत-जापान मित्रता का प्रतीक है। जापान में बापू की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करना उनके अहिंसा और सद्भाव के शाश्वत सिद्धांतों के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।” यह प्रतिनिधिमंडल ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करेगा। टोक्यो पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का जापान में भारतीय राजदूत सिबी जॉर्ज ने स्वागत किया। इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल को राजदूत सिबी जॉर्ज द्वारा भी जानकारी दी गई, जिन्होंने जापानी नेतृत्व और नागरिक समाज के साथ जुड़ाव के लिए रणनीतिक रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अपराजिता सारंगी ने लिखा, “यहां भारतीय दूतावास जापान में भारतीय राजदूत की ओर से प्रतिनिधिमंडल को ब्रीफिंग के साथ शुरुआत की गई। इसके अलावा, हम टोक्यो में एडोगावा गए और महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की।” भारतीय प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य सहनशीलता नीति के लिए समर्थन जुटाने पर केंद्रित है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने जिस प्रकार का रुख दिखाया है, उसे यहां पर सभी कार्यक्रमों में उजागर किया जाएगा।” ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को एक्सपोज करने के उद्देश्य से भारत सरकार की ओर से 59 सांसदों, पूर्व मंत्रियों, राजनयिकों और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं समेत 7 उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 21 मई से 5 जून के बीच 33 देशों की यात्रा करेंगे।

भारत की कार्रवाई के बाद पाक ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात एक भारतीय कर्मचारी को किया निष्कासित

इस्लामाबाद भारत के एक्शन से तिलमिलाई पाकिस्तान सरकार ने भारतीय उच्चायोग के एक कर्मचारी को निष्कासित करने की बृहस्पतिवार को घोषणा की। इससे पहले, भारत ने पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत एक पाकिस्तानी अधिकारी को जासूसी में संलिप्तता के आरोप में बुधवार को निष्कासित कर दिया था। भारत में पिछले एक सप्ताह में निष्कासन का यह दूसरा मामला है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान उच्चायोग के एक कर्मचारी को उसके आधिकारिक दायित्व से इतर गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण ‘‘अवांछित व्यक्ति” घोषित किया गया है और उसे 24 घंटे में भारत छोड़ने को कहा गया है। भारत ने 13 मई को भी एक पाकिस्तानी अधिकारी को जासूसी में कथित रूप से लिप्त रहने पर निष्कासित कर दिया था। भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात एक भारतीय कर्मचारी को निष्कासित कर दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के एक कर्मचारी को उसकी विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति के प्रतिकूल गतिविधियों में लिप्त होने के कारण अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है। संबंधित अधिकारी को 24 घंटे के भीतर पाकिस्तान छोड़ने का निर्देश दिया गया है।” भारतीय प्रभारी उच्चायुक्त को इस निर्णय से अवगत कराने के लिए विदेश मंत्रालय बुलाया गया। बयान के अनुसार इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय उच्चायोग के किसी भी राजनयिक या कर्मचारी को अपने विशेषाधिकारों और स्थिति का किसी भी तरह से दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद से भारत एवं पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों पर सटीक हमले किए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने आठ, नौ और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया। दोनों पक्षों के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच 10 मई को वार्ता के बाद सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति बनी।    

50 परसेंट डिस्काउंट पर दे रहा फाइटर जेट, चीन में जाकर फाइटर जेट चलाना सीख रहे पाकिस्तानी पायलट

चीन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की सेना की सटीक रणनीति और ताकत के प्रदर्शन से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। जवाब में अब वो फिर से युद्ध की तैयारियों में जुट गया है। हमेशा की तरह इस बार भी उसे सहारा मिला है चीन का, जो न केवल उसकी सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है, बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी वाले फाइटर जेट्स को भी भारी छूट के साथ उपलब्ध करा रहा है।   पाकिस्तान को मिलेंगे 50% छूट पर J-35A फाइटर जेट मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन पाकिस्तान को अपने अत्याधुनिक 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट J-35A की आपूर्ति 50% छूट के साथ कर रहा है। पहले चरण में 30 जेट्स देने की योजना है, जिनकी डिलीवरी अगस्त 2025 तक की जाएगी। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी पायलट पहले से ही चीन में इन जेट्स की उड़ान की ट्रेनिंग ले रहे हैं ताकि आने के बाद उनका इस्तेमाल तुरंत शुरू किया जा सके।   क्या है J-35A की ताकत? J-35A चीन का ट्विन-इंजन, स्टील्थ, सुपरसोनिक फाइटर जेट है, जिसे स्ट्राइक मिशन के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। इसे अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 के समकक्ष माना जा रहा है। इस फाइटर जेट में है: चीन क्यों दे रहा है इतनी रियायत? चीन की इस मदद के पीछे केवल दोस्ती नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक रणनीति है। चीन चाहता है कि दक्षिण एशिया में उसकी पकड़ बनी रहे और पाकिस्तान उसकी रक्षा प्रणाली पर निर्भर बना रहे। इस तरह चीन न सिर्फ भारत को घेरने की नीति पर काम कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहा है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर उसने बुरी नजर डाली तो भारत बांग्लादेश के दोनों चिकन नेक पर अटैक करने के लिए तैयार: CM हिमंत सरमा

