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पहलगाम में आतंकी हमले के बाद तीन सक्रिय आतंकवादियों के घरों पर बुलडोजर चलवा दिया

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों पर ऐक्शन तेज हो गया है। आतंकवादी तंत्र के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए प्राधिकारियों ने बांदीपोरा, पुलवामा और शोपियां जिलों में तीन सक्रिय आतंकवादियों के घरों पर बुलडोजर चलवा दिया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात शोपियां जिले के वंडिना में आतंकवादी अदनान शफी का घर ध्वस्त कर दिया गया जो पिछले साल आतंकवादियों के समूह में शामिल हुआ था। उन्होंने बताया कि पुलवामा जिले में एक अन्य सक्रिय आतंकवादी आमिर नजीर का घर भी ढहा दिया गया। बांदीपुरा जिले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी जमील अहमद शेरगोजरी का घर जमींदोज कर दिया। शेरगोजरी 2016 से सक्रिय आतंकवादी है। इसके साथ ही पहलगाम हमले के बाद से अब तक आतंकवादियों और उनके सहयोगियों के नौ घरों को ध्वस्त किया जा चुका है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों की गोलीबारी में कम से कम 26 लोग मारे गए हैं, जिनमें अधिकतर पर्यटक शामिल थे। इस हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा था, ‘हम धरती के आखिरी छोर तक उनका (पहलगाम के हमलावरों का) पीछा करेंगे।’ बता दें कि गृह मंत्रालय ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच एनआईए को सौंप दी है। वहीं पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सेना के सूत्रों ने रविवार को बताया कि पाकिस्तानी सैनिकों ने लगातार तीसरी रात कुपवाड़ा जिले के नौगाम सेक्टर और बारामूला जिले के बोनियार सेक्टर से गोलीबारी की है। सेना ने “उचित छोटे हथियारों से गोलीबारी करके प्रभावी ढंग से जवाब दिया।” सेना के सूत्रों ने बताया, “26-27 अप्रैल 2025 की रात को पाकिस्तान सेना की चौकियों ने तुतमारी गली और रामपुर सेक्टर के सामने के इलाकों में नियंत्रण रेखा के पार बिना उकसावे के छोटे हथियारों से गोलीबारी की। हमारे जवानों ने उचित छोटे हथियारों से गोलीबारी करके प्रभावी ढंग से जवाब दिया।” उन्होंने बताया कि यह लगातार तीसरी रात है, जब पाकिस्तानी सेना ने अस्थिर नियंत्रण रेखा के पास कई स्थानों पर छोटे हथियारों से गोलीबारी की।

क्रीमिया पर किसी भी हद तक जाने को तैयार यूक्रेन, ट्रंप के शांति प्रस्ताव से भड़का

 कीव रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध और सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का क्रीमिया को रूस का हिस्सा बताने वाले प्रस्ताव ने यूक्रेनी सरकार को हैरान कर दिया है। इस प्रस्ताव को लेकर यूक्रेनी अधिकारी और जनता दोनों का स्पष्ट रूप से कहना है कि वे क्रीमिया को कभी भी रूस का हिस्सा नहीं मानेंगे, भले ही शांति समझौते के हिस्से के रूप में अस्थायी तौर पर इसे छोड़ना पड़े। यूक्रेन के नेताओं का मानना है कि ऐसा कदम उनके देश की संप्रभुता और संविधान के खिलाफ होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 2014 में रूस द्वारा अवैध रूप से क्रीमिया पर कब्जा करना और इसे छोड़ना कानूनी और राजनीतिक दृष्टिकोण से असंभव है। इसके लिए संविधान में बदलाव की आवश्यकता होगी और यह राजद्रोह माना जा सकता है। यूक्रेनी संसद और जनता इस विचार का कड़ा विरोध कर रहे हैं। यूक्रेनी संसद के सदस्य ओलेक्ज़ेंडर मरेझखो ने कहा, “हम कभी भी क्रीमिया को रूस का हिस्सा नहीं मानेंगे।” हालांकि, अधिकांश यूक्रेनी जनता यह समझती है कि शांति समझौते के हिस्से के रूप में क्रीमिया को अस्थायी रूप से छोड़ना हो सकता है, लेकिन इसे स्थायी रूप से खोने का विचार वे स्वीकार नहीं कर सकते। जेलेंस्की बता चुके लाल रेखा ट्रंप ने हाल ही में टाइम पत्रिका से साक्षात्कार में कहा था, “क्रीमिया रूस के पास रहेगा। ज़ेलेंस्की इसे समझते हैं और यह लंबे समय से उनके पास है।” जेलेंस्की ने बार-बार कहा है कि क्रीमिया को औपचारिक रूप से सौंपने का विचार उनके लिए “लाल रेखा” जैसा है। उनका कहना है कि ऐसा करना उनके लिए राजनीतिक आत्महत्या के समान होगा, और इससे उन्हें भविष्य में कानूनी कार्रवाई का सामना भी हो सकता है। यूक्रेनी सेना का कहना है कि वे तब तक लड़ते रहेंगे जब तक सभी यूक्रेनी क्षेत्र स्वतंत्र नहीं हो जाते। उन्होंने कहा, “हमने इस युद्ध में अपने सबसे अच्छे जवान खो दिए हैं। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक सभी यूक्रेनी भूमि मुक्त नहीं हो जाती।”

