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यूक्रेन ने दावा किया है कि युद्ध में पहली बार रूस ने इंटर कॉ​न्टिनेंटल मिसाइलों से हमला किया

कीव रूस ने यूक्रेन पर एक इंटर कॉ​न्टिनेंटल यानी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल दागी है। यूक्रेन ने दावा किया है कि युद्ध में पहली बार रूस ने इंटर कॉ​न्टिनेंटल मिसाइलों से हमला किया है। जानकारी के मुताबिक, आज (21 नवंबर) की सुबह 5 से 7 बजे के बीच रूस की ओर से यह हमला किया गया। आशंका जताई जा रही है कि रूस ने RS-26 Rubezh मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इस मिसाइल की रेंज 5,800 किमी है। यूक्रेन की वायुसेना ने इस हमले की पुष्टि की है। इस मिसाइल के अलावा किंझल हापरसोनिक और केएच-101 क्रूज मिसाइलों से भी हमला किया गया है। यूक्रेन की इंटेलिजेंस ने किया था आगाह गौरतलब है कि 20 नवंबर को यूक्रेन की इंटेलिजेंस ने दावा किया था कि रूसी सेना इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल RS-26 Rubezh को दागने की तैयारी कर रही है।  हाल ही में रूस ने दावा किया था कि उसके हवाई डिफेंस सिस्टम ने दो ब्रिटिश स्टॉर्म शैडो मिसाइलों को मार गिराया है। निप्रो शहर को रूस ने बनाया निशाना रूस ने बीती रात यूक्रेनी शहर निप्रो (Dnipro) को निशाना बनाया है। क्रेन की वायुसेना ने बृहस्पतिवार को टेलीग्राम पर एक बयान में कहा गया कि रूस के अस्त्रखान क्षेत्र से यह मिसाइल दागी गई है। हाल ही में अमरेकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन को अमेरिका निर्मित लंबी दूरी की मिसाइलों के उपयोग को हरी झंडी दी थी। इसके बाद यूक्रेन ने रूस पर मिसाइलें दागी थी। माना जा रहा है यूक्रेन के हमले का रूस ने जवाब दिया है। कितना खतरनाक है ICBM? बता दें कि आईसीबीएम रणनीतिक हथियार हैं, जिन्हें परमाणु हथियार पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है और ये रूस के परमाणु निवारक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध छिड़ गया था। हाल ही में युद्द के 1000 दिन पूरे हो गए।

सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक मामले में कहा- आतंकवादी कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया था

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यासीन मलिक से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान निष्पक्ष सुनवाई की जरूरत पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आतंकवादी अजमल कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था। सीबीआई द्वारा एक आदेश के खिलाफ की गई अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। सीबीआई ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को 1989 में भारतीय वायुसेना के चार जवानों की हत्या से संबंधित मामले में जम्मू की एक अदालत में शारीरिक रूप से पेश करने के आदेश के खिलाफ अपील की थी। सीबीआई ने सुरक्षा का हवाला दिया था और यासीन मलिक को शारीरिक रूप से पेश करने के आदेश पर आपत्ति जताई थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ को बताया कि कश्मीरी अलगाववादी को सुनवाई के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल से जम्मू नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा, “गवाहों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है।” इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि यासीन मलिक से क्रॉस एग्जामिनेशन करने के लिए जेल में एक अस्थायी कोर्ट रूम बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, “हमारे देश में अजमल कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था। जेल में एक कोर्ट रूम बनाया जा सकता है और वहां यह किया जा सकता है।” इस पर तुषार मेहता ने दोहराया कि सीबीआई आतंकवाद के दोषी को जम्मू-कश्मीर में सुनवाई के लिए नहीं ले जाना चाहती है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यासीन मलिक मामूली आतंकवादी नहीं है और केंद्र उसके मामले में कानून के मुताबिक नहीं चल सकता। उन्होंने यासीन मलिक के पाकिस्तान की यात्रा और मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद से मुलाकात का भी हवाला दिया। क्या है मामला? जम्मू की एक विशेष अदालत ने दो मामलों में गवाहों से बातचीत के लिए यासीन मलिक को शारीरिक रूप से पेश होने का आदेश दिया था। इन मामलों में 1989 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण और चार भारतीय वायुसेना कर्मियों की हत्या शामिल है। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी जिसने पिछले साल अप्रैल में मामले में एक नोटिस जारी किया और निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी। गौरतलब है कि आतंकवाद के दोषी यासीन मलिक ने जेल अधिकारियों को सूचित किया था कि वह सुनवाई में शारीरिक रूप से शामिल होना चाहता है। जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान शारीरिक रूप से उपस्थित था। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने उस समय मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। पेशी के तुरंत बाद तुषार मेहता ने गृह सचिव अजय भल्ला को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि शीर्ष अदालत में यासीन मलिक की उपस्थिति सुरक्षा में एक गंभीर चूक थी।

बांग्लादेश में दुविधा में पड़ी यूनुस सरकार, छात्र नेता अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा ना लेने देने की वकालत कर रहे हैं

