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कंपनी ने मशहूर बार्बी डॉल के बॉक्स में पोर्न वेबसाइट का पता छाप दिया, कंपनी ने कर दिया कांड

वाशिंगटन बच्चों के लिए खिलौने बनाने वाली कंपनी मैटल ने बहुत बड़ी गलती कर दी। खबर है कि कंपनी ने मशहूर बार्बी डॉल के बॉक्स में पोर्न वेबसाइट का पता छाप दिया। हालांकि, कंपनी ने इस गलती के लिए माफी मांग ली है और ग्राहकों से पोर्न वेबसाइट को छिपाने या डॉल को फेंकने की सलाह दी है। कहा जा रहा है कि ऐसा डॉल के कुछ बॉक्स के साथ ही हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने गलती से बार्बी डॉल के कुछ बॉक्स पर QR कोड छाप दिए थे, जो पोर्न वेबसाइट से लिंक थे। कंपनी का कहना है कि परेशानी सिर्फ कुच डॉल्स के साथ ही थी और इससे निपटने के लिए सभी जरूरी कदम भी उठा लिए गए हैं। कंपनी ने ग्राहकों को भरोसा दिया है कि जल्द ही इन प्रोडक्ट्स को बाजार से हटा लिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने विकेड मूवी के प्रचार के लिए खास बार्बी डॉल तैयार की थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर जब कुछ यूजर्स ने देखा कि कुछ बॉक्स पर छपा हुआ क्यूआर कोड पोर्न वेबसाइट से लिंक है, तो यह मामला कंपनी के सामने आया। खबर है कि प्रिंटिंग की इस गलती से खासतौर पर ग्लिंडा और एल्फाबा डॉल प्रभालित हुए हैं। क्या बोली कंपनी कंपनी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण गलती करार दिया है। मैटल ने प्रभावित ग्राहकों को उनके कस्टमर केयर सर्विस से भी संपर्क साधने के लिए कहा है। कंपनी का बयान है, ‘हम इस दुर्भाग्यपूर्ण गलती के लिए माफी चाहते हैं और इसे सुधारने के लिए तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं। पैरेंट्स को सलाह दी जाती है कि गलती से छपी गलत वेबसाइट बच्चों के लिए ठीक नहीं है।’ कंपनी ने आगे कहा, ‘जिन ग्राहकों के पास प्रोडक्ट्स पहुंच चुके हैं, उन्हें इसकी पैकेजिंग खत्म करने या लिंक को छिपाने या आगे की जानकारी के लिए मैटल कस्टमर सर्विस से बात करने की सलाह दी जाती है।’

अगर कोई महिला किसी पुरुष के साथ कमरे में जाती है, तो मतलब यह नहीं कि महिला सेक्स के लिए तैयार है: बॉम्बे हाईकोर्ट

मुंबई बलात्कार से जुड़े एक केस में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि अगर कोई महिला किसी पुरुष के साथ होटल के कमरे में जाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसने यौन संबंध बनाने के लिए सहमति दे दी है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें आरोपी के खिलाफ रेप केस को बंद कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने क्या कहा जस्टिस भरत पी देशपांडे की बेंच ने कहा, ‘इस बात में कोई शक नहीं है कि यह दिखाने के लिए सामग्री है कि आरोपी और शिकायतकर्ता ने होटल रूम बुक किया था। हालांकि, इसे यौन संबंध बनाने के लिए पीड़िता की तरफ से सहमति देना नहीं माना जा सकता…। अगर यह मान भी लिया जाए कि पीड़िता आरोपी के साथ रूम में गई थी, लेकिन इसे किसी भी तरह से यौन संबंध के लिए उसकी सहमति नहीं माना जा सकता है।’ क्या था मामला मार्च 2020 में आरोपी गुलशेर अहमद ने कथित तौर पर विदेश में नौकरी की पेशकश की थी। कथित तौर पर उसने मीटिंग के बहाने से महिला को होटल के कमरे में बुला लिया। खास बात है कि महिला और पुरुष दोनों ने मिलकर रूम बुक किया था। बाद में पीड़िता ने आरोप लगाए कि कमरे में जाते ही आरोपी ने उसे मारने की धमकी दी और फिर रेप कर दिया। बार एंड बेंच के अनुसार, पीड़िता का कहना है कि आरोपी के बाथरूम जाने पर वह रूम से भाग गई और पुलिस को खबर कर दी। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। मामला जब ट्रायल कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने यह कहकर आरोपी को जाने दिया कि चूंकि महिला इच्छा से कमरे में गई थी, तो उसने सेक्स के लिए सहमति दे दी थी। अब हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज ने गलती की है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज ने पीड़िता के बगैर किसी विरोध के कमरे में जाने और रूम में जो हुआ, उसकी सहमति देने के दो अलग अलग पहलुओं को मिला दिया। कोर्ट ने यह भी पाया कि होटल के कर्मचारियों ने भी पूरी बात बताई है, जो पीड़िता के बयान से मिलती है। कोर्ट ने आरोपी के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि दोनों ने साथ लंच किया और महिला को रूम में जाने में भी कोई परेशानी नहीं थी तो इसका मतलब है कि वह सेक्स के लिए सहमत थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी के खिलाफ केस जारी रखा है।

