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भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में LAC पर जारी गतिरोध के हल का अब रास्ता साफ होता दिख रहा

नई दिल्ली  ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस रवाना होने से पहले भारत को बड़ी सफलता मिली है. भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर जारी गतिरोध के हल का अब रास्ता साफ होता दिख रहा है. पीएम मोदी रूस के कजान में होने वाली ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए रवाना होने वाले हैं. पीएम मोदी की रूस यात्रा से पहले विदेश सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर पेट्रोलिंग को समझौता हुआ है. इस समझौते के बाद एलएसी सैनिकों की वापसी और फिर इस मुद्दे के समाधान का रास्ता साफ हो सकेगा. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता की संभावनाओं पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, ‘पिछले कई हफ्तों से भारत और चीन के बीच राजनयिक और सैन्य वार्ता हो रही है. चीन के साथ एलएसी के मुद्दों पर हमारा समझौता हुआ है. सैनिकों की वापसी और स्थिति के समाधान के लिए पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है. द्विपक्षीय वार्ता के मुद्दे पर हम अब भी समय और व्यस्तताओं के अनुरूप काम कर रहे हैं.’ दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हालिया बातचीत के बाद भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पेट्रोलिंग के लिए एक समझौते पर पहुंचे हैं. मिस्री ने कहा कि पेट्रोलिंग को लेकर बनी सहमति के बाद दोनों देशों के बीच एलएसी पर तनाव कम होने की उम्मीद है.  विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर 16वें ब्रिक्स समिट में भाग लेने के लिए कल कज़ान रवाना होंगे. भारत ब्रिक्स में बहुत महत्व रखता है और इसके योगदान ने आर्थिक विकास, सतत विकास और वैश्विक शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स के प्रयासों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है… पिछले साल जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स के पहले विस्तार के बाद यह पहला शिखर सम्मेलन हो रहा है…’ वहीं एलएसी पर गश्त को लेकर चीन से हुए समझौते की जानकारी देते हुए विदेश सचिव मिस्री ने कहा, ‘…पिछले कई हफ्तों में हुई चर्चाओं के बाद भारत और चीन के बीच एलएसी पर पेट्रोलिंग (गश्त) को लेकर सहमति बन गई है और इससे 2020 में इस इलाके में छिड़े विवाद का समाधान हो रहा है.’

हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर ताबड़तोड़ ऐक्शन, 14 गिरफ्तार, 336 की मंडियों में एंट्री भी बैन

 चंडीगढ़ हरियाणा के कैथल जिले में पराली जलाने के मामले में 14 किसानों को अरेस्ट किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में बीते कुछ दिनों में पलूशन बढ़ गया है। इस बीच यह ऐक्शन लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पराली जलाने पर रोक के बाद भी किसान नहीं माने तो यह कार्रवाई की गई है। हरियाणा के हिसार समेत कुछ और जिलों में भी ऐसा ऐक्शन हुआ है। दिल्ली में पलूशन बढ़ने के लिए हरियाणा और पंजाब में किसानों द्वारा फसल के अवशेष जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। कैथल में कुल 123 किसानों पर केस दर्ज हुए हैं। कहा जाता है कि हर साल धान की फसल काटे जाने के बाद किसान पराली जलाते हैं। उससे निकलने वाले धुएं के चलते ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। आमतौर पर हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीने में दिल्ली में पलूशन बढ़ने की शिकायतें आने लगती हैं। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट तक में यह मामला पहुंचा है और अदालत ने हरियाणा, पंजाब एवं दिल्ली सरकारों को पलूशन पर लगाम कसने का आदेश दिया है। कैथल के डीएसपी बीरभान ने कहा कि बीते कुछ दिनों में 14 किसानों को पराली जलाने पर अरेस्ट किया गया है। हालांकि इन लोगों को बेल पर रिहा कर दिया गया। लगातार बढ़ रही घटनाएं प्रदेश में पराली जलाने के कारण स्मॉग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य में 15 सितंबर को पराली का सीजन शुरू होने से लेकर शनिवार की रात तक प्रदेश के 16 जिलों में पराली जलाने के 642 केस सामने आ चुके हैं। राज्य में कैथल ऐसा जिला है जहां पिछले छह दिनों से AQI में कोई सुधार नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में हरियाणा सरकार को फटकार लगाए जाने के बाद दो दिन पहले कृषि निदेशक द्वारा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। जिसके बाद कृषि विभाग की टीमें और पुलिस बल पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। सभी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट ली प्रदेश में पराली से फैल रहे प्रदूषण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रविवार को मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने जिला उपायुक्तों की आपात बैठक बुलाकर सभी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट ली। इस बैठक को लेकर आधिकारिक रूप से जानकारी तो जारी नहीं की गई लेकिन जिला स्तर पर कई उपायुक्तों ने इस बारे जानकारी जारी की। इस बैठक में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि अब तक प्रदेश में 336 किसानों की रिकार्ड पर रेड पेन एंट्री करके मंडियों में प्रवेश बैन कर दिया गया है। अब यह किसान अगले दो सीजन मंडी में अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे। किस जिले में कितने मामले सामने आए जिला पराली जलाने के मामले कैथल 123 कुरुक्षेत्र 90 अंबाला 73 करनाल 68 जींद 49 सोनीपत 40 फतेहाबाद 36 फरीदाबाद 30 कैथल में 1.57 लाख का जुर्माना लगाया गया: डीसी कैथल के जिला उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने कहा कि अब तक जिले में धान की फसल के अवशेष जलाने के 123 मामले सामने आए हैं। इनमें 40 फायर लोकेशन नहीं मिली, जबकि 63 में धान की फसल के अवशेष जलाए जाने की बात सही निकली है और उन पर 1 लाख 57 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा 11 एफआईआर दर्ज हुई है। कैथल में पराली जलाने वाले 43 किसानों की मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री कर दी गई है। चार सालों का 15 सितंबर से लेकर अब तक ब्योरा साल पराली जलाने के मामले 2021 1082 2022 586 2023 570 2024 642   इन लोगों के खिलाफ प्रदूषण रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ है। पानीपत और यमुनानगर जिलों में भी कई किसानों के खिलाफ केस फाइल हुए हैं। हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी टीवीएसएन ने रविवार को ही डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिया था कि पराली जलाने के मामलों को कंट्रोल किया जाए। बता दें कि बीते सप्ताह हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा एवं पंजाब की सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपको पराली जलाने से रोकना होगा। इसके अलावा यदि किसान नहीं मानते हैं तो फिर उनके खिलाफ ऐक्शन लिया जाए। अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को समन भी जारी किया था और 23 अक्टूबर को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया है। जस्टिस अभय एस. ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और ए. जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा था कि दोनों राज्य पूरी तरह असंवेदनशील हैं। पलूशन को लेकर उन्हें जो आदेश दिया है, उस पर काम नहीं कर रहे हैं। यह गलत है और उल्लंघन करने वालों पर उन्हें ऐक्शन लेना ही होगा। अदालत के इस सख्त आदेश के बाद ही कार्रवाई की गई है। वहीं किसानों का कहना है कि धान की फसल कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम अंतर रहता है। ऐसे में खेत को जल्दी खाली करने के लिए वे पराली को कई बार जला देते हैं। यह आसान और सस्ता पड़ता है।

