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दुबई : शेखों के साथ पार्टी में गई मशहूर मॉडल, 7 दिन बाद सड़क पर ऐसी हालत में मिली

दुबई दुबई में एक हाई-प्रोफाइल पार्टी में शामिल होने के बाद एक यूक्रेनी मॉडल की हालत गंभीर हो गई. उसे सड़क किनारे टूटी हुई रीढ़ की हड्डी, हाथ और पैर के साथ पड़ा पाया गया. 20 साल की इस OnlyFans मॉडल की हालत इतनी खराब थी कि वह बोल भी नहीं पा रही थी. बताया जा रहा है कि वह अरब शेखों के एक रहस्यमयी पोर्टा पॉटी पार्टी में शामिल हुई थी, जहां अमीर लोगों की घिनौनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है. यह मामला तब सामने आया जब मॉडल 8 दिनों तक लापता रही. उसने अपने दोस्तों को बताया था कि उसे दुबई के एक होटल में पार्टी के लिए आमंत्रित किया गया है. इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला. मॉडल के परिवारवालों और दोस्तों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. जब वह सड़क किनारे गंभीर हालत में मिली, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. उसकी मां ने बताया कि मॉडल के पास न तो उसके दस्तावेज थे, न फोन और न ही कोई और सामान. क्रूरता की शिकार बनी मॉडल? स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मॉडल को एक सीक्रेट पार्टी में ले जाया गया, जहां वह शेखों और प्रभावशाली लोगों के बीच फंस गई. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उसे कई दिनों तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई, फिर उसे मरने के लिए सड़क पर फेंक दिया गया. दुबई में होने वाली पोर्टा पॉटी पार्टियों के बारे में कहा जाता है कि इसमें सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और मॉडल्स को मोटी रकम देकर बुलाया जाता है, फिर उनसे अमानवीय काम करवाए जाते हैं. चार सर्जरी के बाद भी हालत गंभीर इस दर्दनाक घटना के बाद मॉडल की चार बड़ी सर्जरी कराई गई, लेकिन अब भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. डॉक्टरों का कहना है कि उसके ठीक होने में लंबा समय लग सकता है. इस बीच रूस की एक वकील, कट्या गॉर्डन ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया और मॉडल्स को चेतावनी दी कि वे इस तरह के आयोजनों से दूर रहें. उन्होंने कहा कि दुबई में ऐसी पार्टियों का चलन बढ़ता जा रहा है, जहां महिलाओं को यातनाएं दी जाती हैं और उनकी जिंदगी खतरे में डाल दी जाती है. महिलाओं को चेतावनी इस घटना के बाद कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मॉडल्स और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ऐसे खतरनाक ऑफर्स से बचने की सलाह दी है. यह पहली बार नहीं है जब पोर्टा पॉटी पार्टीज का मामला सामने आया हो. इससे पहले भी कई महिलाओं के लापता होने और प्रताड़ित किए जाने की घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं. वकील गॉर्डन ने कहा कि लड़कियों, महिलाओं से मेरी अपील है सिर्फ पैसों के लिए ऐसी पार्टियों में मत जाओ, यह तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर सकता है. दोस्तों की उम्मीदें बनी हुई हैं मॉडल के परिवारवाले और दोस्त उसकी जल्द से जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं. एक दोस्त ने कहा, ‘हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह ठीक हो जाए. हम उन सभी का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने उसे ढूंढने और जानकारी देने में मदद की.’ हालांकि, यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और दुबई में होने वाली इन गुप्त पार्टियों की सच्चाई को उजागर करने की मांग तेज हो रही है. यह कैसी सेक्स पार्टी थी जिसमें मॉडल ने भाग लिया? यह कितना भयानक रहा होगा! यह सेक्स पार्टी क्या है? इसके बारे में कुछ ही जानकारी मिली है। दुबई में ये पार्टियां अमीर शेखों की यौन इच्छाओं को शांत करने के लिए होती हैं। इसके लिए वे तेल के पैसे को पानी की तरह बहाते हैं। वे किसी भी देश की अमीर मॉडल और अभिनेत्रियों को पैसे से खरीदने की क्षमता रखते हैं। ये पार्टियां निजी जगहों पर गुप्त रूप से आयोजित की जाती हैं। यहां आने वालों को कभी-कभी सेक्स गुलाम के रूप में भी रखा जाता है। सेक्स के नाम पर यहां हर तरह की विकृतियां होती हैं। ऐसा माना जाता है कि वह ऐसी ही एक विकृत पार्टी में अमीरों की विकृति का शिकार हुई थी। स्थानीय मीडिया ने बताया कि शायद इन अमीर शेखों ने उसे यौन गुलाम बनाकर कई दिनों तक इस्तेमाल किया और अंत में सड़क पर फेंक दिया। इन शेखों द्वारा आयोजित पार्टियों के आयोजकों की पहचान भी गुप्त रखी जाती है। वहां रूसी और यूक्रेनी मॉडल और ओनलीफैंस पोर्न स्टार की बहुत मांग है। एक मॉडल को एक पार्टी में भाग लेने के लिए लगभग $100,000 (लगभग 85 लाख रुपये) का भुगतान किया जाता है। लेकिन इतने पैसे के बदले में इन महिलाओं को उन अमीर पुरुषों की काली इच्छाओं को पूरा करना होता है। इसके लिए उन्हें गंभीर दुर्व्यवहार के लिए तैयार रहना पड़ता है। “पोर्टा पाटी पार्टी” में होती है सेक्स स्लेवरी इस कार्यक्रम को “Porta potty” भी कहा जाता है। यानी बहुत ही भयानक और अपमानजनक यौन क्रियाएं करने वाली पार्टी। यहां भारी मात्रा में धन का लेन-देन होता है। “पोर्टा पाटी पार्टियों के बारे में घोटाले सालों से चल रहे हैं। यहां शेख लड़कियों को मारते हैं, उनके बाल काटते हैं और उनसे हर तरह की सेक्स स्लेवरी करवाते हैं। उन्हें जंजीरों से बांधकर हफ्तों तक जमीन के नीचे रखा जा सकता है। वहां उनका ही कानून चलता है। इसलिए कानून इनका कुछ नहीं कर सकता। यहां जाने वाली महिलाओं ने वीडियो बनाकर चेतावनी दी है कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए सहमत न हों, कमजोर होने पर आप मर भी सकते हैं। इन अरब देशों के शेखों के पास पैसा है, सत्ता है, तेल है। लेकिन उनके देश में कामुकता को दबाने वाले सख्त कानून हैं। इसलिए वे दुबई आकर मजे करते हैं। इसके साथ ही वे इस विकृति का प्रदर्शन करते हैं।    

