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याचिका पर SC का केंद्र को नोटिस, पिछले साल हीटवेव से मरे 700 लोग, इस बार भी खामोश बैठे राज्य

नई दिल्ली भारत में गर्मी की लहर (हीटवेव) के बढ़ते खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में जारी किया गया, जिसमें पिछले साल हीटवेव और गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण 700 से अधिक लोगों की मौत का हवाला दिया गया। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से हीटवेव प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गृह मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने ‘पूर्वानुमान, गर्मी की चेतावनी जारी करने/पूर्व चेतावनी प्रणाली और चौबीसों घंटे निवारण हेल्पलाइन आदि के लिए सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश देने की भी मांग की।’ तोंगड़ की ओर से पेश हुए वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि पिछले साल भीषण गर्मी के कारण 700 से अधिक लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि बार-बार भविष्यवाणियां की गई हैं कि ‘हीट स्ट्रेस’ (गर्मी का प्रकोप) अधिक तीव्र होता जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। वशिष्ठ ने कहा, ‘‘पहले, भीषण गर्मी और लू की स्थिति उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत सहित तीन क्षेत्रों में रहती थी, लेकिन अब यह पूर्वी तट, पूर्व, उत्तर-पूर्व, प्रायद्वीपीय, दक्षिणी और दक्षिण-मध्य क्षेत्रों में फैल गई है और यह आईएमडी की एक रिपोर्ट में खुद कहा गया है।’’ याचिका में इस बात पर जोर डाला गया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी की गई कार्य योजना की तैयारी के लिए 2019 में राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए जाने के बावजूद, कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अनिवार्य ग्रीष्म कार्य योजना को लागू नहीं किया है। इसमें आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 35 के तहत केंद्र की वैधानिक जिम्मेदारियों का भी जिक्र किया गया है, जिसके तहत सरकार को आपदा प्रबंधन के लिए उचित उपाय करने की आवश्यकता होती है। याचिका में बढ़ते तापमान के संकट को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा गया है और गर्मी से संबंधित बीमारी के पीड़ितों को मुआवजा देने और अत्यधिक गर्मी की अवधि के दौरान कमजोर वर्गों को न्यूनतम मजदूरी या अन्य सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।  

‘मंदिर एक सदी से अधिक पुराना है लेकिन दबंगों ने इस पर कब्जा कर लिया, अब अवैध निर्माण शुरू कर दिया

कराची पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो जाम कस्बे में 100 साल पुराने एक हिंदू मंदिर पर कब्जे का आरोप लगा है। हिंदू समुदाय के एक प्रतिनिधि ने गुरुवार को बताया कि जिस जमीन पर 100 साल पुराना शिव मंदिर है, उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इसके अलावा उसके आसपास निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। पाकिस्तान में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान’ के प्रमुख शिव काच्छी ने कहा, ‘मंदिर एक सदी से अधिक पुराना है लेकिन दबंगों ने इस पर कब्जा कर लिया है और मंदिर के आसपास की भूमि पर अवैध निर्माण शुरू कर दिया है। साथ ही शिव मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग और प्रवेश को बाधित किया है।’ काच्छी ने सोशल मीडिया में एक वीडियो जारी करके घटना की जानकारी दी। काच्छी ने कहा कि शिव मंदिर के कामकाज और मंदिर के आसपास लगभग चार एकड़ जमीन की देखरेख का जिम्मा एक समिति के पास था। यह स्थान कराची से लगभग 185 किलोमीटर दूर टांडो जाम कस्बे के पास मूसा खटियन गांव में है। उन्होंने कहा कि मंदिर के ऐतिहासिक महत्व के कारण सिंध विरासत विभाग की एक टीम ने पिछले वर्ष इसका जीर्णोद्वार किया था। उन्होंने बताया कि मंदिर के निकट ही समुदाय के लोगों के अंतिम संस्कार के लिए एक शमशान भी है। मंदिर में प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु भजन-कीर्तन भी करते हैं। संगठन प्रमुख ने कहा, ‘भू-माफिया ने मंदिर के आसपास की काफी भूमि पर कब्जा कर लिया है और इसके चारों ओर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।’ सिंध में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कल्याण के लिए कार्य करने वाले और कानूनी सहायता प्रदान करने वाले काच्छी ने पाकिस्तान सरकार से मंदिर के चारों ओर अवैध निर्माण को रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सिंध में कई ऐतिहासिक हिंदू मंदिर हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है। बता दें कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी अब एक फीसदी से भी कम बची है। इनमें भी ज्यादातर लोग सिंध प्रांत में ही बसे हैं। ऐतिहासिक तौर पर भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ही हिंदुओं की संख्या अधिक थी।  

US के बाद अब EU को चुभ रहा ड्रैगन, यूरोपीय संघ में 91 फीसदी छोटे पार्सल चीन से आयातित, दे दी नई टेंशन

