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शेख हसीना जल्द ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में वापसी करेंगी, डॉ. रब्बी आलम ने किया बड़ा दावा

कोलकाता बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी सहयोगी और अमेरिका अवामी लीग के उपाध्यक्ष डॉ. रब्बी आलम ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि शेख हसीना जल्द ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में वापसी करेंगी। इसके साथ ही, उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शेख हसीना को सुरक्षित ठिकाना और यात्रा मार्ग प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया। मिडिया को दिए एंक इंटरव्यू में डॉ. रब्बी आलम ने ये बात कही। उन्होंने कहा, “शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में वापस आएंगी। युवा पीढ़ी ने गलती की है, लेकिन यह उनकी गलती नहीं है, उन्हें गुमराह किया गया है।” उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे “हमले के अधीन” बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश पर हमला हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। राजनीतिक विद्रोह ठीक है, लेकिन बांग्लादेश में ऐसा नहीं हो रहा है। यह एक आतंकवादी विद्रोह है।” साथ ही, उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस को पद छोड़ने और “जहां से आए थे, वहीं वापस जाने” के लिए कहा। उन्होंने कहा, “हम बांग्लादेश के सलाहकार से कहना चाहते हैं कि वह पद छोड़ दें और वापस वहीं चले जाएं जहां से आप आए हैं। डॉ. यूनुस, आप बांग्लादेश के नहीं हैं। यह बांग्लादेश के लोगों के लिए संदेश है कि शेख हसीना वापस आ रही हैं, वह प्रधानमंत्री के रूप में वापस आ रही हैं।” आलम ने भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे कई नेता भारत में शरण लिए हुए हैं, और हम भारत सरकार को इसके लिए बहुत आभारी हैं। मैं पीएम नरेंद्र मोदी को भी हमारी प्रधानमंत्री शेख हसीना के लिए सुरक्षित यात्रा मार्ग प्रदान करने के लिए धन्यवाद देता हूं। हम भारत के लोगों के भी आभारी हैं।” शेख हसीना को पिछले साल अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, जिसके बाद वह भारत में निर्वासित जीवन बिता रही हैं। उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थक इसे “आतंकी विद्रोह” करार दे रहे हैं। दूसरी ओर, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना की प्रत्यर्पण की मांग की है और उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों सहित कई आरोप लगाए हैं। हालांकि, भारत ने अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।

अगर कोई व्यक्ति किसी की आय पर निर्भर था, तो वह मुआवजा पाने का अधिकारी होगा, चाहे वह रिश्ते में कोई भी हो- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि सड़क हादसे में मुआवजा मृतक पर आर्थिक तौर पर निर्भर हर मेंबर को मिलेगा। इस मामले में कानूनी रिप्रेजेंटेटिव की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती है। जो लोग आर्थिक तौर पर मृतक पर निर्भर थे उन्हें दावेदारों की कैटिगरी से बाहर नहीं किया जा सकता है। अदालत ने हाल के फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी प्रतिनिधि वह व्यक्ति होता है जो सड़क दुर्घटना में किसी शख्स की मृत्यु के कारण पीड़ित होता है और यह जरूरी नहीं कि केवल पत्नी, पति, माता-पिता या संतान ही हो। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accident Claims Tribunal – MACT) ने मुआवजा प्रदान करते समय मृतक के पिता और बहन को आश्रित नहीं माना था। MACT ने माना कि मृतक के पिता उनकी आय पर निर्भर नहीं थे और चूंकि पिता जीवित थे, इसलिए छोटी बहन को भी आश्रित नहीं माना जा सकता था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने MACT के इस फैसले को बरकरार रखा जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द करते हुए माना कि निचली अदालतों ने अपीलकर्ताओं को मृतक का आश्रित मानने से इनकार करके गलती की थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा केवल पति-पत्नी, माता-पिता या बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी व्यक्तियों तक विस्तार होता है जो मरने वाले के कारण प्रभावित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा राशि 17 लाख 52 हजार 500 तय कर दी। क्या है मामला? ग्वालियर में 25 सितंबर 2016 को 24 साल के धीरज सिंह तोमर ऑटो में जा रहे थे। ड्राइवर तेज रफ्तार से ऑटो चला रहा था। लापरवाही के कारण ऑटो दुर्घटनाग्रस्त हो गया और धीरज की मौके पर ही मृत्यु हो गई। एमएसीटी ने मामले में कुल 9,77,200 मुआवजे भुगतान का आदेश दिया गया। मृतक के परिजनों को यह रकम भुगतान किए जाने का निर्देश दिया। लेकिन साथ ही कोर्ट ने मृतक के पिता और बहन को दावेदार नहीं माना और अन्य दावेदारों को यह रकम दिए जाने को कहा गया था। यह फैसला आगे का रास्ता तय करेगा सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं जिनमें मृतक के पिता और बहन को मृतक का आश्रित माना और उन्हें मुआवजा प्रदान किया। यह फैसला भविष्य के मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि मोटर वाहन दुर्घटनाओं में मुआवजा केवल मृतक के पारंपरिक उत्तराधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लोगों को मिलेगा जो उसकी आय पर निर्भर थे।  

विदेशों में संपत्ति खरीदने वालों की संख्या में लगातार इजाफा, विदेशी संपत्ति की घोषणा करने वालों की बढ़ी है संख्या