हरियाणा सरकार देगी इन लोगों को पक्का मकान, बस करना होगा ये काम, जल्द मिलेगा अपना घर

हरियाणा हरियाणा में अपने खुद के पक्के मकान का सपना देख रहे गरीब परिवारों के लिए एक अच्छी खबर आई है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2024-25 के लिए नया लक्ष्य सामने आया है। फरीदाबाद सिटी घर घर कॉलोनी इस बार पिछले साल से 10 गुना ज्यादा लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल जहां इस योजना के तहत 7,746 पात्र लोगों ने घर बनाए थे, वहीं इस साल 69,325 लोगों को पक्के मकान की सौगात मिलेगी। सर्वे के बाद मिलेगा लाभ इस योजना के तहत पक्का मकान बनाने पर एक लाख 38 हजार रुपये का लाभ दिया जाता है। यह राशि सरकार तीन किस्तों में देती है।   उन लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा, जो पात्र थे, लेकिन अब मकान बना चुके हैं। योजना का लाभ देने के लिए जल्द ही टीमें गांव-गांव जाकर सर्वे करेंगी। महत्वपूर्ण नियम आयकर न चुकाता हो और उसकी मासिक आय 15 हजार रुपये से ज्यादा न हो। उपजाऊ भूमि 2 एकड़ से अधिक और बंजर भूमि 5 एकड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए। परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में कार्यरत नहीं होना चाहिए। परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर कोई फर्म पंजीकृत नहीं होनी चाहिए। घर में कोई भी कृषि उपकरण जैसे ट्रैक्टर और अन्य वाहन नहीं होना चाहिए। कोई भी तीन और चार पहिया वाहन नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2017-18 में पोर्टल खोला गया था। विभाग के अनुसार वर्ष 2017-18 के बाद आज तक भी पोर्टल दोबारा नहीं खोला गया है। उस समय पोर्टल पर आवेदन करने वालों को ही पात्र माना गया है और हर जिले में लक्ष्य दिया गया है।  

रूस ने की बड़ी तैयरी, यूक्रेनी सेना पर धावा बोल सकते हैं 50 हजार सैनिक

रूस रूसी सेना आने वाले दिनों में रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी ठिकानों पर बड़े हमले की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए उसने उत्तर कोरियाई सैनिकों को मिलाकर हजारों की सैन्य टुकड़ी इकट्ठा की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने गुरुवार को कहा था कि करीब 11,000 उत्तर कोरियाई सैनिक उस इलाके में हैं, जहां रूसी क्षेत्र में यूक्रेन की तीन महीने की सैन्य घुसपैठ रुकी हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 50 हजार रूसी और उत्तर कोरियाई सैनिक हमले में भाग लेने के लिए तैयार हैं। यूक्रेनी कमांडर ने सीएनएन को बताया कि उत्तर कोरियाई सैनिक कुर्स्क में सीधे युद्ध अभियान में भाग ले रहे हैं। वे रूस के पड़ोसी बेलगोरोड और रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में भी रक्षात्मक अभियानों का हिस्सा हैं। अब कुर्स्क में सीधे तौर पर वार ऑपरेशन की तैयारी है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने सहयोगी देशों से रूस में तैनात उत्तर कोरियाई सैनिकों के युद्ध के मैदान में पहुंचने से पहले आवश्यक कदम उठाने की अपील कर चुके हैं। जेलेंस्की ने उन शिविरों पर यूक्रेनी हमले की संभावना जताई, जहां उत्तर कोरियाई सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और कहा कि कीव को उनके स्थान का पता है। 8 हजार उत्तर कोरियाई सैनिक यूक्रेन की सीमा के पास वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन रूस के काफी अंदर लक्ष्यों पर हमला करने के लिए पश्चिमी देशों में निर्मित लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जब तक कि उसे अपने सहयोगियों की इजाजत नहीं मिल जाती। जेलेंस्की ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर पोस्ट में कहा, ‘अमेरिका देख रहा है, ब्रिटेन देख रहा है, जर्मनी देख रहा है। हर कोई बस इस बात का इंतजार कर रहा है कि उत्तर कोरियाई सेना यूक्रेन के लोगों पर भी हमला करना शुरू कर दे।’ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने कहा था कि लगभग 8,000 उत्तर कोरियाई सैनिक अब यूक्रेन की सीमा के पास रूस के कुर्स्क क्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई में क्रेमलिन की मदद करने की तैयारी कर रहे हैं।