पिछले 20 साल में देश में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई

नई दिल्ली  देश में करोड़पति सांसदों की संख्या बढ़ रही है। पिछले बीस साल के दौरान देश की संसद में करोड़पति सांसदों की संख्या में बंपर इजाफा हुआ है। साल 2004 में जब से एडीआर ने सांसदों की संपत्ति से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण शुरू किया है तब इससे जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में देश में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई है। कुल सांसदों में से करीब 93% करोड़पति एडीआर की तरफ से विश्लेषण किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में कुल सांसदों में 92.8 फीसदी सांसद करोड़पति हैं। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले 504 सांसद करोड़पति थे। यह संख्या पिछले साल के 479 के मुकाबले 29 अधिक थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की संख्या कुल सांसदों का 88.4 फीसदी थी। आंकड़ों को देखें तो 2004 से लेकर 2024 तक संसद में करोड़पति सांसदों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 2004 में महज 29% सांसद करोड़पति साल 2024 में सांसदों की संपत्ति के विश्लेषण के अनुसार कुल 153 सांसद ही करोड़पति थे। वहीं, इसके बाद 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर 312 हो गई। इस तरह करोड़पति सांसदों में 29.8 फीसदी वाली हिस्सेदारी बढ़कर 57 फीसदी तक पहुंच गई। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। इस चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की हिस्सेदारी 57 से बढ़कर 81.9 फीसदी पहुंच गई। खास बात है कि 2014 में सांसदों को अपनी संपत्ति को मार्केट वैल्यू के आधार पर घोषित करने की बात कही गई थी।

पाकिस्तान में निर्वासन के खतरे का सामना कर रहे 170 अफगान शरणार्थियों को जर्मनी ने दी शरण

बर्लिन पाकिस्तान से 170 से अधिक अफगान नागिरकों को लेकर एक विमान जर्मनी के हनोवर एयर पोर्ट पर उतरा। यह अफगानों को फिर से बसाने की बर्लिन की कोशिशों का नतीजा है। अफगान शरणार्थी पाकिस्तान में भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने सभी अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने के लिए 31 मार्च की समय सीमा तय की है। जर्मन मीडिया आउटलेट बिल्ड ने जर्मन संघीय आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि गुरुवार को पहुंचे इस समूह में 82 महिलाएं और 92 पुरुष शामिल हैं। 74 लोग 18 वर्ष से कम उम्र के हैं। दो वर्ष से कम उम्र के नौ बच्चे भी शामिल हैं। एक अफगान शरणार्थी ने कहा, “हम ग्यारह महीने तक पाकिस्तानी शरणार्थी शिविर में रहे। मेरी पत्नी को वकील के रूप में नौकरी के कारण तालिबान की ओर से धमकी दी गई थी। बारह घंटे की उड़ान के बाद जब विमान उतरा, तो मैं बहुत खुश और आभारी महसूस कर रहा था।” इससे पहले फरवरी में, 155 अफगान नागरिक विमान से बर्लिन पहुंचे थे। उन्हें देश के ‘संघीय स्वागत कार्यक्रम’ के जरिए जर्मनी में प्रवेश की अनुमति दी गई। जर्मन सरकार ने अफगानिस्तान में अपने दो दशक के मिशन के दौरान जर्मन सैन्य या नागरिक एजेंसियों के साथ काम करने वाले अफगानों की मदद के लिए 2021 में प्रवेश कार्यक्रम शुरू किया था। जर्मन सरकार के अनुसार, केवल उन शरणार्थियों को लाया जा रहा है जिनमें अफगानिस्तान में तालिबान की तरफ से विशेष खतरा है। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से, लगभग 36,000 लोगों को स्वीकार किया गया है, जिन्हें संघीय सरकार ने ‘विशेष रूप से जोखिम में’ के रूप में वर्गीकृत किया था। जर्मन मीडिया आउटलेट वेल्ट ने बताया कि जर्मनी में पुनर्वास के लिए स्वीकृत लगभग 2,800 अफगान लोग अभी भी इस्लामाबाद में रह रहे हैं, और उनकी स्थिति लगातार निराशाजनक होती जा रही है। वीजा तीन महीने के लिए वैध होता है और जर्मनी जाने की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगान प्रवासियों के निर्वासन की समयसीमा को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका में पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे अफगान शरणार्थियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन शरणार्थियों के निर्वासन को तत्काल रोकने की मांग की गई, जिनके पास अमेरिका में प्रवेश के लिए लंबित या स्वीकृत वीजा आवेदन हैं या जिन्होंने संयुक्त राज्य शरणार्थी प्रवेश कार्यक्रम (यूएसआरएपी) में रेफरल स्वीकार किए हैं। इससे पहले, अमेरिका स्थित एक एडवोकेसी ग्रुप, ह्यूमन राइट्स वॉच ने अफगान शरणार्थियों को जबरन निर्वासित करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की थी। ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया निदेशक एलेन पियर्सन ने कहा, “पाकिस्तानी अधिकारियों को अफगानों को घर वापस लौटने के लिए मजबूर करना तुरंत बंद कर देना चाहिए और निष्कासन का सामना कर रहे लोगों को सुरक्षा की मांग करने का अवसर देना चाहिए।” कई रिपोर्ट बताती हैं अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। कई अफगान शरणार्थियों का आरोप है कि वैध कानूनी दस्तावेज होने के बावजूद, उन्हें अवैध हिरासत, निर्वासन और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर राष्ट्रपति पुतिन बोले, ‘शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, लेकिन मुख्य कारणों का निवारण जरूरी’