ढाका बांग्लादेश में समय से पहले चुनाव कराने के बढ़ते दबाव के बीच मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार चुनावों में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दुविधा में है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस साल जुलाई-अगस्त में हुए विद्रोह का नेतृत्व करने वाले छात्र नेता अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा ना लेने देने की वकालत कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगी इस तरह के प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं और देश की राजनीति में सभी दलों की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश में अवामी लीग की अनुपस्थिति में सबसे बड़ी पार्टी बीएनपी और उसके सहयोगी देश में जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव से पहले सभी राजनीतिक सुधार पूरे किए जाने चाहिए और राजनीति में अवामी लीग की भागीदारी की वैधता पर विचार किया जाना चाहिए। अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि इससे अंतरिम सरकार पर दबाव बना है जो इन मांगों को लेकर दुविधा में है। इंडिया टुडे ने बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के हवाले से बुधवार को बताया, “अवामी लीग एक राजनीतिक पार्टी है और लोग तय करेंगे कि वे चुनाव लड़ेंगे या नहीं।” उन्होंने आगे कहा, ” हालांकि जिन लोगों ने देश के नागरिकों की हत्या की और देश के धन को विदेश में लुटने दिया, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।” इस बीच बीएनपी की अध्यक्ष खालिदा जिया गुरुवार को सशस्त्र सेना दिवस के स्वागत समारोह में भाग लेने वाली हैं। फरवरी 2018 में जेल से जाने के बाद वह पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आएंगी।

कांग्रेस ने सरकार काे छात्रसंघ और निकाय चुनाव कराने में देरी काे लेकर घेरा

देहरादून. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने छात्र संघ, निकाय के साथ पंचायत चुनाव में हो रही देरी के लिए भाजपा सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा युवाओं को लेकर बात तो करती है लेकिन काम के नाम पर दूरी बना लेती है। गुरुवार काे कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा सरकार युवाओं की बात करती है लेकिन छात्रसंघ चुनाव कराने को तैयार नहीं है। निकाय और पंचायत चुनाव को जानबूझ कर टाल रही है। भाजपा सरकार को स्वयं पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा युवाओं की बात हर मंच पर करती है और जब उनके हित की बारी आती है तो चुप्पी साध लेती है। छात्रसंघ चुनाव को क्यों लटकाया जा रहा है समझ से परे है। ऐसे में युवाओं की विकास और युवा को राजनीति में लाने की बात बेमानी लगती है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कथनी और करनी में बहुत फर्क है। युवा भाजपा सरकार के चाल को समझ गए हैं।

देहरादून में यातायात नियमों में बदलाव, सिग्नल का समय बढ़ा

देहरादून. नगर के ओएनजीसी चौक में हाल ही में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब रात 12 बजे तक ट्रैफिक सिग्नल चालू रहेंगे। इसके अलावा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर प्रमुख चौक पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाएंगे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने गुरुवार काे बताया कि यातायात की सुरक्षा को देखते हुए अब रात 12 बजे तक ट्रैफिक सिग्नल चालू रहेंगे। साथ ही, प्रत्येक चौक पर स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं, ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके। उन्हाेंने कहा कि इन सुधारों से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क हादसों की संख्या को कम करने में मदद मिलेगी। दरअसल, ओएनजीसी चौक पर दर्दनाक सड़क हादसे से यातायात नियमों की खामियां सामने आई थीं। इस घटना के बाद दून पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए सिग्नल की समय सीमा को बढ़ा दिया है। अब रात 10 बजे के बजाय ट्रैफिक सिग्नल रात 12 बजे तक काम करेंगे। इसके अलावा, हर चौक-चौराहे पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाएंगे, जिससे तेज गति से चलने वाले वाहनों पर नियंत्रण पाया जा सके।

दो सत्रों में होगा टैट परीक्षा का आयोजन, 24 और 26 नवंबर को होगी परीक्षा

धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने शेष बचे चार विषयों की टेट परीक्षाओं का कार्यक्रम वीरवार को घोषित कर दिया है। तय कार्यक्रम के मुताबिक चार विषयों की टैट परीक्षाएं 24 और 26 नवंबर को दो सत्रों में आयोजित की जाएंगी। चार विषयों में सबसे पहले 24 नवंबर को टीजीटी नॉन मेडिकल टैट की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। यह परीक्षा सुबह के सत्र में 10:00 बजे से लेकर 12:30 तक आयोजित की जाएगी। उक्त परीक्षा के लिए 7176 अभ्यर्थी हैं जिनके लिए प्रदेश भर में 51 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसी दिन दोपहर बाद के सत्र में भाषा अध्यापक विषय की टैट परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। यह परीक्षा दोपहर बाद 2:00 बजे से लेकर 4:30 बजे तक आयोजित की जाएगी। उक्त परीक्षा के लिए 2508 अभ्यर्थी हैं जिनके लिए 41 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसी तरह 26 नवंबर को सुबह के सत्र में 10:00 बजे से लेकर 12:30 तक पंजाबी टैट परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इस परीक्षा के लिए 88 अभ्यर्थी हैं जिनके लिए एक परीक्षा केंद्र बनाया गया है। इसी दिन दोपहर बाद दूसरे सत्र में उर्दू विषय की टैट की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, जो दोपहर 2:00 से लेकर 4:30 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा में 12 अभ्यर्थी हैं जिनके लिए एक परीक्षा केंद्र बनाया गया है। बोर्ड के सचिव डॉ मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि उपरोक्त परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी अपने एडमिट कार्ड बोर्ड की वेबसाइट पर दर्शाए गए लिंक पर जाकर अपना आवेदन नंबर और जन्मतिथि डालकर प्राप्त कर सकते हैं।