नगर निगम चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, इतनी देर में करवाने होंगे इलेक्शन

जालंधर कुछ सप्ताह पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश जारी किए थे कि 15 दिन के भीतर निगम चुनाव का शेड्यूल जारी किया जाए। राज्य सरकार ने यह आदेश नहीं माने और सरकार सुप्रीम कोर्ट की शरण में चली गई जहां आज इस याचिका पर सुनवाई हुई। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को निरस्त करते हुए आदेश जारी किए हैं कि पंजाब सरकार 2 सप्ताह के भीतर निगम चुनाव संबंधी शेड्यूल जारी करे और अगले 8 सप्ताह के भीतर यह निगम चुनाव करवाए जाएं। एक प्रकार से पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से झटका लगा है क्योंकि ‘आप’ सरकार फरवरी में होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद निगम चुनाव करवाने का इरादा किए बैठी थी। अब भी पंजाब में निगम चुनाव जनवरी में होते हैं या दिल्ली विधानसभा के चुनाव के बाद, यह देखने वाली बात होगी।

हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी अगामी विधानसभा सत्र में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं

हरियाणा हरियाणा के 1.20 लाख कच्चे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर आई है। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी अगामी विधानसभा सत्र में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। सीएम सैनी 1.20 लाख कर्मचारियों के जॉब सिक्योरिटी वाले विधेयक के पारित होने के समय ही बड़ा ऐलान कर सकते हैं। अभी तक सरकार ने अध्यादेश जारी कर रखा था। हरियाणा में पांच साल से अनुबंध पर काम कर रहे एक लाख 20 हजार कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं 58 साल की आयु तक करने के निर्णय पर विधानसभा में मुहर लगेगी। प्रदेश सरकार ने विधानसभा में पारित कराए जाने वाले बिल का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त निकायों में कौशल रोजगार निगम, आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-1 और आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-2 तथा तदर्थ आधार पर लगे 50 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले सभी कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं सेवानिवृत्ति आयु तक सुनिश्चित की जाएंगी। इस अध्यादेश की अवधि 6 माह की होती है। लेकिन इससे पहले अगर विधानसभा में विधेयक पारित हो जाए तो राज्यपाल की मंजूरी के बाद वह स्थायी कानून बन जाता है। सीएम नायब सैनी ने विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल की बैठक में 1.20 लाख अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी 58 साल तक सुरक्षित करने के लिए जॉब सिक्योरिटी अध्यादेश मंजूर कराया था। अब 13 नवंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरु होने जा रहा है। जिसमें विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें वे विधेयक भी शामिल होते हैं जिनके अध्यादेश पहले जारी हो चुके हैं। लेकिन इन अध्यादेशों को ऐसे के ऐसे ही विधेयक के रूप में पेश करना होता है। जॉब सिक्योरिटी का अध्यादेश भी ज्यों का त्यों ही पेश किया जाएगा। लेकिन जब इसपर चर्चा होगी तो सीएम सैनी बड़ा ऐलान कर सकते हैं।   पक्के कर्मचारियों के समान बेसिक वेतन मिलेगा सरकारी स्कूलों में तैनात अतिथि अध्यापकों को भी नए नियमों का लाभ मिलेगा। विगत 14 अगस्त से ही कानून लागू होगा, जब इसे अध्यादेश के रूप में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मंजूरी दी थी।  15 अगस्त तक पांच साल की नौकरी पूरी कर चुके सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्के कर्मचारियों के समान बेसिक वेतन दिया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम पे स्केल से पांच प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा। न्यूनतम पे स्केल से 10 प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा इसी तरह आठ साल पुराने कर्मचारियों को न्यूनतम पे-स्केल से 10 प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा। 10 साल से अधिक पुराने अनुबंधित कर्मचारियों को न्यूनतम पे-स्केल से 15 प्रतिशत अधिक वेतन दिया जाएगा। हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को मानदेय में वृद्धि भी की जाएगी। साथ ही सालाना वेतन वृद्धि, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और मेटरनिटी एक्ट के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिलेंगे।   पीएम-जन आरोग्य योजना-चिरायु एक्सटेंशन योजना के तहत अनुबंधित कर्मचारियों के परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी दिया जाएगा।  