नई दिल्ली असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को चेतावनी दे दी। उन्होंने कहा कि अगर सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर उसने बुरी नजर डाली तो भारत बांग्लादेश के दोनों चिकन नेक पर अटैक करने के लिए तैयार है।  कुछ दिनों पहले चीनी नेताओं से मीटिंग के दौरान बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर बयानबाजी की थी। यह चेतावनी उन रिपोर्ट्स के बाद सामने आई जिसमें कहा गया है कि चीन लालमोनिरहट में द्वितीय विश्व युद्ध के समय से एयरबेस को फिर से ऑपरेशनल करने में बांग्लादेश की मदद कर रहा है, जो चिकन नेक कॉरिडोर से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर मौजूद है। हालांकि,  पहले ये जान लें कि बांग्लादेश के दो चिकन नेक कौन-कौन से हैं। बांग्लादेश में एक संकरा कॉरिडोर बांग्लादेश के मुख्य भूभाग को चटगांव से जोड़ता है, जो इसका सबसे बड़ा बंदरगाह है। वहीं, दूसरा चिकन नेक, रंगपुर डिवीजन के दक्षिण में स्थित एक गलियारा है, जो मेघालय के नजदीक है। फेनी नदी के तट पर मौजूद दक्षिणी त्रिपुरा के सबरूम से लेकर चटगांव को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले जिले मिरशाराय उपजिले की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। इस संकरे गलियारे को अगर बंद कर दी जाए तो बांग्लादेश की 20 फीसदी भूमि देश से अलग हो जाएगी। इससे चटगांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा। बता दें कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए चटगांव काफी महत्वपूर्ण है। यह शहर देश के 90 फीसदी से अधिक आयात-निर्यात व्यापार संभालता है। वहीं, 16 हजार वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा में फैला रंगपुर डिवीजन बांग्लादेश का संपूर्ण उत्तरी भू-भाग है। अगर ये हिस्सा बांग्लादेश के बाकी हिस्सों से अलग हो गया तो देश की अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी।

आज कर्नाटक के गृह मंत्री के ठिकानों पर ED रेड में ट्विस्ट, डिप्टी CM बोले- हां, दिया था वेडिंग गिफ्ट