नई दिल्ली विदेशों में संपत्ति रखने वाले या खरीदने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के आंकड़े बताते हैं कि 30,000 से ज़्यादा टैक्सपेयर्स ने 29,000 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति घोषित की है। CBDT के एक अभियान के बाद यह खुलासा हुआ है। हजारों भारतीय एनआरआई बने इस अभियान में करदाताओं को अपनी विदेशी संपत्ति की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। साथ ही, 6,734 करदाताओं ने अपनी स्थिति ‘निवासी’ से ‘अनिवासी’ में बदल दी है। इन लोगों ने 1,090 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी आय की घोषणा की है। इस दौरान औसतन हर करदाता ने लगभग 1 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति घोषित की है। गौरतलब है कि आयकर विभाग ने 19,000 से ज़्यादा करदाताओं को नोटिस भेजा था। 125 देशों के बीच इंर्फोमेशन शेयरिंग एग्रगीमेंट लगभग 125 देशों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था है। भारत 2018 से ही इस व्यवस्था का हिस्सा है। इसके तहत भारत को विदेशी बैंक खातों, उनमें जमा राशि, लाभांश, ब्याज और कुल भुगतान की जानकारी मिलती रहती है। लेकिन, कर अधिकारियों ने पाया कि सभी लोग ज़रूरी जानकारी नहीं दे रहे थे। इसलिए CBDT ने पिछले नवंबर में एक अभियान शुरू किया। इस अभियान में करदाताओं से अपनी विदेशी संपत्ति और आय की घोषणा करने का आग्रह किया गया। उन्हें अपडेटेड टैक्स रिटर्न के ज़रिए यह जानकारी देनी थी। टैक्सपेयर्स को भेजे जा रहे हैं ईमेल इस अभियान के दौरान आयकर विभाग ने 19,500 करदाताओं को ईमेल और टेक्स्ट मैसेज भेजे। इन करदाताओं के पास काफ़ी विदेशी संपत्ति और बैंक खातों में बड़ी रकम थी। विभाग ने लगभग 8,500 लोगों के साथ बैठकें भी कीं। हमारे सहयोगी ईटी को एक सूत्र ने बताया कि लगभग 62% करदाताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी ITR में संशोधन करके अपनी विदेशी संपत्ति और आय की घोषणा की। विदेशी संपत्ति की घोषणा करने वालों की बढ़ी है संख्या पिछले कुछ सालों में, अपनी विदेशी संपत्ति और आय की स्वेच्छा से घोषणा करने वाले करदाताओं की संख्या बढ़ी है। वित्त वर्ष 2020-21 में यह संख्या 60,000 थी, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 2.3 लाख हो गई। इस साल जागरूकता अभियान और व्यापक प्रयासों के कारण, स्वैच्छिक घोषणाओं में वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में 45% की वृद्धि हुई है।

महिला अफसरों का पुरुष कैदियों पर आया दिल, वर्दी में छेद करवा स्टोर रूम में बनाए रिलेशन, 40 बर्खास्त

 लंदन जेल में कैदियों को इसलिए बंद किया जाता है कि वे अपनी गलतियों पर पछताएं और सलाखों से निकलने के बाद अच्छा जीवन बिताएं. लेकिन अगर कैदियों की निगरानी के लिए तैनात स्टाफ ही उनके साथ मिलकर गलत गतिविधियों में लिप्त हो जाए तो क्या किया जाए. ऐसा ही मामला ब्रिटेन में सामने आया है, जिससे सब हैरान हैं. जेल में नियुक्त महिला वार्डरों ने पुरुष कैदियों के साथ संबंध बनाए. सीसीटीवी से बचने के लिए कई वार्डरों ने अपनी पैंट में छेद करवा रखा था. इन अनुचित संबंधों की वजह से कई महिला वार्डर बाद में प्रेग्नेंट भी हो गई, जिसके बाद उन्हें अबॉर्शन करवाना पड़ा. इस मामले का खुलासा होने के बाद 40 महिला जेल अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. सीसीटीवी से बचने के लिए स्टोर रूम में संबंध डेली स्टार यूके वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष कैदियों के साथ सेक्स संबंध रखने वाली महिला वार्डरों की संख्या पिछले 4 साल में तीन गुनी हो गई है. सीसीटीवी से बचने के लिए वे स्टोर रूम में पुरुष कैदियों को ले जाकर संबंध बनाती थीं. पूरे कपड़े उतारने से बचने के लिए उन्होंने कथित तौर पर पैंट में छेद करवा रखा था. अधिकतर संबंध बिना कंडोम यूज किए बनाए जाते थे, जिसके चलते कई महिला अधिकारी गर्भवती भी हो गईं और उन्हें अबॉर्शन करवाना  पड़ा. पुरुष कैदियों पर रीझ गई थीं महिला अधिकारी रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष कैदियों के साथ संबंध बनाने की वजहें भी दिलचस्प रही हैं. अधिकतर मामलों में महिला अधिकारी पुरुष कैदियों पर रीझ गई थीं और उन्होंने अपनी मर्जी से उनके साथ प्रेम संबंध कायम कर रिलेशन बनाए. वहीं कई ने पैसों के लिए ऐसा करना कबूल किया. रिपोर्ट के मुताबिक, फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए कई पुरुष कैदियों ने उन्हें 2 हजार पाउंड तक का ऑफर किया, जो एक बड़ी रकम थी. इसलिए महिला अधिकारी संबंध बनाने के लिए राजी हो गईं. 40 महिला जेल अधिकारी नौकरी से बर्खास्त डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में जेल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनहीनता के 180 मामले सामने आए. इनमें से 73 मामलों में दोष साबित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई. इनमें से 40 मामलों में पुरुष कैदियों से अवैध संबंध कायम करने पर महिला जेल अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया. इसी अवधि में एक पुरुष जेल वार्डर को महिला कैदी के साथ अवैध संबंध रखने के कारण बर्खास्त किया गया. समलैंगिक संबंधों के भी कई मामले आए सामने रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कैदियों और जेल वार्डर के बीच अनुचित समलैंगिक संबंधों के कुछ मामले भी सामने आए, जिनमें दोषी मिलने पर वार्डरों को बर्खास्त किया गया. पिछले चार वर्षों में अवैध संबंधों की वजह से 40 महिला अधिकारियों की बर्खास्ती का मतलब ये है कि हर साल 10 अफसरों को नौकरी से हटाया गया. जबकि 2017 से 2019 की अवधि में यह औसत सिर्फ़ तीन प्रति वर्ष था.

