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राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दी इफ्तार पार्टी, गेस्ट के तौर इन्हें बुलाया और हो गया कांड, Not Trump Iftar के लगे नारे

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर व्हाइट हाउस में पहली इफ्तार (Iftar) पार्टी की मेजबानी की. लेकिन ट्रंप की यह इफ्तार पार्टी विवादों में घिर गई है. अमेरिकी मुस्लिम इस इफ्तार डिनर पर भड़के हुए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इफ्तार डिनर की मेजबानी करते हुए कहा कि मैं आप सभी का व्हाइट हाउस के इफ्तार डिनर में स्वागत करता हूं. हम इस्लाम के पवित्र महीने रमजान का जश्न मना रहे हैं. यह बहुत बेहतरीन महीना है. दुनियाभर के मुस्लिमों को रमजान मुबारक. हम दुनिया के बेहतरीन धर्मों में से एक धर्म का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं. खुदा की इबादत करते हैं. इसके बाद पूरी दुनिया के मुसलमान हर रात परिवारों और दोस्तों के साथ एकजुट होकर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और इफ्तार करते हैं. हम सभी पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं. ट्रंप ने कहा कि 2024 राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए मुस्लिम अमेरिकी समुदाय का आभार भी जताया. बता दें कि व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी आयोजित करने की दो दशक पुरानी परंपरा है. लेकिन आरोप हैं कि इस बार अमेरिकी मुस्लिम सांसदों और समुदाय से जुड़े नेताओं को इसमें शामिल होने का न्योता नहीं दिया गया. इसके बजाए मुस्लिम देशों के विदेशी राजदूतों को इफ्तार डिनर में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. व्हाइट हाउस के बाहर कई मुस्लिम सिविल राइट्स ग्रुप ने Not Trump’s Iftar प्रोटेस्ट किया. इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह डोनाल्ड ट्रंप का एक तरह का पाखंड है. वह एक तरफ देश में मुस्लिमों के प्रवेश पर बैन लगाते हैं तो दूसरी तरफ इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं. बता दें कि इससे पहले 2017 में ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस की इफ्तार पार्टी को रद्द कर दिया था. दरअसल 1996 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी की शुरुआत की गई थी, जिसे बाद के राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश और बराक ओबामा ने भी जारी रखा. इस इफ्तार पार्टी में मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों के साथ ही मुस्लिम देशों के राजनयिक और सीनेटर शामिल होते रहे हैं.  

कैंसर, डायबिटीज, हार्ट संबंधी रोगों की दवाओं सहित एंटीबायोटिक्स की कीमतों में वृद्धि की संभावना

नई दिल्ली भारत में जल्द ही कैंसर, डायबिटीज, हार्ट संबंधी रोगों की दवाओं और एंटीबायोटिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकारी नियंत्रण में आने वाली इन दवाओं की कीमतों में 1.7% तक की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यह असर अगले दो से तीन महीनों में दिखाई दे सकता है, क्योंकि मौजूदा समय में इन दवाओं का स्टॉक 90 दिनों का पहले से ही उपलब्ध है। दवाओं के दाम बढ़ने की वजह रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के महासचिव राजीव ने बताया कि कच्चे माल और अन्य खर्चों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। इससे फार्मा इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है। फार्मा कंपनियों पर आरोप रसायन और उर्वरक से संबंधित संसद की स्थायी समिति के अनुसार, फार्मा कंपनियों पर दवाओं की कीमतें बढ़ाने और नियामक नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लग चुके हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की रिपोर्ट में कहा गया है कि फार्मा कंपनियों ने 307 मामलों में नियमों का उल्लंघन किया है। NPPA के अनुसार, ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 के तहत दवाओं की अधिकतम कीमत तय की जाती है, और सभी निर्माता और विक्रेता इन कीमतों के भीतर ही दवाएं बेचने के लिए बाध्य होते हैं। सरकार की राहत की कोशिश इस साल के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 36 जीवन रक्षक दवाओं से कस्टम ड्यूटी को हटा देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर क्रोनिक रोगों से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है। फार्मा कंपनियों पर लगे नियमों के उल्लंघन का आरोप  NPPA ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत दवाओं की अधिकतम कीमत निर्धारित करता है. सभी दवा निर्माताओं और विक्रेताओं को इस तय कीमत (जीएसटी सहित) के भीतर ही दवा बेचने का निर्देश दिया गया है. इस साल के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 36 लाइफ सेविंग ड्रग्स से कस्टम ड्यूटी हटाने का ऐलान किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि कैंसर, रेयर डिजीज और अन्य गंभीर क्रोनिक डिजीज से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने 36 लाइफ सेविंग दवाओं से बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) पूरी तरह हटाने का फैसला किया है.  

