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पाकिस्तान में एक्शन- ‘अवैध विदेशियों’ को अरेस्ट कर फिर उन्हें अफगानिस्तान वापस भेजने के लिए शिविरों में भेज दिया

इस्लामाबाद पाकिस्तान सरकार ने अफगान नागरिकों के खिलाफ एक बड़ी राष्ट्रव्यापी कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत ‘अफगान नागरिक कार्ड (एसीसी)’ धारकों सहित सैकड़ों ‘अवैध विदेशियों’ को गिरफ्तार किया गया, और फिर उन्हें अफगानिस्तान वापस भेजने के लिए शिविरों में भेज दिया गया। पाकिस्तान में अफगान नागरिकों की स्वैच्छिक वापसी के लिए निर्धारित 31 मार्च की समय-सीमा के बाद सैकड़ों अफगान नागरिकों को हिरासत में लिया गया है और उनके परिवारों के साथ उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि सुरक्षा बलों को जारी निर्देशों से पता चलता है कि यदि कोई भी अफगान नागरिक आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो पूरे परिवार को निर्वासन का सामना करना पड़ेगा। काबुल में तालिबान सरकार ने इस्लामाबाद से पाकिस्तान में अफगान नागरिकों के प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया में देरी का अनुरोध किया था, लेकिन इस्लामाबाद इसमें ढील देने के मूड में नहीं है। अफगान सरकार ने कहा, “उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने नए सिरे से कार्रवाई की घोषणा की है, जिसमें कहा गया कि वह बिना कानूनी निवास परमिट वाले व्यक्तियों को निर्वासित करेगा, जबकि वैध कार्डधारकों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।” पाकिस्तान में यूएनएचसीआर की प्रतिनिधि फिलिप कैंडलर ने कहा, “पाकिस्तान से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह अनिश्चित काल तक अफगान शरणार्थियों की मेजबानी की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाए। मानवीय सहायता की जरूरत है, न केवल अल्पकालिक राहत के लिए बल्कि दीर्घकालिक विकास पहलों को समर्थन देने के लिए भी।” समय सीमा को आगे न बढ़ाने और कार्रवाई शुरू करने का निर्णय पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन रजा नकवी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुई बैठक के दौरान लिया गया। सरकारी प्राधिकारियों ने कड़ी चेतावनी जारी की थी कि 31 मार्च तक देश नहीं छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में अफगान शरणार्थियों को रखने के लिए कम से कम 43 शिविर स्थापित किए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी छापेमारी करेंगे और देश में अवैध रूप से रह रहे अफगानों को हिरासत में लेंगे, जिन्हें फिर शरणार्थी शिविरों में स्थानांतरित किया जाएगा। फिर उन्हें प्रत्यावर्तन के लिए तोरखम पाक-अफगान सीमा पर लांडी कोटल क्षेत्र में ले जाने से पहले सूचीबद्ध किया जाएगा। आंकड़े बताते हैं कि देश में कम से कम 13,44,584 अफगान नागरिक हैं, जिनमें से कम से कम 7,09,278 अफगान नागरिक केपी में रहते हैं, जिनके पास पंजीकरण प्रमाण (पीओआर) है। प्रांतीय आंकड़ों से पता चलता है कि बलूचिस्तान में कम से कम 3,17,000 पंजीकृत अफगानी हैं, सिंध में 74,117, पंजाब में 1,96,000, राजधानी इस्लामाबाद में 42,718 और देश के अन्य हिस्सों में 4,448 अफगान शरणार्थी हैं।

कई बार लगता है कि यह विधेयक बुलडोजर के लिए एक कानूनी कवर है: सांसद मनोज झा

नई दिल्ली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि गाहे-बगाहे किसी पुरानी मस्जिद के नीचे कुछ चीजें ढूंढी जा रही हैं। इस तरह के माहौल में वक्फ संशोधन विधेयक लाने से सरकार की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विधेयक पर सदन में जारी चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, “देश का माहौल कैसा है, इस पर एक नजर डालिए। कभी आर्थिक बहिष्कार की बात की जाती है, पूजा स्थल अधिनियम पर सवाल उठाया जाता है। इस तरह के माहौल में आपके विधेयक के मसौदे और नीयत दोनों पर सवालिया निशान लग जाता है।” उन्होंने कहा कि कई बार लगता है कि “यह विधेयक बुलडोजर के लिए एक कानूनी कवर” है। उन्होंने सत्ता पक्ष के लिए कहा, “आप लोग अक्सर सोचते हैं कि बहुत बड़ा बहुमत है तो सारा ‘विजडम’ आप ही के पास है।” उन्होंने सवाल किया कि खानपान, वस्त्र, आभूषण, भाषा और इबादत पर इतनी तकरार क्यों? हमें जनता को हाशिए पर छोड़ने की आदत बन गई है। हम लगातार लोगों को हाशिए पर छोड़ रहे हैं। इस देश के हिंदुओं को मुसलमानों की आदत है और मुसलमानों को हिंदुओं की आदत है। ईसाइयों-सिखों को हिंदुओं और मुसलमानों की आदत है। ये आदतें मत बदलवाइए। जमीन के साथ किसी व्यक्ति और कौम का क्या रिश्ता होता है, इसको भी समझने की जरूरत है। मनोज झा ने कहा कि इस देश में इतना सेकुलर मिजाज कर दीजिए कि हर धर्म की संस्थाओं में दूसरे धर्म के लोगों को जगह मिले; या फिर यह तय कर लिया गया है कि सारा संयोग और सारा प्रयोग मुसलमानों को लेकर ही होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की एक स्मृति होती है। कोई मस्जिद कब से इस्तेमाल में है, आप उसके दस्तावेज ढूंढेंगे। यदि कोई पुरानी संपत्ति है, कहां से दस्तावेज लाएं, सब विवाद में आ जाएंगे। अदालत में अपीलों का एक पहाड़ खड़ा हो जाएगा। उन्होंने सत्ता पक्ष से प्रश्न किया कि यह कैसा संवाद है। आप किसी की बात सुनते नहीं हैं, बस सुनाते हैं। आप मुस्लिमों की संस्थागत गैर-मौजूदगी सुनिश्चित कर रहे हैं। जल्दबाजी न करें। इस देश के मुसलमान का इस मिट्टी पर कर्ज है और इस मिट्टी का मुसलमान पर कर्ज है। इस कर्ज के रिश्ते को व्यापारी की नजर से मत देखिए, तिजारत की नजर से मत देखिए।

