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सऊदी अरब ने भारत और अन्य देशों के साथ मजबूत संबंध, हाल ही में एक नई पहल का शुभारंभ किया

सऊदी अरब सऊदी अरब ने हाल ही में एक नई पहल का शुभारंभ किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय समाज और भारतीय तथा अन्य प्रवासी समुदायों के बीच मजबूत और सकारात्मक संबंध स्थापित करना है। इस पहल का नाम “वैश्विक सद्भाव पहल” रखा गया है, और इसका मुख्य फोकस जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक संवर्धन करना है। बुधवार रात को इस पहल की शुरुआत करते हुए सऊदी अरब के मीडिया उप मंत्री खालिद बिन अब्दुल कादिर अल-गामदी ने कहा, “यह पहल प्रवासियों की विभिन्न संस्कृतियों और उनके बीच सद्भाव को प्रदर्शित करेगी।” उन्होंने कहा कि यह पहल सऊदी अरब में रहने वाले विभिन्न प्रवासी समुदायों के योगदान को उजागर करेगी और उनकी संस्कृति को सम्मान देगी। विज़न 2030 का हिस्सा वैश्विक सद्भाव पहल, सऊदी अरब के ‘विज़न 2030’ के अंतर्गत आने वाले जीवन की गुणवत्ता कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कार्यक्रम सऊदी अरब के सामाजिक और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है। इस मौके पर भारत के राजदूत सुहेल एजाज़ खान और कई अन्य देशों के उच्चस्तरीय राजनयिक भी उपस्थित थे। राजदूत खान ने कहा कि सऊदी अरब में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समूह है, जिसकी संख्या लगभग 26 लाख है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में भारतीयों की संख्या में लगभग दो लाख की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि सऊदी अरब में बढ़ते आर्थिक अवसरों के साथ-साथ भारतीय कामगारों की अच्छी साख के कारण हो रही है। भारतीय कामगारों की अच्छी साख खान ने यह भी उल्लेख किया कि “विज़न 2030” के कारण सऊदी अरब में बड़े आर्थिक मौके खुल रहे हैं। उन्होंने कहा, “यहां भारतीयों की अच्छी साख है, जो उन्हें अधिक विश्वास के साथ काम करने की प्रेरणा देती है।” इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि भारतीय कामगारों की प्रोफाइल में भी बदलाव आया है। अब यहां ज्यादा कुशल और योग्य भारतीय कामगार आ रहे हैं, जो सऊदी अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती खान ने यह भी कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं, और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान भी हाल ही में जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। उन्होंने दोनों देशों के बीच थल सैनिक और नौसैनिक अभ्यास की जानकारी भी साझा की, जिससे संबंधों में और मजबूती आई है। रियाद सीज़न का आयोजन वैश्विक सद्भाव पहल के तहत 13 से 21 अक्टूबर तक अल-सुवेदी पार्क में ‘रियाद सीज़न’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों की विविध जीवन शैलियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत के अलावा अन्य देशों जैसे कि फिलीपींस, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, यमन, सूडान, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, बांग्लादेश और मिस्र भी शामिल हैं। अल-सुवेदी पार्क में भारतीय नृत्य मंडलियों, संगीत समूहों और गायकों ने अपने प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत किया है। भारतीय कलाकारों की भागीदारी इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले भारतीय कलाकारों में प्रसिद्ध संगीतकार हिमेश रेशमिया, रैपर एमीवे बंटाई और क्रिकेटर उमरान मलिक तथा एस श्रीसंत शामिल हैं। भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए विशेष रूप से भारतीय व्यंजनों, कपड़ों और हस्तशिल्प के लिए एक अलग बाजार भी स्थापित किया गया है, जो भारतीय सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। सऊदी अरब की यह नई पहल न केवल भारतीय प्रवासी समुदाय को सशक्त बनाएगी, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत करेगी। यह कार्यक्रम विभिन्न संस्कृतियों के बीच सद्भाव और एकता को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।  

इजरायली हमले में हमास के नए राजनीतिक नेता याह्या सिनेवार के भी मारे जाने की संभावना

दुबई इजरायल-हमास युद्ध को लेकर एक और बड़ी खबर आ रही है, जहां हमास के नए राजनीतिक नेता याह्या सिनेवार के भी मारे जाने की संभावना है। इजरायली सेना ने इसकी कहा है कि वह इसकी जांच कर रही है और पूरी संभावना है कि हमास चीफ उसके हमले में मारा गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी याह्या सिनेवार के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसका खंडन भी किया गया था। अब इजरायली सेना नई संभावनाओं के साथ इसकी जांच कर रही है। आतंकियों की नहीं हुई है पहचान समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इजरायली सेना ने गाजा पट्टी में एक ऑपरेशन के बाद हमास नेता याह्या सिनवार को मार गिराने का अनुमान लगाया है। सेना ने यह भी कहा है कि उसने तीन आतंकवादियों को निशाना बनाया था। सेना ने बयान में कहा, ‘इस स्तर पर आतंकवादियों की पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती है।’ इसने कहा कि इस बात के कोई संकेत नहीं थे कि जिस इमारत में तीन आतंकवादी मारे गए थे, वहां बंधक मौजूद थे। गौरतलब है कि सिनवार, 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमले का मुख्य साजिशकर्ता था, जिसके कारण गाजा में बड़े पैमान पर युद्ध छिड़ा। उसे अगस्त में तेहरान में पूर्व नेता इस्माइल हानिये की हत्या के बाद हमास का नेता नामित किया गया था। हमास ने नहीं की कोई टिप्पणी इधर, हमास की ओर से इस पूरे मामले पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं की गई है। यदि सिनवार की मौत की पुष्टि की जाती है तो इजरायली सेना और प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह एक बड़ी सफलता होगी, जिन्होंने हाल के महीनों में अपने दुश्मनों के प्रमुख नेताओं की हाई-प्रोफाइल हत्याओं की श्रृंखला शुरू की है। रॉयटर्स के मुताबिक सिनवार इजरायल की वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर है, लेकिन अब तक उसका पता नहीं लगाया जा पा रहा था। संभवतः वह पिछले दो दशकों में हमास द्वारा गाजा के नीचे बनाई गई सुरंगों के जाल में छिपा हुआ है।   हिजबुल्लाह चीफ को भी मार गिराया था इससे पहले इजरायल ने पिछले महीने बेरूत में ईरानी समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के नेता हसन नसरल्लाह को भी मार डाला। साथ ही समूह की सैन्य शाखा के शीर्ष नेतृत्व को भी मार डाला। हमास के नेतृत्व वाले बंदूकधारियों ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया। जवाब में इजरायल के अभियान में 42,000 से अधिक लोग मारे गए। गाजा का अधिकांश हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और इसकी अधिकांश आबादी विस्थापित हो गई।