चारधाम यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू होगी, इस बार वीआई दर्शन भी नहीं करवा सकेंगे

देहरादून उत्तराखंड में चारधाम यात्रा इस साल 30 अप्रैल से शुरू हो रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर आते हैं। इस बार चारधाम यात्रा में कुछ नए नियम बनाए गए हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो और रील बनाने वालों के लिए खास नियम हैं। मंदिर के अंदर वीडियो और रील बनाने पर रोक लगा दी गई है। ऐसा करने पर दर्शन किए बिना ही वापस भेज दिया जाएगा। इसके अलावा VIP दर्शन भी बंद कर दिए गए हैं। इस बार की चारधाम यात्रा के लिए 9 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। केदारनाथ-बद्रीनाथ पंडा समाज ने यह फैसला लिया है कि इस बार यात्रा में रील बनाने वालों को मंदिर में घुसने नहीं दिया जाएगा। पिछले साल वीडियो बनाने वाले यात्रियों की वजह से कई जगह पर व्यवस्था बिगड़ गई थी। केदारनाथ धाम में सिर्फ वीडियो बनाने के लिए ढोल-नगाड़े बज रहे थे। इससे प्रकृति और श्रद्धालुओं की शांति भंग हो रही थी। इसलिए इस बार प्रशासन ने कैमरा चालू करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. ‘पैसे लेकर दर्शन करवाना भगवान की मर्यादा के खिलाफ’ इस साल चारधाम यात्रा में VIP दर्शन भी बंद कर दिए गए हैं। बद्रीनाथ धाम के पंडा पंचायत के कोषाध्यक्ष अशोक टोडरिया ने कहा कि पैसे लेकर दर्शन करवाना भगवान की मर्यादा के खिलाफ है। इसलिए इस बार सभी श्रद्धालु सामान्य दर्शन ही कर पाएंगे। इससे सभी को दर्शन करने का समान मौका मिलेगा। मौसम खराब होने पर यात्रियों के लिए बने 10 होल्डिंग स्‍थल चारधाम यात्रा 30 अप्रैल, 2025 (अक्षय तृतीया) से शुरू होगी। सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। इसके बाद 2 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। सबसे आखिर में 4 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। यात्रा मार्ग को 10-10 किलोमीटर के हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में 6 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। अगर मौसम खराब होता है, तो यात्रियों को राहत देने के लिए 10 जगहों पर होल्डिंग स्थल बनाए गए हैं। यहां पर खाने-पीने और दूसरी जरूरी चीजें मिलेंगी।

नवरात्र और ईद पर भीड़ को देखते हुए रेलवे ने इन रूटों पर चलाईं विशेष ट्रेनें, नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा विशेष

नई दिल्ली नवरात्र व ईद के कारण भीड़ और बढ़ने की संभावना है। इसे ध्यान में रखकर रेलवे प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाने के साथ ही विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा के साथ ही पांच अन्य स्थानों के लिए ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा विशेष (04085/04086) नवरात्र के समय दिल्ली व आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में लोग श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा जाते हैं। इस कारण कटड़ा व जम्मू जाने वाली ट्रेनों में जगह नहीं है। यात्रियों की सुविधा के लिए 28 से 31 मार्च तक नई दिल्ली से दोपहर 12.30 बजे विशेष ट्रेन चलेगी। वापसी में 29 मार्च से एक अप्रैल तक कटड़ा से सुबह साढ़े सात बजे यह ट्रेन चलेगी। रास्ते में इसका ठहराव सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला छावनी, ढंढारी कलां, जालंधर छावनी, पठानकोट छावनी, जम्मू तवी, बलिदानी कैप्टन तुषार महाजन ऊधमपुर रेलवे स्टेशन पर होगा। जनरल, स्लीपर व एसी श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। पुरानी दिल्ली-वाराणसी विशेष (04024/04023) पुरानी दिल्ली से यह विशेष ट्रेन 28 से 30 मार्च तक शाम साढ़े सात बजे और वापसी में वाराणसी से 29 से 31 मार्च तक शाम 6.35 पर चलेगी। रास्ते में गाजियाबाद, मुरादाबाद, आलमनगर, लखनऊ,राय बरेली और मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर ठहरेगी। जनरल, स्लीपर व एसी श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। नई दिल्ली-पटना विशेष (04088/04097) नई दिल्ली से 28 मार्च से एक अप्रैल तक शाम 3.50 बजे रवाना होगी। वापसी में 29 मार्च से दो अप्रैल तक पटना से दोपहर 12 बजे चलेगी। रास्ते में गोविंदपुरी, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर, आरा व दानापुर रेलवे स्टेशन पर ठहरेगी। इसमें सिर्फ एसी श्रेणी के कोच होंगे। नई दिल्ली-सहरसा विशेष (04090/04089) 28 व31 मार्च को नई दिल्ली से दोपहर सवा दो बजे रवाना होगी। वापसी में सहरसा से 29 मार्च व एक अप्रैल को शाम पौने सात बजे चलेगी। स्लीपर व जनरल कोच वाली यह ट्रेन रास्ते में गोविंदपुरी, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर, आरा, दानापुर, पाटलीपुत्र, हाजीपुर, बरौनी, बेगुसराय, खगड़िया व मानसी रेलवे स्टेशन पर रुकेगी। नई दिल्ली-इंदौर विशेष (04092/04091) नई दिल्ली से यह विशेष ट्रेन 28 व30 मार्च को शाम साढ़े तीन बजे और वापसी में इंदौर से 29 व31 मार्च को पूर्वाह्न 11.30 बजे चलेगी। जनरल, स्लीपर व एसी श्रेणी वाली इस ट्रेन का ठहराव मथुरा, कोटा, नागदा और रतलाम रेलवे स्टेशन पर होगा।