मास्को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से संभव है, लेकिन इसके लिए इस संघर्ष के मुख्य कारणों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने इस युद्ध को जटिल मामला बताते हुए सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। पुतिन ने रूसी नौसेना के साथ बैठक के दौरान कहा, “हम सभी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के पक्ष में हैं, लेकिन इसके लिए उन कारणों को भी समाप्त करना होगा, जिनकी वजह से मौजूदा हालात बने हैं।” राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस यूरोप के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन पिछली गलतियों से सीख लेगा और पश्चिम पर जरूरत से ज्यादा भरोसा नहीं करेगा। रूसी मीडिया के अनुसार, पुतिन ने कहा, “हम यूरोप के साथ काम करने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन वे लगातार असंगत तरीके से काम कर रहे हैं और हमें धोखा देने की कोशिश करते रहते हैं। खैर, हमें इसकी आदत हो गई है। उम्मीद है कि अब हम अपने तथाकथित भागीदारों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करके कोई गलती नहीं करेंगे।” इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस में एक सम्मेलन में यूक्रेन को समर्थन देने के लिए कई नई पहल की घोषणा की। फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर यूक्रेन की सेना को पुनर्गठित करने के लिए एक योजना तैयार की है। मैक्रों ने कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और मैं यूक्रेन के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के समन्वय प्रयासों का संयुक्त रूप से नेतृत्व करेंगे। सम्मेलन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि रूस पर लगे प्रतिबंध हटाने का समय अभी नहीं आया है, मैक्रों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि रूस पर प्रतिबंधों को हटाने का यह सही समय नहीं है। इस बीच, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि यूक्रेन में पश्चिमी देशों द्वारा शांति सैनिकों की तैनाती का रूस कड़ा विरोध करता है। जखारोवा ने चेतावनी दी कि “अगर पश्चिमी देश यूक्रेन में शांति मिशन के नाम पर अपनी सेना भेजते हैं, तो इससे रूस और नाटो के बीच सीधा टकराव हो सकता है। लंदन और पेरिस सैन्य हस्तक्षेप की योजना बना रहे हैं, जो शांति प्रयासों के लिए खतरनाक हो सकता है।” रूस और अमेरिका के बीच हाल ही में यूक्रेन संकट के समाधान को लेकर आपसी बातचीत की इच्छा जताई गई थी। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को और वाशिंगटन दोनों शांति वार्ता की ओर बढ़ने के इच्छुक हैं। इसके अलावा, रूस और अमेरिका के बीच रियाद में हुई बातचीत के बाद ब्लैक सी इनिशिएटिव (काला सागर पहल) को लागू करने पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत रूसी बैंकों पर लगे प्रतिबंध हटने के बाद कृषि उत्पादों और उर्वरकों के व्यापार को सुगम बनाया जाएगा।

‘गद्दार’ कमेंट मामले में कुणाल कामरा को मद्रास हाई कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत, बड़ी राहत

चेन्नई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का अपने एक कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से अपमान करने को लेकर आलोचनाओं और शिव सैनिकों के गुस्से का सामना कर रहे स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है। कामरा तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के निवासी हैं। शिंदे पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की आशंका थी। इसलिए उन्होंने आज ही हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। मुंबई पुलिस पूछताछ में शामिल होने के लिए उन्हें दो बार समन भेज चुकी है। यह विवाद खार के हैबिटेट कॉमेडी क्लब में कामरा के हालिया शो से उपजा है, जहां उन्होंने एकनाथ शिंदे को निशाना बनाते हुए एक पैरोडी गीत प्रस्तुत किया था। कामरा के शो के बाद शिवसेना समर्थकों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने रविवार रात क्लब तथा होटल में तोड़फोड़ की थी। शिवसेना विधायक मुरजी पटेल की शिकायत पर खार पुलिस ने कामरा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुंबई पुलिस 36 वर्षीय कामरा को दो बार इस मामले में तलब कर चुकी है। 31 मार्च तक होना था पेश अधिकारी ने बताया कि कामरा को मंगलवार को पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने सात दिन का समय मांगा था। अधिकारी ने बताया, ‘‘दूसरे समन में कुणाल कामरा को 31 मार्च को पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा गया है।’’ पुलिस ने राहुल कनाल समेत शिवसेना के 12 लोगों को स्टूडियो में तोड़फोड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि, उन्हें हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद ही जमानत दे दी गई थी। उधर, महाराष्ट्र विधान परिषद ने भी शिंदे के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के संबंध में कामरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस स्वीकार कर लिया है। इंस्टाग्राम बायो के अनुसार, कामरा फिलहाल पुडुचेरी में हैं।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बड़ी सफलता, आतंकियों से चल रही मुठभेड़ में ढेर किए 5 आतंकी, 4 पुलिसकर्मी भी शहीद

कठुआ जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में कम से कम पांच आतंकवादी ढेर हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। वहीं चार पुलिसकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हो चुकी है। जिले के सुदूर वन क्षेत्र में पहले हुई मुठभेड़ वाली जगह के पास शुक्रवार को, ड्रोन के जरिए एक और पुलिसकर्मी का शव देखा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में यह चौथा पुलिसकर्मी शहीद हुआ है। सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया है। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन भी भारी गोलीबारी और विस्फोटों की तेज आवाजें सुनाई देती रहीं। पुलिस, सेना और सीआरपीएफ ने आज सुबह विभिन्न दिशाओं से क्षेत्र में प्रवेश किया। अधिकारियों ने बताया कि सुबह होते ही अभियान फिर से शुरू कर दिया। सुरक्षा बलों का मुख्य उद्देश्य मारे गए आतंकवादियों और पुलिसकर्मियों के शवों को निकालना, एक लापता पुलिसकर्मी को ढूंढना तथा इलाके में किसी भी संभावित खतरे को खत्म करना था। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बल सावधानीपूर्वक बढ़ रहे हैं क्योंकि माना जा रहा है कि दो और आतंकवादी वहां छिपे हुए हैं। पहले उन्हें मृत मान लिया गया था, लेकिन ड्रोन द्वारा उनके शव नहीं देखे जा सके। अधिकारियों ने बताया कि राजबाग के घाटी जूथाना में जखोले गांव के निकट आतंकवादियों के खिलाफ अभियान गुरुवार सुबह करीब आठ बजे शुरू हुआ। जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के नेतृत्व में सेना और सीआरपीएफ की मदद से की गई जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकवादी मारे गए। एक उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) सहित पांच पुलिसकर्मी कथित तौर पर गोलीबारी के स्थान के पास फंस गए, जो घने पेड़ों से घिरे एक नाले के पास था। इससे तनाव और बढ़ गया। सडीपीओ (​​एक डीएसपी रैंक के अधिकारी) को बृहस्पतिवार देर शाम घायल अवस्था में घटनास्थल से निकाला गया, जबकि उनके तीन निजी सुरक्षा अधिकारी मृत पाए गए। आज सुबह एक पुलिसकर्मी का शव देखा गया। एसडीपीओ के अलावा तीन और पुलिसकर्मियों को कठुआ अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अभियान में सेना के दो जवान घायल हुए हैं। बचे हुए आतंकियों का सफाया करने के लिए सेना ने स्निफर डॉग्स और ड्रोन तैनात किए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यहां 9 से 10 आतंकवादी छिपे हो सकते हैं।

