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भारतीय सेना ने भारत-म्यांमार बॉर्डर पर 10 उग्रवादियों को किया ढेर

चंदेल भारतीय सेना ने भारत-म्यांमार बॉर्डर पर 10 उग्रवादियों को मार गिराया है। सेना की ईस्टर्न कमांड ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी है। सेना की पूर्वी कमान ने देर रात एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर बताया, “भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित चंदेल जिले के खेगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास खुफिया जानकारी के आधार पर उग्रवादियों की गतिविधियों का पता चला था। इसके बाद असम राइफल्स की यूनिट ने 14 मई 2025 को स्पीयर कॉर्प्स के तहत एक ऑपरेशन शुरू किया।” उन्होंने बताया, “ऑपरेशन के दौरान संदिग्ध उग्रवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी की, जिसका जवाब देते हुए सैनिकों ने तुरंत नियंत्रित और संतुलित तरीके से जवाबी कार्रवाई की। गोलीबारी में 10 उग्रवादी मारे गए और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है।” यह कार्रवाई मणिपुर में जारी अशांति के बीच सुरक्षाबलों की ओर से एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। भारत के पूर्वी सीमा पर यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इस कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल केंद्र सरकार ने भारत और म्यांमार के बीच 1,610 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा बाड़ लगाने और सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी थी। सरकार ने यह फैसला मणिपुर में घुसपैठियों को रोकने के लिए लिया था। सरकार के सूत्रों की मानें तो पड़ोसी मुल्क म्यांमार से घुसपैठिए, मणिपुर में प्रवेश कर रहे हैं। इसके लिए अब भारत सरकार ने भारत-म्यांमार सीमा पर मुक्त आवाजाही व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने लगभग 31 हजार करोड़ रुपये की लागत से भारत-म्यांमार के बीच 1610 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने और सीमा सड़कों के निर्माण के काम को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दी है।

त्राल एनकाउंटर: मारे गए 3 जैश आतंकी, टारगेटेड इलाके में ऑपरेशन जारी

 त्राल जम्मू-कश्मीर के त्राल में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबर है. इस दौरान तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया. इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के दो से तीन आतंकी छिपे होने की खबर है. जिन तीन आतंकियों को ढेर किया गया है. वे सभी त्राल के रहने वाले हैं. इनके नाम आसिफ अहमद शेख, आमिर नजीर वानी और यावर अहमद भट्ट हैं. इस कामयाबी के बाद भारतीय सेना ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने के बाद 15 मई को अवंतीपोरा के त्राल के नादेर में तलाशी अभियान चलाया गया. भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने त्राल के नादेर को चारों ओर से घेर लिया. जवानों को कुछ संदिग्ध गतिविधियों का पता चला, जिसके बाद आतंकियों पर फायरिंग की गई. ऑपरेशन अभी जारी है. यह एनकाउंटर त्राल के नादिर गांव में चल रहा है. पुलवामा में 48 घंटे में यह दूसरा एनकाउंटर है. इससे पहले मंगलवार को शोपियां में लश्कर के तीन आतंकियों को ढेर किया गया था. शोपियां में सुरक्षाबलों के विशेष ऑपरेशन के तहत मंगलवार को लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया था. इन आतंकियों को सुरक्षाबलों ने जिनपथेर केलर इलाके में घेर लिया था. इस ऑपरेशन को ऑपरेशन केलर नाम दिया गया था. इस ऑपरेशन में मारे गए लश्कर के एक आतंकी का नाम शाहिद कुट्टे था, जो शोपियां का रहने वाला था. वह आठ मार्च 2023 को लश्कर में शामिल हुआ था. वह 18 मई, 2024 को हीरपोरा, शोपियां में बीजेपी सरपंच की हत्या में शामिल था. वहीं, दूसरे आतंकवादी की पहचान अदनान शफी डार के रूप में हुई है, जो वंडुना मेलहोरा, शोपियां का रहने वाला है. वह 18 अक्टूबर, 2024 को लश्कर में शामिल हुआ था. वह 18 अक्टूबर, 2024 को शोपियां में गैर स्थानीय मजदूर की हत्या में शामिल था.​ पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पोस्टर शोपियां के कई इलाकों में लगाए गए थे. सुरक्षाबलों ने आतंकियों की सूचना देने वाले को 20 लाख रुपये इनाम देने का भी ऐलान कर रखा है. सेना ने पहलगाम में मासूम पर्यटकों की मौत के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकियों की तलाश तेज कर दी है.  

25 मई को पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगे, सभी मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों को बुलाया

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने 25 मई को एनडीए के सभी मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में बिहार के सीएम नीतीश कुमार, आंध्र के चंद्रबाबू नायडू के आने की संभावना है। इसके अलावा महाराष्ट्र से अजित पवार और एकनाथ शिंदे जैसे लीडर भी मौजूद रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग में पीएम नरेंद्र ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगे। इसके अलावा मौजूदा राजनीतिक स्थितियों पर भी बात होने की संभावना है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से छिड़ी जंग और फिर सीजफायर होने से एक वर्ग निराश बताया जा रहा है। इसे लेकर भाजपा नेतृत्व गंभीर है। ऐसे में एनडीए के साथियों को भरोसे में लेने की कवायद भी यह बैठक मानी जा रही है। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ राजनाथ सिंह और अमित शाह जैसे सीनियर नेता भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह और अमित शाह भी इस बैठक में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कुछ ब्रीफ कर सकते हैं। भाजपा की कोशिश है कि ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सुरक्षा बलों की जीत के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाए। यही नहीं इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति से भी बचने की सलाह पीएम नरेंद्र मोदी ने दी है। उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों से कहा था कि राजनीतिक मामलों पर टिप्पणियां करने से फिलहाल बचें। ऑपरेशन सिंदूर को पूरी तरह से सेना को ही समर्पित किया जाए। इसका राजनीतिक श्रेय न लिया जाए। भाजपा के सीनियर नेताओं की तरफ से यह संदेश हर प्रदेश यूनिट को भी दिया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय न लिया जाए। दरअसल पीएम मोदी बिलकुल नहीं चाहते कि इस मौके पर किसी भी तरह का राजनीतिक वाद-विवाद छिड़े। भाजपा की ओर से अपने कार्यकर्ताओं को भी साफ कहा गया है कि वे यही कहें कि ऑपरेशन सिंदूर वाला ऐक्शन आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए था। यह पाकिस्तान के साथ जंग छेड़ने वाली बात नहीं थी। इसके अलावा भारत की ओर से पाकिस्तानी सेना को टारगेट भी नहीं किया गया। लेकिन पाकिस्तान की सेना ने भारत के खिलाफ हमले किए तो उसे करारा जवाब दिया गया। पीएम मोदी ने भी आदमपुर एयरबेस पर दी गई अपनी स्पीच में ऐसी ही बात की थी।

