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भारत के खजाने में हुई विदेशी दौलत की बरसात, लगातार 8वें हफ्ते बढ़ा देश का विदेशी मुद्रा भंडार, पाकिस्तान का तो ‘पों’ हो गया

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुक्रवार (2 मई) को जारी लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार 8वें हफ्ते बढ़ोतरी हुई है. दूसरी ओर पड़ोसी देश पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी की खबर है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 25 अप्रैल, 2025 को खत्म हुए हफ्ते में 1.98 अरब डॉलर बढ़कर 688.13 अरब डॉलर पर पहुंच गया. ये लगातार आठवां हफ्ता है, जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे पहले के हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 8.31 अरब डॉलर बढ़कर 686.14 अरब डॉलर हो गया था. सितंबर, 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 704.89 अरब डॉलर के ऑल टाईम हाई पर पहुंच गया था. 2.17 अरब डॉलर बढ़ी एफसीए रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 2.17 अरब डॉलर बढ़कर 580.66 अरब डॉलर हो गईं. डॉलर में बताई जाने वाली एफसीए में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी फॉरेन करेंसी के मूल्य में बढ़ोतरी या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है. गोल्ड रिजर्व में गिरावट आंकड़ों के मुताबिक, रिपोर्टिंग वीक में गोल्ड रिजर्व 20.7 करोड़ डॉलर घटकर 84.36 अरब डॉलर रह गया. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) में देश का स्पेशल ड्राइंग राइट (SDR) 2.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.59 अरब डॉलर हो गया जबकि आईएमएफ में देश का आरक्षित विदेशी मुद्रा भंडार 20 लाख डॉलर बढ़कर 4.51 अरब डॉलर हो गया. पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को इन दिनों विदेशी मुद्रा भंडार की जबरदस्त किल्लत झेलनी पड़ रही है. बीते 25 अप्रैल 2025 को खत्म हुए हफ्ते में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटॉकर 15.251 अरब डॉलर का रह गया है.

भारत सरकार का पाकिस्तान से व्यापारिक नाता खत्म, आयात-निर्यात की सभी वस्तुओं पर लगाया बैन

नई दिल्ली पाकिस्तान में उत्पन्न या वहां से निर्यातित सभी वस्तुओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात या पारगमन, चाहे मुक्त रूप से आयात योग्य हो या अन्यथा अनुमत हो, तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाएगा। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। जारी किये गए आदेश में कहा गया है कि, यह आदेश तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के हित में लगाया गया है। इस प्रतिबंध के किसी भी अपवाद के लिए भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता होगी। पाकिस्तान से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध, आदेश तत्काल प्रभाव से लागू भारत सरकार ने एक सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान से आने वाले सभी उत्पादों के आयात और पारगमन (Transit) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक न केवल प्रत्यक्ष आयात पर लागू होगी, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य देश के माध्यम से आने वाले पाकिस्तानी सामान पर भी प्रभावी होगी। पहले डायरेक्‍ट ट्रेड बंद किया गया था, लेकिन अब इनडायरेक्‍ट ट्रेड भी बंद कर दिया गया है. यह पाकिस्‍तान पर गहरा चोट है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय उन उत्पादों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्हें भारत से आयात-निर्यात नहीं किया जाएगा. वाणिज्य मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान से सभी वस्तुओं के डायरेक्‍ट या इनडायरेक्‍ट आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023 में इस संबंध में एक प्रावधान जोड़ा गया है. जिसमें कहा गया है कि अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से पाकिस्तान से आने वाले या निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों के डायरेक्‍ट या इनडायरेक्‍ट आयात पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है. यह 2 मई की अधिसूचना में जानकारी दी गई है. अगले आदेश तक एक्‍सपोर्ट-इम्‍पोर्ट बंद FTP के प्रावधान में कहा गया है कि पाकिस्तान से आने वाले या निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात या पारगमन, चाहे वे स्वतंत्र रूप से आयात किए जा सकें या अनुमति प्राप्त हों, तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक प्रतिबंधित रहेंगे. भारत सरकार का ये आदेश तब आया है, जब आतंक को बढ़ाव देने वाला देश पाकिस्‍तान ने पर्दे के पीछे रहते हुए पहलगाम में आतंकी हमला करवा था और इससे 26 लोगों की जान चली गई. भारत सरकार की चाहिए होगी मंजूरी विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अधिसूचना में कहा कि यह प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के हित में लगाया गया है. इस प्रतिबंध के किसी भी अपवाद के लिए भारत सरकार की मंजूरी की आवश्‍यकता होगी. इसका मतलब है कि अगर कोई भी चीज पाकिस्‍तान व्‍यापार के उद्देश्‍य से भेजी आती है या फिर वहां से आती है तो भारत सरकार की मंजूरी की आवश्‍यकता होगी. सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है और इसमें वे वस्तुएं भी शामिल हैं जिनके आयात की पहले अनुमति थी।इस निर्णय से भारत-पाक व्यापारिक संबंधों पर बड़ा असर पड़ सकता है और पहले से ही सीमित व्यापारिक संपर्क अब पूरी तरह ठप हो जाएंगे। और कंगाल हो जाएगा पाकिस्तान… पाकिस्तान के साथ आयात-निर्यात पर बैन लगने से पाकिस्तान और कंगाल होन जाएगा। पहले से ही दोनों देशों के बीच सीमित व्यापारिक रिश्ते पूरी तरह ठप हो सकते हैं। पाकिस्तान से भारत को होने वाले आयात में मुख्य रूप से कृषि उत्पाद, मसाले, और कुछ खाद्य पदार्थ शामिल थे, जो अब पूरी तरह बंद हो जाएंगे। जानकारों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा, खासकर खाद्य पदार्थों की कमी और बढ़ती महंगाई के रूप में। भारत ने पहले ही 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्तों को सीमित कर दिया था, और अब यह प्रतिबंध उस दिशा में एक और कड़ा कदम है।   पहलगाम हमले ने बढ़ाया तनाव पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें दो विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, हालांकि बाद में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और इसके जवाब में कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल समझौता निलंबित करना, अटारी-वाघा सीमा बंद करना, और पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित करना शामिल है।