मौलाना एजाज कश्मीरी ने वक्फ संशोधन बिल को धर्म, इबादत और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया

मुंबई लोकसभा में बुधवार को पास हुए वक्फ संशोधन बिल को लेकर हांडी वाली मस्जिद के मौलाना एजाज कश्मीरी ने तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने इसे अपने धर्म, इबादत और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह उन सभी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन करते हैं, जिन्होंने इस बिल के खिलाफ वोट किया है और उन्हें मुबारकबादी पेश करते हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा कि वक्फ का मामला हमारे इबादत से जुड़ा हुआ है। आज आप वक्फ पर आए हो, कल रोजे पर आ जाओगे, फिर हज पर आओगे, फिर कुर्बानी पर आ जाओगे। पहले तीन तलाक लेकर आए थे, अब वक्फ पर हमला हो रहा है। आप तो सीधे इबादत पर आ रहे हो, आप किससे पूछकर आ रहे हो? किसके बाप ने क्या छोड़ा, क्या नहीं छोड़ा, लेकिन हमारे बाप-दादाओं ने तो अल्लाह के लिए जमीन छोड़ी है। मौलाना ने कहा कि उन्हें अपना मजहब सीखने के लिए किसी सरकार या संसद की आवश्यकता नहीं है। हमें गृहमंत्री, प्रधानमंत्री या किसी मंत्री से इस्लाम सीखने की जरूरत नहीं है। क्या हमें अपना मजहब संसद से सीखना पड़ेगा? हमारे पास खुद अपना मजहब है, जिसे हम अपने धर्मग्रंथों से सीखते हैं। यह हमारी धार्मिक स्वतंत्रता है और कोई भी सत्ता इसे छीन नहीं सकती। वक्फ को लेकर उन्होंने कहा कि वक्फ अल्लाह के वास्ते किया जाता है। हम उसका संरक्षण करते हैं, उसकी हिफाजत करते हैं और उसकी सेवा करते हैं। हम इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे और इसे किसी की बेमानी दखलंदाजी के तहत नहीं आने देंगे। मौलाना ने इस बिल को धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्ष बताते हुए कहा कि यह इस्लामी समाज की स्वतंत्रता पर हमला है। यह बिल हमारी धार्मिक पहचान और हमारी धार्मिक संपत्तियों को खतरे में डालने वाला कदम है, जिसे हम किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। बता दें कि बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर 12 घंटे से ज्यादा चर्चा हुई थी और देर रात को मतदान हुआ। विधेयक के पक्ष में 288 सांसदों ने मतदान किया था, वहीं 232 सांसदों ने विधेयक के विपक्ष में मतदान किया, जिसके बाद यह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया।

वक्फ विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है: जेपी नड्डा

नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है। जेपी नड्डा ने तीन तलाक के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुत पहले ही इसे खत्म करने की बात कही थी, फिर भी कांग्रेस सरकार ने इसे जारी रखने की मजबूरी क्यों महसूस की? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकारों से वंचित रखा और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनाए रखा। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक खत्म कर मुस्लिम बहनों को मुख्यधारा में लाने का काम किया। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने इराक, सीरिया और अन्य मुस्लिम देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तीन तलाक पहले ही समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने मुस्लिम महिलाओं को समानता से वंचित रखा और उन्हें आगे बढ़ने से रोका। वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि कई मुस्लिम देशों ने इसमें सुधार किए हैं। उदाहरण के लिए, तुर्की ने 1924 में ही अपनी पूरी वक्फ संपत्ति को सरकारी नियंत्रण में ले लिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के 70 वर्षों के शासन में किस तरह विकास अवरुद्ध रहा, यह सभी ने देखा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य वक्फ कानून को नियमों के दायरे में लाना है। उन्होंने बताया कि 2013 के संशोधन का समर्थन करने के बावजूद उसका दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वक्फ से जुड़े मामलों को नागरिक सिविल कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी जा सकती। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष से कहा कि आपने (विपक्ष) संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग की थी और हमने इसका गठन किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में जब वक्फ विधेयक के लिए जेपीसी का गठन किया गया था, तब इसमें केवल 13 सदस्य थे, लेकिन मोदी सरकार के तहत गठित जेपीसी में 31 सदस्य शामिल हुए। जेपीसी ने 36 बैठकें कीं और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस पर 200 घंटे से अधिक समय काम किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से हमने कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम समुदाय का वक्फ की प्रॉपर्टी का सही से उपयोग हो सके। इस विधेयक में तय किया गया है कि उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रॉपर्टी सही हाथों में रहे।

200 से ज्यादा भारतीय मुसाफिर पिछले 18 घंटे से तुर्किये के एयरपोर्ट पर फंसे, न पानी, न खाना