यमुना नदी का पानी दूषित, 2 वर्षों में पानी की गुणवत्ता में गिरावट: DPCC की रिपोर्ट

नई दिल्ली दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा यमुना नदी के प्रदूषण पर एक चिंताजनक रिपोर्ट जारी की गई है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में यमुना के जल की गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आई है. विशेष रूप से, जनवरी 2025 में यमुना में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर स्वीकार्य मानक से 42 गुना अधिक पाया गया है. एक स्वस्थ नदी में बीओडी की मात्रा आदर्श रूप से 3 मिलीग्राम/लीटर से कम होनी चाहिए. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के यमुना नदी के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक नजफगढ़ नाले के आउटफॉल में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर जनवरी 2025 में 127 मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच गया, जबकि जनवरी 2023 में यह 53 मिलीग्राम/लीटर था. यह पिछले दो वर्षों में सबसे उच्चतम स्तर है. ‘यमुना के कायाकल्प में प्रगति’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के मध्य में यमुना में प्रदूषण के स्तर में थोड़ी सुधार देखने को मिली थी. हालांकि 2024 की शुरुआत और अंत में यमुना में प्रदूषण के स्तर में तेजी से वृद्धि देखी गई. रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 और मार्च 2025 के बीच दिल्ली के प्रमुख निगरानी बिंदुओं पर प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह, ISBT कश्मीरी गेट पर BOD का स्तर नवंबर 2023 में मिलीग्राम/लीटर से बढ़कर दिसंबर 2024 में मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच गया. कालिंदी कुंज के पास शाहदरा नाले के नीचे स्थिति और भी गंभीर है. जनवरी 2023 में BOD रीडिंग 56 मिलीग्राम/लीटर से बढ़कर जनवरी 2025 में 127 मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच गई, जो कि पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. डीपीसीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि दिल्ली में नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बावजूद, स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना में प्रदूषण के लिए दो मुख्य कारण हैं: एक तो अपर्याप्त वर्षा के कारण नदी के प्रवाह में कमी, और दूसरा सीवेज प्लांट की क्षमता में ठहराव. ISBT कश्मीरी गेट का स्तर भी खराब ISBT कश्मीरी गेट पर, पिछले दो वर्षों में BOD का स्तर लगभग 40 mg/l के आसपास बना रहा, लेकिन नवंबर 2023 में यह बढ़कर 52 mg/l और दिसंबर 2024 में 51 mg/l तक पहुंच गया. वहीं, कालिंदी कुंज के पास शाहदरा नाले के नीचे, जहां नदी दिल्ली से निकलती है, स्थिति और भी गंभीर है। जनवरी 2023 में BOD की रीडिंग 56 mg/l से बढ़कर जनवरी 2025 में खतरनाक 127 mg/l तक पहुंच गई, जो पिछले तीन वर्षों में उस स्थान पर सबसे उच्चतम स्तर है. डीपीसीसी की रिपोर्ट, जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के तहत यमुना नदी के पुनरुद्धार और मासिक जल गुणवत्ता की निगरानी करती है, राजधानी में चल रही कई कार्य योजनाओं के बावजूद नदी में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में शहर की निरंतर असफलता को उजागर करती है. खराब गुणवत्ता के लिए 2 फैक्टर जिम्मेदार विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की deteriorating गुणवत्ता के लिए दो मुख्य कारण जिम्मेदार हैं: एक तो कम बारिश के कारण नदी के पर्यावरणीय प्रवाह में कमी और दूसरे, सीवेज तथा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की क्षमता में ठहराव. उनका कहना है कि पिछले वर्ष मानसून के बाद से दिल्ली और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की मात्रा बहुत कम रही है, जिससे यमुना में प्रदूषकों का पतला होना भी कम हुआ है. यमुना नदी से जुड़े कार्यकर्ता और साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (एसएएनडीआरपी) के सदस्य भीम सिंह रावत ने बताया कि दिल्ली के सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर में अभी तक कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं किया गया है. वर्तमान में, दिल्ली में 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) हैं, जिनकी कुल क्षमता 764 मिलियन गैलन प्रति दिन (एमजीडी) है, जबकि शहर में प्रतिदिन लगभग 792 एमजीडी सीवेज उत्पन्न होता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) 12 नए एसटीपी स्थापित करने की योजना बना रहा है.