अब दूध पीना पड़ेगा महंगा!, राज्य सरकार ने बढ़ाये 4 रुपये प्रति लीटर दाम, 1 अप्रैल से लागू होंगी नई कीमतें

नई दिल्ली महंगाई के इस दौर में अब दूध भी आम आदमी की जेब ढीली करने जा रहा है। अब एक लीटर दूध के पैकेट की कीमत 4 रुपये बढ़ गई है। ये नई कीमतें एक अप्रैल से लागू होंगी। ये फैसला कर्नाटक सरकार ने लिया है। राज्य सरकार में मंत्री केएन रंजना ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में दूध की कीमतें 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाएंगी। डेयरी किसान और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन लंबे समय से कीमतें बढ़ाने की मांग कर रहे थे। दही भी हो गई महंगी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठन की मांग थी कि दूध की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई जाए। हालांकि सरकार ने 4 रुपये की बढ़ोतरी का ही फैसला किया है। इतना ही नहीं, नंदिनी दही की कीमत भी 4 रुपये प्रति किलो बढ़ गई है। इसके पहले जून 2024 में भी नंदिनी दूध की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। मंत्री केएन रंजना ने कहा कि मूल्य संशोधन की राशि सीधे राज्य के दूध उत्पादकों तक पहुंचे, इसके लिए कदम उठाए जाएंगे। कितनी हो जाएगी दूध की कीमत? यहां गौर करना जरूरी है कि कर्नाटक सरकार ने जून में हुई 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का फैसला वापस ले लिया है। इसका अर्थ ये हुआ कि कीमतों में महज 2 रुपये प्रति लीटर का ही फर्क आएगा। अब नंदिनी दूध के एक लीटर वाले नीले पैकेट की कीमत 44 रुपये से बढ़कर 48 रुपये हो जाएगी। बता दें कि नंदिनी दूध अब हरियाणा में अभी लॉन्च हो सकता है। कर्नाटक को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर फेडरेशन ने बताया कि जल्द ही हरियाणा में इसकी लॉन्चिंग होगी। हाल ही में नंदिनी ने यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली में विस्तार किया है।  

जो प्रवासी भारत के विकास के लिए आ रहे हैं, हम उनका स्वागत करते हैं: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। इसी बीच आज  लोकसभा में इमीग्रेशन बिल को लेकर चल रही चर्चा में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हिस्सा लिया।  घुसपैठ और अवैध अप्रवास रोकने के मकसद से लाए गए इस बिल का नाम इमिग्रेशन एंड फॉरेन बिल 2025 (अप्रवासन और विदेशी विधेयक) है।   देश के विकास करने वालों का भारत में स्वागत: अमित शाह इस विधेयक के महत्व का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जो प्रवासी भारत के विकास के लिए आ रहे हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। जो लोग देश में शिक्षा के लिए, व्यापार के लिए, रिसर्च के लिए आते हैं हम उनका स्वागत करते हैं। पीएम मोदी का लक्ष्य है कि साल 2047 तक हमारा देश एक विकसित राष्ट्र बने। इसी वजह से हम कई पुराने कानूनों को खत्म किया। सीमा में कौन दाखिल हो रहा, जानना जरूरी: अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है। देश के कई मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बहुत जरूरी है कि देश की सीमा में कौन घुसता है। हम उन लोगों पर भी कड़ी नजर रखेंगे जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालेंगे।” अमित शाह ने आगे कहा,”10 साल में हमारा अर्थतंत्र 11वें नंबर से 5वें नंबर पर पहुंच गया है। पूरी दुनिया के अर्थतंत्र की सूची में भारत एक चमकदार जगह बनकर उभरा है। भारत मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने जा रहा है। ऐसे में हमारे यहां विश्वभर से लोगों का आना बड़ा स्वभाव है।” हमारा इमीग्रेशन का स्कैन और साइज दोनों बहुत बड़ा है। इसके साथ-साथ शरण लेने की जगह पर उनके निहित निवास और देश को असुरक्षित करने वालों की संख्या भी बढ़ती है। ऐसे में जो लोग भारत की व्यवस्था में योगदान देने के लिए आते हैं, व्यापार और शिक्षा के लिए आते हैं, ऐसे सभी लोगों का स्वागत है, लेकिन लकड़ी रोहिंग्या हो या बांग्लादेशी हो। अगर यहां गंदगी फैलाने के लिए आते हैं तो इन लोगों के साथ बड़ी दोस्ती के साथ उनका व्यवहार होगा।