ED का खुलासा PFI ने कैंप में हथियार चलाना सिखाया, हवाला के पैसे से भारत में फैला रहा था आतंक

 नई दिल्ली  प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सिंगापुर और खाड़ी देशों जैसे कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई में 13 हजार से अधिक सक्रिय सदस्य हैं। ईडी ने बताया कि पीएफआई ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी मुस्लिमों के लिए जिला कार्यकारी समितियां (डीईसी) बनाई हैं। इन समितियों को फंड जुटाने का काम सौंपा गया है। प्रत्येक डीईसी को कई करोड़ रुपये फंड जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। विदेश से जुटाए गए फंड को गई धनराशि को बैंकिंग चैनलों के साथ-साथ हवाला चैनलों के माध्यम से भारत में ट्रांसफर किया गया था, ताकि उनके स्त्रोत का पता न लगाया जा सके। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ईडी समेत विभिन्न एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि पीएफआई की जड़ें भारत के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक फैली हुई हैं। इसके अलावा इसके पैसे के स्रोत को लेकर भी बड़ी जानकारियां सामने आई हैं। इस संगठन के खिलाफ जांच 2022 में शुरू हुई थी। इसका सिलसिला शुरू हुआ था दिसंबर 2020 से। तब ईडी ने कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के महासचिव केए रऊफ शेरिफ को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद पीएफआई के नेटवर्क के बारे में कई जानकारियां सामने आईं। यह संगठन भारत और विदेशों में धन इकट्ठा कर रहा है और देश में आतंकी गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है। चार साल की जांच के बाद ईडी द्वारा तैयार डोजियर में कई जानकारियां सामने आई हैं। इसमें केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, जम्मू कश्मीर और मणिपुर में इसके सदस्य और ऑफिस होने की बात सामने आई है। ईडी के डोजियर के अनुसार, 2022 की जुलाई में संगठन द्वारा पीएम मोदी पर हमले का असफल प्रयास हुआ। इसके बाद इस पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया। इस सिंगापुर और पांच खाड़ी देशों में कम से कम 13,000 सदस्य हैं। यहां से अज्ञात लोगों से कैश लिया जाता है और हवाला के जरिए से भारत भेजा जाता है। इन पैसों को ट्रस्टों और संबद्ध संस्थाओं के 29 बैंक खातों में जमा किया गया। पिछले कुछ साल में ईडी ने भारत से पीएफआई के 26 शीर्ष पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद उनकी संपत्ति और बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। ईडी के डोजियर के मुताबिक पीएफआई ने दिल्ली दंगों और हाथरस में अशांति फैलाने में भूमिका निभाई थी। 2020 के बाद से गिरफ्तार किए गए लोगों में प्रमुख शामिल हैं रऊफ शेरिफ, सीएफआई के राष्ट्रीय महासचिव शफीक पायथ, कतर में स्थित एक पीएफआई सदस्य परवेज अहमद, दिल्ली पीएफआई के अध्यक्ष और साहुल हमीद शामिल हैं। साहुल हमीद सिंगापुर से पीएफआई के लिए हवाला का कारोबार कर रहे हैं। एजेंसी के मुताबिक केरल के कन्नूर जिले के नारथ में एक हथियार प्रशिक्षण शिविर पाया गया। यहां पर फिजिकल एजुकेशन क्लास के नाम पर पीएफआई कैडरों को विस्फोटकों और हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीएफआई और उसके सहयोगियों द्वारा अब तक 94 करोड़ से अधिक रुपए जुटाने की बात सामने आई है। ईडी ने 57 करोड़ रुपये की 35 संपत्तियों को आपराधिक आय बताया है। यह संगठन कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में सक्रिय पाया गया है। इसे इन्हीं जगहों से सबसे ज्यादा पैसा पाया गया है। ईडी के मुताबिक पीएफआई का वास्तविक उद्देश्य जिहाद के माध्यम से भारत में इस्लामी आंदोलन को आगे बढ़ाना शामिल है। हालांकि पीएफआई खुद को एक सामाजिक आंदोलन के रूप में पेश करता है। साक्ष्य बताते हैं कि विरोध प्रदर्शनों का हिंसक तरीके से समर्थन करता है। ईडी ने बताया है कि पीएफआई ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी मुस्लिम प्रवासियों के लिए जिला कार्यकारी समितियां बनाई हैं। ED ने पीएमएलए के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के स्वामित्व वाली 56.56 करोड़ रुपये की 35 संपत्तियां जब्त की हैं. 