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रोहिंग्या शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जम्मू कश्मीर सरकार की जिम्मेदारी: अब्दुल्ला

कठुआ/जम्मू नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि क्षेत्र में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जम्मू कश्मीर सरकार की जिम्मेदारी है। अब्दुल्ला ने कठुआ के दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘भारत सरकार शरणार्थियों को यहां लेकर आई। हम उन्हें यहां नहीं लाए। उन्होंने उन लोगों को यहां बसाया है और जब तक वे यहां हैं, उनके लिए पानी और बिजली मुहैया कराना हमारा कर्तव्य है। यह हमारी जिम्मेदारी है।’ उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू शहर में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों के बसने को एक बड़ी ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया था और इसमें शामिल लोगों की पहचान के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की थी। जम्मू में उन्हें पानी और बिजली कनेक्शन देने संबंधी टिप्पणी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा ने यह भी आरोप लगाया था कि ऐसा उन्हें बचाने के लिए किया गया है, क्योंकि वे (रोहिंग्या और बांग्लादेशी) एक विशेष समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 13,700 से ज्यादा विदेशी जम्मू और दूसरे जिलों में बसे हुए हैं जिनमें से अधिकतर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक हैं। वर्ष 2008 से 2016 के बीच उनकी आबादी में 6,000 की वृद्धि हुई है। अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की भी जोरदार वकालत की और कहा कि जम्मू कश्मीर में केवल एक ही सत्ता केंद्र होगा। उन्होंने कहा, ‘डबल इंजन वाली सरकार यहां काम नहीं करेगी। राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सत्ता का केवल एक ही केंद्र होगा।’ बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, ‘भारत सरकार को इस पर गौर करना चाहिए। यह आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार है। हमें इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है।’ जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के सवाल पर अब्दुल्ला ने फिर से कहा, ‘राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। यह भारत सरकार का वादा है और उच्चतम न्यायालय के सामने भी इसका वादा किया गया है। जिस तरह उनके चुनावी वादे पूरे किए गए, उसी तरह उच्चतम न्यायालय की प्रतिबद्धता का भी सम्मान किया जाएगा और राज्य का दर्जा वापस आएगा।’ अब्दुल्ला ने क्षेत्र में बिजली कटौती के मुद्दे पर कहा कि इसके लिए बारिश और बर्फबारी की कमी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, ‘हम बिजली कटौती को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। बर्फबारी या बारिश न होने की वजह से बिजली की कमी है। बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती के हिंदुत्व पर दिए गए हालिया बयानों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘मुझे उनके बयानों पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।’ जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ईवीएम को लेकर सवाल आज ही नहीं उठे हैं, बल्कि जब से ये मशीनें आई हैं, तब से उठ रहे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोग इन मशीनों पर भरोसा करें।’ जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘कई शिक्षित लड़के और लड़कियां बेरोजगार हैं। कई रिक्तियां हैं, लेकिन उन्हें भरा नहीं गया है। सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए ताकि हमारे युवाओं को काम मिल सके।’ अब्दुल्ला ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा और शैक्षिक बुनियादी ढांचे की स्थिति की भी आलोचना की और कहा कि इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।  

प्रियंका चतुर्वेदी ने अमित शाह को पत्र है, बेलगावी (बेलगाम) को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र है, जिसमें उन्होंने बेलगावी (बेलगाम) को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग की है। प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में कहा कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर बेलगावी सहित कई शहरों और गांवों को लेकर सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही तनाव बढ़ गया है, जिसके कारण बेलगावी में महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) के कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि एमईएस की महा मेलावा रैली और अन्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति दी जाएगी, लेकिन पुलिस ने अब रैली को रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था की है, जिससे शहर में तनाव और बढ़ गया है। उन्होंने पत्र में आगे कहा कि 2022 में, केंद्र ने दोनों राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक कोई भी कार्रवाई न करें। इसके बावजूद, कर्नाटक विधानसभा ने महाराष्ट्र को किसी भी प्रकार की जमीन देने से रोकने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। इसके जवाब में, महाराष्ट्र विधानसभा ने मराठी भाषी गांवों को अपने राज्य में शामिल करने के लिए कानूनी रूप से आगे बढ़ने के लिए एक जवाबी प्रस्ताव पारित किया, जो इस विवादास्पद मुद्दे पर आम सहमति की कमी को उजागर करता है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई लंबित है, एमईएस की ओर से प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए बार-बार अनुरोध किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि दोनों राज्य सरकारों के बीच आम सहमति की कमी और आगे भी अशांति की संभावना को देखते हुए, मैं आपसे (अमित शाह) बेलगावी को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने पर विचार करने का आग्रह करता हूं। इससे शहर में सीमा विवाद को सुलझाने में मदद मिलेगी और नागरिकों को न्याय सुनिश्चित होगा, साथ ही केंद्रीय शासन के माध्यम से सभी भाषाई समुदायों को समायोजित किया जा सकेगा। बता दें कि बेलगाव या बेलगावी विवाद महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच एक लंबे समय से चली आ रही सीमा विवाद है। यह विवाद मुख्य रूप से बेलगावी जिले को लेकर है। वर्तमान में यह जिला कर्नाटक का हिस्सा है। 1956 में जब भारत में राज्यों का पुनर्गठन भाषाई आधार पर किया गया, तब बेलगावी जिले को कर्नाटक को आवंटित किया गया था। महाराष्ट्र का कहना है कि इस जिले में मराठी भाषी लोगों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए यह क्षेत्र भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से महाराष्ट्र का हिस्सा होना चाहिए। जबकि कर्नाटक का तर्क है कि बेलगावी सदियों से कर्नाटक का हिस्सा रहा है। यहां की संस्कृति कन्नड़ संस्कृति से गहरे जुड़ी हुई है।  