Step towards freedom from malnutrition

लंदन लंदन से मुंबई जा रही वर्जिन अटलांटिक की फ्लाइट में अचानक एक मुसाफिर की तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते जहाज को तुर्किये के एक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। लेकिन ये इमरजेंसी लैंडिंग मुसाफिरों के लिए एक नई मुसीबत बन गई। 200 से ज्यादा भारतीय मुसाफिर पिछले 18 घंटे से एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं, जहां न ठीक से खाने-पीने का इंतजाम है और न ही आराम करने की सुविधा। एयरपोर्ट पर सुविधाओं की कमी रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब प्लेन ने इमरजेंसी लैंडिंग की तभी उसमें तकनीकी खराबी आ गई। ऊपर से, जिस एयरपोर्ट पर लैंडिंग कराई गई, वहां उड़ान भरने की सही सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में फ्लाइट को अब तक मुंबई के लिए रवाना नहीं किया जा सका। यात्रियों की हालत खराब एक यात्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम 18 घंटे से यहां फंसे हुए हैं। किसी से ठीक से संपर्क नहीं हो पा रहा। एयरपोर्ट के जिस टर्मिनल पर हमें रोका गया है, वहां पानी और खाना तक सही से नहीं मिल रहा। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।” महाराष्ट्र सरकार की पहल इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनकी मदद का भरोसा दिया है। वहीं, भारत के सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने हालात संभालने के लिए एक नोडल ऑफिसर भी तैनात किया है। तुर्किये में पहले भी फंसे हैं भारतीय यात्री ये कोई पहली बार नहीं जब भारतीय मुसाफिर तुर्की के एयरपोर्ट पर फंसे हैं। पिछले साल दिसंबर में भी 400 से ज्यादा भारतीय यात्रियों को 18 घंटे तक इस्तांबुल एयरपोर्ट पर रुकना पड़ा था। उस वक्त इंडिगो एयरलाइंस को माफी तक मांगनी पड़ी थी, लेकिन अब वर्जिन अटलांटिक की इस फ्लाइट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि इतनी देर से फ्लाइट क्यों रोकी गई है।

भाजपा द्वारा मुसलमानों के प्रति दिखाई गई ‘चिंता’ मुहम्मद अली जिन्ना को भी शर्मिंदा कर देगी: उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र वक्फ बिल को मुसलमानों के लिए हितैषी बताने वाली भाजपा की दलीलों पर उद्धव ठाकरे ने तंज कसा है। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा मुसलमानों के प्रति दिखाई गई ‘चिंता’ मुहम्मद अली जिन्ना को भी शर्मिंदा कर देगी। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा मुसलमानों के हित की बात कर रही है और हम उसके खिलाफ हैं तो फिर बताइए कि हिंदुत्व किसने छोड़ा है। वे तो हम पर आरोप लगाते रहे हैं कि हम लोग हिंदुत्व के सिद्धांतों से भटक गए हैं और समझौता कर लिया है। अब सच्चाई यह है कि भाजपा कह रही है कि वह सेकुलर कानून लेकर आई है, जिससे मुसलमानों का हित होगा। उन्होंने गुरुवार को अपने आवास मातोश्री पर मीडिया से बात की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा केंद्र में तीसरी बार जीत चुकी है और सब कुछ ठीक चल रहा है, फिर भी वह हिंदू-मुस्लिम मुद्दे उठा रही है। इससे पता चलता है कि शायद सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीति क्या है। वह खुद ही बता दे। कभी हमसे कहती है कि हम हिंदुत्व से भटक गए हैं और फिर उसी की तरफ से उनको सौगात-ए-मोदी की भेंट दी जाती है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर भाजपा को मुसलमान नापसंद हैं तो उसे अपनी पार्टी के झंडे से हरा रंग हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने पहले ईद का सेलिब्रेशन किया और फिर संसद में वक्फ बिल लेकर आ गए। उद्धव ठाकरे ने वक्फ बिल के विरोध की वजह बताते हुए कहा कि हम इसलिए खिलाफ रहे क्योंकि भाजपा इसके जरिए जमीन हथियाना चाहती है। उनकी नीयत साफ नहीं है। इसलिए हम बिल के खिलाफ रहे। उन्होंने कहा कि अमित शाह बिल के पक्ष में बात करते हुए कहते हैं कि यह मुस्लिमों की बेहतरी के लिए है। हम पर इसका विरोध करने के लिए गुस्सा होते हैं। फिर बताएं कि हिंदुत्व किसने छोड़ दिया है। यही नहीं उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार तो इस बिल को अमेरिकी ऐक्शन से ध्यान भटकाने के लिए लाई है। उद्धव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश को अमेरिकी शुल्क के आसन्न खतरे और इसे कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताना चाहिए था।

अमेरिकी सरकार ने इजरायली उत्पादों पर 17 प्रतिशत का टैरिफ लगाया, इजरायल चारों खाने चित्त

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को (भारतीय समयानुसार) दुनियाभर के देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान कर दिया। ट्रंप का टैरिफ अटैक भारत, चीन और पाकिस्तान समेत 100 देशों पर हुआ है। ट्रंप के टैरिफ वॉर से इजरायल भी नहीं बच पाया। अमेरिकी सरकार ने इजरायली उत्पादों पर 17 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है। ट्रंप ने जब टैरिफ का ऐलान किया तो इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार पूरी तरह से आश्वस्त थी कि उन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं! इजरायली अधिकारियों का कहना है कि हम ट्रंप की घोषणा से स्तब्ध हैं। इजरायल ने बयान में अमेरिका और उसके 40 साल पुराने मुक्त व्यापार का भी हवाला दिया। इजरायल पर टैरिफ लगाने के फैसले से इजरायली अधिकारी सकते में आ गए हैं। इजरायल का कहना है कि उसने अमेरिकी वस्तुओं पर सभी टैरिफ समाप्त कर दिए थे, फिर भी अमेरिका ने टैरिफ लगा दिए। इजरायली मीडिया i24News ने इजरायली अधिकारियों के हवाले से कहा, “हम हैरान हैं। हमें पूरा भरोसा था कि अमेरिकी वस्तुओं पर सभी आयात शुल्क समाप्त करने के हमारे फैसले से यह कदम रोका जा सकेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” इजरायल ने हाल ही में अमेरिकी आयात पर बचा हुआ टैरिफ समाप्त करने की घोषणा की थी। यह फैसला अर्थव्यवस्था मंत्री निर बरकात और संसद की वित्त समिति से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा था, लेकिन इसकी मंजूरी की पूरी उम्मीद थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मंजूरी मिलते ही अमेरिका से आयात होने वाली सभी वस्तुओं पर टैरिफ समाप्त कर दिया जाएगा। इजरायल-अमेरिका व्यापार संबंध अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और महत्वपूर्ण सहयोगी है। 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 34 अरब डॉलर का था। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अर्थव्यवस्था मंत्री बरकात और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच के साथ संयुक्त बयान में कहा कि अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ हटाने से इजरायली बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जीवनयापन की लागत कम होगी। नेतन्याहू ने इसे इजरायल के नागरिकों और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद बताया और कहा कि इससे अमेरिका और इजरायल के संबंध और मजबूत होंगे। 40 साल पुराना मुक्त व्यापार समझौता इजरायल और अमेरिका के बीच 40 साल पहले एक मुक्त व्यापार समझौता हुआ था। वर्तमान में लगभग 98% अमेरिकी वस्तुओं पर पहले से ही कोई टैक्स नहीं लगता। इजरायल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका से होने वाले आयात पर टैरिफ से सरकार को हर साल लगभग 42 मिलियन शेकेल ($11.3 मिलियन) की आय होती है, जो मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र से जुड़ी होती है। अब इजरायल के इस कदम के बावजूद ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ लगाने का फैसला दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को कैसे प्रभावित करेगा, यह देखने वाली बात होगी।