16 अक्टूबर 2024 को 35.43 करोड़ रुपये की 19 संपत्तियां जब्त की गईं, जबकि 16 अप्रैल 2024 को 21.13 करोड़ रुपये की 16 संपत्तियां जब्त की गईं. ईडी की जांच एनआईए और अन्य एजेंसियों द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें पीएफआई के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हैं. पीएफआई ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत और विदेश में बैंकिंग चैनलों, हवाला और दान के माध्यम से पैसे जुटाए. कई राज्यों में 29 पीएफआई बैंक खातों में 94 करोड़ रुपये जमा किए गए. इस बीच 26 पीएफआई सदस्य गिरफ्तार हुए. फरवरी 2021 और मई 2024 के बीच 9 अभियोजन शिकायतें दर्ज की गईं. हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएफआई के पूर्व नेशनल कॉओर्डिनेटर इब्राहिम पुथनाथनी की जमानत याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी किया. अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा है. कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को करेगी. ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज करने और उन्हें जमानत देने से इनकार करने के बाद इब्राहिम पुथानाथनी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. एनआईए ने दाखिल की थी चार्जशीट एनआईए ने इब्राहिम पुथनाथनी और कुछ अन्य पीएफआई नेताओं के खिलाफ यूएपीए के तहत एक आतंकी मामले में चार्जशीट दायर की है. उन्हें 2022 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था. एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये लोग कई राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भारत और विदेशों से फंड इकट्ठा कर रहे थे और साजिश रच रहे थे. PFI को बॉम्बे हाई कोर्ट से लगा झटका इससे पहले PFI के तीन कथित सदस्यों को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा था. कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था. अदालत ने कहा कि उन्होंने 2047 तक भारत को इस्लामिक देश में बदलने की साजिश रची थी. जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की बेंच ने रजी अहमद खान, उनैस उमर खैय्याम पटेल और कय्यूम अब्दुल शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी.  

मंडी में पीने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं, खबर के बाद खुली प्रशासन की नींद, मंडी में सुविधाएं सुचारू रूप से हुई शुरू

चरखी दादरी   सरकार द्वारा खरीफ फसल खरीद के दौरान किसानों व आढ़तियों को पर्याप्त सुविधाएं मुहैया करवाए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चरखी दादरी अनाज मंडी में सुविधाओं का अभाव होने के कारण आढ़तियों में रोष देखने को मिल रहा था। आढ़ती एसोसिएशन प्रधान रामकुमार रिटोलिया की मानें तो मंडी में पीने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने उठान प्रक्रिया बेहद धीमी होने और उठान के लिए आढ़तियों से रुपये लेने के आरोप जड़े हैं। दूसरी ओर मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने मंडी में पर्याप्त सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। जैसे ही मीडिया में असुविधाओं की खबर चली। उसके बाद उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए मंडी में सभी सुविधाएं किसानों और आढ़तियों को मुहैया करवा दी गई। मंडी प्रधान रामकुमार ने बताया कि चरखी दादरी जिले में पहली बार धान की खरीद भी होगी। दादरी जिले में लगभग तीन चार हजार लाख क्विंटल धान होता है जिसको बचने के लिए किसानों को दर दर की ठोकरे खानी पड़ती थी लेकिन इस बार दादरी जिले में ही वह अपनी फसल का उचित मूल्य ले सकते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने लालकुआं-बांद्रा सुपरफस्ट ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