करोड़ों की चांदी की ईंट किसकी,महाराष्ट्र में साढ़े 6 टन चांदी वाली मिली कैश वैन

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग की टीमें और पुलिस नाकाबंदी कर वाहनों की जांच कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि आचार संहिता लागू होने के बाद से 8 नवंबर तक 280 करोड़ से ज्यादा नकदी और कीमती सामान जब्त किया जा चुका है। राज्य के अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में पुलिस की ओर से वाहनों की जांच कर कीमती सामान और नकदी जब्त किए गए हैं। कुछ दिन पहले पुणे शहर में पुलिस ने एक वैन पकड़ी थी। इसमें सोने-चांदी के गहने और कीमती सामान था। उसके बाद अब पुलिस ने मुंबई में चांदी की ईंटों से भरी एक वैन पकड़ी है। विक्रोली पुलिस और चुनाव आयोग की टीम की ओर से जब्त की गई कैश वैन में चांदी की ईंटें मिली हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये कुल ईंटें साढ़े छह टन की हैं। करोड़ों की कीमत की चांदी की ईंटें वैन में करोड़ों की कीमत की चांदी की ईंटें कथित तौर पर ब्रिंक्स कंपनी के वाहन से मुलुंड के एक गोदाम में स्टोरेज के लिए ले जाई जा रही थीं। शुरुआती जांच में पता चला है कि पुलिस को मिली ये ईंटें सरकारी हैं। हालांकि, इसकी आगे की जांच चुनाव आयोग, आयकर और पुलिस की ओर से की जा रही है। इस बीच पुलिस सभी विधानसभा क्षेत्रों में वाहनों और अवैध यातायात पर कड़ी नजर रख रही है। अवैध रूप से पैसे ले जाने पर कार्रवाई की जा रही है। पालघर में तीन करोड़ कैश जब्त इस बीच शनिवार को पालघर में भी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पालघर में एक गाड़ी से तीन करोड़ से ज्यादा कैश जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पालघर के वाडा पाली मार्ग से विक्रमगढ़ की ओर जा रही एक कार पर पुलिस को शक हुआ। इसके बाद कार को रोका गया और ड्राइवर से पूछताछ की गई। जांच के दौरान संदेह बढ़ने पर कार को जांच के लिए वाडा पुलिस स्टेशन लाया गया। जांच के दौरान कार से करीब 3 करोड़ 70 लाख रुपये जब्त किए गए। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मुंबई में मिले 2 करोड़ 30 लाख रुपयेमुंबई में भी 2 करोड़ से ज्यादा कैश के साथ 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन को सूचना मिली कि कुछ लोग अवैध रूप से बड़ी मात्रा में नकदी ले जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शहर के भुलेश्वर मार्केट, कालबादेवी से 12 लोगों को संदेह के आधार पर गिरफ्तार कर लिया।  