बांग्लादेश में अब भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का ऐलान, जयपुरिया चादरों में लगाई आग, बौखलाए मुस्लिम नेता

ढाका भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। पड़ोसी देश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक वरिष्ठ नेता ने भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का ऐलान किया है और प्रतीक के तौर पर जयपुर निर्मित चादरों को जलाकर विरोध-प्रदर्शन किया है। ढाका की सड़कों पर यह सब तब किया गया, जब दो दिवसीय दौरे पर भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ढाका के दौरे पर हैं। मिसरी ने अपने दौरे के पहले ही दिन अपने बांग्लादेशी समकक्ष से दो टूक लहजे में कहा है कि हिन्दुओं और हिन्दू धर्मस्थलों की रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अपने समकक्ष मोहम्मद जशीमुद्दीन के साथ बैठक के दौरान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सहित भारत की चिंताओं से अवगत कराया। इसके अगले दिन विपक्षी पार्टी के संयुक्त महासचिव एडवोकेट रूहुल कबीर रिजवी ने राजशाही नगर में भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का ऐलान किया और कथित तौर पर जयपुर में निर्मित चादरों को बीच सड़क पर आग के हवाले कर दिया। इस दौरान बीएनपी नेता ने प्रिंटेड चादरों को दिखाते हुए कहा, “यह चादर भारत के राजस्थान की राजधानी जयपुर में बनी है। यह चादर जयपुर के कपड़ा उद्योग द्वारा बनाई गई है… हम भारतीय आक्रमण के खिलाफ विरोध जताने के लिए इसे जला रहे रहे हैं और भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का ऐलान करते हैं।” ऐसा कहकर रिजवी ने उस चादर को सड़क पर फेंक दिया और पार्टी कार्यकर्ताओं से उसे जलाने को कहा। इसके बाद चादर पर केरोसिन तेल छिड़कर उसे आग लगा दिया गया। इस दौरान कई बांग्लादेशी नागरिकों को चादर को पैरों से रौंदते हुए और भारत विरोधी नारा लगाते हुए देखा गया। रिजवी ने ये भी कहा कि भारत की दोस्ती शेख हसीना तक ही थी। अब हम भारतीय उत्पाद का बहिष्कार करते हैं। बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब रिजवी ने भारतीय उत्पादों का बहिष्कार का ऐलान किया है। पिछले हफ्ते उन्होंने भारत में बांग्लादेशी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के खिलाफ अपनी पत्नी की भारत निर्मित साड़ी को आग के हवाले कर दिया था। 5 दिसंबर को एक सभा को संबोधित करते हुए रिजवी ने कहा, “यह भारतीय साड़ी है। यह मेरी पत्नी की थी और उन्होंने खुद इसे जलाने के लिए दिया है। आज मैं इसे आपके सामने फेंक रहा हूं।” इससे पहले इस साल की शुरुआत में, मार्च में भी रिजवी ने इसी तरह के विरोध प्रदर्शन के तहत अपने पहने हुए भारतीय शॉल को फेंक दिया था। चादर जलाने की यह घटना भारत में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन के कुछ ही दिनों बाद हुई है। यहां भी प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेशी निर्मित ढाकाई जामदानी साड़ियों को जलाया था। बंगाली हिंदू सुरक्षा समिति ने कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार की निंदा की थी। तब प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेशी उत्पादों के बहिष्कार का भी आह्वान किया था और पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमले जारी रहने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