देहरादून/लालकुआं  उत्तराखंड़ के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सुबह वर्चुअली लालकुआं-बांद्रा सुपरफस्ट ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कैंची धाम के आशीर्वाद से आज लालकुंआ से बांद्रा के मध्य ट्रेन संचालन का स्वप्न पूरा हुआ है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री र मोदी और रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन के संचालन से रामपुर, मुदादाबाद, गाजियाबाद, हजरत निजामुद्दीन, मथुरा, सवाई माधोपुर, कोटा, वडोदरा सूरत जैसे रेलवे स्टेशन से जुड़े लोगों को को यात्रा करने का आसानी से विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि लालकुआं-बांद्रा रेल सेवा शुरू होने से बाबा कैंची धाम, जागेश्वर और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का एक बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में वंदेभारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेन, रेल नेटवर्क का हिस्सा बनी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और केन्द्र सरकार के सहयोग से पहाड़ तक ट्रेन पहुंचने का स्वप्न ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन बनने के साथ ही पूर्ण हो जाएगा। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर भी सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है, जल्द ही इसमें भी कार्य शुरू हो जायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से काशी, अयोध्या और अन्य प्रमुख शहरों के लिए रेल सेवा के और विस्तार के लिए प्रयास किये जाएंगे। आज हमारी डबल इंजन की सरकार प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाओं को धरातल पर उतार रही है। प्रदेश की देवतुल्य जनता के सहयोग से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार हर क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है। इस मौके पर सांसद अजय भट्ट ने कहा कि यहां के लोगों की यह बहुत पुरानी मांग थी कि लालकुआं से मुंबई को सीधे रेल सेवा सुचारू हो, जो आज पूर्ण हुई है। यह है रूटः लालकुआं-बांद्रा टर्मिनल के मध्य नई ट्रेन सं. 22544 सोमवार को लालकुआं से सुबह 07ः45 बजे प्रस्थान कर रुद्रपुर सिटी, रामपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, हजरत निजामुद्दीन, मथुरा, कोटा, बडोदरा, सूरत होते हुए हुए अगले दिन मंगलवार को प्रातः 08ः30 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में बांद्रा टर्मिनस से सुबह 11ः00 बजे मंगलवार को प्रस्थान कर लालकुआं अगले दिन बुधवार 01:15 बजे पहुंचेगी । इस गाड़ी में यात्रियों की सुविधा के लिए 2 एसी के 1 कोच, 3 एसी के 2 कोच, एसी इकोनॉमी श्रेणी के 3 कोच तथा स्लीपर क्लास के 6 कोच, सामान्य श्रेणी के 4 कोच से संचालित होगी। इस गाड़ी में सभी कोच एलएचबी के लगाए गए हैं जो कि यात्रियों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त हैं। इस अवसर पर विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक नवीन दुमका, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट, दीप कोश्यारी और डी.आर.एम रेखा यादव उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी आज शाम को

कोलकाता कोलकाता के आर.जी.कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद गुस्साए जूनियर डॉक्टरों का आमरण अनशन सोमवार को 17वें दिन भी जारी रहा। बतान दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक राज्य सचिवालय नबन्ना में आज शाम को होने वाली है। हालांकि राज्य सरकार ने पहले कहा था कि बैठक में भाग लेने के लिए भूख हड़ताल वापस लेनी होगी। मगर इस मुद्दे पर आंदोलन की अगुवाई करने वाले पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट (डब्ल्यूबीजेडीएफ) ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस शर्त को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और उनका प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल वापस लिए बिना ही बैठक में भाग लेगा। बैठक के लिए कुल 45 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। पहले दिन से भूख हड़ताल में भाग लेने वाले जूनियर डॉक्टरों में से एक सायंतनी घोष हाजरा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल सकारात्मक सोच के साथ मुख्यमंत्री के साथ बैठक में भाग लेने जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को छोड़कर बाकी सभी अपनी चिकित्सा सेवा ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि चिकित्सा सेवाएं बाधित हो रही हैं। इसलिए हमें उम्मीद है कि इस मुद्दे पर हमारी मांगें आखिरकार पूरी होंगी।” फिलहाल कुल सात जूनियर डॉक्टर भूख हड़ताल पर हैं। इनमें से सात सेंट्रल कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मंच पर हैं और एक दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी स्थित नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के परिसर में है। अब तक, 5 अक्टूबर की शाम से शुरू हुई भूख हड़ताल में हिस्सा ले रहे छह जूनियर डॉक्टरों की तबीयत बहुत खराब हो गई है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की 10 सूत्री मांगों में सबसे विवादास्पद मांग राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाना है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने जूनियर डॉक्टरों से फोन पर बातचीत के दौरान साफ कहा कि उनकी ओर से इस मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा।  

लालकुआं से बांद्रा के लिए सुपरफास्ट ट्रेन को सीएम धामी ने दिखाई हरी झंडी

नैनीताल उत्तराखंड के लालकुआं से बांद्रा के लिए सुपरफास्ट रेलगाड़ी (ट्रेन) शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअली इस ट्रेन को सोमवार को हरी झण्डी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबा कैंची धाम के आशीर्वाद से आज लालकुंआ से बांद्रा के मध्य ट्रेन संचालन का सपना पूरा हुआ है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन के संचालन से रामपुर, मुदादाबाद, गाजियाबाद, हजरत निजामुदीन, मथुरा, सवाई माधोपुर, कोटा, वडोदरा सूरत के साथ ही उत्तराखंड की जनता लाभान्वित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रेल सेवा के शुरू होने से बाबा कैंची धाम, जागेश्वर के साथ ही अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का एक बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में वंदेभारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेन रेल नेटवर्क का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्र के सहयोग से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल सेवा का सपना भी जल्द पूर्ण हो जयेगा। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर भी सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है। जल्द ही इसमें भी कार्य शुरू हो जायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड से काशी, अयोध्या और अन्य प्रमुख शहरों के लिए रेल सेवा के विस्तार के प्रयास किये जायेंगे। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद अजय भट्ट ने कहा कि यहां के लोगों की यह बहुत पुरानी मांग थी। इस सेवा से पूरे कुमाऊं में पर्यटन और तीर्थाटन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अब सप्ताह में तीन रेल गाड़ियां रामनगर, हल्द्वानी और अब लालकुआं से मुम्बई के लिए जा रही हैं। यह रेल सेवा लालकुआं से सुबह 07:45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन मंगलवार को प्रातः 08:30 बजे बान्द्रा टर्मिनल पहुंचेगी तथा उसी दिन (मंगलवार) को 11:00 बजे लालकुआं के लिए प्रस्थान कर अगले दिन बुधवार 13:15 बजे लालकुओं पहुंचेगी। इस अवसर पर विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और रेलवे के डीआरएम श्रीमती रेखा यादव उपस्थित रहीं।  

