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बीजेपी नेता वैशाली डालमिया के घर गए धमाका, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल

कोलकाता बीजेपी नेता वैशाली डालमिया के घर के सामने बम धमाका हुआ है. देर रात अचानक बम की आवाज से इलाका दहल उठा, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया है, सूचना मिलने के बाद ठाकुरपुकुर थाने की पुलिस मौके पर गयी. बताया जा रहा है कि शनिवार रात करीब 12 बजे कुछ बदमाशों ने अचानक बीजेपी नेता बैसाखी डालमिया के घर के गेट के सामने बम फेंक दिया. तेज आवाज से क्षेत्रवासी भयभीत हो गए। कई लोगों को लगा कि किसी घर में रसोई गैस का सिलेंडर फट गया है ,एक पड़ोसी के मुताबिक, “मैं रात को सोने जा रहा थी. तभी ज़ोर की आवाज़ आई. ऐसा लगा जैसे किसी घर में गैस सिलेंडर फट गया हो. फिर मैंने बाहर आकर देखा तो लोगों की बड़ी भीड़ थी.” ठाकुरपुकुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके से बम की सुतली और पत्थर के टुकड़े बरामद किए हैं. इस संबंध में स्थानीय निवासियों से पूछताछ की जा रही है. हालांकि, पुलिस को अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस घटना को किसने अंजाम दिया। अपराधियों की तलाश के लिए इलाके के सीसीटीवी की जांच की जा रही है. पता चला है कि बीजेपी नेता अब ठाकुरपुकुर पुलिस स्टेशन के पास एक घर में रहती हैं. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस घटना की वजह क्या है. अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि घटना में कोई घायल हुआ है या नहीं। बीती रात की घटना के बाद रविवार सुबह से ही पूरे इलाके में तनाव का माहौल है. इस बीच, सुरक्षा कारणों से पूरे इलाके में ठाकुरपुकुर थाने की बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

इल्तिजा मुफ्ती ने हिंदुत्व को एक ‘बीमारी’ बताया, जिसके बाद भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक भड़क गए

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने ‘हिंदुत्व’ का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इल्तिजा मुफ्ती ने हिंदुत्व को एक ‘बीमारी’ बताया, जिसके बाद भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक भड़क गए। उन्होंने रविवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए मुफ्ती परिवार पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बीमारी तो खुद मुफ्ती परिवार है, जो जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लिए बीमारी है। अगर हिंदुत्व इनको बीमारी लगती है, तो हिंदुत्व से दूर रहना चाहिए और टिप्पणी करने से बचना चाहिए। लेकिन, बीमारी ने इन्हें जकड़ लिया तो ये नहीं बच पाएंगे। दरअसल, इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें एक धर्म के नाम पर कुछ नाबालिग लड़के बच्चों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे। इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा, ”भगवान राम को अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए और असहाय होकर देखना चाहिए क्योंकि नाबालिग मुस्लिम लड़कों को केवल इसलिए चप्पलों से पीटा जाता है, क्योंकि वे उनका नाम जपने से इनकार करते हैं। हिंदुत्व एक ऐसी बीमारी है, जिसने लाखों भारतीयों को प्रभावित किया है और भगवान के नाम को कलंकित किया है।” इसके अलावा भाजपा नेता अजय आलोक ने किसान आंदोलन को लेकर पंजाब सरकार और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को भी घेरा। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन पंजाब सरकार की शह पर ये अरविंद कपटीवाल के दिमाग से अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को ब्लैकमेल करने का तरीका है। सरवन सिंह पंढेर को जनता का कितना सपोर्ट है ये हमने हरियाणा विधानसभा चुनाव में देख लिया। ये कोई किसान नहीं हैं, ये अंशाति फैला रहे हैं। हाईवे जामकर लाखों लोगों का जीवन तहस-नहस कर दिया। ये पंजाब सरकार की शह पर हो रहा है, जो शर्मनाक है। भाजपा नेता अजय आलोक ने इंडी अलायंस में खींचतान को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये इंडी ब्लॉक नहीं था, सिर्फ घमंडियों का एक समूह है, जो अपने-अपने घमंड में जीता है। हर कोई नेता बनना चाहता है। ये लोग आखिर क्या करेंगे? न तो ये सत्ता में हैं। जिन-जिन प्रदेशों में इनकी सरकारें है, वहां पर बुरा हाल कर रखा है। इंडी गठबंधन वाले राहुल गांधी को कभी नेता नहीं मानते थे। ये सब चलता रहेगा। भानुमति का ये कुनबा आपस में सिर फोड़ेगा।

अब असम के श्रीभूमि जिले में एक मंदिर का निर्माण कार्य बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के हस्तक्षेप के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया

ढाका हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर उतारू बांग्लादेश की हिमाकत दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। अब असम के श्रीभूमि जिले में एक मंदिर का निर्माण कार्य बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बांग्लादेशी सैनिक) के हस्तक्षेप के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हालांकि, श्रीभूमि जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि यह केवल भ्रम की स्थिति थी, और चर्चा के बाद इसे सुलझा लिया गया। श्रीभूमि के जिला आयुक्त प्रदीप कुमार द्विवेदी ने एचटी को बताया कि भ्रम की वजह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मंदिर के पुनर्निर्माण स्थल के पास एक काले रंग का प्लास्टिक कवर था। उन्होंने कहा, “सीमा के पास मनसा मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा था और श्रमिकों ने वहां एक छोटा सा तम्बू बनाया, जिससे बीजीबी के जवान वहां आए। बीजीबी के हस्तक्षेप के कारण, निर्माण कुछ समय के लिए रोक दिया गया और शाम को फ्लैग-मीटिंग के बाद भ्रम दूर हो गया।” श्रीभूमि जिला (पूर्व में करीमगंज) बांग्लादेश के साथ लगभग 95 किलोमीटर की सीमा साझा करता है और इसमें से लगभग 40 किलोमीटर नदी की सीमा है, जिसमें श्रीभूमि शहर के पास का एक बड़ा क्षेत्र शामिल है। गुरुवार दोपहर को, बांग्लादेश के सिलहट डिवीजन से बीजीबी की एक टीम कथित तौर पर नदी की सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में आ गई, जहां निर्माण कार्य हो रहा था। उन्होंने बीएसएफ को एक पत्र भी लिखा और श्रमिकों से अपनी गतिविधियां बंद करने को कहा। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कोई असामान्य प्रयास नहीं था और दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल एक-दूसरे से बात करते रहते हैं। उन्होंने कहा, “नदी यहां की सीमा है, इसलिए इसका आधा हिस्सा बीजीबी और आधा हिस्सा हमारे द्वारा कवर किया गया है। जब भी हमें कुछ असामान्य दिखाई देता है, हम एक-दूसरे के पक्ष के बारे में पूछताछ करते रहते हैं। वे भारतीय क्षेत्र में निर्माण के बारे में बात करना चाहते थे और हमने चर्चा करके भ्रम को दूर कर दिया।” अधिकारी ने कहा कि वे फ्लैग मीटिंग के संकेत दिखाने के बाद कुशियारा नदी के बीच में गए और बीजीबी ने इसका जवाब दिया, वहीं इस मामले पर चर्चा हुई। श्रीभूमि जिला प्रशासन में असम पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि मंदिर कुशियारा नदी के किनारे स्थित है और इसके पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने 3 लाख रुपये की राशि मंजूर की है। श्रीभूमि जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पार्थ प्रतिम दास ने कहा कि मामले के बारे में कुछ अधूरी जानकारी साझा की गई थी। उन्होंने कहा, “ये चर्चाएं बहुत आम हैं। इस बारे में कुछ अधूरी जानकारी साझा की गई थी, लेकिन अब सब ठीक है।” इस सप्ताह की शुरुआत में, असम की बराक घाटी के हजारों स्थानीय लोग बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित हमलों के विरोध में श्रीभूमि में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एकत्र हुए। विरोध प्रदर्शन के दौरान, एक बिंदु पर पुलिस और बीएसएफ पर हमला किया गया और उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम सरदार पटेल की आत्मा को संतोष प्रदान करते हैं, जो अधूरे संकल्प थे, उन्हें मोदी ने पूरा किया: अमित शाह

जोधपुर जोधपुर दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम सरदार पटेल की आत्मा को संतोष प्रदान करते हैं। जो अधूरे संकल्प थे, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया है। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने सरदार पटेल के योगदान को दबाने का प्रयास किया, लेकिन अब उन्हें उचित सम्मान मिला है। सरदार पटेल को भारत रत्न से सम्मानित करने और उनकी जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने के फैसले ने उनके योगदान को नई पहचान दी है। सरदार पटेल के अधूरे संकल्प हुए पूरे गृह मंत्री ने धारा 370 और 35ए के हटने, कॉमन सिविल कोड लाने और ट्रिपल तलाक को समाप्त करने जैसे कदमों को सरदार पटेल के सपनों को पूरा करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के संकल्पों को पूरा करने में मोदी सरकार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल का योगदान शाह ने सरदार पटेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके बिना भारत का वर्तमान स्वरूप असंभव था। उन्होंने रियासतों को एकीकृत कर भारत को मजबूत किया। जोधपुर एयरबेस और अन्य राष्ट्रीय परियोजनाओं में उनकी भूमिका को याद करते हुए शाह ने कहा कि सरदार पटेल को कांग्रेस ने कभी उचित सम्मान नहीं दिया, लेकिन मोदी सरकार ने “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” बनाकर उनकी विरासत को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा कल, राहुल नार्वेकर ने भरा नामांकन

मुंबई भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 9 दिसंबर (सोमवार) को होगा। वहीं, नामांकन की प्रक्रिया 8 दिसंबर (रविवार) से शुरू हो चुकी है। हालांकि, विधानसभा में महायुति के संख्या बल को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुनाव होगा। राहुल नार्वेकर ने कहा कि मुझे पार्टी की तरफ से जो जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मैं आश्वस्त करता हूं कि उसका निष्ठापूर्वक निर्वहन करूंगा। उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर जो भी फैसले लिए जाएंगे, वो मुझे सहर्ष स्वीकार होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताते हुए कई मौके दिए और इस बार भी मुझे जो मौका दिया जाएगा, मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं उसी के मुताबिक काम करूंगा। बता दें कि राहुल नार्वेकर महाराष्ट्र की कोलाबा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने शनिवार को विधानसभा में पद की शपथ ली। महायुति की ढाई साल की सरकार में भी वह विधानसभा स्पीकर चुने गए थे। राहुल नार्वेकर कोलाबा में बड़े मार्जिन से जीते हैं। उन्हें कांग्रेस के हीरा नावजी देवासी के 32,504 वोटों की तुलना में 81,085 वोट मिले, जबकि 2019 में उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेता भाई जगताप को हराया था। नार्वेकर को 57,420 और भाई जगताप को 41,225 वोट मिले थे। राहुल नार्वेकर ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत शिवसेना से की थी। इसके बाद वह 2014 में शिवसेना छोड़कर एनसीपी में शामिल हो गए थे। जून 2016 में वह विधानसभा पार्षद निर्वाचित हुए थे। उन्हें गवर्नर ने मनोनीत किया था। इसके बाद 2019 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। वहीं, 2022 में महायुति की सरकार आने के बाद भाजपा ने उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष भी बनाया था।