Russia और China मिलकर चांद पर बनाएंगे Nuclear Power … संयंत्र बनाने की डील तय

मॉस्को चीन और रूस ने चंद्रमा पर एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो 2036 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह संयंत्र अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS) को ऊर्जा प्रदान करेगा, जिसका नेतृत्व चीन और रूस संयुक्त रूप से कर रहे हैं. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने 2026 के बजट प्रस्ताव में चंद्रमा पर एक कक्षीय स्टेशन की योजना को रद्द करने की बात कही है. यह कदम चीन और रूस की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को और मजबूत करता है, जबकि अमेरिका की आर्टेमिस कार्यक्रम में देरी और बजट कटौती ने इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चीन-रूस का चंद्र परमाणु संयंत्र: एक क्रांतिकारी कदम चीन और रूस ने हाल ही में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत वे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्थाई, मानव-नियंत्रित चंद्र आधार (लूनर बेस) स्थापित करने के लिए एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाएंगे. यह संयंत्र ILRS को ऊर्जा प्रदान करेगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और दीर्घकालिक मानव रहित संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें भविष्य में मानव उपस्थिति की संभावना भी शामिल है. निर्माण प्रक्रिया: रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के महानिदेशक यूरी बोरिसोव के अनुसार, इस संयंत्र का निर्माण “मानव उपस्थिति के बिना” स्वचालित रूप से किया जाएगा. यह तकनीकी रूप से कैसे संभव होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बोरिसोव ने दावा किया कि तकनीकी कदम “लगभग तैयार” हैं. समयसीमा: संयंत्र का निर्माण 2030 से 2035 के बीच शुरू होगा और 2036 तक पूरा हो जाएगा. ILRS की आधारशिला 2028 में चीन की चांग-ई-8 मिशन के साथ रखी जाएगी, जो पहली बार चीनी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारेगी. अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS): एक वैश्विक परियोजना ILRS एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे चीन और रूस ने जून 2021 में पहली बार घोषित किया था. यह स्टेशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थापित किया जाएगा. इसमें 17 देश शामिल हो चुके हैं, जिनमें मिस्र, पाकिस्तान, वेनेजुएला, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. रोडमैप: ILRS का निर्माण पांच सुपर हेवी-लिफ्ट रॉकेट लॉन्च के माध्यम से 2030 से 2035 तक किया जाएगा. इसके बाद, 2050 तक इस स्टेशन का विस्तार किया जाएगा, जिसमें एक कक्षीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रमा के भूमध्य रेखा और इसके दूर के हिस्से पर दो नोड्स शामिल होंगे. ऊर्जा स्रोत: स्टेशन को सौर, रेडियो आइसोटोप और परमाणु जनरेटरों से ऊर्जा मिलेगी. इसके अलावा, चंद्रमा-पृथ्वी और चंद्र सतह पर उच्च गति संचार नेटवर्क, चंद्र वाहन और मानवयुक्त रोवर भी होंगे. उद्देश्य: ILRS का लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान, दीर्घकालिक मानव रहित संचालन, और मंगल पर मानव लैंडिंग के लिए तकनीकी आधार तैयार करना है चीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम पिछले एक दशक में तेजी से विकसित हुआ है. 2013 में चांग-ई-3 मिशन के साथ चीन ने चंद्रमा पर अपना पहला रोवर उतारा. इसके बाद, उसने चंद्रमा और मंगल पर और रोवर भेजे, चंद्रमा के निकट और दूर के हिस्सों से नमूने एकत्र किए और चंद्र सतह का मानचित्रण किया. 2030 का लक्ष्य: चीन का लक्ष्य 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारना और अंतरिक्ष अनुसंधान में वैश्विक नेता बनना है. 2050 की योजना: ILRS को 2050 तक एक विस्तृत नेटवर्क में बदलने की योजना है, जो चंद्रमा के विभिन्न हिस्सों को जोड़ेगा और मंगल मिशनों के लिए आधार प्रदान करेगा. नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम: चुनौतियों का सामना चीन और रूस की इस घोषणा के ठीक बाद, नासा ने अपने 2026 के बजट प्रस्ताव में आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कटौती की घोषणा की. आर्टेमिस का लक्ष्य 2027 में आर्टेमिस III मिशन के माध्यम से अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को 50 वर्षों बाद चंद्रमा पर वापस लाना है. हालांकि बजट कटौती ने इस कार्यक्रम को जोखिम में डाल दिया है. लूनर गेटवे का रद्द होना: नासा की योजना एक कक्षीय चंद्र स्टेशन, लूनर गेटवे को 2027 तक लॉन्च करने की थी. लेकिन 2026 के बजट प्रस्ताव ने इस मिशन को रद्द कर दिया, साथ ही स्पेस लॉन्च सिस्टम और ओरियन कार्यक्रमों को भी आर्टेमिस III के बाद समाप्त करने की बात कही. बजट कटौती: नासा के बजट में 24% की कटौती प्रस्तावित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 500 मिलियन डॉलर की कमी शामिल है. प्रभाव: इन कटौतियों ने नासा की चंद्र महत्वाकांक्षाओं को कमजोर किया है, जिससे चीन और रूस को अंतरिक्ष दौड़ में बढ़त मिल सकती है. चीन-रूस बनाम अमेरिका: अंतरिक्ष दौड़ में नया मोड़ चीन और रूस का यह समझौता अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है. जहां नासा आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की योजना बना रहा था, वहीं बजट कटौती और देरी ने इसकी गति को धीमा कर दिया है. दूसरी ओर चीन और रूस की ILRS परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें 17 देशों का समर्थन और स्पष्ट रोडमैप शामिल है. चीन-रूस की ताकत: दोनों देशों की परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता ILRS को एक मजबूत आधार प्रदान करती है. चीन की चांग’ए मिशन और रूस की स्वचालित निर्माण तकनीक इस परियोजना को गति दे सकती है. अमेरिका की चुनौतियां: नासा के सामने न केवल बजट की कमी है, बल्कि तकनीकी देरी और राजनीतिक अनिश्चितता भी है। आर्टेमिस III की 2027 की समयसीमा पहले ही 2026 से स्थगित हो चुकी है. वैश्विक प्रभाव और भविष्य चीन और रूस का चंद्र परमाणु संयंत्र वैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. यह न केवल चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति को संभव बनाएगा, बल्कि मंगल मिशनों के लिए भी आधार तैयार करेगा.यह परियोजना हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है. वैज्ञानिक लाभ: ILRS चंद्रमा की सतह, संसाधनों और अंतरिक्ष पर्यावरण के अध्ययन को बढ़ावा देगा. रणनीतिक प्रभाव: यह परियोजना चीन और रूस को अंतरिक्ष में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है, विशेष रूप से तब जब अमेरिका अपनी योजनाओं में पीछे रह रहा है. भारत की भूमिका: भारत, जो अपने चंद्रयान मिशनों के लिए जाना जाता है, भविष्य में ILRS या आर्टेमिस जैसे कार्यक्रमों में सहयोग कर सकता है, लेकिन अभी तक इस परियोजना में शामिल नहीं हुआ … Read more