गडकरी ने विक्रमादित्य सिंह को दिया जन्मदिन का तोहफा, मंडी जिला की दो सड़कों के लिए 21.05 करोड़ रुपए मंजूर किए

शिमला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को जन्म दिन का तोहफा दिया है। केंद्र ने मंडी जिला की दो सड़कों के लिए 21.05 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसके तहत चैलचौक-पंडोह सड़क के लिए 9.10 करोड़ रुपए तथा मंडी-कमांद कटौला सड़क के लिए 11.89 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। चैलचौक-गोहर-पंडोह सड़क के सुधार व सुदृढ़ीकरण के चलते पंडोह से चैलचौक तक वैकल्पिक सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था। एचएचएआई की सड़क के बंद होने पर इस वैकल्पिक सड़क मार्ग से यातायात चलाया जाएगा। इसके अलावा गत वर्ष 16 सितम्बर, 2023 को मंडी-कमांद कटौला-बजौरा सड़क में बारिश से हुए नुक्सान की भरपाई के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था। केंद्र ने इन दोनों प्रस्ताव को मंजूर कर दिया है। केंद्र ने भूस्खलन के कारण सड़कों के बंद होने के जोखिम को देखते हुए यह राशि मंजूर की है। इसको लेकर एनएचएआई ने एसई मंडी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्हें इन दोनों कार्यों के टैंडर दस्तावेज के साथ अकाऊंट व कैंसल चैक जमा करवाने को कहा है। इसके बाद टैंडर की राशि के आधार पर मंजूर राशि को विभाग के एकांऊट में जमा करवा दिया जाएगा। इसकी जानकारी लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने सोशल मीडिया पेज पर दी है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मेरे जन्मदिन के अवसर पर नितिन गडकरी ने बड़ा तोहफा दिया है। विक्रमादित्य ने कहा कि उन्होंने मंडी के जो मसले केंद्रीय मंत्री से पिछली मुलाकात में उठाए थे, उस पर 21 करोड़ रुपए का समर्थन लोक निर्माण विभाग को दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। याद रहे कि गत 3 अक्तूबर को केंद्र ने हिमाचल की 4 सड़कों व 1 पुल के लिए 293.36 करोड़ रुपए की राषि जारी की थी। यह राषि सीआरआईएफ के तहत मंजूर की गई थी।

कुर्सी बचाने के लिए ट्रूडो का नया दांव, अब राष्ट्रवाद-संप्रभुता मुद्दे बनाए मोहरे, जस्टिन ट्रूडो की राजनीति एक बार फिर चर्चा में

कनाडा कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने अपनी कुर्सी बचाने के लिए राष्ट्रवाद और संप्रभुता जैसे मुद्दों को उठाकर जनता का ध्यान अपनी नाकामियों से हटाने की कोशिश की है। ट्रूडो पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए भारत जैसे देशों पर आरोप लगाए हैं, और अब राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता और गिरती लोकप्रियता से पस्त ट्रूडो 2024 में कनाडा के कई प्रांतों में चुनाव होने वाले हैं, जिनमें नोवा स्कोटिया, ब्रिटिश कोलंबिया, न्यू ब्रंसविक और सस्केचेवान शामिल हैं। साथ ही, 2025 में देश के आम चुनाव होने हैं। ऐसे में, ट्रूडो की लिबरल पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उनकी लोकप्रियता ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, और उनके सहयोगी दल एनडीपी ने भी उनसे समर्थन वापस ले लिया है। सभी राजनीतिक विश्लेषण यह संकेत देते हैं कि आगामी चुनावों में ट्रूडो की पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है। उनकी सरकार की कई नीतियां जनता के बीच अलोकप्रिय साबित हो रही हैं, विशेषकर आर्थिक मंदी, महंगाई, और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, ट्रूडो की पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। पार्टी में आंतरिक तख्तापलट की चर्चा हो रही है, जो ट्रूडो के राजनीतिक करियर के लिए खतरा साबित हो सकता है। इस स्थिति में, ट्रूडो ने जनता का ध्यान अपनी असफलताओं से हटाने के लिए राष्ट्रवाद और संप्रभुता के मुद्दों को उठाया है, ताकि वे अपने खिलाफ उठ रहे विरोध को कम कर सकें। भारत पर आरोप सिर्फ राजनीति का हिस्सा नहीं सितंबर 2023 में, जी20 शिखर सम्मेलन के बाद, ट्रूडो ने अचानक भारत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ था। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा, और ट्रूडो ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का मुद्दा बना दिया।कनाडा का दावा है कि भारतीय गृह मंत्रालय इस हत्या में शामिल था, जबकि कनाडाई पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गैंग को इसके लिए जिम्मेदार मानती है। ट्रूडो ने दावा किया कि भारत के राजदूत और अन्य उच्च स्तरीय अधिकारी भी इस मामले में शामिल थे। लेकिन अब तक उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, और एक साल बाद भी मामला केवल आरोपों तक ही सीमित है। ट्रूडो की यह रणनीति उनके घरेलू राजनीतिक संकट से निकलने का एक तरीका है। उन्होंने राष्ट्रवाद और कनाडा की संप्रभुता का मुद्दा उठाकर खुद को एक ऐसा नेता दिखाने की कोशिश की है, जो अपने देश की सुरक्षा के लिए खड़ा है। इससे उन्हें चुनावी फायदे की उम्मीद है, क्योंकि यह कदम उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति संवेदनशील हैं।  हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रूडो का यह कदम सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। उनके इस निर्णय का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी प्रभाव पड़ रहा है, खासकर भारत-कनाडा संबंधों में। भारत के साथ बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर नकारात्मक असर डाला है। ट्रूडो को चीन और विदेशी ताकतों का स्पोर्ट यह भी चर्चा  है कि ट्रूडो को चीन और अन्य विदेशी संस्थाओं से वित्तीय और राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने ट्रूडो और उनकी लिबरल पार्टी में भारी निवेश किया है। इसके साथ ही, क्लॉस श्वाब के वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन और जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन ने भी ट्रूडो को समर्थन दिया है। इस समर्थन के चलते ट्रूडो की राजनीतिक पेंशन और सेवानिवृत्ति निधि सुरक्षित मानी जा रही है, जिससे वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें यकीन है कि भले ही उनकी सरकार चुनाव हार जाए, उनकी राजनीतिक स्थिति पर इसका बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।  