कनाडा में भीड़ में कार घुसने से कई लोगों की मौत, पुलिस की हिरासत में ड्राइवर

वैंकूवर (कनाडा) कनाडा के शहर वैंकूवर में भीड़ में कार घुसने से कई लोगों की मौत हो गई है. शनिवार शाम को एक स्ट्रीट फेस्टिवल में हुई इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है. वैंकूवर पुलिस ने X पर किए एक पोस्ट में कहा कि “शनिवार को स्थानीय समयानुसार 20:00 बजे (रविवार को 03:00 GMT) के कुछ समय बाद” एक ड्राइवर ने ई. 41वें एवेन्यू और फ्रेजर में एक स्ट्रीट फेस्टिवल में भीड़ में गाड़ी घुसा दी. पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान हम और जानकारी देंगे. स्थानीय मीडिया ने बताया कि वार्षिक लापु लापु फेस्टिवल के दौरान पैदल चलने वालों के एक समूह को एक कार ने टक्कर मार दी, जो फिलिपिनो संस्कृति का जश्न मनाता है. सोशल मीडिया पर अपुष्ट फुटेज में घटनास्थल पर कई पुलिस कारें, एम्बुलेंस और दमकल गाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं, और घायल लोग ज़मीन पर पड़े हुए थे. वैंकूवर के मेयर केन सिम ने एक्स पर एक बयान में कहा कि वह “आज के लापु लापु दिवस कार्यक्रम में हुई भयावह घटना से स्तब्ध और बहुत दुखी हैं”. उन्होंने आगे कहा, “हमारी संवेदनाएँ इस अविश्वसनीय रूप से कठिन समय में सभी प्रभावित लोगों और वैंकूवर के फिलिपिनो समुदाय के साथ हैं.”

एनआईए को सौंपी पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच , चश्मदीदों से बारीकी से की जा रही पूछताछ

नई दिल्ली पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई है। रविवार को एजेंसी के एक पुलिस महानिरीक्षक, एक पुलिस उपमहानिरीक्षक और एक पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में गठित टीमों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बायसरन घाटी में हुए हमले के चश्मदीदों से पूछताछ कर रही हैं। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद एजेंसी ने पहलगाम आतंकी हमला की जांच शुरू की है। अधिकारियों ने बताया कि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए चश्मदीदों से बारीकी से पूछताछ की जा रही है। एनआईए आतंकियों के प्रवेश और निकास बिंदुओं की बारीकी से जांच कर रही है। फोरेंसिक और अन्य विशेषज्ञों की सहायता से टीमें पूरे क्षेत्र की गहन जांच कर रही हैं, ताकि आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके। टीमें बुधवार से ही हमले वाली जगह पर डेरा डाले हुए हैं। हमले के बाद से पूरी कश्मीर घाटी में 63 आतंकी ठिकानों पर छापे मारे गए और 1,500 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। अकेले अनंतनाग से ही करीब 175 संदिग्ध पकड़े हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने श्रीनगर समेत कई अन्य जगहों पर भी आतंकियों व उनके समर्थकों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारकर संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय 14 स्थानीय आतंकियों की सूची जारी की गई है। ये आतंकी पाकिस्तानी दहशतगर्दों को रसद व जमीनी सहायता के अलावा सुरक्षित पनाह भी मुहैया कराते हैं। इनमें तीन हिजबुल मुजाहिदीन, आठ लश्कर और तीन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। अधिकारियों ने बताया, शुक्रवार रात पुलवामा, शोपियां व कुलगाम में आतंकियों के घर ध्वस्त किए गए। पुलवामा के मुरान में अहसान उल हक शेख का घर ढहाया गया। 2018 में पाकिस्तान में प्रशिक्षण लेने वाले अहसान ने हाल में घुसपैठ की थी। शोपियां के छोटीपोरा में लश्कर के शीर्ष कमांडर शाहिद अहमद कुट्टे का घर ध्वस्त किया गया। तीन-चार वर्षों से सक्रिय कुट्टे कई वारदातों में शामिल रहा है। कुलगाम के मतलहामा में जाकिर अहमद गनी का घर भी गिरा दिया गया। गनी 2023 से सक्रिय है। दक्षिण कश्मीर के कलरूस स्थित लश्कर आतंकी फारूक तीड़वा का घर ध्वस्त कर दिया गया। शोपियां के वांदिना जैनापोरा में आतंकी अदनान शफी का घर भी ढहाया गया। एक साल से सक्रिय शफी ने एक गैर स्थानीय श्रमिक की हत्या की थी। इससे पहले, हमले के मुख्य संदिग्ध सहित दो आतंकियों आदिल ठोकर व आसिफ शेख के घर तलाशी के दौरान विस्फोटक फटने से नष्ट हो गए थे। सुराग हासिल करने की कोशिश सुरक्षाबलों ने घाटी में मौजूद आतंकियों व उनके समर्थकों की व्यापक तलाश और धरपकड़ शुरू की है। हिरासत में लिए संदिग्ध आतंकी संगठनों से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओडब्ल्यूजी) व उनके मददगार हैं। इनमें से अधिकतर दक्षिण कश्मीर के चार जिलों से हैं। सुरक्षा एजेंसियां इनसे आतंकियों के ठिकानों का  पता हासिल करने की कोशिश में जुटी हैं। शनिवार को एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी सुरक्षाबलों ने शनिवार को श्रीनगर में भी एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापे मारे। अनंतनाग में भी सुरक्षाबल सख्त तलाशी अभियान चला रहे हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए पूरे जिले में मोबाइल वाहन जांच चौकियां बनाई गई हैं। बड़ी साजिश नाकाम: आतंकी ठिकाना ध्वस्त, हथियार बरामद कुपवाड़ा में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी ठिकाना ध्वस्त करते हुए बड़ी साजिश नाकाम कर दी। वहां से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद हुए हैं। मुश्ताकाबाद मच्छिल के सेदोरी नाला वन क्षेत्र में ठिकाने से पांच एके-47 राइफलें, आठ एके-47 मैगजीन, एक-एक पिस्तौल व मैगजीन, एके-47 की 660 गोलियां और एम4 गोला-बारूद की 50 गोलियां शामिल हैं। पुलिस ने दावा किया कि आतंकी क्षेत्र में शांति व व्यवस्था बिगाड़ने के मकसद से गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश कर रहे थे।