महाराष्ट्र विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के 105 विधायकों ने शपथ ली, कल किया था इंकार

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत कल हुई। आज सत्र के दूसरे दिन विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सदस्यों ने विधायक के रूप में शपथ ली। सत्र के पहले दिन (शनिवार) राज्य के सीएम देंवेद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने विधायक पद की शपथ ली थी। महाराष्ट्र विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन रविवार को विपक्ष के 105 विधायकों ने शपथ ली। इन सभी ने EVM के मुद्दे पर 7 दिसंबर को शपथ लेने से इनकार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया था। कांग्रेस के नाना पटोले, विजय वडेट्टीवार और अमित देशमुख, NCP-SP नेता जितेंद्र अव्हाड, शिवसेना UBT के आदित्य ठाकरे ने सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही शपथ ली। शनिवार को 173 विधायकों ने शपथ ली थी। इनमें समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी और रईस शेख भी शामिल रहे। अब बाकी बचे 9 विधायक सोमवार को शपथ लेंगे। इधर, राहुल नार्वेकर ने आज स्पीकर पद के लिए नामांकन भर दिया है। कोलाबा सीट से विधायक नार्वेकर का निर्विरोध चुना जाना तय है क्योंकि किसी और उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। शपथ ग्रहण से पहले विपक्ष के नेताओं ने CM फडणवीस से मुलाकात की। ये सभी विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के पद की मांग को लेकर पहुंचे थे। जानिए मारकडवाडी विवाद, जिसकी वजह से EVM पर विपक्ष सवाल उठा रहा मारकरवाडी के लोगों ने 3 दिसंबर को बैलेट पेपर से मॉक पोलिंग रखी थी, लेकिन प्रशासन ने इसे रोक दिया था। मारकरवाडी के लोगों ने 3 दिसंबर को बैलेट पेपर से मॉक पोलिंग रखी थी, लेकिन प्रशासन ने इसे रोक दिया था। 23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आया था। सोलापुर जिले की मालसिरस विधानसभा सीट से NCP (शरद) उम्मीदवार उत्तमराव जानकर ने जीत हासिल की थी। उन्होंने बीजेपी के राम सातपुते को हराया था। रिजल्ट के बाद मालसिरस विधानसभा के मारकडवाडी गांव के लोगों ने दावा किया था कि गांव के ज्यादातर लोगों ने NCP प्रत्याशी को वोट दिए थे, लेकिन EVM के आंकड़े के मुताबिक बीजेपी प्रत्याशी को 1003 वोट मिले हैं और NCP प्रत्याशी को 843 वोट। ये गलत है। गांववालों का दावा है कि बीजेपी प्रत्याशी को 100-150 वोट से ज्यादा नहीं मिल सकते हैं। गांववालों ने खुद के खर्चे पर स्थानीय प्रशासन से बैलट पेपर पर दोबारा मतदान कराने की अपील की थी, लेकन प्रशासन से इसे खारिज कर दिया था। इसी के बाद EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए आज गांववालों ने खुद बैलट पेपर पर मतदान का कार्यक्रम आयोजित किया। 3 दिसंबर को सारी तैयारी की गई थी। पोलिंग बूथ तक बनाया गया था, लेकिन प्रशासन ने बैलेट पेपर से ग्रामीणों की तरफ से वोटिंग को रोक दिया था। 17 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। विपक्ष के किसी भी दल के पास 10% सीटें नहीं, नेता विपक्ष पर संशय महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग हुई थी। 23 नवंबर को रिजल्ट आया। महायुति को 230 सीटें मिलीं। इसमें भाजपा को 132, शिवसेना को 57 और NCP के 41 विधायक जीते। वहीं महाविकास अघाड़ी (MVA) को 46 और अन्य को 12 सीटें मिलीं। MVA में शिवसेना (UBT) 20, कांग्रेस 16 और शरद पवार की NCP को 10 सीटों पर जीत मिली। बहुमत का आंकड़ा 145 है। नेता विपक्ष पर दावा करने के लिए पार्टी के पास 10% सीटों का होना जरूरी है। 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में इस पद पर दावा करने के लिए 29 सीटों की जरूरत है, जो किसी भी विपक्षी पार्टी के पास नहीं हैं। ऐसे में विधानसभा में कोई भी मुख्य विपक्षी दल और उसका नेता नहीं होगा।

