LATEST NEWS

मुख्य अतिथि के पहुंचने से पहले स्टेज के पास युवाओं ने धक्का मुक्की, करंट लगने से गई युवक की जान

नारनौंद नारनौंद अनाज मंडी में आज कांग्रेस पार्टी द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा पहुंचे थे। यह रैली नारनौंद हलके से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार जस्सी पेटवाड़ के समर्थन में की गई। बता दें कि रैली में मुख्य अतिथि के पहुंचने से पहले स्टेज के पास युवाओं ने धक्का मुक्की शुरू कर दी। जिसके कारण कुछ युवक बिजली की तारों में फंस गए और उनमें से एक युवक को बिजली का करंट लग गया। युवक को नारनौंद के सामान्य अस्पताल में ले जाया गया। डॉक्टर ने वहां से उसको हिसार के लिए रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही युवक की मौत हो गई। मृतक युवक गांव बास का रहने वाला था। युवक का नाम वीरभान व उसकी उम्र 30 वर्ष बताई जा रही है।

नवरात्रि के अवसर पर पीएम मोदी समेत कई मंत्रियो ने दी शुभकामनाएं, सर्व कल्याण की कामना की

नई दिल्ली नवरात्रि के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर एक विशेष संदेश साझा किया। पीएम मोदी ने सर्व कल्याण की कामना की। पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की करबद्ध प्रार्थना! उनकी कृपा से हर किसी का कल्याण हो। देवी मां की यह स्तुति आप सबके लिए…” इस संदेश के साथ पीएम मोदी ने मां शैलपुत्री की स्तुति भी साझा की। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, “वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ जगज्जननी मां भगवती की उपासना के पावन महापर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ के प्रथम दिवस पर मां शैलपुत्री से प्रार्थना है कि जगत में दुष्प्रवृत्तियों का विनाश हो, सद्प्रवृत्तियों का उन्नयन हो व चहुंओर खुशहाली और समृद्धि हो। जय मां शैलपुत्री!” कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “नवरात्रि के शुभ पर्व पर सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं। मां दुर्गा की कृपा आप पर सदा बनी रहे और आपका जीवन खुशियों से भरा रहे। जय माता दी।” प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा, “आज के शुभ दिन से शारदीय नवरात्र का आरंभ हो रहा है – शक्तिस्वरूपा मां दुर्गा की पूजा का महापर्व। देश-विदेश में फैले हुए माता के भक्तों को त्योहारों की इस श्रृंखला की बहुत-बहुत बधाई। पूरा देश धन-धान्य से संपन्न हो; जन रोग-शोक-जरा-मरण से मुक्त रहे। मां का स्नेहाशीष सभी बच्चों पर बरसे। ऊं जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक्स पर लिखा, “शारदीय नवरात्रि के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मां दुर्गा शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। मां दुर्गा भक्तों और साधकों में शक्ति का संचार कर करूणा और परोपकार के द्वारा प्राणियों का कल्याण करती हैं। नवरात्रि पर्व राज्य में सुख, शांति एवं समृद्धि लेकर आए।”  

मां वैष्णो का दरबार शारदीय नवरात्रों पर दुल्हन की तरह सजा, दर्शनार्थियों की सुविधा का रखा जा रहा विशेष ध्यान

कटरा शारदीय नवरात्रों की प्रतिपदा को जम्मू के कटरा स्थित मां वैष्णो देवी का भवन दुल्हन की तरह सज गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी की आराधना को जुटे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा का खास ख्याल रखा गया है। वहीं, मां वैष्णो देवी भवन परिसर में विशाल शत चंडी महायज्ञ का आयोजन भी किया गया है। माता के भवन परिसर में जगह-जगह बने विशाल पंडाल, स्वागत द्वार और देवी-देवताओं की मूर्तियां श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही हैं। देसी और विदेशी फलों-फूलों की महक से वातावरण महक रहा है। मां वैष्णो देवी के दिव्य दर्शन पाने के लिए भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार दोपहर तक लगभग 25,500 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवा लिया था और वे मां के दर्शन के लिए रवाना हो चुके थे। श्रद्धालुओं को बिना किसी देरी के आरएफआईडी यात्रा कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उन्हें यात्रा में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। कटरा में श्रद्धालुओं के लिए आरएफआईडी यात्रा कार्ड प्राप्त करने के लिए कई पंजीकरण केंद्र खोले गए हैं, जिनमें रेलवे स्टेशन, मुख्य बस अड्डा, हेलीपैड और अन्य स्थान शामिल हैं। बिना आरएफआईडी कार्ड के किसी को भी वैष्णो देवी की यात्रा की अनुमति नहीं है। सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिस और श्राइन बोर्ड के अधिकारी मौजूद हैं, जो कार्ड की जांच के बाद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दे रहे हैं। नए लाल और पीले रंग के आरएफआईडी कार्ड जारी किए गए हैं, जबकि पुराने कार्ड अब मान्य नहीं होंगे। ऑनलाइन यात्रा पर्ची लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कटरा रेलवे स्टेशन पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन एटीएम स्थापित किया गया है, जिससे वे बिना कतार में लगे यात्रा कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। अर्ध कुवारी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक लंगर की व्यवस्था की गई है, जहां उन्हें शुद्ध घी की खिचड़ी और अन्य पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। पानी की व्यवस्था के लिए आरोग्य युक्त जल केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, मां वैष्णो देवी भवन परिसर में विशाल शत चंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 51 पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी। यह यज्ञ देश और विश्व की सुख-शांति के लिए आयोजित किया जा रहा है। सुरक्षा के कड़े प्रबंध भी किए गए हैं। कटरा में चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। लगभग 400 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से भी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 6 सेक्टर बनाए गए हैं, जिनमें विभिन्न प्रमुख स्थानों पर अधिकारी तैनात रहेंगे। विशेष सुविधाओं की अग्रिम बुकिंग पूरी तरह से फुल हो चुकी है, जिसमें हेलीकॉप्टर सेवा, बैटरी कार सेवा, और रोपवे शामिल हैं। श्रद्धालुओं को अटका आरती में शामिल होने का भी अवसर मिलेगा, जहां देश के नामी गायक भजन प्रस्तुत करेंगे।  

देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 9 वें सीजन का समापन

देहरादून राजधानी देहरादून में पिछले तीन दिन से चल रहे हैं देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 9 वें  सीजन का समापन बहुत ही शानदार तरीके से हुआ पिछले तीन दिनों में देहरादून पहुंचकर सभी सितारों ने न सिर्फ अपने अनुभव साझा किया बल्कि फिल्म और एक्टिंग का कोर्स कर रहे छात्र छात्राओं युवाओं लोगों को बहुत कुछ सीखने का मौका भी दिया कार्यक्रम का उद्घाटन हरिद्वार रोड से होटल सॉलिटेयर में किया गया था जिसमें मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ  बहुगुणा मौजूद रहे । इस मौके पर दोनों ने ही कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिए जिससे कि देहरादून उत्तराखंड के युवाओं को फिल्म मेकिंग से संबंधित जानकारी मिलती रहे। कार्यक्रम में अभिनेत्री व राजस्थानी लोक पॉप गायिका इला अरुण अभिनेता राजेश शर्मा अभिनेता गजेंद्र चौहान आदिल हुसैन मनोज जोशी जाकिर हुसैन शरीफ हाशमी  दीपक केजरीवाल पंकज बेरी फिल्म निर्देशक पुष्पेंद्र सिंह कमल चंद्र अग्नि देव चटर्जी को सम्मानित किया गया।  इस मौके पर मिजोरम से आए युवा सेबेस्टियन जेसिका और सब रीना ने अपनी प्रस्तुति से सबको मंत्र मुग्ध किया। फेस्टिवल डायरेक्टर राजेश शर्मा जी ने बताया कार्यक्रम के दूसरे दिन सभी कलाकार तुला कॉलेज पहुंचे जहां इला अरुण ने कहा खुद की अलग पहचान बनाने के लिए युवाओं को पहले खुद को तरास ना होगा और अपनी खूबियों को जानकर उन पर काम करना होगा उन्होंने वहां पर छात्रों के साथ डांस भी किया।  इस मौके पर के के रैना ने कहा कि अभिनय सिर्फ संवाद बोलने तक सीमित नहीं है बल्कि हर भाव को जीवंत करना होता है।  इसी तरह से सभी कलाकारों ने कॉलेज में छात्र-छात्राओं के साथ  अपने अनुभव साझा किया।  छात्र भी सभी कलाकारों को अपने बीच पाकर खासे उत्साहित दिख रहे थे ।  वहीं तीसरे दिन सिल्वर सिटी में इला अरुण के साथ अभिनेता के के रहना का टॉक शो आयोजित किया गया था जिससे पूर्व उनकी फिल्म त्रिकाल प्रदर्शित की गई जिसके बारे में उन्होंने विस्तार पूर्वक चर्चा की।  लोगों को तकनीकी विषयों की जानकारी देते हुए बताया कि एक फिल्म में किन-किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है । वही सिल्वर सिटी में तीन दिनों में लगभग 75 फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई जिनमे शॉर्ट फिल्म , डाक्यूमेंट्री के अलावा पर्शियन, इजरायल , फिल्मों को भी प्रदर्शित किया गया वहीं कमल चंद्र की फिल्म हमारे बारह ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया । तीन दिनों में प्रदर्शित फिल्मों के डायरेक्टर्स को अभिनेताओं को मोमेंटो दे कर सम्मानित किया। उनके काम की सराहना भी की।   उत्तराखंड टैलेंट हंट में युवाओं ने दिखाया अपनी प्रतिभा का जलवा फिल्म फेस्टिवल के साथ साथ ही अंजना शर्मा जी ने उत्तराखंड टैलेंट हंट का आयोजन भी किया गया जिसका उद्घाटन व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज मेसन एवं उद्यमिता राज्य मंत्री उत्तराखंड सरकार विनोद उनियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया । तीनों दिन युवाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस मौके पर युवाओं ने न सिर्फ एक्टिंग मिमिक्री की वही डांस और सिंगिंग में भी अपना हुनर दिखाया । इस मौके पर बतौर जज  रक्षिमा तोमर किरण सिंह सोनाली सरकार राजीव सच्चर पी एस कोचर कोमल वोहरा मुक्तेश हांडा आदि मौजूद रहे इस मौके पर अंतिम दिन सभी विजेताओं को मोमेंट तो ट्रॉफी देकर एवं सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया । तीन दिनों में वहां पर पहुंचे लगभग ढाई सौ प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट देकर उनको भी प्रोत्साहित किया गया। उत्तराखंड टैलेंट हंट के विजेताओं में कैटिगरी ए में सिंगिंग में प्रथम स्थान क्रियांश द्वितीय स्थान नायरा एवं तृतीय स्थान पर अंतरिक्ष रहे । वही कैटिगरी बी सिंगिंग में प्रथम स्थान पर चारु द्वितीय स्थान पर कनक नौटियाल एवं तृतीय स्थान पर रवीना रहे।  डांसिंग की ए कैटिगरी में अनन्या सिंह प्रथम स्थान पर इशा द्वितीय स्थान पर एवं आराध्या बलोनी तृतीय स्थान पर रहे।  क्रांतिकारी बी में प्रथम स्थान पर विशाल एवं द्वितीय स्थान पर तन्मय व तृतीय स्थान पर राहुल रहे वही एक्टिंग में प्रथम स्थान पर गौरव द्वितीय स्थान पर सिद्धार्थ व शायरी में प्रथम स्थान पर प्रज्ञा व द्वितीय स्थान पर कनक व तृतीय स्थान पर डॉक्टर पी के सरोहा रहे । ग्रुप डांस में व ग्रुप सिंगिंग में अनंत म्यूजिक एंड डांस एकेडमी व उकामना डी आई टी से रहीं।

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने भारत सहित पांच देशों से वापस बुलाए अपने राजदूत, अधिकारी नाराज