पीएम मोदी की थाइलैंड यात्रा : ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है

बैंकॉक प्रधानमंत्री मोदी की थाईलैंड यात्रा के दौरान एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया है। यह डाक टिकट 18वीं सदी की रामायण के भित्ति चित्रों पर आधारित है। पीएम मोदी ने कहा, मैं थाईलैंड सरकार का आभारी हूं कि मेरी यात्रा के उपलक्ष्य में 18वी शताब्दी की ‘रामायण’ भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक-टिकट जारी किया गया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बैंकॉक पहुंचने पर रामायण के थाई संस्करण ‘रामकियेन’ को देखा। ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘एक अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव! थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।’ उन्होंने लिखा, “रामायण एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ता है।” द्विपक्षीय चर्चा के बाद थाई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने पीएम मोदी को एक बेहद खास गिफ्ट दिया। उन्होंने पीएम मोदी को पवित्र ग्रंथ ‘द वर्ल्ड तिपिटका : सज्जया फोनेटिक एडिशन’ भेंट किया। तिपिटका (पाली में) या त्रिपिटक (संस्कृत में) भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन है, जिसमें 108 खंड हैं और इसे प्रमुख बौद्ध धर्मग्रंथ माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को भेंट किया गया संस्करण पाली और थाई लिपियों में लिखा गया है, जो नौ मिलियन से अधिक अक्षरों का सटीक उच्चारण सुनिश्चित करता है। यह विशेष संस्करण 2016 में थाई सरकार ने ‘विश्व तिपिटका परियोजना’ के हिस्से के रूप में राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (राम IX) और रानी सिरीकित के 70 साल के शासनकाल की स्मृति में प्रकाशित किया था। पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने मुझे त्रिपिटक भेंट किया और मैंने भगवान बुद्ध की भूमि भारत की ओर से हाथ जोड़कर इसे स्वीकार किया। पिछले वर्ष भारत ने भगवान बुद्ध और उनके दो प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे थे। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि करीब चार मिलियन लोगों ने इन अवशेषों को नमन किया।” विश्लेषकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री मोदी को त्रिपिटक भेंट करना भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व और बौद्ध देशों के साथ उसके स्थायी संबंधों का प्रमाण है।

‘बंगाल की खाड़ी में सबसे लंबी तटरेखा हमारी’, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मोहम्मद यूनुस को पढ़ाया भूगोल

बैंकॉक विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत को बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल यानी बिमस्टेक (BIMSTEC) में अपनी जिम्मेदारी का एहसास है और वह आर्थिक और भू-राजनीतिक गतिविधियों से अवगत है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग एक एकीकृत दृष्टिकोण है न कि चुनिंदा विषयों पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल की खाड़ी में भारत की सबसे लंबी तटरेखा है। उनका यह बयान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया और नोबेल पुरस्कार विजेता और अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने चीन के दौरे पर कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्य स्थलबद्ध (लैंड लॉक्ड) हैं, इसलिए बंगाल की खाड़ी और सटे हिन्द महासागर का वह अकेला संरक्षक है। माना जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर का नवीनतम बयान कि बंगाल की खाड़ी में भारत की सबसे लंबी तटरेखा भारत की है, मोहम्मद यूनुस पर एक तरह का अप्रत्यक्ष कटाक्ष है। यूनुस के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया था। यूनुस ने हाल ही में चीनी सरकार से अपने देश के भीतर एक आर्थिक आधार स्थापित करने का आग्रह किया था और इस बात पर जोर दिया था कि बांग्लादेश इस क्षेत्र में “महासागर का एकमात्र संरक्षक” है। थाईलैंड में 6ठा बिम्सटेक शिखर सम्मेलन थाईलैंड में 6ठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने कहा, “बंगाल की खाड़ी के आसपास और समीपवर्ती देशों के साझा हित और साझा चिंताएं हैं। इनमें से कुछ हमारे इतिहास से निकलती हैं, जिसे अन्य प्राथमिकताओं और क्षेत्र की भलाई के लिए पीछे छोड़ दिया गया है।” उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सीमा, प्राथमिकताएं और जिम्मेदारी पता हैं। बंगाल की खाड़ी में 6500 किलोमीटर की भारत की सबसे लंबी तटरेखा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस क्षेत्र में न केवल बिम्स्टेक के पांच सदस्य देशों के साथ सीमा साझा करता है बल्कि उनके साथ बेहतर संपर्क भी रखता है और भारतीय उपमहाद्वीप और आसियान देशों के बीच भी बहुत अधिक इंटरफेस प्रदान करता है। पूर्वोत्तर बिम्सटेक के लिए एक कनेक्टिविटी हब जयशंकर ने कहा, “हमारा पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेष रूप से बिम्सटेक के लिए एक कनेक्टिविटी हब के रूप में उभर रहा है, जिसमें सड़कों, रेलवे, जलमार्गों, ग्रिड और पाइपलाइनों का असंख्य नेटवर्क है। इसके अलावा, त्रिपक्षीय राजमार्ग का पूरा होना भारत के उत्तर पूर्व को प्रशांत महासागर तक जोड़ देगा, जो वास्तव में एक गेम-चेंजर होगा।” जयशंकर ने आगे कहा कि एक क्षेत्र विशेष पर केंद्रित दृष्टिकोण को “चेरी-पिकिंग” कहा जाना चाहिए। ऐसे दृष्टिकोण की बजाय क्षेत्रीय सहयोग पर अधिक व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। बैंकॉक पहुंचे PM मोदी उधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी बृहस्पतिवार को छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुंच चुके हैं। थाईलैंड की अपनी यात्रा के दौरान वह अपनी समकक्ष पैंटोगटार्न शिनावात्रा के साथ वार्ता करेंगे। यहां के डॉन मुआंग हवाई अड्डे पर उनके आगमन पर सिख समुदाय के लोगों ने भांगड़ा किया। थाईलैंड की यात्रा समाप्त करने के बाद वह श्रीलंका जाएंगे, जो देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी। बृहस्पतिवार शाम को प्रधानमंत्री की मौजूदगी में थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार और भूटान के बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) नेताओं के साथ समुद्री सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में मोदी नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और म्यांमार के सैन्य नेता मिन आंग हलिंग सहित अन्य लोगों से मुलाकात करेंगे।