संजीव खन्ना बने सुप्रीम कोर्ट के 51वें चीफ जस्टिस, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संजीव खन्ना नए चीफ जस्टिस के रूप में आज शपथ लेने जा रहे हैं। वह भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 10 बजे संजीव खन्ना को पद की शपथ दिलाएंगी। नए सीजेआई का कार्यकाल 13 मई 2025 तक होगा यानि वह इस पद पर करीब 6 महीने तक ही रहेंगे। अब सभी के जहन में एक सवाल आना आम बात है कि आखिर सीजेआई किस चीज की शपथ लेते हैं। आइए हम आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को संविधान की शपथ दिलाई जाएगी। भारतीय संविधान के थर्ड शेड्यूल के भाग-4 के तहत चीफ जस्टिस को शपथ दिलाई जाती है। इस दौरान राष्ट्रपति की मौजूदगी में वह यह शपथ लेते हैं कि संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा रखते हुए अमीर, गरीब सभी वर्ग के लोगों को बराबर न्याय देंगे। क्या होती है सीजेआई की शपथ अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के शपथ की बात करें तो इसमें लिखा होता है कि मैं, भारत के सुप्रीम कोर्ट का सीजेआई नियुक्त किया गया हूं और ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा। अपनी योग्यता, ज्ञान और विवेक के अनुसार विधिवत और ईमानदारी से व बिना किसी भय या पक्षपात, स्नेह या द्वेष के अपने पद के कर्तव्यों का पालन करुंगा। कौन हैं जस्टिस संजीव खन्ना जस्टिस संजीव खन्ना का 14 मई 1960 को दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस देव राज खन्ना के घर जन्मे थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड से पूरी की। उन्होंने 1980 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और बाद में डीयू के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई की। जस्टिस संजीव खन्ना ने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में वकील के तौर पर नॉमिनेशन कराया। उन्होंने दिल्ली के तीस हजारी में बाद में दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। जस्टिस खन्ना कथित तौर पर उन कुछ जजों में से हैं जो किसी भी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हो गए थे। कब रिटायर होंगे जस्टिस संजीव खन्ना? सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता नियम के मुताबिक, जस्टिस संजीव खन्ना 11 नवंबर 2024 से 13 मई 2025 तक 6 महीने के लिए भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश यानी CJI के रूप में देश की न्यायपालिका का नेतृत्व करेंगे. सुप्रीम कोर्ट में 18 जनवरी 2019 को जज के रूप में शपथ लेने के बाद से अब तक करीब पौने छह साल के दौरान जस्टिस खन्ना यहां 456 पीठ का हिस्सा रहे और 117 फैसले उन्होंने लिखे. दिल्ली के मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड से स्कूली शिक्षा पूरी कर वो 1980 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हुए. फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के ही कैंपस लॉ सेंटर यानी CLC से कानून की डिग्री ली. जस्टिस संजीव खन्ना के चाचा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस हंस राज खन्ना ने 1976 में एडीएम, जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला, (1976) के “बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले” में एकमात्र असहमतिपूर्ण निर्णय सुनाया था. इसके बाद तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार ने वरिष्ठतम जज जस्टिस हंसराज खन्ना सहित चार जजों की वरिष्ठता दरकिनार कर जस्टिस एमएच बेग को जनवरी 1977 में देश का चीफ जस्टिस बनाया था. ये भी दिलचस्प तथ्य है कि जस्टिस खन्ना को उनके मूल उच्च न्यायालय – दिल्ली हाईकोर्ट से सीधे सुप्रीम कोर्ट पदोन्नत किया गया. 1997 से अब तक केवल छह जजों को उनके मूल उच्च न्यायालय से प्रोन्नत कर सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया है. उनमें जस्टिस सैयद अब्दुल नजीर, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, जस्टिस लोकेश्वर सिंह पंटा, जस्टिस जीपी माथुर, जस्टिस रूमा पाल और जस्टिस एसएस कादरी शामिल हैं. जस्टिस खन्ना को 18-01-2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. वे 13-05-2025 को अपने 65 वें जन्मदिन से एक दिन पहले रिटायर होंगे. कैसा रहा है संजीव खन्ना का अब तक का कार्यकाल? ये भी सुखद संयोग रहा कि जस्टिस संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्च में जज के रूप में 18 जनवरी 2019 को सीजेआई की कोर्ट में शपथ लेने के बाद अपना पहला दिन उसी न्यायालय कक्ष यानी दो नंबर कोर्ट से शुरू किया, जहां से उनके चाचा जस्टिस एच.आर. खन्ना ने इस्तीफा देकर रिटायरमेंट ली थी. जस्टिस एच.आर. खन्ना की तस्वीर भी कोर्ट रूम में लगी है. सुप्रीम कोर्ट में अपने अब तक के कार्यकाल में जस्टिस खन्ना कई महत्वपूर्ण मुकदमों के लिए गठित संविधान पीठ का हिस्सा रहे हैं. ऐसी ही संविधान पीठ और बड़ी पीठ के फैसलों में चुनावी बांड योजना प्रमुख है. इसमें बॉन्ड योजना को असंवैधानिक होने के कारण रद्द कर दिया गया.     जम्मू कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र सरकार के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगाने वाली पीठ में भी जस्टिस संजीव खन्ना मौजूद थे.     संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के कदम को बरकरार रखा. इस आदेश ने राज्य का दर्जा बहाल करने का भी निर्देश दिया.     जस्टिस खन्ना ने सीजेआई और जस्टिस कौल के दिए गए निर्णयों से सहमति जताई.     जस्टिस संजीव खन्ना उस दो न्यायाधीशों की बेंच के भी अगुआ रहे, जिसनें दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी.     1983 में दिल्ली बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में नामांकित हुए संजीव खन्ना ने शुरुआत में दिल्ली के तीसहजारी परिसर में स्थित जिला न्यायालय और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट और संवैधानिक कानून, प्रत्यक्ष कराधान, मध्यस्थता जैसे विविध क्षेत्रों में न्यायाधिकरणों में प्रैक्टिस की.     साल 2004 में वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के लिए स्थायी वकील नियुक्त हुए.     दिल्ली हाईकोर्ट में वो अतिरिक्त लोक अभियोजक और एमिकस क्यूरी के रूप में कई आपराधिक मामलों में भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई.     दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में 2005 में पदोन्नत हुए. 2006 में स्थायी न्यायाधीश बनाए गए.     दिल्ली उच्च न्यायालय के जज रहते हुए, जस्टिस खन्ना ने दिल्ली न्यायिक अकादमी, दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र और जिला न्यायालय मध्यस्थता केंद्र के … Read more