 ढाका बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर अपने पांच राजदूतों को वापस ढाका बुला लिया है। बांग्लादेश ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, पुर्तगाल और संयुक्त राष्ट्र के अपने राजदूतों को वापस ढाका लौटने का आदेश दिया है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, भारत में उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान के अलावा न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि, ऑस्ट्रेलया, बेल्जियम और पुर्तगाल के राजदूत शामिल हैं। सूत्रों का कहना है मुस्तफिजुर रहमान सहित वापस बुलाए गए राजदूत कुछ महीनों में रिटायर होने वाले थे। सरकार के फैसले से अधिकारी नाराज वहीं, नाम न छापने की शर्त पर कुछ अधिकारियों ने अंतरिम सरकार के आदेश पर नाराजगी जाहिर की है। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रशासनिक विभाग द्वारा जारी आदेश से विदेश सेवा के अधिकारी नाराज हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत में उच्चायुक्त समेत वापस बुलाए गए अन्य राजदूतों की नियुक्ति राजनीतिक तौर पर नहीं की गई थी।

ईरान ने बरसाई मिसाइलें मारा सिर्फ एक ,वो भी फिलिस्तीनी, हमला रहा नाकाम

तेहरान इजरायल पर अचानक 180 से ज्यादा मिसाइलें दागकर ईरान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. ईरान के इस कदम से पूरा मिडिल ईस्ट जंग के मुहाने पर खड़ा हो गया है. चिंता की बात यह है कि इजरायल ने अब तक ईरान पर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है, जिससे इजरायल के मंसूबों का पता नहीं चल पा रहा है. इजरायल पर किये गये मिसाइल अटैक को ईरान भले ही दुनिया के सामने बड़े एक्शन के तौर पर पेश कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि ईरानी हमले से इजरायल को कुछ खास नुकसान नहीं पहुंचा है. इजरायल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दिया. इन हमलों में सिर्फ एक शख्स की मौत हुई और वह भी इजरायली नहीं, बल्कि फिलिस्तीनी नागरिक था. जेरिको शहर में आकर लगी मिसाइल ईरानी मिसाइल से जिस शख्स की मौत हुई उसका नाम समेह अल-असाली था, जो पेशे से मजदूर असाली की मौत फिलिस्तीन के जेरिको शहर के पास पश्चिमी तट के नुइमा गांव में हुई. जिस समय (रात) उसे मिसाइल लगी, वह सड़क पर टहल रहा था. दरअसल, जेरिको, फिलिस्तीन के पश्चिमी तट पर स्थित एक शहर है. जेरिको जॉर्डन घाटी में बसा है, जिसके पूर्व में जॉर्डन नदी और पश्चिम में यरुशलम है. चार फिलिस्तीनी घायल भी हुए जेरिको के गवर्नर हुसैन हमायल ने एजेंसी को बताया कि रॉकेट के टुकड़ा सीधे फिलिस्तीनी मजदूर के ऊपर गिर गया, जिसमें गाजा पट्टी के जबालिया का रहने वाले समेह अल-असाली की मौत हो गई. रॉकेट के कुछ टुकड़े लगने से 4 फिलिस्तीनी घायल भी हो गए. जानकारी के मुताबिक तीन बच्चों का पिता अल-असली गाजा के उन हजारों मजदूरों में से एक था, जिनके पास इजरायली वर्क परमिट था. इजरायली राजदूत ने हमले पर क्या कहा? बता दें कि ईरान के हमले के बाद भारत में इजरायल के राजदूत रेवेन अजार इंडिया टुडे को एक इंटरव्यू दिया, जिसमें अजार ने कहा कि ईरान ने 181 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें प्रत्येक में 700 से 1,000 किलोग्राम तक विस्फोटक भरा हुआ था और उससे बड़ा नुकसान हो सकता था. हमले के बाद जो बाइडेन ने क्या कहा? ईरान के मिसाइल अटैक के बाद दोनों मुल्कों में तनाव कम करने के लिए G7 देश एक आपात बैठक कर चुके हैं. इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि वह इजरायल का साथ दे रहे हैं, लेकिन अगर इजरायल ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला करता है तो अमेरिका इसमें उसका साथ नहीं देगा. कैसे फेल हुईं ईरान की मिसाइलें? इजरायल का दावा है कि ईरान की 181 मिसाइलों में से 90 फीसदी फेल हो गईं. इसकी वजह इजरायल के 3-3 सुरक्षा चक्र हैं, जो कि मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं. जिन्होंने एक बार फिर अपना लोहा साबित कर दिया है. पहला मिसाइल डिफेंस सिस्टम आयरन डोम है. जो 152 किलो मीटर के दायरे में और 12 किलो मीटर ऊंचाई के अंदर आने वाले रॉकेट को मार गिराता है. दूसरा मिसाइल डिफेंस सिस्टम डेविड्स स्लिंग है, जिसकी रेंज 301 किलो मीटर है. जो 49 किलो मीटर की ऊंचाई के अंदर आने वाले खतरे को तबाह करने की क्षमता रखता है. तीसरा मिसाइल डिफेंस सिस्टम द एरो सिस्टम है. जो पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर ही मिसाइल को ध्वस्त कर देता है. इस तरह इजरायल के तीन-तीन सुरक्षा चक्र ने उसे एक बार फिर बचा लिया.  

उत्तरी इज़रायल में, 60,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हुए : संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र  इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव और इजरायली सेना की ओर से जारी निकासी आदेशों के कारण दो लाख से ज्यादा लोग दक्षिणी लेबनान से विस्थापित हो गए हैं, जिनमें से एक लाख से ज्यादा लोग सीरिया गये हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने  दी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने चेतावनी दी है कि विस्थापित लोगों की संख्या बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि इजरायली रक्षा बल ने सोमवार और  बीच दक्षिण लेबनान के 30 गांवों सहित कई जगहों के लिए निकासी के आदेश जारी किए हैं। प्रवक्ता ने दैनिक विवरण में कहा कि उत्तरी इज़रायल में, 60,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया को लगातार बढ़ा रही है और लेबनान में विस्थापित लोगों के लिए अपनी प्रतिक्रिया में तत्काल मानवीय एवं सुरक्षा सहायता प्रदान करने के लिए भागीदारों के साथ काम कर रही है। संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी भोजन, बच्चों के लिए पोषण, पानी, बिस्तर और स्वच्छता किट जैसी अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान कर लेबनानी सरकार की प्रतिक्रिया का समर्थन कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने आवश्यक आपूर्ति के साथ 50,000 विस्थापितों को शरण देने वाले लगभग 200 सामूहिक आश्रयों का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जारी एक बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 42.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन मानवीय सहायता का तत्काल समर्थन देने की अपील की। दुजारिक ने कहा कि हमारे मानवतावादी सहयोगियों का मानना है कि इस पैसे का लक्ष्य अगले तीन महीनों के लिए 10 लाख लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि लेबनान में मानवतावादी समन्वयक इमरान रिज़ा ने चेतावनी दी है कि मानवतावादी सहयोगियों काे पर्याप्त संसाधनों के बिना पूरे देश की आबादी को उस सहायता के बिना उनके हाल पर छोड़ना पड़ेगा, जिसकी उन्हें तत्काल आवश्यकता है।      