गोवा : लइराई देवी मंदिर में मची भगदड़, 7 की मौत, 40 से ज्यादा घायल, CM प्रमोद सावंत ने लिया हालात का जायजा

पणजी  गोवा के प्रसिद्ध लइराई देवी मंदिर में शनिवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब पारंपरिक ‘शिरगांव जात्रा’ के दौरान भीड़ बेकाबू हो गई। भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। इस घटना में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। नॉर्थ गोवा के पुलिस अधीक्षक अक्षत कौशल ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि भगदड़ के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। बताया जा रहा है कि हर साल की तरह इस बार भी भारी संख्या में श्रद्धालु ‘शिरगांव जात्रा’ में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति बन गई।घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत खुद मौके पर पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। बता दें कि गोवा के श्रीगांव को लेकर कई कहनियां प्रचलित हैं। लइराई देवी का मंदिर होने की वजह से यहां पर शराब और अंडा तक प्रतिबंधित है। कोई किसी जानवर की हत्या नहीं कर सकता। इस गांव में घोड़े भी प्रवेश नहीं कर सकते। बड़ी संख्या में लोग लइराई देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। लइराई देवी की पूजा मुख्य रूप से गोवा में की जाती है। यहां हर साल आयोजित होने वाले जात्रा को को शिरगांव जात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह जात्रा चैत्र मास में कई दिनों तक चलती है। इसमें लोग दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। भक्त एक पवित्र झील में स्नान करते हैं। इससे पहले लोग व्रत और पूजा करते हैं। मंदिर से देवी की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है। शिरगांव और लइराई देवी की मान्यता – लइराई देवी का मंदिर गोवा के श्रीगांव में स्थित है, जो अपनी पवित्रता और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां शराब, अंडा और किसी भी जानवर की हत्या पर सख्त प्रतिबंध है। यहां तक कि घोड़ों का प्रवेश भी निषिद्ध है। ‘शिरगांव जात्रा’ चैत्र मास में आयोजित होती है और यह कई दिनों तक चलती है। इस आयोजन में श्रद्धालु दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं और एक पवित्र झील में स्नान करते हैं। इस दौरान व्रत, पूजा और देवी की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

इरादा एक जैसा तो गैंगरेप में सभी बराबर के दोषी… सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैंगरेप में किसी एक के भी सेक्सुअल एक्ट (penetrative act) पर सभी को दोषी माना जाएगा, अगर उन्होंने एक मंशा से अपराध को अंजाम दिया। कोर्ट ने गैंगरेप के दोषियों की सजा को बरकरार रखा। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना जरूरी नहीं कि हर आरोपी ने पेनेट्रेटिव एक्ट किया। भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(g) के तहत अगर गैंगरेप का मामला है, तो एक के भी कृत्य पर सभी को दोषी ठहराया जा सकता है, अगर उन्होंने कॉमन इन्टेंशन के तहत काम किया हो। यह साझा मंशा इस धारा में अंतर्निहित है। सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका इस मामले में अभियोजन पक्ष ने यह आरोप लगाया था कि उन्होंने पीड़िता का अपहरण कर उसे अवैध रूप से बंधक बनाया और उसका रेप किया। याची ने दलील दी कि उन्होंने खुद कोई सेक्सुअल एक्ट नहीं किया, इसलिए उन्हें गैंगरेप का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की दलील को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विश्वनाथन के लिखित फैसले में कहा गया कि घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पीड़िता का अपहरण, उसे गलत तरीके से कैद करना और उसका बयान कि उसके साथ यौन हमला किया गया, ये सभी फैक्ट धारा 376(2)(g) के तत्वों को साफ सिद्ध करते हैं। क्या था मामला? घटना जून 2004 की है, जब पीड़िता एक विवाह समारोह से लौट रही थी। तभी उसका अपहरण कर लिया गया और उसे कई स्थानों पर अवैध रूप से रखा गया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि जलंधर कोल और अपीलकर्ता राजू नाम के दो लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया। सरकारी वकील ने 13 गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके पिता और जांच अधिकारी शामिल थे। ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को गैंगरेप, अपहरण और अवैध बंदीकरण के आरोप में दोषी ठहराया। राजू को आजीवन कारावास और जलंधर कोल को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद राजू सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जलंधर कोल ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में केवल जलंधर कोल द्वारा बलात्कार का उल्लेख होने के बावजूद, पीड़िता ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि राजू ने भी बलात्कार किया था। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही यह मान लिया जाए कि राजू ने बलात्कार नहीं किया, तब भी वह सामूहिक बलात्कार के लिए दोषी होगा यदि उसने साझा मंशा के तहत अन्य आरोपी के साथ कार्य किया हो। कोर्ट ने प्रमोद महतो बनाम बिहार राज्य (1989) के मामले का हवाला देते हुए कहा कि “ऐसे मामलों में यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक आरोपी द्वारा बलात्कार के पूर्ण कृत्य का स्पष्ट प्रमाण हो। यदि उन्होंने एकसाथ कार्य किया हो और पीड़िता के साथ दुष्कर्म की मंशा में सहभागी हों, तो सभी दोषी होंगे।” SC/ST एक्ट से राहत, लेकिन IPC धाराएं बरकरार हालांकि, कोर्ट ने राजू पर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत दोषसिद्धि को रद्द कर दिया, क्योंकि यह साबित नहीं हो सका कि अपराध पीड़िता की जाति के आधार पर किया गया था। कोर्ट ने पाटन जमाल वली बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के मामले का हवाला देते हुए कहा कि जाति और अपराध के बीच स्पष्ट कारण संबंध होना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के प्रारंभिक बयान और बाद के बयान में कुछ अंतर होने के बावजूद उसकी समग्र गवाही विश्वसनीय है। पीठ ने कहा, “साक्ष्यों में छोटे-मोटे विरोधाभास उसकी विश्वसनीयता को कम नहीं करते। पीड़िता की गवाही में भरोसा किया जा सकता है, भले ही उसमें कोई प्रत्यक्ष समर्थन न हो।” “टू-फिंगर टेस्ट” को फिर बताया अमानवीय कोर्ट ने इस मामले में “टू-फिंगर टेस्ट” के उपयोग पर भी चिंता जताई और इसे एक बार फिर “अमानवीय और अपमानजनक” करार दिया। कोर्ट ने कहा, “किसी महिला का यौन इतिहास पूर्णतः अप्रासंगिक है… यह पितृसत्तात्मक और लिंगभेदी सोच है कि किसी यौन रूप से सक्रिय महिला की गवाही पर संदेह किया जाए।” हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने IPC की सभी धाराओं में दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन सह-आरोपी जलंधर कोल को 10 साल की सजा मिलने के मद्देनजर, राजू की आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 10 साल का कठोर कारावास कर दिया। 2004 का है मामला यह मामला मध्यप्रदेश के कटनी का है। एक लड़की 26 अप्रैल 2004 को एक शादी में गई थी, वहीं से उसे अगवा कर लिया गया था। इस मामले में दो को गिरफ्तार किया गया। सेशन कोर्ट ने दोनों के खिलाफ 25 मई 2005 को गैंग रेप और अन्य धाराओं में आरोप तय किए और बाद में दोनों को दोषी करार दिया गया। हाई कोर्ट ने दोनों की सजा कन्फर्म की और फिर मालमा सुप्रीम कोर्ट आया।

बीजेपी के जाति जनगणना कराने का ऐलान, जिसका लक्ष्य सामाजिक समीकरणों को साधना और चुनावी रणनीति को मजबूत करना

नई दिल्ली  बीजेपी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने की घोषणा की है। यह फैसला सिर्फ आंकड़ें जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक इंजीनियरिंग, चुनावी रणनीति और वैचारिक संतुलन का भी समीकरण बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश की राजनीति में ‘मंडल-कमंडल’ की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में यह समझना चुनावी और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने यह कदम अचानक किन 5 प्रमुख वजहों से लिया है और कैसे यह उसके लिए एक ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक उनके कार्यकाल के दूसरे चुनाव तक बीजेपी ने ओबीसी (OBC),अति-पिछड़ी जातियों (EBC) और अनूसूचित जातियों (SC) को जोड़कर एक मजबूत सामाजिक समीकरण खड़ा किया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का यह वोट बैंक बिखर गया और इन वर्गों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की ओर झुक गया, जिससे बीजेपी के 400 पार वाला सपना चकनाचूर हो गया। बीजेपी और एनडीए को इसके चलते खासकर यूपी,राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में तगड़ा झटका लगा। ऐसे में जाति जनगणना वाला दांव इन जातियों की उन उपेक्षित भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास है। ओबीसी को सीधा संदेश देने का प्रयास बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने वाले तथ्य को अबतक विपक्ष के पिछड़े वाले दांव को कुंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही है। जब बिहार में जातिगत सर्वे करवाया गया था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी जेडीयू एनडीए में नहीं थे। अलबत्ता तब भी बीजेपी ने आधिकारिक रूप से उस जातिगत सर्वे का समर्थन किया था। अब मोदी सरकार देशभर में जाति जनगणना का दांव चलकर प्रधानमंत्री और बिहार के सीएम नीतीश के पिछड़ा पृष्टभूमि को और मजबूती से भुनाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के अपने फैसले का हमेशा जिक्र करती रही है। अब इस फैसले से उसका काम और आसान हो सकता है कि असल में पीएम मोदी खुद पिछड़े समाज से तो हैं ही, वह ओबीसी समाज के मसीहा के तौर पर भी काम कर रहे हैं। राज्यों की राजनीति पर भारी पड़ने की कोशिश बीजेपी को मालूम पड़ चुका था कि अगर केंद्र जाति जनगणना को लेकर सुस्त रहा, तो विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसे अपने-अपने ढंग से लागू करके सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश सकती हैं। तेलंगाना पहले ही इस दिशा में सक्रिय हो चुका है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भी अपने दांव लगाने की कोशिशों में जुटी है और झारखंड में भी ‘सरना कोड’ की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से इसे राष्ट्रीय स्तर पर करवाने का एलान करके, बीजेपी सरकार ने विपक्ष की राजनीति पर बढ़त बनाने वाली चाल चल दी है। नया प्रयोग करने की कोशिश 2014 में जब से मोदी सरकार आई है, उसकी अनेकों कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। ईडब्ल्यूएस कोटा और विश्वकर्मा योजना इसका सबसे बेहतरी उदाहरण है। इसी तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिनके माध्यम से इन वर्गों के उत्थान का भी काम हो रहा है, वहीं इसके माध्यम से सरकार इन वर्गों के बीच पहुंच भी पहुंची है। लेकिन, जाति जनगणना के माध्यम से पार्टी जातियों में बंटे भारतीय समाज को सीधे तौर पर साधने की कोशिश कर रही है, जिसे अब सहेज कर रखना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी थी। क्योंकि, उज्जवला योजना, जनधन योजना जैसी अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से भाजपा सरकार ने खुद को समाज के विशेष वर्गों के नजदीक पहुंचाया है, लेकिन अब उसमें भी जातियों के आधार पर दिक्कतें बढ़ने लगी थीं, जिसके लिए नया कार्ड चलना जरूरी लग रहा था। हिंदुत्व की सियासत पर जाति की चाशनी बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण अब पार्टी के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब पार्टी हिंदुत्व पर भी सामाजिक न्याय और पिछड़ों की चुनावी चाशनी लगाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद एक ऐसे व्यापक सामाजिक समीकरण को तैयार करना है, जिसमें धार्मिक और जातिगत दोनों स्तरों पर समर्थन हासिल हो सके। हालांकि, बीजेपी की यह सोच समझी रणनीति चुनावी फ्रंट पर कितना काम करती है, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है।