रूस पर क्यों है यूरोप को शक, बढ़ते तनाव के बीच बाल्टिक सागर के अंदर इंटरनेट केबल के कटने की खबर आई

नई दिल्ली रूस और यूरोपीय देशों में बढ़ते तनाव के बीच बाल्टिक सागर के अंदर इंटरनेट केबल के कटने की खबर आई है जिससे यूरोप के देशों में सुगबुगाहट बढ़ गई है। दूरसंचार कंपनी टेलिया लिथुआनिया के अनुसार रविवार को लिथुआनिया और स्वीडन के बीच एक केबल काट दी गई। वहीं फिनलैंड की दूरसंचार कंपनी सिनिया ने बताया कि फिनलैंड और जर्मनी को जोड़ने वाली उसकी एक केबल भी सोमवार को बाधित हो गई है। गौरतलब है कि अटलांटिक महासागर के हिस्से के रूप में बाल्टिक सागर यूरोपीय देशों और रूस की सीमा से घिरा हुआ है। इससे पहले अमेरिका ने कुछ दिनों पहले ही यह चेतावनी दी थी कि रूस यूरोप के अहम समुद्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। सीएनएन ने स्वीडिश सूत्रों के हवाले से मंगलवार को बताया कि देश ने काटे गए केबलों पर कथित तौर पर की गई तोड़फोड़ की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। फिनलैंड भी मामले को लेकर सख्त है और जांच शुरू कर दी गई है। लिथुआनियाई मीडिया ने बताया कि जिस केबल को बाधित किया गया है वह लिथुआनिया की इंटरनेट क्षमता का लगभग एक तिहाई संभालती थी। उन्होंने कहा कि व्यवधान के बाद ट्रैफिक फिर से बहाल हो गया है। फिनलैंड, जर्मनी का आरोप इस बीच फिनलैंड और जर्मनी के विदेश मंत्रियों ने अपने देशों के बीच केबल के काटे जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है और इस घटना के हाइब्रिड युद्ध का हिस्सा होने की संभावना जताई है। बयान में कहा गया, “यह तथ्य कि इस तरह की घटना से जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का संदेह पैदा होता है। यह हमारे समय की अस्थिरता के बारे में बहुत कुछ कहता है। फिलहाल जांच चल रही है। यूरोप पर यूक्रेन का साथ देने के बदले में रूस आक्रामक युद्ध छेड़ सकता है। हमारे खिलाफ हाइब्रिड युद्ध का भी खतरा है।” अमेरिका का रुख शुरुआती जांच से परिचित अमेरिकी अधिकारियों ने मंगलवार को CNN को बताया कि अभी तक इस तरह की गतिविधि के कोई संकेत नहीं मिले हैं न ही समुद्र तल के बुनियादी ढांचे को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है। अमरीकी जांच अधिकारियों के मुताबिक यह संभवतः एक गुजरते जहाज से खींचे गए लंगर की वजह से हुआ था। खबरों की माने तो रूस हाल के महीनों में अंडर सी केबल में दिलचस्पी दिखा रहा है। रूस अपने तटों से दूर महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे के करीब गश्त भी कर रहा है। अमेरिका का मानना ​​है कि रूस अपनी गुप्त समुद्री यूनिट को मजबूत कर रहा है। हाइब्रिड युद्ध यूरोपीय सुरक्षा अधिकारी और विशेषज्ञ महीनों से चेतावनी दे रहे हैं कि रूस यूरोप के खिलाफ हाइब्रिड युद्ध छेड़ रहा है। किंग्स कॉलेज लंदन में रक्षा अध्ययन के एक वरिष्ठ प्रोफेसर रॉड थॉर्नटन ने कहा कि रूस नाटो के साथ पूर्ण युद्ध के विकल्प के रूप में इस तरह की तरकीबों का उपयोग कर रहा है जो रूस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। रूस नाटो को उकसा कर उसके सिद्धांत कि एक सदस्य देश के खिलाफ हमला पूरे गठबंधन के खिलाफ हमला है को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। थॉर्नटन ने कहा कि यह हमला उस समय हुआ है जब रूस यूक्रेन और पश्चिम देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

भाषा संस्थान की नई पहल, साहित्य और भाषाई धरोहर के संरक्षण के लिए तीन नई परियोजनाएं शुरू