जस्टिस वर्मा के इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर का नोटिफिकेशन जारी, नहीं काम आया विरोध

नई दिल्ली कैशकांड विवाद के बीच केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा का ट्रांसफर करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया है। जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर किए जाने का इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील विरोध कर रहे हैं। होली वाले दिन जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित घर में आग लग गई थी, जिसके बाद वहां से बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी। मामला सामने आने के बाद जांच की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में इन हाउस जांच करवा रहा है। साथ ही, कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर भी कर दिया था, जिसको लेकर आज सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी। जस्टिस वर्मा से इलाहाबाद हाई कोर्ट जाकर कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के राष्ट्रीय राजधानी में स्थित सरकारी आवास पर 14-15 मार्च की रात आगजनी की घटना के दौरान कथित रूप से बेहिसाब धन मिलने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस को निर्देश देने की गुहार वाली याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि इन-हाउस जांच पूरी हो जाने बाद सभी रास्ते खुले हैं। पीठ ने कहा कि चूंकि इन-हाउस जांच चल रही है, इसलिए इस स्तर पर इस रिट याचिका पर विचार करना उचित नहीं होगा। अगर जरूरत पड़ी तो देश के मुख्य न्यायाधीश प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 22 मार्च को इस मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की एक समिति गठित की थी, जो अपना काम कर रही है। पीठ ने याचिकाकर्ता मैथ्यूज जे नेदुम्परा से पूछा, ”हमने अर्जी देखी है कि हमें इस स्तर पर इस पर क्यों विचार करना चाहिए।” याचिकाकर्ता ने कहा कि जांच देश का काम नहीं है और आम जनता पूछता रहता है कि 14 मार्च को कोई प्राथमिकता क्यों दर्ज नहीं की गई। आग के दौरान कथित तौर पर मिले रुपये क्यों जब्त नहीं किए गए और दिल्ली फायर चीफ ने क्यों कहा कि कोई रुपया बरामद नहीं हुआ। हालांकि, अदालत तमाम दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फिलहाल विचार करने से इनकार कर दिया।

रक्षा क्षेत्र में भारत हो रहा मजबूत, केंद्र सरकार ने दी सबसे बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी, मिलेंगे 156 प्रचंड हेलीकॉप्टर

नई दिल्ली रक्षा के क्षेत्र में भारत लगातार मजबूत हो रहा है। इस बीच केंद्र सरकार ने एक और सबसे बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। दरअसल, भारत ने 156 मेड इन इंडिया एलसीएच प्रचंड हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दे दी है। रक्षा अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की आज हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस वित्त वर्ष में 2.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। HAL को सबसे बड़ा ऑर्डर यहां पर ध्यान देने वाली बात है कि इस रक्षा मंजूरी की स्वीकृति के बाद यह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लिए अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर होगा और हेलीकॉप्टरों का निर्माण कर्नाटक के बेंगलुरु और तुमकुर स्थित उनके संयंत्रों में किया जाएगा। जानिए प्रचंड हेलिकॉप्टर की खासियत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एलसीएच ‘प्रचंड’ विभिन्न हथियार प्रणालियों से लैस है। यह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दुश्मन के टैंक, बंकर, ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है। हेलीकॉप्टर में आधुनिक विशेषताएं, मजबूत कवच सुरक्षा और रात्रि में भी हमले की क्षमता है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में भी काम करने में पूरी तरह सक्षम है। प्रचंड हवा से जमीन और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को दागने में भी सक्षम है और दुश्मन के हवाई रक्षा अभियानों को नष्ट कर सकता है। सरकार आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत मेक इन इंडिया के माध्यम से रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के इरादे पर जोर दे रही है। पिछले साल हुआ था सेना में शामिल इसका उपयोग धीमी गति से चलने वाले विमानों और दूर से संचालित विमानों (आरपीए) के खिलाफ भी किया जा सकता है। एलसीएच ‘प्रचंड’ को पिछले साल थलसेना और वायुसेना में शामिल किया गया था।

नेपाल में उग्र हुए प्रदर्शनकारी, इमारतों को भी फूंका, लोकतंत्र नहीं चलेगा, राजशाही वापस लाओ

नेपाल नेपाल में राजशाही फिर से लागू करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को एक इमारत को तोड़फोड़ की और फिर उसमें आग लगा दी। दरअसल, हिंदू राज्य की बहाली की मांग के लिए काठमांडू में आज प्रदर्शन बुलाया गया था जो जल्द ही हिंसक हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सड़क किनारे इमारत की खिड़कियों को तोड़ दिया। तनाव तब और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंके, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने आंसू गैस के गोले दागकर जवाबी कार्रवाई की। नेपाल पुलिस ने राजतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने खाली गोलियां भी चलाईं। तिनकुने क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, जहां हजारों प्रदर्शनकारियों ने ‘राजा आओ देश बचाओ’, ‘भ्रष्ट सरकार नीचे जाओ’ और ‘हमें राजतंत्र वापस चाहिए’ जैसे नारे लगाए। कई प्रदर्शनकारी अपने हाथ में नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें लिए हुए थे। ये लोग जोर-जोर से नारेबाजी कर रहे थे और सड़कों पर दौड़ते हुए पत्थरबाजी की। झड़प में एक व्यक्ति घायल, कई हिरासत में मौके पर मौजूद शख्स ने बताया कि झड़प में एक व्यक्ति घायल हुआ है। जब प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र न्यू बानेश्वर की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने कई युवाओं को हिरासत में लिया। काठमांडू में सैकड़ों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। राजशाही के समर्थकों और विरोधियों के अलग-अलग प्रदर्शनों के कारण होने वाली झड़प बढ़ने की आशंका है। यह प्रदर्शन नवराज सुबेदी के नेतृत्व वाली संयुक्त आंदोलन समिति की ओर से आयोजित किया गया था, जिसमें विवादास्पद व्यवसायी दुर्गा प्रसाई ने समर्थकों को जुटाने का काम किया। राजेंद्र लिंगदेन के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया।

