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जॉन हॉपफील्ड और ज्योफ्री हिंटन को फिजिक्स नोबेल पुरस्कार?, मशीन लर्निंग को सक्षम बनाने वाली, 10 लाख अमेरिकी डॉलर मिलेगा

स्टॉकहोम फिजिक्स के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कारों की घोषणा हो गई है। इस साल यह सम्मान वैज्ञानिक जॉन होपफील्ड और जेफ्री हिंटन को दिया जाएगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पुरस्कार देने वाली संस्था के हवाले से बताया कि इन वैज्ञानिकों को आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क के भीतर मशीन लर्निंग को सक्षम बनाने से जुड़े आविष्कार के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा। गौरतलब है कि नोबेल प्राइज के साथ 11 मिलियन स्वीडिश क्राउन ($1.1 मिलियन) की पुरस्कार राशि दी जाती है, जिसे विजेताओं के बीच साझा किया जाता है, अगर यह एक से अधिक हैं को। फिजिक्स के लिए यह पुरस्कार रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा प्रदान किया जाता है। अमेरिका में ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के पियरे अगस्टीनी, जर्मनी में मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट ऑफ क्वांटम ऑप्टिक्स तथा लुडविग मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिक के फेंरेस क्रौस और स्वीडन स्थित लुंड यूनिवर्सिटी की एने लुइलिये को इस सम्मान से नवाजा गया था। नोबेल पुरस्कार में 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (10 लाख अमेरिकी डॉलर) की नकद राशि प्रदान की जाती है। यह धन पुरस्कार के संस्थापक स्वीडिश नागरिक अल्फ्रेड नोबेल की संपत्ति में से दिया जाता है जिनका 1896 में निधन हो गया था। नोबेल पुरस्कार विजेताओं को नोबेल की पुण्यतिथि 10 दिसंबर पर सम्मानित किया जाएगा। माइक्रो आरएनए की खोज के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों विक्टर एंब्रोस और गैरी रुवकुन को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा सोमवार को की गई। बुधवार को रसायन विज्ञान और बृहस्पतिवार को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की जाएगी। शांति के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और अर्थशास्त्र के लिए यह घोषणा 14 अक्टूबर को की जाएगी।

आरजी कर अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में 50 वरिष्ठ चिकित्सकों ने दिया इस्तीफा

कोलकाता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के करीब 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया है. इन सभी डॉक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों के आमरण अनशन के प्रति अपना समर्थन और एकजुटता दिखाते हुए अपने पद छोड़ दिए हैं. सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला मंगलवार सुबह मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के प्रमुखों की बैठक में लिया गया. एक सीनियर डॉक्टर ने बताया, “मंगलवार को विभागाध्यक्षों की बैठक में यह फैसला लिया गया है. हमारे अस्पताल के सभी 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे पर हस्ताक्षर किए हैं. यह उन जूनियर डॉक्टरों के प्रति हमारी एकजुटता व्यक्त करने के लिए है, जो पीड़िता की इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं.” एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के डॉक्टर भी अपने इस्तीफे दे सकते हैं. पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों के संयुक्त मंच ने जूनियर डॉक्टरों के साथ एकजुटता का संकल्प लिया है, जो आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही भ्रष्ट स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं. जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर हैं. बताते चलें कि दो दिन पहले ही कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में थ्रेट कल्चर और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही कमेटी ने बड़ा एक्शन लिया था. इस कमेटी ने 10 डॉक्टरों समेत 59 स्टाफ को सस्पेंड कर दिया. इनमें डॉक्टर, इंटर्न्स, स्टूडेंट्स और हाउस स्टाफ शामिल हैं. इन डॉक्टरों पर कई आरोप लगाए गए हैं, जिसमें रैगिंग का भी मामला शामिल है. सस्पेंशन ऑर्डर से पहले जांच कमेटी ने एक बैठक की, जिसमें अधिकारी-डॉक्टर्स और इंटर्न्स की तरफ से प्रतिनिधि शामिल हुए थे. बैठक के दौरान मेडिकल छात्र बाहर नारेबाजी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने अस्पताल में ‘थ्रेट कल्चर’ के आरोपी 59 लोगों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की थी. दस डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. इसके साथ अन्य पर भी कड़ी कार्रवाई की गई. निष्कासित डॉक्टरों में सौरभ पाल, आशीष पांडे (जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया), अभिषेक सेन, आयुष्री थापा, निरंजन बागची, शरीफ हसन, नीलाग्नि देबनाथ, अमरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह और तनवीर अहमद काजी शामिल हैं. उन्हें अगले 72 घंटों में हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया. इन आरोपियों के नामों को राज्य मेडिकल काउंसिल को भी भेजा जाएगा, जिससे उनके रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा सके. साथ ही इस्तीफे में कहा गया है कि हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह तुरंत प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों के साथ समझौता करे. हम आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर हैं और सामूहिक इस्तीफा दे रहे हैं, क्योंकि सरकार भूख हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों की बिगड़ती हालत से बेखबर है और अगर हालात की मांग हुई तो हम व्यक्तिगत इस्तीफा भी देंगे. बता दें कि जूनियर डॉक्टर 10 सूत्री मांगपत्र को सामने रखते हुए आंदोलन कर रहे हैं. शुक्रवार को काम बंद करने के बाद जूनियर डॉक्टर शनिवार से आमरण अनशन पर हैं. मूसलाधार बारिश के बावजूद उनकी भूख हड़ताल जारी है. इससे पहले वरिष्ठ डॉक्टर अपने जूनियर समकक्षों के साथ खड़े थे और भूख हड़ताल का समर्थन कर रहे थे. अब आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रोफेसर और डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफे की राह अपना ली है. अन्य मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ डॉक्टरों के भी यही करने की संभावना है. दुर्गा पूजा और पीजी कॉलेज की परीक्षाएं आगे होने से आशंका है क्यों कि सामूहिक इस्तीफे के कारण मेडिकल कॉलेज में समस्याएं पैदा हो सकती हैं. प्रोफेसर और डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे से सेवाएं बाधित हो सकती हैं. अब सवाल यह है कि जूनियर डॉक्टरों की क्लास कौन लेगा. वहीं सामूहिक इस्तीफे के बारे में आरजी कर अस्पताल के ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर देवव्रत बिस्वास ने कहा कि इस्तीफा देने का मतलब यह नहीं है कि मैं अस्पताल छोड़ दूंगा. इसके लिए नोटिस पीरियड होता है. ऐसा नहीं है कि हम मरीजों का इलाज नहीं करेंगे. हम ऐसा नहीं कर सकते. यह हमारा विरोध है. मैं राज्य सरकार से मांग करता हूं कि वह आकर आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों से बात करे और उनकी मांगों का तुरंत निपटारा करे.  