तुर्की ने सीरिया और इराक में किया भीषण हमला, 13 की मौत

अंकारा  तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश की सेना ने उत्तरी इराक और उत्तरी सीरिया में अभियान चलाकर 13 ‘आतंकवादियों’ को मार गिराया है।रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उत्तरी इराक में तुर्की के ऑपरेशन क्लॉ-लॉक में प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के 11 सदस्य मारे गए। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में तुर्की ने देश की सीमा के पास उत्तरी इराक के मेतीना, जैप और अवाशिन-बसयान क्षेत्रों में पीकेके के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन क्लॉ-लॉक शुरू किया था। मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी सीरिया में एक अलग ऑपरेशन में तुर्की की सेना ने सीरियाई कुर्द पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) के दो सदस्यों को मार गिराया। मंत्रालय के अनुसार, वाईपीजी सदस्यों को तुर्की सेना के ऑपरेशन पीस स्प्रिंग क्षेत्र में देखा गया था। तुर्की अधिकारी अक्सर अपने बयानों में ‘निष्प्रभावी’ (न्यूट्रलाइज्ड) शब्द का प्रयोग यह दर्शाने के लिए करते हैं कि संबंधित ‘आतंकवादियों’ ने आत्मसमर्पण कर दिया, मारे गए या पकड़ लिए गए। तुर्की सेना, पीकेके और वाईपीजी के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इराक और सीरिया में सीमा पार ऑपरेशन चला रही है। तुर्की सेना ने पड़ोसी देश के साथ अपनी सीमा पर वाईपीजी-फ्री जोन बनाने के लिए उत्तरी सीरिया में 2016 में ऑपरेशन यूफ्रेट्स शील्ड, 2018 में ऑपरेशन ओलिव ब्रांच, 2019 में ऑपरेशन पीस स्प्रिंग और 2020 में ऑपरेशन स्प्रिंग शील्ड शुरू किया था। तुर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध पीकेके ने तीन दशकों से अधिक समय तक तुर्की सरकार के खिलाफ विद्रोह किया है। तुर्की वाईपीजी समूह को पीकेके की सीरियाई शाखा के रूप में देखता है।  

सरकार किसी की भी बने इस बार जम्मू कश्मीर को पहला हिंदू सीएम मिलेगा !