म्यांमार में भूकंप के पहले झटके के 12 मिनट के बाद ही दूसरा झटका आया, भारी तबाही, बैंकॉक और मांडले में आपातकाल

म्यांमार म्यामांर में शुक्रवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप की तीव्रता 7.7 थी। भूकंप के झटकों से सैकड़ों मील दूर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक निर्माणाधीन मकान गिर गया. इसमें अभी भी 43 मजदूर फंसे हुए हैं। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक़ म्यांमार में भूकंप के पहले झटके के 12 मिनट के बाद ही दूसरा झटका आया. दूसरे भूकंप की तीव्रता 6.4 थी. इस भूकंप का केंद्र सागाइंग से 18 किलोमीटर दक्षिण में था। म्यांमार के दूसरे बड़े शहर मांडले में बचाव दल के एक कर्मचारी ने बीबीसी को बताया कि भूकंप से भारी तबाही हुई है और सैकड़ों लोगों के मरने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि बैंकॉक में एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत भूकंप के झटकों से भरभराकर ढह गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक बहुमंजिला इमारत धूल के गुबार के बीच ढहती नजर आ रही है और वहां मौजूद लोग चीखते-चिल्लाते हुए भाग रहे हैं। इमारत के मलबे में 40 से अधिक मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। पुलिस ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि वे बैंकॉक के ‘चटुचक मार्केट’ के पास स्थित घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य कर रहे हैं शुरुआती खबरों के अनुसार, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मनी के जीएफजेड भूविज्ञान केंद्र ने बताया कि दोपहर को यह भूकंप 10 किलोमीटर (6.2 मील) की गहराई पर आया, जिसका केंद्र पड़ोसी देश म्यांमार में था। म्यांमार में भूकंप के प्रभाव की तत्काल कोई खबर नहीं है। ग्रेटर बैंकॉक क्षेत्र की आबादी 1.70 करोड़ से अधिक है जिनमें से कई लोग ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंट में रहते हैं। दोपहर करीब डेढ़ बजे भूकंप आने पर इमारतों में अलार्म बजने लगे और घनी आबादी वाले मध्य बैंकॉक की ऊंची इमारतों एवं होटल से लोगों को बाहर निकाला गया। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि कुछ ऊंची इमारतों के अंदरूनी हिस्सों में ‘स्वीमिंग पूल’ में पानी में लहरें उठती दिखीं।    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के डायरेक्टर डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने शुक्रवार को म्यांमार में आए छह भूकंपों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये भूकंप सबसे लंबी फॉल्ट लाइन, सागांग फॉल्ट पर आए थे। सागांग फॉल्ट लगभग 1200 किलोमीटर तक फैली हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि रिक्टर स्केल पर 7 से ऊपर की तीव्रता का यह पहला भूकंप नहीं था। मीडिया से बात करते हुए मिश्रा ने कहा, “यह म्यांमार के सबसे लंबे फॉल्ट, सागांग फॉल्ट में हुआ। इसकी लंबाई 1200 किलोमीटर है। इस फॉल्ट ने अतीत में 7 से अधिक तीव्रता के कई भूकंप उत्पन्न किए हैं। यह 7 तीव्रता का पहला भूकंप नहीं है।” उन्होंने आगे बताया कि भूकंप की गहराई 20 से 30 किलोमीटर के बीच थी, जो कि उथली श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि भूकंप जमीन के ज्यादा नीचे नहीं था। इससे सतह पर ज्यादा नुकसान होने की आशंका रहती है। भूकंप का केंद्र जमीन के जितना करीब होता है, नुकसान उतना ही ज्यादा होता है। इसलिए, इस भूकंप से भी नुकसान हो सकता है। म्यांमार के नायपीडॉ शहर में शुक्रवार को एक शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप के कारण शहर में तबाही मची हुई थी। नायपीडॉ के सबसे बड़े अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के बाहर घायलों की पंक्तियाँ लगी हुई थीं। कई पीड़ित दर्द से कराह रहे थे, तो कुछ धूल और खून से लथपथ सदमे में बैठे थे। सड़कों के टूटने और तारकोल के उखड़ने के बाद लगातार घायल आ रहे थे। कुछ लोग कारों और पिकअप ट्रकों में आ रहे थे, तो कुछ को स्ट्रेचर पर लाया जा रहा था। अस्पताल के एक अधिकारी ने पत्रकारों को इलाज क्षेत्र से चले जाने के लिए कहते हुए कहा, “यह एक मास कैजुअल्टी एरिया है।” अस्पताल के अधिकारी ने यह बात इसलिए कही क्योंकि वहाँ बहुत सारे घायल लोग थे। 1,000-बेड वाले अस्पताल को भी काफी नुकसान हुआ था। हिंसक झटकों से इमरजेंसी विभाग के कुछ हिस्से ढह गए। प्रवेश द्वार पर गिरी कंक्रीट के नीचे एक कार दब गई।

सिलीगुड़ी में रोजगार की मांग करते हुए DYFI का विरोध प्रदर्शन, पुलिस ने दागे आंसू गैस गोले, लाठीचार्ज भी किया

सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां पर डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प देखने को मिली है। बताया जा रहा है कि डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं ने राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाया है और इसके खिलाफ मोर्चा खोला है। डीवाईएफआई कार्यकर्ता शुक्रवार को राज्य में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए और रोजगार की मांग करते हुए उत्तरकन्या की ओर विरोध मार्च निकाल रहे थे। इस मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग की। डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं पर दागे गए आंसू गैस के गोले कार्यकर्ताओं ने पहले ही इस प्रदर्शन को लेकर चेतावनी दी थी। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को उत्तरकन्या तक जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। जब कार्यकर्ता पुलिस की बैरिकेडिंग पर नहीं रूके तो सुरक्षाकर्मियों ने डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले दागे। ये कार्यकर्ता राज्य में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए और रोजगार की मांग करते हुए उत्तरकन्या, मिनी सचिवालय की ओर विरोध मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए। प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा? DYFI द्वारा किए जा रहे विरोध मार्च पर एक प्रदर्शनकारी रत्ना चौबे ने कहा कि युवा शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। हम उनके साथ मौजूद थे। जिस तरह से पुलिस ने लाठीचार्ज किया। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों को पीटा। DYFI की मीनाक्षी को गिरफ्तार किया गया। हमारी तरफ से कोई हिंसा नहीं हुई, यह सब शांतिपूर्ण था। युवा बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस को इस बारे में जानकारी थी, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। जल्द शुरू होगी आवाजाही उल्लेखनीय है कि डीवाईएफआई के विरोध मार्च पर सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डीसीपी राकेश सिंह ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अब स्थिति शांतिपूर्ण है। यातायात की नियमित आवाजाही जल्द ही फिर से शुरू हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने ईद के मौके पर कैदियों को दी ईदी, 500 भारतीय समेत 1200 कैदियों की रिहाई का ऐलान