किसानों की 300 एकड़ जमीन पर वक्फ बोर्ड ने ठोका दावा, 103 लोगों को भेजा नोटिस

महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के खिलाफ लगातार जबरदस्ती हिंदुओं की जमीनों पर कब्जा की शिकायतें आती रही है। इसे लेकर मोदी सरकार वक्फ संशोधन विधेयक लेकर आई है। इसपर बनी एक कमेटी इसमें सुधार पर चर्चा कर रही है। इसी बीच महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड का एक काला कारनामा सामने आया है। वक्फ बोर्ड ने किसानों की 300 एकड़ जमीन पर दावा ठोका है। इसे लेकर 103 लोगों को नोटिस भेजा है। लातूर जिले के 100 से अधिक किसानों ने शनिवार को दावा किया कि वक्फ बोर्ड उनकी उस जमीन हड़पने का प्रयास कर रहा है, जिस पर वे कई पीढ़ियों से खेती करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह दावा छत्रपति संभाजीनगर स्थित महाराष्ट्र राज्य वक्फ अधिकरण में दायर किया गया है और कुल 300 एकड़ जमीन रखने वाले 103 किसानों को नोटिस जारी किए गए है। किसान तुकाराम कनवटे ने कहा, “ये जमीनें पीढ़ियों से हमें विरासत में मिली हैं। ये वक्फ संपत्ति नहीं है। हम चाहते हैं कि महाराष्ट्र सरकार हमें न्याय दे। इस मामले पर अदालत में दो सुनवाई हो चुकी हैं और अगली सुनवाई 20 दिसंबर को है। मोदी सरकार ने पेश किया संशोधन विधेयक बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने इस साल 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश किया था, ताकि वक्फ बोर्ड के कामकाज को सुव्यवस्थित किया जा सके। इसकी संपत्तियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया है। देश में कुल 32 वक्फ बोर्ड हैं, जिनमें कुछ राज्यों जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग शिया और सुन्नी बोर्ड हैं। जबकि कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में अभी तक वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है। इन बोर्डों का समन्वय केंद्रीय वक्फ काउंसिल करती है, जो अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। तमिलनाडु में 1500 साल पुराने मंदिर समेत 369 एकड़ संपत्ति को हड़पने रची थी साजिश बता दें कि वक्फ बोर्ड की जबरदस्ती जमीन कब्जा करने का यह कोई पहला मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले भी देश के कई राज्य़ों में अनगिनत बार बोर्ड के खिलाफ शिकायतें मिल चुकी है। वर्ष 2022 में तो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली  के तिरुचेंथुरई गांव मे स्थित 1500 साल पुराने मंदिर के साथ ही पूरे गांव को ही हड़पने के लिए दावा ठोक दिया था। इसकी जानकारी संसद भवन में खुद अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने दी थी।  किरण रिजिजू ने बताया कि, हिंदू आबादी वाले इस पूरे गांव को ही वक्फ बोर्ड ने वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया था। जबकि, ये गांव 1500 साल पुराना है। सबसे बड़ी बात कि इस हिंदू आबादी वाले गांव में मुस्लिम आबादी का इतिहास ही नहीं रहा है। मंदिर और उसके आसपास मंदिर की 369 एकड़ संपत्ति है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फैशन शो में बिखेरा जलवा, ऐरी सिल्क जैकेट पहनकर किया रैंप वॉक

नई दिल्ली दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अष्टलक्ष्मी महोत्सव में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग ही रूप देखने को मिला। महोत्सव में हुए फैशन शो में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रैंप वॉक किया। सिंधिया जैसे ही ऐरी सिल्क जैकेट पहनकर रैंप वॉक करने उतरे तो देखने वाले लोग दंग रह गए। केंद्रीय मंत्री ऐसे-ऐसे पोज दे रहे थे, जैसे कि प्रोफेशनल मॉडल हो। उनके इस टैलेंट को देखकर हर कोई दंग रह गया। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सुकांत मजूमदार ने भी रैंप वॉक किया। दरअसल अष्टलक्ष्मी महोत्सव में कारीगरों की प्रदर्शनी, राज्य-विशिष्ट मंडप समेत कई कार्यक्रम होते हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा में आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना है। बता दें कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को अक्सर ‘अष्टलक्ष्मी’ या समृद्धि के आठ रूप भी कहा जाता है। अष्टलक्ष्मी महोत्सव पूर्वोत्तर क्षेत्र के जीवंत वस्त्र उद्योग, हस्तशिल्प और अद्वितीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का अभूतपूर्व मंच है। महोत्सव में इन राज्यों के भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों को दिखाया जा रहा है। महोत्सव में गोलमेज सम्मेलन का भी आयोजन अष्टलक्ष्मी महोत्सव में विशेष निवेशक गोलमेज सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसमें राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों, उद्यमियों, व्यापार जगत की हस्तियों और निवेशकों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संवाद को बढ़ावा, निवेश के अवसरों की खोज और पूर्वोत्तर भारत के लिए अभिनव सहयोग को बढ़ावा देना है। पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन यह फैशन शो तीन दिवसीय अष्टलक्ष्मी महोत्सव का हिस्सा था, जो पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सेलिब्रेट करता है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र के कपड़ा उद्योग, कारीगरी और अद्वितीय भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों को प्रदर्शित करना है। इसमें फैशन शो में क्षेत्रीय शैलियों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर फैशन केंद्र में रहा। क्या है अष्टलक्ष्मी महोत्सव अष्टलक्ष्मी महोत्सव में कारीगरों की प्रदर्शनी, राज्य-विशिष्ट मंडप, तकनीकी सत्र और निवेशक सम्मेलन सहित कई कार्यक्रम शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा, कृषि उत्पाद और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम को ‘अष्टलक्ष्मी’ या समृद्धि के आठ रूप कहा जाता है। ये भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यह महोत्सव जीवंत संगीत प्रदर्शनों और स्वदेशी व्यंजनों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करता है। संस्कृति, रचनात्मकता और आर्थिक अवसरों के अपने अनूठे मिश्रण के साथ, अष्टलक्ष्मी महोत्सव पूर्वोत्तर भारत के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम बनने के लिए तैयार है।

गुजरात कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ‘शक से परे मामले को साबित नहीं कर सका, पूर्व IPS संजीव भट्ट को मिली बड़ी राहत