कुपवाड़ा के कंडी में आतंकियों ने की गोलीबारी, स्थानीय निवासी की मौत

जम्मू 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद एक बार फिर रविवार को आतंकियों ने कुपवाड़ा के कंडी में हमला किया है। इस बार आतंकियों ने स्थानीय निवासी को निशाना बनाते हुए गोलीबारी की। जिसमें एक शख्स घायल हो गया है, उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, कुपवाड़ा के कंडी खास निवासी गुल रसूल माग्रे पर आतंकियों ने गोलीबारी की है, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने बताया कि उनके पेट में गोली लगी थी। इधर, पहलगाम हमले के बाद से पूरी कश्मीर घाटी में 63 आतंकी ठिकानों पर छापे मारे गए और 1,500 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। अकेले अनंतनाग से ही करीब 175 संदिग्ध पकड़े हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने श्रीनगर समेत कई अन्य जगहों पर भी आतंकियों व उनके समर्थकों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारकर संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय 14 स्थानीय आतंकियों की सूची जारी की गई है। ये आतंकी पाकिस्तानी दहशतगर्दों को रसद व जमीनी सहायता के अलावा सुरक्षित पनाह भी मुहैया कराते हैं। इनमें तीन हिजबुल मुजाहिदीन, आठ लश्कर और तीन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं।

आतंकी चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए, मन की बात में बोले मोदी

 नई दिल्ली ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने एक बार फिर से पहलगाम हमले को लेकर दुख जताया और साथ ही पहलगाम के दोषियों को कड़ी सजा देने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि ‘पहलगाम की घटना ने देशवासियों को पीड़ा पहुंचाई है और इसे लेकर देशवासियों के मन में गहरी पीड़ा है। लोग पीड़ित परिजनों के दर्द को महसूस कर सकते हैं। हर भारतीय का खून आतंक की तस्वीरों को देखकर खौल रहा है। ऐसे समय में जब कश्मीर में शांति लौट रही थी और लोकतंत्र मजबूत हो रहा था। पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही थी और लोगों की कमाई बढ़ रही थी, लेकिन देश के दुश्मनों को और जम्मू कश्मीर के दुश्मनों को ये रास नहीं आया। आतंकी चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए। इस मुश्किल वक्त में 140 करोड़ देशवासियों की एकता सबसे बड़ा आधार है।’ प्रधानमंत्री बोले- पीड़ितों को न्याय मिलेगा, मिलकर रहेगा पीएम मोदी ने कहा कि ‘हमें इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने संकल्पों को मजबूत करना है। हमें एक दृढ़ राष्ट्र के रूप में अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करना है। भारत के लोगों में जो आक्रोश है, वो पूरी दुनिया में हैं। इस आतंकी हमले के बाद दुनियाभर से लगातार संवेदनाएं आ रही हैं। कई राष्ट्राध्यक्षों ने उन्हें भी फोन करके पहलगाम की घटना पर दुख जताया है। इस जघन्य तरीके से किए गए आतंकी हमले की सभी ने कठोर निंदा की है। पूरा विश्व आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश के साथ खड़ा है। मैं पीड़ित परिवारों को भरोसा देता हूं उन्हें न्याय मिलेगा…और न्याय मिलकर रहेगा। इस हमले के दोषियों को कठोरतम जवाब दिया जाएगा।’ बिहार की धरती से भी पीएम मोदी ने दी थी आतंक के आकाओं को चेतावनी इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते गुरुवार को बिहार की एक जनसभा में भी पहलगाम हमले के दोषियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि ‘आज बिहार की सरजमीं से मैं पूरी दुनिया से यह कहना चाहता हूं कि भारत इन लोगों की पहचान करेगा, उन्हें ढूंढेगा और हर आतंकी तथा उनकी मदद करने वालों को सजा देगा। हम उन्हें पृथ्वी के अंतिम छोर तक खदेड़ देंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद कभी नहीं तोड़ सकता। इंसाफ मिले, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इस दुनिया में जो भी इंसानियत के पक्ष में है, वह हमारे साथ है। इस वक्त दुनिया में जो हमारे साथ खड़ा है, हम उनके शुक्रगुजार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘यह हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है, देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि जिन्होंने यह हमला किया है, उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। सजा मिलकर रहेगी। अब आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति अब आतंक के आकाओं की कमर तोड़कर रहेगी।’

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 686.14 अरब डॉलर पर पहुंचा, 7 हफ्तों में 47.45 अरब डॉलर बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार

नई दिल्ली अमेरिकी टैरिफ से दुनिया भर की अर्थव्यस्था परेशान है लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर इसका कोई असर अभी तक नहीं दिखा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से  जारी लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, 18 अप्रैल, 2025 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.31 अरब डॉलर बढ़कर 686.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया. ये लगातार सातवां हफ्ता है, जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी देखने को मिली है. देश में सोने के भंडार में भी इजाफा हुआ है. उधर, पड़ोसी देश पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार (Pakistan Foreign Exchange Reserve) में कमी की खबर है. इसके पहले 11 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 1.57 अरब डॉलर बढ़कर 677.83 अरब डॉलर हो गया था. सितंबर, 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 704.89 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था. 3.52 अरब डॉलर बढ़ी एफसीए रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 3.52 अरब डॉलर बढ़कर 578.49 अरब डॉलर हो गईं. डॉलर में बताई जाने वाली एफसीए में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी फॉरेन करेंसी के मूल्य में बढ़ोतरी या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है. खास बात तो ये है कि अब भा​रत के विदेशी मुद्रा भंडार को अपना रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 19 अरब डॉलर से भी कम की जरुरत है. जो उसने 27 सितंबर को बनाया गया था. जिस तरह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा देखने को मिल रहा है. ऐसा लग रहा है कि मई का महीना खत्म होने से पहले भारत अपने फॉरेक्स रिजर्व के पुरे रिकॉर्ड के आंकड़े को पार कर लेगा. अगर बात लेटेस्ट आंकड़ों की करें तो 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 8 अरब डॉलर से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर​ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से किस तरह का डाटा जारी किया गया है. लगातार 7वें हफ्ते हुआ इजाफा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 8.31 अरब डॉलर बढ़कर 686.14 अरब डॉलर हो गया. लगातार सातवें सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई है. इसके पहले 11 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 1.57 अरब डॉलर बढ़कर 677.83 अरब डॉलर हो गया था. इन 7 हफ्तों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 47.45 अरब डॉलर का इजाफा देखने को मिल चुका है. 27 सितंबर, 2024 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 704.89 अरब डॉलर के लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गया है. खास बात तो ये है कि इस लेवल पर पहुंचने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को 18.74 अरब डॉलर यानी 1.60 लाख करोड़ रुपए की जरुरत है. गोल्ड रिजर्व में इजाफा रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का एक प्रमुख हिस्सा फॉरेन करेंसी असेट्स 3.52 अरब डॉलर बढ़कर 578.49 अरब डॉलर हो गईं. डॉलर के संदर्भ में उल्लेखित फॉरेन करेंसी असेट्स में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन-अमेरिकी करेंसीज की घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है. समीक्षाधीन सप्ताह में गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.57 अरब डॉलर बढ़कर 84.57 अरब डॉलर हो गया. विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 21.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.57 अरब डॉलर हो गया. केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार 70 लाख डॉलर बढ़कर 4.51 अरब डॉलर हो गया. पाकिस्तान के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट देखने को मिली है. पिछले सप्ताह बाहरी ऋण चुकौती के कारण देश के कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार में 226 मिलियन डॉलर की गिरावट आई. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) द्वारा जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल, 2025 तक देश का कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार 15.436 बिलियन डॉलर रहा, जबकि 11 अप्रैल, 2025 को यह 15.662 बिलियन डॉलर था. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान, बाहरी ऋण चुकौती के कारण एसबीपी भंडार 367 मिलियन डॉलर घटकर 10.206 बिलियन डॉलर रह गया. कमर्शियल बैंकों के भंडार में 140.5 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई, जो 5.09 बिलियन डॉलर से बढ़कर 5.23 बिलियन डॉलर हो गया.

भारत की जल Strike से Pakistan की हुई हालत पतली, बाढ़ या सूखा… दोनों से पाकिस्तान में हाहाकार मचना फाइनल

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव गहरा गया है. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है और 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया है. भारत की मार से पाकिस्तान अंदर तक हिल गया है और नेता गीदड़भभकी देने लगे हैं. सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के बाद पाकिस्तान पर संकट के बादल हैं. बाढ़ या सूखा… दोनों से पाकिस्तान में हाहाकार मचना तय है. हालात कुछ ऐसे हैं कि PAK को खुद पता नहीं है कि आगे क्या होने वाला है? दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई है. हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है, जिसे पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है. भारत भी साफ कर चुका है कि ‘सीमा पार आतंकवाद’ की जड़ें मिट्टी में मिला दी जाएंगी. भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए बड़े फैसले लिए हैं. भारत ने पाकिस्तान को कर दिया सूचित भारत ने पाकिस्तान को एक आधिकारिक पत्र के जरिए सूचित किया है कि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है. पत्र में भारत ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा निरंतर हो रहे सीमा-पार आतंकवाद के चलते यह निर्णय लिया गया है. क्या है सिंधु जल संधि? साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में जल बंटवारा हुआ था. संधि के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर पूर्ण नियंत्रण दिया गया था. जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदी पर अधिकार दिया गया था, जो जम्मू-कश्मीर से होकर बहती हैं. सवाल उठ रहा है कि जल-बंटवारे के समझौते के निलंबन से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? अब क्या बदलेगा? 1. इंडस जल आयुक्तों की बैठकें बंद अब दोनों देशों के जल आयुक्तों की सालाना बैठकें नहीं होंगी, जिससे संवाद और विवाद निपटाने के रास्ते बंद हो जाएंगे. दरअसल, संधि के तहत दोनों देशों के दो आयुक्तों को साल में एक बार बारी-बारी से मिलने की व्यवस्था दी गई थी. भारत द्वारा संधि को निलंबित करने के बाद अब ऐसी कोई बैठक नहीं होगी. 2. जल संबंधी आंकड़े नहीं मिलेंगे भारत अब पाकिस्तान को नदियों का प्रवाह, बाढ़ की चेतावनी और ग्लेशियर पिघलने की जानकारी नहीं देगा. इससे पाकिस्तान में बाढ़ या सूखे की संभावना बढ़ सकती है. संधि के तहत भारत, पाकिस्तान को समय पर हाइड्रोलॉजिकल डेटा सर्कुलेट करता आ रहा था. इसमें बाढ़ की चेतावनी जारी की जाती थी. नदी के प्रवाह को साझा करना और ग्लेशियर पिघलने के पैटर्न पर अलर्ट दिया जाता था. अब पाकिस्तान को सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल स्तर के बारे में जानकारी की कमी के कारण संभावित सूखे या बाढ़ का खतरा है. 3. परियोजनाओं के बारे में नहीं मिलेगी जानकारी भारत अब पश्चिमी नदियों पर अपने जलविद्युत परियोजनाओं को बिना पाकिस्तान से सलाह-मशविरा किए आगे बढ़ा सकेगा. यानी दोनों देशों के बीच सूचना का प्रवाह रुक जाएगा. इस संधि ने पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों पर भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन को चिह्नित करने का अधिकार दिया था. 4. पाकिस्तानी आयुक्त को जम्मू-कश्मीर में प्रवेश नहीं पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त अब भारतीय क्षेत्रों का निरीक्षण नहीं कर सकेंगे, जिससे उन्हें भारतीय परियोजनाओं की जानकारी नहीं मिलेगी. इससे पहले पाकिस्तान के आयुक्त पश्चिमी नदियों और भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं की स्थिति या रिपोर्ट लेने के लिए जम्मू-कश्मीर का दौरा करते आ रहे थे. 5. वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन नहीं अब स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं करेगा, जिससे पाकिस्तान की सिंचाई और कृषि योजनाएं प्रभावित होंगी. सिंधु जल संधि के अनुसार, स्थायी सिंधु आयोग (PIC), सिंधु प्रणाली के बंटवारे का प्रबंधन करने के लिए द्विपक्षीय निकाय है. इसे नदियों के साझा उपयोग पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करनी होती है. लेकिन भारत द्वारा समझौते को सस्पेंड किए जाने के कारण वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी, जिससे पाकिस्तान की सिंचाई और कृषि प्रणालियों के लिए जोखिम पैदा होगा. पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? पाकिस्तान पहले से ही वित्तीय और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा है. इस फैसले से उस पर दूरगामी असर पड़ने वाला है. पाकिस्तान कृषि के लिए सिंधु नदी पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. पाकिस्तान की 90% सिंचाई प्रणाली सिंधु नदी पर आधारित है. जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार का व्यवधान उसके कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है. पश्चिमी नदियों से पानी की आपूर्ति में कोई भी व्यवधान या भविष्य में व्यवधान पाकिस्तान में पानी की कमी को बढ़ा सकती है. फसल की पैदावार को कम कर सकती हैं और घरेलू अशांति को बढ़ावा दे सकती हैं. खासकर पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे पंजाब और सिंध जैसे प्रांतों में हालात बदतर हो सकते हैं. कृषि उत्पादन के अलावा बिजली आपूर्ति पर भी भारी असर पड़ेगा. पहले से ही पानी की कमी के कारण पाकिस्तान सालाना लगभग 19 मिलियन टन कोयला आयात करता है, लेकिन आगे कोयला आयात का वित्तीय बोझ और बढ़ सकता है. आज पाकिस्तान की जीडीपी का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कर्ज में डूबा हुआ है. पाकिस्‍तान के बिलबिलाने की वजह समझ‍िए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करने का फैसला किया है। इस फैसले से पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। यही कारण है क‍ि वह ब‍िलब‍िला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल डेटा साझाकरण में रुकावट, फसल के मौसम में पानी की कमी और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का पूरा इस्‍तेमाल करने के लिए कितने समय में बुनियादी ढांचा विकसित कर पाता है। इसमें एक दशक या उससे अधिक समय लग सकता है। सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर यह एक महत्वपूर्ण समझौता है। इस संधि के अनुसार, पूर्वी नदियां – सतलज, ब्यास और रावी – भारत को दी गईं। वहीं, पश्चिमी … Read more

पाक सेना प्रमुख मुनीर ने दो राष्ट्र सिद्धांत की वकालत करते हुए कहा कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं

इस्लामाबाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने शनिवार को एक बार फिर जहर उगला है। मुनीर ने दो राष्ट्र सिद्धांत की वकालत करते हुए कहा कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। शनिवार को मुनीर खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के काकुल इलाके में पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी (पीएमए) में कैडेटों की पासिंग आउट परेड को संबोधित कर रहे थे। अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात मुनीर ने कहा कि उनके पूर्वजों का मानना ​​था कि हिंदू और मुसलमान जीवन के हर संभव पहलू में अलग हैं। पहले भी दिए हैं विवादित बयान बता दें कि करीब एक हफ्ते पहले भी एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुनीर ने विदेश में रहने वाले पाकिस्तानियों से अपने बच्चों को देश की कहानी सुनाने को कहा था। मुनीर ने कहा कि मुसलमान जीवन के सभी पहलुओं धर्म, रीति-रिवाज, परंपरा, सोच और आकांक्षाओं में हिंदुओं से अलग हैं। दरअसल मुनीर अपने आकाओं के इशारे पर पाकिस्तान की आवाम में अपनी ही सरकार के खिलाफ उठ रही विद्रोह की आवाज को भटकाने के लिए ऐसे ऊल-जलूल बयान देते रहते हैं। पहलगाम हमले के बाद भारत के साथ तनाव के बीच उनके इस बयान को भी इसी रूप में देखा जा रहा है। जिन्ना की बात दोहरा रहे मुनीर     पाकिस्तान के खिलाफ भारत के सख्त रुख से वहां की आवाम भी खौफजदा है। इससे ध्यान भटकाने के लिए मुनीर ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पाकिस्तान के निर्माण के लिए बहुत बलिदान दिया। हम जानते हैं कि इसका बचाव कैसे करना है।     जिन्ना की टू नेशन थियरी का जिक्र करते हुए मुनीर ने कहा कि मारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। यहीं पर दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई थी। हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं।  

10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, कमाडों की पत्नी को सरकारी नौकरी,पहलगाम के पीड़ितों के लिए ममता का एलान

कोलकाता बंगाल सरकार जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हाल में हुए आतंकी हमले में मारे गए राज्य के तीन पर्यटकों के परिवार को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को इसकी घोषणा की। ममता ने कहा कि पीड़ित परिवार की ओर से मांग करने पर राज्य सरकार आश्रित को नौकरी भी देगी। कमांडो की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा ममता ने इसके साथ जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में गुरुवार को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान हुए बंगाल के नदिया जिला निवासी भारतीय सेना में पैरा कमांडो हवलदार झंटू अली शेख के परिवार को भी 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। बितान के माता-पिता को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन ममता ने पहलगाम आतंकी हमले के मृतकों में शामिल कोलकाता के बितान अधिकारी के बुजुर्ग माता-पिता को मासिक 10 हजार रुपये पेंशन देने की भी घोषणा की। साथ ही उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए राज्य सरकार उन्हें स्वास्थ्य साथी कार्ड भी मुहैया कराएगी। ममता ने कहा कि 10 लाख की आर्थिक सहायता में से पांच लाख बितान के माता-पिता जबकि पांच लाख रुपये उसकी पत्नी को दी जाएगी। ममता ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार संकट की इस घड़ी में मृतकों के स्वजनों के साथ हैं। आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या की थी मालूम हो कि 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में तीन लोग बंगाल से हैं। बंगाल के मृतकों की शिनाख्त कोलकाता के वैष्णवघाटा पाटुली निवासी बितान अधिकारी, बेहला साखेर बाजार के समीर गुहा और पुरुलिया जिले के झालदा निवासी मनीष रंजन मिश्रा के रूप में हुई। बितान अधिकारी अमेरिका में आइटी पेशेवर थे। समीर गुहा केंद्रीय कर्मचारी थे जबकि मनीष रंजन खुफिया विभाग (आइबी) के अधिकारी थे।

पाकिस्तान आए लोगों को सरकार के आदेश से सहमे हुए है, ये पाकिस्तान वापस नहीं जाना चाहते, भारत में मरना मंजूर है

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से भारत आए लोगों को वापसी का आदेश दिया है। इस आदेश से सबसे ज्यादा सहमे हुए वह लोग हैं जो पाकिस्तान छोड़ भारत में आकर बस गए हैं। ये सभी पाकिस्तानी अल्पसंख्यक हिन्दू हैं जो वहां के खराब हालातों से परेशान हो कर भारत आए थे। अब सरकार के आदेश के यह सभी लोग सहमे हुए है। ये पाकिस्तान वापस नहीं जाना चाहते। दरअसर 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने एक कायराना हमले को अंजाम दिया था जिसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने लोगों ने धर्म पूछकर उनको निशाना बनाया और कई लोगों को कलमा पढ़ने के लिए भी कहा। इस भयावह हमले की चपेट में आए लोगों की चीख अभी कानों में गूंज रही है। पूरा देश आतंकियों के खिलाफ सख्त ऐक्शन की मांग कर रहा है। इसी दौरान सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान से आए लोगों का विजा कैंसिल कर दिया और अब रविवार को पाकिस्तान वापस जाना होगा। इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को अपनी जान का डर सता रहा है। उन्हें लग रहा है कि उनका वापस जाना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के जैसलमेर में एक शरणार्थी कॉलोनी में पाकिस्तान से आए एक हजार से ज्यादा शरणार्थी हिन्दू रहते हैं जो शॉर्ट टर्म वीजा पर भारत आए हैं। ‘पाकिस्तान जैसे नर्क में नहीं जाना’ ये सभी लोग वाघा-अटारी बॉर्डर से भारत में दाखिल हुए थे। इन्हीं में से एक शख्स ने बताया कि वह पाकिस्तान के सिंध में रहते थे और वहां उत्पीड़न के चलते भारत आ गए थे। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच अब वापसी का ख्याल उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने कहा, उन्हें भारत में मरना मंजूर है लेकिन पाकिस्तान जैसे नर्क में जाना नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है कि उन्हें वापस ना भेजा जाए। उन्होंने कहा, हम पाकिस्तान से सब बेचकर यहां आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक न्य शख्स ने कहा, मेरा परिवार पाकिस्तान नहीं जाना चाहता। उससे अच्छी मौत है। उन्होंने कहा, हमारे पास जो भी था हमने छोड़ दिया है, हमें वापस मत भेजिए।

मीडिया संस्थानों से डिफेंस ऑपरेशंस और सुरक्षा बलों की लाइव कवरेज को दिखाने से बचने की दी सलाह: सरकार