सर्वेक्षण में एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी आशंका विश्वयुद्ध, परमाणु युद्ध और अंतरिक्ष की लड़ाई , कई एक्सपर्ट्स जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चेतावनी दे रहे

वॉशिंगटन  दुनिया में जियो-पॉलिटिकल हालात काफी खतरनाक रास्ते पर मुड़ चला है। यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया कई बार परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुकी है। लेकिन आगे हालात और भयावह होने वाले हैं। वाशिंगटन में वैश्विक मामलों के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की तरफ से किए गये एक सर्वेक्षण से बता चला है कि तीसरा विश्वयुद्ध निश्चित है और ये अगले 10 सालों में शुरू हो सकता है। इस सर्वेक्षण में दुनिया के 300 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया था। इस दौरान इस मुद्दे पर बात की गई कि आखिर अगले 10 सालों में दुनिया कैसे दिखेगी। कई एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि 2035 तक अमेरिका, चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों के बीच युद्ध छिड़ सकता है। वहीं कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 10 सालों में जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वेक्षण में 357 राजनीतिक रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने अगले 10 सालों में दुनिया की बदलती परिस्थितियों और हालातों को लेकर भविष्यवाणियां की हैं। इस दौरान 10 में से चार एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि अगले 10 सालों में अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बीच विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि ये लड़ाई सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युद्ध की आग अंतरिक्ष तक पहुंचेगी। 10 सालों में दुनिया कितनी होगी खतरनाक? सर्वेक्षण के दौरान 10 में से 3 एक्सपर्ट्स ने कहा कि 2035 तक दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द जलवायु परिवर्तन होगा। जबकि करीब 1.7 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 10 सालों में कोई महामारी दुनिया में दस्तक दे सकती है। वहीं 5.1 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय ऋण अगले 10 सालों में दुनिया को पंगु बना सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध का अंत यूक्रेन के लिए अच्छा नहीं होगा और यूक्रेन युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका की आर्थिक और कूटनीतिक वर्चस्व में भारी कमी आएगी। एक्सपर्ट्स इस बात पर अभी भी एकमत हैं कि दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा बना हुआ है। अटलांटिक काउंसिल की टीम ने कहा, “यह भयावह पूर्वानुमान निश्चित तौर पर एक अंधकारमय वैश्विक परिदृश्य के मुताबिक है, जिसमें 62 प्रतिशत एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि एक दशक बाद दुनिया आज की तुलना में बदतर होगी। इस दौरान सिर्फ 38 प्रतिशत ने अनुमान लगाया है कि यह बेहतर होगी।” इस सर्वेक्षण के दौरान एक्सपर्ट्स के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक बात परमाणु युद्ध का खतरा था। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि परमाणु युद्ध जैसा ही खतरनाक स्थिति जलवायु परिवर्तन से भी बन सकते हैं। 10 में से तीन एक्सपर्ट्स ने जलवायु परिवर्तन को 2025 और 2035 के बीच दुनिया में होने वाले विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा माना।

पुरुषों के मुकाबले महिलाएं तेज़ी से हो रही हैं मोटापे का शिकार,हरियाणा में 21% महिलाओं में ये समस्या