पोरबंदर गुजरात की एक अदालत से पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को बड़ी राहत मिली है। पोरबंदर की एक अदालत ने 1997 के हिरासत में यातना देने के मामले में उन्हें बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ‘शक से परे मामले को साबित नहीं कर सका।’ एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मुकेश पंड्या ने पोरबंदर के तत्कालीन पुलिस सुपरिटेंडेंट (एसपी) भट्ट को उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत दर्ज मामले में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। आरोपी का कबूलनामा हासिल करने के लिए गंभीर चोट पहुंचाने और अन्य प्रावधानों के तहत पूर्व आईपीएस के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। भट्ट को इससे पहले जामनगर में 1990 में हिरासत में हुई मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा पालनपुर में राजस्थान के एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स रखने के 1996 के मामले में 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह वर्तमान में राजकोट सेंट्रल जेल में बंद है। वहीं 1997 के मामले में अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ‘शक से परे मामले को साबित नहीं कर सका’ कि शिकायतकर्ता को अपराध कबूल करने के लिए मजबूर किया गया। उसे खतरनाक हथियारों और धमकियों का उपयोग करके उसे स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया गया था। कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि आरोपी, जो उस समय अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा एक लोक सेवक था, के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी इस मामले में नहीं ली गई थी। भट्ट और कांस्टेबल वजुभाई चाऊ, जिनके खिलाफ उनकी मृत्यु के बाद मामला समाप्त कर दिया गया था, पर भारतीय दंड संहिता की धारा 330 (स्वीकारोक्ति करवाने के लिए चोट पहुंचाना) और 324 (खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना) के तहत आरोप लगाए गए थे। यह आरोप नारन जाधव नामक व्यक्ति ने लगाए थे। उसका कहना था कि आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1987 (टाडा) और शस्त्र अधिनियम के मामले में पुलिस हिरासत में उसे शारीरिक और मानसिक यातना देकर कबूलनामा लिया गया था। 6 जुलाई, 1997 को मजिस्ट्रेट अदालत में जाधव की शिकायत पर अदालत के निर्देश के बाद, 15 अप्रैल, 2013 को पोरबंदर शहर बी-डिवीजन पुलिस स्टेशन में भट्ट और चाऊ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जाधव 1994 के हथियार लैंडिंग मामले के 22 आरोपियों में से एक था।

फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 13 लोगों की सोने की चेन, नकदी और अन्य कीमती सामान चोरी, पुलिस में शिकायत दर्ज

मुंबई महाराष्ट्र में जब नई सरकार का शपथ ग्रहण का कार्यक्रम चल रहा था, तब चोरों ने हाथ साफ करने का मौका नहीं छोड़ा। समारोह के दौरान 13 लोगों की सोने की चेन, नकदी और अन्य कीमती सामान खो गई। लोग शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे। इन घटनाओं में करीब 12.4 लाख का सामान चोरी हुआ है। आपको बता दें कि 7 दिसंबर को आजाद मैदान में यह समारोह आयोजित किया गया था। इसमें देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। इस कार्यक्रम में 50,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे। उनमें कई फिल्मी सितारे और बड़े रैंक के अधिकारी भी थे। पुलिस के अनुसार, कई उपस्थित लोग चोरी की शिकायत लेकर थाने पहुंचे। अब तक 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। ये चोरी की घटनाएं शपथ ग्रहण समारोह के दौरान के अव्यवस्था और भीड़-भाड़ के कारण हुईं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब और शिकायतें आ रही हैं और मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जा रही है। इस घटनाक्रम में शामिल एक पीड़ित 64 वर्षीय शिवाजी गावली थे, जिन्होंने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ समारोह में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, “जब मैं गेट नंबर 2 से बाहर निकल रहा था तब जगह बहुत भीड़-भाड़ वाली थी। बाहर आने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरी 30 ग्राम सोने की चेन गायब है। मैंने काफी खोजबीन की लेकिन बाद में पता चला कि किसी ने चोरी कर ली थी।” इसी तरह के अन्य मामलों में 50 साल के जयदेवी उपाध्याय की 20 ग्राम सोने की चेन चोरी हो गई, संतोष लछके की 17 ग्राम के सोने की चेन चोरी हो गई। इसके अलावा विलास चौहान की 20 ग्राम चेन की चेन और मोहन कामत की 35 ग्राम की चेन चोरी हो गई थी। इसके अलावा नकदी चोरी के मामले भी सामने आए। आनंद कोली की 20,000 और नितिन काले से 57,000 रुपये की चोरी की गई। इस समारोह में बॉलीवुड सितारे शाहरुख खान, सलमान खान, रणबीर कपूर और रणवीर सिंह सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हुई थीं। हालांकि भीड़-भाड़ के कारण चोरों ने इसका फायदा उठाया और चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने बताया कि इस तरह की चोरी की घटनाएं सार्वजनिक कार्यक्रमों, संगीत समारोहों, त्योहारों और राजनीतिक रैलियों में आम हो गई हैं। यहां तक कि ड्यूटी पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने भी अपनी बैग चोरी होने की शिकायत की है। पुलिस चोरी की घटनाओं के आरोपियों को पकड़ने और चोरी गए सामान को बरामद करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि वे भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अपने सामान को सुरक्षित रखें और सतर्क रहें।

बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही ज्यादती पर भारत के मुस्लिम उलेमाओं ने अपने गुस्से का किया इजहार, दी बड़ी चेतावनी