गंगोत्री धाम की आगामी यात्रा सीजन में जुड़ जाएगी हेली सेवा

उत्तरकाशी. आगामी यात्रा सीजन में गंगोत्री धाम हेली सेवा से जुड़ जाएगा। इसके लिए धाम से डेढ़ किमी पहले नगर पंचायत के पुराने पार्किंग स्थल में हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन हेलीपैड परिसर में देवदार के तीन वृक्ष भी हैं, जिनके पातन के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मांगी गई है। अभी तक सीधे तौर पर हेली सेवा से नहीं जुड़े धाम उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री व यमुनोत्री धाम अभी तक सीधे तौर पर हेली सेवा से नहीं जुड़े हैं। गंगोत्री धाम जाने के लिए विशिष्ट-अतिविशिष्ट अतिथि और तीर्थ यात्रियों को 25 से 30 किमी दूर हर्षिल व झाला स्थित हेलीपैड पर उतरना पड़ता है। आम तीर्थ यात्रियों को झेलनी पड़ती हैं खासी दिक्कतें वीआइपी दौरे के दौरान हर्षिल से गंगोत्री के बीच हाईवे पर यात्रा को भी रोका जाता है, इससे आम तीर्थ यात्रियों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसी तरह से यमुनोत्री धाम जाने के लिए भी विशिष्ट-अतिविशिष्ट अतिथि और तीर्थ यात्रियों को खरसाली में उतरना पड़ता है। यहां से यमुनोत्री धाम के लिए छह किमी की दूरी पैदल दूरी नापनी पड़ती है। लेकिन, अब दोनों धामों में हेली सेवा मिलने की उम्मीद है। गंगोत्री धाम में हेलीपैड का 80 प्रतिशत कार्य पूरा यमुनोत्री धाम में गरुड़ गंगा के पास हेलीपैड के लिए स्थल चिह्नित कर उसका समतलीकरण किया जा चुका है। जबकि, गंगोत्री धाम में हेलीपैड का 80 प्रतिशत कार्य हो चुका है। यह हेलीपैड लगभग 35 लाख की धनराशि से नगर पंचायत के पुराने पार्किंग स्थल में बनाया जा रहा है।  

गुजरात के भावनगर में एक व्यक्ति ने अपने शादी के कार्ड पर छपा सीएम योगी का ‘बंटोगे तो कटोगे’ नारा

भावनगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नारा ‘बंटोगे तो कटोगे’ चर्चा का विषय बना हुआ है। अब गुजरात के भावनगर में एक व्यक्ति ने अपने शादी के कार्ड पर इस नारे को छपवाया है और उसके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी छपवाई है। पूरा मामला गुजरात के भावनगर जिले की महुवा तहसील के वांगर गांव का है। जहां पर एक भाजपा कार्यकर्ता के घर 23 नवंबर को शादी होनी है। शादी के लिए तैयार किए गए निमंत्रण कार्ड पर सीएम योगी का चर्चित नारा ‘बंटोगे तो कटोगे’ छपवाया गया है, जिसमें हिंदू समुदाय को एकजुट करने की बात कही गई है। पूरे प्रदेशभर में इस कार्ड की चर्चा की जा रही है। बता दें कि हाल ही में हरियाणा के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा दिया था। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में इस नारे की चर्चा लगातार हो रही है। चुनावी राज्य महाराष्ट्र और झारखंड में भी योगी के इस नारे पर राजनीतिक पार्टियां आमने-सामने हैं। उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भी इस नारे का असर देखने को मिल सकता है। भाजपा कार्यकर्ता ने बताया कि उसने लोगों को जागरूक करने और पीएम मोदी के संदेश को फैलाने के मकसद से ये नारा छपवाया है। कार्ड में पीएम मोदी, सीएम योगी और राम मंदिर का डिजाइन भी बनवाया गया है। साथ ही कार्ड में स्वच्छता अभियान और स्वदेशी अपनाने की बात पर भी जोर दिया गया है। गौरतलब है कि झारखंड में एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा था, “अपनी ताकत का एहसास कराएं, जातियों में बंटना नहीं है। जाति के नाम पर कुछ लोग आपको बांटेंगे, कांग्रेस और विपक्ष यही काम करती है। ये लोग बांग्लादेशी घुसपैठियों, रोहिंग्या को बुला रहे हैं। एक दिन ये लोग आपके घर के अंदर घंटी और शंख भी नहीं बजाने देंगे। इसलिए एक रहिए और नेक रहिए। मैं तो कहता हूं कि देश का इतिहास गवाह है जब भी बंटे हैं, निर्ममता से कटे हैं।’

विवाह कानून में होगा संशोधन, अब इराक में 9 साल की बच्चियों से शादी कर सकेंगे पुरुष