बेंगलुरु कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को छापेमारी की है। यह छापेमारी कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव द्वारा की गई सोने की तस्करी से जुड़ी है। ईडी उसी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहा है और उसने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत राज्यभर में 16 स्थानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी उन हवाला संचालक और अन्य ऑपरेटर को निशाना बनाकर की गई जिन्होंने सोना तस्करी की आरोपी रान्या राव के खातों में कथित तौर पर फर्जी वित्तीय लेनदेन किए थे। निदेशालय ने जिन स्थानों पर छापेमारी की उनमें राज्य में परमेश्वर से जुड़े तीन शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं। इस बीच, राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने यह कहकर मामले में नया ट्विस्ट ला दिया है कि गृह मंत्री ने उनसे कहा है कि उन्होंने अभिनेत्री को शादी में उपहार दिया था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। शिवकुमार ने छापेमारी के बीच आज गृह मंत्री जी परमेश्वर से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की थी। उसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने अभी परमेश्वर से बात की है, वहां एक शादी (समारोह) थी, हम सार्वजनिक जीवन में हैं, हम संस्थाएं चलाते हैं। अपने परिचित लोगों के प्रति सम्मान के तौर पर हम ढेर सारे उपहार देते हैं, हम 1 रुपया, 10 रुपये, 10 लाख रुपये, 5 लाख रुपये तक देते हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने भी उपहार दिया होगा। वह एक वेडिंग गिफ्ट थी, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।” कोई भी राजनेता रान्या का समर्थन नहीं करेगा इसके साथ ही डीके शिवकुमार ने कहा कि रान्या राव पर जिस तरह की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप है, उसका कोई भी राजनेता समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “उस महिला ने जो भी गतिविधियां की हैं, वह उसका निजी मामला है, कानून अपना काम करेगा। जहां तक ​​परमेश्वर का सवाल है, हम हजारों लोगों से मिलते हैं, हमें नहीं पता कि कौन क्या करता है। हम कानून और ईडी में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। मैंने उनसे सिर्फ चर्चा की, मैंने उनसे पूछा कि वास्तविकता क्या है, उन्होंने कहा कि शादी के समय उन्होंने दिया है, उन्होंने उपहार दिया है, और यह बिल्कुल स्वाभाविक है।” सीएम से मिले HM परमेश्वर दूसरी तरफ, जी परमेश्वर ने उनसे जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर ईडी की छापेमारी के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से मुलाकात की है। हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि परमेश्वर एवं सिद्धरमैया के बीच क्या बातचीत हुई। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि परमेश्वर ने मुख्यमंत्री को सोने की तस्करी संबंधी मामले के सिलसिले में छापेमारी की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने मुख्यमंत्री को उन परिस्थितियों के बारे में भी बताया जिनमें छापेमारी की गई है।’’ हो सकता है पैसे ही गिफ्ट में दिए हों छापेमारी के बाद डी के शिवकुमार, सतीश जारकीहोली और दिनेश गुंडू राव समेत कई मंत्री एवं सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक अपना समर्थन जताने के लिए सदाशिवनगर स्थित जी परमेश्वर के आवास पहुंचे थे। शिवकुमार ने कहा, ‘‘हम सभी सार्वजनिक जीवन में हैं। कई लोग ट्रस्ट चलाते हैं। हो सकता है कि उन्होंने शादी के लिए पैसे उपहार में दिए हों। क्या परमेश्वर जैसे प्रभावशाली नेता तस्करी में लिप्त हो सकते हैं?’’ मार्च में गिरफ्तार हुई थी रान्या राव रान्या राव को दुबई से आने के बाद तीन मार्च को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया और 14.2 किलोग्राम वजनी सोने की छड़ें जब्त कीं जिनकी कीमत 12.56 करोड़ रुपये से अधिक थी। वह डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) रैंक के अधिकारी के रामचंद्र राव की सौतेली बेटी हैं।

अंतरिम सरकार के कुछ नीतिगत फैसलों पर अपनी निराशा भी व्यक्त की, बांग्लादेश में सबकुछ ठीक नहीं, खतरे में यूनुस की कुर्सी

ढाका बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अशांति के बीच सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने कहा कि वे चाहते हैं कि इस वर्ष दिसंबर तक चुनाव हो जाए और एक निर्वाचित सरकार कार्यभार संभाले। अखबार के अनुसार, उन्होंने अंतरिम सरकार के कुछ नीतिगत फैसलों पर अपनी निराशा भी व्यक्त की। यह बयान अंतरिम सरकार की ओर से संसदीय चुनावों के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप की घोषणा नहीं किए जाने के बाद आया है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख जमान ने कहा कि इस मामले में उनका रुख पहले जैसा है। एक निर्वाचित सरकार को देश के भविष्य की दिशा तय करने का अधिकार है। कैबिनेट से हटाने की मांग दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सहित कई राजनीतिक दल दिसंबर तक संसदीय चुनावों की मांग कर रहे हैं। बीएनपी कार्यकर्ताओं ने ढाका में मुख्य सलाहकार के निवास के बाहर प्रदर्शन कर दो छात्र सलाहकारों को अंतरिम सरकार की कैबिनेट से हटाने की भी मांग की है। अंतरिम सरकार एनसीपी का समर्थन कर रही हालांकि, छात्रों द्वारा संचालित पार्टी राष्ट्रीय नागरिक पार्टी (एनसीपी) चुनावों से पहले मौलिक सुधारों की मांग कर रही है। कथित तौर पर अंतरिम सरकार एनसीपी का समर्थन कर रही है। सेना प्रमुख ने भीड़ हिंसा या संगठित हमलों के खिलाफ भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संगठित भीड़ के नाम पर अराजकता या हिंसा सहन नहीं किया जाएगा। मानवाधिकार संस्था ने अवामी लीग पर प्रतिबंध को मनमाना बताया अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी संस्था मानवाधिकार वाच ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ¨नदा की है। साथ ही कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध मनमाना है। यह हसीना और उनकी पार्टी के समर्थकों के अधिकारों का दमन है। नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अंतरिम सरकार ने 12 मई को संशोधित आतंकवाद विरोधी कानून के तहत अवामी लीग को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया था। यह तबतक भंग रहेगी जब तक विशेष न्यायालय, पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों की मौत के मामले में सुनवाई पूरी नहीं कर लेता। संस्था ने कहा कि हाल के विधायी प्रयास से मौलिक स्वतंत्रताओं को कमजोर करने का जोखिम बढ़ गया है।