पंजुआन-खबल गांव में 2 संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा घर में घुस परिवार को बनाया बंधक, फैली दहशत

कठुआ उधमपुर-कठुआ सीमा के पास मजालता तहसील के चोरे पंजुआन-खबल गांव में 2 संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर एक परिवार को बंधक बनाने, भोजन और मोबाइल फोन छीनने और भाग जाने के बाद तलाशी अभियान जारी है। रिपोर्ट के अनुसार मजालता के एक परिवार ने सुरक्षाबलों को सूचना दी कि रात करीब 8 बजे 2 संदिग्ध उनके घर में घुसे। वे 2 घंटे तक रुके और उन्हें बंधक बनाए रखा। भोजन करने और मोबाइल फोन छीनने के बाद संदिग्ध मौके से भाग गए। इस सूचना के मिलने पर सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सी.आर.पी.एफ. की टीमों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है।

‘ये बिल पूरी तरह से फेक नैरेटिव पर आधारित है जिसके लिए पिछले कुछ महीनों से कोशिश की जा रही थी: नसीर हुसैन

नई दिल्ली अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 राज्यसभा में पेश कर दिया है. बिल पेश कर रिजिजू ने कहा कि वक्फ में किसी गैर मुस्लिम का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. लोकसभा से वक्फ संशोधन विधेयक 2024 कुछ संशोधनों के साथ पारित हो गया है. लोकसभा में चली मैराथन चर्चा के बाद ये बिल 232 के मुकाबले 288 वोट से पारित हो गया. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अब इस बिल को राज्यसभा में पेश कर दिया है. राज्यसभा में बिल पेश कर किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ में किसी गैर मुस्लिम का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. ‘ये महज कानूनी नहीं, पुरानी रवायत से जुड़ा मामला’, वक्फ बिल पर बोले नदीमुल हक टीएमसी सांसद नदीमुल हक ने कहा कि ये महज कानूनी मसला नहीं, पुरानी रवायत से जुड़ा मामला है. क्या हम उन रवायतों को भुला सकते हैं जिन्होंने हमें एक देश एक कौम बनाया है. ये मामला बस मुसलमानों से जुड़ा नहीं है. ये सिर्फ एक मजहबी मसला नहीं, संवैधानिक मुद्दा भी है. हमारे लिए संविधान महज एक किताब नहीं, मार्गदर्शक है. वक्फ बिल में कई खामियां हैं. ये बिल एंटी फेडरल है. इस बिल का मकसद वक्फ बोर्ड में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कम करना है. जब ये बिल लोकसभा में पेश किया गया था, एक गलती रह गई थी जो जेपीसी में जाकर पकड़ा गया था. बहुत सारी कमेटियों की सिफारिश पर ये बिल लेकर आए हैं, मंत्री जी ने कहा. आपको रिफॉर्म करना है तो तीन सुझाव तो मान लीजिए. मुसलमानों की शिक्षा को लेकर एजुकेशन बोर्ड, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से अवैध कब्जा हटाने की सिफारिशें भी मान लीजिए. इस बिल में इन सबका कोई जिक्र नहीं किया गया. नसीर हुसैन पर राधा मोहन दास अग्रवाल के आरोप को लेकर राज्यसभा में हंगामा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जब व्यक्तिगत आरोप लगाए जाएं तब स्पष्टीकरण का मौका दिया जाना चाहिए. निर्मला सीतारमण ने कहा कि गृह मंत्री के बोलने के बाद उन्हें मौका दिया गया था. उन्होंने (नसीर हुसैन ने) जो कहा, वो दोहरा सकती हूं. इस पर हंगामा हो गया. प्रमोद तिवारी के पॉइंट ऑफ ऑर्डर पर अमित शाह बोले- कोई आरोप नहीं लगाया राधा मोहन दास अग्रवाल का संबोधन पूरा होने के बाद कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज किया और कहा कि कोई भी सदस्य किसी सदस्य पर मानहानिकारक, अपराध के आरोप बगैर किसी पूर्व सूचना के आरोप नहीं लगा सकता. इस पर ट्रेजरी बेंच से मंत्री ने कुछ कहा. इस पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि ये मंत्री का आचरण है. हम तो बस इतना चाहते हैं कि सदन में चर्चा शांतिपूर्वक चले. गृह मंत्री अमित शाह अपनी सीट पर खड़े हुए और कहा कि मान्यवर माननीय सदस्य ने नसीर हुसैन पर कोई आरोप नहीं लगाए. इन्होंने बस इतना ही कहा कि नसीर हुसैन जब जीते, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे. नारे इन्होंने नहीं लगाए, इन पर आरोप नहीं लगे. नसीर हुसैन ने कहा कि मेरा नाम लिया गया है. जब ये नारे लगे, सिवाय एक जर्नलिस्ट के कोई वहां नहीं था. वक्फ बोर्ड जिस जमीन पर हाथ रख दे, उसकी हो जाती थी- राधा मोहन दास अग्रवाल बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान वक्फ बोर्ड की तुलना पुरानी फिल्मों के गुंडों से की. उन्होंने कहा कि जिस तरह से फिल्मों में गुंडे जिस औरत पर हाथ रख देते थे, वह उनकी हो जाती थी. उसी तरह से ये जिस जमीन पर हाथ रख देते थे, वह जमीन इनकी हो जाती थी. वक्फ बाई यूजर इनका बड़ा हथियार था. किसी की जमीन पर कुछ दिन नमाज क्या पढ़ ली, वक्फ बाई यूजर वो जमीन वक्फ बोर्ड की हो गई. तमिलनाडु में 1500 साल पुराना मंदिर भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया. हमने मौलाना से पूछा कि ये बताओ कि कुरान में कहां लिखा है, किस हदीस में लिखा है कि जो संपत्ति किसी ने दान की ही नहीं, वह आपकी कैसे हो गई. इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं था. ओवैसी साहब उस सदन में बैठते हैं, उन्होंने मेरा नाम रख दिया मौलाना राधा मोहन दास अग्रवाल. उन्होंने कर्नाटक में वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करने वाले नेताओं के नाम की लिस्ट पढ़ी और कहा कि ये रिपोर्ट जेपीसी में टेबल हुई थी. बीजेपी सांसद ने कहा कि एक नाम इस सदन की मर्यादा में लेने से इनकार करता हूं, वो सदन में हैं भी नहीं. सबको पता है कि वो नाम क्या होगा. वक्फ संशोधन बिल पर गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा हो रही है. इस दौरान कांग्रेस सांसद डॉक्टर सैयद नसीर हुसैन ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि, ‘ये बिल पूरी तरह से फेक नैरेटिव पर आधारित है जिसके लिए पिछले कुछ महीनों से कोशिश की जा रही थी. ये बिल बीजेपी के लिए सिर्फ ध्रुवीकरण का टूल है. ये कह रहे हैं कि हम गरीब को ताकत देंगे, ट्रांसपैरेंसी देंगे. 10 साल से आप सत्ता में हैं, क्या किया. सेंट्रल वक्फ काउंसिल है, उसमें काउंसिल नहीं है, सिर्फ किरेन रिजिजू का नाम नजर आएगा.’ उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि, ‘वक्फ बोर्ड के खिलाफ सबसे बड़ा भ्रम फैलाया गया है कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपनी जमीन घोषित कर देता था. क्या देश में रेवेन्यू रिकॉर्ड नहीं है, कानून नहीं है, कोर्ट नहीं है. हम ट्रेन में नमाज पढ़ते हैं तो क्या ट्रेन हमारी हो गई.’ देश को कर रहे हैं गुमराह कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा, ‘बीजेपी शासित राज्यों में बोर्ड नहीं है. देश को गुमराह करने के लिए ये बातें यहां पर कर रहे हैं. जेपीसी में मैं भी सदस्य था. जब शुरू हुआ, एक्सपर्ट्स आने लगे तो 97 फीसदी लोगों ने बिल के खिलाफ बातें कीं. एक लाख आंकड़ा दे रहे हैं, सदन पटल पर रख दें कि कितने लोगों ने बिल का विरोध किया था. पहली बार जेपीसी में नॉन स्टेक होल्डर्स को बुलाया गया.’ उन्होंने कहा कि, कुछ तो ऐसे थे जो सांप्रदायिक बयान दे रहे थे. ये कह रहे हैं कि जेपीसी की सिफारिशों पर लाए हैं. इनसे पूछिए कि … Read more