संयुक्त अरब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस साल फरवरी के अंत में एक महत्वपूर्ण ऐलान किया। उन्होंने रमजान के मौके पर बड़े पैमाने पर कैदियों को माफी देने की योजना बनाई थी। इस फैसले के तहत, रमजान के खत्म होते ही 1,295 कैदियों को रिहा करने का आदेश जारी किया गया। इसके अलावा, UAE के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने 1,518 कैदियों को माफी देने का ऐलान किया है, जिनमें से 500 से ज्यादा भारतीय नागरिक शामिल हैं। ये रिहाई विशेष रूप से रमजान और ईद के पवित्र अवसर पर की गई है, ताकि कैदियों को एक नया जीवन और उनके परिवारों को साथ बिताने का मौका मिल सके। इन कैदियों को रिहा करके, UAE ने न केवल न्याय का एक नया उदाहरण पेश किया, बल्कि एक मानवीय पहल भी की है, जिससे लोगों को एक नया अवसर मिलने जा रहा है। अब ये कैदी अपने परिवारों के साथ रमजान और ईद का त्योहार मनाएंगे। इस फैसले ने दुनियाभर में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं हासिल की हैं, खासकर उन 500 भारतीय नागरिकों के लिए, जिन्हें अब अपनी मातृभूमि लौटने का मौका मिलेगा। वहीं, रमजान के खत्म होने और ईद की खुशियों के बीच, सऊदी अरब ने भी ईद के छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। सऊदी अरब में पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए छुट्टियां 22 मार्च से शुरू हो चुकी हैं, जबकि प्राइवेट सेक्टर और नॉन-प्रोफिट सेक्टर के लिए छुट्टियां 27 मार्च से शुरू होंगी। इस रमजान में जहां यूएई ने मानवता की मिसाल पेश की है, वहीं पूरी दुनिया ईद के जश्न के लिए तैयार हो रही है।

‘अमेरिका हमें तोड़ना चाहता हैं, लेकिन ये कभी नहीं होगा!’ – ऑटो टैरिफ पर कनाडा का पलटवार

ओटावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति से कनाडा में हलचल मच गई है. ट्रंप ने ऑटो आयात पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिसे व्हाइट हाउस घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के तौर पर देख रहा है. लेकिन कनाडा को यह फैसला नागवार गुजरा है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसे ‘प्रत्यक्ष हमला’ बताते हुए कहा कि इससे न सिर्फ कनाडा बल्कि खुद अमेरिका को भी नुकसान होगा. कार्नी का कड़ा रुख: ‘हम अपने देश की रक्षा करेंगे’ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा, “हम अपने कर्मचारियों, कंपनियों और देश की रक्षा करेंगे.” उन्होंने आगे कहा कि वे ट्रंप के कार्यकारी आदेश का पूरा विवरण देखने के बाद जवाबी कार्रवाई करने पर विचार करेंगे. कनाडाई ऑटो सेक्टर पर खतरा कार्नी ने ट्रंप के फैसले से प्रभावित होने वाले कनाडाई ऑटो सेक्टर को बचाने के लिए 2 बिलियन कनाडाई डॉलर (1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का ‘रणनीतिक प्रतिक्रिया कोष’ बनाने की घोषणा की है. यह फंड उन कनाडाई ऑटो कर्मचारियों की मदद करेगा, जिनकी नौकरियों पर इस टैरिफ का असर पड़ सकता है. गौरतलब है कि ऑटोमोबाइल कनाडा का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक सेक्टर है. यहां 1.25 लाख से ज्यादा लोग इस क्षेत्र में सीधे काम करते हैं, जबकि 5 लाख लोग इससे जुड़े अन्य उद्योगों में कार्यरत हैं. कार्नी ने साफ कहा, ‘हम अपने ऑटो कर्मचारियों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे.’ ट्रंप का दावा – ‘इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा’ ट्रंप ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह टैरिफ अमेरिका के ऑटोमोटिव सेक्टर को मजबूत करेगा और घरेलू उत्पादन बढ़ाएगा. उन्होंने कहा, ‘हम प्रभावी रूप से 25% टैरिफ लगाएंगे, यह स्थायी रहेगा.’ हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी और वाहन निर्माताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा. अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों को होगा बड़ा नुकसान कार्नी ने ट्रंप के इस फैसले को सिर्फ कनाडा के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए भी नुकसानदायक बताया. उन्होंने कहा, “उनका व्यापार युद्ध अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचा रहा है और इससे और भी नुकसान होगा.” इस बात की पुष्टि एक रिपोर्ट से भी होती है, जिसमें बताया गया है कि मार्च में अमेरिकी उपभोक्ता विश्वास सूचकांक 7.2 अंक गिरकर 92.9 पर पहुंच गया है, जो जनवरी 2021 के बाद सबसे निचला स्तर है. पहले भी टैरिफ लगा चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने कनाडा पर टैरिफ लगाया है. इससे पहले भी उन्होंने कनाडा के स्टील और एल्युमीनियम पर 25% टैरिफ लगाया था. अब 2 अप्रैल से कनाडा सहित सभी व्यापारिक साझेदारों पर भी टैरिफ लगाने की धमकी दी है. कनाडा का करारा जवाब – ‘हम झुकेंगे नहीं!’ कार्नी ने ट्रंप की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘वह हमें कमजोर करना चाहते हैं ताकि अमेरिका हम पर हावी हो सके. लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा, क्योंकि हम सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचते, हम एक-दूसरे के बारे में सोचते हैं.’ अब देखना यह होगा कि क्या कनाडा इस फैसले के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करता है या बातचीत से हल निकालने की कोशिश करता है. लेकिन एक बात तय है – ट्रंप के इस फैसले से दुनियाभर में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री प्रभावित होगी. किस देश पर कितना पड़ेगा असर? कनाडा और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे पर काफी हद तक निर्भर रही हैं. दोनों देश उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते यानी नाफ्टा के तहत व्यापार करते हैं. 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा एक तरह से अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश है. अमेरिका, कनाडा से लगभग 421 अरब डॉलर का सामान आयात करता है, जिसमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और ऑटोमोबाइल पार्ट्स शामिल हैं. कनाडा एक तरह से अमेरिका को 60 फीसदी से अधिक कच्चा तेल और 85 फीसदी से अधिक प्राकृतिक गैस की सप्लाई करता है. इसके बंद होने से अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू सकती हैं. वहीं, कनाडा की अर्थव्यवस्था भी अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर है. कनाडा अपने कुल निर्यात का लगभग 75 फीसदी अमेरिका को भेजता है. अगर यह बाजार बंद हो जाए, तो कनाडा की जीडीपी में भारी गिरावट आ सकती . कनाडा के लिए नए व्यापारिक साझेदार ढूंढना आसान नहीं होगा. यूरोप और एशिया के साथ दूरी और लागत के कारण तत्काल विकल्प सीमित हैं. इससे बेरोजगारी और आर्थिक संकट बढ़ सकता है. बता दें कि कनाडा और अमेरिका न सिर्फ पड़ोसी हैं, बल्कि नाटो और NORAD (North American Aerospace Defense Command) जैसे सैन्य गठबंधनों से भी जुड़े हुए हैं. ट्रंप के किस फैसले पर भड़का कनाडा? ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाली कारों पर 25 फीसदी का टैरिफ लगा दिया है. ट्रंप का यह नया टैरिफ दो अप्रैल से लागू होने जा रहा है. माना जा रहा है कि इस टैरिफ से अमेरिका को तकरीबन 100 अरब डॉलर का फायदा होगा. ट्रंप का यह 25 फीसदी टैरिफ इम्पोर्टेड कार और ऑटो पार्ट्स पर लगेगा. ट्रंप को उम्मीद है कि इससे अमेरिकी ऑटो कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ेगा लेकिन दूसरी तरफ इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी है क्योंकि टैरिफ का बोझ आखिर में ग्राहकों पर पड़ सकता है. इसके अलावा ट्रंप ने 2 अप्रैल से भारत और कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया है. ट्रंप ने इसी महीने अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत जैसे कई देश बहुत ज्यादा टैरिफ लेते हैं, अब अमेरिका भी ऐसा ही करेगा. माना जा रहा है कि 2 अप्रैल से एक नया ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है.