श्रीनगर जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने तीन चरणों में अपना जनादेश दर्ज कर दिया है. मंगलवार को तीसरे और आखिरी चरण की वोटिंग संपन्‍न हुई. 8 अक्तूबर को मतगणना होगी. तीसरे चरण में मंगलवार को 7 जिलों की 40 विधानसभा सीटों पर 66.56% वोटिंग हुई. तीसरे फेज में वोटिंग परसेंटेज पहले और दूसरे फेज से ज्यादा रहने का सीधा मतलब कुछ निकलता है जिसे समझना होगा. पहले फेज में 61.38% और दूसरे फेज में 57.31% मतदान हुआ था. तीसरे फेज की 40 सीटों में से 24 जम्मू डिवीजन और 16 कश्मीर घाटी की हैं. मतलब साफ दिख रहा है कि जम्मू रिजन में जम कर वोटिंग हुई है. इस तरह इस बार जम्मू कश्मीर में जो माहौल बन रहा है उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस बार मुस्लिम बहुल जनसंख्या वाले इस केंद्र शासित प्रदेश को हिंदू सीएम मिल सकता है. कई कारण और भी हैं जो इशारा करते हैं कि सरकार किसी की भी बने इस बार जम्मू कश्मीर को पहला हिंदू सीएम मिल सकता है. भारतीय गणतंत्र में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक और राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक का पद देश का कोई भी नागरिक हासिल कर सकता है. संविधान में इस बात की गारंटी दी हुई है. यही कारण है कि देश में राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर 2 बार देश के अल्पसंख्यक (मुस्लिम) हासिल कर चुके हैं. देश के कई राज्यों में मुस्लिम अल्पसंख्या में होने के बावजूद सीएम बन चुके हैं. महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल आदि में मुख्यमंत्री पद पर सीएम पद संभाल चुके हैं. इसी बात को आधार बनाकर जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनावों में इस बार जम्मू क्षेत्र में हिंदू मुख्यमंत्री का मुद्दा जोर पकड़ लिया है. जम्मू कश्मीर जो राजनीतिक हालत बन रहे हैं उसमें कोई भी पार्टी चुनाव जीते इस बार ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं कि यहां का मुख्यमंत्री कोई हिंदू भी बन सकता है.आइए देखते हैं कि वो कौन से कारण हैं जिसके आधार पर यह बात कही जा रही है. 1- जम्मू में इस बार क्यों है हिंदू सीएम का माहौल 1947 में भारत संघ में शामिल होने से लेकर 5 मार्च 1965 तक, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री के नाम से संबोधित किया जाता था. न्यायमूर्ति मेहर चंद महाजन को छोड़कर, जो जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री थे, बाकी सभी प्रधानमंत्री घाटी से थे और मुस्लिम थे. शेख मोहम्मद अब्दुल्ला, बख्शी गुलाम मोहम्मद, ख्वाजा शम्सुद्दीन, और गुलाम मोहम्मद सादिक ने जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया. बाद में प्रधानमंत्री का पद मुख्यमंत्री में बदल दिया गया और सदर-ए-रियासत (राष्ट्रपति) को राज्यपाल का नाम दे दिया गया. इस बड़े परिवर्तन के बाद जम्मू कश्मीर के सभी मुख्यमंत्री एक तो मुस्लिम हुए और दूसरे कश्मीर घाटी से ही हुए. केवल गुलाम नबी आजाद ही एक मात्र ऐसे थे जम्मू के डोडा जिले से आते हैं. दरअसल 2011 की जनगणना के अनुसार, जम्मू और कश्मीर में 68.8% मुसलमान हैं,जो अधिकतर कश्मीर घाटी में रहते हैं. करीब 28.8% हिंदू हैं, जिनमें से अधिकांश जम्मू में रहते हैं. जम्मू में आने वाली विधानसभा सीटों और लोकसभा सीटों पर आम तौर पर हिंदू प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं. जम्मू क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ही नहीं कुछ सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का भी दबदबा है. पर इस बार जम्मू नॉर्थ के बीजेपी उम्मीदवार और राज्य उपाध्यक्ष शाम लाल शर्मा ने जम्मू डिवीजन के मतदाताओं से अपील की थी कि वे पार्टी के उम्मीदवारों को जिताएं ताकि केंद्र शासित प्रदेश को अपना पहला डोगरा हिंदू मुख्यमंत्री मिल सके. इतना ही नहीं एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक मुस्लिम मुख्यमंत्री हो सकता है तो जम्मू और कश्मीर में एक हिंदू क्यों नहीं हो सकता? यहां तो हिंदुओं की आबादी 32% है. दरअसल इस बार के चुनाव परिणाम आने के बाद श्याम लाल शर्मा की कही बातें अतिशयोक्ति नहीं हैं. दरअसल पिछले कुछ सालों में जम्मू की हालत कश्मीर के मुकाबले बहुत कमजोर हुई है. जम्मू अब कश्मीर की शीतकालीन राजधानी भी नहीं रही. दूसरे ट्रेनों का ठहराव अब कटरा तक हो जाने से तीर्थयात्रियों की आमदरफ्त कम हो गई. इसलिए यहां के लोग चाहते हैं कि जम्मू क्षेत्र का आदमी सीएम बनेगा तो ही जम्मू के हक में फैसले हो सकेंगे. 2- त्रिशंकु विधानसभा बनी तो बीजेपी रहेगी सबसे आगे दरअसल श्याम लाल शर्मा के बयान को आप बीजेपी की रणनीति के रूप में देख सकते हैं. क्योंकि हिंदुओं के वोट बीजेपी और कांग्रेस में बंटने की उम्मीद है. बीजेपी इस प्रयास में है कि जम्मू डिवीजन जहां 43 विधानसभा सीटें हैं, में अधिक से अधिक सीटों पर कब्जा कर सके. दरअसल जम्मू कश्मीर विधानसभा में त्रिशंकु विधानसभाओं का इतिहास रहा है. अगर त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो सबसे अधिक संभावना बीजेपी के ही सीएम की होगी. क्योंकि 5 नामित सदस्यों का सहयोग भी बीजेपी को मिलने की उम्मीद रहेगी. 2002 के विधानसभा चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस को 87 सदस्यीय विधानसभा में 57 सीटों से घटकर 28 सीटों पर आ गई थी. कांग्रेस ने 20 सीटें जीतीं और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने 16 सीटें हासिल कीं, जिसके बाद कांग्रेस, पीडीपी और कुछ छोटे दलों ने मिलकर सरकार बनाई. 2008 के विधानसभा चुनावों में भी त्रिशंकु परिणाम आए, जिसके कारण नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और कांग्रेस को मिलकर सरकार बनानी पड़ी. घाटी में राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती दरार के चलते, जम्मू के नेता यह मानने लगे कि जम्मू को भी अपना मुख्यमंत्री मिल सकता है. 2014 के चुनावों में बीजेपी ने जम्मू से 25 सीटें जीतीं, जब हिंदू मतदाता पार्टी के पीछे एकजुट हो गए थे. पीडीपी के साथ बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई. जाहिर है बीजेपी ने ऐसा राज्य में अपनी जड़ें जमाने के लिए किया होगा. अब बीजेपी खुलकर कह रही है कि यदि पार्टी पूर्ण बहुमत से जीतती है, तो मुख्यमंत्री जम्मू से होगा. 3-कांग्रेस-नेशनल कान्फ्रेंस की सरकार बनती है तो भी हिंदू सीएम की संभावना नए परिसीमन के बाद जम्मू कश्मीर में पहली बार चुनाव हो रहे हैं. कुल 90 सीटों पर विधानसभा के चुनाव होने हैं. इनमें 47 सीटें कश्मीर में हैं, जबकि 43 सीटें जम्मू में हैं. परिसीमन के पहले जम्मू एरिया की सीटों की … Read more