नई दिल्ली दुनिया की दो आर्थिक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच पिछले कई महीनों से ट्रेड वॉर छिड़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 145 फीसदी का रेसिप्रोकल टैक्स लगाया है, इसके जवाब में चीन ने भी उतना ही टैक्स अमेरिकी आयातित वस्तुओं पर लगाया है। हालांकि, फिलहाल दोनों देशों ने इसे 90 दिनों के लिए रोक रखा है और व्यापार को सुगम बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं लेकिन इस ट्रेड वॉर में चीन का खिलौना उद्योग तबाही के कगार पर पहुंच गया है। वहां कई कारखाने बंद हो चुके हैं, जबकि कई ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी है तो कुछ कंपनियों में सैलरी का संकट आ पड़ा है। इसी बीच, अब यूपोपीय संघ (EU) ने चीन के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। EU ने चीन से आने वाले हरेक छोटे पार्सल पर हैंडलिंग शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। इससे चीनी ई-कॉमर्स मार्केट को बड़ा नुकसान हो सकता है। ईयू के इस प्रस्ताव से चीन बौखला गया है। चीन ने यूरोपीय संघ से व्यापार के लिए निष्पक्ष मैदान उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “चीन का मानना ​​है कि एक खुला और समावेशी व्यापार वातावरण बनाना सभी पक्षों के साझा हित में है। हमें उम्मीद है कि यूरोपीय यूनियन खुला बाजार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएगा और चीनी कंपनियों के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावकारी व्यावसायिक वातावरण उपलब्ध कराएगा।” छोटे मूल्य के पार्सल पर शुल्क दरअसल, यूरोपीय यूनियन ने विदेशों से सीधे ग्राहकों को भेजे जाने वाले 150 यूरो या उससे कम मूल्य के छोटे पैकेजों के लिए 2 यूरो यानी 2.27 डॉलर (195.15 रुपये) शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा यूरोपीय गोदामों में भंडारण के लिए भेजे जाने वाले पार्सल के लिए प्रति पार्सल 50 सेंट का शुल्क रखा गया है। EU के व्यापार प्रमुख मारोस सेफकोविक ने मंगलवार को यूरोपीय सांसदों को इस प्लान के बारे में जानकारी दी है। इस टैक्स से EU को लगभग 3 अरब यूरो (3.4 अरब अमेरिकी डॉलर) की आय होगी। यूरोपीय संघ में 91 फीसदी छोटे पार्सल चीन से आयातित सेफकोविक ने सांसदों को बताया कि इस आय का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर पार्सल की आवाजाही के लिए सीमा शुल्क और सुरक्षा जांच की लागत को कवर करने के लिए किया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में यूरोपीय संघ में प्रवेश करने वाले लगभग 4.6 अरब छोटे पार्सल में से 91 फीसदी सिर्फ चीन से आए थे। अगर EU ने नए टैक्स प्रस्ताव को मंजूरी दी तो शीन और टेमू जैसी चीनी ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनियों पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी। इन दोनों कंपनियों के यूरोपीय यूनियन के अंदर कई वितरण केंद्र हैं। टेमू यूरोपीय ऑर्डर का करीब 80 फीसदी माल लोकल वेयरहाउस से सप्लाई करता है। फ्रांसीसी सरकार बढ़-चढ़कर कर रही काम बहरहाल, सेफकोविक ने यह नहीं बताया है कि प्रस्तावित टैक्स कब से लागू होगा। न ही इसका उल्लेख किया गया है कि लोकल वेयरहाउस से सप्लाई किए जाने पर कितना टैक्स लगंगा। दूसरी तरफ फ्रांसीसी सरकार, जो इस शुल्क के लिए बढ़-चढ़कर काम कर रही है, ने पिछले महीने कहा था कि 2026 तक नया शुल्क वसूलना शुरू हो जाएगा।  

आतंकवादी उसकी ही जड़ें खोद रहे हैं तो उसके पास निकलने का रास्ता नहीं, बौखलाया पाक, अब नया प्रोपेगेंडा

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने लंबे समय तक तालिबान को पाला था। यहां तक कि तालिबान का एक हिस्सा जिसे टीटीपी यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान कहा जाता है, वह खैबर पख्तूनख्वा में ऐक्टिव रहा है। इन आतंकियों को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सक्रिय अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए पाला था। लेकिन आज जब आतंकवादी उसकी ही जड़ें खोद रहे हैं तो उसके पास निकलने का रास्ता नहीं है। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने अब भारत पर ही आरोप लगाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो गुरुवार को यहां तक कहा कि टीपीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी भारत के इशारे पर काम कर रहे हैं। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के पास पर्याप्त सबूत हैं, जिससे यह साबित किया जा सकता है कि ये भारत के इशारे पर काम कर रहे हैं। बुधवार को बलूचिस्तान के खुजदार जिले में एक आर्मी स्कूल की बस पर हमला हुआ था। इस हमले में तीन बच्चों समेत 5 लोग मारे गए थे। अब पाकिस्तान ने इस अमानवीय हरकत के लिए भी भारत को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि पहलगाम आतंकी हमले से ध्यान भटकाया जा सके। पहलगाम में पाकिस्तान प्रेरित आतंकियों ने 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार डाला था। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि हम जो दावा कर रहे हैं, उसके लिए सबूत भी देंगे। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर जो आरोप लग रहे हैं, उसमें तो कोई दम नहीं है। लेकिन हम यह साबित करेंगे कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और भारत के बीच लिंक है। बता दें कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। कहा जाता है कि भारत पर हमलों के लिए आतंकियों को पालना पाकिस्तान की ‘ब्लीड इंडिया विद थाउजेंड कट्स’ की नीति का हिस्सा है। इसी पॉलिसी के तहत वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों को पालता है। इन आतंकी संगठनों के मुख्यालयों पर ही भारत ने जोरदार हमला बोलते हुए 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर किया था। इस हमले में करीब 100 आतंकी मारे गए थे और आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह किए गए थे। माना जा रहा है कि दुनिया भर में खुद के आतंकी देश की छवि बनने से चिंतित पाकिस्तान ने अब यह नया प्रोपेगेंडा चला है, जिसमें अपने ही पाले तालिबान का भारत से लिंक बता रहा है।  

नेशनल हेराल्ड केस में 2 जुलाई से रोजाना होगी सुनवाई, बुरे फंसे Sonia और Rahul

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय ने  दिल्ली की एक अदालत को बताया कि नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी तथा अन्य के खिलाफ पहली नजर में धन शोधन का ‘प्रथम मामला बनता है। ईडी ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष मामले का संज्ञान लेने के संबंध में प्रारंभिक दलीलें पेश कीं। इस बीच, न्यायाधीश ने ईडी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अपने आरोपपत्र की एक प्रति भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को उपलब्ध कराए, जिनकी निजी शिकायत के आधार पर ईडी ने वर्तमान मामला दर्ज किया था। इस मामले में बहस अभी चल रही है। हाल ही में आरोपपत्र दाखिल करने वाली ईडी ने 2021 में अपनी जांच शुरू की थी, जब एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 26 जून 2014 को स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत पर संज्ञान लिया था। नेशनल हेराल्ड धन शोधन मामले में संघीय एजेंसी का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि आरोपी तब तक “अपराध की आय का आनंद ले रहे थे” जब तक कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नवंबर 2023 में नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त नहीं कर ली। ईडी ने आगे दावा किया कि गांधी परिवार ने न केवल अपराध से प्राप्त धन को अर्जित करके धन शोधन किया, बल्कि उस पेसे को अपने पास भी रखा। ईडी ने बताया कि नेशनल हेराल्ड के संबंध में सोनिया गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और अन्य के खिलाफ प्रथम दृष्टया धन शोधन का मामला सामने आया है। इस बीच, न्यायाधीश ने संघीय एजेंसी को शिकायतकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी को एक प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया। ईडी ने 2021 में अपनी जांच शुरू करने के बाद हाल ही में अपना आरोपपत्र दाखिल किया। पिछली 3 सुनवाई में क्या-क्या हुआ…     8 मई: कोर्ट ने कहा था- आरोपी का पक्ष सुने बिना कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकते जस्टिस विशाल गोगने ने ED की दलीलें सुनने के बाद कहा कि पिछले आदेश के अनुसार सभी आरोपियों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। लेकिन उन्हें नोटिस 8 मई को ही भेजा गया, इसलिए उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकते। 21 और 22 मई को पहले उनका पक्ष सुना जाएगा।     2 मई: कोर्ट ने कहा था– सुने जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई में जान फूंकता है नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को नोटिस दिया। कोर्ट में मामले की दूसरी सुनवाई हुई थी। स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा, किसी भी स्तर पर बात सुने जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई में जान फूंकता है। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? नेशनल हेराल्ड मामले में पहली शिकायत 2012 में दर्ज की गई थी। हालांकि, ईडी ने 2014 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच शुरू की। यह तब हुआ जब एक ट्रायल कोर्ट ने 2012 में स्वामी की ओर से दायर एक निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर अनियमितताओं की आयकर जांच का संज्ञान लिया था। आरोपों के अनुसार 2010 में, नेशनल हेराल्ड प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) में 1,057 शेयरधारक थे। स्वामी की शिकायत के अनुसार, गांधी परिवार ने धोखाधड़ी, आपराधिक गबन और विश्वासघात के जरिए यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) का इस्तेमाल कर एजेएल का अधिग्रहण किया। 2008 में भारी कर्ज के बोझ तले दबी एजेएल ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन बंद कर दिया। दो साल बाद वाईआईएल बना। सोनिया और राहुल गांधी के पास इसके 38-38 फीसदी शेयर थे, जो संयुक्त रूप से 78 फीसदी था। चूंकि एजेएल पर कांग्रेस का 90.25 करोड़ रुपए बकाया था, इसलिए पार्टी ने 50 लाख रुपए में इस लोन को वाईआईएल को हस्तांतरित कर दिया। इस हस्तांतरण के साथ ही एजेएल का नियंत्रण वाईआईएल को हस्तांतरित हो गया, अब इस पर अब एजेएल का 99 प्रतिशत स्वामित्व है। ये सारे बदलाव राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) या किसी अन्य नियामक संस्था की निगरानी के बगैर किया गया। जिससे इस लेनदेन पर सवाल उठने लगे।

PM नेतन्याहू ने अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी से दूतावास के कर्मचारियों की हत्या पर अमेरिकी प्रशासन के सामने नाराजगी जाहिर

यरूशलेम अमेरिका के वॉशिंगटन में गुरुवार को यहूदी म्यूजियम के पास इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने बताया कि संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जो कि पकड़े जाने पर फिलिस्तीन की आजादी से जुड़े नारे लगा रहा था. मारे गए लोगों में एक महिला भी शामिल है. अमेरिका ने इसे आतंकी हमला बताया है और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. नेतन्याहू ने मांगी हमले की डिटेल इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी से बात की और इजरायली दूतावास के कर्मचारियों की हत्या पर अमेरिकी प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर से बात कर घटना का पूरा ब्यौरा मांगा है. साथ ही राजदूत और दूतावास के कर्मचारियों को अपना फुल सपोर्ट देने की भी बात कही है. अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को हत्यारे और दूतावास के दो कर्मचारियों की पहचान के बारे में फिलहाल जो कुछ भी जानकारी है, उसकी डिटेल दी है. अटॉर्नी जनरल ने प्रधानमंत्री से कहा कि उन्हें इस घटना का खेद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस घटना पर चिंतित हैं, साथ ही अमेरिका हत्यारे को न्याय के कटघरे में लाकर रहेगा. ‘खून का बदला खून से…’ अटॉर्नी जनरल बॉन्डी ने हमले में मारे गए यंग कपल के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना जताते हुए बताया कि जल्द ही उनकी सगाई होने वाली थी. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यहूदी-विरोध के खिलाफ साफ रुख के लिए अमेरिकी अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताया है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि हम इस बात के गवाह हैं कि इजरायल के खिलाफ यहूदी विरोधी भावना और उकसावे की कितनी भयानक कीमत चुकानी पड़ी है. इजरायल के खिलाफ खूनी जंग की कीमत खून से चुकानी पड़ती है और इसके खिलाफ पूरी ताकत से लड़ना होगा. नेतन्याहू ने हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है. साथ ही उन्होंने दुनियाभर में स्थित इजरायली दूतावासों और कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है. फिलिस्तीन समर्थक है आरोपी? वॉशिंगटन में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की हत्या के आरोपी का एक वीडियो भी सामने आया है. इसमें हमलावर को फायरिंग करते हुए देखा जा सकता है, जिसको पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वीडियो में पुलिस ने आरोपी के दोनों हाथ पीछे से पकड़ रखे हैं और इस दौरान आरोपी ‘फ्री फिलिस्तीन’ के नारे लगाता दिख रहा है. वॉशिंगटन पुलिस चीफ पामेला स्मिथ ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों पीड़ित म्यूजियम में हो रहे कार्यक्रम में शिरकत करते बाहर निकल रहे थे कि तभी फायरिंग की वारदात हुई. पुलिस के मुताबिक घटना को एक ही शख्स ने अंजाम दिया है और वह पुलिस की हिरासत में है. जैसे ही कुछ लोग म्यूजियम से बाहर निकले, हमलावर ने अपनी बंदूक से उन पर गोलियां चला दीं. शूटिंग के बाद हमलावर म्यूजियम के अंदर चला गया, जहां सुरक्षाकर्मियों ने उसे हिरासत में ले लिया है.  

कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़, गोलीबारी के बाद दो आतंकी ढेर

किश्तवाड़ जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार सुबह से जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया है। यह मुठभेड़ सुबह करीब 7 बजे उस समय शुरू हुई, जब सेना की 11 राष्ट्रीय राइफल्स (11RR), 2 पैरा स्पेशल फोर्स, 7वीं असम राइफल्स और किश्तवाड़ एसओजी (विशेष अभियान दल) की संयुक्त टीम ने सिंघपोरा छत्रू के जंगलों में तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में मुठभेड़ शुरू हो गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, मुठभेड़ स्थल पर तीन से चार आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। इनमें से एक की पहचान कुख्यात आतंकी सैफुल्लाह के रूप में की गई है। मुठभेड़ अभी भी जारी है और अन्य आतंकियों को ढूंढने के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। सभी मार्गों को सील कर दिया गया है, ताकि आतंकी किसी भी तरह से भागने में सफल न हो सकें। इस मुठभेड़ से एक सप्ताह पहले ही जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके के नादिर गांव में सुरक्षाबलों ने तीन जैश-ए-मोहम्मद आतंकियों को मार गिराया था। इनकी पहचान आसिफ अहमद शेख, आमिर नीर वानी और यावर अहमद भट के रूप में हुई थी। ये सभी पुलवामा के ही निवासी थे। इसके अतिरिक्त, 13 अप्रैल को शोपियां के जिनपाथर केलर इलाके में एक अन्य मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया गया था, जिनमें से दो की पहचान शाहिद कुट्टे और अदनान शफी के रूप में हुई थी। 22 अप्रैल को हुए घातक पहल्गाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कई बड़े अभियान चलाए हैं। आतंकवाद के खिलाफ इस व्यापक अभियान के तहत जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकियों से जुड़े लोगों की संपत्तियों को ध्वस्त करना भी शुरू कर दिया है। यह कदम आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए उठाया गया है, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने से पहले दो बार सोचे।

ट्रंप के घर के करीब 2 इज़रायलियों की हत्या, हमलावरों ने लगाए ‘फ्री फिलिस्तीन’ के नारे

वाशिंगटन  अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में बुधवार की शाम एक दिल दहलाने वाली घटना घटी. यहां पर इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह हमला कैपिटल ज्यूइश म्यूजियम के पास हुआ, जो अमेरिकी राजधानी में एफबीआई के फील्ड ऑफिस से महज कुछ कदम की दूरी पर स्थित है. होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दोनों कर्मचारियों की मृत्यु की खबर साझा की. डीसी के पुलिस चीफ ने बताया है कि हमलावरों ने फिलिस्तीन के समर्थन में नारे भी लगाए. अमेरिका के राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि ये घटना भयानक है और इसे रोकना चाहिए- वॉशिंगटन पुलिस चीफ पामेला स्मिथ ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों पीड़ित म्यूजियम में हो रहा कार्यक्रम अटैंड कर बाहर निकल रहे थे कि तभी यह घटना हुई. हमें लगता है कि हमले को एक ही शख्स ने अंजाम दिया, जो अब कस्टडी में है. शूटिंग से पहले इस शख्स को म्यूजियम के बाहर चहलकदमी करते देखा गया था. म्यूजियम से कुछ लोग जैसे ही बाहर निकले. उसने हैंडगन निकालकर दो पर गोली चला दी. वह शूटिंग के बाद म्यूजियम के भीतर गया, जहां सुरक्षाकर्मियों ने उसे डिटेन कर लिया.. इस घटना पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यहूदी विरोध में वॉशिंगटन डीसी में हुई इन हत्याओं को अब थम जाना चाहिए. अमेरिका में नफरत और कट्टरपंथ की कोई जगह नहीं है. पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं. बुरा है कि इस तरह की चीजें अब भी होती है. आप सभी पर ईश्वर की कृपा रहे. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायली कर्मचारियों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि हम वॉशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हमारी दुआएं पीड़ितों के साथ हैं. यह कायराना यहूदी विरोधी हिंसा है. हम इस हमले के जिम्मेदार लोगों को कटघरे में लेकर आएंगे. वॉशिंगटन में इजरायली दूतावास के प्रवक्ता टैल नइम कोहेन ने कहा कि इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों को बेहद करीब से गोली मारी गई. ये दोनों कमचारी एक यहूदी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. हमें स्थानीय और संघीय दोनों स्तर पर प्रशासन पर पूरा भरोसा है कि वे हमलावरों को पकड़ेंगे और इजरायल के प्रतिनिधियों और यहूदी समुदाय की रक्षा करेंगे. यह गोलीबारी जिस यहूदी म्यूजियम के बाहर हुई है, वहां एक कार्यक्रम हो रहा था, जिसका आयोजन अमेरिकी Jewish समिति ने किया था. एफबीआई की ज्वॉइंट टेररिज्म टास्कफोर्स इस घटना की जांच कर रही है. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की मंत्री क्रिस्टी नोएम ने बताया कि वॉशिंगटन डीसी में Jewish म्यूजियम के पास इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की मौत हो गई. हम सक्रियता से इसकी जांच कर रहे हैं और इस संबंध में और जानकारी मिलने पर शेयर करेंगे. पीड़ितों के परिवारों के लिए दुआ करे. हम हत्यारों को कटघरे में लाकर खड़ा करेंगे. एफबीआई निदेशक काश पटेल ने कहा कि मुझे और मेरी टीम को वॉशिंगटन में Jewish  म्यूजियम के बाहर  शूटिंग की जानकारी दी गई. हम एमपीडी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. पीड़ितों और उनके परिवार वालों के लिए दुआ करें. हम आपको जल्द ही इस बारे में और जानकारी देंगे. संयुक्त राष्ट्र में इजरायली राजदूत डैनी डैनन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे यहूदियों के खिलाफ आतंकी कार्रवाई बताया है.  

भारत ने WHO में पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए आतंकवाद को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका को उजागर किया

नई दिल्ली आतंकवाद से पीड़ित होने का दावा कर रहे पाकिस्तान को भारत ने WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन में जमकर सुनाया। भारत ने पड़ोसी मुल्क को पाकिस्तान का ‘जन्म देने वाला’ बताया है। साथ ही कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद से पीड़ित होने का दिखावा नहीं कर सकता। जवाब दे रहीं IFS यानी भारतीय विदेश सेवा अधिकारी अनुपमा सिंह का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। क्या बोला भारत भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने कहा, ‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद के प्रायोजक और आयोजक पाकिस्तान की धरती से काम करते हैं। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। जो सटीक था और पाकिस्तान के अंदर बने आतंकवादी ढांचे को निशाना बना रहा था।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को लेकर भी झूठी कहानियां गढ़ रहा है और मामले को उलझाने की कोशिश कर रहा है।’ सिंह ने कहा, ‘हमने यह सुनिश्चित करने के लिए भी उपाय किए हैं कि कोई आम नागरिक निशाना ना बने और ना ही घायल हो और सिर्फ पाकिस्तान से प्रशिक्षण हासिल किए आतंकवादी और उनके ठिकाने निशाना बनें।’ उन्होंने कहा, ‘एक देश जो आतंकवाद को जन्म देता है, वो पीड़ितों की तरह दिखावा नहीं कर सकता।’ अनुपमा सिंह ने आगे कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद के प्रायोजक और आयोजक पाकिस्तानी धरती से काम करते हैं।” इसके जवाब में, भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया। यह ऑपरेशन सटीक था और पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद के बुनियादी ढांचे पर केंद्रित था। भारत ने संयम बरतते हुए कहा, “हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि उनके नागरिकों को निशाना न बनाया जाए और उन्हें नुकसान न पहुंचे। हमने सिर्फ पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया।” कौन हैं अनुपमा सिंह अनुपमा सिंह 9 सालों से IFS में हैं और इससे पहले वह साल 2012 से लेकर 2014 तक KPMG कंपनी में थीं। उन्होंने कंपनी ने कंसल्टेंट के तौर पर शुरुआत की थी और बाद में सीनियर कंसल्टेंट बनीं। उन्होंने साल 2014 में लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन से ट्रेनिंग पूरी की। वह साल 2008 से 2011 तक CFA प्रोग्राम में भी शामिल रहीं। सिंह ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फाइनेंस में MBA किया है और कॉरपोरेट फाइनेंस, वेल्युएशन और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में महारत हासिल है। खास बात है कि उन्होंने MANIT यानी मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से बीटेक की डिग्री भी हासिल की है।

मीटिंग के दौरान ट्रंप ने अचानक ही रामफोसा को नस्लवाद के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया फिर वह हुआ …….

वाशिंगटन व्हाइट हाउस में एक बार फिर इतिहास दोहराया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा से भिड़ गए. दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच ठीक वैसी ही तीखी बहस हुई, जैसे कुछ महीने पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और ट्रंप के बीच देखने को मिली थी. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा 19 मई को वॉशिंगटन पहुंचे थे. उनकी इस यात्रा का मकसद अफ्रीका और अमेरिका के संबंधों में नई जान फूंकना है. लेकिन व्हाइट हाउस में इस मीटिंग के दौरान ट्रंप ने अचानक ही रामफोसा को नस्लवाद के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया. ट्रंप ने सिरिल रामफोसा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों का नरसंहार हो रहा है और आप तमाशबीन बने हुए हैं. इस आरोप को जैसे ही रामफोसा ने खारिज करना शुरू किया. ट्रंप ने बिग स्क्रीन पर एक वीडियो दिखाया. इस  वीडियो में दावा किया गया कि दक्षिण अफ्रीका में हजारों श्वेत किसानों की हत्या की गई है. इस दौरान ट्रंप ने मीडिया में छपे कुछ लेख की कॉपी भी सिरिल रामफोसा को दिखाई, जिसमें अफ्रीका में श्वेत किसानों के नरसंहार का दावा किया गया है. रामफोसा को ये कॉपी दिखाते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा Death, Death… इससे माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गया. रामफोसा ने ट्रंप को नेल्सन मंडेला की याद दिलाई… ट्रंप के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सिरिल रामफोसा ने कहा कि अफ्रीका में हिंसा बढ़ी है और सभी जातियां और वर्ग इससे जूझ रहे हैं. इन हिंसा में मारे गए लोग सिर्फ श्वेत नहीं है बल्कि अश्वेत भी मारे जा रहे हैं. श्वेतों से ज्यादा अश्वेत लोगों की हत्याएं हुई हैं. रामफोसा ने कहा कि मैंने पहले कभी यह वीडियो नहीं देखा है. हम इसकी प्रमाणिकता का पता लगाएंगे कि वीडियो कहां का है. हमारे देश में अपराध है और इससे सभी प्रभावित हैं फिर चाहे वह श्वेत हो या अश्वेत. मेरी अमेरिकी यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करना था, जो 1994 में रंगभेद युग के बाद से निचले स्तर पर हैं. इस दौरान रामफोसा ने ट्रंप को कतर की सरकार से गिफ्ट में मिले रॉयल प्लेन पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद दूर करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, मुझे दुख है कि मेरे पास आपको देने के लिए विमान नहीं है, जिस पर ट्रंप ने कहा कि काश आपके पास होता. बता दें कि ट्रंप के कतर दौरे के दौरान अमेरिका को कतर सरकार की ओर से 3400 करोड़ रुपये का लग्जरी प्लेन गिफ्ट किया गया था. बता दें कि फरवरी महीने में ही ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सहायता रोकने की घोषणा की थी, जिसका कारण उन्होंने वहां श्वेत लोगों के खिलाफ कथित उत्पीड़न और भूमि अधिग्रहण की नीतियों को बताया था. रामाफोसा ने इसका जवाब देते हुए ट्रंप से दक्षिण अफ्रीका के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने को कहा था. बता दें कि इस साल 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद यह दूसरा मौका है, जब उनकी व्हाइट हाउस में किसी देश के राष्ट्रपति के साथ बहस हुई. इससे पहले 28 फरवरी को ट्रंप की यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ यूक्रेन जंग पर व्हाइट हाउस में तीखी बहस हुई थी.  

देश भर में 72,000 ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए 2,000 करोड़ रुपए आवंटित: केंद्र सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि 2,000 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय के साथ, ‘पीएम ई-ड्राइव योजना’ देश भर में लगभग 72,000 ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में सहायता करेगी। भारी उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इन स्टेशनों को 50 राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों के साथ-साथ मेट्रो शहरों, टोल प्लाजा, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, फ्यूल आउटलेट और राज्य राजमार्गों जैसे हाई-ट्रैफिक वाले गंतव्यों में स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने ‘पीएम ई-ड्राइव योजना’ के तहत ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल को-ऑर्डिनेशन मीटिंग की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य क्लीनर ट्रांसपोर्ट को सक्षम करने और जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी ईवी-रेडी इकोसिस्टम का निर्माण करना है। कुमारस्वामी ने कहा, “भारत सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट के लिए ग्लोबल मॉडल बनने की राह पर है। पीएम ई-ड्राइव योजना एक परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य हमारे नागरिकों को क्लीन, किफायती और सुविधाजनक मोबिलिटी विकल्पों तक पहुंच प्रदान करना है। हम केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बना रहे हैं, हम एनर्जी सिक्योरिटी और ग्रीन इकोनॉमिक ग्रोथ की नींव रख रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री ने इस पहल के क्रियान्वयन में विभिन्न हितधारकों की एकीकृत भूमिका को भी स्वीकार किया। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) को मांग एकत्रीकरण और एक यूनिफाइड डिजिटल सुपर ऐप के विकास के लिए नोडल एजेंसी के रूप में माना जा रहा है, जो पूरे भारत में ईवी यूजर्स के लिए एक सिंगल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। ऐप में पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत नेशनल डिप्लॉयमेंट को ट्रैक करने के लिए रियल-टाइम स्लॉट बुकिंग, पेमेंट इंटीग्रेशन, चार्जर उपलब्धता की स्थिति और प्रोग्रेस डैशबोर्ड की सुविधा होगी। बीएचईएल चार्जर इंस्टॉलेशन के प्रस्तावों को संकलित करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए राज्यों और मंत्रालयों के साथ समन्वय भी करेगा। कुमारस्वामी ने कहा, “क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन अकेले सफल नहीं हो सकता। यह मीटिंग सरकार के रूप में काम करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम और राज्य, सभी जमीनी स्तर पर परिणाम देने के लिए एकजुट हैं। हमें विश्वास है कि पीएम ई-ड्राइव नए उद्योगों को बढ़ावा देगा, हरित रोजगार पैदा करेगा और हर भारतीय को निर्बाध इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रदान करेगा।”

पीएम मोदी आज बीकानेर से 26 हजार करोड़ रुपये की लागत की परियोजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन करेंगे

जयपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बीकानेर से 26 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन कर राष्ट्र को समर्पित करेंगे। साथ ही, प्रधानमंत्री अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित देशनोक रेलवे स्टेशन का दौरा करेंगे तथा बीकानेर-मुंबई एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री देशनोक स्थित विश्वप्रसिद्ध करणी माता मंदिर में दर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा भी बीकानेर में उनके साथ उपस्थित रहेंगे। यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक विरासत, दिव्यांगजन केंद्रित सुविधाएं और यात्रियों की सुगमता के लिए ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री द्वारा 1100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित 103 अमृत रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया जाएगा जिसमें राजस्थान के 8 रेलवे स्टेशन (फतेहपुर शेखावाटी, देशनोक, बूंदी, मांडलगढ़, गोगामेड़ी, राजगढ़, गोविंदगढ़, मंडावर-महुआ रोड) शामिल हैं। देशनोक रेलवे स्टेशन में मंदिर वास्तुकला, मेहराब और स्तंभ विषयवस्तु शैली उपयोग में ली गई है जिससे क्षेत्रीय वास्तुकला को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी ढांचा किया जा रहा सुदृढ़ भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर अग्रसर है जिससे रेलवे संचालन अधिक कुशल तथा पर्यावरण अनुकूल बन रहा है। इसी क्रम में श्री मोदी चूरू-सादुलपुर रेल लाइन (58 किमी) की आधारशिला रखेंगे तथा सूरतगढ़-फलोदी (336 किमी), फुलेरा-डेगाना (109 किमी), उदयपुर-हिम्मतनगर (210 किमी), फलोदी-जैसलमेर (157 किमी) तथा समदड़ी-बाड़मेर (129 किमी) रेल लाइन विद्युतीकरण को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। मजबूत सड़क तंत्र से सुरक्षा बलों को आवाजाही में होगी सुगमता प्रधानमंत्री सड़क अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए पुष्कर में एनएच-58 पर 3 वाहन अंडरपास के निर्माण तथा एनएच-11, एनएच-70 (जैसलमेर से म्याजलार) की सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण की आधारशिला रखेंगे। साथ ही, राजस्थान में लगभग 4 हजार 850 करोड़ की 7 सड़क परियोजनाओं को भी समर्पित करेंगे। इनसे आवागमन सुगम हो सकेगा। साथ ही, इन राजमार्गों के भारत-पाक सीमा तक फैले होने के कारण सुरक्षा बलों के लिए आवाजाही में सुगमता बढ़ेगी और भारत का रक्षा बुनियादी ढांचा भी मजबूत होगा। सभी के लिए बिजली और स्वच्छ ऊर्जा हमारा विजन केन्द्र सरकार सभी के लिए बिजली और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध करवाने के विजन के साथ निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में मोदी विभिन्न विद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे जिनमें नीपको 300 मेगावाट ग्राउंड माउंटेड सौर परियोजना (बीकानेर), एसजेवीएन 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना (नावा), डीडवाना तथा कुचामन की सौर परियोजनाएं शामिल हैं। साथ ही, पार्ट बी पावरग्रिड सिरोही ट्रांसमिशन लिमिटेड और पार्ट ई पावरग्रिड मेवाड़ ट्रांसमिशन लिमिटेड के विद्युत निकासी के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली का शिलान्यास भी किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 विद्युत परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे, जिनमें पावर ग्रिड नीमच ट्रांसमिशन सिस्टम लिमिटेड तथा बीकानेर कॉम्प्लेक्स की विद्युत निकासी के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली शामिल है। साथ ही, फतेहगढ़-द्वितीय विद्युत स्टेशन में परिवर्तन क्षमता के विस्तार का उद्घाटन भी किया जाएगा इससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री प्रदेश में कलासर सौर ऊर्जा परियोजना (500 मेगावाट) की आधारशिला रखेंगे और शिंभू का भुर्ज सौर ऊर्जा परियोजना (300 मेगावाट) का उद्घाटन करेंगे। इनमें एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा घरेलू स्तर पर उत्पादित सौर पीवी मॉड्यूलों के उपयोग से ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। राज्य राजमार्ग विकास कार्यक्रम से क्षेत्रीय संपर्क को मिलेगा बढ़ावा प्रधानमंत्री के आधारभूत अवसंरचना के सुदृढीकरण के विजन को गति देने के उद्देश्य से प्रदेश में राज्य राजमार्ग विकास कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत श्री मोदी कार्यक्रम में 3,240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 757 किलोमीटर की लंबाई के 12 राज्य राजमार्गों का उन्नयन और रखरखाव के लिए विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इनमें मांगलियावास-पदुकलां (स्टेट हाइवे-102), ब्यावर-टेहला-अलनियावास (स्टेट हाइवे-59 और स्टेट हाइवे-104), दांतीवाड़ा-पीपाड़- मेड़ता सिटी (स्टेट हाइवे-21) शामिल हैं। राज्य राजमार्ग विकास कार्यक्रम के विस्तार में गोटन-साथिन राजमार्ग के साथ 900 किलोमीटर के अतिरिक्त नए राजमार्ग शामिल किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से महत्वपूर्ण शहरों, औद्योगिक केंद्रों और राज्य की सीमाओं को जोड़ते हुए क्षेत्रीय संपर्क और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। नए नर्सिंग कॉलेजों से प्रशिक्षण सुविधाओं का होगा विस्तार प्रधानमंत्री राजसमंद, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, धौलपुर में नए नर्सिंग कॉलेजों का उद्घाटन करेंगे। इस पहल से स्वास्थ्य अवसंरचना, नर्सिंग शिक्षा और प्रशिक्षण सुविधाओं में वृद्धि होगी। साथ ही, प्रधानमंत्री 132 केवी जीएसएस राजपुरा (बीकानेर) और 132 केवी जीएसएस सरदा (उदयपुर) की विद्युत अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। ये सबस्टेशन पारेषण क्षमता को बढ़ाएंगे, स्थानीय लोगों और उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाली और निर्बाध बिजली आपूर्ति भी प्रदान करेंगे।  

2026 में भारत की वृद्धि दर 6.2 % और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया: मॉर्गन स्टेनली

नई दिल्ली वैश्विक उथल-पुथल और मौसमी प्रभावों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक मजबूत बनी हुई है और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.4-6.5 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है। यह जानकारी  जारी एसबीआई की एक रिपोर्ट में दी गई है। जीडीपी का सांख्यिकीय रूप से अनुमान लगाने के लिए, भारतीय स्टेट बैंक के इकोनॉमिक रिसर्च डिपार्टमेंट ने इंडस्ट्री एक्टिविटी, सर्विस एक्टिविटी और ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े 36 हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के साथ एक ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ बनाया है। यह मॉडल वित्त वर्ष 2013 की चौथी तिमाही से वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही तक सभी हाई-फ्रिक्वेंसी इंडिकेटर्स के कॉमन, रिप्रेजेंटेटिव या लेटेंट फैक्टर का अनुमान लगाने के लिए डायनेमिक फैक्टर मॉडल का इस्तेमाल करता है। वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी 6.3 प्रतिशत रहने की उम्‍मीद एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, “हमारे ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के लिए अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर 6.4-6.5 प्रतिशत के आसपास आनी चाहिए।” घोष ने कहा कि यह मानते हुए कि एनएसओ से जारी अपकमिंग डेटा में पहली से तीसरी तिमाही के अनुमानों में कोई बड़ा रिविजन नहीं होगा, हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी 6.3 प्रतिशत रहेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून की अपनी सामान्य शुरुआत की तारीख से काफी पहले, अगले चार से पांच दिनों में केरल में पहुंचने की संभावना है। अगर मानसून केरल में अनुमान के अनुसार पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद से भारत के मुख्य भूमि क्षेत्र पर जल्दी दस्तक देने को लेकर रिकॉर्ड किया जाएगा। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत बेहतर मानसून बारिश के पूर्वानुमान पर जुलाई से शुरू होने वाले 2025-26 फसल वर्ष में 354.64 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य बना रहा है। चालू 2024-25 फसल वर्ष में, सरकार ने 341.55 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन (अब तक: 332.3 मिलियन टन) का लक्ष्य रखा था।” आईएमएफ के अनुसार, वैश्विक विकास 2025 में 2.8 प्रतिशत और 2026 में 3 प्रतिशत तक गिरने का अनुमान है। रिपोर्ट में बताया गया है, “भारत के लिए, विकास का दृष्टिकोण वित्त वर्ष 2025 में 6.2 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.3 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है, जिसे निजी खपत, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन प्राप्त है, लेकिन यह दर व्यापार तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के उच्च स्तर के कारण पहले के अनुमान से 30 बीपीएस कम है।” मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी मॉर्गन स्टेनली नेभारत के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के अनुमान को वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत पर बढ़ा दिया। कंपनी ने कहा कि बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता के बीच घरेलू मांग के रुझान देश की वृद्धि की गति के मुख्य चालक होंगे। इससे पहले वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। वैश्विक ब्रोकरेज ने अपने नोट में कहा, “हमें उम्मीद है कि बाहरी कारकों से अनिश्चितता के बीच घरेलू मांग में मजबूती के कारण वृद्धि मजबूत रहेगी।” “राजकोषीय नीति में पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दिए जाने के साथ आसान मौद्रिक नीति के माध्यम से नीतिगत समर्थन जारी रहने की संभावना है। मजबूत बफर के साथ मैक्रो स्थिरता के आरामदायक क्षेत्र में रहने की उम्मीद है।” घरेलू मांग के मामले में, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि शहरी मांग में सुधार और ग्रामीण खपत के स्तर में पहले से ही मजबूती के साथ खपत में सुधार अधिक व्यापक आधार पर होगा। “निवेश के मामले में, हम देखते हैं कि सार्वजनिक और घरेलू पूंजीगत व्यय वृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि हम उम्मीद करते हैं कि निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा,” इसने कहा। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि खाद्य मुद्रास्फीति में कमी और मुख्य मुद्रास्फीति में सीमाबद्ध प्रवृत्ति के कारण हेडलाइन मुद्रास्फीति सौम्य बनी रहेगी।  

कोविड-19 एक बार फिर फैल रहा, देश में फिलहाल 257 एक्टिव मामले

नई दिल्ली  कोविड-19 एक बार फिर फैल रहा है। भारत में फिलहाल कोविड के मामले उतनी चिंता में डालने वाले नहीं हैं, लेकिन फिर भी कुछ राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। देश में फिलहाल 257 एक्टिव मामले हैं। कुछ राज्यों में मामूली केस हैं तो कुछ में आंकड़ा अच्छा खासा है। जैसे हरियाणा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कोविड के 1-1 केस ही हैं तो वहीं केरल में इस समय 95 एक्टिव केस हैं। देश की राजधानी दिल्ली में भी इस समय कोविड के 5 एक्टिव केस हैं। हालांकि, कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां एक भी कोरोना का मामला सामने नहीं आया है। तमिलनाडु में भी कोरोना के 55 एक्टिव मामले हैं। महाराष्ट्र में केस इससे 10 कम यानी 56 हैं। आइए आपको बताते हैं कि किस राज्य में कितने एक्टिव केस इस समय हैं। किस राज्य में कितने एक्टिव केस राज्य    एक्टिव केस केरल    95 तमिलनाडु    66 महाराष्ट्र    56 कर्नाटक    13 पुडुचेरी    10 गुजरात    7 दिल्ली    5 राजस्थान    2 हरियाणा    1 पश्चिम बंगाल    1 सिक्किम    1 कुल मामले    257 सिंगापुर-चीन में भी फैल रहा कोरोना एशिया के कुछ देशों में कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हांगकांग, सिंगापुर, थाईलैंड के अलावा चीन में भी कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 27 अप्रैल से 3 मई 2025 के सप्ताह में कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़कर 14,200 हो गई, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 11,100 थी। थाइलैंड में 33 हजार मामले इस अवधि में सिंगापुर के अंदर कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की औसत संख्या 102 से बढ़कर 133 हो गई। थाईलैंड में 11 मई से 17 मई के बीच मामले बढ़कर 33,030 हो गए, जबकि बैंकॉक में 6,000 मामले सामने आए। इसी तरह हांगकांग में भी कोविड-19 के मामलों में सिर्फ 4 हफ्तों (6 से 12 अप्रैल) के अंदर 6.21% से 13.66% की वृद्धि हुई।

उच्चायोग में काम कर रहे पाक अधिकारी को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश, भारत का PAK पर एक और सख्त एक्शन

नई दिल्ली  भारत सरकार ने नई दिल्ली में स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के एक अधिकारी को उसके राजनयिक दायित्वों के विपरीत गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के चलते “अवांछनीय व्यक्ति ” घोषित कर दिया है। भारत ने नई दिल्ली स्थित स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में कार्यरत एक अधिकारी को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर दिया है और उससे 24 घंटे में देश छोड़ने के लिए कहा है। भारत ने यह कार्रवाई पाकिस्तानी अधिकारी के अपने कार्यक्षेत्र के इतर अन्य तरह की संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के कारण की है। पहलगाम हमले के बाद से भारत लगातार संदिग्ध पाकिस्तानी अधिकारियों को देश छोड़ने के आदेश जारी कर रहा है। पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी को भारत ने आज इस संबंध में एक डिमार्शे (कूटनीति में दूसरे देश के खिलाफ उठाया गया कदम) जारी किया और उनसे उपरोक्त अधिकारी को 24 घंटे के भीतर देश से बाहर भेजने के लिए कहा गया है। इस संदर्भ में आज पाकिस्तान उच्चायोग के कार्यवाहक उच्चायुक्त को एक कड़ा आधिकारिक विरोध पत्र जारी किया गया। भारत की ओर से स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि पाकिस्तान के कोई भी राजनयिक या अधिकारी भारत में अपने विशेषाधिकारों और दर्जे का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न करें। बता दें कि ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ किसी भी विदेशी राजनयिक को अवांछित घोषित करने की वह स्थिति होती है। जिसके तहत उसे देश छोड़ने का तुरंत आदेश दिया जाता है। इससे पहले 13 मई को भारत ने जासूसी में कथित रूप से संलिप्त होने के कारण एक पाकिस्तानी अधिकारी को निष्कासित कर दिया था। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा की गई एक भयावह घटना में 26 निर्दोष पर्यटकों की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य आतंकी हमले के ठीक अगले दिन, 23 अप्रैल को भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कूटनीतिक कदम उठाए थे। इसके बाद से भारत लगातार संदिग्ध पाकिस्तानी अधिकारियों को देश छोड़ने के आदेश दे रहा है। इन उपायों के तहत नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में कार्यरत अधिकारियों की संख्या को 55 से घटाकर 30 कर दिया गया। इसके अलावा, भारत सरकार ने पाकिस्तानी रक्षा सलाहकारों को देश से निष्कासित करते हुए उन्हें एक सप्ताह के भीतर भारत छोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग से सभी रक्षा सलाहकारों को तत्काल प्रभाव से वापस बुला लिया था और वहां कार्यरत राजनयिकों की संख्या में भी कटौती कर दी थी। 

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