मदरसा विद्यार्थी के सरकारी स्कूलों में तबादले पर रोक, सरकार के फैसले पर SC की फिलहाल रोक

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर की सिफारिशों पर सोमवार को रोक लगा दी। मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने NCPCR की सिफारिश पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। ऐसे में आरटीई का पालन नहीं करने वाले मदरसों को भी राज्य से मिलने वाली फंडिंग नहीं रुकेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है और चार हफ्तों में जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर भी रोक लगाई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि एनसीपीसीआर के पत्र और उत्तर प्रदेश व त्रिपुरा समेत कुछ राज्यों की कार्रवाइयों पर रोक लगाई जानी चाहिए। मुस्लिम संगठन ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकारों के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि इस वर्ष 7 जून और 25 जून को जारी एनसीपीसीआर के सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके चलते किए गए राज्यों के आदेश भी स्थगित रहेंगे। न्यायालय ने मुस्लिम संस्था को उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के अलावा अन्य राज्यों को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति दी। NCPCR का क्या है इस मामले पर तर्क एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बीते दिनों कहा था कि उन्होंने मदरसों को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा। बल्कि, उन्होंने इन संस्थानों को सरकार की ओर से दी जाने वाली धनराशि पर रोक लगाने की सिफारिश की क्योंकि ये संस्थान गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। कानूनगो ने कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के बजाय धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए दबाव डाला जाता है। उन्होंने कहा कि वह सभी बच्चों के लिए शिक्षा के समान अवसरों की वकालत करते हैं। दरअसल, एनसीपीसीआर ने एक हालिया रिपोर्ट में मदरसों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई थी। इस आधार पर ऐक्शन लेने की मांग की गई। हालांकि, इस रिपोर्ट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। सत्तारूढ़ भाजपा पर अल्पसंख्यक संस्थानों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। किसने दायर की थी याचिका उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकार के आदेश के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद ने याचिका दाखिल की थी। यूपी सरकार का आदेश एनसीपीसीआर की रिपोर्ट के आधार पर लिया था। इसमें आरटीई 2009 का पालन नहीं करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने और सभी मदरसों की जांच करने को कहा गया था। सीजेआई की बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर गौर किया और राज्यों की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कभी भी मदरसों को बंद करने की मांग नहीं की- एनसीपीसीआर  इंटरव्यू में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि उन्होंने कभी भी ऐसे मदरसों को बंद करने की मांग नहीं की थी, बल्कि उन्होंने सिफारिश की थी कि इन संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जानी चाहिए, क्योंकि ये गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की बजाय धार्मिक शिक्षा लेने के लिए दबाव डाला जाता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी बच्चों के लिए बराबरी की शिक्षा के अवसरों की वकालत करते हैं।