रिलेशनशिप टूटने का मतलब रेप केस नहीं : सुको

 नई दिल्ली शादी का वादा करके संबंध बनाने के नाम पर रेप केस दर्ज कराए जाने के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति बन गई है कि जो रिश्ते शादी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनमें केस दर्ज हो रहे हैं। ऐसा होना गलत है। ऐसी स्थिति बन गई है कि रिलेशनशिप में रहना ही एक अपराध हो गया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि रोमांस खत्म होने या फिर ब्रेकअप होने का यह मतलब नहीं है कि मामला रेप का हो जाए। अदालत ने कहा कि अब समाज में जिस तरह से मूल्य बदल रहे हैं। हमें यह समझना होगा कि रिलेशनशिप टूटने का मतलब रेप केस ना बन जाए। अदालत ने यह टिप्पणी एक शख्स की अर्जी पर सुनवाई करते हुए की, जिसने रेप केस खारिज करने की अर्जी दी थी। उस शख्स के खिलाफ मंगेतर ने ही रेप का केस दाखिल किया था, जिससे उसकी सगाई हुई थी, लेकिन शादी नहीं हो पाई थी। महिला का दावा था कि शादी का गलत वादा करके उसके साथ संबंध बनाए गए। इस मामले में युवक का पक्ष वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने रखा, जबकि महिला की तरफ से माधवी दीवान ने दलीलें दीं। इस केस की सुनवाई करते हुए बेंच ने महिला से कहा, ‘आप इतनी भोली होतीं तो हमारे पास नहीं आतीं। आप बालिग थीं। यह नहीं कहा जा सकता कि किसी ने आपको शादी का वादा करने के नाम पर मूर्ख बनाया। पूरे सम्मान के साथ कहना होगा कि आज नैतिकता और मूल्य बदल गए हैं। खासतौर पर युवा पीढ़ी में। यदि हम आपसे सहमत हो जाएं तो फिर कॉलेज में किसी लड़के और लड़की के बीच का रिलेशन दंडनीय हो जाएगा।’ अदालत ने कहा, ‘मान लीजिए कि कॉलेज के दो स्टूडेंट्स के बीच प्यार है। लड़की पीछे हटती है और युवक कहता है कि मैं तुमसे अगले सप्ताह शादी कर लूंगा। फिर वह बाद में ऐसा नहीं करता है। क्या ऐसा करना अपराध माना जाएगा?’ बेंच ने यह भी कहा कि यह परंपरागत नजरिया है। जिसमें पूरी अपेक्षाएं पुरुषों पर ही डाल दी जाती हैं। इस पर महिला की वकील ने कहा कि यह मामला तो अरेंज मैरिज का है। वकील माधवी दीवान ने कहा, ‘इस मामले में संबंध बनाने की मंजूरी फ्री कंसेंट का केस नहीं है। यहां मसला है कि युवती को लगा कि यदि वह मंगेतर को खुश नहीं करेगी तो वह शादी नहीं करेगा। दोनों की सगाई हुई थी। यह युवक के लिए कैजुअल सेक्स हो सकता है, लेकिन लड़की के साथ ऐसा नहीं था।’ हालांकि बेंच इस दलील से सहमत नहीं हुई। जजों ने कहा कि आप ही बताएं कि क्या सिर्फ शादी न हो पाना रेप का अपराध मान लिया जाए। हम इस मामले को सिर्फ एक तरीके से नहीं देख सकते। हमें किसी एक जेंडर से ही अटैचमेंट नहीं है। मेरी भी एक बेटी है। यदि वह भी इस स्थिति में होती तो मैं भी इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखता। अब खुद ही बताइए कि क्या इतनी कमजोर दलीलों के आधार पर यह केस बनता है। जस्टिस बिंदल ने कहा कि शिकायतकर्ता को पता था कि यह रिश्ता खत्म हो सकता है। फिर भी उन्होंने संबंध बनाए। अदालत ने युवक की अर्जी पर सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की है।

ट्रंप सरकार का कर्मचारियों के लिए चीनी नागरिकों के साथ सेक्स पर बैन, नया नियम जारी

वाशिंगटन अमेरिकी सरकार ने चीन में अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों, साथ ही परिवार के सदस्यों और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त ठेकेदारों पर चीनी नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार का रोमांटिक या यौन रिश्ता रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को इस बारे में जानकारी मिली है। मामले से अवगत चार लोगों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एपी को इस नीति के बारे में बताया जिसे जनवरी में अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स ने चीन छोड़ने से कुछ समय पहले लागू किया था। कुछ अमेरिकी एजेंसियों ने पहले से ही ऐसे रिश्तों को लेकर सख्त नियम लगा रखे हैं। हालांकि, अन्य देशों में अमेरिकी राजनयिकों के लिए स्थानीय लोगों के साथ ‘डेटिंग’ करना और उनसे शादी तक करना भी असामान्य नहीं है। पिछले साल गर्मियों में इस नीति को सीमित रूप में लागू किया गया था, जिसके तहत अमेरिकी कर्मियों को चीन में अमेरिकी दूतावास और पांच वाणिज्य दूतावासों में गार्ड एवं अन्य सहायक कर्मचारियों के रूप में काम करने वाले चीनी नागरिकों के साथ ‘‘रोमांटिक और यौन रिश्ता’’ रखने पर रोक लगा दी गई थी। प्रतिबंध से अवगत दो लोगों ने ‘एपी’ को बताया कि नई नीति पर पहली बार पिछली गर्मियों में चर्चा हुई थी। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी संबंधी प्रतिनिधि सभा की चयन समिति ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। नई नीति के दायरे में मुख्य भूमि चीन में अमेरिकी मिशनों को शामिल किया गया है, जिसमें बीजिंग में दूतावास और गुआंगझू, शंघाई, शेनयांग और वुहान में वाणिज्य दूतावास के साथ हांगकांग के अर्द्ध-स्वायत्त क्षेत्र में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास शामिल हैं। यह चीन के बाहर तैनात अमेरिकी कर्मियों पर लागू नहीं है।

1 करोड़ हुआ इलाज का बिल, इलाज करा रही पत्नी को पति अस्पताल में छोड़कर भागा, अब इलाज करने से इंकार