महाराष्ट्र चुनाव को लेकर EC ने खारिज किए विपक्ष के दावे, कहा- VVPAT और EVM के आंकड़ों में कोई भी असमानता नहीं

मुंबई हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में विपक्ष द्वारा लगाए गए वोटों में गड़बड़ी के आरोपों को मुख्य चुनाव अधिकारी ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि VVPAT (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) और EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के आंकड़ों में कोई भी असमानता नहीं पाई गई है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने अपने बयान में कहा, “हमने प्रत्येक मतदान केंद्र पर EVM और VVPAT का मिलान किया है और सभी परिणाम एकदम सटीक पाए गए हैं। यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है।” सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चयनित पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गिनती करना और ईवीएम में संख्याओं के साथ उसका मिलान करना अनिवार्य है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में मतगणना के दिन 23 नवंबर को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चयनित 5 मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गणना, मतगणना पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के सामने की गई। अधिकारी ने कहा, “इसके अनुसार, महाराष्ट्र राज्य के 288 विधानसभा क्षेत्रों से 1440 वीवीपीएटी यूनिट की पर्ची काउंट को संबंधित नियंत्रण इकाई डेटा के साथ मिलान किया गया है। संबंधित जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार वीवीपीएटी पर्ची गणना और ईवीएम नियंत्रण इकाई गणना के बीच कोई विसंगति नहीं पाई गई है। ईसीआई द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है।”   विपक्ष ने उठाए थे सवाल विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मतदान के दौरान EVM में छेड़छाड़ की गई है और VVPAT की पर्चियों से वोटों का मिलान नहीं हो रहा है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव परिणाम की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि, मुख्य चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है। महाराष्ट्र विधानसभा के 95 निर्वाचन क्षेत्रों के 104 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग से ईवीएम और वीवीपैट डेटा का सत्यापन और मिलान करने की मांग की थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक 31 जिलों को कवर करने वाले 95 विधानसभा क्षेत्रों से पुनः सत्यापन की मांग की गई थी। पिछले महीने आए चुनावी नतीजों में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी तथा एमवीए को हाशिये पर धकेल दिया। महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति गठबंधन को 230 सीट और एमवीए को केवल 46 सीट मिलीं। ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 20 सीट जीतकर विपक्षी खेमे में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, उसके बाद कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं, जबकि राकांपा (शरदचंद्र पवार) 10 सीट के साथ सबसे पीछे रही।

पहले करेंसी नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई गई और अब ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे के दर्जे से भी हटाया

ढाका बांग्लादेश में एक के बाद एक शेख मुजीबुर्रहमान की निशानियों को मिटाया जा रहा है। पहले करेंसी नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई गई और अब ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे के दर्जे से भी हटा दिया गया है। यह कदम अंतरिम सरकार द्वारा हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देने के बाद उठाया गया। दरअसल ‘जय बांग्ला’ नारा 1971 के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहा है और इसे बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान ने जन-जन में लोकप्रिय बनाया। 2020 में शेख हसीना सरकार के दौरान हाई कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय नारा घोषित किया था। अदालत ने कहा था कि सरकारी कार्यक्रमों, राष्ट्रीय दिवसों और शैक्षिक संस्थानों में इसका उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने लगाई हाई कोर्ट के फैसले पर रोक मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की अपील डिवीजन ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाते हुए ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे का दर्जा समाप्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सैयद रिफात अहमद की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय बेंच ने यह निर्णय लिया। अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल अनिक आर हक ने कहा, “‘जय बांग्ला’ अब राष्ट्रीय नारे के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं रहेगा।” पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश के राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीकों में बदलाव तेजी से हुआ है। शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को पहले ही बैंक नोटों से हटा दिया गया था। अब ‘जय बांग्ला’ पर हुई कार्रवाई से यह सवाल उठने लगा है कि क्या बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार शेख मुजीब की विरासत को खत्म करने की कोशिश कर रही है? हसीना के जाते ही बदलने लगी बांग्लादेश की तस्वीर 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर बदलाव देखे जा रहे हैं। ‘जय बांग्ला’ को हटाए जाने को इस बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह नारा न केवल राजनीतिक पहचान था बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम का भावनात्मक प्रतीक भी था। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इस कदम ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। मुजीब समर्थक इसे स्वतंत्रता संग्राम और उनकी विरासत के खिलाफ साजिश मान रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार इसे ‘न्यायिक प्रक्रिया’ का हिस्सा बता रही है। क्या ‘जय बांग्ला’ का हटना महज एक कानूनी निर्णय है, या यह इतिहास बदलने की एक सोची-समझी रणनीति? यह सवाल बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम है।