नई दिल्ली भारत के दक्षिणी राज्यों की महिलाओं में मोटापा (ओबेसिटी) तेजी से बढ़ रहा है। इसके लिए हैदराबाद की काउंसिल ऑफ सोशल डेवलपमेंट ने एक स्टडी भी की है। रिसर्चर्स का कहना है कि तमिलनाडु में सबसे ज्यादा महिलाएं मोटापे की शिकार हैं। वहीं, तेलंगाना में सबसे कम औरतें मोटापे के दायरे में आती हैं। 120 जिलों की महिलाओं पर स्टडी इस शोध के लिए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) 4 और 5 के डेटा की तुलना की गई। यह आंकड़े 2019 से 2021 तक के थे। स्टडी में 15 से 49 साल की महिलाओं की जानकारी का आकलन किया गया। इसके लिए तेलंगाना के 31 जिले, कर्नाटक के 30, आंध्र प्रदेश के 13, केरल के 14 और तमिलनाडु के 32 जिले शामिल किए गए।  चंडीगढ़ की महिलाएं उत्तर भारत में सबसे ज्यादा मोटापे की शिकार हैं। खराब लाइफस्टाइल के कारण चंडीगढ़ में 41%, पंजाब में 31 व हरियाणा में 21% महिलाओं में मोटापे की समस्या है। इन आंकड़ों को पंजाब यूनिवर्सिटी के डॉ. एसएसबी यूआईसीईटी ऑडिटोरियम में नीति आयोग के सदस्य व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन प्रोफेसर विनोद पाल ने शेयर किया। वे पीयू में क्लोकियम सीरीज के तहत पंहुचे थे। 60% फीमेल व 30% मेल में हीमोग्लोबिन की कमी : डॉ. पॉल ने कहा कि चीन की औसत उम्र 37 व जापान की 48 है। भारत की औसत आयु 29 साल है और लगभग आधों की उम्र 25 से नीचे है। देश के निर्माण करने वाली इस आबादी की सेहत चिंता का विषय है। 60% फीमेल और 30% मेल में हीमोग्लोबिन की कमी है। जिससे दौरे पड़ना, डिप्रेशन, टांगों में दर्द, जल्दी ठंड लगना, बालों का गिरना व नाखूनों का टूटना आदि समस्याएं होती हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए रेगुलर टेस्ट व मेडिकेशन जरूरी है। 18 से 30 की उम्र के 9 प्रतिशत युवा टेंशन के शिकार : चंडीगढ़ में हुए सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि  करीब 45 फीसदी किशोरों में साइकोलॉजिकल समस्याएं पाई गई हैं। लगभग ढाई हजार स्टूडेंट्स पर किए गए सर्वे का नतीजा बताता है कि छह फीसदी स्टूडेंट्स को आत्महत्या के ख्याल आते हैं और 0.39 यानी आठ स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की कोशिश भी की। इस टेंशन का बड़ा कारण रहा क्लास और पढ़ाई का बर्डन, मां का कामकाजी होना, पढ़ाई, पीयर प्रेशर, भविष्य और पेरेंट्स के साथ रिश्ता। यूजीसी की रिपोर्ट कहती है कि 18 से 30 की उम्र में 9 परसेंट युवा टेंशन के शिकार हैं। उन्होंने इसके लिए परिवार को ऐसी समस्याओं से बचाने के कुछ साइन भी बताए। चंडीगढ़ की 41.4 फीसदी महिलाएं मोटापे की शिकार हैं, एक-तिहाई पुरुष मोटापे के शिकार हैं, 10 फीसदी महिलाएं और 13 फीसदी पुरुष हाइपरटेंशन के शिकार हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि तमिलनाडु की महिलाओं में मोटापा 9.5% बढ़ा है। साथ ही कर्नाटक और केरल में यह आंकड़ा 6.9% और 5.7% है। तेलंगाना में मोटापे से जूझ रही महिलाओं में इजाफा सबसे कम 2% पर है। पुरुषों से ज्यादा मोटी हैं महिलाएं स्टडी में यह भी पाया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर लगभग एक चौथाई महिलाएं (24%) मोटापे का शिकार हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा थोड़ा कम (22.9%) है। शोध ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में रह रही औरतों की भी तुलना की। नतीजे कहते हैं कि शहरों में रह रही महिलाएं ज्यादा मोटी हैं। मुस्लिम महिलाओं में मोटापा ज्यादा स्टडी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा 31.2% क्रिश्चियन महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं। हालांकि, दक्षिणी राज्यों की बात करें तो यहां मुस्लिम महिलाओं में मोटापा ज्यादा है। रिसर्चर्स के अनुसार यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि राष्ट्रीय औसत के मुकाबले दक्षिणी राज्यों में मोटापा कहीं ज्यादा है। शोध में जाति के आधार पर भी महिलाओं में मोटापे को एनालाइज किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर मोटापा अदर्स में 29.6%, अदर बैकवर्ड क्लास में 24.6%, शिड्यूल्ड कास्ट में 21.6% और शिड्यूल्ड ट्राइब में 12.6% है। नेशनल लेवल पर महिलाओं में मोटापा 3.3% बढ़ गया है। WHO के अनुसार मोटापा क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मोटापा ऐसी कंडीशन होती है, जिसमें हमारे शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। इससे कई गंभीर बीमारियां, जैसे हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज, होने का रिस्क बढ़ता है। जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 25 से ज्यादा होता है, उन्हें ओवरवेट कहा जाता है और जिनका BMI 30 से ज्यादा होता है, उन्हें ओबीस (मोटा) कहा जाता है। BMI एक मेट्रिक सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल इंसान के ज्यादा और कम वजन को मापने के लिए किया जाता है।

1 अप्रैल से तीर्थनगरी ऋषिकेश में खोले गए शराब के डिपार्टमेंटल स्टोर बंद करने की CM पुष्कर सिंह धामी ने की घोषणा

 ऋषिकेश उत्तराखंड सरकार ने धार्मिक स्थलों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए तीर्थनगरी ऋषिकेश और हरिद्वार में सरकार द्वारा आवंटित किए गए शराब बिक्री के डिपार्टमेंटल स्टोर (ग्रोसरी) आगामी 1 अप्रैल के बाद बंद किए जाने का निर्णय लिया है। इसके चलते अब तीर्थनगरी क्षेत्र में खुली शराब की ग्रोसरी (डिपार्टमेंटल स्टोर) कल्चर समाप्त हो जाएगा। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डा० प्रेमचंद अग्रवाल ने धार्मिक स्थलों की अस्मिता को बचाए रखने के लिये मुख्यमंत्री उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी के समक्ष अपने मन की बात रखी थी। जिसका संज्ञान लेते हुए कैबिनेट में 31 मार्च 2025 के बाद ऋषिकेश और हरिद्वार के डिपोर्टमेंटल स्टोर्स (ग्रोसरी) को बंद करने का निर्णय लिया गया है। वहीं कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की बिक्री और तस्करी को बंद कराने के लिए पुलिस के आलाधिकारियों के साथ बैठक बुलाई और मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल इसे रोकने के लिए निर्देश दिए। कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने ऋषिकेश स्थित कैंप कार्यालय में पुलिस और आबकारी के अधिकारियों को बुलाकर क्षेत्र में हो रही अवैध शराब और मादक पदार्थों की बिक्री पर नाराजगी जाहिर करते हुए शराब बिकने वाले जगहों की लिस्ट दिखाते हुए पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा। जिस पर पुलिस अधिकारियों ने नियमित रूप से अवैध शराब और नशा बिक्री पर कार्रवाई की बात कही। इस पर मंत्री डॉक्टर अग्रवाल ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि सोशल मीडिया में आए दिन अवैध रूप से शराब और अन्य नशा बिक्री की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में पुलिस की अवैध मादक पदार्थों पर कार्रवाई संदेहास्पद लग रही है। वहीं उन्होंने बताया कि आज नगर क्षेत्र में अवैध शराब की होम डिलीवरी तक हो रही है। युवा का भविष्य चरस, गांजे, अफीम जैसे अन्य मादक पदार्थों की चपेट में आकर खत्म हो रहा है। जिस पर कैबिनेट मंत्री अग्रवाल ने पुलिस अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि जिस पुलिस चौकी के कार्यक्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की बिक्री होगी। संबंधित क्षेत्र के चौकी प्रभारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में एसपी देहात जया बलूनी, पुलिस क्षेत्राधिकारी संदीप नेगी, ऋषिकेश कोतवाली प्रभारी राजेंद्र सिंह खोलिया, आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट, थाना प्रभारी रायवाला बीएल भारती, थाना प्रभारी रानीपोखरी विकेंद्र कुमार, एसएसआई विनोद कुमार, चौकी प्रभारी नवीन डंगवाल, मनोज रावत, विनय शर्मा, एलआईयू से विपिन गुसाईं आदि उपस्थित रहे।