देहरादून. उत्तराखण्ड भाषा संस्थान ने राज्य की साहित्यिक और भाषाई विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से तीन नई शोध परियोजनाओं का शुभारंभ किया है। इन परियोजनाओं को भाषा विभाग के मंत्री सुबोध उनियाल के अनुमोदन के बाद प्रारंभ किया गया है। यह प्रयास राज्य के साहित्य और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इस संबंध में भाषा विभाग के मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि इन परियोजनाओं की मुख्य विशेषताएं हैं। उत्तराखण्ड की उच्च हिमालयी एवं जनजातीय भाषाओं का संरक्षण व अध्ययन किया गया तो पता चला कि उत्तराखण्ड की उच्च हिमालयी क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों की विशिष्ट भाषाएं और बोलियां विलुप्ति के कगार पर हैं। इन भाषाओं के संरक्षण के लिए साहित्य, लोकगीत, परंपरा, उत्सव, खानपान और सांस्कृतिक विरासत का व्यापक अध्ययन किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से कुमाउंनी, गढ़वाली समेत अन्य बोली-भाषाओं को संरक्षित करने की ठोस योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड के मूर्धन्य साहित्यकार पं. गोविन्द बल्लभ पंत ने हिन्दी साहित्य को अद्वितीय योगदान दिया है। उनकी रचित ऐतिहासिक, पौराणिक और साहित्यिक कृतियों का समग्र संग्रह तैयार करने की योजना बनाई गई है। यह पहल उनके साहित्यिक योगदान को सहेजने और इसे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। भाषा विभाग मंत्री ने बताया कि राज्य के प्रारंभिक साहित्यकारों की धरोहर को बचाने के लिए यह परियोजना शुरू की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रतिष्ठित पत्रिकाओं (जैसे सरस्वती, चांद, माधुरी, धर्मयुग आदि) और देशभर के पुस्तकालयों में संरक्षित दुर्लभ साहित्य को खोजकर उसकी छाया प्रतियां एकत्रित की जाएंगी। इससे उत्तराखण्ड के साहित्यकारों की अप्रकाशित और भूली-बिसरी कृतियों को संरक्षित करने में सहायता मिलेगी। उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने की पहल भाषा संस्थान ने इन परियोजनाओं के लिए शोधकर्ताओं और साहित्यकारों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। संस्थान का उद्देश्य उत्तराखण्ड की भाषाई और साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करना और इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाना है। यह पहल न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने में सहायक होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगी।

PM Modi को Dominica के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया

नईदिल्ली पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) डोमिनिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी को कैरेबियाई देश डोमिनिका ने ‘द डोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति सिल्वेनी बर्टन (Sylvanie Burton) ने पीएम मोदी को इस सम्मान से नवाजा। डोमिनिका ने पीएम मोदी को कोविड काल में किए गए उनके कार्यों के लिए अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है। अवार्ड मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा, “डोमिनिका द्वारा सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं इसे भारत के 140 करोड़ लोगों को समर्पित करता हूं। कोविड-19 महामारी के दौरान फरवरी 2021 में पीएम ने डोमिनिका को कोरोना वैक्सीन एस्ट्राजेनेका की 70 हजार डोज की आपूर्ति की थी। पीएम की इसी उदारता को देखते हुए डोमिनिका की सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने का फैसला किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति बर्टन, आप मुझे यह पुरस्कार देने के लिए व्यक्तिगत रूप से गुयाना आई हैं। मैं इस विशेष भाव के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। भारत और डोमिनिका दो लोकतंत्र हैं। इसके साथ ही, हम पूरी दुनिया के लिए महिला सशक्तिकरण के आदर्श हैं, दोनों देशों में महिला राष्ट्रपति हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं। इसी तरह, राष्ट्रपति बर्टन भी डोमिनिका की पहली स्वदेशी राष्ट्रपति हैं। उन्होंने आगे कहा कि आप दोनों दुनिया की सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। भारत और डोमिनिका के बीच सदियों पुराने, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। 19वीं शताब्दी में, कई भारतीयों ने डोमिनिका को अपना घर बनाया। उनके द्वारा रखी गई नींव हमारे संबंधों को एक मजबूत आधार प्रदान करती है। प्रधानमंत्री के अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की कुल संख्या 19 पहुंची बता दें कि प्रधानमंत्री को गुयाना और बारबाडोस से भी टॉप अवार्ड मिलेंगे, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की कुल संख्या 19 हो जाएगी। गुयाना, प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ देगा, जबकि बारबाडोस उन्हें प्रतिष्ठित ‘ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस’ से सम्मानित करेगा। गुयाना दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी इसके अलावा दो दिवसीय गुयाना यात्रा में PM मोदी ने कैरेबियाई देशों के प्रतिनिधियों के साथ दूसरे इंडिया-कैरिकॉम समिट में भी हिस्सा लिया।समिट के इतर PM ने कैरेबियाई देशों के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय चर्चाएं की। गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान के अलावा PM मोदी ने डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट और सूरीनाम के राष्ट्रपति चान संतोखी से औपचारिक बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) गुयाना दौरे पर हैं. जॉर्जटाउन पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें उनके प्रभावशाली नेतृत्व और विकासशील दुनिया में योगदान के लिए ‘नेताओं के बीच चैंपियन’ कहा।