राजेंद्र मेघवार ने सिविल परीक्षा पास कर रचा इतिहास, पाकिस्तान के पहले हिंदू पुलिस अधिकारी बने

नई दिल्ली पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और खासकर हिंदू समुदाय के साथ कैसा बर्ताव होता है, इसकी बानगी अक्सर देखने को मिल जाती है। लेकिन पाकिस्तान में पहली बार एक हिंदू को पुलिस अधिकारी बनाया गया है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बेहद पिछड़े जिले बदीन से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र मेघवार ने अपनी मेहनत के दम पर सिविल सेवा परीक्षा (CCS) पास की। अब उन्हें पाकिस्तान की पुलिस सर्विस (PSP) में अधिकारी बनाया गया है। गुलबर्ग में हुई तैनाती राजेंद्र की तैनाती फैसलाबाद के गुलबर्ग एरिया में बतौर एएसपी (असिस्टेंड पुलिस अधीक्षक) की गई है। राजेंद्र मेघवार पाकिस्तान के पहले हिंदू पुलिस अधिकारी बने हैं।पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट ‘पाकिस्तान टुडे’ से बात करते हुए राजेंद्र ने कहा, ‘पुलिस में रहते हुए हमें जनता की समस्याओं से सीधे सरोकार करने का मौका मिलता है, जो अन्य विभागों में नहीं हो सकता।’ राजेंद्र मेघवार मानते हैं कि पुलिस विभाग में रहते हुए वह पाकिस्तान के हिंदू समुदाय के लिए बेहतर काम कर सकेंगे। मेघवार के साथ ही रूपमति नाम की एक हिंदू महिला ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की है। हालांकि उनकी नियुक्ति विदेश विभाग में होगी। पाकिस्तान में केवल 2 फीसदी हिंदू आपको बता दें कि पाकिस्तान एक इस्लामिक गणराज्य है। यह दुनिया का पांचवां सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। 2023 की जनगणना के मुताबिक, पाकिस्तान की 24 करोड़ की आबादी में केवल 2 फीसदी ही हिंदू हैं। हिंदू बहुल प्रांत है सिंध पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ही ज्यादा हिंदू आबादी निवास करती है। पाकिस्तान में इस्लाम के अतिवाद के बावजूद सिंध प्रांत में हिंदू परंपराएं आज भी जीवित हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों में अल्पसंख्यकों के लिए सीटें रिजर्व रखी जाती हैं। आपको बता दें कि फैसलाबाद पाकिस्तान का वही हिस्सा है, जहां 2023 में कुरान के कथित अपमान की घटना सामने आई थी। इसके बाद जरांवाला तहसील में ईसाई समुदाय पर हमला कर दिया गया था। 2016 में सिंध प्रांत में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए एक कानून बनाया गया था। लेकिन कट्टरपंथियों के विरोध के कारण यह अब तक लंबित है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 10 सीटें गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं। लंबे समय से अल्पसंख्यक समाज इन सीटों को बढ़ाने की मांग कर रहा है। 2009 में पाकिस्तान की सरकार ने 11 अगस्त को अल्पसंख्यक दिवस के रूप में घोषित किया था।

जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा, इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

नई दिल्ली इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के बयान का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जवाब मांगा है। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “सुप्रीम कोर्ट ने समाचार पत्रों में छापे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश शेखर कुमार यादव के भाषण का संज्ञान लिया है। उच्च न्यायालय से ब्योरा मंगवाया गया है। मामला विचाराधीन है। वीएचपी के कार्यक्रम में दिया था भाषण आठ दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना है। एक दिन बाद न्यायाधीश एक वीडियो सामने आया। शाहबानो केस का किया जिक्र जस्टिस शेखर यादव ने कहा कि जब देश और संविधान एक हैं तो कानून एक क्यों नहीं है? अपने भाषण में जस्टिस यादव ने शाहबानो केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीन तलाक गलत है। मगर उस समय की सरकार को झुकना पड़ा।

आरक्षण की मांग को लेकर कर्नाटक में लिंगायत समुदाय ने की मांग, विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने किया लाठीचार्ज