राष्ट्रपति मुर्मु अपने हाथों से मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया

नई दिल्ली भारत का प्रतिष्ठित और सबसे सम्मानित 70वां नेशनल अवॉर्ड्स आज दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ. इस सेरेमनी में फिल्म जगत की बेहतरीन फिल्मों, उनकी कास्ट और क्रू को उनके मेहनत के लिए सम्मान दिया गया. अवॉर्ड की अनाउंसमेंट अगस्त में ही कर दी गई थी. अवॉर्ड फंक्शन के लिए नीना गुप्ता, ऋषभ शेट्टी, सूरज बड़जात्या और नित्या मेनन समेत कई सितारे इसके लिए दिल्ली पहुंचे, जिन्हें अवॉर्ड दिया गया. देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु खुद अपने हाथों से ये सम्मान सभी सितारों को सौंपा.  नेशनल अवॉर्ड किसी भी फिल्म पर्सनैलिटी के लिए सबसे बड़ी अचीवमेंट माना जाता है. इस बार ये अवॉर्ड उन फिल्मों के लिए दिए गए हैं जिन्हें फिल्म सेंसर बोर्ड ने 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 के बीच सेंसर सर्टिफिकेट दिया था.  मिथुन का सराहनीय योगदान इस बार समारोह में बॉलीवुड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती को भी दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया. हाल ही में इसका ऐलान किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सिनेमा में एक्टर के योगदान की तारीफ की थी. उनकी जर्नी काफी इंस्पिरेशनल रही है. अवॉर्ड मिलने के बाद मिथुन ने अपनी जर्नी के बारे में भी बताया. वो बोले, ”नेशनल अवॉर्ड मिला तो खुद को अल-पचीनो समझने लगा था, फिर मुझे एक लात पड़ी, तो अकल आई. मेरे रंग की वजह से मुझे कुछ सुनने को मिला. कहा जाता था कि ये बॉलीवुड में ये काला रंग नहीं चलेगा. मैं सोचता था कि करूं क्या, मैं भगवान से कहता था कि हे भगवान इस रंग का क्या करूं, ये तो चेंज नहीं कर सकता. तो मैंने सोचा मैं पैरों से डांस करूंगा, मैं ऐसा डांस किया पैरों से, इतना थिरका कि लोगों का ध्यान मेरे पैरों पर गया ही नहीं. उस दिन के बाद से मैं बन गया सेक्सी, डस्की, बंगाली बाबू.  मैं भगवान से बहुत शिकायत करता था. लेकिन आज ये अवॉर्ड मिलने के बाद मैंने ये शिकायत करना छोड़ दिया. मैंने सिर्फ शुक्रियाअदा किया. मैं नए लोगों से कहूंगा कि हिम्मत नहीं हारना, सपना देखना कभी बंद नहीं करना. खुद सो जाना लेकिन सपनों को कभी सोने नहीं देना. मैं कुछ बन सकता हूं तो तुम भी बन सकते हो.” बता दें, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ऐलान कर लिखा था- कोलकाता की सड़कों से सिनेमा की दुनिया में ऊंचाई छूने तक. मिथुन दा की जर्नी ने हर जनरेशन को इंस्पायर किया है. मैं ये ऐलान करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि दादा साहेब फाल्के सेलेक्शन जूरी ने मिथुन चक्रवर्ती को इंडियन सिनेमा में उनके अहम योगदान के लिए सम्मानित करने का फैसला किया है.   मिथुन 74 साल से सिनेमा में एक्टिव हैं, उन्हें साल 1977 में अपनी पहली ही फिल्म मृग्या के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था. मिथुन अब तक लगभग 350 से भी ज्यादा फिल्में कर चुके हैं. इनमें हिंदी से लेकर बंगाली, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और पंजाबी फिल्में भी शामिल हैं.  नीना को तीसरी बार मिला सम्मान नीना गुप्ता को फिल्म ‘ऊंचाई’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला है. आजतक से बातचीत में वो कहती हैं- मैं बहुत शॉक्ड हूं. ये मेरे लिए बड़ा सरप्राइजिंग है. नेशनल अवॉर्ड बड़ी बात है. अभी मुझे किसी ने बताया. 2022 में आई फिल्म ‘ऊंचाई’ को सूरज बड़जात्या ने डायरेक्ट किया था. एक्ट्रेस को इससे पहले 1993 में आई फिल्म ‘बाजार सीताराम’ के लिए बेस्ट फर्स्ट नॉन फीचर फिल्म डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला था. फिर 1994 में फिल्म ‘वो छोकरी’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला. मूवी में उन्होंने एक युवा विधवा का रोल प्ले किया था.   वहीं ‘कांतारा’ के लिए ऋषभ शेट्टी को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला. साथ ही नित्या मेनन और मानषी पारेख ने बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान अपने नाम किया. चौथी बार सम्मानित हुए मनोज मनोज बाजपेयी को ‘गुलमोहर’ के लिए स्पेशल मेंशन अवॉर्ड दिया गया. ये चौथी बार है जब मनोज को नेशनल अवॉर्ड मिला. इस पर उन्होंने कहा, ‘देखिए मुझे जब 3 बार मिले तो भी रिएक्शन ऐसा ही था. चौथी बार भी मुझे ऐसा ही महसूस हो रहा है. मैं हमेशा कहता हूं कि जब मैं अपने जीवन में रंगमंच कर रहा था तो कहता था कि एक बार ये मिल जाए तो जीवन धन्य हो जाएगा. आज ऊपर वाले की कृपा से चौथी बार मुझे ‘गुलमोहर’ के लिए मिला है. मैं अपने आप इस समय बहुत ही भाग्यशाली कलाकार मानता हूं, जिसे चौथी बार नेशनल अवॉर्ड मिला है. मुझे लिए खुशी की बात यह है कि चौथी बार मिल रहे नेशनल अवॉर्ड में मेरी पत्नी वहां मौजूद है. पिछले 3 बार में वो नहीं थी लेकिन चौथी बार में वो आई हैं तो आप समझ सकते हैं कि ये हमारे लिए कितना महत्पूर्ण है.’ किसे मिला कौन-सा अवॉर्ड वहीं बात करें बाकी कैटेगरीज की तो, अवॉर्ड पाने वालों में बॉलीवुड और साउथ से लेकर हर भाषा की फिल्में और एक्टर्स शामिल हैं. यहां देखें लिस्ट… बेस्ट फीचर फिल्म: आट्टम (मलयालम) बेस्ट डेब्यू फिल्म बाय डायरेक्टर: प्रमोद कुमार (फौजा, हरियाणवी फिल्म) बेस्ट पॉपुलर फिल्म- कांतारा बेस्ट फीचर फिल्म (राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरण मूल्यों को प्रमोट करने वाली): कच्छ एक्सप्रेस बेस्ट फिल्म (AVGC- एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स गेमिंग और कॉमिक):  ब्रह्मास्त्र बेस्ट डायरेक्शन: सूरज बड़जात्या (ऊंचाई) बेस्ट एक्टर (लीड रोल): ऋषभ शेट्टी (कांतारा) बेस्ट एक्ट्रेस (लीड रोल): नित्या मेनन (तिरुचित्राम्बलम);  बेस्ट एक्टर (सपोर्टिंग रोल): पवन राज मल्होत्रा (फौजा, हरियाणवी फिल्म) बेस्ट एक्ट्रेस (सपोर्टिंग रोल): नीना गुप्ता (ऊंचाई) बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट: श्रीपत (मल्लिकापुरम, मलयालम फिल्म)  बेस्ट सिंगर (मेल): अरिजीत सिंह (ब्रह्मास्त्र) बेस्ट सिंगर (फीमेल): बॉम्बे जयश्री, साउदी वेलक्का सीसी. 225/2009 (मलयालम फिल्म) बेस्ट सिनेमेटोग्राफी: रवि वर्मन (पोन्नियन सेल्वन पार्ट 1) बेस्ट स्क्रीनप्ले (ऑरिजिनल): आनंद एकार्शी, आट्टम (मलयालम) बेस्ट स्क्रीनप्ले (डायलॉग): अर्पिता मुखर्जी और राहुल वी चितेला (गुलमोहर) बेस्ट साउंड डिजाईन: आनंद कृष्णमूर्ति (पोन्नियन सेल्वन पार्ट 1) बेस्ट एडिटिंग: महेश भुवानंद, आट्टम (मलयालम) बेस्ट प्रोडक्शन डिजाईन: अपराजितो (बंगाली फिल्म) बेस्ट कॉस्टयूम डिजाईन: निक्की जोशी, कच्छ एक्सप्रेस (गुजराती फिल्म) बेस्ट मेकअप: सोमनाथ कुंडू, अपराजितो (बंगाली फिल्म) बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (गीत): प्रीतम (ब्रह्मास्त्र) बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (बैकग्राउंड स्कोर): ए. आर. रहमान (पोन्नियन सेल्वन पार्ट 1) बेस्ट लिरिक्स: नौशाद सदर खान (फौजा, हरियाणवी फिल्म) बेस्ट कोरियोग्राफी: जानी मास्टर … Read more

जयशंकर बोले -मैं वहां भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने के लिए नहीं जा रहा हूं

 इस्लामाबाद पाकिस्तान ने आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मौके पर भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता की संभावना से इनकार किया है. इस शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए पाकिस्तान का दौरा करेंगे. उनके नेतृत्व में भारत सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जाएगा. विदेश मंत्री जयशंकर ने कुछ दिन पहले कहा था कि उनकी आगामी पाकिस्तान यात्रा एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए होगी, द्विपक्षीय वार्ता के लिए नहीं. यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नौ वर्षों में किसी भारतीय विदेश मंत्री का पहला पाकिस्तान दौरा होगा, आखिरी बार 2015 में सुषमा स्वराज विदेश मंत्री के तौर पर इस्लामाबाद गई थीं. एस जयशंकर की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने कहा, ‘मैं चाहूंगी कि आप भारतीय विदेश मंत्री द्वारा 5 अक्टूबर को की गई टिप्पणियों पर गौर करें, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद की उनकी आगामी यात्रा एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए है, न कि पाकिस्तान-भारत संबंधों पर चर्चा के लिए. उनकी ये टिप्पणियां अपने आप में संकेत देती हैं.’ पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 15 और 16 अक्टूबर को इस्लामाबाद की उनकी यात्रा के दौरान एजेंडे में भारत-पाकिस्तान मुद्दों पर बातचीत नहीं है. जयशंकर ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘इस महीने के मध्य में एससीओ समिट के लिए मेरा पाकिस्तान जाने का कार्यक्रम है. यह सरकार के प्रमुखों का शिखर सम्मेलन है. मैं वहां भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने के लिए नहीं जा रहा हूं. मैं वहां एससीओ के एक अच्छे सदस्य के रूप में जा रहा हूं.’ भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध वर्तमान में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं. साल 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद इस्लामाबाद ने नई दिल्ली के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया था. पुलवामा आतंकी हमले के बाद फरवरी 2019 में भारतीय वायु सेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के टेररिस्ट ट्रेनिंग कैंप पर हमला करने के बाद संबंध पहले से ही तनाव में थे. पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे.  

Jammu Kashmir में एनसी को पूर्ण बहुमत, BJP की सीटों ने सबको चौंकाया

नई दिल्ली  हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए हो रही मतगणना के अब तक के रुझानों में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। दोपहर 2 बजे तक के ताजा रुझानों के मुताबिक, राज्य की 90 में से 50 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 35 सीटों पर और निर्दलीय तीन सीटों पर आगे चल रहे हैं। ये चुनावी रुझान एग्जिट पोल के तमाम अनुमानों से ठीक उलट हैं। ऐसे में फिर से इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या भाजपा ने अपनी पुरानी ट्रिक आजमा कर हरियाणा में चुनावी बाजी पलट दी और हरियाणा में चुनावी इतिहास रचते हुए जीत की हैट्रिक लगाई है। इससे पहले राज्य में अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने लगातार तीन बार चुनावों में जीत दर्ज नहीं की थी। हरियाणा में बीजेपी को बड़ा बहुमत मिल गया है। अब तक के चुनाव परिणामों के मुताबिक बीजेपी 49 सीटों पर जीत हासिल कर रही है। वहीं कांग्रेस 26, आईएनएलडी 2 और अन्य 3 सीटों पर जीत रहे हैं। हरियाणा के चुनाव परिणाम एग्जिट पोल को फेल कर दिया है। ज्यादातर एग्जिट पोल में हरियाणा में कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी की गई थी। हालांकि बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है। कैथल से रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला ने जीत दर्ज की है। लाडवा सीट से मुख्यमंत्री नायब सैनी जीत गए हैं। हरियाणा के मंत्री अनिल विज शुरुआती रुझानों में पीछे चल रहे थे। हालांकि उन्होंने भी अपने प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम नई दिल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर में कार्यकर्ताओं क संबोधित करेंगे। बीजेपी ने जश्न के लिए 100 किलो जलेबी का ऑर्डर दे दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी कार्यकर्ताओं को दिया है। जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणाम का हर अपडेट लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच पहला बड़ा सीधा मुकाबला था। इस चुनाव के परिणाम का इस्तेमाल विजेता द्वारा अन्य राज्यों में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जाएगा, जहां अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं। हरियाणा की 90 सीट पर 464 निर्दलीय और 101 महिलाओं सहित कुल 1,031 उम्मीदवार मैदान में थे। इन सीटों पर पांच अक्टूबर को एक ही चरण में मतदान हुआ था। कई एग्जिट पोल ने हरियाणा में कांग्रेस की जीत का अनुमान जताया था। इस बार हरियाणा में 67.90 फीसदी मतदान हुआ था। नेशनल कॉन्फ्रेंस बनी सबसे बड़ी पार्टी जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सभी 90 सीटों पर चुनाव परिणाम परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस को 42, बीजेपी को 29, कांग्रेस को 6, पीडीपी 3, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस 1, आप 1, सीपीआई-एम 1 और निर्दलीय 7 शामिल हैं. ‘दो राज्यों को कर दिया कांग्रेस मुक्त’, जी किशन रेड्डी केंद्रीय मंत्री और  जम्मू-कश्मीर बीजेपी विधानसभा चुनाव प्रभारी जी. किशन रेड्डी ने चुनाव परिणाम के रुझानो पर कहा, “NC ने लोगों को धर्म के नाम पर बांटने का प्रयास किया. उन्होंने बहुत कुछ कहा, लेकिन इतना करने के बाद भी जम्मू और कश्मीर में हमें अच्छी सीटें मिली हैं. राहुल गांधी बार-बार कहते रहे कि पीएम मोदी पर जनता का विश्वास कम हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है. हरियाणा को हमने कांग्रेस मुक्त कर दिया है और जम्मू-कश्मीर भी कांग्रेस मुक्त हो गया है.” क्या है भाजपा की वह ट्रिक दरअसल, भाजपा किसी भी राज्य में अपनी सरकार के लंबे कार्यकाल के खिलाफ उपजे जनाक्रोश या गुस्से को दबाने और एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर को कम करने के लिए चुनावों से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री को बदलती रही है। भाजपा ने इसका सफल प्रयोग गुजरात में किया था। उसके बाद उत्तराखंड में भी भाजपा इसे आजमा चुकी थी। उसी ट्रिक को भाजपा ने चुनावों से कुछ महीने पहले हरियाणा में भी आजमाया और तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को हटाकर और उनकी जगह नायब सिंह सैनी की ताजपोशी करवा दी। भाजपा ने इसी के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को भी बदल दिया। खट्टर ने 26 अक्तूबर 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह इस पद पर 12 मार्च 2024 तक रहे। फिर उनकी जगह उनके ही करीबी और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद भाजपा खट्टर को केंद्र की राजनीति में ले आई। इससे हरियाणा में खट्टर सरकार के प्रति जो नाराजगी और एंटी एनकम्बेंसी थी, वह कम हो गई। चूंकि नायब सिंह सैनी अभी नए-नए मुख्यमंत्री हैं और उनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा और इस बीच उन्होंने कई जन कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया। इसलिए आम जनों को भाजपा ये संदेश देने में कामयाब रही कि सैनी को एक और मौका देना चाहिए, ताकि वह पूर्ण कार्याकल के लिए काम कर सकें। पीएम मोदी ने भी कम रैलियों को किया संबोधित खट्टर गैर जाट नेता थे और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पसंद थे। चूंकि भाजपा लोकसभा चुनावों में यह देख चुकी है कि केंद्रीय नेतृत्व के प्रति जनाक्रोश है, इसलिए प्रदेश स्तर के नेताओं को चुनाव प्रचार में खुली छूट दी और संभवत: यही वजह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ चार चुनावी रैलियां हरियाणा में कीं, जबकि इससे पहले 2014 और 2019 में उन्होंने धुआंधार चुनाव प्रचार किया था। ऐसा कर प्रधानमंत्री ने जवानों, पहलवानों और अग्विनीरों के तथाकथित आक्रोश को भी कम करने की सोची समझी रणनीति पर काम की और चुनावों के दौरान केंद्र सरकार की कई संस्थाओं ने भर्तियों में अग्निवीरों के लिए कोटे का ऐलान किया। रही-सही कसर भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र के जरिए पूरी कर दी, जिसमें महिलाओं को कांग्रेस से भी ज्यादा नकद देने का वादा किया गया है। भाजपा ने और कहां अपनाई CM बदलो ट्रिक भाजपा ने गुजरात में 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले विजय रुपाणी की जगह भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बना दिया था। इससे नरेंद्र मोदी के बाद की सरकार के खिलाफ उपजा एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर कम हो गया था और 2022 के दिसंबर में गुजरात चुनावों में भाजपा फिर से जीतने में कामयाब रही थी। गुजरात में यह भाजपा की डबल हैट्रिक थी। इसी तरह उत्तराखंड में भी 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने वहां के … Read more