इराक विवाह कानून में कानूनी संशोधन पारित करने की तैयारी कर रहा है। यह कानून पुरुषों को नौ साल की उम्र तक की बच्चियों से शादी करने की अनुमति देता है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं को तलाक, बच्चे की कस्टडी और विरासत के अधिकार से वंचित करने के लिए भी संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। यह विधेयक नागरिकों को पारिवारिक मामलों पर निर्णय लेने के लिए धार्मिक अधिकारियों या नागरिक न्यायपालिका में से किसी एक को चुनने की अनुमति भी देगा। शिया दलों के गठबंधन के नेतृत्व वाली रूढ़िवादी सरकार का लक्ष्य लड़कियों को अनैतिक संबंधों से बचाने के प्रयास में प्रस्तावित संशोधन को पारित करना है। कानून में दूसरा संशोधन 16 सितंबर को पारित किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1959 में जब इसे कानून 188 नाम दिया गया था, तो इसे पश्चिम एशिया के सबसे प्रगतिशील कानूनों में से एक माना जाता था। इराक की गठबंधन सरकार ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन इस्लामी शरिया कानून की सख्त व्याख्या के अनुरूप है और इसका उद्देश्य युवा लड़कियों की सुरक्षा करना है। संसद में बहुमत वाली सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह इराकी महिला समूहों के विरोध के बावजूद इस कानून को पारित करेगी। यूनिसेफ के अनुसार, इराक में बाल विवाह की उच्च दर पहले से ही प्रचलित है। लगभग 28% इराकी लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले ही हो जाती है और प्रस्तावित संशोधनों से स्थिति और खराब होने की आशंका है। चैथम हाउस के वरिष्ठ शोध फेलो डॉ. रेनाड मंसूर ने द टेलीग्राफ को बताया कि यह कदम शिया इस्लामवादियों द्वारा सत्ता को मजबूत करने और वैधता हासिल करने का नवीनतम प्रयास है। उन्होंने कहा, “यह सभी शिया पार्टियों की बात नहीं है, यह केवल कुछ खास पार्टियां हैं जो सशक्त हैं और वास्तव में इसे आगे बढ़ा रही हैं।” मंसूर ने कहा, “धार्मिक पक्ष पर जोर देना उनके लिए वैचारिक वैधता को फिर से हासिल करने का एक तरीका है, जो पिछले कुछ वर्षों में कम होती जा रही है।”

श्रीनगर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरा, मुठभेड़ जारी

श्रीनगर मध्य कश्मीर के श्रीनगर जिले के जबरवान वन क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया है और दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ चल रही है। पुलिस ने रविवार को बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम को उस क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिलने के बाद अभियान शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों ने 3-4 आतंकियों को घेर लिया है, वहीं इस दौरान दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच कई मुठभेड़ हुई, जिनमें कई आतंकवादी और उनके कमांडर मारे गए हैं। वहीं, कुछ सुरक्षा बलों के जवान भी हताहत हुए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवादी गतिविधियां अब जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में भी हो रही हैं, जो इस तरह की घटनाओं से मुक्त माने जा रहे थे। इसमें कश्मीर में श्रीनगर और जम्मू में चेनाब घाटी, उधमपुर और कठुआ के इलाके शामिल हैं। जम्मू में अत्यधिक प्रशिक्षित आतंकवादी वाहनों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं और ग्रेनेड और गोलियों के साथ-साथ एम4 असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बढ़ते आतंकवाद और आतंकवादियों द्वारा अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से खतरे के स्तर में वृद्धि का संकेत मिलता है। लगातार हो रहे हमलों ने राजनीतिक आलोचना को जन्म दिया है और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कश्मीर घाटी को जम्मू से विभाजित करने वाले पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकवाद में बढ़ोतरी को देखा गया है। कश्मीर में लगातार आतंकवाद विरोधी अभियानों ने आतंकवादियों को पहाड़ों और उन क्षेत्रों में धकेल दिया है, जो आतंकवाद से मुक्त थे और जहां वे छिपते हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया, कटक में तीन पुलिस थानों ने 19 वर्षीय एक कॉलेज छात्रा की शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया

भुवनेश्वर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ओडिशा के कटक में तीन पुलिस थानों ने 19 वर्षीय एक कॉलेज छात्रा की शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया जिससे कथित तौर पर कई बार सामूहिक दुष्कर्म किया गया। कटक-बाराबती से कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने महिला को शिकायत दर्ज कराने के लिए एक थाने से दूसरे थाने के कथित तौर पर चक्कर कटवाने के लिए पुलिस की भूमिका की जांच करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि पीड़िता पुरी घाट थाना गई, फिर सदर थाना और बारंग थाने गई तथा आखिरकार बादामबाड़ी थाने में उसकी प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिकारियों ने बताया कि छात्रा से कई बार सामूहिक दुष्कर्म करने तथा इस कृत्य का वीडियो बनाने को लेकर पीड़िता के प्रेमी समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। लड़की ने दावा किया कि वह अपना जन्मदिन मनाने के लिए दशहरा पर्व के दौरान अपने प्रेमी के साथ पुरी घाट थाना इलाके में एक कैफे में गई थी। उसने कहा कि प्रेमी ने वहां कथित तौर पर कैफे मालिक की मदद से अपने फोन में उनके कुछ अंतरंग क्षणों का वीडियो बना लिया। पुलिस ने दर्ज मामले के आधार पर बताया कि उस वीडियो के सहारे प्रेमी तथा उसके दोस्तों ने लड़की को ब्लैकमेल किया और कई बार उससे दुष्कर्म किया। इसने कहा कि इस संबंध में शिकायत चार नवंबर को दर्ज की गई और आरोपियों को अगले दो दिन में गिरफ्तार कर लिया गया। फिरदौस ने इस घटना को लेकर शनिवार को पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस विधायक ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जब पीड़िता आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने गई तो कटक में तीन थानों ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। मैंने पुलिस महानिदेशक से यह जांच करने का अनुरोध किया है कि प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिकी दर्ज करने में देरी चिंताजनक है और यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही के बारे में गंभीर चिंता पैदा करती है खासतौर से जब महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बात हो।’’ फिरदौस ने दावा किया कि पीड़िता से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने पीड़िता की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले कटक में इस तरह की घटनाएं पहले कभी नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर अब इस शहर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो यह चिंता की बात है।’’ कटक के पुलिस उपायुक्त जगमोहन मीना ने कहा कि विधायक द्वारा लगाए आरोपों की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें मामला दर्ज न करने के आरोपों के बारे में सबसे पहले विधायक से पता चला है। पुलिस निश्चित तौर पर मामले की जांच करेगी। हालांकि, न तो पीड़िता और न ही उसके परिवार के किसी सदस्य ने ऐसा आरोप लगाया है। पीड़िता सुरक्षित है।’’ कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शुक्रवार को कहा था कि राज्य सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और ओडिशा को 2026 तक ऐसे अपराधों से मुक्त बनाने के प्रयास जारी हैं।  

जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (ब्रिक) ने अपना पहला स्थापना दिवस मनाया

नई दिल्ली जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (ब्रिक) ने अपना पहला स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि अनुसंधान में सामंजस्य स्थापित करने, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की शक्ति को बढ़ाने में ब्रिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने पिछले साल 10 नवंबर को 14 स्वायत्त संस्थानों (एआई) को शामिल करके ब्रिक की स्थापना की थी। ब्रिक जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उत्कृष्टता और नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ब्रिक के पहले स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक राजेश एस गोखले ने कहा, ” बीआरआईसी अनुसंधान में सामंजस्य स्थापित करने, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की शक्ति को बढ़ाने और रूपांतरित करने के संदर्भ में मूल्य और प्रभाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।” इस कार्यक्रम में 15 आईबीआरईसी संस्थानों के विभिन्न अधिकारियों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि अमिताभ कांत ने विभाग के प्रयासों को सराहा और कहा कि “बीआरआईसी देश के लिए एक ऐतिहासिक संस्थान होगा।” 9 नवंबर को, “विज्ञान से उद्यमिता की ओर दौड़ (आरएएसई)” नामक एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य आईबीआरईसी प्लस संस्थानों में पोषित युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना था, ताकि उन्हें जैव विज्ञान के व्यावसायीकरण से जुड़े मुद्दों, विशेष रूप से बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति में उल्लेखित विषयगत क्षेत्रों से अवगत कराकर उनके उद्यमशीलता कौशल को विकसित किया जा सके। 10 नवंबर को, आईबीआरईसी प्लस संस्थानों और डीबीटी के लिए खेल मीट और एक मिलन समारोह की योजना बनाई गई थी, ताकि डीबीटी-आईबीआरईसी प्लस परिवारों के बीच सद्भाव, शारीरिक फिटनेस, टीमवर्क और बॉन्डिंग को बढ़ावा दिया जा सके। स्पोर्ट्स मीट में क्रिकेट, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और शतरंज जैसी स्पर्धाएं शामिल की गई। मंत्रालय ने कहा, “ब्रिक विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उम्मीद है कि इससे भारतीय जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने में सराहनीय परिणाम प्राप्त होंगे।”  

फुलंबरी में स्थित इस दुकान में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे आग भड़क उठी, तीन लोगों की मौत

छत्रपति संभाजीनगर छत्रपति संभाजीनगर के फुलंबरी इलाके में देर रात एक भयानक हादसा हुआ, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। यह घटना बीती रात करीब एक बजे की है, जब एक प्लास्टिक की दुकान में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। जानकारी के अनुसार, फुलंबरी में स्थित इस दुकान में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे आग भड़क उठी। आग की चपेट में आने से दुकान खोलने आए तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान नितिन नागरे, गजानन वाघ, और सलीम शेख के रूप में हुई है। उल्लेखनीय है कि बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं आमतौर पर तेज और अनियंत्रित होती हैं, खासकर जब दुकान में प्लास्टिक जैसे ज्वलनशील पदार्थ मौजूद हों। इस घटना ने एक बार फिर से दुकानों और अन्य व्यावसायिक स्थानों में सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी तरह से कुछ दिन पहले गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके में केमिकल फैक्ट्री में 4 नवंबर की रात को भीषण आग लग गई थी। जिसके बाद इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग काफी ज्यादा फैल चुकी थी। जिसको देखते हुए अलग अलग स्टेशन से फायर ब्रिगेड की और गाड़ियों को बुलाया गया। फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आग पैराबोलिक लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक केमिकल फैक्ट्री में लगी हुई थी।  

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