नई दिल्ली कहानी एक ऐसी महिला की है, जिनका आधा शरीर चलना बंद हो चुका है। इतना सितम कम था कि उनका पति भी इलाज का बिल ज्यादा होने के बाद उन्हें अस्पताल में ही छोड़कर चला गया। अब नौबत यहां तक आ गई है कि अस्पताल ने उनके इलाज और देखभाल में असमर्थता जाहिर कर दी है। फिलहाल, मामला कोर्ट पहुंच गया है। मामला पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का है। पूरा मामला समझें मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि महिला को पति ने सितंबर 2021 में अस्पताल में भर्ती कराया था। तब उन्हें सिर में चोट लगी थी। महिला की न्यूरोसर्जरी समेत कई सर्जरी हुईं। अंत में वह बच तो गईं, लेकिन शरीर ने उनका साथ देना बंद कर दिया। स्थिर हालत होने के बाद भी पति जयप्रकाश गुप्ता ने महिला को घर ले जाने से इनकार कर दिया। क्या बोला पति गुप्ता की तरफ से कोई जवाब नहीं मिले के बाद अस्पताल ने बीते साल मई में पश्चिम बंगाल क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन का रुख किया। इसके बाद अस्पताल ने अदालत में जाने का फैसला किया। अब जब कोर्ट में जस्टिस अमृता सिन्हा ने गुप्ता से कारण पूछा, तो उसने कहा कि वह एक दुकान चलाता था और उसके पास पत्नी का ख्याल रखने का साधन नहीं है। अस्पताल की तरफ से पेश हुए वकील का कहना है कि अस्पताल ने महिला का इलाज किया और कई सर्जरी की। साथ ही उनका 6 लाख रुपये का इंश्योरेंस काफी समय पहले खत्म हो चुका है। वकील का कहना था कि बकाया राशि 1 करोड़ रुपये है। वकील ने यह भी कहा है कि गुप्ता ने एक ‘वैकल्पिक परिवार’ शुरू कर लिया है। जस्टिस सिन्हा ने एडवोकेट जनरल को 9 अप्रैल को पेश होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गुप्ता को भी हाजिर रहने के लिए कहा है। जस्टिस सिन्हा ने इस दौरान पारिवारिक मुद्दों पर कोई बात नहीं की। जबकि, सरकारी वकील ने कहा कि राज्यों के पास मुफ्त सेवाओं वाले शेल्टर होते हैं, लेकिन सरकारी शेल्टर के कर्मचारी बीमारी मरीजों के मामले में जानकार नहीं होते हैं।

राधा मोहन दास अग्रवाल का कांग्रेस पर तीखा हमला, यह एक क्रांतिकारी विधेयक है जो गरीब मुसलमानों की मदद करेगा

नई दिल्ली लोकसभा में पास होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को आज राज्यसभा में पेश किया गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को सदन के पटल पर रखा। बता दें कि करीब 12 घंटे लंबी बहस और तीखी नोकझोंक के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को बुधवार देर रात लोकसभा में पारित कर दिया गया। इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 सांसदों ने मतदान किया। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन को बेहतर करने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दलों के बीच गहरा मतभेद देखने को मिला। अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं।   राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 2013 में वक्फ़ संशोधन विधेयक का समर्थन करने के बाद अपना रुख इसलिए बदल लिया क्योंकि 2024 के चुनाव में उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और वह वक्फ़ कानून के बारे में देश में तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रही है। वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि 2013 में जब यह विधेयक संसद में आया तो लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में भाजपा के नेताओं ने उसका समर्थन किया था लेकिन आज इसे ‘दमनकारी कानून’ करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2024 में जब सत्तारूढ़ भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वह 240 सीटों पर सिमट गयी तो उसे इस वक्फ़ कानून की याद आयी और वह इसे दमनकारी कानून कहने लगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित कई प्रदेशों में तो वक्फ़ बोर्ड गठित ही नहीं किये गये और आज अल्पसंख्यक मंत्री वक्फ़ में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं। हुसैन ने सरकार से जानना चाहा कि क्या सरकार ‘प्रैक्टिसिंग मुस्लिम’ की पहचान करने के लिए कोई अलग विभाग खोलेगी और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो लगा कर कोई प्रमाणपत्र देगी ? उन्होंने कहा कि इस विधेयक का असली मकसद यह है कि खुद सरकार की नज़र वक्फ़ की जमीन पर लगी हुई है। राधा मोहन दास अग्रवाल का कांग्रेस पर तीखा हमला भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने राज्यसभा में कहा, “जब सैयद नासिर हुसैन ने बेंगलुरु में राज्यसभा की शपथ ली, तब मैं कर्नाटक में था। उनके समर्थकों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए और विरोध करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया।” उन्होंने कहा, “यह एक क्रांतिकारी विधेयक है जो गरीब मुसलमानों की मदद करेगा। हम हिंदू हैं और इतिहास गवाह है कि हमने सती प्रथा और बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाकर और विधवा विवाह की अनुमति देकर अपने समाज को बेहतर बनाने की कोशिश की है। लेकिन इस संसद में ऐसे सुधार करने की कोई कोशिश नहीं की गई जिससे गरीब मुसलमानों की मदद हो सके। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार ऐसा हो रहा है। उनकी सभी कल्याणकारी योजनाएं मुसलमानों तक पहुंची हैं।” हमें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है- सैयद नसीर कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने राज्यसभा में कहा, ‘वे राजनीति कर रहे हैं और देश में दंगे कराना चाहते हैं। वे पोर्टल पर पंजीकरण के लिए कागजात मांगेंगे। अगर उनके पास कागजात नहीं होंगे, तो उनके लोग हंगामा करेंगे।’ ‘क्या आप हमें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं? वे 123 संपत्तियों को लेकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। वे या तो मस्जिद हैं, कब्रिस्तान हैं या दरगाह हैं। मैं उनकी सूची प्रस्तुत करना चाहता हूं। जब अंग्रेजों ने लुटियंस दिल्ली पर कब्जा किया, तो उन्होंने क्षेत्र के निर्माण के बाद इन संपत्तियों को वक्फ को सौंप दिया था। ये संपत्तियां वक्फ के पास हैं। ये वे संपत्तियां हैं जिनका वे 2013 के संबंध में उल्लेख कर रहे हैं।” राज्यसभा में सैयद नसीर हुसैन बनाम अमित शाह संसद में सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “वे कहते हैं कि मौजूदा वक्फ अधिनियम के तहत, अगर लोग न्यायाधिकरण के फैसले से असंतुष्ट हैं तो वे अदालत नहीं जा सकते। यह गलत है। अगर कोई भी अदालत नहीं जा सकता तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में इतने सारे लंबित मामले कैसे हैं?” इस पर अमित शाह ने जवाब दिया, “उन्होंने 2013 के अधिनियम में न्यायालय में सिविल मुकदमे के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा, जिसका दायरा व्यापक है। उनके पास केवल उच्च न्यायालय में रिट क्षेत्राधिकार का प्रावधान है, जिसका दायरा बहुत सीमित है।”

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