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म्यांमार में शक्तिशाली भूंकप के बाद भी कांप रही धरती, एक महीने में 157 झटके किए गए महसूस

यांगून म्यांमार में 28 मार्च को आए विनाशकारी भूकंप के बाद देश में कुल 157 झटके (आफ्टरशॉक) महसूस किए गए। मौसम विज्ञान और जल विज्ञान विभाग ने सोमवार को यह जानकारी दी। विभाग ने बताया कि भूकंप के झटकों की तीव्रता 2.8 से 7.5 के बीच थी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने सरकारी दैनिक म्यांमार एलिन के हवाले से बताया कि 25 अप्रैल तक भूकंप में मरने वालों की संख्या 3,763 थी, 5,107 लोग घायल हुए और 110 लोग लापता हैं। देश की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति (एनडीएमसी) के अनुसार, 28 मार्च को मध्य म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद 2,00,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं। शुक्रवार को ने प्यी ताव में आयोजित समिति की साल की तीसरी बैठक में एनडीएमसी के अध्यक्ष वाइस सीनियर जनरल सो विन ने कहा कि भूकंप ने प्यी ताव, सागांग, मांडले, बागो, मैगवे और शान समेत 10 क्षेत्रों और राज्यों में भारी नुकसान किया है। जनरल सो विन ने कहा कि भूकंप से 63,000 से अधिक घर, 6,700 स्कूल, 5,400 मठ, 5,300 पगोडा और सैकड़ों अन्य धार्मिक इमारतें, अस्पताल, पुल, सड़कें और बांध नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए। 337 विदेशी कर्मियों समेत अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टीमों ने सबसे प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी अस्पताल लगाए हैं और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मिलकर लोगों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि म्यांमार सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग करने के बाद 26 देशों और क्षेत्रों से 2,095 बचावकर्मी म्यांमार पहुंचे हैं। ये बचावकर्मी 147 विमानों, सात जहाजों और 23 वाहनों के जरिए 3,800 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर आए हैं। भारत म्यांमार में भूकंप से प्रभावित इलाकों में सबसे पहले सहायता देने वाला देश था। ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत भारत ने 750 मीट्रिक टन से अधिक राहत सामग्री भेजी, जिसमें जरूरी दवाइयां, खाद्यान्न, तैयार भोजन, टेंट, कंबल, जेनसेट, शल्य चिकित्सा और मेडिकल शेल्टर, जल स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, कपड़े, और पूर्वनिर्मित कार्यालय शामिल हैं।

पुतिन ने यूक्रेन के साथ तीन दिनों के लिए अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की, 8 मई से शुरू होकर 11 मई तक जारी रहेगा

मास्को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ तीन दिनों के लिए अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की है, जो 8 मई से शुरू होकर 11 मई तक जारी रहेगा। पुतिन का कहना है कि यह निर्णय मानवीय कारणों और दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर लिया गया है। रूस ने स्पष्ट किया कि युद्धविराम के दौरान यूक्रेन को भी इसका पालन करना होगा, और यदि यूक्रेन इस पर नहीं टिकता, तो रूसी सेना इसका सख्त और प्रभावी जवाब देगी। पुतिन ने रूस की तरफ से एक बार फिर यह भी कहा कि वे बिना शर्त वार्ता के लिए तैयार हैं, ताकि यूक्रेन संकट की जड़ को समाप्त किया जा सके। रूस अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए भी तैयार है। इससे पहले, रूस ने ईस्टर के मौके पर 30 घंटे के लिए संघर्ष विराम का एलान किया था, लेकिन इस बार युद्धविराम की अवधि अधिक है और इसका उद्देश्य मानवीय राहत को सुनिश्चित करना है। यूक्रेन की ओर से इस घोषणा पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ जांच पूरी, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दिया आदेश, लौटाया जायेगा पासपोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित पॉडकास्टर और यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को बड़ी राहत देते हुए विदेश यात्रा के लिए उनका पासपोर्ट वापस लौटाने की अनुमति दे दी है। यह आदेश सोमवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिया। यह निर्णय तब आया जब असम और महाराष्ट्र सरकारों ने अदालत को सूचित किया कि इलाहाबादिया के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। रणवीर इलाहाबादिया, जिन्हें लोग सोशल मीडिया पर ‘BeerBiceps’ के नाम से जानते हैं, विवादों में तब फंसे जब उन्होंने कॉमेडियन समय रैना के यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इस मामले को लेकर उन पर कई प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिनमें यौन विषयों और माता-पिता पर की गई टिप्पणियों को लेकर नाराजगी जताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट की शर्तें और रियायतें अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इलाहाबादिया को पासपोर्ट पाने के लिए महाराष्ट्र साइबर पुलिस ब्यूरो से संपर्क करना होगा। शीर्ष अदालत ने उन्हें पहले ही 18 फरवरी को गिरफ्तारी से संरक्षण दे दिया था। अदालत ने कहा कि ‘द रणवीर शो’ का प्रसारण तीन मार्च से किया जा सकता है लेकिन इस शर्त के साथ कि वह कार्यक्रम में “नैतिकता और शालीनता” बनाए रखें और उसे सभी उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त बनाएं। अदालत अगली सुनवाई में उन एफआईआर को एक स्थान पर समेकित करने के अनुरोध पर विचार करेगी। ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ शो में विवाद की जड़ समय रैना के शो में रणवीर इलाहाबादिया के साथ साथ कॉमेडियन आशीष चंचलानी, जसप्रीत सिंह और अपूर्वा मखीजा भी मौजूद थे। शो में हुई बातचीत को लेकर असम और महाराष्ट्र में कई आपराधिक मामले दर्ज हुए। शो के एक हिस्से में यौन विषयों पर की गई टिप्पणी को लेकर जनता और कई सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया। पुलिस जांच और सरकार का पक्ष असम और महाराष्ट्र पुलिस ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने इस मामले की जांच पूरी कर ली है। इसके बाद अदालत ने पासपोर्ट वापस करने की अनुमति देते हुए कहा कि रणवीर अब अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए विदेश यात्रा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक स्थान पर स्थानांतरित करने का अनुरोध सुनवाई के लिए विचाराधीन रहेगा।

केंद्र सरकार से की जा रही खास अपील, तेजी से बढ़ रही भारत में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या