छापेमारी आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त की छापेमारी

बेंगलुरु कर्नाटक में लोकायुक्त ने गुरुवार को चार सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर रेड डाली। यह छापेमारी आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई है। अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायत के बाद लोकायुक्त ने यह कदम उठाया है। लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु, मांड्या और चिक्कबल्लापुर समेत 25 स्थानों पर यह छापेमारी हुई है। अधिकारियों ने खान और भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ भूविज्ञानी कृष्णावेनी एम सी, कावेरी नीरावरी निगम के सतही जल डेटा केंद्र के प्रबंध निदेशक महेश, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक एनके थिप्पेस्वामी और संयुक्त उत्पाद आयुक्त कार्यालय में उत्पाद अधीक्षक मोहन के. के ठिकानों पर रेड डाली। लोकायुक्त अधिकारी छापेमारी के दौरान प्राप्त हुए अहम दस्तावेज सहित अन्य संपत्तियों की गहनता से जांच कर रहे हैं। पिछले 10 दिनों में यह दूसरी छापेमारी है। पिछली छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए थे। 12 नवंबर को लोकायुक्त अधिकारी ने 9 सरकारी अधिकारियों के यहां छापेमारी की थी, जहां कई दस्तावेज भी बरामद हुए थे। उस वक्त छापेमारी के दौरान 22.5 करोड़ रुपये आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ था। लोकायुक्त अधिकारियों ने बेलगावी, हावेरी, दावणगेरे, कालाबुरागी, मैसूरु, रामनगर और धारवाड़ सहित 40 स्थानों पर रेड डाली थी। इससे पहले जुलाई में भी 56 ठिकानों पर लोकायुक्त द्वारा छापेमारी की गई थी। वो मामला भी आय से अधिक संपत्ति का था।  

अब प्रसिद्ध सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले रोट (प्रसाद) की गुणवत्ता पर उठे सवाल

हमीरपुर तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में मिलावट को लेकर विवाद के बाद अब कई मंदिरों के प्रसाद पर भक्तों की नजर टिकी हुई है। देश के प्रसिद्ध मंदिरों की संस्थाएं और ट्रस्ट इस मामले में अब सावधानी बरत रही हैं। इस सबके बीच हिमाचल के हमीरपुर के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठ रहा है। दरअसल हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले रोट (प्रसाद) की गुणवत्ता पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कंडाघाट लैब ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है। लैब द्वारा जांचे गए रोट(प्रसाद) के सैंपल के चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में रोट की गुणवत्ता स्वास्थ्य मानकों पर खरी नहीं उतरी है और इसे खाने के लिए सुरक्षित नहीं माना गया है। इससे पहले, सितंबर में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद (लड्डू) में हुई गड़बड़ी को लेकर उठे विवादों के बाद, लोगों ने अन्य मंदिरों में दिए जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए थे। इसके मद्देनजर, अक्टूबर में फूड एंड सेफ्टी विभाग की टीम ने मंदिर की कैंटीन और अन्य दुकानों में निरीक्षण कर रोट के सैंपल इकट्ठे किए थे। जांच रिपोर्ट में रोट के सैंपल फेल पाए गए हैं, जिससे मंदिर प्रशासन के लिए चुनौती पैदा हो गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त अनिल शर्मा ने कहा कि पिछले दिनों तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद (लड्डू) में मिलावट का मामला सामने आया था। उसी की तर्ज पर हमने कुछ मंदिरों से जांच के लिए सैंपल इकट्ठे कराए थे। दियोटसिद्ध में स्थित मंदिर से हमने रोट (प्रसाद) की गुणवत्ता के लिए सैंपल भरवाए थे। रोट (प्रसाद) की रिपोर्ट चौंकाने वाली आई है और यह स्वास्थ्य मानकों पर फेल हुई है। उसमें बासीपन रेंसिडिटी का मामला सामने आया है। इसमें आगे की कार्रवाई करेंगे। मंदिर में अन्य लोग जो रोट बनाते हैं, हम उनसे गुजारिश करेंगे वो इस पर ध्यान दें। विभाग इस पर कार्रवाई करेगा। बता दें कि सितंबर में आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में जो प्रसाद भक्तों को लड्डू के रूप में दिया जाता है, उसमें जानवरों की चर्बी और मछली तेल से बनाई जाने वाली घी का उपयोग करने की बात सामने आई थी। मिलावटी घी से बने प्रसाद के खुलासे ने पूरे देश के करोड़ों भक्तों की आस्था पर गहरी चोट पहुंचाई थी। इस बात के सामने आने के बाद से देशभर के साधु-संतों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मांग शुरू की थी।

7वें पेफी राष्ट्रीय पुरस्कार 24 नवंबर को शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रहे शिक्षकों को दिया जाएगा