Indian Army ने 56 साल बाद ढूंढ निकाले Plane Crash में शहीद हुए जवानों के शव

शिमला/लाहौल स्पीति ये कहानी उन चार फौजियों की है, जिनके शवों के अवशेष 56 साल बाद मिले हैं। ये सभी फौजी हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में एक विमान हादसे में शहीद हो गए थे। 29 सितंबर 2024 को चन्द्रभागा-13 ढाका ग्लेशियर में सैनिकों के शवों के अवशेष बरामद हुए हैं। इन फौजियों में मलखान सिंह, सहारनपुर, नारायण सिंह पौड़ी-गढवाल और मुंशी राम, रेवाड़ी और थॉमस चैरियन केरल के तौर पर हुई है। सेना की रेस्क्यू टीम ने इन्हें निकाला है और अब काजा के लोसर हेलिपेड से इन अवशेषों को चंडीगढ़ भेजा गया। 1968 में हुआ था हादसा मामला 7 फरवरी 1968 का है। जब चंडीगढ़ से लेह के लिए भारतीय वायुसेना का एएन-12 जा रहा था। इसमें क्रू-मेम्बर के साथ कुल 102 सैनिकों सवार थे। इस दौरान रोहतांग दर्रे के करीब विमान का संपर्क टूटा और फिर यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान के खोज के लिए वर्ष 2004, 2007, 2013, 2019 विशेष अभियान चलाया गया है। डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए और 2005, 2006, 2013 और 2019 में सर्च ऑपरेशन पांच शव बरामद किए थे। 2003 में मिले थे विमान के पार्टस 2003 में सबसे पहले मनाली के पर्वतारोही संस्थान के ट्रैकर्स ने विमान को खोजा था। 56 साल के बाद 29 सितंबर 2024 को चन्द्रभागा-13 ढाका ग्लेशियर में सैनिकों के शव बरामद हुए। भारतीय सेना के विशेष टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को लोसर लाया गया। मनाली के एक ट्रैकर का कहना है कि साल 2023 में जब उन्होंने भी ढाका ग्लेशियर ट्रैक किया था तो यहां पर विमान का मलबा और कुछ फौजियों के अवेशष देखे थे और फोटो और वीडियो शेयर किए थे। उसने बताया कि यहां पहुंचने के लिए 2 दिन का वक्त लगता है। गर्मियों में बर्फ पिघलने के बाद यहां पर ट्रैकिंग करने वह गए थे। यहां पर पहुंचना आसान नहीं है, आम लोग यहां पर नहीं जाते हैं।  लाहौल स्पीति की चंद्रभागा रैंज में 56 साल पहले हुए विमान हादसे में अब चार फौजी जवानों के शव बरामद किए गए हैं. भारतीय सेना की टीम ने इन शवों को वहां से निकाला है और स्पीती के काजा के लोसर ले गई है. यहां पर शवों को परिवारों को सौंपा जाएगा. इन चार शवों में हरियाणा के रेवाड़ी के सिपाही मुंशीराम भी शामिल हैं. सभी शवों की पहचान हो गई है. जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी 1968 को चंडीगढ़ से लेह के लिए इंडियन एयरफोर्स के एक विमान ने उड़ान भरी थी. इस विमान में 102 लोग सवार थे. लेकिन हिमाचल के रोहतांग दर्रे के पास विमान का संपर्क टूट गया था और फिर आगे बातल के ऊपर चंद्रभागा रैंज में विमान क्रैश हो गया था. विमान में रेवाडी की बावल तहसील के गांव गुर्जर माजरी के सिपाही स्वर्गीय मुन्शीराम भी सवार थे और 56 साल बाद अब उनकी बॉडी के अवेशष बरामद हुए हैं.  रेवाड़ी के डीसी अभिषेक मीणा ने  बताया कि सैन्य अभियान दल ने बर्फ से ढके पहाड़ों से चार शव बरामद किए हैं, उनमें स्वर्गीय मुन्शीराम के अवशेष भी हैं. उनके पार्थिव शरीर को जल्द ही गांव में लाया जाएगा. स्वर्गीय मुन्शीराम के पिता का नाम भज्जूराम, माता का नाम रामप्यारी तथा पत्नी का नाम श्रीमति पार्वती देवी है. स्वर्गीय मुन्शीराम के भाई कैलाशचन्द को इस सम्बन्ध में सेना की ओर से सूचना मिली हैं. लेह के लिए चंडीगढ़ से फौजियों ने भरी थी उड़ान गौरतलब है कि यह विमान हादसा 7 फरवरी, 1968 को हुआ था. चंडीगढ़ से 102 यात्रियों को ले जा रहा भारतीय वायु सेना का एएन-12 विमान खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के पर्वतारोहियों ने विमान के मलबे को खोजा था. बाद में सेना, खासकर डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए और 2005, 2006, 2013 और 2019 में सर्च ऑपरेशन पांच शव बरामद किए थे. हालांकि, इस दौरान मनाली के कई ट्रैकर्स ने भी विमान के मलबे को स्पॉट किया था. लाहौस स्पीति के एसपी मयंक चौधरी ने बताया कि कि चंद्रभागा रैंज से चार जवानों के शवों को बरामद किया गया है. इन्हें काजा के लोसर ले जाया गया है और वहां पर मेडिकल टीम के अलावा, पुलिस की टीम भी मौजूद है. पोस्टरमार्टम के बाद परिजनों को ये शव सौंपे जाएंगे. 2003 में हुई हादसे की पुष्टि 2003 में, अधिकारियों ने पुष्टि की कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और कुछ शव बरामद किए गए थे. जिसके बाद अरनमुला से स्थानीय पुलिस ने थॉमस चेरियन के बारे में विवरण सत्यापित करने के लिए उनके घर का दौरा किया, जहां उनका परिवार रहता है. भाई थॉमस वर्गीस को समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसे समय क्या करें. हालांकि, उन्होंने दुख और राहत दोनों व्यक्त करते हुए कहा कि, यह उनके लिए दुखद भरा क्षण है लेकिन कब्र में दफनाने के लिए अपने भाई के अवशेषों को प्राप्त करने से कुछ शांति मिली है. तीन शवों की पहचान शैजू मैथ्यू ने बताया- परिवार 56 वर्षों के बाद भी उनकी निरंतर खोज के लिए सरकार और सेना के प्रति आभार व्यक्त करता है. केरल के कई अन्य सैनिक भी AN12 विमान में सवार थे, जिनमें कोट्टायम के केपी पनिकर, केके राजपन और आर्मी सर्विस कोर के एस भास्करन पिल्लई शामिल थे. इन सैनिकों के शव अभी तक नहीं मिले हैं. सितंबर में रोहतांग दर्रे में चार और शव मिले थे, और इनमें से तीन की पहचान हो गई है, जिसमें थॉमस चेरियन का शव भी शामिल है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि चौथा शव रन्नी के एक सैनिक पीएस जोसेफ का हो सकता है, जो विमान में भी था.

तिरुपति मंदिर में 4 अक्टूबर से 9 दिवसीय ‘ब्रह्मोत्सव’ उत्सव, हर दिन 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद

तिरुपति आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद को लेकर हुए विवाद के बाद अब तिरुपति का श्री वेंकटेश्वर मंदिर ‘ब्रह्मोत्सव’ के लिए तैयारी कर रहा है. यह 9 दिवसीय उत्सव 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें हर दिन लगभग 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है. बता दें कि लड्डू विवाद के बाद मंगलवार को मंदिर में सफाई अनुष्ठान ‘कोईल अल्वार तिरुमंजनम’ का आयोजन किया गया था.  इस दौरान पूरे मंदिर, मूर्तियों और पूजा के बर्तनों को साफ किया गया. हर दिन बनेंगे 8 लाख लड्डू ब्रह्मोत्सव के दौरान मंदिर प्रशासन बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की उम्मीद कर रहा है. पवित्र रसोई, जिसे ‘पोटु’ कहा जाता है, जहां प्रतिदिन लगभग 3.5 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं वहां  ब्रह्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन कम से कम 8 लाख लड्डू बनाने के लिए तैयार हो रही है. जानकारी के अनुसार, हर दिन एक लाख तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है. प्रशासन व्यवस्था भी सख्त मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं. 4 से 12 अक्टूबर तक सभी वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है. मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों को भीड़ नियंत्रित करने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है. लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा जा रहा है. कौन तैयार करता है लड्डू तिरुपति मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. यहां हर साल करीब तीन करोड़ श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं यानी रोजाना करीब 82 हजार श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करते हैं. करीब 3.50 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं. सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं. इस पूरी व्यवस्था का संचालन उस कमेटी के द्वारा किया जाता है, जिसका गठन हर दो साल में आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार करती है. इस कमेटी का नाम है- तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्. बता दें कि हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि पिछली सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा था. इसी साल जून में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारी और नायडू ने एनडीए की सरकार बनाई. इस दावे के बाद देशभर की सियासत गर्मा गई थी. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था.  