रणधीर जायसवाल ने कहा- जिन मुद्दों पर हमने कार्रवाई की मांग की थी, उन पर ट्रूडो द्वारा अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक तनाव पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयानों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री ट्रूडो की ‘वन इंडिया पॉलिसी’ को लेकर की गई टिप्पणियों को देखा है, लेकिन जिन मुद्दों पर हमने कार्रवाई की मांग की थी, उन पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। उनकी कथनी और करनी में बड़ा अंतर है।” लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बारे में भारत ने बताया था विदेश मंत्रालय ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर कनाडा द्वारा की गई आपत्तियों पर भी बयान दिया। जायसवाल ने आगे कहा, “हमने कनाडा को कुछ अनुरोध भेजे थे, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी करने को कहा था, लेकिन अब तक हमारी मुख्य चिंताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसमें राजनीतिक उद्देश्य भी छिपे हुए हैं।” ट्रूडो ने दावा किया था कि भारतीय राजनयिक उन कनाडाई लोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे जो नरेंद्र मोदी सरकार से असहमत हैं और इसे भारत सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह जैसे आपराधिक संगठनों तक पहुंचा रहे थे। भारत इन बेतुके दावों को पहले ही खारिज कर चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने कनाडा को 26 प्रत्यर्पण के अनुरोध भेजे और सभी पेंडिंग हैं। ये पिछले एक दशक या उससे अधिक समय से पेंडिंग पड़े हैं। इसके साथ ही कुछ अपराधियों की अनंतिम गिरफ्तारी के कई अनुरोध भी कनाडा की ओर से पेंडिंग हैं…हमने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों सहित अन्य गैंग के सदस्यों के बारे में कनाडाई सरकार के साथ सुरक्षा संबंधी जानकारी शेयर की थी और उनसे उन्हें (अपराधियों को) गिरफ्तार करने का अनुरोध किया था…अभी तक हमारे अनुरोध पर कनाडा की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है…हमें यह वास्तव में अजीब लगता है कि जिन लोगों को हम निर्वासित करना चाहते थे या जिन पर कार्रवाई की जानी थी, अब हमें बताया जा रहा है कि, आरसीएमपी (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) कनाडा में इन लोगों द्वारा किए गए अपराधों के लिए भारतीय पक्ष को दोषी ठहरा रही है।” कनाडाई आदेश से पहले ही बुलाए अपने राजनायिक इसके अलावा, भारत ने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनयिकों को कनाडा से वापस बुलाने का फैसला लिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए जायसवाल ने कहा, “हमने कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किया और साफ कहा कि हमें कनाडा सरकार पर अपने राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर कोई भरोसा नहीं है, इसलिए हमने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनयिकों को पहले ही वापस बुलाने का निर्णय लिया। इसके बाद कनाडा की ओर से उनको वापस बुलाने का आदेश आया था, लेकिन हमने पहले ही यह कदम उठा लिया था।” कनाडा द्वारा भारतीय राजनयिकों पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने कहा, “हमने इस मुद्दे पर अपना पक्ष बहुत स्पष्ट कर दिया है। बीते दो दिनों में कई प्रेस विज्ञप्तियां जारी की गई हैं जिनमें हमने अपना रुख साफ किया है। सितंबर 2023 से अब तक कनाडा सरकार ने हमारे साथ कोई भी सबूत साझा नहीं किया है। हाल ही में सार्वजनिक सुनवाई के बाद भी कनाडा (के पीएम) ने गंभीर आरोप लगाए, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया। प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा दिए गए बयानों से इन आरोपों की वास्तविकता पर भी सवाल उठता है। हमारी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है, हम इन झूठे आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। हम अपने राजनयिकों के खिलाफ झूठे आरोपों को खारिज करते हैं।”