बलूचिस्तान में न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय : हिमंत बिस्वा सरमा

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान में वर्षों से हो रही न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय बनी हुई हैं। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं, जिन्हें आमतौर पर ‘मारो और फेंको नीति’ के रूप में जाना जाता है, पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है। वर्षों से, बलूचों ने जबरन गायब किए जाने के क्रूर अभियान को झेला है, जहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियां अपहरण कर लेती हैं, उन्हें यातना दी जाती है और बाद में वे दूरदराज के खड्डों में मृत पाए जाते हैं या उन्हें सुनसान सड़कों पर फेंक दिया जाता है।” मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन करते हैं और उन्होंने याद दिलाया कि भारत उनके लिए खड़ा रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की आवाज ने दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान के संकट की ओर खींचा, जिसे पाकिस्तान ने लंबे समय तक दबाए रखा था। सीएम सरमा ने पोस्ट में उल्लेख किया, “यह अमानवीय प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है, जहां परिवारों को उम्मीद की जगह अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं। इसी गंभीर पृष्ठभूमि में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, वैश्विक समुदाय के लंबे समय से धारण मौन को तोड़ा। बलूचिस्तान से बहने वाली ‘लाल नदियों’ का जिक्र करते हुए, उन्होंने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज़ दी, यह इस बात की पुष्टि थी कि भारत उत्पीड़ित और चुप कराए गए लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वजन भी था, जिससे एक ऐसे संकट की तरफ ध्यान गया जिससे पाकिस्तान ने लंबे समय तक छुपाने की कोशिश की।” सीएम सरमा ने आगे कहा, “वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि 20,000 से अधिक बलूच व्यक्ति गायब हो गए हैं, सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं। यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है – यह एक मानवीय आपातकाल है।”

देश पीएम के हाथों में सुरक्षित, अगर पीएम मोदी के हाथों में देश सुरक्षित नहीं होता तो वे पीएम नहीं होते: फारूक अब्दुल्ला

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में पर्यटकों को उनका नाम और धर्म पूछकर निशाना बनाया गया। इस खूनी खेल ने भारत के लोगों के मन में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा भर दिया है। इस सबके बीच हमेशा पाकिस्तान से बातचीत की पैरवी करने वाले जम्मू-कश्मीर की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के भी सुर अब बदल गए हैं। पाकिस्तान के समर्थन में बात करने वाले फारूक अब्दुल्ला को भी अब लगने लगा है कि पहलगाम आतंकी हमले के हैंडलर पाकिस्तान में मौजूद हैं। दरअसल, पाकिस्तान को लेकर जब-जब भी भारत ने एक्शन लेने की बात कही, तब-तब फारूक अब्दुल्ला अपने बयानों के जरिए पाकिस्तान का समर्थन करते नजर आते थे। लेकिन, पहलगाम हमले के बाद से उनका मन बदला सा नजर आ रहा है और वह पाकिस्तान के खिलाफ जारी केंद्र सरकार के एक्शन का समर्थन करते नजर आ रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला ने तो पहलगाम हमले को लेकर यहां तक कहा कि यह हमला मानवता को शर्मसार करने वाला है और इस आतंकी हमले के हैंडलर पाकिस्तान में छुपे बैठे हैं। अब्दुल्ला ने कहा कि पहलगाम की घटना बेहद दर्दनाक थी। यह किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए था। इस हमले में इंसानियत का कत्ल हुआ है। ऐसे में मेरी मांग है कि आतंकियों को जल्द पकड़कर सजा दी जाए, ताकि इस तरह की घटना को अंजाम देने के बारे में कोई सोचे भी नहीं। उन्होंने साफ कह दिया कि जिन्होंने मुंबई, उरी, पुलवामा, पठानकोट, पुंछ में अटैक किया, अब पहलगाम में आतंकी हमला उनके द्वारा ही किया गया। ये तो सभी लोग जानते हैं कि इन हमलों का हैंडलर तो पाकिस्तान में बैठा है। फारूक अब्दुल्ला ने साफ कहा कि ये घटना बिना लोकल मदद के नहीं हो सकती है। जब तक इन आतंकियों का कोई साथ नहीं देगा, ऐसा हमला नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि मैंने कहा था मसूद अजहर को मत छोड़िए। इसने कईयों का मारा है। मेरे भाई को मारा है। पीओके के बारे में भी अब्दुल्ला ने कहा कि इसे वापस लेने का फैसला पीएम का होगा। उन्होंने दावा किया कि देश पीएम के हाथों में सुरक्षित है। अगर पीएम मोदी के हाथों में देश सुरक्षित नहीं होता तो वे पीएम नहीं होते। पीएम को देश के हर नागरिक की हिफाजत करनी है और वो ऐसा कर भी रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला ने सिंधु जल समझौता रोकने की हिमायत करते हुए कहा कि मैं तो पहले से कहता रहा हूं कि इसे री-नेगोशिएट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पानी हमारा है। हमारे यहां पहले से पानी की कमी है। हमारा ही पानी और हम ही इस्तेमाल नहीं करते हैं। जबकि, इस पर हम लोगों का पूरा हक है। ऐसे में अब ट्रीटी को री-नेगोशिएट करने का वक्त आ गया है। सरकार द्वारा जाति जनगणना की घोषणा का भी फारूक अब्दुल्ला ने समर्थन किया और कहा कि यह बड़ी अच्छी बात है। देश में दलित, मुसलमान, सिख आदि जातियां कितनी हैं, सबको पता होनी चाहिए। मुसलमानों में भी जाति जनगणना होनी चाहिए। हर एक जाति में यह जनगणना होनी चाहिए। जिससे सबको पता लगेगा कि यह देश सबका है। यह दुनिया को पता लगेगा कि भारत कई रंगों का देश है और इस रंग में कितने लोग रहते हैं। इसकी मांग तो बहुत वक्त से है।

रामबन में अचानक हुए भूस्खलन के चलते एनएच-44 पर दोनों ओर से यातायात बाधित

ऊधमपुर रामबन जिले के सेरी चंबा क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही हुई है। अचानक हुए भूस्खलन के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर दोनों ओर से यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया। मूसलधार वर्षा के बाद हुए इस भूस्खलन से राजमार्ग पर भारी मलबा आ गया, जिससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। सैकड़ों की संख्या में वाहन हाईवे पर दोनों तरफ फंसे हैं। टीसीयू रामबन के अनुसार, शुक्रवार दोपहर को अचानक हुई तेज वर्षा के कारण सेरी चंबा में भारी भूस्खलन होने से काफी मलबा और कीचड़ हाईवे पर आ गया। जिस वजह से दोनों ओर का यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। हाईवे बंद होने के कुछ ही देर के बाद एनएचएआई के लिए काम करने वाली सीपीपीएल कंस्ट्रक्शन कंपनी की आधा दर्जन मशीनें मौके पर पहुंच कर मलबा हटाने में जुट गई। नहीं हुआ रास्ता साफ, हाईवे अभी भी बंद दोपहर बाद से ही मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। समाचार लिखे जाने तक रास्ता साफ नहीं हो पाया था और हाईवे पूरी तरह बंद था। पीसीआर रामबन के अनुसार अभी हाईवे खुलने में दो से तीन घंटों या इसके भी कुछ अधिक समय लग सकता है। वहीं यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे राजमार्ग पर यात्रा न करें और जब तक मार्ग पूरी तरह साफ न होने तक हाईवे पर सफर से बचने को कहा है। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वह सफर शुरू करने से पूर्व ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक से अपडेट या टीसीयू से संपर्क कर हाईवे की स्थिति की जानकारी प्राप्त जरूर करें।

भारतीय हमलो का पीओके में 1000 से अधिक मदरसों पर दिखा खौफ, किया बंद

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 1000 से अधिक मदरसे कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने शुक्रवार को यह घोषणा की। विश्वसनीय सूत्रों ने मीडिया को बताया कि भारत की तरफ से हमले के डर की वजह से पीओके में स्थित मदरसों को बंद कर दिया गया। भारत यह दावा करता रहा है कि इन संस्थानों का इस्तेमाल आतंकवादियों के छिपने के ठिकाने के रूप में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि भारत पाकिस्तान के साथ पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू नहीं करेगा, लेकिन नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ पीओके क्षेत्रों में कुछ हमले जरूर करेगा। 29 सितंबर 2016 को, भारतीय सेना के कमांडो की टीमों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों में छिपे बैठे आतंकवादियों को खत्म किया था। यह कार्रवाई 18 सितंबर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी में एक भारतीय सेना की चौकी पर हमला करने के दस दिन बाद हुई थी। हमले में 19 सैनिकों की मौत हो गई थी। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “सरकार के निर्देशानुसार 1000 से अधिक मदरसे बंद कर दिए गए हैं। उन्हें कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों के लिए छुट्टियों की घोषणा कर दी गई है।” इससे पहले पाकिस्तान ने बुधवार को गिलगित और स्कार्दू के लिए सभी घरेलू उड़ानें रद्द करने की घोषणा की। विदेशी उड़ानों की भी कड़ी निगरानी शुरू की गई। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) को सभी आने वाले विदेशी विमानों की जांच करने का निर्देश दिया गया। इस बीच पाकिस्तान ने भारत से लौटने वाले अपने नागरिकों के लिए वाघा सीमा को खुला रखने की घोषणा की। पहलगामा आतंकी हमले के बाद नई दिल्ली ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे। पाकिस्तान विदेश कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, “हालांकि भारत से पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी, लेकिन यदि भारतीय अधिकारी उन्हें अपनी ओर से सीमा पार करने की अनुमति देते हैं तो लाहौर में वाघा बॉर्डर हमारे नागरिकों के लिए खुला रहेगा।” बयान में कहा गया, “वाघा सीमा भविष्य में भी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए खुली रहेगी।” बता दें आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल – पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में लोगों (ज्यादातर पर्यटक) पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह ‘लश्कर-ए-तैयबा’ से जुड़े ‘टीआरएफ’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। नई दिल्ली ने इस्लामबाद के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं। इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने, अटारी इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद करने, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, शामिल हैं। भारत के इन फैसलों के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित करने और भारतीय उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने, भारतीय नागरिकों के वीजा रद्दे करने जैसे कदम उठाए।

याचिकाकर्ता का दावा है कि वे भारतीय हैं, सुप्रीम कोर्ट ने छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने पर रोक लगा दी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वे भारतीय हैं। उनके पास भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करने वाले कई दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड शामिल है। याचिकाकर्ता के वकील नंदकिशोर इस प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि यह बहुत ही हैरान करने वाली बात है। एक व्यक्ति मूल रूप से हिंदुस्तानी है, उसके पास खुद को हिंदुस्तानी साबित करने के लिए अनेकों दस्तावेज हैं। इसके बावजूद, उसे पाकिस्तान जाने के लिए कह दिया जाता है। नोटिस भेज दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से बताया कि हमारे परिवार में कुल छह सदस्य हैं। इनमें से दो बेटे बेंगलुरु में काम करते हैं। इसके अलावा, परिवार में माता, पिता, भाई और बहन हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि जब हमें पाकिस्तान के लिए नोटिस आया, तो हम हतप्रभ हो गए। यही नहीं, हमें गाड़ी में बैठाकर अटारी बॉर्डर तक ले जाया गया और कहा गया कि हम देश छोड़ दें, जबकि हम हिंदुस्तानी हैं। वकील और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सरकारी अधिकारियों को भारतीय नागरिकता की वैधता के बारे में दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा है कि जब तक सरकारी अधिकारी उचित निर्णय नहीं लेते, तब तक परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही याचिकाकर्ता को न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक सरकारी अधिकारी उचित निर्णय नहीं करते, तब तक परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। इसमें सिंधु जल समझौते को निलंबित करना, पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश देना और राजनयिक संबंधों में कटौती करना शामिल है।

मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय संघर्ष भड़क उठे थे, इसे देखते हुए फिर बढ़ा दी गई सुरक्षा, बड़े पैमाने पर तैनाती

इंफाल मणिपुर में जातीय संघर्ष की दूसरी बरसी से पहले एहतियात के तौर पर पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय संघर्ष भड़क उठे थे। पुलिस ने असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए इंफाल, चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिला मुख्यालयों में प्रमुख स्थानों पर तलाशी और वाहनों की जांच तेज कर दी है। इंफाल के खुमान लांपक और उसके आसपास भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जहां ‘मणिपुर पीपुल्स कन्वेंशन’ होने वाला है। अधिकारियों ने बताया कि कंगला गेट के सामने केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया, ‘राज्य में असामाजिक तत्वों की किसी भी अवांछित गतिविधि को रोकने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है, खासकर शनिवार को।’ मेइती समुदाय के संगठन ‘मणिपुर अखंडता समन्वय समिति’ (सीओसीओएमआई) ने जनता से तीन मई को सभी गतिविधियां स्थगित कर सम्मेलन में भाग लेने का आह्वान किया है। स्वयंसेवकों ने सार्वजनिक संबोधन प्रणालियों का उपयोग कर नागरिकों को पिछले दो वर्षों में हुई हिंसा की याद दिलाई तथा राज्य की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता के प्रति कथित खतरे को उजागर किया। कुकी छात्र संगठन (केएसओ) और ज़ोमी छात्र संघ (जेडएसएफ) ने भी तीन मई को सभी कुकी बहुल क्षेत्रों में बंद का आह्वान किया है। एक संयुक्त बयान में छात्र संगठनों ने कहा, ‘तीन मई को जातीय हिंसा शुरू होने के दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दिन सभी शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद रखा जाए।’ उन्होंने लोगों से शोक स्वरूप अपने घरों पर काले झंडे फहराने का भी आह्वान किया। मई 2023 से मेइती और आसपास के पहाड़ों पर रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। एक अलग घटनाक्रम में पुलिस अभियान में प्रतिबंधित संगठन ‘यूएनएलएफ’ (कोइरेंग गुट) के दो सक्रिय सदस्यों को इंफाल पश्चिम जिले के उत्तरी एओसी से गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान हुइड्रोम पिशाक (35) और हंगलेम थोइबा मेइती के रूप में की गई है। उनके पास से दो कारतूसों से भरी 9 एमएम की पिस्तौल बरामद की गई है।

अब भारत ने एक और डिजिटल स्ट्राइक करते हुए पाक पीएम शरीफ के यूट्यूब अकाउंट को सस्पेंड कर दिया

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। भारत पड़ोसी देश के खिलाफ लगातार कड़े ऐक्शन ले रहा है। अब भारत ने एक और डिजिटल स्ट्राइक करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के यूट्यूब अकाउंट को सस्पेंड कर दिया है। इससे पहले भी भारत ने पाकिस्तान के क्रिकेटर्स, मीडिया संस्थानों समेत कई के यूट्यूब और ट्विटर अकाउंट्स को बंद कर दिया था। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने गोलीबारी करते हुए 26 लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा है। हमले के पीछे पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के मुखौटा टीआरएफ का हाथ बताया गया था। आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। भारत ने पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार करते हुए अटारी बॉर्डर बंद करने के साथ-साथ पांच बड़े फैसले लिए थे। सिंधु जल संधि को भी रोक दिया गया। केंद्र सरकार की ओर से सेना को कड़ी कार्रवाई की खुली छूट दी गई है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ कभी भी अन्य सख्त ऐक्शन लिए जा सकते हैं। हमले के बाद से ही पाकिस्तान के यूट्यूब और सोशल मीडिया हैंडल्स लगातार भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। वे झूठी बातें सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं, जिसके चलते सरकार ने अकाउंट्स को बंद करने का फैसला लिया है। इससे पहले प्रतिबंधित किए गए यूट्यूब चैनलों में न्यूज आउटलेट डॉन, समा टीवी, एआरवाई न्यूज, बोल न्यूज, रफ्तार, जियो न्यूज और सुनो न्यूज के यूट्यूब चैनल शामिल थे। पत्रकार इरशाद भट्टी, अस्मा शिराजी, उमर चीमा और मुनीब फारूक के यूट्यूब चैनल भी प्रतिबंधित किए गए हैं। प्रतिबंधित किए गए अन्य हैंडल में द पाकिस्तान रेफरेंस, समा स्पोर्ट्स, उजैर क्रिकेट और रजी नामा शामिल हैं। यह कदम गृह मंत्रालय की सिफारिशों के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान के ये यूट्यूब चैनल भारत, उसकी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील सामग्री, झूठे एवं भ्रामक बयान के साथ गलत सूचना प्रसारित कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान के ओलंपिक चैम्पियन भालाफेंक खिलाड़ी अरशद नदीम का इंस्टाग्राम अकाउंट भी पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद एक कानूनी अनुरोध के कारण भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। भारत में नदीम का इंस्टाग्राम अकाउंट खोलने की कोशिश करने वालों का यह संदेश मिल रहा है ,”भारत में यह अकाउंट उपलब्ध नहीं है। कानूनी अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया।”

