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लगातार तीसरे महीने रोजगार में गिरावट के चलते गहराया संकट, 42 लाख भारतीयों की नौकरियां खतरे में, बढ़ी चिंता

नई दिल्ली देश में रोजगार के अवसर घटने की चिंता बढ़ती जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 में भारतीय श्रम बाजार में गिरावट आई है जिससे करीब 42 लाख लोगों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। इस दौरान कई लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है और कई ने रोजगार की तलाश पूरी तरह से बंद कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार फरवरी के मुकाबले मार्च में श्रम बल 45.77 करोड़ से घटकर 45.35 करोड़ हो गया जो नवंबर 2024 के बाद से सबसे कम है। साथ ही रोजगार की संख्या भी फरवरी में 41.91 करोड़ से घटकर मार्च में 41.85 करोड़ रह गई है। यह लगातार तीसरे महीने रोजगार में गिरावट को दर्शाता है। बेरोजगारी बढ़ने के बावजूद रोजगार में गिरावट रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च में बेरोजगारों की संख्या 3.86 करोड़ से घटकर 3.5 करोड़ रह गई। फरवरी के मुकाबले मार्च में करीब 36 लाख लोग सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश नहीं कर रहे थे जो शायद रोजगार के अवसरों की कमी के कारण श्रम बाजार से बाहर हो गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आमतौर पर हर महीने बेरोजगारों की संख्या में करीब 10 लाख की शुद्ध वृद्धि होती है लेकिन इस बार मार्च में बेरोजगारी दर 8.4 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वाइट कॉलर हायरिंग में कमी मार्च 2024 की तुलना में इस साल मार्च में वाइट कॉलर हायरिंग (ऑफिस में काम करने वालों की भर्ती) में भी 1.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इसका मुख्य कारण खुदरा, तेल-गैस और शिक्षा क्षेत्रों में भर्ती की गिरावट है। रिपोर्ट के अनुसार होली और ईद की छुट्टियों के बावजूद वाइट कॉलर रोजगार बाजार में बदलाव आया है लेकिन यह गिरावट पिछले साल की समान अवधि की तुलना में मामूली रही। खुदरा क्षेत्र में 13 प्रतिशत, तेल-गैस में 10 प्रतिशत और शिक्षा क्षेत्र में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी क्षेत्र में भी हायरिंग में 3 प्रतिशत की कमी आई है। नौकरी के अवसरों में कमी का प्रभाव देश में रोजगार की स्थिति के बारे में बढ़ती चिंता यह संकेत देती है कि नौकरी के अवसर लगातार घट रहे हैं जिससे आर्थिक असंतुलन पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में रोजगार बाजार पर और भी बुरा असर हो सकता है।  

जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे तब क्यों चुप थे जब गरीब का हक वक्फ माफिया मार रहे थे: कशि वारसी

मुंबई वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा में पेश कर दिया गया है। अब वक्फ बिल पर सियासत तेज हो गई है। कई दलों का विरोध जारी है। वक्फ बिल पर मुस्लिम संगठनों का विरोध भी जारी है। वहीं कुछ ने बिल का समर्थन किया। इस बीच भारतीय सूफी फाउंडेशन पर भी रिएक्शन आ गया है। भारतीय सूफी फाउंडेशन के सदर कशिश वारसी ने कहा कि जो लोग इस बिल की मुखालफत कर रहे हैं, ये तब क्यों चुप थे जब गरीब मुसलमानों का हक वक्फ माफिया मार रहे थे। आज ये हालात क्यों आए? कशिश वारसी ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि यह बिल कल्याण के लिए है। संसद में कहा गया कि वक्फ के पास करोड़ों की आय और संपत्ति है। उन्होंने सवाल किया कि जब अगर ऐसा होता तो मुसलमान गरीब क्यों रहते? वक्फ बोर्ड और वक्फ माफियाओं ने गरीब मुसलमानों के लिए स्कूल, अस्पताल और घर क्यों नहीं बनाए? वे कह रहे हैं कि वे कोर्ट जाएंगे। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि जब वक्फ माफिया गरीब मुसलमानों के अधिकार छीन रहे थे, तब वे चुप क्यों थे? वारसी ने सवाल किया कि आप कह रहे हैं कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। नीयत खराब है। अगर सरकार की नीयत खराब है तो आप कहते हैं आप हाईकोर्ट जाएंगे। आप हाईकोर्ट जाइए दरवाजा खुला है लेकिन पहले वक्फ बिल को पढ़िए। अगर उसमें कुछ कुछ गलत है तो संसद बहस के लिए खुली है। संसद में सवाल उठा सकते हैं। आप हाईकोर्ट जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। मैं तो कहूंगा इससे पहले आपकी जुबान क्यों बंद थी? जब हक मारा जा रहा था। आपको बता दें कि लोकसभा में पास होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक के सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। उच्च सदन में भी विधेयक पर पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। सत्ता पक्ष ने वक्फ जमीनों के दुरुपयोग और अवैध कब्जों का मुद्दा उठाते हुए संशोधनों की जमकर पैरवी की।

राज्यसभा में फिल्म एल2 एमपुरान को लेकर विवाद पर सुरेश गोपी का चढ़ गया पारा, रिजिजू ने बढ़कर किया शांत