आतंकवाद का कोई धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होती, यह समस्त मानवता और पूरी दुनिया के लिए खतरा: डॉ. अली राशिद

अबू धाबी ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद पर पाकिस्तान की सच्चाई से दुनिया को रूबरू करवाने के लिए विभिन्न दलों के भारतीय सांसद अलग-अलग देशों के दौरे पर हैं। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में सांसदों के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अहम बैठक की। इस दौरान सांसदों की यूएई संघीय राष्ट्रीय परिषद के रक्षा मामलों, आंतरिक और विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष डॉ. अली राशिद अल नुमामी से भी मुलाकात हुई। डॉ. अली राशिद ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होती। यह समस्त मानवता और पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने आगे कहा, “हम इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद केवल एक राष्ट्र या क्षेत्र के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक खतरा है। हमारा मानना ​​है कि हमें एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में एक साथ आना चाहिए, विशेष रूप से संसद सदस्यों को, हमें योजना और रणनीति बनाने पर काम करना चाहिए और मानवता के लिए बेहतर भविष्य बनाने में लगना चाहिए… यह बैठक आतंकवाद का मुकाबला करने और हमारे लोगों और क्षेत्र के लिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए एक साथ काम करने की हमारी प्रतिबद्धता पर जोर देती है।” आतंकवाद से लड़ने के भारत के प्रयासों पर डॉ. राशिद ने कहा कि हम पहले से ही सहयोग कर रहे हैं। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारत एक रणनीतिक साझेदार है, यह सिर्फ सरकार के साथ ही नहीं बल्कि इसके लोगों के साथ भी है।” बता दें कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संयुक्त अरब अमीरात (UAE), लाइबेरिया, कांगो और सिएरा लियोन के लिए रवाना हुआ है। सरकार पाकिस्तान की साजिशों और आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत कराने के लिए सात प्रतिनिधिमंडल भेज रही है। वहीं श्रीकांत शिंदे ने कहा कि हमने यूएई समकक्षों के साथ बहुत ही अहम बैठक की। हमने रक्षा समिति के अध्यक्ष अली राशिद अल नूमी से मुलाकात की। हमने सहिष्णुता मंत्री शेख नाहयान के साथ भी बैठक की। मुझे लगता है कि यूएई आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यूएई द्वारा दिया गया स्पष्ट संदेश था- हम भारत के साथ आतंकवाद के खिलाफ खड़े हैं, आतंकवाद से लड़ रहे हैं। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश है क्योंकि यूएई जैसा देश, जो एक ऐसे पड़ोस में है जहां विविधता यूएई की मुख्य संस्कृति है – भारत की तरह, भारत भी एक बहुत ही विविध राष्ट्र है। ‘यह मानवता पर हमला है’ उन्होंने आगे कहा, ”मुझे लगता है कि यूएई जैसा देश इन कठिन समय में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। मुझे लगता है कि यूएई समकक्षों से संदेश बहुत स्पष्ट रहा है कि हम हैं इस आतंकवाद के खिलाफ आपके साथ हूं और संदेश दिया गया कि किसी भी धर्म के नाम पर आतंकवाद नहीं पनप सकता। दोनों मंत्रियों की ओर से एक बात बहुत स्पष्ट थी। यह दोनों देशों और पड़ोस के देशों की प्रगति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आतंकवाद केवल भारत से संबंधित नहीं है, संदेश दिया गया कि यह केवल भारत पर हमला नहीं है बल्कि मानवता पर हमला है। मुझे लगता है कि इन सभी का बहुत महत्व है। यूएई भारत पर हमले की निंदा करने वाला पहला देश है।”  