नई दिल्ली शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले राष्ट्रीय पेफी अवार्ड की घोषणा की गयी है, इस बार यह राष्ट्रीय पुरस्कार 24 नवंबर को एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रहे 29 शिक्षकों को दिया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुनाल जी, अर्जुन अवार्डी एवं हॉकी के पूर्व खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद, खेलो इंडिया के हाई परफॉरमेंस मैनेजर और अर्जुन अवार्डी यशपाल सोलंकी, द्रोणाचार्य अवार्डी डॉ. ए. के. बंसल एवं विभिन्न खेल पुरस्कारों से पुरस्कृत वर्तमान एवं पूर्व खिलाड़ी उपस्थित रहेंगे। अवार्ड समिति के सचिव डॉ चेतन कुमार ने बताया कि पेफी के राष्ट्रीय पुरस्कार का यह सातवां संस्करण है। किसी भी देश के खेल भविष्य के लिए शारीरिक शिक्षकों का उत्कृष्ट स्तर प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है। बिना शारीरिक शिक्षकों के बेहतर खेल माहौल की कल्पना नहीं की जा सकती है। शारीरिक शिक्षकों को पेफी के माध्यम से बेहतर प्लेटफार्म प्रदान किया जा रहा है। अवार्ड कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार उप्पल ने बताया कि इस बार इमर्जिंग स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ द ईयर का अवार्ड चिराग चिकारा को दिया जा रहा है जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप कुश्ती में गोल्ड मेडल प्राप्त कर देश का नाम रोशन किया है। वहीं डॉ. जी. पी. गौतम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिल्ली इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन के पूर्व प्रोफ़ेसर डॉ. धनंजय शॉ और सर्वश्रेष्ठ शारीरिक शिक्षा शिक्षक पुरस्कार मध्य भारत से आशुतोष शर्मा, लेफ्टिनेंट डॉ. बृज किशोर प्रसाद (मध्य प्रदेश), उत्तर भारत से आशा दलाल, सुनीता रानी, रोहित कुमार प्रवीण कुमार (दिल्ली), दक्षिण भारत से लेफ्टिनेंट अनु डी. अलप्पट (केरल) एवं डॉ. श्रीनिवासा जी. एम. (कर्नाटक), पश्चिम भारत से डॉ. राजेंद्र कुमार सुखदेव देवकाते (महाराष्ट्र), पूर्व भारत से साहिनूर खान (पश्चिम बंगाल), अमलेंदु बाग (पश्चिम बंगाल) को दिया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ योग शिक्षक पुरस्कार, अल्का रहोरा (मध्य प्रदेश), डॉ. शुभांगी भीवाजी डामले (महाराष्ट्र), ग्रामीण क्षेत्रों में शारीरिक शिक्षा, फिटनेस और खेल के प्रचार हेतु डॉ. जयश्री आचार्य पुरस्कार डॉ. केशब चंद्र गोपे (पश्चिम बंगाल), डॉ. एम. रॉबसन युवा शोधकर्ता पुरस्कार पोली बोरा (असम), दिलप्रीत कौर (महाराष्ट्र), संजय कुमार एस. (तमिलनाडु), डॉ. अजमेर सिंह सर्वश्रेष्ठ कोच पुरस्कार (केवल ओलंपिक खेलों के लिए) डॉ. नीतू दत्ता (पश्चिम बंगाल), अशोक कुमार (उत्तर प्रदेश) ईश्वर भाटी (दिल्ली) और कुलदीप सिंह (हरियाणा), सर्वश्रेष्ठ अधिकारी/जज/रेफरी/अंपायर पुरस्कार (केवल ओलंपिक खेलों के लिए) रोहित कुमार (दिल्ली) इंद्रनील घोष (उत्तर प्रदेश) को दिया जाएगा. शारीरिक शिक्षा और खेलों में नेतृत्व व उत्कृष्टता के लिए कोमल और वी. के. पाहुजा पुरस्कार डॉ. अनिदेव सिंह (दिल्ली) और थॉमस एम. ए. (तेलंगाना), विशेष छात्रों को कोचिंग के लिए डॉ. राकेश गुप्ता सर्वश्रेष्ठ कोच पुरस्कार पराग अग्रवाल (उत्तर प्रदेश) डॉ. पी. एम. जोसेफ पुरस्कार: शारीरिक शिक्षा और खेल को बढ़ावा देने वाले सर्वश्रेष्ठ संस्थान धर्म समाज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (उत्तर प्रदेश) और अजम्प्शन कॉलेज ऑटोनोमस (केरल) को दिया जाएगा। इस अवसर पर एक दिवसीय स्पोर्ट्स इंजरी कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर सफदरजंग हॉस्पिटल, एमवे इंडिया और आई फाई पार्टनर के रूप में रहेंगे। इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव में स्पोर्ट्स इंजरी के विशेषज्ञ खेलों में लगने वाली चोटों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण, वायु प्रदूषण तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक होता