समय से 5 मिनट पहले बुलाया ऑफिस, ओवरटाइम के लिए कंपनी को देने पड़ गए करोड़ों

टोक्यो  जापान को समय के लिए सबसे ज्यादा पाबंद देश माना जाता है. यहां पर इन दिनों एक अनोखा मामला देखने को मिला है. यहां सरकारी कर्मचारियों को तय समय से 5 मिनट  पहले ऑफिस बुलाने पर उन्हें 5 करोड़ का मुआवजा दिया गया. अब यह घटना जापानी इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बन गई है. समय से पहले बुलाया ऑफिस ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के मुताबिक जापान के एक छोटे से शहर गिनान में सरकारी कर्मचारियों को नियमित निर्धारित समय से पांच मिनट पहले काम पर आने का आदेश दिया गया था. यह नियम शहर के पूर्व मेयर हिदियो कोजिमा की ओर से लागू किया गया था. मेयर को उनके स्ट्रिक्ट मैनेजमेंट स्टाइल और वर्कप्लेस में अनुचित व्यवहार के लिए जाना जाता था. उन्होंने ऑफिस के सभी कर्मचारियों को रोजाना सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर ऑफिस आने के लिए बोला. यह तय समय से 5 मिनट पहले था.    कर्मचारियों ने की शिकायत मेयर के इस आदेश से सभी 146 कर्मचारी काफी नाराज हुए. उन्होंने इस फैसले के खिलाफ शिकायत दर्ज की और सीधा जापान फेयर ट्रेड कमीशन से संपर्क साधा. वहीं कमीशन ने भी कर्मचारियों के पक्ष में ही फैसला सुनाया और शहर के मेयर को उन्हें मुआवजे के रूप में  5,852,481 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया. चर्चा का विषय बनी घटना जापान की यह घटना अब इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है. वहीं जापानी लोगों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बन गई है. खासतौर पर उन लोगों के लिए जो अपनी कंपनी में ओवरटाइम वर्किंग कल्चर से परेशान हैं. लोग इसपर तरह तरह के रिएक्शंस दे रहे हैं. कुछ लोगों ने कर्मचारियों के इस फैसले की प्रशंसा की है और कहा कि यह फैसला जापान में ओवरटाइम वर्किंग कल्चर को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. 

72 घंटे तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करने से डेली लाइफ में दिखेंगे 7 बदलाव

नई दिल्ली अगर हम आपसे कहें कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल 3 दिनों तक न करें, तो आपका क्या रिएक्शन होगा? 72 घंटों तक बिना फोन का इस्तेमाल किए रहना आजकल की दुनिया में काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि हमारे लगभग सभी काम इसी पर होते हैं। मनोरंजन हो या सोशल नेटवर्किंग सबकुछ स्मार्टफोन से ही होता है। लेकिन इसके इस्तेमाल को कम करने से आपके दिमाग में कुछ हैरान करने वाले बदलाव हो सकते हैं। इस बारे में एक स्टडी भी हुई है। आइए जानें इस बारे में। क्या है यह स्टडी? इस स्टडी में युवाओं को 72 घंटे तक फोन का कम से कम इस्तेमाल करने को कहा गया। वे फोन का इस्तेमाल सिर्फ काम के सिलसिले में या अपने परिवार और दोस्तों के साथ कॉन्टेक्ट में रहने के लिए ही कर सकते थे। इस रिसर्च से पहले सभी प्रतिभागियों का ब्रेन स्कैन किया गया, जिसमें क्रेविंग और रिवॉर्ड वाले हिस्से पर फोकस किया गया है। 72 घंटे तक स्मार्टफोन के इस्तेमाल को रेस्ट्रिक्ट करने के बाद ब्रेन स्कैन में प्रतिभागियों के ब्रेन केमिस्ट्री में बदलाव देखने को मिले। स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम होने की वजह से प्रतिभागियों के दिमाग में एडिक्टिव सब्स्टांस के विड्रॉवल जैसे रिएक्शन देखने को मिले। इससे यह समझा जा सकता है कि स्मार्टफोन एडिक्शन कितना गंभीर है और इसके इस्तेमाल को कम करने की कितनी ज्यादा जरूरत है। तनाव में कमी फोन का लगातार इस्तेमाल करने से हमारा दिमाग हमेशा एक्टिव रहता है। नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया अपडेट्स की भरमार हमें मानसिक रूप से थका देती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारा दिमाग शांत होता है और तनाव कम हो जाता है। इससे हम ज्यादा शांत और बैलेंस्ड महसूस करते हैं। फोकस करने की क्षमता में सुधार फोन के बार-बार इस्तेमाल से हमारा ध्यान भटकता रहता है। फोन आसपास होने से भी हमारा ध्यान बार-बार उसी ओर जाता रहता है। 3 दिन तक फोन का इस्तेमाल न करने से हमारा दिमाग फोकस्ड होता है और हम अपने काम पर बेहतर ढंग से फोकस कर पाते हैं। इससे प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है। नींद की गुणवत्ता में सुधार फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है। फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है। 3 दिन तक फोन से दूर रहने से हमारी नींद का पैटर्न सुधरता है और हम ज्यादा गहरी और आरामदायक नींद ले पाते हैं। क्रिएटिविटी में बढ़ोतरी फोन के इस्तेमाल से हमारा दिमाग लगातार इनफॉर्मेशन से भरा रहता है, जिससे क्रिएटिव थिंकिंग कम हो जाती है। फोन से दूर रहने पर हमारा दिमाग खुलकर और ज्यादा बेहतर ढंग से सोच पाता है। इससे नई चीजें सीखने और क्रिएटिव थॉट्स विकसित करने की क्षमता बढ़ती है। सोशल कनेक्शन में सुधार फोन के ज्यादा इस्तेमाल से हम वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं। फोन का कम इस्तेमाल करने से हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिता पाते हैं। इससे रिश्तों में मजबूती आती है और हम ज्यादा खुश महसूस करते हैं। सेल्फ रिफ्लेक्शन के लिए समय फोन से दूर रहने पर हमें अपने विचारों और भावनाओं को समझने का मौका मिलता है। यह सेल्फ रिफ्लेक्शन हमें अपने जीवन के गोल्स और प्रायोरिटीज के बारे में बेहतर तरीके से सोचने और इन्हें तय करने में मदद करता है। इससे हमारा मानसिक संतुलन बेहतर होता है। डिजिटल डिटॉक्स तीन दिन तक फोन का इस्तेमाल न करना एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स है। यह हमें डिजिटल दुनिया के नेगेटिव प्रभावों से दूर रखता है और हमें असल जिंदगी के साथ जोड़ता है। इससे हमारी मेंटल और इमोशनल हेल्थ बेहतर होती है।