मुंबई बांग्लादेश इन दिनों हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर सुर्खियों में है और इस्लामी कट्टरपंथी लगातार अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहें। ऐसा शायद ही कोई दिन बीत रहा है जब वहां से हिंदुओं पर हमले और मंदिरों को तोड़े जाने की खबरें न आ रही हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही ज्यादती पर भारत के मुस्लिम उलेमाओं ने अपने गुस्से का इजहार किया है। मुंबई की हांडी वाली मस्जिद में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले के मुद्दे पर आल इंडिया सुन्नी जमीयत उल्मा, रजा अकादमी और जमीयत उल्मा ए अहले सुन्नत ने संयुक्त रूप से उलेमाओं की आपात बैठक बुलाई, जिसमें स्थानीय उलेमा और शेखों ने हिस्सा लिया। ‘हम सड़कों पर उतरने के लिए तैयार’ बैठक की अध्यक्षता करते हुए रजा अकादमी के संस्थापक और प्रमुख हाजी मुहम्मद सईद नूरी ने कहा, ‘अत्याचार और ज़्यादती किसी भी देश में हो, वह न केवल दुखद, बल्कि निंदनीय है। अब जबकि बंग्लादेश, जो एक मुस्लिम बहुसंख्यक देश है, में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यह न केवल इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है, बल्कि मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। बंग्लादेश सरकार को अपने देश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने और उनके मंदिरों की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता, तो भारत के उलेमा ए सुन्नत बंग्लादेश के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।’ हाजी नूरी ने बांग्लादेश को दी चेतावनी रजा अकादमी के संस्थापक ने आगे कहा, ‘शेख हसीना के शासन में जो अशांति फैली, उसमें बंगाली मुस्लिम युवाओं को मंदिरों की सुरक्षा करते देखा गया था। अब ऐसा क्या हुआ कि वहां अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं?’ उन्होंने अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूसुफ से अपील की कि वह दंगाइयों पर कड़ी नजर रखें और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करें। हाजी नूरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बंग्लादेश सरकार ने इस पर कार्रवाई नहीं की, तो रजा अकादमी और अन्य संगठनों के सहयोग से भारतभर में बंग्लादेश के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन होगा। ‘बंग्लादेश की छवि पर असर पड़ेगा’ बैठक में शामिल शहज़ादा शेर मिल्लत मौलाना इज्ज़ाज़ अहमद कश्मीरी ने कहा, ‘अगर बंग्लादेश में उत्पन्न हालात को जल्दी नहीं रोका गया, तो इसके कारण दुनिया भर में बंग्लादेश की छवि पर असर पड़ेगा और वह कई समस्याओं में उलझ जाएगा। मुहम्मद यूसुफ को चाहिए कि वह हिंदुओं पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकें और जिन संगठनों का इसमें हाथ हो, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सके। हम हर हाल में बंग्लादेशी अल्पसंख्यकों के साथ खड़े हैं। यदि हमले नहीं रुकते, तो हम दिल्ली में बंग्लादेशी दूतावास का घेराव करेंगे।’ ‘अत्याचार किसी भी रूप में अस्वीकार्य है’ मौलाना खलीलुर्रहमान नूरी ने कहा, ‘अत्याचार किसी भी रूप में अस्वीकार्य है, चाहे वह हमारे देश में हो, बंग्लादेश में हो या फिलिस्तीन में। हम हमेशा ज़ुल्म के खिलाफ और पीड़ितों के साथ खड़े रहेंगे। यह इस्लाम का सशक्त संदेश है, जिस पर अमल करके हम पीड़ितों की मदद कर सकते हैं।’ मौलाना अमानुल्ला रजा ने भारत सरकार से अपील की कि हिंदुओं पर हमले की घटनाओं की जांच कराए, ताकि वहां के हालात का फायदा हमारे देश के शरपसंद तत्व न उठा सकें। उन्होंने कहा, ‘भारत के सभी मुसलमान बंग्लादेशी अल्पसंख्यकों के साथ खड़े हैं और खड़े रहेंगे।’  

उधमपुर जिले में मंदिर के बाहर पुलिस वैन के अंदर पुलिसकर्मियों के गोलियों से छलनी शव मिले, आखिर कैसे हुई मौत?

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में रविवार तड़के दो पुलिसकर्मी मृत पाए गए और उनके शरीर पर गोलियां लगने के निशान मिले हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने संदेह जताया कि यह साथी पुलिसकर्मी की हत्या करने और आत्महत्या करने का मामला है। अधिकारियों ने बताया कि ये पुलिसकर्मी उत्तरी कश्मीर के सोपोर से जम्मू क्षेत्र में रियासी जिले के तलवाड़ा स्थित सहायक प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) जा रहे थे। उन्होंने बताया कि तड़के करीब साढ़े छह बजे जिला मुख्यालय स्थित काली माता मंदिर के बाहर पुलिस वैन के अंदर पुलिसकर्मियों के गोलियों से छलनी शव मिले। उन्होंने बताया कि पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचा और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘‘आज तड़के करीब साढ़े छह बजे रहमबल पुलिस थाने को सूचना मिली कि सोपोर से विभाग के एक वाहन में एसटीसी तलवाड़ा जा रहे दो पुलिसकर्मी गोलियां लगने से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह सहकर्मी को गोली मारकर आत्महत्या करने का मामला है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और जांच जारी है।’’ अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में वाहन चालक कांस्टेबल और एक हेड कांस्टेबल की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि वाहन में यात्रा कर रहा चयन ग्रेड का एक कांस्टेबल सुरक्षित बच गया और उससे पूछताछ की जा रही है।

सीरिया में विद्रोहियों ने कर दिया ऐलान, जेल से छोड़े जाएंगे कैदी, राष्ट्रपति बशर अल असद का शासन खत्म हुआ