नई दिल्ली क्या आपको पता है कि दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण होता है? एक तरह से वायु प्रदूषण तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक होता है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में दुनियाभर में तंबाकू की वजह से अनुमानित 75 से 76 लाख मौतें हुई होंगीं. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 81 लाख मौतें. यानी, दुनिया में 12% मौतों का कारण जहरीली हवा है. वहीं, दुनियाभर में हर साल एक करोड़ से ज्यादा मौतें हाई ब्लडप्रेशर के कारण होती हैं. ये बातें इसलिए चिंता बढ़ाती हैं, क्योंकि राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 500 के करीब पहुंच गया है. यानी अब यहां AQI ‘गंभीर’ की श्रेणी में आ गया है. जब ये ‘गंभीर’ की श्रेणी में आ जाता है तो अच्छे-खासे तंदरुस्त लोग भी बीमार पड़ सकते हैं. ये रिपोर्ट बताती है कि सबसे बड़ा रिस्क PM2.5 है. PM2.5 का मतलब है 2.5 माइक्रोन का कण. ये बहुत ही महीन कण होता है. इसे ऐसे समझिए कि ये इंसान के बाल से भी 100 गुना ज्यादा पतला होता है. ये इतना छोटा है कि नाक और मुंह के जरिए हमारे शरीर में घुस जाता है. जैसे ही ये हमारे शरीर में आता है तो दिल और फेफड़ों को प्रभावित करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में PM2.5 के कारण 78 लाख मौतें हुई थीं. यानी, वायु प्रदूषण के कारण जितनी मौतें हुई थीं, उनमें से 96 फीसदी से ज्यादा की वजह यही कण था. इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण के कारण होने वाली 90 फीसदी से ज्यादा बीमारियों का कारण भी यही छोटा सा कण होता है. सबसे खतरनाक PM2.5 2024 की स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण जहरीली हवा ही थी. सबसे ज्यादा खतरा साउथ एशियाई और अफ्रीकी देशों पर है. रिपोर्ट से पता चलता है कि 81 लाख मौतों में से 58 फीसदी की वजह वातावरण में मौजूद प्रदूषण रहा. जबकि, 38 फीसदी मौतें घरों के अंदर मौजूद प्रदूषण की वजह से हुई थीं. चिंता बढ़ाने वाली बात ये है कि पांच साल से छोटे बच्चों की मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी वायु प्रदूषण ही है. इतने छोटे बच्चों की मौतों की सबसे बड़ी वजह है. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 2021 में पांच साल से छोटे 7 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी. इतना ही नहीं, साउथ एशिया और अफ्रीकी देशों में जन्म के बाद पहले महीने में होने वाली 30 फीसदी से ज्यादा मौतों का कारण भी जहरीली हवा ही है. भारत के लिए कितना बड़ा खतरा? एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हर साल तंबाकू की वजह से 10 लाख के आसपास लोग मारे जाते हैं. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 21 लाख लोग मारे गए थे. यानी, लगभग दोगुना. इस हिसाब से देखा जाए तो भारत में हर महीने औसतन 1.75 लाख और हर दिन 5,753 लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो जाती है. अकेले भारत में ही पांच साल से कम उम्र के 1.69 लाख बच्चों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो गई थी. ये आंकड़ा दुनिया में सबसे ज्यादा था. दूसरे नंबर पर नाइजीरिया था, जहां 1.14 लाख बच्चों की मौत हुई थी. पाकिस्तान में 68 हजार से ज्यादा बच्चे मारे गए थे. रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाले अस्थमा 5 से 14 साल की उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. 15 फरवरी 2013 को लंदन की रहने वालीं 9 साल की एला किस्सी-डेब्रा की मौत अस्थमा अटैक से हो गई थी. वो दुनिया की पहली शख्स हैं, जिनके डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह ‘वायु प्रदूषण’ दर्ज है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे जहरीली हवा साउथ एशियाई देशों में है. वायु प्रदूषण के कारण दुनिया में जितनी मौतें हुई थीं, उनमें आधी से ज्यादा सिर्फ भारत और चीन में हुई थी. चीन में 23 लाख तो भारत में 21 लाख लोगों की मौत का कारण वायु प्रदूषण था. हवा में मौजूद PM2.5 सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि इससे बेमौत ही लोग मारे जा रहे हैं और हार्ट डिसीज, लंग कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं. भारत में हर एक लाख आबादी में से 148 की मौत का कारण वायु प्रदूषण है. ये वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है. PM2.5 में नाइट्रेट और सल्फेट एसिड, केमिकल, मेटल और धूल-मिट्टी के कण होते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में काफी अंदर तक घुस सकते हैं और गंभीर रूप से बीमार कर सकते हैं. इस कारण दिल और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों की मौत भी हो सकती है. जबकि, स्वस्थ लोगों को इससे हार्ट अटैक, अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी हो सकती है. इसी साल जनवरी में एक स्टडी आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि दुनियाभर में PM2.5 की सबसे ज्यादा मात्रा भारत में है. वहीं, दिल्ली में इसकी मात्रा सबसे ज्यादा है. इस स्टडी में दावा किया गया था कि सर्दी के मौसम में भारत में घर के अंदर की हवा बाहर की हवा से 41% ज्यादा प्रदूषित होती है. हाल ही में साइंस जर्नल लैंसेट में एक स्टडी छपी थी. स्टडी में बताया गया था कि शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के खतरे को बढ़ा रहा है.