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए ईरान की यात्रा करने के संबंध में एडवाइजरी जारी की

नई दिल्ली लेबनान में 27 सितंबर को इजरायली हमले में हिजबुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है।  रात ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से भारी हमले किए। मध्य पूर्व में इस तनाव को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए ईरान की यात्रा करने के संबंध में एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणदीप जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी। इस एडवाइजरी में विदेश मंत्रालय की ओर से भारतीय नागरिकों को ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी गई है। उन्होंने लिखा, “हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में हाल ही में हुई वृद्धि पर बारीक नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिकों को ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है। वर्तमान में ईरान में रहने वाले लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।” बता दें कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रात इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की। हमले में मुख्य रूप से “सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों” को निशाना बनाया गया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक बयान का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि ईरान से इजरायल की ओर बड़ी संख्या में मिसाइलें दागी गई हैं। आईआरजीसी ने धमकी दी है कि अगर इजरायल जवाब देता है, तो वह दूसरा हमला करेगा। तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि आईआरजीसी ने मिसाइल हमले को “इजरायली सेना द्वारा हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनीयेह और आईआरजीसी कमांडर मेजर जनरल सैय्यद अब्बास निलफोरुशन की हत्या का बदला” बताया। इसने कहा कि इसकी वायु सेना ने महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। इजरायली मीडिया ने बताया कि ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर करीब 180 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, इजरायली वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान द्वारा दागी गई 180 बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक “बड़ी संख्या” को लक्ष्य से पहले ही रोक दिया। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने आईडीएफ के हवाले से बताया कि अमेरिका ने इजरायल का साथ देने का ऐलान किया है। भारतीयों को ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह सरकार ने सुरक्षा के गंभीर हालात के मद्देनजर भारतीय नागरिकों को ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और वहां रह रहे भारतीयों को तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी है।विदेश मंत्रालय की ओर से बुधवार को यहां ईरान को लेकर जारी यात्रा परामर्श में कहा गया, “हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में हालिया वृद्धि पर करीब से नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्रा से बचें।” परामर्श में कहा गया, “वर्तमान में ईरान में रहने वालों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।”  

इतिहास में इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने मंगलवार को इजरायल पर 200 से ज्यादा मिसाइलें दागीं है जिनमें हाइपरसोनिक हथियार भी शामिल हैं। अब इजरायल ने भी कसम खाई है कि ईरान इस हमले की कीमत चुकाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा से खराब नहीं थे। यह सुनने में भले ही अकल्पनीय लगे लेकिन इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था। 1960 के दशक में इजरायल और ईरान दोनों का एक साझा दुश्मन था इराक। जहां इजरायल अरब देशों के खिलाफ संघर्ष में उलझा हुआ था वहीं शाह के नेतृत्व में ईरान के लिए सुरक्षा और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए इराक एक सीधा खतरा था। इसके बाद इस समय की सबसे गुप्त साझेदारी के लिए एक आधार तैयार हुआ। इस साझेदारी में इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान की सीक्रेट पुलिस SAVAK शामिल थे। दोनों ने इराकी शासन के खिलाफ कुर्द विद्रोहियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इराक के अरब नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देखे जाने वाले ये कुर्द समूह इराकी सरकार को अंदर से कमजोर करने के लिए जरूरी थे। खुफिया गठबंधन कोड-नाम ट्राइडेंट के गठन के बाद इज़राइल और ईरान के बीच के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे जिसमें तुर्की भी शामिल था। 1958 की शुरुआत में ट्राइडेंट की मदद से इन तीन समूहों ने कई खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान किया। जैसे-जैसे संबंध परिपक्व होते गए इज़राइल और ईरान और भी करीब होते गए। शाह की महत्वाकांक्षाएं और इज़राइल का प्रभाव ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी न केवल साझा भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित थे बल्कि अमेरिका में इज़राइल के प्रभाव से भी प्रेरित थे। शाह ने इजराइल को अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक साधन के रूप में देखा। खासकर कैनेडी प्रशासन द्वारा उनके शासन के बारे में चिंता व्यक्त करने के बाद यह और जरूरी हो गया था। इजराइली-ईरानी संबंध ईरान की पश्चिम के साथ खुद को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा बन गए। नतीजतन 1960 के दशक के मध्य तक तेहरान में एक स्थायी इजराइली प्रतिनिधिमंडल की स्थापना हुई जो एक दूतावास के रूप में कार्य करने लगी। हालांकि इस संबंध में भी कुछ जटिलताएं थी। शाह अरब दुनिया में व्यापक इजराइल-विरोधी भावना से अवगत थे। उन्होंने ईरान के इजराइल के साथ संबंधों के सार्वजनिक तौर पर इनकार किया। इराक के खिलाफ मिलकर काम करने में दोनों देशों का फायदा ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया और इसे एक इजराइल विरोधी इस्लामी गणराज्य में बदल दिया। फिर भी अयातुल्ला खोईमेनी के सत्ता में आने के बाद भी नए शासन ने इजराइल के साथ गुप्त सहयोग जारी रखा। जैसे-जैसे ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) आगे बढ़ा दोनों देशों ने सद्दाम हुसैन के इराक के खिलाफ़ मिलकर काम करने में ही फायदा देखा। इज़राइल ने भी ईरान की मदद करने में एक अच्छा अवसर देखा। अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इराकी सेना की आपूर्ति की थी और यह एक जोखिम था। इज़राइल द्वारा ईरान को हथियारों की खेप भेजना, खास कर से प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन द्वारा 1980 में सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंज़ूरी दिए जाने के बाद इराक की ताकत को कमज़ोर करने का एक सोचा-समझा फ़ैसला था। ये गुप्त हथियार सौदे अमेरिकी नीति के बावजूद किए गए जिसमें तेहरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी लोगों की रिहाई तक ईरान को सैन्य सहायता देने पर रोक लगाई गई थी। इज़राइली सैन्य सहायता के बदले में, खोईमेनी के शासन ने बड़ी संख्या में ईरानी यहूदियों को इज़राइल या अमेरिका में रहने की अनुमति दी। ऑपरेशन फ्लावर इजरायल-ईरानी साझेदारी पारंपरिक हथियार सौदों से आगे तक पहुंच गई थी। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ऑपरेशन फ्लावर था जो एक गुप्त करोड़ों डॉलर की योजना थी जो 1977 में शाह के शासन के दौरान शुरू हुई थी। इस सौदे के तहत ईरान ने 1978 में इजरायल को 260 मिलियन डॉलर का तेल भेजकर एक बड़ा अग्रिम भुगतान किया जैसा कि 1986 की न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था। मिसाइल कार्यक्रम पर काम 1979 में इस्लामिक क्रांति तक जारी रहा जिसके बाद खोमेनेई के शासन ने अचानक सहयोग रोक दिया। अक्टूबर 1980 में जब ईरान ने इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ा था तब इजरायल ने गुप्त रूप से ईरान को अमेरिकी निर्मित एफ-4 लड़ाकू विमानों के लिए 250 अतिरिक्त टायर भी दिए थे। दुश्मनी की शुरुआत 1990 के दशक तक इज़राइल और ईरान के बीच सहयोग का युग लगभग समाप्त हो गया था। भू-राजनीतिक कारण जैसे अरब समाजवाद, सोवियत प्रभाव और इराक का खतरा, जो कभी उन्हें एकजुट करते थे गायब हो गए थे जिससे सहयोग के लिए वजहें नहीं बची थी। इसके बाद ईरान ने इजरायल विरोधी विचारधारा को अपनाया। ईरान ने इजरायल के साथ संघर्ष में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों का समर्थन किया है। 2000 के दशक की शुरुआत में ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का चुनाव, नरसंहार से इनकार और इजरायल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी ने तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान इस क्षेत्र में इजरायल का सबसे प्रमुख विरोधी बन गया। अब मिडिल ईस्ट के ये दो देश पूरी तरह युद्ध की कगार पर हैं।