दमिश्क सीरिया में विद्रोहियों ने ऐलान कर दिया है कि उन्होंने दमिश्क पर भी कब्जा कर लिया है और इसके साथ ही राष्ट्रपति बशर अल असद का शासन खत्म हो गया है। दमिश्क की सड़कों पर बहुत सारे लोग जश्न मनाते हुए नजर आए। विद्रोहियों ने कहा कि असद भाग गए हैं और अब दमिश्क स्वतंत्र हो गया है। वहीं टीवी पर जारी एक बयान में विद्रोहियों ने कहा कि जेलों में बंद सभी कैदियों को रिहा कर दिया जाए। दमिश्क की सड़कें अल्लाह-हु-अकबर के नारों और गोलियों की आवाज से गूंज उठीं। विद्रोही हवा में फायरिंग करके जश्न मनाते हुए नजर आए। कुछ विद्रोही असद के पिता की प्रतिमा पर चढ़ गए और इसके साथ तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा, हम इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। आज सीरिया में नए युग की शुरुआत हो रही है। बता दें कि विद्रोही गुट इस्लामिस्ट हयात तहरीर अल शाम (HTS) को तुर्की का समर्थन प्राप्त है। इसने दो दिन पहले ही सबसे पहले अलेप्पो पर कब्जा किया था। इसके बाद एक-एक कर शहरों को फतह करते हुए दमिश्क तक पहुंच गए। विद्रोही गुट ने टेलीग्राम पर कहा, 50 साल के अत्याचार के बाद बाथ का शासन खत्म हो गया। इन सालों में बहुत सारे लोगों को अपना घरबार छोड़ना पड़ा। हम ऐलान करते हैं कि काले दिन खत्म हो गए हैं और अब सीरिया में नए युग की शुरुआत हो रही है। प्रधानमंत्री मोहम्मद अल जलाली ने कहा कि सीरिया के लोग जिस सरकार को चुनेंगे, वह उसके साथ सहयोग करने को तैयार हैं। इसके अलावा सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स रामी अब्देल रहमान ने कहा, दमिश्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रास्ते सीरिया से निकल गए हैं। हालांकि एएफपी ने भी इस रिपोर्ट पर मुहर नहीं लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक एचटीएस ने कहा कि उनके लड़ाके जेलों से कैदियो को रिहा कर रहे हैं। इससे पहले विद्रोहियों ने होम्स पर कब्जा किया था। होम्स से दमिश्क की दूरी मात्र 140 किलोमीटर थी। सीरियाई विपक्षी युद्ध निगरानी संस्था के प्रमुख ने दावा किया कि असद देश छोड़कर किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। वहीं सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली ने एक वीडियो बयान जारी करके कहा कि वह शासन की बागडोर शांतिपूर्ण तरीके से विपक्ष को सौंपने को तैयार हैं। जलाली ने कहा, ‘‘ मैं अपने आवास पर ही हूं और कहीं नहीं गया हूं और यह इसलिए क्योंकि मुझे अपने देश से प्रेम है।’’ उन्होंने कहा कि वह सुबह काम करने के लिए अपने कार्यालय जाएंगे। उन्होंने सीरियाई नागरिकों से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने का आग्रह किया। यह 2018 के बाद पहली बार है जब विद्रोही दमिश्क के भीतर पहुंच गए हैं। सीरियाई सैनिकों ने वर्षों की घेराबंदी के बाद 2018 में राजधानी के बाहरी इलाकों पर फिर से कब्जा कर लिया था। सरकार समर्थक ‘शाम एफएम रेडियो’ ने बताया कि दमिश्क हवाई अड्डे को खाली करा लिया गया है और सभी उड़ानें रोक दी गई हैं। विद्रोहियों ने यह भी घोषणा की कि वे राजधानी के उत्तर में स्थित सैदनाया सैन्य जेल में घुस गए हैं और उन्होंने वहां से कैदियों को ‘‘मुक्त’’ करा लिया है। इससे एक रात पहले सरकारी बल सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स से पीछे हट गए जिसके बाद विपक्षी बलों ने इस पर कब्जा कर लिया। यह शहर, राजधानी दमिश्क और सीरिया के तटीय प्रांतों लताकिया और टारटस के बीच स्थित है। ये प्रांत सीरियाई नेता का गढ़ हैं और यहां रूस का नौसैनिक अड्डा भी है। इस बीच, सरकार ने असद के देश छोड़कर जाने की अफवाहों का खंडन किया। सरकार समर्थक ‘शाम एफएम’ ने विस्तृत जानकारी दिए बिना बताया कि सरकारी बलों ने सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर के बाहर मोर्चा संभाल लिया है। अब्दुर्रहमान ने कहा कि सीरियाई सैनिक और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के कर्मी शहर से हट गए हैं तथा विद्रोही शहर के कुछ हिस्सों में घुस गए हैं। सीरिया के विद्रोही गुट ‘जिहादी हयात तहरीर अल-शाम’ समूह (एचटीएस) प्रमुख अबू मोहम्मद अल-गोलानी ने बृहस्पतिवार को सीरिया से ‘सीएनएन’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा था कि इस हमले का उद्देश्य असद की सरकार को सत्ता से बेदखल करना है। सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गीर पेडरसन ने सीरिया में ‘‘व्यवस्थित ढंग से राजनीतिक बदलाव’’ सुनिश्चित करने के लिए जिनेवा में तत्काल वार्ता का आह्वान किया है। इस बीच, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका को सीरिया में सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह हमारी लड़ाई नहीं है।’’ अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने कैलिफोर्निया में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका सीरियाई गृहयुद्ध के बीच सैन्य हस्तक्षेप नहीं करेगा।’’

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए कोई सस्ता सौदा नहीं है, बोले- आपके पास है बेहतर डील तो बताएं