किसानों से खेती पर गंभीरता से चर्चा हुई, कृषि को लाभकारी बनाने पर जोर: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि छोटे किसानों के लिए कृषि को लाभकारी बनाने पर जोर दिया जाएगा। श्री सिंह ने यहां किसान और किसान संगठनों से मुलाकात के अपनी साप्ताहिक कार्यक्रम के बाद कहा कि किसानों से खेती से संबंधित कई विषयों पर गंभीरता से चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों ने एक-दो या ढाई एकड़ ज़मीन वाले किसानों को लाभकारी खेती के लिए मॉडल कृषि फार्मिंग के प्रशिक्षण पर ज़ोर दिया है। श्री चौहान ने कहा कि किसानों के सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उनके समाधान का प्रयास किया जायेगा। इनमें से राज्यों को संबंधित विषय भेजेंगे और केंद्र सरकार के विषयों पर विभाग कार्रवाई करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों से संवाद बहुत उपयोगी‌ है और‌ इससे मूल समस्याओं की जानकारी मिल रही है। साथ ही सरकारी योजनाण्ं भी किसानों तक पहुंच रही हैं। संवाद में शामिल किसान अलग-अलग संगठनों और राज्यों से थे। श्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किये गये सभी प्रयासों सहित पिछले कल रबी की एमएसपी बढ़ाने की जानकारी किसानों को दी गयी। संवाद के दौरान किसानों ने एक एकड़ वाले खेत में ही लाभकारी खेती कर रहे किसानों के उदाहरण भी दिये। उन्होंने पानी पहुँचाने, उर्वरकों के प्रयोग, मिट्टी को स्वस्थ बनाना, प्राकृतिक आपदा में हुए नुकसान के कारण परेशानियां, चीनी मिलों के बंद होने और आवारा पशुओं की समस्याओं आदि को लेकर चर्चा की। किसानों ने श्रीअन्न को बढ़ावा देने को लेकर भी सुझाव दिये।

डिबालोंग में लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से उतरे, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

नई दिल्ली असम के डिबालोंग स्टेशन के पास एक ट्रेन डिरेल हो गई है। डिबालोंग में लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि ट्रेन डिरेल की वजह से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। यह दुर्घटना लुमडिंग डिवीजन के लुमडिंग-बदरपुर हिल सेक्शन में हुई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस दुर्घटना की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल हैंडल एक्स पर दी। दुर्घटना दोपहर करीब 3:55 बजे हुई रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि आज सुबह अगरतला से रवाना हुई मुंबई जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस असम के डिबालोंग स्टेशन पर दोपहर करीब 3:55 बजे पटरी से उतर गई। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे जोन के सीपीआरओ ने बताया, ‘ट्रेन के पावर कार और इंजन समेत आठ डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।’ इंजन सहित 8 डिब्बे पटरी से उतर सीपीआरओ, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने कहा कि अगरतला से आज सुबह रवाना हुई 2520 अगरतला-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस लुमडिंग डिवीजन के अंतर्गत डिबालोंग स्टेशन पर लुमडिंग-बदरपुर हिल सेक्शन में लगभग 15-55 बजे पटरी से उतर गई। ट्रेन के पावर कार और इंजन सहित 8 डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। बचाव और बहाली कार्यों की निगरानी दुर्घटना राहत ट्रेन और दुर्घटना राहत चिकित्सा ट्रेन बचाव और बहाली कार्यों की निगरानी के लिए डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लुमडिंग से घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी है। लुमडिंग-बदरपुर सिंगल लाइन सेक्शन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है। घटना स्थल पहुंची राहत टीम रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना राहत ट्रेन और दुर्घटना राहत चिकित्सा ट्रेन बचाव और बहाली कार्यों की निगरानी के लिए डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लुमडिंग से घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। हेल्पलाइन नंबर जारी सीपीआरओ ने बताया कि लुमडिंग-बदरपुर सिंगल लाइन सेक्शन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर 03674 263120, 03674 263126 जारी कर दिया गया है।

संबित पात्रा ने कहा- मुडा स्कैम में मुख्यमंत्री सिर से पांव तक खुद लिप्त हैं, देना चाहिए इस्तीफा

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर तंज कसते हुए कहा कि मुडा के चेयरमैन ने अभी-अभी इस्तीफा दिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भी इस्तीफा देना चाहिए। क्योंकि, मुडा स्कैम में मुख्यमंत्री सिर से पांव तक खुद लिप्त हैं। संबित ने कहा, चंद दिनों पहले सिद्धारमैया ने पेशकश की थी कि जो जमीन उन्हें मुआवजा के तौर पर आवंटित हुई थी, उसे वापस करेंगे। मुडा के चेयरमैन का इस्तीफा और सिद्धारमैया द्वारा जमीन वापस करने की पेशकश से साफ होता है कि इस स्कैम में कांग्रेस पार्टी के कर्नाटक के सबसे बड़े नेता सिद्धारमैया खुद लिप्त हैं। संबित ने प्रदेश की सरकार गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने एससी-एसटी वेलफेयर फंड का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, कर्नाटक में एससी-एसटी के लिए जो फंड है, उसका दुरुपयोग किया गया। 2024 के आम चुनाव में बेल्लारी लोकसभा में लगभग सात लाख से अधिक लोगों में 200 रुपए बांटे गए। संबित ने ईडी की चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा, कांग्रेस को वोट देने के लिए सात लाख लोगों को 200 रुपए बांटे गए। जहां तक यह मुडा स्कैम का मामला है, लेखा अधीक्षक पी.चंद्रशेखर ने आत्महत्या की थी। उन्होंने सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें बहुत कुछ चौंकाने वाला था। नोट में लिखा था, कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के खाते से 187 करोड़ रुपए अनाधिकृत हस्तांतरण हुए हैं। देश में एक नियम है कि जो पैसे एससी-एसटी समुदाय के लिए आवंटित है, उस फंड को डायवर्ट नहीं किया जा सकता है। संबित ने कहा, राहुल गांधी विदेश जाते हैं तो कहते हैं कि हम कभी सत्ता में आएंगे तो आरक्षण खत्म कर देंगे। दूसरी तरफ कर्नाटक की कांग्रेस सरकार है, जिसने एससी-एसटी कल्याण के लिए आवंटित बजट से लोकसभा चुनाव, कार, फ्लैट, निजी हवाई यात्रा, निजी कर्मचारियों को सैलरी, बिजली के बिलों का भुगतान किया है।  