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में सैन्य शक्ति प्रदर्शन को केंद्र में ला दिया है. ऑपरेशन सिंदूर, जिसे मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया, भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती की, जिसमें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत, 7 विध्वंसक, 7 फ्रिगेट, पनडुब्बियां और तेज हमलावर नौकाएं शामिल थीं. यह तैनाती भारत की समुद्री ताकत का शानदार प्रदर्शन थी, जिसने पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया. ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले ने भारत को निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रेरित किया. इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से जोड़ा गया. जिसके बाद भारत ने त्रि-आयामी दबाव (सेना, वायुसेना और नौसेना) के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू की. ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना. पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना था कि भारत किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में अभूतपूर्व तैनाती की. इस तैनाती ने पाकिस्तान नौसेना को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया. भारतीय नौसेना की तैनाती: एक ऐतिहासिक प्रदर्शन 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट और ऑपरेशन पायथन के दौरान कराची बंदरगाह पर हमला करने के लिए केवल 6 युद्धपोतों का उपयोग किया था. उस हमले ने पाकिस्तान की समुद्री रसद को तबाह कर दिया था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में, भारतीय नौसेना ने 36 युद्धपोतों की तैनाती की जो 1971 की तुलना में छह गुना अधिक है. 1. INS विक्रांत और कैरियर बैटल ग्रुप INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, इस तैनाती का केंद्रबिंदु था. 40,000 टन का यह युद्धपोत मिग-29K लड़ाकू विमान, कामोव हेलीकॉप्टर और उन्नत हवाई चेतावनी प्रणालियों से लैस है. कैरियर बैटल ग्रुप: विक्रांत के साथ 8-10 युद्धपोतों का एक समूह तैनात किया गया, जिसमें विध्वंसक, फ्रिगेट और सहायक जहाज शामिल थे. इस समूह ने अरब सागर में कराची के निकट एक अभेद्य समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना को तट पर ही सीमित कर दिया. रणनीतिक प्रभाव: मिग-29K विमानों ने हवाई निगरानी और हमले की क्षमता प्रदान की, जबकि हेलीकॉप्टरों ने पनडुब्बी-विरोधी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 2. सात विध्वंसक: बहुआयामी ताकत भारतीय नौसेना ने सात विध्वंसक तैनात किए, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MRSAM) और वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो से लैस थे. ये विध्वंसक समुद्री सतह, हवा और पनडुब्बी-विरोधी लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम थे. ब्रह्मोस मिसाइल, जो 450 किमी की रेंज और 2.8 मैक की गति से हमला कर सकती है. कराची बंदरगाह और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को तुरंत नष्ट करने की क्षमता रखती थी. उदाहरण: कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जैसे INS कोलकाता और INS चेन्नई, इस तैनाती में शामिल थे, जो अपनी उन्नत रडार और हथियार प्रणालियों के लिए जाने जाते हैं. 3. सात स्टील्थ फ्रिगेट: चपलता और शक्ति सात स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट, जिनमें हाल ही में शामिल INS तुशिल भी तैनात की गईं. ये फ्रिगेट उन्नत रडार, मिसाइल प्रणालियों और स्टील्थ तकनीक से लैस थीं, जो हवाई और समुद्री खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकती थीं. इन फ्रिगेट्स ने पश्चिमी तट के साथ एक रक्षात्मक और आक्रामक समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना को कोई जवाबी कार्रवाई करने से रोक दिया. INS तुशिल: यह नवीनतम तलवार-श्रेणी का फ्रिगेट है, जिसे रूस के सहयोग से भारत में निर्मित किया गया और 2024 में नौसेना में शामिल किया गया. 4. पनडुब्बियां: अदृश्य खतरा अनुमानित छह पनडुब्बियां, जिनमें परमाणु-संचालित INS अरिहंत और पारंपरिक स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियां (जैसे INS कलवारी) शामिल थीं ने अरब सागर में गुप्त रूप से संचालन किया. ये पनडुब्बियां स्टील्थ ऑपरेशन्स में माहिर थीं. पाकिस्तानी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ संभावित हमलों के लिए तैयार थीं. रणनीतिक महत्व: INS अरिहंत की परमाणु मिसाइल क्षमता ने भारत की दूसरी हमले की क्षमता (second-strike capability) को मजबूत किया, जो परमाणु निरोध में महत्वपूर्ण है. 5. तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट कई तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट भी तैनात की गईं, जो त्वरित और सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई थीं. ये छोटे लेकिन घातक जहाज कराची बंदरगाह जैसे लक्ष्यों पर तुरंत हमला करने में सक्षम थे. इनकी तैनाती ने भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाया, जिससे कुल युद्धपोतों की संख्या 36 तक पहुंच गई. पाकिस्तानी नौसेना की स्थिति: रक्षात्मक मुद्रा पाकिस्तानी नौसेना की तुलना में भारतीय नौसेना की तैनाती कहीं अधिक प्रभावशाली थी. पाकिस्तान के पास वर्तमान में 30 से कम युद्धपोत हैं, जिनमें चार चीनी-निर्मित टाइप 054A/P फ्रिगेट, कुछ पुरानी फ्रिगेट, और सीमित पनडुब्बियां शामिल हैं.ऑपरेशन सिंदूर के दौरानपाकिस्तानी नौसेना के जहाज मुख्य रूप से कराची बंदरगाह के भीतर या तट के बहुत करीब सीमित रहे. NAVAREA चेतावनी: भारतीय नौसेना की भारी तैनाती के डर से पाकिस्तान ने समुद्री क्षेत्र में NAVAREA (Navigational Area) चेतावनी जारी की, जिसमें संभावित नौसैनिक हमले की आशंका जताई गई. पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: पाकिस्तानी नौसेना ने दावा किया कि उनकी सतर्कता ने भारतीय नौसेना को उनके जल क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका. हालांकि, भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल निवारक मुद्रा बनाए रखना था, न कि सक्रिय हमला करना. सीमित क्षमता: पाकिस्तानी नौसेना की कमजोर समुद्री ताकत और पुराने उपकरणों ने उसे भारतीय नौसेना के सामने जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ बना दिया. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रभाव भारतीय नौसेना की इस विशाल तैनाती ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रभाव छोड़े… समुद्री यातायात पर असर: कराची के आसपास उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े। इससे पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा. वैश्विक ध्यान: इस तैनाती ने वैश्विक शक्तियों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन का ध्यान आकर्षित किया. भारत की समुद्री ताकत ने हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया. पाकिस्तान पर दबाव: भारतीय नौसेना की तैनाती ने पाकिस्तान को न केवल सैन्य, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर भी दबाव … Read more