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। सरकार ने शनिवार को मीडिया संस्थानों से डिफेंस ऑपरेशंस और सुरक्षा बलों की आवाजाही की लाइव कवरेज को दिखाने से बचने के लिए कहा है। इस एडवाइजरी के पीछे सरकार का तर्क है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से अनजाने में शत्रुतापूर्ण तत्वों को मदद मिल सकती है। यह सलाह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद रक्षा मामलों पर रिपोर्टिंग के मद्देनजर दी गई है। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी की गई सलाह में कहा गया है, “राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में, सभी मीडिया प्लेटफॉर्म, समाचार एजेंसियों और सोशल मीडिया यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे रक्षा और अन्य सुरक्षा-संबंधी अभियानों से संबंधित मामलों पर रिपोर्टिंग करते समय अत्यधिक जिम्मेदारी का प्रयोग करें और मौजूदा कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करें।” इसमें कहा गया है, “विशेष रूप से: रक्षा संचालन से संबंधित कोई भी रियल टाइम कवरेज, दृश्यों का प्रसार या सोर्स-आधारित’ जानकारी के आधार पर रिपोर्टिंग नहीं की जानी चाहिए।” सलाह में यह भी कहा गया है कि संवेदनशील जानकारी का समय से पहले खुलासा अनजाने में शत्रुतापूर्ण तत्वों की सहायता कर सकता है और परिचालन पर प्रभाव और कर्मियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। सलाह में कारगिल युद्ध, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों और कंधार अपहरण जैसी पिछली घटनाओं का हवाला दिया गया, जब कवरेज ने राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले थे।  

मोहन भागवत ने कहा- भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है, पड़ोसियों को तंग नहीं करते

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है। हिंदू मैनिफेस्टो इसी उद्देश्य से प्रस्तावित है, जो व्यापक चर्चा और सहमति के लिए प्रमाणित पुस्तक है। यह विश्व को नया रास्ता देने का भारत का कर्तव्य है, क्योंकि 2000 वर्षों के आस्तिक, नास्तिक और जड़वादी प्रयोग असफल रहे। भौतिक सुख बढ़ा, लेकिन असमानता और पर्यावरण हानि भी बढ़ी। एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन दृष्टि पर आधारित जीवन व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए। पुस्तक में आठ सूत्र पूर्ण हैं, लेकिन भाष्य काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं। पिछले 1500 वर्षों से नया शास्त्र नहीं आया, जिसके कारण जाति व्यवस्था जैसे दोष समाज में आए। वेदों का सही भाष्य आज आवश्यक है। शास्त्रों में अस्पृश्यता या जाति का कोई स्थान नहीं, जैसा उडुपी के संत समाज ने भी कहा। आततायियों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म: भागवत उन्होंने जोर दिया कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, लेकिन आततायियों को सबक सिखाना भी धर्म है। पड़ोसियों को तंग नहीं करते, लेकिन उपद्रव करने वालों को दंड देना राजा का कर्तव्य है। भ्रष्टाचारियों को छोड़ना उचित नहीं, क्योंकि धर्म में अर्थ और काम को मर्यादा में रखना जरूरी है। धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं करना चाहिए; यह सत्य, करुणा और सुचिता है। हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत: भागवत हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत है। हिंदू मैनिफेस्टो शास्त्रार्थ के माध्यम से शुद्ध परंपरा को सामने लाएगा और कालानुरूप स्वरूप स्थापित करेगा। यह पुस्तक विश्व कल्याण के लिए है, और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए।

पर्वतीय चुनौती और प्राकृतिक खतरों के बीच भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग परियोजना पर मंडराया संकट

हिमालय हिमालय की कठोर पर्वतीय चुनौती और प्राकृतिक खतरों के बीच भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग देवप्रयाग से जनासू तक का निर्माण कार्य अब सफलता के मुकाम पर पहुँच चुका है। यह न केवल इंजीनियरिंग की एक अनोखी मिसाल है, बल्कि परियोजना के दौरान आई कठिनाइयों और खतरों को मात देने की एक प्रेरक गाथा भी है। लगभग 14.57 किलोमीटर लंबी यह सुरंग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का हिस्सा है और इसे दुनिया में सबसे तेज़ गति से बनी सुरंगों में गिना जा रहा है। भयावह क्षण: जब सुरंग ढहने का बना खतरा इस मेगाप्रोजेक्ट के पीछे कार्यरत कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के परियोजना निदेशक राकेश अरोड़ा ने बताया कि सुरंग बोरिंग मशीन (TBM) “शक्ति” को जब सुरंग के करीब 5 किलोमीटर अंदर भेजा गया था, तभी 1,500 लीटर प्रति मिनट की दर से पानी का अत्यधिक बहाव शुरू हो गया। इस वक्त सुरंग के भीतर करीब 200 लोग मौजूद थे। अरोड़ा के शब्दों में, “यह हमारे लिए सबसे कठिन और डरावने क्षणों में से एक था। उस समय सुरंग में बाढ़ आने या उसके ढहने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था।” महीनों तक चला संघर्ष, इंजीनियरों ने खोजा समाधान खतरे को देखते हुए टीम ने फौरन सुधारात्मक उपाय शुरू किए। लेकिन परिस्थिति इतनी जटिल थी कि लगभग एक महीने तक कोई खास सुधार नहीं दिखा। अंततः इंजीनियरों ने सीमेंट ग्राउटिंग और रासायनिक मिश्रणों का इस्तेमाल कर सुरंग की रिंग और आसपास की चट्टानों को स्थिर करना शुरू किया। इससे पानी का दबाव कम हुआ और स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रित हुई। चट्टानों का दबाव और टीबीएम की भूमिका प्राकृतिक तौर पर हिमालय की चट्टानें बेहद नरम और अस्थिर होती हैं। ऐसे में बोरिंग मशीन पर भारी दबाव आया, जिससे निर्माण बाधित होने का खतरा पैदा हो गया। टीम ने स्थिति से निपटने के लिए बेंटोनाइट का उपयोग करते हुए टीबीएम के खुदाई कार्य को तेज किया। इसके चलते सुरंग निर्माण फिर से पटरी पर आया। विश्व रिकॉर्ड: पहली बार हिमालय में प्रयोग हुआ सिंगल शील्ड हार्ड रॉक टीबीएम यह परियोजना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार हिमालय की पहाड़ियों में खुदाई के लिए 9.11 मीटर व्यास वाली सिंगल शील्ड हार्ड रॉक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया गया। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सका। औपचारिक शुरुआत और ऐतिहासिक उपलब्धि 16 अप्रैल को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सुरंग के अंतिम ब्रेक-थ्रू की घोषणा की गई। देवप्रयाग और जनासू के बीच बनी यह सुरंग भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का हिस्सा देवप्रयाग-जनासू सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है। इस रेल लिंक के माध्यम से न केवल चारधाम यात्रा को सरल बनाया जा सकेगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कठिनाइयों के बीच सफलता की मिसाल इस परियोजना में जिस प्रकार प्राकृतिक आपदाओं और तकनीकी चुनौतियों को मात देकर लक्ष्य प्राप्त किया गया, वह भारतीय इंजीनियरिंग कौशल, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। देवप्रयाग-जनासू सुरंग केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि भविष्य की राह को प्रशस्त करने वाली एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त तक आयोजित होगी, सरकार ने यात्रा में जोखिम की जिम्मेदारी खुद लेने की सलाह दी

 नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से लोगों के बीच आक्रोश का माहौल है. इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए. इस बीच विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस साल भी कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन होगा. जून से अगस्त तक इसका आयोजन किया जाएगा. यह यात्रा बीते पांच सालों से बंद थी. विदेश मंत्रालय ने क्या जानकारी दी? विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस साल जून से अगस्त 2025 के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन होगा. इच्छुक यात्रा कैलाश यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इस साल यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथु ला दर्रे से होगी. पांच और दस बैंचों का संचालन किया जाएगा. प्रत्येक बैच में 50 यात्री शामिल होंगे. यात्रियों का चयन आवेदकों रैंडम सलेक्शन से कंप्यूटर द्वारा संचालित होगा. इसमें जेंडर बैलेंस का भी ध्यान रखा जाएगा. कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर चीन के साथ बनी सहमति गलवान घाटी में भारत-चीन के साथ हुए संघर्ष के बाद अब दोनों देश के बीच रिश्ते सुधर रहे हैं. भारत और चीन के बीच संवाद के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया. कोरोना महामारी के दौरान यात्रा पर ब्रेक लग गई थी. जिसके बाद सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हुआ. हालांकि, भारत ने इस मुद्दे को लगातार चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर उठाया. 2019 के बाद यह पहली बार है जब मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी. बीते साल, अक्टूबर (2024) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी. जिसके बाद सीमा तनाव घटा और यात्रा की दिशा में प्रगति हुई. यात्रा के लिए सरकार की एडवाइजरी विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में इसकी जानकारी दी है। इस साल यात्रा करने वाले लोगों के लिए दो रास्ते हैं। उत्तराखंड राज्य में लिपुलेख पास से 5 जत्थे जाएंगे। हर जत्थे में 50 यात्री होंगे। सिक्किम राज्य में नाथू ला पास से 10 जत्थे जाएंगे। यहां भी हर जत्थे में 50 यात्री होंगे। कुल मिलाकर, यात्रा में शामिल होने वाले लोगों के लिए सरकार ने इंतज़ाम कर दिया है। यात्रा के लिए सरकार की एडवाइजरी इस यात्रा में प्रतिकूल हालात, अत्यंत खराब मौसम में ऊबड़-खाबड़ भू-भाग से होते हुए 19,500 फुट तक की चढ़ाई चढ़नी होती है और यह उन लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है जो शारीरिक और मेडिकली तंदुरुस्त नहीं हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण अथवा किसी भी अन्य कारण से किसी यात्री की मृत्यु अथवा उसके जख्मी होने अथवा उसकी संपत्ति के खोने अथवा क्षतिग्रस्त होने के लिए किसी भी तरह से वो जिम्मेदार नहीं होगी। जोखिम की जिम्मेदारी खुद लें-सरकार तीर्थयात्री यह यात्रा पूरी तरह से अपनी इच्छा शक्ति के बल पर तथा खर्च, जोखिम और परिणामों से अवगत होकर करते हैं। किसी तीर्थयात्री की सीमा पार मृत्यु हो जाने पर सरकार की उसके पार्थिव शरीर को दाह-संस्कार के लिए भारत लाने की किसी तरह की बाध्यता नहीं होगी। लिहाजा मृत्यु के मामले में चीन में पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के लिए सभी तीर्थ यात्रियों को एक सहमति प्रपत्र पर हस्ताक्षर करना होता है। यह सभी जानकारी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दी गई है। कहां से शुरू होगी यात्रा यह यात्रा उत्तराखंड, दिल्ली और सिक्किम राज्य की सरकारों और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से आयोजित की जाती है। कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) और उनके संबद्ध संगठन भारत में यात्रियों के हर जत्थे के लिए सम्भारगत सहायता और सुविधाएं मुहैया कराते हैं। दिल्ली हार्ट एवं लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) इस यात्रा के लिए आवेदकों के स्वास्थ्य स्तरों के निर्धारण के लिए चिकित्सा जांच करता है।  

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