नई दिल्ली राज्यसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया जब केंद्रीय मंत्री और मशहूर एक्टर सुरेश गोपी ने फिल्म एल2 एमपुरान को लेकर उठे विवाद पर खुलकर जवाब दिया। जैसे ही सीपीआई सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि फिल्म पर 2002 के गुजरात दंगों की झलक दिखाने की वजह से राजनीतिक दबाव डाला गया, सुरेश गोपी भड़क उठे और अपनी कुर्सी से खड़े होकर सफाई पेश की। सुरेश गोपी को तमतमाया देख केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में दखल देकर उन्हें शांत कराया। जॉन ब्रिटास को जवाब देते हुए सुरेश गोपी ने कहा, “ये सिर्फ एक सच्चाई है, जिसे मैं हर भारतीय को बताना चाहता हूं। फिल्म के निर्माताओं पर सेंसर बोर्ड या किसी अन्य संस्था की कोई दबाव नहीं था। सुरेश गोपी ने ये भी खुलासा किया कि फिल्म के थैंक यू कार्ड से उनका नाम हटाने का फैसला खुद उनका था। जॉन ब्रिटास के आरोपों का सुरेश गोपी ने दिया जवाब गोपी उन्होंने कहा, “मैंने खुद फोन करके निर्माताओं से कहा कि मेरा नाम हटा दें। ये मेरा फैसला था और अगर ये झूठ निकले तो मैं हर सजा भुगतने को तैयार हूं।” उन्होंने बताया कि फिल्म से 17 हिस्से हटाने का निर्णय निर्देशक और मुख्य अभिनेता की सहमति से निर्माताओं ने खुद लिया था। इससे पहले भी सुरेश गोपी इस मुद्दे पर मीडिया से मुखातिब हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, “तो विवाद है क्या? कौन विवाद खड़ा कर रहा है? ये सब बिजनेस है, लोगों की मानसिकता से खिलवाड़ कर पैसा कमाने का तरीका है।” क्यो मचा है मोहनलाल की फिल्म एल2 एमपुरान पर बलाल दरअसल, मोहनलाल स्टारर फिल्म एल2 एमपुरान में 2002 के गुजरात दंगों को एक काल्पनिक रूप में दिखाया गया है, जिसमें पृथ्वीराज का किरदार जायेद मसीद इन घटनाओं से प्रभावित दिखता है। इस पर सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में आपत्ति जताई गई, जिसके बाद निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड से संपर्क कर स्वेच्छा से 24 कट लगाए। इनमें एक किरदार का नाम बदलना, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के दृश्य और धार्मिक स्थलों से जुड़े सीन हटाना शामिल है।

भारत समेत इन देशों में बॉयकॉट USA मुहिम तेज, ट्रंप के लिए जी का जंजाल बना ‘टैरिफ दांव’

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को विभिन्न देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी शुल्क) की घोषणा करते हुए एक चार्ट दिखाया था, जिसमें भारत, चीन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर लगाई जाने वालीं नई टैक्स दरों का उल्लेख था। इस चार्ट के मुताबिक, भारत पर 26 फीसदी तो चीन पर 34 फीसदी (कुल 54 फीसदी) कर लगाया गया है। यूरोपीय देशों पर भी भारी भरकम टैक्स लगाया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नई दरें तब तक लागू रहेंगी जब तक कि अमेरिका पिछले साल दर्ज किए गए 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार असंतुलन को कम नहीं कर लेता। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से दुनियाभर में खलबली है। अमेरिकी स्टॉक मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है। गुरुवार को ही अमेरिकी बाजार नैस्डैक करीब 6% टूट गया और Dow Jones इंडेक्स में 1600 अंकोंकी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका पर मंदी का खतरा मंडराने की भी आशंका जताई जा रही है। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नए टैरिफ का बोझ अमेरिकी कंपनियों पर ही पड़ेगा और अंतत: अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही वे बोझ डाले जाएंगे। दूसरी तरफ कई देश जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। इस बीच, अब सोशल मीडिया पर अमेरिकी वस्तुओं और खुद संयुक्त राज्य अमेरिका के बहिष्कार का आह्वान किया जाने लगा है। ट्रंप की घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर #BoycottUSA ट्रेंड करने लगा है। इतना ही नहीं गूगल सर्च में भी इसे दुनियाभर में सर्च किया जाने लगा है। Google सर्च डेटा के अनुसार, भारत समेत करीब एक दर्जन देशों में लोग BoycottUSA के बारे में सर्च कर रहे हैं। ऐसे देशों में भारत के अलावा कनाडा, यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विटजरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। गूगल पर लोग क्या सर्च कर रहे? न्यूजवीक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से लेकर यूरोप और आस्ट्रेलिया तक लोग गूगल पर “अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करें (us products to boycott)”, “अमेरिकी उत्पादों की सूची का बहिष्कार करें (list of American products to boycott)”, “अमेरिकी ब्रांडों का बहिष्कार करें (American brands to boycott)” और “अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार कैसे करें (how to boycott American products)” जैसे सवाल खोज रहे हैं। इतना ही नहीं, कई लोग अपनी वैकेशन ट्रिप कैंसल कर रहे हैं और अमेरिका नहीं जाने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। कनाडाई लेखक जेफरी लुस्कोम्ब ने एक्स पर #BoycottUSA के साथ पोस्ट किया, “हमने पिछले महीने के लिए बुक की गई फ्लोरिडा की होली डे ट्रिप रद्द कर दी है। कनाडा में ही रहने का फैसला किया। सुना है कि कुछ अन्य कनाडाई लोगों ने भी ऐसा ही किया है। इसी तरह एक अन्य यूजर ने एक्स पर लिखा, “मैं अब कभी अमेरिका नहीं जाऊँगा। जहाँ तक संभव होगा, मैं अमेरिकी वस्तुओं और कंपनियों का बहिष्कार करूँगा।” अमेरिका में पर्यटकों की संख्या में गिरावट का अंदेशा रिसर्च फर्म टूरिज्म इकोनॉमिक्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि 2025 में अमेरिका की यात्रा में 5.5 फीसदी तक की गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि, #BoycottUSA का ट्रेंड पहली बार नहीं चला है। जब डोनाल्ड ट्रम्प मे इस साल जनवरी में शपथ ग्रहण किया था, तभी से #BoycottUSA शब्द ऑनलाइन ट्रेंड करने लगा था। मार्च में, कनाडा, मैक्सिको, भारत और चीन समेत करीब पांच दर्जन देशों पर ट्रंप के टैरिफ दांव के बाद यूरोपीय संघ और कनाडा में इस तरह के हैशटैग और सर्च में तेजी से उछाल आया है।