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: सियासी सरगर्मियां तेज, धारावी से चुनाव लड़ सकते हैं समीर वानखेड़े

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि चर्चित आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े जल्द ही शिवसेना में शामिल होने वाले हैं। जानकारी के अनुसार वानखेड़े महायुति के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि उन्हें धारावी सीट से टिकट थमाया जा सकता है। धारावी की पहचान एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती के तौर पर होती है। यहां से समीर वानखेड़े की उम्मीदवारी से पार्टी को एक नई दिशा मिलने की संभावना है। उनकी एंट्री से राजनीतिक परिदृश्य में नए समीकरण बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। वानखेड़े की छवि एक सख्त अधिकारी के तौर पर है। वानखेड़े ने 2 अक्टूबर, 2021 को मुंबई तट के पास लक्जरी जहाज, कॉर्डेलिया क्रूज पर ड्रग्स का भंडाफोड़ करने के लिए छापेमारी की थी और शाहरुख खान के बेटे आर्यन सहित ग्लैमर जगत के 17 से अधिक लोगों को पकड़ा था। आर्यन खान ने एक महीना जेल में बिताया, और रिहाई के बाद, एक उच्च-स्तरीय एनसीबी जांच ने निष्कर्ष निकाला कि वह निर्दोष था और उसे उस मामले में फंसाया गया था। आपको बताते चलें, महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में 20 नवंबर को चुनाव होंगे, जबकि 23 नवंबर को वोटों की गिनती होगी। भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक, महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए एक लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि ईसीआई दोनों राज्य में समावेशी और सुलभ चुनावों के जरिए सुचारू मतदान अनुभव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजीव कुमार ने बताया था कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में 9.63 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे, जिनमें 4.97 करोड़ पुरुष वोटर हैं, जबकि 4.66 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 1.85 करोड़ युवा वोटरों की उम्र 20 से 29 साल के बीच है। वहीं, 20.93 लाख वोटर पहली बार मतदान में हिस्सा लेंगे। 12.43 लाख वोटरों की उम्र 85 साल से अधिक है। इसके साथ ही ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या भी 6,031 है।  

विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ श्री ट्रूडो पर

नई दिल्ली भारत ने कनाडा में एक जांच आयोग में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयान का खंडन करते हुए दोहराया है कि उनकी सरकार ने भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं दिए हैं और इस मामले की वजह से भारत कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ श्री ट्रूडो पर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जांच आयोग में श्री ट्रूडो के बयान को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, “आज हमने जो सुना है, वह केवल उस बात की पुष्टि करता है, जो हम लगातार कहते आ रहे हैं। कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में हमें कोई भी सबूत पेश नहीं किया है।” श्री जायसवाल ने कहा, “इस नुकसान की जिम्मेदारी इस तरह के गैर जिम्मेदाराना एवं अभिमानी व्यवहार की है। भारत-कनाडा संबंधों में जिस तरह का व्यवहार खराब हुआ है, उसका सारा दोष अकेले प्रधानमंत्री ट्रूडो पर है।”  

संवैधानिक है नागरिकता अधिनियम, देश की सर्वोच्च अदालत ने 4-1 की बहुमत से फैसला सुनाया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने असम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 1985 में संशोधन के माध्यम से नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। देश की सर्वोच्च अदालत ने 4-1 की बहुमत से फैसला सुनाया। संविधान पीठ ने नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की वैधता की पुष्टि की है। इसके तहत 1 जनवरी, 1966 और 25 मार्च, 1971 के बीच असम में प्रवेश करने वाले अवैध अप्रवासियों को नागरिकता का लाभ दिया गया था। आपको बता दें कि इनमें से अधिकतर बांग्लादेश से थे। सीजेआई धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुद्रेश और मनोज मिश्रा की पीठ ने इसके पक्ष में फैसला सुनाया। वहीं, जस्टिस जेबी पारदीवाला ने इस प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए इसे भविष्य में प्रभावी माना। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुद्रेश और मनोज मिश्रा की बहुमत की राय से असहमति जताई। यह आदेश उस याचिका पर आया जिसमें कहा गया था कि बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) से शरणार्थियों के आने से असम के जनसांख्यिकीय संतुलन पर असर पड़ा है। इसमें कहा गया था कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए राज्य के मूल निवासियों के राजनीतिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। बहुमत का फैसला पढ़ते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि धारा 6ए का अधिनियमन असम के समक्ष उपस्थित एक अनूठी समस्या का राजनीतिक समाधान है। बांग्लादेश के निर्माण के बाद राज्य में अवैध प्रवासियों के बड़े पैमाने पर प्रवेश ने इसकी संस्कृति और जनसांख्यिकी को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “केंद्र सरकार इस अधिनियम को अन्य क्षेत्रों में भी लागू कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। यह असम के लिए खास बना था। असम में आने वाले प्रवासियों की संख्या और संस्कृति आदि पर उनका प्रभाव असम में अधिक है। असम में 40 लाख प्रवासियों का प्रभाव पश्चिम बंगाल के 57 लाख से अधिक है, क्योंकि असम का क्षेत्रफल पश्चिम बंगाल से कम है।”