DA Hike पर आज आया बड़ा फैसला, खत्म हुआ केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनर्स का इंतजार, कितनी बढ़ेगी सैलरी?

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है. केंद्रीय कैबिनेट बैठक में सरकार की ओर से यह बड़ा फैसला लिया गया है. इस बढ़ोतरी के साथ ही अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनर्स का महंगाई राहत (DR) 53 फीसदी से बढ़कर 55 फीसदी हो जाएगा. आखिरी बार बढ़ोतरी जुलाई 2024 में हुई थी, जब महंगाई भत्ता 50 फीसदी से बढ़ाकर 53 फीसदी कर दिया गया था. अब 2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 2 फीसदी का और महंगाई भत्ता जोड़ा जाएगा. यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से प्रभावी मानी जाएगी. महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा. कितनी बढ़ जाएगी सैलरी     अगर किसी की बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है तो 53% डीए के हिसाब से उसे ₹26,500 का महंगाई भत्ता मिलता होगा, लेकिन 55 फीसदी के डीए के हिसाब से उसे ₹27,500 का डीए मिलेगा. यानी कर्मचारियों की सैलरी में 1 हजार रुपये का इजाफा होगा.     वहीं 70 हजार रुपये की बेस‍िक सैलरी पर अभी महंगाई भत्ता ₹37,100 मिलता होगा, लेकिन 55 फीसदी डीए के हिसाब से ₹38,500 महंगाई भत्ता मिलेगा. यानी ऐसे कर्मचारियों की सैलरी में ₹1,400 की बढ़ोतरी होगी.     इसी तरह, ₹1,00,000 बेसिक सैलरी वालों को 53 प्रतिशत डीए के हिसाब से ₹53,000    महंगाई भत्ता मिलता होगा, लेकिन अब 55 फीसदी के हिसाब से 55 हजार रुपये का डीए मिलेगा. यानी कर्मचारियों की सैलरी में 2 हजार रुपये मंथली की बढ़ोतरी होगी. कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर असर कर्मचारियों के लिए यह Dearness Allowance (DA) कहलाता है, जबकि पेंशनर्स के लिए इसे Dearness Relief (DR) कहा जाता है। इस बढ़ोतरी का फायदा सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर असर कर्मचारियों के लिए यह Dearness Allowance (DA) कहलाता है, जबकि पेंशनर्स के लिए इसे Dearness Relief (DR) कहा जाता है। इस बढ़ोतरी का फायदा सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा। सैलरी पर असर एक एंट्री-लेवल कर्मचारी (Multi Tasking Staff – MTS) जिसकी मूल वेतन ₹18,000 है, उसे इस 2% DA बढ़ोतरी से सीधे फायदा होगा। वर्तमान में 53% DA के तहत इस कर्मचारी को ₹9,540 मिल रहा है। 2% बढ़ोतरी के बाद DA बढ़कर ₹9,900 हो जाएगा, जिससे ₹360 की बढ़ोतरी होगी। अगर DA 3% बढ़ता, तो यह ₹10,080 तक पहुंच जाता और ₹540 की वृद्धि होती। जनवरी 2025 से लागू होगी बढ़ोतरी, एरियर मिलेगा सरकार द्वारा जो भी DA बढ़ोतरी की जाएगी, वह 1 जनवरी 2025 से प्रभावी होगी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को जनवरी 2025 से मिलने वाले अतिरिक्त पैसे का एरियर भी दिया जाएगा। सरकार ने पिछली बार जुलाई 2024 में 3% महंगाई भत्ते में वृद्धि की थी, जिससे DA 50% से बढ़कर 53% हुआ था। अब एक और बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी।      

म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, 7.7 रही तीव्रता, फ्लाईओवर ढहा, 43 लोग लापता