नितिन गडकरी ने नई सेमीकंडक्टर यूनिट को भारत की ‘तकनीकी आत्मनिर्भरता’ की खोज में एक महत्वपूर्ण कदम बताया

नई दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में नई सेमीकंडक्टर यूनिट को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की ‘तकनीकी आत्मनिर्भरता’ की खोज में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत अतिरिक्त सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की स्थापना को हरी झंडी दिखाए जाने के कदम को सराहा। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत एक अतिरिक्त सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा की स्थापना को मंजूरी दे दी है।” उन्होंने आगे कहा, “5 यूनिट के निर्माण के एडवांस स्टेज में होने के साथ, यह छठा प्लांट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की खोज में एक बड़ा कदम है।” केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस प्लांट को लेकर आगे जानकारी दी कि नई अप्रूव्ड यूनिट हार्डवेयर विकास में अपनी विरासत के लिए प्रसिद्ध एचसीएल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में ग्लोबल लीडर फॉक्सकॉन के बीच एक संयुक्त उद्यम है। यह प्लांट यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के भीतर जेवर हवाई अड्डे के पास स्थित होगा। यह प्लांट 20,000 वेफर और 36 मिलियन यूनिट प्रति माह की अनुमानित क्षमता के साथ डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन करेगा। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना को मंजूरी दी है। इससे 3,700 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा। इस नए प्लांट में मोबाइल, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, पीसी और डिस्प्ले वाले दूसरे डिवाइस के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का निर्माण होगा। कैबिनेट नोट के अनुसार, ”भारत में लैपटॉप, मोबाइल, सर्वर, मेडिकल डिवाइस, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की तेजी से विकास के साथ सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ रही है, यह नई यूनिट प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को और आगे बढ़ाएगी।”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा- कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ महत्वपूर्ण है

नई दिल्‍ली पाकिस्‍तान में आतंक के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवाल पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पार्टी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सवाल कांग्रेस की आदत बन चुकी है। कुछ लोगों की कंट्री की विक्ट्री पर भी कंफ्यूजन की स्थिति पैदा करने की साजिश सिंडिकेट के समर्थन में है। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस कंट्री की विक्ट्री पर कन्फ्यूजन केमिस्ट्री पैदाकर किस प्रकार का सियासी लाभ लेने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ महत्वपूर्ण है। मिडिया से बातचीत के दौरान भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पार्टी को घेरा। उन्‍होंने कहा कि 1999 के कारगिल की जंग में सोनिया गांधी ने तमाम तरह के सवाल पूछे थे, दुष्प्रचार शुरू कर दिया गया था। जब सर्जिकल स्ट्राइक हुआ तब भी यही हुआ और अभी भी वही चीज दोहरा रहे हैं। रंग में भंग डालने का जो रिवाज और मिजाज है, वह कोई देशवासी स्वीकार नहीं करेगा। उन्‍होंने कहा कि जब-जब भारतीय सेना देश के दुश्‍मनों को तबाह करती है, आतंक के ठिकानों को ध्‍वस्‍त करती है, तब आप सेना को हौसला देने के बजाय सवाल और सबूत की जुगलबंदी शुरू कर देते हैं। आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी के निंदा प्रस्‍ताव लाने के बयान पर उन्‍होंने कहा कि हमें सुरक्षा बलों और सरकार पर पूरा यकीन करना चाहिए। जो इस तरह की साजिश में भागीदार बने हुए हैं, उनको हमें अस्‍वीकार करना होगा, क्योंकि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर भी ‘आप’ सियासी चक्र की रचना में लगे हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के मंत्री के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इस प्रकार का बयान निंदनीय है। वह (कुरैशी) केवल अकेली नहीं हैं, उनका पूरा परिवार देश की सुरक्षा के प्रति समर्पित है। उस परिवार को देश की आन-बान-शान के तौर पर देखा जाता है। उन्‍होंने कहा कि मध्य प्रदेश के मंत्री को इतना नहीं मालूम कि आतंकवाद और राष्ट्रवाद का फर्क क्या होता है, किस प्रकार की आप भाषा बोल रहे हैं। जोश में होश खोने की जरूरत नहीं है।

पाक के हमलों को नाकाम करने में निभाई बड़ी भूमिका, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने दिखाया स्वदेशी डिफेंस सिस्टम ‘आकाशतीर’