सरकार द्वारा दी गई जानकारी, भारतीय रेलवे के ट्रैक नेटवर्क के विस्तार के लिए चार परियोजनाओं को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे के ट्रैक नेटवर्क के विस्तार के लिए 18,658 करोड़ रुपये के निवेश से चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शुक्रवार को सरकार द्वारा यह जानकारी दी गई। तीन राज्यों (महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़) के 15 जिलों को कवर करने वाली चार परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 1,247 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं में संबलपुर-जरापड़ा तीसरी और चौथी लाइन, झारसुगुड़ा-सासोन तीसरी और चौथी लाइन, खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा पांचवीं और छठी लाइन और गोंदिया-बल्हारशाह रेलवे लाइन का दोहरीकरण शामिल हैं। आधिकारिक बयान में कहा गया कि बढ़ी हुई लाइन क्षमता से मोबिलिटी में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की दक्षता बढ़ेगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्ततम खंडों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। ये परियोजनाएं पीएम मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाएंगी, जिससे उनके लिए रोजगार/अवसरों में वृद्धि होगी। ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा हैं, जिसमें एकीकृत योजना की आवश्यकता होती है और ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इन परियोजनाओं के साथ, 19 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे दो आकांक्षी जिलों (गढ़चिरौली और राजनांदगांव) की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 3,350 गांवों और लगभग 47.25 लाख आबादी की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा लाइन बलौदा बाजार जैसे नए क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और इससे क्षेत्र में सीमेंट संयंत्रों सहित नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की संभावनाएं पैदा होंगी। सरकार ने बयान में आगे कहा कि ये लाइनें कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। नए ट्रैक बनने से 88.77 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी।

वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस और मतदान के वक्त तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद अनुपस्थित थे, अब एक्शन लेंगी ममता बनर्जी!

कोलकाता बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) शुरू से ही वक्फ संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इस मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मुखर रही है। इस बीच लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस और मतदान के वक्त तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद अनुपस्थित थे। तृणमूल सूत्रों के अनुसार, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का एक वर्ग इसको लेकर नाराज है। पार्टी इनकी अनुपस्थिति पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से चर्चा के बाद इन तीनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। पार्टी सूत्रों ने इसके संकेत दिए हैं। टीएमसी के ये सांसद रहे अनुपस्थित अनुपस्थित रहने वाले सदस्यों में घाटल के सांसद व अभिनेता दीपक अधिकारी उर्फ देव, बीरभूम की सांसद और अभिनेत्री शताब्दी राय और कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया शामिल हैं। इनमें बसुनिया ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कूचबिहार से पहली बार जीत दर्ज की थी।लोकसभा में तृणमूल के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने कहा कि ये तीनों सदस्य संसद में वक्फ पर बहस के दौरान मौजूद नहीं थे। तृणमूल सूत्रों के अनुसार, इनमें से केवल देव ने ही संसदीय दल के सदस्य को बताया था कि वह शूटिंग के लिए झारखंड में हैं। इसलिए वह संसद में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। बाकी दोनों सांसदों ने अपनी अनुपस्थिति को लेकर पार्टी को जानकारी नहीं दी थी। इस संबंध में कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया ने कहा कि अचानक एक अप्रैल को मुझे पता चला कि अगले दिन वक्फ विधेयक पेश किया जाएगा। मैं एक पारिवारिक समस्या में फंस गया था, इसलिए मैं नहीं जा सका। अगर मुझे थोड़ा पहले पता होता तो मैं निश्चित रूप से उस दिन संसद की कार्यवाही में शामिल हो जाता। सासंदों के उपस्थित ना रहने से नाराज हैं सीएम ममता इधर, अब पार्टी इन सांसदों के लिए क्या रास्ता अपनाती है, इस बारे में फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। तृणमूल संसदीय दल के सूत्रों के अनुसार, तीनों सांसदों के संबंध में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से चर्चा के बाद ही आगे का कदम उठाया जाएगा। ममता लोकसभा और राज्यसभा में तृणमूल संसदीय दल की अध्यक्ष हैं।