मोटिवेशनल स्पीकर मुंबई के लोकप्रिय इंफ्लूएंसर मुनव्वर जमा और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया

सिकंदराबाद सिकंदराबाद के कुम्मारिगुडा में मुथ्यालम्मा मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद हैदराबाद पुलिस ने मुंबई के लोकप्रिय इंफ्लूएंसर मुनव्वर जमा और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इन लोगों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और नफरत फैलाने का आरोप लगा है। दो अन्य लोगों में अब्दुल रशीद बशीर अहमद और रहमान का नाम शामिल है। ये दोनों रेजिमेंटल बाजार में मेट्रोपोलिस होटल के मालिक और प्रबंधक हैं। पुलिस ने कहा कि वे एक महीने तक चलने वाले इस कार्यशाला के आयोजन की आड़ में हिंदुओं के प्रति नफरत भड़काया गया। पुलिस के अनुसार भारत के विभिन्न हिस्सों से 151 लोग आए थे। उनमें सलमान सलीम ठाकुर उर्फ ​​सलमान भी शामिल था, जिसने 14 अक्टूबर को मंदिर में घुसकर एक स्थानीय देवता की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया। उसे स्थानीय लोगों ने ऐसा करते हुए पकड़ लिया और पुलिस को सौंपने से पहले उसकी पिटाई कर दी। उसका वर्तमान में एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस अब इसमें शामिल होने वाले अन्य व्यक्तियों और जमा के पिछले रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मुनव्वर ज़मा ने न केवल धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दिया, बल्कि उन्होंने प्रतिभागियों को दंगे भड़काने के लिए उकसाया। गोपालपुरम पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर एल सुरेश ने कहा, “उन्होंने सलमान को मुथ्यालम्मा मंदिर में देवी की मूर्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए भी उकसाया।” जमा ने कार्यशाला आयोजित करने की अनुमति नहीं ली थी। बशीर और रहमान ने आयोजित करने में उनकी मदद की। पुलिस ने इसकी जानकारी दी है। तीनों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उन पर धारा 299 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं का अपमान या अपमान), 192 (दंगा भड़काने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण या बेवजह उकसावा), 196 (विभिन्न आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और घृणा को बढ़ावा देना), 223 (लोक सेवकों के आदेशों की अवहेलना करना जिससे बाधा या खतरा हो सकता है) और बीएनएस की धारा 49 (अपराध करने के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम सम्मेलन की रिकॉर्डिंग, प्रतिभागियों को वितरित की गई सामग्री और कई अन्य विवरणों की भी जांच कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागियों को होटल के 49 कमरों में ठहराया गया था। पुलिस ने अब तक पाया है कि ज़ामा इंग्लिश हाउस अकादमी का संस्थापक है और खुद को एक प्रेरक वक्ता और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक के रूप में पहचानता है।