बेंगलुरु कर्नाटक के बेलगावी में लिंगायतों के सबसे बड़े उप-संप्रदाय पंचमसाली समुदाय आरक्षण की मांग पर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मंगलवार को उनका आंदोलन तब हिंसक हो गया, जब इस समुदाय के धार्मिक प्रमुख बसवजय मृत्युंजय स्वामीजी के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर विधान सौध (विधानसभा) की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। सोमवार से ही विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी थी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे विधान सौध का घेराव करेंगे। आज जब प्रदर्शनकारी इसी मंशा से विधान सभा की ओर बढ़ने लगे और बैरिकेडिंग तोड़ी तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए उन पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने इस दौरान भाजपा के कई सांसदों और मृत्युंजय स्वामीजी के साथ-साथ उनके कई समर्थकों को ऐहतियातन हिरासत में लिया है। इस घटना के बाद सड़क पर जूते बिखरे पड़े मिले। लाठीचार्ज से पहले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बहस भी हुई। बता दें कि स्वामी ने मंगलवार को बेलगावी में ट्रैक्टर रैली की योजना बनाई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी और शहर में ट्रैक्टरों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। दरअसल, कुदाल संगम के पंचमसाली गुरु पीठ के पुजारी दिसंबर 2012 से ही पंचमसाली समुदाय को अन्य पिछड़ी जातियों की 2ए श्रेणी के अंतर्गत लाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव डाल रहे हैं। यह समुदाय फिलहाल 3बी श्रेणी के अंतर्गत आता है और सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में इसे पांच प्रतिशत आरक्षण मिलता है। उनकी मांगें अगर पूरी हो जाती हैं तो समुदाय को 15 प्रतिशत आरक्षण मिल सकेगा। लिंगायतों को कर्नाटक में सबसे बड़ा जाति समूह माना जाता है और यह राज्य की आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा है। यह सब अनौपचारिक अनुमानों के आधार पर कहा जाता है क्योंकि इस दावे का साबित करने के लिए कोई अनुभवजन्य डेटा उपलब्ध नहीं है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने संत से मुलाकात की और उनके संघर्ष को समर्थन दिया। विजयेंद्र ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने स्वामी को बताया कि जब उनके पिता बी एस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री थे, तो पंचमसाली समुदाय को 3बी के तहत आरक्षण दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि भाजपा इस संघर्ष का समर्थन नहीं करती है क्योंकि येदियुरप्पा इसके विरोध में हैं, जो गलत है और सच्चाई से कोसों दूर है।

श्री माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए भक्तों की सहूलियत के लिए रोप-वे की सुविधा जल्द मिलने जा रही

जम्मू-कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए खुशी भरी खबर सामने आई है। 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक भारी संख्या में भक्त माता के दरबार पहुंचते हैं। इसी बीच साल के आखिर तक भक्तों की सहूलियत के लिए रोप-वे की सुविधा मिलने जा रही है। वहीं जल्द ही माता के भक्तों को भवन पर पहली बार यज्ञ और फैमिली रूम्स की सुविधा भी मिलने जा रही है। बता दें कटरा से भवन तक रोप-वे से लोगों का सफर आसान हो जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सीईओ ने बताया की 2025 के लिए पाइपलाइन में कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।  परिवार के कमरों के साथ नया वैष्णवी भवन, ऑल वेदर क्यू कंप्लेक्स जल्द ही तैयार हो जाएगा, जिससे यहां आने वाले भक्तों को काफी सुविधा मिलेगी। इसी के साथ नए साल पर माता के दरबार में भारी संख्या में भक्तों के आने को लेकर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि श्री माता वैष्णो देवी के दरबार हर साल लाखों भक्त दर्शने के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ों और बादलों के बीच स्थित माता वैष्णो देवी का दरबार बेहद खास माना जाता है। वैष्णो देवी मंदिर तक की यात्रा को कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाता है। वैष्णो देवी दरबार जम्मू-कश्मीर स्थित त्रिकूट पर्वत पर एक गुफा में है, जहां तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की मुश्किल चढ़ाई करनी पड़ती है। ये यात्रा भले ही कठिन है, लेकिन यहां का दृश्य बेहद अलौकिक है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 

3 करोड़ की डिमांड के चलते पत्नी के हैरेसमेंट से परेशान इंजीनियर ने सुसाइड लिख किया फांसी लगाकर सुसाइड