अमेरिका के टैरिफ शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद चीन ने भारत से नदीकियां बढ़ानी फिर की शुरू

नई दिल्ली जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीता है, तब से चीन का डर बढ़ता जा रहा है। चीन को सबसे ज्यादा डर कारोबार को लेकर है। माना जा रहा है कि जनवरी में राष्ट्रपति की कुर्सी संभालने के बाद ट्रंप चीन पर लगने वाला टैरिफ शुल्क बढ़ा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो पहले से ही धीमी आर्थिक गति की मार झेल रहे चीन के लिए यह बड़ा धक्का होगा। ट्रंप के इस कदम से बचने के लिए चीन ने हाल ही में एक और आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। इसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को गति देना था। लेकिन लगता है कि चीन के ये सारे आर्थिक पैकेज किसी काम के नहीं हैं। ट्रंप का दबाव कम करने के लिए चीन भारत की शरण में आ रहा है। इसके लिए वह भारत के साथ संबंध सुधारने पर लगा है। ढीले पड़ने लगे चीन के तेवर अमेरिका में आगामी ट्रंप प्रशासन का दबाव कम करने के लिए चीन अब भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। यह बात अमेरिका-भारत सामरिक एवं साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कही। ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान चीन से माल पर 60 फीसदी टैरिफ शुल्क और हर दूसरे अमेरिकी आयात पर 20 फीसदी तक के टैरिफ शुल्क का प्रस्ताव रखा था। मुकेश अघी ने कहा, ‘इसलिए हम ट्रंप प्रशासन के आने का प्रारंभिक प्रभाव देख रहे हैं, जिसने चीन पर भारत के साथ व्यवहार को आसान बनाने का दबाव बनाया है। इसलिए सीमा पर गश्त पर सहमति बनी है। सीधी उड़ानों पर सहमति बनी है।’ और नरम होगा ड्रैगन चीन के तेवर आने वाले समय में और ढीले पड़ते नजर आएंगे। अघी ने कहा कि ट्रंप की जीत का भारत-चीन संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आने वाले समय में चीन की ओर से कुछ और नरमी देखी जा सकती है। वहीं भारत की ओर से भी चीन के लोगों के लिए अधिक वीजा जारी होंगे। अमेरिका में चीन का कड़ा विरोध अघी ने कहा कि उन्होंने कहा कि अमेरिका में नया प्रशासन मैन्युफैक्चरिंग को चीन से दूर ले जाने और अमेरिका में ही रोजगार सृजन की योजना बना रहा है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में कांग्रेस की एक समिति ने सिफारिश की है कि चीन के साथ अपने व्यापार संबंधों को अमेरिका कड़ा करे। साथ ही करीब 25 साल पुराने उस फैसले को वापस लेने पर जोर दे जिसने चीन की तीव्र आर्थिक वृद्धि में मदद की थी और जिसे अब अमेरिका में कई लोग अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाला मानते हैं। इसलिए भारत के करीब आया चीन अमेरिका-चीन आर्थिक तथा सुरक्षा समीक्षा आयोग ने मंगलवार को कांग्रेस को भेजी अपनी नौ पन्नों की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार चीन के साथ स्थायी सामान्य व्यापार संबंधों को समाप्त करने का आह्वान किया। ट्रंप प्रशासन के तहत चीन के साथ व्यापार युद्ध के तेज होने के आसार हैं। वहीं चीन यह पहले ही भांप गया था कि अमेरिका में ट्रंप की सरकार बनने जा रही है। ऐसे में उसे लगने लगा था कि ट्रंप व्यापार में चीन का तवज्जो नहीं देंगे। ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद चीन ने भारत के साथ संबंध बेहतर करने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधरने के बाद चीन अपने व्यापार का बड़ा हिस्सा फिर से भारत के साथ बड़े स्तर पर शुरू कर सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार में आई कमी भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा रहा है। लेकिन जून 2020 को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद हालात बिगड़ गए थे। इसका व्यापारिक स्तर पर बड़ा प्रभाव पड़ा। दोनों देशों के बीच काफी दूरियां आ गई थीं। बढ़ गया भारत का व्यापार घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में चीन के साथ भारत का माल व्यापार घाटा 13 फीसदी बढ़ गया है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के संभावित बढ़ने से यह समस्या और बढ़ सकती है। चूंकि अमेरिका चीनी वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लगाता है, इसलिए चीन अपने अतिरिक्त उत्पादन को बेचने के लिए भारत सहित वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर सकता है। इससे भारतीय बाजार में चीनी वस्तुओं की बाढ़ आ सकती है, जिससे व्यापार घाटा और बढ़ सकता है।

मणिपुर सरकार ने हिंसा के चलते मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तीन दिन और निलंबित रखने का फैसला किया

मणिपुर मणिपुर सरकार ने हिंसा की हालिया घटनाओं के मद्देनजर सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवा का निलंबन बुधवार को तीन और दिन के लिए बढ़ा दिया। सरकारी आदेश में कहा गया है, “राज्य सरकार ने कानून और व्यवस्था की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के बाद मणिपुर के इं‍फाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, बिष्णुपुर, थौबल, काकचिंग, कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तीन दिन और निलंबित रखने का फैसला किया है।” मणिपुर सरकार ने 16 नवंबर को सात जिलों में मोबाइल ए‍वं ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं दो दिन के लिए निलंबित कर दी थीं, ताकि असामाजिक तत्व ऐसी सामग्री का प्रसार न कर सकें, जिससे कानून एवं व्यवस्था प्रभावित हो। सोमवार को मोबाइल और ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध दो दिन के लिए और बढ़ा दिया गया था। हालांकि, आम लोगों, स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न कार्यालयों को होने वाली दिक्कतों को देखते हुए मंगलवार को ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं सशर्त बहाल कर दी गई थीं।

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