नेपाल में दुनिया की सातवीं सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट धौलागिरी’ पर गिरने से 5 रूसी पर्वतारोहियों की मौत

काठमांडू  नेपाल में विश्व की सातवीं सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट धौलागिरी’ पर फिसलकर गिर जाने से पांच रूसी पर्वतारोहियों की मौत हो गई है। पर्वतारोही अभियान संचालित करने वाले एक आयोजक ने मंगलवार को यह जानकारी दी। रूसी पर्वतारोही नेपाल के शरदकालीन पर्वतारोहण सत्र के दौरान 8,167 मीटर ऊंचे माउंट धौलागिरी शिखर के लिए चढ़ाई चढ़ रहे थे। काठमांडू स्थित ‘आई एएम ट्रैकिंग एंड एक्सपीडिशन’ के पेम्बा जंगबू शेरपा ने बताया कि ये पर्वतारोही रविवार से लापता थे और मंगलवार को राहत बचाव के लिए निकले एक हेलीकॉप्टर ने उनके शव देखे। शवों को माउंट धौलागिरी से नीचे कब और कैसे लाया जाएगा, यह अभी तय नहीं हो सका है क्योंकि इसके लिए व्यापक योजना, जनशक्ति और उपकरणों की आवश्यकता होगी। बताया जाता है कि उनमें से दो पर्वतारोही शिखर पर पहुंच गए थे लेकिन अन्य पर्वतारोही शिखर पर पहुंचे बगैर वापस लौट आए। इसके बाद से उनके और बेस कैंप में मौजूद टीम के सदस्यों के बीच रेडियो संपर्क टूट गया।    

कोलकाता रेप-मर्डर मामले में जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चौथे दिन जारी, हेल्थ सेक्रेटरी को हटाने समेत 9 मांगों …

कोलकाता कोलकाता रेप-मर्डर केस के विरोध में छह जूनियर डॉक्टरों के आमरण अनशन का आज चौथा दिन है। डॉक्टर्स आज कॉलेज स्क्वायर से धर्मतला तक विरोध मार्च निकालेंगे। उन्होंने कहा कि हम किसी बाहरी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। दूसरी तरफ, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टरों को समर्थन देने का ऐलान किया है। FAIMA ने कहा कि 9 अक्टूबर को देश भर में डॉक्टर्स भूख हड़ताल करेंगे। कोलकाता में जूनियर डॉक्टर 5 अक्टूबर की शाम से आमरण अनशन पर बैठे हैं। वे हेल्थ सेक्रेटरी एनएस निगम को हटाने समेत 9 मांगों पर अड़े हैं। बंगाल सरकार ने कहा है कि सरकार अपने सभी वादे पूरी कर रही है। ममता सरकार ने डॉक्टरों से अनशन खत्म करने की अपील की है। डॉक्टरों ने पहले 5 मांगे रखी थीं, इनमें सरकार ने 3 पूरे किए जूनियर डॉक्टरों ने रेप-मर्डर घटना के खिलाफ 10 अगस्त से 21 सितंबर तक 42 दिन तक हड़ताल की थी। डॉक्टरों ने सरकार के सामने पहले 5 मांगें रखी थीं। इनमें से सरकार ने 3 मांगें मान लीं। CM ममता ने दो अन्य मांगों और शर्तों पर विचार करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर दी थी। वे अस्पतालों में काम पर लौट गए थे। 27 सितंबर को सागोर दत्ता हॉस्पिटल में 3 डॉक्टरों और 3 नर्सों से पिटाई का मामला सामने आया, जिससे नाराज होकर डॉक्टरों ने 1 अक्टूबर को फिर से हड़ताल शुरू कर दी थी। 4 अक्टूबर को जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली, लेकिन धरना जारी रखा। उन्होंने कहा कि हम काम पर लौट रहे हैं क्योंकि सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज परेशान हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने राज्य सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद उन्होंने अनशन शुरू किया। CBI बोली- ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ ट्रेनी डॉक्टर से रेप-मर्डर केस में CBI ने पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें जांच एजेंसी ने ट्रेनी डॉक्टर से गैंगरेप की आशंका को नकार दिया है। एजेंसी का कहना है कि वारदात को संजय रॉय ने अकेले अंजाम दिया था। करीब 100 गवाहों के बयानों और 12 पॉलीग्राफ टेस्ट करने के बाद CBI इस नतीजे पर पहुंची। पुलिस ने संजय को घटना के अगले दिन 10 अगस्त को अरेस्ट किया था। 9 अगस्त की सुबह अस्पताल के सेमिनार हॉल में पीड़ित की अर्धनग्न डेडबॉडी मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि विक्टिम की दोनों आखों, मुंह और प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था। गर्दन की हड्डी भी टूटी थी। हालांकि संजय अब तक खुद को बेगुनाह बता रहा है। संजय को पुलिस ने CCTV फुटेज से पहचाना था। फुटेज में वह 9 अगस्त की सुबह 4 बजे सेमिनार हॉल में अंदर जाता दिखाई दिया। इस दौरान उसने कानों में इयरफोन लगाया हुआ था। करीब 40 मिनट बाद वह हॉल से बाहर निकला तो उसके पास इयरफोन नहीं था। पुलिस को क्राइम सीन पर एक ब्लूटूथ इयरफोन मिला था, जो उसके फोन से कनेक्ट हो गया था।

5 बार एग्जिट पोल के नतीजे गलत साबित हो चुके हैं, खुल गई Exit Poll की पोल, चुनावी नतीजों से अलग रहे पूर्वानुमान

नई दिल्ली  दोपहर के 2 बज चुके हैं, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव नतीजों की तस्वीर भी अब साफ होती दिख रही है। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाती दिख रही है तो वहीं जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस के साथ ने बीजेपी को सत्ता की कुर्सी से दूर कर दिया है। रिजल्ट से तीन दिन पहले आए एग्जिट पोल के नतीजे एक बार फिर फेल साबित होते दिखाई दिए। 5 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव की वोटिंग के कुछ देर बाद जारी किए गए एग्जिट पोल के नतीजों ने हरियणा में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत दिया था, पर रूझानों को देखकर को ऐसा नहीं लग रहा। हरियाणा के एग्जिट पोल और चुनाव नतीजों में फर्क 5 अक्टूबर की शाम को कई चैनलों के एग्जिट पोल जारी किए गए थे। हरियाणा में अधिकतर एग्जिट पोल कांग्रेस की सरकार बनवा रहे थे, हालांकि जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-एनसी की सरकार बनने की बात कही थी। आइए एक बार एग्जिट पोल के आए नतीजों की बात कर लेते हैं। पहले बात हरियाणा की करते हैं। हरियाणा में मैट्रिक एग्जिट पोल के अनुसार, कांग्रेस को 55-62, बीजेपी को 18-24, निर्दलीय को 3-6 और आम आदमी पार्टी को 2-5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। दैनिक भास्कर के अनुसार, हरियाणा में कांग्रेस को 44-54, भाजपा को 19-26, निर्दलीय को 1-5 और अन्य को 4-9 सीटें मिलने का अनुमान था। यहां आप को एक भी सीट न मिलने का दावा था। पीपुल्स पल्स सर्व का एग्जिट पोल देखिए। इसके एग्जिट पोल के अनुसार, कांग्रेस को 55, बीजेपी को 26, इनलो को 2-3, अन्य को 4-6 और आम आदमी पार्टी को शून्य सीट दिखाया था। ध्रुव रिसर्च के एग्जिट पोल में कांग्रेस को 55-62, बीजेपी को 18-24, जेजेपी को 0-3 और अन्य को 5-11 सीटें मिलने का अनुमान था। आजतक- सी वोटर में कांग्रेस को 50-58, बीजेपी को 20-28 और अन्य को 10-14 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। जम्मू-कश्मीर के एग्जिट पोल सही रहे हरियाणा की तरह हालांकि जम्मू-कश्मीर के चुनाव नतीजे एग्जिट पोल से मिलते-जुलते दिखाई दे रहे हैं। आजतक सी वोटर, रिपब्लिक मैट्रिज, एबीवीपी सहित कई चैनलों के एग्जिट पोल जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस- नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की सरकार बनने का दावा किया था जो सही होता भी दिख रहा है। शुरु से ही कांग्रेस-एनसी बीजेपी पर बढ़त बनाए हुए है और अब यह परिणाम में भी बदलते दिख रहे हैं। क्या है ताजा अपडेट? दोपहर 1 बजे के अपडेट के अनुसार, हरियाणा में एग्जिट पोल के उलट बीजेपी सरकार बनाती दिख रही है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी को 49 तो वहीं कांग्रेस को 35 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य के खाते में 6 सीटें आती दिख रही हैं। जम्मू-कश्मीर की बात करें तो कांग्रेस-एनसी गठबंधन को 52 और भाजपा को 27 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य के खाते में 9 तो महबूबा मुफ्ती की पार्टी को सिर्फ 2 सीट मिल रही है। तो हरियाणा में बीजेपी की सरकार परिणाम साफ होने के बाद बनेगी तो वहीं जम्मू-कश्मीर में एनसी-कांग्रेस गठबंधन रूल करेगी।

Israel में घुसकर Yemen की Hypersonic Missile आसमान में ही तबहा

तेलअवीव यमन ने इजरायल पर हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल Palestine-2 से हमला किया. मध्य इजरायल में सायरन बजने लगे. इस मिसाइल के साथ जुल्फिकार (Dhu Al-Fiqar) मिसाइल से भी हमला किया गया. पूरे मध्य इजरायल में हड़कंप मच गया. लोग छिपने लगे. भागने लगे. इसके बाद इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल को वायुमंडल के ऊपर ही खत्म कर दिया. जिसके जलते हुए टुकड़े जब इजरायल के ऊपर आए तो सायरन काफी देर तक बजता रहा. लोगों को लगा कि मिसाइलें गिर रही हैं. हूतियों का कहना है कि उन्होंने दो मिसाइलें दागीं. दोनों जाफा और इलात के मिलिट्री टारगेट पर गिरी हैं. जुल्फिकार मिसाइल कहां गिरी, इसकी डिटेल यमन ने नहीं दी. हूतियों ने पिछले एक साल में इजरायल के ऊपर 220 से ज्यादा बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन्स दागे हैं. इनका हमला ज्यादातर दक्षिणी इजरायली शहर इलात में होता है. इजरायल ने कहा कि हूतियों ने तीन मिसाइलें दागी थीं, दो को हवा में नष्ट कर दिया गया. तीसरी खुले इलाके में गिरी. अब जानिए यमन के हाइपरसोनिक मिसाइल की ताकत… कुछ दिन पहले ही यमन ने Palestine-2 हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल से तेल-अवीव पर हमला किया था. यह मिसाइल मात्र 11 मिनट में 2040 km की दूरी तय करके टारगेट पर पहुंच गई थी. इसकी अधिकतम गति 19756 km/hr है. यानी इसे रोकबेहद मुश्किल है. लेकिन इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम ने इस बार इस मिसाइल को वायुमंडल में ही खत्म कर दिया. जबकि इस मिसाइल की रेंज 2150 किलोमीटर है.    Palestine-2 मिसाइल बीच रास्ते में दिशा बदल सकती है. मतलब एयर डिफेंस सिस्टम से आने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों को हवा में ही धोखा देकर तेज गति से आगे बढ़ सकती है. हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर 15 सितंबर 2024 को कई हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला किया था.    क्या होती हैं हाइपरसोनिक मिसाइल? हाइपरसोनिक मिसाइल वो हथियार होती हैं, जो ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा गति में चले. यानी कम से कम मैक 5. साधारण भाषा में इनकी गति 6100 km/hr या उससे ज्यादा होती है. इनकी गति और दिशा में बदलाव करने की क्षमता इतनी ज्यादा सटीक और ताकतवर होती हैं कि इन्हें ट्रैक करना और मार गिराना असंभव होता है.  