HRTC में शामिल होंगी 324 सुपर लग्जरी बसें, हिमाचल सरकार ने दी मंजूरी, नहीं करना होगा इंतजार

शिमला हिमाचल के लोगों के लिए एक खुशखबरी है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बेड़े में जल्द ही 297 इलेक्ट्रिक बसें (HRTC New Buses) शामिल होगी। गुरुवार को आयोजित निदेशक मंडल (बीओडी) की बैठक में बस खरीद को मंजूरी देकर वर्क ऑर्डर जारी करने के निर्देश दिए हैं। निगम इस बार जो बसें खरीदेगा उसकी मरम्मत (एएमसी) का कार्य भी संबंधित कंपनी 12 साल तक करेगी। निगम ने टेंडर में इसका प्रविधान किया था। इसके चलते निगम को बसें महंगी पड़ रही है। जो बस 1.25 करोड़ में पड़नी थी वह एमएमसी के तहत 1.71 करोड़ में पड़ेगी। लेकिन निगम को इसका फायदा मिलेगा, क्योंकि बसें खराब होने की सूरत में उन्हें ज्यादा खर्च वहन करना पड़ रहा है। पहले निगम के पास जो ई बसें हैं उसमें यह प्रविधान नहीं था। जिसके चलते इसके पार्ट्स को विदेश से मंगवाना पड़ रहा था जो काफी मंहगा पड़ रहे थे। सरकार के इस कदम से यात्रियों को मदद मिलेगी। वहीं, बसों के अंदर पैनिक बटन, स्वचालित दरवाजें और एसी इत्यादि की व्यवस्था भी होगी। 24 सुपर लग्जरी बसों का वर्क ऑर्डर जारी सरकार नाबार्ड की मदद से बसों की खरीद को पैसा जारी करेगी। निदेशक मंडल ने 24 सुपर लग्जरी बसों का वर्क आर्डर जारी करने को भी मंजूरी दे दी है। यह बस 1.52 करोड़ की लागत से निगम खरीदेगा। सभी बसें बीएस-6 श्रेणी की होगी। शनिवार को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक को यह मामले भेजे जाएंगे। बसों के लिए किया आवेदन बैठक में निगम में बसों की खरीद को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने उप-मुख्यमंत्री को बताया कि 250 डीजल बसों के लिए दो अशोका लीलेंड और टाटा दो ही कंपनियां आगे आई है। 100 मिनी मिडी (Himachal New Buses) बसों के लिए एक ही कंपनी ने आवेदन किया है। निदेशक मंडल ने निर्णय लिया है कि नई शर्तों के साथ चैसी बिल्ड कंपनियों के साथ बात की जाएगी और उनसे टेंडर मंगवाए जाएंगे। यदि बात बनी तो एचआरटीसी  (HRTC New Buses) इनकी चैसी खरीदेगा और बॉडी खुद बनवाएगा। बैठक में उपाध्यक्ष अजय वर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम, निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल सहित अन्य अधिकारी व निदेशक मंडल के सदस्य मौजूद रहे।

दक्षिण कोरिया के जंगल में नहीं थम रही आग ने भारी तबाही मचाई है और लगभग 36,000 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक

सोल दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी प्रांत नॉर्थ ग्योंगसांग में लगी अब तक की सबसे बड़ी जंगल की आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन कर्मी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आग में अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है और 30 अन्य लोग घायल हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले शुक्रवार से इस क्षेत्र में लगी जंगल की आग ने भारी तबाही मचाई है और लगभग 36,000 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया है। यह आग 2000 में पूर्वी तट पर लगी जंगल की आग से लगभग 13,000 हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। उस समय की आग में 23,794 हेक्टेयर जंगल जल गया था। लगभग 37,000 लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं, जिनमें उत्तरी ग्योंगसांग प्रांत के उइसियोंग और अंडोंग इलाकों के 29,911 लोग शामिल हैं। इससे पहले कार्यवाहक दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति हान डक-सू ने कार्यवाहक आंतरिक मंत्री की-डोंग को उत्तर ग्योंगसांग प्रांत में रहकर आग पर काबू पाने तक प्रभावित लोगों के लिए राहत कार्यों की देखरेख करने का आदेश दिया। हान ने कहा, “यह बहुत चिंता की बात है कि पीड़ितों में से कई बुजुर्ग लोग हैं, जिनमें नर्सिंग अस्पतालों के मरीज भी शामिल हैं।” उन्होंने कहा, “कृपया पीड़ितों की सेहत और सुरक्षा का ध्यान रखें और एक प्रभावी सहायता प्रणाली बनाएं, ताकि आग बुझाने वाले कर्मचारी और स्वयंसेवक थककर जलने से बच सकें।” उत्तरी ग्योंगसांग प्रांत में, अधिकारियों ने जंगली आग को फैलने से रोकने के लिए फिर से प्रयास शुरू कर दिए हैं। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, वन अधिकारियों ने सोल से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में उइसियोंग काउंटी में लगी आग पर काबू पाने के लिए शनिवार सुबह 6:30 बजे हेलीकॉप्टर, दमकल गाड़ियां और अग्निशमन कर्मी भेजने शुरू कर दिए। यह आग तेज हवाओं के कारण जल्दी फैल गई। मौसम अधिकारियों के अनुसार, उत्तरी ग्योंगसांग प्रांत में लगभग 5 मिमी बारिश होने की उम्मीद है। प्रांत में लगी आग से 21 लोगों की मौत होने का अनुमान है, जिनमें से चार लोग एंडोंग में मारे गए और आठ लोगों की मौत येओंगदेओक काउंटी में हुई।