पूरे विश्व को महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं ग्रहण कर शांति की राह पर चलना चाहिए: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पूरे विश्व को महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं ग्रहण कर शांति की राह पर चलना चाहिए, क्योंकि दुनिया को युद्ध में नहीं, बल्कि बुद्ध में समाधान मिल सकता है। श्री मोदी ने दिल्ली के विज्ञान भवन में अंतरराष्ट्रीय अभिधम्म दिवस और पाली को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अस्थिरता से ग्रस्त है, बुद्ध न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि एक जरूरत भी हैं। उन्होंने कहा, “मैं आज अभिधम्म पर्व पर पूरे विश्व का आवाहन करता हूं- बुद्ध से सीखिए…युद्ध को दूर करिए…शांति का पथ प्रशस्त करिए…क्योंकि, बुद्ध कहते हैं- “नत्थि-संति-परम-सुखं” अर्थात्, शांति से बड़ा कोई सुख नहीं है।”उन्होंने कहा, “नही वेरेन वैरानि सम्मन्तीध कुदाचनम्, अवेरेन च सम्मन्ति एस धम्मो सनन्ततो” अर्थात वैर से वैर, दुश्मनी से दुश्मनी शांत नहीं होती। वैर अवैर से, मानवीय उदारता से खत्म होता है। बुद्ध कहते हैं- “भवतु-सब्ब-मंगलम्”।। यानी, सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो- यही बुद्ध का संदेश है, यही मानवता का पथ है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि हर देश अपनी विरासत को अपनी पहचान से जोड़ता है, लेकिन भारत इस मामले में बहुत पीछे रह गया है। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले आक्रमणकारियों ने भारत की पहचान को मिटाने की कोशिश की। बाद में गुलाम मानसिकता से ग्रसित लोगों ने ऐसा किया। आजादी के बाद एक ऐसे समूह ने देश पर कब्जा कर लिया, जो इसे अपनी विरासत की विपरीत दिशा में ले गया। उन्होंने कहा कि पाली को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देना भगवान बुद्ध की महान विरासत का सम्मान है। भाषा सभ्यता और संस्कृति की आत्मा है। पाली भाषा को जिंदा रखना, भगवान बुद्ध के शब्दों को जिंदा रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “अभिधम्म दिवस हमें याद दिलाता है कि करुणा और सद्भावना से ही हम दुनिया को और बेहतर बना सकते हैं। इससे पहले 2021 में कुशीनगर में ऐसा ही आयोजन हुआ था। वहां उस आयोजन में भी मुझे शामिल होने का सौभाग्य मिला था और ये मेरा सौभाग्य है कि भगवान बुद्ध के साथ जुड़ाव की जो यात्रा मेरे जन्म के साथ ही शुरू हुई है, वो अनवरत जारी है। मेरा जन्म गुजरात के उस वडनगर में हुआ, जो एक समय बौद्ध धर्म का महान केंद्र हुआ करता था। उन्हीं प्रेरणाओं को जीते-जीते मुझे बुद्ध के धम्म और शिक्षाओं के प्रसार के इतने सारे अनुभव मिल रहे हैं।” श्री मोदी ने कहा, “पिछले 10 वर्षों में भारत के ऐतिहासिक बौद्ध तीर्थ-स्थानों से लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक नेपाल में भगवान बुद्ध की जन्मस्थली के दर्शन, मंगोलिया में उनकी प्रतिमा के अनावरण से लेकर श्रीलंका में वैशाख समारोह तक….मुझे कितने ही पवित्र आयोजनों में शामिल होने का अवसर मिला है। मैं मानता हूँ, संघ और साधकों का ये संग, ये भगवान बुद्ध की कृपा का ही परिणाम है। मैं आज अभिधम्म दिवस के इस अवसर पर भी आप सभी को और भगवान बुद्ध के सभी अनुयायियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ। आज शरद पूर्णिमा का पवित्र पर्व भी है। आज ही, भारतीय चेतना के महान ऋषि वाल्मीकि जी की जन्म जयंती भी है। मैं समस्त देशवासियों को शरद पूर्णिमा और वाल्मीकि जयंती की भी बधाई देता हूं” उन्होंने कहा कि इस वर्ष अभिधम्म दिवस के आयोजन के एक साथ, एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी जुड़ी है। भगवान बुद्ध के अभिधम्म, उनकी वाणी, उनकी शिक्षाएँ, जिस पाली भाषा में ये विरासत विश्व को मिली हैं, इसी महीने भारत सरकार ने उसे क्लासिकल लैंग्वेज (शास्त्रीय भाषा) का दर्जा दिया है। इसलिए, आज ये अवसर और भी खास हो जाता है। पाली शास्त्रीय भाषा का ये दर्जा, पाली भाषा का ये सम्मान भगवान बुद्ध की महान विरासत का सम्मान है। श्री मोदी ने कहा, “आप सभी जानते हैं, अभिधम्म धम्म के निहित है। धम्म को, उसके मूल भाव को समझने के लिए पाली भाषा का ज्ञान आवश्यक है। धम्म यानी, बुद्ध के संदेश, बुद्ध के सिद्धान्त…धम्म यानी, मानव के अस्तित्व से जुड़े सवालों का समाधान…धम्म यानी, मानव मात्र के लिए शांति का मार्ग…धम्म यानी, बुद्ध की सर्वकालिक शिक्षाएँ…..और, धम्म यानी, समूची मानवता के कल्याण का अटल आश्वासन! पूरा विश्व भगवान बुद्ध के धम्म से प्रकाश लेता रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से पाली जैसी प्राचीन भाषा, जिसमें भगवान बुद्ध की मूल वाणी है, आज सामान्य प्रयोग में नहीं है। भाषा केवल संवाद का माध्यम भर नहीं होती। भाषा सभ्यता और संस्कृति की आत्मा होती है। हर भाषा से उसके मूल भाव जुड़े होते हैं। इसलिए, भगवान बुद्ध की वाणी को उसके मूल भाव के साथ जीवंत रखने के लिए पाली को जीवंत रखना, ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि हमारी सरकार ने बड़ी नम्रता पूर्वक ये ज़िम्मेदारी निभाई है। भगवान बुद्ध के करोड़ों अनुयायियों को, उनकी लाखों भिक्षुकों की अपेक्षा को पूरा करने का हमारा नम्र प्रयास है। मैं इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए भी आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। भाषा, साहित्य, कला, आध्यात्म…,किसी भी राष्ट्र की ये धरोहरें उसके अस्तित्व को परिभाषित करती हैं। इसीलिए, आप देखिए, दुनिया के किसी भी देश में कहीं कुछ सौ साल पुरानी चीज भी मिल जाती है, तो उसे पूरी दुनिया के सामने गर्व से प्रस्तुत करता है।”