हिंदू संगठनों राम नवमी पर रैली निकालने की इजाजत तो मिल गई है लेकिन शर्तें भी लगाई, हाई कोर्ट ने अब आदेश जारी किया

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राम नवमी के दिन रैली निकालने को लेकर कोलकाता पुलिस द्वारा इजाजत न मिलने पर आक्रोश दिख रहा था। इस मामले में हाई कोर्ट ने अब आदेश जारी किया है, जिसमें हिंदू संगठनों राम नवमी पर रैली निकालने की इजाजत तो मिल गई है लेकिन शर्तें भी लगाई गई हैं, जिसके तहत रैली में हथियार इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे। दरअसल, कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए जीटी रोड के रास्ते पिछले 15 वर्षों से चली आ रही पारंपरिक रामनवमी शोभायात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर इसके जवाब में अंजनी पुत्र सेना नामक संगठन ने इस पारंपरिक मार्ग पर रैली निकालने की अनुमति के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसी पर अब कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। हिंदू संगठनों ने मांगी थी परमिशन जिस रूट से यात्रा के लिए पुलिस ने परमिशन दी थी, वह अंजनी पुत्र सेना, वीएचपी और दुर्गा वाहिनी के लोगों को मंजूर नहीं था। हिंदू संगठन पुराने रूट पर ही यात्रा की मांग कर रहे थे। ऐसे में कोर्ट ने हिदू संगठनों की मांगों को कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा मान लिया है। उन्हें उसी पुराने रूट से यात्रा की अनुमति दी गई गई है। हाई कोर्ट ने इजाजत के साथ लगाई हैं शर्तें हालांकि, हाई कोर्ट ने कई तरह की शर्तें भी लगाई हैं। इसके तहत लोगों को कहा गया है कि किसी भी तरह की कोई बाइक रैली नहीं होगी। कोर्ट ने हथियार या गोला-बारूद नहीं होगा। रैली में डीजे या बाइक नहीं होगी। सभी रैलियां जीटी रोड के एक ही मार्ग पर होंगी। पुलिस को स्थिति का ध्यान रखने को कहा गया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह लगातार दूसरा साल है, जब प्रशासन ने इस जुलूस पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार को ‘जय श्री राम’ के नारे से परेशानी है। इन विवादों के बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने रामनवमी के अवसर पर शांति की अपील करते हुए कहा कि सभी को पूजा करने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी दंगा जैसी स्थिति पैदा नहीं करनी चाहिए।

मोहम्मद यूनुस से पीएम मोदी ने की बेमन से मुलाकात? तस्वीरों और वीडियो में दिखी तल्‍खी, पहले किया था मिलने से मना

बैंकॉक  बैंकॉक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के बीच मुलाकात हुई है। पहले संभावना जताई गई थी मुलाकात नहीं हो सकती है, लेकिन बांग्लादेश ने बार बार इस द्विपक्षीय बैठक के लिए आग्रह किया था। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शेख हसीना, चिकन नेक, चीन से दोस्‍ती को लेकर बातचीत की गई है। ये मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली है। दोनों नेताओं की मुलाकात उस वक्त हुई है जब बांग्लादेश और भारत के बीच के संबंध तनावपूर्ण हो चुके हैं। वहीं मोहम्मद यूनुस ने हाल ही में चीन का दौरा किया था, जहां बीजिंग में उन्होंने बांग्लादेश को ‘समंदर का गार्जियन’ बताया था। जिसका जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि बंगाल की खाड़ी में सबसे ज्यादा तटरेखा भारत की है। बैंकॉक में छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। क्योंकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले लगातार हमलों और शेख हसीना के भारत में रहने को लेकर ढाका और दिल्ली के बीच महीनों से तनाव बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के अनुरोध पर प्रधानमंत्री मोदी, मोहम्मद यूनुस से मिलने के लिए तैयार हुए थे। इससे पहले मोहम्मद यूनुस ने पिछले साल दिसंबर में नई दिल्ली आने के लिए अनुरोध भेजा था, लेकिन भारत की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस में मुलाकात बीजिंग की यात्रा के दौरान मोहम्मद यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र और भूटान, नेपाल और बांग्लादेश में “चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार” की बात की थी, जिसने दिल्ली को आक्रोश में भर दिया है। नई दिल्ली को बांग्लादेश के एंटी इंडिया रूख से चिंता है और भारत को मोहम्मद यूनुस के रवैये पर गहरा शक है। इस मुलाकात के दौरान आई तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि द्विपक्षीय वार्ता के लिए बैठने से पहले दोनों नेताओं ने एक दूसरे से हाथ मिलाया। गुरुवार रात बिम्सटेक नेताओं के रात्रिभोज में भी मोदी और यूनुस एक दूसरे के बगल में बैठे देखे गए थे, जिससे दोनों नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थी। इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश संबंधों में मौजूदा तनावपूर्ण दौर के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है. इससे पहले दोनों नेताओं को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा की ओर से आयोजित डिनर में एक-साथ देखा गया था. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब मोहम्मद यूनुस अपने चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वार्ता को लेकर विवादों में रहे हैं. चीन दौरे पर गए बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चीन की धरती पर कहा था कि इस क्षेत्र के समंदर का एक मात्र गार्जियन ढाका है. चीन को अपने देश में निवेश करने का न्योता देते हुए यूनुस ने कथित तौर पर भारत की मजबूरियां गिनाई थी और चीन को लुभाते हुए कहा था कि उसके पास बांग्लादेश में बिजनेस का बड़ा मौका है. मोहम्मद यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है. वे चारों ओर से भूमि से घिरे हुए देश हैं, भारत का लैंड लॉक्ड क्षेत्र हैं. उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. इस पूरे क्षेत्र में जो समंदर है उसका एक मात्र गार्जियन बांग्लादेश है. हालांकि, पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता को लेकर दोनों ही देशों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है. अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ा. भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर बार-बार चिंता जताई है. बता दें कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात  पिछले साल पांच अगस्त को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद पहली बार हुई है. बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना तभी से भारत में रह रही हैं.

इजरायली हमलों ने बढ़ाई तुर्की की मुश्किल, तिलमिलाया तुर्की, यहूदी देश को बताया सबसे बड़ा खतरा

अंकारा  तुर्की को इस्लामिक खिलाफत का उत्तराधिकारी समझने वाले राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन अब यहूदी देश इजरायल पर हमलावर हैं। उन्होंने इजरायल को क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। तुर्की ने कहा कि इजरायल को सीरिया से हट जाना चाहिए और वहां स्थिरीकरण के प्रयासों को नुकसान पहुंचाना बंद करना चाहिए। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा, इजरायल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। यह रणनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाला, अराजकता पैदा करने वाला और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला है। तुर्की का बयान ऐसे समय में आया है, जब इजरायल ने सीरिया में अपने हमले तेज कर दिए हैं। इजरायली अधिकारियों ने तुर्की को सीरिया से दूर रहने को कहा है। इजरायल ने तुर्की पर सीरिया को अंकारा संरक्षित क्षेत्र में बदलने की कोशिश का आरोप लगाया है। इजरायली वायु सेना ने  सीरिया में हवाई ठिकानों पर हमले किए थे, जिन्हें मध्य सीरिया का हवाई क्षेत्र भी शामिल है। तुर्की की नजर इस हवाई अड्डे पर थी। इजरायली हमलों ने बढ़ाई तुर्की की मुश्किल इजरायली हमलों से अंकारा के लिए सैनिकों, हवाई सुरक्षा और अन्य उपकरणों को सीरिया में पहुंचाना और सामान्य रूप से सुविधाओं को संचालित करना कठिन हो जाएगा। रिपोर्ट बताती हैं कि सीरिया के टी4 हवाई क्षेत्र में सेट अप स्थापित कर रहा है। यह इजरायली हवाई संचालन के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। आईडीएफ ने टेलीग्राम पर बताया कि पिछले कुछ घंटों में इसने सीरियाई ठिकानों हमा और टी4 पर बची हुई सैन्य क्षमता के साथ ही दमिश्क में सैन्य संरचना स्थलों पर हमला किया। आईडीएफ इजरायली नागरिकों के लिए किसी भी खतरे को दूर करने का काम जारी रखेगा। एस-400 की तैनाती की योजना यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की का इरादा T4 बेस को ड्रोन सुविधा में बदलने का है। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया में पुनर्निर्माण प्रयासों के दौरान ‘हवाई क्षेत्र को सुरक्षित के लिए टी4 या पाल्मेरा में एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की अस्थायी तैनाती पर विचार हो रहा है।’ हालांकि, इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और तुर्की को इसके लिए रूस से मंजूरी लेनी होगी।

कोच निर्माण में दुनिया का अग्रणी देश बनकर उभरा भारत, भारतीय रेल का नया कीर्तिमान

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने पिछले वित्त वर्ष में 9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज करते हुए 7,134 कोच बनाए, आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पिछले दशक में 5481 कोच बनाए थे, जो अब नया रिकॉर्ड है। गैर-एसी सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करते हुए, भारतीय रेलवे 2024-25 में 4,601 कोच बनाएगी। रेल मंत्रालय के अनुसार, आईसीएफ चेन्नई ने 3,000 की वार्षिक सीमा को पार करते हुए 178 ज्यादा कोच बनाए, आरसीएफ कपूरथला ने 201 और एमसीएफ रायबरेली ने 341 ज्यादा कोच बनाकर रिकॉर्ड उत्पादन की प्रतिष्ठित यात्रा में योगदान दिया। यह वृद्धि, बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने के लिए रेलवे अवसंरचना के आधुनिकीकरण पर भारत के बढ़ते जोर को दर्शाती है। घरेलू विनिर्माण में वृद्धि आपको बता दें, 2004 से 2014 के बीच, भारतीय रेलवे ने प्रति वर्ष औसतन 3,300 से कम कोच का निर्माण किया। हालांकि, 2014 से 2024 के दौरान, उत्पादन में 54,809 कोचों के उत्पादन के साथ प्रति वर्ष औसतन 5,481 कोचों के उत्पादन के साथ बड़ी वृद्धि दर्ज की गई, जो रेलवे विनिर्माण में बेहतर परिवहन-संपर्क सुविधा पर जोर और आत्मनिर्भरता के अनुरूप है। यह विस्तार घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता को कम करने और रेलवे डिजाइन में उन्नत प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। यात्री अनुभव और परिवहन-संपर्क सुविधा में सुधार रिकॉर्ड कोच उत्पादन सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ विजन के अनुरूप है, जो घरेलू विनिर्माण को सक्षम करने के साथ-साथ बेहतर सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सुनिश्चित करता है। अधिक कोच पेश किए जाने से, यात्री बेहतर सुविधाओं, बढ़ी हुई सुरक्षा सुविधाओं और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बढ़ी हुई क्षमता की उम्मीद कर सकते हैं। यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया पहल’ को मजबूत करती है इसके अतिरिक्त, यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया पहल’ को मजबूत करती है, जिससे रेल-निर्माण में भारत की प्रमुख भूमिका को बल मिलता है। आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और यात्री-अनुकूल कोचों पर ध्यान केंद्रित करके, भारतीय रेलवे एक अधिक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार परिवहन नेटवर्क बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। रेलवे विद्युतीकरण, हाई-स्पीड कॉरिडोर और उन्नत यात्री सेवाओं के चल रहे प्रयासों के साथ, बढ़ा हुआ कोच उत्पादन भारत की रेल परिवहन प्रणाली के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे लाखों यात्रियों के लिए अधिक दक्षता, आराम और पहुँच सुनिश्चित होगी।  

भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का एक नया अध्याय मई 2025 में शुरू होने जा रहा, शुभांशु शुक्ला भरेंगे उड़ान

नई दिल्ली भारत के लिए एक और ऐतिहासिक पल आने वाला है। जहां एक समय सुनिता विलियम्स ने भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी, वहीं अब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला 2025 में NASA के साथ एक अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बनने जा रहे हैं। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का एक नया अध्याय मई 2025 में शुरू होने जा रहा है, जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरेंगे। वे Axiom Mission 4 (Ax-4) का हिस्सा होंगे, जो भारतीय अंतरिक्ष यात्री के लिए एक ऐतिहासिक मिशन साबित होने जा रहा है। यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए भी एक अहम कदम है, जो भारत की अंतरिक्ष यात्रा में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। मिशन Ax-4 का उद्देश्य Axiom Mission 4 (Ax-4) एक 14 दिवसीय मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक प्रयोग, शैक्षिक पहलों और व्यावसायिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस मिशन के तहत, शुभांशु शुक्ला भारत की समृद्ध संस्कृति को अंतरिक्ष में प्रदर्शित करेंगे। वे विभिन्न भारतीय राज्यों से जुड़ी सांस्कृतिक कलाकृतियां अपने साथ ले जाएंगे और माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) वातावरण में योग करने का प्रयास भी करेंगे। शुभांशु शुक्ला का परिचय शुभांशु शुक्ला का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। वे भारतीय वायुसेना के एक अनुभवी पायलट हैं और Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और An-32 जैसे लड़ाकू विमानों के पायलट रहे हैं। 2006 में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 2,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव प्राप्त किया है। मार्च 2024 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके अलावा, वे भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए भी अंतरिक्ष यात्री चुने गए हैं। मिशन की महत्वपूर्ण जानकारी कमांडर: इस मिशन का नेतृत्व पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन करेंगी, जो अब Axiom Space में मानव अंतरिक्ष उड़ान की निदेशक हैं। पायलट: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इस मिशन के पायलट होंगे। अंतरिक्ष यात्री: मिशन में अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री भी शामिल होंगे, जिनमें पोलैंड और हंगरी के प्रतिनिधि शामिल हैं। मिशन के प्रभाव Ax-4 मिशन, न केवल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा, बल्कि यह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। शुभांशु शुक्ला का यह अंतरिक्ष मिशन भारत के लिए गर्व की बात है और यह इस बात को भी प्रमाणित करता है कि भारत अब अंतरिक्ष यात्रा में पूरी तरह से आत्मनिर्भर है।  इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे, जिनमें: पेगी व्हिटसन: मिशन की कमांडर, पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री और Axiom Space की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक। शुभांशु शुक्ला: भारतीय अंतरिक्ष यात्री और मिशन के पायलट। स्लावोज़ उज़्नांस्की-विश्निव्स्की: पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री, जो यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़े हैं। टिबोर कपु: हंगरी के अंतरिक्ष यात्री, जो HUNOR मिशन का हिस्सा हैं। यह मिशन न केवल भारत के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक नया अध्याय है, और शुभांशु शुक्ला के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनना सचमुच गर्व की बात है।

वक्फ विधेयक पर संसद की मुहर, राज्यसभा से भी पारित हुआ वक्फ बिल, 13 घंटे से ज्यादा चली संसद