अलग-अलग हिस्सों में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी, आठ बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर को किया गिरफ्तार

मुंबई देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। मुंबई में पुलिस ने पहली बार आठ बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर को गिरफ्तार किया है। मुंबई की शिवाजी नगर थाना पुलिस के अनुसार, यह सभी बांग्लादेशी पहचान और लिंग बदलकर रहते थे। पुलिस शहर में बांग्लादेशी नागरिकों को ढूंढ रही थी, लेकिन पुलिस से बचने के लिए यह किन्नर बनकर रहते थे। ये सभी नागरिक मुंबई में लगभग पांच साल से रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी कलाकार (नृत्य कलाकार) के रूप में काम करते थे और वैध दस्तावेजों के बिना यहां रह रहे थे। इन आरोपियों ने अपने नाम, पहचान और कुछ मामलों में अपना लिंग भी बदल लिया था, जिससे वे अन्य नागरिकों से अलग दिखते थे। शिवाजी नगर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर रफीक नगर इलाके में जाल बिछाकर आठ ट्रांसजेंडर बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन सभी ने बांग्लादेश सीमा से अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था। मुंबई की शिवाजी नगर पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी वेश्यावृत्ति, धोखाधड़ी और ग्राहकों को ठगने और लूटने के मामलों में भी शामिल थे। मुंबई में यह पहली बार हुआ है जब ट्रांसजेंडर के रूप में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जांच में पाया कि ये सभी पुरुष है और अपनी पहचान छुपाने के लिए ट्रांसजेंडर बन कर रहते थे। बता दें कि 26 मार्च को मुंबई की शिवाजी नगर और आरसीएफ थाने की संयुक्त टीम ने मुंबई के गोवंडी और चेंबूर इलाकों में अभियान चलाकर अवैध रूप से रह रहे 17 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें पांच महिलाएं भी शामिल थी। पुलिस ने अवैध घुसपैठियों की तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। हर टीम को एक निश्चित क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है, जहां उन्होंने गहन जांच-पड़ताल कर अवैध रूप से भारत में रह रहे इन बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था।

70 साल पुराना सपना साकार, जम्मू-कश्मीर की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द दौड़ेगी पटरी पर

 जम्मू  70 साल पुराना सपना साकार होने जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी  19 अप्रैल को कटरा से घाटी तक चलने वाली पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी कटरा से कश्मीर तक चलने वाली जम्मू-कश्मीर की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। ये ट्रेन रियासी जिले के कटरा कस्बे से शुरू होकर पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला को पार करते हुए श्रीनगर पहुंचेगी और फिर उत्तरी कश्मीर के बारामूला तक जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी 19 अप्रैल की सुबह नई दिल्ली से उधमपुर आर्मी एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे चेनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का दौरा करेंगे। इस दौरान उन्हें पुल के निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद पीएम मोदी कटरा स्थित माता वैष्णो देवी आधार शिविर से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल ये ट्रेन संगलदान से बारामूला तक चल रही है। इस इतिहास बनाने वाले कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल होंगे। दिल्ली लौटने से पहले प्रधानमंत्री मोदी कटरा में एक सार्वजनिक रैली को भी संबोधित करेंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार जम्मू रेलवे स्टेशन पर विस्तार कार्य पूरा होने के बाद इस वर्ष जुलाई-अगस्त तक जम्मू से घाटी के लिए ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। हालांकि फिलहाल दिल्ली या अन्य हिस्सों से कश्मीर के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं होगी। यात्रियों को कटरा में उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़नी होगी जिसे बाद में जम्मू में भी लागू किया जाएगा। बता दें कि उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के तहत कुल 272 किलोमीटर में से 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-बारामूला खंड को अक्टूबर 2009 में शुरू किया गया था। इसके बाद जून 2013 में 18 किलोमीटर लंबे बनिहाल-काजीगुंड लिंक और जुलाई 2014 में 25 किलोमीटर लंबे उधमपुर-कटरा खंड का कार्य पूरा किया गया है। पिछले साल फरवरी में 48.1 किमी बनिहाल-संगलदान खंड को भी जोड़ा गया था। 46 किलोमीटर लंबे संगलदान-रियासी खंड का काम भी पिछले साल जून में पूरा हुआ जबकि रियासी और कटरा के बीच 17 किलोमीटर का निर्माण हाल ही में पूरा किया गया है।