फ्लाइट में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर एक-एक कर कपड़े उतारने लगी महिला

ह्यूस्टन “इस तरह की घटनाएं पहले कभी-कभार ही सुनने को मिलती थी, पर आज कल तो यह आम ही हो गया है।” अमेरिका के एक विमान में एक महिला की हरकतों से परेशान हो कर लोग ऐसा ही कुछ कह रहे हैं। यहां ह्यूस्टन से फीनिक्स जा रही एक फ्लाइट यात्रियों के लिए यादगार बन गई। हालांकि यात्री इसे जल्द ही भुलाना चाहेंगे। दरअसल इस फ्लाइट में एक महिला ने कोहराम मचा दिया। महिला 30 हजार फीट की ऊंचाई पर जा कर अचानक विमान से उतरने की जिद करने लगी। मना करने पर उसने जो किया उसे देख कर सब दंग रह गए। इस महिला ने विमान में बैठे लोगों के सामने एक-एक कर सारे कपड़े उतार दिए। नग्न अवस्था में वह विमान में परेड भी करने लगी। महिला ने कथित तौर पर जोर-जोर से चिल्लाते हुए कॉकपिट में घुसने की भी कोशिश की। एक यात्री ने बताया, “उसने सब कुछ उतारना शुरू कर दिया, टोपी, उसके जूते, सब कुछ।” महिला की हरकतों से पूरे विमान में कोहराम मच गया। उस वक्त वहां कई बच्चे भी मौजूद थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि वह कॉकपिट के दरवाजे को पीट-पीट कर अंदर आने देने की जिद करने लगी। स्थिति बिगड़ने पर आखिरकार पायलट को विमान को वापसी की ओर मोड़ना पड़ा। यह पूरा ड्रामा लगभग 25 मिनट तक चला। एक कर्मचारी ने महिला को कंबल से ढकने की कोशिश भी की, लेकिन वह किसी के काबू में नहीं आई। ह्यूस्टन पुलिस ने बाद में उसे हिरासत में लिया है और उसकी मेडिकल जांच की जा रही है।

टी-72 टैंक को मिलेगा अधिक शक्तिशाली इंजन, भारत और रूस के बीच 248 मिलियन डॉलर की डील

नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के लिए अधिक शक्तिशाली 1000 एचपी इंजन की खरीद के लिए रूस के  सोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 248 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस सौदे में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (हैवी व्हीकल फैक्ट्री), अवाडी, चेन्नई को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल है। टी-72 भारतीय सेना के टैंक बेड़े का मुख्य आधार है। वर्तमान में इसमें 780 एचपी इंजन लगा हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को 1000 एचपी इंजन से लैस करने से भारतीय सेना की युद्धक्षेत्र गतिशीलता और आक्रामक क्षमता में वृद्धि होगी। रूस में निर्मित टी-72 भारतीय सेना के बेड़े का मुख्य टैंक है, जो अभी 780 हॉर्स पावर इंजन से संचालित है। भारत के पास टी-72 टैंक के कुल तीन वेरिएंट हैं। टी-72 टैंकों के मौजूदा बेड़े को अब 1000 एचपी इंजन से लैस किया जाएगा, जिससे भारतीय सेना की युद्धक गतिशीलता और आक्रामक क्षमता बढ़ेगी। इस टैंकको 1960 के दशक में सोवियत रूस ने विकसित और निर्मित करके रूसी सेना ने तमाम मोर्चों पर इसका इस्तेमाल शुरू किया। चीन के साथ 1962 में लड़ाई के बाद भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की योजना बनी। इसी क्रम में 1970 के आसपास भारत ने रूस से टी-72 टैंक खरीदा। यह यूरोप से बाहर भारत का पहला टैंक सौदा था और तबसे यह भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी है। वहीं मजबूत सरकारी समर्थन के दम पर, भारत का रक्षा उत्पादन 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174 प्रतिशत अधिक है। देश का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भारत का आत्मनिर्भर अभियान ‘वांछित परिणाम दे रहा है’ और देश 2029-30 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकार के प्रयास बेहद सफल साबित हो रहे हैं। रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले सिर्फ 600 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2023-24 में 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। उन्होंने भरोसा जताया कि यह प्रगति जारी रहेगी और 2029-30 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सरकारी समर्थन और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से भारत का रक्षा क्षेत्र का उत्पादन वित्त वर्ष 24-29 के दौरान लगभग 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने वाला है। भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच सहयोग से हथियार और गोला-बारूद, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और नौसेना प्रौद्योगिकियों में प्रगति हुई है।  