अभ्यास के तहत जवानों ने वायुसेना के मल्टीपर्पज विमान एएन-32 से 18 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई

चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर भारतीय वायुसेना अभ्यास कर रही है। बुधवार को इस अभ्यास के तहत जवानों ने वायुसेना के मल्टीपर्पज विमान एएन-32 से 18 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई और पैराशूट के जरिये चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी के रनवे पर लैंडिंग का अभ्यास किया। इसके साथ ही वायुसेना के मल्टीपर्पज विमान एएन 32 ने चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया। वायु सेना का यह अभियान पायलेट प्रशिक्षण का अभ्यास बताया जा रहा है। इससे पहले गत 17 सितंबर से 22 सितंबर तक पायलेट ट्रेनिंग कार्यक्रम चला। चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण भारत-चीन अंतराष्ट्रीय सीमा के करीब बनी चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए सेना और वायु सेना समय-समय पर यहां अपने अभ्यास कार्यक्रम आयोजित करती आई हैं। इस हवाई पट्टी पर हरक्यूलिस सहित कई विमान लैंडिंग और टेक ऑफ कर चुके हैं। चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर भारतीय वायु सेना पिछले कई वर्षों से समान्य और सैन्य अभ्यास कर रही है। यही वजह है कि वायु सेना इसे अपना एडवांस लैंडिंग ग्राउंड एएलजी बनाने की कवायद में लगी हुई है। गत मंगलवार को भी वायु सेना ने अभ्यास शुरू किया। बुधवार को वायु सेना के 10 जवानों ने एएन 32 विमान से 18 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई। जिन्होंने पैराशूट के जरिये रनवे पर लैंडिंग का अभ्यास किया। ये जवान आगरा एयर बेस से एएन 32 में पहुंचे। 18 हजार फीट की ऊंचाई से कूदे जवानों के हौसले को देखने के लिए चिन्यालीसौड़ में कौतूहल का माहौल बना। हर किसी की नजर आसमान में पैराशूट पर थी। यह अभियान आगामी 4 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभ्यास के लिए वायुसेना के जवान जुटे हुए हैं।

ईरान ने इजरायली नेताओं की मोस्ट वांटेड लिस्ट जारी की, जिसके चलते करारा जवाब देने की तैयारी में नेतन्याहू

तेल अवीव ईरान द्वारा इजरायल पर सैकड़ों मिसाइल दागे जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। इजरायल ने ईरान से बदला लेने की कसम खाई है। उधर, ईरान ने इजरायली नेताओं की मोस्ट वांटेड लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में इजरायल के कुल 11 नेताओं के नाम हैं। टॉप पर पीएम नेतन्याहू का नाम ईरान ने जो लिस्ट जारी की है, उसमें बेंजामिन नेतन्याहू का नाम टॉप पर है। इसके अलावा लिस्ट में रक्षा मंत्री योआव गैलेंट और सेना प्रमुख हर्जी हलेवी का नाम भी शामिल है। ईरान ने जो लिस्ट जारी की है, उसमें इन्हें इजरायली आतंकी बताया गया है।   ईरान ने दागी कई मिसाइलें इससे पहले, बीती रात ईरान की ओर से इजरायल पर 150 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई। हालांकि, मिसाइल अटैक में इजरायल को खास नुकसान नहीं हुआ। इन हमलों के बाद नेतन्याहू ने ईरान पर पलटवार करने की कसम खाई है। वहीं, अमेरिका ने इजरायल की मदद करने का एलान किया है। अमेरिका ने ही हमले से कुछ घंटों पहले इजरायल को आगाह किया था। अमेरिका ने कहा था कि ईरान कुछ ही देर में इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर सकता है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet