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ट्रंप ने फिर जताया अफसोस, भारत और पाक युद्धविराम मेरी इतनी बड़ी सफलता है कि इसका उचित श्रेय मुझे कभी नहीं मिलेगा

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान से बातचीत करना और उन्हें (पूर्ण युद्ध) के कगार से वापस लाना उनकी इतनी ‘‘बड़ी सफलता” है कि उसका उचित श्रेय उन्हें कभी नहीं मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘N’ यानि  नफरत”  और तनाव उस स्तर पर पहुंच गया था जहां अगला चरण संभवतः   ‘N’ ‘‘न्यूकलियर” इस्तेमाल  था। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा, “यह मेरी इतनी बड़ी सफलता है कि इसका उचित श्रेय मुझे कभी नहीं मिलेगा। वे बड़ी परमाणु शक्तियां हैं। उनमें जरा भी समानता नहीं है। वे आक्रोशित थे।” साक्षात्कार के दौरान ट्रंप से पश्चिम एशिया की उनकी यात्रा से पहले की “विदेश नीति की कुछ सफलताओं” का जिक्र करते हुए पूछा गया कि क्या उन्होंने भारत और पाकिस्तान को फोन किया था। ट्रंप ने जवाब दिया, “हां, मैंने किया था।” साक्षात्कार लेने वाले ने कहा कि यह एक सफलता है। ट्रंप ने कहा, “क्या आपने देखा कि यह (संघर्ष) किस दिशा में जा रहा था? यह जैसे को तैसा की तरह था। यह गहराता जा रहा था। मेरा मतलब है कि मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा था। दोनों मजबूत हैं। लिहाजा अगले जिस चरण पर यह पहुंचने वाला था, आप जानते हैं कि वह क्या है? ‘एन’।” साक्षात्कार लेने वाले ने पूछा कि क्या ‘एन’ शब्द का मतलब ‘न्यूक्लियर’ (परमाणु) है? ट्रंप ने कहा, “यह ‘एन’ शब्द है। यह बहुत बुरा शब्द है, है न? कई मायनों में। परमाणु अर्थ में इस्तेमाल किया जाने वाला एन शब्द, सबसे बुरी चीज हो सकती है। मुझे लगता है कि वे बहुत करीब थे। नफरत बहुत ज़्यादा थी। मैंने कहा, ‘हम व्यापार के बारे में बात करेंगे। हम बहुत सारा व्यापार करने जा रहे हैं’।” ट्रंप ने कहा, “मैं व्यापार का उपयोग हिसाब बराबर करने और शांति स्थापित करने के लिए कर रहा हूं।” ट्रंप ने कहा, “भारत…दुनिया में सबसे ज्यादा शुल्क लगाने वाले देशों में से एक हैं, वे व्यापार को लगभग असंभव बना देते हैं। क्या आपको मालूम है कि वे अमेरिका के लिए अपने शुल्क में 100 प्रतिशत कटौती करने को तैयार हैं?” इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या भारत के साथ सौदा जल्द ही होने वाला है, तो उन्होंने कहा, “हां, यह जल्द ही होगा। मुझे कोई जल्दी नहीं है। देखिए, हर कोई हमारे साथ सौदा करना चाहता है।” ट्रंप ने कहा, “दक्षिण कोरिया एक सौदा करना चाहता है… लेकिन मैं हर किसी के साथ सौदा नहीं करना चाहता। मैं बस सीमा तय करने जा रहा हूं। मैं कुछ और सौदे करूंगा। 150 देश हैं जो सौदे करना चाहते हैं।” पिछले कुछ दिनों में यह सातवीं बार है जब ट्रंप ने यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म कराने में मदद की। भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में सात मई की सुबह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवादियों के ठिकानों पर हमले किए थे। पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत की कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान ने आठ, नौ और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया। इसके बाद भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर भीषण जवाबी हमला किया। चार दिन तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव समाप्त करने के लिए 10 मई को सहमति बनी थी। ट्रंप ने 10 मई को घोषणा की थी कि अमेरिका की मध्यस्थता में “लंबी बातचीत” के बाद भारत और पाकिस्तान “पूर्ण और तत्काल संघर्षविराम” पर सहमत हो गए हैं।    

ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, और यह सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है, राजनाथ सिंह ने पाक को फिर चेताया

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और बाद में पाकिस्तान को जिस आक्रामकता से जवाब दिया, उसने न केवल उनकी ताकतवर रणनीतिक सोच को प्रदर्शित किया, बल्कि पाकिस्तान तक को एक कड़ा संदेश दिया। आइए, जानते हैं ऑपरेशन सिंदूर और इसके दौरान किए गए उनके बयानों पर विस्तार से। पहली चेतावनी: 23 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद का बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों के हमले के एक दिन बाद पाकिस्तान को चेतावनी दी थी। अर्जन सिंह मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने कहा था, “हम सिर्फ उन तक ही नहीं पहुंचेंगे जिन्होंने इस हमले को अंजाम दिया, हम उन तक भी पहुंचेंगे जिन्होंने पर्दे के पीछे बैठकर इसे अंजाम देने की साजिश रची है।” प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कड़ा संदेश 4 मई को दिल्ली में दिए गए अपने बयान में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को दोबारा चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम जो चाहते हैं, वह अवश्य होगा। देश पर बुरी नजर डालने वालों को हमारी सेना मुंहतोड़ जवाब देगी।” यह बयान ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत का संकेत था। ऑपरेशन सिंदूर: एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के साथ राजनाथ सिंह ने यह बयान दिया कि भारत ने अपनी वीरता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “हमने केवल उन लोगों को मारा जिन्होंने हमारे निर्दोष नागरिकों को मारा।” इसके बाद 8 मई को राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में 100 आतंकवादी मारे गए थे, और उन्होंने सर्वदलीय बैठक में इस कार्रवाई को लेकर जानकारी दी। ब्रहमोस मिसाइल की ताकत का प्रदर्शन 11 मई को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली का उद्घाटन करते हुए राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि भारत की सेना सीमा पार की कार्रवाई से पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना की धमक रावलपिंडी तक महसूस की गई, जहां पाकिस्तान का मुख्यालय स्थित है। कश्मीर और गुजरात में सख्त संदेश राजनाथ सिंह ने श्रीनगर के बादामी बाग छावनी और भुज एयरबेस का दौरा किया। उन्होंने कश्मीर के सशस्त्र बलों की तारीफ करते हुए कहा, “आपकी वीरता ने सीमा पार पाकिस्तानी चौकियों और बंकरों को ध्वस्त कर दिया है।” भुज एयरबेस पर उन्होंने भारत के लड़ाकू विमानों की ताकत का हवाला दिया और पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अब भारत के विमान बिना सीमा पार किए पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को फिर से चेतावनी देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, और यह “सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।” उनका यह बयान पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि भारत जब चाहें, तब अपनी ताकत का पूरा प्रदर्शन कर सकता है।

भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश,भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी : मोहन भागवत

जयपुर जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शक्ति हो तो दुनिया प्रेम की भाषा भी सुनती है. उन्होंने अपने भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति और त्याग की परंपरा को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास में भगवान श्री राम से लेकर भामाशाह जैसे महान व्यक्तित्वों ने त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व को धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है. धर्म के माध्यम से ही मानवता की उन्नति संभव है. उन्होंने विशेष रूप से हिंदू धर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण माना और कहा कि विश्व कल्याण हमारा प्रमुख धर्म है.  उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश बताते हुए कहा कि भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी है. विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में प्रायसरत! मोहन भागवत का कहना है कि भारत विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता लेकिन जब तक आपके पास शक्ति नहीं होगी, तब तक विश्व प्रेम और मंगल की भाषा नहीं समझेगा. इसलिए उनके मुताबिक, विश्व कल्याण के लिए शक्ति का होना आवश्यक है, और ये कि हमारी ताकत विश्व ने देखी है. शक्ति ही एक माध्यम है! मोहन भागवत ने यह भी बताया कि शक्ति ही वह माध्यम है जिससे विश्व में भारत अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है और वह पहले भी कह चुके हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रसार भी तभी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्वभाव विश्व का है, इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी प्रशंसा की, और कहा कि ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए संस्कृति और धर्म की रक्षा कर रहे हैं.  

राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या

नई दिल्ली भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट की सलाह मांगी है कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए निर्धारित समयसीमा देश की सर्वोच्च अदालत के द्वारा तय की जा सकती है। यह कदम तब उठाया गया जब 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों को राष्ट्रपति को तीन माह में निपटाना होगा। क्या है अनुच्छेद 143(1)? संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत राष्ट्रपति किसी कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं। यह राय बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका संवैधानिक महत्व काफी अधिक होता है। सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी जाती है। राष्ट्रपति ने यह संदर्भ 13 मई को भेजा और इसमें कुल 14 कानूनी प्रश्न शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट क्या पहले भी राय देने से मना कर चुका है? सुप्रीम कोर्ट ने दो बार राष्ट्रपति की राय मांगने पर जवाब देने से इनकार किया है। 1993 में जब राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद में मंदिर की पूर्वस्थिति पर राय मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने धार्मिक और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले 1982 में पाकिस्तान से आए प्रवासियों के पुनर्वास संबंधी कानून पर राय मांगी गई थी, लेकिन बाद में वह कानून पारित हो गया और कोर्ट में याचिकाएं दायर हो गईं, जिससे राय अप्रासंगिक हो गई। कब-कब सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राय? संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सबसे पहले महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली लॉज एक्ट- 1951 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी. केरल शैक्षणिक बिल- 1957 पर संदर्भ को संवैधानिक तौर पर व्याख्या करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर नरसिंह राव सरकार के समय भेजे गए संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों से जुड़े मामलों में राय देना अनुच्छेद 143 के दायरे में नहीं आता है. साल 1993 में कावेरी जल विवाद मामले के संदर्भ पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राय देने से मना कर दिया था. साल 2002 में गुजरात चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपील या पुनर्विचार याचिका दायर करने के बजाय 143 के तहत संदर्भ भेजा जाना सांविधानिक तौर पर गलत विकल्प है. हालांकि, पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की तरह संदर्भ पर राय बाध्यकारी नहीं होना संविधानिक तौर पर विचित्र है. राज्यपाल मामले से जुड़े कुछ पहलू 2G मामले में यूपीए सरकार के संदर्भ से मेल खाते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने 122 फर्म और कंपनियों के 2G लाइसेंस पर स्पेक्ट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था. तब केंद्र ने उसे फैसले के खिलाफ संदर्भ भेजते हुए पूछा था कि क्या नीतिगत मामलों में सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी होनी चाहिए. दरअसल, केशवानंद भारती मामले में संविधान पीठ के फैसले के अनुसार नीतिगत मामलों में संसद और केंद्र के निर्णय पर अदालतों की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल मामले में क्या हुआ? राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो जजों ने दिया था. कानूनविदों की मानें तो इस मामले में कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई होनी चाहिए थी. दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को उन विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित किया. आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए एक समय-सीमा निर्धारित कर दी थी. इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से सुप्रीम कोर्ट से सवाल किए गए हैं कि जबकि संविधान में ऐसा जिक्र नहीं है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे दी. कानूनविद दो जजों की पीठ के फैसले पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि पूर्व में दिया गया सर्वोच्च अदालत की बड़ी पीठ का फैसले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की सीमा तय की गई है. दूसरी ओर संविधान में राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास विधायक कितने दिन लंबित रहेगा, इसका जिक्र नहीं है. संविधान में जो प्रावधान नहीं है उसकी व्याख्या करके सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रावधान बना दिए. जबकि केशवानंद भारती फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट को कानून निर्माण या संविधान संशोधन की शक्ति नहीं है सरकार की खामियों, कानून के निर्वात को ठीक करने के लिए जजों को संरक्षक की भूमिका मिली है. लेकिन यह साफ है कि राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए संदर्भ पर अगर सुप्रीम कोर्ट आगे बढ़ता है यानी राय देता है तो वह बाध्यकारी नहीं होगी. वह महज एक राय, सलाह या मशविरा होगा. क्या राष्ट्रपति निर्णय को पलटना चाहती हैं? सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 143 का उपयोग किसी पहले से दिए गए निर्णय की समीक्षा या पलटने के लिए नहीं किया जा सकता है। 1991 में कावेरी जल विवाद पर कोर्ट ने कहा था कि निर्णय देने के बाद उसी विषय पर राष्ट्रपति की राय मांगना न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है। यदि सरकार चाहे तो वह पुनर्विचार याचिका या क्युरेटिव याचिका दायर कर सकती है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राष्ट्रपति ने पूछे कैसे प्रश्न? अधिकांश प्रश्न 8 अप्रैल के फैसले से जुड़े हैं, लेकिन अंतिम कुछ प्रश्नों में सुप्रीम कोर्ट की स्वयं की शक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रश्न 12 में पूछा गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को पहले यह तय करना चाहिए कि कोई मामला संविधान की व्याख्या से जुड़ा है या नहीं, ताकि उसे बड़ी पीठ को भेजा जा सके? इसी तरहा प्रश्न 13 में पूछा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के प्रयोग की सीमा क्या है। प्रश्न संख्या 14 में पूछा गया है कि केंद्र-राज्य विवादों की मूल सुनवाई का अधिकार किसके पास है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास या अन्य अदालतों के पास … Read more

भारत में पाकिस्तान की तुलना में अधिक मुस्लिम हैं, जो पाक ने अब तक बर्ताव किया है, उनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं: ओवैसी

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तुर्की की ओर से पाकिस्तान का समर्थन करने पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तुर्की को पाकिस्तान का समर्थन करने के अपने रुख पर फिर से विचार करना चाहिए। ओवैसी ने कहा, ‘हमें तुर्की को याद दिलाना होगा कि वहां एक बैंक है जिसका नाम इसबैंक (İşbank) है, जिसके शुरुआती जमाकर्ता भारत के लोग थे। तुर्की के भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। हमें तुर्की को लगातार याद दिलाना चाहिए कि भारत में 20 करोड़ से अधिक सम्मानित मुस्लिम रहते हैं। भारत में पाकिस्तान की तुलना में अधिक मुस्लिम हैं। जिस तरह से पाकिस्तान ने अब तक बर्ताव किया है, उनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है।’ एआईएमआईएम चीफ ने कहा, ‘मैंने पहले भी कहा था और फिर कहूंगा कि हमारे प्रधानमंत्री को युद्धविराम की घोषणा करनी चाहिए थी, न कि अमेरिकी राष्ट्रपति को। क्या आपको पता है कि पाकिस्तान का अमेरिका के साथ व्यापार केवल 10 अरब का है, जबकि भारत का 150 अरब से ज्यादा है। क्या यह मजाक है? क्या यूएस गारंटी दे सकता है कि पाकिस्तान अब हम पर आतंकी हमले नहीं करेगा? पाकिस्तान की सेना हमेशा भारत के साथ छेड़छाड़ करती रहेगी। हम कब तक इसे सहन करेंगे? आप पाकिस्तान के साथ व्यापार कैसे कर सकते हैं? वे तो भिखारी हैं। हम अमेरिका से बस इतनी उम्मीद करते हैं कि वे द रेसिस्टेंस फ्रंट को आतंकवादी संगठन घोषित करें। TRF कुछ और नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा का पाकिस्तान प्रायोजित समूह है।’ ऑपरेशन सिंदूर को प्रदर्शित करने के लिए प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘पहलगाम की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद हमारी सरकार ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों की ओर से हमारे देश में आतंकी घटनाएं हुई हैं, उसे देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि हम दूसरे देशों के सामने भारत का पक्ष रखें। भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं। हम हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहे हैं। मैं इस जिम्मेदारी को निभाने की पूरी कोशिश करूंगा।’ उन्होंने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब भी एक प्रतिनिधिमंडल गया था। 2008 में भी एक प्रतिनिधिमंडल गया था। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लोगों ने हमें सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं चुना है। हमें अपने देश का भी प्रतिनिधित्व करना है। भारत के सभी लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने कहा, ‘अभी तक मुझे पता है कि मैं जिस ग्रुप में हूं, उसका नेतृत्व मेरे अच्छे दोस्त बैजयंत जय पांडा करेंगे। मुझे लगता है कि इसमें निशिकांत दुबे, फंगनन कोन्याक, रेखा शर्मा, सतनाम सिंह संधू और गुलाम नबी आजाद शामिल होंगे। मुझे लगता है कि हम जिन देशों में जाएंगे, वे हैं यूके, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, इटली और डेनमार्क।’ मालूम हो कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने का भारत का संदेश लेकर 7 सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेगा, जिनमें से चार प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व सत्तारूढ़ दलों के नेता, जबकि तीन की अगुवाई विपक्षी दलों के नेता करेंगे।

ईशान किशन, करुण नायर की हुई वापसी, इंग्लैंड दौरे के लिए इंडिया ए टीम का हुआ ऐलान

नई दिल्ली पुरुष चयन समिति ने इंग्लैंड के आगामी दौरे के लिए भारत ए टीम की घोषणा कर दी है, अभिमन्यु ईश्वरन को टीम की कमान सौंपी गई है। करुण नायर और ईशान किशन की टीम में वापसी हुई है। इंडिया ए टीम कैंटरबरी और नॉर्थम्प्टन में इंग्लैंड लायंस के खिलाफ दो प्रथम श्रेणी मैच खेलेगी। भारत ए का दौरा इंग्लैंड में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले होगा। ए टीम 13 से 16 जून तक बेकेनहैम में सीनियर टीम के साथ एक ‘इंट्रा-स्क्वाड’ मैच भी खेलेगी। पहला टेस्ट 20 जून से लीड्स में शुरू होगा। इंडिया ए स्क्वॉड में करुण नायर की एंट्री हुई है, जिन्होंने 2017 में भारत के लिए आखिरी टेस्ट मैच खेला था। घरेलू रेड बॉल क्रिकेट में नायर ने दमदार प्रदर्शन किया है, जिसकी बदौलत उनको टीम में जगह मिली। ईशान किशन को भी टीम में शामिल किया गया है, जोकि लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे थे। 30 मई से शुरू होने वाले इस दौरे के लिए ध्रुव जुरेल को उपकप्तान बनाया गया है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के टीम की घोषणा से संबंधित बयान में यह स्पष्ट था कि आईपीएल फाइनल 25 मई से तीन जून तक टालने के बावजूद मूल कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। टीम में उन आईपीएल टीमों के खिलाड़ी शामिल हैं जो या तो प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई हैं या जिनके नॉकआउट में जगह बनाने की संभावना नहीं है। घरेलू सर्किट में काफी रन जुटाने वाले करुण नायर आठ साल बाद राष्ट्रीय टीम में वापस आ गए हैं। विदर्भ के बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे भी दौरे पर जाने वाली टीम का हिस्सा हैं जिन्होंने इस रणजी ट्रॉफी सत्र में रिकॉर्ड 69 विकेट लिए हैं। कुछ समय से राष्ट्रीय टीम से बाहर ईशान किशन टीम में दूसरे विकेटकीपर हैं। तेज गेंदबाज हर्षित राणा, ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट टीम का हिस्सा रहे आकाश दीप और बल्लेबाज सरफराज खान को भी इंग्लैंड के ‘शैडो टूर’ के लिए चुना गया है। अभिमन्यु ईश्वरन टीम की कप्तानी करेंगे। इस ए सीरीज में रन बनाने से सीनियर टीम के नियमित खिलाड़ियों का टेस्ट से पहले मनोबल बढ़ेगा, जबकि अन्य स्टार खिलाड़ियों को निकट भविष्य में राष्ट्रीय टीम में जगह मिल सकती है। रोहित और विराट कोहली के संन्यास के बाद भारत बदलाव के दौर से गुजर रहा है। गिल को इंग्लैंड में ज्यादा सफलता नहीं मिली है इसलिए वह दूसरे चार दिवसीय मैच में मौके का पूरा फायदा उठाना चाहेंगे। गुजरात टाइटन्स में उनके साथी सुदर्शन को टेस्ट टीम में चुने जाने की उम्मीद है जो बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं। भारत ए दो मैचों में इंग्लैंड से भिड़ेगा। पहला मैच 30 मई को कैंटरबरी में शुरू होगा, जबकि दूसरा मैच 6 जून को नॉर्थम्प्टन में शुरू होगा। सरफराज खान और नितीश कुमार रेड्डी को भी घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन का इनाम मिला है। इंडिया ए टीम: अभिमन्यु ईश्वरन (कप्तान), यशस्वी जयसवाल, करुण नायर, ध्रुव जुरेल (उपकप्तान) (विकेटकीपर), नितीश कुमार रेड्डी, शार्दुल ठाकुर, ईशान किशन (विकेटकीपर), मानव सुथार, तनुष कोटियन, मुकेश कुमार, आकाश दीप, हर्षित राणा, अंशुल कंबोज, खलील अहमद, रुतुराज गायकवाड़, सरफराज खान, तुषार देशपांडे, हर्ष दुबे

TASS की रिपोर्ट: शांति वार्ता के बाद रूस ने तेज कर दिए हमले, यात्रियों पर गिरा दिया बम, 9 की मौत

रूस तुर्किए में शांति वार्ता के एक दिन बाद ही रूस ने यूक्रेन में कई जगहों पर हमला कर दिया। TASS की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सेना ने यूक्रेन की सैन्य छावनी को निशाना बनाया। यहां यूक्रेन की सेना हथियार रखती थी। इस हमले में कितना नुकसान हुआ इसकी खबर नहीं मिली है। वहीं एक यात्री बस पर रूस ने ड्रोन अटैक कर दिया। बस में हुए धमाके में कम से कम 9 लोगों के मारे जाने की खबर है। यूक्रेन की पुलिस ने कहा कि इस तरह से मासूम लोगों की जान लेना वॉर क्राइम है। बता दें कि शुक्रवार को तुर्किए में यूक्रेन और रूस का प्रतिनिधिमंडल मिला था। दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर कोई बात नहीं बन पाई। यूक्रेन और रूस के बीच 1000 बंदियों की रिहाई पर सहमित जरूर बनी है। पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर पुतिन तुर्किए में मुलाकात करने वाले थे। हालांकि ऐन समय से पहले पुतिन ने प्लान बदल दिया। यूक्रेन में सूमी सैन्य छावनी के चीफ ने कहा कि रूसी हमले के बाद राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है। यूक्रेन पुलिस ने क्षतिग्रस्त हुई बस की तस्वीर भी शेयर की। इसमें देखा गया कि बस का ऊपरी हिस्सा उड़ गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ही देश एक दूसरे के आम नागरिकों को निशाना बनाने से चूकते नहीं हैं। वहीं शांति वार्ता के दौरान यूक्रेन चाहता था कि रूस युद्धविराम पर राजी हो। रूस युद्धविराम को लेकर शर्त रख रहा था कि अगर यूक्रेन विवादित इलाकों से अपनी सेना को हटा ले तो युद्धविराम को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है। माना जा रहा था कि डोनाल्ड ट्रंप भी पुतिन और जेलेंस्की के साथ बैठकर शांति वार्ता को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि एक-एक करके सबने अपने हाथ पीछे खींच लिए। अंत में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ही वार्ता हो सकी जो कि बेनतीजा रही।

मर चुकी मां के गर्भ में पल रहा भ्रूण, उसका भ्रूण 21 सप्ताह का है, 3 महीने बाद लेगा जन्म!

वाशिंगटन एक 30 वर्षीय महिला, जिसे फरवरी में मस्तिष्क मृत (ब्रेन-डेड) घोषित कर दिया गया था, को  अमेरिकी राज्य जॉर्जिया के कड़े गर्भपात विरोधी कानूनों के चलते अब भी जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। उसका भ्रूण 21 सप्ताह का है, और डॉक्टर चाहते हैं कि वह गर्भावस्था की पूरी अवधि (कम से कम 3 महीने और) पूरी करे, ताकि शिशु का जन्म संभव हो सके। एड्रियाना स्मिथ नाम की इस महिला के परिवार का कहना है कि अस्पताल ने उन्हें बताया कि जब तक भ्रूण के दिल की धड़कन चालू है, तब तक जॉर्जिया कानून के तहत गर्भपात या जीवन रक्षक प्रणाली को बंद करना गैरकानूनी है। स्मिथ की मां एप्रिल न्यूकिर्क ने बताया कि उनकी बेटी को फरवरी में सिरदर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां जांच में मस्तिष्क में खून के थक्के पाए गए। बाद में डॉक्टरों ने उसे ‘ब्रेन-डेड’ घोषित कर दिया।  एप्रिल न्यूकिर्क ने मीडिया से कहा, “मेरी बेटी अब कानूनी रूप से जीवित नहीं है, लेकिन मशीनें उसे जीवित दिखा रही हैं ताकि भ्रूण विकसित हो सके।” उन्होंने चिंता जताई कि डॉक्टरों के अनुसार भ्रूण के मस्तिष्क में तरल पदार्थ है और वह जन्म के बाद जीवित नहीं भी रह सकता। फिलाडेल्फिया के थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी में मातृ-भ्रूण चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. विन्सेन्ज़ो बर्घेला ने कहा, “यह मामला नैतिक और चिकित्सकीय रूप से बेहद जटिल है।” यह उन चुनौतियों को उजागर करता है जो कड़े गर्भपात कानूनों और परिवार की इच्छा के बीच टकराव में उत्पन्न होती हैं।   एमोरी यूनिवर्सिटी अस्पताल ने इस पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी देने से इनकार करते हुए कहा कि वह हमेशा राज्य कानूनों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर कार्य करता है। “हमारी प्राथमिकता मरीजों की सुरक्षा और भलाई है,” अस्पताल ने एक बयान में कहा।परिवार को इस बात की चिंता है कि बच्चा जन्म के बाद जीवित रह पाएगा या नहीं। न्यूकिर्क ने कहा, “वह अंधा हो सकता है, विकलांग हो सकता है या जन्म के बाद मर सकता है।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या परिवार एड्रियाना को जीवन रक्षक प्रणाली से हटाना चाहता है।

ऑपरेशन सिंदूर : शहबाज शरीफ ने खुद बताया, भारत के हमले से कहां-कहां हुआ नुकसान

इस्लामाबाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत भारतीय वायुसेना के जवाबी हमले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि भारतीय बैलेस्टिक मिसाइलों ने 9-10 मई की मध्यरात्रि में पाकिस्तान के कई एयरबेस, खासकर नूरखान एयरबेस को निशाना बनाया।     शहबाज शरीफ के अनुसार, वजीर-ए-आजम को यह सूचित किया गया कि नूरखान एयरबेस पर मिसाइलें गिरी हैं, जिसके बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने स्वदेशी तकनीक और आधुनिक चीनी लड़ाकू विमानों पर अत्याधुनिक गैजेट का उपयोग कर बचाव किया। मुनीर ने 2.30 बजे फोन करके हमलों के बारे में बताया शरीफ ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं से कहा कि जनरल मुनीर ने मुझे सुबह 2.30 बजे व्यक्तिगत रूप से फोन करके हमलों के बारे में जानकारी दी। यह गंभीर चिंता का क्षण था। भाजपा के राष्ट्रीय आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए इस घटना को ऑपरेशन सिंदूर की साहस और दक्षता का प्रमाण बताया। हमले में नूरखान एयरबेस समेत कई ठिकाने हुए तबाह मालवीय ने लिखा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद माना है कि जनरल असीम मुनीर ने उन्हें रात 2.30 बजे फोन करके बताया कि भारत ने नूर खान एयर बेस और कई अन्य स्थानों पर बमबारी की है। प्रधानमंत्री को आधी रात को पाकिस्तान के अंदर हमलों की खबर के साथ जगाया गया। यह ऑपरेशन सिंदूर के पैमाने, सटीकता और साहस के बारे में बहुत कुछ बताता है। पाक सेना ने स्वदेशी तकनीक और चीनी लड़ाकू विमानों का किया इस्तेमाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि हमारी वायुसेना ने अपने देश को बचाने के लिए स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने चीनी लड़ाकू विमानों पर आधुनिक गैजेट और तकनीक का भी इस्तेमाल किया। शहबाज शरीफ ने कहा, आज हर जगह यही बात की जा रही है कि पाकिस्तान की सेना ने किस तरह हिंदुस्तान को जवाब दिया। पठानकोट, उधमपुर और न जाने कहां कहां हमारी सेना ने हमले किए और दुश्मनों को सिर छिपाने की जगह नहीं मिल रही थी। नूरखान एयरबेस की अहमियत और हमले की सटीकता नूरखान एयरबेस, इस्लामाबाद के निकट होने के कारण पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एयरबेस VVIP और उच्चस्तरीय सैन्य विमानन का केंद्र है, जहां से पाकिस्तान के टॉप अधिकारी और वायुसेना के ऑपरेशंस संचालित होते हैं। स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी सैटलॉजिक (Satellogic) की सैटेलाइट तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि भारतीय वायुसेना ने रावलपिंडी के नूरखान एयरबेस पर सटीक हमला किया, जिससे कमांड और कंट्रोल यूनिट को भारी क्षति पहुंची।इन तस्वीरों में 10 मई को एयरबेस के पास एक सफेद गल्फस्ट्रीम G450 विमान भी दिखा, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रियों के लिए उपयोग होता है। इस हमले ने पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली को गंभीर झटका दिया है और यह साबित करता है कि भारतीय वायुसेना ने बेहद कुशलता से ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने खुलकर स्वीकार किया है कि भारतीय एयरस्ट्राइक से उन्हें नुकसान हुआ है। इससे पहले पाकिस्तान लगातार ऐसे हमलों को नकारता आया था, पर अब शहबाज शरीफ के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से हमले की बात स्वीकार की है। यह ऑपरेशन न केवल भारत की सैन्य ताकत और सटीकता को दर्शाता है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भी बदलाव का संकेत है। भारत ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक हमलों से पाकिस्तान की महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाकर उसकी युद्ध क्षमता को कम करने की कोशिश की है।

केदारनाथ में लैंडिंग के समय हेलीकॉप्‍टर क्रैश, मचा हड़कंप

रुद्रप्रयाग केदारनाथ धाम में एक हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग की सूचना सामने आई है. यह एम्स का सरकारी हेलिकॉप्टर बताया जा रहा है जिसका पीछे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है. हेलिकॉप्टर में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोग सुरक्षित केदारनाथ धाम में शनिवार को एक बड़ा हादसा टल गया जब एम्स ऋषिकेश का एक सरकारी हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के चलते इमरजेंसी लैंडिंग करने पर मजबूर हुआ. राहत की बात यह रही कि हेलिकॉप्टर में सवार सभी तीन लोग, जिसमें पायलट भी शामिल था, सुरक्षित हैं. मरीज को लेने पहुंचा था हेलिकॉप्टर जानकारी के मुताबिक, हेलिकॉप्टर एक मरीज को लेने के लिए केदारनाथ पहुंचा था. लैंडिंग से ठीक पहले हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीपैड से लगभग 10 मीटर पहले ही इमरजेंसी लैंडिंग कर दी. इस दौरान हेलिकॉप्टर का पीछे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन किसी को कोई चोट नहीं आई. हेलिकॉप्टर की इस सफल इमरजेंसी लैंडिंग को लेकर प्रशासन ने राहत की सांस ली है. मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है ताकि आगे इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके. तीसरा हेलिकॉप्टर हादसा स्थानीय प्रशासन और राहत कर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया. हेलिकॉप्टर की टेल पूरी तरीके से टूट गई, लेकिन किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई है. इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान यह तीसरा हेलिकॉप्टर हादसा है. इससे पहले उत्तरकाशी के गंगनानी (गंगोत्री) क्षेत्र में हुए एक हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जिससे हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे हैं.  

मुंबई एयरपोर्ट से NIA ने आईएसआईएस स्लीपर सेल के मॉड्यूल के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया

मुंबई  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मुंबई एयरपोर्ट पर ISIS के दो भगोड़े स्लीपर सेल सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों पुणे, महाराष्ट्र में 2023 में IED बनाने और परीक्षण करने के एक मामले में वॉन्टेड थे। अब्दुल्ला फैयाज शेख को डायपरवाला के नाम से भी जाना जाता है। वहीं तालहा खान को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल 2 पर आव्रजन अधिकारियों ने तब पकड़ा, जब वह इंडोनेशिया के जकार्ता में अपने ठिकाने से वापस आ रहे थे। इसके बाद NIA ने उन्हें हिरासत में ले लिया। ये दोनों आरोपी दो साल से ज़्यादा समय से फरार थे। NIA की स्पेशल कोर्ट, मुंबई ने इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। एजेंसी ने प्रत्येक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 3 लाख रुपये का इनाम भी रखा था। तीन-तीन लाख का था इनाम जांच में पता चला है कि इन दोनों और ISIS के पुणे स्लीपर सेल के आठ अन्य सदस्यों ने मिलकर साजिश रची थी। ये सभी आठ सदस्य अभी न्यायिक हिरासत में हैं। NIA के बयान में कहा गया है कि इन लोगों ने भारत में हिंसा फैलाकर शांति भंग करने और इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश रची थी। दोनों पर तीन-तीन लाख रुपये का इनाम था। बम बनाने की वर्कशॉप की दोनों गिरफ्तार आरोपियों पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पुणे के कोंढवा इलाके में अब्दुल्ला फैयाज शेख ने किराए पर लिए गए एक घर में IED बनाए थे। 2022-2023 के दौरान, उन्होंने बम बनाने की वर्कशॉप भी की और उस घर में एक नियंत्रित विस्फोट में IED का परीक्षण भी किया। एक्शन में एनआईए NIA भारत में ISIS की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। एजेंसी ने पहले ही सभी 10 आरोपियों के खिलाफ UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, अब्दुल कादिर पठान, सिमाब नसीरुद्दीन काजी, जुल्फिकार अली बरोड़वाला, शामिल नाचन, आकिफ नाचन और शाहनवाज आलम शामिल हैं। NIA के अनुसार, ये सभी मिलकर भारत में अशांति फैलाने की योजना बना रहे थे। उनका मकसद था कि देश में डर का माहौल पैदा किया जाए। NIA अब इन सभी से पूछताछ कर रही है ताकि इस साजिश के बारे में और जानकारी मिल सके। NIA का कहना है कि वह देश में आतंकवाद को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं देगी। शशि मिश्रा

शशि थरूर पाक के आतंकी चेहरे को बेनकाब करेंगे, भारतीय डेलिगेशन को लीड कर सकते हैं, कांग्रेस का आया रिएक्शन

नई दिल्ली सरकार पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आक्रामक राजनयिक अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत वैश्विक मंच पर भारत के पक्ष को मजबूती से रखने और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब किया जाएगा। खास बात है कि इस काम के लिए मोदी सरकार ने नरसिम्हा राव की कूटनीति के रास्ते पर चलने का फैसला लिया है। अगले सप्ताह से विभिन्न देशों में कई बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। यह ठीक उसी तर्ज पर जब नरसिम्हा राव ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजयपेयी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा था। तब यूएन में गिर गया था पाकिस्तान का प्रस्ताव 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार से जुड़े सत्र में एक प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य कश्मीर समस्या पर भारत का पक्ष रखना और पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक प्रस्ताव को विफल करना था, जिसमें नई दिल्ली की निंदा की जाती। उस समय यह प्रयास बहुत सफल रहा था। वाजपेयी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के हस्तक्षेप के कारण पाकिस्तान का प्रस्ताव गिर गया था। वाजपेयी की टीम में कौन-कौन थे शामिल पीवी नरसिम्हाराव ने विदेश नीति के धुरंधर माने जाने वाले विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रतिनिधि मंडल का प्रमुख नियुक्त किया था। उनके साथ कश्मीर के फारूक अब्दुल्ला और राव सरकार के विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद भी थे। संयुक्त राष्ट्र के बारे में गहन जानकारी के साथ प्रतिनिधिमंडल को मजबूत करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन राजदूत हामिद अंसारी को भी शामिल किया गया था। राव के कदम से परेशान थे खुर्शीद? अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने छह दशक से अधिक के राजनीतिक करियर में हमेशा व्यक्तिगत समीकरणों पर भरोसा किया। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के साथ उनकी नजदीकी हमेशा उनके संबंधित राजनीतिक दलों में उत्सुकता भरी चर्चा का विषय रही। राव की तरफ से वाजपेयी को यूएन में भेजने के कदम को उनकी पार्टी के भीतर अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद जिनेवा में वाजपेयी के अधीन काम करने से विशेष रूप से परेशान थे। वापस लौटने पर हुआ था शानदार स्वागत जब जेनेवा से जीत हासिल कर भारतीय प्रतिनिधिमंडल राजधानी लौटा तो उसका वैसे ही शानदार स्वागत हुआ जैसा कि आमतौर पर विजयी क्रिकेट टीमों का होता है। राव की इस कूटनीति के तह भारत ने आखिरकार दुनिया को दिखा दिया कि कश्मीर मुद्दे पर उसका इरादा गंभीर है। इस सफलता के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख जावेद मीर को पकड़ लिया गया, जिससे आतंकवादियों के मनोबल को भी गहरा धक्का लगा था। शशि थरूर पाक के आतंकी चेहरे को बेनकाब करेंगे भारत सरकार ने एक सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जो प्रमुख विदेशी सरकारों को हालिया भारत-पाकिस्तान संघर्ष और इस मुद्दे पर भारत के रुख से अवगत कराने के लिए उन देशों का दौरा करेगा. इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर को भी शामिल किया गया है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. नामित अन्य सदस्यों में भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा, डीएमके की कनिमोझी करुणानिधि, राकांपा (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे शामिल हैं. मजे की बात ये है कि इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए कांग्रेस ने अपने जिन 4 सांसदों के नाम सरकार को सुझाए थे, उनमें से किसी को नहीं चुना गया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 16 मई की सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से फोन पर बात की थी और उनसे अनुरोध किया था कि वे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए चार नाम सुझाएं. कल 16 मई को दोपहर तक, लोक सभा में विपक्ष के नेता ने संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार के नाम दिए. लेकिन केंद्र ने इन चारों को छोड़कर शशि थरूर पर विश्वास जताया. भारत सरकार का यह सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 23 मई से 10 दिवसीय राजनयिक मिशन पर रवाना होगा. वाशिंगटन, लंदन, अबू धाबी, प्रिटोरिया और टोक्यो जैसी प्रमुख राजधानियों का दौरा करके यह सर्वदलीय टीम आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी और ऑपरेशन सिंदूर के तहत हाल के घटनाक्रमों के बारे में विदेशी सरकारों को जानकारी देगी. बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में जैश, लश्कर और हिजबुल के 9 आतंकी​ ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे.

10 लाख फिलिस्तीनियों को लीबिया Settle करने की तैयारी में हैं ट्रंप – रिपोर्ट , पढ़ें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन गाजा को लेकर अमेरिका का एक चौंकाने वाला प्लान सामने आया है। अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार युद्धग्रस्त गाजा पट्टी से करीब 10 लाख फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से लीबिया भेजने की योजना बना रही है। ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और इस संबंध में लीबिया के नेतृत्व के साथ चर्चा भी कर चुका है। इस योजना के तहत, लीबिया को उन अरबों डॉलर की धनराशि को जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो अमेरिका ने एक दशक से अधिक समय पहले फ्रीज कर दी थी। एनबीसी न्यूज ने पांच सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस योजना पर पिछले कुछ समय से अमेरिका तथा लीबिया की लीडरशिप के बीच बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका लीबिया की अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के एक प्रवक्ता ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “ये रिपोर्टें असत्य हैं। जमीन पर हालात ऐसे किसी प्लान के अनुकूल नहीं हैं। ऐसी कोई योजना चर्चा में नहीं रही और इसका कोई तर्क नहीं बनता।” लीबिया में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन नाटो समर्थित विद्रोह के बाद 2011 में लीबिया में अराजकता फैल गई थी, जिसमें लंबे समय से शासन कर रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. देश विभाजित हो गया, और इसके पूर्वी और पश्चिमी हिस्से पर दो प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया समूहों ने नियं​त्रण कर लिया. लीबिया में वर्तमान में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन है: अब्दुल हामिद दबीबेह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एकता सरकार (Government of National Unity), और प्रतिनिधि सभा समर्थित राष्ट्रीय स्थिरता सरकार (Government of National Stability), जिसका नेतृत्व लीबियाई नेशनल आर्मी और उसके कमांडर खलीफा हफ्तार के वास्तविक शासन के तहत ओसामा हम्माद द्वारा किया जाता है. जीएनयू त्रिपोली में स्थित है और देश के पश्चिमी हिस्से को नियंत्रित करता है, जबकि जीएनएस पूर्वी और मध्य क्षेत्र में काम करता है. इस विभाजन ने लीबिया में सत्ता के दो केंद्र स्थापित कर दिए हैं, जिसमें दोनों सरकारें वैधता और देश पर नियंत्रण के लिए होड़ कर रही हैं. कई सालों से अस्थिरता से जूझ रहा लीबिया 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की हत्या और शासन के पतन के बाद से लीबिया लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है। देश पूर्व और पश्चिम में दो भागों में विभाजित हो गया है, जहां विभिन्न सशस्त्र गुट सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीनी नागरिकों को वहां पुनर्वासित करना एक व्यवहारिक और मानवीय चुनौती बन सकती है। गाजा में भीषण हमले, 100 से अधिक की मौत इधर, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिनमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 108 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इजरायल का कहना है कि ये हमले हमास पर दबाव बनाने और बंधकों की रिहाई के लिए युद्ध को अगले चरण में ले जाने की तैयारी का हिस्सा हैं। इजरायल ने यमन के दो बंदरगाहों पर भी हमले किए, जिनके बारे में उसका दावा है कि वहां से हूती विद्रोही हथियारों को ट्रांसफर कर रहे थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। ट्रंप की फिलिस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की इच्छा जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देश गाजा से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अधिक संख्या में स्वीकार करें, ताकि “इस तबाह हो चुके इलाके को साफ किया जा सके और एक नया शुरुआत दी जा सके।” उन्होंने कहा था, “यह लगभग एक ध्वस्त इलाका है। लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है, लोग मर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि कुछ अरब देशों के साथ मिलकर कहीं और मकान बनाएं, जहां ये लोग शायद शांति से रह सकें।” हमास ने बंधक सौदे के बदले युद्ध रोकने का प्रस्ताव दिया हमास के गाजा प्रमुख और इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में शामिल खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए एक भाषण में कहा कि उनका संगठन सभी बंधकों के बदले इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के लिए तत्पर है- बशर्ते युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने अंतरिम संघर्षविराम के किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इजराइल ने गाजा और यमन में हमले बढ़ाए इस बीच, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि 108 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. इजरायली अधिकारियों ने इसे हमास पर बंधकों को रिहा करने के लिए दबाव बनाने के अभियान की शुरुआत बताया. इजराइल ने यमन में दो बंदरगाहों पर भी हमला किया, जिसके बारे में उसने कहा कि हूती उग्रवादी समूह द्वारा हथियारों को स्थानांतरित करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए. इस बीच हमास के गाजा प्रमुख ने कहा कि समूह सभी बंधकों को इजरायल द्वारा जेल में बंद फिलिस्तीनियों की एक निश्चित संख्या के साथ बदलने के लिए तत्काल बातचीत करने के लिए तैयार है, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध समाप्त हो जाएगा. इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए हमास वार्ता दल का नेतृत्व करने वाले खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि समूह अंतरिम युद्धविराम समझौते से इनकार करता है.  

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला ने 12वीं का रिजल्ट किया जारी, महक ने पूरे प्रदेश में किया टॉप