पहलगाम हमले की जांच के बाद NIA की टीम ने किया खुलासा, हमले से पहले आतंकियों ने ISI से किया था कॉन्टैक्ट

श्रीनगर पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच के लिए NIA की टीम आज (शुक्रवार, 02 मई को) भी बैसरन घाटी पहुंची है। दूसरी तरफ, NIA के महानिदेशक ने श्रीनगर में समीक्षा बैठक की है। इस बीच, सूत्रों से ये जानकारी मिली है कि NIA को इस आतंकी हमले के मामले में ऐसे कई सबूत मिले हैं जो इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि बैसरन घाटी के हमले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था। अब NIA की जांच में नया ट्विस्ट आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, NIA को ऐसे सुराग हाथ लगे हैं, जिससे स्थानीय पोनीवालों यानी खच्चर वालों की भूमिका शक के दायरे में आ गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को शक है कि पोनीवालों ने आतंकियों की मदद की थी। सूत्रों के मुताबिक हिरासत में रखे गए कई पोनी राइडर्स ऐसे हैं, जिनके बयान मेल नहीं खा रहे। इसलिए जांच टीम को इन पर शक हो रहा है कि कहीं इन लोगों ने ही तो आतंकियों को ऊपर तक पहुंचाने और बैसरन घाटी में एंट्र के लिए मदद तो नहीं की। उनसे अभी भी गहन पूछताछ जारी है। NIA की टीम अब उनके फोन कॉल डिटेल्स भी खंगाल कही है और उनकी लोकेशन हिस्ट्री भी जांच कर रही है। अब तक 2800 लोगों से पूछताछ इसी सिलसिले में NIA की टीम ने स्थानीय पोनीवालों समेत अब तक करीब 2800 लोगों के पूछताछ की है। उनसे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आतंकियों के आने-जाने का रूट क्या था और बैसरन घाटी में कैसे एंट्री ली थी? NIA को जांच में ये भी पता चला है कि इस हमले में शामिल आतंकी हाशिम मूला और अली भाई पाकिस्तान का रहने वाला है, जो हमले के दौरान पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से लगातार संपर्क में बने हुए थे। इस दौरान उन्हें पाकिस्तान से दिशा-निर्देश मिल रहे थे। 150 लोग हिरासत में लिए गए मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि NIA ने अब तक इस मामाले में 2800 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है। इसके अलावा करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया है। NIA की टीम ने घटनास्थल पर जाकर ना सिर्फ उसकी 3D मैपिंग की है बल्कि वहां का डंप डेटा भी लिया है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस वक्त वहां कौन-कौन था और उनका किन-किन से संपर्क हो रहा था। जांच टीम को मौके पर से 40 से ज्यादा कारतूत के खोखे भी मिले हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इन-इन के बयान दर्ज जांच टीम ने इसके अलावा अब तक बैसरन घाटी में काम करने वाले फोटोग्राफर्स, दुकानदारों, टूरिस्ट गाइडों, जिप लाइन वर्कर्स,होटल मालिकों और अन्य के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच की और आतंकियों द्वारा इस्तेमाल की गई सैटेलाइट फोन की भी जांच की है। इसके अलावा पहलगाम में इन स्थलों की जांच की है, जहां आतंकियों ने हमले को अंजाम देने से पहले रेकी की थी। इसके अलावा जांच टीम ने प्रतिबंधित हुर्रियत और जमात इस्लामी से जुड़े लोगों के यहां छापेमारी भी की है।

इजरायली सेना ने द्रुज अल्पसंख्यक लड़ाकों को सुरक्षा कवच देने के लिए किया हमला, मुस्लिम देश पर बरपाया कहर

नई दिल्ली फिलिस्तीन, लेबनान और यमन के बाद अब इजरायली सेना ने सीरिया के अंदर घुसकर राष्ट्रपति भवन के पास हमला किया है। ये हमले शुरक्रवार की सुबह किए गए। इससे वहां हड़कंप है। दरअसल, इजरायल ने ये हमले द्रुज अल्पसंख्यक लड़ाकों को सुरक्षा कवच देने के लिए किए हैं। ताकि उन पर कोई हमला ना हो सके। हाल के दिनों में सीरिया की राजधानी दमिश्क में सीरिया समर्थक हथियारबंद लड़ाकों और द्रूज अल्पसंख्यकों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे। इसके खिलाफ इजरायल की नेतन्याहू सरकार ने सीरियाई लड़ाकों को चेतावनी दी थी और द्रूज अल्पसंख्यकों को समर्थन देने का ऐलान किया था। इस बीच, सीरिया के गृह मंत्रालय ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि बुधवार रात से लेकर आज तक दमिश्क के निकट सीरियाई शहर साहनाया में सशस्त्र समूहों और द्रूज आत्मरक्षा सेनानियों के बीच झड़पें हुईं, जहां मुख्य रूप से द्रूज आबादी रहती है। कौन हैं द्रूज अल्पसंख्यक? द्रूज अल्पसंख्यक अरबों का एक जातीय-धार्मिक समूह है जो लेबनान, सीरिया, इजरायल और जॉर्डन में रहता है। यह 11वीं शताब्दी में इस्लाम की एक शाखा से निकला था। उनका धर्मशास्त्र इस्लाम के तत्वों को प्राचीन परंपराओं के साथ जोड़ता है। इस समुदाय की मान्यता है कि आपका जन्म अगर द्रूज के रूप में हुआ है तो आप हमेशा के लिए द्रूज ही रह सकते हैं और धर्म परिवर्तन नहीं कर सकते। ये समुदाय पुनर्जन्म में विश्वस रखता है। यह समुदाय एक अलग एकेश्वरवादी धर्म का पालन करता है, जो इस्माइली शियावाद की एक शाखा है। यह समुदाय अन्य अब्राहमिक धर्मों के साथ कई पैगंबर के सिद्धांत में भरोसा रखता है। द्रूज कहाँ रहते हैं? लगभग दस लाख द्रूज मध्य पूर्व में रहते हैं। ये मुख्य रूप से सीरिया, लेबनान, जॉर्डन और इजरायल में निवास करते हैं। सीरिया में, सबसे बड़ी द्रूज आबादी मुख्य रूप से दक्षिणी प्रांत सुवेदा में रहती है। इसके अलावा दमिश्क के उपनगरों जरामाना और सहनायामें भी इनकी आबादी केंद्रित है। लेबनान में ये समुदाय चौफ पहाड़ों और माउंट लेबनान के कुछ हिस्सों में केंद्रित है। इजरायल में इस समुदाय की आबादी करीब डेढ़ लाख है, जो वहां की आबादी का करीब 1.6 फीसदी है। यह समुदाय विशेषकर उत्तरी इजरायल और इजरायली कब्जे वाले गोलान हाइट्स में रहता है। पड़ोसी जॉर्डन में भी ह्रूजों की एक छोटी आबादी रहती है, जो ज्यादातर सीरियाई सीमा के निकट है। सीरिया में असद शासन में द्रूजों की क्या स्थिति सीरिया का द्रूज समुदाय लंबे समय से देश के गृहयुद्ध में तटस्थ रहने की कोशिश करता रहा है। यह समुदाय विशेष रूप से स्वेदा और दमिश्क के उपनगरों में स्थानीय स्वायत्तता को बनाए रखते हुए खुले विद्रोह से बचता रहा है। दरअसल, असद शासन के सुरुआत में ही इस समुदाय ने शासन के साथ शांतिपूर्ण समझौता कर लिया था लेकिन इनके खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा बढ़ती गई। ये आर्थिक उपेक्षा के शिकार होते चले गए। बाद में ईरान समर्थित मिलिशिया का आतंक इनके ऊपर बढ़ता चला गया। इसके बाद इन लोगों ने विद्रोह करना शुरू कर दिया। इजरायल से क्या रिश्ता, नेतन्याहू को हमदर्दी क्यों? 1948 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अब तक यह समुदाय इजरायल की मुख्यधारा में जुड़ा रहा है और इजरायली सेना और सिविल सेवाओं में अपनी सेवा देता रहा है। यह समुदाय अपनी वफादारी के लिए मशहूर है। ये नेतन्याहू के समर्थक माने जाते हैं और इजरायल क पहचान की एक गौरवशाली परंपरा के हिस्सा बन चुके हैं। कई द्रूज जनरल, राजदूत, नेसेट के सदस्य और नेतन्याहू सरकार में मंत्री रहे हैं। हमास के खिलाफ लड़ाई में द्रूज सैनिक अग्रिम मोर्चे पर रहे हैं। 1942 में जब यरुशलम में सुन्नी नेतृत्व ने तिबेरियास में जेथ्रो के मकबरे (जिसे ड्रूज शुअयब कहते हैं) पर नियंत्रण करने की धमकी दी, तो द्रूजों ने 1948 के युद्ध में यहूदी सेना का साथ दिया था। तब से द्रूज सैनिक हर अरब-इजरायल युद्ध में इजरायल के लिए लड़के रहे हैं। ह्रूज समुदाय इजरायली रक्षा बलों में भर्ती होने वाला एकमात्र अरब समूह हैं।

पहलगाम में हुए आंतकी हमले के बाद से ही पाकिस्तानी शेयर बाजार की सेहत खराब, सेंसेक्स और निफ्टी का बुरा हाल

इस्लामाबाद पहलगाम में हुए आंतकी हमले के बाद से ही पाकिस्तानी शेयर बाजार की सेहत खराब हो गई है। सेंसेक्स और निफ्टी का बुरा हाल है। 23 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 के बीच पाकिस्तान के शेयर बाजार केएसई-100 इंडेक्स में 7100 अंकों की गिरावट आई है। पाकिस्तान के इस शेयर बाजार में गिरावट की वजह इंडिया और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को माना जा रहा है। 30 अप्रैल को केएसई 100 3.09 प्रतिशत या फिर 3545 अंक की गिरावट के साथ 111,326.57 अंक पर आ गया था। दोनों देशों के बीच हुए रिश्ते खराब पाकिस्तानी शेयर बाजार में लिस्टेड चर्चिच स्टॉक जैसे लक,यूबीएल, पीपीएल और एफईसी ने मार्केट को 1100 पीछे ढकेल दिया है। वहीं, 2 मई केएसई-100 का इंडेक्स 2785 या फिर 2.5 प्रतिशत की उछाल के साथ 114119 पर बंद हुआ है। पाकिस्तानी शेयर बाजारों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है 2 मई की रिकवरी पर्मानेंट नहीं है। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हुए तो पाक शेयर बाजार की सेहत और खराब हो सकती है। बता दें, पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने 26 लोगों को मार दिया था। इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए। सिंधु जल समझौता रद्द पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ किए सिंधु जल समझौता को रद्द कर दिया। इसके अलावा भारत ने दोनों के राजनयिकों की संख्या को कम कर दिया। वहीं, भारत के अंदर रहने वाले पाकिस्तानियों को देश छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया। पाकिस्तान इस दौरान कई मौके पर सीजफायर का भी उल्लंघन भी किया है। जिसका भारत ने मुहंतोड़ जवाब दिया था। पाकिस्तान की ये हरकतें बताती है कि वो शांति नहीं चाहता है। घरेलू शेयर बाजारों में तेजी भारतीय शेयर बाजारों में बीते 2 महीने के दौरान तेजी का सिलसिला देखने को मिला है। सेंसेक्स इस दौरान 10 प्रतिशत से अधिक चढ़ गया था। वहीं, एफआईआआई भी इंडियन स्टॉक मार्केट में पैसा लगा रहे हैं।

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