नई दिल्ली राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा पूरी हो चुकी है। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो चुका है। इंडिया गठबंधन इस संशोधन विधेयक के विरोध में है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्टी के सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि वक्फ़ संशोधन विधेयक मुसलमानों के खिलाफ है। JPC में विपक्षी सदस्यों द्वारा की गई किसी भी सिफारिश को वक्फ़ संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया । संजय राउत ने बीजेपी पर कसा तंज – संजय राउत ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि दो दिनों से मुस्लिमों की इतनी चिंता की जा रही है, जितनी जिन्ना ने भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की इतनी चिंता हो रही है कि मुस्लिम और हिंदू दोनों डरे हुए हैं। संजय राउत ने कहा कि ये बिल लोगों का ध्यान भटकाने का तरीका है। कल ही ट्रंप ने टैरिफ लगाया, उस पर चर्चा होनी चाहिए थी लेकिन आप ध्यान भटकाने के लिए ये बिल ले आए। उन्होंने कहा कि बीजेपी को मुस्लिमों की चिंता कबसे होने लगी? अब आप मुस्लिमों की संपत्ति की चिंता कर रहे हो। यह ऐतिहासिक क्षण, हाशिए पर पड़े लोगों को मदद मिलेगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद में वक्फ संशोधन विधेयक का पारित होना एक “महत्वपूर्ण क्षण” है. पीएम ने कहा कि यह मुस्लिम समुदाय में हाशिए पर पड़े लोगों को आवाज़ देगा और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा. वक्फ विधेयक, जो सरकार को वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने का अधिकार देता है उसे संसद में दो दिन तक चली मैराथन बैठक बैठक के बाद आधी रात को पारित कर दिया गया. बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए थाईलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “संसद द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना हमारे साझा सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ है. इससे विशेष रूप से उन लोगों को मदद मिलेगी जो लंबे समय से हाशिये पर रहे हैं और इस प्रकार उन्हें आवाज और अवसर दोनों से वंचित रखा गया है.” इससे बढ़ेगी पारदर्शिता प्रधानमंत्री का बयान भाजपा के उस रुख को दर्शाता है जिसमें पार्टी ने इस विधेयक को गरीब मुस्लिमों के लिए एक सुधारात्मक कदम बताया है—खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनकी समुदाय के मामलों में कोई भागीदारी नहीं रही. प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वक्फ प्रणाली दशकों से पारदर्शिता की कमी का पर्याय बन गई है, जिससे गरीब मुसलमानों, महिलाओं और पसमांदा मुसलमानों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है. पीएम ने लिखा, ‘वक्फ व्यवस्था दशकों से अधिकारहीनता और अपारदर्शिता का प्रतीक रही है. इससे मुस्लिम महिलाओं, गरीब मुस्लिमों और पसमांदा मुस्लिमों के हितों को नुकसान हुआ है. यह नया कानून पारदर्शिता बढ़ाएगा और लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा.’ पसमांदा मुस्लिम समुदाय के भीतर सबसे पिछड़े और सामाजिक रूप से शोषित वर्ग माने जाते हैं. हाल के वर्षों में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने “अनदेखे” पसमांदा मुस्लिमों को जोड़ने की कोशिश की है. सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशील युग की शुरूआत होगी- पीएम प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक, जिसे अब कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता है, आधुनिकता और सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशीलता के एक नए युग की शुरुआत करेगा. पीएम ने कहा, ‘हम प्रत्येक नागरिक की गरिमा को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसी सोच से हम एक मजबूत, समावेशी और उदार भारत का निर्माण करेंगे.” विधेयक के अनुसार, वक्फ परिषद में दो महिला सदस्यों सहित अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य होने चाहिए. इसके अलावा, जिला कलेक्टरों के पद से ऊपर के वरिष्ठ अधिकारियों का अब अंतिम निर्णय होगा कि कोई संपत्ति वक्फ है या सरकार की है. Waqf Amendment Bill पर अमित शाह ने क्या कहा? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह वक्फ पर प्रस्तावित कानून नहीं मानने की धमकी दे रहा, लेकिन यह संसद द्वारा पारित किया गया कानून होगा और इसे सभी को स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए यह डर फैलाया जा रहा है कि वक्फ विधेयक मुसलमानों के धार्मिक मामलों और उनके द्वारा दान की गई संपत्तियों में दखल है। वहीं, राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों और संपत्ति के अधिकारों को हड़पने के उद्देश्य से बनाया गया एक हथियार है। उन्होंने कहा कि आरएसएस, भाजपा और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर लक्षित है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने के लिए एक मिसाल कायम करता है। कांग्रेस पार्टी इस कानून का कड़ा विरोध करती है क्योंकि यह भारत के मूल विचार पर हमला करता है और अनुच्छेद 25, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

मरीजों की दिक्कत दूर करेगा आयुष्मान योजना का नया पोर्टल, अप्रूवल और क्लेम में नहीं आएगी परेशानी

देहरादून आयुष्मान योजना के तहत मरीजों की दिक्कत को दूर करने के लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण अपना अलग पोर्टल तैयार करेगा। स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने इसके निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री डा धन सिंह रावत ने गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान पोर्टल की वजह से योजना के संचालन में आने वाली परेशानियों को देखते हुए राज्य स्तर पर अलग पोर्टल तैयार करने को कहा गया। अप्रूवल और क्लेम में न आए कोई परेशानी डा. रावत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि मरीजों के इलाज के अप्रूवल और क्लेम आदि में किसी भी तरह की परेशानी न आए। इसके साथ ही उन्होंने योजना में मितव्ययता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान प्रमुख योजना है और लाखों लोग इससे जुड़े हैं। ऐसे में लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार, प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना जोशी, निदेशक वित्त अभिषेक आनंद, निदेशक प्रशासन डा.विनोद टोलिया, अपर निदेशक प्रशासन अतुल जोशी, अपर निदेशक आइटी अमित शर्मा समेत कर्मचारी/पेंशनर्स संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इंश्योरेंस मोड पर सहमत नहीं मंत्री स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी कर्मचारियों के लिए संचालित राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना में आ रही बजट की कमी को दूर करने के लिए किए जा रहे उपायों पर भी चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि इंश्योरेंस और ट्रस्ट मोड का तुलनात्मक अध्ययन कर प्रस्ताव बनाया गया है। कर्मचारी एवं पेंशनर्स के अंशदान की अपेक्षा अधिक खर्च होने से योजना का निर्बाध संचालन में दिक्कत आ रही है। कुछ अस्पतालों ने सेवाएं देने से असमर्थता जता दी है। एसजीएचएस में गैप फंडिंग को लेकर भी शासन को पत्र लिखा गया है। जिस पर विभागीय मंत्री ने कहा कि इस समस्या के समाधान को शासन स्तर पर वित्त विभाग के साथ बैठक की जाएगी। आयुष्मान योजना को इंश्योरेंस मोड पर देने की चर्चा पर कहा कि अधिकांश राज्यों में ट्रस्ट मोड पर ही आयुष्मान योजना संचालित हो रही है। जो प्रदेश इंश्योरेंस मोड में चला रहे हैं, वह भी ट्रस्ट में आने की बात कर रहे हैं। छूटे पेंशनर को मिलेगा गोल्डन कार्ड का लाभ उत्तराखंड के लगभग 30 हजार पेंशनर को पुन: इस योजना से जुड़ने का विकल्प दिया जाएगा। यह वह पेंशनर हैं, जो पूर्व में योजना से अलग हो गए थे। काफी वक्त से इन्हें योजना से जुड़ने का एक विकल्प देने की मांग उठ रही है। कर्मचारी संगठनों की मांग पर राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत ओपीडी सेवा की भांति ही डायग्नोस्टिक लैब व केमिस्ट को सूचीबद्ध करने पर भी स्वास्थ्य मंत्री ने जल्द कार्रवाई की बात कही है। वहीं, वर्ष में एक बार प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप की मांग पर भी सहमति दी। कर्मचारियों की सहूलियत के लिए तैयार होगा एप राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना से आच्छादित सभी कार्मिकों एवं पेंशनर की सहूलियत के लिए एक एप तैयार किया जाएगा। जिसमें योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल, संबंधित अस्पताल में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाएं, बेड की स्थिति आदि का विवरण होगा। इसके अलावा गोल्डन कार्डधारकों के लिए अलग से पंजीकरण काउंटर, भर्ती प्रक्रिया के सरलीकरण आदि का भी निर्णय इस दौरान लिया गया।

उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश घोषित करेंगे अपनी संपत्ति, ‘सभी जज पब्लिक करेंगे अपनी संपत्ति का ब्योरा’

नई दिल्ली  न्यायपालिका में पारदर्शिता और लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने पदभार ग्रहण करने के दौरान ही अपनी संपत्ति का ब्योरा पब्लिक करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह फैसला 1 अप्रैल को की गई फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया है। इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया और यह भावी जजों पर भी लागू होगा। जजों ने यह भी कहा कि संपत्तियों से जुड़ी जानकारी सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। हालांकि, वेबसाइट पर संपत्ति की घोषणा करना स्वैच्छिक होगा। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर कहा गया है, ‘सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर संपत्ति की घोषणा करना स्वैच्छिक आधार पर होगा।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना समेत सुप्रीम कोर्ट के 30 जजों ने अपनी संपत्ति का घोषणा पत्र कोर्ट में दिया है। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत वरिष्ठ वकील आदिश अग्रवाल ने समाचार न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत करता हूं जिसमें जजों को अपनी संपत्ति आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करने को कहा गया है। इसकी वजह से जनता का भरोसा बहाल होगा, जो पिछली घटनाओं के कारण थोड़ा कम हुआ है। मुझे उम्मीद है कि हाई कोर्ट के जज भी इसका अनुसरण करेंगे। इससे न्यायपालिका में पारदर्शिता और विश्वास सुनिश्चित होगा। जबकि 1977 में इसी तरह के प्रस्ताव पर विचार किया गया था, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था।’ जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े विवाद के बाद में आया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल साफ किया कि जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के तौर पर अपना नया पदभार संभालने के बाद कोई ज्यूडिशियल काम नहीं सौंपा जाएगा। बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम ने साफ किया कि यह ट्रांसफर उनके खिलाफ चल रही जांच से बिल्कुल अलग है। कमेटी ने पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज किए पिछले हफ्ते सीजेआई खन्ना ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी का गठन किया है। टॉइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आयोग ने कथित तौर पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा और कुछ अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का बयान दर्ज किया है। ऐसा माना जा रहा है कि अरोड़ा ने आयोग को बताया कि स्टोर रूम एक गार्ड रूम से सटा हुआ था, जहां सीआरपीएफ के जवान तैनात थे और स्टोर रूम को बंद रखा जाता था। अरोड़ा ने आयोग को यह भी बताया कि उन्होंने 15 मार्च को शाम करीब 4.50 बजे सुप्रीम कोर्ट को घटना के बारे में सूचित किया था। उन्होंने आयोग को बताया कि जस्टिस वर्मा के निजी सचिव ने दिल्ली हाई कोर्ट के नाम से रजिस्टर फोन नंबर से पीसीआर कॉल की थी और सचिव ने कहा कि उन्हें जज के आवास पर मौजूद एक नौकर ने आग के बारे में सूचित किया था।

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