SGPC ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह का इस्तीफा किया रद्द

अमृतसर SGPC  ने तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दिया इस्तीफा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि हरप्रीत सिंह की सेवाओं की बहुत जरूरत है। वह ज्ञानी हरप्रीत सिंह का इस्तीफा रद्द करते है। उन्होंने हरप्रीत सिंह से अनुरोध किया गया कि वह उनका नेतृत्व करते रहें।         एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कई वर्षों से एस.जी.पी.सी. सिख मुद्दों का प्रतिनिधित्व करती आ रही है। वहीं एस.जी.पी.सी. सभी तख्त साहिबानों के जत्थेदारों का दिल से सम्मान करती है। उनका कहना है कि सिखों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सभी को मिल कर एस.जी.पी.सी. को बचाना होगा।   एसजीपीसी ने की प्रेस कांफ्रेंस एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने आज प्रेस कान्फ्रेंस की और उसमें कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सेवाओं की अभी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को बहुत जरुरत है। वह अलग अलग पदों के लिए सलाह भी करते हैं और उनकी अगुवाई भी करते हैं। इसीलिए वह उनके अपील करते हैं कि जैसे पांच सिंह साहिबान अगुवाई करते हैं वैसे आपको भी करनी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में जो भी श्री अकाल तख्त साहिब आता है तो एक चिट्ठी पकड़ा जाता है और फिर खुद ही इसका अपने तरीके से व्याख्यान कर जाते हैं। खुद ही कंप्लेंटेंट और खुद ही जज बन जाते हैं। लोग पंथ के पास आकर सियासी रोटियां सेक रहे हैं। इसीलिए पंथ के ओहदेदारों से अपील है कि वह सार्थक रोल अदा करें। हरजिंदर सिंह ने बताया कि कल रात को भी फोन कर ज्ञानी हरप्रीत सिंह को बता दिया गया था कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाना है। उनकी सेवाएं बहुमूल्य हैं। उन्होंने कहा कि बतौर पोलिटिशन बोलते रहो, लेकिन तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सत्कार योग्य हैं, तो कोई भी बात करनी है तो फिर पब्लिकली ना की जाए। उन्होंने कहा कि सिंह साहिब के आदेशों के अनुसार, अंदर रहकर बात की जाए और पब्लिकी ना की जाए। क्योंकि पब्लिक तक बात जाती है तो वह भयंकर रुप धारण कर लेती है। । उन्होंने कहा कि जत्थेदार कौम की अगुवाई करते हैं। बड़ी सेवाओं को मुख्य रखते हुए अगुवाई करने वाले सारे सम्मानीय है और इनकी मर्यादा भी है। उन्होंने अंत में कहा कि ववह सीधे तौर पर कहना चाहते हैं कि वह विश्वास दिलवाते हैं कि वह ज्ञानी हरप्रीत सिंह के साथ हैं और उन्हें अगुवाई करते रहने के लिए अपील करते हैं। भावुक हो गए थे हरप्रीत सिंह आपको बता दें कि, ज्ञानी हरप्रीत सिंह बेहद भावुक होकर कहा था कि कि बीते दिन विरसा सिंह वल्टोहा के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से आदेश दिए गए थे। लेकिन उसके बाद भी लगातार हर घंटे उन्हें धमकियां दी जा रही हैं और उसके परिवार को नंगा करने के बारे में कहा जा रहा है और उनकी बेटियों के बारे में भी बोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह विरसा सिंह वल्टोहा से डरने वाले नहीं है लेकिन विरसा सिंह वल्टोहा का साथ शिरोमणि अकाली दल का सोशल मीडिया विंग कर रहा है और अकाली दल के नए लीडर कर रहे हैं जिनका पंथक परम्पराओं से कोई लेना देना नहीं हो वह उनका साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरसा वल्टोहा से वो डरने वाले नहीं है लेकिन अकाली दल के थर्ड क्लास नेताओं का उसका साथ देना उन्हें बेहद दुखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह बेटियों के पिता भी हैं, इसीलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह एसजीपीसी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने उनका साथ दिया, वह सोच भी नहीं सकते थे कि विरसा सिंह वल्टोहा इतना ज्यादा गिर जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के एजेंट होने का आरोप लगाने की जो कोशिश उनकी असफल रही उसके बाद अब वह घटिया हरकतों पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि वह पंथ के लोगों को जानकारी देना चाहते थे और अपनी संस्था का हमेशा सम्मान करते रहे हैं और करते रहेंगे। अकाल तख्त ने दिए थे इस्तीफा नामंजूर करने के आदेश इसके बाद कल देर शाम ही श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी को आदेश दिए थे कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह का इस्तीफा नामंजूर कर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उनका इस्तीफा मंजूर किया गया तो पांचों सिंह साहिबान इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे। गौरतलब है कि तख्त श्री दमदमा साहिब से ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने जत्थेदार के पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। ज्ञानी हरप्रीत सिंह पर लगातार विरसा सिंह वल्टोहा द्वारा सवार उठाए जा रहे थे। इसके बाद ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भावुक होते हुए बयान दिया और वीडियो जारी कर अपना इस्तीफा देने की पुष्टि की। उन्होंने विरसा सिंह वल्टोहा द्वारा निचले स्तर की बयानबाजी को अपने इस्तीफे का कारण बताया। इसके साथ ही कहा कि वल्टोहा द्वारा उनके खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। यहां तक की उनके परिवार को धमकियां मिल रही हैं।      

धान की खरीद न होने के विरोध में भाकियू उगराहां ने फ्री करवाया दप्पर टोल प्लाजा

सिद्धपुर  भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने पूरे पंजाब में धान की उचित खरीद व भुगतान न होने पर गुरुवार को सभी टोल फ्री करवा दिए। लालड़ू में  ब्लाक प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर के नेतृत्व में किसानों ने दप्पर टोल प्लाजा पर धरना लगा दिया। इस दौरान किसानों ने टोल के सभी लेन मुक्त कर दिए। यूनियन के किसान नेता लखविंदर सिंह के नेतृत्व में दर्जनों किसान सुबह करीब दस बजे दप्पर टोल प्लाजा पर पहुंचे। किसानों ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दरियां बिछाकर बैठ गए। किसानों ने पंचकूला में शपथ ग्रहण समारोह में जा रहे बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने भी नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। वाहन चालक इस दौरान बिना टोल दिए निकलते रहे। किसानों ने बताया कि धान की उचित खरीद व भुगतान न होने के कारण किसान मंडियों मे बेहद परेशान हैं। किसानों ने लालडू मार्केट कमेटी के गेट को लगाया ताला भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर ब्लॉक डेराबस्सी के किसानों ने धान की खरीद, उठाने और भुगतान न होने को लेकर मार्केट कमेटी लालडू को ताला लगा दिया है। इस मौके पर किसानों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेता जसविंदर सिंह टिवाणा ने बताया कि पिछले कई दिनों से स्थानीय अनाज मंडियों में धान की खरीद, उठान और भुगतान न होने को लेकर किसान बहुत परेशान हैं। जिसके चलते उन्होंने आज मार्केट कमेटी लालडू दफ्तर को ताला लगाकर पूरी तरह से बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी समस्या का हल नहीं होता वे अपना रोष प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस मौके पर काफी संख्या में किसान मौजूद थे।  

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