जीवनसाथी का त्महत्या करने की धमकी देना क्रूरता है, यह तलाक का वैध आधार: बॉम्बे हाई कोर्ट

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि जीवनसाथी का आत्महत्या का प्रयास करना या आत्महत्या करने की धमकी देना क्रूरता है और यह तलाक का वैध आधार है। हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ के जस्टिस आरएम जोशी ने पिछले महीने अपने आदेश में दंपती के विवाह को खत्म करने के परिवार अदालत के आदेश को बरकरार रखा। महिला ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। पति ने लगाए थे ये आरोप? पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने धमकी दी थी कि वह आत्महत्या करके उसे व उसके परिवार को जेल भिजवा देगी। परिवार अदालत के समक्ष दायर तलाक की याचिका में उसने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के प्रविधानों के तहत यह क्रूरता है।हाई कोर्ट पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पति की ओर से परिवार अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य एवं अन्य गवाह यह प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त से अधिक हैं कि उसकी क्रूरता की दलील साबित होती है।   अदालत ने कहा कि पति ने न सिर्फ पत्नी द्वारा आत्महत्या की धमकी का आरोप लगाया था बल्कि पत्नी ने एक बार आत्महत्या का प्रयास किया भी था। हाई कोर्ट ने कहा, ‘जीवनसाथी की ओर से इस तरह का कृत्य ऐसी क्रूरता मानी जाएगी जो तलाक का आदेश देने का आधार बन जाती है।’ पीठ ने तलाक मंजूर करने के परिवार अदालत के आदेश को रद करने से इनकार कर दिया और कहा कि इसमें कुछ भी प्रतिकूलता नहीं है, लिहाजा किसी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।मामले के अनुसार, दंपती का अप्रैल, 2009 में विवाह हुआ था और उनकी एक पुत्री भी है। सास-ससुर पर हस्तक्षेप का आरोप पति ने दावा किया था कि उसके सास-ससुर अक्सर उसके घर आया करते थे और उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करते थे। 2010 में उसकी पत्नी उसका घर छोड़कर अपने माता-पिता के घर चली गई और लौटने से इन्कार कर दिया। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी ने कहा था कि वह उसके और उसके परिवार के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करा देगी और उन्हें जेल भिजवा देगी। जबकि महिला ने अपनी याचिका में कहा कि पति व उसके पिता उसके साथ दु‌र्व्यवहार करते थे, लिहाजा उसने पति का घर छोड़ दिया। उसने पति के साथ किसी तरह की क्रूरता करने से इनकार किया था।

आसाराम आश्रम छिन सकता है, इसके अलावा सदाशिव प्रज्ञा मंडल को भी किया जा सकता है शिफ्ट: रिपोर्ट

अहमदाबाद रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रवचनकर्ता आसाराम से अहमदाबाद आश्रम छिन सकता है। जहां अभी आसाराम का आश्रम है, संभव है कि वहां 2036 में दुनियाभर के खिलाड़ी ओलिंपिक मेडल के लिए जोर लगा रहे होंगे। दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन की दावेदारी के लिए गुजरात के अहमदाबाद में जोरशोर से तैयारी चल रही है। इसके लिए जो मास्टर प्लान बनाया गया है उसके दायरे में आसाराम का आश्रम भी है। सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में बताया है कि अहमदाबाद के मोटेरा में स्थित आसाराम के आश्रम का सरकार अधिग्रहण कर सकती है। नरेंद्र मोदी स्टेडियम के नजदीक तीन आश्रमों को हटाकर वहां सरदार पटेल स्पोर्ट्स एनक्लेव, ओलिंपिक विलेज और अन्य खेल सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘संत श्री आसाराम आश्रम’ के अलावा भारतीय सेवा समाज और सदाशिव प्रज्ञा मंडल को भी शिफ्ट किया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इन आश्रमों की जमीन को अधिग्रहण करके इन ट्रस्ट को वैकल्पिक स्थान देने की प्रक्रिया चल रही है। अहमदाबाद म्यूनिसिपिल कमिश्नर, अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर समेत तीन सदस्यों की समिति मास्टर प्लान के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में जुटी है। 86 साल के आसाराम 31 मार्च तक अंतरिम जमानत पर रिहा है। इससे पहले वह राजस्थान के जोधपुर जेल में बंद था। शीर्ष अदालत ने गुजरात में बलात्कार के एक मामले में आसाराम को अंतरिम जमानत पर रिहा किया है। इस मामले में सत्र अदालत ने जनवरी 2023 में उसे दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

Ola, Uber के अब केंद्र सरकार शुरू करने जा रही ‘सहकार टैक्सी’