बैंकॉक  म्यांमार और थाईलैंड में आए खतरनाक भूकंप से भारी तबाही मचने की आशंका है। थाईलैंड से खतरनाक तस्वीरें सामने आ रहे हैं। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत को धड़ाम से जमीन पर गिरते हुए देखा गया है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया है कि शुक्रवार को म्यांमार और थाईलैंड में रिक्टर पैमाने पर 7.2 तीव्रता का खतरनाक भूकंप आया है। भूकंप पूरे देश में झटके महसूस किए गए। दिल्ली एनसीआर तक भूकंप के झटके महूसक किए गये हैं। सबसे खतरनाक बात ये है कि भूकंप का केन्द्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर अंदर था, जिससे भारी तबाही की आशंका है। म्यांमार में भूकंप से भारी तबाही, कई इमारतें जमींदोज, इमरजेंसी घोषित .म्यांमार-थाईलैंड भूकंप: भारत हर संभव मदद देने के लिए तैयार- पीएम मोदी. कोलकाता, इंफाल में हल्के झटके महसूस किए गए समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बैंकॉक में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने के बाद कोलकाता और इंफाल में हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र मध्य म्यांमार में था, जो मोनीवा शहर से लगभग 50 किलोमीटर पूर्व में है। हालांकि, अभी तक किसी नुकसान की खबर नहीं है। यूएसजीएस ने एक बयान में कहा कि भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:50 बजे के आसपास म्यांमार के सागाइंग शहर के उत्तर-पश्चिम में 16 किलोमीटर की दूरी पर 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। बैंकॉक में भी भूकंप से तबाही की आशंका है। लोग अपने घरों से बाहर भागते हुए देखे गए हैं और कुछ वीडियो में खाना खाते समय लोगों को हिलते हुए दिखाया गया। सबसे खतरनाक वीडियो थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक है, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत को ताश के पत्तों की तरह धड़ाम से गिरते हुए देखा गया है। पहला झटका सुबह 11.50 बजे आया 12 मिनट बाद दूसरा झटका महसूस हुआ भूकंप में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा कुछ समाचार एजेंसियों ने रिपोर्ट किया है कि शुक्रवार को म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो लगातार भूकंप आए। दावा किया जा रहा है कि म्यांमार के मांडले में इरावदी नदी पर बना सुप्रसिद्ध अवा ब्रिज गिर गया है। भूकंप में कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। भूकंप इतना तेज था कि करीब 900 किलोमीटर दूर बैंकॉक में भी इसके झटके महसूस किए गए। बैंकॉक में निर्माणाधीन इमारत ढह गई: पुलिस बैंकॉक पुलिस का कहना है कि दोपहर में थाई राजधानी में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में निर्माणाधीन ऊंची इमारत ढह गई। संभावित हताहतों की संख्या अभी तक पता नहीं चल पाई है। पुलिस के मुताबिक, बैंकॉक के लोकप्रिय चतुचक मार्केट के पास घटना हुई। इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं है कि ढहने के समय साइट पर कितने श्रमिक थे? एक मिनट तक हिलती रही धरती सोशल मीडिया वेबसाइट X पर बैंकॉक में आए भूकंप से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं। लोगों ने कहा कि भूकंप के दौरान जमीन करीब एक मिनट तक हिलती रही, जिससे पूरे शहर में अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। भूकंप में पूरी तरह नष्ट हो गया पुल म्यांमार में एतिहासिक शाही महल मांडले पैलेस के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, सागाइंग क्षेत्र के सागाइंग टाउनशिप में एक पुल भूकंप में पूरी तरह नष्ट हो गया। राजधानी नेपीता के अलावा क्यौकसे, प्यिन ऊ ल्विन और श्वेबो में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इन शहरों की आबादी 50 हजार से ज्यादा है। भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में तबाही म्यांमार से भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक तीन मंजिला मकान को धाराशाई देखा जा रहा है। लोगों को भूकंप के बाद अपनी जान बचाने के लिए भागते देखा जा रहा है। बैंकॉक में ऊंची इमारत ढहने पर धूल के बादल से भागते लोग दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा म्यांमार की सीमा से लगे युन्नान और गुआंग्शी प्रांतों में चीनी सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा है कि उन्होंने भूकंप को तीव्रता से महसूस किया। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक म्यांमार के अवा और सागाइंग क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक पुल शुक्रवार को देश के मध्य भाग में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद ढह गया है। फुटेज में देश के उत्तर से दक्षिण तक बहने वाली इरावदी नदी में गिरने के बाद पुराने सागाइंग पुल के कुछ हिस्से दिखाई दे रहे हैं। पहला झटका सुबह 11.50 बजे आया 12 मिनट बाद दूसरा झटका महसूस हुआ भूकंप में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा कुछ समाचार एजेंसियों ने रिपोर्ट किया है कि शुक्रवार को म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो लगातार भूकंप आए। दावा किया जा रहा है कि म्यांमार के मांडले में इरावदी नदी पर बना सुप्रसिद्ध अवा ब्रिज गिर गया है। भूकंप में कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। भूकंप इतना तेज था कि करीब 900 किलोमीटर दूर बैंकॉक में भी इसके झटके महसूस किए गए। बैंकॉक में निर्माणाधीन इमारत ढह गई: पुलिस बैंकॉक पुलिस का कहना है कि दोपहर में थाई राजधानी में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में निर्माणाधीन ऊंची इमारत ढह गई। संभावित हताहतों की संख्या अभी तक पता नहीं चल पाई है। पुलिस के मुताबिक, बैंकॉक के लोकप्रिय चतुचक मार्केट के पास घटना हुई। इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं है कि ढहने के समय साइट पर कितने श्रमिक थे? भूकंप से जुड़े अपडेट यहां पढ़ें:- – थाईलैंड और म्यांमार के कई शहरों में इमारतें ढह गई हैं. – बैंकॉक में टावर जमींदोज हो गया है जबकि दर्जनों लोग लापता हैं. – USGS का कहना है कि हजारों लोगों के मरने की आशंका है. – मेघालय के गारो हिल्स में भी 4.0 तीव्रता का भूकंप का झटका महसूस किया गया. – सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें गगनचुंबी इमारतों को भूकंप के झटकों की वजह से हिलते देखा जा सकता है. कई इमारतें झुक गई हैं. धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं. एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड … Read more

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