7 अक्टूबर इजरायल पर फिर भारी गुजरा, हिजबुल्लाह ने रात भर बरसाए रॉकेट

तेल अवीव इजरायल ने सोमवार को हिज्बुल्लाह के 130 रॉकेट हमलों का जवाब अपने 100 लड़ाकू विमानों के साथ लेबनान में करीब 120 साइटों को निशाना बनाकर दिया. ये विमान करीब 1 घंटे तक बम बरसाते रहे. आईडीएफ प्रवक्ता ने लेबनानी नागरिकों को अगली सूचना तक अवली नदी से दक्षिण की ओर समुद्र तट पर या नावों पर रहने से बचने की चेतावनी जारी की है. लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों की यह लहर पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास द्वारा किए गए हमलों की बरसी पर आई, जो इस क्षेत्र में एक साल से जारी युद्ध की शुरुआत का कारण बना था. आईडीएफ ने सोमवार को यह भी घोषणा की कि उसने उत्तरी इजरायल में एक नया क्लोज्ड मिलिट्री जोन घोषित किया है. लेबनान में इजरायली ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होने के बाद से यह चौथा क्लोज्ड मिलिट्री जोन है, जो मेडिटेरेनियन सी से पूर्व की ओर फैला है. ताजा हवाई हमलों के बारे में जानकारी देते हुए आईडीएफ ने एक बयान में कहा, ‘हमारे विमानों ने हिज्बुल्लाह की विभिन्न यूनिट्स को टारगेट करके हमले किए, जिनमें सदर्न फ्रंट की रीजनल यूनिट्स, रादवान फोर्सेज, मिसाइल और रॉकेट फोर्स और इंटेलिजेंस यूनिट शामिल थे.’ हिज्बुल्लाह के कई ठिकानों पर इजरायल ने बरसाए बम आईडीएफ के मुताबिक यह हवाई हमला हिज्बुल्लाह के कमांड एंड कंट्रोल और फायरिंग क्षमताओं को नष्ट्र करने के लिए था. साथ ही इजरायली ग्राउंड ऑपरेशन में शामिल सैनिकों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करने के उद्देश्य से ये हवाई हमले किए गए. एक तरफ इजरायल में 7 अक्टूबर के हमले की बरसी पर शोक सभाएं चल रही थीं और दूसरी ओर उसकी सेना कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रही थी. इजरायल ने लेबनान में अपने ग्राउंड ऑपरेशन का विस्तार किया और आईडीएफ की थर्ड डिवीजन भी युद्ध में शामिल हो गई. हमास ने इजरायल में 7 अक्टूबर के हमलों के शोक में आयोजित मेमोरियल इवेंट्स को टारगेट करते हुए रॉकेट दागे और इजरायल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की कसम खाई. हालांकि, रॉकेट दागने की हमास की क्षमता गाजा में 12 महीने के विनाशकारी इजरायली हमले के कारण काफी हद तक कम हुई है. बता दें कि गाजा युद्ध में 42,000 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायल समय-समय पर यह कहता रहा है कि उसने गाजा में हमास को प्रभावी ढंग से हराया है. लेबनान से इजरायल में दागे गए 130 से अधिक रॉकेट इजरायली सैन्य अभियानों में आई तेजी के बावजूद, हिज्बुल्लाह ने सोमवार को पूरे दिन में करीब 130 से अधिक रॉकेट दागे. इनमें से ज्यादातर रॉकेट हाइफा को टारगेट करके दागे गए थे, जो इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर है. शाम ढलते ही यमन से हूती द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम ने हवा में ही मार गिराया. इजरायली सेना ने कहा कि लेबनान से हिज्बुल्लाह द्वारा दागे गए कुछ रॉकेट्स को आयरन डोम ने इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया, जबकि कुल खाली इलाकों में गिरे. इस क्षेत्र में युद्ध के और भीषण होने की आशंका है. क्योंकि इजरायल ने पिछले हफ्ते ईरान द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए मिसाइल हमले का बदला लेने का वादा किया है. इजरायल किसी भी समय ईरान के खिलाफ एक बड़ा जवाबी हमला कर सकता है. वहीं, तेहरान ने दोहराया है कि वह अपनी धरती पर किसी भी इजरायली हमले का जवाब देगा. इस बढ़ते संघर्ष में अमेरिका के भी शामिल होने की संभावना है. वह इजरायल को महत्वपूर्ण सैन्य और राजनयिक सहायता प्रदान करता है. और यदि ईरान ने इजरायल पर फिर कोई हमला किया, तो अमेरिका यहूदी देश के बचाव में इस युद्ध में उतर सकता है.  

Israel attack : मारा गया हिजबुल्लाह की मिसाइल टीम का प्रमुख सुहैल हुसैन हुसैनी

बेरुत सुहैल हुसैन हुसैनी (Suhail Hussein Husseini)… हिज्बुल्लाह का वो कमांडर जो इस आतंकी संगठन के हथियार डिपो, हथियारों की सप्लाई, बजट, रसद, वेपन कहां से आना है. कहां जाना है. ये सब देखता था. सात अक्टूबर 2024 की रात इजरायली एयरस्ट्राइक में यह हिज्बुल्लाह लीडर भी बेरूत में मारा गया. इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने कहा कि हुसैनी विदेशों से हथियारों की डीलिंग करता था. यह हिज्बुल्लाह की टॉप मिलिट्री संस्था जिहाद काउंसिल का भी सदस्य था. हुसैनी की वजह से ही ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच हथियारों का आदान-प्रदान होता आया है. उसी ने हिज्बुल्लाह लड़ाकों को ईरान से एडवांस हथियार लेकर दिए थे. हुसैनी यह देखता था कि ईरान से हथियार कैसे आएंगे. कहां जाएंगे. किस यूनिट को किस तरह के हथियार देने हैं. इसके अलावा वह इन सबकी प्लानिंग करता था. उन्हें पूरा करवाता था. साथ ही वह बजट भी देखता था. यह हिज्बुल्लाह के सबसे संवेदनशील लॉजिस्टिकल मैनेजमेंट को संभालता था. जिसमें जंग की रूपरेखा भी शामिल है. हुसैनी ने ने इजरायल के ऊपर लेबनान और सीरिया की तरफ से कई आतंकी हमले करवाए. हुसैनी जिस इमारत में मारा गया. वह इमारत हिज्बुल्लाह का रिसर्ड एंड डेवलपमेंट सेंटर था. ताकि वहां पर नई गाइडेड मिसाइलों की डिजाइनिंग और निर्माण किया जा सके.  