नई दिल्ली Ola, Uber जैसी सर्विसेज के साथ अपनी गाड़‍ियां चलाने वाले ड्राइवरों की हमेशा एक शिकायत रहती है कि उन्‍हें सही भुगतान नहीं किया जाता। तमाम ड्राइवरों को यह आरोप लगाते हुए देखा गया है कि कंपन‍ियां उनसे ज्‍यादा कमीशन लेती है और उन्‍हें कम पेमेंट होता है। ओला-उबर को अब एक नई चुनौती मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार बहुत जल्द ‘सहकार टैक्सी’ नाम से एक नई टैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है। कहा जा रहा है कि इससे ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्‍स को टक्‍कर मिलेगी। इस सर्विस के तहत लोग बाइक, कैब और ऑटो बुक करा पाएंगे एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए। नहीं देना होगा कमीशन, सीधे मुनाफा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में ‘सहकार टैक्सी’ का ऐलान किया। उन्‍होंने कहा कि इसका मकसद ड्राइवरों को बड़ी कंपनियों को मुनाफा दिए बिना सीधे कमाने में मदद करना है। कहा जा रहा है कि किसी राइड से जो भी मुनाफा होगा, वह सीधे ड्राइवर को मिलेगा। उसे कहीं कोई कमीशन नहीं देना होगा। पूरे देश में शुरू की जाएगी सहकार टैक्‍सी सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में सहकार टैक्सी पूरे देश में शुरू हो जाएगी। इस सर्विस से होने वाला सारा मुनाफा सीधे ड्राइवरों को मिलेगा। एक सहकारी बीमा कंपनी भी बनाई जाएगी, जो बीमा सेवाएं देने का काम करेगी। टू और फोर-वीलर का होगा रजिस्‍ट्रेशन बताया जा रहा है कि सर्विस से जुड़ने के लिए टू वीलर और फोर वीलर्स का रजिस्‍ट्रेशन सहकार टैक्‍सी में किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सर्विस से जो भी मुनाफा होगा, वह किसी बिजनेसमैन की जेब में नहीं जाएगा। वह सीधे गाड़ी चलाने वाले को मिलेगा। ओला, उबर से सस्‍ता ऑप्‍शन रिपोर्ट के अनुसार, सहकार टैक्‍सी का मुख्‍य मकसद लोगों को सस्‍ती ट्रांसपोर्ट सर्विस मुहैया कराना है। इससे ड्राइवरों को कमाई करने के बेहतर विकल्‍प मिलेंगे। प्राइवेट कंपनियां ड्राइवरों से कुछ कमीशन ले लेती हैं। कई बार कूपन कोड अप्‍लाई होने से ग्राहक को तो फायदा हो जाता है, लेकिन ड्राइवर को कम पैसा मिलता है। राज्‍यों में पहले से चल रहीं ऐसी योजनाएं रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्‍यों में इस तरह की सेवाएं पहले से चल रही हैं। साल 2022 में केरल में केरल सवारी को शुरू किया गया था। पश्चिम बंगाल में भी यात्री साथी के नाम से ऐसी सर्विस चलाई जा रही है। अब सहकार सर्विस के आने से ओला-उबर को चुनौती मिल सकती है।

पति और उसके परिवार के खिलाफ 45 मुकदमे दर्ज कराए गए थे, स्पष्ट है कि रिश्ते में गहरी दरार, तलाक ही एक रास्ता

भुवनेश्वर एक महिला ने अपने पति के खिलाफ 45 केस दर्ज करा दिए। इस पर ओडिशा हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना तो एक तरह की क्रूरता है। इसके साथ ही अदालत ने पति की तलाक की अर्जी भी मंजूर कर ली। निचली अदालत ने पहले ही तलाक दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से पति और उसके परिवार के खिलाफ 45 मुकदमे दर्ज कराए गए थे, उससे स्पष्ट है कि रिश्ते में गहरी दरार आ चुकी है। दरअसल महिला ने फैमिली कोर्ट के 2023 के जजमेंट के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी। निचली अदालत ने तलाक मंजूर किया था और कहा था कि महिला की ओर से इतने केस फाइल कराना मानसिक क्रूरता था। कपल की शादी 11 मई, 2003 को शादी हुई थी। शुरुआत में दोनों कटक में रहते थे और फिर भुवनेश्वर, बेंगलुरु, अमेरिका और जापान में वे रहे। हालांकि दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे और फिर मुकदमेबाजी का दौर शुरू हुआ। इसके चलते पति ने 2009 में तलाक के लिए आवेदन किया था और उनका कहना था कि पत्नी मानसिक क्रूरता कर रही है। महिला ने अपील दायर की थी और कहा कि उसका भी पक्ष सुना जाना चाहिए। तलाक का फैसला एकतरफा लिया गया है। इस मामले में फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी को मंजूर किया और पत्नी के लिए 63 लाख रुपये की एलिमनी भी मंजूर की। इस मामले में पति का पक्ष रखने वाले वकील बिबेकानंद भुइंया ने कहा कि महिला ने पति और उसके परिवार के खिलाफ 45 एफआईआर दर्ज कराई थीं। इसके अलावा कई बार तो पीटा भी और सिर पर चोटें लगीं। आरोप है कि महिला ने स्थानीय गुंडों को बुलाकर पति के माता और पिता को भी घर से बाहर निकलवा दिया था। यहां तक कि उसका मानसिक उत्पीड़न करने के लिए कई बार यह धमकी भी दी थी कि मैं आत्महत्या कर लूंगी। आरोप है कि तलाक मांगने वाले शख्स की पत्नी ने थाइलैंड और भारत में उसके दफ्तर में जाकर उपद्रव भी काटा था। इससे उसकी मनोदशा खराब हुई और अंत में उसने नौकरी ही छोड़ने का फैसला कर लिया था। पति के वकीलों ने कहा कि महिला ने कई मामले दर्ज कराए थे और इस तरह करना मानसिक उत्पीड़न था। उन्होंने कहा कि यदि कोई कहे कि मैं आत्महत्या कर लूंगा या कर लूंगी तो यह भी एक तरह का मानसिक उत्पीड़न है।

नाटो देशों के इस कदम से यूक्रेन को बड़ा झटका लगा, अमेरिका-रूस में बेहतर हो रहे रिश्ते, यूरोपीय देशों का यू-टर्न क्यों?

वाशिंगटन यूरोपीय देशों समेत NATO गठबंधन के सदस्य देश कथित तौर पर अपनी उस योजना से पीछे हट रहे हैं, जिसके तहत यूक्रेन को सैन्य मदद दी जाने की योजना बनाई गई थी। इससे पहले ऐसी खबरें थीं कि यूरोपीय देश शांति समझौता होने के स्थिति में यूक्रेन को भविष्य में रूसी आक्रमण से बचाने के लिए वहां सैनिकों की तैनाती करेंगे और सैन्य सहायता उपलब्ध कराएंगे लेकिन अब ये योजना खटाई में पड़ती दिख रही है। नाटो देशों के इस कदम से यूक्रेन को बड़ा झटका लगा है। रॉयटर्स के अनुसार, यूरोपीय नेता बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में अब ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा प्रस्तावित सैनिकों को भेजने की चुनौतियों पर विचार कर रहे हैं, और उसे पलटने की योजना पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यूरोपीय देश अब अपने प्रस्ताव से पीछे हट रहे हैं क्योंकि हाल के दिनों में ट्रम्प प्रशासन के तहत अमेरिका-रूस संबंधों में सुधार हुआ है और मॉस्को धीरे-धीरे वॉशिंगटन के करीब आ रहा है। दूसरी तरफ यूक्रेन युद्ध के मैदान में अब पीछे हटने लगा है और रूस आगे बढ़ता दिख रहा है। यूरोपीय देशों का यू-टर्न क्यों? रॉयटर्स से एक अनाम यूरोपीय राजनयिक ने कहा गया है कि यूरोपीय देश अपने कदम पीछे खींच रहे हैं और जो कुछ वे कर रहे थे या करने की कोशिशों में थे, उसे अब बदलने की कोशिश कर रहे हैं और यही फिलहाल समझदारी भरा कदम हो सकता है। एक अन्य राजनयिक ने न्यूज वीक को बताया, “जब यूक्रेन बेहतर स्थिति में था, तो सैनिकों को भेजने का विचार आकर्षक लग रहा था लेकिन अब, जमीनी स्तर पर और अमेरिकी प्रशासन के साथ यूक्रेन कमजोर हुआ है, इसलिए यूरोपीय देशों का प्लान अब बहुत आकर्षक नहीं रह गया है। अधर में लटकी पेरिस योजना बता दें कि इसी महीने 11 मार्च को फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 से अधिक देशों के सैन्य अधिकारियों की एक मीटिंग हुई थी। इसे पेरिस योजना कहा गया था, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय सेना बनाने पर चर्चा हुई थी। इस तरह की सेना का उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध विराम लागू होने के बाद रूस को दूसरा आक्रमण करने से रोकना और हमले की स्थिति में बचाना था। इस बैठक में नाटो गठबंधन के लगभग सभी देशों के चीप ऑफ स्टाफ या उनके प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी। हालांकि, अमेरिका को इसमें न्योता नहीं दिया गया था। अमेरिका-रूस में बेहतर हो रहे रिश्ते दूसरी तरफ अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम लागू कराने की कोशिशों में जुटा था। बाद में यूक्रेन ने 30 दिनों के युद्धविराम पर सहमति जताई थी। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लोदिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले दिनों हुई टेलिफोनिक बातचीत में रूस ने आंशिक युद्धविराम पर सहमति जताई थी और यूक्रेन के ऊर्जा और अन्य बड़े ठिकानों पर हमले नहीं करने का वादा किया था। इसी हफ्ते यूक्रेन और रूस ने काला सागर में भी युद्धविराम पर सहमति जताई है। इस तरह पुतिन धीरे-धीरे अब अमेरिका संग रिश्ते सुधार रहे हैं। पुतिन ने कई तरह के प्रतिबंध हटाने की मांग अमेरिका से की है। इस पर ट्रंप ने भी सकारात्मक आश्वासन दिया है। यूरोपीय देशों को यही गठजोड़ खतरनाक लग रहा है, इसलिए अपने प्लान से पीछे हट रहे हैं।

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