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों ने रूस का बहिष्कार किया, लेकिन भारत ने अपनी दोस्ती बरकरार रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूस की यात्रा की। साथ ही भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। इसको लेकर जब विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल पूछे गए तो उन्होंने करारा जवाब दिया। जयशंकर ने भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले का जोरदार बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विश्व के पास भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोई बेहतर विकल्प है। यह बयान उन्होंने 22वें दोहा फोरम के पैनल “नए युग में संघर्ष समाधान” पर चर्चा के दौरान दिया। जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल बाद दुनिया यह महसूस करने लगी है कि इस समस्या को केवल वार्ता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। रूस से तेल खरीदने पर भारत का रुख जयशंकर ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए कोई सस्ता सौदा नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “मैं तेल खरीदता हूं। यह सच है। यह सस्ता नहीं है। क्या आपके पास बेहतर डील है?” भारत ने हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जो भारत के कुल तेल आयात का 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की भूमिका जयशंकर ने कहा कि भारत का हमेशा मानना रहा है कि यह युद्ध युद्धभूमि पर नहीं सुलझ सकता है। उन्होंने कहा कि अंततः दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लौटना होगा और भारत इसे संभव बनाने के लिए हर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम मास्को जाते हैं तो राष्ट्रपति पुतिन से बात करते हैं। जब कीव जाते हैं तो राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मिलते हैं। हम दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के सूत्र तलाशने की कोशिश करते हैं।”हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कोई शांति योजना पेश नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम मध्यस्थता नहीं कर रहे। हम बातचीत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोनों पक्षों को पूरी पारदर्शिता से जानकारी दी जाए।” यूक्रेन और भारत के संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में कीव का दौरा किया और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मुलाकात की। पीएम मोदी ने भारत के शांति के पक्ष में रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। दूसरी ओर ज़ेलेंस्की ने भारत से यूक्रेन का समर्थन करने और संतुलनकारी रवैया न अपनाने की अपील की। दोहा फोरम में जयशंकर ने संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में यथार्थवाद की ओर रुख हो रहा है। उन्होंने कहा, “वार्ता की आवश्यकता को स्वीकार करना युद्ध जारी रखने की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो रहा है।”

इस्लामी आतंकी गुट के नेतृत्व वाले विद्रोहियों ने देश के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स पर भी कब्जे का दावा किया

दमिश्क सीरिया में विद्रोही गुट लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। इस्लामी आतंकी गुट हयात ताहिर अल-शम के नेतृत्व वाले विद्रोहियों ने देश के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स पर भी कब्जे का दावा किया है। अगर यह खबर सही निकली तो यह असद सरकार के लिए काफी मुश्किल पैदा करने वाली है। बता दें कि होम्स भौगोलिक रूप से काफी अहम है। यह राजधानी दमिश्क और तटीय प्रांतों, लताकिया और तार्तुस के बीच में स्थित है। वहीं, खबरों में यह भी बताया जा रहा है कि यह लोग राजधानी दमिश्क के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इससे पहले विद्रोहियों ने अलेप्पो और हमा पर भी कब्जा कर चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर सीरिया के सरकारी मीडिया ने सोशल मीडिया पर फैली उन अफवाहों का खंडन किया है कि राष्ट्रपति बसर अल असद देश छोड़कर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि वह राजधानी दमिश्क में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। विद्रोहियों के एक कमांडर हसन अब्दुल-गनी ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर पोस्ट किया कि विपक्षी बलों ने दमिश्क को घेरकर अपने अभियान के अंतिम चरण को अंजाम देना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि विद्रोही दक्षिणी सीरिया से दमिश्क की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं, आतंकी गुट एचटीएस के नेता अबू मोहम्मद अल जोलानी ने टेलीग्राम पर एक वीडियो जारी किया है। उसने कहा है कि हम होम्स शहर को आजाद कराने के निर्णायक क्षण की तरफ बढ़ रहे हैं। यह ऐतिहासिक होगा और सच व झूठ के बीच अंतर स्पष्ट करेगा। जोलानी ने विद्रोहियों से कहा है कि जो लोग भी आत्मसमर्पण कर दे रहे हैं, उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाया जाए। ऐसा पहली बार है जब विद्रोही 2018 के बाद से सीरियाई राजधानी के बाहरी इलाके में पहुंचे हैं। यह हमला शनिवार को सीरियाई सेना द्वारा दक्षिणी सीरिया के ज्यादातर हिस्सों से वापस चले जाने के बाद हुआ है। इसके चलते दो प्रांतीय राजधानियों समेत देश के अधिकांश क्षेत्र विपक्षी लड़ाकों के नियंत्रण में आ गए हैं। ब्रिटेन के ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ के प्रमुख रामी अब्दुर्रहमान ने कहा कि विद्रोही अब दमिश्क के उपनगरों मादामिया, जरामाना और दरया में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार को विपक्षी लड़ाके भी पूर्वी सीरिया से दमिश्क के उपनगर हरास्ता की ओर बढ़ रहे थे। इस बीच सीरियाई सेना शनिवार को दक्षिणी सीरिया के ज्यादातर भाग से हट गई, जिससे दो प्रांतीय राजधानियों समेत देश के अधिक क्षेत्र विपक्षी लड़ाकों के नियंत्रण में आ गए। सीरियाई सेना ने शनिवार को एक बयान में कहा कि उसने अपनी चौकियों पर आतंकवादियों द्वारा हमला किए जाने के बाद स्वेदा और दारारा में सैनिकों की पुनः तैनाती की है। विद्रोहियों ने सीरिया के चौथे सबसे बड़े शहर हमा पर कब्जा कर लिया था। सेना ने कहा था कि वह शहर के अंदर लड़ाई से बचने और नागरिकों की जान बचाने के लिए वहां से हट गयी है।

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