हिमाचल प्रदेश    हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला ने 12वीं का रिजल्ट घोषित कर दिया है। बोर्ड अध्यक्ष जिलाधीश हेमराज बैरवा ने नतीजे घोषित किए। परीक्षार्थी अपना रोल नंबर डालकर एचपीबीओएसई आधिकारिक वेबसाइट hpbose.org पर जाकर परिणाम चेक कर सकते हैं। कुछ 83.16 फीसदी विद्यार्थी पास हुए हैं। ऊना जिले की महक ने पूरे प्रदेश में टॉप कर पहला स्थान हासिल किया है। उनका कुल प्रतिशत 96.4 फीसदी बना है। वहीं ऊना की शगुन 487 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। हिमाचल बोर्ड 12वीं परीक्षाएं 4 मार्च से 29 मार्च 2025 तक आयोजित की गई थीं। परीक्षा में प्रदेश भर के 2,300 परीक्षा केंद्रों पर 93,494 अभ्यर्थियों (नियमित और एसओएस) ने भाग लिया था। इससे पहले 15 मई को 12वीं का रिजल्ट जारी किया जा चुका है। इस वर्ष एचपी बोर्ड 12वीं में 79.08 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं। न्यूगल मॉडल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल भवरना की साइना ठाकुर 99.46 प्रतिशत अंक लेकर प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। इस बार 10वीं की परीक्षा 95 हजार 495 छात्रों ने दी थी। टॉप-10 में 117 छात्रों ने जगह बनाई है। इनमें 88 लड़के और 29 लड़कियां शामिल है। इसी तरह टॉप-10 में सरकारी स्कूलों में 20 बच्चे और प्राइवेट स्कूलों के 97 छात्र है। कांगड़ा की बेटियां HPBOSE 12th Result में आर्ट्स और कॉमर्स टॉपर बनीं हैं। कांगड़ा जिले की अंकिता ने आर्ट्स संकाय में शानदार प्रदर्शन करते हुए 483 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, उसी जिले की पायल शर्मा ने कॉमर्स संकाय में 482 अंकों के साथ टॉप कर कांगड़ा का नाम रोशन किया है। महक ने हिमाचल प्रदेश 12वीं में किया टॉप एचपी बोर्ड 12वीं में ऊना जिले की छात्रा महक ने 486 अंकों और 97.2% के साथ प्रदेश भर में पहला स्थान हासिल किया है। इन्होंने साइंस स्ट्रीम से बोर्ड परीक्षा दी थी। वहीं, कांगड़ा जिले की अंकिता ने आर्ट्स में 483 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है और कांगड़ा जिले की ही पायल शर्मा ने 482 अंकों के साथ कॉमर्स में फर्स्ट रैंक हासिल की है। हिमाचल प्रदेश एचपी बोर्ड 12वीं में 83.18 फीसदी पास इस बार परीक्षा परिणाम 83.18% रहा है। टॉप-10 में 75 स्टूडेंट हैं। इनमें 61 लड़कियां और 14 लड़के है। हिमाचल प्रदेश एचपी बोर्ड 12वीं की सेकेंड टॉपर धौलाधार पब्लिक स्कूल शामनगर धर्मशाला का खुशी ने 483 (96.6%) अंक लेकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। हिमाचल प्रदेश एचपी बोर्ड 12वीं टॉपर डीआर पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल गगरेट ऊना की महक ने 500 में से 486 (97.2%) अंक लेकर प्रदेशभर में प्रथम स्थान हासिल किया। हिमाचल प्रदेश 12वीं बोर्ड में किसने किया टॉप हिमाचल प्रदेश 12वीं परीक्षा में ऊना जिले की महक ने पूरे प्रदेश में टॉप कर पहला स्थान हासिल किया है। हिमाचल प्रदेश बोर्ड 12वीं का रिजल्ट जारी हिमाचल प्रदेश बोर्ड ने 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसे hpbose.org और digilocker.gov.in पर चेक कर सकते हैं।

बलूचिस्तान चाहता है कि सबसे पहली मान्यता भारत करे, क्या है इसकी वजह? आइए जानते

नई दिल्ली  पाकिस्तान (Pakistan) के लिए बलूचिस्तान (Balochistan) गले की फांस बन चुका है। बलूचिस्तान के ज़्यादातर निवासी खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते। बलूचों के दिल और दिमाग में पाकिस्तानी सरकार और सेना के प्रति नफरत है। समय-समय पर बलूच अलगाववादी पाकिस्तानी सेना और पुलिस को निशाना बनाते हैं। हाल ही में बलूच नेता मीर यार बलूच ((Mir Yar Baloch)) ने बलूचिस्तान की आज़ादी का ऐलान करते हुए कहा कि बलूचिस्तान, पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही मीर ने खुद को बलूचिस्तान का पहला राष्ट्रपति भी घोषित किया। महरंग बलूच (Mahrang Baloch) समेत अन्य बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता और नेता भी पाकिस्तान के खिलाफ जंग में खड़े हुए हैं। बलूचिस्तान की आज़ादी की घोषणा के बाद बलूच नेता दुनियाभर से मान्यता और समर्थन की मांग कर रहे हैं। सबसे पहले भारत से मान्यता चाहता है बलूचिस्तान बलूचिस्तान के नेता चाहते हैं कि दुनियाभर के देश उन्हें एक अलग देश के तौर पर मान्यता और समर्थन दे। बलूच नेता चाहते हैं कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को आज़ाद देश के रूप में मान्यता देने के साथ ही मुद्रा, पासपोर्ट, और अन्य संसाधनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन दिया जाए। हालांकि पहले समर्थन की बात करें, तो बलूच नेता चाहते हैं कि भारत, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को आज़ाद देश के रूप में मान्यता देने वाला पहला देश बने। बलूच नेताओं ने भारत में दूतावास खोलने की मांग भी की है। बलूच नेता मीर सोशल मीडिया पर भारत-बलूचिस्तान की दोस्ती, भारत से समर्थन और भारत के प्रति अपने प्रेम को सोशल मीडिया पर जमकर दिखा रहे हैं। सबसे पहले भारत से समर्थन क्यों चाहता है बलूचिस्तान? बलूचिस्तान सबसे पहले भारत से ही समर्थन क्यों चाहता है? मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है। इसकी मुख्य वजह है भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव किसी से भी छिपा नहीं है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव और ज़्यादा बढ़ गया है और युद्ध जैसे हालात भी पैदा हो गए। हालांकि भारत ने पाकिस्तान को धूल चटा दी। इसी वजह से बलूच नेता चाहते हैं कि सबसे पहले भारत ही डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को मान्यता दे, जिससे बलूच अलगाववादियों और नेताओं द्वारा पाकिस्तान को दिए जख्मों पर नमक लगाया जा सके। बलूच नेता हैं भारत के समर्थक कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा विवाद जगजाहिर है। पाकिस्तान समय-समय पर कश्मीर मुद्दा उठाता रहता है। बलूच नेताओं ने खुलकर कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है और कहा है कि पाकिस्तान को पीओके को खाली कर देना चाहिए। ऐसे में अगर भारत बलूचिस्तान को मान्यता दे देता है, तो इससे न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव पड़ेगा, बल्कि भारत को देखते हुए अन्य देश भी बलूचिस्तान को मान्यता दे सकते हैं। भारत को बलूचिस्तान का समर्थन करके क्या फायदा होगा? बलूचिस्तान को मान्यता देकर भारत पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच भड़की चिंगारी को हवा दे सकता है जिससे पाकिस्तान का ध्यान भारत से हटेगा और बलूचिस्तान पर लग जाएगा, जिससे बलूचिस्तान में भड़की आज़ादी की चिंगारी से पाकिस्तान की चिंता बढ़ जाएगी। रणनीतिक रूप से यह भारत का पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। इसकी वजह है बलूचिस्तान की आज़ादी से पाकिस्तान की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का कमज़ोर होना। इससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय स्थिति को बड़ी बड़ा झटका लगेगा। आज़ाद बलूचिस्तान, भारत के चाबहार पोर्ट परियोजना को और मज़बूत कर सकता है। इतना ही नहीं, आज़ाद बलूचिस्तान से भारत की अरब सागर में मज़बूती भी बढ़ेगी जिससे पाकिस्तान के साथ ही चीन की भी चिंता बढ़ेगी।

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