YouTube के पीछे हाथ धोकर पड़ीं Meta, लगवानी चाहती हैं बैन

लंदन Meta और Snap समेत दूसरी कंपनियां हाथ धोकर YouTube के पीछे पड़ गई हैं. इन कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया सरकार से यूट्यूब पर भी बैन लगाने की मांग की है. दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर बैन लगा दिया था, लेकिन यूट्यूब को इससे बाहर रखा गया था. अब बाकी कंपनियों का कहना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब पर भी बैन लगना चाहिए. YouTube को क्यों बैन करवाना चाहती हैं बाकी कंपनियां? टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा और स्नैप आदि का कहना है कि YouTube के कारण बच्चों को वही खतरे हैं, जो दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से थे. यूट्यूब भी बच्चों को एल्गोरिद्मिक कंटेट रिकमंडेशन, सोशल इंटरेक्शन फीचर और खतरनाक कंटेट तक एक्सेस देती है. मेटा का कहना है कि यूट्यूब की वजह से भी बच्चे हानिकारक कंटेट से एक्सपोज होते हैं. इसी तरह टिकटॉक का कहना है कि यूट्यूब को इस नियम से बाहर रखने से यह कानून विसंगत बन गया है. स्नैप ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा है कि कानून को निष्पक्ष होना चाहिए और बिना किसी भेदभाव के इसके पालन किया जाना चाहिए. YouTube पर क्यों नहीं लगाई थी पाबंदी? ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल नवंबर में एक नया कानून पारित किया था. इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस नहीं कर सकते. अगर कोई प्लेटफॉर्म उन्हें लॉग-इन करने देगा तो उस पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. हालांकि, यूट्यूब पर यह कानून लागू नहीं होता. इसके एजुकेशनल कंटेट और पेरेंटल सुपरविजन के साथ फैमिली अकाउंट के चलते इसे पाबंदी से बाहर रखा गया है. दूसरी कंपनियों के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूट्यूब ने कहा कि अपनी कंटेट मॉडरेशन पॉलिसी को मजबूत कर रही है और ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए हार्मफुल कंटेट की पहचान कर रही है.

कोरोना के बाद AC कोचो का बड़ा चलन, रेलवे ने जारी किया आकड़ा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे के जरिए रोजाना करोड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं. यात्रियों के लिए रेलवे हजारों की संख्या में ट्रेन चलाता है. भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल व्यवस्था है. सामान्य तौर पर बात की जाए तो अगर कोई कहीं जाना चाहता है और दूर का सफर तय करना चाहता है. तो ऐसे में ज्यादातर लोगों की पहली पसंद ट्रेन होती है. बीते कुछ सालों में ट्रेन में सफर करने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. लेकिन जब पूरी दुनिया की तरह भारत भी कोविड-19 की चपेट में था. तो महामारी के बाद जब चीजें सामान्य हुईं. तो ट्रेन से जाने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बदलाव देखने को मिला. थर्ड एसी में ट्रैवल करने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. हैरान कर देंगे रेलवे के जारी किए गए आंकड़े. कोरोना के बाद बढ़े थर्ड एसी के यात्री साल 2019 में जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था. तब से ही लोग साफ सफाई को लेकर सजग रहने लगे. इसके बाद लोगों की जिंदगी में कई आदते पूरी तरह से बदल गईं. वहीं कोरोना महामारी के बाद बात की जाए तो भारतीय रेलवे में सफर करने वालों यात्रियों की संख्या में भी काफी बदलाव हुआ. हाल ही में रेलवे की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में यह बात सामने निकल कर आई कि कोरोना महामारी के बाद ट्रेनों में पहले जो यात्री स्लीपर में सफर करते थे. वह यात्री थर्ड एसी में सफर करने लगे हैं. कोविड के बाद थर्ड एसी पैसेंजर्स की संख्या में तगड़ा उछाल देखने को मिला है. आंकडे कर देंगे हैरान कोरोना महामारी के बाद से लेकर अब तक के 5 सालों में एसी थर्ड से सफर करने वाले मुसाफिरों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला है. साल 2019-20 में 11 करोड़ यात्री थर्ड एसी से सफर करते थे. यानी कुल यात्रियों का 1.4% ही. वहीं साल 2024-25 की बात की जाए तो इसमें 19% का इजाफा हुआ है. और यात्रियों की संख्या 26 करोड़ हो गई है. साल 2019-20 में जहां थर्ड एसी से भारतीय रेलवे ने 12,370 करोड रुपये का राजस्व कमाया था. तो वहीं साल 2024 25 में यह बढ़कर 30,089 करोड़ हो गया है. यह आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं. बता दें कोरोना महामारी से पहले यानी 2019-20 तक रेलवे के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान स्लीपर क्लास के यात्रियों में हुआ करता था. लेकिन इस बार थर्ड एसी के यात्रियों का राजस्व सबसे ज्यादा है.