बेंगलुरु बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले यूपी के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया. उसने अपने पीछे 24 पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदारों पर हैरेसमेंट का आरोप लगाया है. उन्होंने पत्नी पर आरोप लगाया है कि उसने मेरे खिलाफ कई केस दर्ज कराए हैं और अब तीन करोड़ रुपये की डिमांड कर रही है. अतुल सुभाष बेंगलुरु सिटी में महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में डीजीएम के पद पर काम कर रहे थे.  बेंगलुरु पुलिस ने बताया कि यह घटना मंजूनाथ लेआउट इलाके की है, जो मराठाहल्ली पुलिस स्टेशन के इलाके का है. एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि यूपी के रहने वाले अतुल सुभाष नाम के शख्स का अपनी पत्नी के साथ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था. पत्नी ने उसके खिलाफ यूपी में केस भी दर्ज कराया था. अपने बेडरूम में सीलिंग फैन से लगाई थी फांसी जानकारी के मुताबिक, पुलिस को 9 दिसंबर की सुबह छह बजे एक कॉल आया, जिसमें सुसाइड करने की जानकारी दी गई. जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो घर अंदर से बंद मिला. स्थानीय लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया तो पता चला कि 34 वर्षीय अतुल सुभाष ने नायलॉन की रस्सी का इस्तेमाल करके बेडरूम में लगे सीलिंग फैन से लटककर फांसी लगा ली थी. मृतक के भाई ने क्या बताया? इस घटना की जानकारी यूपी में रहने वाले उनके परिवार को दी गई, जिसके बाद उनके भाई विकास कुमार घटनास्थल पर पहुंचे. विकास कुमार ने बताया कि अतुल की पत्नी, उसकी मां, उसके भाई और उसके चाचा ने झूठे मामलों में उसे फंसाया था और इन मामलों के लिए 3 करोड़ रुपये की मांग की थी. इससे अतुल सुभाष को काफी डिप्रेशन में था, जिसकी वजह से उसने अपनी जान ले ली. पीड़ित परिवार की तहरीर पर मराठाहल्ली स्टेशन में बीएनएस अधिनियम की धारा 108 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है और जांच जारी है. पुलिस ने क्या बताया? अधिकारी ने बताया कि उसने कई लोगों को ईमेल के जरिए अपना सुसाइड नोट भी भेजा और उसे एक एनजीओ के व्हाट्सएप ग्रुप के साथ भी साझा किया, जिससे वह जुड़ा था. उसने मैसेज में लिखा, “सर, ये मैसेज गुड बाय बोलने के लिए है. हो सके तो मेरी फैमिली की मदद कीजिएगा. अभी तक के साथ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.” इसमें उन्होंने अपने द्वारा बनाए गए वीडियो और सुसाइड नोट का लिंक भी भेज दिया था. पुलिस के मुताबिक, सुभाष ने अपने घर में एक तख्ती लटका रखी थी, जिस पर लिखा था, ‘न्याय मिलना बाकी है.’ सुसाइड से पहले अतुल सुभाष ने अलमारी पर महत्वपूर्ण डिटेल चिपकाई. जिसमें सुसाइड नोट, गाड़ी की चाबियां और उसके द्वारा किए गए सभी काम, जो अभी बाकी हैं, उनकी जानकारी थी.

संसद में सत्ता और विपक्ष दोनों के सदस्य हंगामा करने लगे हंगामा बढ़ने पर कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित हुई

नई दिल्ली संसद का उच्च सदन कहे जाने वाली राज्यसभा में मंगलवार को हंगामे के कारण कोई कामकाज नहीं हो सका और सभापति ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सुबह भी इसी कारण से कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों में स्थगित कर दी गई थी। दोपहर 12 बजे कार्यवाही शुरू होने पर भी सत्ता और विपक्ष दोनों के सदस्य हंगामा करने लगे। शोर शराबे में कुछ भी सुना नहीं जा रहा था। इस बीच सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि मीडिया में देश के एक राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता और जार्ज सोरेस को लेकर रिपोर्ट आई है। साठगांठ को लेकर मीडिया में आ रही रिपोर्टों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया जा रहा है। इसी बीच हंगामा बढ़ने पर सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सुबह में विधायी कामकाज शुरू होते ही सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के कुछ सदस्यों के शोर शराबे के कारण सभापति को सदन की कार्यवाही कुछ ही मिनटों बाद 12:00 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इसके कारण इस सप्ताह लगातार दूसरे दिन कोई कामकाज नहीं हो सका।  

तिरुनेलवेली से चेन्नई एगमोर जाने वाली वंदे भारत को मिल रहे बंपर यात्री, छोटी पड़ रही ट्रेन, बोगियों को दोगने करने की तैयारी