भारतीय वायुसेना को नए प्लेन की खरीद में लग रहा समय, ट्रेनिंग देने में लगेगा टाइम

नई दिल्ली  वायुसेना के पास फाइटर प्लेन की ताकत ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है। स्थिति यह है कि भारत के फाइटर प्लेन की क्षमता साल 1965 से भी कम हो गई है। इस पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का कहना है कि ‘जो कुछ भी हमारे पास है, उसी से लड़ने’ को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान मौजूदा असेट्स के संरक्षण और कर्मियों को उनके सही तरीके से उपयोग करने के लिए ट्रेनिंग देने पर है। फाइटर प्लेन हो रहे रिटायर हालांकि एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत क्षमता है। यह संख्या सीमा पर खतरे की स्थिति को देखते हुए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद स्वीकृत की गई है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार कमी आई है। इसकी वजह है कि पुराने सोवियत युग के फाइटर प्लेन रिटायर हो गए हैं और उनकी जगह नए प्लेन को लाने का आदेश नहीं दिया गया है। पिछले 6 साल से नहीं दिख रही प्रोग्रेस अपने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) का उत्पादन, जो समय से पीछे चल रहा है, को तेज करने की जरूरत है। इसके साथ ही नए मल्टी रोल वाले वाले फाइटर प्लेन विमानों की जरूरत “कल से ही” है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि वायुसेना ने 2018 में मेक इन इंडिया योजना के तहत 114 मल्टीरोल फाइटर प्लेन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन पिछले छह साल से कोई प्रोग्रेस नहीं दिख रही है। रातों-रात प्लेन नहीं खरीद सकते वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की कमी को स्पष्ट रूप से बताते हुए कहा कि यह कोई थोड़े समय की बात नहीं है कि हम रातों-रात सामान खरीद सकते हैं। इसमें समय लगता है, सिर्फ सेलेक्शन ही नहीं, बल्कि शामिल करने में भी समय लगता है। इसके साथ ही, अगर हम दो या तीन स्क्वाड्रन शामिल भी करते हैं, तो निश्चित रूप से उनका उपयोग करने में सक्षम होने के लिए ट्रेनिंग में समय लगता है। इसलिए हम इस समय जिस चीज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वह यह है कि हमारे पास जो कुछ भी है, हम उससे तुरंत लड़ने में सक्षम हों। 1965 के बाद सबसे कम ताकत रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 स्क्वाड्रन की मौजूदा ताकत 1965 के बाद से भारत की सबसे कम ताकत है, जब पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा गया था। 1965 के युद्ध के बाद यह संख्या लगातार बढ़ती गई और 1996 में 41 स्क्वाड्रन तक पहुंच गई। जैसे-जैसे विमान की रूपरेखा बदलती गई, 2013 में यह संख्या घटकर 35 रह गई और तब से लगातार कम होती गई। सर्विस में मौजूद 31 स्क्वाड्रन में से दो स्क्वाड्रन कम से कम उड़ान भर रहे हैं। ये अपने मिग 21 लड़ाकू विमानों को बचा रहे हैं, जिन्होंने पहली बार 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया था। ये विमान लंबे समय से अपने लाइफ के अंत तक पहुंच चुके हैं। उनकी रिटायरमेंट को कई सालों के लिए टाला जा रहा है। इसकी वजह है कि वायुसेना एलसीए एमके1ए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी का इंतजार कर रही है। अतीत से सबक लेने की जरूरत एलसीए परियोजना से करीब से जुड़े रहे वायुसेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि अतीत से सबक लेने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे कोई देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जेट विमानों के उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर को बड़े पैमाने पर शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर एलसीए डिलीवरी की समयसीमा पूरी हो जाती है और मल्टी-रोल फाइटर कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो वायुसेना ‘बुरी स्थिति में’ नहीं होगी।  

जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में किसका होगा राजतिलक? परिणाम से पहले पर्टियों की बढ़ी बेचैनी, गुणा-भाग में जुटे उम्मीदवार

नई दिल्ली  विधानसभा के लिए हुए मतदान के बाद जिले की चारों विधानसभाओं में चुनाव लड़ रहे 40 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज मतगणना के बाद होगा। आज सुबह के 8 बजते ही ईवीएम में कैद वोट बाहर आने लगेंगे और इसके साथ ही उम्मीदवारों की जीत-हार को लेकर रुझान मिलने शुरू हो जाएंगे। शाम होते-होते कहीं खुशियों की बारिश होने लगेगी तो कई लोगों की शाम गम के साये से घिर जाएगी, लेकिन रिजल्ट से पहले वाली रात तो सबके लिए कत्ल की रात रही। उम्मीदवारों के दिल की धड़कनें बढ़ी रही हैं कि आखिर आज क्या होनेवाला है। सोमवार को कोई उम्मीदवार पूजा पाठ करने में लगा रहा तो कोई कार्यकर्ताओं के साथ काउंटिंग को लेकर रणनीति बनाने में जुटा रहा। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर (JK) विधानसभा चुनावों के लिए आज मंगलवार को नतीजे का दिन है। दोनों राज्यों में कड़ी सुरक्षा के बीच आज सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हुई । मतगणना की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से शुरू हुई  सबसे पहले मतगणना में लगे कर्मचारी मतगणना केंद्रों पर पहुंचेंगे। विभिन्न दलों के एजेंटों को सुबह 6 बजे तक पहुंचने के लिए कहा गया है। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती होगी। पहले डाक मत पत्र के साथ ही रुझान सामने आने लगेंगे। इसके बाद ईवीएम खोली जाएंगी। सब कुछ ठीक रहा, तो दोपहर तक स्थिति साफ हो जाएगी। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणामों की आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दी जाएगी। यहीं हर पार्टी की स्थिति देखी जा सकती है। साथ ही सीट वार ब्यौरा भी देखा सकता है। वहीं, विभिन्न समाचार चैनलों पर मतगणना की जानकारी लाइव दिखाई जाएगी।     हरियाणा में विधानसभा की कुल 90 सीट है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 46 विधायकों की दरकार होगी। पिछले 10 सालों से राज्य में भाजपा की सरकार है।     हरियाणा में इस बार 65 फीसदी मतदान ही हुआ है। कम मत प्रतिशत के बाद भाजपा और कांग्रेस की टेंशन बढ़ी हुई है। कई बड़े नेताओं की किस्मत दांव पर है।     इस बार भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। हालांकि एग्जिट पोल के अनुसार, मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।     2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 36.49 फीसदी वोट के साथ भाजपा को 40 सीट मिली थी। पार्टी ने जजपा (10 सीट) के साथ सरकार बनाई थी।     जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा की कुल 90 सीट है, जहां तीन चरणों में मतदान (कुल 63.45%) हुआ था। आर्टिकल 370 हटने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव था।     हर बार की तरह इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीडीपी मैदान में है। कई सीटों पर निर्दलीयों का पलड़ा भारी है।     एग्जिट पोल के मुताबिक, JK में किसी दल को बहुमत नहीं मिलेगा। हालांकि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन को बढ़त मिल सकती है।     2014 के विधानसभा चुनाव में मेहबूबा मुफ्ति की पार्टी PDP 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी बनी है।  

राफेल फाइटर जेट ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइस से ऑब्जेक्ट को मार गिराया, अब चीन की नहीं खैर