हिज्बुल्लाह का नेता लीडर नईम कासिम मौत के डर से फरार, ईरान में छिपा बैठा

बेरुत बीते एक साल से हमास और हिजबुल्लाह से लड़ रही जंग में इजरायल बीते कुछ दिनों से आक्रामक है। उसने एक तरफ हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को लेबनान के अंदर ही घुसकर मार गिराया तो वहीं हमास के पॉलिटिकल चीफ रहे इस्माइल हानियेह को तो तेहरान में मार डाला था। फिर बीते सप्ताह उसने हमास के नेता याह्य सिनवार को भी मार गिराया। इजरायल के इन हमलों का ऐसा खौफ है कि नसरल्लाह के बाद हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर कहे जा रहे नईम कासिम ने लेबनान ही छोड़ दिया है। वह अब तक लेबनान में ही रहता था, लेकिन इजरायली हमले में मारे जाने के डर से भाग निकला है। यूएई स्थित Erem News की रिपोर्ट के मुताबिक नईम कासिम ने ईरान में शरण ली है। उसके ठिकाने के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है और वह पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। वह एकदम सेफ लोकेशन में छिप कर रहा रहा है ताकि इजरायल के हाथों न मारा जाए। फिलहाल वह हिजबुल्लाह का डिप्टी सेक्रेटरी जनरल है और उसके सेकेंड इन कमांड कहा जाता है। ऐसे में उसका भागना बताता है कि हिजबुल्लाह किस तरह से इजरायल के डर में है। पेजर विस्फोट और फिर वॉकी-टॉकी धमाकों के बाद से डरे हिजबुल्लाह को अब तक इजरायल बड़ा नुकसान पहुंचा चुका है। ईरानी विदेश मंत्री के एयरक्राफ्ट से ही भागा नईम कासिम उसकी कई सरगनाओं को उसने ठिकाने लगा दिया है तो वहीं लगातार लेबनान में हमले कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नईम कासिम 5 अक्टूबर को ही बेरूत से निकल गया था। उसने इसके लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के विमान का इस्तेमाल किया। इस विमान के जरिए वह लेबनान और सीरिया की यात्रा पर निकलते थे। इसी को उन्होंने हिजबुल्लाह कमांडर को मुहैया करा दिया। 27 सितंबर को नसरल्लाह के मारे जाने के बाद नईम कासिम ने तीन भाषण भी दिए थे। वह इजरायल पर खूब गरजा था, लेकिन अब उसके लगातार हमलों से खौफ में है। बता दें कि इजरायल हिजबुल्लाह के भी कई नेताओं को हमास की तरह ही मार चुका है। नसरल्लाह के मारे जाने के बाद कमान संभाली नईम कासिम को हिजबुल्लाह के संस्थापक सदस्यों में माना जाता है। नसरल्लाह के मारे जाने के उसे ही पब्लिक रोल में देखा जा रहा था। ऐसे में उसका डर से भागना इजरायल को बढ़त दिलाने वाला है। नईम कासिम बीते कई दशकों से इस्लामिक संगठनों का हिस्सा रहा है और फिर जब हिजबुल्लाह बना तो उसका संस्थापक सदस्य रहा। इजरायल उसके पीछे पड़ा है ताकि उसे मार गिराने के बाद हिजबुल्लाह की लीडरशिप को खत्म किया जा सके।

अमित शाह ने कहा- उनके कर्तव्य परायणता की सराहना की और कहा कि बहादुर और वीर पुलिस कर्मी देश का गौरव हैं

  नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पुलिस स्मृति दिवस पर यहां राष्ट्रीय पुलिस स्मारक जाकर शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर श्री शाह ने पुलिस कर्मियों को संबोधित करते हुए उनके कर्तव्य परायणता की सराहना की और कहा कि बहादुर और वीर पुलिस कर्मी देश का गौरव हैं। उन्होंने कहा कि ये पुलिसकर्मी कश्मीर से कन्याकुमारी और कीबितू से कच्छ तक देश की रक्षा में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस पर वह पुलिस कर्मियों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन शहीद पुलिस कर्मियों की शहादत का सम्मान करने तथा उनके परिजनों को यह विश्वास दिलाने के लिए मनाया जाता है कि जिस उद्देश्य के लिए उनके परिवार के सदस्य ने बलिदान दिया है उसे हर हालत में पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस उन महान वीर पुलिस कर्मियों के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने 21 अक्टूबर 1959 को चीन की साजिश का मुंह तोड़ जवाब देते हुए देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया था। गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान कश्मीर और पूर्वोत्तर के क्षेत्र में हमारे वीर पुलिस कर्मियों तथा सैनिकों के समर्पण से करीब करीब शांति बहाली हो गई है। उन्होंने कहा कि बहादुर सुरक्षाकर्मी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए समर्पित हैं। श्री शाह ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानून यह सुनिश्चित करेंगे कि देश में दुनिया का सबसे बेहतर अपराधिक न्याय तंत्र स्थापित हो। इन नए कानून के पूरी तरह लागू हो जाने के बाद देश में किसी को भी न्याय के लिए 3 वर्ष से अधिक समय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।  

बंगाल की खाड़ी में ‘Cyclone Dana ‘ की दस्तक… 120KM की गति से चलेंगी हवाएं, इन राज्यों में भारी बारिश तूफान बढ़ाएगी आफत

 नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में तूफान आने का खतरा मंडरा रहा है. मौसम विभाग की मानें तो 23 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की आशंका है. वहीं, 24 अक्टूबर को ये तूफान ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों पर दस्तक दे सकता है, जिसकी वजह से इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है. IMD के मुताबिक, पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी अंडमान सागर पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना है. वहीं, उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी पर ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव के कारण आज 21 अक्टूबर की सुबह (05:30 बजे IST) पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी अंडमान सागर पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना है. बंगाल की खाड़ी में तूफान की आहट इसके पश्चिम-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ने और 22 अक्टूबर की सुबह तक एक दबाव क्षेत्र में तब्दील होने व 23 अक्टूबर तक पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है. उसके बाद इसके उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ने और 24 अक्टूबर की सुबह तक ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों से उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान अंडमान सागर पर बने एक चक्रवाती उच्च प्रभाव के कम दबाव वाले क्षेत्र में तब्दील होने की आशंका है. वहीं, मौसम की यह प्रणाली एक गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकती है. इस दौरान भारी बारिश होने की आशंका है, जिसको लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है. इसके अलावा मछुआरों को भी तटों से दूर रहने की सलाह दी गई है. मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, इस प्रकार के तूफान अक्सर अप्रत्याशित होते हैं और आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, और म्यांमार के तटवर्ती इलाकों में चक्रवात का खतरा बना रहता है. इस प्रणाली के अधिक मजबूत होकर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं. वहीं, निम्न दबाव उत्तर-पश्चिम से बीओबी के मध्य भागों की ओर बढ़ेगा और 23 अक्टूबर को एक अवसाद (Depression) में बदल जाएगा. ऐसा मालूम होता है कि यह मौसम प्रणाली ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ सकती है. इस स्थिति में अवसाद को और अधिक तीव्र होने के लिए समुद्र में बहुत कम समय मिलेगा, जिससे यह प्रणाली शुरुआती क्षेणी के तूफान का रूप ले पाएगी और इसके समुद्र तट से टकराने के लिए बहुत कठोर होने की संभावना नहीं है.