अमृतसर भारत में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। देश में इस बीमारी के बारे में जागरूकता की भारी कमी के कारण हर साल 10 से 15 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। जहां उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चों के अनमोल जीवन को बचाने के लिए हर माह करीब दो से तीन यूनिट रक्त चढ़ाया जा रहा है, वहीं सरकारी अस्पतालों में रक्त की मौजूदा भारी कमी के कारण थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों व अन्य रोगियों को रक्त मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार थैलेसीमिया की बीमारी लगातार भयानक रूप लेती जा रही है। जिस प्रकार भारत सरकार हेपेटाइटिस बी, पोलियो आदि बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता के प्रयास कर रही है। वहीं थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए भी प्राथमिक प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र व पंजाब सरकार की ढिलाई के कारण थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अमृतसर जिले की बात करें तो यहां वर्तमान में थैलेसीमिया से पीड़ित लगभग 200 बच्चे हैं, जिन्हें सरकारी गुरु नानक देव अस्पताल में हर महीने लगभग 1 से 3 यूनिट रक्त चढ़ाया जाता है। उपरोक्त श्रेणी के बच्चों के लिए प्रति वर्ष लगभग 7,000 यूनिट होनी चाहिए। ब्लड बैंक में रक्त की लगातार कमी के कारण बच्चों और आम रोगियों को अक्सर रक्त मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि निजी ब्लड बैंक एक यूनिट दान करने के लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपए उपलब्ध करवाते हैं, जबकि सरकारी स्तर पर 70 के करीब एक यूनिट के लिए प्रति व्यक्ति उपलब्ध करवाए जाते हैं। इतना ही नहीं, सरकारें भी इस बीमारी की रोकथाम के लिए पूरी तरह गंभीर नहीं हैं। सरकार गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चों की जांच के लिए कई तरह के टैस्ट कराती है, लेकिन अगर सरकार थैलेसीमिया बीमारी की जांच के लिए शुरुआती चरण में ही टेस्ट करवा ले तो इस बीमारी को रोका जा सकता है। फिलहाल थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को बचाने के लिए थैलेसीमिया वेलफेयर एसोसिएशन और कई समाज सेवी संगठनों द्वारा बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार को उक्त एसोसिएशन और समाजसेवी संस्थाओं के प्रयासों को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से उक्त बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान तुरंत शुरू करने की जरूरत है। डा. महाजन थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए उठा रहे हैं विशेष कदम सरकारी ब्लड बैंक गुरु नानक देव अस्पताल में तैनात डॉ. अनिल महाजन थैलेसीमिया रोग की रोकथाम के लिए अपने स्तर पर विशेष प्रयास कर रहे हैं। डॉ. महाजन के अनुसार अब तक वे अपने स्तर पर करीब 6,000 लोगों के नि:शुल्क टैस्ट करवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि गर्भवती महिला की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसके पति की भी जांच की जाती है। यदि उनका टैस्ट भी सकारात्मक आता है तो उनका पुनः टोस्ट भी किया जा रहा है।

भारत के डर से पाकिस्तानी सेना में मची ‘भगदड़’असीम मुनीर, इस्तीफा दो वर्ना…

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपनी सरकार को भारत के साथ तनाव को कम करने की सलाह दी है। पाकिस्तान के तीन बार पीएम रहे नवाज शरीफ मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बड़े भाई हैं। पाकिस्तान के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार नवाज ने अपने भाई और पीएम शहबाज को साफतौर पर कहा है कि भारत के साथ युद्ध की ओर ना बढ़ें बल्कि कूटनीतिक तरीके अपनाकर तनाव को कम करें। पाकिस्तानी नेताओं की भारत के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी के बीच नवाज शरीफ की ओर से यह सलाह दी गई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम हमले के बाद भारत के साथ उपजे तनाव के बीच शहबाज शरीफ ने अपने भाई नवाज शरीफ से मुलाकात की है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने भारत से तनाव के संबंध में नवाज शरीफ को अपनी सरकार के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि देश किसी भी आक्रमण का जवाब देने के लिए तैयार है। इस पर नवाज शरीफ ने कहा कि वह आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने शहबाज से कहा कि वह दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच शांति बहाल करने के लिए सभी उपलब्ध राजनयिक संसाधनों का इस्तेमाल करें। बातचीत के जरिए भारत के साथ तनाव करने पर काम करें। शहबाज ने नवाज से कहा- भारत झूठ बोल रहा शहबाज शरीफ ने मुलाकात में नवाज शरीफ को बताया कि पहलगाम हमले में भारत झूठ बोल रहा है। इसमें पाकिस्तान का कोई किरदार नहीं है। इस हमले का मकसद क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना है। भारत ने एकतरफा तरीके से सिंधु समझौते से हटने का ऐलान कर दिया है। ये पाकिस्तान के लिए बड़ा संकट पैदा करता है। भारत के सिंधु समझौते को निलंबित करने के फैसले से युद्ध का खतरा बढ़ा है। नवाज की सलाह पर शहबाज ने कहा कि पाकिस्तान शांति के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन भारत की ओर से कोई कार्रवाई हुई तो जवाबी कदम उठाए जाएंगे। शहबाज ने ये भी बताया कि उनकी सरकार ने पहलगाम हमले की जांच के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय आयोग बनाने का प्रस्ताव दिया। इस पर नवाज ने कहा कि दोनों देशों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए शांति जरूरी है। ऐसे में प्राथमिकता बातचीत से चीजों को हल करना होना चाहिए। क्या है पूरा मामला कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस हमले में 26 लोगों की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। इस हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं तो इस्लामाबाद की ओर से भी आक्रामक बयानबाजी की जा रही है और युद्ध की धमकी दी जा रही है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। भारत के डर से पाकिस्तानी सेना में मची ‘भगदड़’ पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के मंत्री एक तरफ ऊल-जलूल बयान देने में लगे हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तानी फौज के प्रमुख असीम मुनीर से इस्तीफा मांगा जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में अटकलें थीं कि मुनीर देश छोड़कर भाग गए हैं। कई रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि असीम मुनीर के परिवार ने भी देश छोड़ दिया है। इसके अलावा, बिलावल भुट्टो का परिवार भी देश छोड़कर जा चुका है। माना जा रहा है कि भारत पहलगाम हमले को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई कर सकता है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकियों को ऐसी सजा देने की बात की है, जो आतंकियों की कल्पना से परे होगा। जानते हैं-क्या भारत की संभावित कार्रवाई के डर से पाकिस्तानी फौज की हालत खराब हो रही है। जब पाकिस्तानी PMO को फोटो शेयर कर देनी पड़ी सफाई कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि जनरल मुनीर रावलपिंडी में एक बंकर में छिप गए हैं। इन अटकलों के बीच पाकिस्तान सरकार ने एक फोटो शेयर कर बताया कि ‘सब ठीक ठाक है।’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक X हैंडल से रविवार को एबटाबाद से एक ग्रुप फोटो पोस्ट की, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर आगे की लाइन में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। फोटो के साथ तारीख भी स्पष्ट रूप से कैप्शन देते हुए पाक पीएमओ ने कहा-26 अप्रैल, 2025 को प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर (NIM) और पीएमए काकुल के अधिकारी एबटाबाद के पीएमए काकुल में 151वें लॉन्ग कोर्स के ग्रेजुएट अधिकारियों के साथ एक ग्रुप फोटो में शामिल हुए। मुनीर ने फिर उगला जहर-मुसलमान-हिंदू अलग मुल्क हैं मुनीर ने बीते फिर जहर उगलते हुए कहा कि मुसलमान और हिंदू दो अलग-अलग मुल्क हैं। मुनीर ने इस बात पर जोर दिया था कि उनके पूर्वजों का मानना था कि हिंदू और मुसलमान जीवन के हर पहलू में भिन्न हैं। मुनीर शनिवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के काकुल इलाके में पाकिस्तान सैन्य अकादमी (PMA) में कैडेट की पासिंग आउट परेड को संबोधित कर रहे थे। मुनीर ने कहा-द्वि-राष्ट्र सिद्धांत इस बुनियादी मान्यता पर आधारित था कि मुसलमान और हिंदू दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, एक नहीं। मुसलमान जीवन के सभी पहलुओं- धर्म, रीति-रिवाज, परंपरा और सोच में हिंदुओं से अलग हैं।

पाकिस्तान का बचाव करने वालों पर कड़ी कार्रवाई, जरूरत पड़ने पर NSA के प्रावधान भी लगाए जा सकते हैं

असम असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारतीय धरती पर पाकिस्तान का बचाव करने के आरोप में 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस हमले में 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। इस हमले के बाद, असम में पाकिस्तान का बचाव करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “अब तक 22 देशद्रोही गिरफ्तार किए गए हैं।” यह बयान उन्होंने रविवार रात तक की स्थिति के आधार पर दिया, जब गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की संख्या 19 थी। गिरफ्तार लोगों में प्रमुख विपक्षी पार्टी के विधायक अमीन-उल-इस्लाम भी शामिल हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने पहलगाम हमले में पाकिस्तान और उसके समर्थन का राजद्रोह के तहत बचाव किया। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की संभावना मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के प्रावधान भी लगाए जा सकते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच कोई समानता नहीं है। दोनों देश दुश्मन देश हैं और हमें ऐसे ही रहना चाहिए।” पहलगाम आतंकवादी हमला यह हमला 22 अप्रैल को हुआ था, जब सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले पहलगाम क्षेत्र के बैसरन पर्यटक स्थल पर आतंकवादियों ने हमला किया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकतर लोग पर्यटक थे। यह हमला जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा किए गए सबसे भयावह हमलों में से एक था। पाकिस्तान के समर्थन का बचाव करने के आरोप गिरफ्तारी किए गए लोगों में प्रमुख नाम अमीन-उल-इस्लाम का है, जो AIUDF के विधायक हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस हमले में पाकिस्तान और उसकी मिलीभगत का बचाव किया। इस संदर्भ में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को यह भी कहा था कि, अगर परिस्थितियां जटिल होती हैं, तो गिरफ्तार आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें NSA जैसे प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं। कड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक कदम मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस तरह के देशद्रोह और राजद्रोह के मामलों को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह से गंभीर है और ऐसे आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते दुश्मनी वाले हैं, और देश के अंदर पाकिस्तान का समर्थन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।  

250 से ज्यादा अधिकारी और करीब 5000 सैनिकों ने इस्तीफा दिया, पाकिस्तान सेना में हाल ही में एक बड़ा संकट

इस्लामाबाद पाकिस्तान सेना में हाल ही में एक बड़ा संकट सामने आया है, जब लीक हुए दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि 250 से ज्यादा अधिकारी और करीब 5000 सैनिकों ने इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफे भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच हुए हैं और इसे पाकिस्तान सेना के भीतर गहरे मनोबल संकट के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन इस्तीफों के पीछे पाकिस्तान सेना के उच्च अधिकारियों के फैसलों से असहमति और सेना के भीतर बढ़ते असंतोष को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। एक आंतरिक पत्र, जो लेफ्टिनेंट जनरल ओमर अहमद बख़री द्वारा जनरल आसिम मुनीर को लिखा गया था, में यह स्पष्ट किया गया कि सेना में मनोबल बहुत कम हो चुका है। पत्र में यह भी कहा गया कि कई अधिकारी और सैनिक अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं, जिसके कारण इस्तीफे हो रहे हैं। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान सेना में यह संकट तब और गहरा गया जब सीमा पर भारत के साथ तनाव बढ़ा और पाकिस्तान की सेना पर अत्यधिक दबाव बढ़ने लगा। इस गंभीर स्थिति ने पाकिस्तान सेना के भीतर असंतोष को और बढ़ावा दिया, और इसके परिणामस्वरूप इस्तीफों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना सकता है। पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक अस्थिरता और आर्थिक संकटों से जूझ रहा है, और अब सेना के भीतर मचे इस तूफान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सेना के मनोबल को फिर से स्थापित करने के लिए सरकार को तुरंत प्रभावी कदम उठाने होंगे। अब यह देखना होगा कि पाकिस्तान सरकार और सेना इस संकट से कैसे उबरते हैं और इस असंतोष को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाएंगे।  

आतंकियों से संपर्क में थे 10 से ज्यादा मददगार, एनक्रिप्टेड चैट्स से चला मौत का खेल, पाकिस्तान का सीधा कनेक्शन

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के शांत पहलगाम इलाके में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिनमें से सभी पुरुष थे। अब इस भयावह हमले को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है — चारों आतंकी न केवल पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर आए थे, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर 10 से अधिक ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) का पूरा नेटवर्क मदद पहुंचा रहा था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों और उनके मददगारों के बीच लगातार एनक्रिप्टेड मोबाइल एप्स और चीनी सैटेलाइट तकनीक के जरिए संपर्क बना हुआ था। इससे साफ होता है कि हमले की योजना बहुत सोच-समझकर बनाई गई थी, जिसमें तकनीक और क्षेत्रीय नेटवर्क का भरपूर इस्तेमाल किया गया। टारगेट चुनने से लेकर कत्ल तक— सब कुछ सुनियोजित हमले के तरीके ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। हमलावरों ने टूरिस्ट्स को धर्म के आधार पर पहचाना— पहले उनसे कलमा पढ़वाया गया, फिर कपड़े उतरवाकर जांच की गई। महिलाओं और बच्चों को छोड़ दिया गया, जबकि पुरुषों को बेरहमी से गोली मारी गई। इससे आतंकियों के नापाक इरादों का अंदाजा लगाया जा सकता है— वे समाज में नफरत और डर फैलाना चाहते थे। पाकिस्तान का सीधा कनेक्शन हमले में शामिल चारों आतंकियों में से दो पाकिस्तानी नागरिक थे, और बाकी ने पाकिस्तान में जाकर आतंकी ट्रेनिंग ली थी। यही नहीं, हमलावरों को लगातार सीमा पार से निर्देश दिए जा रहे थे। भारत सरकार को इस बात के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं कि यह हमला पाकिस्तान प्रायोजित था। भारत की कड़ी कार्रवाई घटना के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई निर्णायक कदम उठाए हैं: सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया, जिससे पाकिस्तान को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। अटारी बॉर्डर को आम आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया। पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए गए और उन्हें 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया गया। नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी हाई कमीशन के डिफेंस एडवाइजर्स को देश छोड़ने को कहा गया। दोनों देशों के हाई कमीशन में कर्मचारियों की संख्या घटाकर 55 से 30 कर दी गई है।  

महिला ने विमान के बीच हवा में अपने कपड़े उतार दिए और अपनी सीट पर ही शौच कर दिया, लोग हो गए हैरान-परेशान

शिकागो फिलाडेल्फिया से शिकागो जा रही साउथवेस्ट एयरलाइंस की फ्लाइट में  एक महिला यात्री द्वारा की गई शर्मनाक हरकत ने हड़कंप मचा दिया। महिला ने विमान के बीच हवा में अपने कपड़े उतार दिए और अपनी सीट पर ही शौच कर दिया। यह घटना उन यात्रियों के लिए बेहद चौंकाने वाली थी जो उड़ान के दौरान शांति से यात्रा कर रहे थे। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना साउथवेस्ट एयरलाइंस की फ्लाइट 418 में हुई, जब महिला ने बिना किसी चेतावनी के अपने कपड़े उतारकर सीट पर गंदगी कर दी। यह महिला फ्लाइट का हिस्सा नहीं थी, बल्कि एक सामान्य यात्री थी जो चौंकाने वाली हरकत के बाद विवाद का कारण बनी। बता दें कि इससे पहले  पिछले साल जनवरी में  भी एक 60 साल की महिला का प्लेन में उड़ान दौरान कपड़े उतार कर हंगामा करने का वीडियो वायरल हुआ  था।   घटना के बाद, एयरलाइंस को फ्लाइट को पूरी तरह से साफ करने के लिए कई घंटे की आवश्यकता पड़ी, जिसके कारण फ्लाइट की सर्विस ठप हो गई। इसी दौरान, साउथवेस्ट एयरलाइंस ने एक बयान जारी किया और यात्रियों से इस असुविधा के लिए माफी मांगी। एयरलाइंस ने कहा कि उनके लिए यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा और सुरक्षा सर्वोपरि है। बयान में कहा गया, “हम इस घटना से बेहद दुखी हैं और हमारे टीम के सदस्यों के पेशेवर रवैये की सराहना करते हैं। हम पूरी तरह से प्रभावित यात्रियों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें हुई देरी और असुविधा के लिए खेद व्यक्त कर रहे हैं।” पुलिस और मेडिकल टीम ने फ्लाइट के शिकागो एयरपोर्ट पर लैंड होते ही घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि महिला के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई। यह पहली बार नहीं था जब साउथवेस्ट एयरलाइंस में ऐसी घटना हुई हो। पिछले महीने भी एक अन्य यात्री ने फ्लाइट के दौरान अपने कपड़े उतार दिए थे। इसके अलावा, फ्रंटियर एयरलाइंस की फ्लाइट में भी एक यात्री ने खिड़की तोड़ने की कोशिश की थी, जिससे विमान में खलबली मच गई थी। साउथवेस्ट एयरलाइंस की ओर से दिए गए बयान में यह भी बताया गया कि सभी यात्री पूरी तरह से सुरक्षित हैं और किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है।  

पहलगाम आतंकी हमले पर हम मारे गए 26 लोगों के परिजनों के साथ हैं और दिल से हमदर्दी रखते हैं: उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में भावुक भाषण दिया। उन्होंने कहा कि हम मारे गए 26 लोगों के परिजनों के साथ हैं और दिल से हमदर्दी रखते हैं। यही नहीं उन्होंने कहा कि यह मौका नहीं है, जब हम केंद्र सरकार से पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करें। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम इतनी सस्ती सियासत नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि माहौल सही रहे और मेहमानों पर कोई आंच न आए जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार की यह जिम्मेदारी है। अब्दुल्ला ने कहा, ‘इस मौके पर मैं जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग नहीं करूंगा। मैं किस मुंह से जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग कर सकता हूं। हम हमेशा राज्य के दर्जे की डिमांड करेंगे, लेकिन आज यदि ऐसी मांग करूं तो मुझ पर लानत है।’ उन्होंने कहा कि इस मौके पर तो हम एक ही चीज मांगते हैं कि हमले की कड़ी निंदा और मारे गए लोगों के परिजनों से दिल से हमदर्दी। वहीं उन्होंने हमले के बाद स्थानीय लोगों की भूमिका की भी तारीफ की। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि होटल वालों ने अपने कमरे छोड़े और कहा कि आप लोग यहां रहिए। ऑटो वालों ने कहा कि आपको जहां तक जाना है, हम बिना किसी पैसे को छोड़ेंगे। ऐसी कश्मीरियत को मैं सलाम करता हूं। यही हमारी मेहमाननवाजी है। जान की परवाह किए बिना आदिल ने जान बचाई, लोकल लोगों ने मदद की पूरी कोशिश की। ये मौका आतंकवाद के खात्मे की शुरुआत है। ऐसा कोई कदम न उठाया जाए कि अपने दूर हो जाएं। जुमे की नमाज से पहले मस्जिदों में 2 मिनट का मौन रखा गया। मेज थपथपाने लगे मेंबर तो उमर अब्दुल्ला बोले- ऐसा मत करिए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुस्जिदों के इस मौन को हम समझते हैं। इसके अलावा अफवाहों के दौर पर भी उन्होंने बात की। अब्दुल्ला ने कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने वाले लोगों को समझना चाहिए कि इससे लोगों की जिंदगी कितनी मुश्किल होती है। उन्होंने कहा कि हम बंदूक से आतंकवाद को कंट्रोल कर सकते हैं, लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता। जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार की यह जिम्मेदारी है। इस मौके पर मैं जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग नहीं करूंगा। मैं किस मुंह से जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग कर सकता हूं। हम हमेशा राज्य के दर्जे की डिमांड करेंगे, लेकिन आज यदि ऐसी मांग करूं तो मुझ पर लानत है। इस दौरान जब कुछ सदस्यों ने उनके भाषण पर मेज थपथपाने की कोशिश की तो कहा कि इस मौके पर ऐसा ठीक नहीं।

भारत और फ्रांस के बीच 26 राफेल मरीन विमानों की डील हो गई, 63,000 करोड़ रुपये में की गई

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद जारी तनाव के बीच सोमवार को भारत और फ्रांस के बीच 26 राफेल मरीन विमानों की डील हो गई है. यह डील 63,000 करोड़ रुपये में की गई है. इस डील के तहत भारतीय नौसेना के लिए फ्रांस से 26 राफेल मरीन एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे. इस समझौते के भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया. इस ौदरान नौसेना के उपप्रमुख वाइस एडमिरल के. स्वामीनाथन भी मौजूद थे. भारत और फ्रांस के बीच हुए इस समझौते के तहत 22 सिंगल-सीट और 4 ट्विन-सीट विमान शामिल होंगे. इससे पाकिस्तान को करारा झटका लगने वाला है क्योंकि ये जेट आईएनएस विक्रांत पर तैनात किए जाएंगे. 1971 की जंग में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दी थी. इस जेट के आने से इंडियन नेवी और ताकतवर हो जाएगी. भारत और फ्रांस के बीच 2016 में एक सौदा हुआ था, जिसके तहत पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में 36 एयरक्राफ्ट है. भारतीय वायुसेना के राफेल जेट अंबाला और हाशिनारा इन दो बेस से ऑपरेट होंगे. इन 26 राफेल-M की डील के साथ भारत की राफेल जेट की संख्या बढ़कर 62 हो जाएगी. कैसा है Rafale-M फाइटर जेट? Rafale-M एक मल्टीरोल फाइटर जेट है. इसका AESA राडार टारगेट डिटेक्शन और ट्रैकिंग के लिए बेहतरीन है. इसमें स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है जो इसे स्टेल्थ बनाता है. इसमें बीच हवा में ही रीफ्यूलिंग हो सकती है. यानी इसकी रेंज बढ़ जाएगी. राफेल-एम फाइटर आने से भारतीय समुद्री क्षेत्र में निगरानी, जासूसी, अटैक जैसे कई मिशन किए जा सकेंगे. यह फाइटर जेट एंटी-शिप वॉरफेयर के लिए बेस्ट है. इसमें प्रेसिशन गाइडेड बम और मिसाइलें लगा सकते हैं. जैसे- मेटियोर, स्कैल्प, या एक्सोसैट. इस फाइटर जेट के आने से हवा, पानी और जमीन तीनों जगहों से सुरक्षा मिलेगी. नौसेना एक देश के चारों तरफ अदृश्य कवच बना सकेगी. दक्षिण एशिया में भारत-चीन के पास ही एयरक्राफ्ट कैरियर भारत और चीन के अलावा किसी अन्य दक्षिण एशियाई देश के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तीन तरह के मल्टीरोल फाइटर जेट तैनात हैं. पहला J-10, दूसरा J-15 और तीसरा Sukhoi-30. पाकिस्तान के पास जो फाइटर जेट्स हैं, उनमें से ज्यादातर चीन के ही हैं. अब हम आपको तीनों के साथ Rafale-M की तुलना करके बताते हैं… इस समझौते का प्रतिनिधित्व भारत में फ्रांस के राजदूत और भारतीय रक्षामंत्रालय के अधिकारी करेंगे. रिपोर्ट के अनुसार रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जबकि फ्रांस और भारत के रक्षा मंत्री डिजिटल रूप से इसमें भाग ले सकते हैं. इससे पहले फ्रांसीसी रक्षा मंत्री को व्यक्तिगत रूप से इस हस्ताक्षर समारोह में भाग लेने के लिए आना था, लेकिन कहा जा रहा है कि व्यक्तिगत कारणों से उन्हें अपना दौरा रद्द करना पड़ा. सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस महीने की शुरुआत में इस सौदे को मंजूरी दे दी थी. भारतीय विमानवाहक पोतों, खास तौर पर आईएनएस विक्रांत जो अभी सेवा में है पर तैनाती के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत है. मिग-29 लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े ने कथित तौर पर रखरखाव संबंधी मुद्दों के कारण खराब प्रदर्शन किया है. फ्रांस से खरीदने जाने वाले राफेल एम जेट विमान को भारत के युद्धपोत पर अपने आवश्यकतानुसार सेट किया जाएगा. कहा जा रहा कि इसे आईएनएस विक्रांत पर रखा जाएगा. सरकार के अनुसार यह खरीद अस्थायी समाधान के रूप में है. भारत में भी एक से बढ़कर एक लड़ाकू विमान विकसित किए जा रहे हैं. एनएनआई की रिपोर्ट के अनुसार हस्ताक्षर समारोह संभवतः साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय मुख्यालय के बाहर आयोजित किया जाएगा. बता दें कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में इसी महीने की 9 तारीख को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट में इस डील को मंजूरी मिली थी. इसे अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है. सरकार के इस अनुबंध में 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर जेट शामिल हैं. साथ ही बेड़े के रखरखाव, रसद सहायता, कार्मिक प्रशिक्षण और स्वदेशी घटक विनिर्माण के लिए एक व्यापक पैकेज भी शामिल है. भारत में वर्तमान में 36 राफेल हैं. इसे 2016 एक सौदे के तहत खरीदे गए थे. ये विमान अंबाला और हासीमारा में तैनात हैं. नए सौदे से भारत में राफेल विमानों की कुल संख्या 62 हो जाएगी, जिससे देश के 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बेड़े में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. लंबाई मे छोटा, इसलिए मैन्यूवरिंग आसान J-10: 55.5 फीट J-15: 73.1 फीट Su-30: 72 फीट Rafale-M… सिर्फ 50.1 फीट. यानी आकार में सबसे छोटा. किस तरह की होगी डील? Rafale-M एक मल्टीरोल फाइटर जेट है. दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत और चीन के अलावा किसी अन्य देश के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. इसके आने से चीन और पाकिस्तान समेत इंडो-पैसिफिक में जो स्थितियां हैं, उनसे निपटना आसान हो जाएगा. साथ ही इस डील में ऑफसेट प्रोविजन है. इससे भारत के मेक इन इंडिया मुहिम को भी बढ़ावा मिलेगा. डील में पैकेज है. इसमें मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है. नौसैनिकों की ट्रेनिंग, ऑपरेशन और मेंटेनेंस की ट्रेनिंग भी शामिल है. क्रू/पायलट… सिंगल पायलट के हाथ में कमान J-10: एक पायलट J-15: 1/2 पायलट Su-30: 2 पायलट Rafale-M…1 या 2 पायलट उड़ाते हैं. वजन में हल्का यानी हैंडलिंग आसान J-10: 14 हजार kg J-15: 27 हजार kg Su-30: 24, 900 kg Rafale-M… 15 हजार kg, यानी जे-10 से थोड़ा भारी, लेकिन बाकियों से हल्का है. कैसा है Rafale-M फाइटर जेट? इसका AESA राडार टारगेट डिटेक्शन और ट्रैकिंग के लिए बेहतरीन है. इसमें स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है जो इसे स्टेल्थ बनाता है. इसमें बीच हवा में ही रीफ्यूलिंग हो सकती है. यानी इसकी रेंज बढ़ जाएगी. राफेल-एम फाइटर आने से भारतीय समुद्री क्षेत्र में निगरानी, जासूसी, अटैक जैसे कई मिशन किए जा सकेंगे. यह फाइटर जेट एंटी-शिप वॉरफेयर के लिए बेस्ट है. इसमें प्रेसिशन गाइडेड बम और मिसाइलें लगा सकते हैं. जैसे- मेटियोर, स्कैल्प, या एक्सोसैट. इस फाइटर जेट के आने से हवा, पानी और जमीन तीनों जगहों से सुरक्षा मिलेगी. नौसेना एक देश के चारों तरफ अदृश्य कवच बना सकेगी. फ्यूल (इंटरनल कैपेसिटी) में सबसे बेहतर J-10: 8950 लीटर J-15: … Read more

राफेल एम जेट आईएनएस विक्रांत से संचालित होंगे और मौजूदा मिग-29के बेड़े का सहयोग करेंगे, भारत आज करेगा फ्रांस से बड़ी डील

नई दिल्ली भारत और फ्रांस 28 अप्रैल 2025 यानी आज 26 राफेल-एम फाइटर जेट की डील करेगा. यह समझौता भारतीय नौसेना के लिए होगा. इस समझौते की कीमत करीब 63,000 करोड़ रुपये है. इसमें 22 सिंगल-सीट और 4 ट्विन-सीट विमान शामिल होंगे. पाकिस्तान को करारा झटका लगने वाला है. पाकिस्तान समंदर में भी चोट खाएगा. क्योंकि ये जेट आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात किए जाएंगे. 1971 की जंग में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दी थी. इस जेट के आने से इंडियन नेवी और ताकतवर हो जाएगी.   दक्षिण एशिया में भारत-चीन के पास ही एयरक्राफ्ट कैरियर भारत और चीन के अलावा किसी अन्य दक्षिण एशियाई देश के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तीन तरह के मल्टीरोल फाइटर जेट तैनात हैं. पहला J-10, दूसरा J-15 और तीसरा Sukhoi-30. पाकिस्तान के पास जो फाइटर जेट्स हैं, उनमें से ज्यादातर चीन के ही हैं. अब हम आपको तीनों के साथ Rafale-M की तुलना करके बताते हैं… इस समझौते का प्रतिनिधित्व भारत में फ्रांस के राजदूत और भारतीय रक्षामंत्रालय के अधिकारी करेंगे. रिपोर्ट के अनुसार रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जबकि फ्रांस और भारत के रक्षा मंत्री डिजिटल रूप से इसमें भाग ले सकते हैं. इससे पहले फ्रांसीसी रक्षा मंत्री को व्यक्तिगत रूप से इस हस्ताक्षर समारोह में भाग लेने के लिए आना था, लेकिन कहा जा रहा है कि व्यक्तिगत कारणों से उन्हें अपना दौरा रद्द करना पड़ा. सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस महीने की शुरुआत में इस सौदे को मंजूरी दे दी थी. भारतीय विमानवाहक पोतों, खास तौर पर आईएनएस विक्रांत जो अभी सेवा में है पर तैनाती के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत है. मिग-29 लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े ने कथित तौर पर रखरखाव संबंधी मुद्दों के कारण खराब प्रदर्शन किया है. फ्रांस से खरीदने जाने वाले राफेल एम जेट विमान को भारत के युद्धपोत पर अपने आवश्यकतानुसार सेट किया जाएगा. कहा जा रहा कि इसे आईएनएस विक्रांत पर रखा जाएगा. सरकार के अनुसार यह खरीद अस्थायी समाधान के रूप में है. भारत में भी एक से बढ़कर एक लड़ाकू विमान विकसित किए जा रहे हैं. एनएनआई की रिपोर्ट के अनुसार हस्ताक्षर समारोह संभवतः साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय मुख्यालय के बाहर आयोजित किया जाएगा. बता दें कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में इसी महीने की 9 तारीख को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट में इस डील को मंजूरी मिली थी. इसे अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है. सरकार के इस अनुबंध में 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर जेट शामिल हैं. साथ ही बेड़े के रखरखाव, रसद सहायता, कार्मिक प्रशिक्षण और स्वदेशी घटक विनिर्माण के लिए एक व्यापक पैकेज भी शामिल है. भारत में वर्तमान में 36 राफेल हैं. इसे 2016 एक सौदे के तहत खरीदे गए थे. ये विमान अंबाला और हासीमारा में तैनात हैं. नए सौदे से भारत में राफेल विमानों की कुल संख्या 62 हो जाएगी, जिससे देश के 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बेड़े में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. लंबाई मे छोटा, इसलिए मैन्यूवरिंग आसान J-10: 55.5 फीट J-15: 73.1 फीट Su-30: 72 फीट Rafale-M… सिर्फ 50.1 फीट. यानी आकार में सबसे छोटा. किस तरह की होगी डील? Rafale-M एक मल्टीरोल फाइटर जेट है. दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत और चीन के अलावा किसी अन्य देश के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. इसके आने से चीन और पाकिस्तान समेत इंडो-पैसिफिक में जो स्थितियां हैं, उनसे निपटना आसान हो जाएगा. साथ ही इस डील में ऑफसेट प्रोविजन है. इससे भारत के मेक इन इंडिया मुहिम को भी बढ़ावा मिलेगा. डील में पैकेज है. इसमें मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है. नौसैनिकों की ट्रेनिंग, ऑपरेशन और मेंटेनेंस की ट्रेनिंग भी शामिल है. क्रू/पायलट… सिंगल पायलट के हाथ में कमान J-10: एक पायलट J-15: 1/2 पायलट Su-30: 2 पायलट Rafale-M…1 या 2 पायलट उड़ाते हैं. वजन में हल्का यानी हैंडलिंग आसान J-10: 14 हजार kg J-15: 27 हजार kg Su-30: 24, 900 kg Rafale-M… 15 हजार kg, यानी जे-10 से थोड़ा भारी, लेकिन बाकियों से हल्का है. कैसा है Rafale-M फाइटर जेट? इसका AESA राडार टारगेट डिटेक्शन और ट्रैकिंग के लिए बेहतरीन है. इसमें स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है जो इसे स्टेल्थ बनाता है. इसमें बीच हवा में ही रीफ्यूलिंग हो सकती है. यानी इसकी रेंज बढ़ जाएगी. राफेल-एम फाइटर आने से भारतीय समुद्री क्षेत्र में निगरानी, जासूसी, अटैक जैसे कई मिशन किए जा सकेंगे. यह फाइटर जेट एंटी-शिप वॉरफेयर के लिए बेस्ट है. इसमें प्रेसिशन गाइडेड बम और मिसाइलें लगा सकते हैं. जैसे- मेटियोर, स्कैल्प, या एक्सोसैट. इस फाइटर जेट के आने से हवा, पानी और जमीन तीनों जगहों से सुरक्षा मिलेगी. नौसेना एक देश के चारों तरफ अदृश्य कवच बना सकेगी. फ्यूल (इंटरनल कैपेसिटी) में सबसे बेहतर J-10: 8950 लीटर J-15: 9500 लीटर Su-30: 9400 लीटर Rafale-M… 11,202 लीटर… यानी ज्यादा देर तक उड़ान संभव. ज्यादा अच्छी डॉग फाइट. स्पीड में सिर्फ एक चीनी फाइटर जेट से पीछे J-10: 2205 km/hr J-15: 2963 km/hr Su-30: 2120 km/hr. Rafale-M… 2205 km/hr. यानी J-15 से कमजोर लेकिन सुखोई से ऊपर और जे-10 के बराबर. कॉम्बैट/फेरी रेंज… में सबसे बेहतर राफेल J-10: 1240 km (कॉम्बैट रेंज) J-15: 3500 km (फेरी रेंज) Su-30: 3000 km (फेरी रेंज) Rafale-M… कॉम्बैट रेंज 1850 km और फेरी रेंज 3700 km. यानी सबसे बेहतर. अधिकतम ऊंचाई… इसी मामले में कमजोर है J-10: 59 हजार फीट J-15: 66 हजार फीट Su-30: 57 हजार फीट Rafale-M… 52 हजार फीट. यानी तीनों चीनी फाइटर जेट से पीछे.   किस तरह के फाइटर जेट्स हैं… J-10/J-15 चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं. Su-30 मल्टीरोल एयर सुपरीरियॉरिटी जेट है. Rafale-M 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट है. राफेल में ज्यादा हथियार लगाने की क्षमता चीन के जे-10 फाइटर जेट में 11 हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार तरह के हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, 90 मिलिमीटर के अनगाइडेड रॉकेट्स, 23 मिलिमीटर की गन और चार तरह के बम लगाए जा सकते हैं. जे-15 फाइटर जेट में 12 हार्डप्वाइंट्स हैं. जिनमें 9 तरीके के हथियार लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा बम भी. इसमें 30 मिलिमीटर की गन लगी होती … Read more

भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए हिंदुओं की हत्या कराई : गुरपतवंत सिंह पन्नू

नईदिल्ली  खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देने का ऐलान कर दिया है। हाल ही में उसने कहा है कि पंजाब के जरिए भारत को पाकिस्तान पर हमला नहीं करने दिया जाएगा। जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते तल्ख हैं और सीमा पर भी तनाव जारी है। आतंकवादी हमले में 26 लोगों की हत्या हो गई थी। आजाद डिजिटल से खास बातचीत में SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख पन्नू ने पाकिस्तान का साथ देने की बात कही है। उसने कहा, ‘यह न 1965 और न 1971 है… आज है 2025 है। मैं पाकिस्तान की आवाम को भरोसा दिलाता हूं कि हम पाकिस्तान के साथ ईंट की तरह खड़े हैं। कोई भारतीय सेना की इतनी हिम्मत नहीं होने देंगे कि वो पंजाब पार कर पाकिस्तान पर हमला करे। क्योंकि पाकिस्तान का नाम ही पाक है।’ पन्नू ने कहा, ‘यहां पाकिस्तान को समझने की जरूरत है, सिख समझ चुके हैं।’ हालांकि, पन्नू ने पाकिस्तान की सरकार और आवाम के सामने खालिस्तान को मान्यता देने की शर्त रखी है। उसने पहलगाम को हिंदुओं का नरसंहार बताया और आरोप लगाए हैं कि इसके पीछे राजनीति की जा रही है। साथ ही आरोप लगाए हैं कि भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए हिंदुओं की हत्या कराई है। पन्नू ने कहा, ‘…दुनियाभर में हम पाकिस्तान के साथ खड़े होंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान के अलग थलग न कर सके।’ पन्नू ने कहा, ‘जो पहलगाम में हुआ, उन लोगों ने अपने हिंदू को ही मारा है। इसका कारण समझना जरूरी है। इसका कारण है, राजनीतिक कारण है। राजनीतिक वोट हैं। पहलगाम में जो हिंदुओं का नरसंहार हुआ है, वो चुनाव जीतने के लिए हुआ है…।’ उसने कहा, ‘…चुनाव जीतने और पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए, पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने वाला बताने के लिए उन लोगों ने अपने ही बिरादरी के हिंदू धर्म के लोग मार दिए।’ भारत के खिलाफ उगलता रहा है जहर हालांकि, इससे पहले भी कई मौकों पर पन्नू भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने उत्तर प्रदेश के अयोध्या मंदिर समेत कई स्थानों पर अशांति फैलाने की धमकी दी थी। इसके अलावा खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भी भारत सरकार पर सवालिया निशान लगा चुका है।  शाहिद अफरीदी ने पहलगाम आतंकी हमले पर दिया बेहद घटिया बयान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी शाहिद अफरीदी ने पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले पर बेहद घटिया बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत खुद ही लोगो को मरवाता है और फिर खुद ही कहते हैं कि वो जिंदा हैं. शाहिद अफरीदी ने इस आतंकी हमले पर एक वीडियो जारी किया है. इसमें वो भारत से इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत मांगते दिख रहे हैं. उन्होंने कहा है कि भारत आरोप लगाने से पहले साबित करे कि इस हमले में पाकिस्तान का हाथ था. बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी. आइए देखें इस आतंकी हमले पर शाहिद अफरीदी ने क्या कुछ कहा? क्या कहा अफरीदी ने अफरीदी ने कहा,” पाकिस्तान के एम्बेसडर होने के नाते मैं यही कहूंगा कि स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी को लेकर मेरा बहुत मजबूत स्टैंड है. इस पर सियासत नहीं होनी चाहिए. पड़ोसी मुल्क हैं, एक-दूसरे का ख्याल रखा जाए. हालांकि मैं यह भी कहूंगा कि जब आतंकी हमला हुआ तो आपने तुरंत पाकिस्तान पर इलजाम लगा दिया. इस तरह से चीजें नहीं होनी चाहिए. इससे आपसी रिश्ते खराब होते हैं. जहां आतंकी हमला हुआ वहां आपके 8 लाख सैनिक हैं. क्यों कोई फौजी लोगों को बचाने नहीं आया. खुद ही ब्लंडर करते हैं, खुद ही लोगो को मरवाते हैं और फिर खुद ही कहते हैं कि वो जिंदा हैं. इस तरह से न करें.” पूर्व लेग स्पिनर दानिश कनेरिया ने शहबाज पर उठाए सवाल इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व लेग स्पिनर दानिश कनेरिया ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा न करने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर निशाना साधते हुए कहा कि वह (शहबाज) सच्चाई जानते हैं क्योंकि वह आतंकवादियों को ‘पालने-पोसने’ का काम कर रहे हैं. पूर्व क्रिकेटर ने एक्स पर लिखा, “अगर पाकिस्तान की पहलगाम आतंकी हमले में वाकई कोई भूमिका नहीं है, तो प्रधानमंत्री ने अभी तक इसकी निंदा क्यों नहीं की?” उन्होंने आगे कहा, “आपकी सेना अचानक हाई अलर्ट पर क्यों है? क्योंकि अंदर से, आप सच्चाई जानते हैं – आप आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं और पाल-पोस रहे हैं. आपको शर्म आनी चाहिए.”  

पहलगाम हमले में PAK साजिश के खिलाफ सबूत, UNSC में खुद किया साबित

 नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार डालने वाले आतंकी द रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़े थे। यह आतंकी संगठन हाफिद सईद के ही लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है। इसे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को फैलाने के लिए सईद ने गठित किया है और माना जाता है कि पाकिस्तान की सेना भी इसे खाद पानी देती है। लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है। फिर भी उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो हरकत की है, उससे साबित होता है कि द रेजिस्टेंस फोर्स से उसका सीधा नाता है। इसके अलावा पहलगाम आतंकी हमले की साजिश में भी पाकिस्तानी सरकार या सेना सीधे तौर पर शामिल है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से पहलगाम हमले की निंदा करते हुए बयान जारी किया गया है, लेकिन उसमें आतंकी संगठन TRF का नाम शामिल नहीं है। इसकी वजह थी कि फिलहाल UNSC के अस्थायी मेंबर पाकिस्तान ने TRF का नाम शामिल न होने की जिद रख दी। उसके समर्थन में चीन उतर आया और फिर अमेरिका से भी लंबी जद्दोजहद कर पाकिस्तान ने TRF का नाम शामिल न कराने में सफलता पा ली। यदि पाकिस्तान का TRF या फिर आतंकी हमले से कोई ताल्लुक न होता तो वह उसके नाम को बयान में शामिल होने से रोकने के लिए इतनी खींचतान क्यों करता। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान ने इसीलिए TRF का नाम शामिल न करने पर जोर दिया क्योंकि इससे संगठन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ताल होती तो सीधा लिंक पाकिस्तान से ही जुड़ता, जो कि है। पाकिस्तान के प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हर बार की तरह घिसी पिटी दलील देते रहे कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि द रेजिस्टेंस फोर्स का इस हमले में हाथ था। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि पहलगाम पर बयान अमेरिका की ओर से तैयार किया गया था। इसमें यह बात शामिल थी कि हमले की जिम्मेदारी TRF ने ली है, लेकिन फिर पाकिस्तान की जिद और चीन के समर्थन से उसे हटा दिया गया है। बता दें कि 2019 के हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी औऱ उसका नाम तब UNSC के बयान में शामिल किया गया था। पहले पाकिस्तान मुकरा, अब TRF भी पलट गया; क्या है रणनीति यही नहीं पाकिस्तान सरकार की यह रणनीति ही है कि द रेजिस्टेंस फोर्स भी अब अपने दावे से मुकर रहा है। पहले उसने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन अब उसका कहना है कि यह हमला उसने नहीं कराया है। पुराने बयान को लेकर आतंकी संगठन का कहना है कि हमारे अकाउंट्स पर साइबर अटैक किया गया था। उसी के तहत यह गलत दावा किया गया। इससे साफ है कि पहले पाकिस्तान ने TRF का नाम संयुक्त राष्ट्र से हटवाया और अब उसे भी अपने दावे से पीछे हटने के लिए कहा है ताकि कोई ऐक्शन न हो। खासतौर पर इंटरनेशनल लेवल पर किरकिरी से बचा जा सके।

दुश्मनों के दिल दहलती है भारत की ये 5 ‘हाईटेक’ मिसाइलें

नई दिल्ली जब आसमान गूंजता है, धरती कांपती है और दुश्मनों के दिल दहलते हैं, तो समझ जाइए कि भारत की सुपर हाईटेक मिसाइलें दहाड़ रही हैं! भारत ने पिछले कुछ समय में रक्षा क्षेत्र में जो तरक्की की है, उसका लोहा विश्व स्तर पर माना जाता है। यह बात खासकर मिसाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सबसे ज्यादा लागू होती है। हाइटेक मिसाइलें बनाने के मामले में भारत ने वो ऊंचाइयां छू ली हैं कि दुशमन देशों के लिए यह डर का दूसरा नाम बन चुकी हैं। आइए आज जानते हैं भारत की उन 5 सुपर हाईटेक मिसाइलों के बारे में, जो ताकत और तकनीक की बेजोड़ मिसाल हैं। भारत का लंबा हाथ है अग्नि-V ​महाशक्तिशाली और सबसे एडवांस तकनीक पर आधारित मिसाइलों की सूची में सबसे पहला नाम अग्नि-V का आता है। यह भारत की सबसे एडवांस्ड और हाईटेक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है। इसका नाम सुनते ही दुशमन के पसीने छूटते हैं क्योंकि ये 8,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता रखती है। आसान भाषा में कहा जाए, तो यह अमेरिका, यूरोप और एशिया के लगभग हर कोने तक पहुंच सकती है। इसे तकनीक और तबाही का सबसे अच्छा कॉम्बो इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है और “कैनीस्टराइज़्ड लॉन्च” टेक्नोलॉजी से लैस है। इसका मतलब है कि इसे कहीं भी तैनात करके फौरन फायर किया जा सकता है। इसकी MIRV क्षमता यानी एक साथ कई टारगेट पर हमला करने की क्षमता, इसे दुनिया के सबसे घातक हथियारों में शामिल करती है। सबसे तेज और घातक है ब्रह्मोस ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो आवाज की रफ्तार से तीन गुना तेज चलती है। यह इतनी हाईटेक है कि इसे जमीन, समुद्र और आसमान तीनों ही जगह से लॉन्च किया जा सकता है। कहने का मतलब है कि ये मिसाइल इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम करती है कि दुश्मन कहीं भी छिपा हो, ब्रह्मोस उसे ढूंढ निकालेगी। इसकी रेज 500 किलोमीटर से ज्यादा है। वहीं 1 मीटर के भीतर सटीक वार और रडार से छिपने की ताकत इसे बेजोड़ बनाती है। इसकी रफ्तार के आगे दुश्मन के पास किसी तरह की प्रतिक्रिया करने का समय नहीं बचता। टैंकों का काल नाग मिसाइल किसी भी फौज की ब़ड़ी ताकत उसके टैंक होते हैं और उन टैंको का काल है नाग मिसाइल। यह एक फायर एंड फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। जैसा कि कुछ-कुछ नाम से समझ में आता है यह इतनी हाईटेक है कि एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद लक्ष्य को पहचान कर उसे खत्म कर देती है। दरअसल नाग मिसाइल थर्मल इमेजिंग सीकर का इस्तेमाल करती है, जिससे यह दिन-रात, धूल-धुंआ और हर मौसम में काम कर सकती है। इसमें इस्तेमाल की गई टॉप अटैक तकनीक टैंकों के सबसे मजबूत हिस्से को भी भेद सकती है। भारतीय सेना के रेगिस्तानी युद्धक्षेत्रों में यह दुश्मन के टैंकों का काल बन चुकी है। हवा में मौत का तीर है अस्त्र मिसाइल ​यह भारत की पहली स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल है। जो कि 100 किलोमीटर दूर उड़ते दुश्मन के विमान को एक झटके में मार गिराने की ताकत रखती है। इस मिसाइल में एडवांस्ड रडार होमिंग सिस्टम लगा है, जो लक्ष्य को लॉक कर उसे नष्ट कर देता है। इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने के लिए इसमें खास ECCM तकनीक लगी है। यह तेजस, सुखोई-30 और मिराज जैसे फाइटर जेट्स के लिए भारत का सबसे एडवांस और भरोसेमंद हथियार बन चुका है। जमीन पर दुश्मन के सर्वनाश के लिए शौर्य मिसाइल शौर्य एक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से जमीन पर पारंपरिक ही नहीं बल्कि परमाणु हमला भी कर सकती है। इसकी रफ्तार Mach 7.5 है यानी साउंड से साढ़े सात गुना तेज। इस मिसाइल की खासियत यह है कि बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने की वजह से यह दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला कर पाती है। 700 से 800 किलोमीटर की रेंज के साथ यह बहुत ही एडवांस और हाइटेक मिसाइल की कैटेगरी में आती है। इसकी हाइपरसोनिक तकनीक भारत को खतरनाक से खतरनाक युद्ध के लिए तैयार करती है।

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