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना ने चीन के जासूसी गुब्बारों को मार गिराने में महारत हासिल कर ली है। बीते दिनों दौरान वायुसेना ने इसकी प्रैक्टिस की। इस दौरान चीनी गुब्बारों जैसे ऑब्जेक्ट्स को हवा में उड़ाया गया। इसके बाद राफेल फाइटर जेट ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइस के जरिए इस ऑब्जेक्ट को मार गिराया। भारतीय सेना का यह अभ्यास चीन की जासूसी से निपटने की पूर्व तैयारी का हिस्सा है। अगर 200 फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाले चीनी गुब्बारे भविष्य में जासूसी करने के इरादे से भारत की सीमा पर दिखते हैं तो सेना उन्हें आसानी से मार गिराएगी। गौरतलब है कि साल 2023 के जनवरी-फरवरी महीने में कुछ चीनी जासूसी गुब्बारे अमेरिका में 200 फीट की ऊंचाई पर कई दिनों तक उड़े थे। बाद में अमेरिकी एफ-22 रैप्टर ने इन गुब्बारों को एआईएम-9एक्स साइडवाइंडर मिसाइल का इस्तेमाल करके मार गिराया था। बाद में अमेरिका ने भारत समेत विभिन्न देशों को इस बारे में जानकारी दी थी। सूत्रों ने बताया कि आईएएफ ने टीटीपी का फॉर्मूला तैयार किया है। इस फॉमू्ले का इस्तेमाल इसी तरह के हालात का सामना करने में होगा। यह टीटीपी है, टैक्टिस, टेक्निक्स और प्रॉसीजर। सूत्रों के मुताबिक राफेल का यह प्रदर्शन पिछले साल चार फरवरी को 55 हजार फीट की ऊंचाई पर किया गया। जिस ऊंचाई पर प्रैक्टिस की गई थी, यह उससे कहीं ज्यादा थी। इसके अलावा टारगेट बनाया गया बैलून उस चीनी बैलून से छोटा था जिसने अमेरिका हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था। पांचवीं जनरेशन के एफ-22 ने 58 हजार फीट की ऊंचाई से 60 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे बैलून पर मिसाइल से हमला किया। गौरतलब है कि चीनी जासूसी गुब्बारे अनमैन्ड एयरशिप्स जैसे होते हैं। यह खास किस्म का ट्रांसमिशन भेजते हैं, जिन्हें डिटेक्ट या इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल होता है। 2022 की शुरुआत में अंडमान और निकोबार के करीब गुब्बारे जैसा ऑब्जेक्ट देखा गया था। हालांकि तब इस पर कोई एक्शन नहीं हो पाया था। वजह, तब तक भारत ने महत्वपूर्ण जगहों पर स्थायी आधार पर फाइटर्स की तैनाती नहीं की थी। बता दें कि चीन अक्सर बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारतीय समुद्र में अपना जासूसी जहाज भेजता रहता है। उसका मकसद भारत की बैलिस्टिक मिसाइल लांच को ट्रैक करना होता है। इसके अलावा वह नेविगेशन और सबमरीन ऑपरेशन पर भी नजर रखना चाहता है। आईएफ ने हसीमारा और अंबाला एयरबेस पर 36 राफेल तैनात कर रखे हैं। हसीमारा सिक्किम-भूटान-तिब्बत के करीब और चीन की पूर्वी सीमा के लिहाज से भी अहम है।

भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया हुआ है, जीत की संभावनाएं कम

चंडीगढ़ हरियाणा में विधानसभा चुनाव के नतीजे तीन राजनीतिक ‘लाल’ परिवारों की राजनीतिक दिशा और दशा तय करेंगे। 15वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसी लाल और चौधरी भजन लाल के वारिस भाजपा और कांग्रेस के भरोसे हैं तो पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल के आठ वारिस अपने दम पर चुनावी रण में हैं। भिवानी में तोशाम विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी और स्वर्गीय बंसी लाल की पौत्री श्रुति चौधरी (सांसद किरण चौधरी की बेटी) जीतें या पौत्र अनिरुद्ध चौधरी (कांग्रेस), विधानसभा में बंसी लाल परिवार की एंट्री तय है। हालांकि, यहां भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया हुआ है, लेकिन उनकी जीत की संभावनाएं कम हैं। भजन परिवार का 56 साल से गढ़ आदमपुर उधर, पंचकूला में स्वर्गीय भजन लाल के बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई (कांग्रेस) तो हिसार के आदमपुर में पौत्र भव्य बिश्नोई (भाजपा) और फतेहाबाद में भतीजे दूड़ा राम (भाजपा) की परीक्षा है। आदमपुर में 56 साल से भजन परिवार जीतता आ रहा है, लेकिन इस बार रिटायर्ड आइएएस चंद्र प्रकाश (कांग्रेस) से मिल रही कड़ी चुनौती के चलते भव्य की राह आसान नहीं। रानियां में चाचा-भतीजे के बीच मुकाबला हालांकि, पंचकूला में चंद्रमोहन बिश्नोई पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता (भाजपा) पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। फतेहाबाद में दूड़ाराम (भाजपा) की कांग्रेस के बलवान दौलतपुरिया के साथ टक्कर है। स्वर्गीय ताऊ देवी लाल परिवार की बात करें तो सिरसा के रानियां में निर्दलीय चुनाव लड़ रहे रणजीत सिंह चौटाला अपने ही छोटे भाई एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) प्रत्याशी अर्जुन चौटाला और कांग्रेस प्रत्याशी सर्वमित्र कांबोज के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हुए हैं। उचाना को बचाना दुष्यंत के लिए बना साख इनेलो को तोड़कर जननायक जनता पार्टी (जजपा) बनाने वाले पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की जींद के उचाना में राह आसान नहीं। यहां उन पर पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह (कांग्रेस) भारी पड़ रहे हैं। डबवाली में दिग्विजय सिंह चौटाला (जजपा) का अपने ही चाचा आदित्य चौटाला (इनेलो) और भाई अमित सिहाग (कांग्रेस) से त्रिकोणीय मुकाबला है। इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अभय सिंह चौटाला ऐलनाबाद और बहू सुनैना चौटाला (इनेलो) फतेहाबाद में त्रिकोणीय मुकाबले में उलझे हुए हैं। छह सांसदों और तीन पूर्व मंत्रियों के वारिसों का भविष्य होगा तय विधानसभा चुनाव के नतीजे छह सांसदों और तीन पूर्व मंत्रियों के वारिसों का राजनीतिक भविष्य भी तय करेंगे, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री और गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव का महेंद्रगढ़ के अटेली में कांग्रेस की अनीता यादव से मुकाबला है। मैदान में रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य इसी तरह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला की कैथल में भाजपा विधायक लीलाराम गुर्जर और हिसार के सांसद जयप्रकाश जेपी के बेटे विकास सहारण (कांग्रेस) की कलायत में पूर्व मंत्री कमलेश ढांडा (भाजपा) और इनेलो प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा से टक्कर है। हिसार में बीजेपी पर भारी पड़ सकती हैं सावित्री जिंदल अंबाला के कांग्रेस सांसद वरुण मुलाना की पत्नी पूजा चौधरी को मुलाना में भाजपा की संतोष सारवान तथा राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा की माता शक्ति रानी शर्मा को कालका में कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी से कड़ी चुनौती मिल रही है। कुरुक्षेत्र के भाजपा सांसद नवीन जिंदल की माता सावित्री जिंदल हिसार में भाजपा के कार्यवाहक मंत्री डॉ. कमल गुप्ता पर भारी पड़ रही हैं। पूर्व मंत्रियों में चौधरी निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा (निर्दलीय) अंबाला कैंट में पूर्व मंत्री अनिल विज (भाजपा), आनंद सिंह दांगी के बेटे बलराम दांगी (कांग्रेस) रोहतक के महम में निर्दलीय बलराज कुंडू और भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान दीपक हुड्डा के साथ कड़े मुकाबले में फंसे हैं। पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे सुनील सांगवान (भाजपा) की दादरी में राह आसान नहीं।

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