सेना ने आतंकियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया, एक को मार गिराया, गोला-बारूद और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

 बारामुला जम्मू कश्मीर के बारामुला में सेना की एक संयुक्त टीम ने हथियारों से लैस आतंकी को मार गिराया। इसके साथ ही सेना ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। इस दौरान यहां पर गोला-बारूद और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है। सेना के बयान में कहा गया है कि इस जखीरे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी युद्ध की तैयारी के लिए सामान जुटाया जा रहा है। मारे गए आतंकी के पास एक एके 47 राइफल, दो एके मैगजीन, 57 एके राउंड, दो पिस्टल मैगजीन के अलावा कई अन्य खतरनाक हथियार थे। इससे पहले आर्मी के चिनार कोर ने बताया कि घुसपैठ के खिलाफ इलाके में संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया था। बयान के मुताबिक घुसपैठ को लेकर मिली खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस ने एलओसी के करीब स्थित उरी और बारामुला में यह अभियान चलाया। संदिग्ध गतिविधि नजर आने के बाद सेना की चौकन्नी टुकड़ी ने चुनौती दी। इसके बाद सामने से फायरिंग होने लगे। जवाब में जवानों ने भी गोलियां बरसाईं। इससे पहले गांदरबल इलाके में आतंकी हमले में दो मजदूरों की हत्या कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक यह घटना रविवार शाम को हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन हमलों की निंदा की है और इन्हें कायराना कृत्य बताया है। उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा कि गैर-स्थानीय मजदूरों पर सोनमर्ग इलाके के गगनगीर इलाके में कायराना हमला हुआ है। यह लोग इलाके में एक बेहद अहम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। आतंकी हमले में दो की हत्या की गई है, दो-तीन घायल हैं। अब्दुल्ला ने लिखा कि मैं इस हमले की निंदा करता हूं और मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रेषित करता हूं। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में रविवार शाम को हुए आतंकी हमले में एक स्थानीय डॉक्टर सहित सात लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर गगनगीर के पास एक शिविर में हुआ जहां स्थानीय और गैर-स्थानीय मजदूर 6.5 किलोमीटर लंबी जेड-मोड़ सुरंग परियोजना के निर्माण पर काम कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार दो आतंकवादियों ने मजदूरों पर अंधाधुंध गोलीबारी की जिसके कारण दो गैर-स्थानीय मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हमले में एक स्थानीय डॉक्टर सहित नौ अन्य घायल हो गए। डॉक्टर सहित पांच घायलों ने बाद में दम तोड़ दिया।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की राशि प्रसूताओं को एक वर्ष से नहीं मिली है,लगभग एक लाख महिलाएं कर रही इंतजार

भोपाल केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की राशि प्रसूताओं को एक वर्ष से नहीं मिली है। लगभग एक लाख महिलाएं राशि की प्रतीक्षा कर रही हैं। राशि नहीं मिलने की 25 हजार से अधिक शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में पहुंच चुकी हैं। हर दिन 70 से 100 शिकायतें हो रही हैं। योजना के अंतर्गत महिलाओं को पहले प्रसव में पांच हजार रुपये तीन किस्तों में देने का प्रविधान है। तकनीकी समस्या से नहीं मिली राशि बताया जा रहा है कि योजना में कुछ बदलाव के साथ ही एनआईसी को इसका साफ्टवेयर संचालन करने के लिए दिया गया था। एनआइसी ने नया साफ्टवेयर तैयार किया, जिसमें नए हितग्राहियों को जोड़कर उन्हें लाभ दिया जा रहा है, लेकिन तकनीकी दिक्कत के चलते पुराने हितग्राहियों को पहले संचालित साफ्टवेयर से एनआइसी में शिफ्ट नहीं किया जा सका है। इस कारण उन्हें राशि नहीं मिल पा रही है। पुराने हितग्राहियों में कुछ की एक, कुछ को दोनों या फिर तीनों किस्त रुकी हुई हैं। दरअसल, भारत सरकार ने योजना में पात्रता की शर्तों में कुछ बदलाव किया था। पूर्व में यह प्रविधान था का पहले बच्चे में ही योजना का लाभ दिया जाएगा, बाद में यह जोड़ा गया कि दूसरी संतान बालिका है तो भी योजना का लाभ दिया जाएगा। दूसरा, पहले प्रसूता के परिवार की आय का कोई बंधन पात्रता के लिए नहीं था, पर बाद में आठ लाख रुपये की सीमा निर्धारित कर दी गई। इन बदलावों के साथ नए हितग्राहियों को जोड़कर लाभ दिया जा रहा है, पुराने हितग्राहियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रसूति सहायता योजना की राशि भी तीन माह से नहीं मिली मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को तीन माह से राशि नहीं मिली है। यह स्थिति पूरे प्रदेश की है। बताया जा रहा है बजट की कमी के चलते राशि नहीं मिल पा रही है। योजना के अंतर्गत असंगठित कामगार महिला श्रमिक को 16 हजार रुपये अलग-अलग किस्त में मिलते हैं।

कमला हैरिस सबसे तैयार उम्मीदवार, किया समर्थन: ओबामा

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की गहमागहमी के बीच यहां डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन की दूसरी रात पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कमला हैरिस का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने हैरिस को अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बताया। ओबामा ने कहा कि हमारे पास ऐसे शख्स को चुनने का मौका है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी लोगों को वो मौके देने की कोशिश में लगा दिए जो मौके अमेरिका ने उनको दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने का सम्मान हासिल किए हुए मुझे 16 साल हो गए हैं। इतने सालों बाद मैं बिना किसी हिचक कह सकता हूं कि आपका दोस्त होना मेरा सबसे बेहतरीन फैसला था। बराक ओबामा ने कहा कि हैरिस पांच नवंबर को इतिहास रचेंगी। वह अश्वेत और दक्षिण एशियाई मूल की पहली अमेरिकी राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। हमने मशाल हैरिस को सौंप दी है। लेकिन अभी डेमोक्रेट्स का काम खत्म नहीं हुआ है। ओबामा ने कहा कि कमला हैरिस और टिम वॉल्ज ऐसे नेता हैं, जो लोगों की भलाई से जुड़े काम को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन को बराक के अलावा मिशेल ओबामा ने भी संबोधित किया। दोनों ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखे हमले किए। मिशेल ने राष्ट्र से ट्रंप की विभाजनकारी राजनीति को अस्वीकार करने का आह्वान किया। इससे पहले कन्वेंशन के पहले दिन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्रंप पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप जब अमेरिका के बारे में बात करते हैं कि अमेरिका बिखरता हुआ देश है, तो उस संदेश के बारे में सोचें, जो दुनिया को जाता है। डोनाल्ड के पिछले कार्यकाल की तुलना में अमेरिका अब अधिक समृद्ध और सुरक्षित है। ट्रंप, पुतिन के सामने झुक गए। मैं और कमला हैरिस कभी ऐसा नहीं करते।  

नवंबर महीने में होने वाली छुट्टियों के बारे में जानकर खुशी से झूम उठेंगे, इतने दिन बंद रहेंगे स्कूल

हरियाणा अक्टूबर का आधा महीना बीत चुका है। नवंबर का महीना शुरु होने वाला है। नवंबर महीने की शुरुआत होते ही हरियाणा में छुट्टियों का मौसम शुरु हो जाएगा। नवंबर महीने में होने वाली छुट्टियों के बारे में जानकर खुशी से झूम उठेंगे। 1 नवंबर (शुक्रवार): हरियाणा दिवस और दीपावली नवंबर की शुरुआत ही दो महत्वपूर्ण पर्वों से होती है – हरियाणा दिवस और दीपावली। हरियाणा दिवस: हरियाणा के गठन का यह दिन पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया जाता है। सरकारी और गैर-सरकारी सभी संस्थान इस दिन बंद रहते हैं, जिससे बच्चों को इस दिन की छुट्टी का आनंद मिलेगा। दीपावली: इस दिन दीपों का पर्व भी है, जो हर भारतीय के दिल के करीब है। दीपावली की तैयारियों के साथ-साथ हरियाणा दिवस के समारोह भी इस दिन खास बनाते हैं। 2 नवंबर (शनिवार): विश्वकर्मा दिवस और गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले ही दिन दो और त्योहार हैं। विश्वकर्मा दिवस: इस दिन का महत्व विशेष रूप से निर्माण और इंजीनियरिंग कार्यों से जुड़े लोगों के लिए होता है। विश्वकर्मा जी को सृजन के देवता के रूप में पूजा जाता है। गोवर्धन पूजा: यह त्योहार दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है और इसका धार्मिक महत्व है। इन दोनों पर्वों के कारण स्कूलों में छुट्टी रहेगी। 9 नवंबर (शनिवार): दूसरा शनिवार हरियाणा के ज्यादातर सरकारी और निजी स्कूलों में हर महीने के दूसरे शनिवार को अवकाश होता है। नवंबर का दूसरा शनिवार 9 नवंबर को पड़ रहा है, जिससे बच्चों को एक और लंबी छुट्टी मिलेगी। 15 नवंबर (शुक्रवार): गुरु नानक जयंती नवंबर के मध्य में गुरु नानक जयंती आती है, जो सिख धर्म का एक प्रमुख पर्व है। इस दिन को प्रकाश उत्सव के रूप में मनाया जाता है, और पूरे भारत में इस अवसर पर अवकाश घोषित किया जाता है। हरियाणा के स्कूल भी इस दिन बंद रहेंगे। 5 नवंबर (रविवार): अहोई अष्टमी इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। इसके साथ ही कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भी इसी दिन मनाया जाएगा। 9 नवंबर (गुरुवार): रमा एकादशी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रमा एकादशी का व्रत इस दिन होगा। यह पर्व पूजा-अर्चना और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। 10 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस और यम दीपम दीपावली से पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग सोने, चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी करते हैं। साथ ही, यम दीपम भी इसी दिन मनाया जाता है।  

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