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीमाएं लांघ रही

तमिलनाडु तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन में हुए कथित घोटाले की जांच कर रही ED यानी प्रवर्तन निदेशालय को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीमाएं लांघ रही है। उन्होंने ईडी पर संविधान के उल्लंघन के भी आरोप लगाए। कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही एजेंसी से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। दरअसल, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिका में मद्रास हाईकोर्ट की तरफ से ईडी को मिली जांच की स्वतंत्रता को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने TASMAC में ईडी को कथित 1 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के लिए खुली छूट दे दी थी। सीजेआई ने कहा, ‘यह अपराध निगम के खिलाफ कैसे हो सकता है? निगम के खिलाफ आपराधिक मामला। आपका प्रवर्तन निदेशालय सभी सीमाएं लांघ रहा है। कार्यवाही पर रोक लगाएं। जब अधिकारियों के खिलाफ FIR हैं, तो वहां ईडी क्यों जा रही है। ईडी हलफनामा दाखिल करे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ईडी संविधान का उल्लंघन कर रही है। ईडी वाकई सीमाएं लांघ रही है।’ इसपर एएसजी एसवी राजू ने कहा, ‘यहां एक बहुत बड़ा घोटाला है। मुझे जवाब दाखिल करने दें।’ सीजेआई ने यह भी कहा कि ईडी संघीय ढांचे को तबाह कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी सीमाएं लांघी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। ED की जांच मार्च में एजेंसी ने दावा किया था कि TASMAC के काम में कई अनियमितताएं मिली हैं। साथ ही एजेंसी ने कहा था कि 1000 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी भी मिली थी। ईडी ने कीमत तय करने में भी धोखाधड़ी किए जाने की बात कही थी। इसके साथ ही एजेंसी लगातार छापे भी मार रही थी। बीते सप्ताह ही रेड की गई थी और उस दौरान PMLA के तहत 10 ठिकानों की तलाशी ली गई थी। ईडी का दावा था कि उसे छेड़छाड़ किया गया डेटा मिला था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि टेंडर वितरण के समय धोखाधड़ी गई थी। इसके बाद तमिलनाडु के एक्साइज मंत्री एस मुत्थुस्वामी ने ईडी पर सरकारी अधिकारियों को परेशान करने और राजनीतिक प्रतिशोध के तहत कार्रवाई के आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि ईडी के पास अनियमितताओं को लेकर कोई सबूत नहीं है।  

भारत ने सुरक्षा तैयारियों का कड़ा संदेश देते हुए ‘भार्गवास्त्र’ का सफल परीक्षण किया, चीन लॉन्च करने जा रहा ‘ड्रोन मदरशिप’

चीन चीन जल्द ही अपना नया एडवांस्ड ड्रोन मदरशिप जियु टियान लॉन्च करने वाला है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह ड्रोन जून के अंत तक अपनी पहली मिशन फ्लाइट पर रवाना होगा। इस मिशन के साथ ही चीन की लंबी दूरी की मानवरहित हवाई क्षमताओं में बड़ा इजाफा माना जा रहा है। इससे पहले भारत ने अपनी सुरक्षा तैयारियों का कड़ा संदेश देते हुए ‘भार्गवास्त्र’ नामक नई काउंटर-ड्रोन प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। क्या है चीन का ‘जियु टियान’? चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह मानवरहित हवाई वाहन अपनी पहली मिशन फ्लाइट जून के अंत तक भरेगा। ‘जियु टियान’ का अर्थ है “ऊंचा आकाश” और इसे शांक्सी अनमैन्ड इक्विपमेंट टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित किया गया है। यह UAV नवंबर 2024 में झुहाई एयर शो में पहली बार प्रदर्शित हुआ था। इसकी रेंज 7000 किमी है। इसकी उड़ान ऊंचाई 15000 मीटर है। अधिकतम टेक-ऑफ वजन 16000 किलोग्राम है। पेलोड क्षमता 6000 किलोग्राम है। यह एकसाथ 100 ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता रखता है। यह क्रूज़ और PL-12E एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस इस UAV की सबसे खास बात यह है कि इसे मिशन के अनुसार तेजी से बदला जा सकता है — चाहे वो सीमा सुरक्षा, समुद्री निगरानी, इमरजेंसी रेस्क्यू या सैन्य ऑपरेशन हो। भारत का जवाब- ‘भार्गवास्त्र’ चीन की इस तैयारी के बीच भारत ने भी अपनी नई कम लागत वाली काउंटर-ड्रोन तकनीक ‘भार्गवास्त्र’ का परीक्षण कर जवाब दे दिया है। यह परीक्षण ओडिशा के गोपालपुर में पिछले हफ्ते किया गया। ‘भार्गवास्त्र’ भारत की स्वदेशी विकसित की गई एक बहुस्तरीय काउंटर-ड्रोन प्रणाली है, जिसे खासतौर पर छोटे, झुंड में आने वाले और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को मार गिराने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह काउंटर ड्रोन रक्षा प्रणाली 6 से 10 किलोमीटर तक की दूरी पर ड्रोन को ट्रैक कर सकती है और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या हार्ड किल तकनीक से निष्क्रिय कर सकती है। इसमें AI-आधारित ट्रैकिंग, RF रिसीवर, लेजर डिटेक्शन और इंटरसेप्शन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। भारत के रक्षा अनुसंधान संगठनों द्वारा विकसित यह प्रणाली सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से तैनाती के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।  

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