नई दिल्ली सरकारी डिफेंस कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने बुधवार को स्वदेशी डिफेंस सिस्टम ‘आकाशतीर’ को देश को दिखाया। यह वही डिफेंस सिस्टम है, जिसने पाकिस्तान के कई हवाई हमलों को नाकाम किया। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बीईएल को यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि हमारे इन-हाउस डिजाइन और निर्मित एयर डिफेंस सिस्टम ‘आकाशतीर’ ने युद्ध के मैदान में अपनी क्षमता साबित कर दी है। आकाशतीर के साथ एकीकृत ग्राउंड-बेस्ड डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के हवाई हमलों को नाकाम कर दिया।” बीईएल ने पोस्ट में आगे लिखा, “इस प्रणाली ने उपयोगकर्ताओं की अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन किया और मौजूदा संघर्ष के दौरान भारत को मजबूत वायु रक्षा प्रदान की।” बीईएल ने बताया कि आकाशतीर सेना की सबसे निचली परिचालन इकाइयों को सुलभ, एक निर्बाध और एकीकृत हवाई स्थिति चित्र सुनिश्चित करता है, जिससे सेना को स्थिति के बारे में सही और सटीक जानकारी मिलती है। सरकारी डिफेंस कंपनी ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “आकाशतीर अग्रिम पंक्ति पर तैनात यूनिट्स को सशक्त बनाता है और डायनामिक इंगेजमेंट निर्णय लेने में मदद करता है।” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सोमवार को भारतीय सेना की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर मार्शल एके भारती ने कहा था, “हमारे युद्ध-सिद्ध सिस्टम समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और उन्होंने पाकिस्तान का डटकर मुकाबला किया है। एक और खास बात स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली-आकाश सिस्टम का शानदार प्रदर्शन रहा। पिछले एक दशक में भारत सरकार के बजटीय और नीतिगत समर्थन के कारण ही इतना मजबूत वायु रक्षा वातावरण तैयार करना और संचालित करना संभव हो सका।” भारती ने आगे कहा था, “पाकिस्तान के ड्रोन और मानवरहित युद्धक हवाई वाहनों को स्वदेशी रूप से विकसित सॉफ्ट और हार्ड किल काउंटर-यूएएस सिस्टम और अच्छी तरह से प्रशिक्षित भारतीय वायु रक्षा कर्मियों ने नाकाम कर दिया। हमने सिविलियन और मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को न्यूनतम रखा, जबकि पाकिस्तानी सेना लगातार हमले कर रही थी। आपको पता है कि एयर डिफेंस सिस्टम की हमारे पास वैरायटी है, जिसमें लो लेवल फायरिंग, सरफेस टू एयर मिसाइल, लॉन्ग और शॉर्ट रेंज मिसाइल शामिल हैं। हम पर ड्रोन और यूएवी से हमला किया गया। पाकिस्तानी हमले के दौरान हमारे सभी सिस्टम एकसाथ सक्रिय हुए। मॉडर्न डेज वार फाइटिंग के लिहाज से ये अहम था। पुराने माने जा रहे एयर डिफेंस सिस्टम ने भी सही तरह से काम किया।”

अब दुश्मनो की खैर नहीं, भारत ने हार्ड-किल काउंटर-स्वॉर्म ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ का सफल परीक्षण किया

नई दिल्ली भारत ने ड्रोन हमलों के खिलाफ अपनी क्षमताओं को और मजबूत करते हुए अत्याधुनिक, कम लागत वाले हार्ड-किल काउंटर-स्वॉर्म ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण बुधवार को ओडिशा के गोपालपुर स्थित सीवर्ड फायरिंग रेंज में किया गया। यह सिस्टम स्वदेशी रूप से सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) द्वारा विकसित किया गया है और इसे भारत की रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, खासकर यह ड्रोन स्वॉर्म (झुंड) जैसे खतरों को निष्क्रिय करने में काफी कारगर है। परीक्षण के दौरान सिस्टम के माइक्रो रॉकेट्स ने सभी प्रदर्शन मानकों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया। 13 मई को तीन अलग-अलग परीक्षण किए गए, जिनमें दो व्यक्तिगत रॉकेट दागे गए और एक साल्वो मोड में, जहां दो रॉकेट केवल दो सेकंड के अंतर में दागे गए। सभी रॉकेट्स ने तय लॉन्च मापदंडों को पूरा किया। ‘भार्गवास्त्र’ 2.5 किमी तक की दूरी पर छोटे और तेज गति से उड़ने वाले ड्रोन को पहचानकर उन्हें नष्ट कर सकता है। इसका पहला रक्षा स्तर बिना दिशा-निर्देशन वाले माइक्रो रॉकेट्स पर आधारित है, जो 20 मीटर के घातक दायरे में कई ड्रोन को खत्म कर सकते हैं। दूसरा स्तर गाइडेड माइक्रो मिसाइल पर आधारित है, जो सटीकता के साथ लक्ष्यों पर वार करती है। यह प्रणाली ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों (5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई) में भी प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम है। इसका डिजाइन मॉड्यूलर है, जिसमें सॉफ्ट-किल तकनीकों जैसे जैमिंग और स्पूफिंग को भी शामिल किया जा सकता है। यह भारत की मौजूदा नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्रणाली से भी पूरी तरह लैस है। इसमें उन्नत सी4आई (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन्स, कंप्यूटर एंड इंटेलिजेंस) तकनीकें शामिल हैं। रडार 6 से 10 किमी तक की दूरी पर सूक्ष्म हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम हैं। एसडीएएल ने इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक बताया है, जिसमें रॉकेट और माइक्रो-मिसाइल दोनों का विकास देश में ही किया गया है। कंपनी का कहना है कि दुनियाभर में जहां कई देश ऐसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं, वहीं ‘भार्गवास्त्र’ जैसी लागत-कुशल और मल्टी-लेयर्ड प्रणाली अभी तक कहीं भी तैनात नहीं की गई है। यह परीक्षण न केवल “मेक इन इंडिया” पहल के तहत एक और मील का पत्थर है, बल्कि देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस और न्यूक्लियर ब्लैकमेल के दृढ़ विरोध पर हुई सहमति: एस जयशंकर

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री बियाटे मींल-रेसिंगर से टेलीफोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच आतंकवाद के मुद्दे को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री से बातचीत की जानकारी दी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री के साथ आज हुई बातचीत की सराहना करता हूं। उनकी नियुक्ति पर बधाई दी। आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस और न्यूक्लियर ब्लैकमेल के दृढ़ विरोध पर सहमति हुई। हमारे बेहतरीन द्विपक्षीय संबंधों और यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा हुई।” वहीं, ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री ने इस बातचीत को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ फोन पर अच्छी बातचीत हुई। ऑस्ट्रिया और भारत अपने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की ऑस्ट्रिया की निंदा दोहराई और तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में पाकिस्तान के साथ सीजफायर का स्वागत किया।” उन्होंने आगे लिखा, ”हमने यूक्रेन में शांति के लिए सामूहिक प्रयासों पर भी चर्चा की और मैंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि रूस हिंसा बंद करे और सीजफायर पर सहमत हो।” इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि भारत कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा। भारत की तीनों सेनाएं, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, भारत के अर्धसैनिक बल लगातार अलर्ट पर हैं। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।

रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच खींचतान के लिए दोनों मंत्रालयों ने नए सिरे से एक सहमति पत्र पर किये हस्ताक्षर

नई दिल्ली जमीन समेत अन्य अनेक मामलों में रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच खींचतान और उसके कारण परियोजनाओं में होने वाली देरी को समाप्त करने के लिए दोनों मंत्रालयों ने नए सिरे से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहमति पत्र से पीएम गति शक्ति के तहत आने वाली बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में आ रहीं अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी। दोनों मंत्रालयों ने पिछले साल नवंबर में भी नेशनल हाईवे कॉरिडोर में आने वाले रोड ओवर और रोड अंडर ब्रिजों के लिए इसी तरह के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। मिलकर समाधान निकालेंगे मंत्रालय उसी के अनुरूप अब जमीन समेत अन्य मामलों को लेकर भी अनुबंध किया गया है। नए समझौते में एक-दूसरे की जमीन लेने की प्रक्रिया को और सरल और समयबद्ध किया गया है। इसके साथ ही दोनों मंत्रालय समन्वय के लिए प्रोजेक्ट स्तर पर समितियों का भी गठन करेंगे और विवाद वाली स्थितियों में मिलकर समाधान तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। सहमति पत्र के अनुसार अगर हाईवे निर्माण के लिए रेलवे की जमीन का कोई हिस्सा सड़क परिवहन मंत्रालय अथवा एनएचएआई को चाहिए तो उसे उसके ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा और रेलवे 90 दिनों के भीतर वह जमीन सौंप देगा। यही प्रक्रिया रेलवे की जरूरतों के लिए भी लागू होगी। साझा पोर्टल किया जाएगा तैयार चूंकि सड़क परिवहन मंत्रालय के पास अभी इस तरह का कोई पोर्टल नहीं है इसलिए रेलवे को ऑफलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के 15 दिनों के भीतर दोनों मंत्रालयों की एक संयुक्त टीम जमीन की पहचान करेंगी। जमीन और आरओबी तथा आरयूबी के मामलों के समाधान के लिए दोनों मंत्रालयों ने हर दो महीने में समीक्षा बैठक करने का भी फैसला किया है। इसके अतिरिक्त दोनों मंत्रालय एक साझा पोर्टल भी विकसित करेंगे जिसमें इन मामलों को दर्ज किया जा सकेगा।  

भारत में अब बंद होगी पाक के ‘भाईजान’ की दुकान, नए संकट से घिरे तुर्की और अजरबैजान, यात्रा का पूरी तरह से बहिष्कार

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन और तुर्की ने किस तरह पाकिस्तान का साथ दिया, इसे पूरी दुनिया ने देख लिया है। तुर्की और चीन निर्मित ड्रोनों का भरपूर इस्तेमाल पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए किया लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उन सभी ड्रोनों और मिसाइलों की हवा निकाल दी। अभी भी पाकिस्तान द्वारा दागी गईं चीनी और तुर्की के मिसाइलों और ड्रोनों के अवशेष भारत में मौजूद हैं। हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो गया है लेकिन चीन और तुर्की के अलावा एक और देश अजरबैजान का चेहरा बेनकाब हो गया है, जिसने भाईजान बनकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। बड़ी बात ये है कि इन देशों की अर्थव्यवस्था में भारत का बड़ा योगदान है। चीन जहां भारत में अपने सस्ते माल बेचकर बड़ी कमाई करता है, वहीं तुर्की और अजरबैजान भारतीय पर्यटकों से गाढ़ी कमाई करता है। यानी ये देश कमाई भारत से करते हैं लेकिन उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर रहे हैं। ऐसे में भारतीयों ने अब इनका विरोध करना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी तुर्की और अजरबैजान के बहिष्कार का आह्वान किया जा रहा है। व्यापारियों के संगठन, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी भारतीय व्यापारियों और नागरिकों से मौजूदा शत्रुता के बीच पाकिस्तान का खुला समर्थन करने के जवाब में तुर्की और अजरबैजान की यात्रा का पूरी तरह से बहिष्कार करने का आह्वान किया है। चीनी उत्पादों का बहिष्कार पहले से ही जारी बता दें कि CAIT लंबे समय से चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहा है, जिसका काफी प्रभाव पड़ा है, और अब इसका इरादा इस आंदोलन को तुर्की और अजरबैजान तक बढ़ाने का है। संगठन इस अभियान को तेज करने के लिए ट्रैवल और टूर ऑपरेटरों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ सहयोग करेगा। CAIT के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बुधवार को यह अपील की और इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान के भाईजान तुर्की और अजरबैजान की यात्रा का बहिष्कार करने से इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं, खासकर उनके पर्यटन क्षेत्र पर काफी असर पड़ सकता है। 2024 में 300000 पर्यटक अकेले भारत से 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए खंडेलवाल ने बताया कि तुर्की में करीब 62.2 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से करीब 300,000 पर्यटक अकेले भारत से आए। यह 2023 की तुलना में भारतीय पर्यटकों में 20.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। व्यापारिक निकाय ने कहा कि तुर्की का कुल पर्यटन राजस्व 61.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें प्रत्येक भारतीय पर्यटक औसतन 972 अमेरिकी डॉलर खर्च करता है, जो कुल अनुमानित भारतीय व्यय 291.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। तुर्की को 291.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उन्होंने कहा कि अगर भारतीय पर्यटक तुर्की का बहिष्कार करते हैं, तो देश को लगभग 291.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, भारतीय शादियों, कॉर्पोरेट कार्यक्रमों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रद्द होने से अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक नुकसान और भी अधिक होगा। तुर्की ने भारत के खिलाफ अपना रंग तब दिखाया है, जब दो साल पहले ही वहां विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत ने दिल खोलकर उसकी मदद की थी। तुर्की की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 12 फीसदी है। अज़रबैजान के बारे में खंडेलवाल ने कहा कि 2024 में देश में लगभग 2.6 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से लगभग 250,000 भारतीय थे। एक भारतीय  पर्यटक द्वारा औसत खर्च 2,170 AZN था, जो लगभग 1,276 अमेरिकी डॉलर है, जिससे कुल भारतीय योगदान लगभग 308.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। उन्होंने कहा कि इसलिए भारतीय पर्यटकों द्वारा बहिष्कार से इस परिमाण का सीधा नुकसान हो सकता है। छुट्टियों, शादियों और मनोरंजन के लिए जाते हैं अज़रबैजान उन्होंने बताया कि चूंकि भारतीय यात्री मुख्य रूप से छुट्टियों, शादियों, मनोरंजन और साहसिक गतिविधियों के लिए अज़रबैजान जाते हैं, इसलिए बड़े पैमाने पर गिरावट इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय आर्थिक मंदी का कारण बन सकती है। खंडेलवाल ने कहा कि यह आर्थिक दबाव तुर्की और अज़रबैजान दोनों को भारत के प्रति अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप सांस्कृतिक आदान-प्रदान में कमी आएगी और दोनों देशों में स्थानीय व्यवसायों जैसे होटल, रेस्तरां, टूर ऑपरेटर और अन्य पर्यटन-संबंधी सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अज़रबैजान की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10 फीसदी है।  