Train Cancel: इस रूट की 50 से ज्यादा ट्रेनें कैंसिल

नई दिल्ली भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने अपनी जिंदगी में कभी ट्रेन से सफर न किया हो. रोजाना भारतीय रेलवे के जरिए देश में करोड़ों की संख्या में यात्री एक शहर से दूसरे शहर सफर करते हैं. इन यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की तरफ से 13000 से भी ज्यादा पैसेंजर गाड़ियां चलाई जाती हैं. अक्सर जब किसी को कहीं दूर का सफर तय करना होता है. तो ज्यादातर लोगों की पहली पसंद ट्रेन ही होती है. ट्रेन के सफर में आपको बाकी अन्य साधनों से ज्यादा सहूलियत मिलती है. हाल ही में आयोजित हुए महाकुंभ में भी भारतीय रेलवे की ओर से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं को प्रयागराज पहुंचाया गया था. लेकिन हाल ही में भारतीय रेलवे के जरिए सफर करने वाले यात्रियों के लिए बुरी खबर आई है. रेलवे ने अगले महीने कई ट्रेनों को किया है कैंसिल. सफर पर जाने से पहले देख लें इन ट्रेनों की लिस्ट. अगले महीने इन ट्रेनों को किया है कैंसिल भारतीय रेलवे को रेलवे के संचालन को दूर दराज तक के इलाकों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग रूटों पर नई-नई रेल लाइन जोड़नी पड़ती है. इसके अलावा रेलवे को कई बार रेल ट्रेक्स का रखरखाव भी करना होता है. इन सभी कामों के लिए रेलवे को कई ट्रेनें कैंसिल करनी पड़ती है. ऐसा ही इस बार हुआ है. रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक डोमिनगढ़-गोरखपुर रेलखंड पर रेल लाइन जोड़ने का काम किया जाना है. इस वजह से कई ट्रेनें कैंसिल की गई हैं. ट्रेन नंबर 15047 कोलकाता-गोरखपुर एक्स. 14 अप्रैल से 05 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15211/12 दरभंगा-अमृतसर एक्स. 16 अप्रैल से 04 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15031/32 गोरखपुर-लखनऊ जं. एक्स. 16 अप्रैल से 05 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15065 पनवेल-गोरखपुर एक्स. 16 अप्रैल से 05 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 22531/32 छपरा-मथुरा जं. एक्स. 16 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15067 गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस 16 से 30 अप्रैल के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15005 गोरखपुर-देहरादून एक्स. 16 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 19409 साबरमती-गोरखपुर एक्स. 17 अप्रैल से 01 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 15068 बांद्रा टर्मिनेस-गोरखपुर 18 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 19410 गोरखपुर-साबरमती 19 अप्रैल से 03 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 20103 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर 19 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 14010 आनंद विहार टर्मिनस-बापूधाम मोतीहारी 19 से 30 अप्रैल के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 14009 बापूधाम मोतीहारी-आनंद विहार टर्मिनस 20 अप्रैल से 01 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 20104 गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस 20 अप्रैल से 03 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 12571 गोरखपुर-आनंद विहार टर्मिनस 20 अप्रैल से 03 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 12572 आनंद विहार टर्मिनस-गोरखपुर 21 अप्रैल से 04 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 12595 गोरखपुर-आनंद विहार टर्मिनस 21 अप्रैल से 01 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर12596 आनंद विहार टर्मिनस-गोरखपुर 22 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल ट्रेन नंबर 22549/50 वंदे भारत एक्सप्रेस 27 अप्रैल से 02 मई के लिए कैंसिल

मिस्र के ऐतिहासिक कर्नाक मंदिर में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान ऐसा खजाना हाथ लगा, देवताओं की मूर्तियां भी मिलीं

काहिरा  आज मुस्लिम बहुल आबादी वाले मिस्र की पहचान एक ऐसे देश के रूप में रही है जो हजारों साल पुराने प्राचीन धरोहरों का केंद्र रहा है। इस देश की प्राचीन धरोहरों ने पूरी दुनिया से पुरातत्वविदों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित किया है। पुरातत्वविद यहां खुदाई में दशकों लगा देते हैं, ताकि कोई नायाब चीज खोज सकें। ऐसी ही एक खुदाई में पुरातत्वविदों ने कर्नाक मंदिर परिसर में 2600 साल पुराना खजाना खोज निकाला है। इसमें सोने के गहनों का एक शानदार भंडार और पारिवारिक देवताओं के समूह की मूर्तियां मिली हैं। प्राचीन मिस्र के बारे में नई जानकारी यह ताजा खोज 26वें राजवंश के दौरान प्राचीन मिस्र की धार्मिक और कलात्मक प्रथाओं के बारे में एक आकर्षक जानकारी देती है। इसके साथ ही यह एक हजार साल ईसा पूर्व में कर्नाक मंदिर परिसर के इतिहास और विकास पर नई रोशनी डालती है। कलाकृतियों के चल रहे शोध और जीर्णोद्धार से प्राचीन मिस्रवासियों की परंपरा और प्रथाओं के बारे में और जानकारी मिलती है। हाल ही में मिली कलाकृतियों को पूरी तरह से जीर्णोद्धार किए जाने के बाद लक्सर म्यूजियम में दिखाया जाएगा। इससे मिस्र की प्राचीन संस्कृति और धार्मिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। कर्नाक में प्राचीन मिस्र का महत्वपूर्ण मंदिर कर्नाक मंदिर को मिस्र के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबे समय तक जीवंत रहने वाले धार्मिक परिसर के रूप में जाना जाता है। लक्सर के पास स्थित इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण लगभग 4000 साल पहले किया गया था और लगभग एक हजार साल तक इसका लगातार नवीनीकरण और संशोधन किया गया। यह परिसर सदियों से प्रमुख पुरातात्विक जांच का स्थल रहा है और इस दौरान सैकड़ों ऐतिहासिक खोजें हुई हैं। देवताओं की सोने की मूर्तियां नई खोजी गई वस्तुओं में सोने के बीज, ताबीज और मूर्तियां हैं। इन पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की गई है। इन सभी चीजों को एक टूटे हुए बर्तन के अंदर पाया गया है, लेकिन संरक्षण विधि के चलते उनकी स्थिति हमेशा बरकरार रही। मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने बताया है कि पाए गए आभूषणों में सोने और धातु की अंगूठियां, साथ ही तीन-देवता की मूर्ति शामिल थीं। खुदाई के दौरान मिली तीन मूर्तियों में प्राचीन मिस्र के तीन प्रमुख देवता शामिल हैं। थेब्स के शासक देवता अमुन, उनकी पत्नी और मातृदेवी मुट और उनके बेटे खोंसू यानी चंद्र देवता। शुरू में माना जाता था कि इन मूर्तियों को ताबीज के रूप में पहना जाता थास क्योंकि मान्यता थी कि उन्हें गले में बांधने से वे रक्षा करते हैं।

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