नई दिल्ली वंदे भारत ट्रेनों को अपग्रेड करने का काम जारी है। खबरें हैं कि जल्द ही स्लीपर ट्रेन पटरियों पर उतरने वाली है। इसी बीच खबरें हैं कि तिरुनेलवेली से चेन्नई एगमोर जाने वाली वंदे भारत की डिमांड इस कदर है कि रेलवे अब बोगियों को दोगने करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, अब तक इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मदुरई रेलवे मंडल ने 8 बोगियों वाली तिरुनेलवेली-चेन्नई वंदे भारत एक्सप्रेस को 16 कार रैक में बदलने का प्रस्ताव दिया है। खबर है कि क्षेत्र में यात्रियों के बीच इस ट्रेन की खासी डिमांड है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फिलहाल प्रस्ताव को मुख्यालय भेजा गया है और हामी की उम्मीद की जा रही है। पीएम मोदी ने 24 सितंबर 2023 को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। खास बात है कि यह दक्षिण तमिलनाडु के खाते में आई पहली वंदे भारत ट्रेन थी। इसके बाद 31 अगस्त 2024 को मदुरई-बेंगलुरु-मदुरई और नगरकोल-चेन्नई एगमोर-नगरकोल वंदे भारत की शुरुआत हुई थी। इनमें से सबसे ज्यादा यात्री तिरुनेलवेली वंदे भारत को मिल रहे हैं। अखबार के अनुसार, यात्री बताते हैं कि इस ट्रेन का समय बहुत अच्छा है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे तिरुनेलवेली से चलती है और दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर चेन्नई एगमोर स्टेशन पहुंचती है। सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर मदुरई और 9 बजकर 50 मिनट पर त्रिची पहुंचने के कारण यह और सुविधाजनक हो जाती है। लौटते समय ट्रेन चेन्नई एगमोर से 2 बजकर 50 मिनट पर चलती है और रात 10 बजकर 40 मिनट पर तिरुनेलवेली पहुंचती है। रिपोर्ट के मुताबिक, तिरुनेलवेली जिला यात्री संघ ने भी एक प्रस्ताव पास कर कोच बढ़ाने की मांग की है। अखबार से बातचीत में मदुरई मंडल रेल प्रबंधक शरद श्रीवास्तव ने कहा है कि मंडल की तरफ से भी प्रस्ताव भेजा गया है। इस संबंध में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से पूछा किआखिर फ्री की रेवड़ी कब तक बांटी जाएगी? रोजगार के अवसर बनाने की जरूरत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  सरकारों की ओर से फ्री में दी जा रही सुविधाओं को लेकर सवाल उठाया है. कोर्ट ने पूछा कि आखिर फ्री की रेवड़ी कब तक बांटी जाएगी? कोर्ट ने कहा कि कोविड महामारी के बाद से मुफ्त राशन प्राप्त कर रहे प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर बनाने की जरूरत है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने उस वक्त हैरानी जताई जब केंद्र ने अदालत को बताया कि 81 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत मुफ्त या सब्सिडी वाला राशन दिया जा रहा है. इसपर बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘इसका मतलब है कि केवल टैक्सपेयर्स ही बाकी हैं.’ एनजीओ की ओर से दायर एक मामले में पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उन प्रवासी मजदूरों को मुफ्त राशन  मिलना चाहिए जो “ई-श्रमिक” पोर्टल पर पंजीकृत हैं. इसपर बेंच ने कहा, ‘फ्रीबीज़ कब तक दिए जाएंगे? क्यों न हम इन प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर, रोजगार और क्षमता निर्माण पर काम करें?’ वकील भूषण ने कहा कि अदालत ने समय-समय पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड जारी किया जाए ताकि वे केंद्र द्वारा प्रदान किए गए मुफ्त राशन का लाभ उठा सकें. उन्होंने कहा कि हाल ही में दिए गए आदेश में यह कहा गया है कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं, लेकिन वे “ई-श्रमिक” पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें केंद्र द्वारा मुफ्त राशन दिया जाएगा. कोर्ट ने क्या कहा… जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘यह समस्या है. जैसे ही हम राज्यों को आदेश देंगे कि वे सभी प्रवासी मजदूरों को मुफ्त राशन दें, कोई भी यहां नहीं दिखाई देगा. वे भाग जाएंगे. राज्यों को यह पता है कि यह जिम्मेदारी केंद्र की है, इसीलिए वे राशन कार्ड जारी कर सकते हैं.’ भूषण ने कहा कि यदि 2021 की जनगणना की जाती, तो प्रवासी मजदूरों की संख्या में वृद्धि होती, क्योंकि केंद्र वर्तमान में 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर है. इसपर बेंच ने कहा, “हम केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद नहीं पैदा करें, क्योंकि ऐसा करने से स्थिति बहुत कठिन हो जाएगी.”  

देश में 994 संपत्तियों पर वक्फ का अवैध कब्ज़ा, केंद्र ने संसद में दी राज्यों सहित पूरी डिटेल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में वक्फ संपत्तियों पर 994 अवैध कब्जों की जानकारी मिली है। इनमें सबसे ज्यादा 734 संपत्तियां तमिलनाडु में हैं। यह जानकारी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने दी। वक्फ अधिनियम के तहत देश में 872,352 स्थायी और 16,713 अस्थायी वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। तमिलनाडु में सबसे ज्यादा अवैध कब्जे संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 994 अवैध कब्जों में तमिलनाडु में 734, आंध्र प्रदेश में 152, पंजाब में 63, उत्तराखंड में 11 और जम्मू-कश्मीर में 10 संपत्तियां शामिल हैं। 2019 के बाद वक्फ बोर्ड को जमीन नहीं मिली केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया कि 2019 के बाद केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड को कोई जमीन नहीं दी है। राज्य सरकारों द्वारा दी गई जमीन का डेटा भी उपलब्ध नहीं है। विवादित वक्फ संपत्तियों पर जानकारी मांगी पिछले हफ्ते, जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर विवादित वक्फ संपत्तियों का ब्योरा देने को कहा है।  

PM मोदी ने एस.एम. कृष्णा के निधन पर जताया दुख

बेंगलुरु एस.एम. कृष्णा का राजनीतिक सफर लगभग 60 साल लंबा रहा। 1962 में अमेरिका से लौटने के बाद उन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा। उनकी सेवाओं के लिए 2020 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। कृष्णा ने 2017 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा। हालांकि, भाजपा में शामिल होने के बाद वह राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। उन्हें खास तौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के लिए याद किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने एस.एम. कृष्णा के निधन पर जताया दुख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के निधन पर शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने उनकी सराहना करते हुए उन्हें एक उल्लेखनीय नेता बताया जो कर्नाटक में ढांचागत विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जाने जाते हैं। पूर्व विदेश मंत्री और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सोमनहल्ली मल्लैया कृष्णा का मंगलवार तड़के बेंगलुरू स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे और उनका उम्र संबंधी बीमारियों का इलाज चल रहा था। अपनी बौद्धिक क्षमता और प्रशासनिक कौशल के लिए जाने जाने वाले एस एम कृष्णा का राजनीतिक करियर पांच दशक से भी ज्यादा समय तक शानदार रहा। वह एक पाठक और विचारक भी थे एक एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “एस.एम. कृष्णा एक असाधारण नेता थे, जिनकी प्रशंसा हर वर्ग के लोग करते थे। उन्होंने हमेशा दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास किया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल खासकर बुनियादी ढांचे के विकास पर उनके ध्यान के लिए उन्हें याद किया जाता है। वह एक पाठक और विचारक भी थे।” पीएम मोदी ने कहा-उनके निधन से मुझे गहरा दुख हुआ उन्होंने एक्स पर आगे लिखा कि पिछले कुछ वर्षों में मुझे एसएम कृष्णा जी के साथ बातचीत करने के कई अवसर मिले हैं, और मैं उन बातचीत को हमेशा याद रखूंगा। उनके निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति। कृष्णा अपने समय के सबसे सफल नेताओं में से एक थे 1 मई, 1932 को कर्नाटक के मद्दुर में जन्मे कृष्णा ने मैसूर के महाराजा कॉलेज और बेंगलुरु के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की, उसके बाद टेक्सास के सदर्न मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी और वाशिंगटन डीसी के जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से एडवांस डिग्री हासिल की। ​​प्रतिष्ठित फुलब्राइट स्कॉलरशिप प्राप्तकर्ता कृष्णा अपने समय के सबसे सफल नेताओं में से एक थे। उन्होंने 1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, जिसके दौरान उन्होंने बेंगलुरू को वैश्विक आईटी हब में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूपीए सरकार के तहत 2009 से 2012 तक विदेश मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने एक प्रतिष्ठित राजनेता के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल (2004-2008) और कर्नाटक विधानसभा का अध्यक्ष (1989-1993) पद भी संभाला। 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन की थी कांग्रेस के दिग्गज रहे कृष्णा ने वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन कर ली। अपनी सेवानिवृत्ति तक कर्नाटक की राजनीति में मार्गदर्शक बने रहे। उनके योगदान के सम्मान में, उन्हें 2023 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। कृष्णा की सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता और कर्नाटक के लिए उनके दृष्टिकोण ने राज्य के शासन और विकास पर एक अमिट छाप छोड़ी। सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद भी, कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत के साथ उनका जुड़ाव मजबूत रहा। मुख्यमंत्री के रूप में कृष्णा ने कर्नाटक, खासतौर पर बेंगलुरु, को आईटी सेक्टर का बड़ा केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से बेंगलुरु को एक वैश्विक आईटी हब के रूप में पहचान मिली। उनके कार्यकाल में कई चुनौतियां भी आईं, जैसे वीरप्पन द्वारा डॉ. राजकुमार का अपहरण और कावेरी जल विवाद के कारण राज्य में हिंसक प्रदर्शन। एस.एम. कृष्णा को उनकी दूरदर्शिता और विकास कार्यों के लिए हमेशा याद किया जाएगा, खासकर बेंगलुरु और कर्नाटक में आईटी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए।

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