देशभर में तुर्किये बहिष्कार किया जा रहा, JNU ने स्थगित किया तुर्किये के विश्वविद्यालय के साथ समझौता

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद, तुर्किये ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए उसे रक्षा उपकरण मुहैया कराए थे। ऐसे में देशभर में तुर्किये बहिष्कार किया जा रहा है। इसी कड़ी में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने भी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। दरअसल, केंद्रीय विश्वविद्यालय ने तुर्किये के एक विश्वविद्यालय के साथ तीन साल की अवधि के लिए किए  गए समझौता ज्ञापन को स्थगित कर दिया है। जेएनयू की ओर से ऐसा करने की पीछे की वजह सुरक्षा कारणों को बताया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में लिखा है, “राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से जेएनयू और इनोनू विश्वविद्यालय, तुर्किये के बीच समझौता ज्ञापन को अगली सूचना तक निलंबित कर दिया गया है।” तुर्किये के मालट्या में स्थित इनोनू विश्वविद्यालय ने क्रॉस-कल्चरल रिसर्च और छात्र सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत जेएनयू के साथ अकादमिक साझेदारी की थी। तीन साल के लिए किया गया था समझौता एमओयू पर 3 फरवरी को तीन साल की अवधि के लिए हस्ताक्षर किए गए थे। जेएनयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने तुर्किये के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन को निलंबित कर दिया है। समझौते के तहत संकाय विनिमय और छात्र विनिमय कार्यक्रमों के अलावा कई योजनाएं और अन्य बातें थीं।” भारत-पाक संघर्ष में पाकिस्तान को मुहैया कराए थे रक्षा उपरकरण समझौता ज्ञापन रद्द करने का निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में लिया गया है। दोनों पड़ोसी देशों ने चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए 10 मई को एक समझौता किया था। भारत के तुर्किये के साथ व्यापारिक संबंध तनावपूर्ण होने की आशंका है, क्योंकि अंकारा ने इस्लामाबाद का समर्थन किया है और पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर भारत के हालिया हमलों की निंदा की है। देशभर में उठ रही बहिष्कार की मांग पाकिस्तान को उनके समर्थन के बाद, पूरे देश में तुर्किये के सामान और पर्यटन का बहिष्कार करने की मांग उठ रही है, साथ ही ईजमाईट्रिप और इक्सिगो जैसे ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म ने इन देशों की यात्रा के खिलाफ सलाह जारी की है।  

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल में अगले पांच दिनों तक भारी बारिश, आंधी तूफान व बिजली कड़कने की चेतावनी जारी

नई दिल्ली उत्तर भारत में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है तो दक्षिण के राज्यों में झमाझम बारिश हो रही। मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल में अगले पांच दिनों तक भारी बारिश, आंधी तूफान व बिजली कड़कने की चेतावनी जारी की हे। इसके अलावा, तमिलनाडु में भी तीन से चार दिनों तक ऐसा ही मौसम रहने वाला है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बरसात होने जा रही है। सब हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले तीन दिनों तक ऐसा ही मौसम रहेगा। हालांकि, उत्तर भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश में 15-18 मई और पश्चिमी राजस्थान में 15-17 मई के दौरान हीटवेव चलने वाली है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 15-18 मई, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 14 और 15 मई को भारी बारिश होगी। इसके अलावा, असम, मेघालय में 15 और 16 और अरुणाचल प्रदेश में 14 मई को बहुत भारी बरसात का अलर्ट है। इसके अलावा, मेघालय में 14 मई को भारी बरसात होगी। पश्चिमी भारत की बात करें तो कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा में 14-18 मई, गुजरात में 14 और 15 मई को बारिश होने जा रही है। मध्य महाराष्ट्र में 14 व 15 मई को 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। दक्षिण भारत के लिए मौसम विभाग ने कहा है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में 14-16 मई, तटीय कर्नाटक में 14 मई, उत्तरी इंटीरियर कर्नाटक में 14-18 मई, साउथ इंटीरियर कर्नाटक में 14, 15 मई और 18 मई, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम में 15 मई, केरल, माहे में 14 मई और 18-20 मई के बीच भारी बारिश होने जा रही है। तेलंगाना में 14 मई को ओले पड़ने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर पश्चिम भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18-20 मई, राजस्थान में 14 मई, पंजाब, हरियाणा में 14 और 16 मई, उत्तराखंड में 15 व 16 मई, पश्चिमी राजस्थान में 17 और 18 मई को हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।  

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